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Sunday, February 22, 2026

2027 में पंजाब में भाजपा की सरकार बनेगी--नायब सिंह सैनी

आम आदमी पार्टी ने बड़े-बड़े सपने दिखाकर केवल वोट बटोरने का काम किया 

पंजाब को विकास की दौड़ में AAP ने पीछे धकेल दिया

पंजाब में आप ने महिलाओं को 1100-1100 रुपये देने का वादा पूरा नहीं किया

जबकि हरियाणा में महिलाओं को 2100 प्रति महीना दिया जा रहा है

लुधियाना में चली हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की आंधी 


लुधियाना
: 22 फरवरी 2026: (प्रदीप शर्मा इप्टा//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

लुधियाना दक्षिणी हलके के ग्यासपुरा मंडल में भाजपा पूर्वांचल मोर्चा की ओर से जिला अध्यक्ष रजनीश धीमान की अध्यक्षता में  आयोजित पूर्वांचल सम्मान रैली में  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा विशेष रूप से रैली में शामिल हुए।रैली को संबोधित करते हुए नायब सिंह सैनी ने कहा कि पंजाब में सत्ता में रही आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने पंजाब के लोगों से किए एक भी वादे को पूरा नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों पार्टियों ने बड़े-बड़े सपने दिखाकर केवल वोट बटोरने का काम किया और पंजाब को विकास की दौड़ में पीछे धकेल दिया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आप सरकार झूठे वादे कर लोगों को गुमराह कर रही है, यहां तक कि पंजाब में महिलाओं को 1100-1100 रुपये देने का वादा पूरा नहीं किया जबकि हरियाणा में महिलाओं को 2100 प्रति महीना दिया जा रहा है। किसानों के मुद्दे पर बात करते हुए नायब सिंह सैनी ने हरियाणा माडल का हवाला दिया। मुख़्यमंत्री सैनी ने कहा कि हरियाणा में किसानों की पूरी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाती है और यदि सब्जियों या अन्य फसलों के बाजार भाव कम मिलते हैं, तो सरकार उसकी भरपाई करती है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ही पंजाब को नंबर एक राज्य बनाया जा सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने विदेशों में देश की छवि को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा की आगामी विधानसभा चुनाव जो 2027 में होने वाले है उसमें भाजपा सरकार बनाएगीं। 

इस मौके पर भाजपा के जिला पदाधिकारीयों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सम्मानित किया।इस मौके पर प्रदेश के महामंत्री अनिल सरीन,प्रदेश कोर ग्रुप सदस्य जीवन गुप्ता,प्रवासी मोर्चा के प्रधान राजेश मिश्रा,राज कुमार भरद्वाज,जिला महामंत्री सरदार नरेंदर सिंह मल्ली,डाक्टर कनिका जिंदल,जिला उपाध्यक्ष महेश शर्मा,डाक्टर निर्मल नय्यर,मनीष चोपड़ा,नवल जैन,लक्की शर्मा,जिला सचिव सतनाम सिंह सेठी,अंकित बत्रा,प्रेस सचिव डा.सतीश कुमार,सोशल मीडिया इंचार्ज राजन पांधे,दफतर सचिव परवीन शर्मा,प्रवक्ता सुरिंदर कौशल,साबिर हुसैन,,रोहित सिक्का,पार्षद,राजेश मिश्रा,सुनील मौदगिल,विपन विनायक,युवा मोर्चा प्रधान रवि बत्रा,महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष शीनू चुग,सरदार निर्मल एस.एस,रवि चौरसिया,भाजपा के मंडलों के अध्यक्ष,मंडलों के प्रभारी आदि भाजपा के हजारों कार्यकर्त्ता इस रैली में शामिल हुए।

Wednesday, March 08, 2023

गहन चुनौतियों का सामना करने के बाद आ रही है यह वर्कशाप

Wednesday  8th March 2023 at 04:02 PM

प्रदीप शर्मा ला रहे हैं संस्कार भारती और TTC की कला वर्कशाप 

इप्टा के सहयोग का भी दावा दोहराया प्रदीप शर्मा ने-10 को शुभारम्भ

लुधियाना: 8 मार्च 2023: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

दिग्गज कलाकारों के साथ थिएटर की दुनिया में कई बार कमाल दिखा चुके प्रदीप शर्मा अचानक लुप्त जैसे हो गए थे। ज़िंदगी के झमेलों ने उन्हें बुरी तरह से थका दिया।मंचन की दुनिया से जुड़े बहुत से साथी भी हालात ने या तो कुछ दूर  दराज के स्थानों पर शिफ्ट कर कर दिए या ज़िंदगी की गुज़र बसर ने एक अंतराल पैदा कर दिया। इसी बीच सरकारी नौकरी ने अपनी गर्दिश के रंग दिखाए। कभी इधर कभी उधर यह एक आम सी बात हो गई। एक बरगद का पेड़ फ़िरोज़पुर रोड पर आज भी मौजूद है। किसी सर्वेक्षण में ड्यूटी वहां लगी हुई थी। सड़क के किनारे एक बहुत बड़ा व्यापारिक संस्थान था जिसके मालिकों को लगा यह बरगद हमारी शानोशौकत को खराब करता है। उन्होंने डयूटी पर तायनात सिवल इंजिनियर प्रदीप शर्मा से सम्पर्क किया कि सड़क के रस्ते में आने का बहाना बना कर इसे रातो रात कटवा दें मुँह माँगा मौल ऐडा कर दिया जाएगा। लेकिन इधर मामला ही गड़बड़ा चूका था। प्रदीप शर्मा जी को उस पेड़ से इश्क जैसा लगाव होने लगा था। झुलसा देने गर्मी  के दिन चल रहे थे। उस भीषण गर्मी में शर्मा जी अपने साथियों और मज़दूरों के साथ बरगद के उसी पेड़ की छाया के नीचे दोपहर का भोजन करते और कुछ पल सांस ले कर फिर काम में जुट जाते। उस छाया ने एक ममत्व भी दिया। शर्मा जी चाहते तो मन मांगीं रकम जेब में डालते और पेड़ कटवा देते लेकिन मन नहीं माना। जिस ने हर रोज़ छाया दी उसे कटवाना उन्हें घोर पाप लगने लगा। उन्होंने बिना एक पल भी सोचे इससे इंकार लकर दिया। उन लोगों ने शर्मा जी का तबादला भी करवा दिया लेकिन वो पेड़ आज भी वहीं पर सलामत है। शर्मा जी और मैं कई बार अब भी वहां जा कर चाय का कप या कुछ ठंडा पीते हैं तो एक सकूं सा मिलता है। शायद यही है हमरी पूजा और इबादत। हम इस तरह उस पेड़ को सजदा कर के लौट आते हैं। लोगों को धार्मिक स्थानों पर जाए कर भी भगवान नज़र आता है या नहीं लेकिन हमें अनुभूति महसूस होती है उस पेड़ के पास जा कर। ज़िंदगी और नौकरी ने ऐसे बहुत से रंग दिखाए। 

एक बार एक बहुत बड़े नेता ने जो आजकल बहुत चर्चित भी है उसने भी किसी काम के लिए दबाव डाला लेकिन शर्मा जी नहीं माने। वह सीधे और गुस्ताख़ शब्दों में बोला हम तुम्हें नौकरी करना आज ही सीखा देंगे। कल से तुम्हें यहाँ नहीं आने देंगें। रिटायरमेंट नज़दीक थी। शायद डेड दो साल का समय बाकी था। शर्मा जी ने उसी दिन लौट कर उस नौकरी से अपना त्यागपत्र दे दिया। नाटकों के लोइए डायलॉग लिखने एक अलग बात है और जब ज़िंदगी के रंगमंच पर मुश्किल घड़ियां सामने आती हैं तो फैसला लेना आसान नहीं होता। शर्मा जी ने ऐसे हालात में भी हिम्मतर से काम लिया।  

लेकिन सारी भागदौड़ और संघर्षों के के चलते पिता जी हमेशां के लिए साथ छोड़ गए। उस समय लगा दुखों और ज़िम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा। जी को प्रगतिशील विचारधारा ने डगमगाने न दिया। संकट का सामना बहादुरी से करते रहे। फिर ज़िंदगी की सब से करीबी हमसफ़र अर्थात पत्नी भी साथ छोड़ गई। उस दुःख ने शर्मा जी को भी तोड़ कर रख दिया। डाक्टर अरुण मित्र, डाक्टर बबीता जैन, एम एस भाटिया, बेनु सतीश कान्त, स्वर्गीय डाक्टर भारत और हम सभी लोग उन्हें ढांढ़स बंधाते रहे। 

सर्वाधिक सक्रिय भूमिका निभाई संस्कार भारती की टीम ने। शर्मा जी को फिर से नयी हिम्मत और जोश के साथ दोबारा ज़िंदगी की जंग के लिए तैयार किया। शर्मा जी को भी फैज़ अहमद फैज़ साहिब बहुत पसंद है। जब शर्मा जी गुनगुनाने लगते:

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के 

वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के 

पत्नी के बिछुड़ने  ख्याल बना रहता। कुछ पल खामोश रह कर फिर भीगी आँखों से अगला शेयर कहते:

वीराँ है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास हैं 

तुम क्या गए कि रूठ गए दिन बहार के 

हम उन्हें हौंसला देते कि मौत ही तो है ज़िंदगी की सच्चाई। सभी के साथ यहॉ होना है।  शर्मा जी सारी बात सुन कर अगला शेयर हमें सुनाते:

इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन 

देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के!

हम उन्हें रोज़गार और कला की तरफ मोड़ते तो वह गंभीर हो कर देखने लगते। गम के बावजूद ज़नदगी के खर्चे नहीं रुक जाते। वह हाँ ,में सिर हिलाते और फैज़ साहिब का ही शेयर पढ़ते और यह शेयर अपना रंग दिखाता चला गया।

दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया 

तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के!

अब वास्तविक बात यह भी कि अब कला और थिएटर की वर्कशॉप के बहाने पत्नी के गम को दिल में ताज़ा भी रखना है। उन यादों के उजालों के सहारे अँधेरे रास्ते तय करने हैं। पत्नी ने इसका वायदा भी लिया था शर्मा जी से।

अब इस वर्कशॉप का आयोजन ज़िंदगी में बहुत मुश्किलों से फिर से जुटाए गए उत्साह और हिम्मत का ही नतीजा है। नाटकों की जो जो पांडुलिपियां, नावल और कहानियां उनकी गैर हाज़िरी में रद्दी के कबाड़ में चली गई उनका गम भुलाते हुए, जिन जिन लोगों ने धोखे दिए उनके सदमों को भी दरकिनार करते उए, वक्त ने जो ज़ख्म दिए उनको भी भुलाते हुए, ज़िंदगी ने जिन नई चुनौतियों को सामने ला कर खड़ा किया उनकी आंख से आंख  मिलाते हुए ही हो रहा है इस कार्यशाला का आयोजन। 

शर्मा जी बताते हैं जब कास्टिंग काल दी गई तो पहले ही दिन पचास से ज़्यादा कलाकारों ने निवेदन भेजे। शर्त राखी गई थी कि सभी कलाकार लुधियाना के हों। इस लिए यह गिनती कम नहीं थी। कार्यशाला डॉन चलेगी दस और ग्यारह मार्च को। अप्रैल में नाटकों कजा मंचन हो जाएगा। जब जब कुछ नया तय होगा उसका पता भी हम आपको देते ही रहेंगे। आपके विचारों की  इंतज़ार रहेगी ही। 

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बीतेंगे कभी तो दिन आख़िर ये भूक के और बेकारी के 

टूटेंगे कभी तो बुत आख़िर दौलत की इजारा-दारी के 

जब एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जाएगी 

वो सुब्ह कभी तो आएगी 

फ़ाक़ों की चिताओं पर जिस दिन इंसाँ न जलाए जाएँगे 


सीनों के दहकते दोज़ख़ में अरमाँ न जलाए जाएँगे 

ये नरक से भी गंदी दुनिया जब स्वर्ग बनाई जाएगी 

वो सुब्ह कभी तो आएगी

आज साहिर लुधियानवी साहिब का जन्म दिन भी है, ख़िराज-ए-अक़ीदत साहिर-उनकी शायरी लोगों के साथ होते अन्याय की बात उनकी गैर मौजूदगी में भी करती रहेगी।  शायरी लोगों को जगाती आ है जगाती रहेगी। 

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Friday, November 19, 2021

कड़ाह प्रसाद वितरण और जश्न में पहुंचे हरकेश मित्तल

कृषि कानूनों की वापिसी घोषणा को बताया ऐतिहासिक कदम


लुधियाना
: 19 नवंबर 2021: (प्रदीप शर्मा इप्टा//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय कृषि कानून वापिस लेने की घोषणा को बीजेपी से जुड़े नेता एक ऐतिहासिक फैसला  बता रहे हैं। इस अवसर पर लुधियाना के घंटाघर स्थित बीजेपी कार्यालय के सामने खुशियां मनाई गईं। लड्डू बांटे गए और कड़ाह प्रसाद वितरित किया गया। कड़ाह प्रसाद वितरण और जश्न में पहुंचे हरकेश मित्तल ने इस मौके पर मीडिया से भी बात की। उन्होंने पंजब स्क्रीन से एक भेंट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय कृषि कानून वापिस की घोषणा ऐतिहासिक फैसला है। श्री मोदी ने बहुत बड़े दिल का सबूत दिया है। इसी बड़प्पन के चलते उन्होंने न केवल कृषि कानूनों को वापिस लेने की बात कही बल्कि किसानों से माफ़ी भी मांगी। 

गुरू नानक देव जयंती के पावन पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय कृषि कानून वापिस लेने की घोषणा से पूरे पंजाब में खुशी की लहर है। भाजपा शुरू से किसानो की हितेषी रही है। उक्त शब्द जिला ट्रेड सेल के प्रधान हरकेश मितल ने कृषि कानूनों के रद्द होने की घोषणा के उपरांत भारत नगर चौक में आपनी टीम के साथ लड्डू बांटते हुए कहे। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हार्दिक धन्यवाद करते हुए कहा कि आज गुरुपर्व के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री  द्वारा लिया गया ये  ऐतिहासिक फैसला पंजाब में बीजेपी की जड़े मजबूत करेगा और 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी पंजाब में सत्ता हासिल कर  एक नया अध्याय शुरू करेगी और पंजाब को तरक्की की राह पर ले जायेगी इस अवसर पर नीरू मित्तल,मनोज तायल,आशीष गुप्ता,ऋषि बंसल,.अवनि शर्मा,.मुकेश गौतम,राकेश जैन,रामिंदर सिंह खुराना,राकेश गुप्ता,दीपक भाटिया,राजीव जैन, मोती नारंग हियँ मित्तल विमल हरजाई। आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि किसान आंदोलन के चलते बीजेपी नेताओं का बाहर निकलना भी आसान नहीं रहा था। इस घोषणा से बीजेपी फिर से पंजाब में अपना वर्चस्व कायम करने के प्रयास तेज़ कर सकेगी। 


Monday, April 13, 2020

न्यू प्रताप नगर में पानी की गंभीर किल्लत

पानी का टैंकर आया तो लोग समाजिक दूरी का नियम भी भूले 
लुधियाना: 13 अप्रैल 2020: (प्रदीप शर्मा इप्टा//पंजाब स्क्रीन)::  
लुधियाना बाईपास के नजदीक साथी बहादर के रोड पर एक इलाका है न्यू प्रताप नगर। इस इलाके में गत तीन दिनों से पानी की सप्लाई बंद है। लॉक डाउन के दिनों में इस सप्लाई के बंद होने से लोगों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। जब लोगों ने अपना हो हल्ला मीडिया वालों तक पहुंचाया तो इलाके में पानी का एक टैंकर भेजा गया। इस टैंकर पानी भरने को आतुर लोग समाजिक दूरी बनाये रखने का नियम भी भूल गए। इस तस्वीर को खींचा गया इसी इलाके के वार्ड नंबर दो में जहाँ लोग एक दुसरे के बिलकुल पास पास खड़े हैं। यदि इसी तरह के सिलसिले जारी रहे तो लॉक डाउन का मकसद ही नाकाम कर देंगें ये लोग। कोरोना के बढ़ते प्रभाव के चलते इस तरह की हर बात को ध्यान से लिए जाने की आवश्यकता है।  जल के बिना तो लोगों का घरों में रहना असम्भव ही हो जायेगा। 

Monday, January 21, 2019

नाटक “राजगति” 23 जनवरी,2019,बुधवार रात 8 बजे मुंबई में

शिवाजी नाट्य मंदिर में मंचित होगा मंजुल भारद्वाज का लिखा नाटक 
लुधियाना//मुम्बई: 21 जनवरी 2019: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::
पहले सिनेमा--फिर फ़िल्में और उसके बाद केबल का प्रचलन। तकनीकी विकास के इस दौर ने सबसे बुरा असर डाला मंच की कला पर। नाटकों का का मंचन कम से कम होता चला गया। नाटक को आंदोलन का रूप देने वाले "इप्टा" जैसे संगठन गुमनामी के दायरे में सिमटते चले गए। उनका अस्तित्व केवल उनके राष्ट्रिय आयोजनों या उन पर होने वाले हमलों की खबरों से ही महसूस होता। तकरीबन तकरीबन यही हाल "जन नाटय मंच" का भी हुआ। सुबह से लेकर रात केवल दाल रोटी  उलझा दिए गए समाज में सबसे अधिक शिकार बने नाटकों की दुनिया के कलाकार, लेखक, निदेशक और अन्य तकनीकी स्टाफ के सदस्य। राजनैतिक दलों के शिकंजे ने भी नाटकों के अभियान को लुप्त जैसा ही कर दिया।  इक्का दुक्का कलाकारों ने नाटकों केमाभियाँ को जीवंत रखने की कोशिश भी की लेकिन उन्हें दर्शक नहीं मिले। ऐसे में उभर कर सामने आए मंजुल भारद्धाज। कुछ बातों का संकल्प- की तीखी आलोचना भी लेकिन साथ ही साथ रंगमंच को फिर से हर दिल तक ले जाने का प्रयास भी।  इसी प्रयास के अंतर्गत हो रहा है "राजगति" का मंचन।   
“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” अभ्यासक एवम् शुभचिन्तक आयोजित नाटक “राजगति” 23 जनवरी,2019,बुधवार  रात 8 बजे “शिवाजी नाट्य मंदिर” दादर(पश्चिम), मुंबई में मंचित होगा! सुप्रसिद्ध रंग चिन्तक मंजुल भारद्धाज लिखित और निर्देशित नाटक “राजगति” समता,न्याय,मानवता और संवैधानिक व्यवस्था के निर्माण के लिए ‘राजनैतिक परिदृश्य’ को बदलने की चेतना जगाता है,जिससे आत्महीनता के भाव को ध्वस्त कर ‘आत्मबल’ से प्रेरित ‘राजनैतिक नेतृत्व’ का निर्माण हो।“
मंचन का विवरण इस प्रकार है:
कब : 23 जनवरी,2019,बुधवार  रात 8 बजे
कहाँ : “शिवाजी नाट्य मंदिर”, दादर(पश्चिम), मुंबई
कलाकार:अश्विनी नांदेडकर, योगिनी चौक, सायली पावसकर, कोमल खामकर, तुषार म्हस्के,स्वाति वाघ,हृषिकेश पाटिल,प्रियंका काम्बले,प्रसाद खामकर और सचिन गाडेकर।
अवधि :120 मिनट
नाटक 'राजगति', : “नाटक राजगति ‘सत्ता, व्यवस्था, राजनैतिक चरित्र और राजनीति’ की गति है. राजनीति को पवित्र नीति मानता है.राजनीति गंदी नहीं है के भ्रम को तोड़कर राजनीति में जन सहभागिता की अपील करता है. ‘मेरा राजनीति से क्या लेना देना’ आम जन की इस अवधारणा को दिशा देता. आम जन लोकतन्त्र का प्रहरी है. प्रहरी है तो आम जन का सीधे सीधे राजनीति से सम्बन्ध है.समता,न्याय,मानवता और संवैधानिक व्यवस्था के निर्माण के लिए ‘राजनैतिक परिदृश्य’ को बदलने की चेतना जगाता है,जिससे आत्महीनता के भाव को ध्वस्त कर ‘आत्मबल’ से प्रेरित ‘राजनैतिक नेतृत्व’ का निर्माण हो।“
नाटक “राजगति” क्यों ?
हमारा जीवन हर पल ‘राजनीति’ से प्रभावित और संचालित होता है पर एक ‘सभ्य’ नागरिक होने के नाते हम केवल अपने ‘मत का दान’ कर अपनी राजनैतिक भूमिका से मुक्त हो जाते हैं और हर पल ‘राजनीति’ को कोसते हैं ...और अपना ‘मानस’ बना बैठे हैं की राजनीति ‘गंदी’ है ..कीचड़ है ...हम सभ्य हैं ‘राजनीति हमारा कार्य नहीं है ... जब जनता ईमानदार हो तो उस देश की लोकतान्त्रिक ‘राजनैतिक’ व्यवस्था कैसे भ्रष्ट हो सकती है ? .... आओ अब ज़रा सोचें की क्या बिना ‘राजनैतिक’ प्रकिया के विश्व का सबसे बड़ा ‘लोकतंत्र’ चल सकता है ... नहीं चल सकता ... और जब ‘सभ्य’ नागरिक उसे नहीं चलायेंगें तो ... बूरे लोग सत्ता पर काबिज़ हो जायेगें ...और वही हो रहा है ... आओ ‘एक पल विचार करें ... की क्या वाकई राजनीति ‘गंदी’ है ..या हम उसमें सहभाग नहीं लेकर उसे ‘गंदा’ बना रहे हैं हम सब अपेक्षा करते हैं की ‘गांधी , भगत सिंह , सावित्री और लक्ष्मी बाई’ इस देश में पैदा तो हों पर मेरे घर में नहीं ... आओ इस पर मनन करें और ‘राजनैतिक व्यवस्था’ को शुद्ध और सार्थक बनाएं ! समता,न्याय,मानवता और संवैधानिक व्यवस्था के निर्माण के लिए ‘राजनैतिक परिदृश्य’ को बदलने की चेतना को जगाएं ,ताकि आत्महीनता का भाव ध्वस्त हो और ‘आत्मबल’ से प्रेरित ‘राजनैतिक नेतृत्व’ का निर्माण हो।
पंजाब में नाटय को समर्पित कुछ विशेष लोग 
“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य दर्शन विगत 26 वर्षों से फाशीवादी शक्तियों से जूझ रहा है। भूमंडलीकरण और फाशीवादी ताकतें ‘स्वराज और समता’ के विचार को ध्वस्त कर समाज में विकार पैदा करती हैं जिससे पूरा समाज ‘आत्महीनता’ से ग्रसित होकर हिंसा से लैस हो जाता है. हिंसा मानवता को नष्ट करती है और मनुष्य में ‘इंसानियत’ का भाव जगाती है कला. कला जो मनुष्य को मनुष्यता का बोध कराए...कला जो मनुष्य को इंसान बनाए! “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस”... एक चौथाई सदी यानी 26 वर्षों से सतत सरकारी, गैर सरकारी, कॉर्पोरेटफंडिंग या किसी भी देशी विदेशी अनुदान से परे. सरकार के 300 से 1000 करोड़ के अनुमानित संस्कृति संवर्धन बजट के बरक्स ‘दर्शक’ सहभागिता पर खड़ा है हमारा रंग आन्दोलन.. मुंबई से मणिपुर तक!
लेखक –निर्देशक : रंग चिन्तक मंजुल भारद्वाज रंग दर्शन थिएटर ऑफ रेलेवेंस' के सर्जक व प्रयोगकर्त्ता हैं, जो राष्ट्रीय चुनौतियों को न सिर्फ स्वीकार करते हैं, बल्कि अपने नाट्य सिद्धांत "थिएटर आफ रेलेवेंस" के माध्यम से वह राष्ट्रीय एजेंडा भी तय करते हैं।  अब तक 28 से अधिक नाटकों का लेखन—निर्देशन तथा अभिनेता के रूप में 16000 से ज्यादा बार राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं!
दर्शक सहयोग और सहभागिता से आयोजित इस मंचन में आपके सक्रिय सहयोग और सहभागिता की अपेक्षा !
अच्छा हो यदि इस नाटक का मंचन देश के सभी भागों में हो सके। इस मकसद के लिए स्थानीय नाटय मंडलियों को एक प्रोफेशनल सोच सामने रखते हुए आगे आना हगा तांकि नाटय  मंडलियों के कलाकारों का आवश्यक खर्चा भी निकल सके। 
लुधियाना में डाक्टर अरुण मित्रा, पत्रकार एम एस भाटिया, मैडम सपनदीप कौर, त्रिलोचन सिंह और इप्टा से जुड़े पुराने कलाकार प्रदीप शर्मा भी सक्रिय  हैं।  चंडीगढ़-मोहाली में प्रगतिशील लेखक कंवर, अमन भोगल, संजीवन सिंह, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में इंद्रजीत रूपोवालिया, मोगा में विक्की माहेश्वरी सहित बहुत से लोग सक्रिय हैं। अच्छा हो एक ज़ोरदार हल्ला जन विरोधी साज़िशों पर बोला जा सके। शायद सआदत हसन मंटो और सफदर हाशमी की अंतरात्मा को इससे शांति मिल सके। 

Sunday, March 26, 2017

लुधियाना में अमर स्वीटस पर आयकर विभाग का छापा

देर रात तक जारी रही रेकार्ड चेक करने की कार्रवाई 
लुधियाना:25 मार्च 2017: (प्रदीप शर्मा//पंजाब स्क्रीन):: 
लुधियाना के कारोबारी संस्थानों में अमर स्वीटस एक जाना पहचाना नाम है। शहर में कई जगहों पर इनकी दुकाने और शोरूम है। मिठाई की दुनिया में तेज़ी से किंग की तरह उभर रहा है अमर स्वीटस। पुलिस और अफसरशाही में भी इनका काफी दबदबा कहा जाता है। इस लिए जब शिवपुरी में स्थित अमर स्वीटस पर आयकर विभाग के छापे की खबर आयी तो एक सनसनी सी फ़ैल गयी। आसपास के लोगों का कहना है कि इनकम टेक्स विभाग की यह करवाई बाद दोपहर को ही शुरू हो गयी थी। जब मीडिया की नज़र इस मामले पर पड़ी तो शटर गिरा दिए गए। करवाई देर रात तक जारी रही। बताया जा रहा है कि नोटबंदी के दौरान अतिरिक्त बंद हुई करंसी बैंक में जमा करवाने को लेकर अमर स्वीटस के संचालक शक के दायरे में आए थे। जिसके तहत आयकर विभाग रिकॉर्ड चैक कर रहे है। इस मामले में और विवरण हम जल्द ही आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे। 

Saturday, January 28, 2017

53 वर्ष पुराना 6 फुट से भी ऊंचा तुलसी का पौधा

अभी भी मौजूद है लुधियाना की रेलवे कलोनी नम्बर 5 में 
लुधियाना: 28 जनवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो);      और तस्वीरें देखने के लिए यहाँ क्लिक करें 
हमारे समाज में तुलसी का एक अलग और सम्मानीय स्थान है। छोटे मोटे बुखार को तो तुलसी के पत्तों का सेवन नज़दीक भी नहीं आने देता। जो तुलसी आप देख रहे हैं इसको प्रदीप शर्मा इप्टा के माता जी सुश्री सवर्ण कांता ने रेलवे कलोनी के निवास में लगाया था। यह बात सन मई 1964 की है।  कल हम उधर से गुज़रे तो अचानक उस मकान के सामने रुक गए , दरवाज़ा खटखटाया तो पता चला कि अब वहां कोई और परिवार रह रहा है। यह परिवार यहाँ 2002 में आया था और उनसे पूर्व कोई और परिवार यहाँ रहता था। इतनी मुद्दत के बाद भी तुलसी माता का वहां होना हमें किसी चमत्कार से कम नहीं लगा। उस समय प्रदीप शर्मा जी की कुछ तस्वीरें क्लिक करा सचमुच एक अलौकिक सा अनुभव था। -रेक्टर कथूरिया पौधा 

Tuesday, October 04, 2016

Indore:इप्टा के राष्ट्रिय अधिवेशन स्थल पर आर एस एस का हमला

जवाब में इप्टा सदस्यों ने लगाए इन्क़लाब ज़िंदाबाद के नारे 
इंदौर/लुधियाना: 4 अक्टूबर 2016: (प्रदीप शर्मा//पंजाब स्क्रीन): 
इंदौर में "इप्टा" के राष्ट्रीय सम्मेलन में उस समय अफरातफरी मच गयी जब आर एस एस और उनके सहयोगी संगठनों ने कार्यक्रम को रुकवाने के लिए अचानक वहां पर हमला कर दिया। बाहर से अचानक अंदर घुसे इन लोगों ने मंच पर कब्ज़ा कर लिया और कहा कि हम कन्हैया के समर्थकों का कर्यक्रम नहीं चलने देंगें। जब तक यह खत्म नहीं होता तब तक हम यहीं रुकेंगे। इसके साथ ही भारत माता ज़िंदाबाद के नारे तेज़ क्र दिए गए और धक्का मुक्की शुरू कर दी गयी। ये लोग भारत माता ज़िंदाबाद के नारे गया रहे थे। इन के साथ कुछ इक्का दुक्का सरदार भी थे जो इनकी अगवानी करने वालों थे।  ये लोग जबरदस्ती अंदर घुस कर मंच पर चढ़ गए और मंच पर कब्ज़ा कर लिया। इस सम्मेलन में कुछ महिलाएं भी अपने छोटे छोटे बच्चों के साथ मौजूद थी। इसमें कुछ बेहद्द वृद्ध कलाकार भी आये हुए हैं। गौरतलब है कि पंजाब और चंडीगढ़ से कम से कम 31 कलाकार इसमें भाग लेने के लिए गए हुए हैं। 
हमले के जवाब में इप्टा सदस्यों ने इन्क़लाब ज़िंदाबाद के नारे लगाए और ज़्यादा खरमस्ती पर उतारू संघ कार्यकर्तायों को हाथों से भी अच्छा सबक सिखाया। यह सब कुछ करीब पौने चार बजे शाम को शुरू हुआ। संघ के हमलावर लाठियों से भी लैस थे। तिरंगे झंडे भी कुछ लोगों ने  पकड़ रखे थे लेकिन अंदाज़ पूरा गुंडागरी का था। इप्टा के लोगों ने पहले तो समझाया लेकिन नहीं मने तो फिर हाथ भी दिखाए। यह हमला और मंच पर  कब्ज़ा करीब 20-25 मिनट तक रहा। इस हमले के बावजूद वहां पुलिस या कोई अन्य दल सुरक्षा के लिए नहीं आया। अगर इप्टा के लोग जवाब में सख्त रुख इख़्तियार नहीं करते तो  ये लोग सफदर हाश्मी जैसी वारदात दोहरा चुके होते। हफरदफरी समाप्त होने के बाद अगली रणनीति पर विचार विमर्श हुआ क्योंकि जाते जाते ये संघी लोग दोबारा आने को भी कह गए हैं। इप्टा के राष्ट्रिय अधिवेशन का आज आखिरी दिन है जो रात को समाप्त होगा। आज शाम पांच बजे कर 10 मिनट पर कार्यक्रम दोबारा शुरू हो गया। 
हमले की खबर आने के साथ ही हर तरफ निंदा की लहर दौड़ गयी और गुस्सा फ़ैल गया।  लुधियाना इप्टा के अध्यक्ष डॉक्टर अरुण मित्र, उपाध्यक्ष डॉक्टर गुलज़ार पंधेर और सचिव मनिंदर सिंह भाटिया ने एक संयुक्त बयान में इस हमले की सख्त निंदा की। लुधियाना इप्टा ने हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है। लुधियाना इप्टा ने याद दिलाया कि इप्टा ने बलराज साहनी, कैफ़ी आज़मी और ए के हंगल जैसे देश भक्त कलाकारों को दिया है।  इस फाशी हमले से हम अपने मिशन को नहीं रोकेंगे। हम जन मुद्दों की आवाज़ उठाना बन्द नहीं करेंगे। हम धर्मनिरपेक्षता को तोड़ने के  होने देंगें।  

आज देश में युद्ध का माहौल बनाया जा रहा है- हम युद्ध के खिलाफ हैं

हम सर्जिकल ऑपरेशन में नहीं निदान में भरोसा करते हैं
इंदौर: 2 अक्टूबर 2016: (प्रदीप शर्मा//पंजाब स्क्रीन):
मानव से मानव के रिश्ते को और मज़बूत बनाता हुआ इप्टा का 14वां राष्ट्रीय सम्मेलन आज रात समाप्त हो जायेगा। हिन्दोस्तान के अलग अलग स्थानों के दर्द को यहाँ इप्टा मंच पर एक दुसरे के साथ बाँटने और फिर उस दर्द को संघर्ष की एक ऊर्जा में बदलते हुए हम फिर अपने अपने घरों की तरफ रवाना हो जाएंगे। हम  हमारा  हमारी विचारधारा हमें जोड़े रखेगी।  हम क्रांति की शमा को रौशन रखेंगे।
सम्मेलन प्रथम अक्टूबर को स्थानीय आनन्द मोहन माथुर सभागृह में बेहद उत्साह से शुरू हुआ।शुरूआत पारम्परिक रूप से झंडे साथ हुई। झंडोत्तोलन इंदौर के सुपरिचित संस्कृति कर्मी औए पूर्व सांसद होमी दाजी की पत्नी ने किया। इसके बाद भिलाई इप्टा ने मणिमय मुखर्जी के संगीत निर्देशन में एक जनगीत 'हमने ली कसम' की प्रस्तुति दी। यह केवल एक गीत नहीं था--सचमुच में भी हमारी कसम थी। 

उत्साहित सदस्यों को सुवाग्त्म कहते हुए मप्र इप्टा के अध्यक्ष हरिओम राजोरिया ने  यादगारी पर स्वागतीय भाषण दिया। इप्टा के महासचिव राकेश ने कहा की चार्ली चैपलिन कहा करते थे कि कला जनता के नाम एक प्रेम पत्र है। हमने इसमें यह जोड़ने की हिमाकत की कि यह शाषकों के  विरुद्ध,  साम्राज्यवाद के विरुद्ध, शोषण और असमानता के विरुद्ध अभियोग पत्र भी है। उन्होंने कहा कि आज देश में युद्ध का माहौल बनाया जा रहा है। हम युद्ध के खिलाफ हैं क्योंकि युद्ध समस्याओं की समाप्ति नहीं शुरुआत है। हम भगत सिंह की विरासत को लेकर चलते हैं। एक समय उन्हें भी आतंकवादी कहा गया था। हम अपने सांस्कृतिक औजारों से उनकी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे। हम युद्ध और आतंकवाद से एक साथ लड़ेंगे।


इसके इसके पश्चात् इप्टा के पूर्व अध्यक्ष ए. के.हंगल, पूर्व महासचिव जितेंद्र रघुवंशी, पंडित रविशंकर, ओ. एन करूप, कामरेड ए. बी. बर्धन, रवि नागर, जुगल किशोर, जोहरा सहगल महाश्वेता देवी, राजेन्द्र यादव, रविन्द्र कालिया, नेल्सन मण्डेला, पीट सीगर, आर के लक्ष्मण, मन्नाडे, भूपेन हजारिका, जसपाल भट्टी, सतपाल डांग आदि दिवंगत साथियो-कलाकारों और अन्य जन नेताओं को श्रद्धांजलि दी गई।


 यादगारी फिल्म "गर्म हवा" के लिए चर्चित फिल्मकार और इप्टा के उपाध्यक्ष साथी एम. एस. सथ्यू ने उद्घाटन भाषण देते हुए कहा कि वे 1960 में इप्टा में आए जब वे मुम्बई इप्टा की रिहर्सल देखा करते थे।


मौजूदा हालात का ज़िक्र करते हुए उन्होंने  कहा कि लड़ना आसान है पर शांति से बर्ताव करना मुश्किल है। टेकनोलॉजी के उपयोग से अब लड़ाई और भी आसान हो गयी है है, पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह गांधी का देश है। आज की सरकार शान्ति के आवरण को फाड़कर फेंक रही है। इस नाज़ुक हालत में हमारी जिम्मेदारी बड़ी है। समाजवाद सबको बराबरी का मौका देता है, इसलिए हमें साम्प्रदायिकता के साथ-साथ जातिवाद से भी लड़ना है।  थिएटर दुनिया को बदल नहीं सकता पर यह इसके लिए प्रेरित कर सकता है।


उन्होंने गिला भी किया कि मुझे उद्घाटन भाषण देने के लिए बुलाया गया। अच्छा होता कि मुझे भाषण देने के बदले नाटक करने के लिए बुलाया गया होता तो मैं अपनी बात बेहतर ढंग से रख पता


विचारधारा को आगे बढ़ते हुए राजेन्द्र राजन, महासचिव, प्रलेस  ने कहा कि जब इप्टा का गठन नहीं हुआ था तब भी सांस्कृतिक जागरण का काम हम करते थे। प्रेमचन्द रंगशाला को मुक्त करने के लिए एक लम्बी लड़ाई हमने बिहार में लड़ी। लाठियाँ भी खाईं। लड़ाई की इस विरासत से जुड़े होने के कारण मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूँ। हम सर्जिकल ऑपरेशन में नहीं निदान में भरोसा करते हैं। प्रलेस दिशा देने का काम करता है। इस धारा को कुंद करने के प्रयास पिछले दिनों खूब हुआ। हम उनके लिए एक बेहतर दुनिया चाहते हैं जो भूखे सोते हैं। निश्चय ही उसमें अम्बानी अडानी शामिल नहीं हैं। हम एनजीओ कल्चर के विरुद्ध हैं। अनुदान कला के धार को भोंथरा कर रहा है। इप्टा और प्रलेस को मिलकर इन चुनौतियों का सामना करना है। लेखक और कलाकार को संगठित होकर लड़ाई लड़नी है। जब कबीर कहते थे कि 'दुखिया दास कबीर है, जागे अरु रोवै' तो वह दरअसल उनका रोना नहीं होता था। वह विद्रोह का आह्वान करते थे। उम्मीद की जानी चाहिए कि लडाई के गीत अब भी रचे जाएंगे और यह काम इप्टा के साथी ही कर सकते हैं। निश्चय ही यह काम अब और ज़ोर से होगा। इसके बाद अशोक नगर इप्टा द्वारा वामिक जौनपुरी का एक जनगीत "जब भी नाव चलती है" प्रस्तुत किया गया ।


इसके बाद बारी आई उन महान लोगों को याद  जिन्होंने  इप्टा को मज़बूत किया तांकि  मज़बूत। साथी शमीम फैजी ने कामरेड बर्धन को याद करते हुए कहा कि वे ही मुझे इस आंदोलन में  लेकर आए। मुझ जैसे कई युवा उनके ही कारण आंदोलन से जुड़े। वे सही मायनो में बहु-आयामी थे। अनेक आंदोलनों से जुड़े। साढ़े ग्यारह साल जेल में रहे। कोई 3 साल भूमिगत रहे। वे विचारों को बेहद सरल भाषा में रखते थे। वे आर्ट और कल्चर के साथ भी उतनी ही शिद्दत से जुड़े थे, जितने अन्य संघर्षो से। इसीलिए इप्टा से उनका जुड़ाव समझ में आता है। इसके सम्मेलनों में शिरकत की बागडोर मुझे सौंपते हुए हुए उन्होंने एक बार विनोद में कहा की मैं संस्कृति की बागडोर एक गैर सांस्कृतिक आदमी को सौंप रहा हूँ। साथी शमीम के वक्तव्य के बाद ए. बी. बर्धन के भाषण का एक अंश परदे पर दिखाया गया और उत्पल बेनर्जी ने फैज की एक नज्म 'हम देखेंगे' का गायन किया।


इस अवसर पर इप्टा के पूर्व महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी को याद करते हुए राकेश ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दोस्त, एक साथी की चर्चा इस तरह से करनी होगी। बकौल दुष्यंत,"उखड़ गया है एक बाजू जबसे, और ज़्यादा वज़्न उठाता हूँ। अब ये दायित्व हम पर है कि उनकी अनुपस्थिति में ज्यादा जिम्मेदारी से काम करें। सन 57 में दिल्ली में पूर्व गठित इप्टा का आखिरी सम्मेलन हुआ था और 60 में इप्टा बिखर गई। 85 में हम आगरा में मिले और कैफ़ी के नेतृत्व में ये कारवां जितेंद्र ने आगे बढ़ाया। बकौल राजेन्द्र यादव वे बड़े कथाकार हो सकते थे, वे बड़े अनुवादक हो सकते थे पर उन्होंने इप्टा के संघठन का जिम्मा चुना। इप्टा दरअसल उन्हें घुट्टी में मिली थी। राकेश के वक्तव्य के बाद जितेंद्र जी पर फ़िल्म दिखाई गयी, जिसका निर्माण दिलीप रघुवंशी ने किया है।

विनीत तिवारी के संक्षिप्त परिचय के बादव्अंधविस्वास निर्मूलन समिति, सांगली, महाराष्ट्र ने एक नाटक का मंचन किया। सोचने की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता राजसत्ता के लिए खतरा होती है, इस बात को रेखांकित करते हुए नाटककारों ने कहा, तुम गोली चलाओगे, हम एक कविता लिखेंगे। तुम गोले दागोगे, हम एक नाटक खेलेंगे! इसी बीच हुए संघ के हमले की सभी ने निंदा की। पंजाब में भी जब यह खबर पहुंची  तो पंजाब में भी इसका तीखा विरोध हुआ। बहुत से संगठनों ने इस हमले की सख्त निंदा की।