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Wednesday, January 28, 2026

प्रधानमंत्री ने दी पंजाब केसरी लाला लाजपत राय को श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 28 January 2026 at 9:35AM by PIB Delhi

नई दिल्ली: 28 जनवरी 2026: (पीआईबी दिल्ली/ /पंजाब स्क्रीन डेस्क):: 

आज देश के साथ साथ पूरा पंजाब भी लाला लाजपत राय जी को याद कर रहा है। आज उनकी जयंती है। इस पावन और यादगारी अवसर पर राष्ट्रवाद को समर्पित सभी लोग लाला जी की कुर्बानियों को याद कर रहे हैं। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पंजाब केसरी लाला लाजपत राय की जयंती पर आज उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा, "उनका बलिदानी जीवन देश की हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।"

प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट किया:

"मातृभूमि की अमर संतान पंजाब केसरी लाला लाजपत राय को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनका बलिदानी जीवन देश की हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।"

Monday, November 24, 2025

धर्मेंद्र ...वह सीधा-सादा हीरो जिसने दिल जीत लिए

Neelima Sharma on Dharmendera Death News for Punjab Screen Readers on 24th November 2025 at 18:20

जीवन संग्राम को अपने शब्दों में सहेजते हुए ---नीलिमा शर्मा

धर्मेंद्र भारतीय सिनेमा की उस परंपरा से आते हैं जहाँ अभिनेता सितारे होने से पहले इंसान होते थे। पंजाब के लुधियाना ज़िले के सहनेवाल (Sahnewal) कस्बे में 8 दिसंबर 1935 को जन्मे धर्मेंद्र का बचपन साधारण, संस्कारों में डूबा हुआ और गाँव की मिट्टी की महक से भरा हुआ था। वह हमेशा कहते रहे, “मैं गाँव की मिट्टी से निकला हुआ एक सीधा-सादा आदमी हूँ, सितारा बनना कभी सपना नहीं था, बस काम की तलाश में चला आया था।” उनके पिता स्कूल में हेडमास्टर थे और माँ धार्मिक स्वभाव की गृहिणी। धर्मेंद्र अक्सर याद करते रहे कि घर में प्यार, अनुशासन और स्वाभिमान तीनों बराबर मात्रा में मौजूद थे। इसी वातावरण ने उनके व्यक्तित्व में वह विनम्रता और सहजता भर दी जिसने बाद में उन्हें लाखों दिलों की धड़कन बनाया।

धर्मेंद्र जब जवान हुए तो फिल्मों के प्रति आकर्षण बढ़ा। वह स्वीकारते  थे कि बचपन में वह दिलीप कुमार को देखकर दीवाने हो गए थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मैंने दिलीप साहब को पर्दे पर देखा तो लगा यही बनना है, बस कोई रास्ता मिल जाए।” संघर्ष से भरी शुरुआत थी। एक फिल्मी पत्रिका के टैलेंट कॉन्टेस्ट में 1958 में चुने गए, और फिर मुंबई की राह पकड़ ली। मुंबई उन दिनों आसान शहर नहीं था। रहने के लिए जगह कम, काम मिलना मुश्किल लेकिन हिम्मत और उम्मीद बहुत बड़ी थी। वह कहते थे  “मुंबई ने मुझे बहुत रुलाया, लेकिन हर आँसू की कीमत बाद में मुस्कान बनकर लौटी।”

धरम जी के फिल्मी करियर की शुरुआत 1960 की फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से हुई, लेकिन असली पहचान धीरे-धीरे बनना शुरू हुई। उनका आकर्षक व्यक्तित्व, सरल संवाद-शैली और मासूम-सी मुस्कान दर्शकों को अपनी ओर खींचती चली गई। शुरुआती दौर में उन्हें सीरियस और रोमांटिक किरदार मिले। नूतन, मीना कुमारी और माला सिन्हा जैसे कलाकारों के साथ काम करते हुए उनकी अभिनय क्षमता और व्यक्तित्व दोनों तराशते गए। मीना कुमारी के साथ उनकी जोड़ी ने तो 1960 के दशक में नई ऊँचाई छू ली। उस समय के एक इंटरव्यू में मीना कुमारी ने कहा था, “धर्मेंद्र में वह सादगी है जो अक्सर कलाकारों में कामयाबी के बाद खो जाती है।”

धीरे-धीरे यह बात स्पष्ट होने लगी कि धर्मेंद्र केवल खूबसूरत चेहरे और दमदार कद-काठी वाले अभिनेता नहीं, बल्कि भीतर से बेहद संवेदनशील और जज़्बाती कलाकार हैं। उनकी आँखों में दर्द और प्रेम को अभिव्यक्त करने की एक दुर्लभ क्षमता थी। वह कहते थे “मैंने कभी अभिनय को अभिनय की तरह नहीं किया, मैं जो महसूस करता था वही कैमरे पर बह जाता था।”

उनकी फिल्म अनुपमा (1966) इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। इस फिल्म में उन्होंने एक शांत, शर्मीले और संवेदनशील युवक का किरदार निभाया बिना किसी दिखावे के, बस आँखों से बोलते हुए। हृषिकेश मुखर्जी उनकी अभिनय क्षमता से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने कहा था कि धर्मेंद्र की आँखें किसी भी संवाद से ज़्यादा गहरी बात करती हैं।

इसके बाद उनकी फिल्मी यात्रा कई धाराओं में बहने लगी। एक ओर वह रोमांटिक नायक रहे, दूसरी ओर कॉमेडी में भी कदम रखा और फिर 1970 के दशक में एक्शन हीरो के रूप में उभरे। यहीं से उन्हें “He-Man of Bollywood” कहा जाने लगा। पर धर्मेंद्र स्वयं इस उपाधि को हल्के हास्य के साथ लेते हुए कहते “अरे भाई, ही-मैन वगैरह कुछ नहीं… मैं तो बस मेहनत करता था और लोग प्यार करते गए।”

उनकी एक्शन छवि फिल्मों जैसे शोले, धर्म वीर, प्रतिज्ञा, राजा जानी और यादों की बारात से मजबूत हुई। खासकर शोले में वीरू का किरदार उनके करियर का ऐसा मील का पत्थर बना जिसने उन्हें सदाबहार लोकप्रियता दी। आज भी ‘बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना’ जैसा संवाद लोगों की ज़ुबान पर है, जबकि दिलचस्प बात यह है कि यह संवाद जितना हल्का-फुल्का था, उतना ही भावनात्मक भी।  मौसी वाला सीन तो आज भी एपिक सीन माना जाता हैं I धर्मेंद्र उस समय के इंटरव्यू में कहते हैं, “वीरू के अंदर जो शरारत थी, वह असल में मेरे अंदर की ही शरारत थी। मैं वैसा ही हूँ मज़ाकिया, हँसमुख और कहीं-कहीं बच्चे जैसा।”

धर्मेंद्र केवल एक्शन और कॉमेडी तक सीमित नहीं रहे। उनकी संजीदा फिल्मों सत्यकाम, मां, छुपा रुस्तम, काला पत्थर में उनकी अभिनय गहराई खुलकर सामने आई। सत्यकाम को तो उनकी सबसे बेहतरीन फ़िल्मों में से एक माना जाता है। सत्यवादी, आदर्शवादी और भीतर से टूटते हुए व्यक्ति की भूमिका यह रोल बहुत जटिल था। धर्मेंद्र ने एक साक्षात्कार में कहा था, “सत्यकाम मेरे दिल के सबसे करीब है… जब फिल्म खत्म हुई तो लग रहा था जैसे मैं खुद भी टूट गया हूँ।”

धर्मेंद्र ने 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने कई बेहतरीन एक्शन, रोमांटिक और हास्य भूमिकाएँ निभाईं, जिससे उनका अभिनय स्पेक्ट्रम बहुत व्यापक रहा। शोले जैसी फिल्म में उनकी भूमिका आज भी बॉलीवुड की आइकॉनिक छवियों में गिनी जाती है। उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला (1997)। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण (2012) से सम्मानित किया गया, जो नागरिकों को दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है। अन्य पुरस्कारों में FICCI “Living Legend” अवार्ड, IIFA लाइफटाइम अचीवमेंट, ज़ी सिने लाइफटाइम अचीवमेंट, मुम्बई अकादमी ऑफ़ मूविंग इमेज (MAMI) अवार्ड, आदि। उनके योगदान के लिए अन्य सार्वजनिक सम्मान, जैसे वारल्ड आयरन मैन अवार्ड भी प्राप्त हुए। 

धर्मेंद्र ने फिल्म निर्माण (विजेता प्रोडक्शन) में भी कदम रखा और अपने बेटे सनी देओल को बेताब जैसी फिल्मों से लॉन्च किया। उन्होंने अपनी कंपनी के ज़रिए घायल जैसी फिल्म बनाई, जिसे नेशनल फिल्म अवार्ड भी मिला। 

उनके परिवार ने भी अभिनय में अपनी पहचान बनाई I उनके बेटे सनी देओल, बॉबी देओल, और बेटी ईशा देओल सभी फ़िल्मी दुनिया में सक्रिय रहे। 

1970 के दशक में धर्मेंद्र को उनकी सच्ची और मजबूत बॉडी के चलते “सबसे हैंडसम” अभिनेताओं में गिना गया। उनकी स्क्रीन पर सरलता, बहुत मानवीय भावनाएँ व्यक्त करने की क्षमता और दोस्ताना छवि ने उन्हें लाखों लोगों का प्रिय बना दिया।

उन्होंने अपने करियर में नागरिक जीवन को भी महत्व दियाI राजनीति में सक्रिय रहकर जनता की सेवा की।

उनका राजनीतिक सफर फिल्मी करियर जैसा नहीं रहा, राजनीति उन्हें रास नहीं आई। वह खुलकर कहते हैं, “मैं राजनीति के लिए बना ही नहीं था… वहाँ बहुत बातें होती हैं और मैं बातों से ज़्यादा दिल से काम करने में यक़ीन रखता हूँ।

उनकी निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा में रही। 1954 में प्रकाश कौर से उनकी शादी हुई थी और फिर 1980 में हेमा मालिनी से विवाह ने मीडिया को खूब सामग्री दी, लेकिन धर्मेंद्र इन बातों पर कम ही बोलते हैं। एक बार एक पत्रकार ने निजी जीवन पर सवाल किया तो उन्होंने बड़े शांत स्वर में कहा था, “ज़िंदगी कई मोड़ों से गुज़रती है, और हर मोड़ इंसान को कुछ सिखाता है। इंसान प्यार में भी सच्चाई ढूँढता है और रिश्तों में भी।”

उनके जीवन में परिवार हमेशा प्राथमिकता रहा। वह अपने बच्चों सनी, बॉबी, ईशा और अहाना सभी के बेहद करीब हैं। वह कहते हैं, “मैंने परिवार को हमेशा जोड़कर रखा… मेरी कोशिश यही रही कि बच्चे एक-दूसरे से जुड़े रहें।”

बॉलीवुड में उनकी छवि एक सरल, जमीन से जुड़े, मिलनसार और प्यार बाँटने वाले इंसान की रही है। उनके सभी साथी कलाकार उनकी दिलदारी और विनम्रता की मिसालें देते हैं। अमिताभ बच्चन ने एक कार्यक्रम में कहा था कि धर्मेंद्र की मुस्कान में एक ऐसा अपनापन है कि कोई भी उनसे पहली मुलाकात में ही सहज हो जाता है। धर्मेंद्र खुद कहते रहे हैं, “मैंने कभी खुद को स्टार समझा ही नहीं… मैं आज भी वही गाँव वाला धर्मू हूँ।”

जीवन के अंतिम वर्षों में भी धर्मेंद्र सक्रिय रहे।  उनकी अंतिम फिल्म इक्कीस आगामी माह पच्चीस दिसंबर को रिलीज होगी I बाकी समय में वह खेती-बाड़ी करते रहे ,अपने फार्महाउस में पेड़ लगाते,फलों के बगीचे लगाते और प्रकृति के साथ समय बिताते दिखाई देते रहे। वह कहते थे , “शहर ने मुझे नाम दिया, लेकिन सुकून आज भी मिट्टी ही देती है।”

उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स में भी वही सादगी झलकती  रही I कभी किसान के कपड़ों में, कभी फूल तोड़ते हुए, कभी पुराने गीत गुनगुनाते हुए। वह अक्सर कहते रहे, “ज़िंदगी के हर दिन का शुक्रिया अदा करो… जो मिल गया वह भी अच्छा, जो नहीं मिला उसकी भी शिकायत मत करो।”

धर्मेंद्र का फिल्मी योगदान बेजोड़ है। उन्होंने पाँच दशकों से अधिक समय तक दर्शकों का मनोरंजन किया। 350 से भी अधिक फिल्मों में काम किया, जिसमें विविधता इतनी है कि वह भारतीय सिनेमा के सबसे ‘पूर्ण अभिनेता’ कहे जा सकते हैं।

उनकी फिल्मों ने परिवार, प्रेम, दोस्ती, ईमानदारी, संघर्ष और मानवीय भावनाओं के हर रंग को छुआ। चाहे शोले का मस्तीभरा वीरू हो, अनुपमा का संवेदनशील अशोक, सत्यकाम का सत्यप्रिय सत्यप्रकाश, राजा जानी का रोमांटिक-शरारती रईस या प्रतिज्ञा का बहादुर नायक हर किरदार अपनी जगह अविस्मरणीय है। उनका “मैं जट यमला पगला दीवाना” गाने पर किया गया नृत्य आज भी उनका सिग्नेचर नृत्य माना जाता हैं I 

धर्मेंद्र का मानना  रहा कि अभिनेता का असली काम दर्शकों के दिल में जगह बनाना है। उन्होंने एक बार कहा था, “लोग आपको तब तक याद रखते हैं जब तक आप उनके दिलों को छूते रहते हैं… मैंने कोशिश की कि मेरे हर किरदार में इंसानियत बनी रहे।”

उनका यह कथन उनकी पूरी यात्रा का सार लगता है। सफलता की ऊँचाइयों के बावजूद उनका दिल सरल, इंसानियत से भरा और प्रेम से ओतप्रोत रहा। शायद यही कारण है कि वह केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों की एक भावनात्मक स्मृति बन चुके हैं ।

धर्मेंद्र का जीवन संघर्ष, मेहनत, सफलता, प्रेम, संवेदनशीलता और सादगी का एक अद्भुत मिश्रण है। वह उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं जहाँ अभिनय केवल तकनीक नहीं, बल्कि आत्मा का प्रवाह था। आज भी जब वह स्क्रीन पर आते हैं, तो वही पुरानी गर्मजोशी और अपनापन महसूस होता है। उनके सफर को देखते हुए लगता है कि वह अपनी एक बात को हमेशा सच साबित करते रहे—

“मैं दिलों का आदमी हूँ… और दिल से ही काम करता हूँ।”

धर्मेंद्र के जीवन को एक आदर्श जीवन तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन उनके जीवन स्मृतियों को सेलिब्रेट जरूर किया जा सकता हैं...!

Yah sahi

Tuesday, August 05, 2025

नौवें गुरु जी की 350वीं शहादत जयंती की तैयारियां

From MPSK on Tuesday 5th August 2025 at 17:45 Regarding DGMC   

DGMC वैश्विक स्तर पर मनाने के लिए सभी को एक मंच पर लाए:परमजीत सिंह वीरजी

नई दिल्ली: 5 अगस्त 2025: (मनप्रीत सिंह खालसा//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी प्रबंधन, जो अपने केवल तीन-चार लोगों से घिरा हुआ है, को चाहिए था कि वह पूरे सिख पंथ के धार्मिक, राजनीतिक, निहंग संगठनों, टकसालों और महासंघों को साथ लेकर नौवें गुरु जी की 350वीं शहादत जयंती को वैश्विक स्तर पर मनाने के लिए एक साझा मंच बनाए। 

गुरुबाणी रिसर्च फाउंडेशन के प्रमुख एवं दिल्ली कमेटी के धर्म प्रचार विंग के पूर्व सह-अध्यक्ष सरदार परमजीत सिंह वीरजी ने मीडिया को जारी एक प्रेस नोट में कहा कि यह शताब्दी समारोह केवल दिल्ली कमेटी का नहीं, बल्कि पूरे पंथ का है और इसलिए "गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत" का बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार करने की सख्त ज़रूरत है ताकि दुनिया जान सके कि नौवें पातशाह ने "तिलक और जंझू" की रक्षा के लिए अपना शीश न्योछावर कर दिया और उनके तीन छोटे सिखों ने भी मुगलों के हुक्म को न मानकर शहादत की सज़ा स्वीकार की। लेकिन आज देश में सिखों को बार-बार यह एहसास दिलाया जा रहा है कि वे दोयम दर्जे के नागरिक हैं। कभी पेपर देने वाले बच्चों पर पाबंदियाँ लगाई जाती हैं, कभी हवाई अड्डे पर काम कर रहे सिख युवाओं को परेशान किया जाता है, कभी सिख इतिहास से छेड़छाड़ की जाती है, कभी पगड़ी और गुरु ग्रंथ साहिब जी का अपमान किया जाता है, और राम रहीम व आसाराम जैसे गंभीर अपराधों के दोषियों को बार-बार पैरोल दी जाती है। इन सवालों पर कोई जवाब भी नहीं दिया जाता। 

सिख कैदियों के मुद्दों पर विचार तक नहीं किया जाता। क्या दिल्ली कमेटी के आयोजक शताब्दी समारोह में उपस्थित होने वाले देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के समक्ष सिखों के गंभीर मुद्दों को उठाएंगे या फिर केवल औपचारिक समारोह आयोजित करके अपना बदला लेंगे? दिल्ली कमेटी को शताब्दी समारोह की तैयारी तीन महीने पहले ही कर लेनी चाहिए थी, लेकिन हर मामले में उनकी अनुभवहीनता देश को शर्मसार ही करती है। गुरुओं की शहादत दिल्ली में हुई थी, इसलिए यह समारोह दिल्ली में बड़े पैमाने पर मनाया जाना चाहिए, लेकिन कमेटी अध्यक्ष द्वारा एसजीपीसी को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर बदला लेना उचित नहीं है। उनका कर्तव्य था कि वे एसजीपीसी अध्यक्ष, तख्त हजूर साहिब कमेटी, तख्त पटना साहिब कमेटी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनुरोध करते, लेकिन चूंकि वे तीन-चार लोगों से घिरे हुए हैं, इसलिए उनकी सोच भी उन्हीं तक सीमित रह गई है।

Monday, August 12, 2024

नई दिल्ली के हैंडलूम हाट में आयोजित विरासत प्रदर्शनी

प्रविष्टि तिथि: 12 Aug 2024 5:30 PM by PIB Delhi

श्री गिरिराज सिंह और श्री पबित्र मार्घेरिटा ने  किया अवलोकन 


नई दिल्ली: 12th अगस्त 2024: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह और वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्र मार्घेरिटा ने आज नई दिल्ली के जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में आयोजित “विरासत” प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी का आयोजन 10वें राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस के उपलक्ष्य में किया गया है। प्रदर्शनी 3 अगस्त से 16 अगस्त, 2024 एक पखवाड़े तक चलेगी।

श्री गिरिराज सिंह ने हथकरघा बुनकरों और कारीगरों से बातचीत की और इस बात पर बल दिया कि सरकार बुनकरों और उनके परिवारों के लिए बेहतर आय के अवसरों के लिए वस्त्र मूल्य श्रृंखला में सुधार करने का प्रयत्न कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा हथकरघा समुदाय है जो स्थिरता और ऊर्जा दक्षता पर ध्यान केंद्रित करता है। दुनिया टिकाऊ उत्पादों के उपयोग की ओर बढ़ रही है और हथकरघा शून्य-कार्बन रहित उद्योग है और किसी भी ऊर्जा की खपत नहीं करता है तथा हथकरघा उद्योग शून्य-जल रहित फुटप्रिंट वाला क्षेत्र है।

श्री पबित्र मार्घेरिटा ने हथकरघा क्षेत्र में प्राकृतिक रंगों के अनुप्रयोग के लाइव प्रदर्शन को देखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में फैशन उद्योग में प्राकृतिक रंगों वाले हथकरघा कपड़ों की भारी मांग बाजार में देखी जाने लगी है। हथकरघा बुनकरों द्वारा प्राकृतिक रंगों के उपयोग से न केवल मूल्यवर्धन होता है बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि होती है।

मंत्रियों ने हथकरघा हाट में पौधारोपण कर “एक पेड़ मां के नाम”अभियान को प्रोत्साहित किया। उन्होंने “हर घर तिरंगा” अभियान के तहत हथकरघा बुनकरों और कारीगरों को तिरंगा झंडे भी वितरित किए।

यह प्रदर्शनी सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक जनता के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए हथकरघा उत्पाद प्रदर्शित और बिक्री के लिए रखे गए हैं। इनमें कोसा, चंदेरी, मधुबनी, मंगलगिरी, मेखला चादर, मोइरांग फी, इकत आदि शामिल हैं।

हैंडलूम हाट में कई गतिविधियाँ भी आयोजित की जा रही हैं, जैसे कि हथकरघा बुनकरों और कारीगरों के लिए 75 स्टॉल, जहाँ वे सीधे उत्पादों की खुदरा बिक्री कर सकेंगे और शीर्ष समितियों, बोर्डों आदि द्वारा 07 स्टॉल, भारत के उत्कृष्ट हथकरघा उत्पादों का क्यूरेटेड थीम प्रदर्शन और हथकरघा हाट में प्राकृतिक रंगों, कस्तूरी कपास, डिजाइन और निर्यात पर कार्यशालाएँ, 12 अगस्त 2024 को बुनकरों और कारीगरों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर, लोई लूम और फ्रेम लूम का लाइव प्रदर्शन, भारत के लोक नृत्य और स्वादिष्ट क्षेत्रीय व्यंजन आदि।

भारत का हथकरघा क्षेत्र प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 35 लाख लोगों को रोजगार देता है, जो देश में कृषि क्षेत्र के बाद दूसरे स्थान पर है। भारत सरकार ने हथकरघा के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें पर्यावरण पर शून्य प्रभाव वाले उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की ब्रांडिंग की जाती है, ताकि उत्पादों की विशिष्टता को उजागर करने के अलावा उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा सके और उन्हें एक अलग पहचान दी जा सके। यह खरीदार के लिए एक गारंटी भी है कि खरीदा जा रहा उत्पाद वास्तव में हस्तनिर्मित है। प्रदर्शनी में सभी प्रदर्शकों को अपने उत्कृष्ट उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है और इस प्रकार हथकरघा उत्पादों के लिए बाजार और हथकरघा समुदाय की आय में सुधार करने का लक्ष्य रखा गया है। “विरासत” श्रृंखला-“विशेष हथकरघा एक्सपो” हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित की जाने वाली प्रमुख प्रदर्शनी है। 

इस वर्ष 10वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त को मनाया गया। यह आयोजन हथकरघा और हस्तशिल्प की गौरवशाली परंपरा पर केंद्रित है और हथकरघा बुनकरों और कारीगरों को बाजार से भी जोड़ता है।

********//एमजी/एआर/वीएल/एचबी//(रिलीज़ आईडी: 2044667)

Saturday, September 23, 2023

माता सुदीक्षा के दर्शन करने लाखों निरंकारी पहुंचेगे चंडीगढ़ में

चंडीगढ़ में होगी लाखों की निरंकारी संगत-नए रूट के बिना न निकलें 

चंडीगढ़ के सेक्टर-34 में आज संत निरंकारी समागम


चंडीगढ़
: 23 सितम्बर 2023: (पंजाब स्क्रीन डेस्क टीम)::

13 अप्रैल 2023 को अमृतसर में हुई घटनाओं से पंजाब से सबंधित सियासत की दशा और दिशा दोनों बदलने लगीं थी। उस दिन सिख निरंकारी टकराव में 13 सिख श्रद्धालु मारे गए थे। इनमें दमदमी टकसाल और अखंड कीर्तनी जत्था के लोग भी शामिल थे। इसके बाद सिख संगठनों का आक्रोश बढ़ता ही गया। संत जरनैल सिंह भिंडरांवालों का ज़माना था। हरिमंदिर साहिब का दीवान हाल मंजी साहिब सिख सरगर्मियों का केंद्र भी बना हुआ था जहाँ संत भिंडरांवाले के विचार सुनने संगत भरी संख्या में पहुंचती थी। 

आक्रोश में आए कुछ सिख नौजवानों ने निरंकारी समागम न होने देने का संकल्प कर लिया। इसके बावजूद कुछ सभाएं सुरक्षाबलों की पहरेदारी में लगती रहीं।  इसके बावजूद निरकांरी समुदाय के मुख्यालय में 24 अप्रैल 1980 निरंकारी प्रमुख बाबा गुरबचन सिंह की हत्या कर दी गई थी। जानमाने पत्रकार लाला जगत नारायण की 9 सितंबर 1981 को हुई हत्या से हिंसा का सिलसिला और भी तेज़ हो गया। निरंकारी प्रमुख की हत्या  कटटरपंथी रणजीत सिंह ने की थी जो वहां कारपेंटर बन कर रह रहा था। हत्या में कारबाईन का प्रयोग किया गया था। निरंकारी प्रमुख के बॉडीगार्ड प्रताप सिंह की हत्या भी इसी हमले में की गई थी। 

बाद में संत जरनैल सिंह भिंडरांवालों ने निरंकारी प्रमुख की हत्या करने वाले रंजीत सिंह को सोने के साथ तोलने की घोषणा भी की थी और सिख सियासत में हुए घटनाक्रम के दौरान रंजीत सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार भी बना दिया गया था। अपनी जत्थेदारी के दौरान ही उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब में बाकायदा सचिवालय शुरू करवाया जहां कोई साधारण सिख भी जा कर अपना कोई भी पत्र सौंप सकता था। 

निरंकारी समुदाय ने इस सारे घटनाक्रम के दौरान बहुत से नाज़ुक हालात भी देखे और दबाव का सामना भी  शांतिपूर्ण ढंग से किया। आतंक जैसे माहौल के बावजूद निरंकारी संगत ने दिल नहीं छोड़ा। यह लोग  मिशन के साथ जजूदे रहे। निरंकारी मिशन और इसका सिलसिला जारी रहा। निरंकारी समुदाय के लिए सबसे बड़ा सदमा था जब निरंकारी समुदाय के चौथे गुरु बाबा हरदेव सिंह 13 मई 2016 को देवलोक गमन कर गए। 

इसके बाद का समय बेहद नाज़ुक था। हालात बहुत गंभीर थे। कौन होगा निरंकारी समुदाय का नया गुरु इसका किसी को कोई अनुमान नहीं था। ऐसे दौर में माता सुदीक्षा ने निरंकारी समुदाय की बागडोर संभाली। इस पद पर आसीन होते ही विभिन्न संगठनों और डेरों में इस चुनाव की दिल से प्रशंसा की गई। बागडोर संभालते ही माता सुदीक्षा ने निरंकारी प्रबंधन को बिलकुल नया रंग, रूप और अनुशासन भी दिया। 

उनके प्रवचनों और दिव्य अनुभूति ने समाज के विभिन्न वर्गों को तेज़ी से आकर्षित करना शुरू कर दिया। निरंकारी समुदाय पहले से भी अधिक तेज़ी के साथ विकसित होने लगा। देश विदेश में निरंकारी समाज की पहुँच पहले से भी अधिक तेज़ी से बढ़ने लगी। अब पंजाब के भी तकरीबन हर गांव और कस्बे में निरंकारी मिशन की शाखें मौजूद हैं। निरंकारी सतसंग भवन भी हैं। 

उल्लेखनीय है कि निरंकारी जनजीवन में ब्रह्मज्ञान ही जीवन का आधार है। इस का संदेश देने के  लिए निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी 24 सितंबर को चंडीगढ़ में भी पहुंच रहे है। सद्गुरु माताजी के सानिध्य में एक विशाल समागम होने जा रहा है जिसकी तैयारियां पूरी तरह से मुकम्मल कर ली गई है।आयोजन स्थल पर सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए गए हैं और ट्रैफिक को नियंत्रित रखने के लिए विशेष रुट प्लान बनाए गए हैं। 

इस संबंध में जानकारी देते हुए जोनल इंचार्ज महात्मा ओ.पी. निरंकारी ने बताया कि यह निरंकारी संत समागम मेला ग्राऊंड सैक्टर 34 में सायंकाल 5 बजे से लेकर 9.30 बजे तक होगा। सारा समागम तयशुदा प्रोग्राम के मुताबिक ही चलेगा।  उन्होंने बताया कि इस समागम में बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। दूर दूर से श्रद्धालु वि हिन् साधनों के ज़रिए इस सतसंग में पहुंचेंगे। 

गौरतलब है कि निरंकारी मिशन मानव को ब्रह्मज्ञान की दात देकर मानव को मानव से जोडऩे का कार्य कर रहा है। जब इंसान को ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति हो जाती है तो उसे हर इंसान में व कण कण में प्रभु का अहसास होने लग जाता है, जिससे दैवी गुण उसके  जीवन में आ जाते है। जीवन को खोखली बातों से निकाल कर बहुत ही प्रेक्टिक लाईफ स्टाईल में ढालने की एक सहज और निरंतर प्रक्रिया है। इसे अपनाते ही जीवन के कष्ट, संकट और ताप मिटने लगने लगते हैं। जीवन में आनंद छाने लगता है। 

निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी का चण्डीगढ़ की धरा पर 24 सितंबर को आगमन एक ऐतिहासिक घटना बन कर उभरेगा।  की शक्ति और प्रभाव और बढ़ेगा। इस दौरान माता सुदीक्षा के जीवन-मंत्र अनगिनत लोगों का जीवन बदल कर आनंद से भर देंगें। इस दौरान एक विशाल निरंकारी संत समागम मेला ग्राउंड़, सैक्टर 34-ए में आयोजित होगा। इस संत समागम में चंडीगढ़ के साथ-साथ मोहाली, पंचकुला और पंजाब के अतिरिक्त हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा आसपास के क्षेत्रों से काफी अधिक संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तजन पहुंचेंगे। लोग 23 सितंबर की रात्रि को भी इस योजना के लिए गाड़ियों में आते दिखे। 

इस संबंध में चंडीगढ़ ज़ोन के जोनल इंचार्ज ओ पी निरंकारी ने भी बताया कि मेला ग्राउंड़ में संत निरंकारी मिशन के सेवादल के सदस्य एंव साध संगत के सदस्य श्रद्धा और उत्साह के साथ अपनी सेवाओं में लगे हुए है। उन्होंने बताया कि संत निरंकारी मिशन एक आध्यात्मिकता का मिशन है और निरंकारी सत्गुरु माता सुदीक्षा जी का यह संदेश है कि मानव जीवन का असली उद्देश्य निरंकार प्रभु की जानकारी प्राप्त कर जाति पाति तथा ऊंच नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करना है। जब इंसान को ब्रह्मज्ञान के द्वारा अपने मूल रूप परमात्मा की पहचान हो जाती है तब उसको हर ज़र्रे तथा हर प्राणी में प्रभु निरंकार का अहसास होने लगता है तो उसमें स्वयंमेव ही सदगुणों का विकास हो जाता है। फिर दुनियावी जिम्मेदारियों को भी हम सहज में निभा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि निरंकारी मिशन अध्यात्मिकता के साथ साथ समाज के कार्य जिनमें रक्तदान शिविर, सफाई अभियान, कुदरती आपदाओं के समय राहत शिविर, पौधारोपण आदि समाज सेवा के कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता है।

इसी बीच चंडीगढ़ के सेक्टर-34 में स्थित मेला ग्राउंड में रविवार को होने वाले संत निरंकारी समागम के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने कमर कस ली है। समागम में आने वाली संगत को किसी प्रकार की समस्या न हो और कार्यक्रम के दौरान यातायात एवं कानून व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए पुलिस की ओर से रूट प्लान तैयार किया गया है। साथ ही पुलिस ने कार्यक्रम के दौरान क्या करना और क्या नहीं, इसे लेकर भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। माता सुदीक्षा जी के दर्शन करने लोग बहुत श्रद्धा और उत्साह से आने की तैयारी में हैं।  हर गांव और कस्बे में उत्साह देखा गया। 

यातायात पुलिस की ओर से शाम के वक्त कार्यक्रम स्थल के आसपास मौजूद सड़कों को आवश्यकता अनुसार डायवर्ट किया जा सकता है। पुलिस की ओर से समागम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए संगत और आम जनता से शांति बनाए रखने और कार्यक्रम स्थल और उसके आसपास तैनात पुलिस अधिकारियों के साथ सहयोग करने और पुलिस के दिशानिर्देशों का पालना करने की अपील की गई है। समागम के चलते सेक्टर-34 में लगने वाली अपनी मंडी रविवार को सेक्टर-46 में लगेगी। वहीं, पुलिस ने आम लोगों से रविवार को सेक्टर 33/34 और 34/35 की डिवाइडिंग रोड की तरफ से जाने से बचने की सलाह दी है।

इस बात की सख्ती सी पलना होगी कि तय स्थानों के अलावा कहीं और वाहन पार्क किया तो चालान होगा ही होगा। इस समागम में आने वाले लोगों को यातायात पुलिस की ओर से सलाह दी गई है कि कि वे अपने वाहन केवल निर्धारित पार्किंग स्थल पर खड़ा करें। कार्यक्रम स्थल या आसपास के किसी भी इलाके की सड़क, साइकिल ट्रैक या फुटपाथ पर वाहनों को पार्क करने की इजाजत नहीं होगी। इसके बाद भी यदि कोई भी वाहन चालक ऐसा करता पाया जाता है कि तो यातायात नियमों के तहत चालान किया जाएगा।

इसके साथ ही सलाह दी गई है कि कुछ और खास बातों का भी ध्यान रखा जाए। इस सलाह के मुताबिक सेक्टर-34 स्थित पोल्का बेकरी के सामने मौजूद कट के रास्ते से निकासी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। 

साथ ही यह भी कि समागम में पहुंचने के लिए संगत टैक्सी/कैब या कारपूलिंग का प्रयोग करे तो बेहतर होगा। 

सख्ती के साथ ही यह भी निर्देश है कि शराब पीकर गाड़ी न चलाने की सलाह दी गई है। ऐसा करते पाए जाने पर मोटर अधिनियम तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी

इस समागम के दौरान गुंडागर्दी या जनता को परेशान करने वाली किसी भी प्रकार की गतिविधि में लिप्त पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी इसलिए इस तरह के चलन से बच कर चलना ही हित में होगा। 

इन कुछ बातों के साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति की चिकित्सा देखभाल के लिए आपात कालीन वाहनों और शव वाहन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। चंडीगढ़ में ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी में संत निरंकारी समागम को लेकर सेक्टर-34 की तरफ न आने की सलाह भी दी गई है जिसे मानना ही सब की हित में रहेगा। 

इस समागम के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी प्रबंध पूर्ण हैं। सभी सबंधित लोग डियूटी पर हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर 34 ऐग्जीबिशन ग्राउंड में निरंकारी संत समागम कल रविवार को होने वाला है। इसको लेकर ट्रैफिक पुलिस की तरफ से एक एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें आम लोगों को सेक्टर 34 की तरफ न आने की सलाह दी गई है, लेकिन आपातकालीन वाहनों जैसे फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस आदि के लिए सभी रास्ते खुले रहेंगे।

पुलिस का मानना है कि निरंकारी संत समागम में लाखों की संख्या में निरंकारी मिशन से जुड़े अनुयायी शामिल होंगे। इस कारण यहां पर काफी भीड़ रहेगी। इसके लिए कार पार्किंग की अलग से व्यवस्था की गई है। आने वाले अनुयायियों की संख्या के अनुसार यहां पर यातायात भी बाधित रहेगा।

इस निरंकारी संत समागम में जुटने वाली भीड़ को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए रविवार को सेक्टर-33 और सेक्टर-34 की लाइट पॉइंट से लेकर लेबर चौक तक किसी भी गाड़ी के खड़े होने और रुकने पर पाबंदी लगाई है। इस सड़क पर अगर कोई व्यक्ति पिक ड्रॉप भी करता है तो उसका चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से चालान काटा जाएगा। इसी प्रकार पोलका बेकरी के सामने सेक्टर 34 में निकालने के लिए जो कट था, उसे भी बंद कर दिया गया है।

भीड़ भाड़  भरे इस आयोजन में कारगर सलाह कार पूल करने की भी दी गई है। चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से समागम में आने वाले लोगों से कार पूल करने की सलाह दी है। कार पूल करने की वजह से वाहनों की संख्या में कमी आएगी। जिससे यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चल सकेगी। साथ ही पुलिस का कहना है कि कार पूल करने की वजह से लोगों का खर्च भी काम होगा और वातावरण स्वच्छ बनाने में भी वह अपना योगदान दे सकेंगे।

बार बार यह याद दिलाना ज़रूरी लग रहा है कि सेक्टर 34 की तरफ जाने वाले रास्तों पर आने से बचें। इससे काफी कुछ सहज हो जाएगा। चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से जारी एडवाइजरी में समागम में आने वाले लोगों के अलावा चंडीगढ़ की जनता से अपील की है कि सेक्टर 34 की तरफ आने वाले सड़कों पर आने से लोगों को बचाना चाहिए। इसमें मुख्य रूप से सेक्टर 33 और 34 की डिवाइडिंग रोड एवं सेक्टर 34 और 35 की डिवाइडिंग रोड है। अगर समागम में आने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा होती है तो आम पब्लिक के लिए इन रास्तों को बंद भी किया जा सकता है।

इस सारे प्रबंधन के लिए अपनी मंडी की जगह भी बदली गई है। गौरतलब है कि हर रविवार को सेक्टर 34 के इस एग्जीबिशन ग्राउंड में अपनी मंडी का आयोजन किया जाता है। इसमें किसान सीधे खेतों से सब्जी और फल लाकर यहां पर बेचते हैं। इसमें भी काफी संख्या में भीड़ रहती है, लेकिन कल होने वाले समागम के कारण चंडीगढ़ प्रशासन ने अपनी मंडी की जगह बदल दी है। अब यह सेक्टर 34 के बजाय सेक्टर 46 में आयोजित होगी। इस आयोजन के पंजाब और चंडीगढ़ में समाजिक और राजनैतिक प्रभाव भी पड़ेंगे जिनकी चर्चा अलग से की जाएगी। 

Monday, November 14, 2022

बाल दिवस पर सहेजने का प्रयास ज़रूर करें खो रहे बचपन को

14th November 2022 at 8:13 AM 

लेखिका नीलिमा शर्मा ने लगाई गुहार-बचा लो अंतरमन के बच्चे को 

National Children Day Courtesy-Pexels-Photo-By Parij Photography

नई दिल्ली: 14 नवंबर 2022: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन):: 

जानीमानी लेखिका नीलिमा शर्मा 
बाल दिवस पर बच्चे तो याद आते ही हैं लेकिन साथ ही याद आता हैं बचपन के वो सुनहरे दिन जब हम सच मच भगवान के  रूप गिने जाते थे। केवल गिने ही नहीं जाते थे बल्कि भी थे। हमारे अंदर ऐसी कोई चालाकी नहीं होती थी जो हम बड़े होते होते न जाने कैसे और क्यूं सीख जाते हैं। हमारी मासूमियत हमारे चेहरे से साफ़ नज़र आती थी। हमारी निर्दोषता को दुश्मन भी महसूस कर सकता था। जैसे जैसे हम बड़े होते गए हमारे अंदर होने वाली तब्दीलियां हमारे चेहरे और हमारे एक्शन में भी साफ़ दिखने लगी। हम स्वार्थी हो गए, हम लालची हो गए, हम मक्कारी के शिखर छूने लगे। कदम कदम पर बेईमानी और दोगला चरित्र हमारा स्वभाव बन गया। जुबां पर झूठ एक आम बात हो गई। परिणाम भी भयानक रहे। ब्लड प्रेशर, शूगर, हार्ट अटैक, ब्रेन हैमरेज, स्ट्रोक हमारी जीवन का अभिन्न अंग बने गए। दवाओं का बक्सा हर घर के ज़रूरी सामान में शामिल हो गया। इस सारी स्थिति को गहनता से देखा और महसूस किया जानीमानी लेखिका नीलिमा शर्मा ने। मानव जाती पर आते हर दर्द को महसूस कर सकने की क्षमता रखने वाली इस संवेदनशील लेखिका ने इन सभी समस्याओं का समाधान भी सुझाया। उन्होंने कहा:अंदर के बच्चे को कभी मरने न दें और जब भी जरूरत हो उसकी देखभाल करना सुनिश्चित करें। आपका दयालु हृदय सब कुछ बेहतर कर देगा। बाल दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं। 

सुश्री नीलिमा शर्मा ने एक छोटी सी वीडियो भी प्रेषित की है।  आप भी देखिए इस वीडियो को एक नज़र:

चलते चलते उस लोकप्रिय फ़िल्मी गीत की कुछ पंक्तियां भी समरण करते हैं : सन 1968 में आई फिल्म दो कलियाँ के गीत को। गीत के बोल थे-बच्चे मन के सच्चे और इस गीत को लिखा था जनाब साहिर लुधियानवी साहिब ने। संगीत दिया था रवि ने और आवाज़ दी थी सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने। पढ़िए आप आज आप भी उस गीत के बोलों को। 

बच्चे मन के सच्चे

सारे जग की आँख के तारे

ये वो नन्हें फूल हैं जो

भगवान को लगते प्यारे

बच्चे मन के सच्चे...


खुद रूठे, खुद मन जायें

फिर हमजोली बन जायें

झगड़ा जिसके साथ करे

अगले ही पल फिर बात करे

इनको किसी से बैर नहीं

इनके लिए कोई ग़ैर नहीं

इनका भोलापन मिलता है

सबको बाँह पसारे

बच्चे मन के सच्चे...


इन्साँ जब तक बच्चा है

तब तक समझो सच्चा है

ज्यूँ-ज्यूँ उसकी उमर बढ़े

मन पर झूठ का मैल चढ़े

क्रोध बढ़े, नफ़रत घेरे

लालच की आदत घेरे

बचपन इन पापों से हटकर

अपनी उमर गुज़ारे

बच्चे मन के सच्चे...


तन कोमल, मन सुन्दर है

बच्चे बड़ों से बेहतर हैं

इनमें छूत और छात नहीं

झूठी ज़ात और पात नहीं

भाषा की तकरार नहीं

मज़हब की दीवार नहीं

इनकी नज़रों में एक है

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे

बच्चे मन के सच्चे...

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Sunday, September 11, 2022

इण्डिया गेट की जगह पर अपना राष्ट्रिय स्मारक अब तक क्यों नहीं?

Saturday 10th September 2022 at 11:32 PM

नामधारियों ने किया प्रीति सिंह की अगवानी में ज़ोरदार रोष प्रदर्शन


नई दिल्ली
:10 सितंबर 2022: (साहिबा कौर//पंजाब स्क्रीन डेस्क):: 

दिल्ली का इंडिया गेट फिर विवादों में है। बहुत से लोगों का कहना है कि यह अंग्रेजों की ही निशानी है। उसी शासन सत्ता की याद दिलाता है। इस बार इसके खिलाफ आए हैं नामधारी समाज के लोग। इनका कहना है की हमारे अपने शहीदों का कोई स्मारक ही नहीं है। इसे देख कर ब्रिटिश सत्ता के शहीद याद आते हैं। 

गौरतलब है कि नई दिल्ली के केंद्र में 42 मीटर ऊंचा इंडिया गेट उन इमारतों में शामिल है जिन्हें दिल्ली जाने वाले लोग विशेष तौर पर देखना पसंद करते हैं। सुबह शाम इण्डिया गेट परिसर में भारी भीड़ रहती है जो यहां पिकनिक जैसा माहौल बना देती है। 

रोष प्रदर्शनों के लिए भी अक्सर इसका इस्तेमाल किजा जाता है। इस तरह यह दिल्ली का एक केन्द्रीय स्थल बना हुआ है। इसके अतीत में जाएं तो वास्तव में यह गेट ऐसा है जो एक चौराहे के बीच में आर्कवे की तरह “आर्क-डी-ट्रायम्फ” ही है। लगभग अपने फ्रांसीसी समकक्ष के समान, यह उन यह उन हज़ारों भारतीय सैनिकों को याद करता है, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना के लिए लड़ते हुए अपनी जान गंवा दी थी। शहीद हुए सैनिकों की संख्स्माया को लेकर आंकड़े अलग अलग मिलते हैं। इस स्रमारक में 13,516 से अधिक ब्रिटिश और भारतीय सैनिकों के नाम भी उक्रे हुए  जो पश्चिमोत्तर सीमांत अफगान युद्ध 1919 में मारे गए थे। आखिर यहां 1947 के बाद शहीद हुए उन भारतियों का ज़िक्र क्यों नहीं जो भारत के लिए लड़ते शहीद हुए हों?  स्वतंत्र भारत में बेगाने शहीदों का स्मारक क्यूं?

यहां याद दिलाना उचित होगा कि इंडिया गेट की आधारशिला उनकी रॉयल हाइनेस, ड्यूक ऑफ कनॉट ने 1921 में रखी थी और इसे एडविन लुटियन ने डिजाइन किया था। स्मारक को 10 साल बाद तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने राष्ट्र को समर्पित किया था। भारत को आजादी मिलने के बाद एक और स्मारक, अमर जवान ज्योति बहुत बाद में जोड़ा गया था। दिसंबर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले सैनिकों की देश को याद दिलाने के लिए मेहराब के नीचे अनन्त ज्योति दिन-रात जलती है। लेकिन सिर्फ अम्र जवान ज्योति क्यूं? पूरा स्वतंत्र स्मारक भारतीय शहीदों के लिए क्यूं नहीं। इस मकसद की मांग पहले भी बहुत बार उठी है लेकिन इस बार इसे लेकर सामने आए हैं नामधारी। वे नामधारी जो अपने गुरु ठाकुर दलीप सिंह जी के आदेशों को भगवान के वचनों की तरह मानते हैं। 

अब यह नामधारी दिल्ली के इंडिया गेट पर शहीद स्मारक बनाने की मांग को लेकर के नामधारी समाज के लोगों ने धरना प्रदर्शन किया। इस मौके पर नामधारी समाज के लोगों की पुलिस के साथ तीखी बहस भी हुई। इस मौके पर  पहुंचे हुए प्रदर्शनकारियों की मुख्य संयोजक प्रीति सिंह ने कहा कि हम पिछले 7 सालों से सरकार से मांग कर रहे हैं हैं कि सरकार देश के उन स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान देते हुए उनके लिए एक शहीद स्मारक बनाए। जिससे शहीदों को सही सम्मान मिल सके जिन्होंने देश को आजाद कराने में अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। ऐसे हज़ारों स्वतंत्रता सेनानी है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी लेकिन उन्हें अभी तक कोई नहीं जान पाया है। हम चाहते हैं कि सरकार उन सभी शहीदों के नाम का स्मारक बनाये। सरकार एक ऐसा भव्य स्वतंत्रता शहीद  स्मारक बनाये जिस पर उन सभी शहीदों के नाम अंकित हो जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राण अर्पित कर दिए।  एक ऐसा विशाल शहीद स्मारक बनाए जो एक मिसाल बन सके। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए लेकिन पुलिस ने बाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

इसी बीच कुछ लोग इस पर भी नाराज़ हैं कि महारानी एलिज़ाबेथ के निधन पर देश का राष्ट्रिय ध्वज आधा क्यूं झुकाया गया है?

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Friday, September 17, 2021

27 सितंबर को भारत बंद के लिए दिशा-निर्देश जारी

 17th September 2021 at 08:19 PM

दिशा-निर्देश जारी किए संयुक्त किसान मोर्चा ने 

*मोदी करेगा मंडी बंद, हम करेंगे भारत बंद: किसान मोर्चा

*आपातकालीन सेवाओं को छूट दी जाएगी-बंद शांतिपूर्ण रहेगा

*भारत बंद 27 सितंबर को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा
नई दिल्ली
: 17 सितंबर 2021: (मनप्रीत सिंह खालसा//पंजाब स्क्रीन)::
संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार, 27 सितंबर 2021 को भारत बंद के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, और घटक संगठनों से समाज के सभी वर्गों के किसानों से हाथ मिलाने और बंद को पहले से प्रचारित करने की अपील की है, ताकि जनता को असुविधा न हो। बंद शांतिपूर्ण और स्वैच्छिक होगा और आपातकालीन सेवाओं को छूट  दी जाएगी। भारत बंद 27 सितंबर को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा। दिन के लिए मुख्य बैनर या थीम "किसान विरोधी मोदी सरकार के खिलाफ भारत बंद", "मोदी करेगा मंडी बंद, हम करेंगे भारत बंद" इत्यादि रहेगा। बंद 27 सितंबर 2021 को केंद्र और राज्य सरकारों के कार्यालयों, बाजारों, दुकानों और कारखानों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों, विभिन्न प्रकार के सार्वजनिक परिवहन और निजी परिवहन, सार्वजनिक कार्यों और कार्यक्रमों को बंद करने की मांग करेगा। 
हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार बार-बार अति किसान-विरोधी व्यवहार का प्रदर्शन करने के बाद ऐतिहासिक किसान आंदोलन को दबाने के लिए तरह-तरह के घटिया हथकंडे अपना रही है। खबर है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें करनाल की घटनाओं सहित किसानों के विरोध प्रदर्शन से अवगत कराया। 
एसकेएम का कहना है कि अगर भाजपा को किसानों के लगातार और तेज हो रहे विरोध प्रदर्शनों की चिंता है तो उन्हें आंदोलन की जायज मांगों को पूरा करके इसका समाधान करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा जारी नोटिस के जवाब में, हरियाणा सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राजीव अरोड़ा की अध्यक्षता में राज्य के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक समिति का गठन किया है। 20 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित सुनवाई से पहले सोनीपत जिले के जिला मजिस्ट्रेट ने 19 सितंबर 2021 को एसकेएम नेताओं के साथ मुरथल में बैठक बुलाई है। 
एसकेएम एक बार फिर दोहराता है कि यह उनकी अपनी इच्छा से नहीं है कि लाखों किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय सहित विभिन्न राज्यों की पुलिस ने उन्हें सीमाओं पर रहने के लिए मजबूर किया है। भारी बारिश और बाढ़, भीषण गर्मी और सर्दी के महीनों में किसान विपत्ति में राजमार्गों पर डटे हुए रहे हैं। किसानों के लिए वर्तमान संघर्ष उनकी आजीविका, बुनियादी संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा से जुड़ा है। आंदोलन में अब तक 600 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं। यह सरकार है जो अड़ी हुई है और किसानों को सीमाओं पर विरोध करने के लिए मजबूर कर रही है।
एसकेएम 24 सितंबर 2021 को स्कीम वर्कर की अखिल भारतीय हड़ताल को सक्रिय समर्थन देता है, जिसमें आंगनवाड़ी, आशा, एमडीएम, एनसीएलपी, एसएसए, एनएचएम कार्यकर्ताओं की भागीदारी होगी। ये श्रमिक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और सेवाओं के निजीकरण को रोकने और चार श्रम संहिताओं को वापस लेने के अलावा न्यूनतम मजदूरी के प्रावधान के साथ श्रमिकों के रूप में अपनी सेवाओं को नियमित करने की मांग कर रहे हैं। 
एसकेएम यह मानता है कि देश के दूरदराज के हिस्सों में भी पोषण, स्वास्थ्य देखभाल, बच्चों की देखभाल और शिक्षा की बुनियादी सेवाएं देने वाले इन योजना कार्यकर्ताओं, जिसमें ज्यादातर महिलाएं हैं, का शोषण किया जा रहा है और उन्हें भरण-पोषण भत्ता भी नहीं मिलता है। ये श्रमजीवी अपनी जान जोखिम में डालकर कोविड महामारी से लड़ने में सबसे आगे रहे हैं। एसकेएम इन लाखों श्रमिकों को बधाई देता है, और 24 सितंबर के लिए नियोजित उनकी ऐतिहासिक अखिल भारतीय हड़ताल के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त करता है।
ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पूरे राज्य में किसान आंदोलन को मिल रहे जनसमर्थन से घबरा रही है। किसानों के आंदोलन का मुकाबला करने के लिए उत्तर प्रदेश भाजपा द्वारा किया जा रहा किसान सम्मेलन राज्य के उन किसानों को मूर्ख नहीं बना पाएगा, जो यह समझ चुके हैं कि भाजपा मूल रूप से किसान विरोधी है। उत्तर प्रदेश के किसान मोदी सरकार द्वारा थोपे गए 3 काले कानूनों को रद्द करने और सभी किसानों के लिए गारंटीकृत लाभकारी एमएसपी सुनिश्चित करने वाले कानून के लिए बड़ी संख्या में आगे बढ़ रहे हैं । विभिन्न राज्यों में चल रहे आंदोलन को मजबूत करने और 27 सितंबर को भारत बंद को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किसानों की लामबंदी हो रही है। राजस्थान के सीकर में अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में कल "रोष प्रदर्शन" के रूप में किसानों की एक बड़ी सभा हुई। इस बीच महाराष्ट्र के नंदुरबार में शुरू हुई शेतकारी संवाद यात्रा आज धुले जिले से होते हुए नासिक के मुलर पहुंची।
27 सितंबर के बंद की योजना बनाने के लिए 20 सितंबर को मुंबई में राज्य स्तरीय तैयारी बैठक है। वहीं 20 सितबर को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में किसान मजदूर महापंचायत का आयोजन होगा। 22 सितंबर को उत्तराखंड के रुड़की के लक्सर में किसान महापंचायत होगी ।
22 सितंबर से किसान टिकरी और सिंघू विरोध स्थलों पर 5 दिवसीय कबड्डी लीग टूर्नामेंट का आयोजन करेंगे। विभिन्न राज्यों की टीमों के भाग लेने और   नकद पुरस्कारों को जीतने के लिए उम्दा प्रदर्शन की उम्मीद है।
आज समाज सुधारक और "द्रविड़ आंदोलन के जनक" पेरियार ईवी रामासामी की जयंती देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों और कार्यक्रमों के माध्यम से मनाई जा रही है। उनका आत्म-सम्मान आंदोलन और उनका जाति और पितृसत्ता के खिलाफ सफल सामाजिक न्याय संघर्ष, वर्तमान पीढ़ी के भारतीयों के लिए भी एक गहरी प्रेरणा है।
अलग-अलग जगहों पर भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन जारी है। कल पंजाब के जालंधर में भाजपा नेता एचएस कहलों को ऐसे ही एक विरोध का सामना करना पड़ा। हरियाणा के पानीपत में जजपा के अध्यक्ष अजय चौटाला को उनके विरोध में इकट्ठा हुए किसानों की एक बड़ी सभा द्वारा काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस ने कई किसानों को हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया।  27 सितंबर के भारत बंद के लिए दिशा-निर्देश जारी 

Friday, June 25, 2021

'खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ 'दिवस की तैयारियां पूरी

Friday:25th June  2021 at 7:00 PM

किसानों के विरोध प्रदर्शन के 7 महीने पूरे हुए-तेज़ आंदोलन  


नई दिल्ली
: 25 जून 2021: (मनप्रीत सिंह खालसा//पंजाब स्क्रीन)::

26 जून 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर ऐतिहासिक किसान आंदोलन के सात महीने होंगे। इन सात महीनों में, संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में भारत के सैकड़ों किसान संघों ने भारत के कई राज्यों के लाखों किसानों के साथ दुनिया के सबसे बड़े और सबसे लंबे समय तक लगातार विरोध प्रदर्शन किया। इस किसान आंदोलन ने भारत के किसानों की  सक्रियता , गौरव और सम्मान को वापस लाया है। युवा किसान यह कहकर गौरवान्वित हैं कि वे किसान हैं, और उनकी आवाज की भी गिनती होनी चाहिए। महिला किसान भारतीय खेती में सक्रिय भागीदार के रूप में दिखाई देने लगी हैं, और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही हैं। 

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी', युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव ने कहा कि बीजेपी-आरएसएस सरकार के आन्दोलन को विफल करने के तमाम प्रयासों के बावजूद किसानों की एकता बरकरार है। अपने नागरिकों और उनके हितों और कल्याण के प्रति सरकार की जवाबदेही संघर्ष के केंद्र में है।

कल 20वीं सदी के भारत के एक प्रतिष्ठित किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती की पुण्यतिथि भी है, जिन्होंने जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने अपने नेतृत्व वाले आंदोलनों में किसान-मजदूर एकता भी बनाई। वर्तमान किसान आंदोलन किसान - मजदूर एकता के साथ ऐसी किसान-मजदूर एकता और किसानों और श्रमिकों दोनों के आंदोलनों को बड़ी ताकत देने वाली एकजुटता को भी दर्शाता है।

एसकेएम द्वारा चिह्नित किया जा रहा खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ दिवस आपातकाल की घोषणा की 46 वीं वर्षगांठ और 1975 और 1977 के बीच भारत के आपातकाल के काले दिनों की पृष्ठभूमि के खिलाफ भी है। यह एक ऐसा समय था जब नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर बेरहमी से अंकुश लगाया गया था और नागरिकों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया। भारत में आज का अधिनायकवादी शासन उन काले दिनों की याद दिलाता है जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का अधिकार और विरोध का अधिकार सबों का गला घोंट दिया गया था। यह एक ऐसा समय है जो अघोषित आपातकाल जैसा दिखता है। यह एक ऐसा शासन है जिसने अनुत्तरदायी और गैर-जिम्मेदार बने रहना चुना है। इस अवसर पर राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन इन सभी मुद्दों को उठाता है, और उनसे हमारे संवैधानिक मूल्यों और सिद्धांतों तथा हमारे लोकतंत्र की रक्षा करने के अलावा इसमें हस्तक्षेप करने और किसानों की मांगों को पूरा करने की अपील करता है।

एसकेएम फेसबुक लाइव पर आज कर्टेन रेज़र वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें पूरे भारत से कई किसान नेताओं ने भाग लिया।

कल, जब भारत भर के हजारों किसान विभिन्न राज्यों में राजभवनों तक रैलियों में मार्च करने के लिए तैयार हो रहे हैं, एकजुटता की अभिव्यक्ति के रूप में, भारतीय प्रवासियों ने भी रैलियां निकालने का फैसला किया है। ऐसी ही एक रैली की योजना अमेरिका के मैसाचुसेट्स में बनाई जा रही है।

किसान आंदोलन अपने संघर्ष को शांतिपूर तरीके से इतने लंबे समय तक,चलाने में असाधारण नागरिकों की भागीदारी के कारण सक्षम था । ये वे नागरिक हैं जो सेवा की भावना से अथक और निस्वार्थ भाव से संघर्ष का समर्थन कर रहे हैं। गोल्डन हट ढाबे के मालिक राम सिंह राणा ऐसी ही भावना का प्रतीक हैं। अन्य भी हैं। सिंघू बॉर्डर पर बीबी मोहिनी कौर खास है। वह एक दर्जी है जो साथी प्रदर्शनकारियों के लिए कपड़े सिलती है और बिना किसी लाभ के उन्हें बेचती है। वह साथी प्रदर्शनकारियों से खुद की सिलाई का खर्च नहीं लेती, बल्कि कुर्ते और पाजामा की सिलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले कपड़े की कीमत लेती है। बीबी मोहिनी कौर जैसे लोगों की सेवा ने ही इस आंदोलन को जिंदा और मजबूत रखा है। संयुक्त किसान मोर्चा उन्हें सलाम करता है।

कल हिसार में भाजपा की राज्य स्तरीय बैठक के विरोध में प्रदर्शनकारी काले झंडे लेकर एकत्र हुए थे। इसी तरह, पंजाब के केंद्रीय राज्य मंत्री, श्री सोम प्रकाश (जो आंदोलन के शुरुआती कुछ महीनों में किसानों और सरकार के बीच ग्यारह दौर की बातचीत का भी हिस्सा थे) को पंजाब में काले झंडे के विरोध का सामना करना पडा । 

आंदोलन को मजबूत करने के लिए अलग-अलग जगहों पर किसानों की अधिक लामबंदी हो रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और सिसौली से हजारों किसान बीकेयू टिकैत के नेतृत्व में गाजीपुर गेट पहुंचे । पंजाब में, किसानों ने केंद्र द्वारा लाए गए तीन काले कानूनों के बारे में समझाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी कामगारों के साथ बातचीत शुरू कर दी है, उनसे इस शब्द का प्रसार करने और हाथ मिलाने का अनुरोध किया है। देश के विभिन्न हिस्सों में लाभकारी गारंटीकृत मूल्यों के लिए गेहूं किसानों, गन्ना किसानों, आम किसानों, सेब किसानों, हरे चने किसानों, धान किसानों, ज्वार किसानों और अन्य लोगों का विरोध जारी है। पंजाब में किसान बिजली कटौती के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं जिससे धान की रोपाई में बाधा उत्पन्न हो रहा है।

Friday, January 29, 2021

पुलिस ने मेडिकल टीमों को भी बनाया निशाना

 Friday: 29th January 2021 at 3:21 PM 

  डाक्टरों ने लिया 26 जनवरी को हुए इस हमले का गंभीर नोटिस  


सिंघू  बॉर्डर से लौट कर IDPD की टीम
: 29 जनवरी 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

पोष का महीना। शीत लहर का ज़ोर। बर्फीली हवाओं से बार बार छिड़ती कंपकंपी। रजाई में सर्दी कम नहीं होती। उस माहौल में लगातार दो महीनों से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए खुली सड़कों पर बैठे किसान। खुद को  किसानों का हितैषी बताने वाली सरकार और इस सरकार में भागीदार लोगों ने शीट लहर की इस ठंडक को कभी महसूस ही नहीं किया बल्कि किसानों को पिकनिक मनाते हुए बताया। ऐसी निष्ठुर और असंवेदनशील स्थिति में इस दर्द को महसूस किया डाक्टर अरुण मित्रा और उनके साथियों ने। इन्हीं किसानों के स्वास्थ्य की चिंता को ले कर इंडियन डाकटरज़ फॉर पीस एंड डिवेलपमेंट अर्थात IDPD की एक विशेष टीम तैयार हुई। इसी टीम ने दिल्ली की इन सीमाओं पर बैठे किसानों के स्वास्थ्य की जांच करने के मकसद से कई मेडिकल कैंप लगाए। इस बार 26 जनवरी गणतंत्र दिवस को भी इस टीम ने दवाओं का भंडार ले कर दिल्ली की तरफ कूच किया। किसानों की खराब हो रही सेहत की सभी समस्यायों की चिंता इनके ज़हन में थी। खुद की पॉकेट और अपने साथियों के सहयोग से आवश्यक फंड भी जुटाया गया तब कहीं जा कर मेडिकल कैंप के आयोजन का काम फिर से शुरू हुआ। इन टीमों ने अपनी सभी स्वास्थ्य सेवाएं साथ ले कर गणतंत्र दिवस को किसानों के साथ साथ मार्च भी किया। 

इस टीम ने लुधियाना लौट कर 29 जनवरी को मीडिया के कुछ लोगों से भी अनौपचारिक भेंट की और उन्हें बताया कि समस्या तब शुरू हुई जब पुलिस ने रुट प्लान की सहमति वाले रास्तों को अचानक बदलने की घोषणा की। पूर्व निश्चित उन रास्तों पर रुकावटें खड़ी कीं और दूसरी तरफ कुछ अन्य रास्ते खोल दिए। नतीजतन गुंडागर्दी करने वाले मुठ्ठीभर लोगों का मिशन आसान हो गया। पुलिस चाहती तो इस सारी  साज़िशाना शरारत को रोका जा सकता था। साफ़ ज़ाहिर है कि पुलिस ने जानबूझ कर सारी शरारत और गुंडागर्दी को नज़रअंदाज़ किया। 

दूसरी तरफ किसानों का मार्च इतना शांतिपूर्ण था कि इसका जादू देखने वाला था। दिल्ली के स्थानीय लोगों ने इन शांतिपूर्ण किसानों पर फूलों की वर्षा की। शायद इसी सौहार्द को देख कर वो सियासतदान बोखला गए है और लगातार किसानों के विशाल और व्यापक विरोध को भी अनदेखा कर रहे हैं। कारपोरेट का समर्थन करने वाले ये लोग वास्तव में कृषि  कानूनों को लागू करने की हठधर्मी पर अड़े हुए हैं। कितने किसानों की जान जा चुकी है इसकी इस सत्ता को कोई फ़िक्र नहीं। शायद किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करना इस सत्ता का मुख्य मकसद बन गया है। 

हैरानी की बात है कि लाल क़िला सिंघू बॉर्डर से 20 किलोमीटर दूर है लेकिन वहां हुड़दंग करने वाले तत्व इतनी आसानी से कैसे पहुँच गए? इतने लम्बे समय तक शरारती तत्व वहां अपनी मनमानी करते रहे। सारा गोदी मीडिया किसानों की मुख्य  परेड को नज़रअंदाज़ करते हुआ इन मुठ्ठीभर लोगों को "नायक" की तरह बार बार  दिखलाता रहा। 

इस गोदी मीडिया ने किसानों की मुख्यधारा को पूरी तरह अनदेखा करते हुए जानबूझ कर इस तथ्य को छुपाया कि इस मुख्यधारा वाले शांतिपूर्ण किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान न तो किसी वाहन की तोड़फोड़ हुई, न ही किसी वाहन को टक्कर मारी गई, न ही किसी से गालीगलौच हुआ और न ही किसी के साथ मारपीट हुई। शायद यही कारण था कि दिल्ली के लोगों ने इतने प्रेम से किसानों को सुस्वागतम कहा कि किसान भी हैरान रह गए। उनके ह्रदय गदगद हो गए। किसानों की शांतिपूर्ण सफलता से उन लोगों के सीने पर सांप लेटने लगे जो कारपोरेट घरानों के साथ अपनी दोस्ती निभाने के लिए किसानों के विरोध को दबाने में अपनी पूरी ताक़त लगाए हुए हैं।  

पुलिस ने जिन शांतिपूर्ण किसानों पर अपनी बर्बरता दिखाई उनका इलाज करते हुए डाक्टरों की टीम ने देखा कि उन्हें बुरी तरह पुलिस ने अपना निशाना बनाया। लाठीचार्ज और अश्रुगैस के अटैक में उनके हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। उनकी आँखों को बुरी तरह नुक्सान पहुंचा। एक मरीज़ पर तो वाहन भी चढ़ा दिया गया। कई मरीज़ों की हड्डियां टूट गयीं। कई अन्यों को भी गंभीर चोटें आईं। 

डाक्टरों का कहना है कि पुलिस ने डाक्टरों की टीम को भी नहीं बख्शा।  डाक्टरों पर भी ओर आज़माई की गई। डाक्टर सवैमान की टीम को पुलिस ने उस वक़्त अपना निशाना बनाया जब वह अपनी टीम के साथ घायल हुए मरीज़ों को डाक्टरी सहायता प्रदान कर रहे थे। इसी तरह सिंघू बॉर्डर पर एम्बुलेंस की भी तोड़फोड़ की गई। जब डाक्टर बलबीर सिंह अपने किसी मरीज़ को मिलने जा रहे थे तो उन्हें धक्का दे कर गिराने से भी गुरेज़ नहीं किया गया। गौरतलब है कि दिल्ली के बॉर्डरों पर गई इस टीम में डाक्टर अरुण मित्रा के साथ डा. गगनदीप सिंह, डा. बलबीर सिंह, डा. मोनिका धवन, डा. परम सैनी, डा. एस एस  सिद्धू, डा. सूरज ढिल्लों, डा. गुरवीर सिंह, डा. राजन सिद्धू, कुलदीप सिंह, आनोद कुमार,स्वरूप सिंह, अमनिंदर सिंह भी शामिल रहे।   शहीद करतार सिंह सराभा डेंटल कालेज और अस्पताल के स्टाफ ने घायलों की सेवा और उपचार के लिए ट्रैक्टर मार्च के दौरान सख्त मेहनत की। 

डाक्टरों की टीम ने बताया कि लगातार दो महीनों से बॉर्डरों पर बैठे इन किसानों की स्वास्थ्य समस्याएं और बढ़ने की आशंका है। इसके साथ ही डाक्टरों की इस टीम ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण लेकिन पूरी तरह सतर्क रहने की भी अपील की। 

Friday, January 01, 2021

कंवर ग्रेवाल ने सिंघु बॉर्डर पर ही यूं सादगी से मनाया जन्मदिन

  संघर्षों में जुटे कलाकारों का जीवन भी अब यही हो गया  


सिंघु बॉर्डर
: 1 जनवरी 2020: (पंजाब स्क्रीन डेस्क):: 

भारतीय जनता पार्टी और उनके समर्थक चाहे कुछ भी कहे जाए, बेशक कितना ही धुंआधार प्रचार करते जाए फिर भी लोग जिस किसान आंदोलन की जिस सच्चाई को खुद आंखों से दिल्ली जा कर देख आए हैं या देखने वालों की बातों  रहे  असलियत ही उनके दिलों पर एक छाप बन कर बैठ चुकी है। सारा देश ही नहीं पूरी दुनिया अब तो किसानों के साथ होती जा रही है। हर देश का कारपोरेट घराना अंदर ही अंदर चुनौती को महसूस कर रहा  है। 

इस पोस्ट के साथ आप जिस तस्वीर को देख  तस्वीर जानेमाने लोकप्रिय गायक कंवर ग्रेवाल की है। तस्वीर में उनके साथ बैठे हैं उनके साथी और प्रसिद्ध कलाकार हर्फ़ चीमा।किसान आंदोलन  कर छाये हुए कंवर ग्रेवाल अर्थात सूफी गायक कंवर ग्रेवाल बाई का आज जन्मदिन है। इसके बावजूद न तो कंवर ग्रेवाल ने न ही आंदोलन का मोर्चा छोड़ा और न ही।  बेहद सादगी से वहीँ पर मनलिया जन्मदिन।  है संघर्षों  लोगों लाईफ स्टाईल। बार था कि सादगी ही सबसे बड़ा  गहना लेकिन आज एक बार फिर देख भी लिया। आज की यह फ़ोटो भी सिंघु बॉर्डर पर ही कहीं क्लिक की गई है। इसे क्लिक किया उनके ही  किसी दोस्त या साथी ने और साथ ही शेयर भी किया। शेयर होती होती यह तस्वीर आई गुरदेव सिंह मठारू साहिब के पास और उन्होंने  जानकारी को आगे फ़ैलाने में सहयोग दिया।   

उल्लेखनीय है कि कंवर ग्रेवाल के गाये गीतों में "ऐलान" और "जवानी ज़िंदाबाद" तो  बहुत ही हिट हुए। ऐलान तो बच्चे की जुबां पर गया। जो लोग किसान आंदोलन  का चेहरा बन कर उभरे हैं उनमें एक कंवर ग्रेवाल भी है।  

Saturday, December 19, 2020

अब शिक्षा क्षेत्र भी किसान आंदोलन की तरफ

  लायलपुर खालसा कॉलेज जालंधर ने दिए किसान आंदोलन को 2. 51 लाख रूपये  


जालंधर: 19 दिसंबर 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

शिक्षा क्षेत्र का बहुत बड़ा हिस्सा अब किसान आंदोलन का साथ दे रहा है। बहुत से प्रोफेसर, बहुत से छात्र और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए बहुत से रिटायर्ड अधिकारी भी किसानों का समर्थन करने दिल्ली पहुंच रहे हैं। युवाओं के साथ साथ बड़ी उम्र के लोग भी भी इस राह पर सक्रिय हैं। 

जालंधर के बहुत ही पुराने और लोकप्रिय शिक्षा संस्थान लायलपुर खालसा कॉलेज ने तो दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के लिए 2.51 लाख रुपये की सहायता भी दी है। 

इस फंड को बाकायदा एक शुभकार्य की भावना से एकत्र किया गया। शनिवार को कॉलेज के समूह टीचिंग एवं नॉन टीचिंग स्टाफ, विद्यार्थियों और पीसीसीटीयू ने साझे तौर पर 2.51 लाख रुपये की सहायता खालसा एड को सौंपी है। प्रिंसिपल डॉ. गुरपिंदर सिंह समरा ने कहा कि कॉलेज हमेशा ही समाज और देश की सेवा के लिए तैयार रहता है। विद्यार्थियों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि अन्नदाता की आवाज सुनते हुए कृषि कानूनों को रद्द कर देना चाहिए। इस मौके पर पीसीसीटीयू के प्रधान डॉ. एसएस बैंस, सचिव डॉ. बलदेव सिंह, प्रो. गगनदीप सिंह, डॉ. सुरिंद्रपाल मंड, डॉ. पलविंदर सिंह, राणा रलहन, पीए सुरिंदर कुमार चलोत्रा मौजूद थे। इस कार्य की प्रशन्सा भी तेज़ी से हो रही है। 

Monday, September 07, 2020

दिल्ली में बब्बर खालसा के दो सदस्य गिरफ्तार

छह पिस्तौल और 40 कारतूस बरामद हुए
नयी दिल्ली: 07 सितंबर 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
दिल्ली से बहुत बड़ी खबर आ रही है। एक बार फिर सिख मिलिटेंट संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल सुखियों में है। सोशल मीडिया पर इसी की चर्चा हो रहे है। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में हल्की गोलीबारी के बाद प्रतिबंधित मिलिटेंट समूह बब्बर खालसा इंटरनेशनल के दो संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। दिलचस्प बात है कि इन का संबंध  बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ बताया गया है।  यह वही संगठन है जिसने अतीत में बहुत बड़ी बड़ी वारदातों को अंजाम दिया है। इनका दिल्ली में होना बिना कारण नहीं होगा। 
पुलिस ने कहा कि संदिग्धों की पहचान लुधियाना निवासी भूपेन्दर उर्फ दिलावर सिंह और कुलवंत सिंह के रूप में हुई है। वे पंजाब में कुछ मामलों में भी वांछित थे। पुलिस सूत्रों ने मीडिया से कहा कि दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने दोनों को शनिवार रात पकड़ा था। पुलिस उपायुक्त (विशेष प्रकोष्ठ) ने कहा कि उनके पास से छह पिस्तौल और 40 कारतूस बरामद हुए हैं। देखना है और क्या क्या विवरण सामने आता है! 

Monday, April 06, 2020

Modi Magic: रौशनी से मिलते हैं उत्साह और हिम्मत

प्रधानमंत्री मोदी ने वही सब जुटाने का प्रयास किया 
नई दिल्ली: 5 अप्रैल 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। लॉक डाउन ही इसका सबसे आवश्यक हल था और उसे लागू भी किया गया। इस कदम के साथ ही सामने आई एक और तस्वीर। हर रोज़ कमा कर खाने वाले गरीब लोगों की घबराहट। इनमें से बहुत से लोग अपने अपने गांव की तरफ चल पड़े। रास्ते की तकलीफों और भूख का सामना करते हुए लोग। खौफ, निराशा और घबराहट के इस दौर में जब आशा की किरणें धूमिल होती जा रही हैं। बहुत से लोग बिछड़ चुके हैं। बहुत से लोगों के परिवारों को कोरोना डस चुका है। निराशा के इस गहन अंधेरे में दीप जलाने का फैसला किसी चमत्कारी हिम्मत से कम नहीं। वह हिम्मत दिखाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। उन्होंने सभी अटकलों और सभी विरोधों  दरकिनार करते हुए सभी से दीप जलाने को कहा। रात्रि को पूरे 9 बजे केवल 9 मिनटों के लिए। इस 9 की अहमियत को वही लोग समझ सकते हैं जो ज्योतिष विज्ञान को समझते हैं-जानते हैं। अब लोगों ने इसके साथ आतिशबाज़ी भी चलाई और हुड़दंग भी किया लेकिन प्रधानमंत्री ने तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा था। उन्होंने खुद भी बहुत ही गंभीरता और आस्था से दीप जलाये। महामारी कोरोना के खिलाफ देश की एकजुटता और वह भी पूरे उत्साह के साथ दिखाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं भी नई दिल्ली में दीप जलाए।  देश भर में एक संकल्प नज़र आया।  एक हिम्मत नज़र आई। काम छोटा हो या बड़ा हिम्मत और संकल्प के बिना वह हो ही नहीं सकता।  हिम्मत और एकजुटता के इस अभियान में जब प्रधानमंत्री खुद भी शामिल हुए तो उन पलों को पीआईबी के कैमरामैन ने अपने कैमरे में संजो लिया। उन पलों की इस तस्वीर को हम आपके साथ भी सांझा कर रहे हैं। 

Sunday, March 22, 2020

दिल्ली में भी सरकार ने दिया 31 मार्च तक लॉकडाउन का आदेश

दिल्ली के सभी बाजार 31 मार्च तक बंद रहेंगे
नई दिल्ली: 22 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 

कोरोना का कहर और आतंक दोनों बढ़ते जा रहे हैं। मज़ाक में लेने वाले आम लोग भी अब गंभीर होते नज़र आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर से दिए गए जनता कर्फ्यू को लोगों ने जितनी गर्मजोशी से समर्थन दिया है उससे एक नया इतिहास भी रचा गया है। इसी बीच पंजाब सरकार ने भी लॉक डाउन का आदेश जारी किया है, उत्तराखंड ने भी और दिल्ली सरकार ने भी।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने दिल्ली सरकार द्वारा आज दिल्ली में लॉक डाउन करने की घोषणा का समर्थन किया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्ली के व्यापारियों की ओर से   लॉक डाउन का समर्थन करते हुए कहा की दिल्ली सरकार का यह कदम दिल्ली में कोरोना वायरस के सामुदायिक संक्रमण को रोकने में बहुत मदद करेगा। उल्लेखनीय है कि कैट ने कल एक ट्वीट के जरिये दिल्ली के उपराज्यपाल श्री अनिल बैजल और दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल से  दिल्ली में तालाबंदी किया था।
दिल्ली में घोषित लॉकडाउन के पालन में कैट ने दिल्ली के सभी ट्रेड एसोसिएशंस को एक एडवाइजरी जारी की है कि प्रत्येक व्यापारी को कल से 31 मार्च, 2020 तक अपनी दुकान बंद रखनी होगी। श्री खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली में तालाबंदी की घोषणा के साथ दिल्ली के सभी वाणिज्यिक बाजार 31 मार्च तक बंद रहेंगे और दिल्ली में अगले 9 दिनों तक कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी। दिल्ली के 15 लाख छोटे और बड़े व्यापारी ही नहीं, बल्कि उनके 30 लाख से अधिक कर्मचारी भी  घर पर ही रहेंगे। कैट ने दिल्ली के व्यापारियों को किसी भी कर्मचारी की मजदूरी में कटौती नहीं करने की सलाह दी है। श्री खंडेलवाल ने आगे कहा कि दिल्ली का कारोबारी समुदाय COVID-19 का मुकाबला करने के लिए सरकार के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है।
मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल की प्रेस कांफ्रेंस
दिल्ली में 31 मार्च तक लॉकडाउन का ऐलान मेट्रो सेवाएं भी बंद-25 फीसदी बसें चलेंगी
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए तमाम राज्य लॉकडाउन की ओर बढ़ रहा है। जनता कर्फ्यू के दौरान दिल्ली मेट्रो सेवा 31 मार्च तक बंद करने का फैसला किया गया। वहीं, अब दिल्ली को लॉकडाउन करने का फैसला किया गया है। कल से दिल्ली लॉकडाउन रहेगा। राजधानी दिल्ली में कोरोना के चलते धारा 144 भी लागू है।
सीएम अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया कि कल यानी 23 मार्च से 31 मार्च तक दिल्ली में लॉकडाउन रहेगा।  पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद रहेंगे। डीटीसी की भी केवल 25 फीसदी बसें ही चलेंगी।
सीएम ने कहा, दिल्ली की दुकानें, बाजार सब बंद रहेंगे। दिल्ली के बॉर्डर सील रहेंगे, हालांकि दूसरे राज्यों से खाने-पीने के सामान और सब्जी लाने वाले वाहनों को अनुमति होगी। इसके अलावा सभी फ्लाइट्स और धार्मिक स्थल बंद रहेंगे। वहीं, अस्पताल और बिजली के दफ्तर खुले रहेंगे।
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Friday, March 20, 2020

निर्भया को इंसाफ मिला--और बहुत बाकी हैं अभी

Friday: 20th March 2020 at 6:45 AM 
उन्नाव जैसे मामलों में भी इंसाफ की आशा जगी 
नयी दिल्ली: 20 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::   
दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 रात को याद करते ही आज भी सिहरन सी दौड़ जाती है। दरिंदगी की इंतहा थी। एक लड़की के साथ उस दिन जो हुआ उसे देख कर शक होने लगा था कि क्या सचमुच यह देश धर्मकर्म का ही देश है? सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई उस लड़की की वास्तविक शनाख्त को छुपाते हुए उसे निर्भया का नाम दिया गया था। 
निर्भया फिजियोथैरेपी की छात्रा थी और उसकी उम्र केवल 23 वर्ष थी। निर्भया के साथ हुए सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के मामले के चारों दोषियों को शुक्रवार की सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दे दी गई। इसके साथ ही देश को झकझोर देने वाले, यौन उत्पीड़न के इस भयानक अध्याय का अंत हो गया। इस फांसी के साथ ही उम्मीद जगी है की सत्ता और सियासत के बल पर मनमानियां करने वालों का भी यही अंजाम होगा। उन्नाव मामले में भी जल्द इंसाफ हो इसकी आशा अब और बढ़ गयी है। 
आज सुबह सुबह 5:30 बजे 32 वर्षीय मुकेश सिंह, 25 वर्षों की उम्र के पवन गुप्ता, 26 बरस के विनय शर्मा और 31 वर्षीय अक्षय कुमार सिंह को फांसी के फंदे पर लटकाया गया। फांसी से पहले वे बहुत राई, गिड़गिड़ाए लेकिन इंसाफ हो कर रहा। तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने बताया कि डॉक्टरों ने शवों की जांच की और चारों को मृत घोषित कर दिया। खबर की पुष्टि होते ही तिहाड़ जेल के बाहर खड़े लोगों ने मिठाईयां बांटीं।  
जेल अधिकारियों ने बताया कि चारों दोषियों के शव करीब आधे घंटे तक फंदे पर झूलते रहे जो जेल नियमावली के अनुसार फांसी के बाद की अनिवार्य प्रक्रिया है।
गौरतलब है कि दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसर तिहाड़ जेल में पहली बार चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई। इस जेल में 16,000 से अधिक कैदी हैं। चार दोषियों को एक साथ फांसी दिए जाने से इस जेल के साथ एक नया रेकार्ड जुड़ा है।  
चारों दोषियों ने फांसी से बचने के लिए अपने सभी कानूनी विकल्पों का पूरा इस्तेमाल किया और बृहस्पतिवार की पूरी रात तक इस मामले की सुनवाई चली। इस बार उनकी कोई भी तिकड़म काम नहीं आई। 
उल्लेखनीय है कि सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के इस मामले के इन दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तीन बार सजा की तामील के लिए तारीखें तय हुईं लेकिन हर बार फांसी टलती गई। यहां तक कि बात मज़ाक बन गयी। न्याय में देरी को लेकर बहुत से जन संगठन भी बहुत कुछ बोलने लगे। अंतत: आज सुबह चारों दोषियों को फांसी दे दी गई। सात वर्ष से भी अधिक समय के बाद मिला निर्भया को इंसाफ। 
आखिरी पैंतरा चलते हुए एक दोषी ने दिल्ली उच्च न्यायालय और फांसी से कुछ घंटे पहले उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। वहां भी उसे नाकामी ही मिली। इसी तरह फांसी से कुछ घंटों पहले पवन कुमार गुप्ता ने राष्ट्रपति द्वारा दूसरी दया याचिका खारिज किए जाने को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया। उसकी भी दाल नहीं गली। दोषियों को भी न्याय का पूरा मौका देते हुए अभूतपूर्व रूप से देर रात ढाई बजे सुनवाई शुरू हुई और एक घंटे तक चली। इस सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने उसकी याचिका खारिज करते हुए फांसी का रास्ता साफ कर दिया। हर तिकड़म नाकाम रही। 
न्यायालय ने गुप्ता और अक्षय सिंह को फांसी से पहले अपने परिवार के सदस्यों से मुलाकात करने की अनुमति देने पर भी कोई आदेश देने से इनकार कर दिया।सात साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपनी बेटी को आखिरकार न्याय मिलने से राहत महसूस कर रहे निर्भया के माता-पिता ने कहा कि वे भारत की बेटियों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उलेखनीय है की अब इस दिशा में बेटियों को न्याय दिलाना उनकी ज़िंदगी का मिशन बन चुका है। इस तरह के मामलों में सहायक बन पाना ही उनका मकसद होता है। इस फांसी से उनको और भी भावुक और नैतिक बल मिला है। 
निर्भया की मां आशा देवी ने फांसी के बाद पत्रकारों से कहा कि हमें आखिरकार न्याय मिला। हम भारत की बेटियों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। न्याय में देरी हुई लेकिन न्याय मिला। अब अन्य बेटियों को समय पर न्याय मिले इसका प्रयास जारी रखा जायेगा। सर्कार ने भी इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने की आश्वासन दिया है। 
हालांकि आशा देवी ने कहा कि दोषियों की फांसी के बाद अब महिलाएं निश्चित तौर पर सुरक्षित महसूस करेंगी और पूरा देश इस खबर के लिए जाग भी रहा था और न्याय का इंतजार कर रहा था। आशा देवी की इस आशा और भावना के बावजूद वास्तविकता अभी भी पूरी नहीं बदली। हर महिला और हर लड़की को हर पल सुनिश्चित सुरक्षा का अहसास अभी भी दूर की बात ही लगती है। कठुआ और उन्नाव जैसे मामले अभी भी बाकी हैं। बहुत से मामलों में इंसाफ अभी बाकी है। 
आज सुबह सुबह तिहाड़ जेल के बाहर का नज़ारा देखने वाला था। तिहाड़ जेल के बाहर शुक्रवार सुबह सुबह तड़के तड़के ही सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए। उनके हाथों में राष्ट्रध्वज था और वे ‘अमर रहो निर्भया ’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे। जैसे ही फांसी हुई तो उनमें खुशी की लहर दौड़ पड़ी। उनमें से कुछ ने फांसी के बाद मिठाइयां बांटी। उनके चेहरों पर उम्मीदों की एक नै चमक थी। कानून और जुडिशरी को सलाम की मुद्रा में उठे से लगते थे यह लोग। 
एक और खास बात यह कि जेल के बाहर एकत्रित लोगों में सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना भी थीं। उन्होंने एक पोस्टर ले रखा था जिस पर लिखा था निर्भया को न्याय मिला। अन्य बेटियों को अब भी इंतजार है। यह बहुत गहरी बात थी जो दूर के अर्थ भी बता रही थी। उन्होंने कहा कि आखिरकार न्याय मिला। यह कानून व्यवस्था की जीत है। 
इसी तरह जानेमाने इलाके द्वारका में महिलाओं के कल्याण के लिए सतचित फाउंडेशन नामक एक एनजीओ चलाने वाली अर्चना कुमारी ने कहा  कि  मैंने निर्भया के अभिभावकों का दर्द देखा है। उम्मीद है कि दोषियों को फांसी से बलात्कार और यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर लगाम लगेगी। इससे  करने वाले लोगों के मन में भय की भावना पैदा होगी। इसी भावना को पैदा करना भी एक मकसद था फांसी की सज़ा का।  
हर क्षेत्र के लोगों ने इस मामले में अपनी रुचि दिखाई। पश्चिमी दिल्ली की निवासी सना ने कहा कि हमारे समाज में इस फांसी के बाद कुछ नहीं बदलेगा लेकिन हम खुश हैं कि चारों दोषियों को फांसी दी गई और निर्भया को न्याय मिला। निश्चय ही ऐसी सोच वाले लोगों की तसल्ली के लिए अभी कानून को और त्वरित, निष्पक्ष और सख्त होना होगा। 
ज़रा याद कीजिये उस रात को। चलती बस में निर्भया के साथ छह व्यक्तियों ने सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसे बुरी तरह पीटा, घायल कर दिया और सर्दी की रात में चलती बस से नीचे सड़क पर फेंक दिया था। दरिंदगी और अमानवता की हद थी यह। भूलने के इस युग में भी बहुत से लोग नहीं भूलेंगे कि 16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना ने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया था और निर्भया के लिए न्याय की मांग करते हुए लोग सड़कों पर उतर आए थे। जगह जगह मोमबत्तियां और रोष प्रदर्शन हुए थे। 
इसी बीच करीब एक पखवाड़े तक जिंदगी के लिए जूझने के बाद अंतत: सिंगापुर के अस्पताल में निर्भया ने दम तोड़ दिया था। उसे नहीं बचाया जा सका। ज़िंदगी और मौत की जंग में उसकी सांसों की माला टूट गयी। उसकी मौत से यह गम और गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा। तब से ही दोषियों को सज़ा ी मांग ज़ोर पकड़ गई थी। इस मामले में मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह सहित छह व्यक्ति आरोपी बनाए गए। इनमें से एक नाबालिग था। इसी मामले के एक आरोपी राम सिंह ने सुनवाई शुरू होने के बाद तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। नाबालिग को सुनवाई के बाद दोषी ठहराया गया और उसे सुधार गृह भेज दिया गया। तीन साल तक सुधाार गृह में रहने के बाद उसे 2015 में रिहा कर दिया गया। वह अब सुधरी हुई ज़िंदगी जी रहा है। उसका ठिकाना दक्षिण भारत में कहीं है। उसकी पहचान को कई कारणों से गुप्त रखा गया है। उसे छोड़ना कानून की दया के पहलू को भी दर्शाता है। 
बाकी बचे दोषियों को सज़ा देने के लिए इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई चली और यह निचली अदालतों से होकर उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तथा राष्ट्रपति के पास पहुंचा। एक के बाद एक तिकड़म चली गई। कानून के पेचों का फायदा उठाया गया। अदालत ने इस आधार पर तीन बार मौत का वारंट रोका कि दोषियों ने अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल नहीं किया था और एक के बाद एक ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी। लेकिन एक दिन सभी तिकड़में खत्म हो गईं। हर चाल नाकाम हुई। इन्साफ जीत गया। 
पांच मार्च को एक निचली अदालत ने मौत का नया वारंट जारी किया जिसमें फांसी की अंतिम तारीख 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे तय की गई। उसी के चलते आज सुबह सुबह इन चरों को फांसी पर लटका दिया गया।