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Sunday, April 05, 2020

कोरोना//कोविड-19 के खिलाफ ज़ोरदार संयुक्त जंग जारी है

नाज़ुक हालात वाले देशों की मदद में जुटे यूएन शांतिरक्षा मिशन 
UN Photo//Michael Ali//काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र स्थिरता मिशन के शांतिरक्षक स्थानीय आबादी की मदद में 
कोरोना के खिलाफ जंग पर अपडेट//4 अप्रैल 2020//शांति और सुरक्षा
विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से विश्व भर में जनजीवन बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है लेकिन इस बीमारी से उपजी कई चुनौतियों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा मिशनों ने शांति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए अपना कार्य निरंतर जारी रखा है. साथ ही कोरोनावायरस के फैलाव की रोकथाम के लिए देशों की ओर से किए जा रहे प्रयासों को मज़बूती दी जा रही है।  
दुनिया भर में यूएन के 13 शांतिरक्षा अभियानों में 95 हज़ार से ज़्यादा सैन्य, पुलिस और असैनिक कर्मचारी तैनात हैं।  
संयुक्त राष्ट्र में शांतिरक्षा अभियानों के प्रमुख ज्यॉं पिए लाकोआ ने कहा कि शांतिरक्षा अभियानों को अपना अतिआवश्यक कार्यों को जारी रखने की क्षमता बरक़रार रखनी होगी ताकि हम ज़िंदगियों की रक्षा करने के दायित्व को पूरा कर सकें, लोगों के जीवन और यूएन कर्मचारियों की रक्षा कर सकें। 
यूएन महासचिव द्वारा तत्काल वैश्विक युद्धविराम की अपील की तर्ज़ पर यूएन शांतिरक्षा अभियान भी युद्धरत पक्षों को ‘बंदूकों को शांत’ करने, मानवीय राहत पहुंचाने के काम में मदद करने और कोविड-19 के ख़तरे से निपटने की दिशा में प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। 
अपने कर्मचारियों में कोविड-19 के फैलाव की रोकथाम के लिए संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा विभाग ने कई क़दम उठाए हैं और इसके तहत संबंधित देशों में स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम किया जा रहा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफ़ारिशों को लागू किया गया है।  
यूएन शांतिरक्षा अभियान प्रमुख लाकोआ ने बताया कि “ज़मीनी स्तर पर हमने तेज़ी से अतिरिक्त ऐहतियाती उपायों को अपनाया है और मेज़बान देशों की मदद से वहां आने वाले कर्मचारियों को अलग रखने की व्यवस्था की गई है।”
27 मार्च को यूएन प्रमुख ने सदस्य देशों को सूचित किया था कि शांतिरक्षकों का योगदान देने वाले देशों की मदद से ऐसी व्यवस्था की जा रही है ताकि तैनाती की अवधि पूरी कर चुके और उनकी जगह लेने वाले सैनिकों द्वारा की जाने वाली यात्राओं को रोका जा सके। 
कोरोनावायरस के फैलाव की रोकथाम के मद्देनज़र यह उपाय किया गया है क्योंकि विश्वव्यापी महामारी के दौरान सैनिकों का एक देश से दूसरे देश में जाना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
कोविड-19 से मुक़ाबला
कोरोनावायरस से रक्षा के साथ-साथ शांतिरक्षा मिशन विभिन्न देशों में स्थानीय प्रशासनों को हरसंभव मदद मुहैया करा रहे हैं। 
यूएन के वरिष्ठ अधिकारी लाकोआ ने बताया कि, “हम बहुआयामी समर्थन प्रदान कर रहे हैं.” उदाहरणस्वरूप, संचार के लिए टैक्नॉलजी क्षमता को मज़बूत बनाया जा रहा है। 
ज़रूरी आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन्स) को बरक़रार रखने के लिए मदद दी जा रही है और स्थानीय रेडियो, डिजिटल मीडिया और गश्त के ज़रिए जागरूकता का प्रसार किया जा रहा है।  
उन्होंने कहा कि दार्फ़ूर में अफ़्रीकी संघ और यूएन मिशन का साझा अभियान स्थानीय प्रशासन को आवश्यक उपकरणों, जैसे जनरेटर, व अन्य सामग्री मुहैया कराने में सहयोग दे रहा है।   
लेबनान में यूएन के अंतरिम दल ने नाकोरा नगर पालिका में सर्जिकल मास्क, दस्ताने, और सुरक्षा पोशाकें दान किए थे जहां दक्षिण लेबनान में यूएन मिशन का मुख्यालय है। 
स्थानीय प्रशासन को सहयोग प्रदान करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा का काम भी निरंतर जारी है. कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य में शांतिरक्षकों ने 38 नागरिकों को एक हथियारबंद गुट के क़्ब्ज़े से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई है। 
वहीं माली में यूएन मिशन ने स्थानीय चुनावों में मतदान केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की और चुनाव तैयारियों में मदद भी उपलब्ध कराई। 

Wednesday, April 01, 2020

कोरोना को लेकर बांग्ला देश में भी स्थिति गंभीर

कोरोना अपडेट:बांग्लादेश:31 मार्च 2020//स्वास्थ्य  
बड़े पैमाने पर बन रहे हैं धो कर दोबारा काम आने वाले विशेष मास्क 
संयुक्त राष्ट्र संघ: 31 मार्च 2020: (सं.रा.सं//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
हमारे यहां तो लंगर के दान का दिखावा करने का ज़्यादा ट्रेंड चल रहा है उधर बांग्लादेश में मास्क तैयार करने पर भी पहल के आधार पर ज़ोर दिया जा रहा है। वहां बड़ी संख्या में मास्क तैयार किये जा रहे हैं। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी फैलने की आंच बांग्लादेश तक भी पहुंच रही है और कॉक्सेस बाज़ार में रह रहे लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों और स्थानीय समुदाय के स्वास्थ्य के लिए ख़तरा पैदा रहा है। 
इस बीमारी की रोकथाम के उपायों को इन समुदायों तक पहुंचाने के काम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे हैं। संक्रमण से उनकी सुरक्षा व बचाव के लिए एक नई पहल शुरू की गई है जिसमें स्थानीय समुदाय के सदस्य कपड़े के हज़ारों फ़ेस मास्क बना रहे हैं। इस तरफ तूफानी रफ्तार से काम किया जा रहा है। 
उल्लेखनीय है कि विश्व भर में इस बीमारी के तेज़ी से फैलने के कारण अब तक साढ़े सात लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हुए हैं और 37 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बांग्लादेश में कोरोनावायरस के 49 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। ज़ाहिर है की स्थिति बेहद गंभीर है। 
कोरोना के कहर से बचाव के सभी कारगर उपाय तेज़ी से किये जा रहे हैं। ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र फ़ेस मास्क सहित अन्य निजी बचाव सामग्री की मांग में भारी बढ़ोत्तरी हुई है जिससे वैश्विक स्तर पर इनकी किल्लत भी पैदा हो गई है। इसके बावजूद इनकी मांग तेज़ी से बढ़ रही है। इन फ़ेस मास्क का इस्तेमाल स्वास्थ्यकर्मियों, मरीज़ों और बीमारों के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। इसके उपयोग से काफी बचाव रहता है। 
इसकी मांग को पूरा करने के लिए व्यापक प्रबंध भी किये जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने कॉक्सेस बाज़ार में एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की है जिसके तहत छह हज़ार कपड़े के मास्क तैयार किए जा रहे हैं। इन मास्क को धोकर फिर से इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। धो कर दोबारा उपयोग करने से इन मास्कों की मांग भी तेज़ी से बढ़ी है। 
यहां यह याद दिलाना भी आवश्यक है कि बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में रोहिंज्या समुदाय के लिए शरणार्थी कैंप दुनिया के सबसे बड़े और भीड़-भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में शामिल हैं। 
इसके साथ ही ये मास्क चक्रवाती तूफ़ानों से निपटने की तैयारी में जुटे उन स्वयंसेवकों और अग्रिशमन व सिविल डिफ़ेंस कर्मियों के लिए बनाए जा रहे हैं जो यूएन माइग्रेशन के साथ मिलकर इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने और संक्रमण से बचने के उपायों के बारे में जानकारी मुहैया कराने के प्रयासों में शामिल है। बड़े पैमाने पर हो रहे इनके उत्पादन से इनकी मांग को पूरा करने में काफी सहायता मिलेगी। 

Monday, March 09, 2020

फिर उठी माता चंद कौर के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग

9th March 2020 at 4:58 PM
नामधारी महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उठाया मुद्दा 
लुधियाना: 9 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
नामधारियों के पाठ करने का तौर तरीका और लाइफ स्टाईल बहुत से लोगों को प्रभावित करता है। प्रभावित हुए लोगों में पुरुष भी होते हैं और महिलाएं भी। प्रभावित हुए ऐसे लोगों का वर्ग रहता तो अपने अपने धर्म और वर्ग में ही है लेकिन किसी न किसी तरह नामधारी समुदाय के नज़दीक सा अवश्य हो जाता है।  इस तरह किसी न किसी तरह नामधारी समुदाय के कामों से जुड़ी महिलाओं ने इस बार अंतरार्ष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नया मोर्चा खोला है। 
इन महिलाओं ने माता चंद कौर के हत्यारों की गिरफ्तारी का मुद्दा फिर से उठाया है। ये लोग यह महिलाएं नामधारियों के दोनों-तीनों धड़ों से इस बात को लेकर नाराज़ भी हैं कि माता चंद कौर के हत्यारों की गिरफ्तारी को लेकर कोई बड़ा आंदोलन क्यों नहीं किया जाता? इन्हीं महिलाओं के संगठन महिला सेवा वेलफेयर सोसायटी ने कहा है कि इतनी बड़ी शख्सियत के हत्यारे अगर इतने लम्बे समय तक गिरफ्तार नहीं होते तो ऐसे महिला दिवस मनाने की कोई तुक ही नहीं बनती। इस संगठन की अध्यक्षा कुलदीप कौर और महासचिव बीमा सेन के नेतृत्व हुई एक विशेष बैठक हुई जिसमें कई आरोप भी लगाए गए और सवाल भी उठाये गए। इन महिलाओं का कहना है कि महिलाओं के ले कर भारत की स्थिति साड़ी दुनिया से अलग है। हमारे लिए हमारी माता वंदनीय होती है। हम उस समाज में रहते हैं जहां लोग देवी के 9 रूपों की पूजा भी करते हैं। ऐसे माहौल में गुरु मां की स्थिति तो सर्वोच्च बन जाती है। अगर हम गुरु मां के हत्यारों को ही गिरफ्तार नहीं करवा सकते तो लानत है हम पर। 
गौरतलब है कि चार अप्रैल-2016 की सुबह को श्री भैणी साहिब में हुई थी माता चंद कौर की हत्या। तब से लेकर अब तक बहुत सी जांच समितियां बनी लेकिन हत्यारे कानून के शिकंजे में नहीं आए। हत्यारों की गिरफ्तारी में हो रही देरी को लेकर रोष में आईं इन महिलाओं का कहना है की अगर गुरु माता ही सुरक्षित नहीं तो बाकी कौन सुरक्षित है? कल को हम में से किसी के साथ कुछ भी हो सकता है। 
इन महिलाओं ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी इसी आशय की अपील की है की इन हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ा जाये। इन का यह भी कहना है कि शायद पुलिस और प्रशासन पर किसी न  किसी तरह का दबाव है जिसके चलते वे हत्यारों को नहीं पकड़ रहे। 
मनप्रीत कौर, रणजीत कौर, बलविंदर कौर, गुरप्रीत कौर, हरप्रीत कौर, नरिंदर कौर और मंजीत कौर नाम की  इन महिलाओं ने कहा कि यदि गुरु मां के हत्यारों को ही नहीं पकड़ा जाता तो फिर महिला दिवस मनाना एक आडंबर जैसा ही है। यदि इतनी बड़ी शख्सियत की  हत्या का मामला यूँही फाईलों में बंद पड़ा रह गया तो फिर महिला दिवस तो कैलंडरों और कागज़ी कार्रवाई तक ही सीमित रह जायेगा। 

 इसके साथ ही इस संगठन ने अन्य महिला संगठनों से भी अपील की है कि वे सभी इस मुद्दे को लेकर आगे आएं तांकि इस मुद्दे पर इन्साफ हासिल किया जा सके। इस मुद्दे को लेकर अंतर्राष्ट्रीय महिला संगठनों और मानवाधिकार संगठनों से भी यह महिलाएं सम्पर्क कर रही हैं।  बहुत ही चेतावनी भरे ढंग में इनका कहना है कि हम हत्यारों की गिरफ्तारी तक चुप नहीं बैठने वाली। ज़रूरत पड़ी तो हम सड़कों पर निकलने से भी पीछे नहीं हटेंगी। 

Monday, March 02, 2020

लुधियाना में रात्रि को भी मनाया जायेगा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

2nd March 2020 at 7:45 PM
7 और 8 मार्च की रात को होगा महिला शक्ति पर विशेष आयोजन   
लुधियाना: 02 मार्च 2020: (कार्तिका सिंह//लुधियाना स्क्रीन ब्यूरो):: 
कानून के हाथ भी भी लम्बे हैं और समाज में जागृति भी बढ़ रही लेकिन इसके बावजूद अभी तक  हम ऐसा समाज नहीं बना पाए जो महिलाओं खिलाफ जुर्मों से मुक्त हो। जहाँ  लड़कियां और महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। नैतिक तौर पर कमज़ोर लोग और मनचले किस्म के दिशाहीन युवा मौका मिलते ही इन जुर्मों को करने से नहीं चूकते। इस बार महिलाओं के खिलाफ होने वाले जुर्मों के लिए ज़िम्मेदार तत्वों को चुनौती देते हुए मनाया जायेगा जायेगा अंतराष्ट्रीय महिला दिवस। 
इस बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन लुधियाना में बहुत ही यादगारी होगा। इस बार 7 और 8 मार्च की रात को मनाया जायेगा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस। एडीश्नल डिप्टी कमिश्नर (विकास) सुश्री अमृत सिंह ने आज बताया की इस अवसर पर जहाँ महिला परेड  होगा वहीँ सांस्कृतिक आयोजन भी होंगें और विशेष स्टाल भी लगाए जायेंगे। इस संबंध में एक विशेष बैठक भी उनके कार्यालय में हुई जिसकी अध्यक्षता एडीसी (विकास) सुश्री अमृत सिंह ने की। इस बैठक में इस रात्रि आयोजन के सभी प्रबंधों की समीक्षा भी की गई। 
बनाई गयी योजना के अंतर्गत 7 और 8 मार्च की रात को दस बजे डिप्टी कमिश्नर प्रदीप अग्रवाल फवारा चौकं से एक परेड को ह्री झंडी दिखा कर रवाना करेंगे। अलग अलग सरकारी विभागों, एन जी ओज़ और स्वयं सेवकों के स्टालों  विशेष आकर्षण होगा। एक विशेष कार्यक्रम लड़कियों के राजकीय कालेज  विशाल मैदान में भी किया जायेगा  की आइटमों का प्रस्तुतिकरण होगा। 
एडीश्नल डिप्टी कमिश्नर (विकास) सुश्री अमृत सिंह ने सभी सरकारी विभागों को अपील की कि वे इस आयोजन की सफलता के लिए बनाये गए सभी प्रबंधों का समय पर होना सुनिश्चित बनाएं। रात्रि को ऐसा आयोजन करने का मुख्य मकसद होगा महिलाओं में सुरक्षा की भावना को और मज़बूत बनाना। 

Thursday, August 22, 2019

व्यापारिक संस्थानों में लैंगिक विविधता पर विशेष चर्चा

Thu, Aug 22, 2019 at 3:36 PM
डीडी जैन महिला कालेज में पहुंची फ़्रांस की मिस दीप्ति चंद्र


लुधियाना: 22 अगस्त 2019: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन):: 
समय तेज़ी से बदल रहा है और इसके साथ ही बदल रहे हैं कामकाज के तौर तरीके। अब महिला चूल्हा चौंका ही नहीं देखती घर, परिवार, देश और समाज की आर्थिक रीढ़ भी मज़बूत करती है। उसकी आमदन भी बढ़ाती है। महिला वर्ग में छुपी हुई खूबियों ने उसे व्यापारिक संस्थानों  महत्वपूर्ण स्थानों तक भी पहुंचा दिया है। जो व्यापार और कारोबार पर कभी पुरुष वर्चस्व हुआ करता था लेकिन अब महिलाएं भी बराबरी पर हैं।  न सिर्फ बराबरी पर बल्कि कई जगहों पर तो उनका अनुपात पुरुषों से भी अधिक है। "व्यापारिक संस्थानों में लैंगिक विविधता" पर एक विशेष चर्चा का आयोजन किया देवकी देवी जैन कालेज के महिला हरासमेंट विरोधी सेल ने। इस चर्चा में भाग लेने पहुंची फ्रांस की जानीमानी ऊधमी मिस दीप्ति चंद्र। 
मिस दीप्ति चंद्र फ्रांस के एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगठन ई-एम एम ए  की अध्यक्ष हैं। उनका मुख्यालय पैरिस में है। डी डी जैन महिला कालेज में आना हम सभी लुधियाना वालों के लिए एक गौरव की बात रहा। गौरतलब है कि विश्व के विभिन्न देशों में इस संस्थान की 17 शाखाएं हैं। 
मुख्य वक्ता  दीप्ति चंद्र ने अपने वक्तव्य में तक्नोलोजी के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति पर विशेष तौर पर चर्चा की। उन्होंने सुझाव भी दिए कि तक्नोलोजी के क्षेत्र में इस विविधता को कैसे बढ़ाया जा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भागीदारी और विविधता जितनी अधिक बढ़ेगी कारोबार उतना ही तेज़ी से और बढ़ेगा। उल्लेखनीय है कि बहुत से रिसर्च अध्ययनों में यह बात कई बार सामने आ चुकी है। इस से प्रॉफिट भी बढ़ता है और उत्पादन भी। 
कालेज की प्रिंसिपल डाक्टर सरिता बहल ने इस बात पर बल दिया कि इस तरह के लेक्चरों और चर्चा से कालेज की छात्राओं को अपनी ज़िंदगी में ऊंचे निशाने निश्चित करने का उत्साह भी मिलेगा और मार्गदर्शन भी जिसके परिणामस्वरूप तकनोलॉजी के क्षेत्र में नए कीर्तिमान भी स्थापित होंगें। 

Wednesday, January 10, 2018

महिलाओं के नाम पर नहीं सहन होगा पुरुषों का राज-बेलन ब्रिगेड

Wed, Jan 10, 2018 at 12:56 PM
नशे के बाद अब निशाने पर महिलाओं को दबाने वाली नीति
महिलायें अब पुरुषों की अंगुली पकड़कर नहीं बल्कि खुद अपने रास्ते और मंजिल की तलाश करें 
जो महिलाऐं चुनावों में अपनी पति के कन्धों पर बैठ कर वोट मांगने आएंगी उन्हें जनता वोट न दे 
नारी तूं अबला नहीं झांसी की रानी है 
तुझे अब देश को भाई-भतीजाबाद बेईमान नेताओ के चगुल से आज़ाद कराना है
लुधियाना: 10 जनवरी 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
हिंदी कुञ्ज से साभार तस्वीर 
किसी समय नशे के खिलाफ जंग में एक नई उम्मीद बन कर उभरा बेलन ब्रिगेड अब शायद अपना रास्ता और निशाना बदल चुका है। अब उसके निशाने पर हैं वो लोग जो महिलाओं को स्वतंत्र शक्ति बनने या बनाने के रास्ते में रुकावट बने हुए हैं। इस मामले में उन महिलाओं का भी लिहाज़ नहीं होगा जो खुद अपनी स्वतंत्रता को पुरुषों के पांवों पर रख कर गुलाम बनने पर तैयार हो जाती हैं। बेलन ब्रिगेड ने लुधियाना में हो रहे नगर निगम चुनावों में आम जनता से स्पष्ट कहा है कि उन महिलाओं को कत्तई वोट न दें जो पुरुषों के सहारे वोट मांगने आएं। गौरतलब है कि लुधियाना के नगर निगम चुनावों में बहुत सी सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित कर दी गयी हैं। बेलन ब्रिगेड के मुताबिक इन 50 प्रतिशत सीटों पर हम चुनावी परिणाम बदल कर रहेंगे। महिलाओं के नाम पर पुरुषों का राज हम नहीं होने देंगें। 

भारत में सदियों से घरो में बंद व परदे में रहने वाली महिलाओं को अब घरों  की चारदिवारी से बाहर आकर पुरुष प्रधान समाज में अपने अधिकारों की  प्राप्ति के लिए एक बहुत बड़ा संघर्ष करना होगा यह तभी सम्भव होगा जब वे पुरुषों  अंगुली पकड़कर नहीं बल्कि खुद अपने रास्ते और मंजिल की तलाश करें। 
बेलन ब्रिगेड ने महिलाओं के अधिकारों हेतू समाज में एक आन्दोलन की शुरूआत की है जिसके तहत नारी तूँ अबला नहीं झाँसी की रानी है तुझे अब देश को भ्र्ष्टाचार, भाई-भतीजाबाद, चोरबाज़ारी व बेईमान नेताओ के चगुल से आज़ाद कराना है। बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा इस मुद्दे पर अब फिर पूरे जोश में है। अनीता शर्मा ने इस संबंध में खुल कर कई बातें कीं। 

उन्होंने कहा कि लुधियाना के नगर निगम चुनावों में सभी राजनीतिक पार्टियों के लोग पार्षद  की सीट पाने के लिए अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं चाहे यह दावेदार समाज हित के लिए कुछ कर सकता है या नहीं। 
इस बार 50 प्रतिशत सीटें नगर निगम में महिलाओं के लिए रिजर्व हो चुकी है और सभी वार्डों में जो मर्द चुनाव लड़ने के इच्छुक थे उनके वार्ड महिलाओं के नाम रिजर्व हो चुके हैं। और अब यह मर्द अपनी अपनी पत्नियों को कन्धों पर बिठाकर टिकट लेने के लिए घूम रहें हैं। अधिकतर महिलाऐं घर में खाना बनाने व घर गृहस्थी का काम ही करती है और इन घरेलू महिलाओं को उनके घर वाले अपनी पहुँच से टिकट दिलवा देते हैं और ऐसी महिलाऐं जो चुनाव जीतने के बाद भी घरेलू ही रहती हैं और उनके पति परमेश्वर ही सारा पार्षद का काम खुद करते हैं जिन्हे पति पार्षद के नाम से पुकारा जाना लगा है। 
अनीता शर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष बेलन ब्रिगेड ने  जनता से अपील की है कि वोटर केवल उन्ही महिलाओं को वोट दे जो पहले ही समाज में निष्काम, निःस्वार्थ  काम कर रही हैं चाहे वो किसी भी पार्टी में हो या किसी राजनैतिक पार्टी में न भी हो सिर्फ यह ध्यान रखे कि क्या वो समाज भलाई के काम करने अग्रसर हो । और जो महिलाऐं नगर निगम चुनावों में अपनी पति के कन्धों पर बैठ कर वोट मांगने आएंगी उन्हें जनता वोट न दे क्योकि यह लोग सत्ता के भूखे हैं। इन्हे समाज सेवा या लोगों की भलाई से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने तो चुनावों में अपनी पत्नी को जीता कर कुर्सी पर बिठा कर पार्षद पति ही बनंना है वार्ड के समाज के काम हो या न हो। 
अनीता शर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष बेलन ब्रिगेड सभी राजनैतिक पार्टियों से अपील करती है कि नगर निगम चुनावों में टिकट उन्ही महिलाओं को दिया जाए जो पहले ही समाज में जनता की भलाई के लिए कार्य कर रही हैं। वास्तव में यही महिला सशक्तिकरण होगा जब महिलाये खुद पुरुष प्रधान समाज में आगे आकर अपने हक़ व समाज के जरूरतमंद लोगो के दुख तकलीफो लिए के लिए लड़ेगी। 
अब समय आ गया है महिलाएं अपने अधिकारों को पाने के  लिए घरो से बाहर आकर अपनी लड़ाई आप लड़े।  

Wednesday, June 14, 2017

सरकार आज तक महिलाओं को सशक्त नहीं बना सकी-अनीता शर्मा

Wed, Jun 14, 2017 at 2:51 PM

बेलन ब्रिगेड लौटा अपने पुराने विद्रोही रंग में 

पूछा:निगम चुनावों में 50% आरक्षण महिलाओं को या पति को 
                                                                          Courtesy: Poster Women

लुधियाना: 14 जून 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
संघर्षों की आग में रह कर जन सेवा करने वाले लोगों को सुख सुविधाओं के जाल में फांस कर ज़्यादा देर तक कर्तव्य विमुख नहीं किया जा सकता।  अन्तर आत्मा की आवाज़ सुनाई देते ही वे फिर लौट आते हैं संघर्षों के मैदान में आर पार की जंग लड़ने।  कुछ ऐसा ही होता महसूस हो रहा है बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा और उनकी टीम के साथ जो बहुत से मुद्दों पर पिछले कुछ समय से खामोश चल रही थी या केवल संकेतिक विरोध कर रही थी। सुश्री शर्मा ने एक प्रेस वक्तव्य में पंजाब सरकार के एक फैसले को अपना निशाना बनाया है। मैडम अनीता ने कहा है कि पंजाब  सरकार ने विधान सभा में कानून पास किया है जिसके तहत नगर निगम चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत सीटें मिलेंगी। 
इसके साथ ही बेलन ब्रिगेड की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीता शर्मा ने अपनी आशंका को स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकार ने महिलाओं को नगर निगम में 50 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण तो दे दिया है लेकिन सरकार आज तक महिलाओं को सशक्त नहीं बना सकी है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा है कि जो महिलाऐं नगर निगम में पार्षद हैं उनका सारा कार्य उनके पति करते है और उन्हें पति पार्षद का पद  दिया जाता है। कोई भी महिला आज पुरुष प्रधान समाज में अकेले राजनीति नहीं कर सकती। खासकर नगर निगम में महिला पार्षद अपने परिवार व पति के सहारे ही कार्य करती है। मैडम अनीता ने पूछा कि आखिर ऐसा क्यूं?
गौरतलब है कि मंच पर भाषण तो खूब दिए जाते है महिला सशक्तिकरण के लेकिन असलियत बिलकुल इससे परे है। और ये पार्षद प्रतिनिधि की प्रथा कोई नई नहीं है बरसो बरस से चली आ रही है पार्षद पुत्र,पार्षद पिता, पार्षद पति की ये प्रथा आखिर कब खत्म होगी इसका कोई स्थाई हल तो हमारे राजनेताओ को ही ढूंढना होगा। यह पुरुष प्रधान सिस्टम किसी एक ज़िले मैं नहीं तकरीबन देश भर में इसी तरह चल रहा है। 

उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनावों में सभी राजनैतिक पार्टियों के नेता चुनाव लड़ने के चाहवान होते है और अपनी पार्टी से पार्षद की टिकट लेने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देते है। प्रभावशाली लोग चूल्हे चौंके पर काम करने वाली घर की गृहणी को ही पार्षद का चुनाव लड़ा देते हैं और चुनाव जीतने के बाद महिला पर्षद अपने पति के कंधे पर हाथ रख कर काम करती हैं। मैडम ने पूछा कि आखिर क्यूं  छीन ली जाती है उनकी स्वतंत्र सोच और कार्यशैली?

कुछ माह पूर्व राजस्थान में इसी आशय की आवाज़ बुलंद हुई थी। वहां बीकानेर जिले में ऐसे कितने ही वार्ड है जिनमें पार्षद महिलाएं है पर इनकों स्वतंत्र कार्य की अनुमती नहीं मिल रही है क्यूंकि यहां भी पार्षद प्रतिनिधि के दबाव में ही हर कार्य किया जाता है। यह सब इतना ज़ोर पकड़ चूका है कि क्षेत्र के सारे अहम फैसले भी पार्षद प्रतिनिधि ही लेता है। वास्तव में यह देश भर की एक गंभीर समस्या है। एक तरफ केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे है लेकिन सरकार के इन मंसुबों को पार्षद पति, पिता ,पुत्र (पार्षद प्रतिनधि) ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में नहीं लागु होने दे रहे है। आखिर पुरुषों के अपने रसूख होते हैं जिनको संभालना उनकी पहली ज़िम्मेदारी होती है। तों ऐसे में आाखिर कब होगी पार्षद पति, पिता,पुत्र संस्कृति की ये प्रथा खत्म ???
अपने इन लोगों के बारे में तो अक्सर कथा कथाओं में सुना होगा उमापति, रमापति, कमलापति, लक्ष्मीपति, कुंती पति इतियादी। राष्ट्र का संवैधानिक मुखिया आमतौर पर राष्ट्रपति कहलाता है। विश्वविद्यालय में कुलपति और उपकुलपति के पद भी होते हैं। धनवान लोगों को लखपति करोड़पति अरबपति कहने की परम्परा भी सदियों से चलती आ रही है लेकिन यह पार्षद पति, पार्षद पिता, पार्षद पुत्र आखिर क्या बला है? क्या यह सब महुला अधिकारों पर सदियों से चले आ रहे वर्चस्व को और मज़बूत बनाने की कुप्रथा है? अगर इसी तरह महिला को अक्षम, अपाहिज, अज्ञानी साबित करने के लिए यह सब चल रहा है तो मत दो महिला को दया की यह भीख। जब महिला में शक्ति आएगी वह यह सब खुद ही छीन लेगी। इन आडंबरों से महिला के क्रोध को शांत मत करो।

अनीता शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि सभी राजनैतिक पार्टियां केवल उन्ही महिलाओं को टिकट दें जो पहले ही घरों से बाहर रहकर समाज सेवा कर रही है तभी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा नहीं तो इस आरक्षण महिलाओं के नाम पर पुरुष ही इसका लाभ उठाएंगे। इसके साथ हीयहनने यह सब कहा कि  बेलन ब्रिगेड यह सब होने नहीं देगा।  

Sunday, March 05, 2017

विवाह के वचनों की क़ानूनी सुरक्षा मज़बूत करने का अभियान शुरू

बेलन ब्रिगेड ने बजाया नई महिला जंग का बिगुल 
लुधियाना: 4 मार्च 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::  For more photos please click here 
अग्नि के समक्ष लिए गए सात फेरों या आनन्द कारज के अंतर्गत हुई लावां फेरों की रस्म को धत्ता बताते हुए वैवाहिक जीबन को तहस नहस करने वालों को अब बेलन ब्रिगेड ने आड़े हाथों लेने का ऐलान किया है। ब्रिगेड ने मांग की है कि इन फेरो में दिए जाते वचनों को ऐफिडेविट के ज़रिये  सुरक्षा और मान्यता प्रदान की जाये। ब्रिगेड ने आज सर्कट हाऊस में एक प्रेस कांफ्रेंस करके कि  किस तरह महिलायों की ज़िन्दगी एक श्राप बन चुकी है और उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। इसके साथ ही ब्रिगेड ने याद दिलाया कि इतिहास गवाह है कि पुराने वक्त में भी महिलाये मर्दो से ज्यादा काम करती थी और आज भी हालत में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ। इस मीडिया  मीट में ब्रिगेड की प्रमुख अनीता शर्मा, उनकी राईट  हैंड कोमल शर्मा,  शोभा दीदी और कुछ अन्य प्रमुख महिलाये मौजूद थीं।    For more photos please click here 
ब्रिगेड ने कहा कि दूल्हा व दुल्हन फेरो के वक्त कलयुग में अग्नि को साक्षी मानकर मौखिक वचन देने की परम्परा को छोड़ कर बाकायदा ऐफिडेविट दें।  For more photos please click here 
इस अबसर पर संस्था की राष्ट्रीय अध्य्क्ष आर्किटेक्ट अनीता शर्मा ने कहा कि 18 वी सदी में महिलाये घर में रह कर ही काम करती थी, सारी जिंदगी घूंघट में ही निकाल देती थीं और उन्हें एक मिनट भी काम से फुर्सत नहीं मिलती थी। कुंए से पानी लाना, लकड़ी से चूल्हे पर खाना बनाना, कच्चे घरों को लीपना पोतना, पूरे परिवार की देखभाल करनी और 8 -10 बच्चो को जन्म देना और उनका पालन पोषण करना होता था। इतिहास गवाह है कि पुराने वक्त में भी महिलाये मर्दो से ज्यादा काम करती थी। मर्द तो केवल जंगलों में दिन भर घूम कर फल और जानवरो का शिकार करके लाते थे।  For more photos please click here 
आज 21 वी शताब्दी में सब कुछ बदल गया है महिलाऐं आज आधुनिक तौर के तरीके से घर का काम कर रही है और घरो की चार दिवारी से बाहर आ चुकी है लेकिन दुर्भाग्य से आज भी नारी को मर्दो की गुलामी में जीवन जीना पड़ रहा है महिलायो को मर्दो की सलाह से ही काम  करना पड़ता है यहाँ तक की बच्चे की माँ बंनने के लिए भी नारी को पति की स्वीकृति जरूरी है यदि पति नहीं चाहेगा तो एक औरत अपनी इच्छा से माँ भी नहीं बन सकती उसे गर्भ रखना है या गर्भपात कराना है यह भी मर्दो की इच्छा पर ही निर्भर करता है। 
अनीता शर्मा ने कहा कि अदालतों में महिलायों को सबसे ज्यादा जलील होना पड़ता है और धक्के खाने पड़ते हैं। घरेलू हिंसा और तलाक के मामलों में एक औरत को कई कई वर्ष इन्साफ नहीं मिलता।  वे अपने बच्चे को गोद में उठाये अपना व बच्चे का खर्चा लेने के लिए अदालतों व वकीलो के चक्कर काट काट कर अपनी जिंदगी को नरक बना लेती हैं और उन्हें कई कई साल तक तलाक के मामले में खर्चा तक नहीं मिलता। सारा केस वकीलों की बहस और जज की नासमझी की भेंट चढ़ जाता है और जिंदगी बर्बाद हो जाती है एक माँ और बच्चों की। इन तलाक के मामलो में एक अबला नारी की जो दुर्दशा भारतीय अदालतों में इन्साफ के लिए होती है उस पर आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। For more photos please click here 
मैडम शर्मा ने कहा कि शादी से पहले लड़के के माँ बाप रिश्तेदार कहते है कि लड़का हज़ारों रूपए कमाता है , अपना घर है, फैक्टरी है लेकिन जब तलाक की नोबत आती है तो लड़के के घर वाले उसे बेदखल कर देते है अब लड़का कोई काम नहीं करता क्योकि असल में वह अपनी पत्नी व बच्चे को कोई खर्च नहीं देना चाहता। शादी से पहले लाखों करोड़ों कमाने वाला दूल्हा अपने आप को वकील साहिब की मदद से जज के सामने कंगाल घोषित कर  देता है।  For more photos please click here 
हज़ारो वर्ष पहले सतयुग में वेदों के काल में हिन्दू लोग शादी में फेरो के वक्त दूल्हा व दुल्हन अग्नि को साक्षी मान कर एक दुसरे को वचन देते थे और जिदगी भर उसका पालन करते थे और आज कलयुग में यहां लोग झूठ फरेव में जीवन जी  रहे है माँ बाप भाई बहन एक दुसरे को धोखा दे रहे है और यही  शादी में फेरो के वक्त मौखिक वचन देने वाले पति पत्नी शादी के बाद मुकर जाते है लड़का व लड़की एक दुसरे पर दोष लगाते है। इसलिए अब शादी के वक्त फेरो के समय कलयुग में  मौखिक वचन देने की परम्परा को छोड़  कर दूल्हा व दुल्हन एफिडैविट पर अपने वचनों पर  साइन करे ताकि शादी के बाद तलाक की नोबत आने पर अपने वचनों से मुकरे नहीं। For more photos please click here 
अनीता शर्मा ने कहा कि नारी जो माँ है, बेटी है, बहू है, बहन है लेकिन पुरुष प्रधान समाज में उसको आज भी भोग की ही वस्तु समझा जाता है। हर कोई इन्सान उसको अपने वश में करने की युक्ति लगाता रहता है। यही कारण है कि नारी की सोच, ज्ञान, ममता, सहनशीलता और मान मर्यादा का लोग गलत अर्थ लगाते है, उसका नाजायज फायदा उठाते है और उसे कमजोर समझते है। जबकि हकीकत में नारी कमजोर नहीं है। लगातार 9 महीने तक बच्चे को अपने पेट में पाल कर और बच्चे के जन्म के समय वह अपनी आँखों के सामने ही बच्चे को जन्म देने के लिए अपना पेट चिरवा लेती है इससे बड़ा हिम्मत और बड़े जिगर वाला कौन सा प्राणी होगा?   For more photos please click here 
जो मर्द शराबी, नशेड़ी, कामचोर, जुआरी व रंडीबाज है और घर में माँ बाप, पत्नी व बच्चो को खर्च नहीं देता इस हालात में  मर्द के इस निकम्मेपन का खामियाजा भी  औरत को भुगतना पड़ता है। 
पुरूष समाज ताकतवर है क्योकि वह रुपये कमाता है और नारी रुपया नहीं कमाती इसलिए कमजोर है और घर के खर्चे के लिए मर्दो के मुँह की तरफ देखती है। अब वक्त आ गया है नारी समाज को जागना पड़ेगा अपने हक़ के लिए लड़ना होगा उन्हें खुद रोज़गार करना होगा रुपया कमाना होगा ताकि महिलाओं को घर परिवार चलाने के लिए मर्दो की मोहताज न होना पड़े।   For more photos please click here 
नवकिरन वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन व बेलन ब्रिगेड ने महिला सशक्तिकरण तथा उन्हें रोज़गार उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है ताकि किसी भी महिला को पुरूषों की कमाई से घर परिवार चलाने के लिए मुँह न ताकना पड़े।  For more photos please click here 
शादी से पहले लड़की वाले जिस लड़के से शादी हो उसके माँ बाप से लड़के के कारोबार व उसकी प्रोपेर्टी चल अचल का ऐफिडेविट ले तांकि तलाक के वक्त पत्नी व बच्चे को खर्चा देने से न भागे और लड़के व लड़की का मेडिकल भी शादी से पहले होना चाहिए। For more photos please click here 
इसलिए संस्था की तरफ से अदालतों में लटके हुए महिलायों के तलाक व खर्चे के केसों को निपटाना, नशे से बर्बाद हो रहे घर परिवार और महिलायो को इस से बचाना मुख्य एजंडे पर रहेगा। हर औरत खुद काम करे, रुपया कमाये इसलिए हर वर्ग की  महिलायो को रोज़गार व नौकरी उपलब्ध कराना हमारा उद्देश्य है। 
इस अवसर पर कोमल शर्मा, शोभा दीदी, रीमा, शिहान पंकज साहनी, हेम लता, जगदीश कौर आदि ने अपने विचार रखे।  For more photos please click here 

Saturday, January 28, 2017

नारी में छिपी प्रतिभा को सामने लाने का एक और आयोजन

 Sat, Jan 28, 2017 at 5:38 PM
50 मॉडल्ज़ ने दिखाई अपनी अपनी प्रतिभा-फाईनल  फरवरी में 
लुधियाना:  28 जनवरी 2017: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन);
अब महिला को आधी दुनिया कहो या अर्धांगिनी---बात कहने को तो सही है लेकिन हकीकत में होता क्या है? जो कहा जाता है उसे ज़िन्दगी में उतारा नहीं जाता। शायर को आज भी कहना पड़ता है-औरत ने जन्म दिया मर्दों को -मर्दों ने इसे बाजार दिया। आधी दुनिया अर्थात नारी शक्ति की प्रताड़ना आज के आधुनिक युग में भी जारी है। घर गृहस्थी के झमेलों में फंसी नारी की सारी उम्र निकल जाती लेकिन उसकी प्रतिभा को उड़ान नहीं मिलती। उसका बचपन, उसका यौवन कब बुढ़ापे से गुज़रता हुआ श्मशान तक पहुंच जाता है इसकी कभी चर्चा भी नहीं होती। नारी के अंदर छिपी कला, उसकी प्रतिभा और उसके टेलेंट को बाहर लाने के प्रयास होते तो हैं लेकिन बहुत ही कम।  एक ऐसा ही प्रयास हुआ है आज लुधियाना में। इसे नाम दिया गया Mrs Vogue जिसमें भाग लेने की शर्त राखी गयी शादीशुदा होना। उम्र रखी गयी 22 से 45 वर्ष तक। आज इसमें भाग लिया करीब 50 मॉडल्ज़ ने जिनमें से तकरीबन 30 का चयन हो जायेगा फाईनल  के लिए जिसका आयोजन फरवरी में होना है।
गौतम जैन और अंगद गिल की तरफ से हुए इस आयोजन में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी थी चयन की।  जज के तौर पर इस ज़िम्मेदारी को निभाया-फैशन ब्लॉगर सन चंडोक और डाइटीशियन सानिया गुप्ता ने। 

Monday, September 12, 2016

सारे हिन्दोस्तान का पेट भरना हमारी डयूटी-वीसी डा. ढिल्लों

मेले में बताये गए किसानों को आर्थिकता सुधारने के गुर 
नाग कलां-जहांगीर  (अमृतसर) से लौट कर रेक्टर कथूरिया :: 
खुद दर्द सह कर भी दूसरों को मुस्कराहट देना यह हिम्मत और गौरव पंजाबियों के हिस्सा ही आया है। जब किसान खुदकुशियां कर रहा है उस कठिन समय भी पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी ने देश के प्रति लगाव और स्पिरिट में कमी नहीं आने दी। पीएयू के उपकुलपति डॉक्टर बलदेव सिंह ढिल्लों ने यहाँ आयोजित किसान मेले में याद दिलाया कि पूरे हिन्दोस्तान का पेट भरना हमारा कर्तव्य बनता है। यहाँ सितम्बर महीने में आयोजित किसान मेलों में से दूसरा मेला आज सोमवार 12 सितम्बर 2016 को आयोजित हुआ। 
पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र नाग कला में किसान मेला लगाया गया। मेले के समारोह में डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों वीसी पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी मुख्य मेहमान के तौर पर शामिल हुए। मेले के दौरान कृषि से संबंधित मुकाबले भी करवाए गए। इनमें घरेलू काम को कारोबार तक लेजाने के लिए घरेलू उत्पडन्न की प्रतियोगिता भी शामिल थी। सेवियां बनाने के मुकाबले में इलाके की 15 महिलायों ने भाग लिया। जिनमें चार को सम्मानित भी किया गया। महिला सशक्तिकरण का यह प्रयास बेहद कामयाब भी हो रहा है।  पीएयू के बनाये सेल्फ हैल्प ग्रुप बहुत ही कामयाबी से चल रहे हैं। इनका सामान तरोताज़ा, पौष्टिक और सस्ता भी होता है। कोई बड़ी कम्पनी खराब सामान बेच क्र भी कई बहाने लगा सकती है लेकिन इन कल्बों की सदस्य महिलाएं जानती हैं कि इनको यहां रहना है अपने लोगों के बीच इसलिए इनके साथ व्यवहार शुद्ध रखना आवश्यक है। इन महिलायों के चेहरे पर एक आत्म विश्वास और आंखों में सफलता की चमक होती है। अपने परिवार की आर्थिकता को मज़बूत बनाने में सक्रिय यह साधारण सी महिलाएं बहुत ही असाधारण कार्य कर रही है जिसकी अहमियत अभी तक पूरी तरह लोगों के सामने नहीं आई है। इन मेलों में इन महिलायों की सफलता आसानी से देखी जा सकती है। कर्ज़ लेकर काम शुरू करने वाली ये महिलाएं आज अछि खासी कमाई कर रही हैं वो भी बिना किसी नौकरी के। इस मेले में भी ऐसा एलोवेरा जूस बेचा जा रहा था और केवल एक दिन पूर्व ही पैक किया गया था। बाजार के ब्रांडेड जूस से कुछ महंगा होने के बावजूद हाथो हाथ बिक रहा था। शहद के साथ साथ आंवला का आचार और मुरब्बा भी ग्राहकों को लुभा रहा था। इन महिलायों और कुछ पुरुषों ने भी बताया कि अब अगर वे अपने पैरों पर खड़े हैं तो केवल पीएयू से मिली ट्रेनिंग और प्रोत्साहन की बदौलत। 
इस अवसर पर डॉ. आरके गुब्बर, डॉ. राजिंदर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, महिंद्र सिंह ग्रेवाल, डॉ. तरसेम सिंह, डा. हरवंत सिंह औलख डिप्टी डायरेक्टर कृषि विभाग तथा डॉ. रंजीत सिंह आदि मौजूद थे। इसके साथ ही आत्म हत्या कर रहे किसान की हालत सुधरने के लिए पीएयू ख़ामोशी से सक्रिय है। इस दुसरे किसान मेले में भी इस बात पर ज़ोर दिया गया कि किसान को पूरा वर्ष मेहनत करने और केवल दो दिन आमदन लेने की जगह अब खुद को बदलना होगा और हर रोज़ आमदन लेनी होगी। इस मकसद के लिए किसान को दूध के साथ साथ सब्ज़ियों की तरफ भी विशेष ध्यान देने को कहा जा रहा है। दूध और सब्ज़ियां ही ऐसी चीज़ हैं जो हर रोज़ बिक सकती हैं। 
मेला कोई सरकारी या अकादमिक आयोजन न होकर एक पारिवारिक मिलन की तरह लग रहा था जिसमें सभी अपना सुख दुःख साँझा कर रहे थे। मेले में तरह तरह जे स्टाल लगे थे और जितने लोग पंडाल में थे उससे कहीं अधिक इन स्टालों पर थे। फूल और शाखाएं काटने वाली कैंची से लेकर ट्रेक्टर तक बेचे जा रहे थे। सब्ज़ियों के बीजों की मांग यहाँ बहुत ज़्यादा थी। शायद ही कोई हो जिसने सब्ज़ी के बीजों की किट न खरीदी हो। केवल 100/- रूपये की इस किट में दस तरह की सब्ज़ियों के बीज थे जिन्हें घर में भी उगाया जा सकता है। 
वाइस चांसलर डॉक्टर ढिल्लों ने इन कृषि केंद्रों की स्थापना और मेलों के आयोजन का संक्षिप्त सा इतिहास बताते हुए कहा कि इनसे फायदा लेना अब हर किसान का फ़र्ज़ है। 

Tuesday, May 03, 2016

बेटी के जन्म पर मिठाई बांटो तो अहसास दिलाएगा 25% की छूट

संगीत भंडारी के संचालन में विशेष अभियान सेव डॉटर-सेव वाटर 
लुधियाना: 2 मई 2016: (पंजाब स्क्रीन//दिलजोत कौर और कार्तिका): 
बहुत पहले लोकप्रिय हुए एक गीत में एक पंक्ति आती है--- 
एक अहसास है जो रूह से महसूस करो,
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो। 
लेकिन इस सच को बहुत ही कम लोगों ने बहुत ही कम लोगों में सच होते देखा। स्वार्थ भरे इस कारोबारी युग में इस पंक्ति का याद आना भी अब किसी चमत्कार से काम नहीं लगता। इसकी याद आई सुश्री संगीता भंडारी के नेतृत्व में चलते संगठन अहसास के नाम से। किसी को कोई समस्या हो वहां पहुँच जाना और उसका दुःख केवल बांटना ही नहीं बल्कि दूर करने का प्रयास भी करना-इसे हमारी टीम ने बार बार अपनी आँखों से देखा। कभी डीसी आफिस, कभी सिवल सर्जन और कभी पुलिस कमिश्नर आफिस--हमारी टीम ने संगीता भंडारी और उनकी टीम को किसी न किसी अन्जाने लेकिन दुःख के मारे इंसान के साथ दर्द का मानवीय रिश्ता बनाते देखा। 
अहसास चेरिटबल ओर्गनायज़ेशन अब फिर सक्रिय है। इस संगठन की एक मीटिंग मल्हार रोड पर स्थित एक रेस्टोरेंट में हुई जिसमें अहसास के सदस्यों ने अपने आगामी प्रॉजेक्ट्स पर चर्चा की। अहसास की प्रेज़िडेंट संगीता भंडारी ने इन परियोजनायों की जानकारी देते हुए कहा कि अहसास की तरफ़ से 7 मई को मदर डे मनाया जा रहा है जिसमें कुछ चुनिदा महिलायों को सम्मानित किया जा रहा है जिनकी मेहनत और प्रयास से उनके बच्चें आज अच्छे मुक़ाम पर है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अहसास की तरफ से चलाई जा रही मुहिम "बेटी बचाओ "और "सेव वोटर .सेव लाइफ़ "को भी अब और ज़ोर शोर से चला कर लोगों को जागृत किया जाएगा क्यूँकि अगर बेटी और जल दोनों को ना बचाया गया तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य अन्धकारमय  हो जाएगा। इस अवसर पर नत्थु स्वीट्स के राकेश गर्ग जैन ने अहसास की मुहिम बेटी बचाओ, बेटी पढाऔ  की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी तरफ़ से उनकी सेल का 1% हर महीने अहसास की मुहिम के लिए दिया जाएगा और जो भी बेटी के जन्म पर मिठाई बाँटेगा उसे 25% की छूट दी जाएगी। उनकी इस घोषणा पर अहसास के सदस्यों ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर नेहा मित्तल , मीनाक्षि सूद, रेणु नारंग, सुनील कक्कड़, विनीत मोंगा, रूबी आनेजा, निष्ठा शर्मा, सूखज़िंदर कौर, सुनैना जैन, गगन कैरपाल, राजवंत कौर, नीरू मल्होत्रा हाज़िर थे।  

Sunday, March 08, 2015

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शराब विरोधी आंदोलन सड़कों पर

बेलन ब्रिगेड की  तरफ से आयोजित की गई  शराब एक  नशा पर महाचर्चा
लुधियाना: 8 मार्च 2002 (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
बेलन ब्रिगेड की  तरफ से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शराब व अन्य नशो के विषय पर महाचर्चा  में बड़ी सियासी पार्टियों नेताओं सहित कई राजनैतिक, सामाजिक व धार्मिक वक्ताओं ने अपने अपने विचार रखे।
इस अवसर पर बेलन ब्रिगेड की राष्ट्रीय अध्यक्ष आर्किटेक्ट अनीता शर्मा ने कहा कि पिछले वर्ष महिला दिवस पर शुरू किये गए नशो के खिलाफ आन्दोलन में आम जनता को हीरोइन स्मैक आदि ड्रग कहां से आती है कौन बेचता है आज तक पता नहीं चला और पंजाब सरकार ने सारे नशे का ठीकरा पाकिस्तान पर फोड़ दिया है। पाकिस्तान बार्डर पर धरना लगा कर  अकाली सरकार ने यह साबित कर दिया कि उनका हीरोइन व स्मैक जैसे नशो से कोई वास्ता नहीं है।  ब्रिगेड ने आरोप लगाया कि हकीकत यह है कि पुलिस ड्रग माफिया व नेताओ की मिलीभगत से आज भी नशा सरेआम इधर से उधर सप्लाई हो रहा है।
जो नेता  सरकार चलाने के लिए गली गली मोहल्ले में शराब के ठेके खोल कर 4500 करोड़ का टैक्स इकठ्ठा करते है भला वे ड्रग के नशो  पर कैसे काबू पाएगे।  आज पंजाब  सरकार की टैक्स इकठ्ठा करके सरकार चलाने की पॉलसी एक गरीब मजदूर को  घर लौटने से पहले ही  उसकी  जेब शराब के ठेके पर  हल्की कर देती है।   
बेलन ब्रिगेड ने पंजाब सरकार से मांग की है कि शराब के ठेको में  20 से  25  प्रतिशत हर साल कमी की जाये।  सुबह नौकरी के  वक्त रजिस्टर में  हाजरी  लगाते  समय सरकारी मुलाजमो को एल्कोमीटर से चैक किया जाए । सरकार महीने में दो बार वेतन देने की तारीख तय करे और उस दिन ठेके बंद रखे जाये ढ्ढ जिस इलाके  ठेका खोला जाये वहां  के 60 प्रतिशत लोगो की  सहमति ली जाए। 
सरकार शराब के ठेको की गिणती  के मुताबिक लोगो को मेडीकल  सुविधा देने के लिए उतने  ही मेडीकल  क्लीनिक व अस्पताळ भी  गली  मोहल्लो  में खोले।  शराब पीकर गाड़ी चलने वालो का लाइसेंस रद्द किया जाये। हैल्थ  डिपार्टमेंट शराब के ठेकों पर जाकर शराब की क्वालिटी की जांच करे और शराब की बोतल के रैपर  पर  80 फीसदी जगह पर पंजाबी व हिन्दी भाषा में स्पष्ट लिखा जाए कि इस शराब की बोतल में कितने प्रतिशत अल्कोहल है और इसकी  कितनी मात्रा पीने से इन्सान को ब्लड प्रेसर, शुगर, लीवर व जिगर की बीमारी होती है।
अनीता शर्मा ने कहा कि जब तक पंजाब सरकार शराब की पॉलसी नहीं बदलती  तब तक  बेलन ब्रिगेड का शराब के ठेको के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
इस अवसर पर राष्ट्र धर्म से विनोद जैन ,कुंवर रंजन सिंह, ब्रह्म कुमारी आश्रम, हरदयाल सिंह , प्रोफेसर करुणा शर्मा, गुरनाम सिंह सिद्धू , स्वतंत्र आवाज एन जी ओ, श्री सुंदर लाल धमीजा (गोबिंद  गोधाम), डॉ मधुमिता  बनर्जी  (सदभावना ग्रुप) , श्री गंगा नन्द आश्रम श्री गुरुदेव अत्री, हेल्पिंग हैण्ड  क्लब , धार्मिक एकता वेलफेयर एसोसिएशन, पूर्वांचल विकास मंच, शिव सेना, आल इंडिया ब्राह्मण सभा, एच एस फुल्का, राजवंत कौर,  परमिंदर पप्पू,  लेख राज अरोड़ा , डॉ भूषण  सतपाल शर्मा  आप पार्टी, तरसेम सिंह जोधां, डिप्टी मेयर आर  डी  शर्मा, मिन्टू  शर्मा,  धर्मवती मिश्रा,  संजय कपूर भाजपा,  राकेश कपूर राष्ट्रीय मेंबर भाजपा , पंडित राजन शर्मा, सुखमिंदर एस्ट्रोलोजर , रवि राज  सोई, राजेश घई, नरेंद्र गुलाटी    हेमराज अग्रवाल, अश्वनी शर्मा ,शिमी पसान, गुरप्रीत गोगी कांग्रेस प्रधान, मदन लाल बग्गा चेयरमैन पंजाब विकास बोर्ड, गुरदीप गोशा, सुखविन्दर कौर सचिव  स्त्री अकाली दल।  है की इस चर्चा  नेता शराब के मुद्दे पर एकजुट होने के बाद इसके फैलने के लिए किसे ज़िम्मेदार बताते हैं?

Friday, February 20, 2015

क्या आपको अपने पति से डर लगता है?

सचमुच सच सच बताएं 
लुधियाना: 20 फ़रवरी 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
महिला वर्ग के बिना न घर की कल्पना हो सकती है, न ही परिवार की और न ही संसार की। महिलाओं के इस महत्व के बावजूद उनके सम्मान को लेकर टकराव का माहौल बना रहता है। महिला वर्ग ने बार बार अपमान सह कर भी इस दुनिया  को बहुत कुछ दिया है। इसके बदले में उन्हें हमेशां तिरस्कार और डर का माहौल मिला। डर का माहौल हर जगह उनकी तकदीर बनता चला गया। साहिर साहिब ने औरत की  हालत को देख कर ही कहा था-
तुलती है कहीं दीनारों में, बिकती है कहीं बाज़ारों में
नंगी नचवाई जाती है, ऐय्याशों के दरबारों में
ये वो बेइज़्ज़त चीज़ है जो, बंट जाती है इज़्ज़तदारों में
मर्दों के लिये हर ज़ुल्म रवाँ, औरत के लिये रोना भी खता
मर्दों के लिये लाखों सेजें, औरत के लिये बस एक चिता

मर्दों के लिये हर ऐश का हक़, औरत के लिये जीना भी सज़ा

इस  याद आती फिल्म पुतलीबाई की यादगारी कवाली--जिसमें बताया गया है कि जब औरत बनाने की बात चली तो भगवान ने क्या क्या एकत्र करके औरत बनाई। इस सारी सामग्री को ज़रा एक नज़र आप भी देख ही लीजिये:
 एक दिन बोले फ़रिश्ते करके ये दुनिया की सैर
या खुदा दुनिया तेरी सूनी है औरत के बग़ैर
उठ पडे हिकमत दिखाने के लिये क़ुदरत के हाथ

सोच ली मौला ने औरत को जन्म देने की बात
इस तरह मालिक ने की कारीगरी की इब्तिदा
चांद से मांगा उजाला नूर सूरज से लिया
रूप सैयारों से मांगा रूप ऊषा से लिया
पंखडी से ली नज़ाकत और कलियों से अदा
शाम से काजल लिया और सुबह से ग़ाज़ा लिया
बिजलियों से क़हर मांगा आग से ग़ुस्सा लिया
हौसला चट्टान से और दर्द पंछी से लिया
आसमां से ज़ुल्म मांगा सब्र धरती से लिया
शाख़ से अंगडाइयां झरनों से इठलाना लिया
बुलबुले से नाज़ुकी नद्दी से बल खाना लिया
आईनें से हैरतें तस्वीर से ख़ामोशियां
लहर से अठख़ेलियां मांगीं पवन से शोख़ियां
आंख ली हरनी से और शबनम से आंसू ले लिया
बदलियों से ज़ुल्फ़ नज़्ज़ारों से जादू ले लिया
लाजवंती से शर्म और रातरानी से हया
आबरू मोती से ली सूरजमुखी से ली वफ़ा
ज़हर नागिन से लिया और सांप से डसना लिया
काटना बिच्छू से मांगा तीर से चुभना लिया
लोमडी से मांग लीं ताउम्र की मक्कारियां

मक्खियों से शोर और मच्छर से लीं अय्यारियां
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औरत की क्षमता और शक्ति की चर्चा करना आवश्यक लगा वाटसअप पे एक तस्वीर को देख कर। इस तस्वीर को भी एक शुभ चिंतक ने भेजा है जिसमें पति से डरने  डरने वाली महिला की तुलना की। इस तस्वीर को देख कर सच्चे मन से बताएं कि क्या आपको अपने पति से डर लगता है? 

Wednesday, December 17, 2014

अनीता शर्मा और संजना ने फिर दिखाया महिला शक्ति का जोश

नशे में गाडी चलाने वालो  के साथ सख्ती से निपटा जाय-बेलन ब्रिगेड 
लुधियाना: 17 दिसंबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
जब लोग शीत लहर के कारण हीटर से गर्म किये बंद कमरों में दुबके हुए थे उस समय बेलन ब्रिगेड की प्रमुख  और और भाजपा महिला मंडल की संजना अपनी सहयोगी महिलाओं के साथ सड़कों पर  नशे भरी ड्राईविंग  लोगों को जागरूककर रहे थे। इनको चिंता थी कि नशा व वाहनो की तेज  रफ़्तार से सड़क दुर्घटनाओ में मरने वालो की गिणती  दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।  इन मौतों के कारण उजड़ने वाले परिवारों के दर्द का अहसास करते हुए आज बेलन ब्रिगेड की टीम ने जगराओं पुल ट्रैफिक लाइट चौक पर लगे शशीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के स्मारक पर संकेतक ट्रैफिक भी जाम किया और बहुत ही शांति पूर्ण ढंग से रोष भी व्यक्त किया। न कोई नारा न कोई हुड़दंग केवल जागरूकता को मकसद बना कर इन लोगों ने राह चलते लोगों 
और ट्रैफिक डयूटी निभा रहे पुलिस कर्मियों का भी दिल जीत लिया। कुछ समय के लिए पुलिस थाना डिवीयन नंबर पांच दुर्गा  माता मंदिर पहुँच  कर कुछ समय के  लोगो को शराब पीकर  व तेज वाहन चलाने वालो की वजह से होने वाली दुर्घटनाओ के बारे जागृत किया।  इस अवसर पर बेलन ब्रिगेड की राष्ट्रीय अध्यक्ष आर्कीटेकेट अनीता शर्मा ने बताया कि सड़को पर वाहनो की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है सड़को की चौड़ाई कम होने व  लोगो  दोबारा ट्रैफिक नियमो का पालन  न करना आज की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है दूसरी  तरफ शराब पीकर तेज गाड़ी चलाना दुर्घटनाओ का सबसे बड़ा कारण बन चूका है, सरकार ने हर गली मोहल्ले व गाँव में शराब के ठेके  खोल कर शराबी ड्राइवर लोगो को  पट्रोल पम्प  से पहले शराब पीने के लिए दारू के ठेके मिल जाते है।  ड्राइवर शराब पीकर अन्धा धुधं गाड़िया चलाकर एक दुसरे  के वाहनो को ओवर टेक करते वक्त भयानक दुर्घट्नाय होती है और हजारो लोग इसमें अपनी जान गवा चुके है। 
उन्होंने कहा कि सड़को पर शराब पीकर व स्पीड लीमट से ज्यादा तेज रफ़्तार वाहन चलाने वालो को सख्ती से निपटा जाय और शराब पीकर गाडी चलाने वालो का ड्राइवर लाइसेंस रद्द किया  जाय।  
इस अवसर पर सजना, मंजीत, शालू, दिलजोत कौर, कार्तिका सिंह और बहुत सी अन्य महिलाएं और नवयुवायें भी शामिल थीं। इस आयोजन ने बहुत सी नवयुवतियों को भी अपनी ओर आकर्षित किया। 

Thursday, November 20, 2014

अभद्र टिप्पणी का मामला गर्माया -बाजवा के खिलाफ प्रदर्शन शुरू

लुधियाना में भाजपा महिला मोर्चा ने फूंका बाजवा का पुतला
लुधियाना: 19 नवंबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने जब भाजपा में शामिल हुई एक कांग्रेसी वर्कर पर अभद्र टिप्पणी की तो इसका विरोध काम से काम कांग्रेस में तो  था क्यूंकि यह मामला सियासी न हो कर महिला सम्मान और विचारों की स्वतंत्रता का था। किसी भी दल की विचारधारा अच्छी लगने पर उसमें शामिल होना महिला का अधिकार है।

इस अभद्र टिप्पणी पर कांग्रेस पार्टी और इसके नेता तो कुछ नहीं बोले लेकिन भाजपा से सबंधित महिला  कड़ा नोटिस लिया। केवल नोटिस ही नहीं लिया बल्कि कांग्रेस के पंजाब प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन भी किया। इस प्रदर्शन  उनका पुतला भी फूंका गया। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं की संख्या बेशक कम थी पर जितनी महिलाएं थीं वे वहां दिल से मौजूद थीं। यह कम संख्या इस बात का सबूत कि भाजपा ने सत्ता में होने के बावजूद भाड़े पर भीड़ एकत्र नहीं की।
इस अवसर पर इस प्रदर्शन की अगवानी कर रही साक्षी जुल्का ने अपने तीखे तेवरों में चेतावनी दी कि महिला सम्मान पर किसी भी तरफ से आंच नहीं आने दी जाएगी।
BJP  महिला मोर्चा: साक्षी जुल्का ने दी अपने तीखे तेवरों में चेतावनी 

Friday, June 27, 2014

बड़े नशा तस्कर अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर--अनीता शर्मा

Thu, Jun 26, 2014 at 3:34 PM
बेलन ब्रिगेड ने की बड़े नशा तस्करों पर शिकंजा कसने की मांग
लुधियाना: 26 जून 2014:  (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
अंतर्राष्ट्रीय  नशा विरोधी दिवस पर बेलन ब्रिगेड ने एक  विशाल आंदोलन  पर  और साथ ही स्पष्ट  कि बड़े नशा तस्करों पर  यह  वाली नहीं। संगठन की ओर से स्थानीय सर्कट हाउस में नशीली दवाओं के सेवन तथा अवैध तस्करी के खिलाफ एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान आर्चिटैक्ट व ब्रिगेड की अध्यक्षा अनीता शर्मा ने कहा की नशा हमारे देश के नौजवानो को नशा  दीमक की तरह खोखला कर रहा है। नशे का कुप्रभाव शरीर,दिमाग व देश की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभर रहा है जिसके फलस्वरूप अपराध, सडक़ दुर्घटनाएँ व आत्म हत्या जैसी घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। श्रीमति शर्मा ने कहा कि नशा विरोधी दिवस के माध्यम से समाज  के नौजवानो को संदेश दिया जा रहा है कि नशा मानव जीवन के लिए घातक है जिस घर में नशा करने वाले हो उस घर में सुख शांति व समृद्धि नहीं आती। नशों  के कारण ही अनेकों घर तबाह हो चुके हैं। नशों का सेवन करने वाला व्यक्ति एक रोगी है जिसका उपचार होना अति आवश्यक है ,और ऐसे व्यक्ति को प्यार से समझा  बुझा कर नशे की दल- दल से बाहर निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि नशा करने वाले को प्यार से नशों के विरुद्ध समझाया जाए कि नशा कुछ पल का मजा है और जि़ंदगी भर की सजा है। यदि इस की लत लग जाए तो अपने जीवन के साथ- साथ पूरे परिवार का जीवन नर्क बन जाता है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि नशा करने वालों का सही मार्गदर्शन करने व उन्हें नशे के कीचड से निकालने के लिए हर व्यक्ति को अपना योगदान डालना चाहिए। इसके अतिरिक्त स्कूलों,कालेजो सहित धार्मिक व सामाजिक समारोहों में नशे के खिलाफ जागरूक करना चाहिए। श्रीमति शर्मा ने कहा कि नशे के सौदागरों के खिलाफ जन आंदोलन  चलाया जाए तथा सरकार व प्रशासन भी नशों के सौदागरों से नर्मी न बरतें और उन्हें सख्त सजा दे व उनका सामाजिक बहिष्कार करें। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनो में अनेकों नशे का सेवन करने वाले व नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया जबकि बड़े नशा तस्कर अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है जिन पर शिकंजा कसा जाना अति आवशयक है। इस अवसर पर जैसिका,गुरप्रीत कौर,यश पाल कौर भिंडर,धर्मेन्द्र कुमार,रणदीप कुमार,एडवोकेट संजीव मल्होत्रा आदि उपस्थित थे।

Sunday, September 22, 2013

राष्ट्रपति कल से विभिन्न राज्यों की यात्रा पर

21-सितम्बर-2013 20:07 IST 
23 से 26 सितंबर के तक कर्नाटक, तमिलनाडु और पुडुचेरी की यात्रा 
आन्ध्र प्रदेश से  सुश्री हेमलता की अगुवानी में आये एक महिला शिष्टमंडल से भेंट करते हुए राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी (PIB )
नई दिल्ली:21 सितम्बर 2013:(पीआईबी): राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी 23 से 26 सितंबर, 2013 के दौरान कर्नाटक, तमिलनाडु और पुडुचेरी की यात्रा करेंगे। 

कर्नाटक में राष्ट्रपति 23 सितंबर, 2013 को मैसूर में जेएसएस महाविद्यापीठ के जेएसएस अस्पताल का शुभारंभ करेंगे। वे 24 सितंबर, 2013 को सैनिक स्कूल बीजापुर के स्वर्ण जयंती समारोहों का भी शुभारंभ करेंगे। 

तमिलनाडु में श्री प्रणब मुखर्जी 24 सितंबर, 2013 को चेन्नई में दक्षिण भारतीय फिल्म कामर्स चैंबर द्वारा आयोजित भारतीय सिनेमा के शताब्दी समारोहों की शोभा बढ़ाएंगे। 

पुडुचेरी में राष्ट्रपति 25 सितंबर, 2013 को पांडचेरी विश्वविद्यालय के 23वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे। उसी दिन वे श्री अरविंदो आश्रम जाएंगे और श्री अरविंदो अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा केंद्र के विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। (PIB)
वीके/पीके/डीके/एस/आरके/एसकेबी-6322

Friday, September 13, 2013

मामला दिल्ली सामूहिक बलात्कार का आरोपियों का

Fri, Sep 13, 2013 at 9:09 PM 
फांसी की सजा मिलने पर जताई महिलाओं और एनजीओ ने खुशी
अमृतसर: 13 सितम्बर2013: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): दिल्ली गैंगरेप के आरोपियों को कोर्ट की ओर से फांसी की सजा सुनाए जाने का पूरे देश में स्वागत किया जा रहा है। इस सजा को बलात्कारियों के लिए खतरे की घंटी और महिलाओं और युवतियों के लिए उनके हथियार के रूप में देखा जा रहा है। आज इस फैसले के बाद अखिल भारतीय ह्यूमन राइट्स आग्रेनाइजेशन (अभरो) की ओर से लड्डू बांट और ढोल बजा कर अपनी खुशी का इजहार किया गया। इस मौके पर अभरो की महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कहा, कि इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार और अदालतें किस हद कर फिक्रमंद हैं। उन्होंने कहा, कि इस फैसले ने बलात्कार करने की सोचने वालों के लिए भी एक माइल स्टोन तय कर दिया है, कि यदि उन्होंने ऐसा कुछ किया, तो उनका हाल भी इन आरोपियों जैसा ही होगा।