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Thursday, August 02, 2018

कन्हैया-शहेला और गुरमेहर का लुधियाना आना बहुत गहरी बात

वोट हथियाने वालों के मायाजाल को तोड़ने में मिलेगी सहायता 
लुधियाना: 2 अगस्त 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
स्पीकिंग माइंड्स यूथ कॉन्क्लेव के आयोजन में जो हुआ वो होना ही था। आज के दौर की हकीकत बन चुकी है भटकन। वह भटकन इस आयोजन में भी दिखी। इसमें निमंत्रित लोगों की विचारधारा क्या है इससे सभी अवगत हैं। इस बहस के दौरान भी सभी लोग अपने अपने विचार पर अडिग रहे। अपने अपने विचार पर अडिग रहने के इस संकल्प ने इस बहस को काफी इंट्रेस्टिंग भी बनाया। 
गुरु नानक देव भवन में वीरवार को दो दिवसीय स्पीकिंग माइंड्स यूथ कॉन्क्लेव शुरू हुआ। इसमें लुधियाना और राज्य के अन्य शहरों से आए छात्र छात्राओं ने सक्रिय हिस्सा लिया। इसमें पहले दिन ऑनलाइन क्रिएटिव इंडस्ट्री और इसका भविष्य, यूथ लीडरशिप और नेशन बिल्डिंग, राष्ट्रवाद का मतलब और बोलने की आजादी जैसे विषयों पर चर्चा की गई। काफी समय से यह सभी मुद्दे बहुत नाज़ुक बने हुए हैं। राष्ट्रवाद का अर्थ और बोलने की आजादी के विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन में यह बहस ज़्यादा गरमाई तो इस पैनल डिस्कशन में भाग लेने वाले अपने अपने स्टैंड पर डटे रहे। इस माहौल मैं ऐसा ज़रूर लगा कि मुद्दे से भटक कर पैनलिस्ट एंटी और प्रो मोदी गवर्नमेंट की चर्चा में पहुंच गया। कन्हैया जहां खुद को जेल भेजे जाने की बात कहते रहे। वहीं, शेहला ने भी यूनिवर्सिटी में आ रही परेशानियां सामने रखीं।  गौरतलब है की जे एन यू राष्ट्रवाद  का प्रतीक बानी रही है। इस डिस्कशन में मुद्दा राष्ट्रवाद का अर्थ और बोलने की आजादी का था। यहां तक की चर्चा के दौरान शेहला राशिद और प्रदीप भंडारी में बहस होने के कारण कौंसलर ममता आशू को मामले को शांत करवाना पड़ा। जिन लोगों को जे एन यू में हुए छात्र आंदोलन याद हैं उनको याद होगा कि राष्ट्रवाद और जेएनयू आपस में कितना गहरा जुड़े हुए हैं। जेएनयू की स्वायत्ता भरी जीवनशैली पर प्रहार उस समय भी राष्ट्र के एकता पर प्रहार गिना गया था। 
गुरुनानक भवन में शेहला ने डिस्कशन के दौरान रोके जाने पर प्रदीप पर मुस्लिम महिला होने के कारण न बोलने देने का आरोप लगाया। ममता आशू ने पैनलिस्ट को अपने मुद्दे पर रहने के लिए कहा। इसके बाद चर्चा को वापस विषय पर लाया जा सका। पहले दिन जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन के पूर्व प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार, एक्टिविस्ट गुरमेहर कौर, जन की बात ओपिनियन पोल चलाने वाले प्रदीप भंडारी, बीजेवायएम के स्टेट स्पोक्स पर्सन विक्रम बावा, जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की पूर्व वाइस प्रेसिडेंट शेहला राशिद, पंजाब कांग्रेस के स्पोक्स पर्सन गौतम सेठ, एक्ट्रेस श्रेया मेहता, जसमीत सिंह भाटिया, शिवांकित परिहार मुख्य पैनलिस्ट रहे। कौंसलर ममता आशू, बलजीत कौर, शोभन सोईं मौजूद रहे। बहुत से न्य लोग भी मौजूद रहे। 
लम्बी इंतज़ार के बाद पहुंचे कन्हैया ने स्टेज पर ही अपने विचार रखे, लेकिन मीडिया से खुद को बचाते हुए वापस निकल गए। कन्हैया सिक्योरिटी की आड़ में कॉन्क्लेव खत्म होते ही तुरंत हॉल से निकल गए। वहीं, स्टेज पर मोदी पर ही प्रहार करते रहे। कन्हैया ने कहा कि देश में राष्ट्रवाद की बहस होनी ही नहीं चाहिए। सरकार अपने गलत कामों को छुपाकर दूसरों के गलत कामों को उजागर कर रही है। देश में माहौल जो बनाया जा रहा है, उस पर सवाल उठाना सही नहीं कहा जा रहा जो बोलने की आजादी पर रोक है। कन्हैया बोले, देश की आलोचना करना देशद्रोही होना नहीं है। इससे पूर्व भी कन्हैया ने मीडिया के कुछ चुंनिंदा लोगों से अनौपचारिक भेंट में कई बातें कहीं जिन्हें अलग से दिया गया है। 
कुल मिला कर स्पीकिंग माईन्डज़ का आयोजन लुधियाना और आसपास के क्षेत्र राजनीतिक और  समाजिक मुद्दों पर बहस छेड़ने में कामयाब रहा। इस बहस से निश्चित ही एक नयी चेतना जन्म लेगी जो आम जनता को वोट हथियाने वाले तत्वों के मायाजाल को देखने की क्षमता भी देगी और इस चक्रव्यूह को तोड़ने की शक्ति भी। 
इससे पूर्व कन्हैया कुमार ने आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के कार्यकर्ताओं की एक विशेष मीटिंग को भी अलग से सम्बोधित किया। यह बैठक एक जानेमाने वाम नेता के घर में रखी गयी थी।