Showing posts with label Dr. D N Kotnis. Show all posts
Showing posts with label Dr. D N Kotnis. Show all posts

Friday, November 25, 2022

डा. द्वारकानाथ कोटनिस की स्मृति में विशेष आयोजन 9 को

25th November 2022 at 04:42 PM

डॉ. कोटनीस एक्यूपंक्चर अस्पताल की तरफ से विशेष मैडिकल कैंप  

महान स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर द्वारकानाथ कोटनिस को नमन करने आएंगे बहुत से लोग 


लुधियाना
: 25 नवंबर 2022: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन):: 

विदेशों में जा कर भी मानवता का धर्म निभाने वाले डा. द्वारकानाथ कोटनिस को नमन करने के लिए इस बार भी डॉ. कोटनीस एक्यूपंक्चर अस्पताल  सलेम टाबरी में विशेष आयोजन होगा। इस मकसद के लिए अस्पताल के डायरेक्टर डॉ इंद्रजीत सिंह और आई पी एस सरदार इकबाल सिंह गिल की अध्यक्षता में मीटिंग का आयोजन भी किया गया। डा. कोटनिस की 80वीं बरसी पर आयोजित हो रहे इस मैडिकल कैंप में बहुत सी गंभीर बिमारियों की जांच और इलाज की सुविधा सभी आने वालों को मिलेगी।  

पिछले महीने जन्मदिन के अवसर पर लगे कैंप की खबर आप यहां क्लिक कर के पढ़ सकते हैं  

अगले महीने दिसंबर महीने में  कैंप की घोषणा के अवसर पर डॉक्टर इंद्रजीत सिंह और सरदार इकबाल सिंह गिल ने जानकारी देते हुए बताया कि 9 दिसंबर को महान स्वतंत्रता सेनानी तथा मानवता की सेवा अतः हिंद चीन दोस्ती के प्रतीक डॉक्टर द्वारकानाथ कोटनीस की 80 वी बरसी के उपलक्ष में दो दिन के  कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी के उपलक्ष्य में समारोह के पहले दिन यानि 9 दिसंबर को संस्था के प्रधान डॉक्टर जी. एस. मक्कड़ की अध्यक्षता में मुफ्त एक्यूपंक्चर चिकित्सा कैंप लगाया जा रहा है। 

इस कैंप में हर तरह की बीमारियों के अलावा मुख्य रूप से कोविड-1 बीमारी के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए नई एक्यूपंक्चर तारीको से  जैसे, शरीर में दर्द होना, शरीर में कमजोरी महसूस करना, नींद ना आना, दमा,  फेफड़ों की सभी समस्याओं, जोड़ों का दर्द, पुरानी, पेचीदा बीमारियों का इलाज जैसे कमर में दर्द, साइटिका, स्पोंडिलाइटिस, अधरंग/लकवा, पुराना नजला, मिर्गी दिमागी कमजोरी, माइग्रेन, सिर दर्द, मुंह का लकवा, नाक, कान, गला, लीवर संबंधी समस्याओं का इलाज भारत की प्रसिद्ध एक्यूपंचर माहिर डॉक्टरों द्वारा पूरी जांच के बाद किया जाएगा।  

डॉक्टर इंद्रजीत सिंह ने कहा कि एक्यूपंचर एक रिवायती प्रसिद्ध कुदरती इलाज है। जिसमें रोगी को किसी तरह की दवाई इंजेक्शन नहीं लेना पड़ता बल्कि हर प्रकार के रोगों के लिए बिना दवाई से, बिना सर्जरी, बिना दर्द राहत इलाज एक्यूपंचर से संभव है। 

आज पंजाब में नौजवान पीढ़ी नशों से ग्रस्त हो चुकी है। उसको नशों से बाहर निकालने के लिए एक्यूपंचर चिकित्सा काफी लाभदायक सिद्ध हो रही है। यह कैंप सुबह 10:00 बजे से शुरू होकर शाम 3:00 बजे तक सलेम टाबरी स्थित डॉक्टर कोटनीस मेमोरियल एक्युपंचर हॉस्पिटल में लगाया जायेगा। जिसमें हर प्रकार के व्यक्ति का उपचार एक्यूपंचर विधि द्वारा किया जाएगा। डॉ धींगरा ने बताया कि आज एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में बहुत विस्तार हुआ है। परंतु लोगों को अच्छी सेहत मुहैया करवाने में भी पूरी तरह कामयाबी नहीं मिली। 

आज ना सिर्फ भारत सरकार बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी रिवायती चिकित्सा पद्धतियों जैसे कि आयुर्वेदिक एक्यूपंचर  होम्योपैथिक योगा द्वारा लोगों को अच्छी सेहत मुहैया कराई जा सकती है। जिसके लिए सरकार के प्रति विश्व स्वास्थ संगठन ने एक काफी समय के बाद प्रोग्राम रखा है जिसमें 2023 से 2024 तक सबको अच्छी सेहत मुहैया  करवाने के लिए हम सभी भी वचनबद्ध है। 

समाजिक चेतना और जन सरोकारों से जुड़े हुए ब्लॉग मीडिया को मज़बूत करने के लिए आप आप अपनी इच्छा के मुताबिक आर्थिक सहयोग भी करें तांकि इस तरह का जन  मीडिया जारी रह सके।

Sunday, October 09, 2022

डॉ. कोटनिस एक्यूपंक्चर अस्पताल द्वारा चिकित्सा शिविर

 9 अक्टूबर 2022 अपराह्न 04:15 बजे

महान अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानी द्वारकानाथ कोटनिस की स्मृति में आयोजित शिविर

लुधियाना: 9 अक्टूबर 2022: (संजय//पंजाब स्क्रीन)::

भारत सरकार द्वारा जारी डाक टिकट का फोटो

महान अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानी द्वारकानाथ कोटनिस की स्मृति में डॉ. कोटनिस अस्पताल के प्रबंधन द्वारा एक विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसका लाभ लेने के लिए जरूरतमंद लोग इस शिविर में पहुंचे। उन सभी की गहनता से जांच की गई। 
गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को पूरी दुनिया में डॉ. कोटनिस का जन्मदिन मनाया जाता है। डॉ. कोटनिस का जन्म 10 अक्टूबर 2022 को मुंबई के पास स्थित शोलापुर में एक मराठी परिवार में हुआ था। डॉ. कोटनिस की मानवीय भावना और समर्पण ने एक नया इतिहास रचा जो न केवल चीन और भारत के संबंधों को मजबूत करता है बल्कि पूरी दुनिया को एक शक्तिशाली संदेश भी भेजता है। उस महान चिकित्सक को आज भी लोग याद करते हैं। जब 9 दिसंबर, 1942 को डॉ. कोटनिस की मृत्यु हुई, तो इस चिकित्सा कर्तव्य पथ पर चलते हुए मौत को गले लगाने वाले डाक्टर कोटनिस के देहांत पर शोक व्यक्त करने वालों में पीपुल्स चाइना के संस्थापक माओ त्से-तुंग भी शामिल थे। इस मौत के दुखद अवसर पर चीनी जनता और चीनी सेना ने गहरा दुख जताया था। इस महान चिकित्सक का एक महान इतिहास रहा है। इस मेडिकल शिविर के माध्यम से उस महान चिकित्सक को श्रद्धांजलि दी गई है। यह कैंप उस महान शख्सियत को याद करने का एक बहुत अच्छा तरीका है। आज के लोगों को उस महान डाक्टर की याद दिलाना ज़रूरी भी है। सालेम तबरी के इलाके पीरू बंदा में श्री गुरु रविदास धर्मशाला में इस नि:शुल्क चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा जांच शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाग लिया और लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। इस शिविर में 135 मरीजों की जांच की गई और जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क दवाएं भी वितरित की गईं।

शिविर का उद्घाटन श्री राम किशन अध्यक्ष धर्मशाला और बलबीर चंद अध्यक्ष अशोक मादी, सुरिंदर हीरो, सतपाल महमी ने किया। इस अवसर पर बोलते हुए श्री राम कृष्णजी ने कहा कि डॉ. कोटनिस ने 1942 में मानवता की सेवा की थी। मैंने दिन-रात उन लोगों की सेवा की जो हमारे पड़ोसी मित्र चीन में स्वतंत्रता संग्राम में भाग ले रहे थे। इसलिए उसकी वहीं मौत हो गई।

आज 80 साल बाद भी चीनी सरकार, चीन के लोग इस महान भारतीय चिकित्सक द्वारकानाथ की याद में चीन में हमारे भारतीय डॉक्टरों की याद में सिर झुकाते हैं। भारतीय डॉक्टर की याद में न केवल अस्पताल चलाया जा रहा है, बल्कि चीन युद्ध स्मारक पर उनकी याद में एक ठुमका भी लगाया गया है। आज पूरी दुनिया के लोगों को अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए दुनिया भर के डॉक्टरों को डॉ. कोटिन्स के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। हर गली में इस तरह के कैंप लगाने की जरूरत है।

इस कैंप में डॉ. नेहा ढींगरा, डॉ. रघुवीर सिंह, डॉ. डेंटल डॉ. ऋतिक चावला ने चेकअप कर मरीजों का इलाज किया। उन्होंने रोगों से बचने के विभिन्न उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि दंत रोग के कारण विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं, जिनमें पेट के रोग और मसूढ़ों के रोग प्रसिद्ध हैं।

डॉ. नेहा पहले भी कोविड जैसी महामारी से लड़ते हुए अपना बचाव करने में सफलता से निकल चुकी हैं, लेकिन फिर भी ऐसे कई लक्षण थे जो कोविड के पाए गए, जिनमें कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, खांसी, जोड़ों में दर्द, नींद न आना शामिल हैं, जिससे कमजोरी जैसे लक्षण सामने आने लगे। .

इलाज के दौरान पाया गया कि ऐसे मरीजों को अभी भी इलाज की जरूरत है, जिसके लिए हम आगे भी ऐसे कैंप लगाते रहेंगे, इस कैंप में मनीषा ने लोगों को नशा और नशा करने वालों जैसी बीमारियों से दूर रहने की सीख दी. पंजाब के लोगों को नशा मुक्त बनाने के लिए कोटनिस अस्पताल में नि:शुल्क इलाज किया जाता है। इस शिविर में मुख्य रूप से ODIC प्रभारी मनीषा, गगनदीप कुमार, रितु, अमन, मीनू शर्मा आदि ने अपना विशेष योगदान दिया। 

समाजिक चेतना और जन सरोकारों से जुड़े हुए ब्लॉग मीडिया को जारी रखने में निरंतर सहयोगी बनते रहिए। नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आप सहजता से ही ऐसा कर सकते हैं।