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Tuesday, December 24, 2019

वाम के तो अब बस अवशेष बाकी हैं-ABVP

लुधियाना में ABVP का 51वां राज्य अधिवेशन शुरू 
लुधियाना: 24 दिसंबर 2019: (पंजाब स्क्रीन टीम)
पंजाब में अपना आधार और मज़बूत करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपनी सरगर्मिया बढ़ा दी हैं। शीट लहर के प्रकोप से जब लोग रजाईयों और कंबलों में दबके पड़े हैं उस समय इस छात्र संगठन के सदस्य और नेता मैदान में आ गए हैं।  लगता है छुट्टियों का सीज़न भी रणनीती के तौर पर ही चुना गया है तांकि छात्र शक्ति स्कूलों कालेजों से ग़ैरहाज़र हुए बिना अपना पूरा समय और ध्यान संगठन की तरफ दे सके। इसके सक्रिय नेता चिरांशु रत्न ने  से बात करते हुए बहुत से मुद्दों पर बात की। वाम की चुनौती को लेकर किये गए सवाल का जवाब देते हुए उन्हीने कहा कि अब हम वाम को चुनौती ही नहीं मानते।  वे रहे ही कहां हैं? बस अब तो उनके अवशेष बाकी हैं। वे अवशेष भी अपने ही भार से खुद बी खुद समाप्त होने वाले हैं।  राष्ट्रीयता की लहर के सामने विदेश तत्व अब बेहद निर्बल और असहाय हो चुके हैं। शहीद भगत सिंह और शहीद ऊधम सिंह को अभी तक कौमी शहीद न माने जाने पर किये गए सवालों पर उन्होंने कहा कि हम कई दशकों से शहीदों के इस सम्मान के लिए प्रयासशील हैं। कुछ समय तक किसी ने नहीं सोचा था की कभी धारा 370 भी हटेगी लेकिन वह अब हट चुकी है। बाकि काम भी जल्द होंगें। शहीदों को उन सम्मान मिले यह बात मोदी जी की सरकार के प्राथमिक मुद्दों में है। उनको कौमी शहीद का दर्जा भी जल्द मिलेगा। इस तरह के नए इरादों और नई चुनौतियों के साथ ही शुरू हुआ है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 51वां राज्य अधिवेशन। 
बाद दोपहर  ढाई बज चुके थे लेकिन धुंद और सर्दी की वजह से सुबह सुबह का समय ही लग रहा था। स्थान था  लुधियाना के जानेमाने दरेसी ग्राउंड के गहन आंतरिक इलाके में स्थित एस. ए. एन. जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल। निमंत्रण भेजने वाले व्यवस्था अधिकारी सतीश सैनी जी को हमारी मीडिया टीम में से कोई भी जानता पहचानता नहीं था। नेटवर्किंग समस्या के चलते उनका मोबाईल भी नहीं मिल रहा था। ऐसे में सक्रिय सहयोग दिया एबीवीपी के प्रबंधन कार्यकर्ता अर्जुन त्रेहन ने जो यहां अमृतसर से आए हुए थे। इसी सहयोग के चलते अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 51 वें अधिवेशन का आयोजन बहुत ही अपना अपना सा लगा। मन में आया काश हम भी छात्र होते  और इसमें शामिल हो पाते। हमारी टीम के सक्रिय सदस्य प्रदीप शर्मा जी तो इतने उत्साह में आये कि सेल्फी स्टैंड में आ कर उन्होंने बाकायदा अपना फोटो भी खिंचवाया। आप इन सभी तस्वीरों को फेसबुक पर भी देख सकते हैं। 
आंगन में ध्वजों के बड़े से गोल दायरे और जगह जगह लगे हुए छोटे छोटे माटो राष्ट्रीयता का संदेश दे रहे थे। बोले सो निहाल और वाहिगुरु जी का खालसा के जैकारे उन आरोपों की हंसी उड़ा रहे थे जिनमें कहा जाता है कि एबीवीपी केवल हिंदुत्व की ही प्रतिनिधि है। गौरतलब है वाम  जहाँ लेनिन, कार्ल मार्क्स, माओ-त्से-तुंग और चीगुवेरा जैसे सभी विदेशी है वहीँ एबीवीपी ने गुरुनानक और विवेकानंद को अपने नायकों में शामिल किया है। लगता है पंजाब में इस छात्र संगठन का भविष्य रौशन है। गुरुमुखी में लिखे नारों में  पर पूछे जाने पर इस संगठन के एक कार्यकर्ता ने कहा कि इस तर भी प्रयास जारी हैं।  इसके साथ ही नारे लग रहे थे भगत सिंह तेरी सोच ते पहरा दिआंगे ठोक के। ऊधम सिंह तेरी सोच ते पहरा दिआंगे ठोक के। मंच पर लगे बड़े बैनर पर जहां एक तरफ श्री गुरु नानक देव जी का बड़ा सा स्कैच बना था वहीँ दूसरी तरफ एक गोलक सी बना कर पानी की बचत का संदेश भी दिया गया था। 
गौरतलब है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पंजाब प्रांत का अधिवेशन आज यहां 24 दिसंबर को शुरू हो  गया और 26 दिसंबर तक चलेगा। इस आयोजन के चलते एस. ए. एन सीनियर सेकेंडरी स्कूल लुधियाना  पूरा माहौल ही धर्म और राष्ट्रीयता  रंगा हुआ था।  मुख्य अतिथि के रुप में माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश थे जबकि मुख्य वक्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील अंबेडकर और विशेष मेहमान लेखक एवं मशहूर गायक  किन्द्र देओल रहे। 
सबसे पहले सत्र में प्रदेश मंत्री चिरांशु रतन द्वारा उनके पूरे साल भर का किए गए कार्यों का बेरवा दिया जाएगा एवं उसके बाद ही चुनाव अधिकारियों द्वारा 2019-20 के पंजाब प्रांत के अध्यक्ष एवं मंत्री के लिए चुनाव किया गया। इसके साथ ही दोपहर के भोजन और शाम की चाय का ब्रेक भी हुआ। भोजन का प्रबंध देर शाम तक जारी रहा। दूर दूर से आने वाले डेलीगेटों और सदस्यों के लिए सबसे पहले भोजन का प्रबंध होता। उनका आग्रह इतना स्नेह भरा था कि  हमारी टीम ने भी उस सात्विक से बने भोजन का आनंद लिया। दिलचस्प बात है कि भोजन किसी बाज़ार से नहीं आया बल्कि खुद स्कूल के परिसर में ही तैयार किया गया था। 
अगले दिन 25 दिसंबर को भाषा सत्र कार्य पद्धति के विषय पर पूर्व राष्ट्रीय संगठन मंत्री  सुनील अंबेडकर  द्वारा लिया जाएगा और साय 6:15 बजे  एन.आ.रसी एवम सी.ए.ए के विषय पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री  प्रफुल्ल आकात  द्वारा सतर लिया जाएंगा और दिन में 2:30 बजे भारी शोभायात्रा पूरे शहर में निकाली जाएगी जिसके बाद 3:30 बजे चौड़ा बाजार मे खुला अधिवेशन किया जाएगा और 26 दिसंबर को समापन से पहले भाषण सत्र पंजाब में वैचारिक चुनौतियां विषय पर प्रोफेसर एस.डी कॉलेज लुधियाना से डॉक्टर अश्वनी भल्ला जी द्वारा लिया जाएगा अंत अधिवेशन में पूरे पंजाब प्रांत से लगभग 600 विद्यार्थी एवं अध्यापक मौजूद रहेंगे। अब देखना है कि कल क्रिसमिस के अवसर पर इस संगठन की शोभा यात्रा शहर में क्या प्रभाव डालती है?
(इस कवरेज के लिए पंजाब स्क्रीन की टीम में थे रेक्टर कथूरिया//प्रदीप शर्मा और कुछ अन्य सहयोगी)

Tuesday, February 16, 2016

JNU: कौन है गद्दार? कौन है अफजल गुरू?

11 फरवरी 2016
 हम बोलने की आजादी के पक्ष में खड़े होंगे
तिरंगा को तो इन्होंने कभी माना ही नहीं, भगवा झंडा भी नहीं मानेंगे
हम हैं इस देश के और इस मिट्टी से प्यार करते हैं।  इस देश में जो 80 फीसदी गरीब जनता है, हम उसके लिए लड़ते हैं. हमारे लिए यही देशहित है। 

हमें पूरा भरोसा है बाबा साहेब (आंबेडकर) के ऊपर।  हमें पूरा भरोसा है अपने देश के संविधान के ऊपर और हम इस बात को पूरी मजबूती के साथ कहना चाहते हैं कि इस देश के संविधान पर अगर कोई उंगली उठाएगा.. चाहे वो उंगली संघियों की हो, चाहे वो उंगली किसी की भी हो, उस उंगली को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। 

हम संविधान में भरोसा करते हैं लेकिन जो संविधान झंडेवालान और नागपुर में पढ़ाया जाता है, उस संविधान पर हमको कोई भरोसा नहीं। 

ये बड़े शर्म की बात है, ये बड़े दुख की बात है कि आज ABVP अपने मीडिया सहयोगियों से पूरे मामले को डायल्यूट कर रहा है। 

कल ABVP के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने कहा कि हम फेलोशिप के लिए लड़ते हैं। कितना घिनौना लगता है ये सुन करके। 

इनकी सरकार मैडम ‘मनु’ स्मृति ईरानी फेलोशिप को खत्म करती हैं….और कहती हैं कि हम फेलोशिप के लिए लड़ते हैं! इनकी सरकार ने उच्च शिक्षा के बजट में 17 फीसदी कटौती की है। उससे हमारा होस्टल हमें पिछले चार सालों में नहीं बना। उससे हमें वाईफाई आज तक नहीं मिला और एक बस दिया BHEL ने तो उसमें तेल डालने के लिए प्रशासन के पास पैसा नहीं है। 
ABVP के लोग रोलर के सामने जाकर देवानंद की तरह तस्वीर खिंचवा कर कहते हैं कि हम होस्टल बनवा रहे हैं। 

हम वाईफाई करवा रहे हैं। हम फेलोशिप बढ़वा रहे हैं। इनकी पोलपट्टी खुल जाएगी साथियों, अगर इस देश में बुनियादी सवाल पर चर्चा होगी और मुझे गर्व है JNU का छात्र होने पर क्योंकि हम बुनियादी सवाल पर चर्चा करते हैं। 

(सुब्रमण्यम) स्वामी कहता है कि JNU में जेहादी रहते हैं।  कहता है कि JNU के लोग हिंसा फैलाते हैं। 

कौन है? …मैं JNU से चुनौती देता हूं RSS के विचारकों को. उसे बुलाओ और करो हमारे साथ बहस।  हम करना चाहते हैं हिंसा की अवधारणा पर बहस। हम सवाल खड़ा करना चाहते हैं। ABVP के उस दावे पर।  ABVP के मंच से कहता है बेशरम …कि खून से तिलक करेंगे, गोलियों से आरती। किसका खून बहाना चाहते हो इस मुल्क में तुम। 

क्या चाहते हो इस मुल्क में तुम। तुमने गोलियां चलाई हैं। अंग्रेजों के साथ मिलकर इस देश की आजादी के लिए लड़ने वाले लोगों पर गोलियां चलाई हैं। 

मुल्क के अंदर गरीब जब अपनी रोटी की बात करता है, जब भूखमरी से मर रहे लोग अपने हक की बात करते हैं…तो तुम उन पर गोली चलाते हो. तुमने गोली चलाई है इस मुल्क में मुसलमानों के ऊपर। तुमने गोली चलाई है इस मुल्क में जब महिलाएं अपने अधिकार की बात करती हैं तो तुम कहते हो पांचों उंगली बराबर नहीं हो सकती। महिलाओं को सीता की तरह रहना चाहिए और सीता की तरह अग्निपरीक्षा देनी चाहिए। 

मैं कहना चाहता हूं इन संघियों को। लानत है तुम्हारी सरकार पर। चुनौती है केंद्र सरकार को…कि आज रोहित (वेमुला) के मामले में जो किया है, वो JNU में हम नहीं होने देंगे। कोई रोहित अपनी जान नहीं गंवाएगा।  रोहित ने जो अपनी कुर्बानी दी है, उस कुर्बानी को हम याद रखेंगे। हम बोलने की आजादी के पक्ष में खड़े होंगे। 

और…छोड़ दो पाकिस्तान की बात और बांग्लादेश की बात। हम कहते हैं दुनिया के गरीबों एक हो। दुनिया के मजदूरों एक हो। दुनिया की मानवता जिंदाबाद। भारत की मानवता जिंदाबाद। जो इस मानवता के खिलाफ खड़ा है, हम उसको आज पहचान चुके हैं। 

एक सवाल…अंतिम सवाल पूछकर मैं अपनी बात को खत्म करूंगा।   कौन हैं ये लोग, जो आज इस स्थिति में हैं कि अपने शरीर में बम बांध कर हत्या करने को तैयार हैं। 

अगर ये सवाल यूनिवर्सिटी में नहीं उठेगा तो फिर मुझे नहीं लगता कि यूनिवर्सिटी होने का कोई मतलब है. दोस्तों, बहुत गंभीर परिस्थिति है। 

किसी भी सवाल पर JNU में कोई किसी भी हिंसा का, किसी भी आतंकवादी का, किसी भी आतंकी घटना का, किसी देशविरोधी गतिविधि का समर्थन नहीं करता। 

कड़े शब्दों में एकबार फिर से। जो कुछ लोग, अज्ञात लोगों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए हैं, JNU छात्रसंघ उसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना करता है। 

सवाल पूछना चाहते हैं JNU प्रशासन से कि आप किसके लिए काम करते हैं? किसके साथ काम करते हैं और किस आधार पर काम करते हैं?

ये बात आज बिल्कुल साफ होनी चाहिए…कि JNU प्रशासन पहले परमिशन देता है, फिर नागपुर से फोन आने के बाद परमिशन वापस लेता है। 

ये जो परमिशन लेने देने की प्रक्रिया है, ये उसी तरह से तेज हो गई है इस मुल्क में…जैसे फेलोशिप को लेने और देने की प्रक्रिया है। हमारा सवाल है JNU चांसलर से…कि पोस्टर लगा था JNU में।  पर्चे आए थे मेस में। 

अगर दिक्कत थी तो JNU प्रशासन पहले परमिशन नहीं देता। अगर परमिशन दिया …तो किसके कहने परमिशन कैंसिल किया? ये सवाल JNU प्रशासन साफ करे।  ये सवाल आज हम इनसे पूछना चाहते हैं।  साथ ही साथ…. ये जो लोग हैं, इनकी सच्चाई जान लीजिए। 

इनसे नफरत मत कीजिएगा क्योंकि हम लोग नफरत कर नहीं सकते हैं। इनसे…मुझे बहुत ही दया भाव है इनके प्रति। 

ये इतने उछल रहे हैं…क्यों? इनको लगता है जैसे गजेंद्र चौहान को बिठाया है, वैसे हर जगह चौहान, दीवान, फरमान ये जारी कर देंगे. चौहान, दीवान और फरमान की बदौलत ये हर जगह नौकरी पाते रहेंगे.

इसीलिए ये जब जोर से ‘भारत माता की जय’ चिल्लाएं…तो समझ लीजिए परसों इनका इंटरव्यू DU में होने वाला है. नौकरी लगेगी, देशभक्ति पीछे छूट जाएगी. नौकरी लगेगी, फिर भारत माता का कोई ख्याल नहीं। 

नौकरी लगेगी…तिरंगा को तो इन्होंने कभी माना ही नहीं, भगवा झंडा भी नहीं मानेंगे। मैं सवाल करना चाहता हूं…ये कैसी देशभक्ति है?

अगर एक मालिक अपने नौकर से सही बर्ताव नहीं करता, अगर किसान अपने मजदूर से सही बर्ताव नहीं करता, अगर पूंजीपति अपने कर्मचारियों से सही बर्ताव नहीं करता और ये जो अलग अलग चैनल के लोग हैं  जो पत्रकार काम करते हैं 15-15 हजार रुपए में. इनका जो CEO है , वो इनसे ठीक से बर्ताव नहीं करते हैं। 

वो कैसे करते हैं देशभक्ति? कैसे ? वो सारी देशभक्ति भारत-पाकिस्तान के मैच पर खत्म कर देते हैं। इसीलिए जब सड़क पर निकलते हैं तो केले वाले के साथ बदतमीजी से बात करते हैं। 

केला वाला कहता है – साहब, 40 रुपए दर्जन. कहते हैं- भाग. तुमलोग लूट रहे हो. 30 का दे दो. केला वाला जिस दिन पलट कर बोला देगा कि तुम सबसे बड़े लुटेरे हो, करोड़ों लूट रहे हो…तो कह देंगे कि ये देशद्रोही है। 

मैं आप तमाम JNU के लोगों से कहना चाहता हूं…कि अभी चुनाव होगा मार्च में तब ABVP के लोग ओम का झंडा लगाकर आपके पास आएंगे. उनसे पूछिएगा- हम देशद्रोही हैं .जेहादी आतंकवादी हैं, हमारा वोट लेकर तुम भी देशद्रोही हो जाओ। ये उनसे जरूर पूछिएगा। तब ये कहेंगे- नहीं, नहीं आप लोग नहीं हैं। वो कुछ लोग हैं। 

हम कहेंगे कि वो कुछ लोग थे, ये बात तो तुमने मीडिया में नहीं कही थी। तुम्हारा वाइस चांसलर नहीं बोला और तुम्हारा रजिस्ट्रार भी नहीं बोल रहा है और वो कुछ लोग भी तो कह रहे हैं कि हमने पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा नहीं लगाया। 

वो कुछ लोग भी तो कह रहे हैं कि हम आतंकवाद के पक्ष में नहीं हैं। वो कुछ लोग भी तो कह रहे हैं कि हमें परमिशन देकर हमारा परमिशन कैंसिल कर दिया। ये हमारे प्रजातांत्रिक अधिकारों के ऊपर हमला है। 

वो कुछ लोग हैं जो ये कह रहे हैं कि अगर इस देश के अंदर कहीं लड़ाई लड़ी जा रही है तो उसके समर्थन में हम खड़े होंगे। 

इतनी बात इनके पल्ले पड़ने वाली नहीं है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि यहां जो इतने लोग इतने शॉर्ट नोटिस पर आए हैं, उनके पल्ले पड़ रहा है और वो लोग इस कैंपस में एक-एक छात्र के पास जाएंगे और बताएंगे कि ABVP इस देश को तोड़ रहा है. बल्कि JNU को तोड़ रहा है. हम JNU को टूटने नहीं देंगे.

JNU जिंदाबाद था. JNU जिंदाबाद रहेगा. इस देश के अंदर जितने भी संघर्ष हो रहे हैं, उन संघर्षों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेगा। 

क्या कन्हैया का गुनाह बस इतना कि वह AISF से जुड़ा है?

Saturday, July 26, 2014

ABVP ने फिर की गड़वासु के हड़ताली छात्रों से मुलाक़ात

रविवार को फिर होगी विशेष बैठक और रोष प्रदर्शन 
लुधियाना: 26 जुलाई 2014:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
वामपंथी दलों, अकाली दलों और अन्य संगठनों के सभी छात्र संगठनों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्धार्थी परिषद (ABVP) ने पूरी तरह खुल कर गड़वासू के छात्रों की हड़ताल का समर्थन कर दिया है। इस संबंध में ABVP सूत्रों ने बताया कि शनिवार 26 जुलाई को ABVP के सक्रिय कार्यकर्ताओं ने हड़ताली छात्र-छात्राओं के कैम्प में जाकर उनसे मुलाकात की और उन्हें हर सम्भव सहयोग का आश्वासन दिया। इसके साथ ही आगे की रणनीति भी बनाई गयी। 
इस रणनीति के अंतर्गत कल रविवार 27 जुलाई को सुबह दस बजे सभी ABVP कार्यकर्ता सुबह दस बजे हड़ताली कैंप पर पहुँच कर की रणनीति पर अंतिम निर्णय लेंगें वहीँ रोष प्रदर्शन भी करेंगे। एक सवाल का जवाब देते हुए ABVP प्रवक्ता नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि बीजेपी और अकाली दल के दरम्यान गठबंधन होने के बावजूद हम छात्रों की समस्याओं और उनकी भलाई को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।
गौरतलब है कि अभी तक किसी भी अन्य पार्टी के छात्र संगठन ने इस तरह खुलकर हड़ताली छात्रों का समर्थन नहीं किया है। इस पहल का क्रेडिट ABVP अपने नाम कर लिया है। इस संबंध में विस्तृत रणनीति का ऐलान कल कुछ और विचार विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लेकर किया जायेगा हड़ताली कैंप में ही किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल  इन हड़ताली चहरों के शिष्टमंडल से स्पष्ट शब्दों में ख चुके हैं कि रैलियों धरनों का सरकार पर कोई असर नहीं होने वाला।

गड़वासू के छात्र संघर्ष को मिली और शक्ति  

Protest march in the Support of GADVASU striking students