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Tuesday, September 03, 2013

फिर हुआ इश्मीत सिंह की मौजूदगी का अहसास

गीत-संगीत और आवाज़ के जादू से लौट आया गुज़रा हुआ समय 
                                                                                                             Courtesy photo
लुधियाना, 3 सितंबर 2013:(पंजाब स्क्रीन): मौत ने तो इश्मीत को छीन ही लिया था पर उसकी आवाज़ अब भी उसे हमारे दरम्यान रखे हुए है।एक बकार फिर यह अहसास हुआ वॉयस ऑफ इंडिया के विनर रहे स्वर्गीय इशमीत सिंह के 25वें जन्मदिवस के मौके पर जब राजगुरु नगर स्थित इशमीत सिंह म्युजिक इंस्टीच्यूट में म्यूजिकल शो का आयोजन किया गया। इश्मीत सिंह की स्मृति में ये शाम इशमीत के नाम थी। इस संगीतमय शाम के अंतर्गत हुए इस कार्यक्रम का आगाज इशमीत के गायकी के सफर के बारे में दी गई प्रैजैंटेशन से शुरू हुआ जिसका अंदाज़ दिल को छू लेने वाला था। 
इसके बाद इशमीत सिंह के चाचा व इंस्टीच्यूट के डायरैक्टर डा. चरण कमल सिंह ने इशमीत की याद में गाकर कमाल कर दिया। जब उन्होंने जान कढ़ लई वेईमानां वे तू, जान वाली गल करके गीत गाया तो पूरा हाल इश्मीत की स्मृति में ही। सुरीली शाम में कई  लोग मौजूद थे। टी.वी. शो में भाग ले चुके फाइनलिस्टों ने जहां अपने सुरीले और हसीन नगमों से अपनी आवाज का जादू बिखेरा वहीं इश्मीत की संगीतक स्मृतियों को भी एक बार फिर पुनर्जीवित किया। यूं लगता था जैसे गुज़रा हुआ समय एक बार फिर लौट आया हो। आवाज़ और सुरों के इन साधकों को सम्मानित भी किया गया जिसमें आवाज पंजाब दी की विनर सुरमंगल अरोड़ा, भारत की शान की फाइनलिस्ट रुपाली छावड़ा, गुरलीन कौर, वॉयस ऑफ पंजाब की फाइनलिस्ट हरगुण कौर ने बॉलीवुड तराने भी गाए। बतौर मुख्यातिथि पहुंचे जत्थेदार रखविंदर सिंह गाबड़िया, प्रो. सुखवंत सिंह, रणजोध सिंह आदि को भी बुके देकर सम्मानित किया गया। इश्मीत की याद में बहेगी हुई आँखें और रुंधे हुए कंठ बिना बोले ही कह रहे थे की वे इश्मीत को कभी नहीं भूल सकते। इस मौके पर इशमीत सिंह के पिता व एडवाइजरी बोर्ड ऑफ इंस्टीच्यूट के चेयरमैन गुरपिंदर सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने और अशिम नागपाल ने मिलकर इशमीत को श्रद्धांजलि अर्पित की जो सबके दिलो दिमाग को छू रही थी और  में उतर रही थी। अंत में इंस्टीच्यूट की डीन प्रीति बहल ने ए ट्रिब्यूट टू इशमीत सिंह के टाइटल के अंतर्गत इशमीत के जिंदगी के पहुलओं के सबके सामने जागरूक किया। इश्मीत की गैर मौजूदगी में भी इश्मीत की आवाज़ और उसे चाहने वालों की मौजूदगी उसकी ही मौजूदगी का अहसास करा रही थी। 

Friday, August 09, 2013

लुधियाना: हर्षो-उल्लास से मनाया गया तीज का त्यौहार

मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कालेज में हुआ रंगारंग कार्यक्रम
लुधियाना: 8 अगस्त; 2013: (रेक्टर कथूरिया/पंजाब स्क्रीन): तीज का त्योहार इस बार भी हर तरफ हर्षो उल्लास और धूमधाम से मनाया गया इस सम्बन्ध में एक शानदार कार्यक्रम लुधियाना के मास्टर तार सिंह मेमोरियल कालेज में भी हुआ हर बार की तरह इस बार भी कॉलेज में सजी-धजी मुटियारें हर तरफ मस्ती, डांस और पंजाबी गानों की धूम से  पूरे माहौल को संगीत और डांस के जादू से यादगारी बना रहीं थीं। कार्यक्रम के दौरान कुछ अलग सा ही नजारा था मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कॉलेज फॉर वुमन का। गौरतलब है कि इस बार कालेज में तीज कार्यक्रम के साथ-साथ फ्रेशर पार्टी का भी आयोजन किया गया। आसमान में आँख मिचोली खलते बादल, सावन की फुहारें, सजी-संवरी, झूला-झूलतीं पंजाबी पहरावे में मोहक लगती मुटियारें तो कहीं मेंहदी रचाती लड़कियां हरव तरफ एक अलग सा रंग था। कहीं रंग-बिंरगी चूडिय़ों की खनखनाहट सुने दे रही थी तो कहीं मुटियारों के सिर पर सजी संतरंगी चुन्नियां और सगी-फूल टीका कोका भूले बी इसरे पंजाब के याद ताज़ा करा रहे थे। वातवरण में गूंजती पंजाबी लोक धुनें और गिद्दे की धमक ने मंच पर एक बार तो वही पंजाब रच दिया था जो अब तेज़ी से लुप्त होता जा रहा है।
        हर तरफ रंग था, जोश था, उत्साह था और आधुनिकता के साथ साथ अपनी परम्परा को अपने साथ बनाये र्ख्न्र का दृढ़ संकल्प भी था पंजाब की परम्परा को दिखाती पंजाबी ड्रेस और आधुनिक जमाने के साथ कदम मिलाने का जोश दिखाती वेस्टर्न ड्रेस में सजी लड़कियां अपनी परफार्मेंस देने का इंतजार कर रही थीं। 
अपने टीवी के अतीत को एक बार फिर ज्वलंत करती तेजिन्द्र कौर और उसकी टीम की सदस्याएं अपने मनमोहक बोलों और खनखनाती सुरीली आवाज़ के साथ दर्शकों को शुरू से लेकर अंत तक बांधे रखने में कामयाब रहीं दर्शक और श्रोता मन्त्र मुग्ध हुए नजर आ रहे थे जैसे उन पर किसी ने जादू कर दिया हो। संगीत का जादू, मस्ती का जादू, कुछ बन दिखाने का जोश, कुछ कर दिखाने का संकल्प---तीज के बहाने से इन छात्रायों में छुपी कला और आगे बढने की ललक पंख लगा कर बाहर आ रही थी। सुनिश्चित है की अगर यह कार्यक्रम न हुआ होता तो उह कला अंतर मन के किसी कोने में लगातार छुपी की छुपी ही रह जाती
         इस मौके पर कॉलेज प्रबंधक कमेटी के प्रधान स्वर्ण सिंह तथाप्रबंधक कमेटी के ठेकेदार कंवलइंद्र भी मौजूद रहे।  कॉलेज प्रिंसीपल प्रवीण कौर चावला ने जहाँ तीज के महत्व की चर्चा की वहीँ नई छात्रयों को सुस्वागतम भी कहा मिस तीज और मिस फ्रेशर प्रतियोगिता भी करवाई गई। जिसमें तियां दी रानी अर्शदीप कौर, कुड़ी पंजाबण हरमनदीप कौर बनीं तथा कुड़ी मजाजण का ताज नवदीप कौर के सिर सजा। नए आए स्टूडेंट्स के लिए मिस फ्रेशर ऐश्वर्या बनी, फस्र्ट रनरअप शिफाली और सेकेंड रनरअप हरप्रीत कौर बनीं। सभी विजेताओं को प्रधान स्वर्ण सिंह, कंवलइंद्र सिंह ठेकेदार और प्रिंसीपल प्रवीण कौर चावला ने सम्मानित किया।

लुधियाना: हर्षो-उल्लास से मनाया गया तीज का त्यौहार 

Friday, May 10, 2013

रवींद्रनाथ टैगोर की 150 वीं जयंती का स्‍मरणोत्‍सव

09-मई-2013 15:58 IST
टैगोर की कविताओं पर आधारित 13 लघु फिल्‍मों रिलीज की गई

संस्‍कृति मंत्री श्रीमती चंद्रेशकुमारी कटोच ने आज रवींद्रनाथ टैगोर की कविताओं पर आधारित 13 लघु फिल्‍मों को लॉंच किया। इन फिल्‍मों को संस्‍कृति मंत्रालय की वित्‍तीय सहायता से बनाया गया है। इस श्रृंखला का निर्देशन प्रसिद्ध निर्देशक श्री बुद्धदेव दास गुप्‍ता ने राष्‍ट्रीय फिल्‍म विकास निगम के माध्‍यम से किया है। कविता आधारित 13 लघु फिल्‍मे/वृत्‍त चित्रों को निर्मित करने की ये परियोजना रवींद्रनाथ टैगोर की 150 वीं जयंती के स्‍मरणोत्‍सव का हिस्‍सा है। 
फिल्‍म निर्माण और स्‍मरणोत्‍सव से संबंधित प्रस्‍तावों की जांच के श्री श्‍याम बेनेगल की अध्‍यक्षता में संचालन समिति का गठन किया गया था। 
ये लघु फिल्‍मे (प्रत्‍येक 25 से 30 मिनट की अवधि) टैगोर की बंसी (बांसुरी), कृष्‍णकली (श्‍याम युवती), मुक्ति (आजादी), फंकी (धोखा), पुकुर धरे (पोखर की ओर से), एक गये (एक गांव), कैमेलिया (कैमेलिया), बंशी वाला (बांसुरी बजाने वाला), शेष चिठ्ठी (अंतिम पत्र), होतत देखा (अनपेक्षित मुलाकात), पत्र लेखा (लिखे जाने वाला पत्र), बाशा बाड़ी (हवेली) और इस्‍टेशन (स्‍टेशन) नामक कविताओं पर आधारित है। 
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मीणा/शोभा/प्रियंका/लक्ष्‍मी/तारा-2296

Saturday, May 04, 2013

स्‍पीक मैके-

01-मई-2013 20:55 IST
पारंपरि‍क भारतीय शास्‍त्रीय संगीत और संस्‍कृति के उत्‍थान का महत्‍वपूर्ण अंतरराष्‍ट्रीय मंच
विशेष लेख                                                               किरण सेठ*
                                                                                                                 Courtesy Photo
‘’ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईआईटी), खड़गपुर में अध्‍ययन के बाद मैं पीएचडी करने के लिए न्‍यूयार्क के कोलम्बिया विश्‍वविद्यालय गया था। उन्‍हीं दिनों, ब्रुकलिन अकादमी ऑफ म्‍युजिक, न्‍यूयार्क में मुझे ध्रुपद गायन सुनने का मौका मिला। उस गायन ने जैसे मेरे मन के तारों को झंकृत कर दिया। गायक कलाकार थे - उस्‍ताद नसीर अमीयुद्दीन डागर और उस्‍ताद फरीदूद्दीन डागर। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि मैं अपनी संस्‍कृति से कितना दूर हूं’’ यह कथन है किरण सेठ का जो हमारे देश के अधिकतर युवाओं की भी कहानी है। प्रतिस्‍पर्धा के इस युग में हमारा युवा वर्ग कई मायनों में वंचित रह जाता है।
‘’वर्ष 1976 में देश लौटकर मैंने दिल्‍ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईआईटी) में अध्‍यापन शुरू किया। युवाओं को अपनी संस्‍कृति से जोड़ने के लिए मैं दिलो-जान से जुट गया। अगले ही साल मैंने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया।‘’
पिछले 35 वर्षों के दौरान कई लोग साथ जुड़ते चले गए और आज स्पिक मैके भारत के 400 शहरों और 50 विदेशी शहरों में कार्यक्रमों का आयोजन कर चुका है। पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से भारतीय प्रबंधन संस्‍थान कोलकाता में आगामी 20 मई -26 मई, 2013 के बीच पहले अंतरराष्‍ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसका उदघाटन राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी करेंगे।
इस सम्मेलन के दौरान श्रीमती गिरिजा देवी, प्रोफेसर टी.एन. कृष्‍णन, पंडित बिरजू महाराज, विद्वान टी.वी.शंकरनारायणन, पंडित शिव कुमार शर्मा, श्रीमती अंजलि इला मेनन, पांडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई के साथ कई और जाने माने कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। यही नहीं इस सम्‍मेलन के दौरान देश भर से आए स्‍कूलों और कॉलेजों के 1500 विद्यार्थी भारत की प्राचीन आश्रम प्रथा से रूबरू होंगे।
नादभेद नामक कार्यक्रम के माध्‍यम से अखिल भारतीय स्‍तर पर एक शास्‍त्रीय संगीत प्रतिस्‍पर्धा का आयोजन किये जाने की भी योजना है। यह आयोजन स्पिक मैके और दूरदर्शन के संयुक्त तत्वाधान में होगा। यह भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित एक गौरवशाली रियलिटी शो होगा जिसमें कर्नाटक संगीत और हिन्दुस्तानी शैली के गायन और वाद्य यंत्रों की सुंदर प्रस्तुति होगी। इसका एकमात्र उद्देश्य युवाओं में हमारी समृद्ध संगीत परंपरा का प्रचार-प्रसार करना है।
इस कार्यक्रम के दौरान 6 श्रेणियों में पुरस्‍कार प्रदान किए जाएंगे। पंडित भीमसेन जोशी युवा पुरस्‍कार (हिंदुस्‍तानी संगीत), पंडित रविशंकर युवा पुरस्‍कार (हिंदुस्‍तानी वाद्य), उस्‍ताद अल्‍ला रक्‍खा युवा पुरस्‍कार (हिंदुस्‍तानी उपवादक), श्रीमती एम एस सुब्‍बुलक्ष्‍मी युवा पुरस्‍कार (कर्नाटिक गायन), विदवान शेख चिन्‍ना मौलाना युवा पुरस्‍कार (कर्नाटिक वाद्य), विदवान पालघाट मणिअय्यर युवा पुरस्‍कार (कर्नाटिक उपवादक)। प्रत्‍येक श्रेणी के अंतर्गत्‍विजेता को 5 लाख रूपये का नकद पुरस्‍कार प्रदान किया जाएगा। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर फाइनल में आने वाले कलाकारों के अलावा प्रोत्‍साहन के तौर पर 10 हजार रूपये का पुरस्‍कार भी प्रदान किया जाएगा।
भारतीय संगीत कला और संस्‍कृति की धारा हमारे देश के साथ-साथ पूरे विश्‍व को समृद्ध कर रही है। हमारे युवा वर्ग को भी स्पिक मैके के बदौलत अपनी संस्‍कृति के साथ परिचित होने का एक बेहतरीन मंच मिला है।

*लेखक को कला क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा ‘पदम श्री’ पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है।
वि.कासोटिया/संजीव/रत्‍नावली/रीता/चित्रदेव/मलिक/श्‍याम - 88