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Thursday, December 26, 2013

इश्क़ में 50,000 की FD एक सराहनीय शर्त

Thu, Dec 26, 2013 at 12:08 AM
यूपी हाई कोर्ट का सरकार को निर्देश:पुरुषों को करनी होगी FD  बोधिसत्व कस्तूरिया 
आगरा: उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट इलाहबाद ने सरकार को निर्देश दिया है कि लव-मैरिज करने वाले जोडो मे पुरुष को रु० 50,000/- (प्चास हज़ार मात्र) स्त्री के नाम 3 वर्ष की एफ़०डी० करनी पडेगी ताकि उसका जीवन सुरछित रहे!  यदि 3 वर्ष तक स्त्री की सही तरीके से देख भाल करता है तो रक्म वापिस कर दी जायेगी, अन्यथा उत्पीड़न  अथवा तलाक के बाद स्त्री उसका उपयोग कर सकेगी ! 
यह एक सराहनीय कदम एवम चिरस्थाई समाधान है दहेज लोलुपता  और तलाक की बढती हुई प्रवॄत्ति पर अंकुश लगाने के लिये एवम उन मनचले लड्कों पर अंकुश लगाने का भी काम करेगा जो दो दिन मोबाइल या इन्टर्नैट पर चैटिग के बाद ,वासना के वशीभूत लड्कियों को बहला-फ़ुसला कर घर वालो की रज़ामन्दी के बगैर शादी कर लेते है ! जब 1-2  साल मे भूत उतर जाता है और परिवार और समाज के सहयोग की आवश्यकता होती है तोउत्पीड़न शुरू कर देते है!
किसी का हस्तछेप और मध्यस्था ना होने के कारण ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि तलाक ही एक मात्र समाधान रह जाता है और शादी जैसे पवित्र बन्धन का असतित्व ही समाप्त हो जाता है! आज आगरा जैसे छोटे शहरों मे भी प्रतिदिन तलाक के 5 नये मुकदमे दायर होते है मैट्रोज़ मे स्थिति अत्यन्त भयावह रूप ले चुकी है जिसकी परिणति कभी-कभी आत्म हत्या के रूप मे होती है! अतः मेरे विचार से केन्द्र सरकार को इस पर गम्भीरता से चिन्तन कर शीघ्रातिशीघ्र कानून लाना चाहिये !

बोधिसत्व कस्तूरिया  पेशे से वकील हैं  उनका पता है-202 नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा-282007   

Tuesday, August 27, 2013

मेरा गोविन्दा....//बोधिसत्व कस्तूरिया

जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर 
मित्र बोधिसत्व कस्तूरिया की एक काव्य रचना 
मेरा छोटा सा प्यारा सा लाला,
मेरा गोविन्दा श्याम  गोपाला !!
बॄज मण्डल मे बाजे -बधाई,
इसकी प्यारी छवि सबको भाई,
नाचे बॄज के गोपी औ ग्वाला !!मेरा गोविन्दा....
जसुमति का है ये तो कन्हाई,
इसको नज़र किसी ने लगाई,
कर डारूंगी उसका मुँह काला !!मेरा गोविन्दा......
नन्द बाबा का है ये खिलोना,
मेरा छौना है सबसे सलोना,
बडे नाज़ों से इसको है पाला !!मेरा गोविन्दा...
..


शायर से डाक सम्पर्क:बोधिसत्व कस्तूरिया 202 नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा 282007 

Monday, August 15, 2011

संविधान को तज ,सबने की मनमानी.....!


६५ वर्षों का इतिहास बन गया पानी,
संविधान को तज ,सबने की मनमानी!
रो रहा आज गाँधी ,सुभाष,टैगोर,तिलक,
कहाँ गये अब सब नेता जो देश समाज
पर मिट कर कहलाते थे सेवक-बलिदानी !
अपना घर द्वार भारत माता के चरणो मे
रख कर बनते थे वीर सपूत,स्वाभिमानी !
उन्हे देख डरते थे जनरल डायर कायर,
अँगरेजो को याद आती थी अपनी नानी !
अपनो ने,अपनो की खातिर प्रजातंत्र की,
सुफ़ेद चादर ,मैली करने की जब ठानी !
तब   भ्रष्टाचार,मिटाने की अन्ना ने की,
शुरूआत  एक  नई बिगुल बजाने की !
स्वतंत्रता का अर्थ नही समझे अब तक,
क्या मतलब है ऐसा दिवस  मनाने की ?
कर्तव्यों को दर किनार कर क्या सूझी
सबको अपना घर भरने और भराने की ?
देर न हो जल्दी जागो,सबको त्यागो,
मँहगी कहीं नही पड जाये, उन्की कुरबानी !
बोधिसत्व कतूरिया 
२०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा, 
आगरा २८२००७