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Sunday, August 06, 2017

दिल्ली में तीन सीवरेज कर्मियीं की मौत--एक की हालत गंभीर

कामरेड विजय ने पूछा-सफाई कर्मियों की ज़िंदगी से खिलवाड़ कब तक?
                                                                                           Related File Photo 
लुधियाना: 6 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::  
सीवर में काम करने वालों को हालत हर कही खराब है। हमारे सीवर मज़दूर हर रोज़ मौत के मुँह में धकेल दिए जाते हैं।  आये दिन कोई न कोई हादसा होता है और वे वक़्त से पहले ही इस  रुखसत हो जाते हैं। अब नई खबर आई है दिल्ली से जहाँ तीन सीवरेज कर्मियों की मौत हो गयी है। एटक से सम्बंधित एक नगर निगम मज़दूर नेता विजय कुमार ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि हम लम्बे समय पंजाब में इस सुरक्षा के लिए जूझ रहे हैं लेकिन इसका हल ऊंठ का लटकता हुआ होंठ बन कर रह गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुए हादसे के सिलसिले में हम जल्द ही एक बैठक लुधियाना में बुलाएँगे तांकि इस समस्या को हल करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जा सके।   

उन्होंने बताया कि दिल्ली में भी बुरा हाल है। दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में दिल्ली जलबोर्ड के सेफ्टी टैंक में सफाई के लिए उतरे तीन मजदूरों की मौत हो गई जबकि एक की हालत गंभीर है। कामरेड विजय ने सवाल किया की आखिर मज़दूरों की ज़िंदगी के साथ यह खिलवाड़ कब तक जारी रहेगा?
उन्होंने बताया कि मरने वालों में मजदूर अन्नू की उम्र 27 वर्ष है। जोगिंदर की उम्र 28 है और एक अन्य का विवरम मंगवाया जा रहा है जिसकी पहचान नहीं हो पाई है। हादसे में घायल हुए राजेश नामक युवक का इलाज जारी है। कामरेड विजय ने कहा कि आज के आधुनिक युग में क्या सीवरेज कर्मियों के लिए कोई विकास नहीं हुआ?आखिर क्यों उन्हें सेफ्टी किट के बिना धकेला जाता है सीवरेज में। 
इसी बीच मृतकों के शव एम्स की मोर्चरी में भेजे गए हैं। आसपास के लोगों से की गयी वार्ता के मुताबिक आशंका व्यक्त की जा रही है कि जहरीली गैस की चपेट में आकर सभी सीवरेज कर्मियों की मौत हुई है। मौत के सही कारणों का खुलासा सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद हो पाएगा। पुलिस हादसे में घायल हुए राजेश से पूछताछ करने का प्रयास कर रही है। कामरेड विजय ने इन  मौतों पर गहरा दुःख व्यक्त किया। 

Thursday, April 13, 2017

MCL: बबली को एक साल से नहीं मिला वेतन

एक वर्ष पहले पति की डियूटी पर हुई मौत के बाद मिली थी नौकरी  
लुधियाना: 12 अप्रैल 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
पिछले एक वर्ष से नगरनिगम में सफाई सेविका के तौर पर कार्य कर रही यह महिला बहुत दुखी है। जब बबली के पति की मौत हुई थी तो उस पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। समाज में बच्चों का लालन पालन और पति   के बिना जीना किसी अंधेरी गुफा में रहने जैसा था। इसके बाद  फैसला किया कि  वह अपने पति की निशानी  बच्चों को संभाल कर अच्छा इन्सान बनाएगी। पति की मौत डियूटी पर हुई थी इस लिए सरकारी नियमों के अंतर्गत उसको सरकारी नौकरी मिल गयी। यह बहुत बड़ी राहत थी। उसे लगा कम से कम वो अपना और अपने बच्चों का गुज़ारा तो कर सकेगी पर दुःख के गहन अँधेरे में यह एक सपना ही था। उसकी गम की रात कभी खत्म नहीं हुई। उसकी सुबह कभी नहीं आई। उसे नौकरी तो मिली पर एक बरस तक नौकरी करने के बावजूद उसे अभी तक पहली तनखाह भी नहीं मिली। पूछने पर उसने बताया कि विभाग के एक डाक्टर ने उसकी फाईल  रोक रखी है।  नगरनिगम कर्मचारियों के नेता कामरेड विजय कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि  हम भी इस मामले मैं कई बार सबंधित डाक्टर के चक्र काट चुके हैं लेकिन इसकी फाईल वहां से नहीं निकल रही। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अब अगर और देरी की गयी तो हम सख्त एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेंगे। 
इसी बीच अचानक वहां आए एक अन्य वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता मास्टर फ़िरोज़ ने भी बबली का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि हम इसे इन्साफ दिलाने के लिए हर सम्भव कदम उठाएंगे।  गौरतलब है कि  मास्टर फ़िरोज़ हाल ही में भाकपा और एटक का साथ छोड़ कर कांग्रेस समर्थक ट्रेड यूनियन इंटक में शामिल हो चुके हैं। वर्करों के हक की लड़ाई वह अब भी पहले की तरह ही लड़ रहे हैं।   ट्रेड यूनियन नेताओं ने दी संघर्ष की चेतावनी

Monday, November 21, 2016

बेटी की शादी का कार्ड दिखाने पर भी बैंक से नहीं मिला ढाई लाख रुपया

नोटबन्दी से वाम ट्रेड यूनियन नेता डीपी मौड़ भी परेशान 
लुधियाना: 20 नवम्बर 2016: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
भारतीय समाज में बेटी का विवाह एक बहुत बड़ा यज्ञ मन जाता है। इस मकसद के लिए परिवारिक सदस्य बेटी का जन्म होते ही धन संचय आरम्भ कर देते हैं कर देते हैं। बेटी को पढ़ाया लिखाया जाता है और विवाह की उम्र होने पर उसे योग्य वर देख कर विदा कर दिया जाता है। इस अवसर पर अक्सर कर्ज़ भी लिए जाते हैं। इस तरह किसी न किसी तरह इस रस्म को पूरा  कर दिया जाता है। बाबुल की दुआएं लेती जा की धुन में डोली विदा हो जाती है किसी अनजान अज्ञात घर को कर बनाने संवारने के लिए। मोदी सरकार की बिना तैयारी की गई नोटबन्दी जहां बहुत सी जानें ले ली हैं वहीँ बहुत सी शादियों में भी रुकावटें खड़ी क्र दी हैं। इनमें बहुत सी शादियां बेटियों की हैं। कुछ ऐसा ही देखने को मिला पक्खोवाल रोड स्थित ग्रीन फील्ड में जहाँ पीएयू में लम्बे समय तक लोकप्रिय मुलाज़िम नेता रहे डी पी मौड़ के घर में 23 नवम्बर 2016 को बेटी की शादी है लेकिन बैंक ने उनका ही धन उनको देने  से इन्कार कर दिया है। जैसे तैसे दोस्तों से उधारी पकड़ कर काम चला रहे श्री मौड़ ने अपना दुःख मीडिया के सामने भी व्यक्त किया। उन्होंने आशंका भी व्यक्त की कि लोगों को गुमराह करके थोपी गई नोटबन्दी भी कहीं इस सरकार का नया जुमला ही न हो। 

आॅल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के स्टेट वाइस प्रेजिडेंट डीपी मौड़ ने कहा कि 23 नवंबर को उनकी बेटी की शादी है, मगर बैंक ने उन्हें पैसे देने से इंकार कर दिया है। जिसके चलते उनके सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। 

एक मीडिया वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार ने एटीएम से पैसे निकालने की लिमिट दो हजार रुपये रखी है। इतनी राशि से किसी भी परिवार का गुजारा होना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि बैंक  उनकी बेटी के विवाह का कार्ड देखने के वाबजूद केवल 24 हज़ार रूपये ही उनको दिए हैं। जो पैसे उन्होंने 8 नवम्बर से पहले निकाल लिए थे वे सभी 500 और हज़ार रुपयों के रूप में थे जो अब काला धन बना दिए गए हैं।  गरीब लोग पैसे बदलवाने के लिए सारा दिन बैंकों की लाइन में लगे रहते हैं। अमीर लोग बैंक कर्मचारियों से मिलीभगत करके अपना कैश बदलवा रहे हैं। इसकी वजह से जरूरतमंद लोग अपने ही खाते से पैसे नहीं निकलवा पा रहे। जो इस बात का सबूत है कि सरकार गरीबों को तंग करके अमीरों को मालामाल कर रही है। उनके साथ मौजूद तिलक राज कूनरा ने भी अपने घर शादी कार्ड दिखाया। इस अवसर पर लड़की के नज़दीकी रिश्तेदार प्रेम चंद गोयल ने कहा कि वह मानवाधिकार के तहत सरकार पर केस भी दायर करेंगे। इस अवसर पर केवल सिंह बनवैत, डॉ. अरुण मित्रा, रणधीर सिंह और रामाधार सिंह भी मौजूद रहे।
भाकपा नेता डाक्टर अरुण मित्रा ने कहा कि नोटबन्दी का कालेधन से कोई लेना देना नहीं। यह एलान गरीबों की मेहनत से की गई की गई कमाई पर साज़िशाना हमला है और यह रकम माल्या और अम्बानी-अडानी जैसे अमीरों की तिजौरियां भरने के लिए  जानी है। उन्होंने इस मामले से सबंधित कई बारीकियों की चर्चा करते हुए पूछा कहाँ से आएगा  काला धन?

Thursday, August 25, 2016

निगम मुलाज़िमों ने की लुधियाना में राज्य स्तरीय बैठक

अब अधिकारों की जंग होगी और तेज़ 
लुधियाना: 25 अगस्त 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
सीवरेज के बिना ज़िन्दगी की कल्पना मुश्किल है। गटर---सीवरेज--बहुत ही आम सा नाम लेकिन इसे उसी वक़्त गम्भीरता से लिया जाता है जब यह जाम हो जाये। उस वक़्त सीवरेज को खोलने वाला साधारण सा मुलाज़िम बहुत महत्वपूर्ण लगने लगता है। गन्दगी और गैस से भरे  गटर में जब वह उतरता है तो उसके साथ कुछ भी हो सकता है। फेक्ट्री और घरों से कई बार गन्दगी और गर्म पानी उसके सर पर आ कर गिरता है। गैस उसकी सांस के साथ उसके दिमाग को चढ़ती है। कई बार उसकी वहीँ पे मौत हो जाती है और कई बार अस्पताल में पहुँच कर। अगर वह बच भी जाये तो उसके स्वास्थ्य में इतनी गड़बड़ियां पैदा हो जाती हैं जिनकी वजह से कभी भी कोई गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। इस तरह की ख़बरों को आये दिन अख़बारों में पढ़ कर भी समाज ने कभी उनके लिए गम्भीरता से नहीं सोचा। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इस तरह के सभी मुद्दों को लेकर राज्य स्तरीय बैठक बुलाई कुछ यूनियन नेतायों ने मिल कर।  तकरीबन सभी ज़िलों से प्रमुख और सक्रिय लोग इस बैठक में शामिल हुए।  इन मुलाज़िमों की ज़िन्दगी की कीमत का अहसास सरकार  और समाज को कैसे हो इस पर विस्तृत विचार विमर्श किया गया। देखिये इस बैठक की एक संक्षिप्त कैमरा रिपोर्ट। 
इस बैठक में लुधियाना से कामरेड विजय कुमार, मोगा से सतपाल अनजान, मोहाली से विनोद कुमार चुघ, लुधियाना के अन्य जोनों से महिपाल, दरोगी, शामलाल और अन्य बहुत से सरगर्म कार्यकर्ता शामिल हुए।