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Wednesday, January 12, 2022

बलबीर सिंह राजेवाल चुनाव लड़ेंगे समराला से

संयुक्त समाज मोर्चा ने घोषित की दस प्रत्याशियों की पहली सूची 


लुधियाना: 12 जनवरी 2022: (पंजाब स्क्रीन बयूरो)::

किसान आंदोलन के दौरान अग्रिम पंक्ति में रहे बलबीर सिंह राजेवाल एक बार फिर मैदान मैं हैं। इस बार की जंग का मैदान है चुनाव का। संयुक्त समाज मोर्चा हर रोज़ तेज़ी से अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है। बहुत से अनुमानों और बहुत सी बातों के दरम्यान खुल कर मैदान में आए इस संगठन ने अपने दस प्रत्याशियों की घोषणा भी दी है। किसान आंदोलन की जीत के बाद मोर्चा का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है।  

संयुक्त समाज मोर्चा ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में मोर्चा के प्रमुख नेता बलबीर सिंह राजेवाल समराला के नाम का एलान भी शामिल है। श्री राजेवाल अपने आज़माए हुए क्षेत्र समराला से चुनाव लड़ रहे हैं। बहुत लम्बे समय से उनका इस इलाके में काफी प्रभाव है। 

उनके साथ ही आज महत्वपूर्ण क्षेत्रों से प्रत्याशी घोषित किए गए हैं। इनमें शामिल हैं-प्रेम सिंह भंगू घनौर, हरजिंदर  सिंह टांडा खडूर साहिब, रवनीत सिंह  बराड़ मोहाली,  डा. सुखमनदीप सिंह ढिल्लों तरनतारन, राजेश कूुमार  करतारपूर (रिजर्व), रमनदीप सिंह जैतो (रिजर्व), अजय कुमार फिल्लौर (रिजर्व), बलराज सिंह कादियां और नवदीप संघा मोगा। 

गौरतलब है कि टिकटों की घोषणा संयुक्त समाज मोर्चा के रुलदू सिंह मानसा, भोग सिंह मानसा, किरपा सिंह, मुकेश चन्द्र शर्मा ने की। इस दौरान मोर्चे के रुलदू सिंह, तरुण जैन बावा, डॉ रमन सिंह, कुलवंत सिंह संधू, कृपा सिंह, लखविंदर सिंह, मनजीत सिंह राय, हरमिंदर सिंह सिद्धू, पाल सिंह फ्रांस वाले, कुलदीप सिंह वजीरपुर, जगबीर सिंह, मुकेश चंद्र शर्मा, दौलत राम, हरकीरत सिंह राणा, बलविंदर सिंह, रुपिंदर सिंह, गुरलाल सिंह, रछपाल सिंह राजू और अन्य भी मौजूद थे।

अग्निपरीक्षा जैसी इस चुनावी जंग में संयुक्त समाज मोर्चा कितनी अच्छी कारगुज़ारी दिखा पता है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन चुनावी परिणामों पर किसानों की सक्रिय शमूलियत अपना रंग ज़रूर दिखाएगी। मौजूदा माहौल में किसानी वोट को एकजुट रख पाना भी बहुत बड़ी चुनौती रहेगी संयुक्त समाज मोर्चा के सामने। इस बार वाम की वोटें श्री राजेवाल के साथ लगती हैं। ग़ैरकिसानी ट्रेड यूनियनों में भी श्री राजेवाल का अच्छा  प्रभाव है। 

Wednesday, July 19, 2017

'किसान मुक्ति यात्रा'-देश भर में चार और यात्राएँ

Wed, Jul 19, 2017 at 6:55 PM
AIKSCC के संयोजक वी एम सिंह ने की यात्रा के अगले चरण की घोषणा
नई दिल्ली: 19 जुलाई 2017:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर किसान मुक्ति संसद आज दूसरे दिन भी जारी रहा। आत्महत्या कर चुके महाराष्ट्र के किसानों के बच्चों ने अपनी पीड़ा को एक नाटक के ज़रिए सबके सामने रखा। इस नाटक में उन लोगों ने दिखाया कि एक किसान की आत्महत्या के बाद उसके परिवार पर क्या गुज़रती है। बच्चों के इस प्रदर्शन ने दिल्ली के लोगों को झकझोर कर रख दिया।

उत्तरप्रदेश के आलू किसानों ने भी आलू के गिरते दाम के ख़िलाफ़ किसान मुक्ति संसद में अपना विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश से आलू किसानों के नेता आमिर ने कहा - "सरकार चाहती है कि हम अपनी फ़सल कोल्ड स्टॉरिज में रखें। लेकिन सच्चाई ये है कि हमारी फसल का जो दाम हमें मिल रहा है वो कोल्ड स्टॉरिज में रखने के ख़र्च से भी काफ़ी कम है। 

तमिलनाडु से आयी एक किसान की पत्नी रानी, जिसके पति को बैंक अधिकारियों ने इतना अपमानित किया कि उसने आत्महत्या कर ली, ने बताया - "बैंक के अधिकारियों ने मेरे पति से पूछा कि तुम बैंक का लोन नहीं चुका पा रहे हो तो अपनी पत्नी के कपड़े कैसे ख़रीद रहे हो। क्यूँ हमेशा ग़रीब को ही अपमानित होना पड़ता है? और, उन अमीर लोगों का क्या जो करोड़ों रुपये लेकर देश से भाग जाते हैं?"

किसान मुक्ति संसद को सम्बोधित करते हुए तमिलनाडु के किसानों के नेता ऐय्यकन्नु ने कहा - "तमिलनाडु के किसान सूखा जैसी स्थिति होने के कारण मर रहे हैं और हमारे विधायक किसानों के मुद्दों पर काम करने की बजाए अपनी सैलरी बढ़ाने की माँग लिए बैठे हैं।"

आज उन किसानों के बच्चे भी जंतर मंतर पर जमा हुए जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी, उन बच्चों ने अपनी वेदना एक लघु नाटक के माद्ध्यम से बयान की। एक बच्चा अशोक पाटिल ने अपनी व्यथा प्रकट करते हुए कहा कि बहुत सारे नेता हमारे घर हमसे मिलने आये और हमसे बहुत सारे वादे करके गए, लेकिन हमें मिला क्या? सिर्फ अगले दिन के अखबार में नेताओं के साथ छपा एक फोटो। वो हमें मदद करने आये थे या सेल्फी लेने आये थे?"

मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी किसान मुक्ति संसद में आये। वो भी किसानों की इन दो माँगों से सहमत थे कि किसानो को ऋणमुक्त किया जाए तथा उनकी आय को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि यह समय अपनी पार्टी तथा राजनीति से ऊपर उठकर हमें किसानों के साथ न्याय के इस संघर्ष में साथ होना चाहिए।

महाराष्ट्र से आये विधायक हर्ष वर्धन सहाय ने भी किसानों के इस संघर्ष में साथ होने का दम भरा।
किसान नेता एवं सांसद राजू शेट्टी ने आज लोकसभा में किसानों के मुद्दे को उठाया तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सवाल किया कि आपका स्वामीनाथन कमीशन के सुझाओं को लागू करने का वादा झूठा था क्या ? लोकसभा अध्यक्ष ने इनके माइक को बंद करवा दिया जिसके विरोध में राजू शेट्टी ने संसद से वाक आउट किया। राजू शेट्टी ने कहा - "मैं उस हाउस में मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता जहाँ किसानों की आवाज को दबाया जा रहा हो।"

AIKSCC के संयोजक V M सिंह ने किसान मुक्ति यात्रा के अगले चरण की घोषणा करते हुए कहा - "हमलोग यहीं नहीं रुकने वाले हैं, हमलोग पूरे देश के किसानो को संगठित करेंगे। हमलोग चार और यात्रा निकालेंगे जो कि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा बिहार में होगी। यह यात्रा 2 अक्टूबर को फिर दिल्ली पहुंचेगी और सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमलोग पूरे देश में अनिश्चितकालीन अनशन करेंगे।"

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष श्री योगेन्द्र यादव ने कहा - "यह आन्दोलन किसान आंदोलनों के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस आँदोलन ने अलग अलग दल और विचारधारा के देश भर के किसान संगठनों के नेताओं को एक किया है। साथ ही, आज किसानों की युवा पीढ़ी भले ही किसानी छोड़ने पर मजबूर हो रही है, लेकिन वो किसानों की वेदना को भूली नहीं है। अब किसान निर्णायक संघर्ष करेगा।"