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Monday, February 11, 2013

राष्‍ट्रपति ने कहा राज्‍यपालों से:


11-फरवरी-2013 17:48 IST
एकता/अखंडता के विरुध होती कोशिशों को करते रहें नाकाम 
राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज राष्‍ट्रपति भवन में किया सम्‍मेलन का उद्धाटन
सरकार के कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने की व्‍यवस्‍था भी करें 
सम्‍मेलन का शुभारंभ करते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि यह आयोजन दिल्‍ली में एक लड़की के साथ निर्मम बलात्‍कार और उसकी मौत की दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना के साये में हो रहा है जिसने राष्‍ट्र के सामूहिक अन्‍त:करण को झकझोर कर रख दिया है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने वर्मा समिति की सिफारिशों पर तत्‍काल कार्रवाई की और आपराधिक कानून (संशोधन) अध्‍यादेश 2013 संसद के बजट सत्र में रखे जाने के लिए तैयार है। उन्‍होंने राज्‍यपालों से आग्रह किया कि वे महिलाओं की सुरक्षा और कल्‍याण में सुधार की दिशा में कार्य करें। उन्‍होंने कहा कि समाज में लोगों की सोच बदलने की जरूरत है, ताकि महिलाओं के साथ सम्‍मानजनक तरीके से व्‍यवहार किया जाए। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा में 2012 में सुधार हुआ, लेकिन उन्‍होंने जोर देकर कहा कि हमें देश की एकता और अखण्‍डता को कमजोर करने वाली राष्‍ट्र विरोधी ताकतों की किसी भी साजिश को विफल करने के अपने प्रयासों में अटल रहना होगा। आतंकवाद से निपटने की हमारी प्रतिबद्धता मजबूत रहनी चाहिए। उन्‍होंने सीमावर्ती राज्‍यों को सलाह दी कि वे अतिरिक्‍त सतर्कता बरतें। उन्‍होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के विकास से संबंधित विभिन्‍न कार्यक्रमों में तेजी लाने की जरूरत है, ताकि बढ़ती चुनौतियों से मुकाबला किया जा सके। राष्‍ट्रपति ने कहा कि सरकार के कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने की व्‍यवस्‍था को तत्‍काल मजबूत बनाने की जरूरत है। 

सरकार ने पंजाब और हरियाणा में फसलों की विविधता की तैयारी करते हुए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्वी क्षेत्र में उत्‍पादन बढ़ाने पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए एक रणनीति तैयार की है। असम, बिहार, झारखण्‍ड, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत पूर्वी भारत में हरित क्रांति लाने के लिए 2010-11 में एक कृषि विकास कार्यक्रम को लागू करने का फैसला किया गया। 2010-11 और 2011-12 के दौरान कार्यक्रम के लिए 400 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई, जिसे 2012-13 के दौरान बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपये कर दिया गया। पूर्वी भारत में दूसरी हरित क्रांति पर लगातार ध्‍यान केन्द्रित करने और केन्‍द्र और राज्‍यों की सभी सम्‍बद्ध एजेंसियों द्वारा प्रयास करने की जरूरत है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि पहली हरित क्रांति और उसके पर्यावरण पर प्रभाव से सबक लेकर हमें दूसरी हरित क्रांति करनी चाहिए, जिसमें मिट्टी और जल प्रबंधन के मुद्दों पर शुरू से ही विशेष ध्‍यान दिया जाए। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि खरीद नीति क्षेत्र के किसानों के हित में होनी चाहिए और क्षेत्र में पर्याप्‍त भण्‍डारण सुविधाएं बनाई जानी चाहिए। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में लगातार जारी प्रयासों के काफी उत्‍साहवर्धक परिणाम रहे। देश में चावल के कुल उत्‍पादन में पूर्वी क्षेत्र के हिस्‍से में काफी बढ़ोत्‍तरी हुई। 2011-12 के दौरान देश में चावल का कुल 104.32 मिलियन टन उत्‍पादन हुआ, जिसमें से पूर्वी क्षेत्र के उत्‍पादन का 55.34 मिलियन टन रिकॉर्ड योगदान रहा। राष्‍ट्रपति ने कहा कि जल क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार ने राष्‍ट्रीय जल नीति (2012) घोषित की और इसके कार्यान्‍वयन से जल क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों से निपटा जा सकेगा। भारत की आबादी विश्‍व की कुल आबादी का 18 प्रतिशत से ज्‍यादा है, लेकिन केवल चार प्रतिशत के पास उपयोग करने योग्‍य ताजा जल संसाधन हैं। भारत में पानी की कमी है और पानी की प्रति व्‍यक्ति उपलब्‍धता कम हो गई है। हमारी जल्‍दी ही पानी की कमी वाले देशों में गिनती होने लगेगी। एक अनुमान के अनुसार 2050 में 17 प्रतिशत आबादी के पास पानी की कमी होगी। राष्‍ट्रपति ने जोर देकर कहा कि पानी और स्‍वच्‍छता जीवन की मूलभूत जरूरतें हैं और इन्‍हें संतोषजनक तरीके से प्रदान करना सुशासन का संकेत है। भूमिगत जल के प्रबंध को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पेयजल और स्‍वच्‍छता मंत्रालय, राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम लागू कर रहा है ताकि ग्रामीण इलाकों में पेयजल प्रदान करने के राज्‍यों और संघ राज्‍य क्षेत्रों के प्रयासों को सहायता मिल सके। इसके लिए 2012-13 के बजट में 10,500 करोड़ रुपये का खर्च रखा गया। इस कार्यक्रम पर सावधानीपूर्वक नजर रखने की जरूरत है। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि पानी, स्‍वच्‍छता और स्‍वास्‍थ्‍य के बीच सीधा संबंध है। सुरक्षित पेयजल का इस्‍तेमाल, खुले में शौच, स्‍वच्‍छ भोजन के अभाव से उच्‍च शिशु मृत्‍यु दर और अनेक बीमारियों को जन्‍म देती है। उन्‍होंने कहा कि हमें ग्रामीण और शहरी भारत में उपलब्‍ध जल संसाधनों का इस्‍तेमाल तरीके से करना चाहिए, बेकार पानी को फिर से इस्‍तेमाल योग्‍य बनाना चाहिए और पानी को बर्बाद होने से बचाना चाहिए, भूमिगत जल को रिचार्ज करने और स्‍वच्‍छता की सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। राष्‍ट्रपति ने सभी राज्‍यपालों से आग्रह किया कि वे निर्मल भारत अभियान पर विशेष ध्‍यान दें, जिसे सरकार ने पीने के पानी की सुविधा देने के साथ सभी ग्राम पंचायतों को निर्मल बनाने के लिए शुरू किया है, ताकि गांव वालों को बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य और अच्‍छा जीवन मिल सके। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि 2005 से लागू जेएनएनयूआरएम शहरी बुनियादी सुविधाएं सृजित करने के लिए एक प्रमुख निवेश कार्यक्रम है। उन्‍होंने कहा कि शहर और शहरी इलाके जीडीपी का 60 प्रतिशत से ज्‍यादा योगदान देते हैं और देश में रोजगार सृजन का 80 प्रतिशत है।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और हम इन्‍हें उचित शिक्षा और हुनर देकर बेहतर भविष्‍य की आशा कर सकते हैं। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि चूंकि राज्‍य विश्‍वविद्यालयों के पास वित्‍तीय संसाधनों की कमी है, 12वीं योजना में एक नए कार्यक्रम राष्‍ट्रीय उच्‍चतर शिक्षा अभियान के माध्‍यम से उच्‍च शिक्षा के लिए केन्‍द्रीय धनराशि को स्‍थानांतरित करने की सिफारिश की गई है। उन्‍होंने कहा कि 14वें वित्‍त आयोग की स्‍थापना जनवरी 2013 में की गई। उन्‍होंने राज्‍यपालों से कहा कि वे राज्‍य वित्‍त आयोगों के गठन पर ध्‍यान दें, जिसमें पर्याप्‍त कर्मचारी हों, राज्‍य वित्‍त आयोग की रिपोर्ट समय पर राज्‍यपाल को मिले और उस रिपोर्ट पर सरकार समय पर कार्रवाई करे। 

इस दो दिवसीय सम्‍मेलन की कार्यसूची में आंतरिक और बाहरी सुरक्षा, सरकार के कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने की व्‍यवस्‍था को मजबूत करने, पूर्वी क्षेत्र में दूसरी हरित क्रांति के विस्‍तार, जल प्रबंध और स्‍वच्‍छता, जवाहरलाल नेहरू राष्‍ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) और उच्‍च शिक्षा में गुणवत्‍ता और सुशासन के संदर्भ में राज्‍यपालों की भूमिका शामिल है। 

सम्‍मेलन में उपराष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, नौ केन्‍द्रीय मंत्री, योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष और युआईडीएआई के अध्‍यक्ष भाग ले रहे हैं। 

सम्‍मेलन को सुबह मंत्री और दोपहर में प्रधानमंत्री और उपराष्‍ट्रपति सम्‍बोधित करेंगे। (PIB)
***
राष्‍ट्रपति ने किया राज्‍यपालों के 44वें सम्‍मेलन का उद्धाटन वि.कसोटिया/कविता/राजेश-524

Saturday, January 26, 2013

64वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर

25-जनवरी-2013 19:43 IST
भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का राष्ट्र के नाम संदेश
भारत में पिछले छह दशकों के दौरान,छह सदियों से अधिक बदलाव
64वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर राष्‍ट्र के नाम संदेश का मूल पाठ इस प्रकार है:-
मेरे प्यारे देशवासियो :
चौंसठवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मैं भारत में और विदेशों में बसे आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। मैं अपनी सशस्त्र सेनाओं, अर्ध सैनिक बलों और आंतरिक सुरक्षा बलों को विशेष बधाई देता हूं।
भारत में पिछले छह दशकों के दौरान, पिछली छह सदियों से अधिक बदलाव आया है। यह न तो अचानक हुआ है और न ही दैवयोग से; इतिहास की गति में बदलाव तब आता है जब उसे स्वप्न का स्पर्श मिलता है। उपनिवेशवाद की राख से एक नए भारत के सृजन का महान सपना 1947 में ऐतिहासिक उत्कर्ष पर पहुंचा, और इससे अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह हुई कि स्वतंत्रता से राष्ट्र-निर्माण की नाटकीय कथा की शुरुआत हुई। इसकी आधारशिला, 26 जनवरी, 1950 को अंगीकृत हमारे संविधान के द्वारा रखी गई थी, जिसे हम प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। इसका प्रेरक सिद्धांत था, राज्य और नागरिक के बीच एक सहमति अर्थात न्याय, स्वतंत्रता तथा समानता के द्वारा पोषित सशक्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी।
भारत ने अंग्रेजों से स्वतंत्रता इसलिए नहीं ली थी कि वह भारतीयों को आजादी से वंचित रखे। संविधान दूसरी आजादी का प्रतीक था और यह आजादी थी लिंग, जाति, समुदाय की गैर-बराबरी की घुटन से और उन दूसरी प्रकार की बेड़ियों से, जो हमें बहुत समय से जकड़े हुए थी।

इसने ऐसे क्रांतिकारी उद्विकास को प्रेरणा दी जिसने भारतीय समाज को आधुनिकता के मार्ग पर आगे बढ़ाया : समाज में क्रमिक उद्विकास के द्वारा बदलाव आया, क्योंकि हिंसक क्रांति भारतीय परिपाटी नहीं है। जटिल सामाजिक ताने-बाने में बदलाव पर अभी कार्य जारी है, और इसको कानून में समय-समय पर आने वाले सुधारों और जनमत की शक्ति से प्रेरणा मिलती रही है।

पिछले छह दशकों में ऐसा बहुत कुछ हुआ है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं। हमारी आर्थिक विकास दर तीन गुना से अधिक हो गई है। साक्षरता की दर में चार गुना से अधिक वृद्धि हुई है। खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के बाद अब हम खाद्यान्न के निर्यातक हैं। गरीबी की मात्रा में काफी कमी लाई गई है।  हमारी एक अन्य महत्त्वपूर्ण उपलब्धि लैंगिक समानता की दिशा में हमारा प्रयास है।

ऐसा किसी ने नहीं कहा कि यह कार्य आसान होगा। 1955 में अधिनियमित हिंदू संहिता विधेयक, जैसी पहली बड़ी कोशिश में जो समस्याएं आई थी, उनकी अलग कहानी है। यह महत्त्वपूर्ण कानून जवाहर लाल नेहरू तथा बाबा साहेब अंबेडकर जैसे नेताओं की अविचल प्रतिबद्धता से ही पारित हो पाया था। जवाहरलाल नेहरू ने बाद में इसे अपने जीवन की संभवत: सबसे बड़ी उपलब्धि बताया था। अब समय आ गया है कि हर-एक भारतीय महिला के लिए लैंगिक समानता सुनिश्चित की जाए। हम न तो इस राष्ट्रीय दायित्व से बच सकते हैं और न ही इसे छोड़ सकते हैं क्योंकि इसे नजरअंदाज करने की बहुत भारी कीमत चुकानी होगी। निहित स्वार्थ आसानी से हार नहीं मानते। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए सिविल समाज तथा सरकार को मिल-जुलकर प्रयास करने होंगे।

प्यारे देशवासियो :
मैं आपको ऐसे समय पर संबोधित कर रहा हूं जब एक बहुत व्यापक त्रासदी ने हमारे प्रमाद को झकझोर डाला है। एक नव-युवती के नृशंस बलात्कार और हत्या ने, एक ऐसी महिला जो कि उदीयमान भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक थी, हमारे हृदयों को रिक्तता से तथा हमारे मनों को क्षोभ से भर दिया है। हमने एक जान से कहीं अधिक कुछ खोया है; हमने एक सपना खो दिया है। यदि आज हमारे युवा क्षुब्ध हैं तो क्या हम अपने युवाओं को दोष दे सकते हैं?

देश का एक कानून है। परंतु उससे ऊंचा भी एक कानून है। महिला की पवित्रता भारतीय सभ्यता नामक समग्र दर्शन का नीति निर्देशक सिद्धांत है। वेद कहते हैं कि माता एक से अधिक हो सकती हैं; जन्मदात्री, गुरुपत्नी, राजा की पत्नी, पुजारी की पत्नी, हमें दूध पिलाने वाली और हमारी मातृभूमि। मां हमें बुराई और दमन से बचाती है, हमारे लिए जीवन और समृद्धि का प्रतीक है। जब हम किसी महिला के साथ पाशविकता करते हैं तो अपनी सभ्यता की आत्मा को लहुलुहान कर डालते हैं।

देश को अपनी नैतिक दिशा को फिर से निर्धारित करने का समय आ गया है। निराशावादिता को बढ़ावा देने के लिए कोई अवसर नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि निराशावाद नैतिकता को अनदेखा करता है। हमें अपनी अंतरात्मा में गहराई से झांकना होगा और यह पता लगाना होगा कि हमसे कहां चूक हुई है। समस्याओं का समाधान विचार-विमर्श तथा नजरियों में तालमेल से ढूंढ़ना होगा। लोगों को यह विश्वास होना चाहिए कि शासन भलाई का एक माध्यम है और इसके लिए हमें सुशासन सुनिश्चित करना होगा।

प्यारे देशवासियो :
हम दूसरे पीढ़ीगत बदलाव के मुहाने पर हैं; गांवों और कस्बों में फैले हुए युवा इस बदलाव के अग्रेता हैं। आने वाला समय उनका है। वे आज अस्तित्व संबंधी बहुत सी शंकाओं से ग्रस्त हैं। क्या तंत्र योग्यता को समुचित सम्मान देता है। क्या समर्थवान लालच में पड़कर अपना धर्म भूल चुके हैं। क्या सार्वजनिक जीवन में नैतिकता पर भ्रष्टाचार हावी हो गया है। क्या हमारी विधायिका उदीयमान भारत का प्रतिनिधित्व करती है या फिर इसमें आमूल-चूल सुधारों की जरूरत है। इन शंकाओं को दूर करना होगा। चुने हुए प्रतिनिधियों को जनता का विश्वास फिर से जीतना होगा। युवाओं की आशंका और उनकी बेचैनी को, तेजी से, गरिमापूर्ण तथा व्यवस्थित ढंग से बदलाव के कार्य पर लगाना होगा।

युवा खाली पेट सपना नहीं देख सकते। उनके पास अपनी और राष्ट्र की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए रोजगार होना चाहिए। यह सच है कि हमने 1947 के बाद एक लम्बा रास्ता तय किया है, जब हमारे प्रथम बजट का राजस्व मात्र 171 करोड़ रुपये था। आज केन्द्र सरकार के संसाधन उस बूंद की तुलना में एक महासागर के समान हैं। परंतु हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कहीं आर्थिक विकास से प्राप्त लाभ पर, पिरामिड के शिखर पर बैठे भाग्यशाली लोगों का ही एकाधिकार न हो जाए। धन के सृजन का बुनियादी उद्देश्य हमारी बढ़ती जनसंख्या से भुखमरी, निर्धनता और अल्प आजीविका की बुराई को जड़ से खत्म करना होना चाहिए।

प्यारे देशवासियो :
पिछला वर्ष हम सभी के लिए परीक्षा का वर्ष रहा है। आर्थिक सुधारों के पथ पर अग्रसर होते हुए, हमें बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं की वर्तमान समस्याओं के प्रति जागरूक रहना होगा। बहुत से धनी राष्ट्र अब सामाजिक दायित्व रहित अधिकार की संस्कृति के जाल में फंस गए हैं; हमें इस जाल से बचना होगा। हमारी नीतियों के परिणाम हमारे गांवों, खेतों, फैक्ट्रियों तथा स्कूलों और अस्पतालों में दिखाई देने चाहिए।

आंकड़ों का उन लोगों के लिए कोई अर्थ नहीं होता जिन्हें उनसे लाभ नहीं पहुंचता। हमें तत्काल काम में लगना होगा अन्यथा, वर्तमान में जिन अशांत इलाकों का प्राय: ‘नक्सलवादी’ हिंसा के रूप में उल्लेख किया जाता है उनमें और अधिक खतरनाक ढंग से विस्तार हो सकता है।

प्यारे देशवासियो :
अभी पिछले दिनों, नियंत्रण रेखा पर हमारे सैनिकों पर गंभीर नृशंसता के मामले सामने आए हैं। पड़ोसियों में मतभेद हो सकते हैं; सीमाओं पर तनाव एक सामान्य स्थिति हो सकती है। परंतु राज्य से इतर तत्त्वों के माध्यम से प्रायोजित आतंकवाद समूचे राष्ट्र के लिए भारी चिंता का विषय है। सीमा पर शांति में हमारा विश्वास है और हम सदैव दोस्ती की उम्मीद में हाथ बढ़ाने के लिए तैयार हैं। परंतु इस हाथ को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
प्यारे देशवासियो :
भारत की सबसे अजेय सम्पत्ति है उसका खुद में विश्वास। हमारे लिए प्रत्येक चुनौती, अभूतपूर्व आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता हासिल करने के हमारे सकंल्प को मजबूत बनाने का अवसर बन जाती है। इस संकल्प को, खासकर बेहतर और व्यापक शिक्षा पर भारी निवेश के द्वारा, मजबूत बनाना होगा। शिक्षा ऐसी सीढ़ी है, जो सबसे निचले पायदान पर मौजूद व्यक्तियों को व्यावसायिक और सामाजिक प्रतिष्ठा के शिखर पर पहुँचा सकती है। शिक्षा ऐसा मंत्र है जो हमारे आर्थिक भाग्य को बदल सकता है और ऐसी दरारों को पाट सकता है जो समाज में असमानता पैदा करती हैं। अभी तक शिक्षा की यह सीढ़ी, अपेक्षित स्तर तक, उन लोगों तक नहीं पहुंची है जिनको इसकी सबसे अधिक जरूरत है। भारत द्वारा वर्तमान वंचितों को, आर्थिक विकास के बहुत से उपादानों में बदल कर अपनी विकास दर को दोगुना किया जा सकता है।

हमारे चौंसठवें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यद्यपि चिंता का कोई कारण हो सकता है परंतु हताशा का कोई नहीं। यदि भारत में छह दशकों में पिछली छह सदियों के मुकाबले अधिक बदलाव आया है तो मैं आपसे वायदा करता हूं कि इसमें अगले दस वर्षों में, पिछले साठ वर्षों से ज्यादा बदलाव आएगा। भारत की शाश्वत जिजीविषा जागृत है।

अंग्रेजों को भी यह लगा था कि वे एक ऐसा देश छोड़कर जा रहे हैं जो उससे बहुत अलग है जिस पर उन्होंने आधिपत्य किया था। राष्‍ट्रपति भवन स्थित जयपुर स्तंभ की आधारशिला पर एक शिलालेख है :-

‘‘विचारों में आस्था... शब्दों में प्रज्ञा...
 कर्म में पराक्रम...
 जीवन में सेवा...
 अत: भारत महान बने’’
भारत की भावना प्रस्तर में उत्कीर्ण है।

जय हिंद!

                             ****       64वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर
मीणा/वि. कासोटिया/कविता/सुनील-327

Saturday, January 19, 2013

स्वामी विवेकानंद जी की 150वीं वर्षगांठ के समारोह

18-जनवरी-2013 14:52 IST
राष्ट्रपति ने किया रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का उद्घाटन
भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज 18 जनवरी 2013 को कोलकाता में स्वामी विवेकानंद के जन्मस्थल पर स्वामीजी की 150वीं वर्षगांठ के समारोह के तहत रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का उद्घाटन किया। 

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के संदेश और उनकी सीख उस समय, आज और जब तक मानव सभ्यता है, तब तक हर दौर में प्रासंगिक है। उन्होंने स्वामीजी को बंगाल का महान सपूत और महान दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रसिद्ध इतिहासकार अल बशम ने विवेकानंद को एक ऐसी हस्ती के रुप में वर्णित किया था जो सदियों में एक बार पैदा होती हैं।

उन्होंने कहा कि यह बहुत विस्मयकारी है कि अपने छोटे से समय में उन्होंने ऐसे समाज को बदल दिया जो स्वंय में भरोसा खो चुका था। उन्होंने अपने दर्शन से सभी को झकझोर कर रख दिया और एक विचलित राष्ट्र के भरोसे को वापस लौटाया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब हमारे लोगों का आत्मबल काफी कमजोर था और बहुत से भारतीय आदर्शों के लिए पश्चिम की ओर देखते थे ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने उनके भीतर स्वंय पर भरोसा और गर्व के भाव को जगाया।

राष्ट्रपति ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री जवाहरलाल नेहरु को उद्धरित करते हुए कहा – "भारत के इतिहास में जड और भारतीय गौरव पर पूरे गर्व को समाहित करते हुए जीवन की समस्याओं के प्रति विवेकानंद का दृष्टिकोण आधुनिक था, एक तरह से यह भारत के इतिहास और वर्तमान के बीच सेतु के रुप में था। " (PIB) 
 स्वामी विवेकानंद जी की 150वीं वर्षगांठ के समारोह
मीणा /विजयलक्ष्मी/ - 246

Saturday, November 24, 2012

शहीदी दिवस के अवसर पर राष्‍ट्रपति का संदेश

गुरू तेग बहादुर नि:स्‍वार्थ,साहसी व्‍यक्ति थे:राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी
भारत के राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कल गुरू तेग बहादुर के शहीदी दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा है कि 'गुरू तेग बहादुर का शहीदी दिवस उनके बलिदान की महिमा को याद करने का पवित्र अवसर है। गुरू तेग बहादुर एक नि:स्‍वार्थ, साहसी व्‍यक्ति थे जिन्‍होंने हम सभी को सच्‍चाई, उपासना और ज्ञान से सामर्थ्‍यवान बनना सिखाया। 

यह नि:स्‍वार्थ भाव से सेवा और सच के लिए खड़े होने की हिम्‍मत की महत्‍ता पर चिंतन करने का दिवस होना चाहिए।
हमें महान गुरू की शिक्षाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए और उनके द्वारा दिखाई गई राह पर चलने का प्रसाय करना चाहिए।' (PIB) 23-नवंबर-2012 15:06 IST 

मीणा/प्रियंका -5483

Friday, August 03, 2012

भारत के राष्‍ट्रपति की नए डिजाइन वाली वेबसाइट का शुभारंभ

अब आम नागरिक भी राष्‍ट्रपति से सीधे कर सकेंगे सपंर्क
                                                                                                       साभार चित्र 
भारत के राष्‍ट्रपति की नए डिजाइन वाली वेबसाइट का आज राष्‍ट्रपति भवन में शुभारंभ किया गया। पुरानी वेबसाइट के एतिहासिक परिप्रेक्ष्‍य को बनाए रखा गया है लेकिन नए डिजाइन वाली वेबसाइट में कुछ नई खूबियां जाड़ी गई हैं। इसमें वेबसाइट से सीधे जुड़ने की सुविधा जोड़ी गई है अर्थात राष्‍ट्रपति के लिए फेसबुक और यू ट्यूब जैसे सोशल नेटवर्किंग माध्‍यम उपलब्‍ध कराए गए हैं। ये दोनों खूबियां राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पदभार संभालने के बाद शुरू की गई हैं। नई वेबसाइट में वीडियो गैलरी भी उपलब्‍ध कराई गई है। अब देश के नागरिक राष्‍ट्रपति से सीधे सपंर्क कर सकते हैं। इसके लिए सिर्फ "राष्‍ट्रपति को लिखें" बटन पर क्लिक करना होगा। वेबसाईट का शुभारंभ करते हुए राष्‍ट्रपति की सचिव ओमिता पॉल ने आशा प्रकट की कि इससे भारत के राष्‍ट्रपति को जनता के और करीब जाने में मदद मिलेगी। (पत्र सूचना कार्यालय)                          03-अगस्त 2012   21:21 IST

Thursday, August 02, 2012

रक्षाबंधन के पर्व पर राष्‍ट्रपति ने किया आह्वान

महिलाओं की सुरक्षा और कल्‍याण प्रयासो को और बढ़ाया जाये 
राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने लोगों से महिलाओं की सुरक्षा और कल्‍याण प्रयासो को ओर अधिक करने का आह्वान किया है। श्री मुखर्जी आज राष्‍ट्रपति भवन में रक्षाबंधन के उपलक्ष्‍य में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि राखी स्‍नेह का एक धागा है जो बहनें भाईयों के हाथ पर बांधती है। हमें यह याद रखना चाहिए कि यह सिर्फ एक प्रथा न होकर एक शक्तिशाली प्रयास है जो प्रत्‍येक पुरूष को महिलाओं को सुरक्षा देने और सुरक्षित रखने की याद दिलाती है। मैं देश से महिलाओं की सुरक्षा और उनके कल्‍याण के प्रयासों को ओर अधिक करने का आह्वान करता हूं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे देश की महिलाएं हर समय सुरक्षित महसूस करें।

महिलाओं के पूरे अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्‍यक कदम उठाए जाने चाहिए। घृणित प्रथाएं जैसे महिला भ्रूण हत्‍या और दहेज हत्‍या की समाप्ति होनी चाहिए। बालिका शिशु का कल्‍याण हमारी प्राथमिकता होना चाहिए।

इस पर्व के मौके पर हम सभी को शपथ देनी चाहिए कि हम सब भारत की सभी महिलाओं विशेष तौर पर बालिका शिशु की बेहतरी के प्रति खुद को समर्पित करेंगे।

इस समारोह में दिल्‍ली और आस पास के क्षेत्रों के विभिन्‍न स्‍कूलों के छात्रों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। इस अवसर पर छात्रों ने गीत गाए और कविता पाठ किया और राष्‍ट्रपति के साथ बातचीत की और उन्‍हें राखी भी बांधी।     (पत्र सूचना कार्यालय) 
      02-अगस्त-2012 17:06 IST