Showing posts with label Medical. Show all posts
Showing posts with label Medical. Show all posts

Friday, September 13, 2024

जब जेब खाली होती है तो कैसे हो बीमारी में इलाज?

सरकार कैसे बन सकती है गरीबों के लिए लाईफ लाईन?


चंडीगढ़:13 सितंबर 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

जब जेब खाली होती है और कोई न कोई बिमारी बुरी तरह से घेर लेती है तो उस समय यही सवाल मन में उठता है कि काश कोई डाक्टर या अस्पताल हमारे लिए जीवन रेखा बन कर आ आ जाता। कई बार ऐसा हो भी जाता है लेकिन हर बार हर मामले में हर किसी के साथ कहां होता है एशिया चमत्कार? कोशिश की कि ऐसा सवाल समाज और सरकार के सामने रखा जाए। पंजाब और अन्य भारतीय राज्यों में सिवल अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थान गरीब और मध्य वर्गीय लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए लाईफ लाईन कैसे बन सकते हैं? जवाब ढूंढ़ने के प्रयासों में कुछ काम की बातें भी सामने आईं। 

एक तथ्य तो यह था कि पंजाब और अन्य भारतीय राज्यों में सरकारी स्वास्थ्य संस्थान, जैसे सिविल अस्पताल, गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसे सफल बनाने के लिए कई सुधार किये जा सकते और  नए कदम उठाए जा सकते हैं। 

इस मकसद के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना सबसे पहले स्थान पर है। सिविल अस्पताल और अन्य सरकारी संस्थान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अधिक संख्या में खोले जाएं ताकि हर व्यक्ति को आसानी से स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। जनसंख्या के मुकाबिले स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या भी कम है डाक्टरों की संख्या भी।  इसके साथ ही बहुत सी आवश्यक दवाएं भी सभी को उपलब्ध नहीं होतीं। उन्हें अस्पताल या डिस्पेंसरी से मिली डाक्टर की लिखी पर्ची लेकर बाज़ार  है।  पर महंगी दवाएं ही मिला करती हैं। 

मरीज़ों तक पहुंच बढ़ाने के लिए मोबाइल हेल्थ वैन जैसे कदम भी उठाए जाएं ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं  से पहुंच सकें। दूर दराज के गांवों और कस्बों में इसी तरीके से प्रभावी पहुंच हो सकती है जो ज़्यादा लोगों तक फायदा पहुंचा सकेगी। 

अस्पतालों में बुनियादी ढांचे का सुधार भी अब ज़रूरी बन गया है। आधुनिक युग में सरकारी अस्पतालों  बड़े और महंगे अस्पतालों के  बराबर ले जाना ही होगा। इस मकसद के लिए आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए निवेश भी किया जाए। इस निवेश के लिए गांवों और शहरों से सामर्थ्यवान प्रायोजक भी ढूंढे  हैं। 

समाज में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को निजी क्षेत्र के बराबर पहुँचाने के लिए अस्पतालों की साफ-सफाई और व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जाए ताकि संक्रमण और अन्य समस्याएं न हों। इससे इन संस्थानों के प्रति मनोवैज्ञानिक तौर पर भी एक नया विश्वास भी पैदा होगा। अधिक  आकर्षित भी होंगें। 

मुफ्त और किफायती चिकित्सा सेवाएं भी बढ़ाई जा सकें तो बहुत अच्छा होगा। सरकार द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाइयां, जांच और इलाज मुफ्त या किफायती दामों पर उपलब्ध कराए जाएं, खासकर गरीब और मध्यवर्गीय लोगों के लिए। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य बीमा योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि उन्हें आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। इस मकसद के लिए तकनीकी उलझनों और बारीकियों को भी पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता तो कम ज़रूर किया जाए। 

सरकार की देखरेख में चलने वाले इन स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ की पर्याप्त संख्या भी अवश्य पूरी होनी चाहिए। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टर्स, नर्सेज़ और अन्य स्टाफ की पर्याप्त संख्या होनी चाहिए। इसके लिए मेडिकल स्टाफ की भर्ती और ट्रेनिंग की प्रक्रिया को भी सुधारना चाहिए।

आधुनिक युग की तकनीकों का फायदा उठाते हुए टेलीमेडिसिन जैसी आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जाना चाहिए। इसको इस्तेमाल करके दूर-दराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए तांकि  मरीज़ के लिए बहुत से डॉक्टरों  सम्मिलित राय बनाने में आसानी हो। 

इस मकसद के लिए समय समय पर चलाए जाते स्वास्थ्य जागरूकता अभियान को भी और तेज़ और व्यापक  चाहिए। लोगों में स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार को नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर भी लगाने चाहिएं और जागरूकता अभियान भी चलाने चाहिए। निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, जैसे टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच, पर भी जोर दिया जाए ताकि बीमारियों को रोका जा सके।

इसके साथ ही अस्पतालों का डिजिटलीकरण भी पहल के आधार पर किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जाए, जैसे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग, मेडिकल रिकॉर्ड्स का रखरखाव, और टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी होनी चाहिए। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और लोगों को सुचारू रूप से सेवाएं मिलेंगी।

इस दौर में सर्वाधक ज़रूरत है सभी स्वास्थ्य और चिक्तिसा पैथियों का सम्मान और आपसी सहयोग हो। स्थानीय और पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं का समावेश अच्छे परिणाम ही लाएगा। आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सरकारी अस्पतालों में शामिल किया जाए, जिससे लोगों को वैकल्पिक उपचार का भी लाभ मिले।

इन सभी सुधारों के साथ-साथ, सरकार को स्वास्थ्य के लिए बजट आवंटन बढ़ाना चाहिए और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को निरंतर मॉनिटर करने की आवश्यकता है। इससे सिविल अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थान गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए एक सशक्त जीवन रेखा बन सकते हैं।

Monday, February 26, 2024

आरके फिटनेस और स्लिमिंग स्टूडियो ने किया विशेष आयोजन

25th February 2024 at19:05 AKAS WA 

निःशुल्क चिकित्सा जांच और रक्तदान शिविर से की समाज सेवा 

लुधियाना: 25 फरवरी 2024: (मीडिया लिंक//लुधियाना स्क्रीन डेस्क//पंजाब स्क्रीन)::

लुधियाना की थ्रीके सुआ रोड पर एक नए समाज का नव निर्माण पिछले कई बरसों से हो रहा है। वहां एक ऐसा युवा वर्ग निर्माण किया जा रहा है जो नशे जैसी बुराई से कोसों दूर है। इस मकसद के लिए आरके फिटनेस और स्लिमिंग स्टूडियो ने आज अपने परिसर में एक मुफ्त चिकित्सा जांच और रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया। ऐसा करके सामुदायिक स्वास्थ्य की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया गया है।  इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित प्रतिष्ठित चिकित्सा पेशेवरों और स्वयंसेवकों का सक्रिय सहयोग देखा गया। इस चिकित्सा जांच शिविर में प्रसिद्ध विशेषज्ञों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। 

इस शिविर में फोर्टिस अस्पताल, माल रोड, लुधियाना में स्त्री
रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ सलाहकार डॉ. आरती गुप्ता तुली द्वारा 58 महिला रोगियों की जांच की गई।

इसी तरह डा. अमित तुली, वरिष्ठ सलाहकार यूरोलॉजी विभाग, अयकाई अस्पताल, लुधियाना ने विभिन्न समस्याओं वाले 28 रोगियों की जांच की।

फोर्टिस अस्पताल, माल रोड, लुधियाना में नॉन-इनवेसिव कार्डियोलॉजी में एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. मानव वढेरा** द्वारा 80 कार्डियो रोगियों की जांच की गई।

डॉ. दिनाकरन, तरुश्री फिजियोथेरेपी क्लिनिक के फिजियोथेरेपिस्ट और तरुश्री फिजियोथेरेपी क्लिनिक के डॉ. मुल्लई ने विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं वाले 57 रोगियों की जांच की।

इसके अतिरिक्त, वाहेगुरु ब्लड डोनेशन एनजीओ के सहयोग से एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य ब्लड बैंकों को फिर से भरना और लोगों की जान बचाना था। आज के इस शिविर में 20 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया।

इस कार्यक्रम को समुदाय से भारी समर्थन मिला, शिविर के दौरान बड़ी संख्या में रक्त की इकाइयाँ एकत्र की गईं, जो इस नेक काम के प्रति निवासियों की परोपकारी भावना और एकजुटता को दर्शाती हैं।

आरके फिटनेस और स्लिमिंग स्टूडियो की प्रमुख डॉ. अमरजीत कौर उन सभी प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों और चिकित्सा पेशेवरों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करती हैं जिन्होंने इस पहल को एक शानदार सफलता बनाने में योगदान दिया। इस तरह के प्रयास एक स्वस्थ और अधिक दयालु समाज को बढ़ावा देने में सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित करते हैं।

कुल मिला कर आज के इसे मेडिकल शिविर से बहुत से स्थानीय लोगों ने फायदा उठाया। इस तरह के देहात से सबंधित क्षेत्रों में इस तरह के और शिविर भी लगातार लगने चाहिए। 

निरंतर सामाजिक चेतना और जनहित ब्लॉग मीडिया में योगदान दें। हर दिन, हर हफ्ते, हर महीने या कभी-कभी इस शुभ कार्य के लिए आप जो भी राशि खर्च कर सकते हैं, उसे अवश्य ही खर्च करना चाहिए। आप इसे नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आसानी से कर सकते हैं।

Saturday, August 05, 2023

हर 10 मिनट में एक व्यक्ति का अंग काटना पड़ रहा है--डॉ.लव

Saturday 5th August 2023 at 13:36

लेकिन सभी तरह की  एंप्यूटेशन से बचा भी जा सकता है 


लुधियाना
: 5 अगस्त 2023: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

हर साल 6 अगस्त को मनाए जाने वाले नेशनल वैस्कुलर डे के उपलक्ष्य में ग्लोबल हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अस्पताल के डायरेक्टर कार्डियोलॉजी डॉ. ब्रजेश  बद्धन व डिपार्टमेंट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी के हेड डॉ. केसी मुखर्जी ने की। इस दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की गई, जिसमें संबोधित करते हुए अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ वेस्कुलर एंड एंडो वैस्कुलर सर्जरी के कंसल्टेंट डॉ. लव लूथरा ने नेशनल वेस्कुलर डे, वैस्कुलर एंड एंडो वैस्कुलर सर्जरी के बारे में बहुत सी जानकारियां दीं। 

उन्होंने कहा कि वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया ने एंप्यूटेशन फ्री इंडिया को मिशन बनाया है, जिसके लिए देश के 24 शहरों में 6 अगस्त को वैस्कुलर सर्जनों द्वारा वाकथान के जरिए वैस्कुलर बीमारियों व एंप्यूटेशन से बचाव के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। डॉ. लव लूथरा ने कई तरह की वैस्कुलर डिजीज मसलन वेरीकोज वेन, पेरीफेरल वैस्कुलर डिजीज( गैंगरीन) डायबिटिक फुट डिजीज, करॉटिड आर्टरी डिजीज, मिनिमली इनवेसिव ट्रीटमेंट के बारे में जानकारी दी। 

उन्होंने बताया कि ग्लोबल हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल इस रीजन का एकमात्र हॉस्पिटल है जो ब्रेन, हार्ट, लिंब व एब्डोमेन से संबंधित सभी वैस्कुलर बीमारियों का अत्याधुनिक इनवेसिव तकनीक से इलाज करता है। डॉ.लव ने बताया कि हर 10 मिनट में एक व्यक्ति का अंग काटना पड़ रहा है। 

इसकी सबसे बड़ी वजह डायबिटिक फुट, गैंगरीन की वजह से टांग में ब्लड की सप्लाई घटना, डीप वेन थम्बोसिस इलाज ना करवाना,ट्रॉमा, थरम्बोसिस ऑफ आर्टरी की  वजह से अचानक ब्लड रुक जाना प्रमुख वजहें हैं। उन्होंने बताया कि यदि मरीज समय रहते वैस्कुलर सर्जन से चेकअप करवा ले, तो एंप्यूटेशन से बचा जा सकता है। डॉ.लव ने बताया कि वह पिछले 2 साल में 300 से अधिक ऑपरेशन कर चुके हैं इनमें से ज्यादातर को डॉक्टरों ने एम्प्यूटेश की सलाह दी थी या उन्हें रेफर किया था। 

डॉक्टर लव ने बताया कि ग्लोबल हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में सभी विनस एंड आर्टरियल डिजीज का आधुनिक तकनीकों से इलाज किया जाता है। वेरीकोज वेन का इलाज 1940 लेजर मशीन से किया जाता है जो कि पंजाब में अकेली है। इसके अलावा अस्पताल में बाईपास व पेरिफेरल एंजोयोप्लासटी व अंगों के बचाव के लिए स्टेंटिंग भी की जाती है। 

डायलसिस के मरीजों के लिए क्रिएशन ऑफ आर्टरीवीनस फिसूला,परम कैथ इंसरशन व अन्य प्रोसीजर हमारे वेस्कुलर सर्जनों की टीम द्वारा किए जाते है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मकसद लोगों को वैस्कुलर डिजीज और उसके इलाज के बारे में जागरूक करना था। ग्लोबल टीम की ओर से एंप्यूटेशन फ्री पंजाब मुहिम को लांच किया गया है, जिसके जरिए हम लोगों को एंप्यूटेशन से बचाने के लिए वैस्कुलर डिजीज के बारे में जागरूक करेंगे। 

शनिवार के दिन हुए पत्रकार सम्मलेन के दौरान सबसे बड़ी उपलब्धि ज़ेह जानकारी रही कि डॉ.लव ने कहा स्पष्ट कहा कि सभी तरह की  एंप्यूटेशन से बचा जा सकता है, यदि उसकी समय रहते जांच और इलाज करवाया जाए।

निरंतर सामाजिक चेतना और जनहित ब्लॉग मीडिया में योगदान दें। हर दिन, हर हफ्ते, हर महीने या कभी-कभी इस शुभ कार्य के लिए आप जो भी राशि खर्च कर सकते हैं, उसे अवश्य ही खर्च करना चाहिए। आप इसे नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आसानी से कर सकते हैं।

Thursday, April 13, 2023

श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब चैरिटेबल हॉस्पिटल ट्रस्ट की एक और उपलब्धि

13th April 2023 at 6:30 PM 

खास लोगों की मौजूदगी में नए ऑपरेशन थिएटर का उद्घाटन 


लुधियाना:13 अप्रैल 2023: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

अंतरराष्ट्रीय सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एस पी सिंह ओबेरॉय ने आज गुरु हरिकृष्ण साहिब चैरिटेबल हॉस्पिटल ट्रस्ट, अर्बन स्टेट, फोकल प्वाइंट, लुधियाना में भाई नरेंद्र सिंह ऑपरेशन थियेटर का उद्घाटन किया। इस मौके पर लुधियाना के पुलिस कमिश्नर डाॅ. मनदीप सिंह सिद्धू, पंजाबी लेखक सुरजीत पातर, स. जसवंत सिंह छापा, तथा स. इकबाल सिंह गिल की उपस्थिति में अस्पताल को एक अल्ट्रासाउंड मशीन दान की गई। इस मौके पर पुलिस कमिश्नर ने जहां ओबेरॉय साहब को जन्मदिन की बधाई दी वहीं उन्होंने केक भी काटा और उनका मुंह मीठा किया। उनके सम्मुख सम्बोधित करते हुए कहा एक कवि ने बहुत अच्छा लिखा है कि विश्व में कुछ ऐसे ऐतिहासिक क्षण आते हैं जिनमें मनुष्य के गर्भ से जन्म लेकर एक नया इतिहास रचा जाता है। आज न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में मानवता की सेवा के लिए एस पी सिंह ओबेरॉय के प्रयासों के उदाहरण दिए गए हैं।आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि कोविड के समय में भी उन्होंने लोगों को मुफ्त राशन मुहैया कराया और विदेशों में फंसे पंजाब के लोगों को घर वापस लाया. उन्होंने समय-समय पर धर्मार्थ अस्पतालों को महंगी मशीनें देकर मानवता की सेवा में एक नई मिसाल पेश की है, जो आज कहीं देखने को नहीं मिलती। इस मौके पर एसपी सिंह ओबेरॉय ने सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन को भरोसा दिलाया कि वे भी पंजाब को नशे के चंगुल से छुड़ाने में अपना पूरा सहयोग देंगे।इस मौके पर पद्मश्री सुरजीत पातर जी ने ओबेरॉय साहब को उनके जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा, ईश्वर आपको लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन प्रदान करें ताकि आपके सहयोग से हम पंजाब को महाराजा रणजीत सिंह के समय की ऊंचाइयों पर वापस ला सकें।इस मौके पर अस्पताल के चेयरमैन किरपाल सिंह, इकबाल सिंह गिल, अध्यक्ष गुरदेव सिंह, परमजीत सिंह महराज, जसवंत सिंह चप्पा, जसबीर सिंह (एसीपी) अमनदीप सिंह बराड़, अश्विनी छाबड़ा (एसएचओ), गुरप्रीत कौर (समन्वयक), सुखविंदर कौर, मनजीत कौर, दर्शन सिंह, वीरेंद्र सिंह, डॉ. इंद्रजीत सिंह (कोटनीस एक्यूपंक्चर अस्पताल), शरणपाल मक्कड़ (अध्यक्ष जिला योजना बोर्ड) विशेष रूप से उपस्थित थे। 

Tuesday, February 14, 2023

ना दवा-ना इंजेक्शन-ना सर्जिकल्स//केवल सुई द्वारा इलाज

Tuesday 14th February 2023 at 06:38 PM WhatsApp Dr. ISD

एक्युपंकचर की जादुई खूबियों के बारे में बताया डा. इंद्रजीत ढींगरा ने 

लुधियाना:14 फरवरी 2023:(डा. इंद्रजीत सिंह ढींगरा से हुई बातों पर आधारित//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::


मानव शरीर पर सुई लगाने की चीनी पद्धति को एक्यूपंचर कहा जाता है।
सन 1949 में  आज़ादी लेने के बाद एक्यूपंचर विधि पर चीनी डाक्टरों ने खोज करनी शुरू कर दी। आज ना सिर्फ़ चीन में बल्कि दुनिया का हर विकसित देश इस चिकित्सा को अपनाकर  पूर्ण रूप से मान्यता दे चुका है। 

भारत में एक्यूपंचर की शुरुआत सन 1958 में भारतीय मेडिकल मिशन, चाइना 1938 के एक सदस्य  डॉ विजय कुमार बासु ने कोलकाता से की थी। उन्होंने सन 1972 में डा. कोटनीस यादगारी कमेटी की स्थापना कर के इस इलाज को भारत में प्रचलित  करने के लिए कुछ नौजवान डॉक्टरों को भी सिखाना शुरू कर दिया जिस के सुखद परिणाम भी निकले। इस नेक उपलक्ष के चलते ही आज हमारे देश में लगभग हर राज्य में एक्यूपंचर केंद्र चल रहे हैं। 

उत्तरी भारत में एक्यूपंचर इलाज 1975 से पहला इंडोर हॉस्पिटल लुधियाने सलीम टाबरी में डॉक्टर इंद्र जीत सिंह ढींगरा चला रहे हैं। इस अस्पताल मे ना केवल पंजाब से बल्कि दूसरे प्रांतों से भी लोग आकर  अपना इलाज करवाते हैं ।

एक्यूपंचर इलाज वास्तव में मानव शरीर में जीवन शक्ति फोर्स के सिद्धांत पर आधारित है। यह जीवन शक्ति शरीर में 24 घंटे में एक किनारे से दूसरे किनारे तक  प्रवाहित रहती है। जब तक इस शक्ति का प्रभाव शरीर में संतुलित रहता है, तब तक शरीर रोग  मुक्त रहता है परंतु जब किसी बाहरी या आंतरिक परिवर्तन के कारण  जीवन शक्ति के बहाव का संतुलन बिगड़ जाता है तब शरीर में बीमारियों  पैदा होनी शुरू हो जाती हैं और दुष्परिणाम यह कि  मानव शरीर किसी न किसी रोग से ग्रस्त हो जाता है।

एक्यूपंचर डॉक्टरों की उच्च कोटि की सबसे बड़ी खासियत और उपलब्धि यह है कि शरीर में इस ट्रेप के ज़रिए इस असंतुलन अवस्था को पहली स्थिति में ही सफलता से काबू कर लिया जाता है ताकि बीमारी को आगे बढ़ने ही ना दिया जाए।

उनके अनुसार पहली हालत में बीमारी शरीर की अपनी जीवन शक्ति के साथ कई बार स्वतः ही ठीक हो जाती है क्योंकि हमारी जीवन शक्ति यांग  एंड यिन  मेरिडियन शक्ति के दो रास्तों द्वारा शरीर में चलती रहती है जहां पर यह जीवन शक्ति शरीर को स्वस्थ रखती है। साथ ही बहुत बड़ी बात यह भी की यांग  एंड यिन शरीर को बीमारियो  से बचाने के लिए भी सहायक सिद्ध होती है।

यह दोनों जीवन शक्तियां शरीर के हर् सैल और टीशु   में से लहरों के रूप में कुछ खास रास्तों से गुज़रती है जिनके चिन्ह शरीर  कें ऊपरी हिस्सों में पाए जाते हैं यह लहरें शरीर में 12 जोड़ी होती है जो शरीर के कोमल अंगों और उनके हिस्सों से संबंधित रहती है।

यह लहरें कुछ खास रास्तों से भी गुज़रती हैं जिसे मेरिडियंस के रूप में जानते हैं। इन मेरिडियन के ऊपर कुछ खास बिंदु होते हैं जिन्हें  एक्यूपंचर बिन्दु कहते हैं  ये जीवन शक्ति और हमारे शरीर के अंगों की क्रियाओं पर विशेष असर रखते हैं।

इस पद्धति की सफलता और खूबियों को देखते हुए इस चिकित्सा पद्धति को 1996 में पश्चिम बंगाल सरकार और  2017 में महाराष्ट्र सरकार ने पूर्ण मानता दी थी। 

भारत सरकार द्वारा भी फरवरी 2019 में इस चिकित्सा पद्धति को एक स्वतंत्र चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता मिल चुकी है। 

जल्दी ही भारत में इसके विकास के लिए भारत सरकार द्वारा एक्यूपंक्चर मेडिकल कॉलेज स्थापित कर के डिग्री व डिप्लोमा भी  शुरू किए जाएंगे ताकि लोगों को अच्छी सेहत और पूर्ण तंदरुस्ती दी जा सके।

यह एक बहुत ही सुखद संयोग है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक्यूपंचर चिकित्सा पद्धति को 1979 में मान्यता दी थी अब विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा 2025 तक पूरे विश्व में लोगों को अच्छी सेहत देने के लिए एक्यूपंचर का विकास करने का लक्ष्य रखा है।

गौरतलब है कि एक्यूपंक्चर अस्थमा, जोड़ों के दर्द, सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस, चिंता, फ्रोजन शोल्डर, गठिया, फेफड़ों में संक्रमण, अनिद्रा, चेहरे का पक्षाघात, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया और कई गंभीर बीमारियों के इलाज में बहुत सफल साबित हुआ है, जिनका आधुनिक चिकित्सा में कोई स्थायी इलाज नहीं है।

एक्यूपंक्चर रोगग्रस्त व्यक्तियों के लिए सुरक्षित, किफायती, सफल और एक स्थायी चिकित्सा साबित हुआ है।

निरंतर सामाजिक चेतना और जनहित ब्लॉग मीडिया में योगदान दें। हर दिन, हर हफ्ते, हर महीने या कभी-कभी इस शुभ कार्य के लिए आप जो भी राशि खर्च कर सकते हैं, उसे अवश्य ही खर्च करना चाहिए। आप इसे नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आसानी से कर सकते हैं।

Friday, March 27, 2020

Corona:ओपीडी सेवाएं तुरंत बहाल की जाएं-डा. अरुण मित्रा

27th March 2020 at 11:32 AM 
मनमर्ज़ी की दवाओं और घरेलू टोटकों से हो सकता है नुकसान 
लुधियाना: 27 मार्च 2020: (एम एस भाटिया//कार्तिका सिंह)::
कोरोना संकट के चलते हालात बहुत नाज़ुक और विकराल बन गए हैं। लोग स्वास्थ्य  समस्यायों को ले कर बहुत अजीब सी उलझनों में हैं। ज़रा से छींक आ जाये या ज़रा सी खांसी तो उन्हें लगता है कि कहीं उन्हें कोरोना तो नहीं हो गया? इसी तरह  दर्द हो तो आशंका लगती है कि कहीं कोरोना का फ़्लू तो नहीं हुआ? ऐसे में बहुत से लोग डर के मारे डाक्टरों के पास भी नहीं जाते कि वहां से कहीं वहां से उन्हें आईसोलेशन हाऊस में भेज दिया जाये। आशंकाओं से घिरे हुए लोग या तो घरेलू टोटकों का सहारा लेते हैं या फिर मन मर्ज़ी की दवाओं का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। इससे उनकी स्वास्थ्य मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में डाक्टर अरुण मित्रा ने बहुत पते की बात कही है। उन्होंने कहा है छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों की ओपीडी सेवाएं तुरंत चालू करके ही लोगों को स्वास्थ्य संबंधी मामलों में राहत दी जा सकती है। गौरतलब है कि यह मांग उठाने वाले डा. अरुण मित्रा आईपीडी के वाईस प्रेजिडेंट भी हैं। आईपीडी अर्थात इंडियन डाकटरज़ फॉर पीस एंड डिवेलपमेंट लम्बे समय से  भेदभाव के मानवता के भले के लिए सक्रिय है। 
डा. अरुण मित्रा ने कहा कि कोरोना संकट के चलते आम लोग बहुत ही मुश्किलों में हैं। सरकारी और गैर सरकारी कोशिशों के बावजूद आम लोगों तक वह राहत नहीं पहुंच रही जैसा कि ज़रूरत है।  राशन के साथ साथ मुख्ख समस्या स्वास्थ्य सबंधी दिक्क्तों की भी हैं। कोरोना से डरे हुए लोग बेहद डर और दुविधा में हैं। गली मोहल्लों में उनके आसपास न कोई अस्पताल खुला है और न ही कोई क्लिनिक। ऐसे में लोग जो भी दवा अपने या पड़ोसी के घर में पड़ी मिलती है उसे ही लेने लगते हैं। कोई डाक्टर की पर्ची मिल भी जाये तो भी उन्हें बहुत दूर जाना पड़ता है। ऐसी हालत में यही उचित होगा कि गल्ली मोहल्लों के क्लिनिक भी तुरंत खोले जाएं और वहां ओपीडी जैसी  तुरंत शुरू की जाएं।    
डाक्टर मित्रा ने इस संबंध में एक प्रेस बयान जारी करते हुए सरकार से भी मांग की कि ओपीडी सेवाएं तुरंत शुरू करने की आज्ञा सभी सबंधित क्लीनिकों को दी जाये। छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों में ओपीडी सेवाएं शुरू करके लोगों को बहुत बड़ी राहत दी जा सकेगी।
 कुछ अन्य दिलचस्प लिंक:
छत्तीसगढ़ मेल में पढ़िए:
रायपुर:मशरूम से वनांचल की महिलाएं बनी आत्मनिर्भर
आराधना टाईम्ज़ में पढ़िए:
पूरी तरह वैज्ञानिक हैं हवन के फायदे
इच्छापूर्ति वॄक्ष आपके पास भी है 
मोहाली स्क्रीन में पढ़िए:
सोशल डिस्टेंसिंग के नियम की पालना ही बचा सकती है कोरोना से 
कोरोना: एन आर आईज़ को खलनायक समझना ठीक नहीं 

Sunday, December 23, 2018

पास्टर सुलतान मसीह की याद में डा. रमेश मंसूरां का निशुल्क आई कैंप

जहां पास्टर की हत्या की गयी वहां पर फिर उमड़ा प्रेम का संदेश 
लुधियाना: 23 दिसंबर 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
बेहद लोकप्रिय थे पास्टर सुल्तान मसीह। हर किसी को हमेशां अपने  लगते। उनकी आवभगत भी कमाल की थी। बातें करते हुए जब वह ताली या चुटकी बजाते तो उनके स्टाफ को मालूम हो जाता कि इस मेहमान को क्या पसंद है। चाय या काफी? मीठा या नमकीन? पकौड़े या समोसे? उनकी आवभगत का अंदाज़ बिलकुल निराला था। 
किसी की सहायता करते वक़्त भी वह किसी को कानोकान खबर न होने देते। जिसकी मदद करते उसको भी बस उसे भी मदद होने पर ही पता चलता और उसे भी कहते बस चुप रहना।  यह सब भगवान येशु ने किया। उसको कभी कमज़ोर या हल्का महसूस न होने देते। जब 15 जुलाई 2017 को उनकी बर्बर हत्या की गयी तो बहुत से लोगों को लगा कि उन के सिर से उनका सहारा उठ गया। जिस चर्च में कभी हर पल रौनक औऱ खुशियों  का माहौल बना रहता था उस पर पुलिस का पहरा लग गया। यह सब कुछ सुरक्षा के लिए ही हुआ था लेकिन अहसास में कुछ डर सा अवश्य महसूस होने लगा। उस माहौल को तोड़ने में पास्टर सुलतान मसीह के बेटे अली शा ने बहुत हिमत दिखाई। पिता से बिछड़ने का गम भूलना आसान नहीं था लेकिन चर्च की ज़िम्मेदारी को देखते हुए उन्होंने खुद को सहज किया। 
आज उसी चर्च में जब आँखों की जाँच का निशुल्क कैम्प लगा तो ऐसे महसूस हुआ जैसे वह प्रेम भरा पुराना माहौल फिर लौट आया हो। डाक्टर रमेश मंसूरां की देख रेख में पुनर्जोत अभियान का स्टाफ इस मेडिकल शिविर में सक्रिय था। जहाँ कभी पास्टर सुल्तान मसीह गरीबों की ज़िंदगी में आये अंधेरों को दूर किया करते थे वहीँ आज डाक्टर रमेश का स्टाफ गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की आँखों का इलाज करके उनकी ज़िंदगी में छाये अंधेरों को दूर कर रहा था। इस मौके पर पुनर्जोत अभियान के सक्रिय स्टाफ मेंबर मंजीत कौर कई कई बार भावुक हुई। इसी तरह एक और सक्रिय सदस्य रछपाल ऋषि ने भी कई बार पास्टर सुलतान मसीह को याद किया। 
वास्तव में यह कैंप उन्हीं की याद में लगाया गया था। चर्च में लगे इस कैंप में डाक्टर रमेश के स्टाफ को पूरा सहयोग दिया चर्च के स्टाफ ने।  बहुत से लोग आये। बहुत से लोगों ने इस कैंप का फायदा उठाया। किसी के ऑपरेशन की समस्या हल हुई। किसी को आँखों के दर्द की दवा मिली। किसी ने चश्में एक नंबर बनवाया। किसी ने ऐनक निशुल्क ली। यहाँ दवाएं भी बिलकुल फ्री बांटी गयी। खानेपीने का प्रबंध चर्च की तरफ से था। कुल मिलाकर यह एक सफल कैंप था। लोगों की भीड़ को देख कर शहीद पास्टर सुलतान मसीह के बेटे और मौजूदा पास्टर अली शा ने भी संतोष व्यक्त किया। जिस जगह पर पास्टर सुलतान मसीह की हत्या की गयी थी उस जगह पर फिर से शांति और जनसेवा का संदेश इस कैंप के ज़रिये लोगों तक पहुंच रहा था। ऐसे लग रहा था जैसे पास्टर  खुद इसी कैंप में मौजूद हों और छुप कर सब कुछ देख रहे हों। 

Thursday, August 30, 2018

थैलेसीमिया का ईलाज: लवली जैन का जनून रंग लाया

अब लुधियाना में भी होगा बकरे के खून से थैलासीमिक बच्चों का ईलाज 
लुधियाना: 29 अगस्त 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम):: 

पूंजीवाद  के दौर में मुनाफा सबसे पहले आता है। बाप बड़ा न भैया-सबसे बड़ा रूपया। वो रुपया किसी का खूबसूरत चेहरा दिखा कर आए या फिर उसके आंसू दिखा कर--उसे बहुत गर्वपूर्ण कमाई समझा जाता है। शिक्षा, वकालत, गीत-संगीत, अभिनय, लेखन, मीडिया और अन्य क्षेत्रों के साथ साथ मेडिकल क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं बचा। पहले पहल होम्योपैथी और आयुर्वेद को सस्ता इलाज समझा जाता था लेकिन अब बहुत से लोग इन क्षेत्रों में भी कमाई को पहल देने लगे हैं। इसके बावजूद आयुर्वेद में अभी भी आशाएं बाकी हैं।

इसका अहसास हुआ जब करीब तीन वर्ष पूर्ण अहमदाबाद (गुजरात)  के डाक्टर अतुल भवसार से बात करवाई लुधियाना के लवली जैन ने। उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया के बच्चों को बकरे का खून भी चढ़या जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में सफलता के बाद अब पंजाब में भी इस तजर्बे की तैयारी है। सुन कर यकीन नहीं हुआ। इस योजना का विरोध भी बड़े पैमाने पर हुआ। यह तो लवली जैन की हिम्मत कहो कि यह अभियान जारी रहा।
उन दिनों गुजरात से लुधियाना आए डॉ.अतुल भावसर ने बताया था कि थेलेसीमिया के मरीजों के लिए इंसान की वजाए बकरे का खून ज्यदा फयेदेमंद है। गुजरात के शहर अहमदाबाद स्थित अखंडानंद आयुर्वेद अस्पताल के पंचकर्मा डिपार्टमेंट के हेड डॉ. भावसर ने कहा के थेलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को हर 15-20 दिन बाद ब्लड चढ़ाना पड़ता है क्योंकि इस बीमारी की वजह से ब्लड के आरबीसी (रेड ब्लड सेल) तेजी से टूटते है। जिस कारण मरीज में हिमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। थेलेसीमिया के मरीजों के लिए उन्होंने एक नई खोज की है। जिसके तहत बकरे का खून चढ़ाने पर मरीज को 15 -20 दिन की बजाय दो महीने बाद ही ब्लड चढ़ाने की जरुरत पड़ती है। कई मरीजों को 5 महीने बाद ही खून चढ़ाने की जरुरत पडती है। इसका कारण यह है कि बकरे के खून के आरबीसी जल्दी नहीं टूटते। जिससे मरीज में ज्यादा समय तक हीमोग्लोबिन की मात्रा सही बनी रहती है। डॉ. भावसर ने दावा किया कि इस भयंकर बीमारी से निपटने की कैपेसिटी एलोपैथी के मुकाबले आयुर्वेद में ज्यादा है। थेलेसीमिया में बकरे के खून के इस्तेमाल की पद्धति को गुजरात सरकार ने मान्यता दे दी है। इस पद्धति में मरीज को खून वेन की बजाय एनिमिया के  जरिए बड़ी आंत तक पहुंचाया जाता है।  यह आंत जरुरत के मुताबिक खून को लेने के बाद बाकी बाहर निकाल देती है।  सोसायटी के प्रधान लवली जैन  जुटे रहे। थैलेसीमिया के लिए काम करने वाले उनके बहुत से मित्र भी उन्हें छोड़ गए लेकिन लवली जैन का मनोबल नहीं टूटा।
कभी किसी वीआईपी से--कभी किसी मंत्री से--कभी किसी मीडिया से--जब भी मिलते बस यही गुहार लगाते-इन बच्चों का कुछ करो। गौरतलब है कि लवली जैन खुद शरीरक तौर पर बहुत मुश्किल से उठ बैठ सकते हैं। इस अक्षमता के बावजूद वह हर पल डटे रहे। हर वक यही सोचते-इन बच्चों को बचाना है। सबके पास अंग्रेजी इलाज पर खर्चा आनेवाला पैसा नहीं है। इसलिए इन पर डाक्टर भवसार का सफल प्रयोग लागू करना होगा। जो फायदा गुजरात के लोगों  को मिला वही फायदा पंजाब-हरियाणा-हिमाचल-जम्मू कश्मीर और आसपास के लोगों को भी मिलना चाहिए। 
आखिर लवली जैन का जनून रंग लाया। लुधियाना में थैलसीमिक बच्चों को बकरी या बकरे के खून से ईलाज उपलब्ध करने वाला अस्पताल बन कर तैयार हो चुका है। बहुत ही मेहनती स्टाफ। इन बच्चों के लिए डेडिकेटिड स्टाफ। लगता है है अब उन परिवारों की भी सुनी गयी है जो हर दो सप्ताह बाद खून चढ़ाने का खर्चा वहन नहीं कर सकते। 

Monday, August 06, 2018

जालंधर में माइग्रेटरी पोलियो मुहिम की शुरूआत

हाई रिस्क इलाकों को दी गयी पहल
जालंधर: 5 अगस्त 2018: (राजपाल कौर//पंजाब स्क्रीन)::  
बदलते मौसम में अलग तरह की कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। इनका मुकाबिला करने के साथ जागरूक समाजसेवी और स्वास्थ्य अधिकारी अन्य प्रोजेक्टों को लेकर भी सतर्क और सरगर्म रहते हैं। जालंधर में माइग्रेटरी पोलियो मुहिम इसी तरह की शानदार मिसाल है। 
आज एस.एम.ओ करतारपुर डॉ.हरदेव सिंह के निर्देशानुसार ए.एम.ओ डॉ.हेमंत मल्होत्रा की अगुवाई में पी.एच.सी रंधावा मसंदा के अधीन क्षेत्र में माइग्रेटरी पोलियो मुहिम की शुरूआत समाज सेवक परविंदर सिंह, मैडम राजपाल कौर और जरनैल सिंह रंधावा द्वारा की गई। डॉ.हेमंत मल्होत्रा ने बताया कि 5 से 8 अगस्त तक चलने वाली इस मुहिम में उनकी टीमो द्वारा जालंधर के हाई रिस्क एरिया गुदाईपुर, राजा गार्डन, उद्योग नगर, स्वर्ण पार्क और रंधावा मसंदा के साथ लगते गांवो में 0 से 5 साल तक के लगभग 2500 बच्चों को दो बूंद पोलियो दवा की पिलाई जाएगी। इस मौके एस.आई इंदरजीत सिंह, एल.एच.वी उर्मिल गिल, ज्योति सुमन, नीतू, रमनदीप, सरबजीत, गुरबख्श, राज रानी, मंजीत, रीना, सुनीता, पूनम आदि हाजिर थे ।

Tuesday, May 15, 2018

CMC लुधियाना में 3 दिन की हेमोफिलिया कार्यशाला का आयोजन

Tue, May 15, 2018 at 3:40 PM
हेमोफिलिया के पर्याप्त डायग्नोसिस और उपचार की कमी 
लुधियाना: 15 मई 2018 (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
सीएमसी, लुधियाना  के हेमेटोथोलॉजी विभाग ने आज राज्य स्तरीय कार्यशाला "अहेड”(AHEAD -Advancing Hemophilia Education Awareness & Diagnosis) आयोजित की इसके अंतर्गत  हेमोफिलिया शिक्षा जागरूकता और निदान । यह 15 मई, 2018 से शुरू होने वाली तीन दिवसीय कार्यशाला है। हेमोफिलिया एक आम रक्तस्राव विकार है, लेकिन समुदाय में पर्याप्त डायग्नोसिस और उपचार की कमी है।
इस वर्कशॉप में पंजाब के सभी मेडिकल कॉलेजों और सिविल अस्पतालों में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संरक्षण के साथ साथ डॉक्टरों के लिए एक राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम है। हेमोफिलिया के विश्व फेडरेशन से अनुकूलित इस वर्ष के कार्यक्रम का विषय था "ज्ञान साझा करना हमें मजबूत बनाता है"। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में तीन शाखाऐ हैं, जिसमें डॉक्टर, तकनीशियन और फिजियोथेरेपिस्ट होते हैं।
इस वर्कशॉप का मुख्य आकर्षण था सी.एम.सी लुधियाना के विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान । डॉ. एम जोसेफ जॉन, डॉ.चेप्सी फिलिप और नैदानिक हेमेटोलॉजी विभाग के डॉ. सुवीर सिंह ने हेमोफिलिया के नैदानिक प्रबंधन और अभिव्यक्तियों पर बात की। हेमेटो-पैथोलॉजी के डॉ. नवीन ककर और डॉ.वंदना ने विभिन्न प्रयोगशाला पहलुओं के बारे में बात की, और प्रयोगशाला तकनीशियनों के लिए प्रैक्टिकल सेशन, ताकि वे हेमोफिलिया के रोगियों का निदान और निगरानी करने के लिए प्रयोगशाला तकनीकों में सक्षम हो सकें। फिजियोथेरेपी विभाग से डॉ. मुल्लाई और उनकी टीम ने हेमोफिलिया के मस्कुलोस्केलेटल (हड्डियों और मांसपेशियों) के अभिव्यक्तियों और उनके इलाज के उपायों पर भी बात की। कार्यक्रम के लिए बाहरी संकाय से पी.जी.आई चंडीगढ़ के प्रमुख विशेषज्ञ भी शामिल थे, जिनमें डॉ.पंकज मल्होत्रा, प्रोफेसर और क्लिनिकल हेमेटोलॉजी के प्रमुख, और बाल चिकित्सा के प्रोफेसर डॉ.दीपक बंसल और जी.एम.सी.एच के डॉ. अनीता ताहलान, सेक्टर 32 से शामिल थे । हेमोफिलिया के रोगियों के निदान और प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के बारे में यह यह सभी बोले। सी.एम.सी अस्पताल के निर्देशक डॉ. विलियम भट्टी, भी अन्य गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे और उन्होंने इस तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित करने के लिए सभी के प्रयासों की सरहना की और बधाई दी।
डॉ.परमिंदर पाल सिंह सिद्धू, सिविल सर्जन लुधियाना आज के कार्यकर्म के लिए मुख्य अतिथि थे। डॉ. मनप्रीत चटवाल, अतिरिक्त परियोजना निर्देशक और डॉ. सुखविंदर सिंह, संयुक्त निर्देशक रक्त ट्रांसफ्यूजन सर्विसेज सह एस.एन.ओ, राज्य रक्त कोशिका, आये हुए मेहमानों में शामिल थे | यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.एच.एम) पंजाब के मरीजों के लिए सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सी.एम.सी लुधियाना को मुफ्त एंटी हैमिफिलिया कारक प्रदान करने के प्रस्ताव के रूप में किया गया था। यह उम्मीद की जा रही है कि ऐसी कार्यशालाएं समुदाय में हेमोफिलिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने और राज्य स्तर पर निदान और उपचार के लिए सुविधाओं में सुधार करने में मदद करेंगी। यह पंजाब को हेमोफिलिया मुक्त राज्य बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में मदद करेगा, और मरीजों के लिए मुफ्त या सब्सिडी उपचार प्रदान करेगा।

Saturday, February 03, 2018

लक्ष्णों के बावजूद ऑपरेशन में देरी करना जानलेवा भी हो सकता है

[17:22, 2/3/2018]
पित्ते की पथरी पर डा. नरोत्तम दीवान ने किया सावधान  
लुधियाना: 3 फरवरी 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
दीवान अस्पताल एंड एडवांस्ड लेप्रोस्कोपिक सजर्री  सेंटर के सेमिनार रूम में शनिवार को सीएमई का आयोजन किया गया। सीएमई में पित्ते की पथरी के इलाज व दूरबीन से ऑपरेशन के प्रसिद़्ध जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सजर्न डॉ.नरोत्तम दीवान ने ‘पित्ते की पथरी का समय पर ऑपरेशन कराने से होने वाली समस्याएं’ विषय पर संबोधित किया। 
डॉ.दीवान ने कहा कि वैसे तो पित्ते की पथरी के बारे में पता चलने के तुरंत बाद ऑपरेशन करना जरूरी नहीं है लेकिन पेट में मामूली दर्द, हाजमा खराब होना, गैस ज्यादा बनने, उलटी आने या बुखार चढ़ने जैसे लक्ष्णों के बावजूद ऑपरेशन में देरी करना जानलेवा भी हो सकता है।
 कई बार पित्ते की पथरी पित्ते से फसलकर पित्त की नलकी में फंसकर पित्त का रास्ता रोक देती है। इससे पित्त आंतड़ियों की बजाय रक्त में जाने लगता है। इससे मरीज की आंखें त्वचा व पेशाब पीला व शौच का रंग सफेद हो जाता है। मरीज के सारी त्वचा पर खुजली होने है।  शरीर में विटामिन के की कमी हो जाती है। विटामिन के की कमी से खून जमने में खराबी आ जाती है और थोड़ी सी चोट पर भी बहुत ज्यादा रक्त बहता है।
इसके अलावा कई बर पित्ते की पथरियां ज्यादा देर रहने तक से पित्ते में सोजिश पड़ने से आसपास की आंतड़ियां उससे चिपक जाती हैं और एक गांठ का आकार ले लेती है। इससे मरीज का एक दम ऑपरेशन नहीं हो पाता है। उसे कुछ महीने दवा लेनी पड़ती है व दाखिल भी होना पड़ता है। 
अगर पथरी एक और बड़ी हो तो वह सालों साल रहने के बाद पित्ते में कैंसर पैदा कर देती है। यह कैंसर जानलेवा होता है, क्योंकिा पित्ता जिगर के पास होने की वजह से कैंसर जिगर में बहुत तेजी से दाखिल हो जाता है, जिससे मरीज एकदम से कैंसर की आािखरी स्टेज में पहुंच जाता है।
 इसी तरह पित्ते की पथरी के ऑपरेशन में देरी करने से पित्ते में मवाद पड़ जाता है या पित्ता गल जाता है। मवाद का प्रेशर ज्यादा पड़ने से पित्ता फब्ट जाता है जोकि खतरनाक स्थिति है। इसके इलाज में रिस्क भी रहता है।
इसी तरह मरीज को कोलेंजाइटिस बीमारी भी हो सकती है, जिसमें कुछ अर्सा पहले तक शत प्रतिशत मरीजों की मौत हो जाती थी। हालांकि अभी भी  सात फीसदी डेथ रेट है।
इसमें मरीज को पीलिया, तेज बुखार व पेट के दाहिने में ऊपरी तरफ दर्द, तेज कंपकंपी होने लगती है। पित्ते की नलकियों में कीटाणु बहुत बढ़ जातो है और मवाद पैदा हो सकता है। वह कीटाणु व मवायद जिगर से होते हुए खून में चले जाते हैं, और सारे शरीर में मवाद, कीटाणाु व उसका जहर फैल जाता है। मरीज का ब्लड प्रेशन बहुत तेजी से गिर सकता है और उसके गुर्दे अैर फेफड़े फेल हो सकते हैं। इसके लिए बहुत तेजी से इलाज की जरूी रहीत है। 
पित्ते की पथरी के इलाज में देरी से पेनक्रियाज ग्रंथी में सोजिश से पेनक्रिएटाइटिस बीमारी हो जाती है। पेनक्रियाज से निकलने वलो द्रव्य गुर्दे व फेफड़ों को फेल कर सकते हैं। इससे पेट में पानी व मवाद भर सकता है। मरीज का ब्लड प्रेशर गिर सकता है व उसकी रक्त की धमनियों में ही ब्लड जम जाता है। पेट में खून की धमनियों के जमने से रक्त बहना भी शुरू हो सकता है। पेनक्रियाज में सोजिश से मवाद पड़ जाने पर बार-बार ऑपरेशन करने पड़ते हैं। इसमें भी मरीज को बहुत लंबे समय तक अस्ताल या आईसीयू में दाखिल रहकर बार-बार ऑप्रेशन कराने पड़ सकते हैं। लेकिन फिर भी दस फीसदी मरीज बच नहीं पाते हैं।

Monday, June 12, 2017

महंगाई के चलते कैम्पों से मिलती है आम लोगों को कुछ राहत

श्री दण्डी स्वामी मंदिर के मेडिकल कैम्प में हुई 600 मरीज़ों की जांच 
लुधियाना:11 जून 2017: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन):: More Pics on facebook 
विकास के दावे सियासत वालों की या उनके समर्थकों की तो मजबूरी हो सकती है पर हमारी नहीं। ज़मीनी हकीकत देखना और दिखाना हमारा कर्तव्य भी है और मकसद भी। दावे कितने सच्चे हैं यह हकीकत हम आपके सामने लाते रहते हैं। इस बार इस हकीकत कोदेखने का बहाना बना है एक मेडिकल कैम्प। जब कहीं मेडिकल कैम्प लगता है तो वहां बहुत से ऐसे लोग भी आते हैं जो कभी कभी उच्च मध्यम वर्गीय परिवारों से भी सबंधित होते हैं। कैम्प में आये हुए इन लोगों के दिल को टटोलने और उनकी आंखों में ध्यान से देखने पर पता चलता है कि कितनी देर हो चुकी है उन्हें यह सोचते हुए कि अपना इलाज  लेकिन लेकिन वे चाह कर भी अपना इलाज नहीं करवा पाए। दिन-ब-दिन महंगे हो रहे इलाज के कारण अस्पतालों में जाने से पहले बार बार सोचना पड़ता है। ऐसे बेबस और मजबूर लोगों के लिए मेडिकल कैम्प आवश्यक इलाज की सुविधा और अवसर का वरदान ले कर आते हैं। 
आज लुधियाना के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री सिद्ध पीठ श्री दंडी स्वामी मंदिर में एक ऐसा ही कैम्प था। बहुत से लोग मिले जो बहुत देर से अपनी शूगर तक चैक नहीं करवा सके थे। बहुत से लोग ऐसे भी थे जिनके लिए बीपी चैक करवाना भी सम्भव न हो सका। बहुत से लोग ऐसे थे जिनको अपनी बीमारी की समझ नहीं आ रही थी। बहुत से लोग आंखों का आपरेशन करवा पाने की स्थिति में भी नहीं थे। हमारी टीम को इस कैम्प में जाने का अवसर मिला गांव मंसूरां वाले डाक्टर रमेश की तरफ से आये निमंत्रण के बहाने से। कैम्प में पहुँच कर मिली बहुत से लोगों की बहुत सी कहानियां जिनको आम तौर पर न तो मीडिया में जगह मिलती है न ही सियासतदानों के दरबार में। यूं भी दुःख सभी को बता पाना आसान कहाँ होता है। हम भी उनके दिलों में छुपा उतना ही दुःख पाए जितना बातों बातों में उनकी आँखों तक झलक आया। हमें लगा अगर इनकी बेबसी और मूलभूत आवश्यकता को नज़र अंदाज़ करके समाज का विकास देखा गया तो विकास के वे आंकड़े सच्चे नहीं होंगें। More Pics on facebook 
शहर के सिविल लाइंस इलाके में स्थित श्री सिद्ध पीठ श्री दंडी स्वामी मंदिर में फ्री मेडिकल कैंप का आयोजन पं. राज कुमार शर्मा की अगुवाई में किया गया था। सफेद वस्त्रों में पंडित राजकुमार जी हर टेबल पर जा कर काम तो बार बार चैक करते हैं पर जल्दी किये मीडिया के सामने नहीं आते। पूछ भी लो तो कहेंगे आप मरीज़ों से बात करो--डाक्टरों के विचार सुनो। मैं तो सेवादार हूँ। इस कैंप में विशेष रूप से आंखों के माहिर डॉ. रमेश मंसूरा, डॉ. वरुण मेहता, डॉ. अमित कांसल, डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. सुरिंदर गुप्ता और अन्य डॉ. विशेष रूप से मरीज़ों का इलाज़ करने को सहयोग दिया। कैंप में आंखों के 600 मरीज़ों का चेकअप किया गया। इस मौके पर चौधरी मदनलाल बग्गा, अनिल शर्मा, चंदर मोहन, राजेश गाबा, रवि मल्होत्रा, गुलशन नागपाल, पं. गोपाल शर्मा, राजिंदर नागपाल, धर्मवीर, दीपक शर्मा भी मौजूद थे। तकरीबन हर टेबल पर भीड़ थी। दुःख और मसीबत के मरे लोगों की आँखों में एक चमक भी थी। यह चमक उम्मीद की किरण से आ रही थी। खुद को फिर स्वस्थ महसूस करने की उम्मीद। More Pics on facebook 
शूगर की जाँच टेबल पर जा कर पूछा तो पता चला कि  ज़्यादातर लोग 30 वर्ष से अधिक उम्र के ही आए थे पर शूगर सभी को थी। किसी को कम किसी को ज़्यादा। इसी तरह ब्लड प्रेशर की जाँच कर रही मैडम आशा ने बताया कि ब्लड प्रेशर भी यहाँ जाँच के लिए आये तकरीबन सभी लोगों को था। हाँ हाई बीपी के मरीज़ लो बीपी से कुछ ज़्यादा थे। इसी तरह गैस्ट्रो के मरीज़ भी बहुत ज़्यादा थे। डाक्टर वरुण मेहता बहुत ध्यान से सभी को देख रहे थे। कुछ मरीज़ों ने बताया कि उनके इलाके में पानी शुद्ध नहीं आ रहा। बहुत बार कहा लेकिन पानी शुद्ध नहीं हुआ। आँखों के मरीज़ों की संख्या शायद सभी से अधिक थी। बाद दोपहर तक लम्बी लम्बी लाइनें. नज़र आयी।  सफेद मोतिया, कला मोतिया और बहुत सी अन्य समस्याएं। डाक्टर रमेश से मिल कर इन मरीज़ों को एक नयी ख़ुशी मिली।  दुनिया को फिर से ठीक रूप में देख पाने की उम्मीद जगी। इनकी अँधेरी ज़िंदगी में रौशनी का संदेश लाये डाक्टर रमेश। ये वे लोग थे  जो दोबारा देख पाने की संभावना का सपना भी नहीं लेते थे। More Pics on facebook 
इसी तरह ई एन टी के जांच टेबल पर कम सुनने वाले मरीज़ों की संख्या ज़्यादा थी। डाक्टर संदीप शर्मा बहुत बारीकी से सभी की जाँच कर रह थे। इन मरीज़ों में भी छोटी बड़ी उम्र के मिले जुले मरीज़ ज़्यादा थे। फैक्ट्रियों में चलती बड़ी बड़ी मशीनों के आवाज़ों से पैदा होते शोर के प्रदूषण ने इनके कानों पर बहुत बुरा असर डाला। इन मरीज़ों को भी इसी कैम्प में आ क्र राहत मिली। 
  More Pics on facebook 

Friday, May 19, 2017

""ठाकुर दलीप सिंह जी की कृपा से ठीक हो गया दिल का सुराख"

Fri, May 19, 2017 at 10:33 AM
जालंधर की प्रिंसिपल राजपाल कौर ने किया सभी सबूत पास होने का दावा 
बच्ची प्रेम कौर और उसके माता पिता करणबीर सिंह और राजिंदर कौर 
जालंधर: 19 मई 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
आजकल नवजन्मे या छोटे बच्चों के दिल में सुराख होने की समस्या लगातार बढ़ रही है। ऐसा ही कुछ हुआ जम्मू के एक नामधारी परिवार के साथ। इस परिवार की बच्ची के दिल में भी सुराख था। जालंधर की प्रिंसिपल राजपाल कौर ने दावा किया है कि यह सुराख ठाकुर दलीप सिंह जी की कृप से बिना किसी इलाज के ठीक हो गया है। उनकी भेजी रिपोर्ट हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं। इस रिपोर्ट पर आपके विचारों की भी इंतज़ार रहेगी।-सम्पादक 
राजपाल कौर की रिपोर्ट:::
सतगुरु शब्द सत्य और गुरु के सुमेल से बना है। जो अज्ञान के अन्धेरे से ज्ञान के प्रकाश की तरफ ले चले तथा जो शिष्यों को सच की राह दिखाये उसे सतगुरु कहते हैं। गुरबाणी में भी लिखा है "सति पुरखु जिनि जानिआ सतगुरु तिस का नाउ" तथा "सतिगुरु सभना दा भला मनाइदा, तिस दा बुरा किउ होई"---क्योंकि ऐसे सतगुरु रूप संसार में सभी का कल्याण करने के लिए तथा सदमार्ग दिखाने के लिए ही आते हैं और जो सच्चे मन से सतगुरु जी के चरणों से जुड़ जाता है, वह भवसागर से पार हो जाता है।                       
सतगुरु की कृपा से असम्भव काम भी हो जाते हैं सम्भव 
इस बच्ची के दिल में था सुराख 
वर्तमान समय में नामधारी प्रमुख सतगुरु दलीप सिंह जी, जो विनम्रता तथा त्याग की मूरत हैं, अपने अलौकिक रूप से सबका मन मोह लेते हैं तथा शरण आये हुए पर अपनी कृपा - मेहर करते हैं। ऐसे अनेक अलौकिक कृपाओं को मैने देखा-सुना भी है तथा अनुभव भी किया है, उनमें से केवल एक का ही जिक्र करने जा रही हूँ, जो वाकई सभी को अचंभित कर देने वाली है कि ऐसे कलयुग के समय में भी सतगुरु की कृपा से तथा नाम जपने से असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाते हैं। जम्मू के कृष्णानगर में रहने वाले कुलदीप सिंह जी ने मुझसे मुलाकात होने पर अपनी आपबीती वार्ता के बारे में बताया ,उनके साथ उनका परिवार; उनकी पत्नी सुखविंदर कौर, बेटा करणबीर सिंह, बहु रजिन्दर कौर तथा उनकी पोती प्रेम कौर भी थे। उन्होंने बताया की जब उनकी पोती प्रेम कौर जब केवल दो महीने की ही थी तो वह बहुत बीमार रहती थी, उन्होंने उसे जम्मू के डॉक्टर सी.डी.गुप्ता से चेक करवाया तो उन्होंने बताया की आपकी पोती के दिल में सुराख़ है और इसका अभी कोई इलाज नहीं हो सकता ,जब आपकी बच्ची पाँच साल की हो जाएगी तो एक नई तकनीक द्वारा, जिसमें पैर का मांस काट कर वहां लगा कर ऑपरेट किया जा सकता है या फिर धीरे-धीरे बड़े होने पर भर सकता है। सारे परिवार वाले बहुत निराश हुए और सोच में पड़ गए कि अब क्या किया जाये क्योंकि वो मासूम बच्ची दिल में सुराख़ होने की वजह से उसे बुखार भी अक्सर हो जाया करता था तथा उसके शरीर का उचित विकास भी नहीं हो रहा था।लेकिन निराशा और दुःख में तो केवल परमात्मा ही पुकार सुन सकते है उनकी भी पुकार सुनी गई और उन्हें अपने आराध्य गुरु, सतगुरु दलीप सिंह जी के दर्शन करने का मौका मिला, उन्होंने दर्शन करके सतगुरु जी के चरणों में विनती करके अपनी पोती की हालत के बारे में बताया। सतगुरु जी ने बड़े ध्यान से सारी बात सुनी, फिर बचन किया कि बच्ची की माता उसे अपनी गोद में लेकर पांच मिनट प्रतिदिन नाम सिमरन करे और ऐसा लगातार चालीस दिन तक करे, वे सत्यवचन कहकर, सतगुरु जी को नमस्कार कर घर आ गए और उनकी बहु ने बताया की ऐसा उसने लगातार करना शुरू कर दिया और चालीस दिन के बाद बच्ची की हालत में सुधार आना शुरू हो गया और उसका  ग्रोथ (विकास) होना भी शुरू हो गया, बुखार आना भी धीरे-धीरे बंद हो गया। उसके बाद वे थोड़ा निश्चिंत हो गए और दुबारा टैस्ट कराने भी नहीं गए क्योंकि उन्हें अपने गुरु पर पूरा भरोसा था फिर भी उन्होंने सभी की तसल्ली करवाने के लिए लगभग दो साल बाद बच्ची का टैस्ट करवाने के लिए उसी डॉक्टर के पास दुबारा  गए तथा जब डॉक्टर ने टैस्ट कर लिए तो वे हैरान हो गए कि बच्ची बिल्कुल ठीक थी ,उसके दिल में कोई सुराख़ नहीं था। डॉक्टर के पूछने पर कि आपने कोई इलाज करवाया था, बच्ची नॉर्मल कैसे हो गई तो कुलदीप सिंह जी ने उन्हें सारी बात बताई कि कैसे सतगुरु जी की आज्ञा से, नाम जपने से उनकी बच्ची ठीक हो गई। गुरबाणी में भी लिखा है" सरब रोग का अउखदु नामु" पर जो इसे श्रद्धा से मानता है वही इसका लाभ प्राप्त कर सकता है, सतगुरु जी के बचनों को जीवन में श्रद्धापूर्वक अपनाकर ही खुशियाँ प्राप्त की जा सकती है। डॉक्टर ने उन्हें रिपोर्ट भी दिखाई और वे ख़ुशी-ख़ुशी घर वापिस आ गए। उन्होंने मुझे भी दोनों रिपोर्टे दिखाई पहली वाली और बाद वाली भी। मैं भी उनके बचन सुनकर धन्य हो गई। मेरे मुँह से केवल यही शब्द निकले ;धन्य सतगुरु जी और धन्य हैं उनके सिक्ख! जो श्रद्धा से उनके बताये मार्ग पर चलकर उनके कृपा-पात्र बन जाते हैं। जम्मू में रहने वाले कुलदीप सिंह जी ने मुझसे मुलाकात होने पर अपनी आपबीती वार्ता के बारे में बताया, उनके साथ उनका परिवार; उनकी पत्नी सुखविंदर कौर, बेटा करणबीर सिंह, बहु रजिन्दर कौर तथा उनकी पोती प्रेम कौर भी थे। उन्होंने बताया की जब उनकी पोती प्रेम कौर जब केवल दो महीने की ही थी तो वह बहुत बीमार रहती थी, उन्होंने उसे जम्मू के डॉक्टर सी.डी.गुप्ता से चेक करवाया तो उन्होंने बताया की आपकी पोती के दिल में सुराख़ है और इसका अभी कोई इलाज नहीं हो सकता, जब आपकी बच्ची पाँच साल की हो जाएगी तो एक नई तकनीक द्वारा, जिसमें पैर का मांस काट कर वहां लगा कर ऑपरेट किया जा सकता है या फिर धीरे-धीरे बड़े होने पर भर सकता है। सारे परिवार वाले बहुत निराश हुए और सोच में पड़ गए कि अब क्या किया जाये क्योंकि वो मासूम बच्ची दिल में सुराख़ होने की वजह से उसे बुखार भी अक्सर हो जाया करता था तथा उसके शरीर का उचित विकास भी नहीं हो रहा था।लेकिन निराशा और दुःख में तो केवल परमात्मा ही पुकार सुन सकते है उनकी भी पुकार सुनी गई और उन्हें अपने आराध्य गुरु, सतगुरु दलीप सिंह जी के दर्शन करने का मौका मिला, उन्होंने दर्शन करके सतगुरु जी के चरणों में विनती करके अपनी पोती की हालत के बारे में बताया। सतगुरु जी ने बड़े ध्यान से सारी बात सुनी, फिर बचन किया कि बच्ची की माता उसे अपनी गोद में लेकर पांच मिनट प्रतिदिन नाम सिमरन करे और ऐसा लगातार चालीस दिन तक करे, वे सत्यवचन कहकर, सतगुरु जी को नमस्कार कर घर आ गए और उनकी बहु ने बताया की ऐसा उसने लगातार करना शुरू कर दिया और चालीस दिन के बाद बच्ची की हालत में सुधार आना शुरू हो गया और उसका  ग्रोथ (विकास ) होना भी शुरू हो गया ,बुखार आना भी धीरे-धीरे बंद हो गया। उसके बाद वे थोड़ा निश्चिंत हो गए और दुबारा टैस्ट कराने भी नहीं गए क्योंकि उन्हें अपने गुरु पर पूरा भरोसा था फिर भी उन्होंने सभी की तसल्ली करवाने के लिए लगभग दो साल बाद बच्ची का टैस्ट करवाने के लिए उसी डॉक्टर के पास दुबारा  गए तथा जब डॉक्टर ने टैस्ट कर लिए तो वे हैरान हो गए कि बच्ची बिल्कुल ठीक थी, उसके दिल में कोई सुराख़ नहीं था। डॉक्टर के पूछने पर कि आपने कोई इलाज करवाया था , बच्ची नॉर्मल कैसे हो गई तो कुलदीप सिंह जी ने उन्हें सारी बात बताई कि कैसे सतगुरु जी की आज्ञा से, नाम जपने से उनकी बच्ची ठीक हो गई। गुरबाणी में भी लिखा है"सरब रोग का अउखदु नामु " पर जो इसे श्रद्धा से मानता है वही इसका लाभ प्राप्त कर सकता है, सतगुरु जी के बचनों को जीवन में श्रद्धापूर्वक अपनाकर ही खुशियाँ प्राप्त की जा सकती है। डॉक्टर ने उन्हें रिपोर्ट भी दिखाई और वे ख़ुशी-ख़ुशी घर वापिस आ गए। उन्होंने मुझे भी दोनों रिपोर्टे दिखाई पहली वाली और बाद वाली भी। मैं भी उनके बचन सुनकर धन्य हो गई। मेरे मुँह से केवल यही शब्द निकले ;धन्य सतगुरु जी और धन्य हैं उनके सिक्ख! जो श्रद्धा से उनके बताये मार्ग पर चलकर उनके कृपा-पात्र बन जाते हैं। 

Sunday, January 08, 2017

कोकलियर इंप्लांट से बोलने लगेंगे गूंगे बच्चे

Sun, Jan 8, 2017 at 10:37 AM
जन्म से ही नहीं सुनता हो तो दो साल की उम्र तक करा लें इंप्लांट

जागरूकता ही बच्चे को जीवन भर गूंगा-बहरा रहने से बचा सकती है
लुधियाना: 8 जनवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
आपका  बच्चा अगर जन्म से ही कोई आवाज सुनकर रिस्पांस नहीं देता हो तो यह उसके गूंगा-बहरा होने के संकेत हो सकते हैं। पहले छह महीने तक अगर बच्चा किसी तेज आवाज के होने पर उस तरफ देखता नहीं है तो समझ लेना चाहिए कि उसका समय रहते इलाज कराने की जरूरत है। ऐसे बच्चों के लिए कोकलियर इंप्लांट ट्रीटमेंट किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन यह दो साल की उम्र तक हो जाना चाहिए। इसके बाद बच्चा सुनने और बोलने लग जाता है। इस उम्र के बाद यह ट्रीटमेंट कराने पर बच्चा सुनने तो लग जाता है, लेकिन उसे बोलने में काफी समय लग सकता है। इसका इलाज काफी महंगा होने के कारण केंद्र सरकार ने एडीआईपी योजना के तहत इस ट्रीटमेंट को कवर कर रखा है। यानि अगर आपकी सालाना आमदनी 15 हजार रुपये तक है तो इलाज का सारा खर्च सरकार उठाती है और अगर आपकी आमदनी 20 हजार रुपये सालाना है तो इलाज का 50 प्रतिशत खर्च सरकार उठाएगी।
एसपीएस हॉस्पिटल के ईएनटी सर्जन डॉ. राजीव कपिला ने बताया कि आम तौर पर बच्चे के गूंगा होने पर लोग उसे किस्मत में लिखा होना मान लेते हैं। लेकिन साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि अब बच्चों को जीवन भर गूंगा-बहरा रहने से बचाया जा सकता है। आम तौर पर प्री-मेच्योर पैदा होने वाले बच्चों, जन्म के समय ज्यादा पीलिया से ग्रस्त रहने वाले बच्चे, जन्म के बाद ज्यादा दिनों तक नर्सरी में वेंटिलेटर पर रहने वाले बच्चे और पारिवारिक हिस्ट्री वाले बच्चों में यह समस्या आती है। पंजाब में 1000 बच्चों में से एक बच्चा इस तरह की समस्या के साथ पैदा होता है। उन्होंने बताया कि मां-बाप को अपने बच्चों पर नजर रखनी चाहिए। अगर बच्चा कोई तेज आवाज होने पर उस तरफ घूमकर नहीं देखता, पटाखा जैसी तेज आवाज से नहीं डरता या आपके बुलाने पर रिस्पांस नहीं देता तो यह उसके गूंगा-बहरा होने के संकेत हैं। ऐसे बच्चों का पहले साल के भीतर की कोकलियर इंप्लांट करा लेना चाहिए। इस समय की अवधि में 100 प्रतिशत सफलता की गारंटी रहती है। अगर इलाज दो साल के बाद कराया जाता है तो बच्चा सुनने तो सही समय पर लग जाता है, लेकिन उसे बोलने में काफी समय लग सकता है। डॉ. कपिला ने बताया कि इसका इलाज महंगा होने के कारण केंद्र सरकार ने इसे एडीआईपी स्कीम में कवर कर रखा है। पंजाब में केवल दो ही सेंटरों पर कोकलियर इंप्लांट होता है, जिनमें एसपीएस हॉस्पिटल भी शामिल है।

Saturday, November 05, 2016

मेडिकल कैंप: जिसमे हजारो मरीजो ने इलाज करवाया

टराएडेंट ग्रुप और सी.एम.सी हॉस्पिटल ने किया कैम्प का आयोजन 
लुधियाना: 4 नवम्बर 2016; (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज व् हॉस्पिटल, लुधियाना ने 3 दिन का मल्टी स्पेशियलिटी हेल्थ कैंप आयओजित किया, टराएडेंट (Trident group) ग्रुप के साथ मिलके| यह कैंप अरुण मेमोरियल कम्युनिटी सेण्टर, बरनाला में 2-4 नवम्बर 2016 को हुआ। 

इस कैम्प का उद्धघाटन ट्रिडेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर राजिंदर गुप्ताने और सी.एम.सी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर अब्राहम जी थॉमस ने किया। इस उपलक्ष पे बरनाला से समुदाय के नेता, राजनीतिज्ञ, सरकारी अधिकारी, और करीब 60 गांवों के सरपंच भी मजूद थे।

मेडिकल टीम में करीब 35 डॉक्टर्स थे जो के सर्जरी, गायनी, पीडियाट्रिक्स, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, साइकाइट्री, डर्मेटोलॉजी, मेडिसिन, इ.एन.टी, आँख, ओर्थोपेडिक्स, प्लास्टिक सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, सी.टी.वि.एस, डेंटल, फार्मेसी और कम्युनिटी मेडिसिन के विभाग से थे।

कैंप के पहले दिन करीब 1,160 मरीजो की जांच हुई, दुसरे दिन 1,690 मरीजो ने कैंप का फायदा उठाया, और आज 4 नवम्बर को यह खबर भेजने तक करीब 1,500 मरीज कैंप में आज चुके थे|

डॉक्टर अब्राहम जी थॉमस, ने कहा के इस बड़े कैंप में 35 डॉक्टर्स की टीम आई हैं, जो मरीजो की जांच करेगी | कैंप में डिजिटल एक्स- रे मशीन भी हैं जिस से पलो में ही रिपोर्ट आ जाती हैं| इस टीम के लीडर डॉक्टर क्लारांस होंगे जो के ग्रामीण स्वास्थ्य आउटरीच कार्यक्रम (RHOP) विभाग के हेड हैं| इस टीम में 35 और लोग हैं, जिनमे तकनीशियन, नर्स, और अन्य स्टाफ हैं मदद के लिए, जो के 35 डॉक्टर्स के साथ मिलके इस कैंप में काम करेगी| छोटे आपरेशन  के लिए मेडिकल बस भी उपलब्ध हैं | 

इस मौके पे डॉक्टर क्लारांस ने कहा के, इसी प्रकार सी.एम.सी. बरनाला में लोगो की सहयता करता रहेगा कैंप के द्वारा और कैम्पस की अगली तारीख इस प्रकार हैं – 7-11 नवम्बर, फिर 16-18 नवम्बर, उसके बाद 30 नवम्बर से 2 दिसम्बर तक, और 7 से 9 दिसम्बर तक लगेगा। 

Wednesday, November 02, 2016

एक ख़ास डॉक्टर ने दोहराया समाज सुधार का संकल्प

नाटकों के ज़रिये समाज का अँधेरा दूर करने का हिम्मतवर प्रयोग 
लुधियाना: 2 नवम्बर 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
समाज और समाज की सोच को बदलने की भावना हर किसी के मन में पैदा ही नहीं होती।  इसके लिए भी प्रकृति चुनाव करती है किसी ख़ास व्यक्ति का जिसका आत्मबल बलवान हो और जीवनशैली जन भलाई से भरी हुई। इस बार प्रकृति ने चुनाव किया है हर व्यक्ति को आंखों के दीपक देने में जुटे डॉक्टर रमेश मेहता का। डॉक्टर रमेश का मानना है कि समाज का एक बड़ा हिस्सा भी मानसिक तौर पर अँधा हो चुका है। बेटियों का अपमान, भ्रूण हत्या, नशाखोरी और रेप जैसे कुकृत्य कोई समझदार व्यक्ति कर ही नहीं सकता। राह जाती लड़कियों पर तेज़ाब फेंकना, उन्हें ज़िंदा जलाना, बहु को दहेज के लिए तंग करना किसी ऐसे अंधे व्यक्ति का ही काम हो सकता है जिसे अपने स्वार्थ के सिवा कुछ और नहीं दिखता।  जो पूरी तरह सम्वेदनहीन हो चुका है जैसे कि  कोई पत्थर हो। 
इस अंधे समाज को भी आंखें देने का संकल्प डॉक्टर रमेश ने किया हाल ही में। इस मकसद के लिए वह अपने चिकित्सा औज़ारों के साथ साथ अब कलम को भी हथियार बना रहे हैं। उन्होंने मीडिया से भी इस मकसद के लिए सहयोग माँगा है। उन्होंने एक ड्रामा लिखा "पुनरजोत का विवाह" जो कि बेहद लोकप्रिय हो रहा है। अब रविवार 6 नवम्बर 2016 को इसका मंचन होगा गाँव बद्दोवाल में जहाँ बाबा जसपाल सिंह की देखरेख में भाई घनईया चैरिटेबल अस्पताल की तरफ से बहुत सी ज़रूरतमन्द लड़कियों के सामूहिक विबाह एक साथ किये जाएंगे जिनकी संख्या 100 से ऊपर भी हो सकती है।   
यह जानकारी डॉक्टर रमेश ने आज पंजाबी भवन में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में दी। इस अवसर पर इस नाटक की सह निर्देशिका सपनदीप कौर  भी अपनी टीम के साथ मौजूद थीं। सपनदीप कौर ने कहा कि जनता को जगाना अधिक महत्वपूर्ण और आवश्यक कर्तव्य है। सपनदीप कौर ने पाश की एक प्रसिद्ध कविता के कुछ अंश भी पढ़े। भाई घनईया चैरिटेबल अस्पताल की तरफ से गुरप्रीत सिंह भी विशेष तौर पर पहुंचे। 
गौरतलब है कि डॉक्टर ऐस एन सेवक की सरपरस्ती में हो रहे इस नाटक के मंचन की मांग लगातार बढ़ रही है। नवांशहर से आने वाली जागो भी इस आयोजन का विशेष आकर्षण होगी। यह जागो भ्रूण हत्या की बुराई को कम करने के लिए निकाली जा रही है। 

Friday, October 28, 2016

दीपावली पर भारी पड़ सकता है चॉकलेट गिफ्ट

Fri, Oct 28, 2016 at 9:12 AM
इन्हें खाने से हो सकते हैं पिंपल्स
लुधियाना: 28 अक्टूबर 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
मिलावटी मिठाइयों के डर की वजह से दीपावली के मौके पर गिफ्ट के तौर पर चॉकलेट देने का क्रेज बढ़ता जा रहा है। टीन एजर्स में यह ज्यादा पापुलर हो रहा है। लेकिन हाल ही में स्किन प्रॉबल्म के फील्ड में हुई स्टडी में यह बात सामने आई है कि चॉकलेट और दूध से बने प्रोडक्ट खाने से पिंपल्स होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
एसपीएस हॉस्पिटल की एसोसिएट कंसल्टेंट डर्मोटोलॉजिस्ट डॉ. अल्पना ठाकुर के मुताबिक 80 प्रतिशत टीन एजर्स में पिंपल्स की समस्या देखी गई है। एडल्ट भी इस समस्या को झेलते हैं। हर किसी के जीवन में एक बार यह समस्या जरूर आती है और किशोर अवस्था में बने पिंपल्स कई बार दाग के रूप में स्किन पर रह जाते हैं। सभी जानते हैं कि हार्मोन्स बढऩे या उनमें बदलाव आने के कारण किशोर-किशोरियों पिंपल्स (मुंहांसे) की शिकायत करती हैं। लेकिन आजकल जितने भी मरीज आ रहे हैं, उनसे पता चलता है कि जो लोग मिल्क या मिल्क प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनमें पिंपल्स की समस्या ज्यादा देखी गई है। इसी कारण इन मरीजों को दूध का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इससे तेल की ग्रंथियां ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं।
उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो किशोर-किशोरियां चॉकलेट, ड्राई फ्रूट्स, कार्बोनेटेड ड्रिंक और मिल्क प्रोडक्ट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनमें पिंपल्स की समस्या दूसरों से ज्यादा होती है। क्योंकि चॉकलेट में दूध होता है और दूध में हार्मोन्स काफी मात्रा में होते हैं। हार्मोन्स बढऩे से ही पिंपल की समस्या जन्म लेती है। इसी तरह आयोडीन वाले नमक और आयोडीन युक्त दवाइयों के कारण भी हार्मोन्स में बदलाव होते हैं। पिंपल की समस्या से बचने के लिए बिस्कुट, मैदे से बनी चीजें और कोल्ड ड्रिंक व मीठा लिक्विड पीने से बचना चाहिए। इनकी बजाय सीजनल व ताजे फल, सब्जियों खाने के साथ-साथ पानी पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए। टेंशन फ्री और पॉजीटिव सोच के साथ जीवन जीकर भी पिंपल से बचा जा सकता है। एक-दूसरे की मेकअप किट का इस्तेमाल करने से भी यह समस्या बढ़ती है।

Saturday, October 08, 2016

रक्त चाप (ब्लड प्रेश्र्र) को नियंत्रण में रखना काफ़ी ज़रूरी

डा. लोबो स्मृति आयोजन में प्रो.सेठी ने समझाई हेल्थ की बारीकियां 
लुधियाना: 8 अक्टूबर 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
आज क्रिश्चियन मेडिकल कालेज और अस्पताल में जिन मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ उनमें एक था "हाईपरटेन्शन के इलाज के लिए आज कल के निधारित लक्ष्य" पदमश्री  प्रोफेसर कमल.के सेठी ने इस पर चर्चा करते हुए बताया कि ज़ोर दिया के रक्त चाप (ब्लड प्रेश्र्र) को नियंत्रण में रखना काफ़ी ज़रूरी हैं, जिससे के इसके बुरे प्रभाव से बचा जा सके। प्रोफेसर सेठी यहाँ सीएमसी में डा. लोबो मेमोरियल ऑरेशन में भाग लेने के लिए ए हुए थे। सी. एम. सी ने 34 वा डॉ.एल.एच लोबो मेमोरियल वक्तृत्व (Oration) भी आह बहुत पारम्परिक जोशो खरोश के साथ कराया। उल्लेखनीय है कि डॉ.एल.एच लोबो क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज एन्ड हॉस्पिटल, लुधियाना के पहले भारतीय प्रिन्सिपल थे। सीएमसी अस्पताल और डॉ. लोबो मेमोरियल ट्रस्ट, लुधियाना, की तरफ से डा. लोबो की स्मृति में हर वर्ष एक वक्तृत्व (ऑरेशन) का भव्य आयोजन कराया जाता है।

इस बार पदमश्री  प्रोफेसर कमल.के सेठी, जो के भारत की कारडीयालजी सोसाइटी के पूर्व-अध्यक्ष हैं और अब दिल्ली में कारडीयालजी के हार्ट एंड लंग्ज़ इन्स्टिट्यूट के डाइरेक्टर हैं, ने 34 वे  लोबो मेमोरियल में अपना बेहद जानकारी भरा भाषण आज दिया। इस अवसर पर लुधियाना के कुछ जाने माने लोग, शाहर के डॉक्टर्स, और सी.एम.सी के छात्र, स्टाफ और विभिन्न विभगो के लोग शामिल थे| 
प्रोफेसर कमल.के सेठी ने इस बारे में बहुत सी बारीकियां बतायीं। 

वक्तृत्व  के बाद वैज्ञानिक परिसंवाद किया गया जिसका शीर्षक था "कारडीयालजी में आधुनिक प्रग्रति" | प्रोफेसर प्रमेश कावॅऊर- डाइरेक्टर कार्डियाक सर्वीसज़, वेस्टमीड हॉस्पिटल, सिड्नी ऑस्ट्रेलिया, इस मौके पे विचार-गोष्ठी की। उन्होने खास कर दिल का दौरा (हार्ट अटॅक) की मॅनेज्मेंट (प्रबंधन) के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी|

डॉ. रजनीश काल्टन, जो कि सी. एम. सी. कारडीयालजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर & हेड हैं, और इस सम्मेलन के आयोजक ने बताया के, इस मौके पे कारडीयालजी क्षेत्र से जुड़ी कई  राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी विशेषज्ञ, इलाज में आधुनिकता और दिल के इलाज के बारे में जानकारी दी, जिनमे प्रोफेससर यशपौल शर्मा-पी. जी. आई, चंडीगढ़ से, प्रोफेसर मोहन नायर- नई दिल्ली से, और डॉक्टर राजीव अग्गारवाल मेरठ से शामिल थे। 
अन्य प्रमुख लोगो में डॉ. अब्रह्म जी थॉमस (डाइरेक्टर), डॉ. किम्म मेममेन (उप- डाइरेक्टर), डॉ. विलियम भट्टी (मेडिकल सूपरिंटेंडेंट), डॉ. बॉब्बी जॉन (प्रिन्सिपल), डॉ. रजनीश काल्टन (कारडीयालजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर & हेड), श्री, एस. वढेरा, डॉ. एम. के महाजन,  डॉ. नवनीत चौधरी और  डॉ. तरुण सटीज़ा के इलावा ट्रस्ट से जुड़े कई लोग शामिल थे। 

Thursday, October 06, 2016

"हाइपरटेन्षन के इलाज के लिए आज कल के निधारित लक्ष्य"

Thu, Oct 6, 2016 at 11:34 AM
CMC: डॉ.कमल.के सेठी लोबो मेमोरियल में करेंगे विस्तृत चर्चा
लुधियाना: 6 अक्टूबर 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल, लुधियाना और डॉ. लोबो मेमोरियल ट्रस्ट, लुधियाना की तरफ से इस बार भी डॉ.एल.एच लोबो मेमोरियल ओरेशनक आयोजन करवाया जा रहा है। गौरतलब है कि डा. लोबो सी.एम.सी के पहले भारतीय प्रिन्सिपल थे। उनकी याद में हर वर्ष एक वक्तृत्व अर्थात Oration का आयोजन किया जाता है। इस बार भी उस परम्परा को निभाते हुए इस आयोजन को यादगारी बनाया जायेगा। 
इस बार पदमश्री  प्रोफेसर कमल. के सेठी, जो के भारत की कारडीयालजी सोसाइटी के पूर्व-अध्यक्ष थे  और अब दिल्ली में कारडीयालजी के हार्ट और लंग्ज़ इन्स्टिट्यूट के डाइरेक्टर हैं इन आयोजन में मुख्य वक्तव्य देंगें। 
इस बार 34वें लोबो मेमोरियल में वह अपना भाषण 8 अक्टोबर , 2016 को देंगे जिसका शीर्षक होगा     
वक्तृत्व  के बाद वैज्ञानिक परिसंवाद किया जाएगा जिसका शीर्षक "कारडीयालजी में आधुनिक प्रग्रति" होगा।प्रोफेसर प्रमेश कावॅऊर-डायरेक्टर कार्डियाक सर्वीसज़, वेस्टमीड हॉस्पिटल, सिडनी ऑस्ट्रेलिया, इस मौके पे विचार-गोष्ठी करेंगे। 
डॉ. रजनीश काल्टन, जो के सी. एम. सी. कारडीयालजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर व हेड हैं, ने बताया कि इस मौके पर कारडीयोंलिजी के क्षेत्र से जुड़े कई अनुभवी विशेषज्ञ, इलाज में आधुनिकता और दिल के इलाज के बारे में जानकारी देंगे।

यह लोबो मेमोरियल औरवैज्ञानिक परिसंवाद सी.एम.सी. के डाइरेक्टर डॉ. अब्राहम जी थॉमस की सरपरस्ती में करवाई जा रही हैं|