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Tuesday, October 18, 2016

PM Modi in Himachal:पंजाब पहुंचने से पहले हिमाचल में चली विकास की आंधी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया तीन बड़े प्रोजेक्‍टों का उद्घाटन
The Prime Minister, Shri Narendra Modi being welcomed by the Governor of Himachal Pradesh, Shri Acharya Devvrat and the Chief Minister of Himachal Pradesh, Shri Virbhadra Singh, at a function, in Mandi, Himachal Pradesh October 18, 2016.  मंडी: (हिमाचल प्रदेश): 18 अक्टूबर 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीएम बनने के बाद पहली बार हिमाचल पहुंचे लेकिन लोगों के  अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहे।विरोध में चल रही प्रचार लहर का जवाब देते हुए उन्होंने मंडी में हो रही परिवर्तन रैली से पहले तीन बड़े प्रोजेक्‍टों का उद्घाटन किया। इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा, मैं काशी से लोकसभा का प्रतिनिधित्व करता हूं और आज मिनी काशी में आप लोगों को संबोधित कर रहा हूं।' बस इसी वाक्य से लोग उन्हें और अधिक ध्यान से सुनने लगे। 
पीएम मोदी ने कहा कि 40 साल से अटकी थी वन रैंक वन पेंशन योजना मैंने इसकी पहली किश्त साढ़े पाच हजार करोड़ रुपए दी। बाकी तीन किश्त भी जल्द ही दिए जाएंगे।
सेना के साथ भावकुता का रिश्ता जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि मुझे फौजी और उनके परिवार आशीर्वाद देते हैं। दुनिया में हमारी सेना के पराक्रम की चर्चा है। सेना की ताकत पर हमें गर्व है। उन्होंने कहा कि दुनिया में पहले इजरायल की चर्चा होती थी अब भारत का नाम भी शामिल है।भाजपा के सेवा कार्यों की भी उन्होंने चर्चा की। उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोगों ने खुद को पानी और लोगों की सेवा में खपा दिया। ऐसा कह कर उन्होंने अन्य दलों के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत किया। 
देश को हिमाचल प्रदेश उर्जा देता है। पुरानी फाइलों को ढूंढ कर परियोजनाओं पर फिर से काम किया जा रहा है। शौचालय से लेकर पनबिजली तक पर काम हो रहा है। नांगल बांध कलवारा परियोजना की फाइल 35 साल से ढूल फांक रही है। एलईडी के बल्द से हिमाचल में रोज एक करोड़ रुपए की बचत हो रही है। आज दिल्ली में ऐसी सरकार बैठी है जो जीवन के हर क्षेत्र में काम कर रही है। उन्होंने बहुत ही तरतीब से अपनी सरकार की उपलब्धयां गिनायीं और इन कामों को जनता से जोड़ क्र भी दिखाया। 

पीएम मोदी ने पहले काम किया बाद में चर्चा की। हिमाचल पहुंचने पर पीएम ने सबसे पहले मंडी के ऐतिहासिक पड्डल मैदान से एनएचपीसी के 520 मेगावाट पार्वती पावर स्टेशन और एसजेवीएनएल के 412 मेगावाट की रामपुर जल विद्युत स्टेशन और एनटीपीसी की आठ सौ मेगावाट की कोल डैम जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया।
इस तरह लगता था जैसे विकास की आंधी चल पड़ी हो। मंडी और बिलासपुर जिला की सीमा पर सतलुज नदी पर बने आठ सौ मेगावाट क्षमता की कोल डैम परियोजना एनटीपीसी का पहला हाइड्रो प्रोजेक्ट है। यह प्रोजेक्ट उत्तरी ग्रिड को बिजली आपूर्ति करता है। दिसंबर 2003 में तकनीकी आर्थिक स्वीकृति और मुख्य डैम पैकेज का कार्य मिलने के बाद सतलुज नदी पर परियोजना का काम शुरू किया। इन कामों से आम जनता बेहद उत्साहित नज़र आ रही थी। 
उन्होंने इस काम में आई तकलीफों के साथ साथ इसके फायदे भी गिनवाए। इस प्रोजेक्ट में उत्पादित होने वाली बिजली में 12 प्रतिशत हिमाचल प्रदेश को निशुल्क मिलेगी। परियोजना से प्रभावितों को प्रति माह 100 यूनिट बिजली निशुल्क दी जाएगी। इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, चंडीगढ़ को बिजली आपूर्ति की जाएगी। उम्मीद करनी चाहिए कि उत्तर भारत में बिजली का संकट और कम होगा।       (Photos: PIB)

Tuesday, August 18, 2015

मनिकरण में पहाड़ टूटा--कम से कम 10 की मौत


निर्माण के लिए अवैध खुदाई और तेज़ धुप से रुष्ट हुआ पर्वत 
मणिकरण, 18 अगस्त 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
हिंदुयों और सिखों के प्रमुख तीर्थस्थल मणिकर्ण साहिब गुरुद्वारे की सराय पर मंगलवार दोपहर पहाड़ से एक चट्टान गिरने के कारण हुए हादसे में कम से कम 10 लोग मारे गये, जबकि 10 अन्य घायल हो गये। इसी बीच वाटसअप पे मुर्तकों की संख्या 35 तक भी बताई गयी। घायलों को कुल्लू के जिला अस्पताल में भी भर्ती कराया गया है, जहां 2 की हालत गंभीर बनी हुई है। कुछ गंभीर घायलों को पीजीआई चंडीगढ़ भी रैफर किया गया। हादसे का शिकार हुए 15 लोग पंजाब के संगरूर जिले के रोगला तलवा मंडी गांव के हैं। कई घायलों की पहचान अभी नहीं हो पायी है। हादसा इतना भयावह था कि सब लोग बदहवास हो गए। हादसा दोपहर करीब 2 बजे हुआ। गुरुद्वारे से सटे पहाड़ से करीब 10 वर्गफुट की चट्टान 500 मीटर की ऊंचाई से सराय पर गिरी तो इसने भवन के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया। ये चट्टानें सभी छतों को तोड़ती हुयी नीचे जा कर नदी में भ गयीं। पूरी इमारत इस हादसे के बाद दो भागों में बटी नज़र आ रही थी। 

8 मंजिला सराय की 6 मंजिलों को नुकसान पहुंचा है। हादसे का शिकार हुए लोगों में से ज्यादातर ऊपर वाली मंजिलों में थे। यह भी कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या ज्यादा हो सकती है। मलबे में दबे लोगों को निकालने में एनडीआरएफ की टीम के साथ-साथ एसएसबी, होमगार्ड और पुलिस के जवानों के अलावा स्थानीय लोगों ने भी हाथ बंटाया। एसएसबी के कमांडेंट संजीव यादव के मुताबिक अभी यह कहना मुश्किल है कि यहां और शव हो सकते हैं या नहीं। वहीं, गुरुद्वारा प्रबंधकों का कहना है कि सराय भवन के 14 कमरों में 30 लोग ठहरे हुए थे।  इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने घटनास्थल का दौरा किया और घायलों का हाल जाना। हादसे में निक्का राम, तरसेम चंद, मिट्ठू सिंह, अवतार उर्फ कालू, लोकराज, पपिंद्र जीत सिंह, हंसराज और गुरविंदर घायल हुए हैं।
तेज़ धुप से टूट गयीं चट्टानें: बारिश के बाद निकली तेज़ धुप अक्सर खतरनाक होती है। इस क्षेत्र में 2 दिनों की बारिश के बाद मंगलवार को धूप निकली थी। माना जा रहा है कि बारिश के बाद तेज धूप की वजह से पहाड़ के एक हिस्से में दरार आ गयी और चट्टान नीचे आ गिरी। वहीं, कुल्लू के जिला उपायुक्त राकेश कंवर का कहना है कि प्रबंधक पहाड़ काटकर लगातार गुरुद्वारे का विस्तार कर रहे हैं। संभव है कि पहाड़ खिसकने की आज की घटना का कारण अवैज्ञानिक ढंग से की गयी खुदाई हो।
ठंडे और खौलते पानी के कुंड हैं यहां: कुल्लू से करीब 45 किलोमीटर दूर पार्वती नदी के किनारे बना यह गुरुद्वारा गर्म पानी के कुंडों के लिए जाना जाता है। कड़ाके की ठंड में भी इनमें पानी खौलता है। सिख इतिहास के मुताबिक श्री गुरु नानक देव जी यहां भाई मरदाना के साथ आये थे। मरदाना के लिए लंगर पकाने के लिए उन्होंने एक पत्थर हटवाया, तो गर्म पानी का कुंड निकला। उसी पानी में लंगर पकाया गया था। मरने वालों में ज़्यादातर लोग संगरूर ज़िले के रोगले गाँव के हैं। मुर्तकों की पहचान यादविंदर सिंह, लाडी, सोनी राम, गुरदीप सिंह, गोपाल, रघुवीर और काका सिंह के रूप में हुयी है।  अन्यों की पहचान के प्रयास जारी हैं।

Tuesday, April 28, 2015

हिमाचल में लगा स्टेट बैंक पटियाला का विशेष कैम्प

Tue, Apr 28, 2015 at 1:08 AM
स्टेट बैंक आफ पटियाला की हिमाचल में 131 शाखाएं 
लुधियाना: 28 अप्रैल 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
दिनांक 25 04.2015 को स्टेट बैंक आफ पटियाला द्धारा होटल कनिफर धर्मशाला मे ग्राहक दिवस का आयोजन किया गया, जिस में बैंक के प्रबंध निदेशक श्री एस॰ए॰ रमेश रंगन ने कांगड़ा, हमीरपुर व ऊना जिलों से आए बैंक ग्राहकों को संबोधित किया। उन्होंने बैंक की विभिन आकर्षक जमा एव ऋण योजनाओं के वारे में ग्राहकों को अवगत कराया व बैंक की गतिविधियों एव उपलब्धियों वारे जानकारी दी। श्री रंगन ने बताया कि बैंक का हर क्षेत्र मे निरंतर विकास एव विस्तार हो रहा है। बैंक की हिमाचल प्रदेश में 131 शाखाएँ कार्यरत हें व बैंक की और अधिक विस्तार करने की योजना है। उन्होने बैंक के निरंतर विकास मे सहयोग के लिए सभी ग्राहकों का धन्यवाद प्रकट किया।
 उन्होने कहा कि बैंक का उद्देश्य केवल शाखायें खोलने एवं लाभ कमाने तक सीमित नहीं है अपितु घर घर तक बैकिंग पहुँचाने का है और बैंक का मुख्य उद्देशय है कि न केवल शहरों में अपितु ग्रामीण क्षेत्र में भी कोई व्यक्ति ऐसा न हो जोकि बैंकिंग सुविधाओं से वंचित रहे । उन्होने कहा कि हर घर के हर व्यकित का बैंक में खाता हो, स्टेट बैंक आफ पटियाला का यही सपना एवं उद्देशय है और बैंक की पूरी कोशिश रहती है कि ग्राहक सेवा को बेहतर से बेहतर बनाया जा सके और इस दिशा में प्रयास निरंतर जारी हैं आगे भी रहेंगे ।

Thursday, May 09, 2013

हिमाचल में एक और हादसा: ब्यास में गिरी बस

38 मौतों की आशंका:नशा, मोबाईल और अन्जानता ने ली जानें?
शिमला, 8 मई। पहाड़ी इलाकों में जहाँ एक एक कदम फूंक फूंक कर रखना पड़ता है वहां एक और  हादसे के कारण शोक का माहौल व्याप्त हो गया है। कुल्लू के निकट झिड़ी में बुधवार को एक निजी बस के ब्यास नदी में गिर जाने के कारण लगभग 40 लोगों के मारे जाने की आशंका है। डूबने वालों में से 33 के शव बरामद कर लिये गये हैं खोज का काम अभी जारी है। इस बार भी मारे गए लोगों में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों की संख्या भी काफी है। अशोका ट्रैवल्स की यह बस (एचपी 66-1538) कुल्लू से आनी जा रही थी। हालांकि दुर्घटना के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। इस तरह के हादसों में अक्सर होने वाली लापरवाहियों की ओर एक बार फिर स्पष्ट संकेत मिला है इस हादसे से। आरम्भिक पूछताछ के दौरान पता चला है कि दुर्घटना के समय बस को चालक की जगह कोई और चला रहा था। गौरतलब है कि पहाड़ी इलाकों में अच्छे अच्छे जानकार अभ्यस्त ड्राईवर भी बेहद ध्यान से गाड़ी चलते हैं। लेकिन जब इस सीट पर स्टेयरिंग का नियन्त्रण किसी अन्जान, प्रशिक्षु या कम अभ्यस्त के हाथों में हो तो ऐसी दुर्घटना को कौन रोक सकता है?  
चालीस लोगों से जुड़े परिवारों में शोक व्याप्त करने वाले इस हादसे के सम्बन्ध में प्राप्त आरम्भिक जानकारी के अनुसार सवारियों से खचाखच भरी यह बस कुल्लू बस अड्डे से दोपहर सवा दो बजे के करीब रवाना हुई थी। इस में सवार लोग नहीं जानते थे कि वे मौत की आगोश में जा रहे हैं। करीब 18-20 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद ही यह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिस स्थान पर यह बस गिरी है वहां नदी में पानी काफी गहरा था। बस नदी में गिरते ही उल्टी हो गई। उल्टी पड़ी इस बस में फंसे लोगों को बाहर निकालने में भारी दिक्कत आई। केवल पांच-छह लोग ही किसी तरह से बस से बाहर निकल पाए। ज्यादातर लोगों की मौत पानी के भीतर दम घुटने की वजह से हुई। कुछ शव पानी के बहाव में बह गए वहीं अधिकतर शव आखिर तक बस के भीतर ही फंसे रहे। पानी में बहे शवों का पता लगाने के लिए प्रशासन ने ब्यास नदी में पंडोह बांध तक अलर्ट घोषित कर दिया है। शवों को खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं। पता चला है कि बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे। इस तरह ओवरलोड हुई बस सीधे उफनती ब्यास नदी में जा गिरी। जिस कारण कुछ लोगों को वहां पर मौजूद राफ्टिंग कंपनी के राफ्टरों ने बचा लिया। बचाव कार्य करीब दो घंटा देरी से शुरू हुआ।  गौरतलब है कि आनी में जिला स्तरीय मेले का आयोजन चल रहा है जिसके चलते आनी की ओर जाने वाले लोगों की संख्या अधिक थी। बताया जाता है कि बस में 50 से लेकर 60 लोग सवार थे। दुर्घटना में घायल धीरज नामक एक युवक ने मीडिया को बताया कि इस बार भी दुर्घटना के समय बस काफी तेज गति से चल रही थी। इस तरह के हादसों में तेज़ रफ्तारी अक्सर होती है। दुर्घटना के समय घटना स्थल पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार चालक काफी लापरवाही से बस चला रहा था। हालांकि जिस स्थान पर बस गिरी है वहां सड़क काफी चौड़ी है। यह भी कहा जा रहा है कि बस को चला रहा व्यक्ति शायद नशे में था और दुर्घटना के समय वह मोबाइल पर बात भी कर रहा था। सामने से आ रही एक गाड़ी को देखकर वह अचानक बस पर से नियंत्रण खो बैठा और बस नीचे जा गिरी। दुर्घटना के समय बस के चालक ने पहले ही छलांग मार दी। चालक अभी भी फरार है। पुलिस ने दुर्घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया है।  दुर्घटनाग्रस्त स्थल हालांकि मंडी जिले में है लेकिन कुल्लू से नजदीक होने के कारण कुल्लू  जिला प्रशासन ने राहत कार्यों को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दुर्घटना की सूचना मिलते ही कुल्लू के जिला उपायुक्त शरव नेगी बचाव दल के साथ दुर्घटनास्थल पर पहुंच गए। प्रशासन ने बस को निकालने के लिए सबसे पहले क्रेन का इंतजाम किया। दो क्रेन एनएचपीसी से मंगाई गई और एक क्रेन एक निजी ठेकेदार से ली गई। इस दौरान यहां नदी में रिवर राफ्टिंग का व्यवसाय करने वाले युवकों ने बस में फंसे लोगों को निकालने में प्रशासन की भारी मदद की।  
गौरतलब है कि दुर्घटनाग्रस्त हुई बस में दो पत्रकार भी सवार थे। इनमें से बंसी नामक एक पत्रकार जहां लापता है वहीं दिलीप नामक दूसरे पत्रकार को भी चोटें आई हैं। कुल्लू के जिला उपायुक्त शरव नेगी ने संपर्क साधे जाने पर मीडिया को बताया कि सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि तत्काल राहत के तौर पर सरकार की तरफ से घायलों और मृतकों के परिवार वालों को आवश्यक सहायता राशि भी उपलब्ध कराई गई है। अर्थात वह सब जरी है जो अक्सर हादसे के बाद होता है। 
इस दर्दनाक हादसे में 16 लोग घायल भी हुए हैं। जिनमें 6 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सड़क हादसे में घायल लोगों में लैहणू राम पुत्र लाल चंद (23) दोहरानाला, 41वर्षीय ध्यान सिंह पुत्र पोशू निवासी जवाड़, धीरज (25) पुत्र अशरफी लाल बरेली, ज्ञान चंद पुत्र सीता राम गांधीनगर, राहुल पुत्र दिले राम नगवाईं, नाथू राम जमोट खोखण, दलीप कांगड़ा आदि शामिल है। प्रशासन की ओर से घायलों को फौरी राहत के तौर पर पांच हजार व मृतकों के परिजनों को 15 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाई गई है। घायलों को निकलने में आईटीबीपी और होम गार्ड के जवानों ने भी सराहनीय कार्य किया। आस पास के लोग भी सहयोगी रहे. अब देखना है की इस हादसे के बाद भी कुछ ऐसे कदम उठाये जाते हैं या नहीं जो इन हादसों को रोक सकें।