09-जनवरी-2013 12:52 IST
उद्देश्य प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों के ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाना
प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक कल कोच्चि में हुई। विश्वभर से 13 प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों ने इसमें भाग लिया। बैठक में प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री श्री वायलार रवि, वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री आनंद शर्मा, विदेश मंत्री श्री सलमान खुर्शीद, मानव संसाधन मंत्री श्री एम.एम. पल्लम राजू, योजना आयोग के उपाध्यक्ष डॉक्टर मोंटेक सिंह आहलुवालिया और केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।
बैठक में जिन प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया, उनमें श्री करण एफ. बिलीमोरिया, श्री स्वदेश चटर्जी, सुश्री इला गांधी, लॉर्ड खालिद हमीद, डॉक्टर रेणु खाटोर, श्री किशोर मधुबनी, श्री एल.एन. मित्तल, लॉर्ड भीखु छोटालाल पारेख, श्री सैमपितरोदा, तान श्री दातो अजीत सिंह, श्री नेविले जोसफ रोस, प्रोफेसर श्रीनिवास एस.आर.वर्धन और श्री युसूफाली एम.ए. शामिल थे।
बैठक में प्रतिभागियों ने महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों और भारत पर होने वाले उनके प्रभावों के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया। इनमें वैश्विक आर्थिक स्थिति, पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की घटनाएं, ऊर्जा सुरक्षा और एशिया प्रशांत क्षेत्र में प्रवृत्तियां जैसे मुद्दे शामिल थे। सदस्यों ने भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच तथा भारत और विभिन्न देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के बारे में भी अपने विचार प्रस्तुत किये।
प्रधानमंत्री ने उनके दृष्टिकोण और रचनात्मक सुझावों के लिए सदस्यों का धन्यवाद किया।
प्रधानमंत्री की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद का गठन वर्ष 2009 में हुआ था और हर साल इसकी बैठक होती है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में फैले विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों के ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाना है, ताकि भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच सम्पर्कों के लिए व्यापक एजेंडा तैयार किया जा सके। (PIB)कोच्चि में प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक
मीणा/राजगोपाल/गीता-97
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Wednesday, January 09, 2013
Monday, October 08, 2012
राष्ट्रिय विकास मंच ने किया एक और अहम एलान
गाँधी जी की विचारधारा को घर घर ले जाने का संकल्प
महात्मा गाँधी का नाम और विचारधारा उनकी शहादत के बाद लगातार और जोर पकडती जा रही है। तेज़ी से से प्रासंगिक हो रहे गाँधी जी के विचार एक बार फिर युवायों को आकर्षित कर रहे हैं। उनके समर्थकों की सख्या भी बढ़ रही है और विरोधियों की भी। चर्चा उनक समर्थक भी उनके विचारों की करते हैं और उनके विरोधी भी। हालत यह है की गाँधी जी का विरोध करने वाले भी उनकी हत्या करने वाले नाथू राम गोडसे को सीधे सीधे नायक कहने की हालत में नहीं हैं। गत दिनों एक स्कूली छात्रा ने आरती आई के ज़रिये प्रधानमन्त्री कार्यालय से एक सवाल पूछा कि महात्मा गाँधी को बापू गाँधी की उपाधि या नाम किस ने और कब दिया। इस सवाल का जवाब न तो प्रधानमंत्री कार्यालय ने दिया और न ही गृह मन्त्रालय ने। आखिर इस बच्ची की तस्वीर, उसका सवाल और सरकार का इस पर टालमटोल का जवाब सब कुछ फेसबुक पर आ गया। राष्ट्र के बापू केसाथ यह कैसा मजाक ? जिस नमक आन्दोलन बापू ने सारी दुनिया हिला दी वही नमक देश में आजादी आ जाने के बाद महंगे भाव पर बिकने लगा। जिस स्वदेशी के नारे ने अँगरेज़ साम्राज्य की नींव हिला दी थी आजादी आ जाने के बाद आज उसी स्वदेशी की नीति को पांवों तले कुचल कर विदेशी कम्पनियों को घुटने टेक कर निमंत्रित किया जा रहा है की आईये और हमें लूटिये। देश के बापू के साथ यह कैसा खिलवाड़ ? सीधे विदेशी निवेश जको एक आवश्यक मुख्य नीती के तौर पर अपना लिया गया है। आज समझ आने लगा है की गाँधी जी ने आजादी आने के बाद कांग्रेस को भंग करने की बात क्यूं कही थी? महात्मा गाँधी का नाम लेने वाले लोग ही गाँधी जी के सपनों को धुल में मिला रहे हैं। हमारा संविधान जिस विचार, नीति और भावना की बात करता है हमारे कदम उस सब के पूरी तरह विपरीत जा रहे हैं। किसी भी तरह नहीं लगता कि यह गाँधी जे के सपनों या विचारों की आजादी है !
हालात लगातार नाज़ुक हो रहे हैं। अमन, शांति और सदभावना के पुजारी महात्मा गाँधी को बापू कहने वाले देश में हत्या, साड्फूंक, खूनखराबा, लूटमार, बेईमानी, बलात्कार, भ्रूण हत्या, शोषण, बेरोज़गारी, छूयाछात जैसे कलंक एक आम बात हो चुकी है। इन अत्यंत गंभीर हालात में राष्ट्रीय विकास मंच ने एक संकल्प लिया है गाँधी जी के विचारों को घर घर तक लेजाने का। इसकी औपचारिक शुरूआत की गयी दो अक्टूबर गाँधी जयंती के दिन। पहले दो छोटे छोटे से कार्यक्रम हुए लुधियाना के गोलबाग में, इसके बाद रखबाग और फिर 1 बजे गाँधी धाम पर हुआ मुख्य समारोह। गुरिंदर सूद, निर्दोष भारद्वाज, हरजीत सिंह नंदा और रवि सोई के मार्गदर्शन और संचालन में संकल्प लिया गया की वे सभी मिल कर छूआछात, साम्प्रदायिकता, भ्रष्टाचार और देश में बढ़ रहे विदेशी के चलन का दत कर विरोध किया जायेगा। ਇਹਨਾਂ ਅੱਤ ਦੇ ਗੰਭੀਰ ਹਾਲਾਤਾਂ ਵਿੱਚ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਵਿਕਾਸ ਮੰਚ ਨੇ ਇੱਕ ਵਾਰ ਫੇਰ ਮਹਾਤਮਾ ਗਾਂਧੀ ਦੇ ਫਲਸਫੇ ਨੂੰ ਘਰ ਘਰ ਤੱਕ ਲਿਜਾਣ ਦਾ ਬੀੜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ। दो अक्टूबर 2012 को शुरू हुआ यह अभियान 30 जनवरी तक जरी रहेगा। इस अभियान के अंतर्गत 13 अक्टूबर 2012 को बापू गाँधी का श्राद्ध भी किया जायेगा। गौरतलब है कि बापू के श्राद्ध का आयोजन किसी भी विचार्धार्क सन्गठन की और से शायद पहली बार किया जा रहा है। उल्लेखनीय है की 13 अक्टूबर 1948 के दिन को ही बापू गाँधी की अस्थियों का विसर्जन भी हुआ था। इस श्राद्ध में भाग लेने के इच्छुक नीचे दिए गए नम्बरों पर सम्पर्क भी कर सकते हैं।
गुरिंदर सूद: +91 98881 23786
रवि राज सोई: +91 98884 92198
ਨਿਰਦੋਸ਼ ਭਾਰਦਵਾਜ : +91 99884 03850
नीचे दिए गए दो पंजाबी लिंक भी देखें:
1*ਗਾਂਧੀਵਾਦ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿਚ–ਮੋਹਿਤ ਸੇਨ
13 अक्टूबर को होगा लुधियाना में बापू गाँधी का श्राद्ध
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| संकल्प लेते राष्ट्रिय विकास मंच के सदस्य और अन्य लोग |
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| राष्ट्रीय विकास मंच के आयोजन की एक यादगारी तस्वीर |
गुरिंदर सूद: +91 98881 23786
रवि राज सोई: +91 98884 92198
ਨਿਰਦੋਸ਼ ਭਾਰਦਵਾਜ : +91 99884 03850
नीचे दिए गए दो पंजाबी लिंक भी देखें:
1*ਗਾਂਧੀਵਾਦ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿਚ–ਮੋਹਿਤ ਸੇਨ
Wednesday, May 02, 2012
भारत और अग्नि - 5 // राजीव गुप्ता
संयम रखते हुए अनुशासन के साथ आगे बढ़ना चाहिए
भारत के लिए अग्नि - 5 जिसकी मारक क्षमता 5000 किमी. से ज्यादा है के सफल परीक्षण के साथ 19 अप्रैल 2012 का दिन ऐतिहासिक बन गया ! पूरी दुनिया स्तब्ध नजरो से देखती रह गयी और भारत सुपर मिसाइल क्लब जिसके सदस्य अभी तक रूस,अमेरिका,चीन और फ़्रांस थे, में शामिल हो गया ! वैसे भी भारत की सुरक्षा प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अग्नि - 5 का सफल परीक्षण किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है ! वर्तमान समय की परिस्थितयो के चलते यह परीक्षण जरूरी भी था ! जिस तरह से पड़ोसी देशो के साथ संबंधों में तेजी आ रही है ऐसे में भारत को अपनी रक्षा को लेकर सचेत रहना चाहिए ! अग्नि - 5 का सफल परीक्षण सामरिक एवं वैज्ञानिक दोनों नजरियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है ! अग्नि - 5 के उपलब्धियों के चलते अगर यह कहा जाय यह भारत के रक्षा कवच की तरह है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी !
भारत के लिए अत्यंत गौरव की बात यह है कि यह पूर्णतः स्वदेश में ही निर्मित की गयी है जिसका श्रेय हमारे वैज्ञानिको की दिन - रात मेहनत को जाता है ! अग्नि - 5 जद में समूचा चीन समेत लगभग आधी दुनिया आ गयी है जिसके कारण चीन की मीडिया में बेचैनी बढ़ गयी है ! हालाँकि सिर्फ चीन की मीडिया ने ही भारत के इस सफल परीक्षण पर कुछ इस तरह से अनर्गल बाते की जिससे कि लगता है कि उसे कोई आपत्ति हो ! एक अखबार ने अग्नि 5 के टेस्ट पर चीन ने भारत की मिसाइल क्षमता पर सवाल उठाये है ! मसलन अखबार में कहा गया है कि भारत अग्नि 5 से ICBM क्लब में शामिल होने के दावे कर रहा है ! अग्नि 5 मिसाइल केवल पांच हजार किलोमीटर तक ही मार कर सकती है, जबकि इंटरकॉन्टिनेंटल बलिस्टिक मिसाइल ( ICBM) की मारक क्षमता 8 हजार किलोमीटर होती है !
यही नहीं अखबार में भारत को एक गरीब देश की संज्ञा देते हुए कहा गया है कि "भारत अभी भी एक गरीब देश है , इंफ्रास्ट्रक्टर और निर्माण के क्षेत्र में वह पीछे है, लेकिन वहां की जनता नाभिकीय हथियार की वकालत करती है " ! भारत को अखबार में चेतावनी देते हुए लिखा गया है, "अगर यह मिसाइल चीन के अधिकतर हिस्सों पर निशाना लगाने में भी सक्षम है, तो इसका यह मतलब नहीं है कि भारत विवादित मुद्दों पर कुछ हासिल कर लेगा ! भारत को पता होना चाहिए कि चीन की परमाणु क्षमता कहीं ज्यादा मजबूत है ! भारत हथियारों के मामले में चीन के आगे कहीं भी नहीं ठहरता है !" अखबार में कहा गया है कि पश्चिमी देश भारत की इस "हथियारों की होड़" पर चुप हैं ! चीन का मीडिया बौखलाहट में कैसी भी बयानबाजी करे परन्तु हमें प्रतिक्रिया स्वरुप बौखलाने की जरूरत नहीं है !
सौ फीसदी सच यह है कि बाह्य सुरक्षा हमारे लिए एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है अतः वर्तमान परिस्थितियों के चलते भारत के लिए यह परीक्षण बहुत आवश्यक भी था ! कारण भारत के पड़ोसी देशो में कट्टरवादिता के लगातार हावी होने के चलते वहा राजनैतिक अस्थिरता बढ़ रही है ! पिछले दिनों अरुणाचल प्रदेश को चीन द्वारा अपने नक़्शे में दिखाने से लेकर भारत की घेराबंदी तक जैसी खबरे सुनने में आई थी परन्तु यथार्थ यह है कि चीन भले ही अपने मानचित्र में भारत के अरुणाचल प्रदेश को लगातार दिखता हो परन्तु भारत को यह कदापि मान्य नहीं है ! वही चीन द्वारा भारत के घेराबंदी जैसी बातो से हमें मानसिक घेराबंदी करने की जरूरत नहीं है ! समुचित शक्ति से , अपनी कूटनीतिक के प्रभाव से और सामरिक शक्ति से इसका कटाक्ष किया जा सकता है !
भारत के अग्नि - 5 इस सफल परीक्षण से कई देशो का तर्क है कि इससे एशियाई देशो में हथियारों की होड़ या यूं कहे कि " मिसाइल दौड़" बढ़ेगी तो यह कदापि उचित नहीं होगा ! भारत ने यह परीक्षण अपनी सामरिक आवश्यकताओं के चलते किया है ! हमारा परमाणु अप्रसार रिकॉर्ड समूची दुनिया के लिए एक मिशाल है ! ज्ञातव्य है कि नाटो ने अग्नि - 5 के सफल परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि " भारत का परमाणु अप्रसार रिकॉर्ड बेहद अनुशासित, शांतिपूर्ण और शानदार रहा है " ! अमेरिका भी नाटो के इस बयान से पूर्णतः सहमत है ! भारत की यह सदैव से नीति है कि हम किसी देश पर पहले हमला नहीं करते ! परंतु इसका यह अर्थ कदापि नहीं लगाना चाहिए कि अगर हम पर हमला हुआ तो हम चुप बैठे रहेंगे !
अभी तक यह प्रौद्योगिकी सुरक्षा परिषद् के पांच स्थाई सदस्य देशो के पास ही थी ! भारत अपने अग्नि - 5 के सफल परीक्षण के चलते दूसरे देशो की स्थाई सदस्यता की दावेदारी के चलते अपनी दावेदारी और मजबूत कर ली है अगर ऐसा माना जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी ! हालांकि इस सफलता मात्र से भारत का सुरक्षा परिषद् की तरफ का रास्ता आसान नहीं है ! ज्ञातव्य है कि ब्राजील, जर्मनी, जापान, और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश सुरक्षा परिषद् की स्थाई सदस्यता के लिए अपनी - अपनी दावेदारी कर रहे थे ! इनमे से अभी तक किसी भी देश के पास अंतर्महाद्वीपीय बलास्तिक मिसाइल (ICBM) नहीं है !
भारत का पिछले एक दशक से मिसाइल विकास कार्यक्रम बहुत ही शानदार रहा है ! अग्नि - 1 का सफल परीक्षण 2002 में किया गया था ! जिसकी लागत तकरीबन 300 करोड़ रुपये थी और इसकी मारक क्षमता लगभग 800 किलोमीटर तक थी ! उसके बाद विकास का यह सिलसिला रुका ही नहीं ! भारत ने अब अग्नि - 5 के सफल परीक्षण 5000 से अधिक दूरी तक मार करने की मिसाइल निर्मित कर यह साबित कर दिया कि भारत के वैज्ञानिको में वो काबिलियत है जिससे वह सारे संसार को अपना मुरीद बना सकता है ! ध्यान देने योग्य है भारतीय वैज्ञानिको की दिन - रात मेहनत के चलते भारत ने ब्रह्मोस, आकाश, धनुष,पृथ्वी, सागरिका जैसी मिसाइलें विकास किया है !
वर्तमान समय में किसी भी देश को ताकतवर तब समझा जाता है आर्थिक सम्पन्नता के साथ - साथ उसकी सेना सबसे आधुनिकतम हथियारों से युक्त हो ! भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार समृद्धि की तरफ अग्रसर हो रहा है ! इंफ्रास्ट्रक्टर और निर्माण के क्षेत्र में अब हम निरंतर आगे बढ़ रहे है ! ऐसे में हमें अपनी बाहरी सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए ! क्योंकि आर्थिक सम्पन्नता के साथ - साथ उसकी बाह्य सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है ! अभी भारत के सम्मुख विश्व
मोबाईल सम्पर्क: 98115 58925
भारत के लिए अत्यंत गौरव की बात यह है कि यह पूर्णतः स्वदेश में ही निर्मित की गयी है जिसका श्रेय हमारे वैज्ञानिको की दिन - रात मेहनत को जाता है ! अग्नि - 5 जद में समूचा चीन समेत लगभग आधी दुनिया आ गयी है जिसके कारण चीन की मीडिया में बेचैनी बढ़ गयी है ! हालाँकि सिर्फ चीन की मीडिया ने ही भारत के इस सफल परीक्षण पर कुछ इस तरह से अनर्गल बाते की जिससे कि लगता है कि उसे कोई आपत्ति हो ! एक अखबार ने अग्नि 5 के टेस्ट पर चीन ने भारत की मिसाइल क्षमता पर सवाल उठाये है ! मसलन अखबार में कहा गया है कि भारत अग्नि 5 से ICBM क्लब में शामिल होने के दावे कर रहा है ! अग्नि 5 मिसाइल केवल पांच हजार किलोमीटर तक ही मार कर सकती है, जबकि इंटरकॉन्टिनेंटल बलिस्टिक मिसाइल ( ICBM) की मारक क्षमता 8 हजार किलोमीटर होती है !
यही नहीं अखबार में भारत को एक गरीब देश की संज्ञा देते हुए कहा गया है कि "भारत अभी भी एक गरीब देश है , इंफ्रास्ट्रक्टर और निर्माण के क्षेत्र में वह पीछे है, लेकिन वहां की जनता नाभिकीय हथियार की वकालत करती है " ! भारत को अखबार में चेतावनी देते हुए लिखा गया है, "अगर यह मिसाइल चीन के अधिकतर हिस्सों पर निशाना लगाने में भी सक्षम है, तो इसका यह मतलब नहीं है कि भारत विवादित मुद्दों पर कुछ हासिल कर लेगा ! भारत को पता होना चाहिए कि चीन की परमाणु क्षमता कहीं ज्यादा मजबूत है ! भारत हथियारों के मामले में चीन के आगे कहीं भी नहीं ठहरता है !" अखबार में कहा गया है कि पश्चिमी देश भारत की इस "हथियारों की होड़" पर चुप हैं ! चीन का मीडिया बौखलाहट में कैसी भी बयानबाजी करे परन्तु हमें प्रतिक्रिया स्वरुप बौखलाने की जरूरत नहीं है !
सौ फीसदी सच यह है कि बाह्य सुरक्षा हमारे लिए एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है अतः वर्तमान परिस्थितियों के चलते भारत के लिए यह परीक्षण बहुत आवश्यक भी था ! कारण भारत के पड़ोसी देशो में कट्टरवादिता के लगातार हावी होने के चलते वहा राजनैतिक अस्थिरता बढ़ रही है ! पिछले दिनों अरुणाचल प्रदेश को चीन द्वारा अपने नक़्शे में दिखाने से लेकर भारत की घेराबंदी तक जैसी खबरे सुनने में आई थी परन्तु यथार्थ यह है कि चीन भले ही अपने मानचित्र में भारत के अरुणाचल प्रदेश को लगातार दिखता हो परन्तु भारत को यह कदापि मान्य नहीं है ! वही चीन द्वारा भारत के घेराबंदी जैसी बातो से हमें मानसिक घेराबंदी करने की जरूरत नहीं है ! समुचित शक्ति से , अपनी कूटनीतिक के प्रभाव से और सामरिक शक्ति से इसका कटाक्ष किया जा सकता है !
भारत के अग्नि - 5 इस सफल परीक्षण से कई देशो का तर्क है कि इससे एशियाई देशो में हथियारों की होड़ या यूं कहे कि " मिसाइल दौड़" बढ़ेगी तो यह कदापि उचित नहीं होगा ! भारत ने यह परीक्षण अपनी सामरिक आवश्यकताओं के चलते किया है ! हमारा परमाणु अप्रसार रिकॉर्ड समूची दुनिया के लिए एक मिशाल है ! ज्ञातव्य है कि नाटो ने अग्नि - 5 के सफल परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि " भारत का परमाणु अप्रसार रिकॉर्ड बेहद अनुशासित, शांतिपूर्ण और शानदार रहा है " ! अमेरिका भी नाटो के इस बयान से पूर्णतः सहमत है ! भारत की यह सदैव से नीति है कि हम किसी देश पर पहले हमला नहीं करते ! परंतु इसका यह अर्थ कदापि नहीं लगाना चाहिए कि अगर हम पर हमला हुआ तो हम चुप बैठे रहेंगे !
अभी तक यह प्रौद्योगिकी सुरक्षा परिषद् के पांच स्थाई सदस्य देशो के पास ही थी ! भारत अपने अग्नि - 5 के सफल परीक्षण के चलते दूसरे देशो की स्थाई सदस्यता की दावेदारी के चलते अपनी दावेदारी और मजबूत कर ली है अगर ऐसा माना जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी ! हालांकि इस सफलता मात्र से भारत का सुरक्षा परिषद् की तरफ का रास्ता आसान नहीं है ! ज्ञातव्य है कि ब्राजील, जर्मनी, जापान, और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश सुरक्षा परिषद् की स्थाई सदस्यता के लिए अपनी - अपनी दावेदारी कर रहे थे ! इनमे से अभी तक किसी भी देश के पास अंतर्महाद्वीपीय बलास्तिक मिसाइल (ICBM) नहीं है !
भारत का पिछले एक दशक से मिसाइल विकास कार्यक्रम बहुत ही शानदार रहा है ! अग्नि - 1 का सफल परीक्षण 2002 में किया गया था ! जिसकी लागत तकरीबन 300 करोड़ रुपये थी और इसकी मारक क्षमता लगभग 800 किलोमीटर तक थी ! उसके बाद विकास का यह सिलसिला रुका ही नहीं ! भारत ने अब अग्नि - 5 के सफल परीक्षण 5000 से अधिक दूरी तक मार करने की मिसाइल निर्मित कर यह साबित कर दिया कि भारत के वैज्ञानिको में वो काबिलियत है जिससे वह सारे संसार को अपना मुरीद बना सकता है ! ध्यान देने योग्य है भारतीय वैज्ञानिको की दिन - रात मेहनत के चलते भारत ने ब्रह्मोस, आकाश, धनुष,पृथ्वी, सागरिका जैसी मिसाइलें विकास किया है !
वर्तमान समय में किसी भी देश को ताकतवर तब समझा जाता है आर्थिक सम्पन्नता के साथ - साथ उसकी सेना सबसे आधुनिकतम हथियारों से युक्त हो ! भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार समृद्धि की तरफ अग्रसर हो रहा है ! इंफ्रास्ट्रक्टर और निर्माण के क्षेत्र में अब हम निरंतर आगे बढ़ रहे है ! ऐसे में हमें अपनी बाहरी सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए ! क्योंकि आर्थिक सम्पन्नता के साथ - साथ उसकी बाह्य सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है ! अभी भारत के सम्मुख विश्व
महाशक्ति बनने में और भी कई चुनौतिया है ! मसलन आर्थिक, प्रशासनिक,पड़ोसी देश के साथ सम्बन्ध ठीक न होना है ! पड़ोसी देश के साथ सम्बन्ध ठीक न होने की बेडी जब तक पडी रहेगी तब तक हम अपनी नियति के अनुसार काम नहीं कर पाएंगे ! अगर सफल सरकार और सबल सरकार भारत में नहीं होगी हम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ नहीं कर सकते !
हमारा देश आने वाले समय में विश्व के सम्मुख एक आदर्श स्थिति में होगा ऐसी स्थित में भारत को अपनी सामरिक शक्ति में वृद्धि करते हुए तथा सकारात्मक सोच के साथ हमें प्रगति करने के साथ - साथ संयम रखते हुए अनुशासन के साथ आगे बढ़ना चाहिए !
राजीव गुप्ता ,
लेखक एवं स्वतंत्र स्तंभकार, हमारा देश आने वाले समय में विश्व के सम्मुख एक आदर्श स्थिति में होगा ऐसी स्थित में भारत को अपनी सामरिक शक्ति में वृद्धि करते हुए तथा सकारात्मक सोच के साथ हमें प्रगति करने के साथ - साथ संयम रखते हुए अनुशासन के साथ आगे बढ़ना चाहिए !
राजीव गुप्ता ,
मोबाईल सम्पर्क: 98115 58925
Tuesday, March 27, 2012
गंगा सेवा मिशन अब लुधियाना में भी हुआ सक्रिय
हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है
केवल धर्म शास्त्र ही नहीं फ़िल्मी दुनिया के लोग भी कल कल बहती पावन गंगा जी की धारा के सामने नतमस्तक होते रहे हैं. पूरे समाज के लोग गंगा जी से प्रभावित होते भी रहे हैं और दूसरों को प्रभावित करते भी रहे. कभी जमाना था जब देश के बच्चे बच्चे की जुबान पर बस यही गीत हुआ करता था...हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है. एक भारतीय होने की बस यही पहचान काफी थी. गंगा जी के देश का वासी होना बस यही गर्व काफी था. दुनिया के सामने सर उठा कर चलने के लिए बस यही प्रमाणपत्र पर्याप्त था किसी और चीज़ की ज़रुरत महसूस भी नहीं होती थी. गंगा जी के दर्शन सारी चिंता को दूर कर देते, गंगा स्नान से तन मन के सारे ताप दूर हो जाते. लोग प्रेम की दुनिया में भी उतरते तो बस यही कामना करते गंगा मैया में जब तक ये पानी रहे मेरे सज्जना तेरी जिंदगानी रहे.....!
लोगों के दिल से बस यही आवाज़ निकलती..गंगा तेरा पानी अमृत कल कल बहता जाए. पर यह सुखद हकीकत जल्द ही सपना बनने लगी. हालात बदलने लगे. देश को शक्ति व प्रेरणा देने वाले स्रोतों पर वार करने की साजिशें सफल होने लगी. गंगा जी के पावन शीतल जल को नकार कर बोतल में बंद पानी बेचने के कारोबार खड़े होने लगे. स्विमिंग पूल में नहाने की संस्कृति ने ऐसा सर उठाया कि लोग माँ गंगा जी के पावन आँचल से ही दूर होने लगे. गंगा स्नान बस व्रत त्योहारों की बात बनने लगा. लोग गंगा और यमुना से जुड़े सम्बन्धों को तेज़ी से भूलने लगे. जब जब भी घर में गंगा जल आता तो बच्चे पूछते यह क्या है? यह क्यूं है? इससे से क्या होने वाला है?
जमाना ऐसा बदला और हालत बेहद तेज़ी से बिगड़ने लगी. देश के दुश्मनों की साजिश और देश के सपूतों की अज्ञानता कि गंगा जी की शक्ति को समाप्त करने के कुप्रयास होने लगे. देश के कलमकारों ने, फिल्मकारों ने वक्त पर आगाह भी किया और तडप कर कहा...राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते धोते. पर न पाप रुका और न ही पाप में लगे लोग. देश ऐसा सोया कि न अपनी सुध रही और न ही गंगा जी की. देश का जल, देश की वायु, देश का अन्न, देश का मन सब कुछ प्रदूषित होता चला गया पर देश के कर्णधार सोते रहे सोते रहे. देश कि युवा शक्ति को गंगा जी कि पावन धारा से तोड़ कर नशे कि धारा में डुबोने कि सुनियोजित साजिशें सफल होने लगीं. गंगा पुत्र निगमानन्द जी का बलिदान भी इन्हें जगाने में नाकाम रहा. गंगा यमुना से भावुक तौर पर टूटा भारतीय मानव पूरी तरह भावहीन होता गया, कारोबारी बनता गया और धर्म व संस्कारों से पूरी तरह टूटने लगा. आज अगर अश्लीलता बढ़ रही है, भाई भाई पर वार कर रहा है, पिता पुत्री से सम्बन्ध बना रहा है तो इसके गहरे अर्थ यहाँ भी जुड़े हैं. गंगा जी कि पावन धरा से टूट कर, पर्यादा को भूल कर यही होने वाला था. गंगा यमुना छूटी तो स्नेह भी छूट गया और भावना भी. पवित्रता का वह अहसास भी और मंजिलें पाने का वह असीम जोश भी.
अप्रैल 1985 में शुरू हुए गंगा एक्शन प्लान पर 1200 करोड़ रूपये खर्च हुए पर समस्या हल होने कि बजाये लगातार गंभीर होती चली गई. लेकिन इन सरे प्रयासों में बहुत कुछ ऐसा भी हुआ जिसे उल्लेखनीय कहा जा सकता है.गंगा बचायो अभियान से जुड़े लोगों और संगठनों में गंगा सेवा मिशन भी है. स्वामी आंनद स्वरूप जी कहते हैं गंगा सिर्फ नदी नहीं एक संस्कृति है। गंगा से लगाव उनका बचपन से है। गंगा की लहरों ने उन्हें सदैव आकर्षित किया है। यही कारण है कि उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गिरिधर मालवीय के साथ इलाहाबाद में वर्ष 1998 में गंगा समर्पण संस्थान के माध्यम से गंगा की पवित्रता के लिए काम शुरू किया। मालवीय इसके अध्यक्ष थे। इसके पूर्व महामंडलेश्वर स्वामी महेश्वरानंद ने हरिद्वार कुंभ 1998 में जब गंगा में कुत्ते की लाश देखी तो आहत होकर कहा, गंगा के लिए कुछ करो। बाद में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की प्रेरणा से तो इस संकल्प ने अभियान का रूप ले लिया। शुरू में गंगा सेवा अभियान के माध्यम से इलाहाबाद, पटना, हरिद्वार, रामपुर आदि स्थानों पर सम्मेलन आयोजित किए गए। गंगा सेवा मिशन की स्थापना के बाद अभियान में तेजी आई। 26 दिसंबर 2010 को काशी से गंगा की पवित्रता के लिए एक बड़ी यात्रा शुरू हुई। इसमें बड़ी संख्या में संत और गृहस्थ शामिल हुए। इस यात्रा की समाप्ति मथुरा में हुई। वहां गोवर्धन पीठ में स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती की अध्यक्षता में बड़ा सम्मेलन हुआ। इसके बाद हरियाणा के परहवा में शिवशक्ति महायज्ञ हुआ।
इस सारे अभियान की अंतरात्मा से जुड़े स्वामी आनन्द स्वरूप जी आजकल लुधियाना में है. नवरात्र के शुभ अवसर पर गंगा सेवा मिशन की अलख जगाते हुए स्वामी इस मुद्दे के सभी पहलूयों पर विस्तार से जानकारी दे रहे है तन की लोगों में जागरूकता आ सके. उनके इस मिशन में बहुत से लोग शामिल हैं लेकिन ठाकुर परिबार का नाम लेना आवश्यक है. युवा मन और जोश के साथ आरती ठाकुर भी इस मिशन को सफल बनाने में जुटी है और आरती का परिवार भी.--रेक्टर कथूरिया सहयोग: आरती ठाकुर
केवल धर्म शास्त्र ही नहीं फ़िल्मी दुनिया के लोग भी कल कल बहती पावन गंगा जी की धारा के सामने नतमस्तक होते रहे हैं. पूरे समाज के लोग गंगा जी से प्रभावित होते भी रहे हैं और दूसरों को प्रभावित करते भी रहे. कभी जमाना था जब देश के बच्चे बच्चे की जुबान पर बस यही गीत हुआ करता था...हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है. एक भारतीय होने की बस यही पहचान काफी थी. गंगा जी के देश का वासी होना बस यही गर्व काफी था. दुनिया के सामने सर उठा कर चलने के लिए बस यही प्रमाणपत्र पर्याप्त था किसी और चीज़ की ज़रुरत महसूस भी नहीं होती थी. गंगा जी के दर्शन सारी चिंता को दूर कर देते, गंगा स्नान से तन मन के सारे ताप दूर हो जाते. लोग प्रेम की दुनिया में भी उतरते तो बस यही कामना करते गंगा मैया में जब तक ये पानी रहे मेरे सज्जना तेरी जिंदगानी रहे.....!
लोगों के दिल से बस यही आवाज़ निकलती..गंगा तेरा पानी अमृत कल कल बहता जाए. पर यह सुखद हकीकत जल्द ही सपना बनने लगी. हालात बदलने लगे. देश को शक्ति व प्रेरणा देने वाले स्रोतों पर वार करने की साजिशें सफल होने लगी. गंगा जी के पावन शीतल जल को नकार कर बोतल में बंद पानी बेचने के कारोबार खड़े होने लगे. स्विमिंग पूल में नहाने की संस्कृति ने ऐसा सर उठाया कि लोग माँ गंगा जी के पावन आँचल से ही दूर होने लगे. गंगा स्नान बस व्रत त्योहारों की बात बनने लगा. लोग गंगा और यमुना से जुड़े सम्बन्धों को तेज़ी से भूलने लगे. जब जब भी घर में गंगा जल आता तो बच्चे पूछते यह क्या है? यह क्यूं है? इससे से क्या होने वाला है?
जमाना ऐसा बदला और हालत बेहद तेज़ी से बिगड़ने लगी. देश के दुश्मनों की साजिश और देश के सपूतों की अज्ञानता कि गंगा जी की शक्ति को समाप्त करने के कुप्रयास होने लगे. देश के कलमकारों ने, फिल्मकारों ने वक्त पर आगाह भी किया और तडप कर कहा...राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते धोते. पर न पाप रुका और न ही पाप में लगे लोग. देश ऐसा सोया कि न अपनी सुध रही और न ही गंगा जी की. देश का जल, देश की वायु, देश का अन्न, देश का मन सब कुछ प्रदूषित होता चला गया पर देश के कर्णधार सोते रहे सोते रहे. देश कि युवा शक्ति को गंगा जी कि पावन धारा से तोड़ कर नशे कि धारा में डुबोने कि सुनियोजित साजिशें सफल होने लगीं. गंगा पुत्र निगमानन्द जी का बलिदान भी इन्हें जगाने में नाकाम रहा. गंगा यमुना से भावुक तौर पर टूटा भारतीय मानव पूरी तरह भावहीन होता गया, कारोबारी बनता गया और धर्म व संस्कारों से पूरी तरह टूटने लगा. आज अगर अश्लीलता बढ़ रही है, भाई भाई पर वार कर रहा है, पिता पुत्री से सम्बन्ध बना रहा है तो इसके गहरे अर्थ यहाँ भी जुड़े हैं. गंगा जी कि पावन धरा से टूट कर, पर्यादा को भूल कर यही होने वाला था. गंगा यमुना छूटी तो स्नेह भी छूट गया और भावना भी. पवित्रता का वह अहसास भी और मंजिलें पाने का वह असीम जोश भी.
अप्रैल 1985 में शुरू हुए गंगा एक्शन प्लान पर 1200 करोड़ रूपये खर्च हुए पर समस्या हल होने कि बजाये लगातार गंभीर होती चली गई. लेकिन इन सरे प्रयासों में बहुत कुछ ऐसा भी हुआ जिसे उल्लेखनीय कहा जा सकता है.गंगा बचायो अभियान से जुड़े लोगों और संगठनों में गंगा सेवा मिशन भी है. स्वामी आंनद स्वरूप जी कहते हैं गंगा सिर्फ नदी नहीं एक संस्कृति है। गंगा से लगाव उनका बचपन से है। गंगा की लहरों ने उन्हें सदैव आकर्षित किया है। यही कारण है कि उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गिरिधर मालवीय के साथ इलाहाबाद में वर्ष 1998 में गंगा समर्पण संस्थान के माध्यम से गंगा की पवित्रता के लिए काम शुरू किया। मालवीय इसके अध्यक्ष थे। इसके पूर्व महामंडलेश्वर स्वामी महेश्वरानंद ने हरिद्वार कुंभ 1998 में जब गंगा में कुत्ते की लाश देखी तो आहत होकर कहा, गंगा के लिए कुछ करो। बाद में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की प्रेरणा से तो इस संकल्प ने अभियान का रूप ले लिया। शुरू में गंगा सेवा अभियान के माध्यम से इलाहाबाद, पटना, हरिद्वार, रामपुर आदि स्थानों पर सम्मेलन आयोजित किए गए। गंगा सेवा मिशन की स्थापना के बाद अभियान में तेजी आई। 26 दिसंबर 2010 को काशी से गंगा की पवित्रता के लिए एक बड़ी यात्रा शुरू हुई। इसमें बड़ी संख्या में संत और गृहस्थ शामिल हुए। इस यात्रा की समाप्ति मथुरा में हुई। वहां गोवर्धन पीठ में स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती की अध्यक्षता में बड़ा सम्मेलन हुआ। इसके बाद हरियाणा के परहवा में शिवशक्ति महायज्ञ हुआ।
इस सारे अभियान की अंतरात्मा से जुड़े स्वामी आनन्द स्वरूप जी आजकल लुधियाना में है. नवरात्र के शुभ अवसर पर गंगा सेवा मिशन की अलख जगाते हुए स्वामी इस मुद्दे के सभी पहलूयों पर विस्तार से जानकारी दे रहे है तन की लोगों में जागरूकता आ सके. उनके इस मिशन में बहुत से लोग शामिल हैं लेकिन ठाकुर परिबार का नाम लेना आवश्यक है. युवा मन और जोश के साथ आरती ठाकुर भी इस मिशन को सफल बनाने में जुटी है और आरती का परिवार भी.--रेक्टर कथूरिया सहयोग: आरती ठाकुर
Sunday, March 25, 2012
केन्द्रीय बजट और ग्रामीण भारत//राजीव गुप्ता का विशेष लेख
ग्रामीण भारत से जुड़ाव दिखाने का प्रयास और हकीकत
पांच राज्यों के चुनावों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन से सबक लेते हुए एवं रेल बजट से उत्पन्न हुए गर्म सियासी माहौल के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यूपीए सरकार की दूसरी पारी का तीसरा बजट पेश करते हुए अपने को आम आदमी अर्थात ग्रामीण भारत से जुड़ाव दिखाने का प्रयास किया ! हालाँकि ग्रामीण भारत के लिए जितनी घोषणाएं वित्त मंत्री ने की है वह अभी अपर्याप्त है परन्तु फिर भी कुछ हद तक स्वागत योग्य है लेकिन यह भी कड़वा सच है आने वाले समय में महंगाई की मार से आम आदमी फिर से और त्रस्त होगा क्योंकि वित्त मंत्री द्वारा सेवा कर में दो प्रतिशत (पहले दस प्रतिशत थी अब बारह प्रतिशत हो जायेगी ) की वृद्धि के प्रयोजन के साथ - साथ आम जनता को दी जा रही सब्सिडी में कटौती का बंदोबस्त कर दिया गया है जिसके कारण लोक - लुभावनी घोषणाओं के साथ - साथ महंगाई का दंश झेल रहा आम आदमी की जेब अब और भी ढीली होगी ! या यूं कहा जाय कि मामला अब एक हाथ दे और एक हाथ ले का हो गया है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी !
बहरहाल इस बजट से कुछ हद तक किसानो को जरूर फायदा होगा और अब किसानों को किसानी घाटे का सौदा नहीं रह जायेगा ! ज्ञातव्य है कि एन एस एस ओ की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 41 फीसदी किसान अपनी किसानी छोड़ना चाहते है ! 2.5 की ग्रोथ दर से कृषि क्षेत्र जहां अपनी सांसे गिन रहा था तो ऐसे में कृषि एवं सहकारिता विकास के लिए वित्त मंत्री द्वारा चालू वित्त वर्ष आयोजना परिव्यय को 18 फीसदी बढाकर 17123 करोड़ रूपये (2011 -2012 ) से 20 ,208 करोड़ रुपये (2012 -2013 ) करने के साथ-साथ कृषि कर्ज में भी 1 ,00 ,000 करोड़ रुपये का इजाफा करते हुए 4,75,000 करोड़ रुपये (2011 -2012 ) से 5,75,000 करोड़ रुपये (2012 -2013 ) की व्यवस्था कर दी गयी है जिससे कुछ हद तक सूदखोरों से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है ! साथ ही किसानों को प्रति वर्ष 7 प्रतिशत की दर पर अल्पावधि फसल ऋण के लिए ब्याज आर्थिक सहायता को जारी रखा गया है एवं कर्ज समय से चुकाने वाले किसानो को 3 प्रतिशत की अतिरिक्त राहत की व्यवस्था की जायेगी !
यूरिया उत्पादन - क्षेत्र में अगले पांच वर्ष में आत्म निर्भरता का लक्ष्य स्वागत योग्य है क्योंकि अभी तक लगभग 25 प्रतिशत यूरिया आयत किया जाता है साथ ही उर्वरक सब्सिडी किसानो और रिटेलरों को सीधे देने की घोषणा भी स्वागत योग्य है क्योंकि अभी तक ऐसा माना जाता था कि उर्वरक सब्सिडी के 40 प्रतिशत से ही किसान लाभान्वित होते थे बाकी 60 प्रतिशत उर्वरक उद्योग उर्वरक सब्सिडी का लाभ उठाते थे ! सरकार ने नंदन नीलकणि जो कि आईटी नीति से संबंधित है की अध्यक्षता वाले कार्यबल की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए कहा है कि सब्सिडी का सीधा अंतरण किया जायेगा और इनके आधार पर एक मोबाइल आधारित उर्वरक प्रबंध प्रणाली तैयार की गई है जिसे 2012 में पूरे देश में लागू किया जाएगा ! उर्वरकों के दुरूपयोग में कमी और सब्सिडियों पर व्यय कम करने के उपायों से 12 करोड़ किसान परिवारों को लाभ होगा ! वित्त मंत्री ने आगामी वित्त वर्ष 2012 -2013 में कृषि क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए कई लुभावनी घोषणाएं की है जो कि स्वागत योग्य है !
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक - नाबार्ड
समन्वित ग्रामीण विकास एवं ग्रामीण क्षेत्र में संमृद्धि सुनिश्चित करने हेतु कृषि , लघु उद्योगों , कुटीर एवं ग्रामोद्योगों हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण शिल्प कलाओं के विकास में आने वाली ऋण समस्याओ के निपटान हेतु बनाई गयी इस योजना को वित्त मंत्री ने 10 ,000 हजार करोड़ रुपये प्रावधान किया है !
किसान क्रेडिट कार्ड - केसीसी
किसान क्रेडिट कार्ड - केसीसी का उद्देश्य मौसमी कृषि परिचालनो के लिए पर्याप्त , कम लागत पर और समय पर बिना किसी झंझट के अल्पावधि ऋण प्राप्त करने में कृषको को होने वाली कठिनाइयों को दूर करना है ! मौखिक पट्टेदार , काश्तकारों और बटाईदारों आसी सहित सभी कृषक वर्गों को इस योजना में शामिल किया गया है ! कृषि यंत्र , खाद व अन्य खेती से जुड़े समानो की खरीदारी के लिए उपयोग में आने वाला किसान क्रेडिट कार्ड से अब एटीएम की तर्ज पर नकदी भी प्राप्त किया जा सकेगा ! इससे किसानो को फसल के समय कृषि यंत्र, बीज, उर्वरक इत्यादि के लिए ऊंचे दरों पर ब्याज लेने की आवश्यकता नहीं होगी ! साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड की खरीद सीमा बढ़ाने पर भी सरकार विचार कर रही है ! गौरतलब है कि वर्तमान समय में किसानो को 25 ,000 रूपये तक की सीमा का किसान क्रेडिट कार्ड दिया जा रहा है !
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम - मनरेगा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम - मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले हर एकल परिवार जिसमे माता , पिता और उन पर आश्रित बच्चे शामिल है का साल में सौ दिन का अकुशल शारीरिक काम मांगने और प्राप्त करने का हक बनता है ! इसके अंतर्गत उपेक्षित समूहों को रोजगार प्रदान किया गया ! फरवरी 2011 तक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की भागीदारी क्रमशः 28 व 24 प्रतिशत रही वही महिलाओ की भागीदारी वित्त वर्ष 2010 -2011 में 47 प्रतिशत तक हो गयी ! ऐसा कहा जाता है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम - मनरेगा से पलायन रोकने में काफी मदद मिली है ! इस महत्वपूर्ण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के लिए आगामी वित्त वर्ष 2012 - 2013 में सरकार ने 33 ,000 हजार करोड़ रूपये देने का प्रावधान किया गया है ! हालाँकि पिछले वित्त वर्ष में मनरेगा को 40 ,000 करोड़ रूपये देने का प्रावधान किया गया था !
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन - एनआरएलएम
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिदेश में सभी निर्धन परिवारों तक पहुँच सुनिश्चित करना, उन्हें स्थाई जीविका के अवसर उपलब्ध करवाना और गरीबी से ऊपर आने तक उनका पोषण करना निहित है ! एनआरएलएम के माध्यम से बेरोजगार ग्रामीण निर्धन युवाओं के कौशल विकास तथा विशेष रूप से विकसित क्षेत्रों में नौकरियों में रोजगार उपलब्ध कराने अथवा लाभकारी स्वरोजगार एवं लघु उद्योगों में रोजगार उपलब्ध कराने का उद्देश्य है ! सरकार ने आगामी वित्त वर्ष 2012 -2013 एनआरएलएम को 34 प्रतिशत के बढ़ोत्तरी करते हुए 3915 करोड़ रूपये का प्रायोजन किया है !
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य योजना - एनआरएचएम
इस बार ग्रामीणों के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए वित्त मंत्री ने आगामी वित्त वर्ष 2012-2013 के लिए विगत वर्ष में किये गये 18,115 करोड़ रुपए आबंटन को बढ़ाकर 20,822 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया है!
बुनकर क्षेत्र को विशेष राहत
स्वचालित शटल-रहित करघों को 5 प्रतिशत के बुनियादी सीमा-शुल्क से पूर्ण छूट देने का प्रस्ताव किया गया है और स्वचालित रेशम चरखी और प्रसंस्करण मशीनरी और इनके पुर्जों को भी बुनियादी शुल्क से पूरी छूट दे दी गयी है ! एक तरफ जहां 5 प्रतिशत की बुनियादी सीमा-शुल्क की इस छूट और मौजूदा रियायती दर को केवल नई टेक्सटाईल मशीनरी तक सीमित रखा गया तो दूसरी तरफ सेकेंड हैंड मशीनरी के लिए 7.5 प्रतिशत के बुनियादी शुल्क का प्रस्ताव किया गया जिससे बुनकर समाज को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी !
इसके साथ - साथ ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता के लिए बजटीय आबंटन को 27 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ातें हुए वर्ष 2012-13 में 14,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए आबंटन को 20 प्रतिशत बढ़ाते हुए 24,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया गया है ! साथ ही पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हुए उन्होंने पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि की धन राशि में लगभग 22 प्रतिशत वृद्धि करते हुए वर्ष 2012-13 में आबंटन राशि 12,040 करोड़ रुपए करने की वित्त मंत्री द्वारा घोषणा की गयी ! ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के अधीन आबंटन को बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया गया एवं सर्वशिक्षा अभियान के लिए 25,555 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गयी, जो विगत वर्ष की तुलना में 21.7 प्रतिशत अधिक है ! इसी प्रकार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के परिव्यय को 7860 करोड़ रुपए से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2012-13 में 9217 करोड़ रुपए करने का भी प्रस्ताव किया गया है !
भारत के राज्यों में हरित क्रांति लाने के उपायों के परिणामस्वरूप धान के उत्पादन और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है ! हरित क्रांति में भाग लेने वाले राज्यों ने 70 लाख टन चावल पैदा कर एक नयी मिशाल कायम की परिणामतः धान के उत्पादन को और बढ़ाने के लिए 400 करोड़ रुपए के आबंटन को बढ़ाकर वर्ष 2012-13 में 1000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया गया ! साथ ही राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विदर्भ सघन सिंचाई विकास कार्यक्रम के लिए 300 करोड़ रुपए आबंटित करने का भी प्रस्ताव किया गया ! राष्ट्रीय प्रोटीन पूरक आहार मिशन को सुदृढ़ बनाने और डेयरी क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व बैंक की सहायता से 2242 करोड़ रुपए की परियोजना की घोषणा एवं मछली पालन आदि के लिए वर्ष 2012-13 में परिव्यय को बढ़ाकर 500 करोड़ रुपए किया जाना स्वागत योग्य कदम है ! देश में सिंचाई सुविधा के विस्तार के लिए आबंटन को 13 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2012-13 के दौरान 14,242 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव एक सराहनीय कदम के साथ - साथ अपर्याप्त है !
देश में खुले आसमान के नीचे लाखो - करोड़ों टन सड़ते अनाजों को बचाने के लिए खाद्यान्नों की अतिरिक्त भंडारण क्षमता सृजित करने के उद्देश्य से भी कई उपायों की घोषणा तो की परन्तु उन भंडारण में बिजली पहुँचाने की व्यवस्था कैसे होगी यह नहीं बताया गया ! बहरहाल वित्त मंत्री द्वारा ग्रामीण भारत को सशक्त और सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया कदम अपर्याप्त परन्तु कुछ हद तक सराहनीय है बशर्ते इन घोषणाओं के पालन एवं उसमे पारदर्शिता हो ! भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी वर्तमान यूंपीए - 2 सरकार से ईमानदारी की अपेक्षा करना थोडा मुश्किल जरूर है परन्तु समुचित राशि अगर उन्ही के हाथो में पहुचे जिनके लिए आबंटित की गयी है तो निश्चित ही ग्रामीण भारत का जीवन आगामी वित्त वर्ष में थोडा सुधरेगा ! पर राजीव गुप्ता का विशेष लेख
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| तस्वीर भारत जल पोर्टल से साभार |
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| लेखक: राजीव गुप्ता |
यूरिया उत्पादन - क्षेत्र में अगले पांच वर्ष में आत्म निर्भरता का लक्ष्य स्वागत योग्य है क्योंकि अभी तक लगभग 25 प्रतिशत यूरिया आयत किया जाता है साथ ही उर्वरक सब्सिडी किसानो और रिटेलरों को सीधे देने की घोषणा भी स्वागत योग्य है क्योंकि अभी तक ऐसा माना जाता था कि उर्वरक सब्सिडी के 40 प्रतिशत से ही किसान लाभान्वित होते थे बाकी 60 प्रतिशत उर्वरक उद्योग उर्वरक सब्सिडी का लाभ उठाते थे ! सरकार ने नंदन नीलकणि जो कि आईटी नीति से संबंधित है की अध्यक्षता वाले कार्यबल की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए कहा है कि सब्सिडी का सीधा अंतरण किया जायेगा और इनके आधार पर एक मोबाइल आधारित उर्वरक प्रबंध प्रणाली तैयार की गई है जिसे 2012 में पूरे देश में लागू किया जाएगा ! उर्वरकों के दुरूपयोग में कमी और सब्सिडियों पर व्यय कम करने के उपायों से 12 करोड़ किसान परिवारों को लाभ होगा ! वित्त मंत्री ने आगामी वित्त वर्ष 2012 -2013 में कृषि क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए कई लुभावनी घोषणाएं की है जो कि स्वागत योग्य है !
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक - नाबार्ड
समन्वित ग्रामीण विकास एवं ग्रामीण क्षेत्र में संमृद्धि सुनिश्चित करने हेतु कृषि , लघु उद्योगों , कुटीर एवं ग्रामोद्योगों हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण शिल्प कलाओं के विकास में आने वाली ऋण समस्याओ के निपटान हेतु बनाई गयी इस योजना को वित्त मंत्री ने 10 ,000 हजार करोड़ रुपये प्रावधान किया है !
किसान क्रेडिट कार्ड - केसीसी
किसान क्रेडिट कार्ड - केसीसी का उद्देश्य मौसमी कृषि परिचालनो के लिए पर्याप्त , कम लागत पर और समय पर बिना किसी झंझट के अल्पावधि ऋण प्राप्त करने में कृषको को होने वाली कठिनाइयों को दूर करना है ! मौखिक पट्टेदार , काश्तकारों और बटाईदारों आसी सहित सभी कृषक वर्गों को इस योजना में शामिल किया गया है ! कृषि यंत्र , खाद व अन्य खेती से जुड़े समानो की खरीदारी के लिए उपयोग में आने वाला किसान क्रेडिट कार्ड से अब एटीएम की तर्ज पर नकदी भी प्राप्त किया जा सकेगा ! इससे किसानो को फसल के समय कृषि यंत्र, बीज, उर्वरक इत्यादि के लिए ऊंचे दरों पर ब्याज लेने की आवश्यकता नहीं होगी ! साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड की खरीद सीमा बढ़ाने पर भी सरकार विचार कर रही है ! गौरतलब है कि वर्तमान समय में किसानो को 25 ,000 रूपये तक की सीमा का किसान क्रेडिट कार्ड दिया जा रहा है !
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम - मनरेगा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम - मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले हर एकल परिवार जिसमे माता , पिता और उन पर आश्रित बच्चे शामिल है का साल में सौ दिन का अकुशल शारीरिक काम मांगने और प्राप्त करने का हक बनता है ! इसके अंतर्गत उपेक्षित समूहों को रोजगार प्रदान किया गया ! फरवरी 2011 तक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की भागीदारी क्रमशः 28 व 24 प्रतिशत रही वही महिलाओ की भागीदारी वित्त वर्ष 2010 -2011 में 47 प्रतिशत तक हो गयी ! ऐसा कहा जाता है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम - मनरेगा से पलायन रोकने में काफी मदद मिली है ! इस महत्वपूर्ण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के लिए आगामी वित्त वर्ष 2012 - 2013 में सरकार ने 33 ,000 हजार करोड़ रूपये देने का प्रावधान किया गया है ! हालाँकि पिछले वित्त वर्ष में मनरेगा को 40 ,000 करोड़ रूपये देने का प्रावधान किया गया था !
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन - एनआरएलएम
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिदेश में सभी निर्धन परिवारों तक पहुँच सुनिश्चित करना, उन्हें स्थाई जीविका के अवसर उपलब्ध करवाना और गरीबी से ऊपर आने तक उनका पोषण करना निहित है ! एनआरएलएम के माध्यम से बेरोजगार ग्रामीण निर्धन युवाओं के कौशल विकास तथा विशेष रूप से विकसित क्षेत्रों में नौकरियों में रोजगार उपलब्ध कराने अथवा लाभकारी स्वरोजगार एवं लघु उद्योगों में रोजगार उपलब्ध कराने का उद्देश्य है ! सरकार ने आगामी वित्त वर्ष 2012 -2013 एनआरएलएम को 34 प्रतिशत के बढ़ोत्तरी करते हुए 3915 करोड़ रूपये का प्रायोजन किया है !
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य योजना - एनआरएचएम
इस बार ग्रामीणों के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए वित्त मंत्री ने आगामी वित्त वर्ष 2012-2013 के लिए विगत वर्ष में किये गये 18,115 करोड़ रुपए आबंटन को बढ़ाकर 20,822 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया है!
बुनकर क्षेत्र को विशेष राहत
स्वचालित शटल-रहित करघों को 5 प्रतिशत के बुनियादी सीमा-शुल्क से पूर्ण छूट देने का प्रस्ताव किया गया है और स्वचालित रेशम चरखी और प्रसंस्करण मशीनरी और इनके पुर्जों को भी बुनियादी शुल्क से पूरी छूट दे दी गयी है ! एक तरफ जहां 5 प्रतिशत की बुनियादी सीमा-शुल्क की इस छूट और मौजूदा रियायती दर को केवल नई टेक्सटाईल मशीनरी तक सीमित रखा गया तो दूसरी तरफ सेकेंड हैंड मशीनरी के लिए 7.5 प्रतिशत के बुनियादी शुल्क का प्रस्ताव किया गया जिससे बुनकर समाज को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी !
इसके साथ - साथ ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता के लिए बजटीय आबंटन को 27 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ातें हुए वर्ष 2012-13 में 14,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए आबंटन को 20 प्रतिशत बढ़ाते हुए 24,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया गया है ! साथ ही पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हुए उन्होंने पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि की धन राशि में लगभग 22 प्रतिशत वृद्धि करते हुए वर्ष 2012-13 में आबंटन राशि 12,040 करोड़ रुपए करने की वित्त मंत्री द्वारा घोषणा की गयी ! ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के अधीन आबंटन को बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया गया एवं सर्वशिक्षा अभियान के लिए 25,555 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गयी, जो विगत वर्ष की तुलना में 21.7 प्रतिशत अधिक है ! इसी प्रकार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के परिव्यय को 7860 करोड़ रुपए से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2012-13 में 9217 करोड़ रुपए करने का भी प्रस्ताव किया गया है !
भारत के राज्यों में हरित क्रांति लाने के उपायों के परिणामस्वरूप धान के उत्पादन और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है ! हरित क्रांति में भाग लेने वाले राज्यों ने 70 लाख टन चावल पैदा कर एक नयी मिशाल कायम की परिणामतः धान के उत्पादन को और बढ़ाने के लिए 400 करोड़ रुपए के आबंटन को बढ़ाकर वर्ष 2012-13 में 1000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव किया गया ! साथ ही राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विदर्भ सघन सिंचाई विकास कार्यक्रम के लिए 300 करोड़ रुपए आबंटित करने का भी प्रस्ताव किया गया ! राष्ट्रीय प्रोटीन पूरक आहार मिशन को सुदृढ़ बनाने और डेयरी क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व बैंक की सहायता से 2242 करोड़ रुपए की परियोजना की घोषणा एवं मछली पालन आदि के लिए वर्ष 2012-13 में परिव्यय को बढ़ाकर 500 करोड़ रुपए किया जाना स्वागत योग्य कदम है ! देश में सिंचाई सुविधा के विस्तार के लिए आबंटन को 13 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2012-13 के दौरान 14,242 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव एक सराहनीय कदम के साथ - साथ अपर्याप्त है !
देश में खुले आसमान के नीचे लाखो - करोड़ों टन सड़ते अनाजों को बचाने के लिए खाद्यान्नों की अतिरिक्त भंडारण क्षमता सृजित करने के उद्देश्य से भी कई उपायों की घोषणा तो की परन्तु उन भंडारण में बिजली पहुँचाने की व्यवस्था कैसे होगी यह नहीं बताया गया ! बहरहाल वित्त मंत्री द्वारा ग्रामीण भारत को सशक्त और सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया कदम अपर्याप्त परन्तु कुछ हद तक सराहनीय है बशर्ते इन घोषणाओं के पालन एवं उसमे पारदर्शिता हो ! भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी वर्तमान यूंपीए - 2 सरकार से ईमानदारी की अपेक्षा करना थोडा मुश्किल जरूर है परन्तु समुचित राशि अगर उन्ही के हाथो में पहुचे जिनके लिए आबंटित की गयी है तो निश्चित ही ग्रामीण भारत का जीवन आगामी वित्त वर्ष में थोडा सुधरेगा ! पर राजीव गुप्ता का विशेष लेख
Tuesday, March 20, 2012
लोकसभा बहस में
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री का जवाब
अध्यक्ष महोदया, सदन के सम्मानित सांसदों के साथ मैं माननीय राष्ट्रपति को उनके अभिभाषण पर हार्दिक धन्यवाद देता हूं। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस काफी व्यापक रही और श्री जसवंत सिंहजी ने भी इसमें अपना योगदान दिया। मैं सभी पक्षों के सभी माननीय सदस्यों का शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने इस बहस में योगदान दिया। राष्ट्रपति का अभिभाषण उन उद्देश्यों और रोडमैप को तय करता है जिसे हमारी सरकार क्रियान्वित कर रही है और राष्ट्रपति के अभिभाषण में उल्लिखित चुनौतियों से निपटने के लिए प्रयासों में और अधिक तेजी लाई जाएगी। राष्ट्रपति के अभिभाषण के अनुच्छेद 10 में पांच महत्वपूर्ण चुनौतियों का जिक्र है जिसका सामना आज हमारा देश कर रहा है। ये इस प्रकार हैं-
1. हमारी आबादी की बडी संख्या के लिए आजीविका सुरक्षा हेतु प्रयत्न और हमारे देश से गरीबी, भूख और निरक्षरता को दूर करने के प्रयासों में योगदान;
2. त्वरित और व्यापक आधारित विकास तथा हमारे नागरिकों के लिए लाभकारी रोजगार सृजन के जरिए आर्थिक सुरक्षा को प्राप्त करना;
3. हमारे त्वरित विकास के लिए ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करना;
4. हमारे पारिस्थितिक और पर्यावरणीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाए बगैर विकासात्मक लक्ष्यों को पूरा करना और
5. न्यायसंगत, बहुल, धर्मनिरपेक्ष तथा समावेशी विकास के ढांचे के भीतर आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की गारंटी।
महोदया, यह पांच चुनौतियां उन सभी कार्यों को एकीकृत करती है जो बचे हुए आगामी ढाई वर्षों में हमारी सरकार के समक्ष है।
जहां तक अर्थव्यवस्था का संबंध है मेरे सहयोगी, माननीय वित्त मंत्री ने सदन पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया है और आर्थिक सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था की स्थिति का विस्तृत लेखा प्रस्तुत करता है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में हमारे समक्ष चुनौतियों का भी जिक्र किया। महोदया इन सभी मुद्दों पर अगले सप्ताह बजट पर आम बहस के दौरान विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसलिए देश की अर्थव्यवस्था के बारे में बोलते हुए मैं संक्षेप में इसके बारे में कहूंगा।
मुझे विश्वास है कि माननीय सांसद इस बात से अवगत हैं कि हम उस माहौल में अपना मार्ग तैयार कर रहे हैं जो आज के समय में सभी देशों के लिए कठिन समय है। वर्ष 2011-12 सभी देशों के लिए मुश्किल वर्ष रहा। सभी जगह वैश्विक विकास में गिरावट आई। औद्योगिक देशों ने 2011 में मात्र 1.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि की जो कि पिछले वर्ष की तुलना में आधी है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल जिसका हम सामना कर रहे हैं वह काफी अस्थिर है।
उत्तरी अफ्रीका और पश्चिम एशिया में हाइड्रोकार्बनों की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि का प्रभाव ऊर्वरकों, खाद्यान्नों पर पड़ा है और इससे हमारे भुगतान के संतुलन पर भी दबाव बना है।
महोदया, आर्थिक प्रदर्शन हालांकि उससे कम है जितनी हमने आशा की थी किंतु इस पृष्ठभूमि में लगभग सात प्रतिशत वृद्धि दर का हमारा आर्थिक प्रदर्शन सराहनीय है। यह सही है कि हम इसे स्वीकार्य नहीं मान सकते। अगले वर्ष में हमें इसमें सुधार लाने के लिए काम करना होगा और जल्द से जल्द उच्चतर विकास पथ पर लौटना होगा और ऐसा करते हुए हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम समावेशी विकास के साथ उपयुक्त कीमत स्थिरता को प्राप्त करने की ओर भी प्रगति करे। महोदया इन सबके लिए हमें सदन में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी राजनैतिक मत की व्यापक आधारित राष्ट्रीय सर्वसम्मति की आवश्यकता होगी। यह ऐसा अवसर है जब हमें एक राष्ट्र के रुप में संगठित होकर खड़ा होना होगा।
महोदया, 2008 से पहले पांच वर्षों तक हमने 9 प्रतिशत की दर से विकास किया और मुझे विश्वास है कि हम उस प्रकार की विकास दर को दोबारा हासिल कर सकते हैं और इसके लिए हमें मुश्किल निर्णयों पर एकमत होना होगा। यदि हम उस उद्देश्य में सफल होते हैं तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि एक आर्थिक शक्ति के रुप में भारत अपनी तरक्की को बरकरार रखे और उस अनवरत गरीबी को कम करने के लिए आर्थिक क्षमता को हासिल कर सके जिसका सामना हम करते रहे हैं और महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास तथा स्वच्छ पेयजल तथा स्वच्छता में खाईयों को भर सके। श्री जसवंत सिंह जी ने पेयजल आपूर्ति की समस्या का उल्लेख किया। मैं उन्हें आश्वस्त करता हूं कि हमारी सरकार इस बात को उच्च वरीयता देती है कि हमारे सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
महोदया, कुछ सदस्यों ने हमारे समाज के कमजोर वर्ग द्वारा झेली जा रही समस्याओं का जिक्र किया और मैं उनसे सहमत हूं कि हमें खासतौर पर हमारी जनसंख्या के कमजोर वर्ग जैसे कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों और अन्य सुविधाहीन समूहों को प्रभावित करने वाली विकास की खाइयों पर ध्यान देना होगा। मैं माननीय सांसदों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि हम इस महत्वपूर्ण कार्य पर पूरा ध्यान देंगे। महोदया, बारहवीं पंचवर्षीय योजना में तीव्र, सतत और अधिक समावेशी विकास के लिए विश्वसनीय कार्य योजना का खाका होगा। इसे वर्ष के मध्य में राष्ट्रीय विकास परिषद को प्रस्तुत किया जाएगा। मैं विस्तार में नहीं जाना चाहता लेकिन माननीय सांसदों को स्मरण कराना चाहूंगा कि हमारा मार्ग आसान नहीं है।
मुझे विश्वास है कि माननीय सदस्य यह मानेंगे कि गठबंधन सरकार होने के नाते कठिन निर्णय लेने का फैसला भी बेहद मुश्किल होता है और हमें आम सहमति को बनाए रखने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नीति बनाने का फैसला लेना होता है। रेल बजट की प्रस्तुति के मामले में ऐसी ही चुनौतियां सामने आ चुकी हैं। मैं वर्तमान जानकारी के बारे में सम्मानित सदस्यों को सूचित करना चाहूंगा कि पिछली देर रात मुझे श्री दिनेश त्रिवेदी का एक औपचारिक पत्र ई-मेल संदेश के माध्यम से प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने रेल मंत्री के पद से अपने इस्तीफे का प्रस्ताव भेजा है।
मैं श्री त्रिवेदी के इस इस्तीफे को स्वीकार करने की सिफारिश के साथ इसे राष्ट्रपति को भेजने का प्रस्ताव करता हूं। मुझे श्री त्रिवेदी के पद से जाने का खेद है। उन्होंने रेल बजट प्रस्तुत किया, जिसमें परिकल्पना 2020 को पूरा करने का वायदा किया गया है और इसकी रूपरेखा उनके उत्तराधिकारी द्वारा तैयार की गई। एक नए रेल मंत्री जल्द ही शपथ ले लेंगे। उन्हें हमारे रेलवे तंत्र के आधुनिकीकरण के चुनौतीपूर्ण कार्य को आगे ले जाने का कर्तव्य निभाना होगा।
सभापति महोदया, हमारे जैसे विशाल देश में जहां कुल श्रम शक्ति का 65 प्रतिशत हमारे देश के किसानों द्वारा संगठित किया जाता है, यह अनिवार्य है कि संसद और सरकार को भारत की कृषि स्थिति के बारे में चिंतित होना चाहिए। मैं सम्मानित सदस्यों की पीड़ा को बांटने में पूरी तरह से उनके साथ हूं, जब वे हमारे किसानों की आत्महत्याओं का उल्लेख करते हैं।
सदन ने आश्वासन दिया है कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे और उत्साह के साथ काम करेंगे कि हमारे देश में कोई भी किसान आत्महत्या के चरम स्तर तक जाने के लिए मजबूर न हो।
हमारी सरकार ने कृषि में सार्वजनिक निवेश को बढ़ाने के लिए, कृषि के विकास को उच्च प्राथमिकता पर रखा है, ताकि कृषि के विकास में तकनीकी रूप से और ज्यादा ध्यान दिए जाने को सुनिश्चित किया जा सके। इसके परिणामस्वरूप पिछले 5 वर्षों में कृषि उत्पादन की विकास दर 3.5 प्रतिशत वार्षिक के उच्च स्तर पर रही है। इस वर्ष हमें 250 मिलियन टन का रिकॉर्ड खाद्यान उत्पादन प्राप्त करने की उम्मीद है।
पिछले वर्ष राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय बागवानी अभियान और खाद्य सुरक्षा अभियान सभी ने कृषि के विकास में अधिक अनुकूल वातावरण बनाने में सहयोग किया है, लेकिन मैं अब भी यह कहना चाहूंगा कि इस दिशा में और अधिक किया जा सकता है। 12वीं पंचवर्षीय योजना में हम कृषि के विकास पर ज्यादा गहराई से ध्यान देंगे, क्योंकि हमारी सरकार की सोच में किसानों का हित सर्वोपरि है। यह प्राथमिकता का क्षेत्र होगा और हम पूर्ण परिश्रम के साथ इसका पालन करेंगे।
महोदया, देश में कीमतों की स्थिति के बारे में भी जिक्र किया गया। मैं ये मानता हूं कि पिछले दो वर्षों में कीमतें एक समस्या बन गई हैं। सौभाग्य से कुछ संकेत मिल रहे हैं कि कीमतें अब नियंत्रण में आ रही हैं, लेकिन हमें इसके लिए सतर्क रहना होगा। इस संदर्भ में, वित्त मंत्री के राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने हेतु किए गए प्रयास बहुत प्रासंगिक हैं। हमारे राजकोषीय घाटे में वर्ष 2008-09 में अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक परिदृश्यों में हुए बदलावों के कारण बढ़ोत्तरी हुई। हमें उम्मीद है कि वर्ष 2011-12 में राजकोषीय घाटे को एक उचित स्तर तक वापस लाने में सक्षम होंगे। वित्त मंत्री ने इस वर्ष 4.8 फीसदी राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया है। हालांकि ये अनुमान है कि राजकोषीय घाटा 5.9 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वित्त मंत्री ने अगले वर्ष में राजकोषीय घाटे को 5.1 प्रतिशत तक कम करने की दिशा में कार्य करने के प्रति सरकार की वचनबद्धता जताई है।
मैं कुछ अन्य महत्वपूर्ण मामलों जैसे नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर की स्थापना से संबंधित मुद्दे का भी उल्लेख करना चाहूंगा। नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर से संबंधित मुद्दे पर विचार-विमर्श करते समय श्री राजनाथ सिंह जी ने आतंकवाद की समस्या से निपटने में हमारी सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाया है।
महोदया, आतंकवाद के साथ-साथ वाम चरमपंथ से प्रभावी तरीके से निपटना हमारे देश के समक्ष दो बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा सभी विकास संबंधी उद्देश्य, खासतौर पर मध्य भारत के क्षेत्रों का विकास भी प्रमुख है। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार और झारखण्ड जैसे राज्य वाम चरमपंथ उग्रवाद से पीड़ित हैं। यदि हमें अपने विकास उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल होना है तो वाम चरमपंथियों और आतंकवाद पर पूरी तरह से नियंत्रण आवश्यक है।
महोदया, मैं सदन को विश्वास दिलाता हूं कि हमारी सरकार अपने नागरिकों की पूर्ण सुरक्षा के प्रति वचनबद्ध है और वह आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। वास्तव में एनसीटीसी की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मामले में चिंताएं जाहिर की गई हैं कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्रों का अतिक्रमण करने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह सुझाव दिया गया है कि नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर के संचालन से पूर्व सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए। नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर के गठन के प्रश्न पर पूर्व सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह की रिपोर्ट और द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों को सौंपने के बाद से विभिन्न मंचों पर चर्चा की गई है। 2001 में स्थापित बहु-एजेंसी केंद्र एनसीटीसी का एक अग्रगामी केन्द्र था और आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग हेतु एकल और प्रभावी केंद्र की आवश्यकता को देखते हुए आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठकों के दौरान विचार-विमर्श किया जा चुका है। जैसा कि हमारे कुछ सदस्यों ने इंगित किया है कि बहुत से मुख्यमंत्री इस मामले में आदेश जारी होने के बाद अपनी चिंताएं व्यक्त कर चुके हैं और मैं उनको फिर से आश्वस्त करना चाहता हूं कि अगले कदम उठाए जाने से पूर्व उनके साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। इस संदर्भ में 12 मार्च 2012 को राज्य सरकारों के प्रमुख सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ विचार-विमर्श किया जा चुका है।
आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक पहले 15 फरवरी, 2012 को आयोजित होनी थी पर चुनावों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। अब यह 16 अप्रैल, 2012 को आयोजित होगी। अत: अगले कदम उठाने से पहले पर्याप्त और सभी परामर्शों पर विचार किया जाएगा।
महोदया, मुझे लगता है कि एनसीटीसी का विचार तथा जिस ढंग से एनसीटीसी कार्य करेगा, यह दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं। आप सभी मानते हैं कि एनसीटीसी का उद्देश्य साधारण है तथा। और जिस ढंग से एनसीटीसी कार्य करेगा, उसपर मतभेद हो सकते हैं पर मुझे यकीन है कि बातचीत और विचार-विमर्श से इन मतभेदों को सुलझा लिया जाएगा तथा इस पर आम सहमति बन जाएगी।
महोदया, बहस के दौरान एक अन्य मुद्दा जो सामने आया वह श्रीलंका के तमिलों की स्थिति से संबंधित था। केंद्र सरकार सदस्यों द्वारा जताई गई चिंताओं और भावनाओं को पूरी तरह समझती है। श्रीलंका में संघर्ष के बाद हमारा ध्यान वहां के तमिल नागरिकों के कल्याण और उत्थान पर केंद्रित रहा है। उनका पुनर्वास हमारी सरकार की उच्च प्रथमिकता रही है। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा विदेश मंत्री के 14 मार्च, 2012 को दिए स्व संज्ञान बयान में उल्लिखित है। श्रीलंका सरकार के साथ हमारे रचनात्मक संबंध तथा महत्वपूर्ण सहायता कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप श्रीलंका के तमिल क्षेत्रों में जीवन सामान्य होना शुरू हुआ गया है। श्रीलंका सरकार द्वारा आपातकालीन नियमों को वापस लेने तथा श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्र में स्थानीय निकायों में चुनाव आयोजित करने से भी वहां प्रगति हुई है।
सदस्यों ने श्रीलंका में लंबे समय तक चले संघर्ष में मानव अधिकारों के उल्लंघन तथा जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद के चल रहे 19वें अधिवेशन में अमरीका द्वारा श्रीलंका में फिर से सामंजस्य बैठाने तथा जवाबदेही पर प्रस्ताव के मुद्दे को भी उठाया। भारत सरकार ने श्रीलंका सरकार को सामंजस्य की महत्ता के बारे में बताते हुए ज़ोर दिया है कि वह तमिल समुदायों की शिकायतों को गंभीरता से ले। इस संबंध में हमने श्रीलंका सरकार द्वारा नियुक्त किए गए आयोग की सिफारिशों को लागू करने पर ज़ोर दिया है। इन सिफारिशों में संघर्ष के ज़ख्मों पर मरहम लगाने तथा श्रीलंका में शांति और फिर से सामंजस्य कायम रखने के लिए विभिन्न उपाय सम्मिलित हैं।
हमने श्रीलंका सरकार से तमिल नेशनल अलाएंस सहित सभी दलों के साथ राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए श्रलंका के संविधान में 13वें संशोधन को लागू करने की प्रतिबद्धता पर कायम रहने के लिए कहा है ताकि शक्तियों के हस्तातंरण और राष्ट्रीय सामंजस्य को वास्तविक रूप से हासिल किया जा सके। हमें आशा है कि श्रीलंका सरकार इस मुद्दे की महत्ता को समझेगी तथा इस पर गंभीरता से कार्य करेगी। इस प्रक्रिया के जरिए हम उसके साथ संपर्क बनाए रखेंगे तथा उन्हें श्रीलंकाई तमिलों के मनोनीत प्रतिनिधियों के साथ इस पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
हमें जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद के चल रहे 19वें अधिवेश्न में अमरीका द्वारा पेश किए जाने वाले प्रस्ताव का अंतिम मसौदा प्राप्त नहीं हुआ है। मैं सदन को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट देना चाहते हैं।
श्री जसवंत सिंहजी ने गोरखालैंड दार्जिलिंग पर्वतीय परिषद का मुद्दा उठाया है। मैं इस सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमने इस समस्या का हल निकालने के लिए गंभीरता से कार्य किया है। इस संबंध में पश्चिम सरकार द्वारा किए गए योगदान को भी हम स्वीकारते हैं।
मैं इस सदन का और अधिक समय नहीं लेना चाहता। मैं सभी सदस्यों के साथ माननीय राष्ट्रपति को उनके अभिभाषण के लिए धन्यवाद देता हूं।{पीआईबी} 19-मार्च-2012 20:29 IST
अध्यक्ष महोदया, सदन के सम्मानित सांसदों के साथ मैं माननीय राष्ट्रपति को उनके अभिभाषण पर हार्दिक धन्यवाद देता हूं। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस काफी व्यापक रही और श्री जसवंत सिंहजी ने भी इसमें अपना योगदान दिया। मैं सभी पक्षों के सभी माननीय सदस्यों का शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने इस बहस में योगदान दिया। राष्ट्रपति का अभिभाषण उन उद्देश्यों और रोडमैप को तय करता है जिसे हमारी सरकार क्रियान्वित कर रही है और राष्ट्रपति के अभिभाषण में उल्लिखित चुनौतियों से निपटने के लिए प्रयासों में और अधिक तेजी लाई जाएगी। राष्ट्रपति के अभिभाषण के अनुच्छेद 10 में पांच महत्वपूर्ण चुनौतियों का जिक्र है जिसका सामना आज हमारा देश कर रहा है। ये इस प्रकार हैं-
1. हमारी आबादी की बडी संख्या के लिए आजीविका सुरक्षा हेतु प्रयत्न और हमारे देश से गरीबी, भूख और निरक्षरता को दूर करने के प्रयासों में योगदान;
2. त्वरित और व्यापक आधारित विकास तथा हमारे नागरिकों के लिए लाभकारी रोजगार सृजन के जरिए आर्थिक सुरक्षा को प्राप्त करना;
3. हमारे त्वरित विकास के लिए ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करना;
4. हमारे पारिस्थितिक और पर्यावरणीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाए बगैर विकासात्मक लक्ष्यों को पूरा करना और
5. न्यायसंगत, बहुल, धर्मनिरपेक्ष तथा समावेशी विकास के ढांचे के भीतर आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की गारंटी।
महोदया, यह पांच चुनौतियां उन सभी कार्यों को एकीकृत करती है जो बचे हुए आगामी ढाई वर्षों में हमारी सरकार के समक्ष है।
जहां तक अर्थव्यवस्था का संबंध है मेरे सहयोगी, माननीय वित्त मंत्री ने सदन पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया है और आर्थिक सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था की स्थिति का विस्तृत लेखा प्रस्तुत करता है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में हमारे समक्ष चुनौतियों का भी जिक्र किया। महोदया इन सभी मुद्दों पर अगले सप्ताह बजट पर आम बहस के दौरान विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसलिए देश की अर्थव्यवस्था के बारे में बोलते हुए मैं संक्षेप में इसके बारे में कहूंगा।
मुझे विश्वास है कि माननीय सांसद इस बात से अवगत हैं कि हम उस माहौल में अपना मार्ग तैयार कर रहे हैं जो आज के समय में सभी देशों के लिए कठिन समय है। वर्ष 2011-12 सभी देशों के लिए मुश्किल वर्ष रहा। सभी जगह वैश्विक विकास में गिरावट आई। औद्योगिक देशों ने 2011 में मात्र 1.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि की जो कि पिछले वर्ष की तुलना में आधी है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल जिसका हम सामना कर रहे हैं वह काफी अस्थिर है।
उत्तरी अफ्रीका और पश्चिम एशिया में हाइड्रोकार्बनों की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि का प्रभाव ऊर्वरकों, खाद्यान्नों पर पड़ा है और इससे हमारे भुगतान के संतुलन पर भी दबाव बना है।
महोदया, आर्थिक प्रदर्शन हालांकि उससे कम है जितनी हमने आशा की थी किंतु इस पृष्ठभूमि में लगभग सात प्रतिशत वृद्धि दर का हमारा आर्थिक प्रदर्शन सराहनीय है। यह सही है कि हम इसे स्वीकार्य नहीं मान सकते। अगले वर्ष में हमें इसमें सुधार लाने के लिए काम करना होगा और जल्द से जल्द उच्चतर विकास पथ पर लौटना होगा और ऐसा करते हुए हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम समावेशी विकास के साथ उपयुक्त कीमत स्थिरता को प्राप्त करने की ओर भी प्रगति करे। महोदया इन सबके लिए हमें सदन में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी राजनैतिक मत की व्यापक आधारित राष्ट्रीय सर्वसम्मति की आवश्यकता होगी। यह ऐसा अवसर है जब हमें एक राष्ट्र के रुप में संगठित होकर खड़ा होना होगा।
महोदया, 2008 से पहले पांच वर्षों तक हमने 9 प्रतिशत की दर से विकास किया और मुझे विश्वास है कि हम उस प्रकार की विकास दर को दोबारा हासिल कर सकते हैं और इसके लिए हमें मुश्किल निर्णयों पर एकमत होना होगा। यदि हम उस उद्देश्य में सफल होते हैं तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि एक आर्थिक शक्ति के रुप में भारत अपनी तरक्की को बरकरार रखे और उस अनवरत गरीबी को कम करने के लिए आर्थिक क्षमता को हासिल कर सके जिसका सामना हम करते रहे हैं और महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास तथा स्वच्छ पेयजल तथा स्वच्छता में खाईयों को भर सके। श्री जसवंत सिंह जी ने पेयजल आपूर्ति की समस्या का उल्लेख किया। मैं उन्हें आश्वस्त करता हूं कि हमारी सरकार इस बात को उच्च वरीयता देती है कि हमारे सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
महोदया, कुछ सदस्यों ने हमारे समाज के कमजोर वर्ग द्वारा झेली जा रही समस्याओं का जिक्र किया और मैं उनसे सहमत हूं कि हमें खासतौर पर हमारी जनसंख्या के कमजोर वर्ग जैसे कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों और अन्य सुविधाहीन समूहों को प्रभावित करने वाली विकास की खाइयों पर ध्यान देना होगा। मैं माननीय सांसदों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि हम इस महत्वपूर्ण कार्य पर पूरा ध्यान देंगे। महोदया, बारहवीं पंचवर्षीय योजना में तीव्र, सतत और अधिक समावेशी विकास के लिए विश्वसनीय कार्य योजना का खाका होगा। इसे वर्ष के मध्य में राष्ट्रीय विकास परिषद को प्रस्तुत किया जाएगा। मैं विस्तार में नहीं जाना चाहता लेकिन माननीय सांसदों को स्मरण कराना चाहूंगा कि हमारा मार्ग आसान नहीं है।
मुझे विश्वास है कि माननीय सदस्य यह मानेंगे कि गठबंधन सरकार होने के नाते कठिन निर्णय लेने का फैसला भी बेहद मुश्किल होता है और हमें आम सहमति को बनाए रखने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नीति बनाने का फैसला लेना होता है। रेल बजट की प्रस्तुति के मामले में ऐसी ही चुनौतियां सामने आ चुकी हैं। मैं वर्तमान जानकारी के बारे में सम्मानित सदस्यों को सूचित करना चाहूंगा कि पिछली देर रात मुझे श्री दिनेश त्रिवेदी का एक औपचारिक पत्र ई-मेल संदेश के माध्यम से प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने रेल मंत्री के पद से अपने इस्तीफे का प्रस्ताव भेजा है।
मैं श्री त्रिवेदी के इस इस्तीफे को स्वीकार करने की सिफारिश के साथ इसे राष्ट्रपति को भेजने का प्रस्ताव करता हूं। मुझे श्री त्रिवेदी के पद से जाने का खेद है। उन्होंने रेल बजट प्रस्तुत किया, जिसमें परिकल्पना 2020 को पूरा करने का वायदा किया गया है और इसकी रूपरेखा उनके उत्तराधिकारी द्वारा तैयार की गई। एक नए रेल मंत्री जल्द ही शपथ ले लेंगे। उन्हें हमारे रेलवे तंत्र के आधुनिकीकरण के चुनौतीपूर्ण कार्य को आगे ले जाने का कर्तव्य निभाना होगा।
सभापति महोदया, हमारे जैसे विशाल देश में जहां कुल श्रम शक्ति का 65 प्रतिशत हमारे देश के किसानों द्वारा संगठित किया जाता है, यह अनिवार्य है कि संसद और सरकार को भारत की कृषि स्थिति के बारे में चिंतित होना चाहिए। मैं सम्मानित सदस्यों की पीड़ा को बांटने में पूरी तरह से उनके साथ हूं, जब वे हमारे किसानों की आत्महत्याओं का उल्लेख करते हैं।
सदन ने आश्वासन दिया है कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे और उत्साह के साथ काम करेंगे कि हमारे देश में कोई भी किसान आत्महत्या के चरम स्तर तक जाने के लिए मजबूर न हो।
हमारी सरकार ने कृषि में सार्वजनिक निवेश को बढ़ाने के लिए, कृषि के विकास को उच्च प्राथमिकता पर रखा है, ताकि कृषि के विकास में तकनीकी रूप से और ज्यादा ध्यान दिए जाने को सुनिश्चित किया जा सके। इसके परिणामस्वरूप पिछले 5 वर्षों में कृषि उत्पादन की विकास दर 3.5 प्रतिशत वार्षिक के उच्च स्तर पर रही है। इस वर्ष हमें 250 मिलियन टन का रिकॉर्ड खाद्यान उत्पादन प्राप्त करने की उम्मीद है।
पिछले वर्ष राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय बागवानी अभियान और खाद्य सुरक्षा अभियान सभी ने कृषि के विकास में अधिक अनुकूल वातावरण बनाने में सहयोग किया है, लेकिन मैं अब भी यह कहना चाहूंगा कि इस दिशा में और अधिक किया जा सकता है। 12वीं पंचवर्षीय योजना में हम कृषि के विकास पर ज्यादा गहराई से ध्यान देंगे, क्योंकि हमारी सरकार की सोच में किसानों का हित सर्वोपरि है। यह प्राथमिकता का क्षेत्र होगा और हम पूर्ण परिश्रम के साथ इसका पालन करेंगे।
महोदया, देश में कीमतों की स्थिति के बारे में भी जिक्र किया गया। मैं ये मानता हूं कि पिछले दो वर्षों में कीमतें एक समस्या बन गई हैं। सौभाग्य से कुछ संकेत मिल रहे हैं कि कीमतें अब नियंत्रण में आ रही हैं, लेकिन हमें इसके लिए सतर्क रहना होगा। इस संदर्भ में, वित्त मंत्री के राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने हेतु किए गए प्रयास बहुत प्रासंगिक हैं। हमारे राजकोषीय घाटे में वर्ष 2008-09 में अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक परिदृश्यों में हुए बदलावों के कारण बढ़ोत्तरी हुई। हमें उम्मीद है कि वर्ष 2011-12 में राजकोषीय घाटे को एक उचित स्तर तक वापस लाने में सक्षम होंगे। वित्त मंत्री ने इस वर्ष 4.8 फीसदी राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया है। हालांकि ये अनुमान है कि राजकोषीय घाटा 5.9 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वित्त मंत्री ने अगले वर्ष में राजकोषीय घाटे को 5.1 प्रतिशत तक कम करने की दिशा में कार्य करने के प्रति सरकार की वचनबद्धता जताई है।
मैं कुछ अन्य महत्वपूर्ण मामलों जैसे नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर की स्थापना से संबंधित मुद्दे का भी उल्लेख करना चाहूंगा। नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर से संबंधित मुद्दे पर विचार-विमर्श करते समय श्री राजनाथ सिंह जी ने आतंकवाद की समस्या से निपटने में हमारी सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाया है।
महोदया, आतंकवाद के साथ-साथ वाम चरमपंथ से प्रभावी तरीके से निपटना हमारे देश के समक्ष दो बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा सभी विकास संबंधी उद्देश्य, खासतौर पर मध्य भारत के क्षेत्रों का विकास भी प्रमुख है। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार और झारखण्ड जैसे राज्य वाम चरमपंथ उग्रवाद से पीड़ित हैं। यदि हमें अपने विकास उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल होना है तो वाम चरमपंथियों और आतंकवाद पर पूरी तरह से नियंत्रण आवश्यक है।
महोदया, मैं सदन को विश्वास दिलाता हूं कि हमारी सरकार अपने नागरिकों की पूर्ण सुरक्षा के प्रति वचनबद्ध है और वह आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। वास्तव में एनसीटीसी की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मामले में चिंताएं जाहिर की गई हैं कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्रों का अतिक्रमण करने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह सुझाव दिया गया है कि नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर के संचालन से पूर्व सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए। नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर के गठन के प्रश्न पर पूर्व सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह की रिपोर्ट और द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों को सौंपने के बाद से विभिन्न मंचों पर चर्चा की गई है। 2001 में स्थापित बहु-एजेंसी केंद्र एनसीटीसी का एक अग्रगामी केन्द्र था और आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग हेतु एकल और प्रभावी केंद्र की आवश्यकता को देखते हुए आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठकों के दौरान विचार-विमर्श किया जा चुका है। जैसा कि हमारे कुछ सदस्यों ने इंगित किया है कि बहुत से मुख्यमंत्री इस मामले में आदेश जारी होने के बाद अपनी चिंताएं व्यक्त कर चुके हैं और मैं उनको फिर से आश्वस्त करना चाहता हूं कि अगले कदम उठाए जाने से पूर्व उनके साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। इस संदर्भ में 12 मार्च 2012 को राज्य सरकारों के प्रमुख सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ विचार-विमर्श किया जा चुका है।
आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक पहले 15 फरवरी, 2012 को आयोजित होनी थी पर चुनावों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। अब यह 16 अप्रैल, 2012 को आयोजित होगी। अत: अगले कदम उठाने से पहले पर्याप्त और सभी परामर्शों पर विचार किया जाएगा।
महोदया, मुझे लगता है कि एनसीटीसी का विचार तथा जिस ढंग से एनसीटीसी कार्य करेगा, यह दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं। आप सभी मानते हैं कि एनसीटीसी का उद्देश्य साधारण है तथा। और जिस ढंग से एनसीटीसी कार्य करेगा, उसपर मतभेद हो सकते हैं पर मुझे यकीन है कि बातचीत और विचार-विमर्श से इन मतभेदों को सुलझा लिया जाएगा तथा इस पर आम सहमति बन जाएगी।
महोदया, बहस के दौरान एक अन्य मुद्दा जो सामने आया वह श्रीलंका के तमिलों की स्थिति से संबंधित था। केंद्र सरकार सदस्यों द्वारा जताई गई चिंताओं और भावनाओं को पूरी तरह समझती है। श्रीलंका में संघर्ष के बाद हमारा ध्यान वहां के तमिल नागरिकों के कल्याण और उत्थान पर केंद्रित रहा है। उनका पुनर्वास हमारी सरकार की उच्च प्रथमिकता रही है। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा विदेश मंत्री के 14 मार्च, 2012 को दिए स्व संज्ञान बयान में उल्लिखित है। श्रीलंका सरकार के साथ हमारे रचनात्मक संबंध तथा महत्वपूर्ण सहायता कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप श्रीलंका के तमिल क्षेत्रों में जीवन सामान्य होना शुरू हुआ गया है। श्रीलंका सरकार द्वारा आपातकालीन नियमों को वापस लेने तथा श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्र में स्थानीय निकायों में चुनाव आयोजित करने से भी वहां प्रगति हुई है।
सदस्यों ने श्रीलंका में लंबे समय तक चले संघर्ष में मानव अधिकारों के उल्लंघन तथा जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद के चल रहे 19वें अधिवेशन में अमरीका द्वारा श्रीलंका में फिर से सामंजस्य बैठाने तथा जवाबदेही पर प्रस्ताव के मुद्दे को भी उठाया। भारत सरकार ने श्रीलंका सरकार को सामंजस्य की महत्ता के बारे में बताते हुए ज़ोर दिया है कि वह तमिल समुदायों की शिकायतों को गंभीरता से ले। इस संबंध में हमने श्रीलंका सरकार द्वारा नियुक्त किए गए आयोग की सिफारिशों को लागू करने पर ज़ोर दिया है। इन सिफारिशों में संघर्ष के ज़ख्मों पर मरहम लगाने तथा श्रीलंका में शांति और फिर से सामंजस्य कायम रखने के लिए विभिन्न उपाय सम्मिलित हैं।
हमने श्रीलंका सरकार से तमिल नेशनल अलाएंस सहित सभी दलों के साथ राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए श्रलंका के संविधान में 13वें संशोधन को लागू करने की प्रतिबद्धता पर कायम रहने के लिए कहा है ताकि शक्तियों के हस्तातंरण और राष्ट्रीय सामंजस्य को वास्तविक रूप से हासिल किया जा सके। हमें आशा है कि श्रीलंका सरकार इस मुद्दे की महत्ता को समझेगी तथा इस पर गंभीरता से कार्य करेगी। इस प्रक्रिया के जरिए हम उसके साथ संपर्क बनाए रखेंगे तथा उन्हें श्रीलंकाई तमिलों के मनोनीत प्रतिनिधियों के साथ इस पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
हमें जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद के चल रहे 19वें अधिवेश्न में अमरीका द्वारा पेश किए जाने वाले प्रस्ताव का अंतिम मसौदा प्राप्त नहीं हुआ है। मैं सदन को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट देना चाहते हैं।
श्री जसवंत सिंहजी ने गोरखालैंड दार्जिलिंग पर्वतीय परिषद का मुद्दा उठाया है। मैं इस सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमने इस समस्या का हल निकालने के लिए गंभीरता से कार्य किया है। इस संबंध में पश्चिम सरकार द्वारा किए गए योगदान को भी हम स्वीकारते हैं।
मैं इस सदन का और अधिक समय नहीं लेना चाहता। मैं सभी सदस्यों के साथ माननीय राष्ट्रपति को उनके अभिभाषण के लिए धन्यवाद देता हूं।{पीआईबी} 19-मार्च-2012 20:29 IST
Tuesday, March 06, 2012
कपास के निर्यात पर प्रतिबंध
प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से आगामी आदेशों तक अधिसूचित
डीजीएफटी ने 5 मार्च 2012 से कपास के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से आगामी आदेशों तक प्रतिबंध को अधिसूचित कर दिया है। 4 मार्च 2012 तक कपास के 94.75 लाख गट्ठरों का निर्यात किया जा चुका है।
फरवरी 2012 में भारत का कपास निर्यात 91 लाख गट्ठर तक पहुंचा जबकि निर्यात के लिए कपास के 120 लाख गट्ठरों का पंजीकरण किया गया है। छह मार्च 2012 तक बाजार में कपास आवक 245 लाख गट्ठर तक पहुंच चुकी है। बाजार में कपास आगमन के करीब 50 प्रतिशत का कपास निर्यात के लिए पंजीकरण हो चुका है।
बाजारों में कपास की मात्र 25 प्रतिशत आवक और कपास सीजन से करीब सात माह पहले का परिदृश्य घरेलू उद्योगों के लिए कपास की कमी, कपास के घरेलू मूल्यों में अत्यधिक वृद्धि और वर्ष 2012 में कपास भंडारों को पूर्ण करने में टैक्सटाइल मिलों की असमर्थता जैसी कमियों की ओर संकेत करता है।
टैक्सटाइल नीति के अंतर्गत मूल्य श्रृंखला के प्रतिस्पर्द्धी हितों को संतुलित करने का प्रयास किया गया है। अप्रैल 2010 में अनौपचारिक मंत्री समूह ने ये तय किया कि 50 लाख गट्ठरों को बनाये रखना चाहिए और इससे ज्यादा के कपास भंडार का निर्यात करना चाहिए।
भारतीय कपास निगम यह सलाह दे चुका है कि किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों के होने पर भारत की सभी मंडियों में खरीद की जाएगी। टैक्सटाइल मिलों ने देश भर में खरीद अभियानों की शुरूआत भी कर दी है। 06-मार्च-2012 20:27 IST
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| तस्वीर साभार कोटन मार्किट न्यूज़ |
फरवरी 2012 में भारत का कपास निर्यात 91 लाख गट्ठर तक पहुंचा जबकि निर्यात के लिए कपास के 120 लाख गट्ठरों का पंजीकरण किया गया है। छह मार्च 2012 तक बाजार में कपास आवक 245 लाख गट्ठर तक पहुंच चुकी है। बाजार में कपास आगमन के करीब 50 प्रतिशत का कपास निर्यात के लिए पंजीकरण हो चुका है।
बाजारों में कपास की मात्र 25 प्रतिशत आवक और कपास सीजन से करीब सात माह पहले का परिदृश्य घरेलू उद्योगों के लिए कपास की कमी, कपास के घरेलू मूल्यों में अत्यधिक वृद्धि और वर्ष 2012 में कपास भंडारों को पूर्ण करने में टैक्सटाइल मिलों की असमर्थता जैसी कमियों की ओर संकेत करता है।
टैक्सटाइल नीति के अंतर्गत मूल्य श्रृंखला के प्रतिस्पर्द्धी हितों को संतुलित करने का प्रयास किया गया है। अप्रैल 2010 में अनौपचारिक मंत्री समूह ने ये तय किया कि 50 लाख गट्ठरों को बनाये रखना चाहिए और इससे ज्यादा के कपास भंडार का निर्यात करना चाहिए।
भारतीय कपास निगम यह सलाह दे चुका है कि किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों के होने पर भारत की सभी मंडियों में खरीद की जाएगी। टैक्सटाइल मिलों ने देश भर में खरीद अभियानों की शुरूआत भी कर दी है। 06-मार्च-2012 20:27 IST
Saturday, February 04, 2012
सृजन-प्रक्रिया पूर्णतया यांत्रिकी और........
| रसायनिकी के सूत्रों की तरह अकवितामय Sarojini Sahoo ### अमृत-प्रतीक्षा ###; |
रसायनिकी के सूत्रों की तरह अकवितामय
पूछो, प्रसव-पीडा से छटपटाती उस प्रसूता को,
पूछो, दूरबीन से झाँक रहे खगोलशास्त्र के उन वैज्ञानिकों को,
पूछो, एपीस्टीमोलॉजी, ब्रीच, कन्ट्रेक्शन, सर्विक्स
प्लेसेन्टा को लेकर व्यस्त डॉक्टरों से उस कविता का पता।
इतना होने के बावजूद
गर्भमुक्त प्रसूता की आँखों के किसी कोने में आँसू
और होठों पर थिरकती संतृप्ति भरी हँसी।
कविता पैदा होती है रात के आकाश में
कविता उपजती है पहले सृजन
नवजात शिशु के हँसने और रोने में।
कविता क्या होती है ?
पूछो, रसायन प्रयोगशाला में काम कर रहे
अनभिज्ञ नवागत छात्रों को
पूछो, गर्भस्थ शिशु का पेट में पहले प्रहार
से भयभीत और उल्लासित माँ को
पूछो, प्लेनेटोरियम में टिकट बेचते
लड़कों से,
उस कविता का पता।
प्रज्ञा-चेतना से बाहर निकल कर
देखो, सृजन-प्रक्रिया पूर्णतया यांत्रिक
मगर सृष्टि कवितामय।
पूछो, प्रसव-पीडा से छटपटाती उस प्रसूता को,
पूछो, दूरबीन से झाँक रहे खगोलशास्त्र के उन वैज्ञानिकों को,
पूछो, एपीस्टीमोलॉजी, ब्रीच, कन्ट्रेक्शन, सर्विक्स
प्लेसेन्टा को लेकर व्यस्त डॉक्टरों से उस कविता का पता।
इतना होने के बावजूद
गर्भमुक्त प्रसूता की आँखों के किसी कोने में आँसू
और होठों पर थिरकती संतृप्ति भरी हँसी।
कविता पैदा होती है रात के आकाश में
कविता उपजती है पहले सृजन
नवजात शिशु के हँसने और रोने में।
कविता क्या होती है ?
पूछो, रसायन प्रयोगशाला में काम कर रहे
अनभिज्ञ नवागत छात्रों को
पूछो, गर्भस्थ शिशु का पेट में पहले प्रहार
से भयभीत और उल्लासित माँ को
पूछो, प्लेनेटोरियम में टिकट बेचते
लड़कों से,
उस कविता का पता।
प्रज्ञा-चेतना से बाहर निकल कर
देखो, सृजन-प्रक्रिया पूर्णतया यांत्रिक
मगर सृष्टि कवितामय।
{8:53am Feb 4, 2012
( An excerpt from my short story ‘Amrit Pratiksha’, included in my short stories collection “ Rape Tatha Anya Kahaniyan”, ISBN : 978 81 7028 921 0, published by Rajpal & Sons, Delhi.)
RAPE TATHA ANYA KAHINYAN by Sarojini Sahoo :: 978 81 7028 921 0
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Saturday, January 21, 2012
उन्नति के पथ पर अग्रसर
राष्ट्रीय डिजाइन और उत्पाद विकास केन्द्र-आर के श्रीवास्तव*
राष्ट्रीय डिजाइन और उत्पाद विकास केन्द्र (एनसीडीपीडी) की स्थापना 1999 में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) द्वारा की गई थी। राष्ट्रीय डिजाइन और उत्पाद विकास केन्द्र बोर्ड का प्रतिनिधित्व प्रतिष्ठित निर्यातक, नीति-निर्धारक और व्यापार तथा उद्योग के प्रतिष्ठित व्यक्ति करते हैं। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) एनसीडीपीडी के पदेन अध्यक्ष होते हैं। यह केन्द्र सदस्य आधारित संस्था है जो प्रमुख तौर पर हस्तशिल्प क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है। डिजाइन/उत्पाद विकास और प्रौद्योगिकी के कार्यक्षेत्रों में ठोस माल क्षेत्र के अंतर को पूरा करने के उद्देश्य के साथ इसकी शुरुआत की गई थी। समूहों के लिए पैन इंडिया आधार पर डिजाइन और उत्पाद विकास गतिविधियों को पूरा करने के लिए यह केन्द्र विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के करीबी सानिध्य में कार्य करता है। इस केन्द्र के तहत बहुत सारे राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय डिजाइनर विशेषीकृत डिजाइन/उत्पाद सेवाओं की संपूर्ण श्रेणी प्रदान करने के लिए कार्यरत है।
सेवाएं डिजाइन और उत्पाद विकास, प्रदर्शनी डिजाइन, ग्राफिक-डिजाइन और पैकेज डिजाइन जैसे कई क्षेत्रों में यह केन्द्र अपनी सेवाएं प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त एनसीडीपीडी सतत आपूर्ति प्रबंधन श्रृंखला का सृजन भी करता है। एनसीडीपीडी में गुणवत्ता और प्रौद्योगिकी उन्नयन के साथ ही डिजाइनरों की मदद से डिजाइनों को उत्पादों में तब्दील भी किया जाता है। डिजाइन केन्द्रों, उत्पाद केन्द्रों/संकुलों पर डिजाइन बैंक की स्थापना के जरिए एनसीडीपीडी ढांचागत सहयोग प्रदान करता है। डिजाइन और उत्पाद विकास को बढ़ावा देने के लिए यह औद्योगिक समूहों को शुरु से अंत तक डिजाइन सेवाएं प्रदान करता है। इस केन्द्र में बडे पैमाने पर उत्पादन के लिए मूलभूत कार्यों में मशीनीकरण के लिए तकनीकी सहायता भी उपलब्ध है।
उद्देश्यः- निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति करना एनसीडीपीडी का लक्ष्य है
· अंतर-राष्ट्रीय खरीदारों की बदलती हुई पसंद और डिजाइन अवधारणाओं को पूरा करना।
· हस्तशिल्प निर्यातक समुदाय को डिजाइनों के बारे में बदलते हुए प्रचलन और आगे आने वाले बदलावों के संबंध में नियमित तौर पर समय-समय पर जानकारी उपलब्ध कराना।
· भारतीय डिजाइनों की विशिष्टता का सृजन और इसे सुदृढ़ बनाना
· प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होने वाली आधुनिक तकनीकों के बदलते वैश्विक परिदृश्य के बारे में अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराना।
· उत्पाद विकास और उन्नयन गुणवत्ता को समर्थन देना।
क्षमता/कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन
एनसीडीपीडी को मानव संसाधन विकास कार्यक्रम की क्षमता/कौशल विकास के उन्नयन का जिम्मा सौंपा गया है ताकि वैश्विक बाज़ार खास तौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रतिस्पर्धी बाज़ार में मुकाबला किया जा सके। इस योजना के तहत महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं :-
· कुल 500 कार्यक्रमों का संचालन किया गया।
· पिछले दो वर्षों में 11,000 कारीगरों/शिल्पकारों को प्रशिक्षित किया गया।
· पूर्वोत्तर क्षेत्र सहित समूचे भारत में 30 से भी अधिक शिल्प संकुलों को समाविष्ट किया गया।
· समूचे भारत में 200 से भी अधिक संकायों/स्रोत संपन्न व्यक्तियों के साथ गठजोड़।
· अच्छी तरह से संरचित पाठ्यक्रम
· एक से पांच के पैमाने पर कार्यक्रम को 4.5 अंक प्रदान किया गया।
भारतीय उपमहाद्वीप में सतत रोज़गार के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच पटसन (जूट) क्षेत्र में सहमति-ज्ञापन पर हस्ताक्षर
पटसन क्षेत्र में उत्पाद और डिजाइन विकास द्वारा भारत तथा बांग्लादेश में सतत मूल्य आधारित रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एनसीडीपीडी ने इस वर्ष यूएनटीएडी के तहत बांग्लादेश में अंतर-राष्ट्रीय जूट स्टडी ग्रुप (आईजेएसजी) के साथ गठजोड और समन्वय किया। इस सहमति ज्ञापन से पटसन से संबंधित कार्यशालाओं, बैठकों और प्रकाशनों आदि के द्वारा सतत रोज़गार और आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच अनुसंधान और डिजाइन गठजोड़ गतिविधियों को बल मिलेगा। इस सहमति ज्ञापन के जरिए जूट से संबंधित विविध उत्पाद क्षेत्रों के उद्यमियों, निर्यातकों तथा कारीगरों आदि के लिए आईजीएसजे नवीन/आकर्षक डिजाइनों और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों आदि में सहयोग देगा तथा एनसीडीपीडी जूट के क्षेत्र में संयुक्त गतिविधियों के विकास और क्रियान्वयन के लिए डिजाइनरों और विशेषज्ञों को उपलब्ध कराएगा।
भारत-अंतर-राष्ट्रीय व्यापार मेले में भागीदारी
14-27 नवंबर के बीच आयोजित भारत अंतर-राष्ट्रीय व्यापार मेले के लिए इस वर्ष का विषय था- "इंडियन हैंडिक्राफ्ट- द मैदिक ऑफ द गिफ्टेड हैंड्स"। इसे ध्यान में रखते हुए एनसीडीपीडी ने अंतर-राष्ट्रीय व्यापार मेले में भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए थीम पैवेलियन की स्थापना की। इसके तहत वैश्विक फलक पर भारतीय हस्तशिल्प की विस्तृत श्रृंखला की प्रस्तुति की गई। इस प्रदर्शनी के ज़रिए हस्तशिल्पियों/कारीगरों और छोटे निर्माताओं को अपने लिए बेहतर बाजार संबंधों का निर्माण करने में मदद मिली। एनसीडीपीडी के पैवेलियन की ओर प्रतिदिन एक लाख से अधिक लोग आकर्षित हुए।।
गणतंत्र दिवस परेड-2012 में झांकी का प्रस्तुतिकरण
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा एनसीडीपीडी को गणतंत्र दिवस परेड-2012 में हस्तशिल्प पर झांकी प्रस्तुत करने के लिए केन्द्रीय एजेंसी के रुप में नियुक्त किया गया है। झांकी के लिए चयनित विषय "प्राचीन से नवीनः भारतीय वस्त्र और हस्तशिल्प क्षेत्र में विकास" है।
भविष्य के लिए रणनीतियां
· नवीन उत्पाद श्रृंखला
Ø सौ से भी अधिक नवीन उत्पाद श्रृंखला को प्रस्तुत करना।
Ø स्थापित उत्पाद समूहों को नवीन बाज़ारों में शुरु करना।
· उत्पाद श्रृंखला में विविधता लाना
Ø सजावटी उपकरणों के रुप में भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देना
Ø गिफ्ट के रुप में हस्तशिल्प की अवधारणा को बढ़ावा देना
Ø डिजाइन की प्रमुखता के साथ अभिनव उत्पाद समूह
· गुणवत्ता में सुधार लाना
Ø वैधानिक आवश्यकताएं/फैक्टरी अनुपालन/सामाजिक अंकेक्षण/प्रमाणपत्रों
Ø परीक्षण और फैक्टरी प्रमाणन/क्रय-विक्रय और समर्थन सेवाएं
एनसीडीपीडी कारीगरों और शिल्पकारों की कौशल क्षमता/विकास के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में भी यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा। साथ ही भारतीय हस्तशिल्प में डिजाइन और उत्पाद विकास के नवीन आयामों को विकसित करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
***
*लेखक राष्ट्रीय डिजाइन और उत्पाद विकास केन्द्र में कार्यकारी निदेशक हैं
***
राष्ट्रीय डिजाइन और उत्पाद विकास केन्द्र (एनसीडीपीडी) की स्थापना 1999 में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) द्वारा की गई थी। राष्ट्रीय डिजाइन और उत्पाद विकास केन्द्र बोर्ड का प्रतिनिधित्व प्रतिष्ठित निर्यातक, नीति-निर्धारक और व्यापार तथा उद्योग के प्रतिष्ठित व्यक्ति करते हैं। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) एनसीडीपीडी के पदेन अध्यक्ष होते हैं। यह केन्द्र सदस्य आधारित संस्था है जो प्रमुख तौर पर हस्तशिल्प क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है। डिजाइन/उत्पाद विकास और प्रौद्योगिकी के कार्यक्षेत्रों में ठोस माल क्षेत्र के अंतर को पूरा करने के उद्देश्य के साथ इसकी शुरुआत की गई थी। समूहों के लिए पैन इंडिया आधार पर डिजाइन और उत्पाद विकास गतिविधियों को पूरा करने के लिए यह केन्द्र विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के करीबी सानिध्य में कार्य करता है। इस केन्द्र के तहत बहुत सारे राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय डिजाइनर विशेषीकृत डिजाइन/उत्पाद सेवाओं की संपूर्ण श्रेणी प्रदान करने के लिए कार्यरत है।
सेवाएं डिजाइन और उत्पाद विकास, प्रदर्शनी डिजाइन, ग्राफिक-डिजाइन और पैकेज डिजाइन जैसे कई क्षेत्रों में यह केन्द्र अपनी सेवाएं प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त एनसीडीपीडी सतत आपूर्ति प्रबंधन श्रृंखला का सृजन भी करता है। एनसीडीपीडी में गुणवत्ता और प्रौद्योगिकी उन्नयन के साथ ही डिजाइनरों की मदद से डिजाइनों को उत्पादों में तब्दील भी किया जाता है। डिजाइन केन्द्रों, उत्पाद केन्द्रों/संकुलों पर डिजाइन बैंक की स्थापना के जरिए एनसीडीपीडी ढांचागत सहयोग प्रदान करता है। डिजाइन और उत्पाद विकास को बढ़ावा देने के लिए यह औद्योगिक समूहों को शुरु से अंत तक डिजाइन सेवाएं प्रदान करता है। इस केन्द्र में बडे पैमाने पर उत्पादन के लिए मूलभूत कार्यों में मशीनीकरण के लिए तकनीकी सहायता भी उपलब्ध है।
उद्देश्यः- निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति करना एनसीडीपीडी का लक्ष्य है
· अंतर-राष्ट्रीय खरीदारों की बदलती हुई पसंद और डिजाइन अवधारणाओं को पूरा करना।
· हस्तशिल्प निर्यातक समुदाय को डिजाइनों के बारे में बदलते हुए प्रचलन और आगे आने वाले बदलावों के संबंध में नियमित तौर पर समय-समय पर जानकारी उपलब्ध कराना।
· भारतीय डिजाइनों की विशिष्टता का सृजन और इसे सुदृढ़ बनाना
· प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होने वाली आधुनिक तकनीकों के बदलते वैश्विक परिदृश्य के बारे में अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराना।
· उत्पाद विकास और उन्नयन गुणवत्ता को समर्थन देना।
क्षमता/कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन
एनसीडीपीडी को मानव संसाधन विकास कार्यक्रम की क्षमता/कौशल विकास के उन्नयन का जिम्मा सौंपा गया है ताकि वैश्विक बाज़ार खास तौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रतिस्पर्धी बाज़ार में मुकाबला किया जा सके। इस योजना के तहत महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं :-
· कुल 500 कार्यक्रमों का संचालन किया गया।
· पिछले दो वर्षों में 11,000 कारीगरों/शिल्पकारों को प्रशिक्षित किया गया।
· पूर्वोत्तर क्षेत्र सहित समूचे भारत में 30 से भी अधिक शिल्प संकुलों को समाविष्ट किया गया।
· समूचे भारत में 200 से भी अधिक संकायों/स्रोत संपन्न व्यक्तियों के साथ गठजोड़।
· अच्छी तरह से संरचित पाठ्यक्रम
· एक से पांच के पैमाने पर कार्यक्रम को 4.5 अंक प्रदान किया गया।
भारतीय उपमहाद्वीप में सतत रोज़गार के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच पटसन (जूट) क्षेत्र में सहमति-ज्ञापन पर हस्ताक्षर
पटसन क्षेत्र में उत्पाद और डिजाइन विकास द्वारा भारत तथा बांग्लादेश में सतत मूल्य आधारित रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एनसीडीपीडी ने इस वर्ष यूएनटीएडी के तहत बांग्लादेश में अंतर-राष्ट्रीय जूट स्टडी ग्रुप (आईजेएसजी) के साथ गठजोड और समन्वय किया। इस सहमति ज्ञापन से पटसन से संबंधित कार्यशालाओं, बैठकों और प्रकाशनों आदि के द्वारा सतत रोज़गार और आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच अनुसंधान और डिजाइन गठजोड़ गतिविधियों को बल मिलेगा। इस सहमति ज्ञापन के जरिए जूट से संबंधित विविध उत्पाद क्षेत्रों के उद्यमियों, निर्यातकों तथा कारीगरों आदि के लिए आईजीएसजे नवीन/आकर्षक डिजाइनों और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों आदि में सहयोग देगा तथा एनसीडीपीडी जूट के क्षेत्र में संयुक्त गतिविधियों के विकास और क्रियान्वयन के लिए डिजाइनरों और विशेषज्ञों को उपलब्ध कराएगा।
भारत-अंतर-राष्ट्रीय व्यापार मेले में भागीदारी
14-27 नवंबर के बीच आयोजित भारत अंतर-राष्ट्रीय व्यापार मेले के लिए इस वर्ष का विषय था- "इंडियन हैंडिक्राफ्ट- द मैदिक ऑफ द गिफ्टेड हैंड्स"। इसे ध्यान में रखते हुए एनसीडीपीडी ने अंतर-राष्ट्रीय व्यापार मेले में भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए थीम पैवेलियन की स्थापना की। इसके तहत वैश्विक फलक पर भारतीय हस्तशिल्प की विस्तृत श्रृंखला की प्रस्तुति की गई। इस प्रदर्शनी के ज़रिए हस्तशिल्पियों/कारीगरों और छोटे निर्माताओं को अपने लिए बेहतर बाजार संबंधों का निर्माण करने में मदद मिली। एनसीडीपीडी के पैवेलियन की ओर प्रतिदिन एक लाख से अधिक लोग आकर्षित हुए।।
गणतंत्र दिवस परेड-2012 में झांकी का प्रस्तुतिकरण
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा एनसीडीपीडी को गणतंत्र दिवस परेड-2012 में हस्तशिल्प पर झांकी प्रस्तुत करने के लिए केन्द्रीय एजेंसी के रुप में नियुक्त किया गया है। झांकी के लिए चयनित विषय "प्राचीन से नवीनः भारतीय वस्त्र और हस्तशिल्प क्षेत्र में विकास" है।
भविष्य के लिए रणनीतियां
· नवीन उत्पाद श्रृंखला
Ø सौ से भी अधिक नवीन उत्पाद श्रृंखला को प्रस्तुत करना।
Ø स्थापित उत्पाद समूहों को नवीन बाज़ारों में शुरु करना।
· उत्पाद श्रृंखला में विविधता लाना
Ø सजावटी उपकरणों के रुप में भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देना
Ø गिफ्ट के रुप में हस्तशिल्प की अवधारणा को बढ़ावा देना
Ø डिजाइन की प्रमुखता के साथ अभिनव उत्पाद समूह
· गुणवत्ता में सुधार लाना
Ø वैधानिक आवश्यकताएं/फैक्टरी अनुपालन/सामाजिक अंकेक्षण/प्रमाणपत्रों
Ø परीक्षण और फैक्टरी प्रमाणन/क्रय-विक्रय और समर्थन सेवाएं
एनसीडीपीडी कारीगरों और शिल्पकारों की कौशल क्षमता/विकास के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में भी यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा। साथ ही भारतीय हस्तशिल्प में डिजाइन और उत्पाद विकास के नवीन आयामों को विकसित करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
***
*लेखक राष्ट्रीय डिजाइन और उत्पाद विकास केन्द्र में कार्यकारी निदेशक हैं
***
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Friday, January 20, 2012
पहल लाई परिवर्तन
विशेष लेख *किशन रतनानी
हम उत्साहित और आशापूर्ण हैं लेकिन साथ ही सतर्क और चौकन्ने भी
महात्मा गांधी का कहना था कि अपने प्रयोजन में दृढ़ विश्वास रखने वाला इतिहास के रूख को बदल सकता है।
सामाजिक परिवर्तन भी तभी आते हैं जब हम प्रयोजन में दृढ़ विश्वास रखें। दृढ़ विश्वास के साथ-साथ सक्रियता और सकारात्मकता के साथ पहल करें। ऐसी पहल परिवर्तन लाती है।
वर्ष 2011 में स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसे कई परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिसका श्रेय चुनौतियों को समझने और सुलझाने की सटीक, बहुस्तरीय और अभिनव नीति तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा की गई पहल को जाता है।
एक साल तक पोलियो मुक्त भारत ऐसा ही एक परिवर्तन है जो नजर आ रहा है। 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के पांचला ब्लाक में एक बालिका पोलियो से ग्रस्त पायी गई थी।
अगले तीन वर्षों तक पोलियो का पूरी तरह उन्मूलन अब हमारा प्रमुख प्रयोजन है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद ने कहा- ‘‘हम उत्साहित और आशापूर्ण हैं, लेकिन साथ ही सतर्क और चौकन्ने भी।’’
हर बार जब राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान चलाया गया, इसके हर दौर में 24 लाख वैक्सीनेटर, डेढ़ लाख सुपरवाईजर और 20 करोड़ से ज्यादा लोगों ने ये सुनिश्चित किया कि 17 करोड़ 20 लाख बच्चों को पोलियो की दवा पिला दी जाए। चलती-फिरती टीमों का अपूर्व योगदान भी महत्वपूर्ण रहा।
पिछले दशक के दौरान एचआईवी से ग्रस्त नए लोगों की वार्षिक संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम और उसकी रोकथाम के उपायों के अधीन विभिन्न कार्यक्रमों के प्रभाव का यह एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण साक्ष्य है।
12 जनवरी को केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के रेड रिबन एक्सप्रेस के तीसरे चरण का शुभारंभ किया। रेड रिबन एक्सप्रेस की मल्टी-मीडिया और बहु-क्षेत्रीय सामूहिक जागरूकता परियोजना एक नई पहल है और अपने तरह के एक अद्वितीय उदाहरण के रूप में विश्व भर में इसकी सराहना की गई है। पहली दिसम्बर, 2007 को रेड रिबन एक्सप्रेस के पहले चरण की शुरूआत हुई थी, जो जानकारी जन-जन तक पहुंचाने पर केन्द्रित था। वर्ष 2009 में इसका दूसरा चरण आरंभ किया गया था, जो सलाह और उपचार सेवाओं पर आधारित था। तीसरे चरण में सूचना शिक्षा और संचार वाहनों तथा लोक कला दलों के जरिये विशेषकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों में प्रदर्शनियों के साथ सूक्ष्म आयोजना पर जोर दिया जा रहा है, ताकि यह रेलगाड़ी जिन जि़लों से होकर गुजरेगी उसके आसपास की जनता को इसके बारे में जानकारी मिल सके।
· संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग कार्यक्रम के तहत रोग की पहचान दर 75% तक और पूर्ण इलाज दर 85% तक आ गई है। क्षय रोग से होने वाली मृत्यु के मामलों में भी 43% की कमी आई है।
· नया डॉट्स लोगो शुरू किया गया- डॉट्स : पूरा कोर्स, पक्का इलाज’’ यह क्षय रोग और इसके आविर्भाव के बारे में उभरती चुनौतियों की प्रतिक्रिया का द्योतक है।
प्रजनन व शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ ऐसे ही परिवर्तन हुए हैं :-
· नवजात मृत्यु अनुपात वर्ष 2005 के 58 से घटकर 2009 में प्रति हजार नवजात 50 पर आ गयी है।
· मातृ मृत्यु दर भी वर्ष 2004-2006 में 254 प्रति एक लाख प्रसव से घटकर वर्ष 2007-09 के दौरान 212 प्रति एक लाख प्रसव पर आ गई है।
· प्रजनन दर 2005 में 2.9 से घटकर 2009 में 2.6 पर आ गई है।
· व्यापक प्रतिरक्षण कार्यक्रम( यूआईपी) के तहत देश के 12-24 माह के 61 प्रतिशत बच्चे 6 बीमारियों का टीका ले चुके हैं।
· देश में संस्थागत प्रसव, वर्ष 2007-08 के दौरान 47 %(डीएलएचएस III 2007-08) से बढ़कर 2009 में 72.9 % हो गया है जैसा कि कवरेज इवेल्यूएशन सर्वे (सीईएस-2009) में पाया गया।
· व्यापक प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत हेपाटाइटिस बी का टीका और खसरा के दूसरे डोज का टीका लगाना शुरू किया गया है। साल 2011-12 के दौरान हेपाटाइटिस 'बी' का टीका अब पूरे देश में दिया जा रहा है। तमिलनाडु और केरल में 15 लाख बच्चों को प्रायोगिक तौर पर पेंटावैलेंट टीका दिया जा रहा है जो पांच बीमारियों डिप्थीरिया, कुकुरखांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी और हेमोफीलयस एन्फलुएंजा 'बी' से बच्चों को सुरक्षा प्रदान करता है।
· जच्चा -बच्चा की सुरक्षा के लिए 1 जून 2011 को जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम शुरू किया गया जिसके तहत जन स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रसव कराने वाली सभी गर्भवती महिलाओं का प्रसव मुफ्त होगा चाहे वह सीजेरियन ही क्यों न हो। इसके तहत मुफ्त दवा, रक्त, भोजन और आने-जाने का नि:शुल्क परिवहन उपलब्ध करवाया जा रहा हैं। जन्म के बाद 30 दिनों तक नवजात शिशु को संबंधित संस्थान में लाने ले जाने के लिए भी ये व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी। 35 में से 32 राज्यों और सभी केंद्र शासित-प्रदेशों में यह योजना लागू है।
· स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (एमसीटीएस) नाम से एक ई-गवर्नेंस (ई-गवर्नेंस इनिशिएटिव) पहल की है जिसका उद्देश्य सभी गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की जानकारी जुटाना है ताकि जच्चा-बच्चा भी महिला के गर्भधारण से लेकर प्रसव के 42 दिन बाद और नवजात बच्चों के मामले में उसके 5 वर्ष तक का होने तक उपचार और प्रतिरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। 11 दिसंबर 2011 तक इस प्रणाली के तहत एक करोड़ 27 लाख 41 हजार 402 महिलाओं तथा 69 लाख 55 हजार 165 बच्चों का पंजीकरण कराया गया है।
· स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा एक संयुक्त जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया गया है। जिससे गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रसव पूर्व से जन्म के बाद तक निगरानी रखी जा सके।
· 2005-06 के दौरान जननी सुरक्षा योजना के तहत 7.39 लाख गर्भवती महिलाओं को फायदा पहुंचा। 2011 में लगभग एक करोड़ 13 लाख गर्भवती महिलाओं को नकद राशि देकर मदद दी गई। इस योजना पर वर्ष 2005-06 में जहां 38 करोड़ रूपये खर्च हुए वहीं वर्ष 2010-11 में यह राशि बढ़कर 1618 करोड़ रूपये तक पहुंच गई है।
· ''आशा'' नाम से भी एक नई योजना चल रही है जो 42 दिनों तक नवजात के घर जाकर उनके स्वास्थ्य पर नजर रखती है।
· किशोरियों में मासिक धर्म के दौरान स्वास्थ्य की सावधानी के लिए खास कर आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में सब्सिडी पर नैप्किन उपलब्ध कराना शुरू किया गया है। इसके पहले चरण में 20 राज्यों के 152 जिलों में 10-19 वर्ष की 14 लाख किशोरियों को इसका लाभ मिला है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना भी एक अभिनव पहल के रूप में सामने है। अप्रैल 2008 से अमल में आई इस योजना में 31 दिसंबर 2011 तक 2 करोड़ 57 लाख स्मार्ट कार्ड चलन में थे और 24 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 29 लाख 25 हजार से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती होने की सुविधा का लाभ ले पाए। इसमें बिल्डिंग व निर्माण मजदूर, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून से लाभान्वित ग्रामीण, रेहड़ी पटरी वाले, बीड़ी मजदूर व घरेलू नौकर भी शामिल किए गए हैं।
परिवर्तन के कई पैमाने हैं। सबसे बेहतर परिवर्तन वो होता है जिसे हम महसूस करें, हम सभी महसूस करें। परिवर्तन समाज, देश और दुनिया को नजर आए। यह एक सामूहिक प्रयास है जिसमें सरकार, समाज, संस्था और व्यक्ति के रूप में हम सबकी सक्रिय साझेदारी और सकारात्मक सोच जरूरी है। ऐसी पहल परिवर्तन की पराकाष्ठा तक पहुँचे, आइए कामना करें। ****
*लेखक पत्र सूचना कार्यालय नई दिल्ली में उपनिदेशक (मीडिया एवं संचार)हैं।
हम उत्साहित और आशापूर्ण हैं लेकिन साथ ही सतर्क और चौकन्ने भी
महात्मा गांधी का कहना था कि अपने प्रयोजन में दृढ़ विश्वास रखने वाला इतिहास के रूख को बदल सकता है।
सामाजिक परिवर्तन भी तभी आते हैं जब हम प्रयोजन में दृढ़ विश्वास रखें। दृढ़ विश्वास के साथ-साथ सक्रियता और सकारात्मकता के साथ पहल करें। ऐसी पहल परिवर्तन लाती है।
वर्ष 2011 में स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसे कई परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिसका श्रेय चुनौतियों को समझने और सुलझाने की सटीक, बहुस्तरीय और अभिनव नीति तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा की गई पहल को जाता है।
एक साल तक पोलियो मुक्त भारत ऐसा ही एक परिवर्तन है जो नजर आ रहा है। 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के पांचला ब्लाक में एक बालिका पोलियो से ग्रस्त पायी गई थी।
अगले तीन वर्षों तक पोलियो का पूरी तरह उन्मूलन अब हमारा प्रमुख प्रयोजन है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद ने कहा- ‘‘हम उत्साहित और आशापूर्ण हैं, लेकिन साथ ही सतर्क और चौकन्ने भी।’’
हर बार जब राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान चलाया गया, इसके हर दौर में 24 लाख वैक्सीनेटर, डेढ़ लाख सुपरवाईजर और 20 करोड़ से ज्यादा लोगों ने ये सुनिश्चित किया कि 17 करोड़ 20 लाख बच्चों को पोलियो की दवा पिला दी जाए। चलती-फिरती टीमों का अपूर्व योगदान भी महत्वपूर्ण रहा।
पिछले दशक के दौरान एचआईवी से ग्रस्त नए लोगों की वार्षिक संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम और उसकी रोकथाम के उपायों के अधीन विभिन्न कार्यक्रमों के प्रभाव का यह एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण साक्ष्य है।
12 जनवरी को केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के रेड रिबन एक्सप्रेस के तीसरे चरण का शुभारंभ किया। रेड रिबन एक्सप्रेस की मल्टी-मीडिया और बहु-क्षेत्रीय सामूहिक जागरूकता परियोजना एक नई पहल है और अपने तरह के एक अद्वितीय उदाहरण के रूप में विश्व भर में इसकी सराहना की गई है। पहली दिसम्बर, 2007 को रेड रिबन एक्सप्रेस के पहले चरण की शुरूआत हुई थी, जो जानकारी जन-जन तक पहुंचाने पर केन्द्रित था। वर्ष 2009 में इसका दूसरा चरण आरंभ किया गया था, जो सलाह और उपचार सेवाओं पर आधारित था। तीसरे चरण में सूचना शिक्षा और संचार वाहनों तथा लोक कला दलों के जरिये विशेषकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों में प्रदर्शनियों के साथ सूक्ष्म आयोजना पर जोर दिया जा रहा है, ताकि यह रेलगाड़ी जिन जि़लों से होकर गुजरेगी उसके आसपास की जनता को इसके बारे में जानकारी मिल सके।
· संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग कार्यक्रम के तहत रोग की पहचान दर 75% तक और पूर्ण इलाज दर 85% तक आ गई है। क्षय रोग से होने वाली मृत्यु के मामलों में भी 43% की कमी आई है।
· नया डॉट्स लोगो शुरू किया गया- डॉट्स : पूरा कोर्स, पक्का इलाज’’ यह क्षय रोग और इसके आविर्भाव के बारे में उभरती चुनौतियों की प्रतिक्रिया का द्योतक है।
प्रजनन व शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ ऐसे ही परिवर्तन हुए हैं :-
· नवजात मृत्यु अनुपात वर्ष 2005 के 58 से घटकर 2009 में प्रति हजार नवजात 50 पर आ गयी है।
· मातृ मृत्यु दर भी वर्ष 2004-2006 में 254 प्रति एक लाख प्रसव से घटकर वर्ष 2007-09 के दौरान 212 प्रति एक लाख प्रसव पर आ गई है।
· प्रजनन दर 2005 में 2.9 से घटकर 2009 में 2.6 पर आ गई है।
· व्यापक प्रतिरक्षण कार्यक्रम( यूआईपी) के तहत देश के 12-24 माह के 61 प्रतिशत बच्चे 6 बीमारियों का टीका ले चुके हैं।
· देश में संस्थागत प्रसव, वर्ष 2007-08 के दौरान 47 %(डीएलएचएस III 2007-08) से बढ़कर 2009 में 72.9 % हो गया है जैसा कि कवरेज इवेल्यूएशन सर्वे (सीईएस-2009) में पाया गया।
· व्यापक प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत हेपाटाइटिस बी का टीका और खसरा के दूसरे डोज का टीका लगाना शुरू किया गया है। साल 2011-12 के दौरान हेपाटाइटिस 'बी' का टीका अब पूरे देश में दिया जा रहा है। तमिलनाडु और केरल में 15 लाख बच्चों को प्रायोगिक तौर पर पेंटावैलेंट टीका दिया जा रहा है जो पांच बीमारियों डिप्थीरिया, कुकुरखांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी और हेमोफीलयस एन्फलुएंजा 'बी' से बच्चों को सुरक्षा प्रदान करता है।
· जच्चा -बच्चा की सुरक्षा के लिए 1 जून 2011 को जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम शुरू किया गया जिसके तहत जन स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रसव कराने वाली सभी गर्भवती महिलाओं का प्रसव मुफ्त होगा चाहे वह सीजेरियन ही क्यों न हो। इसके तहत मुफ्त दवा, रक्त, भोजन और आने-जाने का नि:शुल्क परिवहन उपलब्ध करवाया जा रहा हैं। जन्म के बाद 30 दिनों तक नवजात शिशु को संबंधित संस्थान में लाने ले जाने के लिए भी ये व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी। 35 में से 32 राज्यों और सभी केंद्र शासित-प्रदेशों में यह योजना लागू है।
· स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (एमसीटीएस) नाम से एक ई-गवर्नेंस (ई-गवर्नेंस इनिशिएटिव) पहल की है जिसका उद्देश्य सभी गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की जानकारी जुटाना है ताकि जच्चा-बच्चा भी महिला के गर्भधारण से लेकर प्रसव के 42 दिन बाद और नवजात बच्चों के मामले में उसके 5 वर्ष तक का होने तक उपचार और प्रतिरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। 11 दिसंबर 2011 तक इस प्रणाली के तहत एक करोड़ 27 लाख 41 हजार 402 महिलाओं तथा 69 लाख 55 हजार 165 बच्चों का पंजीकरण कराया गया है।
· स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा एक संयुक्त जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया गया है। जिससे गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रसव पूर्व से जन्म के बाद तक निगरानी रखी जा सके।
· 2005-06 के दौरान जननी सुरक्षा योजना के तहत 7.39 लाख गर्भवती महिलाओं को फायदा पहुंचा। 2011 में लगभग एक करोड़ 13 लाख गर्भवती महिलाओं को नकद राशि देकर मदद दी गई। इस योजना पर वर्ष 2005-06 में जहां 38 करोड़ रूपये खर्च हुए वहीं वर्ष 2010-11 में यह राशि बढ़कर 1618 करोड़ रूपये तक पहुंच गई है।
· ''आशा'' नाम से भी एक नई योजना चल रही है जो 42 दिनों तक नवजात के घर जाकर उनके स्वास्थ्य पर नजर रखती है।
· किशोरियों में मासिक धर्म के दौरान स्वास्थ्य की सावधानी के लिए खास कर आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में सब्सिडी पर नैप्किन उपलब्ध कराना शुरू किया गया है। इसके पहले चरण में 20 राज्यों के 152 जिलों में 10-19 वर्ष की 14 लाख किशोरियों को इसका लाभ मिला है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना भी एक अभिनव पहल के रूप में सामने है। अप्रैल 2008 से अमल में आई इस योजना में 31 दिसंबर 2011 तक 2 करोड़ 57 लाख स्मार्ट कार्ड चलन में थे और 24 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 29 लाख 25 हजार से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती होने की सुविधा का लाभ ले पाए। इसमें बिल्डिंग व निर्माण मजदूर, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून से लाभान्वित ग्रामीण, रेहड़ी पटरी वाले, बीड़ी मजदूर व घरेलू नौकर भी शामिल किए गए हैं।
परिवर्तन के कई पैमाने हैं। सबसे बेहतर परिवर्तन वो होता है जिसे हम महसूस करें, हम सभी महसूस करें। परिवर्तन समाज, देश और दुनिया को नजर आए। यह एक सामूहिक प्रयास है जिसमें सरकार, समाज, संस्था और व्यक्ति के रूप में हम सबकी सक्रिय साझेदारी और सकारात्मक सोच जरूरी है। ऐसी पहल परिवर्तन की पराकाष्ठा तक पहुँचे, आइए कामना करें। ****
*लेखक पत्र सूचना कार्यालय नई दिल्ली में उपनिदेशक (मीडिया एवं संचार)हैं।
Thursday, January 19, 2012
पर्यटन पर विशेष लेख
अतुल्य भारत - नये क्षितिज
भारत में पर्यटन लगातार बढ़ रहा है, पर्यटकों की संख्या की दृष्टि से और विदेशी पर्यटकों से होने वाली आय की दृष्टि से भी। वर्ष 2009 के मुकाबले 2010 में विदेशी पर्यटकों की संख्या में 11.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2011 में जनवरी से नवम्बर तक की अवधि के दौरान पर्यटकों की संख्या में और 9.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई । वर्ष 2009 में विदेशी मुद्रा से रुपयों में जो आय हुई, उसके मुकाबले वर्ष 2010 में 18.1 प्रतिशत अधिक आय हुई और वर्ष 2011 में जनवरी से नवम्बर तक की अवधि में पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले इस आय में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2010 के दौरान घरेलू पर्यटकों की संख्या 74 करोड़ 2 लाख से अधिक रही, जो इससे पिछले वर्ष के मुकाबले 10.7 प्रतिशत अधिक है।
पर्यटन मंत्रालय का लक्ष्य 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक विश्व में पर्यटकों की संख्या में भारत के हिस्से को 1 प्रतिशत बढ़ाना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मंत्रालय ने महत्वपूर्ण नगरों और पर्यटकों की अधिक संख्या वाले नगरों से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कार्यक्रम चलाए हैं।
मंत्रालय ने 4 से 14 अगस्त 2011 तक जिनेवा में आयोजित जिनेवा उत्सव में भाग लिया, जिसमें भारत सम्मानित अतिथि देश था। उत्सव में एक भारतीय ग्राम का निर्माण किया गया, जहां योग, स्वास्थ्य, संस्कृति और भारतीय व्यंजनों आदि की प्रस्तुतियां की गईं। भारत की उल्लेखनीय मौजूदगी और इसके शानदार कार्यक्रम के परिणाम स्वरूप जिनेवा उत्सव बहुत सफल रहा और वहां लगभग 18 लाख स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय दर्शक पहुंचे। 6 से 9 सितम्बर 2011 तक भारत में नई दिल्ली में पाटा (प्रशांत एशिया यात्रा एसोसियेशन) ट्रैवल मार्ट 2011 का आयोजन किया। इस मार्ट में 302 खरीदारों और 625 विक्रेताओं के अलावा दुनियाभर से पर्यटन अधिकरणों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटन व्यापार और अतिथि संगठनों तथा मीडिया आदि के प्रतिनिधि आये। मंत्रालय ने 7 से 10 नवम्बर 2011 तक लंदन में आयोजित वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट 2011 में भी सफलतापूर्वक भाग लिया। वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट 2011, अंतर्राष्ट्रीय यात्रा उद्योग का प्रमुख कारोबार मंच है। अतुल्य भारत ब्रांड के अंतर्गत मंत्रालय ने दुनिया भर के प्रमुख टेलीविजन चैनलों के माध्यम से एक विश्वव्यापी टेलीविजन अभियान (ग्लोबल टेलीविजन कैम्पेन) के साथ-साथ यूरोप एशिया प्रशांत और अमरीकी प्रदेशों में ग्लोबल प्रिंट कैम्पेन भी चलाया है। अतुल्य भारत अभियानों को विश्वव्यापी सफलता मिली है। और पिछले वर्षों में कई अंतर्राष्ट्रीय प्रशस्तियां और पुरस्कार भी मिले हैं।
वर्ष 2011 के दौरान अतुल्य भारत अभियान को जो महत्वपूर्ण पुरस्कार मिले, वे हैं :- पाटा गोल्ड अवार्ड 2011, ‘एडवेन्चर डाउन अंडर’ नाम से विज्ञापन अभियान के लिए, पाटा गोल्ड अवार्ड 2011, ‘इंडिया इज ऑसम’ नाम की प्रमोशनल वीडियो फिल्म के लिए और वर्ल्ड ट्रैवल अवार्ड 2011, ‘लीडिंग डेस्टीनेशन’ और ‘लीडिंग टूरिज़्म बोर्ड’ अभियानों के लिए।
पर्यटन मंत्रालय पर्यटन के विकास और संवर्धन क लिए समन्वित प्रयास करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार के अन्य मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य संबद्ध पक्षों के साथ भी मिलकर उपाय कर रहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा हीरे जवाहरात एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के साथ इसने सफलतापूर्वक कार्य किया है। पर्यटन मंत्रालय ने ‘एक्सपीरियंस इंडिया सोसाइटी’ के साथ सहमति पत्र का भी नवीकरण किया है। यह संस्था पर्यटन मंत्रालय के साथ सरकार – निजी भागीदारी के जरिए भारत की छवि को निखारने वाली प्रमुख होटल श्रृंखलाओं और टूर ऑपरेटरों की संस्था है।
पर्यटन मंत्रालय के प्रयासों से पर्यटन क्षेत्र के लिए एक अंतर- मंत्रालय समन्वय समिति भी बनाई गई है, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव हैं। यह समिति देश में पर्यटन के विकास केलिए विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित मुद्दों को तथा पर्यटन क्षेत्र की उद्योग एसोसियशनों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को निपटाएगी।
एक महत्वपूर्ण पहलू, जिसका हमारे देश में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू पर्यटन पर प्रभाव पड़ता है, वह है महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर स्वास्थ्य और सफाई की असंतोषजनक व्यवस्था । मंत्रालय ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के अंतर्गत पर्यटन स्थलों पर सफाई के लिए एक व्यापक नीति बनाई है। स्वच्छता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इस अभियान के अंतर्गत जागरूकता लाने के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रदर्शन और नियमन के तरीके अपनाए जाएंगे। यह अभियान केन्द्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों, कार्पोरेट क्षेत्र, यात्रा व्यापार संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों, शिक्षा संस्थाओं, मीडिया और अन्य संबद्ध पक्षों के साथ मिलकर चलाया जाएगा।
(पर्यटन मंत्रालय से प्राप्त संदर्भ सामग्री के आधार पर)
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भारत में पर्यटन लगातार बढ़ रहा है, पर्यटकों की संख्या की दृष्टि से और विदेशी पर्यटकों से होने वाली आय की दृष्टि से भी। वर्ष 2009 के मुकाबले 2010 में विदेशी पर्यटकों की संख्या में 11.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2011 में जनवरी से नवम्बर तक की अवधि के दौरान पर्यटकों की संख्या में और 9.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई । वर्ष 2009 में विदेशी मुद्रा से रुपयों में जो आय हुई, उसके मुकाबले वर्ष 2010 में 18.1 प्रतिशत अधिक आय हुई और वर्ष 2011 में जनवरी से नवम्बर तक की अवधि में पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले इस आय में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2010 के दौरान घरेलू पर्यटकों की संख्या 74 करोड़ 2 लाख से अधिक रही, जो इससे पिछले वर्ष के मुकाबले 10.7 प्रतिशत अधिक है।
पर्यटन मंत्रालय का लक्ष्य 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक विश्व में पर्यटकों की संख्या में भारत के हिस्से को 1 प्रतिशत बढ़ाना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मंत्रालय ने महत्वपूर्ण नगरों और पर्यटकों की अधिक संख्या वाले नगरों से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कार्यक्रम चलाए हैं।
मंत्रालय ने 4 से 14 अगस्त 2011 तक जिनेवा में आयोजित जिनेवा उत्सव में भाग लिया, जिसमें भारत सम्मानित अतिथि देश था। उत्सव में एक भारतीय ग्राम का निर्माण किया गया, जहां योग, स्वास्थ्य, संस्कृति और भारतीय व्यंजनों आदि की प्रस्तुतियां की गईं। भारत की उल्लेखनीय मौजूदगी और इसके शानदार कार्यक्रम के परिणाम स्वरूप जिनेवा उत्सव बहुत सफल रहा और वहां लगभग 18 लाख स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय दर्शक पहुंचे। 6 से 9 सितम्बर 2011 तक भारत में नई दिल्ली में पाटा (प्रशांत एशिया यात्रा एसोसियेशन) ट्रैवल मार्ट 2011 का आयोजन किया। इस मार्ट में 302 खरीदारों और 625 विक्रेताओं के अलावा दुनियाभर से पर्यटन अधिकरणों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटन व्यापार और अतिथि संगठनों तथा मीडिया आदि के प्रतिनिधि आये। मंत्रालय ने 7 से 10 नवम्बर 2011 तक लंदन में आयोजित वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट 2011 में भी सफलतापूर्वक भाग लिया। वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट 2011, अंतर्राष्ट्रीय यात्रा उद्योग का प्रमुख कारोबार मंच है। अतुल्य भारत ब्रांड के अंतर्गत मंत्रालय ने दुनिया भर के प्रमुख टेलीविजन चैनलों के माध्यम से एक विश्वव्यापी टेलीविजन अभियान (ग्लोबल टेलीविजन कैम्पेन) के साथ-साथ यूरोप एशिया प्रशांत और अमरीकी प्रदेशों में ग्लोबल प्रिंट कैम्पेन भी चलाया है। अतुल्य भारत अभियानों को विश्वव्यापी सफलता मिली है। और पिछले वर्षों में कई अंतर्राष्ट्रीय प्रशस्तियां और पुरस्कार भी मिले हैं।
वर्ष 2011 के दौरान अतुल्य भारत अभियान को जो महत्वपूर्ण पुरस्कार मिले, वे हैं :- पाटा गोल्ड अवार्ड 2011, ‘एडवेन्चर डाउन अंडर’ नाम से विज्ञापन अभियान के लिए, पाटा गोल्ड अवार्ड 2011, ‘इंडिया इज ऑसम’ नाम की प्रमोशनल वीडियो फिल्म के लिए और वर्ल्ड ट्रैवल अवार्ड 2011, ‘लीडिंग डेस्टीनेशन’ और ‘लीडिंग टूरिज़्म बोर्ड’ अभियानों के लिए।
पर्यटन मंत्रालय पर्यटन के विकास और संवर्धन क लिए समन्वित प्रयास करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार के अन्य मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य संबद्ध पक्षों के साथ भी मिलकर उपाय कर रहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा हीरे जवाहरात एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के साथ इसने सफलतापूर्वक कार्य किया है। पर्यटन मंत्रालय ने ‘एक्सपीरियंस इंडिया सोसाइटी’ के साथ सहमति पत्र का भी नवीकरण किया है। यह संस्था पर्यटन मंत्रालय के साथ सरकार – निजी भागीदारी के जरिए भारत की छवि को निखारने वाली प्रमुख होटल श्रृंखलाओं और टूर ऑपरेटरों की संस्था है।
पर्यटन मंत्रालय के प्रयासों से पर्यटन क्षेत्र के लिए एक अंतर- मंत्रालय समन्वय समिति भी बनाई गई है, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव हैं। यह समिति देश में पर्यटन के विकास केलिए विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित मुद्दों को तथा पर्यटन क्षेत्र की उद्योग एसोसियशनों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को निपटाएगी।
एक महत्वपूर्ण पहलू, जिसका हमारे देश में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू पर्यटन पर प्रभाव पड़ता है, वह है महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर स्वास्थ्य और सफाई की असंतोषजनक व्यवस्था । मंत्रालय ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के अंतर्गत पर्यटन स्थलों पर सफाई के लिए एक व्यापक नीति बनाई है। स्वच्छता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इस अभियान के अंतर्गत जागरूकता लाने के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रदर्शन और नियमन के तरीके अपनाए जाएंगे। यह अभियान केन्द्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों, कार्पोरेट क्षेत्र, यात्रा व्यापार संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों, शिक्षा संस्थाओं, मीडिया और अन्य संबद्ध पक्षों के साथ मिलकर चलाया जाएगा।
(पर्यटन मंत्रालय से प्राप्त संदर्भ सामग्री के आधार पर)
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Tuesday, January 17, 2012
करूर में आयुष कैम्प
चिकित्सा की अजब वैकल्पिक प्रणालियां-डॉ. के. परमेश्वरन*
केरल में वैद्यों (आयुर्वेद चिकित्सकों) के प्रसिद्ध परिवार के बारे में किंवदन्ती है, इन्हें अलाथर नाम्बी कहा जाता है। अलाथर नाम्बियों का परम्परागत घर पलक्कड़ के आधुनिक जिले के एक भाग में है। उनके आठ चिकित्सक परिवार हैं, उनका परिवार चिकित्सा की प्रत्येक शाखा में विशिष्ट क्षमता रखने में प्रसिद्ध है। ऐसा प्रतीत होता है कि एक बार देव लोक से अश्विनी देव जो कि स्वास्थ्य और चिकित्सा के संरक्षक देव हैं कौओं के रूप में प्रकट हुए और वे मन्दिर के तालाब के समीप पेड़ पर बैठकर कारुकू की ध्वनि का उच्चारण करते।
एक दिन, मन्दिर में अलाथर नाम्बी परिवार का मुखिया पूजा के लिए आया तथा कौओं द्वारा किए जा रहे शोर को सुनकर खड़ा हो गया और संस्कृत की द्विपदी दोहराई, जिसका तात्पर्य यह था कि : जो उचित समय पर आवश्यकता अनुसार ही भोजन ग्रहण करता है, जो पेशाब और शौच बिना ज्यादा रुकावट के करता है और जो पर्याप्त मात्रा में जल पीता है वह किसी भी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त नहीं होता। ऐसा लगता है कि कौअे ‘‘यह प्रश्न कर रहे थे कि ऐसा कौन है जिसे बीमारी नहीं है?’’ जैसा कि आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने जो जवाब दिया है वह सभी मानकों से आधुनिक है?
इसी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय सरकार चिकित्सा की वैकल्पिक प्रणालियों जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, आदिवासी दवाओं आदि को उपयुक्त महत्व दे रही है। पर्यावरण उन्मुख होने के अलावा चिकित्सा की इन प्रणालियों से यह लाभ है कि ये प्रतिबन्धात्मक पहलुओं पर अधिक बल देती हैं।
आयुष
तमिलनाडु के करूर में हाल ही में सम्पन्न हुए भारत निर्माण लोक सूचना अभियान में लोक सूचना अभियान के भाग के रूप में नि:शुल्क चिकित्सा कैम्प आयोजित किया गया और इसमें एक प्रयोग किया गया। इसे केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत आयुष विभाग (आयुर्वेद, यूनानी, होमियोपैथी) द्वारा संचालित किया गया। अधिकतर रोगियों को आकर्षित करने के अलावा, कैम्प एक प्लेटफार्म के रूप में भी सफल रहा, जहां औषधियों की वैकल्पिक प्रणाली के लाभों तथा इनकी उपलब्धता की जानकारी दी गई।
चेन्नई के विभिन्न संस्थानों के डाक्टरों तथा अर्धचिकित्सा स्टाफ की टीम ने तीन दिन के अभियान में भाग लिया। यूनानी दवाओं की केन्द्रीय अनुसंधान परिषद, आयुर्वेद के अनुसंधान केन्द्र तथ होमियोपैथी की क्लीनिकल अनुसंधान इकाई जैसे संस्थानों ने चिकित्सा कैम्प का आयोजन किया। इनका नेतृत्व क्रमश: डॉ. हफीज मो. सलाम, डॉ. पी. श्रीनिवास और डा. के राजू ने किया।
एक दिन के चिकित्सा कैम्प के अलावा, इकाइयों ने इस अभियान में स्टाल लगाकर सम्बद्ध जानकारी के इश्तेहार बांटे तथा विभिन्न सामान्य बीमारियों की सस्ती दवाइयां बांटीं।बीमारों से जानकारी लोक सूचना अभियान प्रदर्शनी स्थल के नजदीक थनथनड्रीमलाई अग्रहारम के रिहायशी वेक्टेश्वरन कुछ समय से अपनी टांगों के अग्रभाग तथा ऐड़ी में दर्द महसूस कर रहे थे। उसने कैम्प में आयुर्वेदिक डॉक्टरों से परामर्श किया। डॉक्टरों ने दवाई युक्त तेल के साथ नहाने तथा सुबह खाना खाने से पहले पानी में पावडर को घोलकर पीने का सुझाव दिया। कैम्प की समाप्ति के समय वेंकटेश्वरन प्रसन्नचित्त था। उसने कहा कि उर्स दर्द से काफी राहत मिली है।
करूर के नजदीक करूपत्ती से रोज दैनिक मजदूरी करने वाला जगदम्मा प्रदर्शनी देखने के लिए आया था। होम्योपैथी के डॉक्टरों द्वारा बताई गई दवा लगाने के बाद उसकी आंखों की लाली और सूखेपन से उसको काफी राहत मिली। यूनानी डॉक्टरों ने भी बहुत से बीमारों को आकर्षित किया। यूनानी डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने तमिल में तैयार की गई 1000 के लगभग रिकॉर्ड संख्या में ‘‘स्वस्थ जीवन के लिए सूत्र’’ पुस्तिका बांटी। संक्षेप में, कैम्प चिकित्सा की वैकल्पिक प्रणालियों की प्रभावशीलता तथा क्षमता के बारे में आंखें खोलने जैसा था। इससे सस्ती एवं पर्यावरण उन्मुख औषधियों की लोकप्रियता बढ़ने की प्रेरणा एवं सहायता मिली जिसे ग्रामीण क्षेत्रों के समान्य लोग सहजता से आकलन कर सकते हैं।
*लेखक पत्र सूचना कार्यालय, मदुरैई में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत्त हैं
केरल में वैद्यों (आयुर्वेद चिकित्सकों) के प्रसिद्ध परिवार के बारे में किंवदन्ती है, इन्हें अलाथर नाम्बी कहा जाता है। अलाथर नाम्बियों का परम्परागत घर पलक्कड़ के आधुनिक जिले के एक भाग में है। उनके आठ चिकित्सक परिवार हैं, उनका परिवार चिकित्सा की प्रत्येक शाखा में विशिष्ट क्षमता रखने में प्रसिद्ध है। ऐसा प्रतीत होता है कि एक बार देव लोक से अश्विनी देव जो कि स्वास्थ्य और चिकित्सा के संरक्षक देव हैं कौओं के रूप में प्रकट हुए और वे मन्दिर के तालाब के समीप पेड़ पर बैठकर कारुकू की ध्वनि का उच्चारण करते।
एक दिन, मन्दिर में अलाथर नाम्बी परिवार का मुखिया पूजा के लिए आया तथा कौओं द्वारा किए जा रहे शोर को सुनकर खड़ा हो गया और संस्कृत की द्विपदी दोहराई, जिसका तात्पर्य यह था कि : जो उचित समय पर आवश्यकता अनुसार ही भोजन ग्रहण करता है, जो पेशाब और शौच बिना ज्यादा रुकावट के करता है और जो पर्याप्त मात्रा में जल पीता है वह किसी भी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त नहीं होता। ऐसा लगता है कि कौअे ‘‘यह प्रश्न कर रहे थे कि ऐसा कौन है जिसे बीमारी नहीं है?’’ जैसा कि आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने जो जवाब दिया है वह सभी मानकों से आधुनिक है?
इसी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय सरकार चिकित्सा की वैकल्पिक प्रणालियों जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, आदिवासी दवाओं आदि को उपयुक्त महत्व दे रही है। पर्यावरण उन्मुख होने के अलावा चिकित्सा की इन प्रणालियों से यह लाभ है कि ये प्रतिबन्धात्मक पहलुओं पर अधिक बल देती हैं।
आयुष
तमिलनाडु के करूर में हाल ही में सम्पन्न हुए भारत निर्माण लोक सूचना अभियान में लोक सूचना अभियान के भाग के रूप में नि:शुल्क चिकित्सा कैम्प आयोजित किया गया और इसमें एक प्रयोग किया गया। इसे केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत आयुष विभाग (आयुर्वेद, यूनानी, होमियोपैथी) द्वारा संचालित किया गया। अधिकतर रोगियों को आकर्षित करने के अलावा, कैम्प एक प्लेटफार्म के रूप में भी सफल रहा, जहां औषधियों की वैकल्पिक प्रणाली के लाभों तथा इनकी उपलब्धता की जानकारी दी गई।
चेन्नई के विभिन्न संस्थानों के डाक्टरों तथा अर्धचिकित्सा स्टाफ की टीम ने तीन दिन के अभियान में भाग लिया। यूनानी दवाओं की केन्द्रीय अनुसंधान परिषद, आयुर्वेद के अनुसंधान केन्द्र तथ होमियोपैथी की क्लीनिकल अनुसंधान इकाई जैसे संस्थानों ने चिकित्सा कैम्प का आयोजन किया। इनका नेतृत्व क्रमश: डॉ. हफीज मो. सलाम, डॉ. पी. श्रीनिवास और डा. के राजू ने किया।
एक दिन के चिकित्सा कैम्प के अलावा, इकाइयों ने इस अभियान में स्टाल लगाकर सम्बद्ध जानकारी के इश्तेहार बांटे तथा विभिन्न सामान्य बीमारियों की सस्ती दवाइयां बांटीं।बीमारों से जानकारी लोक सूचना अभियान प्रदर्शनी स्थल के नजदीक थनथनड्रीमलाई अग्रहारम के रिहायशी वेक्टेश्वरन कुछ समय से अपनी टांगों के अग्रभाग तथा ऐड़ी में दर्द महसूस कर रहे थे। उसने कैम्प में आयुर्वेदिक डॉक्टरों से परामर्श किया। डॉक्टरों ने दवाई युक्त तेल के साथ नहाने तथा सुबह खाना खाने से पहले पानी में पावडर को घोलकर पीने का सुझाव दिया। कैम्प की समाप्ति के समय वेंकटेश्वरन प्रसन्नचित्त था। उसने कहा कि उर्स दर्द से काफी राहत मिली है।
करूर के नजदीक करूपत्ती से रोज दैनिक मजदूरी करने वाला जगदम्मा प्रदर्शनी देखने के लिए आया था। होम्योपैथी के डॉक्टरों द्वारा बताई गई दवा लगाने के बाद उसकी आंखों की लाली और सूखेपन से उसको काफी राहत मिली। यूनानी डॉक्टरों ने भी बहुत से बीमारों को आकर्षित किया। यूनानी डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने तमिल में तैयार की गई 1000 के लगभग रिकॉर्ड संख्या में ‘‘स्वस्थ जीवन के लिए सूत्र’’ पुस्तिका बांटी। संक्षेप में, कैम्प चिकित्सा की वैकल्पिक प्रणालियों की प्रभावशीलता तथा क्षमता के बारे में आंखें खोलने जैसा था। इससे सस्ती एवं पर्यावरण उन्मुख औषधियों की लोकप्रियता बढ़ने की प्रेरणा एवं सहायता मिली जिसे ग्रामीण क्षेत्रों के समान्य लोग सहजता से आकलन कर सकते हैं।
*लेखक पत्र सूचना कार्यालय, मदुरैई में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत्त हैं
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