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Monday, December 30, 2013

रूस: भयानक धमाके के बाद वोल्गाग्राद में तीन दिनों का शोक घोषित

स्टेशन के अंदर जा कर धमाका करना चाहती थी आत्मघाती महिला 
                                         © Screenshot: YouTube
मास्को: रेडियो रूस ने रूस  धमाके की पुष्टि की है रविवार को वोल्गाग्राद के रेलवे स्टेशन पर एक आत्मघाती महिला द्वारा किए गए धमाके में 14 व्यक्तियों की मृत्यु होने और 34 व्यक्तियों के घायल होने के बाद पूरे शहर में भय और शोक का माहौल है। वोल्गाग्राद प्रदेश के गवर्नर सेर्गेउ बोझेनफ़ ने यह बात कही।
सेर्गेय बोझेनफ़ ने बताया कि गम्भीर रूप से घायल हुए व्यक्तियों को हवाई जहाज़ से मास्को ले जाने की तैयारियां की जा रही हैं ताकि उनका भलीभाँति इलाज किया जा सके।
रेलवे जंक्शन के प्रवेश द्वार के पास लगे मेटल डिटेक्टर के पास जमा सुरक्षाकर्मियों और वहाँ जमा हुई भीड़ में यह आतंकवादी महिला भी शामिल थी। जब उस महिला ने यह देखा कि वह मेटल-डिटेक्टर से गुज़रकर स्टेशन की बिल्डिंग के भीतर नहीं जा पाएगी तो उसने वहीं अपने शरीर पर लगे बम में विस्फोट कर दिया। बिल्डिंग का मेन गेट पूरी तरह से टूट गया है। कुछ समय के लिए रेलगाड़ियों को वोल्गाग्राद के निकटवर्ती रेलवे स्टेशनों से चलाया जाएगा।
रूस के राष्ट्रपति व्लदीमिर पूतिन ने गृह-मन्त्रालय और सुरक्षा बलों के अधिकारियों के साथ बैठक की है और उन्हें सुरक्षा के कड़े क़दम उठाने के निर्देश दिए हैं।
इसी बीच आत्मघाती महिला हमलावर को पहचान लिया गया है। वोल्गाग्राद की आत्मघाती महिला पहचानी गई इस शीर्षक से रेडियो रूस ने अपनी एक खबर में बताया है-बताया है कि रक्षा-बलों के एक स्रोत ने ‘रिया नोवोस्ती’ एजेंसी को बताया है कि जिस महिला ने रविवार को वोल्गाग्राद में आत्मघाती विस्फोट किया है उसे पहचान लिया गया है| वोल्गाग्राद के रेलवे स्टेशन पर विस्फोट दिन के पौने एक बजे हुआ। 
अंतिम समाचार के अनुसार 14 लोग मारे गए हैं और दसियों लोग घायल हुए हैं| “एक अनुमान यह है कि यह आतंकी हमला दागिस्तान की निवासिन ओक्साना अर्सलानोवा ने किया हो सकता है, लेकिन इस खबर की पुष्टि की आवश्यकता है,” स्रोत ने कहा है| इस स्रोत के अनुसार वह लड़ाकों के एक गिरोह के नेता की पत्नी थी जिसकी एक विशेष ऑपरेशन में हत्या हो गई थी| पहले पति की हत्या के बाद उसका विवाह कई दूसरे लड़ाकों से भी हुआ। 
वोल्गाग्राद के इस आतंकी हमले में मारे गए लोगों में से नौ की शिनाख्त हो चुकी है जिनमें छह पुरुष और तीन महिलाएं हैं।
                                                     Photo:RIA Novosti
इस धमाके की निंदा और मरने वालों के परिवारों से संवेदना का सिलसिला जारी है। रेडियो रूस ने अपनी एक और खबर में बताया कि पूतिन ने प्रकट की गहरी संवेदना रेडियो के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पूतिन ने वोल्गाग्रद में हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों के स्वजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है, उनके प्रेस सचिव दमित्री पेस्कोव ने बताया है| उनके शब्दों में राष्ट्रपति ने सभी घायलों से सहानुभूति जताते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की है|
रूस में अमरीका के राजदूत माइकल मैकफोल, नाटो के महासचिव आंद्रेस फोग रासमुस्सेन, यूक्रेन के विदेश मंत्री लेओनिद कोझारा, यूरोपीय संसद-सभा के अध्यक्ष जान-क्लोद मिन्यों, रूस की मुफ्ती परिषद, रूस के यहूदी समुदायों के संघ के अध्यक्ष अलेक्सांद्र बोरोदा, यूरोपीय आयोग के प्रधान जोसे मनुएल बर्रोजु – इन सबने मृतकों के परिवारों से संवेदना प्रकट की है|
रूस के गृह मंत्रालय की विज्ञप्ति में इस आतंकी हमले में मारे गए पुलिस कर्मी दमित्री माकोव्किन के परिवार और निकट सम्बन्धियों से संवेदना दर्शाते हुए कहा गया है कि “दमित्री माकोव्किन ने अपना दायित्व निभाते हुए आम नागरिकों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी| उनके कौशलमय कदमों की बदौलत अधिक गंभीर परिणामों से बचा जा सका, अनेक लोगों की जान उनकी कार्रवाइयों की बदौलत बच गई”| वोल्गोग्राद पुलिस विभाग के सीनियर सार्जेंट दमित्री माकोव्किन ने संदिग्ध आतंकी महिला को तब देखा जब वह स्टेशन के प्रवेश द्वार से थोड़ी दूर थी| उनका ध्यान इस बात की ओर गया कि वह सहमी-सहमी सी इधर-उधर देख रही है| “वह इस संदिग्ध महिला का रास्ता काटते हुए आगे बढ़े ताकि उसके पहचान-पत्र की जाँच कर सकें| वह उससे कुछ ही कदम दूर थे जब विस्फोट हुआ, जिसमें उनके प्राण जाते रहे,” विज्ञप्ति में कहा गया है|

Saturday, August 10, 2013

आधी सदी में भारत ने खो दी अपनी 200 से अधिक स्वदेशी भाषाएँ

1961 में बोली जाती थीं भारत में 1100 भाषाएँ 
                                                     Photo: EPA
मामला बेहद गंभीर है और इसकी खबर दी है रेडियो रूस ने जिसका शीर्षक है-आधी सदी में भारत की 200 से अधिक भाषाएँ विलुप्त। रेडिओ ने पूरी ज़िम्मेदारी से तथ्यों का हवाला देते हुए बताया है कि भारत के एक शोध संस्थान 'भाषा' जिसे 'भाषा शोध एवं प्रकाशन केन्द्र' भी कहा जाता है, के द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आधी सदी में भारत ने अपनी 200 से अधिक स्वदेशी भाषाएँ खो दी हैं।
इस क्षेत्र के एक शोधकर्ता गणेश देवी के अनुसार, सन् 1961 में भारत में 1100 भाषाएँ बोली जाती थीं लेकिन अब उनमें से 220 भाषाएँ लुप्त हो चुकी हैं। ये भाषाएँ सपेरों, ज्योतिषियों, स्वदेशी चिकित्सकों द्वारा बोली जाती थीं। भारत की 3-4 प्रतिशत जनसंख्या, यानी लगभग पाँच करोड़ लोग ऐसी भाषाएँ बोल सकते थे।
भारत में दो भाषाओं, हिन्दी और अंग्रेज़ी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है जबकि 22 अन्य भाषाओं का देश के राज्यों में सरकारी भाषा के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

आधी सदी में भारत की 200 से अधिक भाषाएँ विलुप्त

आधी सदी में भारत ने खो दी अपनी 200 से अधिक स्वदेशी भाषाएँ 

Wednesday, July 03, 2013

ई०मेल और फ़ोन कॉलों के विश्लेषण:

:                        अमरीकी तरीके से भारत सहमत
                                                                                                                      फोटो: RIA Novosti
मंगलवार को भारत के विदेशमन्त्री सलमान ख़ुर्शीद ने अचानक ही अमरीकी गुप्तचर संगठनों की गतिविधियों का समर्थन किया, जो देशी-विदेशी नागरिकों के इलैक्ट्रोनिक सन्देश और टेलिफ़ोन-बातचीत पर नज़र रखते हैं।
ब्रुनेई में पत्रकारों से बात करते हुए सलमान ख़ुर्शीद ने कहा -- इन सबकी रिकार्डिंग करके उन्हें जो जानकारी मिली, उसके बल पर ही उन्होंने कुछ देशों में बड़ी आतंकवादी घटनाओं को होने से रोक दिया।
सलमान ख़ुर्शीद ने कहा कि उनका मतलब निजी सन्देशों की रिकार्डिंग से नहीं, बल्कि उस कम्प्यूटर-विश्लेषण से है, जो आम सन्देशों और फ़ोन-कॉलों के सिलसिले में किया जाता है।

सलमान ख़ुर्शीद की यह बात भारत के विदेश मन्त्रालय के आरम्भिक नज़रिए से बिल्कुल मेल नहीं खाती क्योंकि बीते जून माह में अमरीकी विदेशमन्त्री से मुलाक़ात करते हुए सलमान ख़ुर्शीद ने कहा था कि निजी जीवन में कोई भी हस्तक्षेप 'स्वीकार नहीं किया जाएगा'।(रेडियो रूस से साभार) 

Monday, April 29, 2013

मई महीने के रंगीन त्यौहार

फूलों, रंगों और संगीत के कई त्यौहार
                                                                 फ़ोटोः रिया नोवस्ती
मई महीने के पहले दशक में रूसी शहरों में रंगों और संगीत के कई त्यौहार मनाए जाएँगे। आजकल रूस के निवासी रंगों के भारतीय त्यौहार, होली को भी बड़े उत्साह से मनाते हैं। रूस के विभिन्न नगरों में होली के त्यौहार को मनाने का सिलसिला मार्च माह के अंत में ही शुरू हो गया था जो अप्रैल माह से गुज़रता हुआ मई माह में पहुँच जाएगा। आम तौर पर रूस में मई महीने का पहला दशक फूलों, रंगों और संगीत के कई त्यौहारों के रूप में मनाया जाता है। एक मई को श्रम दिवस और नौ मई को विजय दिवस मनाया जाएगा। इसके अलावा साबुन के बुलबुलों का त्यौहार और अंतर्राष्ट्रीय संगीत त्यौहार भी मनाए जाएंगे और रूसी हस्तशिल्प कला के एक प्रदर्शनी-मेले का आयोजन भी किया जाएगा। इस प्रकार, मई महीने के पहले दशक के दौरान रूस के नगरों, कस्बों और गाँवों का माहौल रंगों, फूलों और संगीत से भरपूर रहेगा।

इस साल, 5 मई को मास्को में रंगों का भारतीय त्यौहार, होली फिरसे मनाया जाएगा। हज़ारों की संख्या में लोग एक दूसरे पर रंग और गुलाल डालेंगे। दुनिया का सबसे रंगीन त्यौहार है यह! मास्को में यह उत्सव पूरा दिन जारी रहेगा।

रूस की राजधानी में ही एक अन्य उज्ज्वल और ख़ुशियों-भरा त्यौहार मनाया जाएगा। देश भर से रूसी कारीगरों की हस्तशिल्प कला की एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इस प्रदर्शनी-मेले में विचित्र खिलौनों से लेकर घरेलू उपयोग की वस्तुओं तक, कई प्रकार की अद्भुत शिल्प कला-कृतियाँ न केवल देखी जा सकेंगी बल्कि, अगर कोई चाहे तो इन्हें ख़रीद भी सकेगा। इसके अलावा, आप "कारीगरों की नगरी" में जाकर कुछ ही घंटों में इन कला-कृतियों को बनाने के गुर सीख सकेंगे। इस प्रदर्शनी-मेले के दौरान संगीत कार्यक्रमों, राष्ट्रीय वेशभूषा की प्रदर्शनियों और लोक-नृत्यों के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, आगुन्तकों को रूसी व्यंजनों का ज़ायका लेने का भी अवसर मिलेगा।

इन सभी त्यौहारों के दौरान आकाश में रंग-बिरंगे गुब्बारे छोड़े जाने की परंपरा है। यह एक बहुत ही सुन्दर नज़ारा होता है। गुब्बारे आसमान में उड़ते-उड़ते पता नहीं कहाँ अलोप हो जाते हैं। इस वर्ष रूस के दूसरे सबसे बड़े नगर सेंट-पीटर्सबर्ग में साबुन के बुलबुले आकाश में छोड़ने का त्यौहार मनाया जाएगा। इस दिन रूस की उत्तरी राजधानी "साबुन के बुलबुलों की नगरी" में बदल जाएगी। इस के केंद्रीय पार्क में इस त्यौहार का उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस त्यौहार में हिस्सा लेने की सभी लोगों को अनुमति दी जाएगी। सिर्फ़ एक ही अनिवार्य शर्त होगीः इसके भागीदारों को उज्ज्वल कपड़े या यहाँ तक कि कार्निवाल की पोशाकें पहननी होंगी और उनके हाथों में साबुन के पानी से भरा एक मर्तबान होना चाहिए। इस समारोह का प्रत्येक प्रतिभागी अपने सपने बुन सकता है। उसके मन में कोई उदासी सेंध नहीं लगा सकेगी और उसकी सभी समस्याएँ ऐसे ही ग़ायब हो जाएंगी जैसे साबुन के पानी का बुलबुला फट जाता है।

पूरे रूस में चटख-चमकीले रंगों का माहौल है। चारों तरफ़ रंग-बिरंगे फूल खिले हैं। वातावरण फूलों की सुगंधियों से तरो-ताज़ा है। और ऐसे माहौल में संगीत, मधुर संगीत के बिना मानो किसी रंग की कमी महसूस की जा रही है। संगीत के कार्यक्रमों की कमी। संगीत के बिना कोई त्यौहार कैसे मनाया जा सकता है? तो लीजिए, यह कमी भी पूरी हो गई! रूस के एक सबसे पुराने नगर यरोस्लावल में पाँचवीं बार अंतर्राष्ट्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस शहर और इसके आसपास के नगरों में कुछ दिनों तक विभिन्न देशों से आए आर्केस्ट्राओं और संगीत-मंडलियों द्वारा शास्त्रीय संगीत लगातार पेश किया जाएगा। यदि मनुष्य के जीवन में चटख-चमकीले रंगों, फूलों की खुशबू और मधुर संगीत का बोलबाला हो तो उसके लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है?  (
रेडिओ  रूस)

कब आएंगे परग्रहवासी?

रूसी समाजविज्ञानियों ने पता लगाने के लिए किया एक जनमत अध्ययन 
क्या मानव ब्रहमांड में अकेला है ?
                                                                                    © फ़ोटो: SXC.hu
विश्लेषण से मालूम हुआ कि लगभग एक चौथाई रूसी लोगों को यह उम्मीद है कि परग्रहवासी हमारी पृथ्वी पर आएंगे|
आधे से अधिक रूसियों को परग्रहवासी जैसी बातों में कोई विश्वास नहीं है| किंतु लगभग 40% लोगों का यह मानना है कि पृथ्वी-इतर सभ्यताएं अस्तित्वमान हैं| आश्चर्य की बात यह है कि ऐसा मानने वालों में उच्च शिक्षा प्राप्त और अच्छी आमदनी वाले पुरुष ही अधिक हैं|
लगभग एक चौथाई रूसियों को विश्वास है कि अगले पचास वर्ष के अंदर-अंदर पृथ्वीवासियों का पृथ्वी-इतर सभ्यताओं से संपर्क स्थापित हो जाएगा| इसके साथ ही वे यह भी मानते हैं कि इस भेंट का स्थान पृथ्वी भी हो सकती है यानी ये इतर-सभ्यताओं वाले पृथ्वी पर अवतरित हो सकते हैं| या फिर ऐसा भी हो सकता है कि अंतरिक्ष का अध्ययन कर रहे पृथ्वी के अंतरिक्षनाविकों की अंतरिक्ष में उनसे कहीं भेंट हो जाए|
रूसी लोगों को सबसे अधिक विश्वास इस बात पर है कि पृथ्वी-इतर सभ्यताओं से भेंट धरतीवासियों के लिए हितकर होगी| अनेक लोगों ने यह मत व्यक्त किया कि दूसरे ग्रहों के निवासी हमसे अधिक बुद्धिमान, उदार और ईमानदार हैं और वे पृथ्वीवासियों को अपने ये सद्-गुण प्रदान करेंगे| लेकिन साथ ही कुछ लोगों को यह आशंका भी है कि पृथ्वी-इतर सभ्यताएं हमें भारी क्षति पहुंचा सकती हैं| उन्हें डर है कि ये सभ्यताएं मानव पर प्रयोग करेंगी या फिर पृथ्वी पर कब्ज़ा ही कर लेंगी|
लगभग एक चौथाई लोग यह मानते हैं कि परग्रहवासी पृथ्वी पर आए थे और उन्होंने पृथ्वीवासियों से संपर्क भी स्थापित कर लिए थे| इनमें से अधिकाँश लोगों का यही मानना है कि यह संपर्क पृथ्वीवासियों के लिए हितकर रहा|
एक और दिलचस्प बात यह है कि आधे से अधिक लोग यह मानते हैं कि देश के नेताओं को पृथ्वी-इतर सभ्यताओं के बारे में कहीं अधिक जानकारी है किंतु वे किन्हीं कारणों से आम लोगों तक यह जानकारी नहीं पहुँचने दे रहे| (रेडिओ रूस)

Monday, April 01, 2013

16 बंगलादेशी मछुआरों के शव समुद्र में मिले

                       सभी मृतकों के हाथ-पैर बँधे हुए थे
कुछ दिन पूर्व लापता हुए बांग्लादेशी मछुयारों के शव मिल गए हैं। रेडियो रूस ने यह समाचार देते हुए सिन्हुया के हवाले से बताया कि मुर्तकों के हाथ पाँव बंधे हुए थे। रेडियो ने बताया कि सोमवार को बंगलादेश के दक्षिणी-पश्चिमी समुद्री-तट पर कुतुब्दिया द्वीप के पास बंगाल की खाड़ी में 16 मछुआरों के शव मिले हैं। कोक्स बाज़ार के पुलिस प्रमुख मुहम्मद आज़ाद मियाँ के हवाले से सिन्हुआ समाचार समिति ने यह ख़बर दी है।
उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले 23 मछुआरे कुतुब्दिया की ओर रवाना हुए थे जो बाद में लापता हो गए थे। उनकी खोज की जा रही थी। सभी मृतकों के हाथ-पैर बँधे हुए थे।
कोक्स बाज़ार के पुलिस अधिकारी मुहम्मद आज़ाद मियाँ ने बताया कि ऐसा लगता है कि इन लोगों के हाथ-पैर बाँधकर इन्हें जीवित ही समुद्र में फेंक दिया गया था। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस का अनुमान है कि समुद्री डकैतों ने इन मछुआरों की हत्या की होगी।

16 बंगलादेशी मछुआरों के शव समुद्र में मिले

Monday, March 25, 2013

मास्को और बीजिंग: सदा मित्र, शत्रु कभी नहीं !

दुनिया को दिया गया है एक स्पष्ट संदेश 
                                                      © Photo: «The Voice of Russia»
"मेरी रूस यात्रा के परिणाम मेरी सारी उम्मीदों से भी कहीं अच्छे निकले हैं"। यह बात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी मास्को यात्रा के दौरान कही। वास्तव में, चीनी नेता द्वारा की गई रूसी राजधानी की यात्रा फलदायक रही है। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन, प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव, संसद के दोनों सदनों के स्पीकरों- सेर्गेय नरीश्किन और वलेन्तिना मत्वेयेन्का से बैठकें कीं जो अति कामयाब रहीं। अपनी रूस यात्रा के दौरान शी जिनपिंग रूस के रक्षामंत्री सेर्गेय शोइगू से भी मिले जिन्होंने अपने चीनी मेहमान को रूसी सेना का संचालन नियंत्रण केंद्र देखने के लिए आमंत्रित किया। शी जिनपिंग ऐसे पहले विदेशी नेता हैं जिनके लिए रूसी सेना की इस मुख्य कमान पोस्ट के दरवाज़े खोले गए। चीनी नेता रूस के युवा लोगों से मिले और उन्होंने मास्को के अंतर्राष्ट्रीय संबंध संस्थान के छात्रों को एक व्याख्यान भी दिया।

रूस दुनिया का पहला देश है जिसकी चीनी राष्ट्रपति के रूप में शी जिनपिंग ने राजकीय यात्रा की है। इस प्रकार, दुनिया को एक स्पष्ट संदेश दिया गया है कि बीजिंग रूस के साथ अपने संबंधों के विकास को प्राथमिकता देता है। मास्को ने चीनी नेता के इस क़दम का ऊँचा मूल्याँकन किया है। रूसी-चीनी वार्ता का उद्घाटन करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरूआत है। चीनी नेता को संबोधित करते हुए व्लादिमीर पूतिन ने कहा-

चीन के राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाने पर मैं आपको हार्दिक बधाई देता हूँ। आपने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए हमारे देश को चुना है। इसके लिए हम आपको धन्यवाद देते हैं। यह इस बात का एक स्पष्ट सबूत है कि चीन और रूस एक दूसरे के साथ संबंधों के विकास पर कितना ध्यान दे रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में हमने इन संबंधों के विकास के लिए बहुत कुछ किया है। और आज ये संबंध दुनिया की राजनीति में एक प्रमुख कारक बन गए हैं। आदरणीय राष्ट्रपति जी, मेरा विश्वास है कि आपकी यह यात्रा रूसी-चीनी संबंधों के विकास को एक नया मोड़ प्रदान करेगी।

चीनी नेता की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सभी क्षेत्रों में सहयोग से संबंधित दस्तावेज़ों के एक बड़े पैकेज पर हस्ताक्षर किए। रूस के सबसे बड़े विदेश व्यापार बैंक वी.ई.बी, प्रत्यक्ष निवेश कोष, रूसी-चीनी निवेश कोष और चीनी निवेश निगम के बीच एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके अंतर्गत रूस के सुदूर-पूर्व में मूलभूत सुविधाओं के निर्माण से संबंधित परियोजनाओं और अन्य परियोजनाओं को कार्यरूप देने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया जाएगा। ऊर्जा का क्षेत्र- दो देशों के बीच सहयोग की एक रणनीतिक दिशा है। रूस की गैस कंपनी “गाज़प्रोम” और चीनी पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के बीच हुए एक ज्ञापन-समझौते के तहत चीन को रूसी प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी। इस सिलसिले में “गाज़प्रोम” के प्रमुख अलेक्सेय मीलर ने कहा-

इस दस्तावेज़ का एक रणनीतिक महत्त्व है। दोनों पक्षों ने तय किया है कि रूस से चीन को गैस की आपूर्ति के लिए "साइबेरिया की शक्ति" नामक गैस पाइपलाइन के पूर्वी मार्ग को प्राथमिकता दी जाएगी। इस समझौते की अवधि 30 साल होगी। इसके अंतर्गत चीन को रूसी गैस की सप्लाई वर्ष 2018 में शुरू की जाएगी। चीन के लिए रूसी गैस की वार्षिक आपूर्ति की मात्रा फ़िलहाल 38 अरब घन मीटर निर्धारित की गई है। लेकिन इस मात्रा को 60 अरब घन मीटर तक बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। दोनों पक्ष आगामी जून माह में कानूनी रूप से बाध्यकारी शर्तों संबंधी एक अनुबंध पर हस्ताक्षर करेंगे और इस वर्ष के अंत तक लंबी अवधि के एक मूलभूत अनुबंध पर हस्ताक्षर करने की हमारी योजना है।

रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव के साथ शी जिनपिंग की बैठक का अधिकांश समय बंद दरवाज़े के पीछे ही गुज़रा। चीनी नेता ने पत्रकारों की उपस्थिति में यह भी कहा कि वह अपनी रूस यात्रा के परिणामों से बेहद खुश हैं। मास्को के अंतर्राष्ट्रीय संबंध संस्थान के छात्रों को संबोधित करते हुए चीनी नेता ने कहा-

आजकल चीनी राष्ट्र का महान कायाकल्प किया जा रहा है। यह इतिहास के आधुनिक चरण में चीनी जनता का एक सबसे महत्वाकांक्षी सपना है। हम इसे "चीनी सपना" कहते हैं। यह चीन को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने, राष्ट्रीय पुनरुद्धार करने और जनता का कल्याण करने का सपना है। पिछली सदी में चीनी जनता को बहुत दुख झेलने पड़े हैं, बाहरी हमलों तथा घरेलू उथल-पुथल का सामना करना पड़ा है। इसलिए चीनी जनता को पता है कि शांति का कितना बड़ा महत्त्व होता है। हमें अपने लोगों का जीवन स्तर ऊँचा करने के लिए शांतिपूर्ण माहौल की ज़रूरत है।

मास्को और बीजिंग के बीच वर्तमान संबंधों का उल्लेख करते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि आज की दुनिया में रूस और चीन के बीच सबसे घनिष्ठ संबंध मौजूद हैं। चीनी नेता ने इन संबंधों का सार बताते हुए कहा- "हम सदा के लिए एक दूसरे के मित्र हैं और शत्रु कभी नहीं बनेंगे।"


मास्को और बीजिंग: सदा मित्र, शत्रु कभी नहीं !

Saturday, February 23, 2013

यूरोप में बेरोज़गारी का क़हरः यूरोपीय आयोग


23.02.2013, 01:36
बेरोज़गारी का स्तर बढ़कर 12 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा
                                                                   फोटो: EPA
हमें लगता होगा कि शायद बेरोज़गारी का संकट केवल हमारे यहाँ ही है पर वास्तव में यह संकट पूरी दुनिया में गहराता जा रहा है। रेडियो रूस ने यूरोपीय आयोग के हवाले से खबर दी है कि वहन भी भी बेरोज़गारी का संकट घर रहा है। यूरोप में बेरोज़गारी का कहर शीर्षक से दी गई इस खबर में रेडियो रूस ने बताया है कि वर्ष 2013 में यूरो क्षेत्र में बेरोज़गारी का स्तर बढ़कर 12 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा। यह बात शुक्रवार को यूरोपीय आयोग द्वारा प्रकाशित आर्थिक पूर्वानुमान संबंधी एक रिपोर्ट में कही गई है। वर्ष 2012 में यूरो क्षेत्र में बेरोज़गारी का स्तर 11.4 प्रतिशत था। विशेषज्ञों के मुताबिक, योरोप में बेरोज़गारी की उच्चतम, 27 प्रतिशत दर यूनान में होगी।

यूरोपीय आयोग की रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि यूरोप में लंबे समय तक बेरोज़गारी बढ़ते रहने से कई लोग अपना पेशेवाराना कौशल भी भूल सकते हैं।

Monday, February 04, 2013

उल्लू का राज खुला

3.02.2013, 15:34
 दर्जनों उल्लुओं के एक्स-रे और सीटी स्कैन्स किए गए
Национальный зоопарк Манагуа Никарагуа карлик сова карлик Бруно Браулио птица птицы
                                                                                                                             फोटो: EPA
उल्लू दिन की रौशनी में देख नहीं सकता लेकिन रात के अँधेरे में उल्लू की शक्ति बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। उल्लू की वचित्र खूबियों की चर्चा अक्सर सुनने में मिलती है। तन्त्र की दुनिया में तो उल्लू को वश में करने के बहुत ही कठिन तरीके भी बताये जाते रहे हैं। लेकिन इस सब के साथ साथ विज्ञान अपना काम करता है। अब विज्ञानं ने उल्लू की गर्दन में हैरानीजनक हद तक पाए जाते  लचीलेपन के राज़ का पता लगा लिया है। रेडियो रूस ने इस सम्बन्ध में एक दिलचस्प खबर दी है।
उल्लू अपनी लचीली गर्दन के लिए मशहूर है और अब वैज्ञानिकों ने इसके कारण का भी पता लगा लिया है। उल्लू किसी भी दिशा में अपनी गर्दन को लगभग पूरा [270 डिग्री तक] घुमा सकता है और खास बात यह है कि ऐसा करने में उल्लू को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। उल्लू की शारीरिक संरचना के अध्ययन के लिए दर्जनों उल्लुओं के एक्स-रे और सीटी स्कैन्स किए गए। इसे लेकर मीडिया में जो कुछ आता रहा उसके  अनुसार उल्लुओं का गर्दन घुमाने का रहस्य अब सुलझ गया है। इस अध्ययन के लिए उल्लू की नसों में रंगीन तरल प्रवाहित कर कृत्रिम रक्त प्रवाह बढ़ाया गया। उल्लू के जबड़े की हड्डी से ठीक नीचे सिर के आधार में स्थित रक्त वाहिकाएं रंगीन तरल के पहुंचने के साथ-साथ लंबी होती गई। यह प्रक्रिया तब तक चली जब तक कि यह रंगीन तरल रक्त भंडार में जमा नहीं हो गया। उल्लू में पाया जाने वाला यह गुण बिल्कुल अनोखा है जबकि मनुष्य में ऐसा नहीं होता है। (रेडियो रूस से साभार) उल्लू का राज खुला

Thursday, January 24, 2013

पोल भाषा में रामायण का अनुवाद प्रकाशित

रामायण और महाभारत की तुलना किसी भी रचना से नहीं 
                                       © Photo: SXC.hu

भारत के प्रेम का संदेश निरंतर  फ़ैल रहा है। एक तरफ रूस के  स्तास नामिन भारत पर मोहित हैं तो दूसरी तरफ पोलैण्ड  के यानुस क्रीज़ीज़ोव्स्की भी भारत को बहुत प्यार करते हैं। इतना प्यार करते हैं कि बड़ी आसानी से हम कह सकते हैं कि वे भारत के पीछे पाग़ल हैं। रेडियो रूस के मुताबिक पोलैण्ड के प्रसिद्ध भारतविद् यानुस क्रीज़ीज़ोव्स्की की कोशिशों से अब 'रामायण' का अनुवाद पोल भाषा में भी उपलब्ध है। हालाँकि रामायण के कुछ अंशों का अनुवाद 1816 में ही पोल भाषा में हो गया था और बीसवीं शताब्दी तक लगातार रामायण का अनुवाद करने के अनेक प्रयत्न किए जाते रहे।
यानुस क्रीज़ीज़ोव्स्की ने दर्जनों किताबों में प्रकाशित उन सभी अनुवादों को इकट्ठा करके उन्हें एक निश्चित क्रम दे दिया ताकि पोलैण्ड के आम पाठक पूरी रामायण पढ़ सकें। यानुस क्रीज़ीज़ोव्स्की ने बताया --मैं इस महाकाव्य को ऐसा रूप देना चाहता था कि आम पाठक भी उसे सहजता से समझ सके। ख़ासकर बच्चे भी उसे आसानी से पढ़ सकें और महान भारतीय मिथक परम्परा को जान सकें।

यानुस क्रीज़ीज़ोव्स्की भारत को इतना प्यार करते हैं कि बड़ी आसानी से हम कह सकते हैं कि वे भारत के पीछे पाग़ल हैं। 15 साल पहले जब उन्होंने दर्शनशास्त्र में एम०ए० किया था तो उनका यह पाग़लपन शुरू हुआ था।

इण्डो-एशियन न्यूज सर्विस से बात करते हुए यानुस क्रीज़ीज़ोव्स्की ने कहा -- रामायण और महाभारत -- ये दो ऐसे अनूठे महाकाव्य हैं, जिनकी तुलना दुनिया की किसी भी रचना से नहीं की जा सकती है। यहाँ तक कि प्रसिद्ध यूनानी महाकाव्य भी इनके सामने फीके पड़ जाते हैं।

पोलैण्ड में भारत की राजदूत मोनिका मेहता ने कहा -- यानुस क्रीज़ीज़ोव्स्की ने पोलैण्डवासियों के मन में भारत के प्रति प्यार और दिलचस्पी जगाने के लिए बहुत कुछ किया है। इसलिए उनसे मिलकर उनके प्रति मन में आदर पैदा होता है। हमें गर्व है कि हमारे साथ पोलैण्ड में इतना बेशक़ीमती रत्न सहयोग कर रहा है।
(रेडियो रूस से साभार)

Monday, January 21, 2013

स्तास नामिन और "दस अवतार"


भारतीय संस्कृति और कला से मोहित हैं-स्तास नामिन
                                                           कोलाज व्यास आफ रशिया 
कई दशक पूर्व जाने माने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी शख्सीयत राज कपूर साहिब की एक फिल्म का एक गीत बहुत लोक प्रिय हुआ था 
मेरा जूता है जापानी 
ये पतलून इंगलिस्तानी 
सर पे लाल टोपी रूसी 
फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी 
फिल्म श्री420 के इस गीत को लिखा था शैलेन्द्र ने और संगीत दिया था शंकर-जयकिशन ने।  गीत संगीत की दुनिया में एक यादगारी छाप छोड़ने वाले जनाब मुकेश साहिब की आवाज़ में जब गीत  दुनिया के सामने आया तो सबके दिल में उतर गया।  आज भी लोग इसे  गुनगुनाते अक्सर सुने जा सकते हैं। इस गीत की  भावना को इतनी मुद्दत के बाद याद दिलाया है रेडियो रूस ने अपनी एक खबर में। खबर है स्तास नामिन और "दस अवतार" की।  रेडियो रूस के मुताबिक स्तास नामिन-एक प्रसिद्ध रूसी रॉक संगीतकार, कलाकार, फोटोग्राफर और थिएटर तथा फिल्म निर्देशक हैं। उन्होंने भारतीय विषय पर एक नाटक तैयार करने का संकल्प किया है। स्तास नामिन का कहना है कि वह भारतीय संस्कृति और कला से मोहित हैं। स्तास नामिन ने कहा-

आप यह सुकर हैरान होंगे कि मुझे भारत से प्यार विगत शताब्दी के आठवें दशक में तब हुआ जब मैंने "बीटल्स" का संगीत सुना। बाद में मैं प्रामाणिक भारतीय कला के संपर्क में आया। तब हमारे देश में भारत से कई संगीत कलाकार आए थे। भारत के परंपरागत वाद्ययंत्रों की सुंदरता और विशिष्टता ने मेरा मन मोह लिया। मैं उन भारतीय संगीत कलाकारों से मिला और भारतीय वाद्ययंत्रों के बारे में जानकारी हासिल की। सितार का तो में दीवाना हो गया और मैंने संकल्प किया कि भारत जाकर सितार वादन की शिक्षा पाऊँगा।

भारत जाने से पहले स्तास नामिन और उसकी संगीत मंडली ने लगभग आधी दुनिया की यात्राएँ कीं और अपने कई दिलचस्प कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उन्होंने अस्सी के दशक में मास्को में आयोजित नशीले पदार्थों के विरुद्ध एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय रॉक संगीत त्योहार में भाग लिया था। उसके बाद उन्होंने विभिन्न देशों के संगीतकारों के साथ मिलकर ब्रिटेन के कई नगरों में अपने संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वह कुछ समय के लिए अमरीका में भी रहे। वहाँ वह संगीत संस्कृति का ज्ञान हासिल करने के प्रयास करते रहे। वहाँ ही उन्होंने सितार ख़रीदा और भारतीय संगीतकारों से सितार वादन सीखना शुरू किया। उसके बाद उन्होंने सितार के साथ अपने संगीत कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू किया और इस साल उन्होंने भारत का दर्शन भी किया। वहाँ उन्होंने भारत के बारे में कुछ दस्तावेज़ी फिल्में बनाईं। उनमें से एक फिल्म वाराणसी और वहाँ आनेवाले तीर्थयात्रियों के बारे में है। स्तास नामिन की यह फिल्म हाल ही में मास्को स्थित भारत के सांस्कृतिक केंद्र में दिखाई गई जो दर्शकों को बहुत पसंद आई। इस फ़िलाम के लिए संगीत भी स्तास नामिन ने स्वयं ही रचा है।

मास्को में स्तास नामिन का अपना एक थीएटर भी है। इस थीएटर में रूसी चैम्बर संगीत, रॉक ओपेरा और संगीत नाटक प्रस्तुत किए जाते हैं। ऐसा लगता है कि यह रूसी फिल्म निर्माता और संगीतकार अपने थिएटर को एक नया रंग देना चाहते हैं। स्तास नामिन ने बताया कि अपने थीएटर में एक भारतीय महाकाव्य पर आधारित संगीत नाटक प्रस्तुत करने की उनकी योजना है। उन्होंने कहा-

हमारे नए संगीत नाटक का नाम होगा- "दस अवतार"। यह भगवान विष्णु के विभिन्न अवतार धारण करने की कहानी होगी जिसका वर्णन प्राचीन पुराणों में किया गया है। यह एक संगीत और नृत्य प्रस्तुति होगी। इसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य होगा। हम रूसी दर्शकों को भारतीय महाकाव्य की विलक्षण झलकियाँ दिखानी चाहते हैं ताकि दर्शक अद्वितीय भारतीय कला और संस्कृति की मूल परंपराओं को अच्छी तरह से समझ सकें।

स्तास नामिन के संगीत नाटक "दस अवतार" में भाग लेने के लिए भारतीय संगीत कलाकारों को आमंत्रित किया गया है और इसमें भारतीय शास्त्रीय नृत्य रूसी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। उम्मीद है कि यह संगीत नाटक अगले वर्ष के पूर्वार्ध में प्रस्तुत किया जाएगा।(
रेडियो रूस से साभार)
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Monday, January 14, 2013

माउस से एक ही “क्लिक” करने से पूरी सभ्यता का विनाश?

साइबर युद्ध का ख़तरा-अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से
वर्ष 2013 में दुनिया भर में साइबर हमलों की संख्या में बड़ी तेज़गति से वृद्धि होगी। कुछ ख़ास ठिकानों पर ऐसे हमले किए जाएंगे और सरकारी एजेंसियों पर विशाल पैमाने के हमले भी होंगे। यह निष्कर्ष एंटीवायरस निगम "कैसपेर्स्की लैब" के विशेषज्ञों ने निकाला है। अमरीकी खुफिया सेवाओं ने भविष्यवाणी की है कि आनेवाले 20 वर्षों में वैश्विक साइबर युद्ध शुरू हो जाएगा।

"कैसपेर्स्की लैब" के विश्लेषकों के मुताबिक, अगले साल कई सरकारी संस्थानों और व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों की निजी कंपनियों की गोपनीय जानकारी की चोरी बड़े पैमाने पर होने लगेगी। सामाजिक सेवाओं और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर साइबर हमले अक्सर होने की सम्भावना है।

गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी बड़ी नेटवर्क कंपनियों के पास भारी मात्रा में ऑनलाइन जानकारी हासल करने की क्षमता होगी। इसके अलावा, संचार प्रौद्योगिकी के विकास की तेज़गति की बदौलत देशों की सरकारों का अपने नागरिकों पर असीम नियंत्रण हो जाएगा। लेकिन इन देशों के नागरिकों के पास भी अपनी सरकारों को चुनौतियाँ देने के कई अवसर मौजूद होंगे।

वर्तमान में, सूचना प्रौद्योगिकी हमारे समाज के सूचना क्षेत्र के विकास के संदर्भ में एक बड़ा ख़तरा बनती जा रही है। इस संबंध में रूस के सूचना सुरक्षा संघ के अध्यक्ष गेन्नादी येमेलियानोव ने रेडियो रूस को बताया –

ऐसा ख़तरा इसलिए बढ़ता जाएगा क्योंकि इस ख़तरे का एक टाइमबम फिट कर दिया जा चुका है। यदि हम समय पर पर्याप्त सुरक्षा उपाये नहीं करेंगे तो यह बम ज़रूर फटेगा और बड़े विनाश का कारण बनेगा। जब हम सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के इतने ज्यादा आदी हो जाएंगे कि इसके बिना जीवन ही असंभव हो जाएगा तब पूरी दुनिया के लिए बहुत-सी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ज़रा सोचिए, इस सूचना प्रौद्योगिकी ने अचानक ही काम करना बंद कर दिया है। अब आप क्या करेंगे? पूरा जीवन ठप्प। आप ज़रा कल्पना कीजिए कि सभी स्थानों पर बिजली गुल हो गई है। सारा काम ठप्प। वित्तीय और आर्थिक कारणों से भी ऐसा ख़तरा पैदा हो सकता है। इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी को अच्छी तरह से समझने वाले एक बहुत अच्छे दिमाग़ की ही ज़रूरत होगी।

अमरीकी खुफिया सेवाओं ने अपने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें अमरीका के लिए मौजूदा साइबर हमलों के ख़तरों की समीक्षा की गई है। इसमें कहा गया है कि इस क्षेत्र में अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से ही पैदा होगा। लॉस एंजिल्स टाइम्स में छपी इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस, फ्रांस, इज़राइल और दुनिया के कुछ अन्य देश भी साइबर जासूसी करते हैं लेकिन वे उतना विश्वासघात नहीं करेंगे जितना कि चीन कर सकता है। कम से कम रूस ऐसा नहीं कर रहा है। वह अपने व्यापारियों के लाभ के लिए अमरीकी कंपनियों की जानकारियां चुराने की कोशिशें नहीं कर रहा है।

इस बीच, दिसंबर माह की शुरूआत में साइबर रक्षा पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मंच साइबर सुरक्षा एशिया- 2012 के भागीदार इस बात पर सहमत हुए थे कि सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया की मुख्य समस्या यह है कि दुनिया की सरकारें अभी तक यह तय नहीं कर पाई हैः साइबर-आतंकवाद क्या चीज़ है? कुछ देशों की सरकारें साइबर युद्ध के लिए सबसे प्रभावकारी मालवेयर का विकास कर रही हैं। लेकिन कोई भी सरकार यह गारंटी नहीं दे सकती हैं कि ये मालवेयर और वायरस आतंकवादियों के लिए भी उपलब्ध नहीं हो सकेंगे। यदि ऐसा हुआ तो आतंकवादी गिरोह इन मालवेयरों और वायरसों का खूब इस्तेमाल करेंगे। इसलिए कहा जा सकता है कि आज भी दुनिया के कई देशों के लिए अपने ही साइबर संजाल में फंसने का बड़ा भारी ख़तरा बना हुआ है। माउस से एक ही “क्लिक” करने से पूरी सभ्यता का विनाश हो सकता है। (
रेडियो रूस से साभार)
13.12.2012, 16:32         
साइबर युद्ध का ख़तरा