Showing posts with label Pushpinder Kaur. Show all posts
Showing posts with label Pushpinder Kaur. Show all posts

Thursday, November 12, 2020

पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम सेल टीम की लुधियाना में दबिश

 मोहाली से आई विशेष टीम का ऑपरेशन करीब 9 घंटे तक चला 


मोहाली
//लुधियाना: 12 नवंबर 2020: (पुष्पिंदर कौर नीलम//पंजाब स्क्रीन)::

डिजिटल इंडिया  भी तेज़ी से साकार हो रहा है लेकिन साथ ही बढ़ रहे हैं बहुत से खतरे। साईबर क्राईम करने वाले भी अब पहले से ज़्यादा शातिर होने।  नया मामला सामने आया है लुधियाना में। पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम सेल टीम ने मोहाली से फिरोजगांधी मार्केट स्थित एक कंपनी के दफ्तर में ज़बरदस्त दबिश दी। कंपनी के प्रमुख सदस्यों के आवासों पर छापे भी मारे। जांच अधिकारी भगवंत सिंह के नेतृत्व में कुल 13 पुलिस कर्मियों की दो टीमों ने यह छापेमारी की। आपरेशन के लिए डिजिटल फोरेंसिक वैन और नवीनतम फोरेंसिक उपकरण भी भेजे गए थे। आपरेशन सुबह शुरू हुआ और लगभग नौ घंटे तक चला। टीम ने वहां से पेन ड्राइव, डीवीडी और अन्य सामग्रियों के साथ लगभग 17 लैपटाप और पीसी जब्त किए।

गौरतलब है कि लुधियाना स्थित एडटेक कंपनी टीसीवाई लर्निंग साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने पुलिस को रमनदीप सिंह, जगजीत सिंह, रूपिंदर सिंह, राहुल नागपाल और उसकी पत्नी हरप्रीत कौर के खिलाफ डाटा चोरी, डाउनलोड करने और चुराने की शिकायत की थी। वकील अंकुर घई ने बताया कि उक्त आरोपित पहले टीसीवाई में काम कर रहे थे। जगजीत बरनाला में टीसीवाई की फ्रैंचाइजी भी चला रहे थे।

कार्यकाल के दौरान उन्होंने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर कंप्यूटर नेटवर्क/सिस्टम आदि से क्लाइंट डाटा/कंप्यूटर डाटा बेस/सूचना/वायरफ्रेम/सोर्स कोड आदि डाउनलोड, कापी, निकाले और अवैध रूप से अपना काम शुरू कर दिया। उन्होंने टीसीवाई के कर्मचारियों को भी लालच दिया और अपनी कंपनी में ले गए। जो टीसीवाई सेवाओं के बारे में महत्वपूर्ण और गोपनीय जानकारी रखते थे। उन्होंने विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए कापी किए गए साफ्टवेयर को टीसीवाई के ग्राहकों को रियायती दरों पर बेचना शुरू किया।

जांच से पता चला कि कंपनी एक्सओवेज वेब टेक्नोलाजीज प्राइवेट के नाम से गैरकानूनी रूप से टीसीवाई के पायरेटेड साफ्टवेयर उपयोग कर रहा था। सबूतों के आधार पर टीसीवाइ ने एक्सओवेज वेब टेक्नोलाजीज के अवैध कृत्यों के लिए मोहाली में पंजाब स्टेट साइबर क्राइम पुलिस के साथ एफआइआर दर्ज की। इसके आधार पर टीम ने लुधियाना में दबिश दी।

सबूतों के आधार पर, टीसीवाई ने 20.10.2020 को धारा 406/408/379/381/120-B / 34 IPC और धारा 43/66/66-B आईटी एक्ट के तहत एक्सओवेज़ वेब टेक्नोलॉजीज के अवैध कृत्यों के लिए मोहाली में पंजाब स्टेट साइबर क्राइम पुलिस के साथ एफआईआर नंबर 29 दर्ज की ।”

उन्होंने यह भी कहा कि हम आरोपियों के ग्राहकों सहित अन्य जुड़े हुए लोगों के खिलाफ जल्द ही जरुरी कदम लेंगे।

साइबर पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई को देखते हुए, शिकायतकर्ताओं को उम्मीद है कि आरोपियों को जल्द ही सजा दी जाएगी।



Sunday, April 26, 2020

नामधारी संगत के साथ शहीद सरबजीत की बहन ने भी बांटा राशन

26th April 2020 at 5:28 PM
दलबीर कौर ने "पंथ के ठेकेदारों" को भी रखा आलोचना के निशाने पर  
अमृतसर//कुराली//लुधियाना: 26 अप्रैल 2020: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन):: 
कोरोना से कराह रहे लोगों को राहत पहुंचाने के मिशन में नामधारी सम्प्रदाय ने शहीद सरबजीत सिंह भिखीविंड की बहन दलबीर कौर को भी अपने साथ लिया है। दलबीर कौर ने भी भलाई के इस कार्य पर ठाकुर दलीप सिंह की प्रशंसा करते हुए सक्रिय हो कर इस काम में नामधारी काफिले का साथ दिया। उन्होंने ठाकुर जी का धन्यवाद करते हुए कहा कि आर्थिक तौर पर कमज़ोर जिन लोगों को आप ने राशन भिजवाया है पंथ के ठेकेदार तो इन लोगों को सिख ही नहीं मानते। इस मौके पर शहीद सरबजीत सिंह की चर्चा भी चली। आपको याद है न सरबजीत सिंह और उसकी ह्रदय विदारक शहादत? 
सच क्या है यह तो सरकारें ही जानती होंगीं लेकिन एक बात अवश्य होती रही कि नौजवान उम्र में धड़कते हुए दिल अपने देश के लिए खुद को खतरों में डाल कर अक्सर बहुत कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो एक नया इतिहास भी रच जाता है। इन कामों में दुसरे देशों में जा पहुंचना और जासूसी करना भी शामिल होता है। जासूसों की ज़िंदगी बेहद रहस्यपूर्ण होती है। वे जो कुछ करते हैं उसका सबूत भी अक्सर खुद ही मिटा देते हैं। इस लिए जब कोई उनसे उनके कामों का सबूत मांगें तो उनके लिए वह घड़ी बहुत ही मुश्किल की घड़ी होती है। मिटाये हुए सबूतों को भला कौन ला सकता है? पाकिस्तानी प्रचार के मुताबिक कहा जाता है कि भिखीविंड का सरबजीत सिंह भी पाकिस्तान में सीक्रेट ऐजन्ट था। उसने एक भारतीय जासूस के तौर पर  काफी काम किये। लेकिन गाँव के लोग कुछ और ही कहने बताते हैं। उनका कहना है कि उसने गलती से सीमा पार कर ली थी क्यूंकि उनदिनों कांटेदार बाड़ नहीं लगी होती थी।उसे नाम का भरम होने के कारण वहां पकड़ा गया। वहां उसे मंजीत सिंह बता कर अदालत में पेश किया गया। उसे यातनाएं भी दी गयीं और मौत की सज़ा भी सुनाई गई  जिसे कूटनयिक प्रयासों से रद्द करवा लिया गया। उसकी बहन दलबीर कौर ने उसे बचाने के लिए जो संघर्ष किया उसकी मिसाल शायद कहीं और नहीं मिलती। जब उसे रिहा किये जाने का वक़्त नज़दीक आया तो पाकिस्तान की कोटलखपत जेल में ही किसी अन्य कैदी ने उस पर हमला करके उसे बुरी तरह पीटा। मारपीट जानलेवा थी। शायद वहीँ पर उसकी मौत हो गई थी लेकिन फिर भी उसके इलाज का सिलसिला कई दिनों तक चला। उसके रिहा होने की बातें केवल कागज़ों में रह गई। रिहाई होने वाली थी लेकिन वहीँ अस्पताल में उसका देहांत हो गया। कभी किसी शायर ने कहा था:
पास मंज़िल के मौत आ गई 
जब सिर्फ दो कदम रह गए!
बस रिहा हो कर भिखीविंड गांव में अपने परिवार में पहुंचने की बातें केवल कागज़ों में रह गईं। उसके परिवार का सपना कभी पूरा न हुआ। उसकी बेटियां कभी अपने पिता को न देख सकीं। उसका शव ही यहाँ पहुंचा। दर्द असहनीय था लेकिन सरे परिवार ने इस दर्द को सहा। उसकी बहन दलबीर कौर ने उस नाज़ुक हालत में भी उस परिवार को संभाला। हालांकि दलबीर कौर को भी लोगों ने बहुत कुछ कहा लेकिन वह डटी रही। उसने सरबजीत सिंह की अंत्येष्टि राजकीय सम्मानों के साथ करवाई।  मौत पर पंजाब सरकार ने तीन दिनों तक का राजकीय शोक भी रखा। एक करोड़  आर्थिक राहत  भी दी। इस तरह सरबजीत को शहीद का सम्मान भी प्राप्त हुआ। इस सब के बावजूद लोग उसे भूलते चले गए। सियासी लोग भी और समाजिक लोग भी। उसके जाने का दर्द याद रहा केवल उसके परिवार को। साथ ही उस दर्द को नामधारी सम्प्रदाय ने भी याद रखा। 
अब जब कोरोना का कहर छाया तो यह संकट भीखीविंड में ही महसूस किया गया। वहां भी कारोबार ठप्प हो गए। गरीब और मध्यवर्गीय लोगों को खाने के लाले पड़ गए। काम लगातार ठप और खर्चे लगातार जारी। पेट की भूख तो लगातार सताती रही। गहरे संकट की इस नाज़ुक घड़ी में ठाकुर दलीप सिंह ने अपनी संगत सिंह से भिखीविंड जाने को भी कहा और शहीद सरबजीत सिंह की बहन से मिलने का भी आदेश दिया। नामधारी संगत ने ऐसा ही कहा। भिखीविंड में पहुंच कर नामधारी सम्प्रदाय के लोगों ने आर्थिक कमज़ोर लोगों का पता लगाया।एक एक करके उनके घर ढूंढे और बिना कोई शोर शराबा किये राशन और आर्थिक सहायता उन तक पहुंचाई। न मीडिया बुलाया और न ही फोटो खिंचवाने का आडंबर किया। जिस तस्वीर को आप देख रहे हैं इसे भी किसी ने चुपके से खींच लिया। दलबीर कौर  भूपिंदर कौर ने भी सक्रिय हो कर इसमें योगदान दिया। 
नामधारी संगत का काफिला और दलबीर कौर मिलकर अमृतसर के गांव गांव में पहुँच रहे हैं। वहां ज़रूरतमंद सिख परिवारों को दैनिक उपयोग में आने वाली सभी आवशयक चीज़ें मुहैया कराई जा रही हैं। नामधारी संगत के इस काफिले का नेतृत्व कर रहे हैं साहिब सिंह, लाल सिंह और गुरचरण सिंह। इन नामधारी प्रतिनिधियों ने कहा कि यह सब  ठाकुर दलीप सिंह जी के विशेष आदेशों पर ही किया जा रहा है। शहीद सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने ही कहा कि मैं ठाकुर जी की विशेष आभारी हूँ जिन्होंने इस संकटकाल में इन लोगों का दामन थामा है। मुश्किल की इस घड़ी में यह ज़रूरतमंद लोग बहुत ही डगमगाए हुए थे। नामधारी संगत इनके लिए भगवान बैंक कर पहुंची है। उन्होंने इस बात पर गहरा दुःख व्यक्त किया कि पंथ के कुछ स्वयंभू ठेकेदार तो इनको सिख भी नहीं मानते। इनके साथ लम्बे समय से भेदभाव करते आ रहे हैं। दलबीर कौर ने साड़ी संगत से अपील की कि जो खुद को सिख समझता है वह किसी के साथ भी भेदभाव न करे। भेदभाव दूर करके ही पंथ की चढ़दीकला होगी। गुरु का तेज भी हमें तभी मिलेगा। 
इस मौके पर सरपंच दविंदर सिंह नागी, बलकार सिंह, धीर सिंह, सुच्चा सिंह, प्रितपाल सिंह, बीबा भूपिंदर कौर और अन्य लोग भी मौजूद रहे।
यह भी पढ़िए बस यहाँ नीचे दिए गए नीले लिंक पर क्लिक करके 
पटियाला और आसपास के क्षेत्रों में मोर्चा संभाला कुलदीप कौर और अन्य नामधारी सहयोगियों ने 

Wednesday, April 22, 2020

शहीद भगत सिंह नगर हुआ कोरोना मुक्त-बलबीर सिंह सिद्धू

ज़िला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कड़ी मेहनत का नतीजा 
कोरोना पर फतह के बाद मीडिया से बात करते हुए जसकरण सिंह 
चंडीगढ़//नवां शहर: 22 अप्रैल 2020: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन)::
जिस तरह से कोरोना आया उसे देख कर दुनिया हार भी  थी लेकिन अब अच्छी खबरें आ रही हैं। ज़िंदगी है-कोरोना हार रहा है। अतीत में कई बार इतिहास रचने वाले शहीद भगत सिंह नगर ने फिर एक नया इतिहास रचा है। यह ज़िला कोरोना मुक्त घोषित हो गया है। यह खबर पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पंजाबियों के जीवट, उत्साह और इच्छा शक्ति को दर्शाती हुई खबर। ज़िला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कड़ी मेहनत के चलते शहीद भगत सिंह नगर आज कोरोना मुक्त होने वाला पंजाब का पहला ज़िला बन गया है। कोरोना प्रभावित इस ज़िले का अठारहवां मरीज जसकरन सिंह भी आज ठीक होने के बाद घर रवाना हो गया। कोरोना पर फतह पाने की यह उपलब्धि आज के इस युद्ध में बहुत ही बड़ी बात है। एक नई प्रेरणा देती है यह खबर। एक  जगाती है यह खबर। इस खबर से समाज के सभी क्षेत्रों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। 
स्वास्थ्य मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने स्वस्थ हुए मरीजों को तंदुरुस्त जीवन की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ये सभी व्यक्ति अब कोरोना प्रभावित मरीजों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं कि हिम्मत और आत्मविश्वास के साथ घातक बीमारियों को भी मनुष्य हरा सकता है। उन्होंने बताया कि जिले को रैड जोन में से ग्रीन जोन में ले जाने के लिए जिला प्रशासन समेत स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने दिन-रात काम किया और जिसके लिए विधायक अंगद सिंह, डिप्टी कमिश्नर विनय बबलानी, एस एस पी अलका मीना, सिविल सर्जन डाॅ. रजिन्दर प्रसाद बधाई के पात्र हैं जिनके नेतृत्व अधीन सभी मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौटे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने शहीद भगत सिंह नगर जिले के निवासियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस तरह यहाँ पंजाब सरकार की हिदायतों और कर्फ्यू का पालन किया गया है वह भी पूरे पंजाब के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि कोरोना के विरुद्ध इस लड़ाई को आम जनता के सहयोग के साथ ही जीता जा सकता है जो शहीद भगत सिंह नगर ने कर दिखाया है।
स्वास्थ्य विभाग की मिसाली कारगुजारी को उजागर करते हुए उन्होंने बताया कि 19 मार्च से 26 मार्च तक एक दम आए 18 कोरोना मामलों के साथ यह इलाका कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हो गया था जिस कारण जिला हस्पताल में भी तनाव का माहौल बन गया था। इसके उपरांत बड़ी संख्या में मरीजों को मानक इलाज सेवाएं मुहैया करवाना एक चुनौती बन गया था परन्तु जिस तरह बहादुरी और संजीदगी के साथ मैडीकल और पैरा-मैडीकल टीमों द्वारा मरीजों का ध्यान रखा गया वह काबिले तारीफ है जो भविष्य में भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
गौरतलब है कि एस एस पी अलका मीना के नेतृत्व अधीन स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला हस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में मरीजों के लिए निभाई गई सेवाओं की सराहना करते हुए डाॅक्टरों और पैरा-मैडीकल स्टाफ पर फूलों की वर्षा करके ताली के साथ धन्यवाद भी किया गया।

Sunday, February 05, 2017

राष्‍ट्रपति ने आरंभ किया राष्‍ट्रपति भवन का वार्षिक ‘उद्यानोत्‍सव’

04-फरवरी-2017 16:38 IST
सुबह साढ़े नौ बजे से शाम चार बजे तक खुला रहेगा
नई दिल्ली:: 4 फरवरी 2017: (पी आई बी)::
राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज (4 फरवरी, 2017) राष्‍ट्रपति भवन का वार्षिक ‘उद्यानोत्‍सव’ आरंभ किया। 

मुगल गार्डन आम जनता के लिए कल से 12 मार्च, 2017 (सोमवार को छोड़कर जोकि रखरखाव दिवस है) तक सुबह साढ़े नौ बजे से शाम चार बजे तक खुला रहेगा। लोग स्प्रिचुअल गार्डन, हर्बल गार्डन, बोनसाई गार्डन एवं म्‍यूजिकल गार्डन का आनन्‍द भी उठा सकेंगे। इस अवधि के दौरान उद्यानों का भ्रमण करने के लिए कोई ऑन लाइन बुकिंग नहीं होगी। 

आम जनता के लिए प्रवेश तथा निकास नॉर्थ एवन्‍यू के समीप प्रेसिडेंट एस्‍टेट के गेट नम्‍बर 35 से होगा। आगंतुकों से पानी की बोतल, ब्रीफकेस, हैंडबैग/लेडीज पर्स, कैमरा, रेडियो/ट्रांजिस्‍टर, बक्‍से, छाता, खाद्य सामग्री आदि न लाने का अनुरोध किया जाता है। ऐसी वस्‍तुएं लाने पर उन्‍हें प्रवेश बिन्‍दु पर जमा कर दिया जाएगा। बहरहाल, गार्डन का भ्रमण करने के लिए आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी, शौचालय, प्राथमिक चिकित्‍सा/चिकित्‍सकीय सुविधा ;वरिष्‍ठ नागरिकों, महिलाओं तथा बच्‍चों के लिए विश्राम कक्ष की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। 

मुगल गार्डन विशिष्‍ट रूप से किसानों, दिव्‍यांगों, सैन्‍य/अर्द्धसैन्‍य बलों तथा दिल्‍ली पुलिस के जवानों जैसे विशेष वर्ग के आगंतुकों के लिए 10 मार्च, 2017 को सुबह साढ़े नौ बजे से शाम चार बजे तक खुला रहेगा। प्रवेश तथा निकास गेट नम्‍बर 35 के जरिए होगा। 

टेक्‍टाइल गार्डन 10 मार्च, 2017 को 11 बजे से शाम चार बजे तक दृष्टिबाधित लोगों के लिए खुला रहेगा। प्रवेश तथा निकास चर्च रोड पर स्थित गेट नम्‍बर 12 से होगा। 
*****
वीके/एसकेजे/एनआर– 312

Thursday, September 15, 2016

हिन्दी के विकास में गैर हिन्दी क्षेत्र के विद्वानों का बहुत बड़ा योगदान


हिन्दी को हमें आत्म सम्मान के साथ जोड़ना होगा-राधे श्याम शर्मा
कमला  लोहटिया कालेज लुधियाना में भी हिंदी दिवस 
पंचकूला/चंडीगढ़/पिंजौर/लुधियाना14 सितंबर 2016: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन):
विवाद करने वाले विवाद करते रहे लेकिन हिंदी के चाहने वाले लगातार बढ़ रहे हैं। हिंदी में बात करना और हिंदी में लिखना अब धीरे धीर गर्व की बात महसूस करने जैसा हो रहा है। हिंदी दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ और आसपास ले इलाकों में विशेष कार्यक्रम हुए। 

हिन्दी केवल अभिव्यक्ति की भाषा नहीं है। हिन्दी एक राष्ट्र, एक सभ्यता, एक संस्कृति है। यह विचार दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो.कुमुद शर्मा ने हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रकट किए। उनके विचारों को सभी ने बहुत प्रेम से सुना। 
उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में इस वर्ष अकादमी द्वारा प्रदेश के सभी सरकारी तथा गैर सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में हिन्दी दिवस पर विशेष आयोजनों की व्यवस्था की गई है। अकादमी के उपाध्यक्ष राधे श्याम शर्मा ने कहा कि हिन्दी भाषा के विकास में गैर हिन्दी क्षेत्र के विद्वानों का बहुत बड़ा योगदान है। हिन्दी के विकास को हमें आत्म सम्मान और अस्मिता के साथ जोड़ना होगा तब शायद हिन्दी दिवस मनाने की आवश्यकता ही न रहे। गोष्ठी में सतनाम सिंह, अरुण जौहर, गणेश दत्त, निखा खोलिया, सुनीता नैन, एसएल धवन, चन्द्र भार्गव, संगीता बैनीवाल, उर्मिल सखी, सुशील हसरत, नरेन्द्र आहुजा विवेक, राजेश पंकज, शशि प्रभा, मीरा गौतम, अमर जीत ‘अमर’ तथा सुभाष रस्तोगी ने कविता पाठ किया। मंच संचालन डॉ. विजेन्द्र कुमार ने किया जिसे बहुत पसन्द किया गया।
पिंजौर/कालका: इसी तरह बुधवार को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में पिंजौर, कालका के विभिन्न स्कूलों में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सीआरपी केन्द्र पिंजौर के केन्द्रीय विद्यालय में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। सेंट विवेकानंद स्कूल पिंजौर में वॉइस प्रिंसिपल पल्लवी भारद्वाज, बाल भारती स्कूल कालका की प्रिंसिपल पूनम गौतम ने बच्चों को हिंदी का महत्व बताया। इन  ही हिंदी का प्रभाव क्षेत्र बढ़ेगा। 
लुधियाना: अन्य स्थानों की तरह लुधियाना में भी बहुत से संस्थानों की ओर  से विशेष आयोजन हुए। गवर्नमेंट कॉलेज फॉर ब्वॉयज में पंजाब हिंदी परिषद नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा संयुक्त रुप से राष्ट्रीय हिंदी दिवस के मौके पर समारोह का आयोजन किया गया। इस शानदार कार्यक्रम में हायर एजुकेशन मिनिस्टर सुरजीत सिंह रखड़ा मुख्यातिथि के तौर पर शामिल हुए। वहीं, मेयर हरचरण सिंह गोहलवड़िया, राजेंद्र भंडारी, अजय सिंह, मदन बस्सी, अंगरुप सोनम, आर के मल्होत्रा ने विशेषातिथि के तौर पर शिरकत की। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. धर्म सिंह संधू ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार भाषा आयोग के सदस्य हरमिंदर सिंह बेदी ने मुख्य प्रवक्ता के तौर पर हिस्सा लिया। यशपाल बांगिया ने पंजाब हिंदी परिषद के प्रयासों पर प्रकाश डाला। डॉ. बबीता जैन और डॉ. निरत्तोमा मोदगिल शर्मा ने पंजाब में हिंदी के उपयोग उत्थान पर जोर दिया। एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज, मालवा सेंट्रल कॉलेज के स्टूडेंट्स ने कल्चरल कार्यक्रम पेश कर सभी का मनोरंजन किया। इस मौके पर किरन साहनी, रणधीर शर्मा ने भी खासतौर पर शिरकत की। पंजाब हिंदी परिषद के प्रधान नरेंद्र बांगिया ने समारोह के सफल आयोजन के लिए ओम प्रकाश शर्मा, यश पाल छाबड़ा, महेश शर्मा अन्य कार्यकारी सदस्यों का धन्यवाद किया। लुधियाना का यह आयोजन भी बेहद सफल रहा। 

Thursday, September 01, 2016

LIC: राष्ट्र की सेवा में, गौरवपूर्ण 60 वर्ष पूरे कर लिए

Date: 2016-09-01 15:14 GMT+05:30
बहुत से स्थानों पर हुए हर्षोउल्लास पूर्वक विशेष आयोजन 
चंडीगढ़//मोहाली//लुधियाना: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन):

भारतीय जीवन बीमा निगम ने 01.09.2016 को राष्ट्र की सेवा में, गौरवपूर्ण 60 वर्ष पूरे कर लिए हैं। भारतीय जीवन बीमा निगम ने जीवन बीमा का संदेश देश के हर कोने में पहुचाने तथा लोगों का पैसा लोगों के भलाई में लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पिछले 16 वर्षो से जीवन बीमा के क्षेत्र मे प्राईवेट कंपनियों के आने के बावजूद भी भारतीय जीवन बीमा निगम का मार्केट शेयर पहले स्थान पर है। आज भारतीय जीवन बीमा निगम के पास 41 करोड़ से ज्यादा पॉलिसी धारक होने के साथ साथ 20,57,628.38 करोड़ का लाइफ फ़ंड हैं जब कि  भारतीय जीवन बीमा निगम के पास 22 लाख करोड़ से ज्यादा की सम्पत्ति है। वित वर्ष 2015-16  में 205.71 लाख पॉलिसियाँ बेच कर भारतीय जीवन बीमा निगम ने नई पॉलिसियाँ में 76.84% मार्केट शेयर अपने नाम किया जब के कुल प्रीमियम  आमदन 97,674.32 करोड़ दर्ज़ कर 70.44% मार्केट शेयर अपने नाम कर के बीमा क्षेत्र मे पहले स्थान कायम रखा । पेंशन तथा समूह बीमा योजना मे क्न्वेंशनल व्यवसाय के अंतर्गत 400.16 लाख नई पॉलिसियाँ जारी की गई।

वित्तीय वर्ष 2015-16 में भारतीय जीवन बीमा निगम ने 1,01,041-65 करोड़ रुपये के 215.71 लाख दावों का भुगतान कर के एक इतिहास बनाया है। जब के 99.75% मृत्यु दावों का भुगतान सूचना मिलने के 15 दिनों के अंदर किया गया है।

भारतीय जीवन बीमा निगम ने अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान करने हेतु सूचना प्रोधौयोगिकी का अधिकतम उपयोग किया है। भारत में सब से बड़ा बीमा उधयोग  होने के कारण भारतीय जीवन बीमा निगम ने हमेशा उच्च तकनीक को अपनाया है ताकि  वह अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान कर सके।

भारतीय जीवन बीमा निगम हमेशा अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेवारी को निभाने में तत्पर रहा है । भारतीय जीवन बीमा निगम ने 20.06.2006 को एलआईसी गोल्डन जुबली ट्रस्ट की स्थापना की है । जिसे एलआईसी अपनी सामाजिक जिम्मेवारी का हिस्सा मानते हुए, इसे बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम 1950 के अंतर्गत चैरिटेबल  कमिश्नर के पास रजिस्टर कराया गया है। इस का मुख्य उद्देश्य आम जनता  को गरीबी से राहत दिलाना और शिक्षा को बढ़ावा देने तथा मेडिकल सुविधा दिलाना है ।

एलआईसी गोल्डन जुबली फ़ाउंडेशन ने हमेशा सामाजिक सुविधा से जुड़े प्रोजेक्ट, जैसे हॉस्पिटल, विधालय भवन तथा कक्षा के कमरे, पुस्तकालय, कम्प्युटर सेंटर, वृद्ध आश्रम, पिछड़े इलाकों में बच्चों के लिए होस्टल बनाना, विकलांग बच्चों के लिए वोकेशनल परिशिक्षण केंद्र बनवाने में वित्तीय सहयोग दिया है ताकि देश के विभिन्न भागों में रह रहे जरूरत मंद लोगों को अधिक से अधिक सुविधा प्रदान की जा सके। एलआईसी गोल्डन जुबली फ़ाउंडेशन की स्थापना से लेकर अब तक एलआईसी फ़ाउंडेशन ने एन. जी. ओ. द्वारा चलाये विभिन्न 296 प्रोजेक्टों में वित्तीय सहायता दी जा रही है ।

अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हुए 31.03.2016 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान 43 पुरस्कारों से सनमानित किया गया है जैसे कि notable ones being Readers Digest Trusted Brand, ET Best Brands 2014, Outlook Money Award, Annual Greentech CSR Awards,   Money Today awards-2014 LIC has also been ranked Second In The Most Valuable Indian Brands of 2014 by Brand Finance LIC was also among the Top Three Meaningful Brands of 2013, in a study done by Havas Media Group’ LIC has also been selected as “Brand of the Year 2015-16”by World Branding Forum.

प्रैस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लुधियाना मण्डल के वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक श्री डी.सी. ठाकुर ने बताया कि लुधियाना मण्डल ने 31.03.2016 के समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान 1,05,649 नई पॉलिसियाँ जारी करके 136.64 करोड़ रुपये की प्रथम प्रीमियम आय अर्जित करके नव-व्यवसाय में नया कीर्तिमान स्थापित किया है । लुधियाना मण्डल के दावा भुगतान के संबंध मे बोलते हुए श्री डी. सी. ठाकुर ने बताया कि 31.03.2016 तक कुल 1,05,433 परिपक्वता एवं विधमानता हित लाभ  के साथ हुए 428.86 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह से कुल 3049 मृत्यु दावों का भुगतान करते हुए कुल 49.70 करोड़ रुपये का भुगतान करते हुए अपने पॉलिसी धारकों को वेहतर सेवा की मिसाल लुधियाना मण्डल द्वारा की जा चुकी है।

लुधियाना मण्डल ने चालू वित्तीय (01.04.2016 to as on date) वर्ष में, अब तक कुल 26417 परिपक्वता एवं विधिमानता हित लाभ  के साथ हुए 138.96 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह से कुल 1087 मृत्यु दावों का भुगतान करते हुए कुल 17.65 करोड़ रुपये का भुगतान करके अपनी बेहतर सेवा का प्रदर्शन कर चुका है।

इस अवसर पर श्री डी. सी. ठाकुर ने बताया पूरे देश में अपने पॉलिसी धारकों को सेवा प्रदान करने के लिए एलआईसी के 8 क्षेत्रीय कार्यालय, 113 मण्डल कार्यालय, 2048 शाखा कार्यालय, 1401 सेटेलाईट कार्यालय, 1240, मिनी कार्यालय, 73 कस्टमर ज़ोन कार्यालय का प्रावधान किया गया है जो कि अपने बहुमूल्य पॉलिसी धारकों को उन के घर तक सेवा प्रदान कर रहा है। कस्टमर ज़ोन कार्यालय के बारे में श्री डी. सी. ठाकुर ने बताया के कोई भी पॉलिसी धारक आई. वी. आर. एस। सेंटर के 1251 नंबर पर अपनी पॉलिसी के बारे में  कोई भी जानकारी ले सकता है । 73 कस्टमर ज़ोन कार्यालय पूरे देश में अपने पॉलिसी धारकों को 24x7 पॉलिसी संबंधी सेवा उपलब्ध करा रहा है। एलआईसी ने अपने पॉलिसी धारकों के लिए एक पोर्टल का विकास कर रखा है जिस से कोई भी पॉलिसी धारक अपनी पॉलिसी को रजिस्टर करने के बाद, पॉलिसी से संबन्धित जानकारी किसी भी शाखा से ले सकता है ।


(डी. सी. ठाकुर)
वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक,
भारतीय जीवन बीमा निगम,
लुधियाना।

Friday, August 19, 2016

रिटायर्ड ब्रिगेडियर गगनेजा पर हमला करने वालों को जल्द पकड़ो

चंडीगढ़ में आरएसएस के शिष्टमंडल ने की राज्यपाल से भेंट 
मोहाली:18 अगस्त 2016: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन): 
आरएसएस के वरिष्ठ नेता रिटायर्ड ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा पर जालंधर में हुए हमले का मामला अभी तखल न होने के कारण संघ और भाजपा केडर में लगातार रोष बना हुआ है। इस हमले की तकरीबन सभी दलों ने सख्त शब्दों में निंदा की थी। इसी बीच चंडीगढ़ के संघ संचालक त्रिलोकी नाथ गोयल ने पंजाब के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को सौंपे ज्ञापन में अारएसएस पंजाब के सह प्रांत संघचालक ब्रिगेडियर (रिटा.) जगदीश गगनेजा पर 6 अगस्त को कातिलाना हमला करने वालों को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है। गोयल ने कहा है कि गगनेजा पर किया गया हमला पंजाब व देश के सामाजिक सौहार्द तथा भाई-चारे को तोड़ने की साजिश है। उल्लेखनीय है जगदीश गगनेजा पर जालंधर के ज्योति चौंक के भीड़भाड़ भरे सघन इलाके में 6 अगस्त की शाम को हमलावरों ने उस समय गोली चलाई थी जब वे अपने परिवार के साथ ज्योति चौक के नजदीक खरीददारी कर रहे थे। वे लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। पंजाब के हालात पर नज़र रखने वाले समाजिक और सियासी लोगों ने इसे आतंकवाद की दस्तक के तौर पर लिया और सरकार को सतर्क होने की सलाह भी दी। हमलावरों को पकड़ने में हो रही देरी के कारण आम लोगों में निराश का आलम है और उन्हें एक बार फिर असुरक्षा का अहसास होने लगा है।
गौरतलब है कि जिस दिन श्री गगनेजा पर गोली चलाई गई उस दिन उन्होंने एक अहम मीटिंग बुला रखी थी। आरएसएस के प्रदेश सह संघ चालक रिटायर्ड ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा ने रविवार को जालंधर में संघ की एक बड़ी बैठक बुलाई हुई थी। डेवियट में होने वाले इस विभाग मिलन कार्यक्रम में संघ के पंजाब में कार्यक्रत सभी विंग बुलाए हुए थे। बैठक का मुख्य एजेंडा पंजाब में संघ के प्रचार-प्रसार व आम लोगों को संघ से अवगत करवाने का था। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में आरएसएस का विस्तार करना व वहां नई शाखाएं खोलने की भी चर्चा इसी कार्यक्रम में होनी थी। पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भी कई मुद्दों पर चर्चा की जानी थी। 
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की पंजाब इकाई के सचिव कामरेड हरदेव अर्शी ने भी इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए चेताया था कि सरकार को अब तो नींद से जाग जाना चाहिए। 
Com Hardev Arshi on law and Order situation in Punjab

Friday, August 07, 2015

ढाई आखर प्रेम के पढ़े सो पंडित होए

प्रेम, सौहार्द और सदभावना की राह दिखाता चंडीगढ़ का धर्म स्थल 
चंडीगढ़: 7 अगस्त 2015: (पुष्पिन्दर): 
बहुत पहले ही कह दिया गया था की ढाई आखर प्रेम के पढ़े सो पंडित होए लेकिन लोगों ने एक न मानी।  धर्म के नाम पर अधर्म होता रहा। प्रेम के संदेश नफरत के लिए इस्तेमाल होने लगे , भगवान के नाम पर दंगे फसाद आम बात हो गयी। जनाब जावेद अख्तर साहिब को एक लम्बी नज़्म लिखनी पड़ी---जिसकी दो चार पंक्तियाँ हैं-
लोग इन मुर्दा खुदाओं को सम्भाले क्यूं हैं !
फ़िक्र पे जंग है क्यूं,  ज़हन पे ताले क्यूं हैं !
धर्म तो आया था दुनिया में मोहब्बत के लिए..!
इनके हाथों में ये तलवार, ये भाले क्यूं हैं !                
बांटते फिरते हैं नफ़रत जो ज़माने भर में,
ऐसे इंसान तेरे चाहने वाले क्यूं हैं !
आँख रोशन हुयी सूरज की किरण से लेकिन,
ज़हन में अब भी अँधेरे के ये जाले क्यूं है !
शायर देखते रहे, उनका दिल रोता रहा---वे लिखते रहे पर दुनिया फिर भी नासमझ बनी रही। इसी तरह जनाब बशीर बद्र साहिब ने लिखा:
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में;
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में। 
हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं
उम्र बीत जाती है दिल को दिल बनाने में। 
बहुत से शायरों ने बहुत सी भाषाओं में बहुत कुछ लिखा लेकिन नफरत फैलती रही।  लोगों को जोड़ने वाले पुल  टूटते रहे और दीवारें ऊंची से ऊंची होती रहीं। समाज की हालत देख कर निराशा के सिवाए कुछ मन में नहीं उठता।  बार बार लगता यही है हमारी नियति। यही है हमारी तक़दीर। कभी आँखों के सामने मुम्बई घूमता, कभी गोधरा, कभी गुजरात और कभी नवंबर-84.... दंगे फसाद इस पीरों पैगंबरों की  भूमि के प्रतीक क्यों बन गए? शयद मन और निराश होता लेकिन तभी दिमाग मैं एक उम्मीद की किरण आई।  उस बिजली की तरह जो तूफानी और अँधेरी रात में अचानक कौंधती है लेकिन पल भर में ही राह दिखा जाती है। उस चमक में देखा चंडीगढ़ के सेक्टर 41-B में बना अद्भुत धर्म स्थल जो आज भी राह दिखाता और पूछता है जब भगवान और उसके घरों में कोई भेद भाव नहीं तो तुम कौन होते हो इंसान और इंसान में भेदभाव करने वाले? तुम्हे क्या अधिकार है ऊँच-नीच की दीवारें खड़ी करने का?
आज के युग में प्रेम और सौहार्द का प्रतीक बने इस स्थानमें गुरुद्वारा साहिब भी है, मंदिर भी और चर्च भी.… तीनों की दीवारें एक साथ सटी हैं जैसे ख रही हों किसी का भी जिस्म चीरोगे तो खून का रंग लाल ही मिलेगा। 
आयो मोहब्बत के इस पैगाम को और मज़बूत बनाने के लिए सब तक पहुंचाएं।