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Thursday, May 21, 2015

आखिर कब रुकेंगे पत्रकारों पर हमले ?

 [5/20/2015, 22:05] Anil Vij:
अब जगराओं के पत्रकार पर हुआ जानलेवा हमला
कब्जे की कवरेज कर रहा था पत्रकार जसवंत
पंजाब स्क्रीन ग्रुप में अनिल विज की ओर  से प्रेषित  
लुधिआना:  पत्रकारों पर हो रहे हमले बंद होने का नाम नहीं ले रहे| आए दिन कवरेज कर रहे पत्रकारों पर हमलों की खबरे मिलती रहती है पर पुलिस प्रशासन इस मे कोई ठोस खदम उठता महसूस नहीं होता।  जगराओ मे भी एक ऐसी घटना हुई जिसमें इंग्लिश ट्रिब्यून के रिपोर्टर जसवंत अपने बेटे को ले  कर घर जा रहे थे के उनकी नजर एक़ दुकान पर पड़ी जहा कुछ लोक कब्ज़ा कर रहे थे।  जसवंत ने जब इसकी कवरेज करनी चाही तो कब्ज़ा कर रहे युबको ने जसवंत का कैमरा छीन लिया और उसपर हमला कर दिया।  हमले मे जसवंत गंभीर रूप से जख्मी हो गया जिसे सिविल हॉस्पिटल जगराओ मे भर्ती करवाया गया है। इस हमले मे जसवंत की बीवी को भी चोटें आई है। सिविल हॉस्पिटल मे मौजूद जसवंत के मित्र और दैनिक सवेरा के ब्यूरो सुढोरा ने बताया कि जसवंत की हालत अब खतरे से बाहर है। पंजाब प्लस मे बातचीत के दौरान जगराओ के एस एस पी रवचरण सिंह बराड़ ने कहा  की मीडिया पर हमले के दोषी बखसे नहीं जायेगे।
इसी बीच अनिल विज की ही एक और सूचना के मुताबिक जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन (रजि) जगराओ के इंग्लिश ट्रिब्यून के पत्रकार जसवंत पर हुए हमले की कड़ी निंदा करती है। पत्रकारों पर हमले दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है और हमारी सरकार और पुलिस इसके लिए एक़ परसेंट वी सीरियस नहीं है। हमारी मांग है कि (हर जिले मे पुलिस पत्रकार समिति बनाना) पर इस पर भी सरकार ने चुप्पी साध रखी है।  थोड़ा दुखी होकर यह वी कह सकता हु की इसकी एक़ वजह हमारा आपस का  विवाद वी है। अब समय आ गया है की हम सब एक़ हो कर छोटे वड़े पत्रकार का तमगा उतार कर एकजुट हो कर सरकार से हमारी इस मांग पर अड़े। हर जिले मे पत्रकार पुलिस समिति बनाई जाये जो सिर्फ पत्रकारों के मामलो को सुने।
आये मिल कर संघर्ष करे। ------------गौरव कुमार 'आरोड़ा' (9814175786 )

Wednesday, April 09, 2014

“आप” प्रत्याशी फूल्का को जगराओं रैली में मिला भारी समर्थन

लोगों के साथ ज़मीन पर बैठे लोकसभा प्रत्याशी फूलका 
लुधियाना, 9 अप्रैल 2014: (रेकटर कथूरिया/पंजाब स्क्रीन):
आम आदमी पार्टी के लुधियाना से प्रत्याशी एडवोकेट हरविंदर सिंह फूल्का ने आज जगराओं विधान सभा में पड़ते विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का सघन दौरा कर चुनाव प्रचार किया। श्री फूल्का ने रोड शो को अखाडा से प्रारम्भ कर रंधीरगढ़, भामिपुर कलां, बासुवाल, मानुके, ह्थूर, चकर, माला, रसूलपुर, दंगियाँ, कायोंके कलां, अगवाड़ लोपो, लेह्दी भानी होते हुए जगराओं में समाप्त किया। भरी दोपहरी  में आयोजित इस रोड शो के दौरान श्री फूल्का को स्थानीय लोगों का भारी सहयोग और समर्थन मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय नागरिकों को संबोधित करते हुए श्री फूल्का ने कहा कि किसानों के द्धारा जिस कर का भुगतान सरकार को किया जाता है उस कर का खर्च ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर ही होना चाहिए। पंजाब के ग्रामीण क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से अभी तक वंचित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी, स्वास्थ्य और बिजली कि मूलभुत सुविधाओं का आभाव है जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोग शहरी क्षेत्रों के लोगों से कई मायनों में पिछड़े हुए हैं। अंत में पत्रकारों को संबोधित करते हुए श्री फूल्का ने कहा, वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन लाना आज के समय की मांग है, अगर पंजाब की, पंजाब के लोगों की तरक्की और खुशहाली यहाँ के लोग चाहते हैं तो उन्हें हर हाल में वर्तमान भ्रष्ट राजनीतिज्ञों को सदा के लिए सत्ता से बाहर करना होगा, उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि आम आदमी पार्टी का खुल कर साथ दें और पंजाब के साथ साथ देश को खुशहाल बनाने में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। 
गौरतलब है कि हर जगह लोग उनसे ऐसे मिलने आते जैसे उनके गहर परिवार का कोई देर से बिछड़ा आत्मीय व्यक्ति किसी लम्बी विदेश यात्रा से लौटा हो। न कहीं कोई औपचारिकता--न ही कोई अन्य ड्रामेबाज़ी---बस कुछ लोगों की आँखों में आंसू थे।  पूछने पर कुछ देर बाद बोले अब लगता है उनके दुखों का अंत होगा। उनकी भी सुबह आयेगी। कुछ लोगों की आँखों में शोले थे। कह रहे थे अबकी बार हम सब बदल देंगें। 

Wednesday, August 28, 2013

आधार कार्ड बनाना:लोगों के लिए बना नई सर दर्द

दफ्तर खुलने से पहले ही एकत्र हो जाते हैं फ़ार्म
लुधियाना: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): आधार कार्ड का खुय्द अपना आधार कितना खोखला और अनियमित है इसका एक नया मामला सामने  आया है  जगराओं और आसपास के इलाकों की है जहाँ आधार कार्ड बनाने के लिए लगे कैंप में आये लोगों को बुरी तरह निराश करके वापिस भेज दिया जाता है। कहा जाता है यह की आज का कोटा पूरा हो चूका है इसलिए फिर किसी दिन आना। दिलचस्प बात यह की यह कोर जवाब उस समय सुबह सुबह ही दे दिया जाता है जब कैंप आफिस का ताल भी नहीं खुला होता। हैरानी की बात है कि ताला खुलने से पूर्व ही निश्चित कोटे के फ़ार्म किसने और कहाँ से पूरे कर लिए। सरकारी विज्ञापनों में आधार कार्ड बनाने के लिए प्रचारित की जाने वाली सुविधाएं और घोषनाएं एक मजाक बन कर रह गयी हैं। वास्तव में हर सरकारी काम की तरह आधार कार्ड बनवाना भी आम लोगों के लिए एक अच्छी खासी मुसीबत बन गयी है। लोग सुबह चार बजे से ही कार्ड बनवाने के लिए लाइन में लग जाते हैं, फिर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। इसी बात को लेकर मंगलवार के दिन २७ अगस्त को लोग बड़ी संख्या में गुस्से में आ गए। वे अपनी दिहाड़ी तोड़ कर वहां आये थे और ऊपर से मिला कोर जवाब। भडके हुए इन लोगों को पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शांत तो कराया पर इस गुस्से का कारण कौन दूर करेगा। कौन कराएगा इसकी जांच कि वास्तव में जान पहचान के लोगों से अग्रिम धन लेकर उनके फार्मों से ही कोटा पूरा कर लिया जाता है। 
 कोटा पूरा होने के बाद आम जनता के लिए एक कोर जवाब या ताल मटोल ही बाकि बचता है! जानकारी के अनुसार जगराओं के बीडीपीओ दफ्तर में लगे आधार कार्ड कैंप में मंगलवार को करीब सुबह छह बजे कुछ लोग कार्ड बनवाने पहुंचे। लेकिन सुबह सुबह वहां पहले से ही मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें यह कहकर वापस जाने को कहा कि आज केवल 70 कार्ड ही बनेंगे। उसने इसका कारण बी बताया कि आज केवल 70 कार्ड बनेंगे और उतने फार्म पहले से ही उनके पास आ चुके हैं इसलिए आप किसी और दिन आइएगा। सवाल उठता है क्या कोटे के निश्चित 70 फ़ार्म क्या घर घर जाकर आधी रात को एकत्र कर लिए गए थे? अगर नियम पहले आओ पहले पाओ का है तो यह नियम ताल खुले बिना पूरा ही कैसे हुआ? यह सारा ड्रामा देख कर वहां मौजूद लोग गुस्से में आ गए और उक्त व्यक्ति से पूछने लगे कि वो कौन होता है आधार कार्ड के निवेदन पत्र लेने वाला, जबकि दफ्तर में अभी ताला लगा है। इसका कोई ठोस जवाब न था और न ही मिला। 
यह बुरी हालत केवल एक कैंप की नहीं बल्कि कई स्थानों की है। गांव शेरपुरा के पूर्व फौजी जगजीत सिंह, गुरदित सिंह व बेअंत कौर ने भी इस बारे में कहा कि वह और उनके साथ दर्जनों लोग पिछले तीन दिनों से कार्ड न बनने कारण लौट रहे हैं। आज भी वह सुबह करीब पांच बजे से आए थे लेकिन उसने पहले ही वह व्यक्ति करीब 70 फार्म लिए हुए था। जबकि कार्ड बनने का काम सुबह नौ बजे से होता है। इसके बाद कर्मचारी के आते ही कार्ड न बनने से परेशान लोगों ने उसके साथ बहस शुरू कर दी। इसके बाद मामला बढ़ते देख पुलिस को भी सूचना दी गई। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंच कर लोगों को शांत कराया तथा कार्ड बनवाने का काम शुरू कराया।
लोग जब उठते हैं तो फिर कुछ किये बिना बैठने का नाम भी नहीं लेते। यहाँ भी कुछ ऐसे ही हुआ। लोग जब कुछ ज्यादा ही गुस्से में आये तो उन्होंने ढूँढ निकला। मिलने पर आधार कार्ड कैंप के प्रमिंदर सिंह ने बताया कि एक दिन में करीब 70 कार्ड बनाने की प्रक्रिया मुकम्मल होती है। इसलिए जो भी पहले 70 लोग आते हैं उनका ही फार्म लिया जाता है। अब देखना है यह है कि इस सरे सिस्टम को पारदर्शी और सुविधाजनक कैसे है?  

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