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Friday, April 28, 2017

डाकघरों को ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए त्रिपक्षीय समझौता

28-अप्रैल-2017 19:59 IST
अब डाकघरों को भी मिलेगी हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा 
नई दिल्ली: 28 अप्रैल 2017: (पीआईबी):
ग्रामीण क्षेत्रों में डाकघरों को भारत-नेट की ब्रॉडबैंड संपर्कता प्रदान करने के लिए आज बीबीएनएल, डाक विभाग और बीएसएनएल के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता-दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए। संचार मंत्री श्री मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में किया जाने वाला यह समझौता-दस्तावेज अपनी तरह का पहला त्रिपक्षीय समझौता है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 1.3 लाख डाकघरों और 25 हजार छोटे डाक घरों को हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा प्रदान की जाएगी, ताकि ग्रामीण आबादी को लाभ हो।

इस अवसर पर श्री मनोज सिन्हा ने कहा कि लगभग एक लाख ग्रामीण पंचायतों को संपर्कता प्रदान करने का पहला चरण पूरा होने वाला है। शेष डेढ़ लाख ग्राम पंचायतों को 100 एमबीपीएस ब्राडबैंड संपर्कता का काम दिसंबर, 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा। एक प्रश्न के जवाब में मंत्री महोदय ने कहा कि भारत–नेट प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए 9 स्तंभों में से एक है। 

श्री मनोज सिन्हा ने कहा कि भारत-नेट और आज होने वाले समझौते में नागरिक सुविधाओं के प्रावधान पर बल दिया गया है। बीएसएनएल सेवा प्रदाता है जो ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करेगा। बुनियादी ढांचा तैयार करने और संचालन खर्च डाक विभाग वहन करेगा। चूंकि भारत-नेट राष्ट्रीय नेट वर्क है, इसलिए बीबीएनएल इस पूरे संचालन का समन्वय करेगा। अन्य सरकारी विभागों के साथ भविष्य में समझौता दस्तावेज किये जाने का प्रस्ताव है।
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Thursday, February 13, 2014

डाक विभाग में भी रही मुक्मल हड़ताल

डाक विभाग की यह हड़ताल भी पूरी तरह कामयाब रही
हड़ताल के चलते  दूसरे दिन भी कामकाज ठप्प
लुधियाना: 13 फरवरी 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
बैंकों के बाद डाक विभाग की हड़ताल ने व्यापार और कारोबार की नींव तक हिला दी। इन दो विभागों की बारी बारी से हुयी लगातार हड़ताल ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा और लोगों को बताया कि हम इस हड़ताल के लिए मजबूर क्यूँ हुए। जो दृश्य आप देख रहे हैं वे लुधियाना के केंद्रीय डाकघर माता रानी चोंक के सामने का है। यहाँ दोनों दिन जम कर नारेबाज़ी हुई। जोशीली नारेबाज़ी में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी जमकर निशाना बनाया गया।
बैंक मुलाज़िमों की दो दिवसीय हड़ताल के  डाक विभाग की दो दिवसीय हड़ताल ने कामकाज ठप्प कर दिया।डाक विभाग के कर्मचारियों की अपनी मांगों के सम्बन्ध में चल रही देश व्यापी हड़ताल के दूसरे दिन भी डाक घरों में कोई काम काज नहीं हुआ.। विभाग के कर्मचारी डाक घर के गेट पर धरना प्रदर्शन करते रहे और काम करवाने आए लोगों को बुरी तरह से निराश हो कर लौटना पड़ा.। भारत नगर चौंक स्थित मुख्य डाक घर के बाहर जहाँ कर्मचारी धरने पर बैठे रहे वहीं माता रानी चौंक स्थित केंद्री डाक घर के बाहर भी धरना प्रदर्शन चलता रहा। प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे और मांग कर रहे थे कि उनकी पिछले लम्बे समय से लंबित पडी माँगों को अबिलम्ब पूरा किया जाए.।
नेशनल यूनियन पोस्टमैन व ग्रुप डीएमटीएस पंजाब के सर्कल सचिव सुरिंदर सेठी ने कहा कि सरकार ने जो संगठन से मांगों को मानने का वायदा किया था से मुकर रही है जिस कारण कर्मचारियों में रोष व्याप्त है.। यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया तो राष्ट्रीय स्तर के यूनियन पदाधिकारियों द्वारा अगली रणनीति तैयार की जाएगी और उससे निकलने वाले दुष्परिणामों की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की होगी।राम लाल डिवीजन सचिव,कमिकर सिंह व जोगिंदर ने मांगों को दोहराते हुए कहा कि सरकार द्वारा नित्य प्रति दिन महंगाई तो बढ़ाई जा रही है परन्तु मुलाजिमों के हितों में योजनाएँ बनाने की बजाय कर्मचारी विरोधी नीति अपनाई जा रही है।उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर कर्मचारी की मौत हो जाने पर उसके परिवार
के एक सदस्य को नौकरी,ठेकेदारी प्रथा को बंद किया जाए,ग्रामीण डाक सेवकों को स्थाई करते हुए सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्रदान कर पैंशन सहित अन्य लाभ भी दिए जाएँ। जो स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश पर कई पदों को ख़त्म किया जा रहा है वो  मुलाजिमों के साथ धोखा है। इस अवसर पर गुरदीप सिंह,बिक्रमजीत सिंह,गुरमीत सिंह,मनवीर सिंह,राम किशोर,राजविंद्र सिंह,हरमेश,रघवीर चंद,सीमाए चंद,जोगिंदर कुमार,रमेश कुमार,मीनाक्षी,नेहा,बनीता,कनिका,बलविंदर कौर,नीलम सूद,मोनिका आदि शामिल थे।




Monday, February 27, 2012

सादा पोस्‍ट कार्ड : आम आदमी का संदेश वाहक

भारतीय पोस्‍ट कार्ड का इति‍हास
वि‍शेष लेख                                     डॉ. के परमेश्‍वरन*
साभार तस्वीर 
     मल‍यालम के एक प्रमुख हास्‍य लेखक श्री एन गोपालाकृष्‍णन ने एक हृदय रोग वि‍शेषज्ञ यानी कार्डि‍योलॉजि‍स्‍ट की परि‍भाषा इस तरह बताई है कि‍जो सि‍र्फ कार्डों के यानी पत्रों के उपरांत ही पत्र लि‍खता है। वे अपने शहर में अपने आपको बहुत बड़ा कार्डि‍योलॉजि‍स्‍ट बताते हैं।
      मलयालम में एक छोटी सी पत्रि‍का है – इन्‍नू (यानी आज), जो केवल एक पत्रनुमा कार्ड पर छपती है। यह पत्रि‍का अपने प्रकाशन के 30वें वर्ष में प्रवेश कर गयी है और इस पत्र कार्ड को दुनि‍याभर में 10 हजार से भी ज्‍यादा ग्राहकों को डाक के जरि‍ए भेजा जाता है। पोस्‍ट कार्ड, पत्र कार्ड तथा डाक पत्र वि‍द्या (Deiltolog) की कला और वि‍ज्ञान से संबंधि‍त तथ्‍य इस प्रकार हैं :पोस्‍ट कार्ड
      सरकारी तौर पर पोस्‍ट कार्ड एक नि‍श्‍चि‍त आकार के कार्ड पर लि‍खा खुला संदेश है। इस कार्ड का आकार आमतौर पर 14 सेमी. X9 सेमी. होता है।  पोस्‍ट कार्ड आमतौर पर दो कि‍स्‍मों में उपलब्‍ध हैं- अकेला एक कार्ड, केवल संदेश भेजने के लि‍ए या दोहरा संलग्‍न कार्ड- एक संदेश भेजने के लि‍ए और दूसरा संदेश प्राप्‍तकर्ता द्वारा तुरंत जवाब के लि‍ए। उत्‍तर देने वाला जवाब देने में देरी नहीं कर सकता, क्‍योंकि‍संदेश भेजने वाले ने कार्ड की कीमत पहले ही चुका दी होती है।
      पोस्‍ट कार्ड के बारे में एक बात की जानकारी शायद बहुत कम लोगों को होगी कि‍इसका इस्‍तेमाल सि‍र्फ भारत के अंदर ही कि‍या जा सकता है। कोई व्‍यक्‍ति‍या संस्‍था भी अपने कर्मचारि‍यों या उपभोक्‍ताओं को संदेश भेजने के लि‍ए कार्ड छपवा सकती हैं। इस प्रकार के पोस्‍ट कार्डों का आकार भी सरकारी पोस्‍ट कार्ड जैसा ही होना चाहि‍ए। यह पतला भी नहीं होना चाहि‍ए और इनका आकार और मोटाई भी छपे हुए पोस्‍ट कार्ड जैसी होनी चाहि‍ए।

भारतीय पोस्‍ट कार्ड का इति‍हास
      भारतीय डाक घर ने पहली बार जुलाई 1879 में चौथाई आना (यानी एक पैसा) का पोस्‍ट कार्ड शुरू कि‍या था। इसका उद्देश्‍य ब्रि‍टि‍श भारत की सीमा में एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान तक डाक भेजना था। भारत के लोगों के लि‍ए अब तक का यह सबसे सस्‍ता डाक पत्र था और जो बहुत सफल सि‍द्ध हुआ।
पूरे भारत के लि‍ए वृहद डाक प्रणाली शुरू हो जाने पर डाक बहुत दूर-दूर तक जाने लगी। पोस्‍ट कार्ड पर लि‍खा संदेश बि‍ना कि‍सी अति‍रि‍क्‍त डाक टि‍कट के देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचने लगा, जहां नजदीक में कोई डाकखाना भी नहीं होता था। इसके बाद अप्रैल 1880 में ऐसे पोस्‍ट कार्ड शुरू हुए, जो केवल सरकारी इस्‍तेमाल के लि‍ए थे और 1890 में जवाबी पोस्‍ट कार्ड शुरू हुए। पोस्‍ट कार्ड की यह सुवि‍धा आज भी स्‍वतंत्र भारत में जारी है।

अन्‍य स्‍थानों के पोस्‍ट कार्ड
      1861 में फि‍लेडलफि‍या में जॉन पी चार्लटन ने एक गैर-सरकारी पोस्‍ट कार्ड की शुरूआत की, जि‍सके लि‍ए उसने कॉपीराइट हासि‍ल कि‍या, जि‍से बाद में एचएल लि‍पमैन को स्‍थानांतरि‍त कर दि‍या गया। कार्ड के चारों ओर छोटी सी पट्टी की सजावट थी और कार्ड पर लि‍खा था – लि‍पमैन्‍ज़ पोस्‍टल कार्ड, इसके पेटेंट अधि‍कार के लि‍ए आवेदन कि‍या हुआ था। ये बाजार में 1873 तक चले, जब पहला सरकारी पोस्‍ट कार्ड शुरू हुआ।      अमरीका ने 1873 में पहले से मुहर लगे पोस्‍ट कार्ड जारी कि‍ए। केवल अमरीका की डाक सेवा को ही इस तरह के कार्ड छापने की अनुमति‍थी, जो 19 मई, 1898 तक रही, जब अमरीकी संसद ने प्राइवेट मेलिंग कार्ड एक्‍ट पास कि‍या, जि‍समें प्राइवेट फर्मों को कार्ड बनाने की अनुमति‍दी गयी। प्राइवेट मेलिंग कार्डों की डाक लागत एक सेंट थी, जबकि‍पत्र कार्ड की दो सेंट थी। जो कार्ड अमरीकी डाक सेवा द्वारा छपे हुए नहीं होते थे, उन पर प्राइवेट मेलिंग कार्ड छापना जरूरी था। पोस्‍ट कार्ड की उल्‍टी तरफ सि‍र्फ सरकार को पोस्‍टकार्ड शब्‍द छापने की अनुमति‍थी। गैर-सरकारी कार्डों पर सॉवेनेर कार्ड, कॉरेस्‍पांडेंस कार्ड और मेल कार्ड छपा होता था।
   
अंतर्देशीय पत्र कार्ड
      अंतर्देशीय पत्र कार्ड पोस्‍ट कार्ड से अलग होता है। इसमें संदेश खुले में नहीं लि‍खा जाता। संदेश को पढ्ने के लि‍ए इसके फ्लैप को खोलना पड्ता है, जबकि‍पोस्‍ट कार्ड के मामले में, जि‍सके हाथ से भी पोस्‍ट कार्ड गुजरे, वह संदेश पढ् सकता है।
      तकनीकी तौर पर अंतर्देशीय पत्र कार्ड एक नि‍श्‍चि‍त आकार के कागज पर लि‍खा संदेश होता है, जि‍से मोडकर बंद कि‍या जाता है। अंतर्देशीय पत्र कार्ड भारत के अंदर ही प्रेषण के लि‍ए होता है। वि‍देशों में संदेश भेजने के लि‍ए अधि‍क लागत का वि‍शेष अंतर्देशीय पत्र कार्ड, जि‍से एरोग्राम कहा जाता है, इस्‍तेमाल कि‍या जाता है।
      मलयालम पत्रि‍का इन्‍नू पूरी तरह से इस तरह के अंतर्दशीय पत्र कार्ड पर छपती है। इसमें कवि‍ताएं, संपादकीय, कार्टूंन, संपादक को पत्र सभी कुछ होता है, जो पूरे आकार की पत्रि‍का में होते हैं, लेकि‍न बहुत ही छोटे आकार में छपते हैं।

डाक पत्र वि‍द्या (Deiltology)
      डील्‍टोलॉजी पोस्‍ट कार्डों के अध्‍ययन और संग्रहण की वि‍द्या है। ऐशलैंड, ओहि‍यो के प्रोफेसर रैंडल रोडेस ने 1945 में इस शब्‍द की रचना की, जि‍से बाद में चि‍त्र पोस्‍ट कार्डों के अध्‍ययन की वि‍द्या के रूप में स्‍वीकार कर लि‍या गया।
      दुनि‍याभर में डील्‍टोलॉजी को डाक टि‍कट संग्रहण और सि‍क्‍का/बैंक नोट संग्रहण के बाद तीसरी सबसे बड़ी हाबी माना जाता है। पोस्‍ट कार्ड इसलि‍ए लोकप्रि‍य हैं, क्‍योंकि‍लगभग हर समय के चि‍त्र पोस्‍ट कार्ड पर छपते रहते हैं। पोस्‍ट कार्डों के जरि‍ए इति‍हास की जानकारी हासि‍ल की जा सकती है, जि‍समें प्रसि‍द्ध इमारतों, महत्‍वपूर्ण व्‍यक्‍ति‍यों, वि‍भि‍न्‍न कला रूपों और इस तरह के कई वि‍षय मि‍ल जाते हैं।
      लेकि‍न डाक टि‍कट संग्रह के मुकाबले कि‍सी पोस्‍ट कार्ड के प्रकाशन और स्‍थान का समय पता करना लगभग असंभव कार्य है, क्‍योंकि‍पोस्‍ट कार्ड आमतौर पर बहुत अनि‍यमि‍त तरीके से छापे जाते हैं।
      इसलि‍ए कई संग्रहकर्ता केवल ऐसे कार्डों का ही संग्रह करते हैं जो कि‍सी वि‍शि‍ष्‍ट कलाकार और प्रकाशन या समय और स्‍थान से संबंधि‍त हों।
      इस डाक पत्र वि‍द्या का सबसे अधि‍क लोकप्रि‍य पक्ष शहरों के दृश्‍यों से संबंधि‍त है इनमें कि‍सी शहर या क्षेत्र के वास्‍तवि‍क चि‍त्र होते हैं। अधि‍कतर संग्रहकर्ता केवल ऐसे शहर के पोस्‍ट कार्ड इकट्ठे करते हैं, जहां वे रहते हैं या जहां वे पले-बढ़े हैं।

पोस्‍ट कार्ड संग्रह का संरक्षण- कुछ जरूरी बातें
·         पोस्‍ट कार्डों के सबसे बड़े शत्रु हैं आग, नमी, धूल मि‍ट्टी, धूप और कीड़े। सबसे अच्‍छा यही होगा है कि‍आप अपने संग्रह को कि‍सी बॉक्‍स में रखें, जो ठंडा और सूखा हो।
·         प्‍लास्‍टि‍क वाले एलबम का प्रयोग न करें। पीवीसी से पुराने कागज को कुछ समय बाद रासायनि‍क क्रि‍या से नुकसान पहुंचता है।
·         यदि‍प्रदर्शनी के उद्देश्‍य से अलग-अलग पोस्‍ट कार्डों का वि‍वरण दर्ज करना है, तो ध्‍यान रखें कि‍ इसके लि‍ए पेंसि‍ल का इस्‍तेमाल करें। प्रदर्शनी के बोर्ड पर पोस्‍ट कार्ड को चि‍पकाने के लि‍ए टेप या इस तरह की कोई चीज इस्‍तेमाल न करें।
·         जब पुराने पोस्‍ट कार्डों का प्रदर्शन कि‍या जाए तो इस बात का वि‍शेष ध्‍यान रखा जाए कि‍वे सीधे धूप के सामने न हों। [पीआईबी]  27-फरवरी-2012 15:44 IST 
(पत्र सूचना कार्यालय वि‍शेष लेख)* सहायक नि‍देशक, पत्र सूचना कार्यालय, मदुरई

Friday, January 06, 2012

पिनकोड- पत्र का 'संवाहक'


पिनकोड सप्ताह 15 से 21 जनवरी तक       *-डॉ.के.परमेश्‍वरन*
चित्र साभार : भारत डिस्कवरी 
एक छोटा आयातकार बॉक्‍स जो छह हिस्‍सों में बंटा होता है देश में सभी डाक वस्‍तुओं पर बना होता है। इसे अधिकांश लोग नजरअंदाज करते हैं और अक्‍सर इसे बिना भरे ही छोड़ देते हैं। लेकिन डाक विभाग के लिए यह छोटा बॉक्‍स एक पत्र के लिए 'संवाहक' के रूप में कार्य करता है। इस बॉक्‍स में पत्र भेजे जाने वाले स्‍थान का पिन कोड भरना होता है। पिन कोड क्‍या है? यह कैसे कार्य करता है?
 पिन कोड क्‍या है?  
      पिन कोड पोस्‍टल इन्‍डेक्‍स नम्‍बर (पिन) कोड का संक्षिप्‍त नाम है। यह छह अंकों का विशिष्‍ट कोड है जो भारत में डाक वितरण करने वाले सभी डाकघरों को आवंटित किया जाता है। चूंकि एक कोड केवल एक ही डाकघर से सम्‍बंधित होता है इसलिए उस कोड का उपयोग यह सुनिश्चित करता है कि पत्र तेजी से ठीक डाकघर में पहुंच जाए।
 यह कैसे कार्य करता है?  
      पिन कोड प्रणाली लागू करने के लिए पूरे देश को आठ पिन क्षेत्रों में बांटा गया है। नीचे दी गई तालिका में प्रत्‍येक क्षेत्र की पहचान संख्‍या और उसकी सीमा को दर्शाया गया है।
संख्‍या
क्षेत्र
इसके अंतर्गत आने वाले राज्‍य
1
उत्‍तरी
दिल्‍ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू और   कश्‍मीर
2
उत्‍तरी
उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तराखण्‍ड
3
पश्चिमी
राजस्‍थान और गुजरात
4
पश्चिमी
छत्‍तीसगढ़, महाराष्‍ट्र और मध्‍य प्रदेश
5
दक्षिणी
आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक
6
दक्षिणी
केरल एवं तमिलनाडु
7
पूर्वी
वेस्‍ट बंगाल, उड़ीसा एवं पूर्वोत्‍तर
8
पूर्वी
बिहार और झारखण्‍ड
       जैसा कि प्रारंभ में उल्‍लेख किया गया है‍ कि पिन कोड छह अंकों की एक संख्‍या है। पहला अंक इन क्षेत्रों में से एक को दर्शाता है। दूसरा एवं तीसरा अंक मिलकर उस जिले को दर्शाते हैं जहां वितरण करने वाला डाकघर स्थित है। अगले तीन अंक उस विशेष डाकघर को दर्शाते हैं जहां पत्र का वितरण होना है। संक्षेप में पहले तीन अंक मिलकर उस छंटाई करने वाले या राजस्‍व जिले को दर्शाते हैं जहां पत्र को मूलतया भेजा जाना है। अंतिम  तीन अंक उस वा‍स्‍तविक डाकघर से संबंध रखते हैं जाहं उस पत्र को अंतत: वितरित किया जाना है। उदाहरण के लिए अगर कोई कोझिकोड, केरल का एक शहर में रहता है तो उस क्षेत्र के डाकघर का पिन कोड 673006 है। इसमें पहला अंक 6 यह दर्शाता है कि पत्र छठे पिन क्षेत्र-तमिलनाडु, पांडिचेरी एवं केरल के लिए है। 7 और 3 (कोड का दूसरा एवं तीसरा अंक) अंक यह दर्शाएंगे कि पत्र का गंतव्‍य स्‍थान ठीक-ठीक कोझिकोड (पूर्वनाम कालीकट) में है। अंतिम तीन अंक 006 यह सुनिश्चित करेंगे कि  पत्र कोझिकोड में 006 नम्‍बर की छोटी बस्‍ती में स्थित विलाकुलम, में जाना है। अगर किसी पत्र पर पर्याप्‍त डाक टिकट लगे हों और उस पर पिन कोड ठीक तरह लिखा गया हो तो वह गंतव्‍य स्‍थान पहुंच जायेगा चाहे वह अलास्‍का हो या साइबेरिया से ही क्‍यों नहीं भेजा गया हो।  
      हम एक उदाहरण और लेते हैं। पत्र सूचना कार्यालय के लिए मदुरै में पिन कोड 625020 है। यहां अंक 6 पिन क्षेत्र-तमिलनाडु, पांडिचेरी एवं केरल को दर्शाता है। अगले दो अंक 25 मदुरै जिले का प्रतिनिधित्‍व करते हैं जबकि अंतिम दो अंक 20 मिलकर गांधीनगर डाकघर को दर्शाते हैं, जो पत्र सूचना कार्यालय, मदुरै को डाक वितरण करने वाला डाकघर है।
      यहां यह भी ध्‍यान देने योग्‍य है कि मदुरै, तमिलनाडु में गांधीनगर डाकघर को दी गई संख्‍या विशिष्‍ट है। भारत के किसी भी अन्‍य डाकघर के लिए यह संख्‍या नहीं हो सकती। पिन कोड डॉयरेक्‍ट्री की जांच करने पर यह पता चलेगा कि उत्‍तर प्रदेश के पवित्र शहर मथुरा में वितरण डाकघर का बिल्‍कुल अलग पिन कोड-281001 है क्‍योंकि दोनों मंदिरों के शहरों के नामों में भ्रांति होने की संभावना रहती है। मथुरा के पिनकोड में 2 अंक पिन क्षेत्र के लिए है जिसमें उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तराखंड आते हैं। 81 अंक मथुरा को दर्शाते है जबकि 001 मथुरा मुख्‍य डाकघर के लिए हैं।
 अमेरिका में जिप प्रणाली
      जिप कोड संयुक्‍त राज्‍य डाक सेवा में (यूएसपीएस) द्वारा प्रयुक्‍त डाक कोड संख्‍याओं की प्रणाली है। जिसका 1963 से प्रयोग किया जा रहा है। जिप (जैडआईपी) क्षेत्र सुधार योजना (जोन इम्‍प्रूवमेंट प्‍लान) का संक्षिप्‍त रूप है। इसका चयन इस विश्‍वास के साथ किया गया था कि जब पत्र भेजने वाले पते में कोड का प्रयोग करेंगे तो पत्र अधिक कुशलता एवं अधिक तेजी से यात्रा पूरी करेगा। मूल प्रारूप में पांच अंक होते हैं। 1980 में शुरू किए गए विस्‍तृत जिप +4 कोड में जिप कोड के पांच अंक और 4 अतिरिक्‍त अंक हैं जो जिप कोड के मुकाबले अधिक पास की स्‍थान स्थिति का निर्धारण करते है।
 यूनाइटेड किंगडम की प्रणाली
      यूनाइटेड किंगडम (इंग्‍लैंड) में प्रयुक्‍त डाक कोड प्रणाली पोस्‍टकोड के रूप में जानी जाती है। कोड में शब्‍दों एवं अंकों, दोनों का प्रयोग होता है। उन्‍हें 11 अक्‍तूबर, 1959 से 1974 तक की 15 वर्ष की अवधि के लिए ब्रिटिश रॉयल मेल सिस्‍टम द्वारा शुरू किया गया था। पूरे पोस्‍टकोड को पोस्‍टकोड यूनिट के रूप में जाना जाता है जो सामान्‍यतया पते के सैट या एक बड़े वितरण स्‍थान के अनुरूप है।
      लंदन और दूसरे बड़े शहरों में 1857 से डाक जिलों की प्रणाली लागू की गयी थी। बाद में 1971 में लंदन में इस प्रणाली को परिष्‍कृत करके इसमें संख्‍या धारक उपखण्‍डों को शामिल किया गया और 1934 में दूसरे शहरों तक भी इसका विस्‍तार किया गया। बाद में इन नगरों को राष्‍ट्रीय पोस्‍ट कोड प्रणाली में शामिल कर लिया गया।
 क्षेत्रीय प्रणाली- एक अग्रदूत
      भारत में डाक से वस्‍तुएं भेजे जाने की प्रणाली को सुचारू रूप देने के प्रयासों का इतिहास बहुत पुराना है, इस दिशा में, 1946 में किया गया एक प्रयास था-वितरण क्षेत्र संख्‍या प्रणाली। इस प्रणाली के अंतर्गत हर वितरण डाकघर को एक विशिष्‍ट संख्‍या प्रदान की गयी। पहले इसे मुंबई, कोलकाता, दिल्‍ली और चेन्‍नई जैसे बड़े नगरों में लागू किया गया। इसमें लोगों से अनुरोध किया गया कि जिन नगरों में यह प्रणाली लागू की गयी है वहां नगर के नाम के बाद उसकी संख्‍या भी लिखी जाए और यह संख्‍या अंकित न किये जाने की स्थिति में भेजी गयी वस्‍तुओं की प्राप्ति में विलंब हो सकता है।
 डाक सर्किल
      डाक सर्किलों का संगठन भी वितरण प्रणाली के सुचारू बनाने और डाक से भेजी गई वस्‍तुओं की प्राप्ति में होने वाली देरी से बचाव का प्रयास था।
      1 अप्रैल, 1774 में जब डाक की सुविधाएं जनता को उपलब्‍ध करायी गयी, उस समय मात्र तीन ही डाक सर्किल थे जिनके नाम थे बंगाल, बम्‍बई और मद्रास। उन दिनों जहां बंगाल, ब्रिटिश साम्राज्‍य के सम्‍पूर्ण पूर्वी और उत्‍तरी क्षेत्रों को डाक सेवा उपलब्‍ध कराता था वहीं मद्रास द्वारा पूरे दक्षिण क्षेत्र को डाक की सेवाएं उपलब्‍ध करायी जाती थीं। विभाजन के बाद आजाद भारत में बम्‍बई सेन्‍ट्रल, पूर्वी पंजाब, मद्रास और उत्‍तर प्रदेश में 20 डाक सर्किल हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, दिल्‍ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू-कश्‍मीर, केरल, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, पूर्वोत्‍तर क्षेत्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्‍थान, तमिलनाडु, उत्‍तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सैनिक डाक सेवा शामिल हैं।    

*सहायक निदेशक, पत्र सूचना कार्यालय, मदुरै