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Saturday, November 23, 2013

कमांडरों के संयुक्‍त सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री का भाषण

22-नवंबर-2013 20:27 IST
प्राणों की आहूति देने वालों को श्रद्धांजलि अर्पि‍त 
हमारी सशस्‍त्र सेनाओं के वरिष्‍ठतम नेतृत्‍व के इस सम्‍मेलन में एक बार फिर बोलते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही हैं। हमारी सेनाओं में शामिल पुरूष और महिलाएं सुरक्षा के काफी कठिन माहौल में काम करते हैं, लेकिन उन्‍हें हमेशा आदर्श पेशेवराना अंदाज, साहस और प्रतिबद्धता के साथ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनका मार्गदर्शक होने के नाते आप लोगों ने हमारी सेनाओं का विश्‍वास और गौरव बढ़ाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। मैं आप सभी को और आपकी सेवाओं के लिए धन्‍यवाद देना चाहता हूं। 

सबसे पहले मैं अपने देश के लिए प्राणों की आहूति देने वालों को श्रद्धांजलि अर्पि‍त करना चाहता हूं। हम खासतौर से बेहद पीड़ा और दु:ख के साथ उन सैनिकों को याद करते है जो मुम्‍बई में पनडुब्‍बी दुर्घटना में मारे गये और हमारे वो सैनिक जो अपनी सीमाओं की रक्षा करने और आतंकवाद का मुकाबला करते हुए शहीद हो गए। हम अपने उन पायलटों और वायु सैनिकों का भी स्‍मरण करते हैं जिन्‍होंने उत्‍तराखंड में लोगों की जान बचाने के लिए अपने प्राण न्‍यौछावर कर दिए, हम उनके प्रति‍ कृतज्ञ है। साथ ही हम उन अनेक सैनिकों को भी याद करते हैं जिनके वीरतापूर्ण कारनामों की सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं हुई, लेकिन जिन्‍हें असह्य और प्रतिकूल माहौल में जोखिम उठाना पड़ा। उन्‍होंने भी देश की सेवा की। 

मित्रों मैं नहीं चाहता कि मेरा आज का भाषण रक्षा के क्षेत्र में हमारी पिछले वर्षों की उप‍लब्धियों की व्‍याख्‍या बने। उन सभी के बारे में आप सभी लोग पहले से ही जानते है। इसके बजाय मैं अपने आस-पास के माहौल पर ध्‍यान केन्द्रित करूंगा और मैं समझता हूं कि हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारी सशस्‍त्र सेनाएं इससे निपटने में पूरी तरह सक्षम हों। अपने पड़ोसियों के साथ सुरक्षा की अनोखी चुनौतियों की चर्चा करने से पहले मैं कुछ सामान्‍य बिंदुओं पर प्रकाश डालना चाहता हूं। 

सबसे पहले अगर आप पिछले दशक के वैश्विक सामरिक माहौल को देखें तो आप इस बात को नजरंदाज नहीं कर सकते कि जैसे-जैसे आर्थिक पेंडुलम पश्चिम से पूर्व की तरफ बढ़ रहा है वैसे-वैसे सामरिक महत्‍व की चीजों पर भी ध्‍यान केन्द्रित हो रहा है जैसा कि हमारे पूर्व के समुद्रों में बढ़ते विवाद और इस क्षेत्र में अमरीका द्वारा उससे संबंधित ''केंद्र बिन्‍दु'' या ''पुन:संतुलन'' का उदाहरण है। यह अनिश्चितता के साथ विकास है। हम अभी तक नहीं जानते कि ये आर्थिक और सामरिक संक्रमण शांतिपूर्ण होगा अथवा नहीं, लेकिन इस चुनौती का यहां मौजूद श्रोताओं को सामना करना होगा। 

दूसरा वैश्वीकरण एक ऐसा विषय है जिसका हमें हर क्षेत्र में सामना करना होगा। लेकिन यह नई अथवा शीत युद्ध के बाद की घटना नहीं है। हमें प्‍लीनी और रोमन साम्राज्‍य को याद करने की जरूरत है और यह सच्‍चाई है कि पूर्व से सिल्‍क और मसालों का आयात करने के लिए रोम के सम्राट के हाथ खाली हो गए थे। आज वैश्वीकरण की गति इंटरनेट सहित प्रौद्योगिकी से चलती है। 

हालांकि वैश्वीकरण ने आर्थिक और व्‍यापारिक मोर्चों पर देशों और नागरिकों के बीच आपस में निर्भरता को बढ़ा दिया है, उसने सुरक्षा के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्‍पर्धा और प्रतिद्वंद्विता पैदा की है। इन परस्‍पर विरोधी स्‍वरों का प्रबंधन, जिसे अमरीकी राष्‍ट्रीय सुरक्षा एजेंसी द्वारा बनाई गई, वैश्विक निगरानी कार्यविधि द्वारा उजागर किया गया है, हमारी शासन नीति के लिए अनिवार्य है। निश्चित रूप से हमारा उद्देश्‍य ठोस राष्‍ट्रीय क्षमता हासिल करना होना चाहिए, अथवा शब्‍दकोष में जिसे व्‍यापक राष्‍ट्रीय ताकत के रूप में परिभाषित किया गया है। यह आर्थिक, प्रौद्योगिकीय और औद्योगिक कौशल का मिश्रण है। 

तीसरा, आजादी के बाद पहले छ: दशकों में देश को अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा और देश तथा उसकी सेना हर मौके पर खरी उतरी। लोग भारतीय सेना की देशभक्ति और उसके पेशेवराना अंदाज का लोहा मानते हैं, लेकिन भारतीय सेना को आगे क्‍या करना है? हम शांति के रास्‍ते के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यदि सेना को किसी खतरे अथवा चुनौती का सामना करना पड़ता है तो वह भारतीय हितों की रक्षा करने में सक्षम होनी चाहिए। 

अब हम अपने पड़ोसियों की स्थिति पर आते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं कि हमें लगातार चुनौतियों को सामना करना पड़ेगा। पश्चिम एशिया में जारी उथल-पुथल ने न केवल हमारी ऊर्जा सुरक्षा और जीविका तथा 70 लाख भारतीय की सुरक्षा को प्रभावित किया है बल्कि कट्टरपंथ, आतंकवाद, हथियारों के प्रसार और सांप्रदायिक विवाद के लिए संकट बन गया है जो हमारे समुद्रों को छू सकता है। एशिया प्रशांत क्षेत्र जिसके साथ हमारे संबंध हर क्षेत्र में बढ़ रहे है, समान रूप से महत्‍वपूर्ण है। 

हमारे उच्‍च रक्षा संगठनों को इन विशेष घटनाक्रमों की तरफ खासतौर से ध्‍यान देना चाहिए। साथ ही हमारी सामरिक सीमाओं में वस्‍तुओं, ऊर्जा और खनिजों के वैश्विक समुद्री व्‍यापार, विश्‍वभर में पहले प्रवासी भारतीयों के कल्‍याण और भारत की राजधानी में बढ़ते वैश्विक पदचिन्‍हों की रक्षा करने की जरूरत है। जैसे-जैसे हमारी क्षमता बढ़ती जाएगी, हमारे सामने प्राकृतिक आपदाओं अथवा विवाद और अस्थिरता के क्षेत्रों में मदद का आह्वान बढ़ता जाएगा। इन स्थितियों से कैसे निपटा जाएगा यह कार्य आपके सामने है। मैं आपके सामने अपने कुछ विचार रखना चाहता हूं। 

मैं रक्षा मंत्रालय और सशस्‍त्र सेनाओं के साथ-साथ डीआरडीओ से आग्रह करता हूं कि वे इन अनुभवों को जोड़े और हमारी सरकार की पहल वाली विविध कार्यबल की रिपोर्टों की समीक्षा करे ताकि सैनिक सामानों के उत्‍पादन में स्‍वदेशी क्षमता का उच्‍च सूचकांक हासिल किया जा सके। काफी लंबे समय से हम निजी बनाम सार्वजनिक क्षेत्र के फायदे-नुकसान पर बहस कर रहे हैं। यह अधिक उपयोगी होगा यदि हम अपने सार्वजनिक क्षेत्र, निजी उद्यमों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं को पूरी ताकत देने के लिए औसत राष्‍ट्रीय क्षमता के संदर्भ में विचार करें ताकि उत्‍पादन, अनुसंधान और विकास के लिए सृजनात्‍मक और प्रभावी स्‍वदेशी आधार बनाए जा सके। हमें घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार तैयार करने के लिए अनुकूल अंतर्राष्‍ट्रीय माहौल का लाभ उठाना होगा। 

हमें उच्‍च रक्षा प्रबंधन के लिए सही ढांचा स्‍थापित करने के लिए तत्‍काल और ठोस प्रगति करने तथा निर्णय लेने में उचित नागरिक-सैनिक संतुलन बनाने की जरूरत है जो हमारे जटिल सुरक्षा माहौल की मांग है। एक बार फिर मैं आप लोगों को इस बात के लिए प्रोत्‍साहित करता हूं कि इसे सर्वोच्‍च पेशेवर महत्‍व दें, अलग-अलग सेवाओं के बीच वर्तमान मतभेदों को दूर करते हुए सामंजस्‍य स्‍थापित करे और भविष्‍य के लिए एक खाका तैयार करें। मैं आपको आश्‍वासन देना चाहता हूं कि राजनीतिक नेतृत्‍व द्वारा आपकी सिफारिशों पर सावधानीपूर्वक विचार किया जाएगा। 

दोनों मुद्दे जो मैंने अभी उठाएं वे हमारे समक्ष मंडरा रहे गंभीर संकट को देखते हुए प्रासंगिक है। सैनिक उपकरणों और सेनाओं में हमारा निवेश हमारे राष्‍ट्रीय संसाधनों से मेले खाता हुआ होना चाहिए। अधिकतर पिछले दशकों के दौरान, हमें 8 प्रतिशत की दर से औसत वार्षिक वृद्धि का लाभ मिला, लेकिन पिछले दो वर्षों में विकास की गति धीमी हुई है और हमें घटती-बढ़ती विनिमय दर और व्‍यापार के क्षेत्र में अड़चनों की संभावना सहित अनिश्चित अंतर्राष्‍ट्रीय आर्थिक माहौल का सामना करना पड़ रहा है। इसमें जरा भी संदेह नहीं है कि हम अपनी वर्तमान आर्थिक मंदी से उभर जाएंगे, लेकिन हमें अपनी रक्षा प्राप्ति योजनाओं में सावधानी बरतनी होगी तथा अपनी चादर के अनुसार ही अपने पैर पसारने होंगे। हमें अपने विरोधियों की क्षमताओं को भी ध्‍यान में रखना होगा, हमें सीमित संसाधन उपलब्‍धता को ध्‍यान में रखते हुए दीर्घकालिक लाभ योजना बनानी होगी। यह एक ऐसा कार्य है जिसे प्रा‍थमिकता के आधार पर करना होगा। 

हमारी सशस्‍त्र सेना के दिल में लोग बसते है। यह हमारी सेना की विशिष्‍ट मूल्‍य व्‍यवस्‍था है जो उसके मानवीय संसाधन को सुसंगति प्रदान करता है। जिस वैश्वीकरण और लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं का मैंने पहले जिक्र किया उसका हमारे अपने लोगों पर काफी प्रभाव पड़ा है। सेना भी इससे अछूती नहीं है, वरिष्‍ठ मार्गदर्शक होने के नाते वर्दी में अपने पुरूषों और महिलाओं के जीवन और कल्‍याण की जिम्‍मेदारी आपकी है। कंमाडर होने के नाते आपको र्इमानदारी से लेकर अलंघनीय सिद्धांतों का आत्‍मविश्‍लेषण करना होगा। उदाहरण प्रस्‍तुत करना होगा। मैं आप लोगों से आग्रह करूंगा कि उस पुरानी कहावत की तरफ गौर जिसमें किसी भी सेना के लिए मानव संसाधनों का प्रबंधन सर्वोच्‍च है। भारतीय सेना का उत्‍कृष्‍ट नाम है और आप लोगों से बेहतर कोई नहीं जानता कि किस तरह इसे चमकाया जा सकता है। 

हाल के समय में हमारे देश में नागरिक-सैनिक संबंधों की प्रकृति के बारे में चिंताएं उठाई गई है। मैं स्‍पष्‍ट तौर पर बता देना चाहता हूं कि भारत के राजनीतिक नेतृत्‍व को अपनी सेना और लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर उसके संस्‍थागत खरेपन पर पूरा भरोसा है। हमारी सेना की अराजनीतिक प्रकृति और उसका पेशेवराना अंदाज दुनिया के लिए ईर्ष्‍या पैदा करती है और इसने भारतीय लोकतांत्रिक अनुभव विकसित किया है। हमारे लोकतंत्र और संस्‍थानों ने किसी भी मुद्दे से निपटने में अपनी क्षमता साबित की है। 

मित्रों, मैं जानता हूं कि आप मेरी इस बात से सहमत होंगे कि हमारे देश की वास्‍तविक क्षमता राष्‍ट्रीय प्रयोजन की उत्‍तम उद्देश्‍यों से मिलती है। हमें अपनी अर्थव्‍यवस्‍था को उच्‍च विकास के रास्‍ते पर ले जाना होगा। हमें अपना औद्योगिक और विनिर्माण आधार विकसित करने की जरूरत है। हमें भारत में अविष्‍कारों की ताकत बढ़ानी होगी ताकि हम अपने सामने खड़ी चुनौतियों के नए समाधान ढूंढ सके। हमें अपने आर्थिक विकास को सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से अधिक समग्र, क्षेत्रीय दृष्टि से संतुलित और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ बनाना होगा। इन सबसे ऊपर हमें अपने मूल्‍यों को मजबूत बनाने की जरूरत है जो हमें लोकतंत्र, कानून के शासन व्‍यक्तिगत आजादी, सामाजिक और धार्मिक सौहार्द और वैश्विक शांति की परिभाषा देते हैं। 

मैं जानता हूं कि हमारी सशस्‍त्र सेनाएं इसी सिद्धांत के अनुरूप आचरण कर रही हैं और शेष दुनिया के लिए उदाहरण प्रस्‍तुत किया है। उनके पास जर्बदस्‍त ताकत है लेकिन उन्‍होंने परिपक्‍वता और जिम्‍मेदारी के साथ इसका उपयोग किया है। वे कठिन से कठिन मिशन के लिए तैयार है, लेकिन शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्‍होंने देश की रक्षा के लिए तूफानों, कड़ाके की ठंड और तपती गर्मी का बहादूरी से मुकाबला किया है, इसलिए भारत अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है। आने वाले हफ्तों और महीनों में हमारी सुरक्षा चुनौतियां कठिन बनी रहेंगी लेकिन हमारा संकल्‍प अडिग रहेगा। मुझे विश्‍वास है कि हमारी सशस्‍त्र सेनाएं झंडे और देश के प्रति अपनी सामूहिक जिम्‍मेदारी उत्‍साह और जोश से निभाएंगी, जो उनका पर्याय बन चुका है। मैं आपके प्रयासों में आप सभी की सफलता की कामना करता हूं। 

धन्‍यवाद, जय हिन्‍द 
***
वीके/केपी/एलडी-7101

Thursday, February 28, 2013

वित्‍त मंत्री श्री पी चिदंबरम के बजट भाषण का सार

28-फरवरी-2013 15:22 IST
उद्देश्‍य उच्‍च वृद्धिदर से समावेशी और टिकाऊ विकास हासिल करना
वित्‍त मंत्री श्री पी चिदंबरम ने कहा है कि वर्ष 2013-14 के आम बजट का उद्देश्‍य उच्‍च वृद्धिदर से समावेशी और टिकाऊ विकास हासिल करना है। इस मूल मंत्र के साथ वित्‍त मंत्री ने महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में आवंटन बढ़ाने और निवेश एवं बजट के लिए छूट देने तथा राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्‍पाद के 4.8 प्रतिशत तक बनाये रखने पर बल दिया है।
आज संसद में बजट प्रस्‍तुत करते हुए वित्‍त मंत्री ने आशा व्‍यक्‍त की कि वैश्विक आर्थिक वृद्धिदर में सुस्‍त रफ्तार के बावयजूद भारत उच्‍च आर्थिक वृद्धि हासिल करेगा।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार 2012-13 में राजकोषीय समेकन पर अमल करते हुए राजकोषीय घाटे को 5.2 प्रतिशत रखने में सफल रही है, लेकिन चालू खाते का घाटा बहुत चिंता की बात है, इसलिए विदेशी निवेश को प्रोत्‍साहन देने का प्रस्‍ताव किया गया है।

वित्‍त मंत्री पी. चिदबंरम ने आज संसद में वर्ष 2013-14 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य देख-भाल के समान ही मनुष्‍य का मूलभूत अधिकार है। राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक सरकार का एक आश्‍वासन है। इस विधेयक की संसद में शीघ्र ही पारित होने की उम्‍मीद है। राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत संभावित वृद्धि परक लागत के लिए खाद्य सब्सिडी हेतु सामान्‍य प्रावधान से अलग 10 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्‍त प्रावधान करने की भी उन्‍होंने घोषणा की है। 
वित्‍त मंत्री ने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्र में औसत वृद्धि दर 11वीं योजना के दौरान 3.6 प्रतिशत रही तथा वर्ष 2012-13 के कुल खाद्यान्‍न उत्‍पादन 250 मिलियन टन से अधिक होगा। कृषि उत्‍पाद के न्‍यूनतम समर्थन मूल्य बढ़़ाये गये है, जिससे किसानों ने अधिक उत्‍पादन किया है। आज देश दूध, दाल और जूट के क्षेत्र में विश्‍व का सबसे बड़ा उत्‍पादक है। अप्रैल से दिसंबर 2012 तक कृषि निर्यात 1,38,403 करोड़ रुपये से अधिक मूल्‍य का हुआ है। उन्होंने कृषि‍ मंत्रालय को 27,049 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्‍ताव किया है, जो चालू वर्ष के संशोधित अनुमान से 22 प्रतिशत अधिक है। वित्‍त मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि‍ इस राशि में से 3,415 करोड़ रुपये कृषि अनुसंधान के लिए दिये जाएंगे।
श्री चिदबंरम ने कहा कि कृषि ऋण कृषि उत्‍पादन की प्रमुख शक्ति है, इसलिए उन्‍होंने वर्ष 2012-13 के लिए निर्धारित 5,75,000 करोड़ रुपये के लक्ष्‍य को बढ़ाकर 7 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्‍ताव किया है। उन्‍होंने यह भी बताया कि लघु अ‍वधि के लिए फसली ऋणों के लिए ब्‍याज माफी योजना जारी रहेगी। समय पर ऋणों का भुगतान करने वाले किसानों को प्रति वर्ष 4 प्रतिशत की दर से ऋण प्रदान किये जाएंगे। अभी तक यह योजना सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा सहकारी बैंकों द्वारा दिये गये ऋणों पर लागू है, जिसके फायदे नि‍जी क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिये गये फसल ऋणों के लिए भी दिये जाने का भी उन्‍होंने प्रस्‍ताव किया है। 
वित्‍त मंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत में हरित क्रांति ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्‍त की है। उन्होंने 2013-14 में पूर्वी भारतीय राज्‍यों की सहायता के लिए 1,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्‍ताव किया है।  फसलों के विविधिकरण के लिए किसानों को प्रोत्‍साहित करने के‍ लिए 500 करोड़ रुपये, राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के लिए क्रमश: 9,954 करोड़ रुपये तथा 2,250 करोड़ रुपये प्रदान करने का भी उन्‍होंने प्रस्‍ताव किया है।
श्री चिदंबरम ने समेकित जलसंभरण कार्यक्रम के लिए 2012-13 के बजट अनुमान की राशि 3,050 करोड़ रुपये को बढ़ाकर 5,387 करोड़ रुपये के आवंटन का भी प्रस्‍ताव किया है। उन्‍होंने सूक्ष्म–पोषक तत्‍वों से संपन्‍न फसल की नई किस्मों की योजना को शुरू करने के लिए 200 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। वित्‍त मंत्री ने पौध संरक्षण मुद्दों के‍ लिए राष्‍ट्रीय जैव दबाव प्रबंधन संस्‍थान रामपुर छ‍तीसगढ़ में तथा भारतीय कृषि‍ जैव प्रौद्योगिकी संस्‍थान रांची झारखंड में स्‍थापित करने की भी घोषणा की है। केरल राज्‍य में नारियल के बागानों के पुन:रोपण तथा नवीकरण के लिए वर्ष 2013-14 में 75 करोड़ रुपये की अतिरिक्‍त राशि देने का भी प्रस्‍ताव किया है।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि कृषि उत्‍पादक कं‍पनी (एफपीसी) और कृषि उत्‍पादक संगठन (एफपीओ) की सहायता के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये का समतुल्य इक्विटी अनुदान दिया जाएगा, जिससे ये संगठन वित्‍तीय संस्‍थाओं से कार्यकारी पूंजी जुटाने में सक्षम हो जाएंगे। इस परियोजनाओं के लिए उन्‍होंने 50 करोड़ रुपये देने का प्रस्‍ताव किया है। इसके साथ-साथ 100 करोड़ रुपये की प्रारंभिक आधारभूत निधि के साथ लघु किसानों के कृषि व्‍यवसाय निगम में ऋण गारंटी निधि का भी सृजन किया जाएगा।
श्री चिदबंरम ने कहा कि निवेश जुटाने और स्‍थानीय कृषि-प्रास्थितिकी की स्थितियों और उत्‍पादकता बढ़ाने को ध्‍यान में रखते हुए 2013-14 में राष्‍ट्रीय पशु मिशन शुरू किया गया है। इस मिशन के लिए उन्‍होंने 307 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया है। उन्‍होंने यह भी बताया‍ कि दाना-चारे की उपलब्‍धता को बढ़ाने के लिए इसमें एक उपमिशन भी बनाया जाएगा।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि निवेश जुटाने और स्‍थानीय कृषि-प्रास्थितिकी की स्थितियों और उत्‍पादकता बढ़ाने को ध्‍यान में रखते हुए 2013-14 में राष्‍ट्रीय पशु मिशन शुरू किया गया है। इस मिशन के लिए उन्‍होंने 307 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया है। उन्‍होंने यह भी बताया‍ कि दाना-चारे की उपलब्‍धता को बढ़ाने के लिए इसमें एक उपमिशन भी बनाया जाएगा।
वित्त मंत्री श्री पी चिदम्बरम ने सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री चिदम्बरम ने कहा कि इस समय उच्च वित्तीय घाटे, विदेशी पूंजी पर निर्भरता, कम बचत और कम निवेश के कारण आर्थिक गुंजाइश निकालने में मुश्किल आ रही है। इसके साथ ही मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मौद्रिक नीति बनानी पड़ रही है। प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के कारण भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर जोर पड़ रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि विजय केलकर समिति की सिफारिशों को मानते हुए इस वर्ष वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 5.3 प्रतिशत तक और 2013-14 में 4.8 प्रतिशत तक रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उन्होंने कहा कि तेल के आयात पर निर्भरता, बड़ी मात्रा में कोयले के आयात, सोने के लिए हमारी ललक और निर्यात में गिरावट के चलते चालू खाता घाटा लगातार अधिक बना हुआ है। इस घाटे के वित्त पोषण के लिए हमें इस वर्ष और शायद अगले वर्ष भी 75 अरब अमरीकी डॉलर की आवश्यकता होगी। हमारे सामने केवल तीन रास्ते हैं- विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, विदेशी संस्थागत निवेश या विदेशी वाणिज्यिक ऋण। इसलिए मैं महसूस करता हूं कि विदेशी निवेश हमारे लिए लाज़मी है, लेकिन हमें अपने आर्थिक लक्ष्यों के अनुरूप ही विदेशी निवेश को बढ़ावा देना होगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि हमारे विकास के प्रयासों में मुद्रास्फीति एक और बड़ी बाधा है। कुछ मुद्रास्फीति बाहरी कारणों से है। मुद्रास्फीति के खिलाफ सभी मोर्चों पर लड़ाई लड़नी होगी। पिछले कुछ महीनों के हमारे प्रयासों से थोक मूल्य सूचकांक लगभग सात प्रतिशत तक आ गया है और मुख्य मुद्रास्फीति की दर 4.2 प्रतिशत तक आ गई है। लेकिन खाद्य मुद्रास्फीति अब भी चिंता का कारण बनी हुई है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के लिए आपूर्ति बढ़ाने के वास्ते हम सभी संभव कदम उठायेंगे।
वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने कहा है कि सरकारी खर्च से कुल मांग बढ़ती है और इसके अच्छे और बुरे परिणाम निकलते हैं। इसलिए सरकारी खर्च को उचित स्तर पर रखना जरूरी है। आज लोकसभा में अगले वित्त वर्ष का आम बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि 2012-13 के बजट में हमने कुछ कड़े उपाय किए और कुछ ऐसे नीतिगत फैसले लिए, जो लम्बे समय से रूके हुए थे। इससे कुछ आर्थिक गुंजाइश हासिल करने में मदद मिली, जिसका इस्तेमाल हमने यूपीए सरकार के सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए किया।
श्री चिदम्बरम ने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के पहले वर्ष 2012-13 में वैश्विक और घरेलू स्थिति में सुधार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कुल खर्च 14,90,925 करोड़ रूपए तक निश्चित किया गया था। मितव्ययता के उपायों से खर्च का संशोधित अनुमान 96 प्रतिशत यानी 14,30,825 करोड़ रूपए रखा गया। इससे जो आर्थिक गुंजाइश बनी, उससे हमें 2013-14 में और अधिक महत्वकांक्षी बनने का विश्वास पैदा हुआ है।
वित्त मंत्री ने कहा कि अगले वर्ष के बजट अनुमान में कुल खर्च 16,65,297 करोड़ रूपए का निश्चित किया गया है और योजना खर्च 5,55,322 करोड़ रूपए रखा गया है। 2013-14 का योजना खर्च चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान से 29.4 प्रतिशत अधिक है। इससे सभी फ्लैगशिप कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धनराशि रखी गई है। प्रत्येक मंत्रालय और विभाग को भी उनके खर्च की क्षमता के अनुसार पर्याप्त राशि दी गई है, जिसका सही प्रबंधन करके वे अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि महिलाओं, बच्चों, अल्पसंख्यकों तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों को लाभ पहुंचाने वाले कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धनराशि रखी गई है। अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए 41,561 करोड़ रूपए और जनजाति उपयोजना के लिए 24,598 करोड़ रूपए रखे गए हैं। यह राशि चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमानों से 31 प्रतिशत अधिक है। श्री चिदम्बरम ने इस बात को दोहराया कि इस राशि को किसी अन्य कार्यों में नहीं लगाया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में महिलाओं से संबंधित कार्यक्रमों के लिए बजट में 97,134 करोड़ रूपए और बच्चों के कार्यक्रमों के लिए 77,236 करोड़ रूपए रखे गए हैं। अकेली महिलाओं या विधवाओं सहित कमजोर वर्गों की महिलाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि वे सम्मान के साथ अपना गुजर-बसर कर सकें। इसके लिए शुरू में महिला और बाल विकास मंत्रालय को 200 करोड़ रूपए की अतिरिक्त राशि देने का प्रस्ताव है। मंत्रालय को इन महिलाओं के कल्याण से संबंधित योजनाएं बनानी चाहिएं।
श्री चिदम्बरम ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के लिए मैंने 3,511 करोड़ रूपए रखे हैं, जो चालू वर्ष के बजट अनुमान से 12 प्रतिशत और संशोधित अनुमान से 60 प्रतिशत अधिक हैं। मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा योजनाओं को लागू करता है और गैर-सरकारी संगठनों को आर्थिक सहायता देता है। इसकी 750 करोड़ रूपये की निधि को 12वीं योजना में बढ़ा कर 1500 करोड़ रूपए करने का उद्देश्य है। मेरा इस निधि के लिए 160 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव है। फाउंडेशन अपने कार्यक्रमों में चिकित्सा सहायता के कार्यक्रम को भी शामिल करना चाहता है। इसके लिए शिक्षा संस्थाओं में आवासीय डॉक्टर रखे जाएंगे। इस कार्यक्रम को शुरू करने के लिए मेरा 100 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव है।
विकलांग लोगों की सहायता के लिए वित्त मंत्री ने विकलांगता मामलों के विभाग के लिए 110 करोड़ रूपए की राशि देने का प्रस्ताव किया। चालू वित्त वर्ष में संशोधित अनुमानों के अनुसार यह राशि 75 करोड़ रूपए है। 
वित्त मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय को मेरा 37,330 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव है। इसमें से 21,239 करोड़ रूपए नए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए होंगे, जिसमें ग्रामीण मिशन और प्रस्तावित शहरी मिशन दोनों शामिल हैं। यह राशि चालू वर्ष के संशोधित अनुमान से 24.3 प्रतिशत अधिक है।
वित्त मंत्री ने चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए 4,727 करोड़ रूपए राशि देने का प्रस्ताव किया।
श्री चिदम्बरम ने कहा कि बुजुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल के राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए 150 करोड़ रूपए रखे गए हैं। यह कार्यक्रम 21 राज्यों के 100 जिलों में चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत आठ जरा चिकित्सा केन्द्र चलाए जा रहे हैं।
आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी को बढ़ावा देने के लिए श्री चिदम्बरम ने आयुष विभाग को 1,069 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव रखा।
श्री चिदम्बरम ने कहा कि एम्स जैसे छह संस्थानों में सितंबर, 2012 से शिक्षा सत्र शुरू हो गए हैं। इन संस्थानों में अगले वर्ष अस्पताल बनाने होंगे, जिनके लिए मेरा 1650 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव है।
शिक्षा को सरकार की उच्च प्राथमिकता बताते हुए वित्त मंत्री ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के लिए 65,867 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि सर्वशिक्षा अभियान और शिक्षा का अधिकार कानून जोरों से लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने अगले वर्ष सर्वशिक्षा अभियान के लिए 27,258 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव रखा। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के लिए भी उन्होंने 3,983 करोड़ रूपए देने की बात कही, जो चालू वर्ष के संशोधित अनुमान से 25.6 प्रतिशत अधिक है।
वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2013-14 में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यक वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्तियां देने के लिए विभिन्न मंत्रालयों को 5,284 करोड़ रूपए दिए जा रहे हैं। चालू वर्ष के संशोधित अनुमानों में यह राशि 4,575 करोड़ रूपए थी। मिड डे मील के लिए 13,215 करोड़ रूपए रखे गए हैं। श्री चिदम्बरम ने नालंदा विश्वविद्यालय को शिक्षा के एक उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में विकसित करने के बारे में भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
श्री चिदम्बरम ने 2012-13 में समन्वित बाल विकास योजना की पूरी राशि 15,850 करोड़ रूपए खर्च करने की सराहना की। अगले वर्ष के उन्होंने इस योजना के लिए 17,700 करोड़ रूपए देने की घोषणा की।
वित्त मंत्री ने कहा कि माताओं और शिशुओं में कुपोषण की स्थिति में सुधार के लिए पिछले वर्ष घोषणा की गई थी कि 2013-14 में देश के 100 जिलों में एक बहुक्षेत्रीय कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिसके लिए उन्होंने 300 करोड़ रूपए देने की घोषणा की। इससे अगले वर्ष यह कार्यक्रम 200 जिलों में लागू किया जाएगा।
वित्‍त मंत्री श्री पी. चिदम्‍बरम ने देश में निवेश बढ़ाने के उद्देश्‍य से कई उपायों की घोषणा की। श्री चिदम्‍बरम ने कहा कि अवसंरचना क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए अवसंरचना ऋण निधि (आईडीएफ) को प्रोत्‍साहित किया जायेगा। उन्‍होंने कहा कि अब तक सेबी में चार आईडीएफ को पंजीकृत कर लिया गया है और इनमें से दो ने फरवरी, 2013 से अपना काम शुरू कर दिया है। वित्‍त मंत्री ने कहा कि एशियाई विकास बैंक की सहभागिता में भारतीय अवसंरचना वित्‍त निगम लिमिटेड (आईआईएफसीएल) ने ब्रांड मार्केट में दीर्घावधि निधियों के दोहन हेतु अवसंरचना कंपनियों को अधिक ऋण प्रदान करेगा।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार ने सड़क निर्माण के क्षेत्र में एक विनियामक प्राधिकरण गठित करने का निर्णय लिया है। उन्‍होंने कहा कि हालांकि सड़क निर्माण क्षेत्र परिपक्‍वता के एक स्‍तर पर पहुंच गया है किंतु इस क्षेत्र में वित्‍तीय दबावों, बढ़े हुए निर्माण संबंधी जोखिमों तथा प्रबंधन मामलों की देख-रेख के लिए एक स्‍वतंत्र प्राधिकरण की आवश्‍यकता महसूस हुई। उन्‍होंने कहा कि सड़क परियोजनाओं की अड़चनों को दूर कर दिया गया है और गुजरात, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान और उत्‍तर प्रदेश में 3,000 किलोमीटर की सड़क परियोजनाओं को वर्ष 2013-14 की पहली छमाही में अधिनिर्णित कर दिया जायेगा।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि बचत वृद्धि और उत्‍पादक गतिविधियों में उसके आबंटन से तीव्र आर्थिक वृद्धि का मार्ग प्रशस्‍त होता है। वित्‍त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2007-08 में 36.8 प्रतिशत के उच्‍च अनुपात के साथ सकल घरेलू बचत 2011-12 में घटकर छह प्रतिशत के नीचे आ गई। उन्‍होंने कहा कि निजी क्षेत्र की और निगम क्षेत्र ही बचत के बचत के मुख्‍य अंशदाता है। अत: निश्चित तौर पर उन्‍हें बचत के लिए प्रोत्‍साहित किया जाना चाहिए।
वित्‍त मंत्री ने राजीव गांधी इक्विटी बचत स्‍कीम को उदारीकृत करने का प्रस्‍ताव किया, जिसमें पहली बार निवेशक को म्‍यूचुअल फंडों में तथा सूचीबद्ध शेयरों में निवेश करने की अनुमति होगी। आय सीमा 10 लाख रूपये से बढ़ाकर 12 लाख रूपये कर दी जायेगी।
श्री चिदम्‍बरम ने कहा कि किसी बैंक या गृह वित्‍त पोषण निगम से पहली अप्रैल, 2013 से लेकर 31 मार्च, 2014 की अवधि के दौरान अपने पहले घर के लिए 25 लाख रूपये गृह ऋण लेने वाला व्‍यक्ति 2014-15 में एक लाख रूपये तक ब्‍याज कटौती का हकदार होगा और यदि यह सीमा पूरी नहीं होती है तो शेष आकलन वर्ष 2015-16 में लागू होगी।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि लेह-कारगिल क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में सुधार लाने के लिए तथा लद्दाख क्षेत्र को उत्‍तरी ग्रिड से जोड़ने के लिए सरकार 1,840 करोड़ रूपये की लागत पर श्रीनगर से लेह तक एक ट्रांसमिसन लाईन का निर्माण कर रही है। श्री चिदम्‍बरम ने इस परियोजना के लिए वर्ष 2013-14 में 226 करोड़ रूपये प्रदान करने का प्रस्‍ताव किया।
श्री चिदम्‍बरम ने कहा कि तेल और गैस के क्षेत्र में लाभ वितरण से राजस्‍व वितरण संविदाओं की तरफ बढ़ते हुए तेल और गैस दोहन नीति की पुन: समीक्षा की जायेगी। उन्‍होंने कहा कि तेल और गैस के दोहन और उत्‍पादन को बढ़ावा देने के लिए एक नीति की घोषणा की जायेगी। उन्‍होंने कहा कि प्राकृतिक गैस मूल्‍य निर्धारण की समीक्षा की जायेगी और इसके मूल्‍य निर्धा‍रण से जुड़़ी अनिश्चितओं को दूर किया जायेगा।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि एनईएलपी ब्‍लॉक जिनका अधिग्रहण किया गया, किंतु कार्यांवित नहीं हो सके उन्‍हें क्‍लीयर किया जायेगा। श्री चिदम्‍बरम ने कहा कि महाराष्‍ट्र में पांच एमएमटीपीए एलएनजी टर्मिनल वर्ष 2013-14 में पूरी तरह से चालू हो जायेगा।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि नौकरियों, उत्‍पादक और निर्यात में सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यमों की बहुत बड़ी भूमिका हैं। इनमें से कई उद्यम छोटे और मध्‍यम हैसियत से जुड़े लाभों को खोने के डर से और आगे तरक्‍की नहीं कर पाते हैं। वित्‍त मंत्री ने उन्‍हें बढ़ने के लिए प्रोत्‍साहित करने के उद्देश्‍य से यह प्रस्‍ताव किया कि जिस श्रेणी में उन्‍हें लाभ मिलता है, उस श्रेणी से आगे बढ़ने के बावजूद अगले तीन वर्षों तक उन्‍हें यह लाभ मिलता रहे। श्री चिदम्‍बरम ने अपने प्रस्‍ताव में बताया कि एमएसएमई, कलस्‍टर विकास कार्यक्रम, ऋण गारंटी विकास कोष, ऋण से जुड़ी पूंजी सब्सिडी स्‍कीम, राष्‍ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्‍पर्धा कार्यक्रम तथा गुणवत्‍ता उन्‍नयन के लिए प्रोत्‍साहन एमएसएमई की एमई इकाईयों को तब तक उपलब्‍ध करायें जब तक कि वे इससे उंची श्रेणी में न पहुंच जायें।
श्री चिदम्‍बरम ने सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यमों को अधिक सहायता मुहैया कराने के लिए सीडबी की वित्‍तपोषण क्षमता को प्रतिवर्ष 5,000 करोड़ रूपये के मौजूदा स्‍तर से बढ़ाकर 10,000 करोड़ रूपये करने का प्रस्‍ताव किया।
वित्‍त मंत्री ने पूंजी निर्माण के लिए बैंकों को 2013-14 में 14,000 करोड़ रुपये देने का प्रस्‍ताव किया। उन्‍होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा बासिल-3 विनियमावली का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।श्री चिदंबरम ने कहा कि मार्च 2013 की समाप्ति से पहले सार्वजनिक क्षेत्र के 13 बैंकों को 12,517 करोड़ रुपये की अतिरिक्‍त पूंजी दी जाएगी।
श्री चिदंबरम ने वित्‍त मंत्रालय में विशेषज्ञों की स्‍थायी परिषद के गठन का प्रस्‍ताव किया जो भारतीय वित्‍तीय क्षेत्र की अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतिस्पर्द्धात्‍मकता का विश्‍लेषण करे और भारतीय बाजार में व्‍यापार करने की लेनदेन की लागतों की समय-समय पर जांच करे तथा आवश्‍यक कारर्वाई के लिए सरकार को जानकारी दे।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सभी शाखाओं में 31 मार्च 2014 तक एटीएम सुविधा उपलब्‍ध कराई जाएगी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के रूप में भारत के पहले महिला बैंक की स्‍थापना का प्रस्‍ताव किया। प्रारंभिक पूंजी के रूप में इस पर 1,000 करोड़ रुपये के व्‍यय का प्रावधान किया जाएगा। 2013-14 में ग्रामीण आवास निधि को 6,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। राष्‍ट्रीय आवास बैंक  से शहरी आवास निधि की स्‍थापना के लिए कहा गया है और 2013-14 में इस निधि में 2,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
वित्‍त मंत्री ने हुए जीवन और साधारण दोनों तरह के बीमा के प्रसार में वृद्धि के लिए बहु-स्‍तरीय द़ृष्टिकोण अपनाने का प्रस्‍ताव किया। उन्‍होंने कहा कि आईआरडीए के पूर्व अनुमोदन के बिना टीयर-2 शहर और इससे नीचे के शहरों में शाखाएं खोलकर बीमा कंपनियों को अधिकारिता देने को अंतिम रूप दिया गया है। बीमा पालिसी प्राप्‍त करने के लिए बैंकों का केवाईसी पर्याप्‍त होगा। बैंको को बीमा ब्रोकरों के रूप में काम करने की अनुमति दी गई है। 
श्री चिदंबरम ने कहा 10,000 या उससे अधिक आबादी वाले प्रत्‍येक कस्‍बे में भारतीय जीवन बीमा निगम-एलआईसी का एक कार्यालय खोला जाएगा तथा सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनी का कम से कम एक कार्यालय होगा।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना अन्‍य श्रेणियों जैसे रिक्‍शा चालकों, ऑटोरिक्‍शा चालकों, टैक्‍सी चालकों, सफाई कामगारों, कूड़ा बीनने वालों और खान कामगारों को प्रदान की जाएगी। उन्‍होंने कहा कि विभिन्‍न निर्गमों में विलय को आसान बनाकर असंगठित क्षेत्र के लिए समेकित सामाजिक सुरक्षा पैकेज तैयार किया जाएगा।
श्री पी चिदंबरम ने कहा कि विनियामक को सुदृढ़ बनाने के लिए सेबी अधिनियम में संशोधन करने का प्रस्‍ताव है। उन्‍होंने कहा कि सेबी की सिफारिश के अनुसार कई प्रस्‍तावों को अंतिम रूप दि‍या गया है । सेबी द्वारा प्राधि‍कृत नामि‍त नि‍क्षेपागार भागीदार वि‍भि‍न्‍न पोर्टफोलि‍यों नि‍वेशकों को केवाईसी दि‍शा नि‍र्देशों के अनुपालन के अधीन पंजीकृत कर सकते हैं । सेबी वि‍देशी पोर्टफोलि‍यो नि‍वेशकों के प्रवेश के लि‍ए प्रक्रि‍याओं को सरल बनायेगा और एक समान पंजीकरण व अन्‍य मानदण्‍ड नि‍र्धारि‍त करेगा ।
वित्‍त मंत्री श्री पी चिदंबरम ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई उपायों का प्रस्‍ताव किया। उन्‍होंने कहा कि भारत में प्रतिदिन कई हजार टन कचरा निकलता है। नगरों और नगरपालिकाओं को इस बात के लिए प्रोत्‍साहित किया जाएगा वे कचरे से बिजली बनाने की परियोजनाओं पर ध्‍यान दें। वित्‍त मंत्री ने कहा कि अपशिष्‍ट से ऊर्जा बनाने की परियोजनाओं को लागू करने वाली नगरपालिकाओं को सहायता दी जाएगी।
श्री चिंदबरम ने कहा कि सरकार स्‍वच्‍छ ऊर्जा निधि (एनसीईएफ) से इरेडा को कम ब्‍याज वाली निधियां उपलब्‍ध कराएगी जो आगे व्‍यवहार्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को उधार देगा।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि पन बिजली परियोजनाओं के लिए सृजन आधारित प्रोत्‍साहन फिर शुरू किया गया है और इसके लिए 800 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि पिछड़ेपन के निर्धारण के लिए नया मानदंड  बनाया जाएगा और उन्‍हें भविष्‍य की योजना बनाने एवं निधियों के अंतरण में प्रतिबिंबित किया जाएगा।
श्री चिदंबरम ने कहा कि वर्ष 2013-14 में 90 लाख व्‍यक्तियों सहित 12वीं योजना में 5 करोड़ लोगों को कौशल प्रदान करने का लक्ष्‍य है। इसके लिए सभी बाधाएं दूर की जाएंगी। इसके वास्‍ते निधियां राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और राष्‍ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से जारी की जाएंगी।
वित्‍त मंत्री ने रक्षा के लिए आवंटन पूंजी व्‍यय के लिए 86,741 करोड़ रुपये सहित बढ़ाकर  2,033,672 करोड़ रुपये किया गया है। 4 उत्‍कृष्‍ट संस्‍थाओं में से प्रत्‍येक को 100 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में नई खोज करने वाले संगठनों और जनता को आवश्‍यक उत्‍पाद उपलब्‍ध कराने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि सभी खेलों को सरकारी सहायता की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि हमारे पास अनेक पुरुष और महिला खिलाड़ी हैं लेकिन प्रशिक्षकों की कमी है। इसलिए तीन वर्ष की अवधि के दौरान 250 करोड़ रुपये की लागत से पटियाला में राष्‍ट्रीय खेल प्रशिक्षण संस्‍थान का निर्माण करने का प्रस्‍ताव है।
श्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार का 294 और शहरों में निजी एफएम रेडियो की सेवाएं पहुंचाने का प्रस्‍ताव है। उन्‍होंने कहा कि वर्ष 2013-14 में करीब 839 नए एफएम चैनलों की नीलामी की जाएगी। नीलामी के बाद एक लाख से अधिक आबादी वाले सभी शहरों में निजी एफएम रेडियो सेवाएं उपलब्‍ध हो जाएंगी।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि वर्तमान वर्ष में राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान 50 करोड़ रुपये के सामान्‍य आवंटन के साथ आरंभ किया गया था। पंचायती राज संस्‍थाओं में क्षमता निर्माण की महत्‍ता को ध्‍यान में रखते हुए 2013-14 में पंचायती राज मंत्रालय के लिए 455 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसके अलावा 200 करोड़ रुपये देने का प्रस्‍ताव किया गया है।
श्री चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने 4,909 करोड़ रुपये की लागत पर डाक नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी प्रेरित महत्‍वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। डाकघर बुनियादी बैंकिंग समाधान का हिस्‍सा बन जाएंगे और साथ-साथ बैंकिंग सेवाएं भी प्रदान करेंगे। वित्‍त मंत्री ने 2013-14 में इस परियोजना के लिए 532 करोड़ रुपये देने का प्रस्‍ताव किया है।
वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार गदर आंदोलन की शताब्‍दी मनाने के लिए सरकार सेन-फ्रांसिस्‍को में गदर स्‍मारक को संग्रहालय एवं पुस्‍तकालय में बदलने के लिए धनराशि देगी।

वित्‍त मंत्री ने पचास लाख रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों के हस्‍तांतरण मूल्‍य पर एक प्रतिशत की दर से टीडीएस का प्रस्‍ताव किया है। श्री चिदम्‍बरम ने कहा कि यह प्रस्‍ताव कृषि भूमि पर लागू नहीं होगा।
उन्‍होंने कहा कि अचल संपत्तियों में होने वाले लेनदेन का मूल्‍यांकन और रिपोर्टिंग आमतौर पर कम की जाती है। आधे मामलों में संबंधित पक्षों के पैन नम्‍बर भी नहीं दिये जाते। वित्‍त मंत्री ने कहा कि ऐसे लेनदेनों की जानकारी और पूंजी अभिलाभों में सुधार के मद्देनजर टीडीएस को लागू करने का प्रस्‍ताव किया गया है।
वित्‍त मंत्री ने प्रति वर्ष एक करोड़ रुपये से अधिक की कर योग्‍य आय वाले व्‍यक्तियों पर दस प्रतिशत का अधिभार लगाने का प्रस्‍ताव किया है। उन्‍होंने कहा कि ये अधिभार व्‍यष्टियों, हिंदु अविभक्‍त कुटुम्‍बों और समान कर स्थिति वाली फर्मों और संगठनों पर लागू होगा। श्री चिदम्‍बरम ने कहा कि मात्र 42,800 व्‍यक्ति ऐसे हैं, जिन्‍होंने प्रति वर्ष एक करोड़ से अधिक की कर-योग्‍य आय स्‍वीकार की है।
वित्‍त मंत्री ने पांच लाख रुपये तक की कुल आय वाले प्रत्‍येक व्‍यक्ति को दो हजार रुपये की कर छूट का प्रस्‍ताव किया है। श्री चिदम्‍बरम ने उम्‍मीद जताई कि इससे 1.8 करोड़ करदाताओं को 3,600 करोड़ रुपये का लाभ होगा।
     उन्‍होंने कहा हालांकि मौजूदा स्‍लैब पिछले वर्ष ही शुरू किये गए हैं, इसलिए इनकी दरों को संशोधित करने की आवश्‍यकता नहीं है। उन्‍होंने कहा कि प्रारंभिक छूट स्‍तर में मामूली सी वृद्धि से कई सौ हजार करदाता कर दायरे से बाहर हो जाएंगे और कर का आधार काफी घट जाएगा। श्री चिदम्‍बरम ने कहा इसके बावजूद भी वे दो लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक की प्रथम स्‍लैब करदाताओं को कुछ राहत देना चाहते हैं। (PIB)
***

मीणा/राजगोपाल/प्रदीप/ सुधीर/संजीव/इन्‍द्रपाल/बि‍ष्‍ट/ शदीद/सुनील/शौकत/मनोज- 779

Saturday, January 26, 2013

64वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर

25-जनवरी-2013 19:43 IST
भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का राष्ट्र के नाम संदेश
भारत में पिछले छह दशकों के दौरान,छह सदियों से अधिक बदलाव
64वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर राष्‍ट्र के नाम संदेश का मूल पाठ इस प्रकार है:-
मेरे प्यारे देशवासियो :
चौंसठवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मैं भारत में और विदेशों में बसे आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। मैं अपनी सशस्त्र सेनाओं, अर्ध सैनिक बलों और आंतरिक सुरक्षा बलों को विशेष बधाई देता हूं।
भारत में पिछले छह दशकों के दौरान, पिछली छह सदियों से अधिक बदलाव आया है। यह न तो अचानक हुआ है और न ही दैवयोग से; इतिहास की गति में बदलाव तब आता है जब उसे स्वप्न का स्पर्श मिलता है। उपनिवेशवाद की राख से एक नए भारत के सृजन का महान सपना 1947 में ऐतिहासिक उत्कर्ष पर पहुंचा, और इससे अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह हुई कि स्वतंत्रता से राष्ट्र-निर्माण की नाटकीय कथा की शुरुआत हुई। इसकी आधारशिला, 26 जनवरी, 1950 को अंगीकृत हमारे संविधान के द्वारा रखी गई थी, जिसे हम प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। इसका प्रेरक सिद्धांत था, राज्य और नागरिक के बीच एक सहमति अर्थात न्याय, स्वतंत्रता तथा समानता के द्वारा पोषित सशक्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी।
भारत ने अंग्रेजों से स्वतंत्रता इसलिए नहीं ली थी कि वह भारतीयों को आजादी से वंचित रखे। संविधान दूसरी आजादी का प्रतीक था और यह आजादी थी लिंग, जाति, समुदाय की गैर-बराबरी की घुटन से और उन दूसरी प्रकार की बेड़ियों से, जो हमें बहुत समय से जकड़े हुए थी।

इसने ऐसे क्रांतिकारी उद्विकास को प्रेरणा दी जिसने भारतीय समाज को आधुनिकता के मार्ग पर आगे बढ़ाया : समाज में क्रमिक उद्विकास के द्वारा बदलाव आया, क्योंकि हिंसक क्रांति भारतीय परिपाटी नहीं है। जटिल सामाजिक ताने-बाने में बदलाव पर अभी कार्य जारी है, और इसको कानून में समय-समय पर आने वाले सुधारों और जनमत की शक्ति से प्रेरणा मिलती रही है।

पिछले छह दशकों में ऐसा बहुत कुछ हुआ है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं। हमारी आर्थिक विकास दर तीन गुना से अधिक हो गई है। साक्षरता की दर में चार गुना से अधिक वृद्धि हुई है। खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के बाद अब हम खाद्यान्न के निर्यातक हैं। गरीबी की मात्रा में काफी कमी लाई गई है।  हमारी एक अन्य महत्त्वपूर्ण उपलब्धि लैंगिक समानता की दिशा में हमारा प्रयास है।

ऐसा किसी ने नहीं कहा कि यह कार्य आसान होगा। 1955 में अधिनियमित हिंदू संहिता विधेयक, जैसी पहली बड़ी कोशिश में जो समस्याएं आई थी, उनकी अलग कहानी है। यह महत्त्वपूर्ण कानून जवाहर लाल नेहरू तथा बाबा साहेब अंबेडकर जैसे नेताओं की अविचल प्रतिबद्धता से ही पारित हो पाया था। जवाहरलाल नेहरू ने बाद में इसे अपने जीवन की संभवत: सबसे बड़ी उपलब्धि बताया था। अब समय आ गया है कि हर-एक भारतीय महिला के लिए लैंगिक समानता सुनिश्चित की जाए। हम न तो इस राष्ट्रीय दायित्व से बच सकते हैं और न ही इसे छोड़ सकते हैं क्योंकि इसे नजरअंदाज करने की बहुत भारी कीमत चुकानी होगी। निहित स्वार्थ आसानी से हार नहीं मानते। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए सिविल समाज तथा सरकार को मिल-जुलकर प्रयास करने होंगे।

प्यारे देशवासियो :
मैं आपको ऐसे समय पर संबोधित कर रहा हूं जब एक बहुत व्यापक त्रासदी ने हमारे प्रमाद को झकझोर डाला है। एक नव-युवती के नृशंस बलात्कार और हत्या ने, एक ऐसी महिला जो कि उदीयमान भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक थी, हमारे हृदयों को रिक्तता से तथा हमारे मनों को क्षोभ से भर दिया है। हमने एक जान से कहीं अधिक कुछ खोया है; हमने एक सपना खो दिया है। यदि आज हमारे युवा क्षुब्ध हैं तो क्या हम अपने युवाओं को दोष दे सकते हैं?

देश का एक कानून है। परंतु उससे ऊंचा भी एक कानून है। महिला की पवित्रता भारतीय सभ्यता नामक समग्र दर्शन का नीति निर्देशक सिद्धांत है। वेद कहते हैं कि माता एक से अधिक हो सकती हैं; जन्मदात्री, गुरुपत्नी, राजा की पत्नी, पुजारी की पत्नी, हमें दूध पिलाने वाली और हमारी मातृभूमि। मां हमें बुराई और दमन से बचाती है, हमारे लिए जीवन और समृद्धि का प्रतीक है। जब हम किसी महिला के साथ पाशविकता करते हैं तो अपनी सभ्यता की आत्मा को लहुलुहान कर डालते हैं।

देश को अपनी नैतिक दिशा को फिर से निर्धारित करने का समय आ गया है। निराशावादिता को बढ़ावा देने के लिए कोई अवसर नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि निराशावाद नैतिकता को अनदेखा करता है। हमें अपनी अंतरात्मा में गहराई से झांकना होगा और यह पता लगाना होगा कि हमसे कहां चूक हुई है। समस्याओं का समाधान विचार-विमर्श तथा नजरियों में तालमेल से ढूंढ़ना होगा। लोगों को यह विश्वास होना चाहिए कि शासन भलाई का एक माध्यम है और इसके लिए हमें सुशासन सुनिश्चित करना होगा।

प्यारे देशवासियो :
हम दूसरे पीढ़ीगत बदलाव के मुहाने पर हैं; गांवों और कस्बों में फैले हुए युवा इस बदलाव के अग्रेता हैं। आने वाला समय उनका है। वे आज अस्तित्व संबंधी बहुत सी शंकाओं से ग्रस्त हैं। क्या तंत्र योग्यता को समुचित सम्मान देता है। क्या समर्थवान लालच में पड़कर अपना धर्म भूल चुके हैं। क्या सार्वजनिक जीवन में नैतिकता पर भ्रष्टाचार हावी हो गया है। क्या हमारी विधायिका उदीयमान भारत का प्रतिनिधित्व करती है या फिर इसमें आमूल-चूल सुधारों की जरूरत है। इन शंकाओं को दूर करना होगा। चुने हुए प्रतिनिधियों को जनता का विश्वास फिर से जीतना होगा। युवाओं की आशंका और उनकी बेचैनी को, तेजी से, गरिमापूर्ण तथा व्यवस्थित ढंग से बदलाव के कार्य पर लगाना होगा।

युवा खाली पेट सपना नहीं देख सकते। उनके पास अपनी और राष्ट्र की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए रोजगार होना चाहिए। यह सच है कि हमने 1947 के बाद एक लम्बा रास्ता तय किया है, जब हमारे प्रथम बजट का राजस्व मात्र 171 करोड़ रुपये था। आज केन्द्र सरकार के संसाधन उस बूंद की तुलना में एक महासागर के समान हैं। परंतु हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कहीं आर्थिक विकास से प्राप्त लाभ पर, पिरामिड के शिखर पर बैठे भाग्यशाली लोगों का ही एकाधिकार न हो जाए। धन के सृजन का बुनियादी उद्देश्य हमारी बढ़ती जनसंख्या से भुखमरी, निर्धनता और अल्प आजीविका की बुराई को जड़ से खत्म करना होना चाहिए।

प्यारे देशवासियो :
पिछला वर्ष हम सभी के लिए परीक्षा का वर्ष रहा है। आर्थिक सुधारों के पथ पर अग्रसर होते हुए, हमें बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं की वर्तमान समस्याओं के प्रति जागरूक रहना होगा। बहुत से धनी राष्ट्र अब सामाजिक दायित्व रहित अधिकार की संस्कृति के जाल में फंस गए हैं; हमें इस जाल से बचना होगा। हमारी नीतियों के परिणाम हमारे गांवों, खेतों, फैक्ट्रियों तथा स्कूलों और अस्पतालों में दिखाई देने चाहिए।

आंकड़ों का उन लोगों के लिए कोई अर्थ नहीं होता जिन्हें उनसे लाभ नहीं पहुंचता। हमें तत्काल काम में लगना होगा अन्यथा, वर्तमान में जिन अशांत इलाकों का प्राय: ‘नक्सलवादी’ हिंसा के रूप में उल्लेख किया जाता है उनमें और अधिक खतरनाक ढंग से विस्तार हो सकता है।

प्यारे देशवासियो :
अभी पिछले दिनों, नियंत्रण रेखा पर हमारे सैनिकों पर गंभीर नृशंसता के मामले सामने आए हैं। पड़ोसियों में मतभेद हो सकते हैं; सीमाओं पर तनाव एक सामान्य स्थिति हो सकती है। परंतु राज्य से इतर तत्त्वों के माध्यम से प्रायोजित आतंकवाद समूचे राष्ट्र के लिए भारी चिंता का विषय है। सीमा पर शांति में हमारा विश्वास है और हम सदैव दोस्ती की उम्मीद में हाथ बढ़ाने के लिए तैयार हैं। परंतु इस हाथ को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
प्यारे देशवासियो :
भारत की सबसे अजेय सम्पत्ति है उसका खुद में विश्वास। हमारे लिए प्रत्येक चुनौती, अभूतपूर्व आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता हासिल करने के हमारे सकंल्प को मजबूत बनाने का अवसर बन जाती है। इस संकल्प को, खासकर बेहतर और व्यापक शिक्षा पर भारी निवेश के द्वारा, मजबूत बनाना होगा। शिक्षा ऐसी सीढ़ी है, जो सबसे निचले पायदान पर मौजूद व्यक्तियों को व्यावसायिक और सामाजिक प्रतिष्ठा के शिखर पर पहुँचा सकती है। शिक्षा ऐसा मंत्र है जो हमारे आर्थिक भाग्य को बदल सकता है और ऐसी दरारों को पाट सकता है जो समाज में असमानता पैदा करती हैं। अभी तक शिक्षा की यह सीढ़ी, अपेक्षित स्तर तक, उन लोगों तक नहीं पहुंची है जिनको इसकी सबसे अधिक जरूरत है। भारत द्वारा वर्तमान वंचितों को, आर्थिक विकास के बहुत से उपादानों में बदल कर अपनी विकास दर को दोगुना किया जा सकता है।

हमारे चौंसठवें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यद्यपि चिंता का कोई कारण हो सकता है परंतु हताशा का कोई नहीं। यदि भारत में छह दशकों में पिछली छह सदियों के मुकाबले अधिक बदलाव आया है तो मैं आपसे वायदा करता हूं कि इसमें अगले दस वर्षों में, पिछले साठ वर्षों से ज्यादा बदलाव आएगा। भारत की शाश्वत जिजीविषा जागृत है।

अंग्रेजों को भी यह लगा था कि वे एक ऐसा देश छोड़कर जा रहे हैं जो उससे बहुत अलग है जिस पर उन्होंने आधिपत्य किया था। राष्‍ट्रपति भवन स्थित जयपुर स्तंभ की आधारशिला पर एक शिलालेख है :-

‘‘विचारों में आस्था... शब्दों में प्रज्ञा...
 कर्म में पराक्रम...
 जीवन में सेवा...
 अत: भारत महान बने’’
भारत की भावना प्रस्तर में उत्कीर्ण है।

जय हिंद!

                             ****       64वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर
मीणा/वि. कासोटिया/कविता/सुनील-327