बीटा थैलेसीमिया मेजर के अनुमानित 4700 मरीज हैं
Thursday, May 09, 2024
पंजाब में बीटा थैलेसीमिया के लगभग 1.5 मिलियन वाहक हैं
Saturday, June 03, 2023
रॉ के पूर्व अधिकारी जीबीएस सिद्धू ने किए सनसनीखेज़ खुलासे
अतीत की गलतियों पर कुकी गिल ने भी कहीं खरी खरी बातें
यहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता करते हुए, जस्टिस (सेवानिवृत्त) रणजीत सिंह ने कहा कि पंजाब के लोगों, विशेष रूप से सिखों को, गुरुओं द्वारा दिखाए गए "किछ सुनिए, किच्छ कहिए" के संकल्प पर पहरा देना चाहिए। सभी जम्हूरियत पसंद लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अप्रैल 1978 के निरंकारी कांड के बाद शुरू हुई पंजाब की समस्या ने जिस तरह से हिंसक रूप धारण किया और राज्य के दमन ने राज्य के नौजवानों को तबाह कर दिया, उससे आज भी सबक लेने की जरूरत है।
सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (रॉ) के पूर्व अधिकारी जीबीएस सिद्धू ने अपने विचार साझा करते हुए, कहा कि जून 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार भारत सरकार की सोची समझी साजिश थी, जिसके लिए पृष्टभूमि पहले से ही तैयार कर ली गई थी। सिद्धू ने अपनी किताब 'द खालिस्तान कॉन्सपिरेसी' का हवाला देते हुए कहा कि अमृतसर में हुई हर कार्रवाई की योजना दिल्ली में बनाई गई थी, भले ही कार्रवाई किसी पार्टी की ओर से हुई हो।
जाने-माने अधिवक्ता व मानवाधिकार अधिवक्ता राजविंदर सिंह बैंस ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस ने 1985 के चुनाव में 1984 की घटनाओं के जरिए सिखों को निशाना बनाकर भारी बहुमत हासिल किया था, उसी तरह वर्तमान सरकार अब मुसलमानों को निशाना बनाकर सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के अल्पसंख्यकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
प्रख्यात विश्लेषक और टिप्पणीकार मलविंदर सिंह माली ने कहा कि पंजाब की समस्या वास्तव में 1849 से शुरू होती है जब ब्रिटिश शासकों ने पंजाब देश को भारत में शामिल कर लिया था। उन्होंने कहा कि सिखों और पंजाबियों की समस्या का समाधान गुरु नानक साहिब और गुरबाणी की आशा के अनुरूप ही हो सकता है, जिसमें संवाद बहुत जरूरी है।
रणजीत सिंह कूकी गिल ने कहा कि सिख बुद्धिजीवियों को साका जून 1984 और दिल्ली में हुए सिख नरसंहार के बारे में सही शब्दावली का चयन करना चाहिए, ताकि आम लोगों के सामने सही परिप्रेक्ष्य पेश किया जा सके।
डॉ खुशहाल सिंह ने मंच संचालन की कमान संभाली। ज्ञानी केवल सिंह जी, ने पधारे लोगों का धन्यवाद किया। इस मौके पर कौमी सिंह सभा पत्रिका का नया संस्करण (जून-84 सिख रेफरेंस लाइब्रेरी कहां चला गया?) और जीबीएस सिद्धू की किताब "दा खालिस्तान कांस्पिरेसी' का प्रकाशन व्हाइट क्रो पब्लिशर्स ने किया।
इस कार्यक्रम में गुरप्रीत सिंह (ग्लोबल सिख काउंसिल), गुरबीर सिंह मचाकी, डॉ. प्यारा लाल गर्ग, हमीर सिंह, अशोक सिंह बागड़ी, प्रो. मनजीत सिंह, हरजोत सिंह, नारायण सिंह चौडा, महेंद्र सिंह मोरिंडा, सुरिंदर सिंह किशनपुरा, हरदीप सिंह दिबिबा, डॉ. भगवान सिंह और सभी विद्वानों ने अपने विचार रखे।
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‘वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए पराली से आगे सोचना ज़रुरी'
Thursday: 9th December 2021 at 6:16 PM
परिवहन, सड़क की धूल, शहरी कचरा, कारखानें और प्लास्टिक जलना भी अन्य उत्सर्जक
| प्रतीकात्मक फोटो |
चंडीगढ: 09 दिसम्बर 2021: (गुरजीत सिंह बिल्ला//पंजाब स्क्रीन)::
"हम सभी को वायु प्रदूषण के समाधान में पराली जलने वाले मुद्दे से हटकर अन्य उत्सर्जक जैसे परिवहन, सड़क की धूल, शहरी कचरे, कारखानें और प्लास्टिक जलने जैसे उपेक्षित कारकों को शामिल करना होगा" ये बातें श्री राणा गुरजीत सिंह जी, कैबिनेट मंत्री, पंजाब सरकार द्वारा सेन्टर फ़ॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (CSTEP) द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'विज़न: क्लीन स्काइज फॉर पंजाब' में कही गयी।
“वायु प्रदूषण से निपटने के लिए व्यापक समाधान समय की आवश्यकता है। ऐसा करने के लिए, सरकारी विभागों को अपनी दृष्टि को संरेखित करना होगा, और पंजाब, जो कि उच्च कृषि उत्पादक होकर निरन्तर पराली जैसी समस्या से जूझ रहा है, उनको वैकल्पिक समाधान देना होगा। सभी उद्योग, कृषि संस्थानों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सरकारी विभागों को समग्र समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता है।”उन्होंने चंडीगड़ के इस आयोजन में कहा।
इस मौके पर पंजाब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव श्री कुनेश गर्ग ने कहा कि पराली को समस्या नहीं बल्कि ईंधन या उर्वरक बनाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे बेहतर वायु गुणवत्ता के इलावा किसानों को आर्थिक रूप से मदद मिल सकती है।
इस बीच, मोहाली के नगर आयुक्त डॉ कमल कुमार गर्ग ने सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में पर्यावरण सुरक्षा को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
हाल ही में कई रिपोर्टों ने पंजाब के गिरते वायु गुणवत्ता को उजागर किया है। जहां ज्यादातर चर्चाएं सर्दियों में पराली जलाने के मुद्दे पर केंद्रित दिखती हैं, जबकी पंजाब के नागरिक पूरे साल खराब वायु गुणवत्ता से प्रभावित हैं। 'द स्टेट ऑफ इंडियाज़ एनवायरनमेंट-2021' रिपोर्ट ने राज्य में वायु गुणवत्ता के कारण 41,900 लोगों के मृत्यु की सूचना दी। 2018 में, पंजाब शीर्ष चार राज्यों में शामिल था, जहां अधिकतम शहर भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में विफल रहे।
इन्हीं कारणों से प्ररित CSTEP ने राज्य में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया है।
कार्यक्रम में बोलते हुए, CSTEP के निदेशक, डॉ जय असुंदी ने कहा, “इस चर्चा का प्राथमिक उद्देश्य पंजाब में वायु प्रदूषण के सभी कारणों और प्रभावों को समझना, नीति कार्यान्वयन में व्यावहारिक चुनौतियों को पहचानना, स्थायी समाधानों के विकास में तेजी लाना व राज्य के विभागों की तकनीकी क्षमता का निर्माण करना है।"
संस्था में सेंटर फॉर एयर पॉल्यूशन स्टडीज (CAPS) की प्रमुख डॉ प्रतिमा सिंह ने कहा, “पंजाब में वायु प्रदूषण के मुद्दे सर्दियों के महीनों में पराली जलाने के कारण बहुआयत चर्चित रहतें है, जिससे दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्य प्रभावित होते हैं, जबकि ऐसे कई कारक हैं जो पंजाब के वायु प्रदूषण में योगदान करते हैं और इन चर्चाओं के माध्यम से, हम इन कारकों पर अधिक वैज्ञानिक आकलन के माध्यम से और स्थानीय समुदायों के साथ जुड़कर, राज्य की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए एक व्यापक और रणनीतिक योजना तैयार करेंगे।
Saturday, September 18, 2021
पीसीजेयू के मौजूदा दौर में मीडिया को चुनौतियों पर विचारगोष्ठी
18th September 2021 at 10:22 PM
सियासतदान परिवारिक, व्यापारी और दरबारी हुए: डॉ. गर्ग
लुधियाना: 18 सितंबर 2021: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::
बरसों बाद लुधियाना में कोई ऐसा मीडिया आयोजन हुआ है जिसमें न कोई सरकारी सरपरस्ती थी और न ही कोई मंत्री या सरकारी अधिकारी मुख्य मेहमान था। न ही सत्ता से कोई जगह या अन्य फायदा माँगा गया और न ही किसी सियासी या कारपोरेट लीडर के सामने हाथ फैलाए गए। सिर ऊंचा उठा कर, समाज की आंख से आंख मिलाते हुए शुद्ध जनहित की चर्चा की गई। जनहित से जुड़े लोग ही इस सेमिनार के मेहमान थे जिन्होंने खुल कर हर सबंधित मुद्दे पर बात भी उठाई और चर्चा भी की। डा, प्यारा लाल गर्ग, प्रोफेसर जगमोहन सिंह, बलविंदर जम्मू सरीखे जानेमाने लोगों ने मीडिया के नैतिक उत्थान की बात भी ज़ोरदार ढंग से की। कार्पोरेटी जकड़ के खिलाफ आवाज़ बुलंद हुई और पत्रकारों को उनके कर्तव्य बहुत ही अपनत्व से याद कराए गए। साथ ही उनको अपनी मुहारत सुधारने पर भी ज़ोर दिया।
पंजाब एंड चंडीगढ़ जर्निलस्ट यूनियन की तरफ से लुधियाना में मौजूदा दौर में मीडिया को चुनौतियां विषय पर एक सैमीनार करवाया गया। इस में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. प्यारा लाल गर्ग और प्रो. जगमोहन सिंह मुख्य प्रवकता के तौर पर पहुंचे। इस मौके पर उनके साथ इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन के महासचिव बलविंदर जम्मू और पीसीजेयू के सचिव जय सिंह छिब्बर भी शामिल हुए। लुधियाना टीम की तरफ से युवा और सक्रिय पत्रकार गगन अरोड़ा, संतोख गिल और अमरपाल सिंह की तरफ से सभी को सुस्वागतम कहा गया।
मुख्य प्रवकता डॉ. गर्ग ने कहा कि आज के पत्रकारों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पत्रकार बेशक किसी भी संस्थान के साथ जुड़ा हो उसे जन हित के मुद्दों को उठाना ही चाहिए। उन्होंने खबर में सही और स्पष्ट तथ्य देने पर भी ज़ोर दिया और समझाया कि पत्रकार को बिना किसी धर्म, जातपात और मतभेद से अपना कर्तव्य निभाने पर जोर देना चाहिए।
सेमिनार में बहुत से मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्पोरेटी दौर में आए मशीनीकरण ने संवेदनशीलता को समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस सारी स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बात पर ज़ोर दिया गया कि मौजूदा समय में एक पत्रकार को खुद पूरी मुहारत हासिल करनी पड़ेगी तांकि वह अपनी कलम के जरिए अच्छे मुद्दे प्रभावी ढंग से लोगों के बीच ले कर जाए। तभी वह अपना कलम का धर्म निभाता हुआ लोगों को जागरुक भी कर सकेगा।
डॉ. गर्ग ने पत्रकारों को अपने खुद के मुद्दे उभारने के लिए संगठित होने पर भी जोर दिया। उन्होंने कि आज हमारे सियासतदान तो परिवारवाद, व्यापरिक और दरबारी हो गए है। इसके लिए पत्रकारों पर जनहित्त की ज़िम्मेदारी का बोझ और भी बढ़ गया है।
वाम विचारधारा से जुड़े गहरी पैठ वाले वरिष्ठ और सक्रिय पत्रकार बलविंदर जम्मू ने कहा कि मौजूदा समय में मीडिया बड़े बड़े कार्पोरेट के हाथ में सिमटता जा रहा है। किसानी का मुद्दा साज़िश के तहत दिल्ली के बड़े मीडिया की तरफ से दबाया जा रहा है। मौजूदा दौर में पत्रकारी के काम को बहुत ज़्यादा नुकसान हुआ है जिसे बचाने के लिए हम सभी को मिल कर काम करना पड़ेगा। उन्होंने पत्रकारों को मौजूदा चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी खबरों के जरिए झूठ सच्च का निपटारा करते रहने के लिए प्रेरित किया। बलविंदर जम्मू ने पब्लिक सैक्टर के हो रहे उजाड़े पर भी चिंता व्यक्त की।
शहीद भगत सिंह के भान्जे और निरंतर सक्रिय रहने वाले प्रो. जगमोहन सिंह ने पत्रकारों को आधुनिक टेक्नालिजी के साथ जुड़े ठीक गलत की पहचान करने के लिए भी प्रेरित किया। गौरतलब है की इस विषय पर प्रोफेसर जगमोहन सिंह की गहरी पकड़ है। उन्हें तकरीबन हर मीडिया संस्थान और पत्रकार की आंतरिक वास्तविकता का गहरा ज्ञान है। उन्होंने देश में बढ़ रही महंगाई में कार्पोरेट घरानों का हाथ बताया।
सेमिनार में चर्चा के वक्त जय सिंह छिब्बर और मैडम बिद्दू ने भी अपने विचार सांझे किए। सैमीनार में लुधियाना सहित आस पास के अलग अलग अखबारों के इंचार्ज और प्रतिनिधी ने भी हिस्सा लिया। सेमिनार में फोर्टो जर्नलिस्ट एसोसिएशन की पूरी टीम भी मौजूद रही।
इस मौके पर लुधियाना टीम की तरफ से कोआर्डीनेटर गगनदीप अरोड़ा, अमरीक बतरा, गुरिंदर सिंह, वरिंदर राणा, हर्शराज सिंह, निखिल भाद्धवाज, अमरपाल सिंह, सतविंदर शर्मा, विकास मल्होत्रा, रविंदर अरोड़ा, मुनीष शर्मा, दिलबाग दानिश, दिनेश कुमार, अमित कुमार, अरुण कुमार, अरुण सरीन, हिमांशु महाजन, अश्वनी धीमान, कुलदीप सिंह काला, अमनप्रीत चौहान, राजेश भट्टा,. जोगिंदर ओबराय, दविंदर सिंह जग्गी, डीपीएस बतरा, सहित अन्य लोग हाजिर थे।
Tuesday, September 10, 2019
सोशल थिंकर्स फोरम ने कराया सोसायटी को दो विद्धानों से रूबरू
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| मार्क्सवादी चिंतक,लेखक व CPI की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अनिल राजिमवाले |
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| जानीमानी खोजी पत्रकार और इतिहास लेखिका सुश्री कृष्णा झा की बहुचर्चित पुस्तक का कवर |
Sunday, July 21, 2019
बैंकों के राष्ट्रीयकरण को याद किया सेमिनार में
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| बॉक्स की पंक्तियाँ सत्याग्रह से साभार |
Friday, April 26, 2019
SCD कालेज के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर सेमिनार 27 अप्रैल को
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| विवादित नाटक "म्यूज़ियम....." के किसी पुराने मंचन का एक दृश्य |
Saturday, March 10, 2018
महिलायों के खिलाफ जुर्मों के साथ साज़िशों की भी चर्चा
लुधियाना: 10 मार्च 2018: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन)::
Wednesday, January 24, 2018
डी डी जैन कालेज में इस बार टीचर लर्निंग पर सेमिनार
और तस्वीरें फेसबुक पर देखें यहां क्लिक करके
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Monday, July 10, 2017
मीडिया में अब की स्थिति इमरजेंसी से ज़्यादा खतरनाक?
Friday, June 16, 2017
न्याय के लिए कब तक मिलेगी तारीख दर तारीख ?
वक्ताओं ने न्याय व्यवस्था के हालात का दृश्य दिखाते हुए इस सिस्टम के बखिये उधेड़ दिए। एक एक मुद्दे पर बात हुयी। विस्तार से चर्चा हुई। समस्या को सभी के सामने रखा गया। इसके साथ ही हल की तलाश पर भी विचार विमर्श हुआ। जो जुर्म करते हैं, इतने बुरे नहीं होते;
सज़ा न दे के अदालत बिगाड़ देती है।
Tuesday, March 14, 2017
स्किन प्रोब्लेम्स पर लेटेस्ट रिसर्च और टिप्स की चर्चा
Sunday, March 12, 2017
ध्यान योग का विज्ञान ही पूर्ण स्वास्थ्य का मूल है : डॉ. सतीश गुप्ता
Saturday, January 28, 2017
चुनावी रंग में भी जलवा दिखाया खूबसूरत दिखने के रंग ने
सेमिनार में बताये बालों को सुंदर और रंगीन बनाने के टिप्स
लुधियाना: 28 जनवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
चुनावी सरगर्मियों के चलते एक बार तो सब कुछ थम सा गया लगता है लेकिन खूबसूरत दिखने का चाव एक ऐसा जनून है जो अक्सर हर तरह के माहौल में सक्रिय रहता है। सुंदरता के मामले में बालों का अहम स्थान है। आज के युग में इस तरफ लड़कियों के साथ साथ लड़के भी बेहद सम्वेदनशील हो गए हैं। हेयर स्टाइल आज कल बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। इसी मांग को लेकर आज एक स्थानीय संस्थान में हेयर कलर सेमिनार का आयोजन किया गया। स्टूडियो के डायरेक्टर जावेद परवेज़ ने आई हुई मॉडल्स को नई हेयर कलर और हेयर कट के बारे में जानकारी दी।उन्होंने लेटेस्ट ट्रेंड का हेयर कलर,हेयर कट और हेयर स्टाइल की आसान और इफेक्टिव टेक्निक्स बताई। जावेद परवेज़ ने बताया कि काफ़ी वक्त से लुधियाना के काफ़ी मॉडल्स डिमांड कर रही थी कि उनको कुछ लेटेस्ट ट्रेंड के बारे में बताए कुछ अनोखो और नए स्टाइलिस्ट डिजाईन बताए। इस तरह के सेमिनार वो समय समय पर करवाते रहेगे ताकि लोगो को कुछ नया पता लग सके। अब देखना है कि तन की सुंदरता के ये आयोजन मन को सुंदर बना पाने में कितना येगदान डालते हैं।
Monday, January 16, 2017
पूँजीवादी व्यवस्था के अन्तरविरोध समाजवादी क्रान्तियों के नए संस्करणों का निर्माण करेंगे
हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा मांगेंगे-
इक बाग़ नहीं -इक खेत नहीं हम सारी दुनिया मांगेंगे।
इस वाम विचारधारा ने गम के मारे लोगों को शक्ति दी, नई ऊर्जा दी, आश्वासन दिया-
रात भर का है मेहमां अँधेरा--किसके रोके रुका है सवेरा..!
विचारों में दम था और इस विचारधारा के लिए लोग अपने सभी सुख छोड़ कर पूरे जोश के साथ आगे आये। नावल मां ने इस अभियान में एक नया जोश भरा। इस वाम आंदोलन के लिए कुर्बानियां देने वालों की कमी नहीं रही। इस विचारधारा से प्रभावित हो कर बहुत से लोगों ने अपनी सारी सारी ज़िन्दगी लगा दी, अपना घरघाट परिवार सब कुछ दांव पर लगा दिया पर इस सब के बावजूद एक समय आया जब इनको लगने लगा शायद हम गलत हो गए। बहुत से मित्रों ने व्यक्तिगत मुलाकातों में रुयासे हो कर कहा शायद हमने सारी उम्र अँधेरा ढोया। इनको भी इन्कलाब दूर होता महसूस हुआ। पार्टी के लिए पूरी उम्र लगाने वालों ने भी कभी कभी अनौपचारिक भेंटवार्ता में यही कहा कि इंकलाब तो अब आने वाला नहीं। यह कहने पर कि फिर कौन सी पार्टी में जाना है तो उनके आंसू निकल आते-कहते-पार्टी तो मां होती है कामरेड --हम पार्टी नहीं छोड़ेंगे। स्पष्ट था कि उनका गिला शिकवा पार्टी से नहीं बल्कि पार्टी पर काबिज़ हुए या घुस आये स्वार्थी नेतायों से था। बहुत से वरिष्ठ कामरेड ऐसे हैं जिनकी अपनी सन्तान ने भी वाम सियासत में आना उचित नहीं समझ। आज वाम दलों के पास युवा केडर चिंतनीय हद तक कम हो रहा है और वृद्ध लोग बारी बारी अलविदा कह रहे हैं इसके बावजूद पदों का मोह छूट नहीं रहा। ऐसे हालात में जब वाम दलों का आम केडर ठगा ठगा सा महसूस कर रहा था और उसे लग रहा था कि बड़े बड़े वाम नेतायों की ज़िन्दगी और उनके परिवारों का इंकलाब आ चुका है और हमारा इंक़लाब कभी आने वाला नहीं। इस बेहद नाज़ुक दौर में जिसके बारे में पूंजीवादी साम्प्रदायिक दलों के बड़े नेता अक्सर मज़ाक करते हैं कि कामरेड तो अब खत्म हो चुके तो उनका मज़ाक न खोखला लगता है न ही मज़ाक। एक कड़वा सत्य जिसका सामना आज बहुत से कामरेड कर रहे हैं लेकिन अपनी ज़िन्दगी में। इन विचारों से जुड़ा केडर निराश नज़र आ रहा था। जहाँ एक वाम ट्रेड यूनियन के आह्वान पर लाल झंडे वालों की भीड़ का सागर लहराता नज़र आता था वहां अब चार चार वाम दल मिलकर भी 50-100 से ज़्यादा वर्कर अपनी रैलियों में एक्टर नहीं कर पाते।
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Wednesday, March 12, 2014
डीडी जैन महिला कालेज में कराया गया विशेष राष्ट्रीय सेमिनार
डा. ओझा ने दी इतिहास पर रौचक जानकारी
लुधियाना:12 मार्च 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
शोर शराबे से भरे हल्के आयोजनों से हट कर डीडी जैन महिला कालेज ने एक और विशेष आयोजन कराया। यह एक राष्ट्रीय सेमिनार था जो पंजाब के प्रारंभिक मध्यकाल के दौरान राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संक्रमणकालीन चरण प् विशेष चर्चा करने के लिए आयोजित कराया गया। इस एक दिवसीय संगोष्ठी प्रायोजित किया था पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के ICSSR विभाग ने। गौरतलब है कि आज के इस शुभ दिन इस कालेज की मुख्य प्रेरणा स्रोत देवकी देवी जैन जी का जन्मदिन भी था। इस शुभ अवसर पर कालेज ने एक गंभीर और खो चुके विषय पर संगोष्ठी करा कर जहाँ कालेज की छात्रायों को एक ज्ञान भरी सौगात दी वहीँ इतिहास में रूची रखने वाले अन्य लोगों के लिए भी एक नया सिलसिला शुरू किया। कार्यक्रम के दो तकनीकी स्तर थे जिनमें दस शोध पत्र प्रस्तुत किये गए।
सेमिनार शुरूआत औपचारिक ज्योति प्रज्वलित करके हुई। इस मौके पर हमेशां की तरह णमोकार मंत्र का उच्चारण भी किया गया। वक्ताओं और मेहमानों का स्वागत बहुत ही सम्मान और गर्मजोशी से किया गया। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से आये डा. एन के ओझा पहले सेशन के मुख्य वक्ता थे जबकि उनके साथ ही चंडीगढ़ से आये डा. अश्विनी अग्रवाल दुसरे तकनीकी स्तर के मुख्य वक्ता था। इस यादगारी मौके पर जानेमाने समाज रत्न और कालेज के की प्रबंधन समिति के चेअरमैन श्री हीरा लाल जैन, कालेज के प्रधान केदारनाथ जैन, सचिव बिपन जैन, मैनेजर सुरिंदर कुमार जैन, राज कुमार जैन, श्री शांति सरूप जैन, और वरिष्ठ उपाध्यक्ष शीतल कुमार जैन, उप प्रधान और अन्य वशिष्ठ लोग भी मौजोड़ रहे।
अपने मुख्य भाषण में में डा. एन के ओझा ने पंजाब के राजनीतिक पर इतिहास पर बहुत ही दिलचस्प तरीके से बॉट ही अमूल्य जानकारी दी। उन्होंने छठी और 12वीं सदी के कार्यकाल का एक नक्शा सा ही खींच दिया। उन्होंने उस समय की राजनीति के साथ पंजाब की आर्थिक हालत, धर्म-कर्म और संस्कृति की भी जानकारी दी।
आये हुए डेलीगेटों ने अपने अपने शोधपत्रों में छूयाछात, महिलायों की हालत और बहुत से अन्य मुद्दों पर भी जानकारी दी। समापन सेशन के मुख्य मेहमान थे डाकटर आर के शर्मा। उन्होंने ने भी इस विष पर बहुत ही जानकारी दी। कालेज की प्रिंसिपल सरिता बहल ने आये हुए मेहमानों का धन्यवाद किया।समापन रिपोर्ट के साथ ही प्रमाणपत्र भी दिए गए और राष्ट्र गान के साथ ही कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।





















