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Thursday, July 16, 2015

लुधियाना मीडिया क्लब ने दुसरे दिन ही कर दिया टीम का एलान

गौतम जालंधरी व सुरिंदर डल्ला बने कार्यवाहक प्रधान व महासचिव
लुधियाना: 16 जुलाई 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
सरकारी प्रेस क्लब के नाम से जाने जा रहे संगठन की टीम तो अभी कन्फ्यूज़न में है लेकिन बुधवार को घोषित हुए लुधियाना मीडिया क्लब की टीम ने तेज़ी से अपनी सरगर्मियां शुरू कर दी हैं।  पत्रकारों की सम्पूर्ण सूची बनाने के साथ ही संगठन के ढांचे की तरफ भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। इस मकसद के लिए एक कार्यवाहक टीम बनाई गयी है जिसमें गौतम जालंधरी कार्यवाहक प्रधान और सुरिंदर दल्ला कार्यवाहक महासचिव होंगें। इस टीम के वृद्द हो रहे लोगों ने अच्छी सेहत के बावजूद खुद ही युवा वर्ग को आगे लाकर एक मिसाल पैदा की है।
पत्रकारों की एकता, अखंडता एवं वैलफेयर के लिए गठित किए गए लुधियाना मीडिया क्लब की अंतरिम कमेटी की बैठक आज यहां संपन्न हुई। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि क्लब के चुनाव की प्रक्रिया जारी होने तक कार्यकारी प्रधान एवं कार्यकारी महासचिव का चुनाव किया जाए। जिसके लिए ड्रा के जरिये के लिए क्लब के कार्यवाहक प्रधान के तौर पर गौतम जालंधरी व कार्यवाहक महासचिव के तौर पर सुरिंदर डल्ला को महासचिव चुना गया। 
इस घोषणा के होते ही सोशल मीडिया पर उत्साह और ख़ुशी की लहर दौड़ गयी। सभी ने इस टेम्परेरी चुनाव पर ख़ुशी का इज़हार किया और टीम को बधाईयां दीं। यह टीम लुधियाना ज़िले के सभी पत्रकारों को अपने साथ लेगी।उम्मीद करनी बनती है कि  लुधियाना मीडिया क्लब  पत्रकारों के विश्वास को टूटने नहीं देगी। 

Tuesday, July 14, 2015

लुधियाना मीडिया क्लब के गठन का एलान-- मीडिया में उत्साह की लहर

आगामी विशेष बैठक 16 जुलाई को 
लुधियाना: 14 जुलाई 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
आखिर वो हो के ही रहा जिसे होना ही था और जिसकी इंतज़ार तकरीबन सभी को थी। तानाशाही, चौधर, स्वार्थ,  आरोप, और नए सिरे से परिभाषाएं लिखने के निंदनीय प्रयास और साजिशी माहौल में एक क्रांति की लहर उठी और सामने आया लुधियाना मीडिया क्लब। आपसी एकता, अखंडता व वैलफेयर के लिए लुधियाना मीडिया क्लब का गठन एक नए युग की शुरुआत है। यह मीडिया लोकतंत्र का जवाब है उन लोगों को जो आज के आधुनिक युग में भी सदियों पहले ढह ढेरी हो चुकी रजवाड़ा शाही को फिर से लागू करने चले थे। 
महानगर के पत्रकारों ने तीव्रता से भरा उत्साह दिखाते हुए अंतरिम कमेटी का गठन करके मैंबरशिप अभियान शुरू करने का भी ऐलान कर दिया है। सदस्यता के लिए भी सभी का स्वागत। केवल पत्रकार होना ही आवश्यक।पत्रकारिता की किसी भी विधा से जुड़ा कलम या कैमरे का सिपाही  इस क्लब का मेंबर बन सकेगा। 
गठन के अवसर पर बहुत ही प्रशंसनीय कदम उठाया गया बेड पर पड़े वरिष्ठ पत्रकार अश्वनी जेतली का हाल चाल पूछा गया।  वरिष्ठ पत्रकार एक साथ जेटली जी के घर गए और इस शुभ कार्य के लिए उनका सहयोग, मार्गदर्शन और आशीर्वाद माँगा। यह होता है भले लोगों के काम करने का तरीका। प्राप्त विवरण के मुताबिक आपसी एकता, अखंडता एवं वैलफेयर को सामने रखते हुए महानगर के पत्रकारों ने आज यहां एक बैठक करके लुधियाना मीडिया क्लब का गठन कर दिया। इस बैठक में गौतम जालंधरी, सुरिंदर डल्ला, यशपाल शर्मा, मनोज धीमान, राज जोशी, अजय सुनील राय कामरेड उपस्थित थे। जबकि इस निर्णय पर नितिन धीमान, रविंदर अरोडा, अश्वनी जेतली, योगेश सूद, यूके शारदा, राजेश मेहरा ने भी अपनी सहमति व्यक्त की। इस अवसर पर 15 सदस्यीय एक आंतरिक कमेटी का गठन किया गया। जिसमेें उपरोक्त के अलावा शेष नामों का ऐलान अगली बैठक में करने का निर्णय किया गया। इस बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि क्लब की मैंबरशिप के जरिये प्रिंस एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुडे पत्रकार एवं फोटोग्राफर, रेडियो, न्यूज वैब पोर्टल, रिटा. जर्नलिस्ट, एडिटर्स, फ्री लांस जर्नलिस्ट, कांट्रिब्यूअर, डेस्क से साथियों को साथ जोडा जाए। जिसमें उन्हें केवल आई कार्ड या अर्थाटी लैटर या न्यूज क्लीपिंग आदि के आधार पर सदस्यता दी जाए। जिसे कि प्रिंट, इलेक्ट्रिानिक्स, ऑन लाइन, फोटो जर्नलिस्ट, वीकली एवं लोकल समाचार पत्र के एक-एक सदस्य पर आधारित स्कू्रटनी कमेटी द्वारा देखा जाए। इस अवसर पर क्लब के लोगो व आई कार्ड, पोस्ट बाक्स नंबर, मैंबरशिप फीस, ई-मेल आईडी, रजिस्ट्रेशन जैसे मुद्दे पर भी निर्णय लिए गए। बैठक में यह भी तय किया गया कि जल्द ही क्लब का एक शिष्टमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री पंजाब व उपमुख्यमंत्री पंजाब से भी भेंट करेगा तथा उनसे पत्रकारों को पेश आ रही समस्याओं के बारे में विचार किया जाएगा। यह भी तय किया गया कि क्लब की अगली बैठक 16 जुलाई को होगी। इस नए संगठन का गठन होते ही पत्रकार भाईचारे में उत्साह की लहर उठ खड़ी हुयी है।  पत्रकारक एक दुसरे को बधाईयां दे रहे हैं। इसे कहते हैं एकता और सर्व मान्यता। न किसी ने किसी को कोई गाली दी न ही किसे ने किसी का गिरेबान पकड़ा।  सब कुछ पूरे सौहार्द और शांति के साथ सम्पन्न हुआ।  अब 16 जुलाई की मीटिंग में सभी मीडिया कर्मी अतीत की घटनाओं को किसी दुःस्वप्न की तरह भुलाकर बढ़चढ़ कर इस बैठक में शामिल हों और बता दें कि नए दौर में लिखेंगे हम मिल कर नयी कहानी। 

Saturday, May 23, 2015

लुधियाना में तेज़ हुयी मीडिया के अधिकारों की जंग

पत्रकारों के कई संगठन एलायंस बनाने पर हुए सहमत 
लुधियाना: 23 मई 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
पत्रकारों ने अपने अधिकारों की जंग और तेज़ कर दी है। आज गुरुनानक भवन में हुआ विशेष आयोजन कम से कम इस बात का जीता जागता सबूत था। बहुत ही कम समय के नोटिस पर बुलाये गए इस कार्यक्रम में पत्रकार जिस जोशो खरोश से पहुंचे उसे देख कर लगता था कि अबकि बार लड़ाई आर पार की होगी। 
आरम्भ कुछ नाज़ुक था। डीपीआरओ का विरोध, प्रेस क्लब बनाने के लिए पिछले कुछ दिनों से सरगर्म टीम का विरोध और कुछ अन्य मुद्दे माहौल को शुरू में गर्माने लगे थे पर इस आयोजन के लिए सक्रिय भूमिका अदा कर रहे गौतम जालंधरी ने बात को संभालते हुए स्पष्ट किया कि हम न तो किसी के विरोध में हैं और न ही प्रेस क्लब बनाने के खिलाफ हैं।  उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर प्रेस क्लब बनता है तो सबसे अधिक ख़ुशी उन्हें होगी। गौरतलब है कि गौतम जालंधरी यहाँ लुधियाना प्रेस क्लब (रजिस्टर्ड) की प्रतिनिध्ता भी कर रहे थे। 
दुसरे संगठन प्रेस लायन्ज़ क्लब के प्रमुख बल्ली बराड़ ने गौतम जालंधरी के विचारों का समर्थन करते हुए इस भड़कती आग को बुझाने में सक्रिय योगदान दिया। 
एक अन्य पत्रकार संगठन के प्रमुख एस पी सिंह ने आगाह किया कि यहाँ बैठे लोग यह न समझें कि वे किसी बंद हाल में बैठे हैं।  यहाँ की हर जानकारी आहर जा रही है और जानी भी चाहिए। इससे से व्यक्तिगत छींटाकशी का ज़ोर कुछ कम होने लगा। एडवोकेट राजेश मेहरा और गौरव अरोड़ा ने सभी के लिए सामान कानून की संविधानिक परिभाषा की व्याख्या की और सवाल किया कि डीपीआरओ कौन होता है इन अधिकारों को छीनने वाला। उन्होंने कहा की अगर उन्हें कहा गया तो वे इस मामले को कोर्ट में लेजायेंगे और जीत कर भी दिखाएंगे। गौरतलब है की सुनील कामरेड पहले ही कह चुके थे कि न तो वह डीपीआरओ ऑफिस में जाते हैं और न ही उन्हें इसकी ज़रूरत है।
इसी बीच बहुत से उतराव चढ़ाव देखने वाले पत्रकार सुनील जैन ने विवाद को सुलझाने का प्रयास करते हुए कहा कि प्रेस क्लब बनाने के लिए और इसका सदस्य बनने के लिए रखी गयी शर्तों में गलत कुछ भी नहीं।  अगर अख़बार या चैनल ही अपने पत्रकार को मान्यता नहीं देगा तो उसे क्लब का सदस्य कैसे स्वीकार किया जा सकता है? उन्होंने स्टाफर और स्ट्रिंगर के अंतर को भी सहजता से समझाया। सुनील जैन ने याद दिलाया कि प्रेस क्लब बनने के प्रयास अतीत में कई बार हो चुके हैं लेकिन एकजुट न होने के कारण वे सिरे नहीं चढ़ सके। उन्होंने नाम लेकर ज़िक्र किया कि मंत्री हरनाम दास जौहर ने दो लाख रुपयों का चैक दिखाकर मीडिया को दो वर्ष चक्र में डेल रखा गया लेकिन प्रेस क्लब नहीं बन सका। इस लिए अब अगर यह बन रहा है तो इसे बनने दिया जाये। जैन  ने मीडिया के समक्ष कुछ बाद्लील प्रश्न भी रखे। 
आजकल बहुत सरगर्म पत्रकार राकेश मौदगिल ने बहुत ही जोशीले अंदाज़ में कहा कि हम अपने अधिकार छीनने वालों को जाने ही कहाँ देंगें, यहीं गिरा लेंगें।  सड़क भी पार नहीं करने देंगें। 
आज के आयोजन का मुख्य आकर्षण बने रहे पंकज शारदा ने अपने अनुभवी अंदाज़ के साथ बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि मीडिया में कोई छोटा बड़ा नहीं होता। खबरों की कवरेज में खतरे की बात करते हुए शारदा ने कहा कि जितना खतरा डेस्क पर बैठे पत्रकार को होता है उतना ही खतरा गली मौहल्ले में काम करने वाले संवाद सूत्र को भी होता है। किसी को भी तथाकथित पत्रकार लिखे जाने पर एतराज़ करते हुए शारदा ने फटकारते हुए कहा कि अपने ही भाईचारे में किसी को तथाकथित लिखनेवाला खुद क्या है? उन्होंने संस्कारों की चर्चा करते हुए कहा कि अगर किसी से कोई गलती हुयी भी हो तो उसे आपस में समझना होगा। हमें अपने भाईचारे का साथ देना होगा चाहे वह गलत ही क्यों न हो। 
प्रितपाल सिंह पाली, जसमीत कौर, बलवीर सिंह सिद्धु, राजेश मेहरा, सुशील मल्होत्रा और कई अन्य पत्रकारों ने भी अपने विचार रखे। सभी पत्रकारों को एक समान मताधिकार का प्रस्ताव भी सर्वसम्मत राय से पारित हुआ। 
देर शाम प्राप्त एक प्रेस नोट के मुताबिक महानगर में संयुक्त प्रेस क्लब के गठन के उदेश्य से सभी पत्रकारों की मीटिंग गुरुनानक भवन में हुई। जिसमें सर्वसम्मति से 200 से अधिक पत्रकारों ने एकजुटता से हाथ खड़े करके सभी पत्रकारों को एक समान बताते हुए सभी को वोटिंग का अधिकार की मांग की गयी। मीटिंग में साँझा प्रेस क्लब के गठन पर सहमति जताई गयी व फॉर्म भी वितरित किये गए। साथ ही सर्वसमति से 21 सदस्यी कमेटी घोषित की गयी। मीटिंग में गौतम जालंधरी ने कहा कि इस मीटिंग के बाद समुचा पत्रकार भाईचारा संयुक्त प्रेस क्लब बनाने की दिशा में एक कदम और बढा है। पंकज शारदा ने कहा कि कोई पत्रकार बडा छोटा नहीं है। सुनील राय कामरेड ने कहा कि भारतीय संविधान ने वोट के अधिकार में कोइ भेदभाव नही किया। बल्ली बरार ने कहा कि यह सभी के लिए ख़ुशी की बात है कि सभी प्रेस संगठन एक मंच आए और भविष्य में 21 मेम्बरी कमेटी के जरिये एकजुटता बनाये रखने की बात कही। राजेश मेहरा एडवोकेट, गौरव अरोड़ा ने कहा कि कानून सभी के लिए एक समान है। एसपी सिंह व् अशोक थापर ने सहमति दी। योगेश कपूर, राकेश मौदगिल, प्रितपाल सिंह पाली, नीलकमल शर्मा, सुशील मल्होत्रा, जसमीत लूथरा, मेहमि जी, रॉकी जी, चरणजीत सलुजा, राजेश मेहरा, संजीव मोहिनी, सिद्धू जी, सुनील जैन ने प्रेस क्लब के चुनाव को फार्म जमा करवाने की अपील की। अब देखना है कि यह कंग कहीं भीतरघात करने वालों और हर वक़्त अपनी "मैं" का बखान करने वालों का शिकार न बन जाये। 

लुधियाना के पत्रकारों की एक आवश्यक संयुक्त बैठक 23 मई को 

Friday, May 22, 2015

लुधियाना के पत्रकारों की एक आवश्यक संयुक्त बैठक 23 मई को

Update: Friday 22 May 2015 8:00 PM 
गुरु नानक भवन में होगी मीडिया मुद्दों पर गंभीर चर्चा
लुधियाना: 22 मई 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
पूरे समाजं की मुश्किलों को सबके सामने लाने वाले मीडिया कर्मी खुद कितने असुरक्षित हैं इसका सही अंदाजा शायद किसी को नहीं। दिन-रात 24 घंटे कलम के ये सिपाही अपनी डियूटी पर डटे रहते हैं। जब मुसीबत आ जाये तो क्या हाल होता है इसका पता सबको रंजीत शर्मा उर्फ़ विक्की के दुखद देहांत से लग ही चूका है। लोकतंत्र का यह चौथा स्तम्भ अब खुद बहुत बुरी हालत में है। इन सब बातों को देखते हुए प्रेस क्लब लुधियाना और प्रेस लायनज़ क्लब लुधियाना की तरफ से गौतम जालंधरी और बल्ली बराड़ ने एक संयुक्त बैठक कल गुरुनानक भवन लुधियाना में बुलाई है। इस बैठक के आयोजन की सरगर्मियां आज भी दिन भर जारी रही। मीडिया को सरकार और अन्य राजनैतिक दलों के ठप्पे से बचाने के प्रयास में आज भी कई वरिष्ठ मीडिया कर्मी सरगर्म रहे। वास्तव में यह एक ऐसी लड़ाई पत्रकारों के गले आ पड़ी है जिसे लड़ना अब आवश्यक है। इस अवसर पर गीता ज्ञान के बिना कोई और ज्ञान काम नहीं आने वाला। पत्रकारों के अधिकारों के लिए एक लम्बी लड़ाई काफी अरसे से जारी है। पहले इस संघर्ष की धार पंजाब में चलती बंदूकों के कारण कुंद हो गयी थी। उस समय पत्रकारों को और उनके परिवारों की जान बचना आवश्यक था। इस नाज़ुक माहौल में कुछ प्रमुख अख़बारों ने पहचान पत्र जारी करने की परम्परा ही बंद कर दी क्यूंकि कुछ पहचान पत्र कुछ मिलिटेन्टों की जेब से मिले थे। इस लिए दलील में वज़न था। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पहचान पत्र न देने की नीति को एक तरह से स्वीकार ही कर लिया गया। उस नाज़ुक समय में शुरू हुआ यह सिलसिला तकरीबन आज भी जारी है।
पहचान पत्र के बिना पत्रकार को कई तरह की परेशानियां होती हैं। इस बात को भांपते हुए कई शातिर किस्म के लोगों ने बाकायदा पहचान पत्र "बेचने" के अंदाज़ में "जारी" करने शुरू कर दिए। चुंगी बचाने के मकसद से कई कारोबारियों ने भी इस तरह के आई कार्ड खरीदे। इस तरह मीडिया की साख और पहचान धुंधली होती चली गयी। जो वास्तव में पत्रकार थे उनके पास आई कार्ड नहीं थे।  जो कारोबारी और व्यापारी थे उनके पास पत्रकारिता के कार्ड आ गए। मीडिया में यह "प्रदूषण" काफी समय से जारी है। अब इस प्रदूषित धारा को शुद्ध करने की बजाये इस पर मोहर लगा कर इसे सर्व-स्वीकृत बनाने की साज़िशें होने लगीं हैं। 
अगर कुछ गैर पत्रकार किस्म के लोगों ने बाकायदा RNI से स्वीकृति लेकर अपने पेपर निकले और उनके नाम से अपने कार्ड बेचे तो बड़ी और असली अखबारों ने भी कम मुनाफा नहीं कमाया। वे कार्ड के बदले सप्लीमेंट निकलवाने लगे। हाल ही में सेंटर यूनिवर्सिटी धर्मशाळा के उप कुलपति डाक्टर कुलदीप अग्निहोत्री लुधियाना एक आयोजन में भाग लेने आये तो उन्होंने विस्तार से बताया कि किस तरह उनके ज़माने में विज्ञापन उस स्थिति में छपा करते जब ख़बरों के बाद एक चौथाई या कुछ ज़्यादा जगह बच जाया करती थी तो ऊपर से आदेश आता था कि चलो यहाँ अब विज्ञापन छाप दो। जो बच जाते उन्हें अगले दिन प्रकाशित किया जाता। लेकिन अब विज्ञापन पहले छपते हैं और खबरें तब छपती हैं अगर जगह बच जाये। इस कारोबारी तब्दीली ने वास्तविक पत्रकारिता का गला घोंट डाला है। मीडिया मैनेजमेंट की तरफ से आज सप्लीमेंट मुख्य मांग बन गयी है। सवाल उठता है कि पत्रकार से अख़बार की मांग अच्छी खबरें हों या विज्ञापन? इस सब के खिलाफ काफी लड़ाई पहले भी लड़ी गयी है और काफी अभी लड़ी जानी है। अतीत में इस जंग में वो पत्रकार लोग भी शामिल थे जिन्होंने पंजाब के कठिन समय में कई लड़ाईयां लड़ीं। उन दिनों पुलिस और मिलिटेंट दोनों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करना आसान नहीं था। उस दौर में बहुत से पत्रकार शहीद भी कर दिए गए। अब जबकि वह दौर खत्म हो चूका है लेकिन बहुत सी मुसीबतें अपना रंग रूप बदल कर सामने आ रही हैं। सबसे दुखद बात यह कि छोटी छोटी बातों को लेकर मीडिया कई गुटों में बंट गया है। चौधर की इस जंग में वास्तविक मुद्दे गुम हो रहे हैं। इस नाज़ुक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कुछ प्रमुख संगठनों और पत्रकारों ने कुर्सी की इस जंग से ऊपर उठते हुए फ़िलहाल केवल एकता पर ज़ोर दिया है। इस तरह के सभी मामलों पर चर्चा होगी कल 23 मई 2015 शनिवार को गुरुनानक भवन में सुबह 11:30 बजे।  
मीडिया से जुड़े सभी लोगों से निवेदन है कि लोकतंत्र के इस चौथे स्तम्भ को बचाने के लिए आगे आएं तांकि उन लोगों की साज़िशों को नाकाम किया जा सके जो इसे पांचवां टायर बनाने पर तुले हैं। अपने सुझाव, अपनी समस्या सब कुछ वहां विस्तार से रखें। दबाव रहित और शकितिशाली मीडिया मंच की स्थापना में सहयोग करें। मीडिया मज़बूत तो समाज मज़बूत। खुद भी आए अपने साथियों को भी लाएं। खुले दिल से सुनें खुल कर कहें। अब देखना है दूसरों के अधिकारों की जंग लड़ने वाले खुद अपनी जंग कितनी बहादुरी से लड़ पाते हैं? आपके पास  कार्ड है या नहीं? आपके पाश अथार्टी है या नहीं? इन सभी सवालों को एक तरफ रख कर केवल एक सवाल अपने आप से पूछें क्या आप पत्रकार हैं या नहीं? अगर हैं तो वहां अवश्य पहुँचिये। एक सवाल मीडिया मैनेजमेंट से भी करना बनता है, समाज से भी और सरकार से भी कि क्या पत्रकारिता करने वाला पत्रकार है या पत्रकारिता को साईड बिज़नेस बना कर लाभ उठाने वाला?

लुधियाना में तेज़ हुयी मीडिया के अधिकारों की जंग 

Sunday, July 06, 2014

गौतम जालंधरी बने प्रैस क्लब (रजि.) के प्रधान

Sun, Jul 6, 2014 at 6:18 PM
संस्थापक अध्यक्ष एनआर भाखड़ी को दी श्रद्धांजलि
पत्रकार भाईचारे के कल्याण के कार्यरत रहूंगा : जालंधरी
लुधियाना: 6 जुलाई 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
प्रैस क्लब (रजि.) लुधियाना  की अहम बैठक चेयरमैन अशोक थापर की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में सर्वप्रथम क्लब के संस्थापक अध्यक्ष स्व: एनआर भाखड़ी की स्मृति में दो मिनट का मौन धारण करके उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके सभी सदस्यों ने वरिष्ठ पत्रकार श्री गौतम जालंधरी को क्लब का अध्यक्ष घोषित किया। इस अवसर पर गौतम जालंधरी ने स्व: भाखड़ी को याद करते हुए सभी सदस्यों को आश्वासन दिलाया कि वह पत्रकारों भाईचारे के भले के लिए हमेशा कदम उठाते रहेंगे तथा पत्रकार सदस्यों के लिए अधिक से अधिक मनोरंजन कार्यक्रम, वर्कशाप, सैमिनार इत्यादी करवाएं जाएंगे। क्लब के महासचिव मनोज भाखड़ी ने बताया कि क्लब की ओर से सभी पत्रकार सदस्यों का बीमा करवाया जाएगा तथा भविष्य में फैमिली गेट-टू-गैदर का भी आयोजन किया जाएगा ताकि पत्रकार भाईचारा के परिवारों में आपनी मेलजोल बन सके। इस अवसर पर सीनियर वाईस प्रधान राजेश मेहरा एडवोकेट (पंजाब केसरी) , सीनियर पत्रकार कुलवंत ङ्क्षसह, अमरीक सिंह बत्तरा (अजीत) , मनोज धीमान (सिटी न्यूज), राजेश शर्मा (दैनिक जागरण), सुशील मल्होत्रा, करनैल सिंह सैणी( पंजाबी जागरण), राजन कैंथ (दैनिक जागरण), दीपक बेरी (पंजाब केसरी), मीनू कपूर (पंजाब केसरी), मोहीनी (पंजाब केसरी), नीलकमल शर्मा (पंजाब केसरी), एसएस भट्टी (पहरेदार), रणजीत कलसी (पहरेदार), सुखविंद्र सिंह चौहान (जागृति लहर), सुखदेव सिंह (दैनिक जारगण), संजीव शर्मा  (दैनिक भास्कर), अमित कुमार  (दैनिक भास्कर), भरत मुंजाल (दैनिक जागरण), मनीष सामा (जागृति लहर) आदि उपस्थित थे। अंत में गौतम जांलधरी ने कहा कि जल्द ही क्लब की कार्यकारिणी का विस्तार कर दिया जाएगा।

Sunday, January 12, 2014

एफएम गोल्ड पर छाये सीनियर पत्रकार गौतम जालंधरी

Sun, Jan 12, 2014 at 6:14 PM
खबर गर्म है के जरिये हुए श्रौताओं से रूबरू:कई मुद्दों पर की चर्चा 
लुधियाना: 12 जनवरी 2014: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
वरिष्ठ पत्रकार एवं ऑन लाइन न्यूज पार्टल नया शिखर के मुखय संपादक गौतम जालंधरी प्रसार भारती के एफएम गोल्ड में हर रविवार सुबह साढ़े नौ बजे प्रसारित कार्यक्रम खबर गर्म है, में विशेष रूप से शामिल हुए। खबर गर्म हैअकाशवाणी लुधियाना एफएम गोल्ड का एक बेहद संजीदा कार्यक्रम है तथा श्रौताओं में काफी पसंद किया जाता है। कार्यक्रम की शुरूआत में संचालक नवयेश नवराही ने पत्रकार जालंधरी कोश्रौताओं से रूबरू करवाते हुए आज विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित आम आदमी पाटी, एनआरआई स्म्मेलन व देवयानी प्रकरण सहित अन्य बड़ी खबरों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। श्रौताओं से रूबरू होते हुए पत्रकार जालंधरी ने इन खबरों पर अपना नजरिया व इसका आने वाले समय में प्रभाव के बारे में गहराई से बताया। इससे पहले स्टूडियों आने पर एफएम स्टाफ ने पत्रकार जालंधरी का स्वागत किया।