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Saturday, December 22, 2018

इस तरह हुआ था नामधारी गुरुतागद्दी के सम्बन्ध में रहस्यमय खुलासा

Dec 21, 2018, 2:07 PM
21 दिसंबर: जब श्री जीवन नगर में कायम हुई थी त्याग की मिसाल 
21 दिसंबर 2012 को त्याग का अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जब श्री जीवन नगर, सिरसा में हजारों की संख्या में नामधारी संगत एकत्रित हुई पर माहौल शोकपूर्ण था क्योंकि मौका था सतगुरु जगजीत सिंह जी को श्रद्धांजलि देने का, जिन्होंने 13 दिसंबर 2012 को देह रूपी चोले को त्यागा था। 
श्रद्धा सुमन अर्पित करने का यह आयोजन ठाकुर दलीप सिंह जी और उनकी संगत की तरफ से किया गया था क्यूंकि श्री भैणी साहिब में रहने वाले ठाकुर उदय सिंह, जगतार सिंह आदि ने सतगुरु जगजीत सिंह जी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात् भैणी साहिब पर कब्ज़ा करके पुलिस और प्राइवेट सेक्योरिटी लगवाकर पूरी तरह से प्रतिबंध लगवा दिया कि यहाँ संगत के आलावा चाहे कोई भी ऐरा-गैरा तो आ सकता है पर ठाकुर उदय सिंह के बड़े भ्राता ठाकुर दलीप और अपने सगे माता बेबे दलीप कौर को भैणी साहिब के अंदर आने की सख्त मनाही थी। यहाँ तक कि सतगुरु जी के अंतिम संस्कार के समय भी ठाकुर दलीप सिंह जी को अंदर आने की इजाजत नहीं मिली और अपनी मर्जी से अगले गुरु का चुनाव भी कर लिया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए श्री जीवन नगर की संगत और सतगुरु जगजीत सिंह जी के बड़े सपुत्र श्री ठाकुर दलीप सिंह जी की तरफ से श्री जीवन नगर इलाके में श्रद्धांजलि समागम करना पड़ा। इस समागम ने इस बात को साबित कर दिया कि जहाँ ठाकुर दलीप सिंह जी त्याग की मूरत हैं वहीं ठाकुर उदय सिंह प्रॉपर्टी और गद्दी के अभिलाषी हैं। 
                       इस समागम में एकत्रित संगत बहुत वैरागमयी अवस्था में थी क्योंकि संगत को सतगुरु जगजीत सिंह जी का बिछड़ना बर्दाश्त नहीं हो रहा था। इस श्रद्धांजलि समागम में बहुत बड़ा खुलासा हुआ। यह खुलासा किया डॉक्टर इक़बाल सिंह जी ने जो सतगुरु जगजीत सिंह जी के निजी डॉक्टर रहे। वह  आयुर्वैदिक, फिजियोथेरेपी, एक्यूपंचर  आदि तरीकों से सतगुरु जी की सेवा करते थे। 
                     इस ऐतिहासिक आयोजन को सम्बोधन करते हुए डॉक्टर इक़बाल सिंह ने गुरुता गद्दी को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 29 जनवरी 2012 को जब वह सतगुरु जगजीत सिंह जी के पास अकेले बैठे उनकी सेवा का सौभाग्य प्राप्त कर रहे थे तो सतगुरु जी ने उनसे कहा कि मैंने तुम्हे एक बात बतानी है पर तुम मुझे वायदा करो कि यह बात किसी को पता न चले। तुमने अभी किसी से कुछ नहीं बताना। फिर किसी कपड़े में लपेटा हुआ समान मुझे थमाते हुए कहा कि जब मैं यह शरीर त्याग दूंगा तो यह अमानत बड़े बेटे दलीप सिंह जी को देनी है और सारी संगत  को यह बात बतानी है कि मेरे बाद दलीप सिंह जी को ही अपना गुरु मानें। डॉ साहिब ने वह अमानत संगत के सामने  खोल  के दिखाई।  इसमें कुछ वस्त्र के अलावा एक दस्तार, एक नारियल, पांच पैसे तांबे के व एक आसन था। डॉक्टर साहिब ने ठाकुर दलीप सिंह जी के चरणों में यह अमानत लेने की विनती की। उनके साथ सतगुरु जगजीत सिंह जी के निजी सेवक दीदार सिंह और पंथ के सिरमौर सूबा साहिबान भी खड़े थे। उन सभी ने भी विनती कि सतगुरु जी के हुक्म अनुसार अब आप जी ही पंथ की बागडोर सम्भालो और उन्हें दुविधा से बाहर निकालें। यह सारा दृश्य देख-सुन कर निराश हुई संगत को थोड़ी राहत मिली और सारा पंडाल जैकारों से गूंज उठा और कितनी देर गूंजता रहा। फिर एक आशा भरी नज़र से संगत ने जैसे ही ठाकुर दलीप सिंह जी की तरफ देखा तो सभी दंग रह गए। जब ठाकुर दलीप सिंह जी ने बड़ी ही शालीनता और विनम्रता से सतगुरु जी की भेजी हुई अमानत ले कर अपने मस्तक से लगाई फिर बहुत ही सम्मान से माता चंद कौर जी की तस्वीर के आगे रख दी। आप ने संगत को सम्बोधित करते हुए कहा कि एक तरफ मेरे छोटे भाई गद्दी पर बैठे हैं दूसरी तरफ मैं गद्दी को अपना कर पंथ को विभाजित नहीं करना चाहता। मैंने पंथ को जोड़ना है। तोड़ना नहीं है। इसके आलावा इस समय माता जी पंथ की सर्वोच्च हस्ती हैं। मैंने उनके आगे यह अमानत रख दी है और मैं चाहता हूँ कि जब तक हमारी आपसी एकता नहीं हो जाती तब तक आप सभी लोग माता जी को गुरु रूप में स्वीकार करें क्योंकि माता जी सभी के लिए सम्मानीय हैं और सतगुरु जगजीत सिंह जी की धर्मपत्नी भी हैं। इस पर संगत को हौंसला नहीं हो रहा था। संगत तो इस तरह तड़प रही थी जैसे पानी के बिना मछली। पर ठाकुर दलीप सिंह जी अपने वचन पर अटल रहे और त्याग का वह महान सबूत दिया जो बेमिसाल था और वह त्याग था केवल पंथ की एकता के लिए। 
                 इसके आलावा आपके द्धारा आज भी जो प्रयत्न किए जा रहे हैं उन्हें देखकर यही प्रतीत होता है कि वे इस महान पंथक-एकता के साथ-साथ आपसी एकता व् सौहार्द्य को बढ़ावा देने के लिए निरंतर यत्नशील हैं।                                                 रिपोर्ट:: प्रितपाल सिंह खालसा--7814545781 प्रेषक:राजपाल कौर

Monday, August 28, 2017

यौन शोषण मामले में डेरा प्रमुख राम रहीम को 10 साल की जेल

हिंसा की खबरों के बीच CBI कोर्ट ने सुनाया फैसला

चंडीगढ़//रोहतक//सिरसा: 28 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

न कोई चमत्कार हुआ और न ही हिंसा के दबाव ने काम किया। सज़ा का एलान होने से पहले ही सिरसा में दो गाड़ियों को आग लगा दी गयी लेकिन इस सब के बावजूद सीबीआई की विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह ने मेसेंजर आफ गॉड गुरमीत राम रहीम को रोहतक में ही दस वर्ष कैद की सज़ा सुना दी। गौरतलब है की यह केवल ेल मामले की सजा है। अगर दुसरे में भी यही फैसला आया तो सजा दुगनी अर्थात 20 साल हो सकती है। इस सजा को डेरे ने हाई कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसी बीच मुख्य मंत्री मनोहर लाल खटटर ने सारे घटनाक्रम पर विचार करने के लिए एक विशेष आपात बैठक बुलाई है। सिरसा में फ्लैग मार्च शुरू कर दिया गया है। अब कई और लोगों के भी डेरा प्रमुख के सामने आने की संभावना है। इसी बीच बाबा को ब्लड प्रेशर होने की खबर गलत बताई जा रही है और पीठ दर्दकी पड़ताल का परिणाम अभी आना है। इस सज़ा के दौरान बाबा को जेल नियमों के मुताबिक बाकायदा काम करना होगा। 
गौरतलब है कि यौन शोषण मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जो 10 वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है उससे डेरा के पैरोकार गुस्से में हैं।  सिरसा में दो गाड़ियों का जलाया जाना साबित करता है कि अभी भी डेरा के हथियारबंद स्कुएड के लोग कहीं न कहीं छुपे होने और हमले की ताक में हो सकते हैं। 

उल्लेखनीय है कि सोमवार को सजा पर सुनवाई के दौरान सुनवाई के दौरान राम रहीम ने हाथ जोड़े और माफ़ी की मांग भी की।  

उनके वकीलों ने भी सीबीआई की विशेष अदालत से सजा में नरमी की मांग की थी पर सज़ा हो कर ही रही।  
इस बार वक़्त रहते किये गए सुरक्षा प्रबंधों के चलते उस तरह की हिंसा नहीं हो सकी जिस तरह 28 अगस्त के बाद पंचकूला और कुछ अन्य स्थानों पर हुई थी। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी व्यापक हिंसा हुई थी। इन सभी स्थानों पर एक आतंक सा छाया रहा। जन जीवन ठप्प रहा। डेरा समर्थकों ने कई शहरों में उपद्रव और आगजनी शुरू कर दी। इस क्रम में 38 लोगों की मौत हो गई और 250 लोग घायल हो गए थे। इससे जो वित्तीय नुकसान हुआ वो अलग।   
दूसरों के परिवारों को ज़िंदा दफना देने की धमकियां देने वाले इस बाबा को जब खुद मुसीबत का अहसास हुआ तो सजा सुनाए जाने से पहले गुरमीत राम रहीम ने जज के आगे हाथ जोड़े और माफी की मांग की। हिंसा की आशंका के चलते आज प्रशासन पूरी तरह सतर्क था। जेल के आसपास के इलाके में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। अर्ध सैनिक बलों की कंपनियां भी तैनात हैं रहीं। रोहतक आने वाली सभी गाड़ियों की सघन तलाशी भी ली गयी। हर आने-जाने वाले से उसकी पहचान पूछी गयी। शहर के अदंर और बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। यहां रोहतक और सिरसा में भी धारा 144 लगी हुई है। 

Monday, June 13, 2016

हिंसा जारी-अब फरीदकोट में डेरा प्रेमी को गोली मारी

दिनदिहाड़े हुई वारदात से इलाके में तनाव 

 फरीदकोट//लुधियाना: 13 जून 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):

लुधियाना में रंजीत सिंह ढडरियांवाले पर हमला,
लुधियाना की ही सब्ज़ी मंडी में एक आढ़ती की हत्या। 
फिर दमदमी टकसाल के कथावाचक संदीप सिंह पर हमला, 
अब फरीदकोट में डेरा प्रेमी को गोली मारी।
पंजाब में हिंसा का तांडव जारी है। गोलियां चलाने वाले पूरी तरह बेख़ौफ़ लगते हैं और निशाना बनने वाले पंजाब के फरीदकोट में आज दिनदिहाड़े कार सवार बदमाशों ने डेरा सच्चा सौदा प्रेमी को गोली मार दी। इससे इलाके में तनाव बना हुआ है। वहीं, गोली लगने से घायल व्यक्ति की हालत गंभीर बनी हुई है। मिली जानकारी के अनुसार यह वारदात सुबह 5:30 बजे के करीब घटित हुयी। गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा के सामने गुरदेव सिंह (45) नामक व्यक्ति की किरयाने की दुकान थी। आज सवेरे जब वह दुकान खोलने आया तो कार सवार बदमाश कोई चीज़ लेने के बहाने वहां रुके और जब उसका ध्यान चीज़ देने की तरफ हुआ तो उसे गोली मारकर फरार हो गए।   
गोली गुरदेव के सिर में लगी। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास लोग दौड़े आए तो देखा कि उसकी सांसें चल रही हैं। लोगों ने तुरंत उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कालेज के डाकटरों ने उसे प्राथमिक इलाज प्रदान करने के बाद प्राथमिक इलाज के बाद उसकी नाज़ुक हालत को देखते हुए उसे डीएमसी हसपताल लुधियाना के लिए रैफर कर दिया। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि गुरदेव सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा का प्रेमी है और जिस गुरुद्वारे के सामने उसकी दुकान है, उससे एक साल पहले जून-2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप चोरी हुए थे।

Sunday, June 05, 2016

तोहफे में पौधा पाकर बोले लोग बच्चों जैसी करेंगी परवरिश


Sun, Jun 5, 2016 at 3:23 PM
एनजीओ "अपने" ने निराले ढंग से मनाया पर्यावरण दिवस
नेशनल हाईवे पर स्टाल लगाकर बांटे 151 लोगों को पौधे

डबवाली (सिरसा):5 जून 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
रविवार को विश्व पर्यावरण दिवस एनजीओ "अपने" ने बहुत ही निराले अंदाज में मनाया। नेशनल हाईवे-54 (चौटाला रोड़) के किनारे स्टाल लगाकर लोगों को पर्यावरण का महत्व समझाते हुए पौधे उपहार स्वरूप दिए। पर्यावरण बचाने के लिए आगे आए 151 लोगों ने जिंदगी भर बच्चों की तरह पौधे की परवरिश करने की शपथ उठाई।

"अपने" के अध्यक्ष मथरा दास चलाना के नेतृत्व में सदस्य गोल चौक के निकट चौटाला रोड़ पर जुटे। जामुन, बुगन बेल, गुलमोहर, जरूपा, चांदनी, शहतूत, नीम तथा गुलाब के पौधों की स्टाल लगाकर बैठ गए। चिलचिलाती धूप के बीच सदस्यों ने राहगीरों को रोककर पर्यावरण का महत्व समझाने का प्रयास किया। स्टाल पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। एनजीओ अध्यक्ष ने सरल लफ्जों में संबोधित करते हुए कहा कि तापमान 45 डिग्री तक जा पहुंचा है, इसके पीछे क्या कारण हैं, कभी सोचा है? उन्होंने कहा कि हम अपने ऐशो आराम के लिए प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे हैं, अंधाधुंध तरीके से वृक्ष काटे जा रहे हैं। जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। इसे हमारा एक प्रयास ही सुधार सकता है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को एक पौधा गिफ्ट किया। 151 लोगों ने उपहार प्राप्त करके लिखित में शपथ ली कि आज पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर 'अपनेÓ ने पौधे के रूप में खूबसूरत तोहफा दिया है। वे जिंदगी भर बच्चों की तरह परवरिश करने की शपथ लेते हैं। इस अवसर पर एनजीओ की युवा विंग के प्रधान हैप्पी बांसल, पीएनबी के चीफ मैनेजर परमजीत कोचर, जतिंद्र ऋषि,  रजनीश मैहता, इंद्र शर्मा, खुशी मोहम्मद, अशोक धवन, विजयंत शर्मा, अंग्रेज सिंह सग्गू, सुरेंद्र सचदेवा, सतपाल चलाना, गुरकिरत सिंह, सूरज चावला, बिट्टू मनन, भोला सिंह मांगेआना, हरीश सेठी, वार्ड नं. 15 के पार्षद रविंद्र बबलू मौजूद थे।

Tuesday, December 01, 2015

ENT: एनजीओ अपने लगा रहा है डबवाली में जांच शिविर


Tue, Dec 1, 2015 at 3:39 PM
आयोजन हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से 
डबवाली (सिरसा):1 दिसंबर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):


हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एनजीओ अपने 10 दिसंबर 2015, दिन वीरवार को सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन करेगा। जिसमें ईएनटी विशेषज्ञ अमनदीप मित्तल नाक, कान तथा गला संबंधी रोगों की जांच करेंगे। एनजीओ की ओर से रोगियों को दवा भी मुफ्त बांटी जाएगी। 

एसएमओ एमके भादू तथा अपने के अध्यक्ष मथरा दास चलाना ने बताया कि डबवाली तथा आसपास के क्षेत्र में नाक, कान तथा गला संबंधी रोगियों की तादाद काफी ज्यादा है। लोग बेहतर इलाज के लिए पंजाब तथा राजस्थान के बड़े शहरों का रूख करते हैं। ऐसे में सिविल अस्पताल में मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने का निर्णय लिया गया है। डॉ. अमनदीप मित्तल ने ईएनटी से संबंधी बीमारियों का जिक्र करते हुए बताया कि अक्सर कान के पर्दे फटे होने तथा कान के भीतर फंगल इंफेक्शन होने के मरीज मिलते हैं। महज जागरूकता के चलते दोनों रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है। कान का पर्दा बचपन में ही फट जाता है। चूंकि अक्सर माताएं अपने बच्चे को लेटकर दूध पिलाती हैं। जिससे दूध कान के पीछे च
ला जाता है। कान का पर्दा फट जाता है। जितनी भी इमरजेंसी हो, माताएं अपने बच्चे को दूध गोद में लिटाकर पिलाएं। उसका मुंह ऊंपर हो, पेट नीचे। ताकि दूध सीधा पेट में जाए। फंगल इंफेक्शन के संबंध में डॉ. मित्तल ने बताया कि कुछ लोगों को तीली से कान खुजाने की लत होती है। ऐसा होने से कान के भीतर घाव हो जाता है। धीरे-धीरे इंफेक्शन होने लगती है। जिससे सुनने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। नाक संबंधी बीमारियों का जिक्र करते हुए चिकित्सक ने बताया कि अक्सर जन्म के समय बच्चे की नाक टेढ़ी हो जाती है। ध्यान न देने के कारण यह बीमारी नासूर बन जाती है। बचपन में ही इसे मेडिसन से ठीक किया जा सकता है। वरना बालिग होने पर ऑपरेशन ही जरिया होता है। बार-बार जुकाम लगने से हृदय पर भी असर पड़ता है। इससे हृदय संबंधी बीमारी हो सकती है। ऐसे कई मामले सामने आते हैं। उन्होंने गले संबंधी बीमारियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में सूखी तथा रेशे वाली खांसी हो जाती है। मामूली जागरूकता से ही इससे बचा जा सकता है।