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Saturday, December 28, 2019

वर्ष 2019 के अंत में, आधार की संख्‍या 125 करोड़ से अधिक हो गई है

27th December 2019 3:45 PM by PIB Delhi
प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ प्रमाणीकरण अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं
नई दिल्ली: 27 दिसंबर 201प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ प्रमाणीकरण अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं9: (पीआईबी)::
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने यह घोषणा की है कि आधार परियोजना ने 125 करोड़ के अंक को पार करके नई उपलब्धि हासिल की है। इसका मतलब यह है कि भारत के 125 करोड़ से अधिक निवासियों के पास 12 अंकों की विशिष्ट पहचान उपलब्‍ध है।

      यह उपलब्धि आधार धारकों द्वारा आधार के प्राथमिक पहचान दस्तावेज के रूप में तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण हासिल हुई है। यह इस तथ्य से यह स्पष्ट है कि आधार-आधारित प्रमाणीकरण सेवाओं का शुरूआत से अब तक लगभग 37,000 करोड़ बार उपयोग हो चुका है। वर्तमान में यूआईडीएआई को प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ प्रमाणीकरण अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं।

      इसके अलावा आज नागरिक आधार में अपने विवरण को अद्यतन रखने के अधिक इच्छुक हैं। यूआईडीएआई ने अब तक लगभग 331 करोड़ सफल आधार अपडेट (बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय) दर्ज किए हैं। वर्तमान में यूआईडीएआई को रोजाना लगभग 3-4 लाख आधार अपडेट अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं।
(आरकेमीणा/आरएनएम/एएम/आईपीएस/एसके–4981
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Monday, August 01, 2016

‘आधार’ में अपने मोबाइल नम्‍बर को दर्ज अथवा अद्यतन कराएं


01-अगस्त-2016 19:48 IST
सरकारी सेवाओं तक आसान ऑनलाइन पहुंच के लिए ज़रूरी
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने विभिन्‍न सरकारी सेवाओं तक आसान ऑनलाइन पहुंच सुनिश्चित करने के लिए देश के निवासियों को ‘आधार’ में अपने मोबाइल नम्‍बर को दर्ज अथवा अद्यतन कराने की सलाह दी है। 
यूआईडीएआई के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अजय भूषण पांडेय ने कहा, ‘लोग अपने विशिष्‍ट एवं गैर-अस्‍वीकार्य पहचानकर्ता आधार का उपयोग करके विभिन्‍न सरकारी सेवाओं का ऑनलाइन लाभ घर बैठे अथवा बगैर परेशानी के किसी भी जगह से हासिल कर सकते हैं। जिन्‍होंने आधार संबंधी नामांकन के दौरान अपने मोबाइल नम्‍बर का पंजीकरण नहीं कराया है, उन्‍हें आधार में अपने मोबाइल नम्‍बर को बाकायदा दर्ज अथवा अद्यतन करा लेना चाहिए, ताकि किसी प्रयास के बगैर ही उनकी पहुंच सरकारी सेवाओं तक सुनिश्चित हो सके। आधार पर आधारित ओटीपी पहचान निवासियों को बगैर किसी परेशानी के इन सेवाओं को हासिल करने की सुविधा प्रदान करती है।’ 
यूआईडीएआई ने सार्वजनिक उपयोग वाले विभिन्‍न उन अनुप्रयोगों जैसे कि डिजी-लॉकर, ईसाइन, र्इएनपीएस, ई-हॉस्पिटल, आयकर रिटर्न (आईटीआर) की ई-जांच इत्‍यादि को ध्‍यान में रखते हुए यह सलाह दी है, जिन्‍हें सरकारी विभागों द्वारा पहचानकर्ता के रूप में ‘आधार’ का उपयोग करते हुए शुरू किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, ‘डिजी-लॉकर’ की सुविधा के तहत निवासी अपने आधार का उपयोग करते हुए डिजिटल लॉकर हो सकते हैं और अपने मूल्‍यवान दस्‍तावेज उस लॉकर में रख सकते हैं। इसी तरह ‘आधार ईसाइन’ सुविधा के तहत निवासी नकद रहित, उपस्थिति रहित और कागज रहित तरीके से बगैर किसी परेशानी के अनेक सेवाओं को ऑनलाइन हासिल करने के लिए डिजिटल हस्‍ताक्षर का उपयोग कर सकते हैं। कोई भी व्‍यक्ति आधार पर आधारित ईसाइन सुविधा का उपयोग करके पैन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है अथवा अपने पैन कार्ड को ऑनलाइन अपडेट कर सकता है। ई-हॉस्पिटल सेवा के तहत कोई भी निवासी ‘आधार’ के जरिये लम्‍बी लाइन में खड़े हुए बिना ही एम्‍स अथवा किसी भी अस्‍पताल में डॉक्‍टर से दिखाने का समय ऑनलाइन ले सकता है। आयकर विभाग ने निवासियों को ‘आधार’ का उपयोग करके आयकर रिटर्न की ई-जांच की सुविधा प्रदान की है और ऐसे में भौतिक रूप से किसी भी कागज अथवा दस्‍तावेज को भेजने की जरूरत नहीं पड़ती है। इन सभी सेवाओं में आधार पर आधारित ओटीपी पहचान का उपयोग किया जा रहा है, ताकि देश के निवासियों की पहचान बगैर किसी परेशानी के हो सके और इसके साथ ही उन्‍हें वि‍भिन्‍न सेवाएं सुविधाजनक ढंग से ऑनलाइन मिल सके। 

डॉ. पांडेय ने कहा, ‘इस तरह की ऐसी किसी भी सेवा को ऑनलाइन पाने के लिए देश के निवासियों को अवश्‍य ही अपने मोबाइल नम्‍बर को आधार में दर्ज करा लेना चाहिए जिनके लिए आधार पर आधारित ओटीपी पहचान का उपयोग किया जा रहा है।’ 

103.5 करोड़ से भी ज्‍यादा ‘आधार’ के सृजन के साथ ही यूआईडीएआई ने देश भर में 23000 से भी ज्‍यादा स्‍थायी नामांकन केंद्र (पीईसी) खोल रखे हैं। देश के निवासी अपने किसी भी निकटवर्ती पीईसी में जाकर अपने मोबाइल नम्‍बर को आधार में अपडेट करा सकते हैं। स्‍थायी नामांकन केंद्रों की सूची https://resident.uidai.net.in पर उपलब्‍ध है। 
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Wednesday, September 02, 2015

लुधियाना के बैंकिंग क्षेत्र में भी हुयी ज़बरदस्त हड़ताल

Wed, Sep 2, 2015 at 1:59 PM
श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ फिर बुलंद हुयी देश की आवाज़ 
लुधियाना: 2 सितम्बर 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
स्थान था लुधियाना का भारतनगर चौंक में स्थित केनरा बैंक जहाँ गूँज रहा था आकाश जन विरोधी नीतियों के खिलाफ। 
मकसद था : * कामगार विरोधी श्रम सुधारों का विरोध

                  * जनविरोधी बैंकिंग सुधारों का विरोध  

प्रमुख मांगें हैं:

* कामगार विरोधी श्रम सुधार रोके जायें
* जनविरोधी बैंकिंग सुधार रोके जायें
* कार्पोरेट ऋण चूककरर्ताओं द्वारा जनता के धन की लूट रोकी जाए
* बैंक ऋणों को जानबूझकर अदा न करना फौजदारी अपराध घोषित किया जाए
* बैंक कार्यों की आउटसोर्सिंग रोकी जाए
आल इंण्डिया बैंक इम्पलाईज़ एसोसिएशन (एआईबीईए), एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीओसी, एनओबीड्बल्यु, आईएनबीईएफ एवं एनओबीओ ने आज 2 सितंबर 2015 को केन्द्रीय सरकार की कामगार विरोधी नीतियों के विरुद्ध हड़्ताल की । देश भर के 100 मिलीयन से अधिक मजदूर/कामगार आज राष्ट्रव्यापी हड़्ताल पर हैं । यह वर्तमान एन.डी.ए. सरकार की कामगार विरोधी नीतियों के विरोध में सबसे ताकतवर लड़ाई है । 
पंजाब बैंक इम्पलाईज़ फैडेरेशन (लुधियाना इकाई) ने आज एक दिवसीय हड़ताल की और केनरा बैंक, भारत नगर चौंक, लुधियाना के सामने जबरद्स्त प्रदर्शन किया । कामरेड पी.आर.मेहता, प्रधान, कामरेड नरेश गौड़, सचिव, कामरेड हरविन्द्र सिंह, सीनियर उप-प्रधान, कामरेड पवन ठाकुर, प्रधान, पंजाब बैंक इम्पलाईज़ फैडेरेशन (लुधियाना इकाई), कामरेड गुरमीत सिंह, कामरेड चिरंजीव जोशी, आल इंण्डिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन से एवं कामरेड डी.पी.मौड़, महा सचिव, ज्वाईंट काऊंसिल आफ ट्रेड यूनियन्स ने बैंक कर्मचारियों को संबोधित  किया।
बैंक कर्मचारियों को संबोधित करते हुए फैडेरेशन के नेताओं ने कहा कि हम सभी को ज्ञात है कि कामगारों पर हमले बढ़ रहे हैं और श्रम संगठन अधिकारों पर और सुविधाओं पर हमले बढ़ रहे हैं तथा हमारे देश में मालिकों को सुविधाएं प्रोत्साहन और छूट बढाई जा रही है । विभिन्न श्रम कानूनों को मालिकों के पक्ष में संशोधित करने तथा मज़दूरों के विरुद्द करने के खुले प्रयास चल रहे हैं । नव उदार आर्थिक नीतियों न केवल कामगारों वरन जन सामान्य की समस्याएं भी बढा  रही हैं । सरकार के कुछ प्रस्तावों और नीतियों का प्रारुप इस प्रकार है - श्रम कानूनों को संशोधित कर मालिकों को ऐसी शक्तियां देना जिससे उन्हें "रखो और निकालो" का अधिकार मिल जाए, कामगारों और श्रम संगठनों को उनके अधिकारों से वंचित करना, रणनीतिक क्षेत्रों जैसे रेलवे, सुरक्षा और वित्तीय क्षेत्रों में निर्वात सीधा विदेशी निवेश, वर्तमान भूमि अधिग्रहण कानून में व्यापक परिवर्तन, कृषकों की भूमि व कृषि कामगारों के जीवन यापन के अधिकारों को व्यापक रुप से कुचलना और कटौती करने के प्रयास, ईपीएफ और ईएसआई योजनाएं एच्छिक बनाने का प्रस्ताव, मौलिक सामान्य सुरक्षा ढांचा, जो संगठित क्षेत्र को  उपलब्ध हैं, को तहस नहस करने का प्रयास इत्यादी ।      
बैंकिंग उद्दोग कोई अपवाद नहीं है । बैंकिंग उद्दोग में हमें पहले ही पता है कि सरकार अपने कथित सुधारों के निरंतर प्रयास आगे बढ़ा रही है, जिसकी कार्य सूची में प्राथमिकता के आधार पर बैंकों का निजीकरण सुदृढ़ीकरण और विलय आदि है । अधिक से अधिक निजी पूंजी और सीधे विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया  जा रहा है । क्षेत्रिय ग्रामीण बैंकों के निजीकरण का प्रयस चल रहा है और इस संदर्भ में हमारी यूनियनों के विरोध के बावजूद संसद में इस संदर्भ में विधेयक पारित कर दिया गया है । प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों में (पीएसी) समेटे जाने के खतरे में है । शहरी साहकारी बैंक लाईसेंस समाप्त किये जाने के खतरे में हैं । निजी क्षेत्र के कार्यकारियों को सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों में थोपा जा रहा है । बिना किसी ढांचागत सुविधा और कर्मचारियों के बढाए सरकारी नीतियों को सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों पर थोपा जा रहा है । बैंक अधिकारियों को काम के नियमित घंटों से वंचित किया जा रहा है । स्थाई और नियमित कार्यों को ठेका आधार पर आउट्सोर्स किया जा रहा है और ठेका कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है । सरकार अपनी कार्य सूची पर आगे बढ़ रही है और श्रम संगठनों से बिना समुचित विचार विमर्श किये बिना श्रम कानूनों को संशोधित करेगी । इस लिए यह आवशयक तथा अनिवार्य है कि सार्वभौम श्रम संगठन आंदोलन से जुड़ा जाए और सरकार की इन श्रम विरोधी नीतियों के विरुद्द अपना विरोध दर्ज किया जाए ।      

Sunday, May 10, 2015

आज सभी मतदान केन्द्रों में बैठेंगे बी.एल.ओ

Sat, May 9, 2015 at 1:18 PM
आधार कार्डों को वोटर कार्डों से जोडऩे का होगा कार्य
लुधियाना, 9 मई 2015: (अमरीक सिंह घुंगराणा//पंजाब स्क्रीन):
आधार पहचान पत्रों को वोटर कार्डों से जोडऩे हेतु भारतीय चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक 10 मई दिन रविवार सुबह 9 से शाम 5 बजे तक पंजाब के सभी मतदान केन्द्रों में संबंधित बूथ लेवल अफसर बैठेंगे। जिन लोगों के आधार कार्ड उनके वोटर कार्डों से नहीं जुड़े हैं, वे अपना आधार कार्ड लेकर संबंधित मतदान केन्द्र पर पहुंचें। यह जानकारी दी बूथ लेवल ऑफिसरज एसोसिएशन (पंजाब) के महासचिव अमरीक ङ्क्षसह घुंगराना ने दी।
इस अवसर पर उन्होंने सभी वोटरों से अपील की है कि वह बूथ लेवल अफसरों को सहयोग दें। इससे उनके आधार कार्डों को वोटर कार्डोँ के साथ जोडऩे सहित वोटर कार्ड में गल्तियों को भी दुरुस्त किया जाएगा।

Wednesday, August 28, 2013

आधार कार्ड बनाना:लोगों के लिए बना नई सर दर्द

दफ्तर खुलने से पहले ही एकत्र हो जाते हैं फ़ार्म
लुधियाना: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): आधार कार्ड का खुय्द अपना आधार कितना खोखला और अनियमित है इसका एक नया मामला सामने  आया है  जगराओं और आसपास के इलाकों की है जहाँ आधार कार्ड बनाने के लिए लगे कैंप में आये लोगों को बुरी तरह निराश करके वापिस भेज दिया जाता है। कहा जाता है यह की आज का कोटा पूरा हो चूका है इसलिए फिर किसी दिन आना। दिलचस्प बात यह की यह कोर जवाब उस समय सुबह सुबह ही दे दिया जाता है जब कैंप आफिस का ताल भी नहीं खुला होता। हैरानी की बात है कि ताला खुलने से पूर्व ही निश्चित कोटे के फ़ार्म किसने और कहाँ से पूरे कर लिए। सरकारी विज्ञापनों में आधार कार्ड बनाने के लिए प्रचारित की जाने वाली सुविधाएं और घोषनाएं एक मजाक बन कर रह गयी हैं। वास्तव में हर सरकारी काम की तरह आधार कार्ड बनवाना भी आम लोगों के लिए एक अच्छी खासी मुसीबत बन गयी है। लोग सुबह चार बजे से ही कार्ड बनवाने के लिए लाइन में लग जाते हैं, फिर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। इसी बात को लेकर मंगलवार के दिन २७ अगस्त को लोग बड़ी संख्या में गुस्से में आ गए। वे अपनी दिहाड़ी तोड़ कर वहां आये थे और ऊपर से मिला कोर जवाब। भडके हुए इन लोगों को पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शांत तो कराया पर इस गुस्से का कारण कौन दूर करेगा। कौन कराएगा इसकी जांच कि वास्तव में जान पहचान के लोगों से अग्रिम धन लेकर उनके फार्मों से ही कोटा पूरा कर लिया जाता है। 
 कोटा पूरा होने के बाद आम जनता के लिए एक कोर जवाब या ताल मटोल ही बाकि बचता है! जानकारी के अनुसार जगराओं के बीडीपीओ दफ्तर में लगे आधार कार्ड कैंप में मंगलवार को करीब सुबह छह बजे कुछ लोग कार्ड बनवाने पहुंचे। लेकिन सुबह सुबह वहां पहले से ही मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें यह कहकर वापस जाने को कहा कि आज केवल 70 कार्ड ही बनेंगे। उसने इसका कारण बी बताया कि आज केवल 70 कार्ड बनेंगे और उतने फार्म पहले से ही उनके पास आ चुके हैं इसलिए आप किसी और दिन आइएगा। सवाल उठता है क्या कोटे के निश्चित 70 फ़ार्म क्या घर घर जाकर आधी रात को एकत्र कर लिए गए थे? अगर नियम पहले आओ पहले पाओ का है तो यह नियम ताल खुले बिना पूरा ही कैसे हुआ? यह सारा ड्रामा देख कर वहां मौजूद लोग गुस्से में आ गए और उक्त व्यक्ति से पूछने लगे कि वो कौन होता है आधार कार्ड के निवेदन पत्र लेने वाला, जबकि दफ्तर में अभी ताला लगा है। इसका कोई ठोस जवाब न था और न ही मिला। 
यह बुरी हालत केवल एक कैंप की नहीं बल्कि कई स्थानों की है। गांव शेरपुरा के पूर्व फौजी जगजीत सिंह, गुरदित सिंह व बेअंत कौर ने भी इस बारे में कहा कि वह और उनके साथ दर्जनों लोग पिछले तीन दिनों से कार्ड न बनने कारण लौट रहे हैं। आज भी वह सुबह करीब पांच बजे से आए थे लेकिन उसने पहले ही वह व्यक्ति करीब 70 फार्म लिए हुए था। जबकि कार्ड बनने का काम सुबह नौ बजे से होता है। इसके बाद कर्मचारी के आते ही कार्ड न बनने से परेशान लोगों ने उसके साथ बहस शुरू कर दी। इसके बाद मामला बढ़ते देख पुलिस को भी सूचना दी गई। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंच कर लोगों को शांत कराया तथा कार्ड बनवाने का काम शुरू कराया।
लोग जब उठते हैं तो फिर कुछ किये बिना बैठने का नाम भी नहीं लेते। यहाँ भी कुछ ऐसे ही हुआ। लोग जब कुछ ज्यादा ही गुस्से में आये तो उन्होंने ढूँढ निकला। मिलने पर आधार कार्ड कैंप के प्रमिंदर सिंह ने बताया कि एक दिन में करीब 70 कार्ड बनाने की प्रक्रिया मुकम्मल होती है। इसलिए जो भी पहले 70 लोग आते हैं उनका ही फार्म लिया जाता है। अब देखना है यह है कि इस सरे सिस्टम को पारदर्शी और सुविधाजनक कैसे है?  

आधार कार्ड से सबंधित कुछ अन्य खबरें 

Tuesday, August 27, 2013

रसोई गैस सब्‍सि‍डी:देश के 20 जिलों में आधार कार्ड अनिवार्य

27-अगस्त-2013 19:58 IST
प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण जि‍लों में आधार अनि‍वार्य 
2.4 मि‍लि‍यन उपभोक्‍ताओं को सब्‍सि‍डी उनके बैंक खातों में 
रसोई गैस के लि‍ए प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण योजना देश के 20 जि‍लों में शुरू की गई है। कुल 7.3 मि‍लि‍यन उपभोक्‍ता इसके दायरे में है। बैंक खातों में नकद सब्‍सि‍डी के हस्‍तांतरण के लि‍ए उपभोक्‍ता के पास आधार संख्‍या होनी चाहि‍ए जो उसके बैंक खाते से जुड़ी होनी चाहि‍ए। इसके लि‍ए योजना जारी करने के समय से 3 महीने की अवधि‍ नि‍र्धारि‍त की गई है।
उपरोक्‍त 20 जि‍लों में अब तक 3.5 मि‍लि‍यन उपभोक्‍ताओं ने अपनी आधार संख्‍याओं को रसोई गैस उपभोक्‍ता संख्‍याओं और अपने बैंक खातों से जोड़ दि‍या है। इन 20 जि‍लों में 2.4 मि‍लि‍यन उपभोक्‍ताओं को अपने बैंक खातों के जरि‍ए सीधी सब्‍सि‍डी प्राप्‍त हो रही है। बहरहाल, बाजार मूल्‍य पर रसोई गैस सि‍लेंडर प्राप्‍त करने के लि‍ए आधार संख्‍या की आवश्‍यकता नहीं है।
प्रथम चरण के 20 जि‍लों का ब्‍यौरा इस प्रकार है:-
क्रम संख्‍या
राज्‍यों के नाम
जि‍लों के नाम
1.       
आंध्र प्रदेश
अनंतपुर
2.
चि‍त्‍तूर
3.
पूर्वी गोदावरी
4.
हैदराबाद
5.
रंगारेड्डी
6.
दमन और दीव
दीव
7.
गोवा
उत्‍तरी गोवा
8.
हि‍माचल प्रदेश
बि‍लासपुर
9.
हमीरपुर
10.
मंडी
11.
उना
12.
कर्नाटक
मैसूर
13.
तुमकुर
14.
केरल
पथनमथि‍ट्टा
15.
व्‍यानाड़
16.
महाराष्‍ट्र
वर्धा
17.
पुदूचेरी
पुदूचेरी
18.
पंजाब
नवांशहर
19.
मध्‍य प्रदेश
पूर्वी नि‍माड़(खंडवा)
20.
हरदा
PIB  
वि‍.कासोटि‍या/पांडे/अंबुज-5880

पंजाब: अभी भी नहीं बने सभी के आधार कार्ड 
कहीं जाली आधार कार्डों का आधार तो नहीं बन रहा-चोरी हुआ डाटा ?
सरकारी सब्सिडी के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं-राजीव शुक्ल 

Monday, August 26, 2013

पंजाब: अभी भी नहीं बने सभी के आधार कार्ड

कहीं जाली आधार कार्डों का आधार तो नहीं बन रहा-चोरी हुआ डाटा ?
सरकारी सब्सिडी के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं-राजीव शुक्ल 
आधार कार्ड बनाने का प्रचार भी जोरशोर से चला और इसका तथाकथित अभियान भी।  पर यह रहा पूरी तरह से नाकाम ही क्यूंकि इस सारे अभियान का परिणाम यह हुआ कि बहुत से लोग इस कार्ड को अभी भी नहीं बनवा पाए। कुछ "नासमझ" लोगों को यह लगा कि क्या फर्क पड़ने वाला है। कुछ ज्यादा ":अक्लमंद" लोगों को लगा की हम कोई मुजरिम थोड़े हैं कि अपनी पुतलियों की तस्वीरें भी खिंचवा कर दें और उँगलियों के निशान भी! उन्ह्वें शक था कि हर काम में किसी न किसी निर्दोष को यूं ही फंसा देने वाला यह सिस्टम कहीं हमें भी न फंसा दे। इसी बीच कुछ शातिर किस्म के लोग इसके कैंप लगवा कर इन कार्डों को  बनवाने का पुण्य भी अर्जित करते रहे और साथ ही साथ प्रति कार्ड दो दो सो रूपये कमाने का कारोबार करते भी बताये गए।  अगर कोई इनके पास जाता तो कार्ड की औपचारिकता झट से पूरी हो जाती और अगर कोई सीधा किसी सरकारी कार्यालय में जाता तो उसे हजारों झंझट और वह फिर लौट आता इन्हीं लोगों के पास।  आखिरकार हुआ यह कि समय निकल गया और बहुत से लोग अभी भी इन आधार कार्डों के बिना रह गये।  उन्हें अपना आधार खिसकता तब महसूस जब सरकार ने एक बयान के जरिये एक ऐलान जारी किया कि अब नया गैस सिलेण्डर इस आधार कार्ड के बिना बुक ही नहीं होगा। 
इस बयान के अनुसार एक सितंबर, 2013 से गैस सिलेंडर को मिलने वाली सब्सिडी, पेंशन खाताधारक के खाते में सीधी जाएगी। बस इस बयान के आते ही पूरे पंजाब में हलचल मच गई। गौरतलब है कि अभी बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनके आधार कार्ड लाख चाहने के बावजूद भी नहीं बने हैं। पंजाब भर में बहुत से लोग ऐसे भी होंगें जिन्होंने आधार कार्ड बनने के लिए तो दिए हैं और दस माह बीतने के बावजूद उन्हें आधार कार्ड नहीं मिले। कई इसे हैं जो केवल कम्प्यूटे से निउक्लि पर्ची पर संतोष करके बैठे हैं। 
दोराहा में रामगढि़या विश्वकर्मा फ्रंट पंजाब के प्रांतीय सेक्रेटरी बरजिंदर सिंह जंडू व बलविंदर सिंह मठारू ने इस सरे मामले पर घन निराश व्यक्त करते हुए कहा कि आधार कार्ड के लिए जब भी इंटरनेट के उपर दिए गए नंबरों पर फोन करते हैं तो जवाब में उन्हें कोई ठोस उत्तर नहीं मिलता। दूसरी ओर आधार कार्ड की वेबसाइट पर दिए नंबरों पर जब संपर्क करते हैं तो वहां कोई फोन नहीं उठाता। बहुत से आधार कार्डो का जब स्टेटस चेक किया जाता है तो उनका स्टेटस आता है कि आपकी इनरोलमेंट असफल हो गई है, कृपया दोबारा इनरोल करवाएं। लोग हैरान हैं कि आखिर इतना डाटा कहां गया। जिन लोगों ने अपना कामकाज छोड़कर आधार कार्ड बनवाने के लिए जद्दोजहद की, उन्हें दोबारा से लाइनों में लगाना होगा।
इसी तरह लुधियाना के अहाता शेरगंज इलाके के कुछ लोगों ने बताया की सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उनके कार्ड नहीं बने। अधिकारी कहते हैं की उनके कम्प्यूटर से डाटा चोरी हो गया।  अब स्वकाल उठता है की डाटा चोरी कैसे हुआ और उसका पता क्यूं नहीं लगाया गया। कहीं एस तो नहीं की वही डाटा किसी समाज विरोधी या आतंकी सन्गठन के हाथ लगा गया हो और उस डाटा के आधार पर कई लोगों के जाली आधार कार्ड तैयार हो जायें! अब देखना यह भी है कि इस तरह की चोरी और कहाँ कहाँ हुई?  
इसी बीच शुक्रवार को ही सरकार ने साफ तौर पर ख दिया था कि सरकारी सब्सिडी का फायदा लेने के लिए आधार कार्ड को अभी तक अनिवार्य नहीं बनाया गया है, फिर चाहे मामला एलपीजी का हो या कुछ भी और। संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि वह पहले ही संसद में साफ कर चुके हैं कि सब्सिडी वाली किसी भी सरकारी योजना के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। इसे पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई केंद्रीय उद्यम ऐसा कर रहा है तो उसमें सुधार किया जाएगा। उम्मीद है कि सरकार का सपष्टीकरण आने के बाद लोग राहत की सांस लेंगें और इस आधार कार्ड को बनाने बनवाने के मांमले में पारदर्शिता भी आएगी और तेज़ी भी। 
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रसोई गैस सब्‍सि‍डी:देश के 20 जिलों में आधार कार्ड अनिवार्य 

Tuesday, August 20, 2013

‘‘अपने ग्राहक को जानिए’’ अब हुआ बहुत ही आसान

                                                                                                                    19-अगस्त-2013 20:02 IST
आधार ने (केवाईसी) प्रक्रिया को बनाया कागज विहीन  
भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण आधार कार्ड की सहायता से ‘‘अपने ग्राहक को जानिए’’ (केवाईसी) की पूरी प्रक्रिया को कागज विहीन, सुरक्षित और फायदेमंद बना रहा है। प्राधिकरण को उम्‍मीद है कि केवाईसी की प्रक्रिया इलैक्‍ट्रोनिक हो जाने से ग्राहकों को सुविधा रहेगी और वे आसानी से पहचान और पता दाखिल कर सकेंगे। ग्राहकों के वर्तमान खातों में भी आधार नम्‍बर आ जाएगा।
वित्‍त मंत्रालय पहले ही ई-केवाईसी को वित्‍तीय सेवाओं के लिए एक वैध दस्‍तावेज घोषित कर चुका है। ई-केवाईसी सेवा का उपयोग करके नागरिक, प्राधिकरण को केवाईसी संबंधी जानकारी उनके सेवा प्रदाता को उपलब्‍ध कराने के लिए अधिकृत कर सकेंगे। तब प्राधिकरण संबद्ध नागरिक का नाम, पता, जन्‍म तिथि, लिंग, फोटो मोबाइल नम्‍बर और ई-मेल आदि सेवा प्रदाता को उपलब्‍ध करा सकेंगे।
      आधार केवाईसी सेवा की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं :-----
1.                  कागज विहीन – यह सेवा पूर्ण रूप से इलैक्‍ट्रोनिक है और इसमें कागजी दस्‍तावेजों की प्रबंधन की आवयकता नहीं पड़ेगी।
2.                  सहमति पर आधारित – आधार प्राधिकरण केवाईसी संबंधी जानकारी संबद्ध नागरिक की सहमति से ही किसी को उपलब्‍ध कराएगा और इस तरह नागरिक की निजता सुरक्षित रहेगी।
3.                  दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा समाप्‍त होगा – इस प्रक्रिया में विभिन्‍न दस्‍तावेजों की फोटो प्रतियों की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी। प्राधिकरण ही ई-केवाईसी डेटा सेवा प्रदाता को उपलब्‍ध कराएगा इसलिए दस्‍तावेजों में फर्जीवाड़ा संभव नहीं होगा।
4.                  आई टी कानून के अनुरूप सुरक्षित – डेटा हस्‍तांतरण की प्रक्रिया सूचना प्रौद्योगिकी कानून 2000 के अनुरूप होगी और इसमें डिजिटल हस्‍ताक्षर होंगे।
5.                  कम लागत रहेगी – प्रमाणिक कागजी दस्‍तावेजों की आवश्‍यकता नहीं रहने से उस प्रक्रिया से तैयार केवाईसी पर लागत बहुत कम हो जाएगी।
6.                 तात्कालिकता – यह सेवा पूर्ण रूप से स्‍वचालित होगी। इसलिए इसमें केवाईसी डेटा तत्‍काल उपलब्‍ध हो सकेगा।
ई-केवाईसी के लाभ
     ई-केवाईसी में दस्‍तावेजों और फोटो कापी आदि को इधर-उधर ले जाने की आवश्‍यकता नहीं होगी। इस तरह उनकी दस्‍तावेजों की चोरी अथवा उन्‍हें कहीं भूल जाने से होने वाली कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे पर्यावरण को लाभ पहुंचेगा। कोई कागज नहीं तो कोई कूड़ा करकट भी नहीं। वह ग्राहकों की तरह सेवा प्रदाताओं के लिए भी उतना ही सुविधाजनक और लाभकारी रहेगा। इसके अलावा नियामक संस्‍थाएं भी तत्‍काल किसी भी केवाईसी पर नजर रख सकेंगी।  
 ·        आधार 12 अंकों का व्‍यक्तिगत पहचान नम्‍बर है जो भारत में हर जगह पहचान और पते का प्रमाण माना जाता है।
·        कोई भी व्‍यक्ति चाहे उसका लिंग कोई भी हो और वो भारत का नागरिक हो, वह नि:शुल्‍क आधार नम्‍बर प्राप्‍त कर सकता है। यह आधार नम्‍बर पूरे जीवन के लिए वैध होगा।
·        आधार हर व्‍यक्ति को, जिसके जनसांख्यिकीय सूचना एवं बॉयोमेट्रिक्‍स के आधार पर पहचान प्रदान करता है। इसके द्वारा पूरे देश में सभी सरकारी और निजी एजेंसियों को व्‍यक्ति विशेष की पहचान के बारे में सूचना मिल जाती है।
·        आधार शब्‍द का अर्थ बुनियाद होता है। इसके आधार पर सभी प्रणालियां काम करती है। इसका उपयोग भारत का नागरिक अपनी पहचान बताने के लिए कर सकता है। इसके आधार पर कोई भी व्‍यक्ति निम्‍नलिखित कार्यक्रमों से लाभ उठा सकता है-
     भोजन एवं पोषण- सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्य सुरक्षा, मिड-डे मील, एकीकृत   बाल विकास योजना।
      रोजगार- महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, स्‍वर्ण जयंती ग्राम     स्‍वरोजगार योजना, इंदिरा आवास योजना, प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना।
      शिक्षा- सर्वशिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार,
      समावेश एवं सामाजिक सुरक्षा-  जननी सुरक्षा योजना, प्राचीन जनजातीय समूहों का       विकास, इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय वृद्ध पेंशन योजना।   
     स्‍वास्‍थ्‍य- राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना, जनाश्री बीमा योजना, आम आदमी बीमा     योजना।
·        मतदाता पहचान पत्र, पेन कार्ड, सम्‍‍पत्ति की खरीद-फरोख्‍त जैसे अन्‍य उद्देश्‍यों के लिए
·        प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण योजना के तहत जिन लोगों को मौद्रिक लाभों के योग्‍य पाया गया है, उन लाभार्थियों के बैंक खातों में धनराशि का सीधा हस्‍तांतरण होगा। यह खाते आधार नम्‍बर से जुड़े होंगे। फिलहाल ; अभी तक बड़ी संख्‍या में लाभार्थियों को आधार कार्ड दिया जाना बाकी है। इसी वजह से लाभों को बिना आधार नम्‍बर के भी बैंक खातों में जमा किया जा रहा है।
·        रसोई गैस के लिए प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण के अंतर्गत आधार नम्‍बर वाले सभी उपभोक्‍ताओं, जिनके बैंक खाते आधार नम्‍बर से जुड़े हैं, उन सभी को सिलेंडर बुक करने के अवसर पर प्रति सिलेंडर 435 रुपये की अग्रिम राशि दी जा रही है। रसाई गैस बाजार कीमत पर उपलब्‍ध किये जाएंगे, लेकिन इस पर दी जाने वाली सब्सिडी की रकम उनके खातों में अपने आप चली जायेगी।
·        आधार वित्‍तीय समावेश का एक महत्‍वपूर्ण उपाय है। आधार कार्ड के बल पर निर्धन व्‍यक्ति भी बैंकों में खाता खोलने के लिए अपनी पहचान दे सकता है। वे इसे रेल यात्रा के दौरान भी पहचान प्रमाण के तौर पर अपने साथ रख सकते हैं।     
·        आधार कार्डों के बैंक खातों से जुड़े होने के कारण ग्रामीण नागरिक एक दूसरे के साथ तथा कम्‍पनियों के साथ अपने गांव से बाहर इलैक्‍ट्रोनिक रूप से लेन-देन कर सकते हैं। इससे उनकी नकदी पर निर्भरता कम होगी।
·        एक बार जब आधार आधारित सूक्ष्‍म-भुगतान प्रणाली काम करने लगेगी, तब सूक्ष्‍म-ऋण, सूक्ष्‍म-बीमा, सूक्ष्‍म-पेंशन और सूक्ष्‍म-म्‍यूचुअल फंड जैसे अन्‍य वित्‍तीय कार्य भी सुगम हो जायेंगे।
·        आधार कार्ड से भारत के प्रत्‍येक नागरिक को जीवन भर के लिए निर्धारित पते का प्रमाण प्राप्‍त हो जाता है, इसका उपयोग भुगतान पते के लिए भी किया जा सकता है।
·        आधार ई-केवाईसी (अपने ग्राहक को जानो) सेवा जन्‍म-तिथि और लिंग के साथ-साथ पहचान तथा पते के इलैक्‍ट्रोनिक प्रमाण के रूप में काम करता है। इसके अलावा, इसके द्वारा सेवा प्रदाताओं को प्रत्येक व्‍यक्ति के मोबाईल नम्‍बर और ई-मेल पते का प्रमाण भी प्राप्‍त हो जाता है, जिससे सेवा देने में और सुविधा होती है।
·        भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण द्वारा दिये जाने वाले डिजिटल तौर पर हस्‍ता‍क्षरित इलैक्‍ट्रोनिक्‍स केवाईसी डाटा को मशीन द्वारा पढ़ा जा सकता है। इसके ज़रिये सेवा करदाता सेवाओं, खाता निरिक्षण इत्‍यादि के लिए सूचनाओं को अपने ग्राहक के रिकार्ड में सीधे दाखिल कर सकता है। ऐसा करने से मानवीय हस्‍तक्षेप समाप्‍त हो जायेगा और प्रक्रिया सस्‍ती हो जायेगी एवं गलती की सम्‍भावना कम हो जायेगी।
·        ई-केवाईसी सेवा को आधार नम्‍बरों के जरीये मौजूदा लाभार्थियों के रिकार्डों से जोड़ा जा सकता है। उदाहरण के लिए आधार के साथ मौजूदा राशन कार्डों, पेंशन खातों, छात्रवृत्तियों आदि को जोड़ना। इससे दो तरफा लाभ होगा, जैसे प्रतिलिपि और नकली पहचान की संभावना समाप्‍त हो जायेगी। इससे यह भी सुनिश्चित हो जायेगा कि लक्षित लाभार्थियों तक लाभ पहुंच सकें। राशन कार्ड, ड्राईविंग लाईसेंस, जाति प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट, जन्‍म प्रमाण-पत्र आदि जैसे विभिन्‍न सरकारी दस्‍तावेज़ों को प्राप्‍त करने के लिए आवेदन करेगा, उसे ई-केवाईसी की सेवा द्वारा तुरन्‍त, प्रभावशाली और सटिक पहचान के आधार पर सेवा प्राप्‍त हो जायेगी। 

वि.कासोटिया/नरेश/मधुप्रभा/अरूण/सुनील–5690