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Tuesday, December 05, 2023

वेरका मिल्क प्लांट मैनेजर रिश्वत लेता काबू

5 दिसंबर 2023 को शाम 7:00 बजे

विजिलेंस ब्यूरो ने रिश्वत वाले 50,000 रुपये के साथ पकड़ा मैनेजर

चंडीगढ़: 5 दिसंबर 2023: (कार्तिका कल्याणी सिंह//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

सरकारी नौकरियों में आजकल वेतन भी बहुत अच्छा है। कई सुविधाएं हैं लेकिन बड़े पदों पर रहने वाले लोगों को रिश्वत और हेराफेरी जैसी आदतों से छुटकारा नहीं मिल रहा है। कई कानूनों के बावजूद इस तरहे के सिलसिले  जारी हैं। अब एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी को पंजाब सतर्कता ब्यूरो के राज्य में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के दौरान गिरफ्तार किया गया है। मंगलवार को मिल्क प्लांट मुहाली में तैनात एक प्रबंधक (दूध संग्रहन) मनोज कुमार श्रीवास्तव को 50,000 रुपये की रिश्वत लेने के लिए रंगे हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया था। वेरका मिल्क प्लांट पंजाब के सबसे बड़े दूध मांग प्रतिष्ठानों में से एक है। दूध के अलावा, यह प्लांट दही, लस्सी, घी, मक्खन, पनीर, केक और पिन्नी जैसे उत्पादों की एक विस्तृत वरायटी भी बेचता है। वे आमतौर पर ताजा और अधिक स्वादिष्ट होते हैं। इस प्रकार इस प्कालांट व्यवसाय बहुत बड़ा है। इसका नेटवर्क पंजाब के सभी शहरों के मोहल्लों  की गलियों  सड़कों पर भी फैला हुआ है। इसमें दूध की किस्में भी होती हैं जो वसा और कीमत के आधार पर बदलती भी हैं। ऐसे बड़े संस्थानों के में भी भृष्ट तन्त्र घुसा हुआ है और सक्रिय भी है। कोई न कोई खबर बहार निकलती ही रहती है। 

विजिलेंस ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने कहा कि कर्मचारी के खिलाफ मामला सुखबीर सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया था जो मिल्क प्लांट की एक निजी फर्म द्वारा दूध संग्रह टैंकरों की देखभाल कौन करता है।

उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता ने सतर्कता ब्यूरो से संपर्क किया था और आरोप लगाया था कि राज्य विभिन्न स्थानों से दूध एकत्र करने के लिए अपने टैंकरों को अच्छा और फायदे वाला रूट आवंटित करने के बदले में विभाग का उक्त कर्मचारी उससे 50,000 रुपये की रिश्वत मांग रहा है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उक्त प्रबंधक ने इस संबंध में पहले ही 50,000 रुपये ले लिए थे।

प्रवक्ता ने आगे कहा कि सतर्कता ब्यूरो मोहाली की फ्लाइंग स्क्वाड इकाई ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच में एक जाल बिछाया था जिसके तहत आरोपी प्रबंधक को दो सरकारी गवाहों की उपस्थिति दी गई थी उन्होंने शिकायतकर्ता से 50,000 रुपये की रिश्वत ली और रंगे हाथ पर उसे काबू कर लिया गया।

सतर्कता ब्यूरो के पुलिस फ्लाइंग स्क्वाड -1, पंजाब, मुहाली में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत उपरोक्त कर्मचारी के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है। उसे कल एक स्थानीय अदालत में पेश की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इसके साथ ही जांच भी आगे बढ़ रही है। 

इससे पहले नवंबर में, भ्रष्टाचार का एक ऐसा ही मामला सामने आया था जब सीबीआई ने वेरका मिल्क प्लांट मोहाली के डिप्टी मैनेजर आशिम कुमार सेन को रिश्वत दी थी था। कहा जाता है कि वह उसके काम में कमियों को इंगित करके और रिश्वत देने के लिए मजबूर करके एक ठेकेदार को परेशान कर रहा था। आशिम सेन ठेकेदार से 15,000 रुपये प्रति माह मांग रहे थे। यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि ऐसे और कितने मामले हो सकते हैं। कभी कभार पकड़े गए लोग समस्या के गंभीर बनने का इशारा कर ही रहे हैं।  

बार-बार उत्पीड़न से निराश होकर ठेकेदार ने सीबीआई से शिकायत की। सीबीआई ने आरोपी को पकड़ने के लिए शुक्रवार शाम को सेक्टर -35 होटल माया में एक जाल बिछाया। जब आरोपी ठेकेदार से रिश्वत लेने गया, तो सीबीआई ने उसे रिश्वत की राशि के साथ गिरफ्तार कर लिया। उस समय वह ठेकेदार से 30,000 रुपये ले रहा था। सीबीआई ने उसी शाम आरोपी को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी को बुडैल जेल भेज दिया। इस प्रकार इस इतिहास में एक और मामला दर्ज किया गया है लेकिन अभी तक भ्रष्टाचार का उन्मूलन नहीं हुआ है। यह एक लम्बी लड़ाई है जो इस मकसद में अभी वक़त लेगी। 

इसी तरह, उसी वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह में, एक अजीब तरह का विवाद भड़क गया जब लाखों रुपये के सामान का गायब होना प्रकाश में आया। गायब हुए सामान में मुख्य रूप से दूध और घी ही थे। उस समय, विभाग द्वारा केवल 60,000 क्रेट लापता होने की सूचना दी गई थी। 

इस मुद्दे पर मोहाली के वेरका मिल्क प्लांट में भी व्यापक रूप से चर्चा हुई। उस समय, देशी घी, दूध और टोकरे के लाखों रुपये गायब थे। विभाग द्वारा केवल 60,000 क्रेट लापता होने की सूचना दी गई थी, जबकि समाचार में घोटाला अधिक था। मीडिया में लापता माल का मूल्य लगभग 1.25 करोड़ रुपये था।

इस बारे में मीडिया में बहुत कुछ चल रहा था। सबसे पहले, यह कहकर मामले को दबाने का प्रयास किया गया था कि टोकरे खराब थे, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में टोकरे खराब थे और उनके कचरे तक का पता नहीं चला था इसके कारण, सहकारी सोसायटी पंजाब के रजिस्ट्रार द्वारा एक जांच भी शुरू की गई थी। उसका क्या बना यह एक अलग मामला हो सकता है। 

यह रहस्यमय मामला बाहर आना और इतना कुछ पता लगना वास्तव में कर्मचारीयों की सावधानी का ही परिणाम था। पंजाब स्टेट वर्कर्स पार्टी के पूर्व सचिव जगजीत सिंह ने इस मामले में शिकायत की थी कि घरेलू घी, दूध और टोकरा संयंत्र से 100 करोड़ रुपये गायब थे। इस मामले में, वेरका प्लांट मोहाली के चार अधिकारियों के नाम लिए गए हैं। मामले में पांच लोगों को भी निलंबित कर दिया गया था, जिसे बाद में यूनियन के दबाव के कारण बहाल कर दिया गया था।

अब देखना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण विभाग पूरी तरह से भ्रष्टाचार से मुक्त कब होंगें?  क्या अतीत में भी भृष्टाचार में संलिप्त  रहे लोगों के रिकॉर्ड देख कर उन पर रेगुलर नज़र रखनी कोई ज़्यादा मुश्किल काम है? आखिर कैसे बचाया जा सकता आम जनता और सरकार के हितों को ऐसे तत्वों से?

Tuesday, September 07, 2021

विजीलैंस द्वारा महिला पटवारी और सहायक रिश्वत लेते काबू

 7th September 2021 at 8:11 PM

6,000/-रुपयों की रिश्वत लेते रंगे हाथों काबू किया 
चंडीगढ़: 7 सितम्बर 2021: (गुरजीत बिल्ला//पंजाब स्क्रीन)::
भर्ष्टाचार के खिलाफ चलाए जाते अभियानों, सामजिक उपदेशों और क़ानूनी सख्तियों के बावजूद रिश्वतखोरी जैसी बुराईयां रुकने का नाम ही नहीं ले रहीं। अब नया मामला सामने आया है एक महिला पटवारी का। 

पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने आज राजस्व हलका बाजेवाला, ज़िला मानसा में तैनात महिला पटवारी अमनदीप कौर और उसके सहायक और ड्राइवर के तौर पर काम करते एक प्राईवेट व्यक्ति हरजीत सिंह को 6,000 रुपए की रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों काबू कर लिया।

इस सम्बन्धी जानकारी देते हुये विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि उक्त महिला पटवारी को गाँव बाजेवाला के शिकायतकर्ता राजा सिंह की शिकायत पर 6,000 रुपए की रिश्वत लेते हुये गिरफ़्तार किया है। शिकायतकर्ता ने विजीलैंस ब्यूरो को अपनी शिकायत में दोष लगाया कि उक्त पटवारी की तरफ से ज़मीन के तबादले का इंतकाल दर्ज करने बदले 12,000 रुपए की माँग की गई थी परन्तु सौदा 10,000 रुपए में तय हुआ है। उन्होंने बताया कि वह दोषी महिला पटवारी को पहली किश्त के 4,000 रुपए पहले ही अदा कर चुका है।

विजीलैंस की टीम की तरफ से शिकायत की पड़ताल के उपरांत उक्त मुलजिम पटवारी और उसके सहायक प्राईवेट व्यक्ति को दो सरकारी गवाहों की हाज़िरी में दूसरी किश्त के 6,000 रुपए की रिश्वत लेते हुये पकड़ लिया। प्रवक्ता ने बताया कि उक्त दोषियों के खि़लाफ़ विजीलैंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत बठिंडा स्थित विजीलैंस ब्यूरो के थाने में मुकदमा दर्ज करके अगली कार्यवाही आरंभ कर दी है।

Tuesday, February 17, 2015

अरविन्द बाबू दिल्ली का सिंहासन कोई फूलों की सेज नहीं


Tue, Feb 17, 2015 at 8:23 AM
इंदिरा सरकार को नसबंदी ले डूबी और मोरार जी को नशाबंदी     -मनीराम शर्मा एक शराब निर्माता ने 6 करोड़ रूपये खर्च करके मोराजी सरकार गिरा दी थी 
केजरीवाल जी आपने  जनता को काफी कुछ मुफ्त में देने और भ्रष्टाचारमुक्त शासन देने का वादा  किया है | लोकपाल कानून तो आपके दायरे में ही नहीं है और  इस कानून से भी जनता का कितना  भला हो सकता है मैं नहीं जानता किन्तु यह अवश्य जानता हूँ कि राजस्थान में लोकायुक्त कानून 40 से अधिक वर्षों से बना हुआ है और वहां कितना भ्रष्टाचार है  आप जानते ही होंगे | कानून तो जनता को भ्रमित करने के लिए बुना जाने वाला वह मकडजाल है जिसमें जनता को मछली की तरह फंसाया जा सके | दिल्ली सरकार तो एक स्थानीय निकाय से अधिक कुछ भी नहीं  है  जिसके पास बिजली, पानी , सफाई, परिवहन आदि मुद्दे ही हैं  और वे भी केंद्र सरकार के रहमोकरम   पर निर्भर  है | उसके पास न न्यायालय है न पुलिस .. फिर भ्रष्टाचारियों को कौन पकड़ेगा  ..कौन दंड देगा ..   फिर ...आपके पास तो वही सरकारी मशीनरी –उपकरण हैं जो आज तक थे | पूर्व में  जो मुख्य सचिव आपको मिले थे वे  शीला दीक्षित सरकार में स्कूलों में  कंप्यूटर घोटाले में मुख्य भूमिका निभाने वालों में से एक थे | क्या आप  कोई अधिकारी विदेशों से आयात करेंगे ? स्मरण रहे जंग खाए हुए और  भोंथरे औजारों से युद्ध नहीं जीता जा सकता | जनता के लिए सबसे बड़ा सरदर्द दिल्ली पुलिस ही है जिसमें 100  तो बलात्कार के आरोपी कार्यरत हैं | पुलिस और प्रशासनिक पद तो सरकारों में लगभग नीलाम होते हैं जो ऊँची बोली लगाने वाले को मिलते हैं | आपके पास अपना स्वतंत्र कौनसा तंत्र है ? आपके सदस्यों में भी एक तिहाई दागी हैं | जिस समुदाय विशेष का आपको समर्थन मिला है, आंकड़े बताते हैं कि वे भी  आम भारतीय से 24% अधिक अपराधी हैं | आपकी पार्टी पर यह भी आरोप है कि उत्तराखंड के बाढ़ पीड़ित लोगों के लिए इकठा किया गया चन्दा भी आपने उनको नहीं दिया है |  शीला दीक्षित के घोटालों की फाइलें आपके पास काफी लम्बे अरसे से हैं किन्तु आपने उन पर कोई कार्यवाही नहीं की –शायद  अब राजनीतिक लाभ मिल सके | आपने पहले गडकरी पर आरोप लगाए औए बाद में उनसे माफ़ी मांगी |

जनता पर आपको कर लगाने के बहुत ही सीमित अधिकार हैं | पिछलीबार  जब हाई कोर्ट की  फीस बढाई गयी थी उसे भी दिल्ली सरकार के दायरे से बाहर मानकर उसे निरस्त कर दिया था | अब नए वर्ष से जीएसटी  लागू हो रहा है –केंद्र का सिकंजा कसेगा , राज्यों की मुश्किलें और बढ़ जायेंगी | इस वर्ष व्यापार और उद्योग लगभग ठप हैं, कर संग्रहण  मात्र  आधा ही हो  पाया है | ऐसी स्थिति में राज्य  कर और केंद्र से मिलने वाली राशि में कटौती ही होगी फिर आपके इन वादों का क्या होगा | जनता आपके  इन लुभावने भाषणों को कितने दिनों तक सुनेगी ? जनता को भाषण नहीं राशन चाहिए अब तक तो आपको भी पता लग गया होगा | जहां तक  केंद्र से सहयोग मिलने का प्रश्न है सो शीला दीक्षित भी केंद्र  को कोसती रहती थी जबकि केंद्र में उनकी ही पार्टी का शासन था | केंद्र में अब तो आपका कोई विशेष हस्तक्षेप भी नहीं है |

आम नागरिक इस देश में स्वभावतः बेईमान नहीं है और उनको बेईमान बनाने का श्रेय भी राजनेताओं को ही जाता है | एक भूखे द्वारा अपने पेट की  भूख मिटाने और ऐश के लिए चोरी करने में अंतर होता है | मेरा अनुभव है कि वर्षा व फसल अच्छी   होने पर खेत  में रास्ते पर  पड़े फलों को भी यहाँ कोई नहीं उठाता है | वैसे भी 20000 रुपये महीना या अधिक कमाने वाले इस देश में मात्र 3% लोग ही हैं और उनमें से भी 70% तो संगठित क्षेत्र के कर्मचारी हैं | देश की 70% जनसंख्या सब्सिडी से मिलने वाले अन्न से अपना पेट भरती है | इस क्षुद्र राजनीति के परिवेश में में आप क्या कुछ  कर पाएंगे?  न्यायाधीश जगमोहन लाला सिन्हा जब इंदिराजी के विरुद्ध निर्णय देने वाले थे तो उनकी जान को भी ख़तरा था और मजबूरन  निर्णय उनको स्वयं ही टाइप करना पडा था | इंदिरा सरकार को नसबंदी ले डूबी और मोरारजी को नशाबंदी |   एक शराब निर्माता ने 6 करोड़ रूपये खर्च करके मोराजी सरकार गिरा दी थी और चरणसिंह जी प्रधान मंत्री बने थे  किन्तु वे तो जांच आयोग  और कमिटी की फाइलों में ही उलझकर रह गए , कभी संसद के दर्शन भी नहीं कर पाए और वे सारी जांचें भी धरी रह गयी थी |