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Friday, August 28, 2020

साईबर अपराधी अमित शर्मा उर्फ नितिन गिरफ़्तार

 बहु-करोड़पति साईबर बैंक फ्रॉड का किया पर्दाफाश 
चंडीगढ़: 27 अगस्त 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
पंजाब पुलिस स्टेट साईबर क्राइम सैल ने राज्य में आधुनिक सूचना तकनीक के द्वारा बहु-करोड़पति साईबर बैंक घोटाले का पर्दाफाश करके बड़ी सफलता हासिल की है और गिरोह के मुख्य सरगना अमित शर्मा उर्फ नितिन को काबू कर लिया है, जो पिछले करीब 7 महीनों से फऱार चल रहा था। इस सम्बन्ध में उस दोषी के खि़लाफ़ थाना स्टेट साईबर क्राइम, एसएएस नगर में आईपीसी की धारा 420, 465, 468, 471, 120 बी, आईटी कानून की धारा 66, 66-सी, 66-डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए ब्यूरो ऑफ इनवैस्टीगेशन के डायरैक्टर-कम-एडीजीपी श्री अर्पित शुक्ला ने बताया कि साईबर क्राइम सैल ने इस केस की जांच एचडीएफसी बैंक के लोकेशन मैनेजर विजय कुमार की शिकायत पर की है, जिसने दोष लगाया है कि एचडीएफसी बैंक खाते से लगभग 2 करोड़ रुपए की तकनीकी ढंग से धोखाधड़ी की गई है। पुलिस को पड़ताल के दौरान यह पता लगा कि साईबर धोखाधड़ी करने वाले ने नैट बैंकिंग के द्वारा खाते से पैसे निकाल कर 5 अलग-अलग बैंक खातों में भेज दिए। उन्होंने कहा कि यह बैंक खाते नकली पहचान पत्रों के द्वारा खोले गए थे और इसके बाद खातों से एटीएम और स्वै-चैक के द्वारा नकदी निकलवाई गई।
इस साईबर अपराध की कार्यप्रणाली संबंधी बताते हुए बीओआई के प्रमुख ने कहा कि धोखाधड़ी करने वालों ने बहुत चालाकी के साथ पीडि़त के बैंक खाते के साथ रजिस्टर किए गए ईमेल आईडी और मोबाइल नंबरों को उसी जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी में तबदील कर दिया, जिस कारण मुलजि़म अपने इन मोबाइल नंबरों और ईमेल आईडी के द्वारा उसके खातों का वर्चुअल कंट्रोलर बन गया।
इस केस में अमित शर्मा उर्फ नितिन ने अपने आप को अकाश अरुण भाटिया (केस का पीडि़त) के तौर पर अपनी पहचान बनाई और उसके (भाटिया) बैंक खातों की इन्टरनेट बैंकिंग पहुँच हासिल कर ली। इसके बाद मुलजि़म ने नकली दस्तावेज़ जमा करवा कर विक्रम सिंह के नाम पर खोले और पाँच अलग-अलग खातों में पैसे तबदील कर लिए।
उन्होंने आगे बताया कि जांच के दौरान सभी सरकारी पहचान प्रमाण, जिनमें चिप आधारित ड्राइविंग लायसेंस, पैन कार्ड, होलोग्राम वाला वोटर आईडी कार्ड आदि और बैंक खाता खोलने और मोबाइल नंबर प्राप्त करने के लिए मुहैया करवाए गए निजी पहचान दस्तावेज़ (केवाईसी) भी नकली पाए गए। इन धोखेबाज़ों ने एटीएम कार्डों और चैकों के द्वारा सारे पैसे निकलवा लिए, जिससे पुलिस को कोई सुराग न मिल सका। इसके अलावा, मोबाइल नंबर सिफऱ् अपराध करने के समय ही इस्तेमाल किए जाते थे और उसके बाद नॉट-रीचेबल हो जाते थे।
इसका और विवरण देते हुए श्री अर्पित शुक्ला ने कहा कि जांच के दौरान मोबाइल फ़ोन की लोकेशन से पता लगा कि लुटेरे लुधियाना से गिरोह चला रहे थे। पड़ताल के दौरान पुलिस जांच टीम को पुलिस के स्रोतों से गुप्त जानकारी मिली और इस खुलासे के साथ मुलजि़म की पहचान हो गई। इस ऑप्रेशन के दौरान उस क्षेत्र की परीक्षक टीम द्वारा ख़ुद जांच और घर-घर तस्दीक की गई जहाँ यह फ़ोन एक्टिव थे।
उन्होंने बताया कि शारीरिक बनावट और सामने आ रहे विवरणों के आधार पर इस मामले में 3 मुलजि़म नामज़द किए गए और इनमें से दो मुलजि़म राजीव कुमार पुत्र देव राज और दीपक कुमार गुप्ता पुत्र दर्शन लाल गुप्ता निवासी शिमलापुरी को शिमलापुरी, लुधियाना से 28-01-2020 को गिरफ़्तार कर लिया था, परन्तु यह मुख्य मुलजि़म उस समय पर फऱार होने में सफल हो गया।
उन्होंने कहा कि इस साईबर अपराधी अमित शर्मा उर्फ नितिन पुत्र राम लाल निवासी दयोल एन्क्लेव, लुधियाना को पकडऩे के लिए एसएचओ साईबर क्राइम भगवंत सिंह की एक विशेष टीम बनाई गई। इस फऱार दोषी के विरुद्ध पंजाब और हरियाणा राज्य के अलग-अलग थानों में 6 एफआईआर दर्ज हैं और वह ऐसी करोड़ों की धोखाधड़ी में वांछित था।
जि़क्रयोग्य है कि मुलजि़म सूचना तकनीक के साथ विवरणों को बदल कर बैंक खातों को हैक करते थे। यह मुलजि़म 28-01-2020 को पुलिस पार्टी को चकमा देकर फऱार हो गया था, जब उसके सह मुलजि़मों को जांच टीम ने लुधियाना के एक जिम से गिरफ़्तार किया था, जहाँ उस दिन उसे काबू करने के लिए जाल बिछाया गया था। इन मुलजि़मों की गिरफ़्तारी के साथ, करोड़ों रुपए की साईबर धोखाधड़ी के साथ सम्बन्धित सभी केस हल हो गए। इस सम्बन्धी अगली जांच के दौरान और खुलासे होने की संभावना है।

Sunday, July 26, 2015

पाखंडी जगेड़ा: नाम जपते जपते बन गया क्राईम किंग

आजकल फिर सरगर्म है अकाली नेताओं पर डोरे डालने के लिए  
लुधियाना:26 जुलाई 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
कहते हैं कि ज़िंदगी जीने के दो ही तरीके हैं। या तो जो हासिल है उसे पसंद करना सीख लो और या जो पसंद है उसे हासिल करना सीख लो। धर्म मार्ग पर चलने वाले अक्सर भगवान की रज़ा में राज़ी रहना सीख लेते हैं और उनके चेहरे पर गहन शांति अ जाती है। धीरे धीरे उनके पास संसार के सारे सुख आ जाते हैं लेकिन वे इन सुखों से बहुत  ऊपर उठ चुके होते। हैं दूसरी तरह भगवान को न मानने वाले अति अति आत्मविश्वासी अपनी रज़ा के मुताबिक जीवन जीने लगते है। वे हर उस चीज़ को हासिल करना सीखते हैं जो उन्हें पसंद होती है। लोग दोनों क्षेत्रों में सफल देखे गए हैं और असफल भी। इन दोनो के इलावा एक तीसरी केटेगरी है बीच के लोगों की जो सारी उम्र चलते रहते हैं लेकिन पहुँचते कहीं नहीं। उनका एक कदम भगवान की तरफ और दूसरा कदम संसार की तरफ होता है। न वे धर्म के रहते हैं और न ही दुनिया के।  
कुछ ऐसा ही हुआ शमशेर सिंह जगेड़ा के साथ। अहमदगढ़ के साथ ही लगता है एक गाँव नानकपुर जगेड़ा। इसी गाँव का शमशेर सिंह अन्य युवकों की तरह बहुत कुछ बनना चाहता था, बहुत कुछ पाना चाहता था लेकिन उस सब कुछ के लिए जिस संघर्ष, प्रतिभा और  त्याग की ज़रूरत होती है वह सब उसमें नहीं आ पाया।  अख़बारों के लिए पत्रकारिता करने की थोड़ी बहुत कोशिश भी की लेकिन पत्रकार नहीं बन सका। नेता बनने की कोशिश की तो वहां भी नाकामी मिली। घर परिवार के लोग पहले से ही परेशान थे।  गाँव वाले भी निठल्ला समझने समझने लगे। आखिर खुली दाढ़ी सफेद पगड़ी और सफेद कुरता पायजामा  पहन कर जब "संत" शब्द साथ जुड़ा तो लोग आवभगत भी करने लगे। स्कूली शिक्षा में अनपढ़ लेकिन एक रिश्तेदार की मेहरबानी से पाठ करना भी सीख  गया।  पाठ की मर्यादा बनी रहती तो ठीक थी लेकिन निगाहें गुस्ताख़ होने लगीं और गाँव में बुरी नज़र किसी की भी बर्दाश्त नहीं होती सो इस तथाकथित धार्मिक को भी गाँव से निकलना पड़ा। 
गाँव से निकल कर भी सबक नहीं सीखा। अब दिमाग में नई  साज़िशें पनपने लगीं। ब्लयू स्टार आप्रेशन के बाद का ज़माना था। हर गली में आतंक का था। हर सांस सहमी हुयी थी। कभी इधर गोली चलती और कभी उधर बम फेंका जाता। उन दिनों लम्बी खुली दाढ़ी सफेद चोले वाले वाले "संतों" की अहमियत बहुत बढ़ गयी थी। सरकार को लगता था कि यह धार्मिक लोग "भटके हुए" युवकों को सही राह पर लाएंगे और बंदूक पकड़े युवक हर संत में से "भिंडरांवाले संत" को तलाश कर रहे थे। 
जो तथाकथित धार्मिक लोग सभी की अपेक्षा पर पूरा उतरने के प्रयासों में थे उनमें  शमशेर  जगेड़ा भी था। सरकार साथ भी और नौजवानों के साथ भी। वह बहुत ही संवेदनशील वक़्त था। उस नाज़ुक दौर में कुछ लोग सब कुछ गंवा कर हमेशां के लिए गुमनामी के अंधेरों में गुम  हो गए या मौत मुँह में चले गए और कुछ लोग मौके का फायदा उठाते उठाते जुर्म और "धर्म" दोनों क्षेत्रों में "किंग" बन गए। इन लोगों ने अपना हलवा मांडा बनाये रखने के लिए कितनों के घर उजाड़े,  किस किस को मौत के मूह में धकेला उन सब की कहानी बहुत लम्बी है लेकिन हम बताएंगे ज़रूर। इंतज़ार कीजिये हमारी अगली पोस्ट की। 

Sunday, September 01, 2013

कंपनियों द्वारा धोखाधड़ी की गतिविधियां

01-सितम्बर-2013 19:22 IST
1978 के तहत कड़ी कार्रवाई करने के लिए निर्देश जारी
नई दिल्ली: 2 सितम्बर 2013:कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने उच्च रिटर्न ऑफर करने के जरिए निवेशकों के साथ कथित धोखाधड़ी के लिए कुछ कंपिनियों की शिकायतें मिली हैं। हाल ही में लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री श्री सचिन पायलट ने बताया कि पिछले तीन वर्ष के दौरान और वर्तमान वर्ष में मंत्रालय ने 125 ऐसी शिकायतों के मामले में कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 235/237 के तहत जांच के आदेश दिए हैं। इनमें से ज्यादातर शिकायतें गंभीर धोखाधड़ी की हैं। 
उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने ऐसी धोखाधड़ी से निपटने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। राज्यों को प्राइज चिट और मनी सर्कुलेशन स्कीम (बैनिंग)एक्ट, 1978 के तहत कड़ी कार्रवाई करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। अनाधिकृत कंपनियों की निगरानी के लिए वित्त मंत्रालय को भी लिखा गया है। निवेशकों को चेतावनी देने के लिए बल्क एसएमस की व्यवस्था शुरू की गई है। (PIB)

वि.कासोटिया/देवेश/प्रदीप/राजीव/सुनील-5980

Tuesday, August 06, 2013

जुर्म की दुनिया:लगातार कम हो रहा है पुलिस का खौफ

पुलिस में भर्ती के नाम पर लोगों को ठगने वाला काबू
लुधियाना,5 अगस्त 2013::(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): पहले पहल गाँव में एक वर्दी वाला सिपाही भी चक्कर लगा जाता था तो  में आतंक छ जाया करता था लेकिन अब पुलिस की फ़ोर्स भी गुजर जाये तो चर्चा तक नहीं होती। जुर्म की दुनिया से जुड़े लोग इतने बेख़ौफ़ हो चुके हैं की पुलिस के नाम से ठगने के काम में भी कभी नहीं डरते। इस तरह का एक न्य मामला सामने आया है लुधियाना में जहां पुलिस में भर्ती करवाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले आरोपी को सी.आई.ए. स्टाफ पुलिस ने काबू किया है। आरोपी का नाम कुलविन्दर सिंह है, वह बहादुरके रोड का रहने वाला है। आरोपी की हिम्मत देखो वह खुद पुलिस की वर्दी डाल कर लोगों पर प्रभाव डालता था और कहता था की उसकी पहुँच ऊपर तक है। 
उसकी हकीकत का पता तब चला जब उस पर इस्लामगंज निवासी प्रिंस मग्गो की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ। गहन पूछताछ के दौरान आरोपी ने चार लोगों से ठगी करने की बात कबूली है और अभी कई और मामले सामने आने की सम्भावना है। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश कर एक दिन का रिमांड भी हासिल किया है, जिसमें ठगी की और भी वारदातों के खुलासे होने की उम्मीद है।  सी.आई.ए. प्रभारी सर्बजीत सिंह के मुताबिक प्रिंस ने शिकायत दी थी कि उसकी भट्टियां में कास्मैटिक की दुकान है। आरोपी कई बार पुलिस की वर्दी में उसकी दुकान पर आया व उसे पुलिस में भर्ती करवाने की बात कही। उसने आरोपी के झांसे में आकर उसे 35 हजार रुपए दे दिए। इसी तरह आरोपी ने पुलिस में भर्ती करवाने के नाम पर भट्टियां निवासी हरिंदर सिंह हनी से 25 हजार, काराबारा निवासी राजकुमार से 5 हजार तथा हजूरी बाग कालोनी निवासी विजय कुमार से 5 हजार की नकदी ऐंठ ली। बाद में पता चला कि आरोपी तो खुद ही पुलिस मुलाजिम नहीं है यह दूसरों को पुलिस में भर्ती क्या करवाएगा। यह  सामने आने के बाद मामला दर्ज कर तेज़ी से आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई। कुछ मुशक्कत के बाद पुलिस ने 4 अगस्त की शाम को एक सूचना के आधार पर आरोपी को जालंधर बाईपास के पास काबू कर लिया गया। अब देखना है की उसके नेटवर्क से जुड़े और छोटे बड़े कितने लोगों के नाम सामने  आते हैं! कहां से आती थी पुलिस की वर्दियां और किस के दम पर वह दिखता था इतनी हिम्मत? इन सभी स्व्लों के जवाब भी जल्द सामने आ जायेंगे।

Sunday, July 28, 2013

अमृतसर में नौसरबाज साधु गिरफ्तार

Sun, Jul 28, 2013 at 5:21 PM
महिलाओं से ठगी गई तीन सोने और हीरे की अंगूठियां बरामद
अमृतसर (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन) अक्सर लोगों के घरों में साधु के भेष में घुस कर भोली-भाली महिलाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अमृतसर पुलिस ने एक नौसरबाज को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो हीरे की और एक सोने की अंगूठी भी बरामद कर ली है। डीएसपी सोहन सिंह ने इस संबंध में बताया, कि 17 जुलाई को अमृतसर के रानी का बाग इलाके की एक कोठी में दो साधु पहुंचे और घर में मौजूद महिलाओं से भोजन की मांग की। भोजन ग्रहण करने के बाद साधुओं ने महिलाओं से कहा, कि वे उनके शारीरिक कष्ट को दूर कर देंगे और यह कह उन्होंने महिलाओं से उनके गहने उतरवा लिए। इसके बाद मंत्र मारने का बहाना बना कर उक्त साधुओं ने कागज में छोटी ईंट लपेट कर दे दिया और वहां से चले गए। महिलाओं ने जब कागज खोल कर देखा, तो उसमें गहने नहीं थे। इस बीच महिलाओं में से एक ने साधुओं की फोटो खींच ली थी। जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नौसरबाजों में से एक राजीनाथ को काबू कर लिया, जबकि उसका साथी बूटा सिंह उर्फ डैनी अभी भी फरार बताया जाता है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से दो हीरे की और एक सोने की अंगूठी बरामद कर ली है।