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Thursday, May 09, 2024

पंजाब में बीटा थैलेसीमिया के लगभग 1.5 मिलियन वाहक हैं

बीटा थैलेसीमिया मेजर के अनुमानित 4700 मरीज हैं

मोहाली: 8 मई 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::
साहिबज़ादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) में स्थित एक गौरवशाली संस्थान है डॉ. बी.आर. अम्बेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़। इस संस्थान में एक ऐसी जंग को लेकर दो दिवसीय आयोजन हुआ जिसमें बहुत सी महत्वपूर्ण बातें हुईं। जंग शब्द से आप हैरान न हों,  यह जंग थैलिसीमिया की जंग है और दुनिया के बहुत से हिस्सों में लड़ी जा रही है। इस जंग में भी बहुत से योद्धा हैं जो लगातार इस जंग को लड़ रहे हैं। इस जंग के योद्धाओं को यहां सम्मानित भी किया जाता है और उनके रणकौशल की जानकारी भी दी जाती है। इस बार के आयोजन में ऐसी ही एक थैलेसीमिया योद्धा और सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री अलका चौधरी भी मौजूद रहीं। 

थैलेसीमिया के साथ इस जंग के दायरे और महत्व को और बढ़ाते हुए इस महत्वपूर्ण संस्थान ने 7-8 मई 2024 को दो दिवसीय कार्यक्रम के साथ "विश्व थैलेसीमिया दिवस 2024" मनाया। इस वर्ष का विषय "सशक्त जीवन, प्रगति को अपनाना: सभी के लिए समान और सुलभ थैलेसीमिया उपचार" है। थैलेसीमिया योद्धा और सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री अलका चौधरी ने थैलेसीमिया के साथ अपनी यात्रा साझा की जो लचीलापन, साहस और आशा में से एक रही है। प्रतिदिन चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, वह जीवन को मुस्कुराहट और दृढ़ संकल्प के साथ लेती है। अपने जीवन के अनुभव के माध्यम से, सुश्री अलका ने थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों के लिए अधिक जागरूकता, समर्थन और समझ की वकालत भी बहुत ही जीवंत ढंग से की। 

पीजीआईएमईआर के हेमेटोलॉजी विभाग की प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. रीना दास को भी एमबीबीएस छात्रों के लिए अतिथि व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने आनुवंशिक जांच और प्रसव पूर्व परामर्श के माध्यम से बीमारी की रोकथाम पर ज़ोर दिया क्योंकि मेजर थैलेसीमिया का उपचार अत्यधिक महंगा हो सकता है और इसमें स्टेम सेल प्रत्यारोपण भी शामिल हो सकता है। इसलिए, स्थानीय लोगों के बीच जागरूकता फैलाना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

संस्थान की निदेशक प्रिंसिपल और स्वयं एक समर्पित नियमित रक्तदाता डॉ. भवनीत भारती ने इस रोग का शीघ्र पता लगाने, स्वास्थ्य देखभाल में निष्पक्षता और समावेशिता की आवश्यकता, थैलेसीमिया से प्रभावित व्यक्तियों को सशक्त बनाने और उपचार विकल्पों में प्रगति को बढ़ावा देने के प्रयास पर एक आकर्षक संदेश भी  दिया। उनकी मैगनेटिक शख्सियत ने इस सबंध में वहां मौजूद लोगों के दिलो दिमाग में थैलेसीमिया जाग्रति की तरंगों को और भी मज़बूत किया। 

एआईएमएस के पैथोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. राशि गर्ग ने बताया कि पंजाब में बीटा थैलेसीमिया (3.96%) के लगभग 1.5 मिलियन वाहक हैं, और बीटा थैलेसीमिया मेजर के अनुमानित 4700 मरीज हैं। आप अनुमान लगा सकते कि स्थिति कितनी गंभीर है। कितने लोग इस जंग को लड़ रहे हैं। कितने परिवार इसका दंश झेल रहे हैं। 

इसी आयोजन में पैथोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. तनुप्रिया बिंदल ने थैलेसीमिया के प्रमुख रोगियों के लिए आवश्यक निरंतर रक्त संक्रमण और केलेशन थेरेपी के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाली बहुत सी बातें बताईं। उन्होंने सभी थैलेसीमिया रोगियों के लिए रक्त की उपलब्धता, सामर्थ्य और पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व को रेखांकित किया।

यदि आप इस महत्वपूर्ण जंग के योद्धाओं  करना चाहते हैं तो देर मत कीजिए। आगे आइए। इस जंग में सहायक बन कर इन योद्धाओं की शक्ति बढ़ाइए। यह सब पुरे समज की ज़िम्मेदारी है सिर्फ सरकार की नहीं। 

Saturday, June 03, 2023

रॉ के पूर्व अधिकारी जीबीएस सिद्धू ने किए सनसनीखेज़ खुलासे

अतीत की गलतियों पर कुकी गिल ने भी कहीं खरी खरी बातें


चंडीगढ़: 3 जून 2023: (कार्तिका सिंह//रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन टीम)::

केन्द्रीय श्री गुरु सिंह सभा द्वारा 'साका जून 1984 की राजनीतिक पृष्ठभूमि' विषय पर आयोजित स्मृति समारोह में प्रो. शाम सिंह (अध्यक्ष) ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा हालात में सिख पंथ को संवाद बनाने की जरूरत है और फेडरल ढांचे को मजबूत करने के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष पर भरोसा करना चाहिए।

यहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता करते हुए, जस्टिस (सेवानिवृत्त) रणजीत सिंह ने कहा कि पंजाब के लोगों, विशेष रूप से सिखों को, गुरुओं द्वारा दिखाए गए "किछ सुनिए, किच्छ कहिए" के संकल्प पर पहरा देना चाहिए। सभी जम्हूरियत पसंद लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अप्रैल 1978 के निरंकारी कांड के बाद शुरू हुई पंजाब की समस्या ने जिस तरह से हिंसक रूप धारण किया और राज्य के दमन ने राज्य के नौजवानों को तबाह कर दिया, उससे आज भी सबक लेने की जरूरत है।

सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (रॉ) के पूर्व अधिकारी जीबीएस सिद्धू ने अपने विचार साझा करते हुए, कहा कि जून 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार भारत सरकार की सोची समझी साजिश थी, जिसके लिए पृष्टभूमि पहले से ही तैयार कर ली गई थी। सिद्धू ने अपनी किताब 'द खालिस्तान कॉन्सपिरेसी' का हवाला देते हुए कहा कि अमृतसर में हुई हर कार्रवाई की योजना दिल्ली में बनाई गई थी, भले ही कार्रवाई किसी पार्टी की ओर से हुई हो।

जाने-माने अधिवक्ता व मानवाधिकार अधिवक्ता राजविंदर सिंह बैंस ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस ने 1985 के चुनाव में 1984 की घटनाओं के जरिए सिखों को निशाना बनाकर भारी बहुमत हासिल किया था, उसी तरह वर्तमान सरकार अब मुसलमानों को निशाना बनाकर सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के अल्पसंख्यकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

प्रख्यात विश्लेषक और टिप्पणीकार मलविंदर सिंह माली ने कहा कि पंजाब की समस्या वास्तव में 1849 से शुरू होती है जब ब्रिटिश शासकों ने पंजाब देश को भारत में शामिल कर लिया था। उन्होंने कहा कि सिखों और पंजाबियों की समस्या का समाधान गुरु नानक साहिब और गुरबाणी की आशा के अनुरूप ही हो सकता है, जिसमें संवाद बहुत जरूरी है।

रणजीत सिंह कूकी गिल ने कहा कि सिख बुद्धिजीवियों को साका जून 1984 और दिल्ली में हुए सिख नरसंहार के बारे में सही शब्दावली का चयन करना चाहिए, ताकि आम लोगों के सामने सही परिप्रेक्ष्य पेश किया जा सके।

राजविंदर सिंह राही ने साका जून 1984 के दौरान फ़ौजी हमले में खत्म हुई सिख रेफरेंस लाइब्रेरी पर अपने शोध का जिक्र करते हुए कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, लाइब्रेरी की सामग्री और पवित्र ग्रंथों के गायब होने के लिए जिम्मेदार है।

अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते डाक्टर प्यारे लाल गर्ग भी इस मौके पर हर वक्ता को ध्यान से सुनते रहे। उन्होंने इस पुस्तक "द खालिस्तान कॉन्सपिरेसी' के लेखक पर भी सवाल किया कि वह इस सारे घटनाक्रम के एक विशेष पहलू पर चुप क्यूं रहा? इस खामोशी के पीछे क्या राज़ है? गौरतलब है कि इस पुस्तक के लेखक जी बी एस सिद्धू केंद्रीय खुफिया एजेंसी रॉ के उच्च अधिकारी रहे हैं। उनकी बातों में भी दम लगता है। जहां तक कुछ मुद्दों पर खामोशी की बात है तो उनकी bho कई मजबूरियां रही हो सकती हैं।

डॉ खुशहाल सिंह ने मंच संचालन की कमान संभाली। ज्ञानी केवल सिंह जी, ने पधारे लोगों का धन्यवाद किया। इस मौके पर कौमी सिंह सभा पत्रिका का नया संस्करण (जून-84 सिख रेफरेंस लाइब्रेरी कहां चला गया?) और जीबीएस सिद्धू की किताब "दा खालिस्तान कांस्पिरेसी' का प्रकाशन व्हाइट क्रो पब्लिशर्स ने किया।

इस कार्यक्रम में गुरप्रीत सिंह (ग्लोबल सिख काउंसिल), गुरबीर सिंह मचाकी, डॉ. प्यारा लाल गर्ग, हमीर सिंह, अशोक सिंह बागड़ी, प्रो. मनजीत सिंह, हरजोत सिंह, नारायण सिंह चौडा, महेंद्र सिंह मोरिंडा, सुरिंदर सिंह किशनपुरा, हरदीप सिंह दिबिबा, डॉ. भगवान सिंह और सभी विद्वानों ने अपने विचार रखे।

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Friday, December 10, 2021

‘वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए पराली से आगे सोचना ज़रुरी'

Thursday: 9th December 2021 at 6:16 PM

परिवहन, सड़क की धूल, शहरी कचरा, कारखानें और प्लास्टिक जलना भी अन्य उत्सर्जक 

प्रतीकात्मक फोटो 

चंडीगढ
: 09 दिसम्बर 2021: (गुरजीत सिंह बिल्ला//पंजाब स्क्रीन)::

"हम सभी को वायु प्रदूषण के समाधान में पराली जलने वाले मुद्दे से हटकर अन्य उत्सर्जक जैसे परिवहन, सड़क की धूल, शहरी कचरे, कारखानें और प्लास्टिक जलने जैसे उपेक्षित कारकों को शामिल करना होगा" ये बातें श्री राणा गुरजीत सिंह जी, कैबिनेट मंत्री, पंजाब सरकार द्वारा सेन्टर फ़ॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (CSTEP) द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'विज़न: क्लीन स्काइज फॉर पंजाब' में कही गयी। 

“वायु प्रदूषण से निपटने के लिए व्यापक समाधान समय की आवश्यकता है। ऐसा करने के लिए, सरकारी विभागों को अपनी दृष्टि को संरेखित करना होगा, और पंजाब, जो कि उच्च कृषि उत्पादक होकर निरन्तर पराली जैसी समस्या से जूझ रहा है, उनको वैकल्पिक समाधान देना होगा। सभी उद्योग, कृषि संस्थानों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सरकारी विभागों को समग्र समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता है।”उन्होंने चंडीगड़ के इस आयोजन में कहा। 

इस मौके पर पंजाब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव श्री कुनेश गर्ग ने कहा कि पराली को समस्या नहीं बल्कि ईंधन या उर्वरक बनाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे बेहतर वायु गुणवत्ता के इलावा किसानों को आर्थिक रूप से मदद मिल सकती है।

इस बीच, मोहाली के नगर आयुक्त डॉ कमल कुमार गर्ग ने सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में पर्यावरण सुरक्षा को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

हाल ही में कई रिपोर्टों ने पंजाब के गिरते वायु गुणवत्ता को उजागर किया है। जहां ज्यादातर चर्चाएं सर्दियों में पराली जलाने के मुद्दे पर केंद्रित दिखती हैं, जबकी पंजाब के नागरिक पूरे साल खराब वायु गुणवत्ता से प्रभावित हैं। 'द स्टेट ऑफ इंडियाज़ एनवायरनमेंट-2021' रिपोर्ट ने राज्य में वायु गुणवत्ता के कारण 41,900 लोगों के मृत्यु की सूचना दी। 2018 में, पंजाब शीर्ष चार राज्यों में शामिल था, जहां अधिकतम शहर भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में विफल रहे।

इन्हीं कारणों से प्ररित CSTEP ने राज्य में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया है।

कार्यक्रम में बोलते हुए, CSTEP के निदेशक, डॉ जय असुंदी ने कहा, “इस चर्चा का प्राथमिक उद्देश्य पंजाब में वायु प्रदूषण के सभी कारणों और प्रभावों को समझना, नीति कार्यान्वयन में व्यावहारिक चुनौतियों को पहचानना, स्थायी समाधानों के विकास में तेजी लाना व राज्य के विभागों की तकनीकी क्षमता का निर्माण करना है।"

संस्था में सेंटर फॉर एयर पॉल्यूशन स्टडीज (CAPS) की प्रमुख डॉ प्रतिमा सिंह ने कहा, “पंजाब में वायु प्रदूषण के मुद्दे सर्दियों के महीनों में पराली जलाने के कारण बहुआयत चर्चित रहतें है, जिससे दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्य प्रभावित होते हैं, जबकि ऐसे कई कारक हैं जो पंजाब के वायु प्रदूषण में योगदान करते हैं और इन चर्चाओं के माध्यम से, हम इन कारकों पर अधिक वैज्ञानिक आकलन के माध्यम से और स्थानीय समुदायों के साथ जुड़कर, राज्य की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए एक व्यापक और रणनीतिक योजना तैयार करेंगे।


Saturday, September 18, 2021

पीसीजेयू के मौजूदा दौर में मीडिया को चुनौतियों पर विचारगोष्ठी

  18th September 2021 at 10:22 PM

 सियासतदान परिवारिक, व्यापारी और दरबारी हुए: डॉ. गर्ग 


लुधियाना
18 सितंबर 2021: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

बरसों बाद लुधियाना में कोई ऐसा मीडिया आयोजन हुआ है जिसमें न कोई सरकारी सरपरस्ती थी और न ही कोई मंत्री या सरकारी अधिकारी मुख्य मेहमान था। न ही सत्ता से कोई जगह या अन्य फायदा माँगा गया और न ही किसी सियासी या कारपोरेट लीडर के सामने हाथ फैलाए गए। सिर ऊंचा उठा कर, समाज की आंख से आंख मिलाते हुए शुद्ध जनहित की चर्चा की गई। जनहित से जुड़े लोग ही इस सेमिनार के मेहमान थे जिन्होंने खुल कर हर सबंधित मुद्दे पर बात भी उठाई और चर्चा भी की। डा, प्यारा लाल गर्ग, प्रोफेसर जगमोहन सिंह, बलविंदर जम्मू सरीखे जानेमाने लोगों ने मीडिया के नैतिक उत्थान की बात भी ज़ोरदार ढंग से की। कार्पोरेटी जकड़ के खिलाफ आवाज़ बुलंद हुई और पत्रकारों को उनके कर्तव्य बहुत ही अपनत्व से याद कराए गए। साथ ही उनको अपनी मुहारत सुधारने पर भी ज़ोर दिया। 

पंजाब एंड चंडीगढ़ जर्निलस्ट यूनियन की तरफ से लुधियाना में मौजूदा दौर में मीडिया को चुनौतियां विषय पर एक सैमीनार करवाया गया। इस में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. प्यारा लाल गर्ग और प्रो. जगमोहन सिंह मुख्य प्रवकता के तौर पर पहुंचे। इस मौके पर उनके साथ इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन के महासचिव बलविंदर जम्मू और पीसीजेयू के सचिव जय सिंह छिब्बर भी शामिल हुए। लुधियाना टीम की तरफ से युवा और सक्रिय पत्रकार गगन अरोड़ा, संतोख गिल और अमरपाल सिंह की तरफ से सभी को सुस्वागतम कहा गया। 

मुख्य प्रवकता डॉ. गर्ग ने कहा कि आज के पत्रकारों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पत्रकार बेशक किसी भी संस्थान के साथ जुड़ा हो उसे जन हित के मुद्दों को उठाना ही चाहिए। उन्होंने खबर में सही और स्पष्ट तथ्य देने पर भी ज़ोर दिया और समझाया कि पत्रकार को बिना किसी धर्म, जातपात और मतभेद से अपना कर्तव्य निभाने पर जोर देना चाहिए। 

सेमिनार में बहुत से मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्पोरेटी दौर में आए मशीनीकरण ने संवेदनशीलता को समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस सारी स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बात पर ज़ोर दिया गया कि मौजूदा समय में एक पत्रकार को खुद पूरी मुहारत हासिल करनी पड़ेगी तांकि वह अपनी कलम के जरिए अच्छे मुद्दे प्रभावी ढंग से लोगों के बीच ले कर जाए। तभी वह अपना कलम का धर्म निभाता हुआ लोगों को जागरुक भी कर सकेगा।  

डॉ. गर्ग ने पत्रकारों को अपने खुद के मुद्दे उभारने के लिए संगठित होने पर भी जोर दिया। उन्होंने कि आज हमारे सियासतदान तो परिवारवाद, व्यापरिक और दरबारी हो गए है। इसके लिए पत्रकारों पर जनहित्त की ज़िम्मेदारी का बोझ और भी बढ़ गया है। 

वाम विचारधारा से जुड़े गहरी पैठ वाले वरिष्ठ और सक्रिय पत्रकार बलविंदर जम्मू ने कहा कि मौजूदा समय में मीडिया बड़े बड़े कार्पोरेट के हाथ में सिमटता जा रहा है। किसानी का मुद्दा साज़िश के तहत दिल्ली के बड़े मीडिया की तरफ से दबाया जा रहा है। मौजूदा दौर में पत्रकारी के काम को बहुत ज़्यादा नुकसान हुआ है जिसे बचाने के लिए हम सभी को मिल कर काम करना पड़ेगा। उन्होंने पत्रकारों को मौजूदा चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी खबरों के जरिए झूठ सच्च का निपटारा करते रहने के लिए प्रेरित किया। बलविंदर जम्मू ने पब्लिक सैक्टर के हो रहे उजाड़े पर भी चिंता व्यक्त की। 

शहीद भगत सिंह के भान्जे और निरंतर सक्रिय रहने वाले प्रो. जगमोहन सिंह ने पत्रकारों को आधुनिक टेक्नालिजी के साथ जुड़े  ठीक गलत की पहचान करने के लिए भी प्रेरित किया। गौरतलब है की इस विषय पर प्रोफेसर जगमोहन सिंह की गहरी पकड़ है। उन्हें तकरीबन हर मीडिया संस्थान और पत्रकार की आंतरिक वास्तविकता का गहरा ज्ञान है। उन्होंने देश में बढ़ रही महंगाई में कार्पोरेट घरानों का हाथ बताया। 

सेमिनार में चर्चा के वक्त जय सिंह छिब्बर और मैडम बिद्दू ने भी अपने विचार सांझे किए। सैमीनार में लुधियाना सहित आस पास के अलग अलग अखबारों के इंचार्ज और प्रतिनिधी ने भी हिस्सा लिया। सेमिनार में फोर्टो जर्नलिस्ट एसोसिएशन की पूरी टीम भी मौजूद रही। 

इस मौके पर लुधियाना टीम की तरफ से कोआर्डीनेटर गगनदीप अरोड़ा, अमरीक बतरा, गुरिंदर सिंह, वरिंदर राणा, हर्शराज सिंह, निखिल भाद्धवाज, अमरपाल सिंह, सतविंदर  शर्मा, विकास मल्होत्रा, रविंदर अरोड़ा, मुनीष शर्मा, दिलबाग दानिश, दिनेश कुमार, अमित कुमार, अरुण कुमार, अरुण सरीन, हिमांशु महाजन, अश्वनी धीमान, कुलदीप सिंह काला, अमनप्रीत चौहान, राजेश भट्टा,. जोगिंदर ओबराय, दविंदर सिंह जग्गी, डीपीएस बतरा, सहित अन्य लोग हाजिर थे। 

Tuesday, September 10, 2019

सोशल थिंकर्स फोरम ने कराया सोसायटी को दो विद्धानों से रूबरू


संविधान की सभी मूल भावनाओं को बदल कर एक जैसी संस्कृति लागू करना चाहती है भाजपा सरकार

लुधियाना: 10 सितंबर 2019: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
मार्क्सवादी चिंतक,लेखक व CPI 
की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य 
अनिल राजिमवाले
जानीमानी खोजी पत्रकार और इतिहास
लेखिका सुश्री कृष्णा झा की बहुचर्चित
पुस्तक का कवर  
लुधियाना के बौद्धिक क्षेत्रों में एक नया रंग देखने को मिला। सियासी लोगों की भीड़ में एक ऐसा आयोजन सामने आया जिसमें चर्चा तो राजनीती पर भी हुई लेकिन चर्चा करने वाले दो विद्धान बौद्धिक क्षेत्रों में अलग सी पहचान रखते हैं। एक तो थीं सुश्री कृष्ण झा जिन्होंने अयोध्या विवाद पर बहुत ही चर्चित पुस्तक लिखी थी। दुसरे थे जानेमाने विद्धान अनिल राजिमवाले जिन्होंने जन संघर्षों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इन लोगों ने आशंका जताई कि देश को एक ही रंग में रंगने का जनून बहुत बड़ी गड़बड़ी खड़ी कर देगा। इन्होने साफ़ कहा कि सत्ता पर मौजूद भारतीय जनता पार्टी देश की सभी विभिन्नताओं को समाप्त करने की ताक में है। अलग अलग इलाकों और अलग अलग समुदायों के रीतिरिवाजों के साथ छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम निकल सकते हैं। 

इन लोगों ने कहा कि आर एस एस की शह और सरपरस्ती प्राप्त भाजपा सरकार लोकतंत्र की नृशंस हत्या करके देश भर में एक जैसी संस्कृति लागू करने पर तुली हुई है। यह बात यहाँ सोशल थिंकर्स फोरम की तरफ से कराई गयी एक विचार गोष्ठी में जानीमानी ऐतिहासकार और समाज सेविका सुश्री कृष्णा झा ने कही।  
उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र का आधार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान रखा गया था जिसमें सभी वर्गों, धर्मों और जातियों के लोगों ने हिस्सा लिया।  इसके परिणाम स्वरूप धर्म निरपेक्ष, न्याय, और बराबरी पर आधारित समाज की स्थापना  का संकल्प लिया गया।   देश का संविधान भी इन्हीं आधारों पर ही बनाया गया था और राज्यों को अनेक मामलों में अधिक अधिकार भी दिए।  दबे और कुचले हुए दलित लोगों को भी बहुत सी सुविधाएँ दी गयीं। लेकिन जनसंघ, आर एस एस और इसके सहयोगी संगठनों ने अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ कोई संघर्ष नहीं किया बल्कि तिरंगे का अपमान किया, भारत छोड़ो आंदोलन और नमक सत्याग्रह का केवल विरोध ही नहीं किया बल्कि अंग्रेज़ों का साथ भी दिया। इसी वजह से उनके लिए भारतीय संविधान का कोई महत्व नहीं है। यह सरकार और इसके सहयोगी संगठन संविधान की सभी मूल भावनाओं को बदल कर देश में एक जैसी संस्कृति लागू करना चाहते हैं। इस मकसद के लिए यह लोग देश और विदेश के कार्पोटेस्ट के साथ मिल कर देश के आम लोगों का बुरा हाल कर रहे हैं। सरकारी अत्याचार के खिलाफ उठ रहे जन आंदोलनों को दबाने के लिए यूएपीए जैसे कानून लाये जा रहे हैं।  श्रम सुधारों के नाम पर मज़दूर विरोधी और कारपोरेट समर्थक तब्दीलियां की जा रही हैं।शिक्षा और स्वास्थ्य नीति में परिवर्तन करके कम वेतन वाले लोगों को स्वास्थ्य और शिक्षा  जैसे मूल अधिकारों से भी वंचित किया जा रहा है। अन्य वर्गों के मुकाबले में दलितों की तरफ से दी जाने वाली फीसें तीन गुना बढ़ा दी गयी हैं। उच्च शिक्षा के लिए दी जानेवाली ग्रांट को 602 करोड़ रूपये से कम कर के 283 करोड़ रूपये कर दिया गया है।  किसानों का तो और भी बुरा हाल है। इसीलिए आत्महत्यायों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। आज माध्यम वर्ग भी दबाव में है। इन सब से  ध्यान हटाने के लिए हिन्दू मुस्लिम फसाद  कराये जा रहे हैं और जंग की बातें की जा रही हैं। ग्रह मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि हिन्दुओं को तो बसाया जा रहा है लेकिन मुस्लिमों को नज़रबंदी की स्थिति में रखा जायेगा।   इकलौते मुस्लिम बहुल राज्य कश्मीर में 370 इसी इरादे से हटाई गयी है। अमित शाह ने साफ़ शब्दों में कहा है कि अन्य राज्यों में 371 को छेड़ा भी नहीं जायेगा। यह खुलमखुल्ला साम्प्रदायिक पक्षपात का रवैया है। कश्मीर में 80 लाख लोगों के अधिकार समाप्त कर दिए गए हैं।  सभी लोकतान्त्रिक संस्थानों की स्वायत्ता समाप्त की जा रही है। सेना का उपयोग राजनैतिक मकसदों के लिए किया जा रहा है।  सैनिक अधिकारीयों से राजनैतिक ब्यान दिलाये जा रहे हैं।इस अवसर जानमाने विद्धान अनिल रजिमवाले ने कहा की इस नाज़ुक घड़ी में सभी प्रगतिशील शक्तियों को एकजुट हो कर इन फासीवादी शक्तियों का मुकाबिला करना होगा वरना देश का भविष्य धुंदला है। इस मौके पर डाक्टर अरुण मित्रा, एम् इस भाटिया, चरण सराभा, एडवोकेट हरिओम जिंदल, शुभदीप कौर, डाक्टर जसविंदर सिंह ने भी बहस में हिस्सा लिया। युवा और छात्र नेता डाक्टर तानिया, डाक्टर विनोद वर्मा, दीपक कुमार, राजीव कुमार, सौरव कुमार, प्रदीप कुमार और ललित कुमार ने अपने विचार व्यक्त किये।

Sunday, July 21, 2019

बैंकों के राष्ट्रीयकरण को याद किया सेमिनार में

Jul 21, 2019, 3:05 PM
मौजूदा चुनौतियों की भी विस्तृत चर्चा की गयी
लुधियाना: 21 जुलाई 2019: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
बॉक्स की पंक्तियाँ सत्याग्रह से साभार 
कहा जाता है कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण से पहले का ज़माना एक ऐसा वक़्त था जिसमें आम इंसान बैंक के अंदर झाँकने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता था। बैंक में लेनदेन बड़े लोगों का ही हुआ करता था। बैंकों के राष्ट्रीयकरण ने आम इंसान को बैंकों की राह दिखाई। बाद में इस राह को भी धीरे धीरे मुश्किल बना दिया गया। न्यूनतम जमा राशि की रकम में वृद्धि जारी रही। निजीकरण की तरफ झुकाव सिलसिला तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरागाँधी की हत्या के बाद आई सरकारों के समय ही शुरू हो गया था जो अब चरम पर है। लेकिन इतिहास खंगाले तो ऐसी चर्चा भी सामने आती है कि सन 1969 से पहले भी बैंकों के राष्ट्रीयकरण की शुरुआत हो चुकी थी और 1980 में भी इसने अपना जलवा दिखाया।
पंजाब बैंक कर्मचारी संघ का राज्य स्तरीय सेमिनार आज 21 जुलाई 2019 को पंजाब ट्रेड सेंटर, लुधियाना में आयोजित किया गया। राज्य के सभी कोनों के 600  से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह संगोष्ठी बैंक राष्ट्रीयकरण की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई थी। डॉ आर एस घुम्मन, प्रोफेसर, सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (CRRID), चंडीगढ़, डॉ अनुपमा उप्पल, अर्थशास्त्र पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के प्रोफेसर प्रमुख वक्ता थे। कॉम पी आर मेहता, अध्यक्ष, पीबीईएफ और महासचिव, एआईपीएनबीएसएफ, कॉम एस के गौतम, महासचिव, पीबीईएफ और संयुक्त सचिव, एआईबीईए  और कॉम अमृत लाल, अध्यक्ष पीबीईएफ  और महासचिव जेसीसी, एआईबीओबीईसीसी  ने भी बैंक कर्मचारियों को संबोधित किया।

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने सरकार के फैसले के मद्देनजर, पूरे सप्ताह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की रक्षा करने के लिये पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करके का निर्णय लिया। बैंकिंग सुधारों के नाम पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विनिवेश और निजीकरण की नीतियां, स्थिति का जायजा लेने के लिए और हमारे राष्ट्र के विकास में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के योगदान का मूल्यांकन करने के लिए, यह सेमिनार राज्य स्तर पर आयोजित किया गया। 
कमरेड एस के गौतम, महासचिव, ने सेमिनार का एजेंडा रखते हुए बताया कि यह उच्च स्तर पर बैंकिंग उद्योग की प्रगति और देश के विकास का मूल्यांकन करने का समय है। बैंकों की शाखायें राष्ट्रीयकरण करने के समय केवल 8200 थी जो अब 90765 है। ग्रामीण और अर्ध शहरी शाखाएँ पहले से मौजूद नहीं थीं, लेकिन अब 54872 हैं, प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण नहीं दिए गए थे और अब 40% हैं। जमा केवल 5000 करोड़ रुपये थे और अब 127 लाख करोड़ रुपये हैं, ऋण केवल 3500 करोड़ रुपये थे, लेकिन अब 85 लाख करोड़ रुपये हैं। हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और इन्फ्रा संरचना का विकास केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का परिणाम था। दुर्भाग्य से, इन प्रशंसनीय उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत करने के बजाय, वर्तमान दिन के एजेंडे में बैंकों के निजीकरण और समामेलन जैसे बैंकिंग सुधारों को आगे बढ़ाना है।
कामरेड पी आर मेहता, अध्यक्ष ने अपने संबोधन में बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विनिवेश के माध्यम से बड़े कॉरपोरेट को सौंपने का लक्ष्य है, जो बैंकों में खराब ऋण और भारी घाटे के लिए खुद जिम्मेदार हैं। लाभ का निजीकरण और नुकसान का राष्ट्रीयकरण कॉर्पोरेट नीति है। बैंक बड़े कारोबारियों के चंगुल में आते जा रहे हैं। हमारे बैंक कॉरपोरेट डिफाल्टरों की वजह से हुए नुकसान और रिकॉर्ड नुकसान से बने हैं। बैंक राष्ट्र के होते हैं। पैसा लोगों का है। इसलिए हमारा नारा है: 'लोगों के कल्याण के लिए लोगों का पैसा और कॉर्पोरेट लूट के लिए नहीं।' बैंकिंग सुधारों के सभी प्रतिगामी प्रयासों का विरोध करने और हमारे बैंकों को मजबूत करने वाली नीतियों के लिए लड़ने के लिए हर तंत्रिका को तनाव देना हमारा देशभक्ति कर्तव्य है।
प्रख्यात प्रोफेसर डॉ आर एस घुम्मन ने अपने प्रमुख नोट संबोधन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण को बैंकिंग स्वतंत्रता कहा, जिसने न केवल उत्पादक उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक धन को चैनलाइज किया, बल्कि लोगों को धन उधारदाताओं के चंगुल से बाहर आने के लिए सशक्त बनाया। भारी उद्योग, सड़क, बिजली, रेलवे, संचार आदि सहित इंफ्रा संरचना का विकास केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ ही संभव था। केवल  यूएस फाइनेंशियल क्राइसिस के प्रभाव के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रभाव नहीं पड़ा। इसलिए पीएसबी के सार्वजनिक चरित्र में कमजोर पड़ने से हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और समावेशी विकास और विकास के खिलाफ जाएगा।
डॉ अनुपमा उप्पल ने अपने संबोधन में पंजाब बैंक कर्मचारी महासंघ को संगोष्ठी आयोजित करने के लिए बधाई दी क्योंकि बैंकों के राष्ट्रीयकरण की रक्षा के लिए जन जागरूकता पैदा करने के लिए उच्च समय है। राष्ट्र के विकास में पीएसबी के योगदान का बचाव केवल सार्वजनिक समर्थन जुटाकर किया जा सकता है जो सर्वोत्तम ग्राहक सेवा के साथ संभव हो सकता है। निजी बैंक केवल चयनात्मक और लाभदायक व्यवसाय कर रहे हैं,   जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्राथमिकता क्षेत्र में अग्रिम और बड़े पैमाने पर बैंकिंग कर रहे हैं, इसलिए राष्ट्रीयकृत बैंकों को हमारे राष्ट्र के विकास के लिए होना चाहिए।
कामरेड अमृत लाल ने संबोधित करते हुए कहा कि विलय और समामेलन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बंद करने के लिए और कदम हैं, जबकि सरकार का कहना है कि विलय बड़े बैंकों का निर्माण करना है। एसोसिएट बैंक के विलय के बाद भारतीय स्टेट बैंक की 7000 शाखाएँ बंद हो गई हैं और हजारों कर्मचारियों को समेकन के नाम पर वीआरएस दिया गया है। बैंक ऑफ बड़ौदा में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, फिर बड़े बैंक कैसे बनाए जाएंगे? बैंकों का विलय निजीकरण की दिशा में एक और कदम है, इसलिए बैंकों के राष्ट्रीयकरण को परिभाषित करना आवश्यक है।
कामरेड आरके वालिया, सीनियर उपाध्यक्ष, कामरेड रूप लाल मेहरा, कामरेड रवि राजदान, कामरेड पवन जिंदल, उपाध्यक्ष, कामरेड दलीप पाठक, संयुक्त महासचिव, कामरेड नरेश गौड़, कामरेड राजेश वर्मा, कामरेड के सी सरीन, उप महासचिव, कामरेड नरेश वैद, कामरेड जगदीश राय, कामरेड हरविंदर सिंह, संयुक्त सचिव,  कामरेड संजीव पराशर, कोषाध्यक्ष, कामरेड लवलीन कुमार, कामरेड दिनेश कुमार, कामरेड राम लाल,  कामरेड आर के जौली, सहायक सचिव  और अन्य प्रमुख नेता पंजाब बैंक कर्मचारी महासंघ भी सेमिनार में उपस्थित थे। 

Friday, April 26, 2019

SCD कालेज के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर सेमिनार 27 अप्रैल को

लोक सुरक्षा मंच ने तोड़ी माहौल में छायी ख़ामोशी 
विवादित नाटक "म्यूज़ियम....." के किसी पुराने मंचन का एक दृश्य 
लुधियाना: 26 अप्रैल 2019: (पंजाब स्क्रीन सांस्कृतिक डेस्क)::    
सतीश चंद्र हवन राजकीय  कालेज में खेले गए नाटक को लेकर उठा विवाद गहराता जा रहा है। कालेज के स्टाफ की सहम भरी खामोशी ने इसके रहस्य और भी गंभीर बना दिया है। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले कालेज के स्टाफ ने एक तफोंफोन वार्ता में कहा था कि जब तक इस मुद्दे को उठाने संगठन बजरंग दल क्षमा मांगता तब तक सुलह की कोई बात नहीं हो सकती। लेकिन जब उन्हें यही बात कैमरे के सामने रेकार्ड करने को कहा गया तो स्टाफ ने टालमटोल का रवैया अपना लिया। गौरतलब है कि यह नाटक देश भर में कई कई बार खेला जा चुका  है।   पंजाब में भी इसके कई शो हो चुके हैं। इस नाटक के जिन डायलॉग्स पर एतराज़ उठाया गया है उससे मिलते जुलते डायलॉग राज कुमार संतोषी की फिल्म "लज्जा" में भी हैं। इस नाटक के मंचन का समर्थन करने वालों का कहना है कि इस नाटक का मंचन केवल यह दर्शाना था कि महिलाओं के साथ अन्याय आज से नहीं बल्कि युगों युगों से जारी है। सीता माता और द्रोपदी भी इससे बच नहीं सकी। अब जिस युग को आधुनिक कहा जाता है उसमें तो यह सिलसिला बंद होना चाहिए! लेकिन महिलाओं के अधिकारों की बात इस मंचन पर  ऐतराज़ उठने के बाद एक विवादित मुद्दा बन गई। दिलचस्प बात है कि सत्ता लोलुप सियासत के माहौल में कोई भी बड़ा राजनीतिक दल या समाजिक संगठन इस बात पर नहीं बोला।  वाम दलों और बुद्धिजीवियों ने इस ऐतराज़ को अड़े हाथों लिया और कहा चुनावी माहौल में इसे उठाने का मकसद एक ही है की हिन्दुत्वी संगठनों के पास अब जनता के पास जाने का कोई मुद्दा नहीं बचा। दूसरी तरफ बजरंग दल ने 24 अप्रैल को इसी मुद्दे को लेकर फिर से रोष प्रदर्शन का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो सका। सुना है उसी दिन कालेज में चंडीगढ़ से शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी भी आए थे।  लगा था दोनों तरफ के कुछ लोगों को बिठा कर सुलह करवा दी जाये गई लेकिन ऐसी कोई बात नहीं बन सकी। बजरंग दल इस बात पर अड़ा है कि ऍफ़ आई आर में जिन लोगों का नाम है उन्हें गरिफ्तार किया जाए। इस सारी स्थिति में एक चुप्पी सी छा गयी। अक्सर सबसे ज़्यादा बोलने वाले लोग भी खामोश हो गए। जिनका बोलना ज़रूरी था वे भी चुप्प हो गए। बोल रहा था तो केवल बजरंग दल। खुद को सेकुलर कहने वाले खफा थे कि अगर कांग्रेस के शासन में भी हमारे नाटकों को मुद्दा बना कर ऍफ़ आई आर दर्ज होती है तो यह चिंतनीय बात है। अगर सरकार अकाली भाजपा की होती तब क्या हुआ होता! डाक्टर अरुण मित्रा और उनके साथियों  ने इस मुद्दे को लेकर लोक सुरक्षा मंच की तरफ से मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरेंद्र सिंह को एक पत्र भी लिखा। ख़ामोशी की इस हालत में कमाल अहमद सिद्दीक़ी साहिब का शेयर याद आने लगा: 
कुछ लोग...जो ख़ामोश हैं ये सोच रहे हैं
सच बोलेंगे जब सच के ज़रा दाम बढ़ेंगे
इस चुप्पी को तोडा है लोक सुरक्षा मंच ने। इसी मुद्दे पर एक सेमिनार करवाने का एलान करके। सेमिनार की जगह सर्कट हाऊस थी लेकिन उन्होंने एन वक़्त पर मना कर दिया। शायद उन पर भी कोई दबाव काम कर रहा हो। इसके बाद सेमिनार की जगह बदली गयी। नयी जगह थी शहीद करनैल सिंह ईसड़ू भवन। अब्दुल्ला पर बस्ती में आते इंदिरा नगर में स्थित एक विशेष इमारत। सेमिनार का वक़्त होगा बाद दोपहर तीन बजे। इससे पहले जमहूरी अधिकार सभा भी खुल कर सामने आ चुकी है।   
अब देखना है कि इस सेमिनार में अपना सेकुलरिज़्म साबित करने कौन कौन पहुंचता है और कौन कौन बहानेबाज़ी करता है। 

Saturday, March 10, 2018

महिलायों के खिलाफ जुर्मों के साथ साज़िशों की भी चर्चा

परत-दर-परत किया गया मौजूदा स्थिति को बेनकाब
लुधियाना: 10 मार्च 2018: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन)::
औरत की ज़िंदगी में हर कदम पर पैदा हो रहे संताप के लिए पूंजीवादी सोच से भरा यह सिस्टम भी ज़िम्मेदार है जिसने औरत को एक वस्तु की तरह बना दिया है। इस सिस्टम का हथियार बना हुआ मीडिया चौबीसों घंटे पल पल बाद यही विज्ञापन दिखता है कि अगर यह परफ्यूम उपयोग करो तो लड़कियां आपकी दीवानी बन जाएँगी।  अगर यह तैयार इस्तेमाल करो तो लड़कियां आपके पीछे हो लेंगी। अगर यह बाईक चलायो तो लड़कियां आपके आगे पीछे घूमेंगी। जनता के मुख्य मुद्दों को न तो पब्लिक ब्रॉडकास्टर दिखा रहे हैं और न ही प्राइवेट ब्राडकास्टरज़। इस मुद्दे पर आज प्रोफेसर मौसमी बासु ने पंजाब स्क्रीन के साथ खुल कर चर्चा की।  ये विचार चर्चा हुयी लुधियाना के पंजाबी भवन में। इस विचार चर्चा का आयोजन किया था जमहूरी अधिकार सभा ने। इस यादगारी अवसर पर मुख्य मेहमान थी जवाहर लाल नेहरू यूनियवर्सिटी नई दिल्ली से आई प्रोफेसर मौसमी बासु। इस मौके पर पंजाब स्टूडेंटस यूनियन की लीडर हरदीप कौर कोटला और बेलन ब्रिगेड की प्रमुख अनीता शर्मा ने विचारोत्तेजक भाषण देकर श्रोताओं के दिलों को झंकझौरा।
गौरतलब है कि जमहूरी अधिकार सभा के प्रांतीय महसचिव हैं शहीद भगत सिंह के भांजे प्रोफेसर जगमोहन सिंह और प्रांतीय अध्यक्ष हैं प्रोफेसर ऐ के मलेरी।
पंजाब के छात्र आंदोलनों में किसी समय इतिहास रचने वाले छात्र  संगठन पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन की तरफ से इस कार्यक्रम में शामिल हुयी हरदीप कौर कोटला ने मंच से भी तीखी आलोचना करते हुए कहा कि महिला वर्ग को वस्तु बनाने में पूरा सिस्टम निंदनीय भूमिका निभा रहा है। "पंजाब स्क्रीन" के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा कि सस्ता और निरंतर नेट दे कर उसके ज़रिये जिस तरह से अश्लीलता परोसी जा रही है वास्तव में वह आज की युवा पीढ़ी का ध्यान मुख्य मुद्दों से हटाने की एक गहरी साज़िशों का ही एक हिस्सा है। युवा वर्ग को इस साज़िशी जाल से बचते हुए तकनीक का फायदा उठा कर स्वस्थ समाज बनाने की तरफ जुटना चाहिए।  
बेलन ब्रिगेड सुप्रीमो अनीता शर्मा ने पंजाब स्क्रीन के साथ बात करते हुए कहा कि वर्ष में एक दिन महिला दिवस मना कर हमें संतोष नहीं करना चाहिए।  इससे कुछ नहीं संवरने वाला।  इस मकसद के लिए हमें हर पल हर कदम पर सक्रिय हो कर खुद ही आगे आना होगा। उन्होंने मंच से भी कहा था कि हर महिला अगर पूरा दिन नहीं तो कम से कम दो घंटे हर रोज़,  तो सप्ताह में एक बार या महीने में एक बार समाज के लिए वक़्त अवश्य निकाले।  
गौरतलब है कि अनीता शर्मा ने मंच से बोलते हुए कामरेडों को भी अपनी आलोचना का निशाना बनाया था जिसका जवाब देते हुए जसवंत जीरख ने कहा कि इस संबंध में अनीता मैडम के सुझावों को ध्यान में रखा जायेगा और प्रेक्टिस में भी लाया जायेगा। 
मंच से महिला वर्ग से जुड़े बहुत से मुद्दों की चर्चा हुई और इनका हल तलाश करने के लिए विचार विमर्श भी हुआ। जान दिल्ली से आयी मौसमी बासु ने जे एन यू और पंजाब यूनिवर्सिटी के ख़र्चों का अंतर् बताया तो सारा हाल सन्न रह गया। पढ़ाई लिखाई को केवल अमीरों का आरक्षित अधिकार बनाने की साज़िश सभी को समझ भी आयी। मंच से भी शांत और सांस्कृतिक भाषा में बहुत तीखे सवाल हुए।  श्रोतायों ने भी अपने सवाल खुल कर पूछे। प्रशासन की तरफ से अपनाये जाते रवैये की भी चर्चा हुई। मंच पर सुशोभित मेहमानों ने सभी के सवालों का जवाब दिया।  कुल मिला कर यह एक बहुत ही यादगारी आयोजन रहा। इस सारे आयोजन में महिला वर्ग की शमूलियत उत्साह वर्द्धक थी। 

Wednesday, January 24, 2018

डी डी जैन कालेज में इस बार टीचर लर्निंग पर सेमिनार

विचार चर्चा में खुल कर कहीं गयीं खरी खरी बातें 
लुधियाना: 24 जनवरी 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम):: और तस्वीरें फेसबुक पर देखें यहां क्लिक करके 
कभी एक गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था--
चल भाग चलें पूर्व की ओर--
प्यार मेरा न चोरी कर लें ये पश्चिम के चोर-
भागने वाले पश्चिम की हवाओं से भरे माहौल से भागने की जकड़ छुड़ा कर भागने में सफल भी रहे लेकिन पूँजीवाद ने धीरे धीरे पूर्व को भी पश्चिमी रंग में रंग दिया। ऐसा रंगा कि संपति से लेकर जज़बात तक के सौदे होने लगें। हर रिश्ता अपनी गरिमा खो बैठा। हर संबंध पूंजीवाद की चमकदमक में फंस गया। कहीं से खबर आने लगी भाई ने भाई की हत्या कर दी। कहीं से खबर आती बेटे ने मां-बाप को मार डाला। रिश्ते तार तार हो गए। साहिर लुधियानवी साहिब ने जो कुछ बहुत पहले लिखा था--

माटी का भी कुछ मौल मगर--इंसान की कीमत कुछ भी नहीं। 
 और तस्वीरें फेसबुक पर देखें यहां क्लिक करके 
यह सब कुछ हर कदम पर सच होने लगा। पूंजीवाद की इन बुराईयों का प्रभाव हर क्षेत्र पर पड़ा। बाप बड़ा न भईया-सबसे बड़ा रुपया। इस नए दौर की हवाओं ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना घातक असर दिखाया। हाल ही में यमुनागर से खबर आयी की एक छात्र ने अपनी प्रिंसीपल को गोलियां मार दीं। अध्यापन क्षेत्र से जुड़े लोगों को आंदोलनों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। गुरु और शिष्य के संबंध बिगड़ते चले गए। शिक्षा जगत की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने में पहल दिखाई लुधियाना के  देवकी देवी जैन मेमोरियल कॉलेज फॉर वुमन ने।  इस कालेज में ‘इनोवेटिव प्रेक्टिस के जरिए टीचिंग, लर्निंग और एजुकेशन’ विषय पर दो दिवसीय नेशनल सेमिनार की शुरुआत की गई। कॉलेज के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल की तरफ से "नेशनल असेस्मेंट और एक्रिडिएशन काउंसिल" द्वारा इस सेमिनार को स्पांसर किया गया।  गौरतलब है कि इस कालेज में ज्वलंत समस्याओं पर अक्सर बहुत ही अर्थपूर्ण और गंभीर आयोजन होते रहते हैं। इस बार का आयोजन दो दिनों का है और पहले दिन तीन सेशन हुए। बहुत ही शांत माहौल में बहुत ही खरी खरी बातें कही गयीं।  और तस्वीरें फेसबुक पर देखें यहां क्लिक करके 
24 जनवरी बुधवार को शुरू हुए सेमिनार की शुरुआत ज्योति प्रज्वलन और नमोकार मंत्र से की गई। सत्यम ऑटो कंपोनेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन सुरेश चंद्र मुंजाल ने मुख्य मेहमान के तौर पर शिरकत की। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. सरिता बहल ने सभी मेहमानों, शख्सियतों, डेलीगेट्स और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सेमिनार जानकारी बढ़ाने के साथ ही बौद्धिक ज्ञान को भी बढ़ाने में मदद करते हैं। मुख्य मेहमान सुरेश मुंजाल ने देश में क्वालिटी एजुकेशन की जरूरत पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इस तरह की एक्टिविटीज का आयोजन भविष्य में भी किया जाता रहना चाहिए।  और तस्वीरें फेसबुक पर देखें यहां क्लिक करके 
इस सेमिनार के उदघाटनी भाषण में एएस कॉलेज खन्ना के प्रिंसिपल डॉ. आरएस झांजी ने महत्वपूर्ण संदेश दिया। उनसे पंजाब स्क्रीन की बातचीत के कुछ अंश आप सबंधित वीडियो में भी देख सकते हैं।  उन्होंने टीचिंग लर्निंग प्रोसेस में कॉलेजों द्धारा किए गए प्रयासों के बारे में बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी दी और तर्क पर आधारित चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि टीचिंग लर्निंग में आईसीटी का प्रयोग और बेस्ट प्रैक्टिस को इम्प्लीमेंट करना आज के समय के लिए बेहद आवश्यक है।
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पैनल डिस्कशन में जीजीएनआईएमटी के प्रिंसिपल डॉ. हरप्रीत सिंह ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई। प्रताप कॉलेज ऑफ एजुकेशन के डॉ. बलवंत सिंह, एमएम मोदी कॉलेज पटियाला के डॉ. खुशविंदर कुमार, भगत फूल सिंह महिला महाविद्यालय से डॉ. संकेत विज और एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज से डॉ. अश्विनी भल्ला पैनलिस्ट रहे। पैनल में प्रोफेशनलिज्म, टेक्नॉलॉजी का महत्व, हायर एजुकेशन का वर्तमान स्तर और हल विषय के साथ ही रिसर्च बेस्ड इनोवेटिव प्रैक्टिस जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। सभी पैनलिस्ट ने कहा कि अध्यापक को सिखाने के लिए उत्साहित होने के साथ ही स्टूडेंट को भी सीखने के लिए उत्सुक रहना होगा। टेक्नीकल सेशन में डॉ. संकेत विज ने टीचिंग लर्निंग और स्टूडेंट्स की इवैल्युएशन के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। डॉ. अश्वनी भल्ला ने कहा कि फॉर्मल एजुकेशन के साथ ही स्टूडेंट्स को नैतिकता भी सिखानी होगी। सेमिनार के पहले दिन 30 रिसर्च पेपर पढ़े गए। सेमिनार में कॉलेज के चेयरमैन सुखदेव राज जैन, नंद कुमार जैन, विपन कुमार जैन, बांके बिहारी लाल जैन, राजीव जैन, अजय जैन, धर्म कीर्ति जैन, अशोक जैन व अन्य भी मौजूद रहे। सेमिनार में वक्ताओं ने एजुकेशन की जरूरत पर भी अपने विचार रखे। डाक्टर अश्विनी भल्ला, डाक्टर बलवंत सिंह और अन्यों ने बहुत ही खरी खरी बातें कहते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षा के मौजूदा सिस्टम को बदलने की आवश्यकता है। अभी यह सिस्टम टीचर ओरिएंटेड है इसे स्टूडेंट ओरिएंटेड भी बनाना होगा। डाक्टर हरप्रीत सिंह ने बहुत ही कुशलता और शायराना रंग में इस चर्चा का संचालन किया। अगर दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य माध्यमों से इसका सीधा प्रसारण होता तो इसका फायदा दूर दूर तक पहुंचता। कुल मिलाकर लुधियाना में एक सार्थक पहल हुई। यमुनागर नगर में लुधियाना की ही बेटी प्रिंसिपल रीतू छाबड़ा की जान ले ली गई।  इस लिए लुधियाना से शुरू हुई शिक्षा जगत पर चर्चा ज्यादा से ज्यादा दूर पहुँच सके तो अधिक फायदा हो सकता है।
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Monday, July 10, 2017

मीडिया में अब की स्थिति इमरजेंसी से ज़्यादा खतरनाक?

आपातकाल, मीडिया और मौजूदा स्थिति के विषय पर हुयी विचार चर्चा 
लुधियाना: 10 जुलाई 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: More Pics on Facebook
आपातकाल का वो दौर बहुत से लोगों को आज भी याद है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरागांधी के विरोधी आज भी उस दौर को काले दिनों का दौर कह कर याद करते हैं। मीडिया पर लगाई गई सेंसरशिप को लेकर आज भी बहुत कुछ कहा सुना जाता है। लेकिन अब तो कोई इमरजेंसी नहीं हैं। अब कोई सेंसरशिप भी नहीं है। इस खुले माहौल के बावजूद भी लोग बहुत सी खबरें अपने अपने इलाकों में घटित होती तो देखते हैं लेकिन वे कभी मीडिया में नहीं पहुंचती। जब सोशल मीडिया इस फैलता है तो इसे अफवाह बताने के प्रयास किये जाते हैं। कारपोरेट मीडिया के युग में यह कैसा श्राप है। क्या इमरजेंसी ज़्यादा खतरनाक थी या यह दौर? आखिर इस दौर को क्या नाम दिया जाये? 
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कारपोरेट युग के इस दौर में पैदा हुए हालात के दौरान जो स्थिति बनी है वह वास्तव में इमरजेंसी के दौर से भी ज़्यादा खतरनाक है। यह विचार "जन मीडिया मंच" (पीपुल्ज़ मीडिया लिंक) की तरह से आयोजित एक विचारगोष्ठी में खुल कर सामने आया। यह आयोजन मीडिया और आम लोगों के हालात से सबंधित शुरू किये गए सिलसिले के अंतर्गत कियागया था। इस अवसर पर शहीद भगत सिंह के भान्जे प्रोफेसर जगमोहन सिंह, प्रसिद्ध स्तम्भकार और ई एन टी स्पेशलिस्ट डाक्टर अरुण मित्रा, वाम नेता कमरेड रमेश रतन बेलन ब्रिगेड सुप्रीमो अनीता शर्मा प्रधानगी मंडल में सुसज्जित थे। 
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पत्रकार गुरप्रीत महदूदां (जी जी न्यूज़), अरुण कौशल (पब्लिक व्यूज़), एडवोकेट श्रीपाल शर्मा, सतीश सचदेवा व  गुरमल मैंडले (नवां ज़माना), इंद्रजीत सिंह (सत समुन्द्रों पार), कैनेडा से आये जानेमाने तर्कशील कार्यकर्ता-गुरमेल सिंह गिल और पंजाब में सक्रिय जसवंत जीरख, ओंकार सिंह पुरी (दिल्ली टाईम्ज़ न्यूज़), डाक्टर भारत (ऐफ आई बी मीडिया), रेक्टर कथूरिया (पंजाब स्क्रीन) ने अपने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि  आज की स्थिति कितनी भयानक है। मीडिया के लिए ईमानदारी से काम करने वाले बहुत से पत्रकार आज भी ज़िंदगी की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मेहनत से तैयार की गयीं खबरों को कारपोरेट मीडिया में जगह नहीं मिलती। बहुत सी सच्ची खबरें न तो अब अख़बारों में आती हैं और न ही टीवी चैनलों में। आखिर उनको कौन सी अदृश्य शक्ति रोक देती है। इस विषय पर विस्तृत बहस की भी आवश्यकता है और इस रोहजान को रोकने के लिए समांनांतर जन मीडिया को मजबुत बनाना भी आवश्यक है। इस अवसर पर कई जन समर्थक मीडिया संगठनों की प्रशंसा भी की गयी।
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डाक्टर अरुण मित्रा ने कहा कि  मौजूदा स्थिति बहुत ही खतनाक है और इसके खिलाफ आवाज़ उठाना हमारा सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि  आज हाँ संख्या में कम हैं लेकिन इस तरह के कम लोगों से ज़्यादा बड़े काफिले बनते हैं। आपातकाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर इंदिरा गाँधी ने इमरजेंसी लगाई तो उसने इसका ख़मयाज़ा भी भुगता और वह बुरी तरह से हार भी गयी लेकिन जो अघोषित आपातकाल आज चल रहा है वह ज़ुडा भयानक है। इसे भी लोग ज़्यादा देर तक चलने नहीं देंगें। इसके संचालकों भी इसका खामियाज़ा भुगतना ही पड़ेगा।  हां यह बात अलग है इस मकसद के लिए मीडिया साथ सिवल सोसायटी और सियासतदानों  मेहनत करनी पड़ेगी। मीडिया  अपनी कारगुज़ारी और बेहतर बनाने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे नहं डाक्टरों को हर पांच वर्ष बाद अपनी डिग्री रिन्यू करानी पड़ती है इसके लिए बाकायदा सी एम ई अटेंड करनी पड़ती हैं। इसी तरह पत्रकारों को भी अपनी कला और कलम की धार तेज़ रखने के लिए खुद फील्ड में जाने के प्रयास करते रहना चाहियें। इससे उनमें और  निखार आएगा। 
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प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने इस अवसर पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि लोगों की तकलीफों की बात प्रशासन तक नहीं पहुंच रही इस लिए पीपुल्ज़ मीडिया लिंक बनाया गया है तांकि जन समर्थक लेखकों का एक सक्रिय ग्रुप बनाया जा सके। श्रोताओं को सम्बोधित हुए उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में लोगों की ज़ुबानबन्दी के साथ साथ सोच भी बंद कर दी गयी थी लेकिन अब की स्थिति ज़्यादा भयानक है। उन्होंने शहीद भगत सिंह के समय की पत्रकारिता कर कुर्बानियों की भी याद दिलाई।
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मैडम अनीता शर्मा ने जन समर्थक पत्रकारों की वित्तीय स्थिति और आत्महत्यायों का ज़िक्र करते हुए कि हमें ऐसे कीमती पत्रकारों को बचने के लिए को भलाई संगठन बनाना चाहिए जो इस तरफ निरतंर उचित ध्यान दे सके दे।    More Pics on Facebook 
कामरेड रमेश रतन ने कहा कि स्थापित संस्थागत मीडिया से टक्क्र लेना कोई व्यक्तिगत तौर पर न तो सम्भव है और न ही आसान। उन्होंने इस विषय पर और भी बहुत कुछ विस्तार से कहा। 
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मंच संचालन करते हुए प्रदीप शर्मा इप्टा ने ऐसी बहुत सी घटनाएं बतायीं जो आज के बेबस हालात पर रौशनी डालती थीं। अंत में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि हमें जन समर्थक मीडिया को मज़बूत बनाने के साथ साथ सोशल मीडिया के ज़रिये भी प्रामाणिक सच बाहर लाते रहना है तांकि वास्तविक और मत्वपूर्ण खबरें छुपाने या बिगाड़ने वाले पूंजीवादी मीडिया की साज़िशों का मुकाबिला किया जा सके। 
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Friday, June 16, 2017

न्याय के लिए कब तक मिलेगी तारीख दर तारीख ?

पंजाबी भवन लुधियाना में हुआ न्याय व्यवस्था पर सेमिनार 
लुधियाना: 15 जून 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: More Pics on Facebook 
अदालत में न्याय पाना हो तो गुज़रना पड़ता है एक लम्बे सिलसिले से जिसमें मिलती है बार बार तारीख..और तारीख और तारीख....। तारीखों के इस चक्रव्यूह में फंसा इंसान तो चल बस्ता है लेकिन न्याय की झलक उसे नहीं मिल पाती। इस अमानवीय सिलसिले के खिलाफ संघर्ष शुरू किया है जज एडवोकेट पीड़ित संगठन (JAPO) ने।
इस संगठन की तरफ से आज एक सेमिनार स्थानीय पंजाबी भवन में करवाया गया। इस मौके पर मुख्य मेहमान थे शहीद भगत सिंह के भान्जे प्रोफेसर जगमोहन सिंह और छत्तीसगढ़ से आये प्रवीण पटेल।  इनके साथ ही मंच पर मुख्य मेहमानों में मौजूद थी बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा और कुछ अन्य लोग।
वक्ताओं ने न्याय व्यवस्था के हालात का दृश्य दिखाते हुए इस सिस्टम के बखिये उधेड़ दिए। एक एक मुद्दे पर बात हुयी।  विस्तार से चर्चा हुई। समस्या को सभी के सामने  रखा गया। इसके साथ ही हल की तलाश पर भी विचार विमर्श हुआ। 
सेमिनार का मुद्दा महत्वपूर्ण था लेकिन हाल में मौजूद लोगों की संख्या बहुत ही कम थी। इस संबंध में प्रबंधन बेहद कमज़ोर साबित हुआ। हाल की खाली कुर्सियां संकेत थी की इस गहन गंभीर मुद्दे पर या तो लोग डर के मरे चुप हैं या फिर उन्हें पता ही नहीं चला की यहाँ इस मुद्दे पर कोई चर्चा आयोजित हो रही है। 
वास्तव में इसके आयोजकों में से प्रमुख सुभाष कैटी और उनकी टीम लम्वे समय से संघर्षशील होने के बावजूद उन लोगों तक पहुँच नहीं कर सकी जिन्होंने न्याय व्यवस्था की पीड़ा को झेला है। इसके बावजूद यह एक सफल आयोजन था क्यूंकि एक ऐसे मुद्दे पर बात तो शुरू हुई जिस पर कहने को बहुत से लोगों के पास बहुत कुछ है लेकिन बात ज़ुबान पर नहीं आ पाती।  उम्मीद है यह मंच और यह आयोजन उन बेबस लोगों की ज़ुबान बनेगा जिनसे न्याय के नाम पर लगातर अन्याय हुआ है। पत्रकारअरविंदर सिंह सराना ने भी इस मुद्दे पर इसी मंच से विस्तृत चर्चा की।  More Pics on Facebook
आखिर में डा. राहत इन्दोरी साहिब का एक शेयर इसी मुद्दे पर:
जो जुर्म करते हैं, इतने बुरे नहीं होते;
सज़ा न दे के अदालत बिगाड़ देती है। 

Tuesday, March 14, 2017

स्किन प्रोब्लेम्स पर लेटेस्ट रिसर्च और टिप्स की चर्चा

Date: 2017-03-14 16:54 GMT+05:30
डा.ज़ारा शेख़ एवं डा.ईमरान खान ने बतायीं काम की बातें
लुधियाना: 14 मार्च 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
विकास के साथ साथ बढ़ रही हैं तन और मन की समस्याएं। प्रदूषित पर्यावरण, बदलता मौसम और मिलावटी खानपान से आए दिन नयी समस्या सामने आती है। इन्हीं में से एक है स्किन की समस्या। काले दाग, स्याही जैसे धब्बे, खुजली, और कई तरह की बातें आजकल आम हो रही हैं। इन्हीं बातों को लेकर एक विशेष सेमिनार कराया गया। फास्डर्मा इंडिया इज़ारा कम्पनी की तरफ से एक ब्यूटी स्कीन ट्रीटमेंट सेमिनार का आयोजन मंगलवार को होटल फ्रेंड्स रीजेंसी में किया गया। विशेष रूप से डॉ ज़ारा शेख़ एवं डॉ ईमरान खान ने आए हुए सभी स्कीन विशेषज्ञों को लेटेस्ट रिसर्च और टिप्स दिए कि स्किन की प्रोब्लेम्स को कैसे ठीक किया जा सकता है। आज के दौर में हो रही स्कीन प्रोब्लेम्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उनको कैसे ठीक किया जाए और उनसे कैसे बचा जाए। आने वाले गर्मी के मौसम में स्कीन को धूप से कैसे बचाया जाए और कैसे धूल मिटी से बचा कर अपनी त्वचा को सूंदर रख सकते है। बदलते मौसम के मुताबिक आपको रोज़ाना इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोडक्ट्स को अपने स्कीन को ध्यान में रखते हुए ही खरीदना चाहिए या फिर एक्सपर्ट्स की सलाह से ही इस्तेमाल करना चाहिए।

Sunday, March 12, 2017

ध्यान योग का विज्ञान ही पूर्ण स्वास्थ्य का मूल है : डॉ. सतीश गुप्ता

डा. गुप्ता अनेक राष्ट्रीय व  अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित 
लुधियाना: 12 मार्च, 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय, लुधियाना शाखा की संचालिका बी.के. राज दीदी की अध्यक्षता में रविवार सांय गुरु नानक पब्लिक स्कूल, साराभा नगर, लुधियाना के ऑडीटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में भारी सभा को संबोधित करते हुए ग्लोबल हॉसपिटल व रिसर्च सैंटर माऊंट आबू से आए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश गुप्ता ने खुशहाल व स्वस्थ जीवन के सरल सहज उपाए बताए। उन्होंने राजयोग ध्यान का विज्ञान व स्वास्थ्य के लिए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डॉ. सतीश गुप्ता को चिकित्सा, खास तौर पर हृदय रोगों से बचाव के संबंध में व राजयोग के क्षेत्र में अनेक अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वे बिना आपरेशन, केवल खान-पान, रहन-सहन के परहेज व राजयोग ध्यान योग के माध्यम से अनेक हृदय धमनियों के अवरोध को सफलता पूर्वक दूर कर चुके हैं। इस मौके पर लुधियाना के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि आज समाज में भले चिकित्सक, विशेषज्ञ व चिकित्सा संस्थान बढ़ रहे हैं परन्तु बीमारियां भी कम होने के बजाए बढ़ गई हैं। इसके कारण पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि आज हमारी जीवनशैली से संबंधित अनेकों बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्चरक्तचाप, थायरायड, कैंसर, हृदय रोग, त्वचा रोग, फेफड़ों के रोग, पेट की बीमारियों आदि ने हमें घेर लिया है। इनसे पूर्णत निजात इस लिए नहीं मिल पा रही क्योंकि शारीरिक स्वास्थ्य हमारी पूर्ण सेहत का केवल एक पहलू है। इसके अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं- मानसिक व अध्यात्मिक पहलू पर हम गौर ही नहीं कर रहे। जबकि मानसिक व आध्यात्मिक पहलूओं के अस्वस्थ होने पर ही शरीर में रोग होते हैं। आज हर कोई चिंता, तनाव, क्रोध, आक्रोश, असंतुष्टता, डर, लोभ, मोह, अहंकार आदि अनेक अस्वस्थ मनोभावों को अपना चुका है इसे अपना स्वभाव मान कर स्वीकार कर चुका है। जबकि ऐसा ही अस्वस्थ मन-अस्वस्थ खान-पान, व रहन-सहन को स्वीकृति देता है जिससे शरीर में तो रोग होते ही हैं। इन्हीं मनोभावों के कारण आपसी संबंधों में मनमुटाव व सामाजिक स्वास्थ्य को भी हानि पहुंचती है। मन को स्वस्थ, सशक्त रखने का एक मात्र रास्ता अध्यात्म ज्ञान का जीवन में पालन करना है। अध्यात्म ज्ञान हमें सिखाता है कि हम मूल रूप से शरीर नहीं बल्कि शांत स्वरूप आत्मा है और हम सब एक परमात्म पिता की सन्तान व आपस में भाई-भाई हैं। यह आत्मिक ज्ञान हमें देह, मन की अस्वस्थ मानसिकता से उभरने में मदद करता है। इसे राजयोग मैडीटेशन के नियमित अयास द्वारा दृढ़ किया जा सकता है। राजयोग के द्वारा हमें आत्मा के सात गुणों- सुख, शांति, प्रेम, आनन्द, ज्ञान, पवित्रता व शक्तियों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा व मार्ग मिलता है। मैडीटेशन द्वारा बिचारों पर नियन्त्रण व उन्हें सही दिशा देकर हम अभ्यन्तर तौर पर स्वस्थ होते हैं व शरीर रोगों से भी मुक्त होते हैं। मन के विचार कम होने से वे सशक्त व सकारात्मक भी होते हैं। तभी आत्मा अपने पिता परमात्मा से संबंध स्थापित कर सब शक्तियों का अनुभव कर पाती है। इस प्रकार स्वस्थ मन, आत्मा व शरीर के बीच कड़ी का काम करते हुए आत्मिक गुणों को स्वस्थ जीवन के रूप से प्रकाशित करता है। ऐसे स्वस्थ मानसिकता, सकारात्मकता से हमारा खान-पान, रहन-सहन भी सदा स्वस्थ होता जाता है। समाज के प्रति उदार प्रवृति हो जाती है। इस प्रकार ध्यान योग का विज्ञान पूर्ण स्वास्थ्य का मूल कहा जा सकता है। 
सत्र के दौरान डॉ. सतीश जी ने उपस्थित लोगों को राजयोग मैडीटेशन का अयास भी कराया जिसे सभी ने सराहा।

Saturday, January 28, 2017

चुनावी रंग में भी जलवा दिखाया खूबसूरत दिखने के रंग ने

2017-01-28 18:15 GMT+05:30
सेमिनार में बताये बालों को सुंदर और रंगीन बनाने के टिप्स 
लुधियाना: 28 जनवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
चुनावी सरगर्मियों के चलते एक बार तो सब कुछ थम सा गया लगता है लेकिन खूबसूरत दिखने का चाव एक ऐसा जनून है जो अक्सर हर तरह के माहौल में सक्रिय रहता है। सुंदरता के मामले में बालों का अहम स्थान है। आज के युग में इस तरफ लड़कियों के साथ साथ लड़के भी बेहद सम्वेदनशील हो गए हैं। हेयर स्टाइल आज कल बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। इसी मांग को लेकर आज एक स्थानीय संस्थान में हेयर कलर सेमिनार का आयोजन किया गया। स्टूडियो के डायरेक्टर जावेद परवेज़ ने आई हुई मॉडल्स को नई हेयर कलर और हेयर कट के बारे में जानकारी दी।उन्होंने लेटेस्ट ट्रेंड का हेयर कलर,हेयर कट और हेयर स्टाइल की आसान और इफेक्टिव टेक्निक्स बताई। जावेद परवेज़ ने बताया कि काफ़ी वक्त से लुधियाना के काफ़ी मॉडल्स  डिमांड कर रही थी कि उनको कुछ लेटेस्ट ट्रेंड के बारे में बताए कुछ अनोखो और नए स्टाइलिस्ट डिजाईन बताए। इस तरह के सेमिनार वो समय समय पर करवाते रहेगे ताकि लोगो को कुछ नया पता लग सके। अब देखना है कि तन की सुंदरता के ये आयोजन मन को सुंदर बना पाने में कितना येगदान डालते हैं। 

Monday, January 16, 2017

पूँजीवादी व्यवस्था के अन्तरविरोध समाजवादी क्रान्तियों के नए संस्करणों का निर्माण करेंगे

‘महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति व आज का समय’ विषय पर विचार-चर्चा
लुधियाना: 15 जनवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): For more Pics Please Clik Here
पूंजीवाद के लालच, स्वार्थ और संवेदनाविहीन सिस्टम में सताये लोगों के लिए शायद आखिरी उम्मीद बन कर उभरी थी रूस में आई अक्टूबर क्रांति। शायरों ने गीत लिखे-वो सुबह कभी तो आएगी।  फिल्मों के गीत हिट हुए-
हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा मांगेंगे-
इक बाग़ नहीं -इक खेत नहीं हम सारी दुनिया मांगेंगे।  
इस वाम विचारधारा ने गम के मारे लोगों को शक्ति दी, नई ऊर्जा दी, आश्वासन दिया-
रात भर का है मेहमां अँधेरा--किसके रोके रुका है सवेरा..! 
विचारों में दम था और इस विचारधारा के लिए लोग अपने सभी सुख छोड़ कर पूरे जोश के साथ आगे आये। नावल मां ने इस अभियान में एक नया जोश भरा। इस वाम आंदोलन के लिए कुर्बानियां देने वालों की कमी नहीं रही। इस विचारधारा से प्रभावित हो कर बहुत से लोगों ने अपनी सारी सारी ज़िन्दगी लगा दी, अपना घरघाट परिवार सब कुछ दांव पर लगा दिया पर इस सब के बावजूद एक समय आया जब इनको लगने लगा शायद हम गलत हो गए। बहुत से मित्रों ने व्यक्तिगत मुलाकातों में रुयासे हो कर कहा शायद हमने सारी उम्र अँधेरा ढोया। इनको भी इन्कलाब दूर होता महसूस हुआ। पार्टी के लिए पूरी उम्र लगाने वालों ने भी कभी कभी अनौपचारिक भेंटवार्ता में यही कहा कि इंकलाब तो अब आने वाला नहीं। यह कहने पर कि फिर कौन सी पार्टी में जाना है तो उनके आंसू निकल आते-कहते-पार्टी तो मां होती है कामरेड --हम पार्टी नहीं छोड़ेंगे। स्पष्ट था कि उनका गिला शिकवा पार्टी से नहीं बल्कि पार्टी पर काबिज़ हुए या घुस आये स्वार्थी नेतायों से था। बहुत से वरिष्ठ कामरेड ऐसे हैं जिनकी अपनी सन्तान ने भी वाम सियासत में आना उचित नहीं समझ। आज वाम दलों के पास युवा केडर चिंतनीय हद तक कम हो रहा है और वृद्ध लोग बारी बारी अलविदा कह रहे हैं इसके बावजूद पदों का मोह छूट नहीं रहा। ऐसे हालात में जब वाम दलों का आम केडर ठगा ठगा सा महसूस कर रहा था और उसे लग रहा था कि बड़े बड़े वाम नेतायों की ज़िन्दगी और उनके परिवारों का इंकलाब आ चुका है और हमारा इंक़लाब कभी आने वाला नहीं।  इस बेहद नाज़ुक दौर में जिसके बारे में पूंजीवादी साम्प्रदायिक दलों के बड़े नेता अक्सर मज़ाक करते हैं कि कामरेड तो अब खत्म हो चुके तो उनका मज़ाक न खोखला लगता है न ही मज़ाक। एक कड़वा सत्य जिसका सामना आज बहुत से कामरेड कर रहे हैं लेकिन अपनी ज़िन्दगी में। इन विचारों से जुड़ा केडर निराश नज़र आ रहा था। जहाँ एक वाम ट्रेड यूनियन के आह्वान पर लाल झंडे वालों की भीड़ का सागर लहराता नज़र आता था वहां अब चार चार वाम दल मिलकर भी 50-100 से ज़्यादा वर्कर अपनी रैलियों में एक्टर नहीं कर पाते। 
और इसके चाहनेवालों के लिए पैदा हुई इस चिंतनीय स्थिति से भरे इस तरह के हालात में एक आयोजन वह था जब छात्र नेता कन्हैया के आने पर लुधियाना के पंजाबी भवन में इतनी भीड़ जुटी थी कि उसे सम्भालना मुश्किल था। उसके बाद एक मौका अब और देखने को मिला जब 15 जनवरी 2017 दिन रविवार को अक्टूबर क्रांति पर हुए सेमिनार में पंजाबी भवन का हाल पूरी तरह से भरा हुआ था। यहाँ तक कि इस सेमिनार को सुनने के लोग कड़क सर्दी के मौसम में भी नीचे फर्श पर बैठे थे और वो भी बर्फीली शीत लहर में। हाल में मौजूद श्रोता और कार्यकर्ता पूरी तरह से ध्यान मगन थे। न कोई शोर न कोई बेचैनी। मुख्य वक्ता शशि प्रकाश के प्रभावशाली व्यक्तित्व के सामने सभी मंत्रमुग्ध हुए एक एक बात को सांस रोक कर सुन रहे थे। For more Pics Please Clik Here

15 जनवरी 2017 को लुधियाना के पंजाबी भवन में मार्क्सवादी स्टडी सर्किल द्वारा ‘महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति व आज का समय’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। मार्क्सवादी लेखक, राजनीतिक कार्यकर्ता व अंग्रेजी मार्क्सवादी पत्रिका ‘द एनविल’ के सम्पादक शशि प्रकाश सेमिनार के मुख्य वक्ता थे। सेमिनार की शुरुआत क्रान्तिकारी सांस्कृतिक मंच, दस्तक द्वारा पेश क्रान्तिकारी गीतों से हुई। मंच संचालन मार्क्सवादी स्टडी सर्किल की ओर से साथी सुखविन्दर ने किया। 

मुख्य वक्ता शशि प्रकाश ने विषय पर बात रखते हुए कहा कि रूस में 25 अक्टूबर 1917 को होने वाली मज़दूर क्रान्ति दुनिया की तब तक की सबसे महान घटना थी। यह पहला मौका था जब राज्यसत्ता किसी शोषक वर्ग के हाथों से निकलकर शोषित-उत्पीड़ित वर्ग के कब्ज़े में आ गयी। यह सचेतन तौर पर की जाने वाली दुनिया की सबसे पहले क्रान्ति थी जिसका मकसद था इन्सान के हाथों इन्सान की हर तरह की लूट का ख़ात्मा करना। इस क्रान्ति ने सम्पत्तिवान वर्गों का तख्ता पलट दिया। इस क्रान्ति ने दिखा दिया कि अगर समाज का नियन्त्रण मज़दूर वर्ग के हाथों में आ जाये तो मेहनतकश वर्गों की चेतना, संस्कृति, शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, तकनीकी और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किया जा सकता है। यह एक युगप्रवर्तक घटना थी जिसके बाद मज़दूर क्रान्तियों के युग की शुरुआत हुई। महान अक्टूबर क्रान्ति आज भी हमें प्रेरणा दे रही है और उसकी शिक्षाएँ हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं। महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति के सबकों को आत्मसात किए बिना क्रान्तिकारी आन्दोलन को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा विश्व पूँजीवादी व्यवस्था के अन्तरविरोध समाजवादी क्रान्तियों के नए संस्करणों का निर्माण करेंगी। अक्टूबर क्रान्ति की शिक्षाओं को व्यापक जनता तक पहुँचाना क्रान्तिकारी आन्दोलन का एक अहम कार्यभार है।For more Pics Please Clik Here

उनके अलावा प्रो. जगमोहन, डा. जगजीत चीमा, जरनैल सिंह, रवि कुमार, मास्टर दविन्दर, जगसीर जीदा, गुरप्रीत, वरूण आदि ने भी बात रखी। For more Pics Please Clik Here

इस सेमिनार से एक बात उभर कर सामने आई कि शोषित वर्ग आज भी शोषकों के खिलाफ संघर्ष के लिए मार्गदर्शन चाहता है और अगर इस तरह का कोई अवसर मिले तो वह चूकता नहीं। मार्क्सवाद के चाहनेवालों की प्यास अभी भी बरकरार है। अब आगे सोचना वाम नेतायों का काम है कि वे केवल एकता की बातें करते हैं या इस मकसद के लिए कोई ठोस कदम उठाने को भी तैयार हैं? 
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Wednesday, March 12, 2014

डीडी जैन महिला कालेज में कराया गया विशेष राष्ट्रीय सेमिनार

Wed, Mar 12, 2014 at 3:25 PM
डा. ओझा ने दी  इतिहास पर रौचक जानकारी 
लुधियाना:12 मार्च 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
शोर शराबे से भरे हल्के आयोजनों से हट कर डीडी जैन महिला कालेज ने एक और विशेष आयोजन कराया। यह एक राष्ट्रीय सेमिनार था जो पंजाब के प्रारंभिक मध्यकाल के दौरान राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संक्रमणकालीन चरण प् विशेष चर्चा करने के लिए आयोजित कराया गया। इस एक दिवसीय संगोष्ठी प्रायोजित किया था पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के ICSSR विभाग ने। गौरतलब है कि आज के इस शुभ दिन इस कालेज  की मुख्य प्रेरणा स्रोत देवकी देवी जैन जी का जन्मदिन भी था। इस शुभ अवसर पर कालेज ने एक गंभीर और खो चुके विषय पर संगोष्ठी करा कर जहाँ कालेज की छात्रायों को एक ज्ञान भरी सौगात दी वहीँ इतिहास में रूची रखने वाले अन्य लोगों के लिए भी एक नया सिलसिला शुरू किया। कार्यक्रम के दो तकनीकी स्तर थे जिनमें दस शोध पत्र प्रस्तुत किये गए। 
सेमिनार  शुरूआत औपचारिक ज्योति प्रज्वलित करके हुई। इस मौके पर हमेशां की तरह णमोकार मंत्र का उच्चारण भी किया गया। वक्ताओं और मेहमानों का स्वागत बहुत ही सम्मान और गर्मजोशी से किया गया। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से आये डा. एन के ओझा पहले सेशन के मुख्य वक्ता थे जबकि उनके साथ ही चंडीगढ़ से आये डा. अश्विनी अग्रवाल दुसरे तकनीकी स्तर के मुख्य वक्ता था। इस यादगारी मौके पर जानेमाने समाज रत्न और कालेज के की प्रबंधन समिति के चेअरमैन श्री हीरा लाल जैन, कालेज के प्रधान केदारनाथ जैन, सचिव बिपन जैन, मैनेजर सुरिंदर कुमार जैन, राज कुमार जैन, श्री शांति सरूप जैन, और वरिष्ठ उपाध्यक्ष शीतल कुमार जैन, उप प्रधान और अन्य वशिष्ठ लोग भी मौजोड़ रहे।  
अपने मुख्य भाषण में में डा. एन के ओझा ने पंजाब के राजनीतिक पर इतिहास पर बहुत ही दिलचस्प तरीके से बॉट ही अमूल्य जानकारी दी। उन्होंने छठी और 12वीं सदी के कार्यकाल का एक नक्शा सा ही खींच दिया। उन्होंने उस समय की राजनीति के साथ पंजाब की आर्थिक हालत, धर्म-कर्म और संस्कृति की भी जानकारी दी। 
आये हुए डेलीगेटों ने अपने अपने शोधपत्रों में छूयाछात, महिलायों की हालत और बहुत से अन्य मुद्दों पर भी जानकारी दी। समापन सेशन के मुख्य मेहमान थे डाकटर आर के शर्मा।  उन्होंने ने भी इस विष पर बहुत ही जानकारी दी।  कालेज की प्रिंसिपल सरिता बहल ने आये हुए मेहमानों का धन्यवाद किया।समापन रिपोर्ट के साथ ही प्रमाणपत्र भी दिए गए और राष्ट्र गान के साथ ही कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।