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Saturday, December 25, 2021

पंजाब पुलिस ने 24 घंटों में ही सुलझा लिया बम ब्लास्ट केस

25th December 2021 at 6:35 PM

मारे गए आतंकी का संबंध खालिस्तान समर्थकों से? 


पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस को विभिन्न पड़ावों पर मिली सफलता
केस को 24 घंटों में ही सफलतापूर्वक सुलझा लेना बहुत बड़ी चुनौती थी 
डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने दी पंजाब पुलिस को बधाई
राज्य में सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल बनाकर रखना हमारी प्राथमिकता: डी.जी.पी.

चंडीगढ़//लुधियाना: 25 दिसम्बर 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
मृतक गगनदीप 
पंजाब ने एक दशक से भी ज़्यादा समय तक आतंक का दंश झेला। गोलियों और बम धमाकों की आवाज़ें उन दिनों आम बात हो गई थी। बहुत से घर उजड़ गए। बहुत मुश्किलों से लौटा था शांति का माहौल लेकिन इस धमाके ने सब कुछ फिर से याद दिला दिया। इस शक्तिशाली बम धमाके ने बहुत से सवाल खड़े किये जिनका जवाब आसान नहीं था। बाउट सी उलझनें थी। चुना सर पर होने से इसकी साज़िशी उलझनें और बढ़ गयीं थी। एक सवाल रह रह क्र उठ रहा था-कौन है जो पंजाब को फिर से आग लगाना चाहता है? लोकतंत्र के सबसे बड़े त्यौहार की तरह होते हैं चुनाव। इस त्यौहार पर हमला अर्थात लोकतंत्र पर हम गिना जाना चाहिए। पंजाब पुलिस ने इस मामले को 24 घंटों के अंदर अंदर सुलझा कर सभी सवालों के जवाब तलाश करने का सफल प्रयास किया है। डीजीपी का पत्रकार सम्मेलन इन्हीं सवालों के जवाब देने में व्यस्त रहा। बहुत बड़ी उलझन कम समय में ही सुलझाया पंजाब पुलिस ने। 

पंजाब पुलिस ने 24 घंटों से भी कम समय में लुधियाना कोर्ट परिसर में हुए बम धमाके के मामले को सुलझाने में कामयाबी हासिल की है। पुलिस द्वारा मृतक की पहचान गगनदीप सिंह (31) निवासी खन्ना के रूप में की गई है, जो पंजाब पुलिस में कॉन्स्टेबल के तौर पर भर्ती हुआ था और उसके कब्ज़े से 385 ग्राम हेरोइन बरामद होने के उपरांत उसको अगस्त 2019 में बखऱ्ास्त कर दिया गया था।

डायरैक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी), पंजाब सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने आज यहाँ पंजाब पुलिस हैडक्वाटर में एक प्रैस कॉन्फ्रेंस को संबोधन करते हुए कहा, ‘‘मुझे पंजाब पुलिस पर गर्व है, जिसने लुधियाना बम धमाके के केस को 24 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक सुलझा लिया है।’’

जानकारी के मुताबिक गुरूवार को लुधियाना के जि़ला कोर्ट कॉम्पलैक्स के सार्वजनिक शौचालय में बड़ा धमाका हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 6 अन्य ज़ख्मी हो गए। जब धमाका हुआ तो जि़ला अदालत की कार्यवाही आम दिनों की तरह ही चल रही थी और यह धमाका इतना ज़बरदस्त था कि सार्वजनिक शौचालय को काफ़ी नुकसान पहुँचा और इमारत की कई खिड़कियों के शीशे भी चकनाचूर हो गए।

डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने बताया कि पोस्ट मार्टम के दौरान पुलिस मरने वाले व्यक्ति की दाहिनी बाज़ू पर बने टैटू के निशान से मृतक की पहचान कर सकी। उन्होंने कहा कि अलग तौर पर लाश के डीएनए नमूने भी लिए गए।

उन्होंने बताया कि मुलजि़म गगनदीप सिंह थाना सदर खन्ना में मुंशी के तौर पर काम करता था, जिस दौरान उसे हेरोइन समेत काबू किया गया और थाना एस.टी.एफ, एस.ए.एस नगर मोहाली में एन.डी.पी.एस. के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। डीजीपी ने बताया कि इस केस पर सुनवाई चल रही है।
उन्होंने बताया कि उक्त मामले में लुधियाना जेल में दो साल बिताने के बाद वह सितम्बर 2021 में ज़मानत पर रिहा हो गया था और उसने 24 दिसंबर 2021 को फिर अदालत में पेश होना था।
डीजीपी ने कहा कि प्राथमिक जाँच से पता चला है कि मुलजि़म गगनदीप अदालत में डर और दहशत पैदा करना चाहता था।

इस घटना के पीछे पाकिस्तान आधारित खालिस्तान समर्थक संबंधों के बारे में डीजीपी ने कहा कि पुलिस इस मामले की हर पहलू से जाँच कर रही है। पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने कहा, ‘‘प्राथमिक जाँच से पता लगा है कि दोषी गगनदीप के जेल में बंद खालिस्तान समर्थक तत्वों से सम्बन्ध हो सकते हैं, जिन्होंने राज्य की शांति भंग करने के इरादे से कोर्ट कॉम्पलैक्स को निशाना बनाने के लिए दोषी का प्रयोग किया।’’
डीजीपी ने कहा कि धमाके के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री का अभी तक पता नहीं लग सका है, क्योंकि नमूने फोरेंसिक लैब को भेजे गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘एनएसजी की एक टीम और राज्य के फोरेंसिक विशेषज्ञों को धमाके के बाद की जाँच कार्यवाही के लिए बुलाया गया। डीजीपी ने आगे कहा, धमाके वाली जगह पर मलबे को योजनाबद्ध ढंग से हटाने के दौरान फोरेंसिक टीम ने कुछ महत्वपूर्ण सुराग जैसे कि नुकसान हुए मोबाइल सैट और मृतक के शरीर के जले हुए कपड़ों के अलावा अन्य सुबूत इकठ्ठा किए।

गौरतलब है कि डीजीपी ने ख़ुद भी उसी कोर्ट कॉम्पलैक्स का दौरा किया, जहाँ यह धमाका हुआ था और जि़ला और सैशन जज, लुधियाना के साथ बैठक की और सुरक्षा प्रबंधों का जायज़ा भी लिया। डीजीपी ने शुक्रवार को फील्ड अधिकारियों के साथ भी बैठक की और उनको राज्य में किसी भी अन्य आतंकवादी हमले को रोकने के लिए पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

मुलजि़म गगनदीप की पत्नी जसप्रीत कौर के अनुसार धमाके वाले दिन गगनदीप सुबह 9:30 बजे घर से निकला था और उसका मोबाइल तब से बंद था। उसने गगनदीप की बाज़ू पर बने टैटू के निशान और उसके द्वारा पहने कपड़ों को पहचान लिया।

इस सम्बन्ध में थाना डिविजऩ नंबर 5, लुधियाना में भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धाराएँ 302, 307 और 124-ए और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम और ग़ैर-कानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत एफ.आई.आर. तारीख़ 23 दिसंबर, 2021 को पहले ही दर्ज की जा चुकी है।

सभी  जाँच एजंसियां उन लोगों तक कब तक पहुंच पाती हैं जिन्होंने इस आतंकी गगनदीप को इस धमाके के लिए एक तरह से फिदायीन बना कर भेजा? देखना होगा कौन हैं वे लोग? नशीले पदार्थों  के कारोबार, अलगाववादी सोच, विदेश आधारित आतंकवाद और देश में छुपे गद्दार इत्यादि बहुत से सवाल अभी भी सुलझाए जाने बाकी हैं।