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Tuesday, October 01, 2024

लुधियाना:काले पानी के खिलाफ लोगों का गुस्सा उबलने लगा

 मंगलवार 1 अक्टूबर 2024 14:50 बजे व्हाट्सएप

सरकार बंद करे तो ठीक वरना हम बंद कर देंगें काले पानी का स्रोत 


लुधियाना: 1 अक्टूबर 2024: (मीडिया लिंक//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

बहुत शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा काले पानी का मोर्चा अब पूरे रोष और क्रोध में नजर आ रहा है। साहिब श्री गुरु नानक देव जी के चरण स्पर्श वाली  ऐतिहासिक इस ऐतिहासिक पुरानी नदी बुड्ढे दरिया के साथ किया गया सलूक बेहद निंदनीय  दुर्भाग्यपूर्ण है। समाज और उद्योगपतियों के साथ-साथ राजनेताओं द्वारा अपनाए गए षडयंत्रकारी व्यवहार के चलते लोगों में गुस्सा है। 

इस खतरनाक काले जहरीले पानी को बंद करने की मांग उठाने के लिए पढ़े-लिखे सभ्य लोगों को कभी चंडीगढ़ पुलिस की हिरासत में रहना पड़ता है, कभी धरना देना पड़ता है, कभी विरोध मार्च निकालना पड़ता है और कभी पुलिस की नजरों से छुपकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ती है। दोष सिर्फ इतना है कि इन लोगों ने कैंसर जैसी बीमारी फैलाने वाले काले पानी का जहर फैलाना बंद करने की मांग उठाई है।  इसी उद्देश्य से काला पानी का ऐतिहासिक मोर्चा लगातार जारी है। आख़िर सरकार इनकी मांगें क्यों नहीं मानती? क्या है इन सभी का कसूर? क्या प्रदूषण के खिलाफ आवाज़ बुलंद करना कोई है?

कई बार सनसनीखेज खुलासे कर चुके इस मोर्चे के नेताओं ने सीधे तौर पर मांग की है कि तीनों डिएंग सीईटीपी से रोजाना दस करोड़ लीटर से ज्यादा के अवैध जहरीले काले पानी को जमीनी स्तर पर रोका जाए। लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे इस ज़हर को लेकर सरकारें और समाज असमंजस में क्यों हैं?

आज लुधियाना में काले पानी के इस मोर्चा द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सरकार ने पंजाब प्रदूषण निवारण बोर्ड के माध्यम से रंगाई उद्योग के तीन अवैध आम अपशिष्टों को लंबे समय से बंद करने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) को बंद करने का आदेश दिया गया है. इन संयंत्रों को संचालित करने वाले तीन विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) कानून का घोर उल्लंघन करते हुए और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जल संसाधन मंत्रालय से प्राप्त 2013 की शर्तों का उल्लंघन करते हुए सरकार की नाक के नीचे काम कर रहे हैं अवैध रूप से नदी में पानी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह जहरीला पानी प्रतिदिन डेढ़ करोड़ लीटर है, जो सतलुज के जरिए पंजाब और राजस्थान के लोगों को पीने के लिए सप्लाई किया जा रहा है.

काला पानी मोर्चा के वरिष्ठ नेता जसकीरत सिंह ने कहा कि मोर्चा ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि एक अक्टूबर से फिरोजपुर रोड पर धरना दिया जाएगा, जिसके बाद पंजाब के लोग काला पानी गिरने के विरोध में प्रदर्शन करेंगे। सतलुज और बुड्ढे नदियों को बांध कर मार दिया जाएगा। इस घोषणा के दो दिन बाद पंजाब सरकार ने डाइंग के तीन प्रमुख सीईटीपी को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं. इस बदले हुए हालात में काले पानी दा मोर्चा की ओर से अगला कार्यक्रम आज दिया जा रहा है, जिसमें 1 अक्टूबर को फिरोजपुर रोड पर धरना सिर्फ संकेत के तौर पर दिया जा रहा है और 3 दिसंबर को बड़े कार्यक्रम की घोषणा प्रेसवार्ता कर की गई है उसी स्थान पर सम्मेलन चल रहा है

मोर्चा की ओर से अमितोज मान ने कहा कि हमारा काला पानी बांध कार्यक्रम हमेशा उन जहरीले आउटलेटों को बंद करने के लिए था जो औद्योगिक और अन्य जहरीले पानी को बुड्ढा नदी में डाल रहे हैं। इसलिए लुधियाना के कुछ लोग जो पिछले दिनों बुड्ढा नदी बंद होने से चिंतित थे, उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है. हम उन्हें इस डर से मुक्त होने और जहरीले काले पानी के केवल अवैध आउटलेट को बंद करने के कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं।

लक्खा सिधाना ने कहा कि आने वाले दिनों में पंजाब में पंचायत चुनाव की घोषणा हो चुकी है और उसके बाद धान की कटाई का समय है, पंजाब के सभी लोगों से आह्वान है कि वे लुधियाना के जमालपुर में लुधियाना सेंट्रल जेल के सामने इन दो अवैध बड़े पाइपों को बंद करें प्रतिदिन 9 करोड़ लीटर का सबसे बड़ा स्रोत बंद करो।

डॉ. अमनदीप सिंह बैंस ने कहा कि ये डाइंग सीईटीपी ताजपुर रोड और सीईटीपी फोकल प्वाइंट के अवैध आउटलेट हैं और इन्हें पहचानने और ब्लॉक करने के लिए एक सफल रिहर्सल की गई है। उनकी जीपीएस लोकेशन 30.919924, 75.913612 है जिसके जरिए सरकार और पंजाब के लोग उन तक आसानी से पहुंच सकते हैं। काला पानी बांधने के लिए सबसे पहले इन दोनों को बंद करना जरूरी है और अगर सरकार अपना काम नहीं करती है तो जनता को ही यह काम पूरा करना होगा, जिसे वे 3 दिसंबर को फिर पूरे जोश के साथ पूरा करेंगे.

पीपीसीबी अधिकारियों द्वारा जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एनजीटी और यहां तक ​​कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी से पैदा हुई इस गंभीर स्थिति में कुलदीप सिंह खैरा और कपिल अरोड़ा ने पंजाब के डीजीपी से मांग की है कि वे इस शिकायत पर कार्रवाई करें पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और रंगाई उद्योग के बड़े कारोबारियों की मिलीभगत पर फ्रंट ने कानून का राज बहाल करने के लिए पुलिस कमिश्नर लुधियाना को ज्ञापन दिया ताकि लोगों में कानून के प्रति विश्वास कायम हो सके।

अब देखना यह है कि लोगों को कैंसर का मरीज बनाने वाले इस जहरीले पानी को रोकने के लिए सरकार, समाज और खुद उद्योगपति कब और क्या कदम उठाते हैं? 3 दिसंबर का आह्वान दिवस आने से पहले यदि संबंधित पक्ष इस जहरीले पानी को रोकने के लिए स्वयं आगे आएं तो बहुत अच्छा होगा। यह पंजाब के हितों के प्रति निष्ठा होगी।

Sunday, May 20, 2018

क्यों बेख़ौफ़ हैं दरियाओं को प्रदूषित कर रहे लोग?

भारत जन ज्ञान विज्ञान जत्था ने बहुत पहले ही आगाह कर दिया था 
लुधियाना: 19 मई 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
"भारत जन ज्ञान विज्ञान जत्था" ने दो वर्ष पहले ही तैयार कर दी थी विशेष रिपोर्ट 
दरिया में शीरा गिराया गया तो हंगामा हो गया। हालांकि इस तरह के मामले पहली बार नहीं हुए। अगर इस सिलसिले को रोकने के लिए वक्त पर कदम उठाये जाते  तो शायद इतनी बड़ी मात्रा में प्रदूषण की यह दुखद घटना होती ही नहीं। इस घटना से ज़ाहिर है कि प्रदूषण फ़ैलाने वाले बेख़ौफ़ हो चुके हैं। उन्हें किसी का डर नहीं रहा। उनके खिलाफ किये गये "एक्शन" का अंदाज़ बताता है की उनकी बेखौफी आधारहीन नहीं है। उनकी जेब में पैसा है और इस पैसे के जोर से यहाँ का कानून भी इनके मुताबिक चलता है। इन बातों की पुष्टि भारत जन ज्ञान विज्ञान जत्था ने दो वर्ष पूर्व ही कर दे थी। 
हालत जितनी बुरी दिख रही है वास्तव में उससे कहीं ज्यादा सम्वेदनशील है। ऐसी हालत में सियासतदान जो कुछ कर रहे हैं वह शायद उनकी इस वक्त की सियासत के चलते जरूरी है। 
जहाँ तक सतलुज और बुड्ढा दरिया का सम्बन्ध है उसकी हालत बहुत पहले से बिगड़ी हुई है। करीब दो वर्ष पूर्व भी "भारत जन ज्ञान विज्ञान जत्था" ने इस मामले को उठाया था। "आप" नेता एच एस फुल्का ने बाकायदा एक पत्रकार सम्मेलन में भी इस दरिया को बिगाड़े जाने की दुखद दास्तान मीडिया के सामने सुनाई थी। जब किसी पत्रकार ने इसे "बुड्ढा नाला" कहा तो श्री फुल्का ने एतराज़ किया था की नाला नहीं दरिया कहो। शायद वो चुनावी दिन थे इसलिए इस मुद्ददे की भी ज़रूरत थी। ज़रूरत का वह समय निकलते ही यह मुद्दा भी गैर ज़रूरी बन गया। 

अब फिर आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर मैदान में है। विपक्ष के नेता सुखपाल सिंह खैहरा ने कहा कि इस समय पंजाब में एनवायरमेंटल इमरजेंसी के हालात बने हैं और सूबे के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह मनाली में छुट्टियां मना रहे हैं। वह लुधियाना के वलीपुर गांव में सतलुज व बुड्ढा नाला के संगम स्थल का जायजा लेने पहुंचे थे।
विपक्षी नेता खैहरा ने कहा कि ब्यास दरिया में चीनी मिल ने शीरा छोड़कर दरिया को दूषित कर दिया गया है। इसके परिणाम स्वरूप दरिया में मछलियां मर गईं। पानी इतना जहरीला हो गया था कि उसका असर फिरोजपुर में भी देखने को मिला। बुड्ढा नाला में लुधियाना की इंडस्ट्री का केमिकल बहाया जा रहा है जो सीधे सतलुज दरिया में बह रहा है। इसकी वजह से सतलुज के प्रवाह क्षेत्र में आने वाले जिलों के साथ राजस्थान के कुछ जिले भी प्रभावित हो रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष खैहरा ने सतलुज व बुड्ढा नाला के संगम स्थल को दिखाते कहा कि इसे देख कर कोई भी व्यक्ति बता सकता है कि सतलुज के पानी में कितना जहर है। पहले अकाली सरकार बुड्ढा नाले की सफाई का राग अलापती रही और अब यही हाल कांग्रेस का है। यह बात है भी सही कि किसी भी दल ने कभी गंभीरता से इस मुद्दे की हाथ में नहीं लिया। बात बयानबाज़ी और ऐलानों तक ही सिमट कर रह जाती। 
यहाँ के बहुत से इंडस्ट्रिलिस्ट राज्य में अपने मुनाफे के लिए पानी को जहरीला बना रहे हैं। सरकार चुप बैठी है। इसकी वजह से मालवा कैंसर हब बन गया है। उन्होंने बताया कि नदियों के प्रदूषण का मामला विधानसभा में उठाएंगे।
अब देखना है की इस समस्या को समझने और सुलझाने के लिए गैर सियासी लेकिन गंभीर क्षेत्रों से कितने लोग आगे आते हैं। पानी और हवा को बचना है तो इसे एक जन अभियान बनाना होगा।