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Monday, May 13, 2024

मोहाली में ज़िला प्रशासन द्वारा 24x7 शिकायत कक्ष शुरू

 Monday 13th May 2024 at 6:15 PM

शिकायतों के निपटारे में अब और तेज़ व नई रफ़्तार लाने का दावा 


एसएएस नगर: (मोहाली): 13 मई 2024: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

लोगों को अक्सर यह शिकायत रहती है कि शिकायत जा तो दर्ज ही नहीं होती जा फिर उनका जल्द निपटारा नहीं होता। अब सत्ता और प्रशासन ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मई तकनीक के मुताबिक शिकायत का निपटारा हर हालत में 100 मिनटों के अंदर अंदर कर दिया जाएगा। इसकी जानकारी ए डी सी कम अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारी वी इस तिड़के ने दी। लोगों में इसे ले कर बेहद उत्साह है। 

यहां मोहाली अर्थात एसएएस नगर में भी सिविल विजिलेंस को 66 शिकायतें मिलीं, प्रशासन ने इनका समय पर समाधान किया-एडीसी विराज एस तिड़के इस दिशा में पूरी तरह से सक्रिय बने हुए हैं। इस शिकायत केंद्र में 66 में से 42 शिकायतें वैध पाई गईं 24x7 शिकायत निगरानी कक्ष सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। 

अतिरिक्त उपायुक्त-सह-अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारी विराज एस. तिडके ने कहा कि ज़िला प्रशासन द्वारा 24x7 शिकायत निगरानी कक्ष स्थापित किया गया है, जहां आदर्श चुनाव संहिता के उल्लंघन से संबंधित विभिन्न शिकायतें आती हैं। संचार के विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों का समय पर निस्तारण भी त्वरित गति से किया जा रहा है। 

एडीईओ ने आगे बताया कि शिकायत प्रकोष्ठ को अब तक भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा विकसित सी विजिल ऐप के माध्यम से आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित 66 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि 23 शिकायतें विभिन्न कारणों से खारिज कर दी गईं (वैध नहीं पाई गईं) जबकि शेष 42 शिकायतें वैध पाई गईं और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 100 मिनट की समय सीमा के भीतर निपटारा कर दिया गया, जबकि एक शिकायत प्रगति पर है उन्होंने कहा कि जब भी सी विजिल ऐप पर कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो शिकायत प्राप्त होने के पांच मिनट के भीतर फ्लाइंग स्क्वाड टीमों को नियुक्त किया जाता है, जिसके बाद टीम को 15 मिनट के भीतर वहां पहुंचना होता है। इसके बाद 30 मिनट के भीतर शिकायत की जांच कर रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए निर्वाचन क्षेत्र के सहायक रिटर्निंग अधिकारी को भेज दी जाती है। एआरओ को अगले 50 मिनट के भीतर शिकायत पर कार्रवाई करनी होगी। 

उन्होंने कहा कि इस तरह मात्र 100 मिनट में शिकायत का निपटारा हो जाता है. उन्होंने कहा कि यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और इस ऐप के माध्यम से नागरिक आदर्श आचार संहिता के किसी भी उल्लंघन के स्थान आधारित विवरण के साथ मौके पर ही फोटो और वीडियो अपलोड कर सकते हैं। जब वह कोई तस्वीर या वीडियो अपलोड करते हैं, तो उड़न दस्ते और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा तत्काल कार्रवाई शुरू की जाती है। इस तरह तेज़ी से इस दिशा में कदम उठाए जाते हैं। 

अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी ने यह भी बताया कि इन शिकायतों के समाधान में औसतन 43.26 मिनट का समय लगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन आदर्श आचार संहिता को सख्ती से लागू कर रहा है। 

Friday, May 10, 2024

श्री आनंदपुर साहिब की सीट पर लगातार छा रही है भाजपा

Thursday 9th May 2024 at 3:45 PM

पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर भाजपा की आंखें 


चंडीगढ़
//श्री आनंदपुर साहिब: 09 मई 2024: (पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

पिछली बार किसान आंदोलन के समय जब किसान कार्यकर्ताओं ने कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं के घरों के सामने गोबर फेंका था व कुछ अन्य उग्र कदम उठाए थे उस समय लगता था कि भाजपा अब किसी भी तरह पंजाब में सर नहीं उठा सकेगी। जब प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानून वापिस लेने का एलान किया तो भाजपा के लिए पंजाब में एक बार फिर से सुखद माहौल बनने लगा। 

इसके बाद जब किसान आंदोलन ने शम्भु पर नया मोर्चा शुरू किया और खनौरी पर शुभकरण डीप सिंह की शहीदी हुई तो एक बार फिर से भाजपा के लिए पंजाब के माहौल में मुश्किलें बढ़ने लगीं। इन मुश्किलों को आसान किया पंजाब के सियासी नेताओं में भाजपा के लिए उमड़े सियासी प्रेम ने। पंजाब में आतंकवाद का शहीद कह कर परचारे जाते मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत बिटु  ने जब भाजपा में शामिल होने का एलान किया तो यह  कांग्रेस और कांग्रेस के समर्थकों पर बहुत बड़ा आघात था। निकट भविष्य में भाजपा को राष्ट्रवाद की निधि में बहुत फायदा मिलने की भी संभावना है। 

पंजाब में ब्लू स्टार ऑपरेशन कर के राष्ट्रवाद की दौड़ में सबसे आगे रहने की इच्छुक रही कांग्रेस ने दल बदली के ऐसे घटनाक्रम की तो कभी कल्पना भी नहीं की थी। कांग्रेस को लगता था उसका राष्ट्रवाद अजेय है लेकिन भाजपा ने अपने अंदाज़ में साबित किया कि उसका राष्ट्रवाद ज्यादा प्रभावी है। 

ऐसे माहौल में भाजपा की टीम पंजाब में कमाल की रणनीति से चुनाव के मैदान में है। उसने किसान आंदोलन और किसान संगठनों का डर पूरी तरह से उतार फेंका है। भाजपा के इस राजनीतिक रणकौशल के चलते हर रोज़ महत्वपूर्ण रणनीति का कदम उठाए जा रहे हैं। सिख चेहरे और किसान लगते चेहरे इन आयोजनों में काफी सक्रिय दीखते हैं। 

इसी सिलसिले में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और माता नैना देवी मंदिर में नतमस्तक हो कर डा. सुभाष शर्मा ने अपना चुनावी अभियान शुरू किया। चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर और अन्य कई स्थानों से भाजपा का चुनावी अभियान तेज़ी से जारी है। 

डा. सुभाष शर्मा ने अपना चुनावी अभियान शुरू  करते हुए श्री आनंदपुर साहिब को विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और मोहाली को आईटी हब बनाने के वायदे का एलान भी किया है। उन्होंने अपने वायदे में इस इस मकसद के लिए  हर सम्भव प्रयास करने की बात कही है। गुरु घर में नतमस्तक होते हुए उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा और बख्शीश से ही उन्हें श्री आनंदपुर साहिब का प्रतिनिधित्व करने का अवसर पार्टी ने प्रदान किया है। पार्टी ने जितना विश्वास किया है उस पर पूरी तरह से खरे उतरने की कोशिशें पूरी क्षमता और संकल्प से होंगीं। 

श्री आनंदपुर साहिब में पार्टी के सभी कार्यकर्ता पूरी तरह से सक्रिय हैं। श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा ने आज तख्त श्री केसगढ़ साहिब और माता नैना देवी के मंदिर में नतमस्तक हो कर अपने चुनाव प्रचार अभियान का शुभारम्भ किया। 

आनंदपुर साहिब के इस ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह धरती भक्ति और शक्ति के सिद्धान्त की जननी है और वह इससे प्रेरणा ले कर अपनी पूरी ताकत के साथ इलाके के लोगों की सेवा करेंगे। गुरु की बख्शीश से गुरु नगरी की सेवा करने का अवसर भी अवश्य मिलेगा।उनके इस कथन से संगत में भी भरी उत्साह दिखा। 

डा. सुभाष शर्मा ने बहुत ही स्कपष्हाट शब्दों में खुल कर कहा कि लोकतंत्र में फैसला जनता के हाथ में होता है। हम मोदी सरकार की नीतियों का प्रचार कर रहे हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि पंजाब में रिकॉर्ड तोड़ बहुमत से सभी 13 सीटें भाजपा जीतेगी। उन्होंने कहा कि वह खुद को बहुत भाग्यशाली मानते हैं जिन्हें गुरु की नगरी की सेवा करने के लिए पार्टी ने प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया है। 

इस मौके पर डा. सुभाष ने कहा कि आज मैंने गुरु नगरी के विकास और पंजाब की खुशहाली के लिए अरदास की और गुरु महाराज की कृपा से ही मैं यहां से चुनाव लड़ने जा रहा हूं। श्री आनंदपुर साहिब के विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह हलका विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होना चाहिए। बेंगलुरु की तरह मोहाली भी आईटी हब के रूप में आगे बढ़े और इसके लिए मैं अवश्य प्रयास करूंगा। 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पौराणिक और सिखों के गौरवशाली इतिहास की साक्षी श्री आनंदपुर साहिब की धरती का वातावरण कमल खिलने के सर्वथा अनुकूल है। इस अवसर पर भारी मात्रा में पार्टी के कार्यकर्ता स्थानीय लोग उपस्थित थे। 

Sunday, August 06, 2023

ईवीएम के रहस्य खोले आधुनिक चाणक्य डा. औलख ने

विपक्ष में जाग उठी नई उम्मीदों की रौशनी//अब रद्द होगा ईवीएम?

वृद्ध लेखक बलकौर गिल भी साथ में आए भीष्म पितामह की तरह 


लुधियाना
: 5 अगस्त 2023: (एम एस भाटिया के साथ इनपुट-पंजाब स्क्रीन डेस्क):: 

मणिपुर और हरियाणा की हिंसा के चलते देश का चुनावी युद्ध भी सामने है। बिसात बिछ चुकी है। मोहरे भी अपनी अपनी जगह बैठाए जा चुके हैं। रणभेरी सुनी भी जा सकती है। पांचजन्य शंख गूँज रहा है। कौन जीतेगा कौन हारेगा यह तो समय की बात है लेकिन इस बार विपक्ष कई हल्ले करेगा जिनमें एक हल्ला ईवीएम के प्रयोग को ले कर भी है। इस मामले में पंजाब के प्रमुख लोगों ने साथ लिया है दवा खोज के क्षेत्र में जाने माने वैज्ञानिक डाक्टर बी एस औलख को। वही डाक्टर औलख जो मेडिसिन खोज और इंडस्ट्री को नज़दीक से देख चुके हैं और समाजिक चेतना से भी सबंधित हैं. वही डाक्टर औलख हैं जो देश और दुनिया के प्रमुख आंदोलनों के नज़दीक रहे हैं। पंजाब के नक्सलवादी आंदोलन और खालिस्तानी आंदोलन के संबंध में उन्होंने बहुत पहले भविष्वाणी की तरह कह दिया था कि ये लोग नाकामी की तरफ जा रहे हैं। हाल ही में वह कौमी इंसाफ मोर्चा के सर्वोच्च संचालकों से भी मिल कर आए थे। जीरा मोर्चे की फतह भी उन्हीं के कारण सम्भव हुई। अब वह फिर मैदान में हैं। इस बार निशाने पर हैं भारतीय सियासत में घुसे हुए नापाक लोग। 

उल्लेखनीय है कि साल 2019 के आम चुनावों में भी ई वी एम मशीनों के निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन पर कई अहम सवाल खड़े हुए थे। इन्हीं विवादों के चलते एक अमरीकी हैकर का दावा भी सामने आया था कि साल 2014 के चुनाव में मशीनों को हैक किया गया था। गौरतलब है कि  इस चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की थी। हालांकि, भारतीय चुनाव आयोग ने इन दावों का पूरी तरह से खंडन भी किया है. लेकिन इन मशीनों में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर आशंकाएं लगातार उठती चली आ रही हैं। चुनाव आयोग के दावों से लोग संतुष्ट नहीं हुए थे। 

सोशल मीडिया पर विज्ञान को समझने वाले कुछ युवा लोगों की वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होती रही हैं जिनसे सवाल खड़े होते रहे कि क्या सचमुच हैकिंग संभव है? उस वीडियो में किसी भी चुनाव चिन्ह का बटन दबाने पर पर्ची केवल एक विशेष दल की ही निकलती थी। इस तरह की सभी वीडियो के बावजूद चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करता आया है। 

इस पारदर्शिता को साबित करने और प्रचारित करने के मकसद से तकरीबन हर ज़िले में सभी प्रमुख राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों को बुला कर उनके सामने मशीनों के संचालन को दिखाया जाता रहा है। किसी न किसी सरकारी भवन में यह सब घोषित प्रोग्राम के दौरान होता रहा लेकिन मीडिया को इसके फिल्मांकन की इज़ाज़त पर पूरी सतर्कता बरती जाती रही। राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि मशीनों का संचालन शो देख कर चाय काफी पी कर बाहर आ जाते रहे। उनके पास सब ठीक है कहने और हां में हां मिलाने के इलावा कोई चारा भी नहीं बचता था। इसकी वजह यही रहती थी कि  इनके पास इस तकनीक को समझने वाला कोई विशेषज्ञ होता ही नहीं था। अब इस मुद्दे पर सभी सवालों को चुनौती देने के लिए  सियासत की दुनिया में सामने आया है नए युग का चाणक्य। स्वयं को देवता विरोधी और असुर समर्थक मानने वाले उन्हें अपना शुक्राचार्य भी मानते हैं। एक पूरी टीम है डाक्टर औलख और बलकौर सिंह गिल के साथ जो आम तौर पर अपना प्रचार करने से परहेज़ करती है। इस टीम का यकीन पर्दे के पीछे रह कर काम करने में ही है। 

शायद आप सभी को नहीं तो कुछ लोगों को याद  होगा कि आठ साल पहले, अमरीका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस को मशीन से जोड़कर दिखाया था कि मोबाइल से संदेश भेजकर ईवीएम मशीन के नतीजों को बदला जा सकता है। 

हालांकि, भारत की आधिकारिक संस्थाओं ने इस दावे को ख़ारिज करते हुए कहा था कि मशीन से छेड़छाड़ करना तो दूर, ऐसा करने के लिए मशीन हासिल करना ही मुश्किल है फिर भी लोगों के मन की आशंकाएं कायम रहीं। 

इसी बीच कई अन्य विशेषज्ञों के विचार भी सामने आते रहे। मीडिया में इस संबंध में काफी कुछ आता रहा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञ धीरज सिन्हा भी मानते थे कि लाखों वोटिंग मशीनों को हैक करने के लिए काफ़ी ज़्यादा धन की ज़रूरत होगी और ऐसा करने के लिए इस काम में मशीन निर्माता और चुनाव कराने वाली संस्था का शामिल होना ज़रूरी है, इसके लिए एक बहुत ही छोटे रिसिवर सर्किट और एक एंटीना को मशीन के साथ जोड़ने की ज़रूरत होगी जोकि 'इंसानी आंख से दिखाई नहीं देगा।' सवाल यहां भी उठता है कि सत्ता पाने के लिए धन खर्च करने वालों की कमी कहां है इस देश और दुनिया के दुसरे हिस्सों में?

इसका विवरण समझाते हुए वह कहते हैं कि वायरलैस हैकिंग करने के लिए मशीन में एक रेडियो रिसीवर होना चाहिए जिसमें एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और एंटीना होता है। चुनाव आयोग का दावा है कि भारतीय वोटिंग मशीनों में ऐसा कोई सर्किट ऐलीमेंट नहीं हैं। कम शब्दों में कहे तो इतने व्यापक स्तर पर हैकिंग करना लगभग नामुमिकन होगा। लेकिन यहां भी सवाल तो उठता ही है की व्यापक स्तर पर न सही लेकिन क्या कुछ सीमित इलाकों में इससे फेरबदल संभव है? वहां वहां  हो सकता है। इससे हारजीत के फैसले तो प्रभावित हो ही सकते हैं। 

अब साथ ही दुनिया की वोटिंग मशीनों का हाल भी देख लेते हैं। दुनिया में लगभग 33 देश किसी न किसी तरह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की प्रक्रिया को अपनाते हैं और उन मशीनों की प्रामाणिकता पर सवाल भी उठे हैं। क्या इसे अनदेखा किया जा सकता है? क्या आंकड़ों और तथ्यों की यह मैनेजमेंट और मैनिपुलेशन सत्य को ज़्यादा देर तक छुपने देगी?

गौरतलब है कि वेनेज़ुएला में साल 2017 के चुनावों में डाले गए मतों की कुल संख्या कथित रूप से असली संख्या से दस लाख ज़्यादा निकली। मामला बेहद हैरानीजक निकला हालांकि, सरकार इसका खंडन करती है लेकिन लोग इस खंडन से संतुष्ट नहीं हो जाते। लोगों को जो बात नहीं जचती या उनके दिल में नहीं उतरती उसे लोग एक कान से सुन कर दुसरे कान से निकाल भी दिया करते हैं। उनके मनों में उनके सवाल तब तक सवाल बने रहते हैं जब तक उनके जवाब उन्हें पारदर्शिता से न मिल जाएं। ऐसा होना नैतिक तौर पर भी ज़रूरी है। 

विवादों की बात चली है तो याद दिला ज़रूरी लगता है कि अर्जेंटीना के राजनेताओं ने इसी साल मतों की गोपनीयता और नतीजों में छेड़छाड़ की आशंकाएं जताते हुए ई-वोटिंग कराने की योजना से किनारा कर लिया है। 

इसी तरह इराक़ में साल 2018 में हुए चुनाव के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी की ख़बरों के बाद मतों की आंशिक गिनती दोबारा करवाई गई थी। 

अमरीका के चुनाव की भी बात करें तो बीते साल दिसंबर महीने में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में ई-वोटिंग से पहले मशीनों की टेस्टिंग न किए जाने की ख़बरें सामने आने के बाद ई-वोटिंग मशीनें विवाद का विषय बनी थीं.अमरीका में वोटिंग मशीनों को लगभग 15 सालों पहले इस्तेमाल में लाया गया था।  वहां भी इसे लेकर लोगों के मन की आशंकाएं कभी खत्म नहीं हुई हैं। 

चिंता की बात यह है कि अगर ईवीएम की गलती पकड़ में आ भी जाए तो रास्ता क्या है उसे सुधरने का? इस समय अमरीका में लगभग 35000 मशीनें इस्तेमाल होती हैं। इस तरह मतदान में काग़ज़ी सबूत न होने से मशीन के स्तर पर ग़लत मतदान रिकॉर्ड होने पर उसके सुधार की गुंजाइश कम होने से जुड़ी चिंताएं जताई गई थीं। हमारे यहां तो पूरे के पूरे बूथ कब्ज़े में ले लिए जाते हैं। दबंगों के गिरोह स्वयं सब हाथ में  लेकर वोट पर्चियों पर मोहरें लगते देखे जाते रहे हैं। इस पर फ़िल्में भी बनती रही हैं। उन दबंगों गए के लिए ईवीएम को कब्ज़े में करना कौन सी बड़ी बात हो सकती है?

इन चुनावों में मतों की गिनती करने वाली मशीनों में एक प्रोग्राम पाया गया जोकि दूर बैठे सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर को मशीन में फ़ेरबदल करने की सुविधा देता था। 

साउथ कैरोलिना यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफ़ेसर डंकन बुएल इसी विषय पर बहुत ही गहनता से शोध कर रहे हैं। नतीजे जल्द ही आम जनता के सामने आ सकते हैं। 

ब्रिटेन में अब भी मतपत्र का इस्तेमाल होता है। भारत की तरह ईवीएम वहां इस्तेमाल नहीं की जाती। प्रोफ़ेसर सिन्हा के मुताबिक़ पिछले तीन सालों से यहां ईवीएम के इस्तेमाल पर चर्चा चल रही है। लेकिन ख़ुफ़िया एजेंसियों और चुनाव आयोग का मानना है कि ईवीएम फ़ुलप्रूफ़ नहीं है। उसकी हैकिंग की जा सकती है। इसी तरह का विचार दुनिया के कई लोगों का भी है। साथ ही यहां हर सीट पर मतदाताओँ की संख्या बहुत कम होती है, भारत की तरह यहां बहुत ज़्यादा मतदाता तो होते नहीं. इस वजह से यहां मतपत्रों की गिनती भी उतनी मुश्किल होती नहीं।  इन वजहों से यहां अब भी ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता। 

हमारे यहां थानों, कचहरियों, विधानसभाओं और सड़कों पर जिस तरह की दबंगाई नज़र आती है उस पर कई फ़िल्में बन चुकी हैं। उन फिल्मों के नाम ही काल्पनिक होते हैं लेकिन घटनाएं सत्य का उद्घोष ही करती हैं। इस लिए यहां की हालत कुछ ज़्यादा ही नाज़ुक है। 

सनसनीखेज़ खुलासे डाक्टर औलख की ज़ुबानी भी सुनिए

डाक्टर औलख स्पष्ट कहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें हैं राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे बड़ा खतरा है। 

ई वी एम अर्थात इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें न केवल एक सच्चे, मजबूत व पारदर्शी लोकतंत्र के लिए घातक हैं बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बहुत बड़ा खतरा हैं। यह विचार आज जहां एक वैज्ञानिक सेमिनार को संबोधन करते हुए मशहूर वैज्ञानिक श्री बी एस औलख ने पेश किए। गौरतलब है की डाक्टर औलख की बातें बहुत गहरे अध्यन के बाद उनकी जुबां पर आती हैं। 

आज आए दिन अखबारों में हम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का सहारा लेकर के होने वाले फ़राडों  के बारे में पढ़ते हैं। लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा लिए जाते हैं। लोगों का निजी व सरकारों का अति गोपनीय डाटा चुरा लिया जाता है। पैगासस व परीडेटर जैसे सॉफ्टवेयर बन चुके हैं। किसी के भी मोबाइल या लैपटॉप वगैरा को बिना टच किए हैक कर लिया जाता है। यह सारा कुछ एक खास किस्म के रिगिंग यानी ठगी मारने वाले सॉफ्टवेयर के जरिए किया जाता है।

इससे भी ज्यादा आजकल एक और ही बड़े शक्तिशाली और खतरनाक किस्म के सॉफ्टवेयर बन चुके हैं जिन्हें टैसट रिगिंग सॉफ्टवेयर कहा जाता है जहां रिगिंग  सॉफ्टवेयर के पकड़े जाने का का डर होता है वहीं टैसट रिगिंग सॉफ्टवेयर के पकड़े जाने की कोई संभावना नहीं होती। यह किसी भी टैस्ट में नहीं आते।

टैस्ट रिगिंग सॉफ्टवेयर बहुत ही संवेदनशील सैंसर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बहुत ही ऊंचे पायदान पर पर ले जाते हैं। इनके इस्तेमाल के बाद यह मशीनें बिल्कुल इंसानों की तरह महसूस करने लगती हैं। यह देखने, सुनने व सोचने लगती हैं। फिर यह इंसानों की तरह ही धोखा देने लगती हैं। फ़राड करती हैं। जब उनको चेक किया जाता है, तब यह ईमानदारी का ढोंग करती है और जैसे ही टैस्ट प्रक्रिया खत्म हो जाती है, यह फिर से बेईमान बन जाती हैं।

दुनिया का सबसे पहला टैस्ट रिगिंग सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी बौश ने 2004 में बनाया था। बाद में बहुत बढ़ी कार कम्पनी वोकसवैगन ने इसी साफ्टवेयर का सहारा लेकर के 34 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 3 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा का घोटाला कर डाला।

यह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें जिनके नाम में ही इलेक्ट्रॉनिक शब्द मौजूद है किसी भी तरह भरोसे के लायक नहीं हैं। यह ना केवल आज हमारे लोकतंत्र के लिए खतरा हैं बल्कि यह आज हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बहुत घातक हैं। कल को अगर किसी दिन कोई विदेशी संस्था या कोई बड़ा कारपोरेट घराना इन मशीनों का इस्तेमाल करके अगर किसी बड़े चुनावी घोटाले को अंजाम देता है तो चारों तरफ अफरा तफरी का आलम हो जाएगा और किसी को कुछ समझ भी नहीं आएगा।

इसीलिए हम अपने आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को विनती करते हैं कि वह एक सच्चे राष्ट्रवादी होने के नाते इन ईवीएम मशीनों पर यथाशीघ्र बैन लगाएं और आने वाले सारे चुनाव बैलट पेपर से करवाएं।

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Sunday, February 20, 2022

CEO की तरफ से पंजाब के लोगों का आभार

 20th February 2022 at 9:04 PM

अमन-शांति से वोटें डालने के लिए लोगों से धन्यवाद कहा 

राज्य में शाम 5 बजे तक दर्ज की गई 63.44 फीसद वोटिंग

चंडीगढ़: 20 फरवरी 2022: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::
इस बार चुनावों में
उत्सव सा माहौल था। लोग अबकी बार बहुत ही खुश नज़र आए। युवा वोटर भी खुश थे और वृद्ध भी। कोई भी मतदान से वंचित नहीं रहना चाहता था फिर भी बहुत से लोग किसी न किसी वजह से रह गए। 

पंजाब में आज 117 विधान सभा हलकों के लिए नुमायंदों  के चुनाव के लिए शांतमयी ढंग के साथ एक ही पड़ाव में मतदान हुआ। शाम 5बजे तक पंजाब में 63.44 वोट फीसद दर्ज की गई।

 लुधियाना सेंट्रल हल्का मैं शाही इमाम पंजाब
मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी ने मतदान किया
 
अपने लोकतांत्रिक हक का प्रयोग करने के लिए
बड़ी संख्या में आगे आने के लिए पंजाब के लोगों का धन्यवाद करते डा.ऐस.करुना राजू, मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंजाब ने कहा कि वोटों में बढ़ -चढ़कर हिस्सा डाल कर राज्य के लोगों ने एक बढ़िया मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का ध्यान शांतिपूर्ण मतदान को पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग के साथ यकीनी बनाना था। 

उन्होंने इस बात पर तसल्ली ज़ाहिर की कि सभी 196 महिला पोलिंग स्टेशनों पर भी वोटरों की बड़ी संख्या देखने को मिली। श्री राजू ने बताया कि इस चुनाव की मुख्य विशेषता चुनाव कमिशन के 65 जनरल अबज़रवर, 29 पुलिस अबज़रवर और 50 खर्चा अबज़रबर के इलावा 8784 माईक्रो -अबज़रवरों की तैनाती थी।

उन्होंने बताया कि प्रातःकाल मोक पोल के दौरान 146 बैलट यूनिट, 152 कंट्रोल यूनिट और 433 वीवीपीएटी मशीनों को बदला गया जबकि असली मतदान दौरान 72 बैलट यूनिट, 64 कंट्रोल यूनिट और 649 वीवीपीएटी की बदली की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि दिन के समय पर चुनाव में विघ्न डालने और वोटरों को भ्रमित करने का एक भी मामला कमिशन के ध्यान में नहीं लाया गया।

श्री राजू ने राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान को यकीनी बनाने के लिए दिन -रात काम करने के लिए पोलिंग मुलाज़ीम, सुरक्षा अमले और पंजाब पुलिस के मुलाजिमों का धन्यवाद किया।

उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में योगदान डालने के लिए 25 हज़ार बूथ स्तर अफ़सर, दिव्यांग कोऑर्डिनेटकोऑर्डिनेटरों, एनसीसी/ एनएसएस के वालंटियर, आशा वर्करों आंगनवाड़ी वर्कर, मिड -डे -मील वर्कर्स और गाँवों के चौकीदारों का भी विशेष तौर पर धन्यवाद किया।  

कानून व्यवस्था के बारे जानकारी देते हुए डा. राजू ने बताया कि मतदान दौरान कुछ स्थानों छोटी -मोटी घटनाएँ सामने आईं और मतदान के दौरान असुखद घटानाओं को रोकने के लिए 18 ऐफआईआरज़ दर्ज की गई।

Wednesday, February 09, 2022

दलित कार्ड के लिए कांग्रेस के योद्धा ताम्रध्वज साहू भी मैदान में

चंडीगढ़ में पहुंच कर की कांग्रेस को जिताने की अपील 


चंडीगढ़
: 9 फरवरी 2022: (पंजाब स्क्रीन डेस्क::

मिर्ज़ा ग़ालिब साहिब की एक प्रसिद्ध गज़ल का एक शेयर है-

ज़िंदगी यूं भी गुज़र ही जाती  

क्यूं तेरा रह गुज़र याद आया!

कुछ महीने पहले भी ज़िंदगी यूं ही गुज़रती जा रही थी। आम जनता की भी और पंजाब की भी। कांग्रेस पार्टी की आन्तरिक कलह थमने का नाम ही नहीं ले रही थी। राष्ट्रपति शासन की सम्भावनाएं हर हर रोज़ तेज़ होती जा रहीं थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरेन्द्र सिंह और नवजोत सिद्धू पूरी तरह आमने सामने थे। पंजाब में कांग्रेस शासन बेहद नाज़ुक स्थिति में था। उस समय कांग्रेस की कश्ती को बचाने के लिए लिए निकले कुछ ख़ास लोगों ने जो रास्ता निकाला उस का रंग रूप चरणजीत सिंह चन्नी के नाम से सामने आया। चन्नी सरकार ही शायद एकमात्र रास्ता था। यह रास्ता बेहद मुश्किल भी था लेकिन चन्नी चल पड़े। 

बीजेपी ने भी सवाल किया कि क्या केवल तीन महीने का मुख्यमंत्री या बाद में भी? कहीं यह सब दलितों के साथ कोई मज़ाक तो नहीं? दुसरे दलों से भी इस स्वर के सवाल आए। जब कांग्रेसियों के लिए एकमात्र उम्मीद बने राहुल गांधी ने लुधियाना में बाकायदा चन्नी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया तो सभी को बात गंभीर लगने लगी। चन्नी ग्रुप के मित्रों को भी और विरोधियों को भी। मुख्यमंत्री चन्नी तो इतने उत्साहित हुए की कर की छत पर ही अपने चुनावी अभियान के लिए निकल पड़े। इसके साथ ही दलित मतदाता भी उत्साह में आए। उन्हें लगने लगा कि हमने आधी लड़ाई जीत ली है। 

इसके साथ ही ज़मीनी हकीकतों की तरफ नज़रें गईं तो यह सवाल कायम था कि कौन करेगा दलित वर्ग को फिर से एकजुट और मज़बूत? पंजाब में ऐसा कोई चेहरा सक्रिय रूप से नज़र नहीं आ रहा था। कांग्रेस की हाईकमान इस सारी स्थिति से अवगत थी लेकिन कहीं कहीं बेबसी का अहसास भी था। कांग्रेस हाईकमान को अपने सभी सियासी विरोधियों से भी लड़ाई लड़नी पड़ रही थी, केंद्र की सत्ता में मौजूद मोदी सरकार  के साथ भी, कैप्टेन अमरेंद्र सिंह जैसे उन अपनों से भी जो अब विरोधी कैम्पों में जा बैठे थे और हर रोज़ उठ रही समस्याओं से भी। चुनावी मुकाबिले में अकालीदल और बीएसपी भी कम बड़ी चुनौती नहीं गिने जा सकते थे। चुनावी समर सिर पर है। मतदान में बस अब कुछ ही दिन शेष हैं। 

अब कौन बचाए पंजाब की कांग्रेस सरकार? कौन बचाए चन्नी सरकार? कौन बचाए दलित सरकार? ऐसे कई सवाल उन सभी लोगों के ज़हन में हैं जो चन्नी सरकार को ही एक बार फिर से देखना चाहते हैं।  ऐसे लोगों में न कांग्रेसी वर्करों और समर्थकों के साथ साथ गैर कांग्रेसी लोग भी शामिल हैं। चन्नी सरकार को विजयी बनाना इन सभी का मकसद है अब। सेकुलर सोच वाली ट्रेड यूनियनें और अन्य संगठन भी इस मकसद में सक्रिय हो कर काम कर रहे हैं। यह बात अलग है की वे खुल कर सामने नहीं आ रहे। चन्नी सरकार का समर्थन करने वाले लोग काफी हैं लेकिन ख़ामोशी से काम कर रहे हैं। बहुत से दलित वर्कर और दलित नेता कांग्रेस विरोधी हो कर भी अंदर से चन्नी सरकार के साथ ही हैं। इसके बावजूद कांग्रेस ने चुनावी अभियान तो लगातार तेज़ करना ही है।  

इस मकसद के लिए जो रणनीति बनी उसके अंतर्गत कई कदम उठाए जा रहे हैं। उन्हीं कदमों में से एक कदम था छत्तीसगढ़ से ताम्रध्वज साहू को चुनावी अभियान के अंतर्गत पंजाब में भी लाने का फैसला। ताम्रध्वज साहू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के एक ऐसे मंझे हुए अनुभवी नेता हैं जिन्होंने कांग्रेस के लिए बहुत से राजनैतिक युद्ध जीते हैं। छत्तिसगढ के बेमतरा जिला स्थित पटोरा गा‍ँव के एक सामान्य परिवार में जन्मे ताम्रध्वज साहू औपचारिक शिक्षा के नाम पर तो बेशक हायर सेकेंडरी ही पूरी कर सके लेकिन ज़िंदगी के संघर्षों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। ज़िंदगी ने गर्दिश की जो राहें उन्हें दिखाईं उन पर चलते हुए वह युवावस्था से ही सामाजिक कार्यों से जुड़ गए थे। उनके राजनीतिक जीवन का आरंभ कांग्रेस कार्यकर्त्ता के रूप में हुआ और वह धीरे-धीरे सफलता की सीढी चढते चले गए। अब साहू जी कौन हैं इस पर आप अलग से भी एक पोस्ट देख सकते हैं यहां क्लिक करके। ऊके चेहरे पर अभी भी युवाओं जैसा जोश और चमक है। उनकी चर्चा अलग पोस्ट में है यहां इसी पोस्ट के मुद्दे पर। 

लौटते हैं पंजाब की चर्चा पर। श्री साहू के आगमन पर 9 फरवरी को एक सादगी भरा आयोजन हुआ चंडीगढ़ के पंजाब कांग्रेस भवन में। कार्यक्रम का आयोजन बाद दोपहर को था। कांग्रेस के ओबीसी सेल से सबंधित कार्यकर्ता सुबह 11 बजे ही पहुंचना शुरू हो गए थे। छत्तीसगढ़ से चंडीगढ़ तक का रास्ता भी लम्बा है और मौसम की दुश्वारियां भी बहुत हैं। इसके साथ ही ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी। श्री साहू तकरीबन डेढ़ दो घंटे की देरी से ही कांग्रेस भवन में पहुंच पाए। सर्दी के प्रकोप का सामना करते हुए 72 वर्षीय श्री साहू युवाओं जैसे जोश की भावना से सक्रिय दिखे। इस आयोजन में पहुंचे वर्करों को समझाया गया कि किस तरह हमारे दलित भाई चरणजीत सिंह चन्नी को केवल तीन महीने का समय ही मिल पाया। इसमें भी श्री चन्नी ने बहुत कुछ कर के दिखाया।  सरकार बहुत कुछ और भी करेगी अगर उनके हाथ में ताकत आई तो। दलित वर्गों को यही यकीन दिलाना इस वक्त इन लोगों का मकसद है कि चन्नी सरकार ही बन सकती है उनकी सरकार।

पंजाब कांग्रेस भवन में हुआ आयोजन इस बात को समझाने में सफल भी रहा। घर घर जा कर लोगों को चन्नी सरकार की उपलब्धियां गिनवाने में जो लोग जुटे हुए हैं वे दलित वर्गों से ही जुड़े हुए हैं। कोई साईकल पर कैम्पेनिंग करने जा रहा है तो कोई पैदल ही लोगों से सम्पर्क साध रहा है। इस जोश और उत्साह को भरने में श्री साहू के दौरे ने बहुत सफलता से योगदान दिया है। गौरतलब है कि श्री साहू आल इंडिया कांग्रेस कमेटी ओबीसी सेल के चेयरमैन भी हैं और छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री भी हैं। उन्हें ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। 

इस सारे आयोजन की सफलता के पीछे जो लोग सक्रिय रहे उनमें चुने हुए लोगों की एक पूरी टीम शामिल है। श्री साहू के साथ देश भर में ऐसे लोग जुड़े हुए हैं। पांचों चुनावी राज्यों में इस तरफ विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पंजाब में उनके साथ कांग्रेस पंजाब ओबीसी  सेल के चेयरमैन संदीप कुमार टिंकू, पंजाब के इंचार्ज हरदीप चाहल और सह इंचार्ज अरुण सोनी भी रहे। इस समय श्री सोनी तो  साथ उत्तराखंड की तरफ रवाना हो चुके हैं और श्री टिंकू जगराओं की तरफ इसी अभियान में हैं। इस तरह दलित वर्ग के लिए एक लड़ाई यह विंग भी लड़ रहा है जिससे ज़ाहिर है कि दलित वर्ग के अधिकारों की लड़ाई अभी अभीआसान नहीं हुई। अब देखना है कि श्री साहू का पंजाब दौरा कांग्रेस पार्टी को और चन्नी सरकार को कितना लाभ पहुंचा पाता है। 

Monday, January 31, 2022

राज्य में 305 करोड़ रुपए की संपत्ति ज़ब्त

 31st  January 2022 at 5:48 PM                                   कार्यालय मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब

मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंजाब ने किया खुलासा 

चुनाव में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के उपरांत सख्ती तेज़ 


चंडीगढ़
: 31 जनवरी 2022: (पंजाब स्क्रीन डेस्क):
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एक तो लोग महंगाई के कारण दुखी हैं दूसरा उनकी आमदनी कम है ऐसी हालत में भृष्टाचार में लाइट लोग उनसे वोट खरीदने के प्रयासों में जुटे रहते हैं। जो  उन्हें धमकाने से भी यह लोग पीछे नहीं हटते।  ऐसी हालत में चुनाव आयोग हर सम्भव प्रयास करता है की चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष हों। मतदाता अपनी पसंद के प्रत्याशी को वोट दाल सके। पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और आम लोग पूरी तरह से निडर हो कर अपने मत का उपयोग कर सकें।  डराने, धमकाने और उन्हें खरीदने की कुत्सित हरकतों को रोकने के लिए सभी सम्भव उपाय किये जाते हैं। लालच और गुंडागर्दी के नापाक साये जनता से दूर हटाए जाते हैं। इसी अभियान के अंतर्गत इस बार बहुत से सफल एक्शन भी किए गए हैं। 

पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के उपरांत विभिन्न प्रवर्तन टीमों द्वारा राज्य में 30 जनवरी, 2022 तक आचार संहिता का उल्लंघन करने के सम्बन्ध में 305 करोड़ रुपए की कीमत की संपत्ति ज़ब्त की गई है।

इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सी.ई.ओ.) डॉ. एस. करुणा राजू ने आज बताया कि निगरान टीमों ने 12.11 करोड़ रुपए की 26.64 लाख लीटर शराब ज़ब्त की है। इसी तरह प्रवर्तन विंग द्वारा 273.13 करोड़ रुपए के नशीले पदार्थ बरामद करने के अलावा 18.48 करोड़ रुपए की बेनामी नकदी भी ज़ब्त की गई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 1,197 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है। इसके अलावा गड़बड़ी करने की संभावना वाले 2,860 व्यक्तियों की पहचान भी की गई है, जिनमें से 1,835 व्यक्तियों के विरुद्ध पहले ही कार्रवाई शुरु की जा चुकी है, जबकि शेष पर भी जल्द ही मामला दर्ज कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा के नज़रिए से सी.आर.पी.सी. अधिनियम की निवारक धाराओं के अंतर्गत 696 व्यक्तियों को काबू किया गया है।

उन्होंने बताया कि ग़ैर-ज़मानती वॉरंटों के 2,630 मामलों पर कार्यवाही की जा चुकी है, जबकि 58 मामलों पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य भर में 14,997 नाके लगाए गए हैं।

डॉ. राजू ने बताया कि चुनाव आयोग की हिदायतों के अनुसार राज्य में कुल 3,90,275 लाइसेंसी हथियारों में से अब तक 3,76,451 हथियार जमा करवाए जा चुके हैं जबकि, राज्य में 65 बिना लाइसेंस वाले हथियार ज़ब्त किए गए हैं।

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Tuesday, December 21, 2021

कैप्टन ने खुल कर की बेअदबी आरोपियों के कत्ल की निंदा

 21st December 2021 at 7:08 PM

 कोई भी सभ्य समाज ऐसी बातों की इज़ाज़त नहीं देता 

राष्ट्रीय सुरक्षा, पंजाब के हित मेरे लिए पहले: कैप्टन अमरिंदर

राजपुरा (
पटियाला): 21 दिसंबर 2021: (गुरजीत बिल्ला//पंजाब स्क्रीन)::
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राष्ट्रिय सुरक्षा और पंजाब का कल्याण उनके एजेंडे पर सबसे पहले हैं और वह उम्मीद करते हैं कि अगली पीएलसी-बीजेपी सरकार इस पर सफलतापूर्वक कार्य करेगी। इसके साथ बेअदबी के आरोपियों को कत्ल किए जाने की घटना पर स्पष्ट स्टैंड लेते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुल कर बेअदबी के आरोपियों को कत्ल करने की निंदा की। उन्होंने कहा कि कोई भी सभ्य समाज ऐसी बातों की इज़ाज़त नहीं देता। इस स्पष्ट स्टैंड से कैप्टन ने अपने मानवीय दृष्टिकोण को भी व्यक्त किया है और ला एंड आर्डर वाली छवि को भी। इससे उनका सैकुलर व्यक्तित्व भी और मज़बूत हुआ है।  
यहां सीनियर कांग्रेसी नेता जगदीश कुमार जग्गा को पार्टी में शामिल करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि दोनों पार्टियां चुनाव में सफलता सुनिश्चित करने के लिए तालमेल के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तालमल के अच्छे प्रयास सुनिश्चित हैं। 
इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में, कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ दर्ज किया गया केस कानूनी पड़ताल में कायम नहीं रह सकेगा, क्योंकि सरकार ने जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।
मजीठिया के खिलाफ केस दर्ज करने सबंधी एक सवाल के जवाब में उन्होंने पूछा कि किस आधार पर सरकार ने उनके विरुद्ध केस दर्ज किया है, क्योंकि नशा तस्करी पर रिपोर्ट अभी भी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सीलबन्द लिफाफे में पड़ी है। देश में कानून का शासन चलता है और उन्हें यकीन है कि कानूनी पड़ताल में यह केस कायम नहीं रह सकेगा। सिर्फ इसलिए कि आप किसी को पसंद नहीं करते, आप उसे जेल की सलाखों के पीछे नहीं धकेल सकते।
उन्होंने श्री दरबार साहिब और कपूरथला में बेअदबी के आरोपियों की हत्या की निंदा भी की और कहा कि आरोपियों को पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए था। अमृतसर और कपूरथला में लिंचिंग से जुड़े एक सवाल पर कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि आरोपियों को पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए था। कोई भी सभ्य समाज ऐसी हत्याओं की इजाजत नहीं देता। 
जबकि बहबल कलां बेअदबी मामले में न्याय न मिलने से लोगों में गुस्से के चलते ऐसी हत्याएं होने बारे पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से इस मामले पर काम किया था।
उन्होंने कहा कि पहले राज्य सरकार को सीबीआई से जांच वापस लेने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी थी और बाद में जांच शुरू हुई व 22 आरोपियों, जिनमें पुलिस अधिकारी व आम नागरिक शामिल थे, को गिरफ्तार किया गया, जो अभी जमानत पर हैं। इसी मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि मोब लिंचिंग की कहीं भी इजाजत नहीं मिलती, जो भी हुआ है वह निंदनीय है।
इससे पहले कैप्टन अमरिंदर का औद्योगिक शहर के लोगों द्वारा शानदार स्वागत किया गया। उनके काफिले का नेतृत्व कर रही कारों के आगे मोटरसाइकिल रैली चल रही थी, जिसमें सैकड़ों युवा शामिल हुए। उनका लोगों द्वारा खुले दिल से स्वागत किया गया और रास्ते भर फूल बरसाए गए।
कैप्टन अमरिंदर ने राजपुरा शहर के साथ अपनी भावनाओं के जुड़ाव को सांझा करते हुए कहा कि उनके पिता स्वर्गीय महाराजा यादविंदर सिंह ने बहावलपुर से रिफ्यूजीस को यहां बसाया था और उनकी मां स्वर्गीय राजमाता मोहिंदर कौर यहां रिफ्यूजीस को देखने आती थी व उनके साथ वह भी कैंपों का दौरा करते थे।
इस दौरान स्थानीय विधायक की शह पर की गई धक्केशाही और दर्ज किए गए झूठे केसों संबंधी शिकायतों के जवाब में कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि उसे (विधायक को) जवाब दे बनाया जाए। इस सरकार का समय पूरा हो चुका है और कुछ दिनों में चुनाव आचार संहिता लग जाएगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद ना तो विधायक और ना ही सरकार नजर आएगी।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व व खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पंजाब को खुले दिल से समर्थन देने के लिए धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा और पंजाब में अच्छा शासन रही है। उन्होंने दुश्मन देश के गलत इरादों के खिलाफ भी चेतावनी दी, जो लगातार यहां हालात बिगाड़ने के लिए हथियार भेज रहा है। उन्होंने पंजाब पुलिस और अलग-अलग केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के मध्य नजदीकी तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया।
जगदीश जग्गा को शानदार जनसभा के आयोजन हेतु मुबारकबाद देते हुए कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि यह उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है।
टिकटों के आबंटन पर कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि उनकी पार्टी व भाजपा विजयी उम्मीदवारों को ही फाइनल करने हेतु मिलकर काम करेंगे।
उन्होंने सभा में शामिल होने के लिए भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का भी धन्यवाद किया।

Saturday, November 06, 2021

चंडीगढ़ निगम चुनाव 35 सीटों पर लड़ेंगे बसपा और अकाली

चुनावों के लिए अर्ज़ियों की आखिरी तारीख 15 नवंबर 

मोहाली: 6  नवंबर 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव  बहुजन समाज पार्टी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर 35 सीटों पर लड़ रहे हैं । दोनों पार्टी मिलकर चंडीगढ़ नगर निगम के चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारेगी । सभी वार्डों के उम्मीदवारों से अपनी दावेदारी साबित करने के लिए एप्लीकेशन आ रही हैं । एप्लीकेशन जमा करवाने की आखिरी तारीख 15 नवंबर 2021 रखी गई है जिस करके चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार अभी से ही काफी  सरगरम हैं और अपने अपने वार्डों में मीटिंग कर रहे हैं । चंडीगढ़ निवासियों की तरफ से इस बार बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है कि लोग भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस से काफी दुखी हैं । इस बार ऐसा लग रहा है कि बहुजन समाज पार्टी चंडीगढ़ इस बार नगर निगम के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करेगी और अपनी जीत हासिल करेगी ।

बहुजन समाज पार्टी,चंडीगढ प्रदेश के अध्यक्ष गुरचरण सिंह कंबोज इस मकसद के लिए सक्रिय हैं। 




Wednesday, September 15, 2021

तख्त श्री केशगढ़ साहिब में बेअदबी:आप ने लिया गंभीर नोटिस

 15th September 2021 at  6:03 PM

हाईकोर्ट की निगरानी में रिटायर जजों की कमेटी बनाई जाए 


चंडीगढ़
: 15 सितंबर 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने हाल ही में तख्त श्री केशगढ़ साहिब में हुई  बेअदबी की घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे राज्य के शांतिपूर्ण माहौल के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और परेशान करने वाला बताया है। आप ने आरोप लगाया कि इस तरह के जघन्य कृत्यों को अंजाम देकर असामाजिक तत्व आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की शांति और सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय से जारी एक संयुक्त बयान में आप विधायक कुलतार सिंह संधवां, प्रो बलजिंदर कौर,अमरजीत सिंह संदोआ और जय सिंह रोढ़ी ने कांग्रेस सरकार से पूर्व जजों की एक विशेष कमेटी बनाकर,हाईकोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करने की मांग की है। आप नेताओं ने कहा कि उन्हें पंजाब पुलिस तथा बादल नियंत्रित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की कार्यशैली पर भरोसा नहीं है।

उन्होंने कहा कि “चुनाव से ठीक पहले ही ऐसी दिल दहला देने वाली घटनाएं क्यों होती हैं? सरकार की विफलता के अलावा, ऐसी घटनाएं किसी  खास योजना के तहत घटित होने का संकेत देती हैं, जिसका उद्देश्य न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना है बल्कि सामाजिक भाईचारे को कमजोर करना भी है। पंजाब की जनता को ऐसी घटनाओं से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब को सांप्रदायिक और धार्मिक आधार पर बांटकर लोगों में संदेह की भावना पैदा करने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं और बेअदबी की यह घटना भी उसी श्रृंखला का हिस्सा है।

आप नेताओं ने आगे कहा कि सरकार ने बेअदबी की पिछली घटनाओं में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, इसलिए बेअदबी के दोषियों में डर खत्म हो गया है। “यदि पिछले बेअदबी मामलों में शमिल दोषियों पर सख्त कार्रवाई की हुई होती तो आज किसी की भी दोबारा ऐसी हरकत करने की हिम्मत नहीं होती।" आप नेताओं ने कहा कि यह घटना शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की व्यवस्था और योजनाओं पर भी संदेह पैदा करती है।

Thursday, April 18, 2019

मतदान का उत्साह कर्नाटक में भी देखा गया

बेंगलुरु का गांवों में भी मतदान के उत्साह की लहर 
लोकसभा चुनाव-2019 के दूसरे चरण के तहत 18 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक के अनेकल गांव, बेंगलुरु में एक मतदान केन्द्र पर वोट डालने के लिए अपना पहचान पत्र दिखाते हुए मतदाता। (PIB)

Wednesday, August 08, 2018

PMC: चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग तेज़

PMC की चुनावी प्रक्रिया बदलना समय की मांग 
लुधियाना: 8 अगस्त 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
मामला डाक्टरी सेवा का है। डाक्टर--एक ऐसा महान इन्सान-जिसे कभी भगवान माना जाता था लेकिन अब लोग उसे उस भावना से नहीं देखते। हालांकि अब बह मानवीय संवेदना से ipoorन लोग खुद अपनी जेब से वित्तीय तैर पर कमज़ोर लोगों का इलाज करवाते हैं लेकिन व्यापक तौर पर पूंजीवादी सिस्टम ने इसे केवल मुनाफे का धंधा बना दिया है। बीमार होने पर लोग बिना दवाई के मरना पसंद करते हैं या फिर सेल्फ मेडिकेशन के खतरनाक प्रयोगों से खुद का नुकसान करवा बैठते हैं लेकिन डाक्टरके पास नहीं जाना चाहते। ऐसा नहीं है कि अच्छे लोग नहीं बचे। अब भी बहुत से डाक्टर भगवान की तरह अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं लेकिन ज़्यादातर मामला गडबडा चुका है। किसी भी अस्पताल में जाते ही लम्बे चौड़े टेस्ट लिख कर पर्ची मरीज़ के परिवार को  थमा दी  जाती है। उनका खर्चा इतना ज्यादा बैठता है कि या तो व्यक्ति इलाज ही नहीं करवाता और या फिर खतरा उठा कर फंस जाता है मजबूरी के जाल में। और यह सब गली मौहल्लों के झोलाछाप डाक्टर नहीं करते बल्कि बड़े बड़े अस्पताल और बड़े बड़े क्लिनिक करते हैं। आमिर खान ने अपने लोकप्रिय सीरियल सत्यमेव जयते में इस मुद्दे को उठा कर बहुत कुछ बेनकाब किया था। इस आयोजन में अच्छे डाक्टरों की भी चर्चा हुई थी और पैसा बनाने वालों की भी। इसके बावजूद वह सुधर नहीं आ पाया जो अपेक्षित था। 
सवाल उठता है जो लोग भगवान समझे जाते थे वे शैतान क्यूँ बन रहे हैं। आखिर उनपर निगरानी करने वाले क्यूँ कुछ ठोस नहीं करते जिससे यह सब रुक सके? क्या यह ख़ामोशी एक मुजरिमाना भूमिका नहीं इंसानियत के लिए? अब पंजाब मेडिकल काउन्सिल के चुनावों के मौके पर इस सब की चर्चा भी ज़ोरों पर है। कुछ लोग चाहते हैं नए लोग आयें तांकि निगरानी रखने वाला तंत्र अधिक प्रभावशाली हो सके। मीडिया में यह सब चर्चा का विषय बना हुआ है। 
पंजाब मेडिकल कौंसिल (पीएमसी) के इलेक्शन में ऑनलाइन वोटिंग की मांग के बाद अब सीनियर मेडिकल अफसर (बूथगढ़) और चीफ एडवाइजर पीसीएमएस एसो. पंजाब डॉ. दलेर सिंह मुल्तानी ने रिटर्निंग अफसर डाॅ. गुरदीप कल्याण को लेटर भेज कर चुनाव कैंसिल करने की मांग की है। वहीं बठिंडा से डॉ. वितुल गुप्ता ने सीएम व हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लेटर भेज इलेक्शन में वोट इकट्‌ठी करने को तुरंत रोकने के लिए कहा है। इसी तरह हेल्थ एंड ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट बठिंडा के डॉ. वितुल गुप्ता ने कहा, एथिकल कमेटी मैंबर बनने के लिए अन एथिकल तरीके से वोट लेकर क्या न्याय कर पाएंगे। कोई बैलेट पाने के लिए पोस्टमैन का पीछा कर रहा है। मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे स्टूडेंट से उनके डॉक्टर्स माता पिता का बैलेट मंगवाने का काम चल रहा है। 
डॉ. दलेर सिंह और डॉ. वितुल गुप्ता भी खुल कर सामने आये हैं।  डाक्टर बलबीर सिंह शाह ने  तो इस मुड़े पर बहुत कुछ कहा है। 
डाक्टर दलेर सिंह कहते हैं कि बैलेट में चार बड़ी खामियां हैं। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर में 23 प्रत्याशियों के नाम हैं। जिसे वोट देना है, उसके आगे क्राॅस लगाना है। एक डॉक्टर को 10 को वोट देना होता है। अगर वह सिर्फ 2 को वोट देता है तो ऐसे में कोई भी बैलेट पेपर से छेड़छाड़ कर अपने प्रत्याशी को वोट दे सकता है। एतराज़ जायज़ है।  पहले भी इसी तरह मुद्दे उठते रहे हैं लेकिन सुधर नहीं हो सका। अगर वोटर का क्रॉस चिन्ह कॉलम से इधर उधर हुआ तो वोट इनवैलिड होगी। यह गलत है क्योंकि सिर्फ प्रत्याशी के कॉलम के सामने क्राॅस का चिन्ह लगाना है, तो बाकी प्रत्याशियों के सामने क्या लिखना है। यह स्पष्ट नहीं है। 
सेल्फ डिक्लेरेशन में आधार कॉर्ड और पीएमसी रजिस्ट्रेशन की कॉपी मांगी गई है। क्योंकि यह इलेक्शन सिक्रेट नहीं है, ऐसे में वोटर की पहचान हो जाएगी। आगे चलकर उसकी सामाजिक या प्रोफेशनल स्तर पर विरोधता हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो वोटिंग सिस्टम के लिए इसे सुरक्षित नहीं माना जा सकता। 
इस चुनाव के संबंध में बहुत कुछ कहा सुना जा रहा है लेकिन लगता है हर बार बात चर्चा तक ही रह जाती है। 
गौरतलब है कि नोटिफिकेशन में कहीं नहीं लिखा कि जिनकी रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं हुई है, उन्हें बैलेट पेपर नहीं भेजे जाएंगे। जबकि सूचना है कि रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं करवाने वाले डॉक्टर्स को बैलेट पेपर नहीं भेजे जा रहे हैं। 
डाक्टर अरुण मित्र ने भी कहा कि सरकार को भेजा था प्रोसेस बदलने का प्रस्ताव लेकिन परिणाम कुछ नहीं। उन्होंने कहा था-
वोटिंग का मतलब होता है कि जाकर वोट डालना लेकिन पीएमसी इलेक्शन में तो घपला हो रहा है। इसलिए वोटिंग ऑनलाइन होनी चाहिए। डाक्टर अरुण मित्र कहते हैं कि जिस समय मैं पीएमसी की एथिकल कमेटी में था, उस समय यह इश्यू उठा था। सभी की एक राय बन गई थी कि ऑनलाइन वोटिंग हो। सरकार को यह प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद कुछ नहीं हुआ। संवैधानिक तरीके से इलेक्शन करवाने हैं, तो वोटिंग ऑनलाइन करनी होगी। उल्लेखनीय है कि डॉ. अरूण मित्रा, पीएमसी की एथिकल कमेटी के चेयरमैन भी रह चुके हैं। 
दूसरी तरफ रिटर्निंग अधिकारी खुद को बेबस जैसा दिखाते हैं। अब वास्तव में ऐसा है या यहाँ भी कोई बहाना है यह तो भगवान् ही जाने। उनका कहना है कि प्रोसेस बदलना मेरे बस में नहीं। सवाल है की आखिर किसके बस में है वास्तविक बदलाव?
रिटर्निंग अफसर डॉ. गुरदीप कल्याण का कहना है-मेरे पास शिकायत आई है, लेकिन मेरा काम कानून के दायरे में रहकर चुनाव करवाना है। जैसा वोटिंग का सिस्टम है, वैसे चुनाव हो रहे हैं। बैलेट पेपर को एकत्र किया जा रहा है। कुछ और प्रोसेस जो प्रत्याशी कर रहे हैं उन पर कार्रवाई मेरे दायरे में नहीं है। 
इसी बीच खुल कर सामने आए हैं डाक्टर बलबीर सिंह शाह। डॉ. शाह के अनुसार पीएमसी का गठन 1916 में हुआ था। उस समय सिर्फ 435 मेंबर्स थे। लेकिन इसका दायरा पेशावर से लेकर दिल्ली तक था। तब हालात भी और थे माहौल भी और था लेकिन अब तो इसके सदस्यों की संख्या भी बढ़ चुकी है। भूगौलिक दायरा बेशक कम हुआ हो लेकिन तकनीक विकास ने बहुत सी नयी संभावनाएं दिखाई हैं। 
डाक्टर शाह ने विस्तार से बताया कि पीएमसी का गठन 1916 में हुआ था। उस समय सिर्फ 435 मेंबर्स थे। लेकिन इसका दायरा पेशावर से लेकर दिल्ली तक था। इतने बड़ा दायरा होने से वोटिंग को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजा जाता था। उसके बाद तकनीकी विकास ने संचार सुविधायों में बहुत से चमत्कार दिखाए हैं। अब इमेल का जमाना है।  अब ऑनलाइन का ज़माना है। मौजूदा सिस्टम में इसे अपनाया जाना चाहिए। डाक्टर शाह याद दिलाते हैं कि देश के विभाजन के बाद इस सन्गठन के सदस्यों का यह दायरा सीमित हो गया। लुधियाना के दंडी स्वामी चौक पर इसका पहला दफ्तर बना, यहां पर डॉक्टर हंसराज इसके रजिस्ट्रार बने थे। लेकिन सीमित दायरे के बावजूद सदस्यों की संख्या बढ़ गयी। अब पंजाब में पीएमसी के 50 हजार मेंबर्स हैं। हर बार इलेक्शन में जालंधर या फिर लुधियाना के डॉक्टर मेंबर्स सेलेक्ट होकर जाते हैं। इसके अलावा अन्य सिटी से महज कोई जीत कर पीएमसी मेंबर्स बनता है। ऐसे में सवाल है कि जालंधर या फिर लुधियाना से जीतने वाले मेंबर्स को बठिंडा, मानसा या फिर संगरूर में बैठे डॉक्टर्स के दर्द के बारे में क्या पता चलेगा। इसलिए हर जिले से एक डॉक्टर को चुना जाना चाहिए। सिविल सर्जन दफ्तर में उसका दफ्तर भी होना चाहिए। ताकि किसी भी शिकायत पर वह आसानी से काम कर सकें। मेरी तरफ से हेल्थ मिनिस्टर को यह सलाह भेज दी गई है, अब देखते हैं कि वह इसे मानते हैं या नहीं। अगर कोई डाक्टर किसी जिले में कुछ गलत करता है तो इसकी जितनी जानकारी उसी जिले के पीएमसी मेम्बर को होगी उतनी उस जिले से दो-चार सो किलोमीटर दूर बैठे मीम्सी मेम्बर को कैसे हो सकती है? डाक्टर शाह साफ़ कहते है अगर हर जिले में अनएथिकल प्रेक्टिस रोकनी है तो हर जिले में पीएमसी का मेम्बर होना चाहिए। 

Wednesday, June 14, 2017

सरकार आज तक महिलाओं को सशक्त नहीं बना सकी-अनीता शर्मा

Wed, Jun 14, 2017 at 2:51 PM

बेलन ब्रिगेड लौटा अपने पुराने विद्रोही रंग में 

पूछा:निगम चुनावों में 50% आरक्षण महिलाओं को या पति को 
                                                                          Courtesy: Poster Women

लुधियाना: 14 जून 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
संघर्षों की आग में रह कर जन सेवा करने वाले लोगों को सुख सुविधाओं के जाल में फांस कर ज़्यादा देर तक कर्तव्य विमुख नहीं किया जा सकता।  अन्तर आत्मा की आवाज़ सुनाई देते ही वे फिर लौट आते हैं संघर्षों के मैदान में आर पार की जंग लड़ने।  कुछ ऐसा ही होता महसूस हो रहा है बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा और उनकी टीम के साथ जो बहुत से मुद्दों पर पिछले कुछ समय से खामोश चल रही थी या केवल संकेतिक विरोध कर रही थी। सुश्री शर्मा ने एक प्रेस वक्तव्य में पंजाब सरकार के एक फैसले को अपना निशाना बनाया है। मैडम अनीता ने कहा है कि पंजाब  सरकार ने विधान सभा में कानून पास किया है जिसके तहत नगर निगम चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत सीटें मिलेंगी। 
इसके साथ ही बेलन ब्रिगेड की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीता शर्मा ने अपनी आशंका को स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकार ने महिलाओं को नगर निगम में 50 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण तो दे दिया है लेकिन सरकार आज तक महिलाओं को सशक्त नहीं बना सकी है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा है कि जो महिलाऐं नगर निगम में पार्षद हैं उनका सारा कार्य उनके पति करते है और उन्हें पति पार्षद का पद  दिया जाता है। कोई भी महिला आज पुरुष प्रधान समाज में अकेले राजनीति नहीं कर सकती। खासकर नगर निगम में महिला पार्षद अपने परिवार व पति के सहारे ही कार्य करती है। मैडम अनीता ने पूछा कि आखिर ऐसा क्यूं?
गौरतलब है कि मंच पर भाषण तो खूब दिए जाते है महिला सशक्तिकरण के लेकिन असलियत बिलकुल इससे परे है। और ये पार्षद प्रतिनिधि की प्रथा कोई नई नहीं है बरसो बरस से चली आ रही है पार्षद पुत्र,पार्षद पिता, पार्षद पति की ये प्रथा आखिर कब खत्म होगी इसका कोई स्थाई हल तो हमारे राजनेताओ को ही ढूंढना होगा। यह पुरुष प्रधान सिस्टम किसी एक ज़िले मैं नहीं तकरीबन देश भर में इसी तरह चल रहा है। 

उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनावों में सभी राजनैतिक पार्टियों के नेता चुनाव लड़ने के चाहवान होते है और अपनी पार्टी से पार्षद की टिकट लेने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देते है। प्रभावशाली लोग चूल्हे चौंके पर काम करने वाली घर की गृहणी को ही पार्षद का चुनाव लड़ा देते हैं और चुनाव जीतने के बाद महिला पर्षद अपने पति के कंधे पर हाथ रख कर काम करती हैं। मैडम ने पूछा कि आखिर क्यूं  छीन ली जाती है उनकी स्वतंत्र सोच और कार्यशैली?

कुछ माह पूर्व राजस्थान में इसी आशय की आवाज़ बुलंद हुई थी। वहां बीकानेर जिले में ऐसे कितने ही वार्ड है जिनमें पार्षद महिलाएं है पर इनकों स्वतंत्र कार्य की अनुमती नहीं मिल रही है क्यूंकि यहां भी पार्षद प्रतिनिधि के दबाव में ही हर कार्य किया जाता है। यह सब इतना ज़ोर पकड़ चूका है कि क्षेत्र के सारे अहम फैसले भी पार्षद प्रतिनिधि ही लेता है। वास्तव में यह देश भर की एक गंभीर समस्या है। एक तरफ केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे है लेकिन सरकार के इन मंसुबों को पार्षद पति, पिता ,पुत्र (पार्षद प्रतिनधि) ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में नहीं लागु होने दे रहे है। आखिर पुरुषों के अपने रसूख होते हैं जिनको संभालना उनकी पहली ज़िम्मेदारी होती है। तों ऐसे में आाखिर कब होगी पार्षद पति, पिता,पुत्र संस्कृति की ये प्रथा खत्म ???
अपने इन लोगों के बारे में तो अक्सर कथा कथाओं में सुना होगा उमापति, रमापति, कमलापति, लक्ष्मीपति, कुंती पति इतियादी। राष्ट्र का संवैधानिक मुखिया आमतौर पर राष्ट्रपति कहलाता है। विश्वविद्यालय में कुलपति और उपकुलपति के पद भी होते हैं। धनवान लोगों को लखपति करोड़पति अरबपति कहने की परम्परा भी सदियों से चलती आ रही है लेकिन यह पार्षद पति, पार्षद पिता, पार्षद पुत्र आखिर क्या बला है? क्या यह सब महुला अधिकारों पर सदियों से चले आ रहे वर्चस्व को और मज़बूत बनाने की कुप्रथा है? अगर इसी तरह महिला को अक्षम, अपाहिज, अज्ञानी साबित करने के लिए यह सब चल रहा है तो मत दो महिला को दया की यह भीख। जब महिला में शक्ति आएगी वह यह सब खुद ही छीन लेगी। इन आडंबरों से महिला के क्रोध को शांत मत करो।

अनीता शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि सभी राजनैतिक पार्टियां केवल उन्ही महिलाओं को टिकट दें जो पहले ही घरों से बाहर रहकर समाज सेवा कर रही है तभी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा नहीं तो इस आरक्षण महिलाओं के नाम पर पुरुष ही इसका लाभ उठाएंगे। इसके साथ हीयहनने यह सब कहा कि  बेलन ब्रिगेड यह सब होने नहीं देगा।  

Sunday, February 05, 2017

पंजाब में लिप और आप गठबंधन की सरकार बननी तय-सीवीया

 Sun, Feb 5, 2017 at 3:59 PM
सीवीया ने हलके के समूह वोटरों और समर्थकों को दी बधाई
लुधियाना: 5 फरवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):   For more pics please click here
विधान सभा हलका उत्तरी से लोक इंसाफ पार्टी और आम आदमी पार्टी के सांझे उम्मीदवार रणधीर सिंह सीवीया ने शान्ति से हुए मतदान की हलके के समूह वोटरों और समर्थकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वह हमेशा ही हलका उत्तरी के लोगों का रिणी रहागां, जो मेरी चयन मुहिम दौरान दिन रात एक करके लोगों के घर -घर पहुँच के लिप और आप गठबंधन की नीतियाँ बता के वोट डालने की अपील की। मेरे और मेरे साथियों की अपील पर दुनिया के सब से बड़े लोकतंत्र में विश्वास रखते हुए सुबह से ही लाईनों में लग के आपसी भाईचारो का सबूत देते हुए पोलिंग स्टेशनों पर जा कर 68.94 प्रतिशत वोट पोल की, जो हलके के 2012 की विधान सभा मतदान के मुकाबले अधिक है। For more pics please click here
उन्होंने कहा कि हलका उत्तरी से अधिक वोटों की पोलिंग इस बात का प्रतीक है, कि हलके के लोग अकाली भाजपा गठबंधन सरकार और हलके के मौजूदा विधायक की नीतियाँ से निराश थे और वह तीसरे बदल को लाने के लिए इस दिन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 11 मार्च को लिप और आप गठबंधन की सरकार बनने पर वह हलका उत्तरी के विकास के लिए पहले दिन से ही काम शुरू कर देंगे। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में इस बार लिप और आप गठबंधन की सरकार बननी तय है। For more pics please click here


आपकी वोट ही बनाती है आपका भविष्य

Sun, Feb 5, 2017 at 2:20 PM
बजाज कालेज के छात्रों ने समझाया लोकतंत्र की शक्ति का मन्त्र 
लुधियाना: 5 फरवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
चुनाव का दिन एक ऐसा मौका लाता है जिसके सदुपयोग से आप अपनी किस्मत का फैसला किसी सही प्रत्याशी के हाथों सौंप सकते हैं। इस मामले में एक एक वोट का असर होता है। लेकिन खेद की बात है कि  इस सीधे से रहस्य को भी अधिकतर लोग समझ नहीं पाते। लोकतंत्र के इस मन्त्र की शक्ति जनता को समझाने के लिए बजाज कालेज के छात्रों ने लुधियाना प्रशासन की सक्रिय सहायता की। बजाज कॉलेज के छात्रों ने पंजाब राज्य चुनाव 2017 में भाग लेने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया।  
बजाज कॉलेज के लगभग 50 छात्र वालंटरियों ने जिला प्रशासन को सक्रिय सहयोग दिया। छात्रों ने समझाया कि -मेरा वोट-मैं ही नेता। हमारे लोकतंत्र में कैसे एक एक वोट चुनावी प्रक्रिया में फर्क ला सकती है यह किसी करिश्मे। हमारे समाज को सही नेताओं  चयन इसी शक्ति से हो।  इसलिए यह एक गंभीरता पूर्ण।  छात्र शक्ति ने मतदान के महत्व पर प्रकाश डाला
छात्र दिन भर अलग अलग स्थानों पर जा कर विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के आसपास के वरिष्ठ मतदान अधिकारियों को सहायता प्रदान करते रहे इन युवाओं ने सक्रिय रूप से यह सुनिश्चित किया कि अधिक से अधिक लोगों तक इसका महत्व पहुँच सके। खुद छात्रों के लिए भी यह एक जीवन भर का अनुभव था। सभी ने इसे रोमांचित और यादगारी अनुभव के तौर पर सहेजा जो उनके दिलो दिमाग में रहेगा।

Saturday, February 04, 2017

चुनाव 2017 के रंग में रंगा हलका महल कलां

Sat, Feb 4, 2017 at 7:59 PM
हर वर्ग में रहा भारी उत्साह
भदौड़ 4 फरवरी (विजय जिंदल///पंजाब स्क्रीन)
2017 की मतदान के मद्दे नजर हलका महल कलां (104) में पाया गया भारी उत्साह हर वर्ग में मतदान में प्रति भारी योगदान, नौजवान, बुज़ुर्ग, और हर वर्ग में वोट डालनेे प्रति रूचि दिखाई दी, हलका महल कलांं के 151886 कुल वोटर हैं, मेल वोटर 80 475 और फीमेल 71 411 कुल बूथ हलके में 163 हैं, टोटल गांव हल्के में 74 हैं, हलका महल कलां के कुल 6बूथ हैं, जिन में 23 नंबर बूथ में 843 वोट भुगते, 24 नं: बूथ में 808 वोट, बूथ नं 25 के 679 और 28 नंबर बूथ के 657 वोट, और बूथ नं 26 में और 27 नं बूथ में 75 से 80 प्रतिशत के करीब कुल वोट भुगती। वोटों का रंग लोगों पर इतना चढा था कि महल कलां के बाजार खुले नजर नही आए, बाजारों में पूरा दिन सुनसान और शान्ति नजर आई। 
चुनाव कमीशन के पुख्ता प्रबंधों कारण हलके में कहीं भी कोई असुखद घटना नहीं घटी। पुलिस और सेना बल पूरा दिन पूरी चौकसी के साथ अपनी ड्यूटी पर सख्ती के साथ पहरा देते रहे जिससे कोई हुल्लडबाज या शरारती अनसर गलत हरकत न कर सके इस के अलावा उच्च अधिकारी और ड्यूटी पर तैनात ड्यूटी अफसरों ने भी अपनी यह चुनावी डयूटी पूरी तनदेही के साथ निभाई। 
पंजाब स्क्रीन डेस्क से पूनम ने और विवरण जोड़ा और बताया कि चुनावी उत्साह हर तरफ नज़र आया। युवायों में तो जोश और उत्साह था ही लेकिन इस मौके पर वृद्ध लोग भी मतदान करना नहीं भूले। उन्हें भी याद रहा कि अपने इलाके के विकास और अपनी लोगों के भले के लिए उस व्यक्ति का चुनाव करना है जो उनकी अपनी नज़र में सबसे अच्छा है। सख्त सर्दी, ठंडी हवा और वृद्ध शरीर के बावजूद वे वोट डालने के लिए पोलिंग स्टेशन तक पहुंचे और मतदान करके अपना लोकतान्त्रिक फ़र्ज़ निभाया। गौरतलब है कि इस बार अधिकतर स्थानों पर तिकौनी टक्कर नज़र आयी।  आज़ाद प्रत्याशियों ने भी इस बार की चुनावी जंग को दिलचस्प बनाया। सभी दलों के प्रत्याशियों की किस्मत अब ईवीएम में बन्द हो चुकी है। नतीजा क्या रहा, लोग किसके हक में रहे इसका  चुनावी परिणामों के दिन ही सामने आएगा। उस दिन की इंतज़ार तकरीबन सभी को बहुत शिद्दत से है।