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Sunday, January 19, 2020

जानेमाने राजनीतिज्ञ बीरदविंद्र सिंह पहुंचे जे एन यू

Sunday: 19th January 2020 at 22:26 Whats App
जे एन यू पर हमले के दौरान घायल हुई आईशी घोष के साथ भेंट की
सोशल मीडिया: 19 जनवरी 2020: (सृजनधारा ग्रुप में सरबजीत सिंह)::
हमसे सबूत मांगना महंगा पड़ा उन्हें। 
कागज़ को यूं खंगालना महंगा पड़ा उन्हें। 
शायरा लता ह्या की गाई हुई यह ग़ज़ल आजकल सोशल मीडिया पर भी लगातार लोकप्रिय हो रही है। सीएए के मुद्दे पर विरोध की चिंगारियों को इस ग़ज़ल ने भी खूब हवा दी है। 
फेसबुक और यूट्यूब में भी लगातार लोकप्रिय हो रही इसी ग़ज़ल पर सीएए के समर्थन और विरोध में बहुत से कुमेंट भी आए हैं। इसी बीच पंजाब में भी सी ए ए के विरोध में कई नए आंदोलनों की तैयारियां हैं। इन्ही ख़बरों के चलते जानेमाने राजनीतिज्ञ और लोकप्रिय नेता बीरदविंद्र सिंह ने जे एन यू में जा कर घायल छात्रा आईशी घोष के साथ भेंट की। यह मुलाकात रविवार को हुई। इस तस्वीर को सोशल मीडिया में व्हाटसअप के सृजनधारा ग्रुप में शेयर किया है सरबजीत सिंह (+91 98141 23338) ने। जिस शायरी ने  मौजूदा राजनैतिक घटनाक्रम झलक देने वाली रचनाएं सामने रखीं हैं उन में अब यह ग़ज़ल भी शामिल हो गई है। 
अब देखना है जानेमाने नेता बीर दविंदर सिंह का छात्र नेता आईशी घोष के साथ मुलाकात करना राजनैतिक माहौल छात्र राजनीति पर क्या प्रभाव डालता है। 
  

Monday, January 06, 2020

JNU में छात्रों के साथ गुंडागर्दी की शाही इमाम पंजाब ने भी की निंदा

Monday: 6th January 2020 at 5:47 PM
केंद्र सरकार पर लगाया खामोश तमाशाई बने होने का आरोप 
लुधियाना: 6 जनवरी 2020:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी
दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के साथ नक़ाब पहन कर साम्प्रदायिक ताक़्तों द्वारा की गई गुंडागर्दी की निंदा करते हुए स्वतंत्रता सैनानियों की पार्टी मजलिस अहरार इस्लाम के प्रधान व शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर भी खामोश तमाशाई बनी हुई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस का साम्प्रदायिक चेहरा रात एक बार फिर से बेनकाब हो गया है। यह  वक़्त रहेगा जब पुलिस ने जे.एन.यू. में बदमाशों को खुली छूट दे दी और मीडिया को अंदर नहीं जाने दिया गया। शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि भाजपा के राज में पुलिस बल का जमकर दुरुपयोग हो रहा है जो कि निंदनीय है, आए दिन जबर-ज़्यादतियां बढ़ रही हैं जो कि लोकतंत्र के लिए चिंता की बात बनी हुई है। 
शाही इमाम ने कहा कि केंद्र सरकार खामोश तमाशाई बनी हुई है प्रदर्शनकरियों से सरकार बात करने की बजाए गलत ढंग से सच्चाई कि आवाज को कुचलना चाहती है जो कि संभव नहीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र कि रक्षा के लिए हर एक भारतीय को संघर्ष करना होगा, यह देश सभी का है, यहां अनेकता में एकता का जो इतिहास रहा है उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। 
शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने कहा कि को लोग धर्म के नाम पर कानून बना रहे है दरसअल वह सत्ता के लालची है वह अपने स्वार्थ के लिए समाज को बांटना चाहते हैं, इतिहास गवाह है कि भारत में नफरत कि राजनीति कभी कामयाब नही हुई और ना ही अब होगी।
  वर्णनयोग है कि पंजाब भर में शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान की अगुवाई में लगातार मुसलमान सी.ए.ए. और एन.आर.सी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 3 जनवरी को राज्य भर में काला दिवस मनाने के बाद अब अगली रणनीति के लिए 7 जनवरी को दोपहर 1 बजे जामा मस्जिद में मीटिंग बुलाई गई है।


Monday, August 13, 2018

संसद भवन के पास छात्र नेता उम्र खालिद पर हमला-सकुशल बचे

प्रगतिशील क्षेत्रों में गम और रोष की लहर 
नयी दिल्ली: 13 अगस्त 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
जानेमाने लोकप्रिय छात्र नेता उम्र खालिद पर गोली चलने की खबर से सभी प्रगतिशील क्षेत्रों में गम और गुस्से की लहर है। गौरतलब है कि कुछ अज्ञात लोगों ने आज यहां संसद भवन के पास स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब के ठीक बाहर जेएयनू के छात्र नेता उमर खालिद पर हमला किया और गोलियां चलायी लेकिन वह सकुशल बच गए। उनके सकुशल बचने की खबर से संतोष भी पाया जा रहा है लेकिन इससे इस हमले से पैदा हुई चिंता कम नहीं हो रही। यह सब तब हुआ जब स्वतन्त्रता दिवस को केवल एक दिन बाकी है। आज कई जगहों पर स्वतन्त्रता दिवस के आयोजनों की रिहर्सल भी हो चुकी होगी। लेकिन यह गोलियां चलाने वाले इस राष्ट्रीय त्यौहार से एक-दो दिन पूर्व छात्र नेता पर गोलियां चला कर क्या संदेश देना चाहते हैं? 
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि जब खालिद क्लब के गेट पर थे तब दो गोलियां चलायी गयीं। निश्चय ही दिन दिहाड़े इस तरह संसद भवन के पास गोलियां चलाने वाले आम मुजरिम न रहे होंगें। शायद उनके पीछे कोई बड़ा हाथ हो। उल्लेखनीय है कि खालिद ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ संगठन के ‘खौफ से आजादी’ नामक एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने यहाँ पहुंचे थे।
खालिद के साथ कांस्टीट्यूशन क्लब गए एक व्यक्ति  खालिद सैफी ने कहा कि जब हम चाय पीने गए थे जब तीन लोग हमारी तरफ आए। उनमें से एक ने खालिद को जकड़ लिया जिसका विरोध करते हुए खालिद ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की और इसमें सफल भी रहे।  
खालिद सैफी ने कहा कि गोली चलने की आवाज आने से सैर माहौल में अफरातफरी मच गयी। 
समझा जाता है कि इसी हडबडाहट में शायद हमलावर अपना निशाना चूक गए। उन के इस सुनियोजित हमले के बावजूद खालिद अपनी सतर्कता के चलते घायल नहीं हुए। इस पर बोखलाए हुए आरोपियों ने भागते समय एक और गोली चलायी। इससे आसपास के माहौल में एक सनसनी सी फ़ैल गयी।  
इस घटना के कुछ देर बाद उम्र खालिद ने इसका गंभीर नोटिस लिया। इस घटनाक्रम पर खालिद ने कहा कि देश में खौफ का माहौल है और सरकार के खिलाफ बोलने वाले हर व्यक्ति को डराया-धमकाया जा रहा है। आज की घटना इस हकीकत की एक ताज़ा मूंह बोलती तस्वीर भी है। 
इसी बीच इस सरे मामले की जांच का काम जारी है। पुलिस घटनास्थल पर है और मामले की जांच कर रही है। उसने वह हथियार भी जब्त कर लिया है जो आरोपियों के भागते समय उनके हाथों से गिर गया था। अब देखना है पुलिस कितनी देर में हमलावरों की पहचान करके उन्हें पकड़ पाती है। 

Sunday, August 28, 2016

राष्ट्रपति ने कहा विश्वविद्यालय स्वतंत्र संवाद और अभिव्यक्ति का स्थल होने चाहिए

27-अगस्त-2016 19:37 IST
प्राचीन नालंदा एक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान था....
राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज (27 अगस्त, 2016) को नालंदा के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और इसके नए परिसर की आधारशिला रखी। 
राजगीर (बिहार): 27 अगस्त 2016: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
इस अवसर पर, अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय में वह इस आशा के साथ उपस्थित हैं कि यह विश्वविद्यालय सही मायने में प्राचीन समय के नालंदा विश्वविद्यालय की स्थिति को हासिल करेगा। प्राचीन नालंदा में अपनायी जाने वाली कई पद्धतियां नवीन नालंदा में अनुकरण के योग्य है। प्राचीन नालंदा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान था जहां विशेष रूप से अंतर-एशियाई संबंधों का विस्तार हुआ था। चीनी भिक्षु ह्वेन त्सांग, यिझिंग और हुईशाओ एवं अन्य आगन्तुकों ने नालंदा में निवास, अध्ययन और पढ़ाया भी। एक अवधि के बाद तिब्बत के विद्वान भी बौद्ध धर्म और ज्ञान के अन्य स्वरूपों का अध्ययन करने के लिए नालंदा आएं। इसके अलावा श्रीलंका के साथ-साथ अन्य देशों के भिक्षु भी संस्थान पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभावों की विविधता का अध्ययन करने के लिए नालंदा आए। राष्ट्रपति ने कहा कि यह सिर्फ एक दिशा में नहीं था नालंदा के भिक्षुओं ने अपने इस ज्ञान का प्रसार संपूर्ण विश्व में किया और भारत में ह्वेन त्सांग की यात्रा से पूर्व यह चीन पहुंच गया था। 

राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा को उच्च स्तर की बौद्धिक परिचर्चा और विचार-विमर्श के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यह मात्र एक भौगोलिक अभिव्यक्ति ही नहीं अपितु एक विचार और एक संस्कृति को परिलक्षित करता है। नालंदा ने मित्रता, सहयोग, विचार-विमर्श और तर्क का संदेश दिया। चर्चा और बहस हमारे लोकाचार और जीवन का हिस्सा है। 

राष्ट्रपति ने कहा हालांकि अध्ययन के मुख्य विषय बौद्धग्रंथ थे लेकिन वेदों और अन्य क्षेत्रों के अध्ययन को भी यहां पर महत्वपूर्ण रूप से महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि आधुनिक नालंदा के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह इस महान परंपरा को अपने परिसर में नए जीवन और शक्ति के साथ आगे बढ़ाता रहे। विश्वविद्यालयों को स्वतंत्र संवाद और अभिव्यक्ति का स्थल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालों में असहिष्णुता, पूर्वाग्रह और घृणा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए और इसे विभिन्न विचारों, दर्शनों का ध्वजवाहक होना चाहिए। 

राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा सभ्यताओं और आधुनिक भारत का एक मिलन स्थल रहा है और इसे निरंतर बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी ज्ञान झरोखों को बंद नहीं करना चाहिए और हमें बाहर से आने वाली झोकों से इन्हें बुझना नहीं चाहिए। हमें समूची दुनिया से स्वतंत्र प्रवाह के रूप में ज्ञान को अंदर आने देना चाहिए और इससे स्वयं को समृद्ध बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें संकीर्ण मानसिकता को छोड़कर स्वतंत्र विचारों और सकारात्मक परिचर्चा को अपनाना चाहिए। 

Monday, February 15, 2016

क्या कन्हैया का गुनाह बस इतना कि वह AISF से जुड़ा है?

क्या Znews किसी साजिश के तहत गया था?
                                                                                                      --Sindhu Khantwal
आखिर कन्हैया कुमार को क्यों गिरफ्तार किया गया।।???????
जब की वह उस प्रोग्राम का हिस्सा नहीं था जहाँ पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे।
जब की वह नारे लगाने वालो में शामिल नहीं था। 
JNU वह जगह है जहाँ पर हर छात्र संगठन को आजादी है की वह अपना किसी भी तरह का प्रोग्राम करवा सकता है अफजल गुरु की बरसी पर हुआ यह प्रोग्राम भी इसी आजादी का एक हिस्सा था छात्रो ने इस प्रोग्राम को ऑर्गनाइस करवाया था इस प्रोग्राम का ऑर्गनाइसर कन्हैया नहीं था इस प्रोग्राम का वक्ता कन्हैया नहीं था। प्रोग्राम जब शुरू होने वाला था तो ठीक 5 मिनट पहले प्रोग्राम की परमिशन को रद्द कर दिया गया क्यों की ABVP के छात्र प्रोग्राम का बिरोध कर रहे थे। जब प्रोग्राम की जगह पर दोनों पक्षों में झड़प होने लगी तो कन्हैया वहां बीच बचाव करने के लिए पहुंचा इसी बीच बचाव के दौरान भारत पाकिस्तान के नारे लगे। 
क्यों की कन्हैया JNUSU का प्रेजिडेंट है इस लिए दोनों पक्षों में होनेवाली झड़प को रोकना उस का अधिकार है।  
अब आते है मुख्य बात पर और कुछ सवालों पर
क्या कन्हैया को जानबूझ कर फंसाया गया है????
1. आखिर Znews वहां कैसे पंहुचा? जब की आज से पहले तो कभी कोई न्यूज़ चैनल वहां किसी तरह का कवरेज लेने नहीं गया था क्या Znews किसी साजिश के तहत गया था?
2.आखिर वह वीडियो कौन सा है जो कोर्ट में दिखाया गया जो की न मिडिया के पास आया न कही और दिखाया गया ?क्या वह एडिट किया हुआ और किसी साजिश के तहत तैयार किया हुआ वीडियो है?
3. जो नया वीडियो सामने आया है जिस में ABVP के कार्यकर्ता नारे लगते हुए साफ़ दिख रहे है मीडिया उसे क्यों नहीं दिखा रहा है ?
4. क्या ABVP संघ और बीजेपी कन्हैया से किसी तरह की रंजिश रखते है?
5. अब जो नए वीडियो में नारे लगते लोग दिख रहे है क्या उन को भी गिरफ्तार किया जायेगा?
6. क्या कन्हैया का गुनाह बस इतना है की वह JNUSU का प्रेजिडेंट है और AISF से जुड़ा है?

JNU: कौन है गद्दार? कौन है अफजल गुरू?