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Saturday, August 15, 2015

सम्‍प्रदायवाद का जुनून विकास के अमृत से मिटाना है--प्रधानमंत्री मोदी

15-अगस्त-2015 15:03 IST
स्वतंत्रता दिवस 2015 के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ 
आज प्रधानमंत्री जी श्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्‍वतंत्रता दिवस 2015 के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से देश को संबोंधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है - 
भारत के सवा सौ करोड़ मेरे प्‍यारे देशवासियों, 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, 15 अगस्त, 2015 को भारत के 69 वें स्वतंत्रता दिवस
के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्‍ट्र को संबोधित करने के बाद स्‍कूलों के
बच्‍चों के साथ बातचीत करते हुए।
आजादी के पावन पर्व पर आप सबको हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 15 अगस्‍त का यह सवेरा मामूली सवेरा नहीं है। यह विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र का स्‍वातंत्र्य पर्व का सवेरा है। यह सवेरा, सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों का सवेरा है। यह सवेरा सवा सौ करोड़ देशवासियों के संकल्‍प का सवेरा है और ऐसे पावन पर्व पर जिन महापुरूषों के बलिदान के कारण, त्‍याग और तपस्‍या के कारण सदियों तक भारत की अस्मिता के लिए जूझते रहे, अपने सर कटवाते रहे, जवानी जेल में खपाते रहे, यातनाएं झेलते रहे, लेकिन सपने नहीं छोड़े, संकल्‍प नहीं छोड़े। ऐसे आजादी के स्‍वतंत्रता सेनानियों को मैं आज कोटि-कोटि वंदन करता हूं। पिछले दिनों हमारे देश के अनेक गणमान्‍य नागरिकों ने, अनेक युवकों ने, साहित्‍यकारों ने, समाजसेवियों ने, चाहे वो बेटा हो या बेटी हो, विश्‍वभर में भारत का माथा ऊंचा करने का अभिनंदनीय कार्य किया है। अननिगत वो लोग हैं, जिनको मैं आज लालकिले के प्राचीर से भारत का माथा ऊंचा करने के लिए हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, अभिनंदन करता हूं। विश्‍व के सामने भारत की विशालता, भारत की विविधता इसके गुणगान होते रहते हैं। लेकिन जैसे भारत की अनेक विशेषताएं हैं, भारत में अनेक विविधताएं हैं, भारत की विशालता है, वैसे ही भारत के जन-जन में सरलता भी है और भारत के कोने-कोने में एकता भी है। यही हमारी पूंजी है, यह हमारे राष्‍ट्र की शक्ति है। हमारे देश की शक्ति को सदियों से संजोया गया है। हर युग में उसे नया निखार देने का प्रयास हुआ है। समय की आवश्‍यकता के अनुसार, भविष्‍य के सपनों को साकार करने की आवश्‍यकता के अनुसार उन्‍हें ढाला गया है, उन्‍हें पनपाया गया है और उससे चिर पुरातन परंपराओं के बीच, नित्‍य नूतन संकल्‍पों के साथ यह देश आज यहां पहुंचा है। हमारी एकता, हमारी सरलता, हमारा भाई-चारा, हमारा सद्धभाव यह हमारी बहुत बड़ी पूंजी है। इस पूंजी को कभी दाग नहीं लगना चाहिए, कभी उसे चोट नहीं पहुंचनी चाहिए। अगर देश की एकता बिखर जाए, तो सपने भी चूर-चूर हो जाते हैं। और इसलिए चाहे जातिवाद का जहर हो, सम्‍प्रदायवाद का जुनून हो, उसे हमें किसी भी रूप में जगह नहीं देनी, पनपने नहीं देना है। जातिवाद का जहर हो, सम्‍प्रदायवाद का जुनून हो, उसे हमें विकास के अमृत से मिटाना है, विकास की अमृतधारा पहुंचानी है और विकास की अमृतधारा से एक नई चेतना प्रकट करने का प्रयास करना है। भाइयों-बहनों यह देश टीम इंडिया के कारण आगे बढ़ रहा है। और ये Team India, सवा सौ करोड़ देशवासियों की बृहत Team है। क्या कभी दुनिया ने सोचा है कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की ये Team, जब टीम बनकर के लग जाती है तो वो राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हैं, वे राष्ट्र को बनाते हैं, वो राष्ट्र को बढ़ाते हैं, वे राष्ट्र को बचाते भी हैं, और इसलिए हम जो कुछ भी कर रहे हैं, हम जहां पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, वह ये सवा सौ करोड़ की Team India के कारण है और टीम इंडिया के आभारी हैं। 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, 15 अगस्त, 2015 को भारत के 69 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महात्मा गाँधी की 
राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए।
लोकतंत्र में जनभागीदारी, ये सबसे बड़ी पूंजी होती है, अगर सवा सौ करोड़ देशवासियों की भागीदारी से हम देश को चलाएंगे तो देश हर पल सवा सौ करोड़ कदम आगे चलता चला जाएगा और इसलिए, Team इंडिया के इस रूप में जनभागीदारी को बल दिया गया है, प्राथमिकता दी गई है। चाहे Electronic के platform के माध्यम से mygov.in हो, चाहे नागरिकों से लगातार आते रहे लाखों पत्र हो, चाहे मन की बात हो, चाहे नागरिकों के साथ संवाद हो। इसी मार्ग से दिनों-दिन जनभागीदारी बढ़ती चली जा रही है। बहुत बड़ी मात्रा में हर काम में, दूर-सुदूर गांवों में बैठे हुए लोगों के भी सुझाव हमें मिलते रहे हैं और यही, Team India की ताकत है। मेरे प्यारे देशवासियों, ये बात निश्चित है इस Team India का एक ही जनादेश है और वो जनादेश है हमारी सारी व्यवस्थाएं, हमारी सारी योजनाएं इस देश के गरीब के काम आनी चाहिए। अगर हम गरीब को गरीबी की मुक्ति की लड़ाई में बल प्रदान करते हैं, उसे सामर्थ्य प्रदान करते हैं, तो देश का कोई गरीब, गरीबी में गुजारा करना नहीं चाहता है, वह भी गरीबी से जंग लड़ना चाहता है और इसलिए शासन व्यवस्था की सार्थकता इस बात में है कि हमारी व्यवस्थाएं, हमारे संसाधन, हमारी योजनाएं, हमारे कार्यक्रम गरीबों के कल्याण के लिए किस प्रकार से उपयोग आते हैं। 
भाईयों-बहनों, गत 15 अगस्त को मैंने आपके सामने कुछ विचार रखे थे, तब मैं नया था। अब मैंने जो शुरू-शुरू में देखा था, उसको मैंने, कोई लाग-लपेट के बिना खुले मन से सवा सौ करोड़ देशवासियों के सामने रख दिया था लेकिन आज, एक वर्ष के बाद, उसी लालकिले की प्राचीर से पवित्र तिरंगे झंडे की साक्षी से, मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि एक साल में Team India, सवा सौ करोड़ देशवासी, एक नए विश्वास के साथ, नए सामर्थ्य के साथ परिश्रम की पराकाष्ठा करते हुए समय-सीमा में सपनों को साकार करने में जुट गए हैं। एक नया विश्वास का माहौल पैदा हुआ। मैंनें गत 15 अगस्त को प्रधानमंत्री जन-धन योजना इसकी घोषणा की। देश में साठ साल बीते, गरीबों के लिये बैंको का राष्ट्रीयकरण किया गया लेकिन इसके बावजूद भी साठ साल से भी अधिक समय के बाद गत 15 अगस्त को देश के चालीस प्रतिशत लोग बैंक खातों से वंचित थे। गरीब के लिये बैंकों के दरवाजे बंद थे। हमने संकल्प किया कि इस कलंक को मिटाना है और विश्व में Financial Inclusion की बातें होती हैं, उस Financial Inclusion को एक मजबूत धरातल पर लाना है तो देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को आर्थिक गतिविधि की मुख्य धारा में जोड़ना पड़ेगा और Bank account, ये उसका एक प्रारम्भ बिंदु है। हमने तय किया था, ''करेंगे, करते हैं, सोचते हैं, देखते हैं'' ऐसा नहीं, हमने कहा था- 26 जनवरी को जब देश फिर एक बार तिरंगे झंडे के सामने खड़ा होगा तब तक समय सीमा में काम पूरा करेंगे। मेरे देशवासियों मैं आज गर्व से कहता हूं कि हमने समय सीमा पर काम पूरा किया। 17 करोड़ लोगों ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत खाते खुलवाए। हमने तो कहा था, गरीबों को अवसर देना था इसलिए कहा था- एक भी रूपया नहीं होगा, एक नया पैसा भी नहीं होगा, तो भी बैंक का accounts खोलेगें। बैंकों को खोलने की कागज़ पट्टी का खर्चा होगा तो होने देंगे। आखिर बैंक किसके लिए हैं! गरीब के लिए होना चाहिए, और इसलिए जीरो बैलेंस से हमने अकाउंट खोलने का संकल्‍प किया था। लेकिन, मेरे देश के अमीरों को हमने देखा है, और इस बार देश ने गरीबों को भी देखा है और गरीबों की अमीरी को देखा है। मैं इन गरीबों की अमीरी को आज लालकिले के प्राचीर से शत-शत नमन करना चाहता हूं, सलाम करना चाहता हूं क्योंकि जीरो बैलेंस से अकाउंट खोलने का कहने के बावजूद भी इन गरीबों ने बीस हजार करोड़ रुपया बैंक के खातों में जमा करवाया। 

अगर ये गरीबों की अमीरी न होती तो कैसे संभव होता और इसलिये गरीबों की अमीरी के बलबूते ये टीम इंडिया आगे बढ़ेगी, ये मेरा विश्‍वास आज प्रकट हो रहा है। भाइयों-बहनों हमारे देश में कहीं पर एक बैंक का ब्रांच खुल जाए या बैंक का नया मकान बन जाए तो इतनी बड़ी चर्चा होती है कि वाह! बहुत बड़ा काम हो गया, बड़ा विकास हो रहा है, बड़ी प्रगति हो रही है क्‍योंकि 60 साल तक हमने इन्‍हीं मानदंडों से देश के विकास को नापा है। वो नापने की पट्टी यही रही है कि एक बैंक का ब्रांच खुल जाए, बहुत बड़ी वाहवाही हो जाती है, बहुत बड़ा जय-जयकार हो जाता है। सरकार की बल्‍ले-बल्‍ले बात हो जाती है। लेकिन मेरे प्‍यारे देशवासियों, बैंक का ब्रांच खोलना मुश्‍किल काम नहीं है। सरकारी तिजोरी से वो काम हो जाता है। लेकिन 17 करोड़ देशवासियों को बैंक के दरवाजे तक लाना ये बहुत बड़ा कठिन काम होता है, बहुत बड़ा परिश्रम लगता है। जी-जान से जुटना पड़ता है, पल-पल हिसाब मांगना पड़ता है। और मैं टीम इंडिया के मेरे महत्‍वपूर्ण साथी, टीम इंडिया के इस महत्‍वपूर्ण साथी बैंक के कर्मचारियों का, बैंकों का हृदय से अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने बैंक को गरीबों के सामने ला करके रख दिया और ये चीज आने वाले दिनों में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाली है। 

दुनिया में आर्थिक चिंतनधाराओं में एक चिन्‍तनधारा ये भी है कि financial inclusion यह हमेशा अच्‍छा नहीं होता है और उसके कारण गरीबी का बोझ व्‍यवस्‍थाओं पर पड़ता है। मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं। भारत जैसे देश में अगर विकास का Pyramid हम देखें। तो Pyramid के जो सबसे नीचे की सतह होती है, वो सबसे चौड़ी होती है। अगर वो मजबूत हो तो विकास का सारा Pyramid मजबूत होता है। आज विकास के Pyramid में हमारे देश का दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, उपेक्षित, वो वहां पर बैठा हुआ है। हमें विकास की Pyramid की इस नींव को मजबूत करना है ताकि, financial inclusion के द्वारा अगर वो ताकतवर होगा तो विकास का Pyramid कभी हिलेगा नहीं। कितने ही झोंके क्‍यों न आए, उसे कोई संकट नहीं आएगा और विकास का ये Pyramid आर्थिक मजबूती पर खड़ा होगा तो उनकी खरीद शक्‍ति बहुत बढ़ेगी और जब समाज के आखिरी इंसान की खरीद शक्‍ति बढ़ती है तो इस economy को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। वो बहुत तेज गति से देश को विकास की नई उंचाइयों पर ले जाता है और इसलिए हमारी कोशिश यह है कि हम उस पर बल दें। हमने सामाजिक सुरक्षा पर बल दिया है। गरीबों की भलाई पर बल दिया है। 

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और जीवन-ज्‍योति योजना, हमारे देश में करोड़ों-करोड़ों लोग हैं जिनको सुरक्षा का कवच नहीं है। Insurance का लाभ हमारे देश में निम्‍न मध्‍यम वर्ग को भी नहीं पहुंचा है गरीब की बात तो छोड़ो। हमने योजना बनाई एक महीने का एक रुपया, ज्‍यादा नहीं एक महीने का एक रुपया। 12 महीने का 12 रुपया और आप प्रधानमंत्री सुरक्षा-बीमा के हकदार बन जाइए। अगर आपके परिवार में कोर्इ आपत्ति आई तो दो लाख रुपया आपके परिवार को मिल जाएगा। अर्थतंत्र को कैसे चलाया जाता है। हम प्रधानमंत्री जीवन-ज्‍योति बीमा लाये। एक दिन के 90 पैसे, एक रुपए से भी कम, सालभर का 330 रुपया। आपके परिवार के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए, आपके परिवार की सुरक्षा के लिए 2 लाख रुपयों का बीमा सिर्फ 90 पैसे दो रोज के, हमने किया। भाइयो-बहनों भूतकाल में योजनाएं तो बनती रहीं, कौन सरकार होगी जो योजना नहीं बनाती होगी। हर कोई बनाता है, कौन सरकार होगी जो घोषणाएं नहीं करती होगी हर कोई करती है। कौन सरकार होती है जो उद्घाटन दीये न जलाती हो, फीता न काटती हो, सब कोई करते हैं, लेकिन कसौटी इस बात की होती है कि हम जिन बातों को कहते हैं, उसको पूरा करते हैं कि नहीं करते हैं। हमने एक नये Work culture पर दबाव डाला है, हमने एक नई कार्य-संस्‍कृति पर दबाव डाला है। और भाइयो-बहनों हमारे देश की कई योजनाएं जो 40 साल पुरानी हैं, 50 साल पुरानी हैं, 5 करोड़, 7 करोड़ लोगों से आगे नहीं पहुंच पाती हैं। इस योजना को अभी तो 100 दिन पूरे हुए है, 100 दिन। 100 दिन में 10 करोड़ नागरिकों ने इसका लाभ लिया है, 10 करोड़ नागरिकों ने। हमारे देश में ये 10 करोड़ नागरिक मतलब कि 10 करोड़ परिवार हैं। इसका मतलब ये हुआ कि देश में जो 30-35 करोड़ परिवार हैं उसमें से 100 दिन के भीतर-भीतर 10 करोड़ परिवार इस योजना में शरी‍क हो गए हैं। भाइयों-बहनों, हमारी सरकार की Team India की पिछले एक साल की जो विशेषता है, Team India का जो पराक्रम है, Team India सवा सौ करोड़ देशवासी टीम इंडिया हैं। उन्‍होंने जो सबसे बड़ा काम किया है समय-सीमा में निर्धारित कामों को पूरा करना। मैंने पिछली बार लाल किले पर से शौचालय की बात की थी, स्‍वच्‍छता की बात की थी। देश के लिए पहले घंटे-दो घंटे अजूबा लगा कि कैसे प्रधानमंत्री है कि लाल किले पर शौचालय बनाने में किसलिए समय खपा रहा है। लेकिन आज पूरे देश में जितने भी सर्वे होते हैं, हर सर्वे में एक बात उजागर आती है कि इस Team India की सबसे महत्‍वपूर्ण जन-जन को छूने वाली कोई बात है तो वो स्‍वच्‍छता का अभियान है। भाइयो-बहनों हमने स्‍वच्‍छता अभियान को आगे बढ़ाने के लिए समाज के लोगों का आह्वान करते रहते थे 9-9 लोगों का नाम अंकित करते थे एक दौर चल पड़ा था। लेकिन आज इस Team India को मुझे बधाई देनी है चाहे celebrity हो, चाहे राजनयिक हो, चाहे समाज सेवक हो, शिक्षाविद् हो, संप्रदायी जीवन से जुड़े हुए, आध्‍यात्‍मिक जीवन से जुड़े हुए महानुभाव हो, चाहे हमारे media के मित्र हो, सबने किसी की आलोचना किए बिना, बुराइयों को खोजने के बिना, जन-सामान्‍य को प्रशिक्षित करने का एक बहुत बड़ा बीड़ा उठाया है। मैं, जिन्‍होंने इस काम को किया है उन सबका आज ह्दय से अभिनंदन करता हूं। लेकिन सबसे ज्‍यादा एक बात मुझे कहनी है ये स्‍वच्‍छ-भारत के अभियान को ये सबसे बड़ी ताकत कहां से मिली है। उसके सबसे बड़े Brand Ambassador कौन है। आपका ध्‍यान नहीं गया होगा लेकिन आप अपने परिवार में याद कीजिए क्‍या हुआ था। हिन्‍दुस्‍तान में ऐसे कोटि-कोटि परिवार है जिन परिवारों में 5 साल के 10 साल के 15 साल के बालक इस स्‍वच्‍छ भारत अभियान के सबसे बड़े Ambassador बने है। ये बालक घर में कोई कूड़ा-कचरा करता है तो बच्‍चे मां-बाप को रोकते है कि नहीं, गंदगी मत करो, कूड़ा-कचरा मत फेकों, किसी पिता को गुटखा खाने की आदत है और कार का शीशा खोलता है तो बच्‍चा रोक देता है कि दादा बाहर थूकना नहीं, भारत स्‍वच्‍छ रहना चाहिए ये कार्यक्रम की सफलता उन छोटे-छोटे बालकों के कारण है। मैं, मेरे देश के भविष्‍य के प्रति, उन बालकों के प्रति अपना सर झुकाना चाहता हूं। सर झुका करके नमन करना चाहता हूं। जो बात बड़े-बड़े लोगों को समझने में देर लगती है वो भोले-भाले निर्मल मन के बालकों ने तुरंत पकड़ लिया है। और मुझे विश्‍वास है जिस देश का बालक इतना सजग हो, स्‍वच्‍छता के लिए प्रतिबद्ध हो वह देश स्‍वच्‍छ होकर रहेगा। गंदगी के प्रति नफरत पैदा होकर रहेगी। 

2019, महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती हम मनाने वाले हैं और महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती स्‍वच्‍छ भारत को हमें उन्हे अर्पित करना है। महात्‍मा गांधी को 150वीं जयंती पर इससे बड़ी कोई श्रद्धांजलि नहीं हो सकती। और इसलिए अभी तो काम शुरू हुआ है लेकिन मुझे इसको आगे बढ़ाना है। इसको रोकना नहीं है, संतोष मानना नहीं है। मैंने trial के लिए, क्‍या ये काम टीम इं‍डिया कर पाती है कि नहीं कर पाती? इसके ट्रायल के लिए, एक जिसको नाप सकूं, ऐसे कार्यक्रम को मैंने यहां से घोषित किया था। किसी से सलाह-मशविरा करके घोषित नहीं किया था। जिलों से, गांवों से, जानकारियां प्राप्त कर-करके घोषित नहीं किया था। बस मेरे दिल में आया था और मैंने कह दिया था कि अगली 15 अगस्‍त तक हमारे विद्यालयों में हमारे स्‍कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय बना देंगे और बाद में जब हमने काम शुरू किया, टीम इंडिया ने अपनी जिम्‍मेदारी को समझा, ध्‍यान में आया कि इस देश में 2 लाख 62 हजार विद्यालय ऐसे थे, जिसमें सवा चार लाख से ज्‍यादा toilet बनवाने थे। ये आंकड़ा इतना बड़ा था कि कोई भी सरकार सोचती- नहीं साहब! इसके लिए समय बढ़ा दीजिए, लेकिन टीम इंडिया का संकल्‍प देखिए किसी ने भी समय बढ़ाने की मांग नहीं की और आज 15 अगस्‍त को, मैं उस टीम इंडिया का अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने भारत के तिरंगे झंडे का सम्‍मान करते हुए, इस सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और करीब-करीब सारे toilet बनाने के काम में टीम इंडिया ने सफलता पाई है। 

मैं इसके लिए राज्‍य सरकारों को अभिनंदन देता हूं, जिला इकाई में बैठे हुए सरकारी अफसरों को अभिनंदन करता हूं, शिक्षा संस्‍था में बैठे हुए नीति निर्धारक हो या संचालक हो, उन सबका अभिनंदन करता हूं। ये मुद्दा सवा चार लाख toilet बनने का नहीं है। ये मुद्दा, जो निराशा का माहौल है कुछ हो नहीं सकता है, कैसे होगा, कैसे करेंगे, ये जो माहौल है, उस माहौल के सामने यह आत्‍मविश्‍वास पैदा कर सकता है। हम भी कुछ कम नहीं हैं, टीम इंडिया पीछे नहीं हट सकती है, टीम इंडिया सफलता लेके रह सकती है, ये इसमें से संकेत मिल रहा है और इसलिए राष्‍ट्र चलता है आत्‍मविश्‍वास के भरोसे। राष्‍ट्र चलता है नए-नए संकल्‍पों की पूर्ति कर-करके, राष्‍ट्र चलता है, नए-नए सपनों को संजो करके। हम कहीं बंद नहीं हो सकते, हमें निरंतर आगे बढ़ना होता है। और इसलिए 

भाइयों- बहनों हमारे देश का मजदूर, हमने योजना बनाई श्रमेव जयते। भारत में गरीब मजदूर के प्रति देखने का रवैया हमें शोभा नहीं देता है। हम कोई कोट, पैंट, टाई पहना हुआ महापुरूष मिल जाए, लम्‍बा कुर्ता जैकेट पहन करके कोई महापुरूष मिल जाए तो खड़े होकर उसका बड़ा अभिवादन करते हैं। लेकिन कोई ऑटो-रिक्‍शा वाला आ जाए, कोई पैडल रिक्‍शा वाला आ जाए, कोई अखबार बेचने वाला आ जाए, कोई दूध बेचने वाला आ जाए, इन गरीबों के प्रति हमारा देखने का भाव ठीक नहीं है। राष्‍ट्र की इस कमी को सवा सौ करोड़ देशवासियों ने अपने मन के संकल्‍प से मिटाना है। जिनके कारण हम अच्‍छे दिखते हैं, जिनके कारण हमारा अच्‍छा काम होता है, उससे बड़ा हमारा कोई हितैषी नहीं होता है। और इसलिए dignity of labour, श्रमिकों का सम्‍मान, श्रमिकों का गौरव,ये हमारा राष्‍ट्रीय कर्तव्य होना चाहिए यह हमारा राष्‍ट्रीय स्‍वभाव होना चाहिए। यह जन-जन की प्रवृति होनी चाहिए, यह जन-जन की वृत्ति होनी चाहिए। पिछले दिनों कुछ योजनाओं के तहत जो unorganised labour हैं, उनको विशेष पहचान पत्र देने का हमने अभियान प्रारंभ किया। उस पहचान पत्र के द्वारा उसको कई सुरक्षा की योजनाओं का लाभ मिलने वाला है। इन असंगठित मजदूरों की तरफ कभी देखा नहीं जाता था, उसी प्रकार से हमारे देश के मजदूरों ने अपनी मेहनत से सरकार की तिजोरी में अपना हिस्‍सा जमा करवाया। धीरे-धीरे यह रकम 27 हजार करोड़ रुपये पहुंची। लेकिन वो मजदूर बेचारा 6-8 महीने नौकरी करके कहीं और चला जाता है। फिर साल दो साल के बाद कहीं और चला जाता है। आगे जहां पैसे कटवा करके आया है, उसका कोई हिसाब-किताब रहता नहीं। पूंजी भी इतनी कम होती है कि मन नहीं करता है कि चलो 200 रुपये किराया खर्च करके फिर वापस जाकर पैसा ले आऊं। और इसके कारण 27 हजार करोड़ रुपया मेरे देश के गरीबों का, मेरे देश के मजदूरों का, उनकी पसीने की कमाई का सरकार की तिजोरी में सड़ रहा है। हमने उपाय खोजा, हमने मजदूरों को, श्रमिकों को एक special पहचान कार्ड नम्‍बर दे दिया। और उनको कहा कि अब आपका तबादला कहीं पर भी होगा, आप एक नौकरी छोड़कर कहीं पर भी चले जाएंगे, एक कारखाना छोड़कर दूसरे कारखाना चले जाएंगे, एक राज्‍य छोड़कर दूसरे राज्‍य चले जाएंगे यह नम्‍बर आपके साथ-साथ चलेगा और वो रुपये भी आपके साथ-साथ चलते जाएंगे। आपका एक रुपया कोई हजम नहीं कर पाएगा। 27 हजार करोड़ रूपया गरीबों को वापस करने की दिशा में हमने प्रयत्‍न किया। 

हमारे देश में एक फैशन हो गया है। हर चीज में कानून बनाते रहो, हर चीज में कानून बनाते रहो और हमारे न्‍यायालयों को busy रखते रहो। एक कानून से दूसरा कानून उल्‍टी बात बताता हो, लेकिन एक ही विषय का कानून हो। confusion create करना यही काम हमारे यहां चलता रहा। Good Governance के लिए अच्‍छी निशानी नहीं है। और इसलिए कानून स्‍पष्‍ट हो, कानून सटीक हो, कानून कालबाह्य नहीं होना चाहिए। समाज तभी तो गति करता है। हमारे मजदूरों के लिए भिन्‍न-भिन्‍न प्रकार के 44 कानूनों के ढ़ेर, उसमें से बेचारा मजदूर अपने हित की बात कहां खोजेगा। हमने उसमें बदलाव लाया है। 44 कानूनों को चार आचार संहिताओं में समेट करके.. गरीब से गरीब, अनपढ़ से अनपढ़ मजदूर भी अपने हित की बात को पकड़ सकें, इस योजना को हमने बल दिया है। 

भाइयों-बहनों हमारे देश में भ्रष्‍टाचार को ले करके बहुत बातें होती हैं। आपने देखा होगा बीमार व्‍यक्ति भी, दूसरे को स्‍वस्‍थ कैसे रहना चाहिए, उसकी Tips देने का आदत रखता है। खुद तो अपने आप को संभालता नहीं है, लेकिन हर इंसान का स्‍वभाव होता है.. तुम ऐसा करो ठीक हो जाओगे, तुम वैसा करो ठीक हो जाओगे। ये corruption भी ऐसा है, जो इसमें लिप्त है, वो भी सलाह देता है, जो इसके कारण परेशान है, वो भी सलाह देता है और एक प्रकार से एक-दूसरे को सलाह देना, यही चला है। 

भाईयों-बहनों मैंने कभी ये घोषणा नहीं की है, लेकिन आज मैं हिसाब देना चाहता हूं, मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं, मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India को कहना चाहता हूं कि ये देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो सकता है। अनुभव के आधार पर कह रहा हूं, ऊपर से शुरू करना होता है। 

साथ-साथ भ्रष्टाचार हमारे देश में दीमक की तरह लगा हुआ है और दीमक ऐसे फैलती चली जाती है, पहले तो दिखती नहीं है लेकिन जब Bedroom तक जुड़ जाए, कपड़े जहां लगे हो उस cupboard तक पहुंच जाए तब पता चलता है और जब दीमक से मुक्ति लेनी है तो हर square meter जमीन पर injection लगाने पड़ते हैं दवाइयों के, घर में एक जगह पर injection लगाने से काम नहीं बनता है, दीमक को अगर खत्म करना है तो हर square meter में हर महीने injection लगाते रहना पड़ता है तब जाकर के, सालों प्रयास करने के बाद दीमक से मुक्ति मिलती है। इतने बड़े देश में भी भ्रष्टाचार रूपी दीमक से मुक्ति के लिए अनेक प्रकार के कोटि-कोटि प्रयासों की आवश्यकता है और उसे किया भी जा सकता है। 

कभी-कभी, मैं अगर ये कहता कि मैं LPG Gas subsidy 15 हजार करोड़ रूपया cut करने वाला हूं तो मैं दावे से कहता हूं हिंदुस्तान में इस सरकार की वाहवाही के सैंकड़ों लेख लिखे गए होते कि ये मोदी बड़ा दम वाला है कि उसने 15 हजार करोड़ रूपए की गैस की सब्सिडी को बंद कर दिया, ये आदमी है, जो बड़े कठोर निर्णय़ कर सकता है और अगर वो नहीं किया तो यार कुछ होता नहीं है, कुछ दिखता नहीं है। कभी-कभी कुछ लोगों को निराशा के गर्त में डूबने का शौक होता है, जब तक वो चार लोगों के बीच निराशा की बातें न करें, उनको रात को नींद नहीं आती है, ये उनका एक व्यसन होता है। कुछ बीमार लोग होते हैं, जिनको कोई बीमारी के लिए पूछे तो पसंद नहीं आता है, वो चाहते नहीं है कि बीमारी का पता चले और कुछ बीमार ऐसे होते हैं वो इंतजार करते हैं, यार वो आया नहीं, वो पूछने नहीं आया और फिर उसको घंटे भर वर्णन करते हैं कि ऐसा हुआ-ऐसा हुआ है, मैं देख रहा हूं कुछ लोग होते हैं जो निराशा ढूंढ़ते रहते हैं, निराशा फैलाते रहते हैं और जितनी ज्यादा निराशा फैले, उतनी उनको ज्यादा गहरी नींद आती है। ऐसे लोगों के लिए न योजनाएं होती हैं, न कार्यकलाप होते हैं और न ही सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India इनके लिए भी समय invest करने के लिए तैयार है लेकिन होता कैसे है। एलपीजी की सब्सिडी हमने Direct benefit transfer की scheme लाए, जन-धन account का फायदा लिया, आधार कार्ड का फायदा लिया और ग्राहकों के खाते में सीधी सब्सिडी पहुंचाई और इसके कारण जो दलाल थे, उनकी दुकान बंद हो गई, जो बिचौलिए थे, उनकी दुकान बंद हो गई, जो कालाबाजारी थे, उनकी दुकान बंद हो गई। सही व्यक्ति को सही लाभ, किसी का एक रुपया काटा नहीं है। बड़ी वाहवाही हो, ऐसी घोषणाएं नहीं की, व्यवस्था में सुधार किया और मैं आज मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India को कहना चाहता हूं, इसके कारण करीब-करीब 15 हजार करोड़ रुपया, हर साल का 15 हजार करोड़ रुपया जो कि गैस सिलेंडर के नाम से चोरी होता था, वो बंद हो गया, भ्रष्टाचार चला गया मेरे देशवासियों। लगता होगा, काम कैसे होते हैं मेरे भाइयों-बहनों 15 हजार करोड़ रुपया भारत जैसे देश के लिए सामान्य बात नहीं होती और वो हमने करके दिखाया है और हमने खुली website बनाई, डीलरों का यहां board लगवाया। इसके बावजूद भी किसी की भी शिकायत है तो आधी रात को उसको गैस सिलेंडर मिल जाएगा लेकिन देश को लूटने वालों के लिए इजाजत नहीं है, गरीबों के पैसे लूटने वालों के लिए इजाजत नहीं है क्या ये काम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का काम नहीं, है कि नहीं? मेरे भाइयों-बहनों देश से एक request की थी मैंने मेरे देशवासियों से, कि अगर आप आर्थिक रूप से संपन्न हैं तो आप एलपीजी सब्सिडी क्यों लेते हैं, ये 500-700 रुपया आपके लिए क्या जरूरत है। 500-700 रुपया तो आप चाय-पान में एक दिन में खर्च करने वाले लोग हैं। मैंने अभी बात शरू की है, अभियान नहीं चलाया है क्योंकि Team India पर मेरा भरोसा है जैसे-जैसे बात पहुंचेगी परिणाम मिलता जाएगा लेकिन आज मैं गर्व से कहता हूं कि एलपीजी गैस सिलेंडर की सब्सिडी give it up का movement चलाया। अब तक 20 लाख लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी भाइयों। ये आंकड़ा छोटा नहीं है, ये छोटा आंकड़ा नहीं है। हम मंदिर में भी प्रसाद की कतार में भी खड़े रहते हैं तो कभी मन करता है कि छोटे भाई के लिए भी और एक प्रसाद दे दे, ये हमारी प्रकृति है लेकिन और ये 20 लाख कोई अमीर घराने के लोग नहीं हैं, सामान्य मध्यम वर्ग, कोई शिक्षक, पेंशन पर गुजारा करता है लेकिन जब उसने सुना कि ये सिलेंडर किसी गरीब परिवार को जाने वाला है उसने अपनी सब्सिडी छोड़ दी। मेरे भाइयों-बहनों गरीबों के कल्याण के लिए जब 20 लाख गैस सिलेंडर उस गरीब परिवार में पहुंचेंगे, जहां का रसोड़ा kitchen धुंए से भरा हुआ रहता है, आप मुझे बताइए उस मां को कितना सुख मिलेगा, छोटे-छोटे बच्चे धुंए के कारण रोते रहते हैं, उनको कितना सुख मिलेगा। काम सही दिशा में करने से परिणाम मिलता है। भाइयों-बहनों अगर मैं कोयले की चर्चा करूंगा तो कुछ political पंडित उसको राजनीति की तराजू से तोलेंगे, ये जगह उस काम के लिए नहीं है और इसलिए मैं सभी political पंडितों को प्रार्थना करता हूं कि मैं जिस कोयले की चर्चा करने जा रहा हूं, उसको राजनीति की तराजू से कृपा करके मत तोलिए। ये राष्ट्र की संकल्प शक्ति का तकाजा है। जब CAG ने कहा कि कोयले पर्ची से कोयला की खदान देने के कारण 1 लाख 76 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। हम भी चुनाव में बोलते थे लेकिन मन में रहता था कि यार इतना तो नहीं हुआ होगा, बोलते तो थे लेकिन मेरे भाइयों-बहनों हमने समय-सीमा के अंदर तय किया कि कोयला हो, Spectrum हो और कोई खनिज हो अब उसकी नीलामी की जाएगी, auction किया जाएगा और मेरे प्यारे देशवासियों ये Team India का पराक्रम देखिए, सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India का संकल्प देखिए, समय-सीमा में कोयले का Auction हुआ और करीब-करीब 3 लाख करोड़ रुपया देश के खजाने में आएंगे। भाइयों-बहनों आप अपनी आत्मा से पूछिए, क्‍या भ्रष्‍टाचार गया कि नहीं गया, दलालों का ठेका गया कि नहीं गया, हिन्‍दुस्‍तान की संपत्‍ति को लूटने वालों के दरवाजे बंद हुए कि नहीं हुए? मैंने कोई भाषण नहीं दिया था, करके दिखाया। 

Spectrum में वहीं हुआ। अभी एफएम रेडियो का auction चल रहा है, बड़े-बड़े लोग परेशान है। मुझ पर बहुत दबाव डाला गया कि मोदी जी, एफएम रेडियो, रेडियो तो सामान्‍य व्‍यक्‍ति को काम आता है, कोई कमाई नहीं होती है। आप एफएम रेडियो का auction क्‍यों करते हैं। बहुत दबाव डाला गया था। हर प्रकार से मेरा ध्‍यान आकर्षित करने का प्रयास हुआ था। लेकिन हमने कहा, सवा सौ करोड़ देशवासियों की टीम इंडिया transparency चाहती है, पारदर्शिता चाहती है और अभी एफएम रेडियो के करीब-करीब 80-85 शहरों का auction चल रहा है। परसों जब मैंने पूछा auction में हजार करोड़ रुपयों से भी ऊपर चला गया था। ये पैसा गरीब के काम आने वाला है। भाइयों-बहनों, देश को ठेकेदारों ने कैसे चलाया, कैसे लूटा, नीतियों पर प्रभाव पैदा किया। हमारे देश में कैसा कारोबार किया गया है। विदेश से जो कोयला आता है, वो कोयला समुद्री तट के बिजली के कारखानों को नहीं दिया जाता है। उसको जहां कोयले की खदानें हैं, उसके अगल-बगल के कारखानों को देने के लिए वहां से transport किया जाता है और कोयले की खदानों का कोयला है उसको transport करके समुद्र तट के कारखानों तक ले जाया जाता है। इस देश के छोटे बालक को भी समझ आ सकता है कि भाई इधर का माल उधर और उधर का माल उधर के बजाए, जिसका जहां है वहां लगाओ। भाइयों-बहनों हमने निर्णय बदल दिया है। कारखाने के नजदीक में जो है उसका लाभ सबसे पहले उसे मिले और मैं कहना चाहूंगा कि एक छोटे से इस निर्णय ने दलालों की दुकानें बंद की और सरकार की तिजोरी में 1100 करोड़ रुपया जमा हो गया मेरे भाइयों और बहनों, और ये हर वर्ष होगा। 

भ्रष्‍टाचार एक प्रकार से व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा बन गया है। जब तक व्‍यवस्‍था के हिस्‍सों से उसे उकाटा नहीं जाएगा, भाइयों और बहनों मैं आज तिरंगे झंडे की साक्षी से बोल रहा हूं, लाल किले की प्राचीर से बोल रहा हूं। सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों को समझ करके बोल रहा हूं। 15 महीने हो गए, आपने दिल्‍ली में जो सरकार बैठाई है, उस सरकार पर एक नए पैसे के भ्रष्‍टाचार का आरोप नहीं है और मैं, मेरे देशवासियों, आपने, आपने मुझे जिस काम के लिए बैठाया है इस काम को पूरा करने के लिए हर जुर्म को सहता रहूंगा, हर अवरोधों को झेलता रहूंगा। लेकिन आपके आशीर्वाद को लेकर के भ्रष्‍टाचार मुक्‍त भारत के सपने को साकार करके रहूंगा, ये आपको मैं कहने आया हूं। लेकिन मैंने कहा था, ये दीमक है। सिर्फ दिल्‍ली सरकार से भ्रष्‍टाचार जाए इससे बात बनने वाली नहीं है। अभी-भी छोटे-छोटे स्‍थान पर परेशानियां हो रही हैं। गरीब आदमी इन छोटे लोगों की परेशानी से परेशान है। इसके लिए, हमारी एक राष्‍ट्रीय चेतना को जगाने की आवश्‍यकता है। हमने भ्रष्‍टाचार के इस रूप से भली-भांति उसको समझ करके, जन-जन को उसकी मुक्‍ति के लिए जोड़ना है और तब जाकर के इस कलंक को हम मिटा सकते हैं। 

भाइयों-बहनों, मुझे ये भी कहना है, काला धन। काले धन के लिए इतने कम समय में हमने एक के बाद, अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार बनने के पहले दिन सुप्रीम कोर्ट मार्गदर्शन में SIT बना दी। तीन साल से लटका हुआ काम हमने पहले ही सप्‍ताह में पूरा कर दिया, वो SIT आज काम कर रही है। मैं जी-20 समिट में गया, दुनिया के वो देश वहां मौजूद थे, जिनकी मदद से काला धन वापस आ सकता है। जी-20 समिट में भारत के आग्रह पर काले धन के खिलाफ प्रस्‍ताव किया गया और हर देश एक-दूसरे को मदद करेगा, काला धन देशों को वापस पहुंचाने के लिए, इसका संकल्‍प लिया गया। अमेरिका के साथ FATCA का कानून, हमने नाता जोड़ दिया। हमने विश्‍व के उन देशों के साथ उस प्रकार की संधियां की है, ताकि वो देश, अपने पास इस प्रकार का कोई भारतीय नागरिक का धन हो तो उसकी जानकारियां हमें real time में देता रहे। एक के बाद एक कदम उठाते रहे। भाइयों-बहनों हमने एक कठोर कानून पारित किया। अब जब कानून पारित हो गया, तो हर हफ्ते कोई न कोई हमारी सरकार का संपर्क करता है और कहता है आपकी सरकार ने बड़ा जुल्‍म किया है। ऐसा कठोर कानून बना दिया, कोई कहता है कि ऐसा काला कानून बना दिया। इसके कारण अफसरों का जुल्‍म बढ़ जाएगा। भाइयों-बहनों कभी-कभार जब बीमारी बड़ी भयानक होती है तो ऐसे इंजेक्‍शन की जरूरत पड़ती है और जब इंजेक्‍शन लेते हैं, तो डॉक्‍टर भी कहता है कि side effect होगा। लेकिन यह बीमारी इतनी भयंकर है कि side effect झेलने के बाद भी इसी दवा से मुक्ति मिलेगी। मैं जानता हूं यह काला धन का हमने कानून बनाया है, उसके कारण बहुत लोग परेशान हैं, बहुत लोगों को मुसीबत दिखाई दे रही है। काला धन थोड़ा dilute हो, थोड़ा नियमों में छूट आ जाए, इसके लिए हमारे तक संदेश पहुंचाए जाते हैं। मैं इन Team India सवा सौ करोड़ देशवासी मैं आज कहना चाहता हूं, वो side effect की तैयारी के साथ भी काले धन के खिलाफ कठोरता से काम लेने के दिशा में हम आगे बढ़े और बढ़ेंगे और इतना हो गया है काला धन वापस लाने की एक लम्‍बी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इतना तो हो गया है कि अब कोई काला धन बाहर भेजने की हिम्‍मत नहीं करता है। यह तो फायदा हुआ ही हुआ है। कोई माने या न माने। इतना ही नहीं, अभी कुछ दिनों में जब यह समय दिया है कि आप अपना घोषित कर सकते हो। मैं आज कह सकता हूं करीब 65 सौ करोड़ रुपया अब अघोषित आय। लोगों ने आकर के घोषित सामने से करना शुरू कर दिया। यह पैसा हिंदुस्‍तान की तिजोरी में आएगा। भारत के गरीब के काम आएगा। और भाइयों-बहनों आपको जो मैंने विश्‍वास दिया है, उसे पूरा करने के लिए पूरे संकल्‍प के साथ हम आगे बढ़ेंगे। 

भाइयों-बहनों सीबीआई के द्वारा हमारी सरकार बनने के पहले एक वर्ष में भ्रष्‍टाचार के सिर्फ 800 केस हुए थे। 800.. भाइयों-बहनों हमने सत्‍ता में आने के बाद हम तो नये हैं.. अब तक One Thousand Eight Hundred – 1800 केस हम दर्ज करा चुके हैं और अफसरों के खिलाफ हमने कार्रवाई शुरू की है। सरकार के मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। आप कल्‍पना कर सकते हैं हमारे आने से पहले एक साल में 800 और हमारे बाद 10 महीने के भीतर-भीतर 1800, यह बताता है कि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ने का हमारा माद्दा कैसा है। ये दिखाता है कि हमारी भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता, press conference करके हमने नहीं जताई है हमने धरती पर कदम उठा करके जताई है और हमने परिणाम पाया है। हमने व्‍यवस्‍थाओं को बदलने की कोशिश की है, मनरेगा, सीधा जनधन एकाउंट में पैसा कैसे जाए, बच्‍चों की स्‍कॉलरशिप, सीधा पैसा बैंक के एकाउंट में कैसे जाए, कम से कम दलाली कैसे हो, उस दिशा में हमने काम प्रारंभ किया है और मुझे विश्‍वास है कि इन कामों के कारण देश, उन बातों को पूर्ण कर पाएगा। मेरे किसान भाइयों-बहनों, गत वर्ष वर्षा का संकट हुआ था, जितनी मात्रा में वर्षा चाहिए नहीं हुई थी, देश के अर्थतंत्र को भी नुकसान हुआ था और किसानों को भी नुकसान हुआ था। उसके बावजूद भी महंगाई को नीचे लाने में हम सफल हुए। ये मानना पड़ेगा कि हमारे आने से पहले महंगाई double digit थी, दो अंकों में चलती थी। हमारे आने के एक के बाद एक प्रयासों के कारण बारिश कम होने के बावजूद भी, किसान परेशान हुआ, उसके बावजूद भी, महंगाई को दो अंकों से नीचे लाते-लाते, करीब 3-4 percent तक लाने में हम सफल हो गए। उसको और नीचे लाए जाने का प्रयास हमारा जारी रहेगा क्‍योंकि गरीब से गरीब की थाली में संतोषजनक खाना मिले, इन सपनों को ले करके हम चल रहे हैं। 

लेकिन हमारे देश के कृषि जीवन को एक बहुत बड़े बदलाव की आवश्‍यकता है। जमीन कम होती जा रही है, परिवारों में जमीन बंटती चली जा रही है, टुकड़े छोटे हो जा रहे हैं। हमारी जमीन की उपजाऊ ताकत बढ़ानी पड़ेगी, productivity बढ़ानी पड़ेगी, किसान को पानी चाहिए, किसान को बिजली चाहिए। उस सपने को पूरा करने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। पचास हजार करोड़ रुपया, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए हमने लगाने का तय किया है और खेत तक पानी कैसे पहुंचे और पानी बचाना भी होगा। save water, save energy, save fertilizer, इस मंत्र को ले करके हमने हमारे कृषि जीवन में आंदोलन खड़ा करना है और इसलिए हम उस काम को आगे बढ़ाने के लिए per drop more crop एक-एक बूंद से अधिकतम फसल और सफल किसान इस काम का आगे बढ़ाने की दिशा में, ये धन खर्च करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। पिछले दिनों जब ओले गिरे, हमने 50 प्रतिशत उसको जो क्षति हुई थी, उस क्षति पूर्ति में वृद्धि कर दी। 60 साल में इतना बड़ा jump कभी लगा नहीं, इतना ही नहीं पहले अगर कभी नुकसान होता था तो 50 प्रतिशत नुकसान हो, तभी वो मुआवजे के दायरे में आता था, हमने इसको कम करके 30 प्रतिशत कर दिया। इससे बड़ा किसान को मदद का काम, पिछले 60 साल में कभी हुआ नहीं है। किसान को urea चाहिए, हमने नीम कोटिंग urea, मैं फिर एक बार कहता हूं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ कैसे लड़ाई लड़ी जा सकती है, नीम कोटिंग, नीम कोटिंग ये कोई मोदी के दिमाग की पैदावार नहीं है, ये वैज्ञानिकों से सुझाया हुआ विचार है, और ये विचार सिर्फ मेरी सरकार के सामने आया ऐसा नहीं, पहले भी सरकारों के सामने आया है। 

हमारे देश में किसानों के नाम urea जाता है, अरबों-खरबों का urea जाता है, लेकिन वो यूरिया 15%, 20%, 25% chemical की फैक्‍ट्ररियों में चला जाता है, raw material के रूप में। नाम किसान का होता है, दलालों के माध्‍यम से चोरी होती है। नीम coating शत-प्रतिशत किये बिना यह चोरी रोकी नहीं जा सकती। और इसलिए हमने सरकार की तिजोरी पर बोझ पड़े तो भी, यूरिया का 100% नीम coating करने का काम पूरा कर दिया। और इसके कारण अब यह यूरिया खेती के सिवा किसी काम नहीं आ सकता। कोई chemical फैक्‍ट्री इसमें से कुछ नहीं निकाल सकती। और इसलिए किसान को जितना यूरिया चाहिए, उतना मिलेगा और नीम coating होने के कारण उसको जो nutrition value चाहिए जमीन में 10% कम यूरिया उपयोग करते हुए भी उसको इसका लाभ मिलने वाला है, आने वाले season में मेरे देश के किसानों को यूरिया का एक नया लाभ। और मैं तो सभी किसानों को कहता हूं, कोई गलती से भी बिना नीम coating का यूरिया आपको दिखाता है, तो आप मान लेना कि वो सरकार के द्वारा अधिकृत नहीं है। किसी ने पीले रंग का कोई पाऊडर आपको दे दिया है, आप हाथ मत लगाना। 

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों मैं कहता हूं कि भारत का अगर विकास करना है तो पूर्वी हिंदुस्‍तान के विकास के बिना भारत विकसित नहीं हो सकता। भारत का पश्चिमी छोर, यही अगर आगे बढ़ेगा, तो हिंदुस्‍तान कभी आगे नहीं बढ़ सकता। हिंदुस्‍तान तब आगे बढ़ेगा, जब हमारा पूर्वी उत्‍तर प्रदेश ताकतवर बने, हमारा बिहार ताकतवर बने, हमारा पश्चिम-बंगाल ताकतवर बने, हमारा असम, हमारा ओडि़शा, हमारा north east, यह भू-भाग हिंदुस्‍तान का, यह ताकतवर बनना चाहिए। और इसलिए infrastructure का मामला हो, Rail connectivity का मामला हो, Digital Connectivity का मामला हो, हमने हर बात में पूर्वी भारत में ध्‍यान केंद्रित किया है और पूर्वी भारत में ध्‍यान करने में, हम गैस की पाइप-लाइन लगा रहे हैं। किसी ने सोचा होगा कि जिन राज्‍यों में kitchen में पीने का पानी अभी Tap से आना मुश्किल लगता है, वहां गैस का पाइप तक पहुंचाने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। और चार यूरिया Fertilizer के कारखाने जो पूर्वी भारत में बंद पड़े थे, वहां के नौजवान बेरोज़गार हुए थे, वहां का किसान परेशान हो रहा था। हमने नई यूरिया नीति बनाई, हमने गैस supply की नई नीति बनाई और उसका परिणाम है कि गोरखपुर हो, बरेली हो, तालचेर हो, सिंदरी हो, यह सारे पूर्व से जुड़े हुए, इनके Fertilizer के कारखानों को पुनर्जीवित करके नौजवानों को रोज़गार देना और किसानों को Fertilizer देना, उसकी दिशा में हम काम कर रहे हैं। भाइयों-बहनों देश में सेना के जवानों के लिए, जवानों के कल्‍याण के लिए विभाग होता है। लेकिन इस देश में जितना माहात्म्य जवान का है, उतना ही माहात्म्य किसान का है। 60 साल में हमने क्‍या किया है, हमने कृषि के आर्थिक पहलू पर बल दिया है। हमारी कृषि अच्‍छी हो, कृषि का विकास हो, और सरकार के मंत्रालय का नाम भी कृषि मंत्रालय रहा। भाइयों-बहनों कृषि मंत्रालय का जितना महत्‍व है, उतना ही महत्‍वपूर्ण समय की मांग है, किसान कल्‍याण का भी महत्‍व है। अकेले कृषि विकास यह बात, ग्रामीण जीवन के लिए, कृषि जीवन के लिए अधूरी है, वो पूर्ण तब होगी जब किसान-कल्‍याण को भी जोड़ा जाए। और इसलिए भाईयों-बहनों अब भारत सरकार का जो मंत्रालय कृषि मंत्रालय के रूप में जाना जाता था, वो कृषि मंत्रालय एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के रूप में जाना जाएगा और आने वाले दिनों में कृषि के लिए जैसे योजना बनेगी, वैसे ही किसान कल्‍याण की भी योजना बनेगी, ताकि मेरे किसान को जो व्‍यक्तिगत जीवन में समस्‍याएं झेलनी पड़ती हैं, मुसीबतों से गुजरना पड़ा है, तो सरकार एक स्‍थायी व्‍यवस्‍था के रूप में उसको मदद करने की दिशा में प्रयास करेगी। भाईयों-बहनों आने वाले दिनों में एक काम की ओर मैं ध्‍यान देना चाहता हूं, आजादी के इतने वर्ष हो गए लेकिन आज भी हमारे देश में करीब साढ़े 18 हजार, 18,500 गांव ऐसे हैं कि जहां बिजली का तार नहीं पहुंचा है, बिजली का खंभा नहीं पहुंचा है। आजादी का सूरज, आजादी का प्रकाश, आजादी के विकास की किरणें, 18500 गांव वंचित हैं। अगर पुराने तरीके से चलते रहे तो शायद इन 18,500 गावों में खंभा पहुंचाते-पहुंचाते, बिजली का तार पहुंचाते-पहुंचाते, 10 साल लग जाएंगे। देश, 10 साल इंतजार करने के लिए तैयार नहीं है। मैंने सरकार के मुलाजिमों की meeting ली, मैंने उनको पूछा, क्या करोगे तो कोई कहता है साहब 2019 तक कर देंगे, कोई कहता है 2022 तक कर देंगे। बोले घने जंगलों में है। फलानी जगह पर है, पहाड़ों में है, बर्फीली प्रदेश में है, कैसे पहुंचे? 

सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India का संकल्प है, इन 18500 गांवों में 1000 दिन के अंदर बिजली का खंभा, बिजली का तार और बिजली पहुंचे ये काम पूरा करके दिया जाएगा और मैं राज्यों से आग्रह करता हूं कि हम इसको करके दिखाएं और सब राज्यों में ये बाकी नहीं है, कुछ ही राज्यों में ज्यादा बाकी है। अगर मैं उन राज्यों का नाम दूंगा तो फिर मेरी बात को political तराजू से तौला जाएगा, राजनीतिक छींटाकशी होगी और इसलिए मैं उस चक्कर में पड़ना नहीं चाहता और इसलिए मैं कहता हूं सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India, लालकिले से ये संकल्प करती है कि राज्यों के सहयोग से, स्थानीय इकाइयों के सहयोग से, आने वाले 1000 दिन में 18500 गांवों में हम बिजली पहुंचाने का काम करेंगे। 

हमारे देश में जैसे किसान कल्याण एक चिंता का विषय मैंने हाथ लगाया है, उसी प्रकार से जहां से देश को ताकत मिलती है, जहां से खनिज संपदा निकलती है। चाहे कोयला निकलता हो, चाहे बॉक्साइट निकलता हो, चाहे और खनिज संपदा निकलती हो लेकिन वहां का जो क्षेत्र है, उसके विकास के प्रति उदासीनता रहती है। आप वहां के लोगों का जीवन देखो, हमारे देश को तो वो समृद्ध बनाने के लिए पसीना बहाते हैं लेकिन उस क्षेत्र का विकास नहीं होता है और इसलिए हमने जहां से खनिज निकलती है, वहां के मजदूरों के विकास के लिए, वहां के किसानों के विकास के लिए एक विशेष योजना बनाई है और हर वर्ष करीब-करीब 6 हजार करोड़ रुपया उन-उन इलाकों के लिए खर्च किया जाएगा जो ज्यादातर मेरे आदिवासी भाइयों के इलाके में है, मेरे आदिवासी क्षेत्रों में है। कोयला कहां है, आदिवासियों के बीच में है, वहां का विकास हो उस पर हमने काम शुरू किया है। 

भाईयों-बहनों, 21वीं सदी में देश को आगे बढ़ाने में हमारी युवा शक्ति का महत्व है और आज मैं घोषित करना चाहता हूं। पूरे विश्व की तुलना में हमें आगे बढ़ना है तो हमारे युवकों को हमें प्रोत्साहित करना होगा, उनको अवसर देना होगा। हमारे युवक नए उद्योगकार कैसे बने, हमारे युवक, नए उत्पादक कैसे बने, पूरे देश में इन नए उद्यमियों के द्वारा एक Start up का पूरा Network कैसे खड़ा हो? हिंदुस्तान का कोई जिला, हिन्‍दुस्‍तान का कोई ब्लॉक ऐसा न हो जहां आने वाले दिनों में नए Start up शुरु न हुए हों। क्या भारत यह सपना नहीं देख सकता कि हम दुनिया में, Start up की दुनिया में भारत नंबर एक पर पुहंचेगा, आज हम नहीं हैं। भाईयों और बहनों इस Start up को मुझे बल देना है और इसलिए मेरा संकल्प है आने वाले दिनों में Start up India और देश के भविष्य के लिये Stand Up India! Start Up India! Stand up India… यह Start Up India! Stand Up India! इस काम को जब मैं आगे लेकर जाना चाहता हूं तब मेरे भाइयों-बहनों हमारे देश में पिछले एक साल में बैंक के लोगों ने बहुत बड़ा पराक्रम किया.. और जब आप अच्छा करते हो तो मेरी जरा अपेक्षाएं भी ज्यादा बढ़ जाती है। मेरे बैंक के मित्रों बाबा साहब आंबेडकर की सवा सौवीं जयंती का वर्ष 125वीं जयंती का वर्ष, सवा लाख बैंक की ब्रांच हैं। क्या हमारे बैंक की ब्रांच.. ये जो मेरा Start Up India का कार्यक्रम है, उसकी और कोई योजनाएं बनेंगी.. लेकिन हर ब्रांच यह संकल्प करे और आने वाले दिनों में इसको पूरा करे कि अपने बैंक के ब्रांच के इलाके में हर ब्रांच जहां, Tribal बस्ती हो वहां मेरे आदिवासी भाई को जहां, आदिवासी बस्ती नहीं हैं वहां मेरे दलित भाई को और हर ब्रांच एक दलित को या एक आदिवासी को Start Up के लिये लोन दें Financial मदद करें औऱ एक साथ देश में सवा लाख मेरे दलित उद्योगकार पैदा हों। इस देश में Tribal बस्ती में मेरे आदिवासी उद्योगकार पैदा हों। ये काम हम कर सकते हैं Start Up को एक नया Dimension दे सकते हैं। और दूसरा ये सवा लाख ब्रांच.. क्या विशेष योजना.. महिला उद्यमी के लिये बना सकती हैं। सवा लाख ब्रांच, सवा लाख महिला उद्यमी उनके Start Up को Promote करें उनको मदद करें। आप देखिए, देखते ही देखते हिन्दुस्तान के कोने कोने में Start Up का जाल बिछ जाएगा। नये उद्योगकार तैयार होंगे। कोई एक कोई दो कोई कोई चार को नौकरी देगा और देश के आर्थिक जीवन में बदलाव आएगा। भाइयों बहनों देश में जब पूंजी निवेश होता है तो हम एक बात पर आग्रह रखते हैं कि Manufacturing का काम हो और ज्यादा से ज्यादा Export हो और उसके लिये पूंजी निवेश करने वालों को सरकार का आर्थिक विभाग अनेक नई - नई स्कीम देता है। इसका अपना महत्व है इसको बनाए रखना है। लेकिन आज मैं एक नई बात लेकर करे आगे बढ़ना चाहता हूं। हमारे देश में जो पूंजी निवेश हो, Manufacturing Sector में पूंजी निवेश हो, उसमें सरकार की मदद के जो Parameter है उसमें एक महत्वपूर्ण Parameter यह रहेगा कि आप जिस उद्योग को ला रहे हो उसमें आप अधिकतम - अधिकतम लोगों को अगर रोज़गार देंगे तो आपको आर्थिक Package अलग प्रकार का मिलेगा। सरकार की सहायता रोज़गार के साथ जोड़कर के नई इकाइयों के लिये सरकार अब योजना बनाएगी। देश में रोज़गार के अवसर बढ़ें, उस पर हम बल देना चाहते हैं। Skill India, Digital India इन सपनों को पूरा करने की दिशा में हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं। भाइयों-बहनों, भ्रष्टाचार का एक क्षेत्र है नौकरी। गरीब से गरीब व्यक्ति चाहता है कि बेटे को नौकरी मिले। और हमने देखा है जब नौकरी के लिये Interview का कॉल आता है तो नौजवान किसी को ढूंढता है कि मेरा रेलवे में Interview आया है, टीचर में Interview आया है, टूल का Interview आया है, ड्राइवर का Interview आया है, कोई सिफारिश के लिये किसके पास जाऊं विधवा मां भी सिफारिश के लिये जगह सोचती है। क्‍यों, क्‍योंकि हमारे यहां merit से भी ज्‍यादा interview के कारण व्‍यक्‍ति के साथ न्‍याय और अन्‍याय के खेल खेले जाते हैं और कहा जाता है कि interview में फेल हो गए। मैंने अभी तक ऐसे मनोवैज्ञानिक नहीं देखे हैं कि दो मिनट का interview करें और मनुष्‍यों को पूरा जांच लें। भाइयों-बहनों, मेरे मन में कई दिनों से चल रहा है एक गरीब मां का बेटा है। कम शिक्षा पाया हुआ व्‍यक्‍ति, जिसे छोटी-छोटी नौकरियों की जरूरत है। क्‍या उसको interview देना जरूरी है। क्‍या बिना interview के नौकरी नहीं मिल सकती है। क्‍या online उसकी मार्कशीट के आधार पर, ऑनलाइन उसकी मार्कशीट के आधार पर यह तय हो कि हमें 500 लोगों की जरूरत, पहले 500 लोग कौन है। हमें 2000 की जरूरत है, पहले 2000 कौन है। हां, जहां पर physical fitness की testing है, उसके दायरे अलग हो, उसकी पद्धति अलग हो। जहां ऊपर की नौकरियां है, जहां पर personality का महत्‍व रहता है, appearance का महत्‍व रहता है, लेकिन छोटी-छोटी। मैं तो देख रहा हूं रेलवे की नौकरी के लिए नागालैंड, मिजोरम से लोग exam देने के लिए, interview देने के लिए मुंबई तक बेचारे दौड़ते हैं। ये मुझे बीमारी बंद करनी है। मैं आग्रह करता हूं राज्‍य सरकारों को, मैं आग्रह करता हूं सरकार के मेरे सभी साथियों को कि हम छोटी-छोटी नौकरियों से ये interview हो सके उतना जल्‍द बंद करें। merit के आधार पर दें। देश में से भ्रष्‍टाचार जो गरीब आदमी को परेशान करता है, उसे उसको मुक्‍ति मिलेगी और उसको हमें पूरा करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए, ये मेरा आग्रह है। 

मेरा देश चैन से सोता है। सवा सौ करोड़ देशवासी चैन की नींद सोते हैं। उसका कारण हमारे देश के जवान सीमा पर अपने आप को बलि चढ़ाने के लिए प्रति पल तैयार रहते हैं। कोई देश, अपनी सेना का मूल्‍यांकन कम नहीं आंक सकता है। सवा सौ करोड़ देशवासियों की टीम इंडिया, उनके लिए भी मेरे देश का हर फौजी, हर जवान, हर सैनिक एक राष्‍ट्र की शक्‍ति है, राष्‍ट्र की संपत्‍ति है, राष्‍ट्र की ऊर्जा है। 

कई वर्षों से कई सरकारें आई और चली गई। one rank one pension ये विषय हर सरकारों के सामने आया है। हर सरकारों के सामने प्रस्‍ताव रखे गए हैं। हर सरकारों ने छोटे-मोटे वचन भी दिए हैं, वादे भी किए हैं, लेकिन समस्‍या का समाधान नहीं हुआ है। मेरे आने के बाद भी अभी तक मैं इसको कर नहीं पाया। मैं आज मेरे सेना के सभी जवानों को विश्‍वास फिर से एक बार दे रहा हूं और ये बात, एक व्‍यक्‍ति नहीं बोल रहा है। सवा सौ करोड़ टीम इंडिया की तरफ से मैं कह रहा हूं, तिरंगे की छत्रछाया में कह रहा हूं। लाल किले की प्राचीर से कह रहा हूं। मेरे सेना के जवानों, सिद्धांतत: one rank, one pension हमने स्‍वीकार किया हुआ है। लेकिन इसके संगठनों से बातचीत का दौर चल रहा है। हम चाहते हैं अंतिम दौर में ये जहां तक पहुंची है। संपूर्ण राष्‍ट्र के विकास को ध्‍यान में रखते हुए हर किसी को न्‍याय मिले। इस बात को ध्‍यान में रखते हुए 20-20, 25-25 साल से लटकी हुई समस्‍या का हमने रास्‍ता खोजना है। मुझे विश्‍वास है कि जिस विश्‍वास के साथ वार्ता चल रही है, मैं सुखद परिणाम की आशा करता हूं और इसलिए मैं फिर एक बार विश्‍वास दिलाता हूं कि सिद्धांतत: इस सरकार ने one rank , one pension की बात को स्‍वीकार किया है। उसकी Nitty gritty को देख करके लागू कैसे किया जाए, उसके लिए संबंधित लोगों से बातचीत करके हमारी बात को आगे हम बढ़ा रहे हैं। 

भाइयो-बहनों, 2022, भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। भारत की आजादी के 75 साल, 2022, 15 अगस्‍त को मना करके चुप नहीं होना है। आज ही, आज इसी 15 अगस्‍त को, 2022, 15 अगस्‍त के लिए हमें संकल्‍प लेना है। हिन्‍दुस्तान के 6 लाख गांव, हर गांव एक सपना तय करे, संकल्‍प तय करे कि 2022 को हमारे गांव को इस समस्‍या से हम मुक्‍त कर देंगे। 

सवा सौ करोड़ देशवासी अपने जीवन में, 2022 भारत की आजादी के 75 साल हम भी एक संकल्‍प करें, हर नागरिक एक संकल्‍प करे कि मैं देश की भलाई के लिए, समाज की भलाई के लिए इस काम को करुंगा। एक बार मेरे सवा सौ करोड़ देशवासी एक संकल्‍प ले करके आगे बढ़ें तो 2022 का जब सवेरा होगा 15 अगस्‍त का, हमारे देश के लिए मर-मिटने वाले आजादी के सैनिकों, उनकी आत्‍मा जब देखेगी तो देश ने सवा सौ करोड़ संकल्‍पों को पूरा किया होगा। 6 लाख गांव ने 6 लाख सपनों को पूरा किया होगा। शहरों ने, महानगरों ने, सरकार के हर विभाग ने, सरकार की हर इकाई ने एक-एक संकल्‍प ले करके अभी से जुट जाना है और अब हमारा कोई literature ऐसा न हो, हमारी कोई बात ऐसी न हो जिसमें 2022, 15 अगस्‍त को दोहराया न जाए। जिसमें आजादी के 75 साल का संकल्‍प को दोहराया न जाए। एक momentum खड़ा करना चाहिए। 

आजादी का आंदोलन, भाइयो-बहनों, दशकों तक चला, आजादी सामने नहीं दिखती थी तो 1910 में भी कोई आजादी की बात करता था, बीस में करता था, तीस में भी करता था। दशकों तक एक बात को दोहराया गया तब आजादी प्राप्‍त हुई। स्‍वाभिमानी, गौरवशाली, समृद्ध राष्‍ट्र के लिए हमें सक्षम-भारत बनाना है, समृद्ध-भारत बनाना है, स्‍वस्‍थ-भारत बनाना है, सुसंस्कृत-भारत का सपना हमें पूरा करना है। स्‍वाभिमानी भारत बनाना है, श्रेष्‍ठ भारत बनाना है। 2022 तक इस देश में कोई गरीब बिना घर के न रहे। 24 घंटे बिजली पहुंचाने की दिशा में हमें सफल होना है। हमारा कृषक सबल हो, हमारा श्रमिक संतुष्‍ट हो, हमारी महिलाएं सशक्‍त हों, हमारे युवा स्‍वाबलंबी हों, हमारे बुजुर्ग सकुशल हों, और हमारे गरीब सम्‍पन्‍न हों, समाज में कोई पिछड़ा न रहे। हमारे हर किसी के अधिकार समान हो, और पूरे भारतीय समाज में समरसता का माहौल हो, इसी सपने के साथ मैं फिर एक बार आजादी के पावन-पर्व पर आजादी की 75वीं वर्षगांठ एक निश्चित role में आपके साथ, आगे बढ़ाने की तैयारी के साथ सवा सौ करोड़ देशवासियों को हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। 

मेरे साथ पूरी ताकत से बोलेंगे- 
भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्, वंदे मातरम्।
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद।                                                                              (PIB)
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GG/AKT/AK/NT/SH/MV

Thursday, August 15, 2013

स्वतंत्रता दि‍वस 2013 के अवसर पर प्रधान मंत्री का भाषण

15-अगस्त-2013 08:42 IST
आज यकीनन ही खुशी का दिन लेकिन हमारे दिलों में दर्द भी है
लाल किले की ऐतिहासिक प्राचीर से जय हिन्द का जय घोष करते प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह 
आज प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने स्‍वतंत्रता दि‍वस 2013 के अवसर पर लाल कि‍ले के प्राचीर से देश को संबोधि‍त कि‍या । इस अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है - 

“मेरे प्यारे भारतवासियो, 

भाइयो-बहनो और प्यारे बच्चो, 

मैं आप सभी को इस स्वाधीनता दिवस पर बधाई देता हूँ। 

आज यकीनन ही खुशी का दिन है। लेकिन आज़ादी के इस त्यौहार पर हमारे दिलों में इस बात का दर्द भी है कि उत्तराखण्ड के हमारे भाई-बहनों को करीब दो महीने पहले भारी तबाही का सामना करना पड़ा। हमारी संवेदना और सहानुभूति उन सभी परिवारों के साथ है जिनको जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा । मैं आज उत्तराखण्ड की जनता को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि इस मुश्किल की घड़ी में सारा देश उनके साथ है। हमारी सरकार जल्द से जल्द लोगों के उजड़े हुए घर दोबारा बसाने और बर्बाद हुए Infrastructure को फिर से बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत से काम कर रही है। 

उत्तराखण्ड में कठिन परिस्थितियों में हमारी फौज़, अर्धसैनिक बलों और केन्द्र और राज्य सरकार के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों ने आम लोगों के साथ मिलकर, घिरे हुए लोगों को राहत पहुंचाने का जो काम किया, वह तारीफ के काबिल है। हम ख़ास तौर पर Air Force, ITBP और NDRF के उन अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने दूसरों को बचाने में अपनी जान कुर्बान कर दी। 

हमें इस बात का भी बेहद अफसोस है कि कल एक दुर्घटना में हमने अपनी पनडुब्बी INS Sindhurakshak को खो दिया। इस हादसे में 18 बहादुर नौसैनिकों के शहीद होने की आशंका है। यह नुकसान इसलिए और भी दर्दनाक है क्योंकि अभी हाल में हमारी Navy ने अपनी पहली Nuclear पनडुब्बी Arihant और Aircraft Carrier, INS Vikrant के रूप में दो बड़ी कामयाबियां हासिल की थीं। 

हम शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। साथ-साथ Navy की सफलताओं के लिए उन्हें मुबारकबाद भी देते हैं। 

भाइयो और बहनो, 

1947 में महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में हमने आज़ादी हासिल की। उसके बाद के अपने सफर पर अगर हम ग़ौर करें तो पाएंगे कि हर दस साल पर हमारे देश में बड़े बदलाव आए हैं।

1950 के दशक में पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के नेतृत्व में एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में भारत ने अपने पहले कदम रखे। देश में Atomic Energy Commission, योजना आयोग और निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं की स्थापना की गई जिन्होंने आगे चलकर राष्ट्र निर्माण के काम में बहुत बड़ा योगदान दिया। पहली बार आम चुनाव कराए गए और देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए पहली पंचवर्षीय योजना बनाने का सिलसिला शुरू किया गया। 

1960 के दशक में पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने नए-नए उद्योग और कारखाने लगवाए, नई सिंचाई परियोजनाएं शुरू की और नए विश्वविद्यालय खोले। राष्ट्र निर्माण में विज्ञान और Technology के महत्व पर ज़ोर देकर उन्होंने इस प्राचीन देश को एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया। 

1970 के दशक में इंदिरा जी ने हमारे राष्ट्र का आत्मविश्वास बढ़ाया। इस दौरान हमने अंतरिक्ष में अपना पहला उपग्रह छोड़ा। हरित क्रांति ने पहली बार हमें अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्रदान की। 

राजीव गांधी जी ने अगले दशक में तकनीकी और आर्थिक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान Information Technology के क्षेत्र में हमारी प्रगति की नींव रखी गई। 

पंचायती राज संस्थाओं के महत्व पर ज़ोर दिया गया जिसकी वजह से आगे चलकर इन संस्थाओं को मज़बूत और अधिकार संपन्न बनाने के लिए हमारे संविधान में संशोधन हुआ। 

साल 1991 में हमने श्री नरसिम्हा राव जी के नेतृत्व में एक बहुत बड़े आर्थिक संकट का सामना बख़ूबी किया और देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए आर्थिक सुधारों को अपनाया। उस समय इन सुधारों का कई राजनैतिक दलों ने विरोध किया। लेकिन ये सुधार राष्ट्र हित में थे और इसीलिए बाद में आने वाली सभी सरकारों ने उनको जारी रखा। साल 1991 से लेकर आज तक सुधारों की ये प्रक्रिया आगे बढ़ती रही है। 

भाइयो और बहनो, 

मेरा मानना है कि पिछला दशक भी हमारे देश के इतिहास में बहुत बड़े बदलावों का दशक रहा है। देश की आर्थिक समृद्धि जितनी इस दशक में बढ़ी है उतनी पहले किसी दशक में नहीं बढ़ी। लोकतांत्रिक ताकतों को बढ़ावा मिला है और समाज के बहुत से वर्ग विकास की प्रक्रिया से पहली बार जुड़े हैं। आम आदमी को नए अधिकार मिले हैं जिनकी बदौलत उसकी सामाजिक और आर्थिक ताकत बढ़ी है। 

भाइयो और बहनो, 

मई 2004 में पहली UPA सरकार सत्ता में आई थी। तब से लेकर आज तक हमने एक प्रगतिशील और आधुनिक भारत बनाने के लिए लगन और ईमानदारी से काम किया है। 

हमने एक खुशहाल भारत की कल्पना की है। एक ऐसा भारत जो सदियों से चले आ रहे गरीबी, भूख और बीमारी के बोझ से मुक्ति पा चुका हो। जहाँ शिक्षा के उजाले से अज्ञानता और अंधविश्वास के अंधेरे दूर हो चुके हों। 

जहां सामाजिक समानता हो और सबको एक जैसे आर्थिक अवसर प्राप्त हों। जहाँ समाज के किसी भी तबके को अन्याय और शोषण का सामना न करना पड़े। 

हमने एक ऐसे भारत का सपना देखा है जहाँ नौजवानों को रोज़गार के ऐसे अवसर मिलें जिनके जरिए वह राष्ट्र निर्माण के महान काम में योगदान कर सकें। 

हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आवाज़ बुलंद करनी चाही है। हमने एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना चाहा है जिसे सारी दुनिया आदर और सम्मान के साथ देखे। 

इन सपनों को साकार करने के लिए हमने कई कदम उठाए हैं। लेकिन सफर लंबा है, अभी बहुत फासला और तय करना है। 

भाइयो और बहनों, 

अभी कुछ दिन पहले हमने Food Security कानून बनाने की दिशा में एक Ordinance जारी किया है। Food Security Bill अब संसद के सामने है और हमें उम्मीद है यह जल्द ही पास हो जाएगा। इस कानून का फायदा हमारे गांवों की 75 प्रतिशत और शहरों की आधी आबादी को पहुंचेगा। इसके तहत 81 करोड़ भारतीयों को 3 रुपये प्रति किलो चावल, 2 रुपये प्रति किलो गेहूं और 1 रुपये प्रति किलो मोटा अनाज मिल पाएगा। यह दुनिया भर में इस तरह का सबसे बड़ा प्रयास है। 

हम अपने किसानों की मेहनत की वजह से ही इस कानून को लागू कर पाए हैं। साल 2011-12 में हमारी अनाज पैदावार 25.9 करोड़ टन रही, जो एक रिकार्ड है। 

बिना तेज़ कृषि विकास के हम अपने गांवों में खुशहाली पहुंचाने का मक़सद हासिल नहीं कर सकते हैं। पैदावार बढ़ाने और किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य दिलवाने के लिए हमने लगातार कोशिशें की है। फसलों के खरीद मूल्यों में पिछले 9 सालों में पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ोत्तरी की गई है। गेहूं और धान के खरीद मूल्य दुगुने से भी अधिक किए गए हैं। कई ऐसे राज्यों में जहां पहले अनाज की कमी रहती थी आज उनकी अपनी ज़रूरत से ज़्यादा पैदावार हो रही है। 

11 वीं पंच-वर्षीय योजना के दौरान कृषि विकास की औसत सालाना दर 3.6 प्रतिशत रही है जो 9वीं और 10वीं योजना, दोनों से ज्यादा है। 

अब ग्रामीण इलाकों में खुशहाली बढ़ने के साफ संकेत दिखाई देने लगे हैं। साल 2004 से लेकर 2011 तक प्रतिव्यक्ति उपभोग किया जा रहा सामान और सुविधाएं पहले के मुकाबले चार गुना तेजी से बढ़े हैं। 

ग्रामीण मजदूरी दर में भी कहीं अधिक तेजी से वृद्धि हुई है। मनरेगा की बदौलत ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों गरीब लोगों को रोज़गार मिल रहा है। 

गरीबी को नापना एक मुश्किल काम है। गरीबी की परिभाषा को लेकर लोगों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हम गरीबी की चाहे कोई भी परिभाषा अपनाएं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि 2004 के बाद गरीबी कम होने की गति तेज़ हुई है। 

कई ऐसे राज्य, जो बहुत समय से पिछड़े माने जाते थे और जिनमें से कुछ को "बीमारू" कहा जाता था, आज तेज़ी से विकास कर रहे हैं। 

भारत में हर बच्चे को शिक्षा के अवसर देने के लिए हमने शिक्षा का अधिकार कानून बनाया है। आज देश में लगभग सभी बच्चे प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे हैं। 

कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या पिछले नौ सालों में दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है। गरीबों और कमजोर तबकों के बच्चों को शिक्षा के अवसरों का फायदा दिलाने के लिए हमने बड़े पैमाने पर वज़ीफों के कार्यक्रम शुरू किए हैं। आज देश भर में 2 करोड़ से ज़्यादा बच्चों को केन्द्र सरकार द्वारा वज़ीफे दिए जा रहे हैं। 

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई नए संस्थान खोले गए हैं। जैसे 8 नए IIT, 7 नए IIM, 16 नई Central Universities और 10 नए NIT । Scientific Research को बढ़ावा देने के लिए भी नई संस्थाएं खोली गई हैं। Science की पढ़ाई में ज्यादा छात्रों को शामिल करने के लिए और विदेशों से भारतीय Scientists की वापसी आसान करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। 

लेकिन शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। बहुत सारे स्कूलों में अभी भी पीने का साफ पानी, शौचालय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। शिक्षा की Quality को बेहतर बनाने की ज़रूरत है। इसके लिए अध्यापकों की training पर ज़्यादा जोर दिया जाना आवश्यक है। 

Mid-day-Meal योजना में रोज करीब 11 करोड़ बच्चों को स्कूलों में दोपहर का खाना दिया जा रहा है। यह योजना बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है। लेकिन इसको बेहतर तरह से लागू करना भी बहुत ज़रूरी है। बिहार में पिछले दिनों जो दर्दनाक हादसा हुआ वह देश में कहीं भी दोबारा नहीं होना चाहिए। 

2005 में हमने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरूआत की थी। इस मिशन के अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। देश में Maternal Mortality Rate और Infant Mortality Rate दोनों तेज़ी से घटे हैं। पहले से कहीं अधिक बच्चों का जन्म आज अस्पतालों में होता है। टीकाकरण के प्रतिशत में भी काफी वृद्धि हुई है। 

पिछले दो सालों से हमारे देश में पोलियो का कोई भी केस सामने नहीं आया है। हमें एक ऐसे रोग को मिटाने में कामयाबी मिली है जो लाखों लोगों को अपंग बना दिया करता था। 

हमारे ग़रीब भाई-बहनों को अस्पतालों में इलाज के लिए मुफ्त बीमा सुविधा प्रदान कराने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना अब साढ़े तीन करोड़ परिवारों को फायदा पहुंचा रही है। 

हमने शहरी क्षेत्रों में भी Health Mission लागू किया है जिससे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और उनमें सुधार आएगा। 

महिलाओं की सुरक्षा को बेहतर करने के लिए, हमने महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित कानून को मज़बूत बनाया है। 

Infrastructure यानि सड़कों, रेलगाड़ी, बिजली उत्पादन, Civil Aviation, बंदरगाहों और Telecom जैसे क्षेत्रों में भी पिछले 9 सालों में काफी तरक्की हुई है। गांवों को जोड़ने वाली प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2 लाख किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। सैंतीस हजार Kilometer से ज़्यादा नए Highway बनाए गए हैं जिनसे व्यापार और यात्रा अब ज़्यादा आसान हो गए हैं। चालीस से ज़्यादा हवाई अड्डों का निर्माण या नवीनीकरण किया गया है। सन् 2004 में सिर्फ 7 प्रतिशत लागों के पास telephone connection थे। आज 73 प्रतिशत लोगों को यह सुविधा प्राप्त है। ग्रामीण इलाकों में यह प्रतिशत 2 से बढ़कर 40 हो गया है। बिजली उत्पादन में रिकार्ड बढ़ोत्तरी हुई है। 

भाइयो और बहनो, 

हाल के महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में यह बात चर्चा में रही है कि पिछले साल हमारी विकास दर कम होकर 5% रह गई है। यह बात सच है और हम इस हालत में सुधार लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सिर्फ हमारा देश ही अकेला आर्थिक कठिनाईयों का सामना नहीं कर रहा है। पूरी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए पिछला साल मुश्किल भरा रहा है। यूरोप के बड़े देशों में इस वक्त मंदी चल रही है। दुनिया भर में हर जगह निर्यात बाज़ारों की स्थिति में गिरावट आई है। सभी विकासशील देशों को मंदी का सामना करना पड़ा है। 

मेरा मानना है कि भारत में धीमे विकास का दौर बहुत दिन नहीं चलेगा। पिछले 9 सालों में हमारी अर्थव्यवस्था में औसतन 7.9 प्रतिशत सालाना की बढ़ोत्तरी हुई है। विकास की यह रफ्तार अब तक किसी भी दशक में हुई प्रगति से कहीं ज्यादा है। 

भाइयो और बहनो, 

आज दुनिया के देश एक दूसरे से जितना जुड़े हुए हैं उतना पहले कभी नहीं रहे। हमने अपनी विदेश नीति के जरिए यह कोशिश की है कि भारत को इस बात का पूरा फायदा मिले। दुनिया की बड़ी ताकतों से पिछले 9 सालों में हमारे संबंध लगातार सुधरे हैं। पूर्व और दक्षिण पूर्व Asia में स्थित दस ASEAN राष्ट्रों के साथ हमारी Look East Policy के अच्छे नतीजे सामने आए हैं, खासकर आर्थिक मामलों में। हमारी यह भी कोशिश रही है कि पड़ोसी देशों के साथ हमारी दोस्ती बढ़े। लेकिन पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर होने के लिए यह ज़रूरी है कि वह अपनी सरज़मीन और अपने नियंत्रण वाली ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए न होने दे। 

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति में सुधार हुआ है। 2012 में और इस साल कुछ राज्यों में सांप्रदायिक हिंसा की चिंताजनक घटनाओं के बावजूद, पिछले 9 साल सांप्रदायिक सद्भाव की दृष्टि से अच्छे गुजरे हैं। आतंकवादी और नक्सली हिंसा में भी कमी आई है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध में हमें लगातार सावधानी बरतने की ज़रूरत है। समय-समय पर हो रहे नक्सली हमलों को पूरी तरह रोकने में हम सफल नहीं हो पाए हैं। छत्तीसगढ़ में पिछली 25 मई को जो नक्सली हिंसा हुई वह भारत के लोकतंत्र पर एक सीधा हमला था। भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर हाल में हमारे जवानों पर कायरतापूर्ण हमला किया गया। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे। 

भाइयो और बहनो, 

सरकार के काम को ज़्यादा संवेदनशील, पारदर्शी, और ईमानदार बनाने के लिए हमने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें से मैं सिर्फ दो का ज़िक्र यहां करना चाहूंगा। 

RTI कानून के जरिए आम आदमी को अब सरकारी कामकाज के बारे में पहले से कहीं ज़्यादा जानकारी मिल रही है। इस कानून का इस्तेमाल एक बड़े पैमाने पर, हर स्तर पर हो रहा है। यह कानून अक्सर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार को सामने लाता है और सुधार का रास्ता खोलता है। मुझे यकीन है कि आने वाले समय में RTI की वजह से सरकारी कामकाज में और सुधार आएगा । 

हमने संसद में लोकपाल बिल प्रस्तुत किया है। लोक सभा ने इसे pass कर दिया है और अब इस पर राज्य सभा विचार कर रही है। यह कानून हमारी राजनैतिक व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। 

भाइयो और बहनो, 

हमने पिछले दशक में एक लंबा सफर तय किया है। लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। बदलाव का जो सिलसिला हमने शुरू किया है उसे आने वाले वक्त में जारी रखा जाएगा। 

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, तेज़ आर्थिक विकास हमारे देश के लिए बेहद ज़रूरी है। गरीबी दूर करना, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और रोज़गार के नए-नए अवसर पैदा करना – यह सब तेज़ आर्थिक विकास के बगैर मुमकिन नहीं है। पिछले 9 साल में हमने आर्थिक विकास की जो औसत रफ्तार हासिल की है उससे हमारे देश की क्षमताओं का पता चलता है। लेकिन इस वक्त देश के आर्थिक विकास की दर में कमी आई है। हम इस कमी को दूर करने के लिए पूरी मेहनत से काम कर रहे हैं। 

उद्योगों के लिए सरकारी मंज़ूरियों की प्रक्रिया को तेज़ करने, देश में उद्योग और व्यापार के लिए बेहतर माहौल बनाने और निवेश को बढ़ाने के लिए हमने हाल ही में कई कदम उठाए हैं। बड़ी परियोजनाओं की मंजूरियों की प्रक्रिया में मदद करने के लिए एक विशेष cell की स्थापना की गई है। Cabinet Committee on Investment रुकी हुई परियोजनाओं की अड़चनें दूर करने का काम कर रही है। 

बिजली उत्पादन बढ़ाने के रास्ते में कोयले की आपूर्ति एक समस्या बन गई थी। इसको हमने काफी हद तक सुलझा लिया है। 

आने वाले महीनों में Infrastructure के क्षेत्र में बहुत सी बड़ी परियोजनाओं पर हम काम शुरू करने वाले हैं। इनमें 2 नए बंदरगाह, 8 नए हवाईअड्डे, नए Industrial Corridors और रेल परियोजनाएं शामिल हैं। 

Foreign Direct Investment को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में हमने कई क्षेत्रों में ऐसे निवेश की सीमा बढ़ाई है और इसकी प्रक्रिया को आसान बनाया है। 

निवेश बढ़ाने की इन कोशिशों के अच्छे नतीजे हमें अगले कुछ महीनों में साफ देखने को मिलेंगे। इससे आर्थिक विकास की रफ्तार तेज़ होगी, रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे और infrastructure में भी सुधार आएगा। 

भाइयो और बहनो, 

Food Security कानून बनने के बाद उसे प्रभावी ढंग से लागू करना हमारी प्राथमिकताओं में से एक रहेगी। इस दिशा में हमने राज्यों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। Public Distribution System के Computerization के काम में तेज़ी लाई जाएगी। 

Mid-day-Meal Scheme में सुधार लाए जाएंगे। बच्चों को स्कूल में मिल रहा भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ साफ सुथरे ढंग से बना हुआ होना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए हम ठोस कदम उठाएंगे। 

Skill Development के क्षेत्र में शुरुआत में हम उतनी अच्छी प्रगति नहीं कर पाए जितनी चाहते थे, लेकिन अब इसमें तेज़ी आई है। हमने कुछ महीने पहले National Skill Development Authority का गठन किया है। हम जल्द ही एक नई योजना शुरू करेंगे जिसके तहत उन नौजवानों को लगभग 10 हज़ार रुपये की राशि दी जाएगी, जिन्होंने सफलतापूर्वक नई Skills हासिल की हैं। इस योजना से अगले 12 महीने में करीब 10 लाख नौजवानों को फायदा पहुंचेगा। 

अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए Multi-Sectoral Development Programme में हाल ही में सुधार लाए गए हैं। अब इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। 

Minor Forest Produce के लिए खरीद मूल्य निर्धारित करने की स्कीम को मंजूरी दे दी गई है। इससे हमारे आदिवासी भाई-बहनों को लघु वन उपज के सही दाम मिलेंगे। इस योजना को हम जल्द-से-जल्द लागू करेंगे। 

आदिवासी भाई-बहनों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति और उनके स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर के बारे में सही जानकारी हासिल करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की Report से हमें उनके लिए बेहतर योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। 

हम अपने देश में बहुत सी समस्याओं को बेहतर Technology के ज़रिए हल कर सकते हैं। इसकी एक मिसाल है आधार योजना। इस योजना के तहत इस साल के आख़िर तक पचास करोड़ लोगों को अपनी पहचान साबित करने का जरिया मिलेगा और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उनको सहूलियत पहुंचेगी। इसके ज़रिए हम करोड़ों लोगों को पहली बार बैंकों की सुविधाओं का लाभ दे पाएंगे। 

भाइयो और बहनो, 

एक आधुनिक, प्रगतिशील और Secular देश में तंग और सांप्रदायिक ख्यालों की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। ऐसी सोच हमारे समाज को बांटती है और हमारे लोकतंत्र को कमज़ोर करती है। हमें इसे रोकना होगा। हमें अपनी संस्कृति की उन परंपराओं को मज़बूत करना होगा, जो हमें अन्य विचारधाराओं के प्रति सहनशील होना और उनका सम्मान करना सिखाती हैं। मैं आज सभी राजनैतिक दलों, समाज के सभी वर्गों और आम जनता से इस दिशा में प्रयास करने की अपील करता हूँ । 

भाइयो और बहनो, 

कुछ देर पहले मैंने कहा था कि आज़ादी के बाद के हर दशक में भारत में बड़े परिवर्तन आये हैं। हमें आज यह सोचना है कि आने वाले दस सालों में हम किस तरह का परिवर्तन चाहते हैं। 

पिछले दस सालों में जैसी प्रगति हमने की है यदि हम उसे आगे भी जारी रखें तो वह वक्त दूर नहीं जब भारत को ग़रीबी, भूख, बीमारी और अशिक्षा से complete मुक्ति मिल जाएगी। हमारा भारत खुशहाल होगा और उसकी खुशहाली में सभी नागरिक बराबर के शरीक होंगे चाहे उनका धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा कुछ भी हो। 

इसके लिए हम सबको मिलकर देश में राजनैतिक स्थिरता, सामाजिक एकता और सुरक्षा का माहौल भी बनाना होगा। 

आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा भारत बनाने के लिए अपने आपको फिर से समर्पित करें। 

प्यारे बच्चों, अब आप मेरे साथ मिलकर तीन बार बोलिए… 

जय हिन्द - जय हिन्द - जय हिन्द ।”  (PIB)
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शरत/रतनानी/नवनीत/शाहबाज/सनोज/सतीश/लालमणी