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Friday, July 03, 2020

कोरोना की आड़ में किया गया मज़दूर अधिकारों का हनन

3rd July  2020 at 1:35 PM
 कारखाना मज़दूर यूनियन ने भी किये रोष प्रदर्शन 
लुधियाना:03 जुलाई 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
आज विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा देशव्यापी रोष-प्रदर्शनों के आह्वान के तहत कारख़ाना मज़दूर यूनियन द्वारा लुधियाना के फेस 4, फोकल प्‍वाइंट में रोष-प्रदर्शन किया गया। धरना प्रदर्शन के साथ साथ इलाक़े में रोष मार्च भी किया गया।  
वक्ताओं ने केंद्र की मोदी सरकार और पंजाब समेत विभिन्न राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया। वक्ताओं ने केंद्र और राज्यों सरकारों पर गंभीर आरोप लगाया कि कोरोना के बहाने पूँजीपतियों के पक्ष में मज़दूर वर्ग के अधिकारों का हनन तेज़ी से तेज़ किया गया। इन सरकारों ने लोगों को कोरोना में उलझा कर उनका शोषण किया है। 
इन रोष प्रदर्शनों के दौरान बुलंद आवाज़ में मांग की गई कि श्रम क़ानूनों में संशोधनों को रद्द करने, श्रम अधिकार लागू कराने, श्रम क़ानूनों का उल्लंघन करने वाले पूँजीपतियों को सख़्त सज़ाएं देने, लॉकडाउन के कारण मज़दूरों के हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा, छंटनियों पर रोक लगाने, बंद और मंदी के समय की पूरी तनख़्वाह देने, बेरोज़गारों को बेरोज़गारी भत्ता देने, सभी बीमारियों के मुफ़्त इलाज, कच्चे स्वास्थ्य कर्मियों को पक्का करने, सभी स्वास्थ्य सुविधाओं के सरकारीकरण, सभी मज़दूरों को मुफ़्त अनाज देने, जन-वितरण प्रणाली का प्रसार करने, कोरोना के बहाने पूँजीपतियों को राहत पैकेज के नाम पर मेहनतकश जनता का पैसा लुटाना बंद करने और उन पर भारी टेक्स लगाकर मज़दूरों-मेहनतकशों को सुविधाएँ देने, महँगाई पर लगाम लगाने के लिए सचमुच के गंभीर कदम उठाये जाएं। 
वक्ताओं ने केंद्र की मोदी हुकूमत को फासीवादी हुकूमत करार देते हुए जनवादी अधिकारों का हनन बंद करने, झूठे पुलिस मामलों में जेलों में बंद किए गए जनवादी कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों को तुरंत रिहा करने, नाजायज गिरफ़्तारियाँ बंद करने की माँग भी की। प्रदर्शन को यूनियन के प्रधान लखविंदर के अलावा यूनियन नेताओं जसमीत, विमला, नौजवान भारत सभा के नवजोत आदि ने संबोधित किया।

Monday, May 18, 2020

22 मई को पंजाब में भी रोष प्रदर्शन करने का ऐलान

Monday: 18th May 2020:4:26 PM
16 जन संगठनों द्वारा देश स्तरीय आह्वान पर फैसला 
चण्डीगढ़:18 मई 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::  
ट्रेड यूनियनों द्वारा 22 मई को देश भर में रोष प्रदर्शन करने के आह्वान के तहत पंजाब के 16 मज़दूर-मुलाज़िम, किसान, नौजवान, विद्यार्थी संगठनों ने भी राज्य भर में रोष प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह जानकारी आज मज़दूर नेताओं राजविन्दर सिंह, लछमण सिंह सेवेवाला, जगरूप सिंह, प्रमोद कुमार और किसान नेताओं जोगिन्द्र सिंह उगराहाँ, कंवलप्रीत सिंह पन्नू द्वारा जारी सांझे प्रेस विज्ञप्ति में दी गई। नेताओं ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार तथा विभिन्न राज्य सरकारों ने कोरोना संकट को बहाना बना कर मज़दूर वर्ग पर तीखा राजनीतिक-आर्थिक-सामाजिक हमला किया है। विभिन्न राज्यों में 8 घंटों की जगह 12 घंटे कार्यदिवस लागू करने समेत अन्य क़ानूनी श्रम अधिकारों का हनन किया गया है और किया जा रहा है। पंजाब में भी बारह घंटे कार्यदिवस लागू करने तैयारी है। भाजपा की उत्तर-प्रदेश सरकार ने तो लगभग सभी श्रम कानून ख़त्म करने का ऐलान कर दिया है। ज़रूरत तो इसकी थी कि कमज़ोर श्रम कानूनों को मज़दूरों के पक्ष में मज़बूत बनाया जाये परन्तु सरकारें न सिर्फ़ इनको ओर कमज़ोर बनाने पर तुलीं थी बल्कि अब तो ख़त्म ही कर रही हैं। यह प्रक्रिया पहले ही जारी थी परन्तु कोरोना संकट के बहाने और लॉकडाउन का फ़ायदा उठा कर इस मज़दूर विरोधी और देशी-विदेशी पूँजीवादी एजंडे को अंजाम दिया रहा है। इस तरह सरकारें पूँजीपतियों को मज़दूरों से जैसे मर्ज़ी लूट-खसोट और अन्य बेइन्साफ़ी करने की पूरी छुट दे रही हैं।
          नेताओं ने कहा सरकारों ने कोरोना संकट के हल के लिए उचित कदम उठाने की जगह इसको और भी गंभीर बनाया है। उन्होंने दोष लगाया कि हुकूमत द्वारा कोरोना से बचाव के बहाने जनता पर थोपे गए ग़ैर-जनवादी और दमनकारी लॉकडाउन के ज़रिए मज़दूरों-मेहनतकशों को भुखमरी, शारीरक कमज़ोरी, कोरोना और अन्य बीमारियों से नुकसान का ख़तरा बढ़ाने, पैदल व साईकिलों के ज़रिए लंबे सफरों, पुलिस दमन, नाजायज गिरफ़्तारियों, हादसों, आत्महत्यों आदि मुसीबतों के मुँह में धकेलने की आपराधिक भूमिका निभाई गई है जिसके लंबे समय तक भयानक नतीजे मज़दूरों तथा अन्य जनता को भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याएँ दूर करने की जगह सरकारें ‘‘देश’’ तथा ‘‘राज्य ’’ को कोरोना और लॉकडाउन से हुए नुकसान का बहाना बना कर आर्थिक पैकेज के नाम पर पूँजीपतियों को सरकारी ख़ज़ाना लुटा रही हैं और बिजली क्षेत्र समेत तमाम जन-सेवाओं के उपक्रमों के मुकम्मल निजीकरण के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। सरकारें जनता पर नए टेक्स थोपने की तैयारी कर रही हैं। खेती को राहत के नाम पर खेती उपभोग उत्पाद के उद्योगपतियों को लुटाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ़ जनता को कोरोना संकट, लॉकडाउन और अन्य भयानक मुसीबतों के मुँह में धकेल कर बड़ा राजनीतिक-आर्थिक हमला किया जा रहा है। संगठनों ने मज़दूर वर्ग, अन्य सभी मेहनतकशों तथा जनवादी लोगों को हुक्मरानों के इस हमले के ख़िलाफ़ ज़ोरदार संघर्ष और 22 मई के प्रदर्शनों में सावधानियाँ रखते हुए शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
इन 16 संगठनों में टेक्स्टाल-हौज़री कामगार यूनियन, पॉवर कॉम एंड ट्रांसको ठेका मुलाज़िम यूनियन, पंजाब खेत मज़दूर यूनियन, टेक्निकल सर्विसज़ यूनियन, भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहाँ), किसान संघर्ष कमेटी पंजाब, मोल्डर एंड स्टील वर्कर्ज़ यूनियन, जल स्पलाई एवं सेनिटेशन कंट्रैक्ट वर्कर्ज़ यूनियन पंजाब (रजि. नं 31), नौजवान भारत सभा (ललकार), पी.एस.यू. (शहीद रंधावा), नौजवान भारत सभा, पी.एस.यू. (ललकार), कारख़ाना मज़दूर यूनियन, गुरू हरगोबिंद थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत ठेका मुलाज़िम यूनियन आज़ाद, ठेका मुलाज़िम संघर्ष कमेटी पॉवर कॉम (ज़ोन बठिंडा) और पंजाब रोडवेज़ /पनबस कंट्रैक्ट वर्कर्ज़ यूनियन शामिल हैं।

Wednesday, November 20, 2019

हम्बड़ां कत्ल व दमन कांड के खिलाफ़ रोष प्रदर्शन कल

नाबालिग लवकुश के हत्यारे की दफा 302 के तहत हो गिरफतारी
संघर्षशील संगठनों के नेताओं पर झूठे केस रद्द करके उन्हें रिहा करो 

लुधियाना20 नवंबर 2019: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
हम्बड़ां कत्ल व दमन काण्ड व लुधियाना पुलिस के खिलाफ़ लुधियाना के दर्जन से अधिक जनवादी जनसंगठनों द्वारा गठित संघर्ष कमेटी ने जोरदार संघर्ष छेड़ दिया है। संघर्ष कमेटी ने 21 नवम्बर को हम्बड़ां में जोरदार प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संघर्ष कमेटी का यह भी ऐलान है कि अगर इंसाफ न मिला तो संघर्ष और तीखा किया जाएगा। संघर्ष कमेटी की माँग है कि संघर्ष समिति की माँग है कि हम्बड़ां की मैंसर पलाईवुड फैक्ट्री में काम करने वाले 15 वर्षीय मज़दूर लवकुश की वहशी मारपीट करके कत्ल करन वाले ठेकेदार के विरुद्ध धारा 302 के अंतर्गत पर्चा दर्ज किया जाये, उसको तुरंत गिरफ़्तार किया जाये, पीडित परिवार को इंसाफ़ दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे जनवादी जनसंगठनों के नेताओं पर दर्ज किया झूठा पर्चा रद्द किया जाये और उन्हें जेल से रिहा किया जाये। संघर्ष समिति की माँग है कि हम्बड़ां कत्ल कांड के दोषी के साथ मिलीभुगत करने वाले पुलिस अफसरों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्यवाही की जाये और लोगों का एकजुट रोष व्यक्त करने का हक बहाल किया जाये।

कुल 10 जन-नेताओं और कार्यकर्ताओं को झूठा पर्चा दर्ज करके जेल भेजा गया है। इन में पेंडू मज़दूर यूनियन (मशाल) के नेता /कार्यकर्ता सुखदेव भून्दड़ी, मेजर भैनी, चिमल सिंह, भाकियू (एकता-डकोंदा) व पेंडू मज़दूर यूनियन (मशाल) के नेता के सुखविन्दर हम्बड़ां, टेक्स्टाईल हौज़री कामगार यूनियन के नेता /कार्यकर्ता राजविन्दर, गुरदीप, जगदीश, नौजवान भारत सभा के नेता /कार्यकर्ता गुरविन्दर, शलेंदर, कारख़ाना मज़दूर यूनियन के नेता जसमीत शामिल हैं।
गौरतलब है कि मैंसर पलाईवुड फैक्ट्री हम्बड़ां में झारखंड से आए लवकुश नाम के 15 साला बच्चे से ठेकेदार रघबीर उपरोक्त फैक्ट्री अंदर लेबर का काम कराता था। तारीख़ 7नवंबर को फैक्ट्री अंदर काम दौरान रघबीर ने बच्चे लवकुश की बुरी तरह मारपीट की और उसके सिर में डंडे मारे। उसकी पी.जी.आई. में मौत हो गई। इसके बावजूद भी पुलिस दोषी ठेकेदार के ख़िलाफ़ पर्चा दर्ज नहीं कर रही थी। पुलिस ने बाद में लोगों के दवाब के चलते पर्चा दर्ज भी किया परन्तु धारा 302 की जगह धारा 304 ही लगाई। दोषी की तुरंत गिरफ्तारी, धारा 302 के अंतर्गत पर्चा दर्ज करने और मुआवज़े की माँग को लेकर पीडित परिवार, ग्रामीण मज़दूर यूनियन (मशाल), टेक्स्टाईल हौज़री कामगार यूनियन और ओर संगठनों ने 18 नवंबर को हम्बड़ां में रोष-प्रदर्शन किया। पुलिस ने इन्साफ के लिए कार्यवाही करने की जगह दमन का रास्ता चुना और संगठनों के नेताओं को गिरफतार कर धारा 186, 353, 341, 283, 149 के अंतर्गत पर्चा दर्ज करके आज जेल भेज दिया है। दूसरे तरफ़ पीडित परिवार और लवकुश की लाश का कुछ भी अता पता नहीं है।
हम्बड़ां कत्ल कांड दमन विरोधी संघर्ष समिति में टेक्स्टाईल हौज़री कामगार यूनियन, ग्रामीण मज़दूर यूनियन (मशाल), भारतीय किसान यूनियन (डकौंदा), एटक, जमहूरी किसान सभा, सीटू, मोलडर एंड स्टील वर्करज़ यूनियन, इंकलाबी मज़दूर केंद्र, कारख़ाना मज़दूर यूनियन, नौजवान भारत सभा, किरती किसान यूनियन, पेंडू मज़दूर यूनियन (मशाल), लाल झंडा भट्टा मज़दूर यूनियन, इंकलाबी केंद्र पंजाब, डी.टी.एफ., डी.एम.एफ., मोलडर एंड स्टील वर्कर्ज यूनियन, भारत निर्माण मज़दूर यूनियन आदि संगठन शामिल हैं।

Friday, September 07, 2018

मज़दूरों के साथ धोखाधड़ी करके करोड़ों रूपए के घोटाले का आरोप

Sep 7, 2018, 5:26 PM
कम्पनी मालिक विनोद पोद्दार की गिरफतारी की माँग
लुधियाना: 07 सितम्बर 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
गोबिन्द रबड़ लिमिटड के मज़दूरों का  संघर्ष और तेज़ 

आज गोबिन्द रबड़ लिमिटेड (जी.आर.एल.) के मज़दूरों के एक प्रतिनिधि मण्डल ने पुलिस कमिश्नर लुधियाना व डीसी कार्यालय पर सहायक कमिश्नर (जनरल) को से मुलाकात करके कम्पनी मालिक विनोद पोद्दार की गिरफतारी की माँग की। कम्पनी ने करीब 1500 मज़दूरों की चार-चार महीने के वेतन, ओवरटाईम का पैसा, अक्टूबर क2017 से ई.पी.एफ. का पैसा, ई.एस.आई., बोनस, छुट्टियाँ आदि का करोड़ों रुपए बिना दिए लुधियाना के जोगियाना में स्थित इसके तीन युनिट बन्द कर दिए हैं। विनोद पोद्दार द्वारा बार-बार वेतन आदि देने का वादा किया गया था लेकिन दिया नहीं गया। 24 अप्रैल को नोटिस जारी किया गया कि कच्चे माल की कमी के कारण एक सप्ताह के लिए बन्द किए जा रहे हैं। लेकिन दुबारा कारखाने चलाए ही नहीं गए बल्कि पक्के तौर पर बन्द कर दिए गए। यह मामला मज़दूरों के साथ धोखाधड़ी करके करोड़ों रूपए के घोटाले का है। इसलिए मज़दूरों के प्रतिनिधि मण्डल ने माँग की कि तुरन्त विनोद पोद्दार की गिरफतारी की जाए, उसे सख्त से सख्त सजा मिले व मज़दूरों को इंसाफ दिलाया जाए। प्रतिनिधि मण्डल ने सहायक क्षेत्रीय पी.एफ. आयुक्त गुरदयाल सिंह से भी मुलाकात की व माँग पत्र सौंपकर इंसाफ की माँग की।


मज़दूरों ने इंसाफ न मिलने की सूरत में संघर्ष तेज़ करने की माँग की है। प्रतिनिधि मण्डल में कारखाना मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष लखविन्दर, गोबिन्द रबड़ लिमिटेड मज़दूरों की संघर्ष कमेटी के सदस्य गुरमीत सिंह, कृष्ण कुमार,  पुश्कर सिंह, प्रेमचंद, जसवीर सिंह, रविन्दर, जसवीर सिंह, रमेश सिंह व अन्य अनेकों मज़दूर शमिल थे। 


Thursday, January 18, 2018

धरना-प्रदर्शनों पर अनिश्चितकालीन रोक के खिलाफ लामबंदी और तेज़

Thu, Jan 18, 2018 at 4:16 PM 
जनवादी जनसंगठनों की डी.सी. से मीटिंग बेनतीजा रही
लुधियाना प्रशासन के तानाशाह आदेश के खिलाफ़ 30 जनवरी को होगा विशाल रोष प्रदर्शन
लुधियाना: 18 जनवरी 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
आज जिला लुधियाना के मज़दूरों, किसानों, मुलाजिमों, नौजवानों, छात्रों, स्त्रियों, बुद्धिजीवियों आदि तबकों के करीब 50 जनवादी जनसंगठनों के एक प्रतिनिधि मण्डल ने डिप्टी कमिश्नर से माँग की है कि लुधियाना में अनिश्चितकाल के लिए धारा 144 लगाने के गैरजनवादी-तानाशाह आदेश को तुरन्त वापिस लिया जाए। दिलचस्प बात यह है कि कि डीसी को यह भी सही ढंग से नहीं पता था कि उनके द्वारा जारी हुए पत्र के मुताबिक पुलिस कमिश्नर, लुधियाना ने क्या आदेश जारी किया है। डीसी ने माना कि यह देखना पड़ेगा कि पुलिस कमिशनर के अनिश्चतकाल के लिए धारा 144 लगाने का अधिकार है भी या नहीं। जनसंगठनों का कहना है कि धारा3 144 कानूनी तौर पर विशेष आपातकालीन परिस्थितियों में ही थोड़े समय के लिए लगाई जा सकती है। लुधियाना पुलिस कमिशनरी में ऐसे हालात नहीं है जिन्हें बहाना बनाकर इस धारा का इस्तेमाल किया जाए। वास्तव में हुक्मरान तरह-तरह के बहानों तले जन-आवाज़ कुचलने की साजिशें रच रहे हैं। लुधियाना पुलिस कमिशनरी में यह धारा लगाकर धरना-प्रदर्शनों पर पाबन्दी लगाना भी इन साजिशों का ही हिस्सा है।
लुधियाना जिला के चार दर्जन से भी अधिक जनवादी-जनसंगठनों द्वारा डिप्टी पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पर विशाल रोष प्रदर्शन किया जाएगा। 19 से 29 जनवरी तक सघन प्रचार अभियान चला कर लोगों को लुधियाना प्रशासन के तानाशाह हुक्मों के खिलाफ़ लामबन्द किया जाएगा। 
डीसी लुधियाना के साथ आज हुई मीटिंग में कारखाना मज़दूर यूनियन, जमहूरी किसान सभा, मनरेगा मज़दूर यूनियन, तर्कशील सोसाईटी, रेहड़ी फड़ी युनियन, इंकलाबी केन्द्र पंजाब, एटक, मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान, नौजवान भारत सभा, मोल्डर एण्ड स्टील वर्कर्ज यूनियन, लाल झण्डा बजाज सन्स मज़दूर यूनियन, लाल झण्डा हीरो साईकिल मज़दूर यूनियन, जमहूरी अधिकार सभा, बी.के.एम.यू., पंजाब खेत मज़दूर सभा, लोक मंच पंजाब, कामागाटा मारू यादगारी कमेटी, हौज़री मज़दूर यूनियन, पंजाब रोडवेज इम्पलाईज़ यूनियन (आज़ाद), पंजाब लोक सभ्याचारक मंच, सफाई लेबर यूनियन, जमहूरी किसान सभा, टेक्सटाईल हौज़री कामगार यूनियन, पेंडू मज़दूर यूनियन (मशाल), पंजाब स्टूडेंटस यूनियन, किरती किसान यूनियन, पेंडू मज़दूर यूनियन, म्यूंसीपल वर्कर्ज यूनियन, देहाती मज़दूर सभा, सीटूयू, शहीद भगत सिंह नौजवान सभा, गोरमिंट टीचर्ज यूनियन, रेलवे पेंशनर्ज ऐसोसिएशन, जिस्पोजल वर्कर्ज यूनियन, लाल झण्डा पेंडू चोंकीदार यूनियन, पीप्लज मीडिया लिंक, महासभा लुधियाना, बी.एम.एस., आदि संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। 
बाद में हुई एक मीटिंग में संगठनों ने कल पत्रकारों पर कार्पोरेशन अधिकारियों द्वारा हुए हमले और दोषी अफसरों के खिलाफ़ पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करने की सख्त निन्दा की गई है और माँग की है कि दोषी अफसरों के खिलाफ़ सख्त से सख्त पुलिस कार्रवाई की जाए। 
इस अभियान से जुड़ने के लिए सम्पर्क करें कामरेड लखविन्दर के साथ (मो. नंबर 9646150249)

Sunday, December 24, 2017

लगातार बुलंद हो रही है शहनाज़ के लिए इन्साफ की मांग

Sun, Dec 24, 2017 at 4:57 PM
श्रद्धांजली आयोजन ने समाज से पूछा-आखिर कब जागोगे आप लोग?
लुधियाना24 दिसम्बर 2017: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
नवरात्र का उपवास रखने वाले देश में ही हुई थी शहनाज़ की हत्या। अनगिनत धार्मिक स्थलों से भरे देश में ही हुआ था उसके साथ दुष्कर्म। जब उसने आवाज़ उठाई तो किसी ने नहीं दिया उसे इन्साफ। दरिंदों की दरिंदगी इतनी बढ़ी कि न्याय की जंग लड़ने निकली शहनाज़ को जिंदा जला दिया गया। अफ़सोस कि न तो धरती डगमगाई न ही आसमान टूटा और न ही लोग जागे। बहुत से लोगों ने इसे भी भगवान की मर्जी कह कर आँखें बंद कर लीं और अपने काम धंधों में मस्त हो गए। वास्तव में इस तरह के लोग भी ज़िम्मेदार हैं समाजविरोधी गुण्डातत्वों की मनमानियां बढ़ाने में। इन पर लगाम कसना सभी का फ़र्ज़ होना चाहिए न कि सिर्फ किसी शहनाज़ के परिवार का। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शहनाज़ का दर्द किसी ने न सुना। More Pics on Facebook
इस दर्द की आवाज़ को सुना तो उन लाल झंडे वाले लोगों ने जिन्हें लोग नास्तिक कह कर मूंह फेर लेते हैं। यह लोग 2014 से लगातार शहनाज़ के लिए इन्साफ मांग रहे हैं। लोगों को इस मकसद के लिए जागरूक कर रहे हैं। आज भी ढंडारी के इलाके में इसी तरह का कार्यक्रम था। दिल को हिलाता हुआ। दिमाग में सवाल पैदा करता हुआ। सरे समाज से पूछता रहा था यह आयोजन कि आखिर कब जागोगे ? किस की इंतज़ार कर रहे हो? जब हर घर की कोई न कोई शहनाज़ इन दरिंदों का निशाना बनेगी? आयोजन में चेताया गया कि अगर अब आप आगे नहीं आये तो उस समय कोई आपकी मदद के लिए आने वाला नहीं बचेगा। इस चेतना को जगाने के लिए इंक़लाबी गीत संगीत का कार्यक्रम भी हुआ। दर्द के साथ संघर्ष और हौंसले की ताल मिलाई गयी।  बुलंद आवाज़ में कहा गया कि हम इन गुंडों से नहीं डरेंगे। नारे लगाए गए-गुंडागर्दी चक्क दियांगे-धौण ते गोदा रख दियांगे। इस आयोजन ने सहमे और डरे हुए लोगों में एक नयी जान फूंकी।
ढण्डारी अपहरण, बलात्कार व कत्ल काण्ड की पीडि़ता शहनाज़ की तीसरी बरसी पर आज ढण्डारी बलात्कार व कत्ल काण्ड विरोधी संघर्ष कमेटी द्धारा ढण्डारी, लुधियाना में श्रद्धांजलि समागम किया गया। श्रद्धांजलि समागम में शामिल लोगों ने शहनाज़ को इंसाफ़ दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि बलात्कारी गुण्डा गिरोह के खिलाफ शहनाज़ के न्यायपूर्ण संघर्ष को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। श्रद्धांजलि समागम को विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों व शहनाज़ के माता-पिता ने सम्बोधित किया। क्रान्तिकारी सांस्कृतिक मंच ‘दस्तक’ की ओर से जुझारू गीत पेश किए गए। यह वो गीत थे जिनमें शोषण का शिकार हुयी जनता का दर्द था। इस दर्द को दूर करने वाली मरहम की बात थी। आम जनता के हक पर चील बन कर मंडरा रहे शोषकों की चुनौती स्वीकार करने का ऐलान था।  
कारखाना मज़दूर यूनियन, पंजाब; टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब; स्त्री मज़दूर संगठन, पंजाब स्टूडेंटस यूनियन (ललकार); नौजवान भारत सभा व बिगुल मज़दूर दस्ता संगठनों द्धारा गठित ‘ढण्डारी बलात्कार व कत्ल काण्ड विरोधी संघर्ष कमेटी’ की तरफ से आयोजित श्रद्धांजलि समागम में विभिन्न संगठनों के वक्ताओं ने कहा कि शहनाज़ दमन-उत्पीडन का शिकार सभी स्त्रियों और साधारण जनता के सामने संघर्ष का एक प्रतीक है। बलात्कार, अपहरण, छेड़छाड़ जैसे जुल्मों का शिकार अधिकतर महिलाएं व उनके परिवार इन घटनाओं को सामाजिक बदनामी, मारपीट, जान गंवाने, न्याय की नाउम्मीदी आदि कारणों के चलते छिपा जाते हैं। लेकिन बहादुर शहनाज़ और उसके परिवार ने ऐसा नहीं किया। 
शहनाज़ ने लड़ाई लड़ी और वह लड़ते-लड़ते मौत को गले लगा गई। वह जुल्म के सामने घुटने न टेकने की मिसाल कायम करके गई है। उसे हमेशा याद रखना होगा। वक्ताओं ने कहा कि स्त्रियों को भयानक जुल्मों का सामना करना पड़ रहा है। स्त्रियों को इसके खिलाफ़ एकजुट होना होगा। हर इंसाफपसंद व्यक्ति को इस संघर्ष में शामिल होना होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को स्त्रियों सहित सभी आम लोगों की सुरक्षा, दमन-जुल्म से छुटकारे के लिए सरकारी व्यवस्था से कोई उम्मीद न करके एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को गुण्डा-पुलिस-राजनीतिक नापाक गठजोड़ के खिलाफ जुझारू जनान्दोलन सगंठित करना होगा।
संघर्ष कमेटी के संयोजक लखविन्दर ने बताया कि शहनाज़ को 4 दिसम्बर 2014 को एक गुण्डा गिरोह ने मिट्टी का तेल डालकर आग लगाकर जला डाला था। इससे पहले शहनाज़ को 25 अक्टूबर 2014 को अगवा करके दो दिन तक सामूहिक बलात्कार किया गया था। राजनीतिक सरपरस्ती में पलने वाले इस गुण्डा गिरोह के खिलाफ़ कार्रवाई करने में पुलिस ने बेहद ढिलाई बरती, पीडि़तों की ढंग से सुनवाई नहीं की गई, रिपोर्ट लिखने और मेडिकल करवाने में देरी की गई। बलात्कार व अगवा करने के दोषी 18 दिन बाद जमानत करवाने में कामयाब हो गए। गुण्डा गिरोह ने शहनाज़ और उसके परिवार को केस वापिस लेने के लिए डराया, जान से मारने की धमकियाँ दीं। 4 दिसम्बर को दिन-दिहाड़े सात गुण्डों ने उसे मिट्टी का तेल डाल कर जला दिया। 9 दिसम्बर को उसकी मौत हो गई। गुण्डा गिरोह के इस अपराध व गुण्डा-सियासी-पुलिस-प्रशासनिक नापाक गठजोड़ के खिलाफ़ हज़ारों लोगों द्वारा ‘संघर्ष कमेटी’ के नेतृत्व में विशाल जुझारू संघर्ष लड़ा गया था। जनदबाव के चलते दोषियों को सजा की उम्मीद बँधी हुई है। कत्ल काण्ड के सात दोषी जेल में बन्द हैं। अदालत में केस चल रहा है। पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज करने में की गई गड़बड़ों के चले अगवा व बलात्कार का एक दोषी जमानत पर आज़ाद घूम रहा है। लखविन्दर ने कहा कि इन बलात्कारियों व कातिलों के फाँसी की सजा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
श्रद्धांजलि समागम को ‘संघर्ष कमेटी’ के संयोजक व कारखाना मज़दूर यूनियन, पंजाब के अध्यक्ष लखविन्दर; टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब के अध्यक्ष राजविन्दर; स्त्री मज़दूर संगठन की बलजीत; मोल्डर एण्ड स्टील वर्कर्ज यूनियन के अध्यक्ष हरजिन्दर सिंह, नौजवान भारत सभा के सतपाल व कर्मजीत कोटकपुरा, मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान के नेता सुरिन्दर सिंह, डेमोक्रटिक लॉयर्ज ऐसोसिएशन के नेता एडवोकेट हरप्रीत जीरख, शहनाज़ के पिता मुहम्मद इलियास, पीप्लज मीडिया लिंक के रेक्टर कथूरिया आदि ने सम्बोधित किया। 
इस अवसर पर जनचेतना द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई। 
इस अभियान से जुड़ने के लिए आप सम्पर्क कर सकते हैं लखविन्दर से जो ढण्डारी बलात्कार व कत्ल काण्ड विरोधी संघर्ष कमेटी के संयोजक   हैं। उनका मोबाईल फोन नंबर है:9646150249

Sunday, August 13, 2017

टेकस्टाइल हौज़री कामगार यूनियन का तीसरा सम्मेलन

पुस्तकालय में हुई मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा 
लुधियाना:13 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
आज जबकि हर तरफ अँधेरे जैसा माहौल है उस समय ज्ञान की रौशनी बाँट रहा है मज़दूरों का पुस्तकालय जिसे मज़दूरों खुद अपनी मेहनत की कमाई से निकले थोड़े थोड़े पैसे से बनाया है इसी लिए इसमें शर्म की चमक भी महसूस होती है। स्लम इलाके में मज़दूरों को सिर उठा कर जीना सिखाने वाले इस संस्थान को  तमन्ना बहुत समय से थी लेकिन मौका नहीं मिल रहा था। आज मज़दूरों के सम्मेलन की कवरेज ने यह मौका भी प्रदान किया। याद आने लगते है उस गीत के बोल-- 
पहन कर पायों में जंजीर भी,
रक्स किया जाता है--
आ बता दें कि तुझे कैसे जिया जाता है........। 
आज टेकस्टाइल हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब का तीसरा डैलीगेट सम्मेलन किया गया। सम्मेलन में विभिन्न कारखानों के 50 से अधिक डैलीगेटों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में शामिल डैलीगेटों ने यूनियन के कामों को व्यवस्थित तरीके से करने के लिए नईं नेतृत्वकारी कमेटी का चुनाव किया गया। इस मौके पर 11 सदस्यों की नईं कमेटी ने राजविंदर को अध्यक्ष, ताज़ मोहमद को उप-अध्यक्ष, विश्वनाथ को मुख्यसचिव, राम सेवक को सचिव, बलजीत व छोटेलाल को कोशाध्यक्ष घनश्याम, राम सिंह, गुरदीप, धरमिंदर और प्रमोद को कमेटी सदस्य चुना गया। यूनियन के अध्यक्ष लखविंदर रिपोरट पेश की, जिसमें संगठन की प्राप्तियों व कमियों का विषलेश्ण किया गया व भविष्य की चनौतियों व कामों पर क्रमबार बात की। इसके बाद सम्मेलन में उपस्थित डैलीगेटों ने रिपोरट पर गहन विचार-चर्चा की।

शाम को हुई मज़दूर सभा में यूनियन की नईं नेतृत्वकारी कमेटी का ऐलान किया गया। इस अवसर पर टेकस्टाइल हौज़री कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजविंदर ने सरकार की मज़दूर-गरीब विरोधी नितियों की निन्दा की। उन्होंने जी.एस.टी. की वजय से टेकस्टाइल व हौज़री मज़दूरों में फैल रही बेरोजगारी पर चिन्ता प्रगट की। सभा में छोटेलाल, घनश्याम और बलजीत ने भी बात रखी। वक्तायों ने श्रम-कानूनों में संशोधन बन्द करवाने व कारखानों में सखती से श्रम-कानून लागू करवाने के लिए बड़े सतर पर मज़ादूर वर्ग को संगठित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

इस अव्सर पर क्रांतिकारी सांस्र्शत्कि मंच दसतक की ओर से क्रांतिकारी गीतों की पेशकारी की गई। मंच संचालन की भूमिका ताज मोहमद ने निभाई।
यदि आपने अभी तक इस पुस्तकालय को नहीं देखा है तो आपकी सभी तीर्थ यात्रायें अधूरी हैं। जन संघर्ष और ज्ञान के इस सुमेल को कभी किसी भी दिन सभी काम छोड़ कर भी देखें। आपको मिलेगा एक नया अनुभव जो ज़िन्दगी का अनुभव होगा। 


Monday, January 16, 2017

पूँजीवादी व्यवस्था के अन्तरविरोध समाजवादी क्रान्तियों के नए संस्करणों का निर्माण करेंगे

‘महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति व आज का समय’ विषय पर विचार-चर्चा
लुधियाना: 15 जनवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): For more Pics Please Clik Here
पूंजीवाद के लालच, स्वार्थ और संवेदनाविहीन सिस्टम में सताये लोगों के लिए शायद आखिरी उम्मीद बन कर उभरी थी रूस में आई अक्टूबर क्रांति। शायरों ने गीत लिखे-वो सुबह कभी तो आएगी।  फिल्मों के गीत हिट हुए-
हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा मांगेंगे-
इक बाग़ नहीं -इक खेत नहीं हम सारी दुनिया मांगेंगे।  
इस वाम विचारधारा ने गम के मारे लोगों को शक्ति दी, नई ऊर्जा दी, आश्वासन दिया-
रात भर का है मेहमां अँधेरा--किसके रोके रुका है सवेरा..! 
विचारों में दम था और इस विचारधारा के लिए लोग अपने सभी सुख छोड़ कर पूरे जोश के साथ आगे आये। नावल मां ने इस अभियान में एक नया जोश भरा। इस वाम आंदोलन के लिए कुर्बानियां देने वालों की कमी नहीं रही। इस विचारधारा से प्रभावित हो कर बहुत से लोगों ने अपनी सारी सारी ज़िन्दगी लगा दी, अपना घरघाट परिवार सब कुछ दांव पर लगा दिया पर इस सब के बावजूद एक समय आया जब इनको लगने लगा शायद हम गलत हो गए। बहुत से मित्रों ने व्यक्तिगत मुलाकातों में रुयासे हो कर कहा शायद हमने सारी उम्र अँधेरा ढोया। इनको भी इन्कलाब दूर होता महसूस हुआ। पार्टी के लिए पूरी उम्र लगाने वालों ने भी कभी कभी अनौपचारिक भेंटवार्ता में यही कहा कि इंकलाब तो अब आने वाला नहीं। यह कहने पर कि फिर कौन सी पार्टी में जाना है तो उनके आंसू निकल आते-कहते-पार्टी तो मां होती है कामरेड --हम पार्टी नहीं छोड़ेंगे। स्पष्ट था कि उनका गिला शिकवा पार्टी से नहीं बल्कि पार्टी पर काबिज़ हुए या घुस आये स्वार्थी नेतायों से था। बहुत से वरिष्ठ कामरेड ऐसे हैं जिनकी अपनी सन्तान ने भी वाम सियासत में आना उचित नहीं समझ। आज वाम दलों के पास युवा केडर चिंतनीय हद तक कम हो रहा है और वृद्ध लोग बारी बारी अलविदा कह रहे हैं इसके बावजूद पदों का मोह छूट नहीं रहा। ऐसे हालात में जब वाम दलों का आम केडर ठगा ठगा सा महसूस कर रहा था और उसे लग रहा था कि बड़े बड़े वाम नेतायों की ज़िन्दगी और उनके परिवारों का इंकलाब आ चुका है और हमारा इंक़लाब कभी आने वाला नहीं।  इस बेहद नाज़ुक दौर में जिसके बारे में पूंजीवादी साम्प्रदायिक दलों के बड़े नेता अक्सर मज़ाक करते हैं कि कामरेड तो अब खत्म हो चुके तो उनका मज़ाक न खोखला लगता है न ही मज़ाक। एक कड़वा सत्य जिसका सामना आज बहुत से कामरेड कर रहे हैं लेकिन अपनी ज़िन्दगी में। इन विचारों से जुड़ा केडर निराश नज़र आ रहा था। जहाँ एक वाम ट्रेड यूनियन के आह्वान पर लाल झंडे वालों की भीड़ का सागर लहराता नज़र आता था वहां अब चार चार वाम दल मिलकर भी 50-100 से ज़्यादा वर्कर अपनी रैलियों में एक्टर नहीं कर पाते। 
और इसके चाहनेवालों के लिए पैदा हुई इस चिंतनीय स्थिति से भरे इस तरह के हालात में एक आयोजन वह था जब छात्र नेता कन्हैया के आने पर लुधियाना के पंजाबी भवन में इतनी भीड़ जुटी थी कि उसे सम्भालना मुश्किल था। उसके बाद एक मौका अब और देखने को मिला जब 15 जनवरी 2017 दिन रविवार को अक्टूबर क्रांति पर हुए सेमिनार में पंजाबी भवन का हाल पूरी तरह से भरा हुआ था। यहाँ तक कि इस सेमिनार को सुनने के लोग कड़क सर्दी के मौसम में भी नीचे फर्श पर बैठे थे और वो भी बर्फीली शीत लहर में। हाल में मौजूद श्रोता और कार्यकर्ता पूरी तरह से ध्यान मगन थे। न कोई शोर न कोई बेचैनी। मुख्य वक्ता शशि प्रकाश के प्रभावशाली व्यक्तित्व के सामने सभी मंत्रमुग्ध हुए एक एक बात को सांस रोक कर सुन रहे थे। For more Pics Please Clik Here

15 जनवरी 2017 को लुधियाना के पंजाबी भवन में मार्क्सवादी स्टडी सर्किल द्वारा ‘महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति व आज का समय’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। मार्क्सवादी लेखक, राजनीतिक कार्यकर्ता व अंग्रेजी मार्क्सवादी पत्रिका ‘द एनविल’ के सम्पादक शशि प्रकाश सेमिनार के मुख्य वक्ता थे। सेमिनार की शुरुआत क्रान्तिकारी सांस्कृतिक मंच, दस्तक द्वारा पेश क्रान्तिकारी गीतों से हुई। मंच संचालन मार्क्सवादी स्टडी सर्किल की ओर से साथी सुखविन्दर ने किया। 

मुख्य वक्ता शशि प्रकाश ने विषय पर बात रखते हुए कहा कि रूस में 25 अक्टूबर 1917 को होने वाली मज़दूर क्रान्ति दुनिया की तब तक की सबसे महान घटना थी। यह पहला मौका था जब राज्यसत्ता किसी शोषक वर्ग के हाथों से निकलकर शोषित-उत्पीड़ित वर्ग के कब्ज़े में आ गयी। यह सचेतन तौर पर की जाने वाली दुनिया की सबसे पहले क्रान्ति थी जिसका मकसद था इन्सान के हाथों इन्सान की हर तरह की लूट का ख़ात्मा करना। इस क्रान्ति ने सम्पत्तिवान वर्गों का तख्ता पलट दिया। इस क्रान्ति ने दिखा दिया कि अगर समाज का नियन्त्रण मज़दूर वर्ग के हाथों में आ जाये तो मेहनतकश वर्गों की चेतना, संस्कृति, शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, तकनीकी और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किया जा सकता है। यह एक युगप्रवर्तक घटना थी जिसके बाद मज़दूर क्रान्तियों के युग की शुरुआत हुई। महान अक्टूबर क्रान्ति आज भी हमें प्रेरणा दे रही है और उसकी शिक्षाएँ हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं। महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति के सबकों को आत्मसात किए बिना क्रान्तिकारी आन्दोलन को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा विश्व पूँजीवादी व्यवस्था के अन्तरविरोध समाजवादी क्रान्तियों के नए संस्करणों का निर्माण करेंगी। अक्टूबर क्रान्ति की शिक्षाओं को व्यापक जनता तक पहुँचाना क्रान्तिकारी आन्दोलन का एक अहम कार्यभार है।For more Pics Please Clik Here

उनके अलावा प्रो. जगमोहन, डा. जगजीत चीमा, जरनैल सिंह, रवि कुमार, मास्टर दविन्दर, जगसीर जीदा, गुरप्रीत, वरूण आदि ने भी बात रखी। For more Pics Please Clik Here

इस सेमिनार से एक बात उभर कर सामने आई कि शोषित वर्ग आज भी शोषकों के खिलाफ संघर्ष के लिए मार्गदर्शन चाहता है और अगर इस तरह का कोई अवसर मिले तो वह चूकता नहीं। मार्क्सवाद के चाहनेवालों की प्यास अभी भी बरकरार है। अब आगे सोचना वाम नेतायों का काम है कि वे केवल एकता की बातें करते हैं या इस मकसद के लिए कोई ठोस कदम उठाने को भी तैयार हैं? 
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Tuesday, January 03, 2017

जनचेतना व क्रान्तिकारी-जनवादी विचारों पर हमले के खिलाफ तीखा विरोध

समर्थकों ने किया थाने का घेराव व जोरदार प्रदर्शन
लुधियाना:3 जनवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):  For more Pics Click here Please 
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आज लुधियाना के विभिन्न क्रान्तिकारी-जनवादी संगठनों के आह्वान पर सैंकड़ों मज़दूरों, नौजवानों, छात्रों, जनवादी कार्यकर्ताओं ने पुलीस थाना डिवीयन नम्बर 5 का घेराव करके ज़ोरदार प्रदर्शन किया और माँग की कि बीती 2 जनवरी को क्रान्तिकारी, प्रगतिशील, जनवादी विचारों के संस्थान जनचेतना के पंजाबी भवन, लुधियाना स्थित बिक्री केन्द्र पर हमला करने वाले हिन्दुत्वी कट्टरपंथी संगठनों के हमलावरों को गिरफ्तार किया जाए। क्रान्तिकारी-जनवादी संगठनों ने माँग की है कि हमलावरों का साथ देने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाए। हिन्दुत्वी कट्टरपंथी संगठनों द्वारा शहर का माहौल खराब करने का सख्त नोटिस लेते हुए माँग की गई है कि धर्म के आधार पर लोगों को बाँटने-लड़ाने वाले संगठनों पर पाबन्दी लगाई जाए और दोषी व्यक्तियों को सख्त सजाएँ दी जाएँ। मौके पर पहुँचे ए.सी.पी. द्वारा दोषियों के खिलाफ़ कार्रवाई के लिए 24 घण्टे का समय माँगे जाने के बाद धरना उठाया गया। ऐसा न होने की सूरत में संघर्ष तीव्र करने की चेतावनी दी गई। 
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कल पुलिस ने हिन्दुत्वी कट्टरपंथियों के दबाव में पंजाबी भवन, लुधियाना पर जनचेतना के बिक्री केन्द्र की सील कर दिया था। आज ज़ोरदार प्रदर्शन के दबाव में पुलीस ने जनचेतना की चाबियाँ प्रबन्धकों को सौंप दी हैं। पुलीस ने शहीद भगत सिंह और राधा मोहन गोकुल की किताबों के जरिए नास्तिकता फैलाने के दोष में जनचेतना, लुधियाना की प्रबन्धक बिन्नी, टेक्सटाईल हौज़री कामगार यूनियन के अध्यक्ष लखविन्दर, कारखाना मज़दूर यूनीयन के नेता गुरजीत (समर) और नौजवान भारत सभा के कार्याकर्ता सतबीर को नाजायज तौर पर गिरफ्तार कर लिया था। हिन्दुत्वी कट्टरपंथियों ने जनचेतना बिक्री केन्द्र को आग लगाने और तोड़फोड़ की भी कोशिश की थी। प्रबन्धक बिन्नी के साथ छेड़खानी और बदसलूकी की गई। उसके बचाव में आए अन्या कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की की गई। पुलीस दो घण्टे तक मूक दर्शक बनकर देखती रही। हिन्दुत्वी गुण्डों को गिरफ्तार करने की बजाए जनचेतना व अन्य कार्यकर्ताओं को ही गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि जनदबाव के चलते इन्हें शाम को रिहा कर दिया गया था लेकिन मामला अभी टला नहीं था। पुलीस हिन्दुत्वी कट्टरपंथियों के दबाव में क्रान्तिकारी-जनवादी कार्यकर्ताओं पर धारा 295 (ए) के तहत पर्चा दर्ज करना चाहती थी। आज ज़ोरदार प्रदर्शन के कारण पुलीस को पीछे हटना पड़ा है और भरोसा दिया गाया है ऐसी कोई भी नाजायज कार्रवाई नहीं की जाएगी। 
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वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगत सिंह और राधामोहन गोकुल की किताबें वर्षें से देश भर में छप रही हैं। जनचेतना पर हमला समूचे क्रान्तिकारी-जनवादी आन्दोलन पर हमला है। इन किताबों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना विचारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी और जनवादी अधिकारों पर हमला है।
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प्रदर्शन को जनचेतना, लुधियाना की प्रबन्धक बिन्नी, टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन के अध्यक्ष लखविन्दर, नौजवान भारत सभा के संयोजक कुलविन्दर और नेता अजयपाल, इंकलाबी केन्द्र पंजाब के राज्य समिति सदस्य सुखदेव भूंदड़ी, पंजाब स्टूडेंटस यूनियन के नेता कर्मजीत, कारखाना मज़दूर यूनियन के नेता राजविन्दर, डैमोक्रेटिक लायर्ज ऐसोसिएशन के नेता हरप्रीत जीरख, डैमोक्रेटिक इम्पलाइज फ्रण्ट के नेता रमनजीत संधु, तर्कशील सोसाईटी पंजाब के नेता सतीष सचदेवा, मोल्डर एण्ड स्टील वर्कर्ज यूनीयन के अध्यक्ष विजय नारायण, लोक एकता संगठन के अध्यक्ष गल्लर चौहान, आदि ने सम्बोधित किया।
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इस आंदोलन से जुड़ने के लिए सम्पर्क कर सकते हैं टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब के अध्यक्ष कामरेड लखविन्दर से उनका मोबाईल नम्बर है- 9646150249
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