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Saturday, February 12, 2022

महात्मा गांधी के हत्यारों को डा राम पुनियानी के जवाब

12th February 2022 at 12:29 PM

गांधी और बोस दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति अथाह सम्मान था

एक खास एजंडे के हक में जारी साज़िशों का भड़ाफोड़ करता लेख 


हाल में रिलीज हुई फिल्म ‘वाय आई किल्ड गांधी‘
 महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का महिमामंडन करने का प्रयास है. इस फिल्म की एक क्लिप, जो पंजाब हाईकोर्ट में नाथूराम गोडसे की गवाही के बारे में है, सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही है।   

इसमें गोडसे को घटनाक्रम का एकदम झूठा विवरण प्रस्तुत करते हुए और इस पूरे मामले को साम्प्रदायिक रंग देते हुए दिखाया गया है। काफी समय से आम लोगों के दिमाग में यह ठूंसा जा रहा है कि महात्मा गांधी ने क्रांतिकारी भगतसिंह की जान बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। तथ्य इसके विपरीत हैं। वायसराय लार्ड इर्विन ने अपने विदाई भाषण में कहा था कि महात्मा गांधी ने बहुत कोशिश की थी कि भगतसिंह की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाए। इर्विन ने 26 मार्च 1931 को कहा था ‘‘जब मिस्टर गांधी मुझसे काफी जोर देकर यह आग्रह कर रहे थे कि सजा को कम कर दिया जाए तब मैं यह सोच रहा था कि अहिंसा का एक दूत इतने आग्रहपूर्वक ऐसे लोगों की पैरवी क्यों कर रहा है जो उसकी विचारधारा के एकदम विपरीत सोच रखते हैं। परंतु मेरा यह मानना है कि इस तरह के मामलों में मैं अपने निर्णय को शुद्ध राजनैतिक कारणों से प्रभावित नहीं होने दे सकता। मैं ऐसे किसी दूसरे मामले की कल्पना भी नहीं कर सकता जिसमें कोई व्यक्ति कानून के अंतर्गत उसे दिए गए दंड के लिए प्रत्यक्ष रूप से इतना पात्र हो।‘‘

गोडसे ने अपने बयान में कहा कि गांधीजी लगातार क्रांतिकारियों के खिलाफ लिख रहे थे और यह भी कि उनके विरोध के बावजूद कांग्रेस अधिवेशन में भगतसिंह के बलिदान और देशभक्ति की प्रशंसा करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया था। सच यह है कि भगतसिंह की प्रशंसा करते हुए जो प्रस्ताव कांग्रेस ने पारित किया था उसका मसविदा गांधीजी ने ही तैयार किया था। प्रस्ताव में कहा गया था कि ‘‘कांग्रेस किसी भी रूप में या किसी भी प्रकार की राजनैतिक हिंसा से स्वयं को अलग करते हुए और उसका अनुमोदन न करते हुए भी दिवंगत सरदार भगतसिंह और उनके साथियों सुखदेव और राजगुरू की वीरता और बलिदान पर अपनी प्रशंसा दर्ज करना चाहती है। इन ज़िंदगियों को खोने वाले परिवारों के साथ हम भी शोकग्रस्त हैं। कांग्रेस की यह राय है कि इन तीन मृत्युदंडों का कार्यान्वयन अकारण की गई बदले की कार्यवाही है और देश की उनके दंड को कम करने की सर्वसम्मत मांग का जानबूझकर अनादर किया गया है।‘‘

क्रांतिकारियों और गांधी को एक-दूसरे का विरोधी बताते हुए गोडसे यह भी भूल जाता है कि गांधीजी ने सावरकर बंधुओं की रिहाई के लिए भी प्रयास किए थे। ‘कलेक्टिड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी' खण्ड-20 के पृष्ठ 369-371 में गांधीजी का एक लेख प्रकाशित है जिसमें उन्होंने यह कहा है कि सावरकर बंधुओं को रिहा किया जाना चाहिए और उन्हें देश की राजनीति में अहिंसक तरीके से भागीदारी करने की अनुमति दी जानी चाहिए। 

जो वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही है उसमें गांधी और बोस को एक-दूसरे का विरोधी बताया गया है। यह सच है कि गांधी और बोस में कुछ मुद्दों पर मतभेद थे परंतु दोनों भारत को स्वतंत्रता दिलवाने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध थे। गांधीजी ने सन् 1939 में बोस के कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने का विरोध किया था। बोस का तर्क था कि हमें अंग्रेजों से लड़ने के लिए जापान और जर्मनी के साथ गठबंधन करना चाहिए. गांधीजी का मानना था कि स्वाधीनता हासिल करने के लिए हमें ब्रिटेन के खिलाफ संघर्ष करना चाहिए। कांग्रेस की केन्द्रीय समिति के अधिकांश सदस्य इस मामले में गांधी के साथ थे। इन मतभेदों के बावजूद गांधी और बोस दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति अथाह सम्मान था। जब गांधीजी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ हुआ तब बोस ने इस पर प्रसन्नता जाहिर की। बोस ने आजाद हिन्द फौज की सफलता के लिए गांधीजी का आशीर्वाद मांगा था। बोस ने ही महात्मा के लिए राष्ट्रपिता शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया और आजाद हिन्द फौज की एक टुकड़ी का नाम गांधी बटालियन रखा।  बोस के प्रति गांधीजी के मन में सम्मान का भाव था और वे उन्हें ‘प्रिंस अमंग पेट्रियट्स' कहते थे। वे आजाद हिन्द फौज के कैदियों से मिलने जेल भी गए थे।

आरएसएस-हिन्दू महासभा के दुष्प्रचार के अनुरूप गोडसे यह आरोप भी लगाता है कि गांधी हिन्दुओं के विरोधी और मुसलमानों के समर्थक थे और देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार थे। हम जानते हैं कि देश के विभाजन के पीछे अनेक जटिल कारण थे। अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो‘ की नीति को सफल बनाने के लिए मुस्लिम और हिन्दू सम्प्रदायवादियों ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। गोडसे द्वारा बोस की प्रशंसा मगरमच्छी आंसू बहाने के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। जब बोस अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे थे तब हिन्दू महासभा ब्रिटिश आर्मी में भारतीयों को भर्ती कराने का अभियान चला रही थी. गोडसे के अखबार ‘अग्राणी‘ ने उस समय एक कार्टून छापा था जिसमें सावरकर को रावण को मारते हुए दिखाया गया था. रावण महात्मा गांधी थे और उनका एक सिर बोस था. अगर गोडसे क्रांतिकारियों से इतना ही प्रभावित था तो उसे आजाद हिन्द फौज में शामिल होने से किसने रोका था?

गोडसे गांधीजी पर पाकिस्तान को 55 करोड़ रूपये दिलवाने का आरोप लगाता है।   यह 55 करोड़ भारत और पाकिस्तान के संयुक्त खजाने में पाकिस्तान का हिस्सा था। गांधीजी ने इस मुद्दे पर उपवास किया था क्योंकि उनका मानना था कि अगर हम इस तरह का व्यवहार करेंगे तो दुनिया हमें किस नजर से देखेगी। 

गोडसे गांधी पर इसलिए भी हमलावर है क्योंकि उन्होंने यह शर्त रखी थी कि वे अपना उपवास तभी तोड़ेंगे जब हिन्दू मुसलमानों की मस्जिदों और उनकी संपत्तियों से अपना बेजा कब्जा छोड़ देंगे। विभाजन की त्रासदी के बाद पूरे देश में हिंसा फैल गई थी। साम्प्रदायिक तत्वों की मदद से हिन्दुओं ने मस्जिदों और मुसलमानों की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया था। गोडसे गांधी को चुनौती देता है कि वे पाकिस्तान और मुसलमानों के मामले में ऐसी ही कार्यवाही करके दिखाएं। गोडसे भूल जाता है कि महात्मा गांधी ने नोआखली में दंगे रोकने के लिए अनेक कदम उठाए थे और नोआखली में दंगा पीड़ित मुख्यतः हिन्दू थे। गांधीजी का मानना था कि अगर भारत में मुसलमान सुरक्षित रहेंगे तो वे पाकिस्तान के हिन्दुओं और सिक्खों के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। शांति और अहिंसा पर उनका जोर नैतिक सिद्धांतों पर आधारित था। ‘‘अगर हम दिल्ली में यह कर पाए तो मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि पाकिस्तान में हमारी राह खुल जाएगी और इससे एक नया सफर शुरू होगा। जब मैं पाकिस्तान जाऊंगा तो मैं उन्हें आसानी से नहीं छोड़ूंगा। मैं वहां के हिन्दुओं और सिक्खों के लिए अपनी जान दे दूंगा।‘‘

फिल्म में गोडसे के बयान में सबसे बड़ा झूठ यह है कि गोडसे ने अकेले महात्मा गांधी की हत्या का षड़यंत्र रचा था। सरदार पटेल ने कहा था कि गांधीजी की हत्या की योजना हिन्दू महासभा ने बनाई थी। आगे चलकर जीवनलाल कपूर आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि ‘‘इन सभी तथ्यों को एकसाथ देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि हत्या का षड़यंत्र सावरकर और उसके साथियों के अतिरिक्त और किसी ने नहीं रचा था। 

गांधीजी की हत्या का असली कारण यह था कि वे समावेशी राष्ट्रवाद के पैरोकार थे-उस राष्ट्रवाद के जिसका सपना भगतसिंह और बोस ने भी देखा था। गांधीजी की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वे अछूत प्रथा और जातिगत ऊँचनीच के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। गोडसे का हिन्दू राष्ट्रवाद जातिप्रथा का समर्थक और समावेशी राष्ट्रवाद का विरोधी था. गोडसे को जो कुछ कहते हुए दिखाया गया है वह हिन्दू राष्ट्रवादियों के असली एजेंडे को बताता है।  

(अंग्रेजी से रूपांतरण अमरीश हरदेनिया) (लेखक आईआईटी मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं)

Tuesday, December 12, 2017

नारी शक्ति पे आधारित है ये फिल्म: “हार्ड कौर”

"नारीवाद महिलाओं को मज़बूत बनाना नहीं है...नारी तो पहले से ही मज़बूत है...बात सिर्फ नज़रिये की है के दुनिया किस नज़रिये से ये मज़बूती देखती है”...निर्देशक, अजित आर राजपाल 
लुधियाना:12 दिसंबर 2017:(पंजाब स्क्रीन टीम)::
आजकल हर जगह नारी शक्ति की बहुत चर्चा होती है कि किस तरह आजकल महिलायें हर क्षेत्र में आगे बड़ रही हैं।  वो चाहें अपने घरों में रह रही हों या बाहर काम कर रही हों, वे एक स्वतंत्र दृष्टिकोण का दावा करती हैं। वे अपने जीवन पर नियंत्रण प्राप्त कर रही हैं और अपने शिक्षा, कैरियर, पेशे और जीवनशैली के संबंध में अपना निर्णय खुद ले रही हैं। पंजाब सबसे बड़ा राज्य है, जिसने सबसे अधिक महिला योद्धाओं को जन्म दिया है, परन्तु आज हम अपनी मजबूत पकड़ को अपने साहसी दायरे से लुप्त होते देख रहे है। निर्देशक अजित आर राजपाल ने बताया के हमारी महिलाओं का जीवन बेहतर बनाने व उन के साहस को रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में इस्तेमाल करने की हमारी ये छोटी सी कोशिश है। इस पंजाबी फिल्म में पंजाब के पांच अलग-अलग शहरों की सिख लड़कियों हैं, जो पीड़ा से गुज़रती हैं, लेकिन सब एक जुट हो कर हर कठिनाई का डट के मुकाबला करती हैं। विजय उनके कदम चूमती है। 
निर्देशक अजित आर राजपाल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में हम दृष्टि ग्रेवाल, डियाना उप्पल, निर्मल ऋषि, नीत कौर, स्वाति बक्शी, चैतैन्य कन्हाई, तनविसर सिंह व शशि किरण को हम अहम किरदारों में देखेंगे।दिल्लीवुड स्टुडिओज़ प्राइवेट लिमिटेड के बैनर में बनी इस फिल्म के निर्माता हैं राकेश चौधरी, सुरेश चौधरी व् वसीम पाशा. अजित आर राजपाल ने लिखी है इस की कहानी और सोहेब सिद्दीक़ी हैं इस के छायाचित्र निर्देशक. फिल्म को वाइट हिल स्टूडियोज द्वारा डिस्ट्रीब्यूट किया जा रहा है। ये फिल्म 15 दिसम्बर 2017 को रिलीज़ हो रही है। 
मीडिया से बातचीत के दौरान निर्देशक अजित आर राजपाल ने बताया, "हार्ड कौर, पंजाबी सिनेमा का सबसे बेहतरीन उदाहरण है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण को अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में पेश करेगी।" उन्होंने आगे फिल्म के सार के बारे में बताया, "ये कहानी एक कौर की है जो एक स्कूल टीचर है और जो रोज़ एक लोकल बस द्धारा पटियाला से दोंक्ला से राजपुरा बाईपास तक सफर करती है और इस दौरान उस की मुलाक़ात एक बहुत ही अमीर लड़के से होती है जो कि हरियाणा से है। यहीं पर किस तरह से उस की ज़िन्दगी एक मोड़ लेती है जब चलती बस में एक खून हो जाता है और किस तरह ये मासूम लड़की उस खून के मामले में फस जाती है। कहानी नाज़ुक मोड़ लेती है।  किस तरह बाकी की चार कौर एकजुट हो कर इस लड़की को न्याय दिलाती हैं।" महिका एकता और सशक्तिकरण की एक दिलचस्प कहानी है हार्ड कौर। 
निर्माता  राकेश चौधरी, सुरेश चौधरी व वसीम पाशा ने बताया, "डेलीवुड स्टुडिओज़ प्राइवेट लिमिटेड के लिए, एक शानदार फिल्म "हार्ड कौर" जैसी फिल्म का निर्माण करना एक गर्व की बात है। हम क्षेत्रीय सिनेमा को एक  उच्च स्तर देने में बहुत गर्व महसूस करते हैं".
लीड एक्टर, चैतन्य कन्हई, ने भी बताया, "मैं इस तरह के कांसेप्ट व कंटेंट वाली फिल्म कर बहुत ही खुश हूँ और मुझे पूरी उम्मीद है के दर्शक इस फिल्म को ज़रूर पसंद करेंगे।"
इस फिल्म मे चार गाने है जिन्हें गाया है नछत्तर गिल, प्रभ गिल, नूरां सिस्टर्ज व अमन त्रिखा ने। इन  गीतों को लिखा है अनिल जींजर, राजवीर सिंह प्रजापति, सोनू ललका, कुंवर वड़ैच, ऐ एम तुराज व रवि बसनेट ने।  संगीत दिया है प्रतीक, अम्बिका, शिवा रामगड़िआ, एनकी व बबली हक़ ने। 

Thursday, July 27, 2017

"जब हैरी मेट सेजल" के अगले गाने "हवाइयां" का अनावरण

Thu, Jul 27, 2017 at 18:51
4 अगस्त, 2017 को देशभर में रिलीज होगी "जब हैरी मेट सेजल"
सुर्यास्त के बीच अपनी खूबसूरत डेट के दौरान शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा ने "जब हैरी मेट सेजल" के अगले गाने "हवाइयां" का आगमन किया। Click Here To See More Pics on FB
मुंबई के उपनगरीय में एक समुद्र के किनारे सूर्यास्त के बीच बड़ी ही धूमधाम और जोश के साथ 'जब हैरी मेट सेजल' का नया गीत 'हवाइयां' का अनावरण किया गया।

26 जुलाई 2017 की शाम ढलते हुए सूरज और ताज़ा खुली हवा के बीच गीत "हवाइयां" को रिलीज किया गया।

इस खूबसूरत समा में शाहरुख खान का सर्वश्रेष्ठ रोमांटिक अवतार देखने मिला, जहाँ शाहरुख पूरी तरह से अपने किरादर हैरी के ढल गए थे और अपनी खूबसूरत सेजल को आकर्षित करने में हैरी ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
गीत के लॉन्च के दौरान प्रीतम ने फ़िल्म के गीत "सफर" पर भावपूर्ण धुनों के साथ प्रदर्शन कर इस माहौल में चार चाँद लगा दिए। 
निर्देशक इम्तियाज अली ने ट्रैक के बारे में ढ़ेर सारी बाते की और फिल्म से जुड़े कुछ पर्दे के पीछे वाले दृश्यों को भी साझा किया।
"जब हैरी मेट सेजल" के इस नए गीत में हैरी और सेजल द्वारा साझा किए रोमांटिक पलों को उजागर किया गया है, जिसने हमें दोनों मुख्य पात्रों के जीवन के ओर करीब खींच लिया है।
इम्तियाज अली द्वारा निर्देशित, जब हैरी मेट सेजल में शाहरुख खान उर्फ हैरी एक पर्यटक गाईड के रूप में नज़र आएंगे, और अनुष्का शर्मा उर्फ सेजल एक वकील है और वो यूरोप की सैर पर निकली है।
रेड चिलीज एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित और इम्तियाज अली द्वारा निर्देशित  फिल्म "जब हैरी मेट सेजल" 4 अगस्त, 2017 को देशभर में रिलीज होगी।

Sunday, June 18, 2017

पत्थरों के शहर में शीशे की बात करती परमिंदर कौर

इस बार सामना हुआ एक फिल्म की ऑडिशन में  
लुधियाना: 18 जून 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::  More Pics on Facebook
ज़िंदगी बहुत से सवाल पूछती है। सवाल भी बहुत ही मासूम से लगते हैं।बिलकुल भोलेभाले से महसूस होते हैं लेकिन परेशान कर देते हैं। इनका जवाब नहीं सूझता। घर में दाल रोटी की जंग।  रास्ते में महंगे होते पैट्रोल डीज़ल की जंग। अख़बारों में कश्मीर के आतंकवाद की जंग। कुल मिला कर ज़िंदगी का चैन दूर की कौड़ी लगने लगता है पर इस तरह के गंभीर माहौल के बावजूद भी करिश्मे हो ही जाते हैं। परमिंदर कौर और उनकी टीम इसी तरह के करिश्मों से एक हैं। घुटन भरे माहौल में ताज़ी हवा के झौंके जैसी। 
शुद्ध मुनाफे की सोच से भरे इस स्वार्थी और मशीनी युग में कला की बात करना किसी करिश्मे से कम तो नहीं। हालांकि इसमें बहुत से खतरे भी हैं लेकिन फिर भी परमिंदर कौर लगातार सक्रिय रहती है। कभी नन्हे मुन्ने बच्चों की प्रतिभा को उड़ान देनी और कभी बड़ी उम्र के लोगों में दब गयी या छिप गयी कला को बाहर लाना। कलाकारों का चयन, कलाकारों की प्रतिभा को पहचान कर उसका विश्लेषण करने वाले जजों का चयन और फिर कलाकारों की कला को और चमकने के लिए विशेषज्ञों का चयन। इन सब को एक मंच पर लाना आसान नहीं होता लेकिन परमिंदर कौर यह सब करती हैं बहुत कुशलता से।
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इस बार मैडम परमिंदर कौर से मुलाकात हुई एक ऑडिशन टैस्ट में। मॉडल टाऊन एक्सटेंशन की मार्किट में कलाकारों का चयन था। मकसद था हरदीप सिंह खंगूड़ा की  मूवी के लिए कलाकारों का चुनाव। जज की भूमिका निभाने वालों में थे थिएटर के जाने पहचाने हस्ताक्षर तरलोचन सिंह, पॉलीवुड से जुड़े हुए विजय शर्मा और निदेशक व  कोरियोग्राफर वरुण राजपूत।
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इस ऑडिशन में गायन और अदाकारी के साथ साथ डांस  गया और आवाज़ का भी। लेखन का स्तर भी देखा गया और प्रस्तुतिकरण भी। सुबह 9 बजे से शुरू हुई प्रक्रिया शाम पांच बजे के बाद तक भी जारी रही। बहुत सी नयी प्रतिभाएं सामने आयीं। बहुत से चेहरों पर उम्मीद की चमक दिखाई दी। बहुत से मनों में आसमान छूने के हिम्मत जगी। सपने ने नई करवट ली। ज़िम्मेदारियों के बोझ में छुपी दबी प्रतिभा एक नई  अंगड़ाई ले कर बाहर आई। यह लोह वो कलाकार थे जिन्होंने दुनियादारी को निभाते हुए भी अभी तक अपने अंतर्मन में छुपी कला को मरने नहीं दिया था। उनके अंदर की संवेदना इस बेरहम युग में भी ज़िंदा है। उनको अभी भी संगीत में स्कून महसूस होता है। उनके पाँव अभी भी अंदर से सुनाई देते किसी संगीत पर थिरकते हैं। उनको अभी अभी पहाड़ों और झरनों की सुंदरता का संगीत सुनाई देता है।  उनको प्रकृति की कलात्मक आवाज़ें अभी भी बुलाती हैं। ये वो कलाकार थे जिन्होंने न तनावों भरी ज़िंदगी के सामने हार मानी और न ही बढ़ती हुई उम्र के सामने घुटने टेके। इनके चेहरे अंतर्मन में रौशन किसी मशाल की रौशनी से दमक रहे थे। उम्मीद करनी चाहिए कि इनको जल्द ही नई  पहचान मिलेगी किसी नई  फिल्म में, किसी सीरियल में या किसी और मंच पर।
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Friday, March 17, 2017

जिंदुआ’ रोमांस, इमोशन्स और रिश्तों का त्रिकोण

17 को सिनेमा हाल में देखिये हंसी,आँसू और मुस्कुराहटों की कहानी
लुधियाना: 16 मार्च 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::   For More Pics Please Click Here
कभी-कभी एक सच हज़ारों झूठ से बुरा होता है और एक ऐसी फिल्म जो एक सरल रोमैन्टिक कहानी की तरह लगती है वो अचानक से एक ऐसा टर्न लेती है जो लोगों को उनकी सीटों से जोड़े रखेगी और उन्हें जिंदगी के अलग रंगों और इमोशन का अनुभव करवाएगी। ओहरी प्रोडक्शन और इन्फेन्ट्री पिक्चर्ज़ जिनके सहयोगी हैं यदु प्रोडक्शन लेकर आए हैं अपनी प्रस्तुति ‘जिंदुआ’ जिसमें अहम किरदार में नज़र आएंगे एक्टर जिम्मी शेरगिल, ऐक्ट्रस नीरू बाजवा, सरगुन मेहता और हास्य कलाकार राजीव ठाकुर।
फिल्म की कहानी एक्टर जिम्मी शेरगिल, ऐक्ट्रिस नीरू बाजवा, सरगुन मेहता इन तीन किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। यह फिल्म डायरेक्शन है मशहूर नवनियत सिंह की, फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले किया है धीरज रत्न ने। फिल्म का म्यूज़िक दिया है मशहूर जयदेव कुमार, प्रोफे-सी और अर्जुना हरजाई ने। फिल्म का म्यूज़िक स्पीड रेकार्ड द्वारा लेबल किया गया है।
फिल्म के बारे में बात करते हुए एक्टर जिम्मी शेरगिल ने कहा कि, “फिल्म ड्रामा, रोमैन्स, इमोशन और रोमांच से भरी है। स्क्रिप्ट ने मुझे बेहद आकर्षित किया और फिल्म की पूरी कास्ट ने बेहतरीन तरीके से काम किया। मैं इस फिल्म का हिस्सा बन कर बेहद खुश हूँ। फिल्म पूरी तरह से आपको रिश्तों का एहसास करवाएगी”।
ऐक्ट्रिस सरगुन मेहता ने कहा कि, “मैं रिलीज़ के लिए बेहद इक्साइटिड हूँ। फिल्म की कहानी दिल को छू जाने वाली है जिसमें हर एक किरदार बेहद उभर कर आ रहा है। फिल्म आपको फैमिली और रिश्तों की अहमियत के बारे में बताती है। मैं उम्मीद करती हूँ कि लोग भी इस फिल्म को उतना ही पसंद करेंगे जितना कि मैनें किया”।
मशहूर हास्य कलाकार राजीव ठाकुर ने कहा कि, “फिल्म आपको प्यार की एक अलग ही साइड दिखाएगी जिसमें आपको लव ट्राइऐंगल का ट्विस्ट दिखेगा। ये फिल्म लोगों को तीन अलग किरदारों की लव जर्नी पर लेकर जाएगी। वहीं फिल्म की पूरी कास्ट और क्रू काफी सपोर्टिव थी और हम सब ने अपना बैस्ट दिया है”।
फिल्म के डिरेक्टर नवनियत सिंह ने कहा की, “फिल्म की सबसे अहम बात यह है की ये फिल्म न केवल कपल्स को बल्कि सभी को पसंद आएगी। ये फिल्म रिश्तों और उनकी अहमियत पर आधारित है और हमें उम्मीद है कि हमारी मेहनत लोगों को खूब पसंद आएगी”। तो हो जाइए तैयार और खो जाइए जिंदुआ के रंगों और इमोशन्स में। For More Pics Please Click Here

Monday, February 06, 2017

महान 'देशभक्त शायर प्रदीप को 102वें जन्मदिन पर शत शत नमन

जानेमाने पत्रकार इक़बाल सिंह चन्ना ने फिर ताज़ा की पुरानी यादें
ऐ मेरे वतन के लोगो

ज़रा आँख में भर लो पानी... 
भारत के महान 'देशभक्त शायर' कवि प्रदीप को 102वें जन्मदिन पर शत शत नमन !
आज देशभक्ति के गीत लिखने वाले भारत के महान शायर कवी प्रदीप का जन्मदिन है !
भारत चीन के 1962 के युद्ध के पश्चात दिल्ली के लाल किले पर जब लाता मंगेशकर ने प्रदीप का लिखा गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगो ज़रा आँख में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी...' गाया तो वहां बैठे तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ली आँखें भर आई थीं।
कवी प्रदीप का जन्म 6 फरवरी 1915 को उज्जैन के पास बड़नगर में हुआ था। उनका असल नाम रामचंद्र नारायणजी दिवेदी था। 1939 में उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की थी। कॉलेज के दिनों के दौरान ही उन्होंने कविता लिखनी शुरू कर दी थी। अपनी रचना वह गाकर सुनाते थे, इसीलिए वह मुशायरों में बहुत पॉपुलर हो गए थे। इसी दौरान उन्होंने अपना 'पेन नेम' प्रदीप रख लिया था।
1939 में मुम्बई में हुए रक कवी सम्मेलन दौरान बॉम्बे टॉकी के हिमांशु रॉय ने उन्हें अपनी फिल्म 'कंगन' के लिए गीत लिखने को कहा। वह मुम्बई आ गए, उनके लिखे फिल्म के चार गीत बहुत मशहूर हुए और वह फ़िल्म इंडस्ट्री में पैर जमाने में सफल हो गए। 1940 में फिल्म बंधन के लिए लिखा उनका गीत 'चल चल रे नौजवान ..' हर ज़ुबान पर आ गया क्योंकि उस समय भारत की आज़ादी का आंदोलन शिखर पर था। 1943 में फिल्म 'किस्मत' के इंकलाबी गीत 'दूर हटो ऐ दुनिया वालो...' इतना प्रसिद्ध  हुआ कि वह ब्रिटिश सरकार के लिए वांटेड हो गए और कई वर्ष भूमिगत रहना पड़ा।
क्वी प्रदीप का ज्यादा रुझान देशभक्ति और धार्मिक शायरी की तरफ ही रहा। उनके लिखे कुछ अमर गीत हैं :
- ऐ मेरे वेतन के लोगो ज़रा आंक में भर लो पानी...
- चल चल रे नौजवान... (बंधन)
-आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है, दूर हटो ऐ दुनिया वालो हिंदुस्तान हमारा है... (किस्मत)
- देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान, कितना बदल गया इंसान... (नास्तिक)
- हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के...(जाग्रति)
-पिंजरे के पंछी रे...( नागमणि)
- इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैग़ाम हमारा... (पैग़ाम)
- भारत के लिए भगवान् का इक वरदान है गंगा... (हर हर गंगे)
- अँधेरे में जो बैठे हैं, नज़र उन पर भी कुछ डालो... (संबंध)
- मैं तो आरती उतारूं रे, संतोषी माता की... (जय संरोशी माँ)
1997 में भारत सरकार ने उन्हें सबसे बड़े फ़िल्मी अवार्ड 'दादा साहेब फाल्के अवार्ड' से सम्मानित किया था।   
11 दिसम्बर 1998 को 83 वर्ष की आयु में मुम्बई में कवी प्रदीप जी का निधन हुआ।

Wednesday, November 23, 2016

IFFI-2016: सुश्री रोसाली वार्डा

गोवा के पणजी में असीम छाबरा के साथ

फ्रांस की कॉस्ट्यूम डिजाइनर और कलात्‍मक निर्देशक सुश्री रोसाली वार्डा, 23 नवंबर 2016 को गोवा के पणजी में भारत के 47वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई-2016) में असीम छाबरा के साथ कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग मास्‍टरपीस पर बात रखते हुए। (वीएस/वाईबी, पीआईबी, हिंदी इकाई)
The Costume Designer and Artistic Director, France, Ms. Rosalie Varda at the Costume Designing Masterclass with Aseem Chhabra, during the 47th International Film Festival of India (IFFI-2016), in Panaji, Goa on November 23, 2016.


Thursday, August 25, 2016

भारत प्रथम ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव की मेजबानी करेगा

24-अगस्त-2016 20:36 IST

मलयालम फिल्‍म ‘वीरम’ से होगा इस महोत्‍सव का शुभारंभ होगा 
ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव सिनेमा, संस्‍कृति एवं व्‍यंजनों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशेगा: वेंकैया नायडू 
The Union Minister for Urban Development, Housing & Urban Poverty Alleviation and Information & Broadcasting, Shri M. Venkaiah Naidu addressing the Press Conference on the BRICS Film Festival, in New Delhi on August 24, 2016. The Minister of State for Information & Broadcasting, Col. Rajyavardhan Singh Rathore and the Director General (M&C), Press Information Bureau, Shri A.P. Frank Noronha are also seen
नई  दिल्ली: 24 अगस्त 2016: (पसूका
सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव के आयोजन का विचार सबसे पहले पिछले ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन में उभर कर सामने आया था, जिसमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव और फिल्‍म पुरस्‍कारों का प्रस्‍ताव किया था। जल्‍द ही आयोजित किया जाने वाला यह फिल्‍म महोत्‍सव सदस्‍य देशों के फिल्‍म उद्योग से जुड़े लोगों के लिए एक ऐसा मंच होगा, जिसमें ‘सिनेमा, संस्‍कृति और व्‍यंजनों’ के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा सकेंगी। इस महोत्‍सव के दौरान फिल्‍म निर्माताओं, अभिनेताओं और निर्देशकों को पुरस्‍कृत कर सिनेमा की उत्‍कृष्‍टता का जश्‍न मनाया जाएगा। मंत्री महोदय ने आज यहां नेशनल मीडिया सेंटर में ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव के पूर्वालोकन के संबंध में आयोजित संवाददाता सम्‍मेलन के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन 
श्री नायडू ने इस बात का उल्‍लेख किया कि भारत की ब्रिक्‍स अध्‍यक्षता, जिसका शुभारंभ गोवा में 15-16 अक्‍टूबर को होगा, के तहत शिखर सम्‍मेलन की थीम को ध्‍यान में रखते हुए पांच आयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है। यह थीम ‘उत्तरदायी, समावेशी और सामूहिक समाधान का निर्माण’ है। पांच आयामी दृष्टिकोण में निम्‍नलिखित शामिल हैं –

*       ब्रिक्‍स संबंधी सहयोग को और गहरा करने, टिकाऊ बनाने एवं संस्‍थागत रूप देने के लिए संस्‍थान का निर्माण करना।



*         पिछले शिखर सम्‍मेलनों में लिए गए निर्णयों पर अमल।

*        वर्तमान सहयोग व्‍यवस्‍थाओं को एकीकृत करना।

*         नवाचार अर्थात नवीन सहयोगात्‍मक व्‍यवस्‍थाएं।

*       निरंतरता अर्थात आपसी सहमति वाली मौजूदा ब्रिक्‍स सहयोगात्‍मक व्‍यवस्‍थाओं को जारी रखना।

इस बारे में विस्‍तृत जानकारी देते हुए श्री नायडू ने कहा कि ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव एक बॉयोस्कोप होगा, जिसमें सहभागिता करने वाले देशों की विशिष्‍ट संस्‍कृतियों, व्‍यंजनों और कलाओं को दर्शाया जाएगा। ब्रिक्‍स देशों के बीच सहभागिता बढ़ाने एवं सदभाव पैदा करने के उद्देश्‍य से यह महोत्‍सव आयोजित किया जा रहा है, जो सदस्‍य देशों के लोगों विशेषकर युवाओं के बीच और ज्‍यादा संपर्क सुनिश्चित करेगा। इस संदर्भ में मंत्री महोदय ने कहा कि भारत ने इस महोत्‍सव के दौरान अनेक आयोजनों की योजना बनाई है, जिनमें 17 साल से कम आयु के खिलाडि़यों के लिए फुटबॉल टूर्नामेंट, युवा शिखर सम्‍मेलन, युवा राजनयिकों का फोरम और कुछ ब्रिक्‍स देशों के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई फिल्‍मों की विशेष स्क्रीनिंग शामिल हैं। श्री नायडू ने ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव के लिए एक पोस्‍टर का भी अनावरण किया।

ब्रिक्स फिल्म महोत्सव नई दिल्ली के सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में 2 सितंबर, 2016 से 6 सितंबर, 2016 तक आयोजित होगा। पांच दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रतिस्पर्धा वर्ग में 20 फिल्में दिखाई जाएंगी। सभी देशों से चार फिल्में होंगी। ब्रिक्स के सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की सांस्कृतिक मेल, फिल्म, गीत एवं नृत्य और खान-पान की झलक इन फिल्मों में देखी जा सकेगी। सभी ब्रिक्स राष्ट्रों का मुख्य व्यंजन फूड कोर्ट में उपलब्ध रहेगा। इसका प्रबंधन महोत्सव स्थल पर विशेष रूप से किया गया है। सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम परिसर में शिल्प मेले का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें सभी सदस्य देश अपने-अपने यहां के विशिष्ट सामान बेचने के लिए स्टॉल लगाएंगे।
फिल्मों से अलग चेंगदू परफॉर्मिंग आर्ट थिएटर (चीन), थिएटर लेनिनग्राड सेंटर ड्रीम्स ऑफ रशिया और एमबीजेड म्यूजिक प्रोडक्शन (दक्षिण अफ्रीका) के कलाकार भी महोत्सव के दौरान मंच कला का प्रदर्शन करेंगे।
ब्रिक्स फिल्म महोत्सव नई दिल्ली के सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में 2 सितंबर, 2016 से 6 सितंबर, 2016 तक आयोजित होगा। पांच दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रतिस्पर्धा वर्ग में 20 फिल्में दिखाई जाएंगी। सभी देशों से चार फिल्में होंगी। ब्रिक्स के सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की सांस्कृतिक मेल, फिल्म, गीत एवं नृत्य और खान-पान की झलक इन फिल्मों में देखी जा सकेगी। सभी ब्रिक्स राष्ट्रों का मुख्य व्यंजन फूड कोर्ट में उपलब्ध रहेगा। इसका प्रबंधन महोत्सव स्थल पर विशेष रूप से किया गया है। सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम परिसर में शिल्प मेले का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें सभी सदस्य देश अपने-अपने यहां के विशिष्ट सामान बेचने के लिए स्टॉल लगाएंगे।
फिल्मों से अलग चेंगदू परफॉर्मिंग आर्ट थिएटर (चीन), थिएटर लेनिनग्राड सेंटर ड्रीम्स ऑफ रशिया और एमबीजेड म्यूजिक प्रोडक्शन (दक्षिण अफ्रीका) के कलाकार भी महोत्सव के दौरान मंच कला का प्रदर्शन करेंगे।
भाग ले रहे सभी पांच देशों की प्रतिस्पर्धा वर्ग में दिखाई जाने वाली फिल्में इस तरह हैं:


ब्राजील
रूस
भारत
चीन
दक्षिण अफ्रीका
बिटवीन वैलीज
निर्देशकः फिलीप बारसिंकी
14+
निर्देशकः आंद्रे ज़ेटसीव
बाहुबली -द बिगनिंग
निर्देशकः एस.एस. राजामौली
बुक ऑफ लव
निर्देशकः जीयलो जू
 फ्री स्टेट
निर्देशकः सालास दी जेगर
रोड 47
निर्देशकः विंसेंट फैराज
अबाउट लव
निर्देशकः एना मेलीकिया
बाजीराव मस्तानी
निर्देशकः संजय लीला भंसाली
गो अवे मिस्टर ट्यूमर
निर्देशकः हान यान
कलूशी
निर्देशकः मंडला दूबे
द हिस्ट्री ऑफ एटरनिटी
निर्देशकः केमिलो केवलकेंटे
द बैटल ऑफ सिवास्तोपोल
निर्देशकः सर्गी मोक्ट्जिकाई
सिनेमावाला
निर्देशकः कौशिक गांगुली
सांग्स ऑफ द फोनिक्स
निर्देशकः त्यां मिंग वू
मिसेज राइट गाय
निर्देशकः एडजी उगा
दे विल कम बैक
निर्देशकः मारसेलो लोर्डएलो
वेरी बेस्ट डे
निर्देशकः जोहरा क्रिजोवनीका
तिथि
निर्देशकः राम रेड्डी
जुआन जैंग
निर्देशकः जियांक़ हू
टेस
निर्देशकः मेग रिकर्ड्स
 PIB 

Monday, July 25, 2016

महान मनोज कुमार जी को 79वें जन्मदिन की हार्दिक बधाई !

भारत का रहने वाला हूँ भारत की बात बताता हूँ…
आज महान एक्टर और फिल्ममेकर मनोज कुमार का 79वां जन्मदिन है । इस में कभी दो राय नहीं हुई कि मनोज कुमार देश भक्ति और भारत की साथ सुथरी छवी का संदेश देने वाली फिल्मों के सिर्जनहार हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि फ़िल्मी हेरोइनों के पीछे भागने और लिपटने चिपटने वाले रोल उन्होंने इसलिए नही किये कि वह फिल्मों से एक संदेश देने की हमेशा इच्छा रखते थे इसलिए फिल्म बड़ा सोच समझ कर साइन करते थे। उन्हें अपनी इमेज की बड़ी चिंता रहती थी। कहते हैं: “मैंने ज़िंदगी में दूसरे समकाली हीरोज़ की तरह 250-300 फिल्मे नहीं कीं, बड़ी मुश्किल से 50 की होंगी, लेकिन मुझे इस बात से संतुष्टि है कि मैंने अपनी कला को बिकने नहीं दिया !"
शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम, रोटी कपडा और मकान व् क्रांति जैसी देश भक्ति भरी फिल्मों के सिर्जनहार मनोज कुमार के अंदर देश प्रेम और देशभक्ति का जज्बा कूट कूट कर भरा हुआ है। आज भी शहीद भगत सिंह की बातें करते उनकी आँखों में से पानी उछल जाता है।
24 जुलाई 1937 को एबोटाबाद में पैदा हुए हरी कृष्ण गोस्वामी 10 वर्ष के थे कि देश के बटवारे समय परिवार समेत दिल्ली आकर रिफ्यूजी कैम्पों में रहना पड़ा। दिल्ली से ग्रेजुएशन करने के बाद एक्टर बनने की इच्छा लेकर वो मुम्बई आ गए।
1957 में फिल्म ‘फैशन’ में छोटा सा रोल करने के बाद 1960 में सईदा खान के साथ ‘कांच की चूड़ियां’ में पहली बार हीरो बने। 1962 में विजय भट्ट की फिल्म ‘हरयाली और रास्ता’ की सफलता ने उन्हें स्टार बना दिया।
उन्होंने भले ही 50 के करीब फिल्मो में काम किया लेकिन उनकी सफलता का रिकॉर्ड बहुत ही बढ़िया रहा। कुछ कामयाब फ़िल्में हैं : हिमालय की गोद में, वह कौन थी, हरयाली और रास्ता, शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम, शोर, रोटी कपडा और मकान, दो बदन, सावन की घटा गुमराह, पत्थर के सनम, नील कमल, साजन, आदमी, यादगार, पहचान, मेरा नाम जोकर, बलिदान, बेईमान, सन्यासी, दस नम्बरी, अमानत, क्रांति, और भी बहुत।
जन्मदिन पर उनकी फिल्मों में उन पर फिल्माए कुछ यादगारी गीत हैं:
- मेरे देश की धरती सोना उगले… (उपकार)
- भारत का रहने वाला हूँ भारत की बात बताता हूँ… (पूरब और पश्चिम)
- कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे… (पूरब और पश्चिम)
- मेरा रंग दे बसंती चोला… (शहीद)
- ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी कसम… (शहीद)
- मैं न भूलूंगा, इन रस्मों को… (रोटी कपडा और मकान)
- तेरी याद दिल से भुलाने चला हूँ… (हरयाली और रास्ता)
- चाँद सी मेहबूब हो मेरी कब ऐसा मैंने सोचा था… (हिमालय की गोद में)
- रहा गर्दिशों में हरदम मेरे इश्क़ का सितारा… (दो बदन)
- मेरी जान तुझपे सदके, अहसान इतना कर दो… (सावन की घटा)
- इक प्यार का नग़मा है…(शोर)
- ज़िंदगी की न टूटे लड़ी… (क्रांति)
1966 में उनकी फिल्म ‘शहीद’ ने बेस्ट फिल्म का नेशनल अवार्ड जीता और 1967 में ‘उपकार’ को सेकंड बेस्ट फिल्म का नेशनल अवार्ड मिला।
1968 में ‘उपकार’ ने बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्टोरी और बेस्ट डायलाग का फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड जीता। बेस्ट डायरेक्टर (रोटी कपडा और मकान -1975) बेस्ट एक्टर (पहचान और बेईमान) फिल्म फेयर अवार्ड भी उनके नाम हौं।
हाल ही में उन्हें वर्ष 2016 के लिए देश के सबसे बड़े फ़िल्मी सम्मान ‘दादा साहेब फाल्के अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।
मेरी खुशकिस्मती है पिछले 20 वर्ष से उनके साथ एक अज़ीज़ दोस्त की तरह मेरी एसोसिएशन है।
जन्मदिन के अवसर पर बहुत बहुत बधाई सर !                              Iqbal Singh Channa

Friday, July 08, 2016

यह उनके साथ आखरी मुलाकात थी

Iqbal Singh Channa posted on July 7 at 7:51pm
नहीं रहे मेरे परम मित्र ओमी जी
Sansaar Hai Ik Nadiya, Dukh Sukh Do Kinare Hain...
Salute to a Gentleman Music Director, and above that my dear friend OMI Ji (SONIK OMI) who is no more with us !
ओमी जी और हसन कमाल जी   पत्रकार इक़बाल---आखरी मुलाक़ात
संसार है इक नादिया, दुख सुख दो किनारे है ...
एक मिलनसार संगीतकार, और उस से भी बढ़कर मेरे परम मित्र ओमी जी (सोनिक ओमी) नहीं रहे !
आज दोपहर ओमी जी के देहांत का दुखद समाचार सुनने को मिला। झटका सा लगा।
कुछ समय पहले ही मैं और मेरा दोस्त शिव दत्त अक्स IPRS के ऑफिस गये तो ओमी जी और हसन कमाल जी मिल गए। एक घंटा हम पुराणी यादें ताज़ा करते रहे। कहने लगे-मैं 75 का हो गया हूँ। मैंने कहा-ओमी जी देखने से तो ऐसा लगता है कि आप 50 की तरफ जा रहे हो! यह उनके साथ आखरी मुलाकात थी!
ओमी जी के साथ करीबी दोस्ती बन गयी थी। एक वक़्त ऐसा था क़ि उनके घर, मेरे घर या पंजाबी निर्देशक सुखी धंजल के घर हमने बहुत महफिलें सजाईं। कोलकाता और थाईलैंड में भी कई कई दिन इकट्ठे रहे। लेकिन आज वह हमें और इस संसार को अलविदा कह गए हैं।
सोनिक-ओमी (चाचा भतीजा) की संगीतकार जोड़ी ने बड़ा हिट म्यूजिक दिया है-
- इशारों को अगर समझी राज़ को राज़ रहने दो ..(धर्मा)
- संसार है इक नादिया, दुःख सुख दो किनारे हैं...(रफ़्तार)
- मैंने तेरे लिए जग छोड़ा तू मुझको छोड़ चली...(महुआ)
- कान में झुमका, चाल में ठुमका, कमर पे चोटी लमके...(सावन भादों)

संगीतकार के तौर पर उनकी पहली फिल्म " दिल ने फिर याद किया" एक म्यूजिकल ब्लॉक बस्टर थी । सारे गाने हिट-
- दिल ने फिर याद किया...
- हमने जलवा दिखाया तो जल जाओगे...
- आजा रे प्यार पुकारे...
- लो चेहरा सुर्ख शराब हुआ...
- कलियों ने घूघट खोले...

वाह !
शत शत नमन! हम आपको मिस करते रहेंगे ओमी जी !

Thursday, September 10, 2015

फिल्म जिन्दा सुक्खा: पहले मंजूरी अब पाबंदी

सेंसर बोर्ड या थाली का बैंगन?
चंडीगढ़: 9 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):  
जानीमानी कलाकारा सुनीता धीर 
फिल्म की घोषणा से ले कर उसके टाइटल रजिस्टर्ड होने, फिर शूटिंग होने और फिर अन्य कई पेचीदा किस्म की प्रक्रियायों से गुज़र कर उसके रलीज होने तक बहुत कुछ ऐसा होता है जो जग ज़ाहिर होता है। न  के लिए उसके पता लगाना मुश्किल होता है और न ही फिल्म निर्माण से जुडी संस्थाओं के लिए। इस सबके साथ एक एक ऐसा वर्ग होता है जो फिल्म निर्माण को संतान की तरह देखता है। यह वर्ग होता है कलाकारों का, लेखकों का, गीतकारों का, और दर्शकों का भी। कलाकार के लिए फिल उसके कैरियर और रोज़ी रोटी से जुडी होती है। जब तक फिल्म निर्माण चलता है उसका सारा ध्यान फिल्म पर केंद्रित होता है और जब फिल्म बन जाती है तो सारा ध्यान उसकी रिलीज़ पर केंद्रित हो जाता है। जब आखिरी दम तक मिली किसी मंजूरी को दरकिनार कर अचानक ही पाबंदी की घोषणा होती है तो सबसे अधिक निराशा होती है इस कलाकार वर्ग को। उसे ऐसा लगता है जैसे किसी ने भ्रूण हत्या कर दी हो। ऐसा महसूस होता है जैसे काटने को तैयार फसल को अचानक किसी ने आग के हवाले कर दिया हो। 
कुछ ऐसा ही हुआ है आगामी 11 सितंबर को रिलीज होने वाली पंजाबी फिल्म ‘मास्टर माइंड जिंदा सुक्खा’ कर मामले में। इस फिल्म पर रोक लगा दी गई है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पहले मंजूरी दे दी थी लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद इस पर पाबंदी लगा दी गई। मंत्रालय का कहना है कि इस फिल्म के रिलीज होने से पंजाब और आसपास के राज्यों मे हालात बिगड़ सकते हैं। फिल्म की टीम ने रोक लगने की पुष्टि की है। 
पाबंदी का एलान और इसकी वजह इतनी मासूमियत  से बयान की जाती है जैसे बेचारे सेंसर बोर्ड को कुछ पता ही न हो कि फिल्म किस मुद्दे पर थी, उसके हक़ और विरोध में कौन कौन थे, उसका क्या क्या असर हो सकता था। बहुत देर से सेंसर बोर्ड इस तरह की हरकतें कर रहा है कि फिल में एतराज़ की बात उसे बस सरकार के कहने पर ही पता चली हो। क्या फिल्म को पारित करते वक़्त इस बोर्ड ने कुछ नहीं देखा होता? 
फिल्म पर पाबंदी लगाने का कुछ संगठनों ने समर्थन किया है और कुछ ने विरोध। दल खालसा ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार को सिख विरोधी बताया है। उल्लेखनीय है कि यह फिल्म पूर्व सेना प्रमुख जनरल अरुण वैद्य के हत्यारों हरजिंदर सिंह जिंदा और सुखदेव सिंह सुक्खा के जीवन पर आधारित है। फिल्म बनाने वालों और फिल्म के समर्थकों ने इसे अपने नायकों पर बनी ऐतिहासिक फिल्म भी कहा है। अब देखना है कि फिल्म निर्माण से जुड़े कलाकारों और औनकी कला व कॅरियर के साथ खिलवाड़ कब तक जारी रहता है। 
फिल्म जिन्दा सुक्खा: पहले मंजूरी अब पाबंदी
सेंसर की भेंट:
1973 में फिल्म गर्म हवा का प्रदर्शन रोक गया 
1975 में  आंधी का प्रदर्शन रोक गया 
1977 में किस्सा कुर्सी का फिल्म पर पाबंदी सेंसर बोर्ड के कार्यालय से सारी रील उठवा कर जला दी 
1971 में सिक्किम फिल्म पर पाबंदी जिसे सितम्बर 2010 में हटा दी दिया गया।
1987 में फिल्म पति परमेश्वर की रेटिंग से इंकार किया गया 
1994 में फिल्म बैंडिट क्वीन पर पाबंदी 
1996 में फिल्म फायर पर पाबंदी 
2003 में फिल्म हवाएं पर पाबंदी जो नवंबर-१९८४ की घटनाओं से सबंधित थी। 
2005 में वर्ष 2004 की फिल्म ब्लैक फ्राईडे पर पाबंदी 
2005 में सिख व्विरोधी हिंसा पर पर बनी फिल्म अमु को कुछ आडियो कटस के बाद एडल्ट रेटिंग दी 
2005 में ही फिल्म वाटर हिन्दू संगठनों के ऐतराज़ पर रुकी और फिर मार्च 2007 में रिलीज़ हुई।
2014 में फिल्म कौम दे हीरे पर पाबंदी लगी  

Friday, February 20, 2015

क्या आपको अपने पति से डर लगता है?

सचमुच सच सच बताएं 
लुधियाना: 20 फ़रवरी 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
महिला वर्ग के बिना न घर की कल्पना हो सकती है, न ही परिवार की और न ही संसार की। महिलाओं के इस महत्व के बावजूद उनके सम्मान को लेकर टकराव का माहौल बना रहता है। महिला वर्ग ने बार बार अपमान सह कर भी इस दुनिया  को बहुत कुछ दिया है। इसके बदले में उन्हें हमेशां तिरस्कार और डर का माहौल मिला। डर का माहौल हर जगह उनकी तकदीर बनता चला गया। साहिर साहिब ने औरत की  हालत को देख कर ही कहा था-
तुलती है कहीं दीनारों में, बिकती है कहीं बाज़ारों में
नंगी नचवाई जाती है, ऐय्याशों के दरबारों में
ये वो बेइज़्ज़त चीज़ है जो, बंट जाती है इज़्ज़तदारों में
मर्दों के लिये हर ज़ुल्म रवाँ, औरत के लिये रोना भी खता
मर्दों के लिये लाखों सेजें, औरत के लिये बस एक चिता

मर्दों के लिये हर ऐश का हक़, औरत के लिये जीना भी सज़ा

इस  याद आती फिल्म पुतलीबाई की यादगारी कवाली--जिसमें बताया गया है कि जब औरत बनाने की बात चली तो भगवान ने क्या क्या एकत्र करके औरत बनाई। इस सारी सामग्री को ज़रा एक नज़र आप भी देख ही लीजिये:
 एक दिन बोले फ़रिश्ते करके ये दुनिया की सैर
या खुदा दुनिया तेरी सूनी है औरत के बग़ैर
उठ पडे हिकमत दिखाने के लिये क़ुदरत के हाथ

सोच ली मौला ने औरत को जन्म देने की बात
इस तरह मालिक ने की कारीगरी की इब्तिदा
चांद से मांगा उजाला नूर सूरज से लिया
रूप सैयारों से मांगा रूप ऊषा से लिया
पंखडी से ली नज़ाकत और कलियों से अदा
शाम से काजल लिया और सुबह से ग़ाज़ा लिया
बिजलियों से क़हर मांगा आग से ग़ुस्सा लिया
हौसला चट्टान से और दर्द पंछी से लिया
आसमां से ज़ुल्म मांगा सब्र धरती से लिया
शाख़ से अंगडाइयां झरनों से इठलाना लिया
बुलबुले से नाज़ुकी नद्दी से बल खाना लिया
आईनें से हैरतें तस्वीर से ख़ामोशियां
लहर से अठख़ेलियां मांगीं पवन से शोख़ियां
आंख ली हरनी से और शबनम से आंसू ले लिया
बदलियों से ज़ुल्फ़ नज़्ज़ारों से जादू ले लिया
लाजवंती से शर्म और रातरानी से हया
आबरू मोती से ली सूरजमुखी से ली वफ़ा
ज़हर नागिन से लिया और सांप से डसना लिया
काटना बिच्छू से मांगा तीर से चुभना लिया
लोमडी से मांग लीं ताउम्र की मक्कारियां

मक्खियों से शोर और मच्छर से लीं अय्यारियां
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औरत की क्षमता और शक्ति की चर्चा करना आवश्यक लगा वाटसअप पे एक तस्वीर को देख कर। इस तस्वीर को भी एक शुभ चिंतक ने भेजा है जिसमें पति से डरने  डरने वाली महिला की तुलना कीइस तस्वीर को देख कर सच्चे मन से बताएं कि क्या आपको अपने पति से डर लगता है? 

Monday, December 01, 2014

चार साहिबजादे की प्रमोशन के साथ जुड़े कई और संगठन

पत्रकार सम्मेलन में आलोचना का निशाना बना कटटरवाद
लुधियाना:1 दिसंबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
धार्मिक कटटरवाद एक बार फिर समाज के निशाने पर है। बहुत से सिख बुद्धिजीवियों ने कटटरता की सख्त शब्दों में निदा  की और सिख सिद्धांत को समझने पर ज़ोर दिया। इसके साथ ही चार साहिबजादे फिल्म को घर घर तक पहुँचाने का अभियान भी तेज़ किया गया।
शायद पंजाबी फिल्मों के इतिहास में पहली बार हुआ की प्रशसंकों और बुद्धिजीवियों ने मिलकर खुद ही एक मीडिया सम्मेलन किया जिसमें फिल्म की प्रमोशन के साथ साथ कटटरवाद को भी आड़े हाथों लिया गया। इसमें मौजूद बुद्धिजीवी गुरभजन सिंह गिल, डाक्टर अनुराग सिंह, शिक्षण संस्थानों की ओर से जगतार सिंह, इंडस्ट्री की करते तरफ से डीएस चावला, मंच संचालक डाक्टर  रणजोध सिंह और डाक्टर सीबिया कटटरवाद के खिलाफ खुल कर सामने आये। जानेमाने लेखक गुरभजन गिल से जब इस चर्चा की शुरुआत हुई तो उन्होंने पंजाबी फिल्मों के अतीत की भी चर्चा की साथ ही धन्यवाद भी दिया की अब जबकि चार साहिबजादे नामक फिल्म ने एक नया इतिहास रचा है तो शुक्र है कि कोई पागल व्यक्ति कुल्हाड़ा लेकर इसके खिलाफ खड़ा नहीं हुआ।  हम इस बात के लिए आभारी हैं।

इसके साथ ही जानेमाने उद्योगपति डी एस चावला ने गुरु इतिहास की चर्चा करते हुए बहुत सी अर्थपूर्ण बातें की और कटटरता को नकारा।

रामगढ़िया एजूकेशन कोंसिल की तरफ से जगतार सिंह ने भी यही कि वास्तव में सिख धर्म में कटटरता के लिए कोई स्थान नहीं।
जानेमाने इतिहासकार डाक्टर अनुराग सिंह ने भी कटटरता को नकारते हुए कहा कि यूट्यूब पर तरह तरह की बेहूदा बातें  करने वालों को अगर सामने आकर बात करने के लिए कहें तो वे मैदान छोड़कर भाग जाते हैं।  
मंच संचालन कर रहे डाक्टर रणजोध सिंह ने सिख धर्म के सिद्धांत को घर घर तक पहुँचाने वाली इस शानदार फिल्म चार साहिबजादे का उल्लेख करते हुए कटटरता की निंदा की और सलाह भी दी कि भविष्य में इस फिल्म  को पैमाना बनाया जाना चाहिए अब जो भी धार्मिक फिल्म बने वह इससे कम दर्जे की नहीं होनी चाहिए। इस फिल्म को एक स्टैंडर  पर रखा जाना चाहिए।
इस ऐतिहासिक अवसर पर गुरुघर के क्लीन शेव्ड श्रद्धालु राजीव साहनी भी मौजूद थे जिन्होंने इस  प्रमोशन के लिए कैलेंडर, छल्ले, मैग्नेट, पज़ल, तीर कमान, खड्ग और ढाल के साथ साथ पेन ड्राईव जैसे  भी  तैयार किये।
बाईट: राजीव साहनी (गुरु घर के अनिनय भक्त उअर प्रमोशन प्रोडक्ट के कंट्रीब्यूटर)
उम्मीद करनी चाहिए कि इस फिल्म के बहाने मुद्द्त के बाद एकजुट हुआ सिख समुदाय कटटरवाद के खिलाफ नई हवा पैदा करने में कामयाब होगा।