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Sunday, September 27, 2020

पारिवारिक पेंशन पर अब तलाकशुदा बेटियों का भी हक

 26-सितम्बर-2020 18:24 IST

तलाकशुदा बेटियों के लिए नियमों में विशेष ढील: डॉ.जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली: 26 सितंबर 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

डॉ.जितेंद्र सिंह
पारिवारिक पेंशन पाने के लिए तलाकशुदा बेटियों के लिए नियमों में ढील दे दी गई है और एक बेटी अब पारिवारिक पेंशन पाने की हकदार होगी, भले ही तलाक अंतिम रूप से हुआ न रहा हो लेकिन तलाक की याचिका उसके मृत माता पिता कर्मचारी /पेंशनभोगी के जीवन काल के दौरान ही उसके द्वारा दायर कर दी गई थी।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा लाए गए कुछ महत्वपूर्ण सुधारों के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा, एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहले के नियमों में किसी तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन के भुगतान का प्रावधान तभी था जब तलाक उसके मृत माता पिता कर्मचारी /पेंशनभोगी या उसकी पत्नी/पति के जीवन काल के दौरान ही हो गया रहा हो। नया परिपत्र न केवल पेंशन प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के जीवन में सुगमता लाएगा बल्कि तलाकशुदा बेटियों के लिए समाज में सम्मानजनक एवं समान अधिकार भी सुनिश्चित करेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी दिव्यांग शिशु या उसके भाई बहन को पारिवारिक पेंशन की मंजूरी के लिए भी आदेश जारी कर दिए गए हैं भले ही दिव्यांग प्रमाणपत्र पेंशनभोगी माता पिता की मृत्यु के बाद प्रस्तुत किया गया हो लेकिन विकलांगता माता पिता की मृत्यु से पहले ही हो गई हो। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, दिव्यांग पेंशनभोगियों के जीवन में सुगमता लाने के लिए सहायक के लिए परिचारक भत्ता भी 4,500 रुपये प्रति महीने से बढ़ा कर 6,700 रुपये कर दिया गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशन विभाग द्वारा डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र के संबंध में सर्वाधिक उल्लेखनीय पहल की गई है। ऐसे वरिष्ठ नागरिकों के सामने आने वाली समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, जो सेवानिवृत्ति के बाद अपने बच्चों के साथ विदेशों में चले गए हैं और वहीं बस गए हैं, उनके लिए जीवन प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने एवं पारिवारिक पेंशन आरंभ करने पर समेकित निर्देशों पर परिपत्र लाया गया है जिसके द्वारा संबंधित बैंक की विदेश स्थित शाखाओं तथा भारतीय दूतावास/वाणिज्य दूतावास/उच्चायोग को वहीं जीवन प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने एवं पारिवारिक पेंशन आरंभ करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

डॉ.जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसी के साथ-साथ सभी पेंशन संवितरण बैंकों को उन पेंशनभोगियों के लिए उनके दरवाजे पर ही जीवन प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं जो बैंक जा पाने में असमर्थ हैं।


Wednesday, June 08, 2016

अहसास चेरिटबल ऑर्गनिज़ेशन ने भी बनाई ग्रैफ़ायटी

"बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ" का दिया संदेश
लुधियाना: 7 जून 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
म्यूनिसिपल कॉर्परेशन द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत लुधियाना को ख़ूबसूरत बनाने के लिए जो दीवारों और पिलर्ज़ पर ग्रैफ़ायटी बनाई जा रही है, उसमें अहसास चेरिटबल ऑर्गनिज़ेशन ने अपना योगदान डालते हुए रेल्वे स्टेशन के सामने दो पिलर्ज़ पर "बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ "का संदेश देते हुए पेंटिंगस बनाई। आज अडिशनल कमिशनर देवेन्द्र सिंह ने पेंटिंग स्थान का दौरा किया और अह्सास संगठन के प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा की इस से जहाँ लुधियाना को ख़ूबसूरत बनाने में योगदान मिलेगा वहाँ एक अच्छा संदेश भी लोगों तक जाएगा। अहसास की प्रेज़िडेंट संगीता भंडारी ने कहा कि बेटीया हर क्षेत्र में बेटों से आगे निकल रही है। ज़रूरत है उन्हें एक मौक़ा देने की और लोगों की मानसिकता बदलने की। उन्होंने कहा कि अहसास संस्था पिछले 6 वर्ष से बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के लिए काम कर है और हमे ख़ुशी है कि लुधियाना को ख़ूबसूरत बनाने में हम योगदान दे पाए और इसके द्वारा लोगों तक बेटी बचाओ, बेटी पढाओ का संदेश लोगों तक पहुँचा पाए, इसके लिए हम कमिशनर घनश्याम थोरी और अडिशनल कमिशनर देवेन्द्र सिंह का धन्यवाद करते है जिन्होंने हमें ये अवसर प्रदान किया। इस अवसर पर चाहत भंडारी, स्वाति भंडारी, रजनीश धिंगान, मीनाक्षी सूद, सुनैना जैन, रेणु नारंग, ममता तलवार, रूबी अनेजा, रमेश तलवार, रेणु आहूजा, विनीत मोंगिया, नितिन वतरा, गोल्डी सभरवाल आदि भी हाज़िर थे। 

Sunday, January 26, 2014

समाज में शर्मनाक गिरावट:बाप बेटी से करता रहा बलात्कार

हैवानियत की सभी सीमाएं पार कर  चाकू की नोक पर जारी रहा कुकर्म 
पुलिस से की शिकायत,फिर भी नहीं हुई कार्यवाई 
लुधियाना, 25 जनवरी (सतपाल सोनी//वीकेजी//पंजाब स्क्रीन):
कारण कुछ भी रहे हों पर समाज की गिरावट है।  ताज़ा मामला सामने आया है पिता की और से बेटी के साथ कथित दुष्कर्म का। हवस का शिकार बनी 25 वर्षीय महिला दो बच्चों की मां भी है। उसने लुधियाना पुलिस से गुहार लगाई है कि उसके पिता को गिरफ्तार किया जाए वर्ण वह उसे जान से मार डालेगा। उसने साफ़ कहा कि उसके पिता ने सभी मानवीय रिश्तों को भूल कर हैवानियत कि सभी हदें पार कर दीं। पीड़िता के मुताबिक उसके पिता ने इस बेहद नाज़ुक रिश्ते को तार-तार करते हुए कथित रूप से कई महीनों तक उसके साथ बलात्कार किया।
पीडि़ता जो कि आजकल किरायेदार के तौर पर ताजपुर रोड संजय गांधी कालोनी, लुधियाना में रह रही है, ने अपनी दर्द भरी कहानी मीडिया को सुनाते हुए कहा कि उसकी शादी अप्रैल 2008 में गार्डन कालोनी मोरिंडा निवासी रणजीत सिंह से हुई थी, परन्तु पति से अक्सर झगड़ा रहने के कारण वह जनवरी 2013 में अपने माता-पिता के पास अपने दोनों बच्चों सहित लुधियाना आ गई। उसके पिता राजिंद्र कुमार ने उसे अपने निवास के पास ही एक कमरा किराए पर ले दिया और वह वहां रहने लगी। इससे पहले कि उसकी समस्या का कोई हल होता उस पर मुसीबतों का एक नया पहाड़ टूट पड़ा। तीन महीने बाद उसकी मां सुशीला देवी की मौत हो गई। मां की मौत के बाद उसके साथ शुरू हुआ दरिंदगी का यह शर्मनाक सिलसिला जिसे वह बताती भी तो किसे? कौन सुनता? कौन मानता?  उसने आगे बताया कि 2 जुलाई 2013 की रात को जब वह अपने बच्चों के साथ सो रही थी तो उसका पिता उसके पास आया और शैतान बनकर उसके साथ चाकू की नोक पर कथित रूप से बलात्कार किया और धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो वह उसे जान से मार डालेगा।
पीडि़ता ने आगे बताया कि इसके बाद उसके पिता ने कई बार उसे अपनी हैवानियत का शिकार बनाया। बाद में मैं इतना डर गई कि मुझे अपनी मौसी के यहां न्यू शिमलापुरी में शरण लेनी पड़ी। इसके बाद जब सभी रिश्तेदारों को मेरे पिता की कथित करतूतों का पता चला तो पिछले वर्ष 23 दिसम्बर को सभी ने मिलकर थाना डिवीजन नं. 7 में प्राथमिक रपट दर्ज करवाई, परन्तु अभी तक आरोपी के विरुद्ध पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है, बल्कि मेरा पिता, मेरी छोटी बहन और अन्य रिश्तेदार मुझे जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। ऐसे वातावरण में मेरा और मेरे बच्चों का जीना दूभर हो चुका है। उसने पुलिस आयुक्त से गुहार लगाई है कि उसे उसके पिता से बचाया जाये और उसे तुरन्त गिरफ्तार किया जाये।
कानून अपना काम करेगा ही लेकिन समाज को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी। आखिर सोचना होगा कि क्यूँ बढ़ रहे हैं ऐसे मामले? क्यूँ भूल रहे हैं रिश्ते नाते और संबंध? क्यूँ बढ़ रहा है महिलायों के साथ एक वस्तु जैसा व्यवहार? क्या होता है ऐसे मामलों के पीछे का मनोविज्ञान? इसके सभी पहलुयों पर आपके विचारों कि इंतज़ार बनी रहेगी।  अपने विचार यूनिकोड में इस पते पर प्रेषित करें : medialink32@gmail.com हम आपके विचारों को आपके नाम के साथ प्रकाशित करेंगे।  यदि आप चाहेंगे तो आपका नाम गोपनीय भी रखा जायेगा।


Sunday, January 12, 2014

हेल्पिंग हेंड्स क्लब (रजि: ) ने मनाई “धीयां दी लोहड़ी”

मुख्य उद्देश्य समाज को एक नयी सोच देना   Sun, Jan 12, 2014 at 2:25 PM
लुधियाना: 12 जनवरी 2014: (सतपाल सोनी/पंजाब स्क्रीन):
समाज सेवा में अग्रणी संस्था हेल्पिंग हेंड्स क्लब (रजि: ) के फ्री कम्प्यूटर शिक्षा केंद्र में लड़कियों के लिए “धीयां दी लोहड़ी” मनाई गई, हेल्पिंग हेंड्स क्लब के राष्ट्रीय प्रधान रमण गोयल और राष्ट्रीय मुख्य सलाहकार अवनीश मित्तल ने बताया कि इस लोहड़ी को  मनाने का मुख्य उद्देश्य समाज को एक नयी सोच देना है , लड़कों के पैदा होने पर हर कोई ख़ुशी मनाता है , और लड़कियों के लिए इस त्योहार पर ख़ुशी के कोई मायने नहीं रखते, आगे बताते हुए दीपक जैन, निरंजन मित्तल  पूजा कक्कड़ और ज्योति डंग ने बताया कि आज के समाज में अगर लड़कियां सब क्षेत्रों में लड़कों से आगे है तो उन्हें समाज की ऐसी धारणाओं से निकल कर ख़ुशी मानाने का पूरा हक़ है , संस्था की तरफ से राकेश सिंगला, रशिम कालड़ा ,वरुण जैन ने बताया की कार्यक्रम के दौरान बच्चों की तरफ से साहितिक और समाजिक कार्यक्रम किया गया  ,  जिससे लोगों को त्योहार के साथ जुड़ने की प्रेरणा मिली , इसके बाद दीप प्रज्वलन के साथ नाच कर लोहड़ी जलने की पवित्र रसम मनाई गयी , इसमें विजेता बच्चों को तथा “सिंगल गर्ल चाइल्ड “ बच्चों की माताओ को नीरज वर्मा और प्रवीन मल्होत्रा के द्वारा  पुरस्कृत किया गया , इस मोके पर कम्प्यूटर शिक्षा केंद्र के बैच के विधार्थी कीर्ति , शिवानी , पूजा , अनिकेत , याशिका, ज्योति,वंदना ,कोमल, ऋतू, सेजल, अमरजीत, श्रुति की पूरी टीम ने सारे समाज को लोहड़ी  की बधाई देते हुए , समाज में  लड़कियों के लिए लोहड़ी मनाये जाने की अपील की |

Saturday, August 24, 2013

मुंबईगैंगरेप:फिर निकाला पहरावे का कसूर

मुंबई गैंगरेप पर स्पा नेता नरेश अग्रवाल का बेहूदा बयान
अकाली सांसद हरसिमरित कौर बादल ने डट कर किया एतराज़ 
नई दिल्ली: सत्ता मिलते ही समाज से कट कर आम लोगों से दूर किसी ऊंची  हवा के महल में रहने वाले नेता देश की किसी गंभीर समस्या पर भी कोई बेतुका ब्यान  न दें यह  तो अब सम्भव ही  नहीं लगता।  इस तथ्य को उजागर करता एक नया ब्यान सामने आया है सपा के नेता नरेश अग्रवाल का। मुंबई में गैंगरेप का शिकार हुई एक महिला फोटो जर्नलिस्ट के साथ हमदर्दी  की बजाये श्री अग्रवाल कह रहे हैं यह  सब  लडकी के पहरावे के कारण हुआ। गौरतलब है कि गुरुवार को मुंबई में एक फोटो जर्नलिस्ट के साथ हुई रेप के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। सड़क से संसद तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है लेकिन हमारे नेता लोग मुजरिमों को पहरावे से पैदा हुई उत्तेजना का शिकार हुए बेचारे मासूम लोग साबित करने में लगे हैं। 
सपा नेता नरेश अग्रवाल ने शनिवार को कहा कि सिर्फ कानून बनाने से रेप पर लगाम नहीं लगेगी, बल्कि लड़कियों के रहन सहन और पहनावे पर ज्यादा ध्यान देना होगा। यही रेप की बढ़ती वारदातों का मुख्य कारण है। इस बयान को सुन कर लगता है कि अगर देश में सपा की सत्ता आई तो यहां भी कोई बुर्के जैसा सिस्टम लागू हो जायेगा और ये लोग देश में कुछ इसी तरह का समाजवाद लायेंगे। क्या ये लोग बतायेंगे कि दुष्कर्म का शिकार होने वाली नन्ही नन्ही बच्चियां किस पहरावे के कारण इस दरिंदगी का शिकार होती हैं। देश के समाज की बीमार हो रही मानसिकता के आरोप पहरावे पर लगाने से 
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं हुआ है जब किसी नेता ने इस तरह का बयान देकर लडकी और उसके परिवार के जख्मों पर नमक छिड़का हो। इससे पहले भी जब जब देश में ऐसी घिनौनी घटना घटी है, कुछ करें न करें लेकिन नेता अपनी बयानबाजी से कभी पीछे नहीं हटते हैं। दिल्ली गैंगरेप मामले में में भी प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने कुछ ऐसी ही टिप्पणी कर डाली थी जिसकी व्यापक स्तर पर चौतरफा निंदा हुई थी। इसी तरह से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पार्क स्ट्रीट रेप मामले पर कुछ अजीब बात ही कह डाली थी। आरएसएस नेता ने भी लड़कियों के साथ बढ़ती रेप की वारदातों के लिए उनके सही समय पर घर न आना, उनकी लाइफ स्टाइल पर सवाल उठाए थे। यही नहीं खाप पंचायत ने इस तरह के मामले को लेकर कहा था कि महिलाओं को मर्यादा में रहना चाहिए। आपको याद होगा कि लडकियों के पहरावे को निशाना बनाने वाले रेश अग्रवाल अपने सियासी कैरियर में खुद कितने सियासी लिबास बदल चुके हैं। डेट लाईन लखनऊ से छपी खबरें लोग इतनी जल्द भूलें भी नहीं होगें। लोग जानते हैं कि दिसम्बर-2011 के आखिरी दिनों में नरेश अग्रवाल अपने बेटे सहित बसपा से निकाल दिए गए थे। बसपा से निष्कासित होने के बाद वह खामोश नहीं बैठे बल्कि अपने पुत्र नितिन अग्रवाल के साथ बसपा से नाता तोड़ कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। इस मकसद के उन्होंने बस सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से एक ही भेंट और मुलाकात को सफल बना लिया। इस मुलाकात के  तुरंत बाद ही उनकी वापसी को हरी झंडी मिल गयी। लोगों को यह भी याद होगा कि यह वही नरेश अग्रवाल हैं जिन्होंने सन 1997 में कांग्रेस से अलग होकर लोकतांत्रिक कांग्रेस बना ली थी और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी हुए थे। यह उनकी राजनीतिक कलाबाजी का ही  सकता है कि फिर सन 2002 का चुनाव उन्होंने सपा के टिकट पर लड़ा और मुलायम सिंह यादव की नेतृत्व वाली सरकार में भी मंत्री रहे। सत्ता मोह का कमाल  कि वह जहां भी रहे उन्हें मंत्री पद मिला। सन 2007 के चुनाव में भी वह सपा के टिकट से जीते लेकिन बाद में वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर बसपा में शामिल हो गए। बसपा ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाने के साथ राज्यसभा का सदस्य भी बना दिया उनकी विधानसभा वाली सीट पर 2008 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र नितिन अग्रवाल बसपा से विधायक हुए थे। बसपा ने उनके पुत्र को 2012 के के लिए भी उम्मीदवार घोषित किया पर शनिवार को टिकट काट दिया गया। इसके बाद नरेश अग्रवाल ने सपा और कांग्रेस में जगह तलाशनी शुरू की और अन्तत: सपा में वापसी के लिए मुलायम सिंह को मनाने में सफल रहे। सत्ता और सियासत के इतने रंग देखने वाले देश में महिलायों के खिलाफ हो रहे जुर्मों की असल जद क्यूं नहीं देख पा रहे।  
इसी बीच पंजाब की एक दलेर अकाली महिला नेता और सांसद हरसिमरित कौर बादल ने नरेश अग्रवाल के इस ब्यान पर सख्त एतराज़ जताया है और जवाबी सवाल हुए पूछा है कि क्या सलवार कमीज़ पहनने वाली औरतों के बलात्कार  फिर बिलकुल ही नन्ही बच्चियों से दुष्कर्म नहीं होता?उन्होंने तथ्य और आंकड़े देते हुए कहा कि देश में महिलायों के साथ ज्यादतियों के एक  पेंडिंग पड़े हैं--क्या इन एक लाख औरतों का पहनावा गलत था? उन्होंने गंभीर स्वर में कहा कि इस तरह की दकियानूसी बातें करने की बजाये इस जुर्म के लिए ज़िम्मेदार तत्वों के खिलाफ एक्शन लेने की मांग होनी चाहिए। 
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Monday, August 19, 2013

ऋषि नगर की लडकी से छेड़छाड़ का मामला गर्माया

लोगों का दबाव बनने पर घटना के 41 दिनों बाद दर्ज हुआ मामला

देश के अलग अलग हिस्सों में लडकियों के खिलाफ समाज विरोधी तत्वों की बढती हुई हरकतों के बावजूद पुलिस अपनी कार्यशाली को सुधरने का नाम नहीं ले रही। इस का ताज़ा मामला देखने को मिला लुधियाना में जहाँ ऋषि नगर की एक कालेज छात्र मोनिका (काल्पनिक नाम) के साथ छेड़छाड़ करने व अपशब्द बोलने के मामले में 41 दिनों के बाद मामला दर्ज किया।  यह सब भी तब सम्भव हुआ जब महिला संगठनों, राजनीतिक दलों और समाजिक कार्यकर्तायों ने इस मकसद के लिए एकजुट हो कर अपना दबाव बनाया। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर छात्रा और उसका परिवार पहले दिन से ही रोष व्यक्त कर रहे हैं पर पुलिस करवाई करने की बजाये एक तरह से आरोपियों का साथ देते चल रही थी। जब पीडिती लडकी के परिवार ने इस सारे मामले की सूचना पुलिस को दी थी तो पुलिस ने लडकी के मां-बाप को ही ठाणे बंद कर दिया और मनमर्जी के समझौते का दबाव बनाया। गौर तलब है की छेड़छाड़ करने वाले आरोपी छेड़छाड़ के बाद लडकी के घर में घुस कर पूरे परिवार की पिटाई भी कर गए थे। निराश करने वाले इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद लडकी कानून में आस्था रखते हुए डटी रही और कई समाजिक संगठन उसके साथ आ मिले और आखिर 41 दिनों के बाद मामला दर्ज हुआ। मामला तो दर्ज हुआ पर इस पुलसिया ढंग तरीकों से आहत लडकी का दिल पुलिस से टूट गया यह बात लडकी ने मीडिया को भी बताई। 

           लडकी ने आहत पर दृढ़ स्वर में मीडिया के सामने अपना रोष भी व्यक्त किया है। छात्रा ने आरोप लगाया कि बीते दिनों कुछ लोग नशे की हालत में उसके घर आ गए थे। उसके बाद उन्होंने घर में घुसकर उसके के साथ छेड़छाड़ की और उसके माता-पिता को पीटा भी। जिसके बाद छात्रा ने इसकी शिकायत पीएयू थाना पुलिस से कर दी। लेकिन पुलिस ने छात्रा की शिकायत पर मामला दर्ज करने की बजाए सिर्फ मारपीट का मामला दर्ज कर दिया है। ऋषि नगर स्थित चांद कालोनी निवासी मोनिका (काल्पनिक नाम) बीएससी की छात्रा है। उसने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने 9 जुलाई को उसके घर में घुसकर उसके साथ छेड़छाड़ की और उसके बाद उसके माता-पिता के साथ मारपीट भी की। रेखा ने इसकी शिकायत पुलिस से कर दी। मोनिका ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी माता की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कर दिया, लेकिन पुलिस ने उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। पीडिता ने मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इस मामले के दर्ज होने से इलाका निवासियों में एक बार फिर यह आशा बंधी है की अगर लोग एकजुट हो जायें तो जीत दूर नहीं रहती। 
         ठंडे बसते में फेंक दिए गए इस मामले को भी दोबारा खुलवाने में भाकपा नेता डाक्टर अरुण मित्रा, कामरेड गुरनाम सिद्धु, कामरेड रणधीर सिंह, पंजाब स्त्री सभा की नेता मैडम गुरुचरण कौर कोचर और जीत कुमारी, वर्किंग महिला फोरम की आयोजक डाक्टर नरजीत कौर और कई अन्य समाजिक नेतायों ने आगे बढ़ कर मोर्चा सम्भाला तब कहीं ४१ दिनों के बाद मामला दर्ज हुआ।
अब देखना है कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ क्या एक्शन लेती है?

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