Friday, July 17, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर में भी पधारे

स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 17 JUL 2026 at 5:48 PM by PIB Delhi

अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र तथा अत्‍याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्‍द्र का उद्घाटन किया

*प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत प्रधानमंत्री ने पीजीआईएमईआर में 150 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला रखी

*बारह वर्ष पहले हमने संकल्प लिया था कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में किसी भी नागरिक को कष्ट न उठाना पड़े तथा प्रत्येक व्यक्ति को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियाँ इसी संकल्प का परिणाम : प्रधानमंत्री

*“देश भर में 2014 के बाद 15 नए एम्स को मंजूरी दी गई, सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विशेष अस्पतालों को समर्थ किया गया”

*“देश में टीबी उपचार का कवरेज अब 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है तथा डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत कमी आई”

*राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक तथा उपशामक देखभाल पर विशेष बल देते हुए एक व्यापक, समग्र और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत नींव रखी : श्री जे. पी. नड्डा

*“आयुष्मान आरोग्य मंदिर देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रथम संपर्क केन्‍द्र बनकर उभरे और जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुदृढ़ कर रहे हैं”

* “आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य मंच के रूप में तेज गति से उभर रहा है, जो डिजिटल नवाचार के जरिये स्वास्थ्य सेवाएं देने में परिवर्तन ला रहा है”


चंडीगढ़
: 17 जुलाई 2026: (PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन)::

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र तथा अत्‍याधुनिक तंत्रिका विज्ञान (न्यूरोसाइंसेज़) केन्‍द्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के अंतर्गत पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में 150 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला भी रखी। इस कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं केन्‍द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया, केन्‍द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा, केन्‍द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव तथा चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद श्री मनीष तिवारी भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पीजीआईएमईआर में अत्‍याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन और नई परियोजनाओं की आधारशिला लाखों लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने वर्ष 2015 में पीजीआईएमईआर के दीक्षांत समारोह में अपनी यात्रा को याद करते हुए पिछले एक दशक में संस्थान की क्षमता में हुए उल्लेखनीय विस्तार की सराहना की। साथ ही, उन्होंने पीजीआईएमईआर के प्रबंधन, विभाग के सदस्यों तथा युवा चिकित्सकों को उनकी समर्पित सेवाओं के लिए बधाई दी।

स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के बीच घनिष्ठ संबंध पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वच्छता को जन अभियान बनाने के उद्देश्य से ‘स्वच्छ भारत मिशन’ प्रारंभ किया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों शौचालयों के निर्माण, खुले में शौच से मुक्ति, देशव्यापी स्वच्छता अभियानों तथा स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के प्रयासों से जनस्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की रैंकिंग ने चंडीगढ़ सहित अनेक शहरों को अपने स्वच्छता मानकों में निरंतर सुधार करने के लिए प्रेरित किया है।

प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी श्री इंदरजीत सिंह सिद्धू की ‘ब्रूम वॉरियर’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिकों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि स्वच्छता को बढ़ावा देने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सरकार ने इस वर्ष उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।

जनभागीदारी के महत्व पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “स्वच्छता एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।” उन्होंने ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल के अंतर्गत आयोजित विशेष स्वच्छता अभियान की सराहना की तथा चंडीगढ़ के नागरिकों को उनके उत्साहपूर्ण सहयोग के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जन-अभियान बीमारियों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक और परिवर्तनकारी बदलाव आए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान पूरी दुनिया में उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भारत सहायता मांगने वाला देश नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों की सहायता करने वाला राष्ट्र बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि आज भारत चिकित्सा पर्यटन (मेडिकल टूरिज्म) के प्रमुख वैश्विक केन्‍द्रों में से एक बन चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “बारह वर्ष पहले हमने यह संकल्प लिया था कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में किसी भी नागरिक को कठिनाई का सामना न करना पड़े तथा प्रत्येक व्यक्ति को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियाँ इसी संकल्प का परिणाम हैं।”

स्वास्थ्य अवसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “वर्ष 2014 के बाद देश में 15 नए एम्स को मंजूरी दी गई, सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विशेष अस्पतालों को समर्थ बनाया गया है।” उन्होंने वर्ष 2022 में शुरू हुए चंडीगढ़ स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान आज हजारों मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने को भी समान प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक, एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्रामीण, शहरी और जनजातीय क्षेत्रों सहित पूरे देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाले 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं, जिनमें 12 प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य देखभल सेवा पैकेज शामिल हैं। इन केन्‍द्रों के माध्यम से करोड़ों नागरिकों की उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा अन्य गैर-संचारी रोगों की जांच की जा चुकी है।

स्वास्थ्य सेवाओं में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ने विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श तक लोगों की पहुँच को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि अब तक इस मंच के माध्यम से 48 करोड़ से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सलाह आसानी से उपलब्ध हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि देश में अब 90 प्रतिशत से अधिक डिलीवरी संस्थागत स्तर पर हो रही हैं। साथ ही, मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी आई है तथा शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार के विशेष बल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योग, एचपीवी टीकाकरण तथा यू-विन प्लेटफॉर्म जैसी पहलें समय पर निवारक हस्तक्षेप सुनिश्चित कर करोड़ों नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा कर रही हैं।

क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ को जनभागीदारी के साथ लागू किया जा रहा है, ताकि जागरूकता बढ़े, समय पर जांच हो तथा मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने बताया कि देश में टीबी उपचार का कवरेज अब 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में टीबी की घटनाओं में पिछले एक दशक में 21 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का सबसे अधिक लाभ गरीबों, मध्यम वर्ग तथा महिलाओं को मिला है, जो अक्‍सर अपने परिवार की देखभाल में स्वयं के स्वास्थ्य की उपेक्षा कर देती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत में स्वास्थ्य सेवा अब कोई विशेषाधिकार नहीं रही, बल्कि यह प्रत्येक सामान्य नागरिक का अधिकार बनती जा रही है।”

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय सीमित मेडिकल कॉलेजों और सीटों के कारण अनेक प्रतिभाशाली युवाओं के लिए डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाता था। उन्होंने बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है तथा एमबीबीएस और स्नातकोत्तर चिकित्सा की सीटों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में एमबीबीएस कॉलेज की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है और शीघ्र ही इसमें प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इससे प्रतिभाशाली युवाओं को देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अध्ययन का अवसर मिलेगा तथा भारत की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कार्यबल और अधिक सशक्त होंगे।

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए परिवर्तनकारी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक तथा उपशामक (पैलिएटिव) देखभाल पर विशेष बल देते हुए एक व्यापक, समग्र और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत नींव रखी है।”

उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रथम संपर्क केन्‍द्र बनकर उभरे हैं और जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुदृढ़ कर रहे हैं।

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी ढंग से एक-दूसरे से जोड़ते हुए एक समेकित स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की है, जिससे प्रत्येक नागरिक को उपचार की निरंतर और समन्वित सुविधा सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि देशभर में 23 एम्स स्वीकृत किए जा चुके हैं और वे विभिन्न चरणों में विकसित हो रहे हैं। इससे गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तथा चिकित्सा शिक्षा तक लोगों की पहुँच में उल्लेखनीय विस्तार हो रहा है।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए श्री जे. पी. नड्डा ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 थी, जो आज बढ़कर 818 हो गई है। इसी प्रकार स्नातक (एमबीबीएस) चिकित्सा सीटों की संख्या बढ़कर 1.38 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने 75,000 अतिरिक्त स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटें सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिनमें से 25,000 सीटें पहले ही जोड़ी जा चुकी हैं।

श्री नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) तेज़ी से विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य मंच के रूप में विकसित हो रहा है, जो डिजिटल नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 90 करोड़ आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे नागरिक अपने डिजिटल स्वास्थ्य रिकार्डों को सुरक्षित तरीके से रख सकें।

राष्ट्र को समर्पित की जा रही नई स्वास्थ्य सुविधाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने कहा कि 300 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्‍द्र भारत की न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1967 से लगभग पाँच दशकों तक पीजीआईएमईआर में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के लिए केवल 25 बिस्तर उपलब्ध थे, जबकि यह नया केन्‍द्र संस्थान की स्वास्थ्य सेवा क्षमता में परिवर्तनकारी वृद्धि करेगा। लगभग 440 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह केन्‍द्र न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी तथा न्यूरो-क्रिटिकल केयर की समग्र सेवाएँ एक ही जगह पर उपलब्ध कराएगा, जिससे तंत्रिका संबंधी अत्‍याधुनिक उपचार तक लोगों की पहुँच और अधिक सुलभ होगी। उन्होंने कहा कि अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र देश में महिलाओं और बच्चों के लिए उपलब्ध सबसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में से एक है, जहाँ एक ही जगह व्यापक एवं विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएँ प्रदान की जाएँगी।

पृष्‍ठभूमि:

अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं, गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं तथा विशेष उपचार की आवश्यकता वाले बच्चों को व्यापक तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। 300 बिस्तरों और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित यह केन्‍द्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगा तथा क्षेत्र के हजारों परिवारों को लाभान्वित करेगा।

अत्‍याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्‍द्र में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-क्रिटिकल केयर तथा अत्याधुनिक नैदानिक (डायग्नोस्टिक) सुविधाएँ एक ही जगह पर उपलब्ध होंगी। यह केन्‍द्र जटिल तंत्रिका संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों को समयबद्ध एवं विश्वस्तरीय उपचार सुनिश्चित करेगा, साथ ही तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में चिकित्सा अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण को भी सशक्त बनाएगा।

पीजीआईएमईआर में स्थापित किया जाने वाला क्रिटिकल केयर ब्लॉक आपातकालीन तैयारी, गहन चिकित्सा (आईसीयू) सेवाओं तथा आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाएगा। साथ ही यह क्षेत्र की समग्र स्वास्थ्य अवसंरचना को और अधिक मजबूत बनाएगा।

***//पीके/केसी/केपी/एसएस//(रिलीज़ आईडी: 2285923) 

चंडीगढ़ में विभिन्न विकास परियोजनाओं का हुआ शुभारंभ

प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 17 JUL 2026 at 4:51 PM by PIB Delhi

विकास के इस नए अध्याय के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ


चंडीगढ़
//नई दिल्लीः 17 जुलाई 2026:(पंजाब स्क्रीन//PIB Delhi)::

पंजाब और चंडीगढ़ में आज चहल पहल थी। एक उत्सव सा माहौल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब और चंडीगढ़ के लिए विकास की उपलब्धियों का एक नया इतिहास लिखने आ रहे थे। इनके आने से 17 जुलाई का दिन एक ऐतिहासिक दिन बन गया। इस सुअवसर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विस्तार से इस नई स्वर्णिम रेखा  का विवरण भी बताया। 

सर्वप्रथम उन्होंने वहां मौजूद विशेष अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा, 

श्रीमान गुलाब चंद कटारिया जी, केंद्र में मेरे सहयोगी जे. पी. नड्डा जी, अश्विनी वैष्णव जी, संसद में मेरे साथी मनीष तिवारी जी, यहां सभागार में भी कई विधायक, मंत्री, सांसद बैठे हुए हैं। अन्य सभी महानुभाव भी, आज कईयों के दर्शन हो रहे, पुराने-पुराने लोगों के।


भाइयों-बहनों,

आज आप सबके बीच आकर मन में खुशी का एक भाव है, अलग ही भाव है।

साथियों,

चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं है, ये भारत के लिए development का एक मॉडल रहा है। चंडीगढ़ जाना जाता है, व्यवस्थित विकास के लिए, चंडीगढ़ की पहचान है, बेहतर लाइफस्टाइल के लिए, ease of living के लिए। चंडीगढ़ की पहचान है, चिकित्सा की बेहतर सुविधाओं के संबंध में और इस सबके साथ-साथ चंडीगढ़ की पहचान है, माँ चंडी का आशीर्वाद। और इसलिए, चंडीगढ़ का विकास हमेशा से NDA सरकार की प्राथमिकता रहा है। आपको ध्यान होगा, डेढ़ साल पहले देश ने न्याय व्यवस्था में बहुत बड़ा सुधार किया है। हम दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता लेकर आए हैं। भारतीय न्याय संहिता यानी, दंड आधारित क़ानूनों की जगह न्याय आधारित कानूनी व्यवस्था। और तब भारतीय न्याय संहिता लागू करने की शुरुआत चंडीगढ़ से ही हुई थी।

साथियों,

बीते वर्षों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग और डिजिटल गवर्नेंस, चंडीगढ़ को हाइटेक बनाने के लिए ऐसे कितने ही प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है। ढाई हजार करोड़ से ज्यादा रुपए इस मिशन में खर्च हुये हैं। आज भी यहाँ हेल्थ, एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विकास के कई काम शुरू हो रहे हैं। मैं इनके लिए सभी चंडीगढ़ वासियों को बधाई देता हूं।

साथियों,

यहाँ आने से पहले मैं हरियाणा के जींद में था और यहां से इसके बाद मुझे पंजाब के विकास कार्यों के लिए जालंधर जाना है। इन दोनों कार्यक्रमों के बीच आज ये चंडीगढ़ का कार्यक्रम हो रहा है। क्योंकि हमारा चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, इस पूरे क्षेत्र को जोड़ता है। चंडीगढ़ के विकास से चंडीगढ़ के लोगों का जीवन तो बदलता ही है, साथ ही हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और जम्मू कश्मीर के लोगों को भी इससे बहुत लाभ होता है। चिकित्सा सेवाओं के लिए तो चंडीगढ़ इस पूरे क्षेत्र में एक बड़ा हब है।

साथियों,

जब मैं चंडीगढ़ रहता था, तो मुझे कई बार PGI जाना होता था और कारण क्या? तो कोई ना कोई हमारे साथी या उनका परिवार चाहे जम्मू कश्मीर का हो, पंजाब का हो, हिमाचल का हो, हरियाणा का हो, कोई ना कोई बीमार यहां आते थे, तो मेरा मिलने जाना बड़ा स्वाभाविक रहता था। और इसलिए मुझे पता है कि इस पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए ये आरोग्य की दृष्टि से एक बड़ा महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

साथियों,

आज यहाँ चंडीगढ़ PGI में एडवांस्ड हेल्थकेयर फैसिलिटीज़ का विस्तार हो रहा है। यहाँ एडवांस न्यूरो-साइन्स सेंटर, एडवांस मदर एंड चाइल्ड सेंटर और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक, ये प्रोजेक्ट्स लाखों लोगों को इलाज की और बेहतर सुविधा देंगे। मुझे याद है, 2015 में, मैं चंडीगढ़ PGI के दीक्षांत समारोह में आया था। और मुझे खुशी है कि आज मुझे वर्चुअली भी वहां के सब पुराने साथियों से मिलने का अवसर मिल रहा है। तब से अब तक इस दशक में PGI की क्षमताओं में बड़ा विस्तार हुआ है। मैं PGI चंडीगढ़ के मैनेजमेंट की, यहाँ के प्रोफेसर्स और युवा डॉक्टर्स की सराहना करता हूं, उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जब हम स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो हम सब जानते हैं कि इसमें स्वच्छता की कितनी बड़ी भूमिका है और इसलिए जब हमारी सरकार बनी थी, तब हमने देश के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ लॉन्च किया था। देश में करोड़ों शौचालय बनाए गए, भारत को खुले में शौच से मुक्त कराया गया, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता के लिए अभियान चलाये गए, सफाई हमारी जीवनशैली का हिस्सा बने, इसके लिए अलग-अलग initiatives शुरू किए गए। हमारे शहरों की स्वच्छ भारत रैंकिंग इसी प्रयास का हिस्सा है और चंडीगढ़ इसमें बेहतर प्रदर्शन का प्रयास भी करता रहता है।

साथियों,

मैं आज चंडीगढ़ के रिटायर्ड IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की भी सराहना करना चाहूँगा। उनकी पहचान ‘ब्रूम वारीयर’ की बनी हुई है। उन्होंने चंडीगढ़ में स्वच्छता को लेकर एक नई अलख जगाई है, लोगों को प्रेरित किया है। इसके लिए हमारी सरकार ने उन्हें इस साल पद्म सम्मान से भी सम्मानित किया है।

साथियों,

स्वच्छता कोई एक दिन का काम नहीं है, स्वच्छता तो जीवन जीने का तरीका है। और मुझे खुशी है कि स्वच्छता को आज के इस कार्यक्रम से भी जोड़ा गया। आज यहां स्वच्छता से स्वागत, इस पहल के तहत विशेष सफाई अभियान चलाया गया। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में सारे लीडर लोग भी और जनता जनार्दन भी सफाई के काम में लगी थी। देश के अंदर एक खुशी का माहौल था, इन सारी चीजों को देखकर के। चंडीगढ़ के सभी भाई-बहनों को मैं इसके, इस पहल के लिए व्यक्तिगत रूप से बड़े गर्व के साथ आप सबको बधाई देता हूं।

साथियों,

स्वच्छता के ऐसे अभियान देश में अनेक रोगों की रोकथाम में बहुत मददगार साबित हुए हैं।

साथियों,    

एक समय था, भारत के हेल्थ सेक्टर पर पूरी दुनिया चिंता जताती थी। किसी बड़ी आपदा का अंदेशा होता था, तो लोग सवाल उठाने लगते थे कि भारत में क्या होगा? कोरोना के समय में हमने देखा है कि कैसे भारत ही विश्व की चिंताओं का केंद्र था। लेकिन हमारी सरकार ने भारत का सामर्थ्य भी बदला और विश्व का नजरिया भी बदला। जब कोरोना महामारी आई, तो भारत मदद मांगने वाला देश नहीं था, बल्कि भारत दुनिया को मदद भेज रहा था। आज कितने ही देशों से लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भारत आते हैं। भारत मेडिकल टूरिज़्म का बड़ा डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है।

साथियों,

ये बदलाव पिछले 12 वर्षों की ईमानदार कोशिशों और नीतियों का परिणाम है। 12 साल पहले हमने संकल्प लिया था, हमारे देश के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में नहीं जियेंगे, हमारे देश के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिलेगी और कम कीमत में मिलेंगी। पिछले 12 वर्षों की देश की सफलता इसी संकल्प का परिणाम है। बीते वर्षों में भारत ने अपने हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया है। 2014 के बाद देश में 15 नए AIIMS को मंजूरी दी गई है। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में नए AIIMS काम कर रहे हैं। देशभर में सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए speciality hospitals की संख्या भी बढ़ी है। यहाँ चंडीगढ़ में भी, होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल बना है, यहां से थोड़ी दूरी पर। 2022 में मुझे इसके लोकार्पण का अवसर मिला था। आज ये हॉस्पिटल हजारों मरीजों की सेवा कर रहा है। 

साथियों,

गाँव-गाँव में प्राइमरी हेल्थकेयर सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हर स्तर पर हेल्थ सिस्टम मजबूत हो, इसके लिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स और पब्लिक हेल्थ यूनिट्स जैसी सुविधाओं का नेटवर्क तैयार हुआ है। आज शहरी और ग्रामीण इलाकों से लेकर जनजातीय क्षेत्रों तक देश में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी काम कर रहे हैं। आरोग्य मंदिरों में प्राइमरी इलाज की सुविधाएं तो हैं ही, साथ ही,12 अलग-अलग हेल्थ पैकेज सर्विस भी यहाँ मिल रही हैं। इनमें करोड़ों लोगों की ब्लड प्रेशर और ड़ायबिटीज़ जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग हुई है।

साथियों,

हमारी सरकार तकनीक के जरिए भी इलाज को सुगम बना रही है। हमने ई-संजीवनी मिशन के जरिए telemedicine की सुविधा शुरू की। इसके तहत आज देश में 48 करोड़ से ज्यादा telemedicine consultations हो चुके हैं। दूर-सुदूर इलाकों से भी लोग बड़े अस्पतालों से, डॉक्टर्स से परामर्श कर रहे हैं।

साथियों,

स्वास्थ्य सेवाओं के इस विस्तार की वजह से आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक institutional डिलीवरी हो रही हैं। हमारे यहाँ माता मृत्यु दर में 86 percent की कमी आई है। और शिशु मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट आई है।

साथियों,

बीमारियों के इलाज के साथ ही आज उतना ही फोकस Preventive Healthcare पर भी है। पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योगा, H.P.V. Vaccination, U-WIN प्लेटफॉर्म, ऐसे कई अहम प्रयासों के कारण करोड़ों लोगों का जीवन सुरक्षित हो रहा है।

साथियों,

हमने देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प भी लिया है। इसके लिए टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। जनभागीदारी के जरिए, जन-जन को जागरूक किया जा रहा है। समय से टीबी की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इसी का परिणाम है, आज देश में टीबी का ट्रीटमेंट कवरेज 90 percent से ज्यादा हो गया है। पिछले साल आई WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 10 वर्षो के भीतर-भीतर टीबी संक्रमण भी इक्कीस प्रतिशत कम हुआ है। इन प्रयासों का सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब को हो रहा है, इसका लाभ हमारे मिडिल क्लास को हो रहा है और ज्यादा लाभ हमारी माताओं-बहनों को हो रहा है। क्योंकि माताएं-बहनें परिवार के काम को प्राथमिकता देती हैं। बीमारी को सहन करना ये माताओं-बहनों ने जैसे अपना एक संस्कार बना दिया है। लेकिन यह प्रोएक्टिव प्रयासों के कारण माताओं-बहनों का स्क्रीनिंग हुआ, उनकी देखभाल की गई और आज टीबी मुक्त होने में हमारी माताओं-बहनों की संख्या बड़ी है। भारत में हेल्थ सर्विसेस अब प्रिविलेज नहीं, आज हेल्थ सर्विसेस देश के सामान्य नागरिक का अधिकार बन रही हैं।

साथियों,

हेल्थ सेक्टर पर सरकार के फोकस का बहुत बड़ा लाभ भारत के युवाओं को भी हुआ है। हमारे युवा डॉक्टर्स इस बात से परिचित होंगे, पहले डॉक्टर बनने का सपना कितना मुश्किल होता था, युवाओं को डॉक्टर बनने के पर्याप्त मौके ही नहीं मिलते थे, क्योंकि मेडिकल सीटों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या बेहद कम थी। हमने इस परिस्थिति को भी बदला है। आज देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। MBBS और Post Graduate सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। और, अब तो चंडीगढ़ PGI में भी MBBS कॉलेज को मंजूरी दे दी गई है। जल्द ही यहां भी एडमिशन शुरू हो जाएंगे। इससे देश के कितने प्रतिभाशाली युवाओं को ऐसे टॉप इंस्टीट्यूट में पढ़ने का मौका मिलेगा। देश को बड़ी संख्या में बेस्ट डॉक्टर्स मिलेंगे।

साथियों,

चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है, जहां एजुकेशन, इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंस और रिसर्च से जुड़े बड़े संस्थान एक साथ मौजूद हैं। बहुत कम शहरों के पास ऐसा सामर्थ्य होता है। आने वाले समय में यही संस्थान नई टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, स्टार्टअप्स और इनोवेशन के बड़े केंद्र बन सकते हैं। आज एजुकेशन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी इस यात्रा को नई गति दे रही हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल एंड मेस का उद्घाटन हुआ है। सेक्टर-46 के गवर्नमेंट कॉलेज के लिए नया हॉस्टल भी तैयार हुआ है। रिसर्च स्कॉलर्स हॉस्टल की नींव भी रखी गई है। हमारा प्रयास है कि हमारे युवाओं को रिसर्च के लिए बेहतर लैब्स, बेहतर फैकल्टी मिले। जब रिसर्च का माहौल मजबूत होगा, तब इनोवेशन भी तेज होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डीप-टेक, ऐसी सभी टेक्नोलॉजी में हमें भारत को आगे लेकर जाना है। मुझे पूरा विश्वास है कि चंडीगढ़ के एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स, यहां के शिक्षक और यहां के युवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

साथियों,

इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का रोडमैप होता है। इसलिए, पहली बार देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को holistic approach के साथ विकसित किया जा रहा है। आज चंडीगढ़ में कनेक्टिविटी को लेकर भी कई शुभारंभ हुए हैं। आईटी सिटी से कुराली तक छह लेन वाले ग्रीनफील्ड हाईवे का उद्घाटन हुआ है। इससे एयरपोर्ट रोड पर दबाव कम होगा, मोहाली और खरड़ के लोगों को जाम से राहत मिलेगी। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड हाईवे से ‘पी.आर. सेवन स्पर’ इसकी आधारशिला भी रखी गई है। ऐसे सभी विकास कार्यों से उद्योग और कारोबार को गति मिलेगी। हमारे चंडीगढ़ में Ease of Living और बेहतर होगी।

साथियों,

रीजनल कनेक्टिविटी पर फोकस बढ़ाते हुए, आज जालंधर में रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स का भी लोकार्पण होने वाला है। इसका लाभ पंजाब के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र को होगा। साथ ही, आज हरियाणा के जींद से, जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी शुरू हुई है। क्लीन फ्यूल पर चलने वाली ये ट्रेन एक बहुत बड़ी शुरुआत है। मैं इसके लिए भी आप सभी को और देशवासियों को बधाई देता हूँ।

साथियों,

विकसित भारत की यात्रा में हमें फ्यूचर की टेक्नोलॉजी पर, फ्यूचर के ट्रांसपोर्टेशन पर और फ्यूचर की हेल्थ सर्विसेस पर, इसी आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ना है। हमें ऐसे फैसले लेने हैं, जिनका लाभ वर्तमान पीढ़ी को तो मिले ही मिले, आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता रहे। हमें ऐसे संस्थान बनाने हैं, जो समय के साथ और मजबूत हो जाएं। बीजेपी-एनडीए सरकार, इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मैं चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और इस पूरे क्षेत्र के लोगों को इन नई परियोजनाओं के लिए फिर से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।   


कुल मिला कर यह एक यादगारी आयोजन रहा। स्थानीय लोगों ने भी बहुत बढ़चढ़ कर और उत्साह से इस में भाग लिया। 

*******//MJPS/SS/ST/RK//(रिलीज़ आईडी: 2285778) 

Monday, July 06, 2026

पुनर्वास आवश्यक है, विकल्प नहीं:

हर व्यक्ति के बेहतर जीवन की दिशा में पीएमआर की भूमिका

राष्ट्रीय पीएमआर दिवस पर विशेष: 6 जुलाई, 2026: 

पीजीआई में डॉ. सौम्या सक्सेना के आधारित कार्तिका कल्याणी सिंह पंजाब स्क्रीन की विशेष प्रस्तुति -::

आज के आधुनिक चिकित्सा युग में उपचार का उद्देश्य केवल बीमारी को ठीक करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को फिर से सक्रिय, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने योग्य बनाना भी है। यही कार्य *फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) या पुनर्वास चिकित्सा का मूल उद्देश्य है। इस वर्ष राष्ट्रीय पीएमआर दिवस का विषय “रेहाबिलिटेशन इज एसेन्शियल, नॉट ऑप्शनल” इस संदेश को और अधिक सशक्त बनाता है कि पुनर्वास कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि समग्र उपचार का अनिवार्य अंग है। 

आधुनिक चिकित्सा में पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) को अब उपचार के बाद की वैकल्पिक सुविधा नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य सेवा का अनिवार्य हिस्सा माना जा रहा है। राष्ट्रीय फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) दिवस के अवसर पर पीजीआई, चंडीगढ़ के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. सौम्या सक्सेना ने कहा कि समय पर पुनर्वास न केवल व्यक्ति की कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ाता है, बल्कि उसे पुनः सम्मानजनक एवं सक्रिय जीवन जीने में भी सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय पीएमआर दिवस की थीम ‘पुनर्वास आवश्यक है, विकल्प नहीं’ समाज में इसी संदेश को सशक्त बनाने का प्रयास है।

 बीमारी से आगे, व्यक्ति को देखने की चिकित्सा 

पीएमआर केवल रोग का उपचार नहीं करता, बल्कि व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखता है। यह चिकित्सा पद्धति विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) के इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ फंक्शनिंग, डिसेबिलिटी एंड हेल्थ (आई सी ऍफ़) मॉडल पर आधारित है, जिसे बायोप्साइकोसोशल मॉडल भी कहा जाता है।

अर्थात, किसी व्यक्ति की बीमारी का प्रभाव उसके शरीर, मानसिक स्थिति, पारिवारिक जीवन, सामाजिक भागीदारी और कार्यक्षमता पर किस प्रकार पड़ रहा है, इसका समग्र मूल्यांकन कर उपचार एवं पुनर्वास की योजना बनाई जाती है। यही कारण है कि पीएमआर रोग नहीं, बल्कि पूरे व्यक्ति और उसकी जीवन-परिस्थितियों को केंद्र में रखकर कार्य करता है।


 कब आवश्यक होती है पुनर्वास चिकित्सा? 

पुनर्वास की आवश्यकता केवल दिव्यांग व्यक्तियों तक सीमित नहीं है। किसी भी ऐसी स्थिति में, जहाँ दर्द, कमजोरी, चलने-फिरने, दैनिक कार्यों या सामाजिक सहभागिता में बाधा उत्पन्न हो, पीएमआर विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 इससे लाभान्वित होने वाले प्रमुख रोगों एवं स्थितियों में शामिल— 

* स्ट्रोक एवं मस्तिष्क की चोट

* स्पाइनल कॉर्ड इंजरी

* सेरेब्रल पाल्सी एवं बच्चों की विकास संबंधी समस्याएँ

* ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर

* न्यूरोमस्कुलर विकार

* गठिया एवं जोड़ों के रोग

* कमर और गर्दन का दर्द

* खेल चोटें                                            

* अंग विच्छेदन एवं कृत्रिम अंग पुनर्वास

* वृद्धावस्था में चलने-फिरने और संतुलन की समस्याएँ

* ऑपरेशन के बाद पुनर्वास

* दीर्घकालिक दर्द एवं अन्य पुरानी बीमारियाँ

प्रारम्भिक पुनर्वास से बेहतर परिणाम 

वैज्ञानिक अध्ययनों से स्पष्ट है कि यदि बीमारी या चोट के शुरुआती चरण में ही पुनर्वास प्रारम्भ कर दिया जाए, तो कार्यक्षमता में सुधार, जटिलताओं में कमी तथा जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होती है।

समय पर पुनर्वास से— 

* दर्द एवं विकलांगता कम होती है,

* बेड सोर, कॉन्ट्रैक्चर और गिरने जैसी जटिलताओं की रोकथाम होती है,

* अस्पताल में रहने की अवधि घट सकती है,

* व्यक्ति शीघ्र अपने परिवार, समाज और कार्यस्थल से पुनः जुड़ पाता है,

* आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

आधुनिक तकनीक बदल रही है पुनर्वास का स्वरूप 

आज पुनर्वास चिकित्सा में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। रोबोटिक रिहैबिलिटेशन, कंप्यूटर आधारित गेट एवं मोशन एनालिसिस, एक्सोस्केलेटन सहायता प्राप्त चाल प्रशिक्षण, मायोइलेक्ट्रिक एवं बायोनिक कृत्रिम अंग, वर्चुअल रियलिटी और स्मार्ट पुनर्वास उपकरणों ने उपचार को अधिक प्रभावी और सटीक बनाया है।

इन तकनीकों की सहायता से मरीजों की कार्यक्षमता, संतुलन, गतिशीलता और स्वतंत्र जीवन जीने की क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार संभव हो रहा है।

दिव्यांगता की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण योगदान 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, उचित समय पर उपचार एवं पुनर्वास के माध्यम से अनेक मामलों में विकलांगता की गंभीरता को कम किया जा सकता है। पुनर्वास व्यक्ति को केवल बीमारी के बाद संभालने का माध्यम नहीं, बल्कि जटिलताओं और दीर्घकालिक निर्भरता को रोकने का भी सशक्त साधन है।

वृद्धजन और पुनर्वास 

बढ़ती आयु के साथ उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गठिया, कमर दर्द, सुनने की कमी और संतुलन संबंधी समस्याएँ सामान्य हो जाती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलन प्रशिक्षण, मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम तथा समुचित पुनर्वास कार्यक्रम वृद्धजनों को स्वतंत्र और सक्रिय जीवन बनाए रखने में सहायता करते हैं। अच्छी संतुलन क्षमता के लिए शरीर के विभिन्न तंत्रों का समन्वय अत्यंत आवश्यक होता है, और पीएमआर इस दिशा में वैज्ञानिक एवं व्यक्तिगत समाधान प्रदान करता है।

 पुनर्वास: मानव अधिकार और सामाजिक आवश्यकता 

डॉ. सौम्या सक्सेना ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) को उपचार के बाद की वैकल्पिक सुविधा नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य सेवा के अनिवार्य अंग के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी, दुर्घटना या शारीरिक अक्षमता के बाद व्यक्ति को पुनः कार्यक्षम, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने योग्य बनाना ही पुनर्वास चिकित्सा का प्रमुख उद्देश्य है। डॉ. सक्सेना के अनुसार, इस वर्ष राष्ट्रीय पीएमआर दिवस की थीम ‘पुनर्वास आवश्यक है, विकल्प नहीं’ इस बात का संदेश देती है कि उपचार तभी पूर्ण माना जा सकता है, जब व्यक्ति को उसकी अधिकतम कार्यक्षमता प्राप्त करने और परिवार तथा समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए आवश्यक पुनर्वास सेवाएँ समय पर उपलब्ध कराई जाएँ।

आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज पुनर्वास को विलासिता या विकल्प के रूप में न देखकर, एक मूलभूत स्वास्थ्य सेवा के रूप में स्वीकार करे। प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाओं तक पहुँच मिलनी चाहिए, जिससे वह अपनी अधिकतम क्षमता प्राप्त कर सके और सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।

राष्ट्रीय पीएमआर दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि “रेहाबिलिटेशन इज एसेन्शियल, नॉट ऑप्शनल”          "(Rehabilitation is Essential, Not Optional)”—पुनर्वास आवश्यक है, विकल्प नहीं। उपचार तभी पूर्ण माना जा सकता है, जब व्यक्ति को पुनः कार्यक्षम, आत्मनिर्भर और समाज का सक्रिय सदस्य बनने में सहायता मिले।

पुनर्वास केवल स्वास्थ्य लाभ नहीं, बल्कि बेहतर कल, अधिक आत्मनिर्भरता और गरिमापूर्ण जीवन की आधारशिला है।

Monday, June 15, 2026

वेणी प्रसाद जी की कला आज भी चमत्कार दिखाती है

On 14th June 2026 Regarding Medical Camp at Dhanwantri Garden Ludhiana 14 जून 2026 को धन्वंतरि गार्डन लुधियाना में मेडिकल कैंप के बारे में

डॉ. विश्व विजय शर्मा आज भी अनगिनत मरीज़ों का इलाज करते हैं


लुधियाना: 15 जून 2026: (मनप्रीत सिंह//मीडिया लिंक 32//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

यह कुछ दशक पुरानी बात है। कत्लेआम की आग के बावजूद पंजाब में सहनशीलता बनी रही। एक समुदाय के यात्रियों को बसों से निकालकर मारने की अमानवीय घटनाओं के बावजूद समाज में शांति और भाईचारा बना रहा। इतना ही नहीं, शाम को कुछ साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होने लगे। PAU स्टूडेंट्स होम थोड़ी दूर था, इसलिए ऐसे कुछ कार्यक्रम ओल्ड कोर्ट चौक के पास एक्सटेंशन लाइब्रेरी में होते थे। इन कार्यक्रमों में होने वाले कार्यक्रमों में विश्व भाईचारे की भावना भी साफ़ दिखती थी।

मंच संचालन के दौरान हिंदी, पंजाबी और उर्दू का मिला-जुला रंग भी महसूस होता था। स्टेज से होने वाले अनाउंसमेंट के बीच कविता और शायरी का भी रंग होता था। शायद ऐसे प्रोग्राम अब भी होते होंगे, लेकिन मुझे बहुत समय से पता नहीं है। शायद किसी ने मुझे बुलाया ही नहीं।

आज जिस प्रोग्राम की याद मैं शेयर कर रहा हूँ, उसमें मशहूर लेखक और जानकार डॉ. ज्ञान सिंह मान भी थे, जिनकी तांत्रिक के तौर पर भी शोहरत आसमान छू रही थी। इन इवेंट्स में औरतें भी बड़ी संख्या में शामिल होती थीं।

इस मौके पर मशहूर डॉ. वेणी प्रसाद जी भी मौजूद थे, जिनके परिवार का अस्पताल आज भी टैगोर नगर, धन्वंतरि गार्डन में बहुत मशहूर जगह है। शारीरिक और मानसिक बीमारियों से परेशान लोग आज भी यहाँ ज़रूर पहुँचते हैं। इस स्थान पर कई बीमारियों का इलाज मौजूद है, लेकिन सांस और अस्थमा के मरीज़ बहुत ज़्यादा हैं - कभी-कभी एक दिन के फिक्स कैंप में कुछ हज़ार मरीज़। मरीज़ आते और डॉ. साहब अपने असिस्टेंट और दोस्त बस्सी साहब के साथ उन्हें दवा का एक पैकेट या दो-तीन कैप्सूल देते और आँखें बंद करके कुछ ऐसा मंत्र पढ़ते...!

मैंने पूछा भी कि यह कौन सा मंत्र है जो आप बिना आवाज़ ऊंची किए पढ़ते हैं...? उन्होंने मुस्कुराकर मेरा सवाल टाल दिया...! जब मैंने पूछा कि आप किसी की बीमारी के बारे में पूछते भी नहीं हैं और बस दवा दे देते हैं,तब भी वह सिर्फ़ मुस्कुराए लेकिन उनके साथ खड़े मिस्टर MP बस्सी ने कहा कि यह खास दवा डॉक्टर साहब का बहुत पुराना और खास राज़ है। बल्कि यूं कहें कि यह उनके पिता माननीय कविराज वेणी प्रसाद जी का राज़ है, जिसका फ़ायदा लाखों-करोड़ों लोगों ने उठाया है। 

आज भी कुछ हज़ार मरीज़ डॉक्टर विश्व विजय शर्मा के पास दवा लेने आए थे। मिस्टर MP बस्सी भी डॉक्टर विश्व विजय शर्मा के पड़ोसी हैं और बैंक से रिटायर हो चुके हैं। दोनों दोस्तों के बीच इतना प्यार है कि दोनों दिन का ज़्यादातर समय साथ बिताते हैं। बस्सी साहब डॉक्टर साहब के मरीज़ों को देखते हैं और इलाज में डॉक्टर साहब के असिस्टेंट का रोल बड़ी ज़िम्मेदारी से निभाते हैं।

असल में, अपने पिता कविराज श्री वेणी प्रसाद की तरह अब उनके बेटे डॉक्टर विश्व विजय शर्मा जी में भी सिर्फ़ चेहरा देखकर बीमारी का पता लगाने की चमत्कारी काबिलियत है। लोग उन्हें कोई चमत्कारी बाबा कहते हैं। वे बिना कुछ पूछे लोगों का बहुत कामयाबी से इलाज करते हैं। कविराज वेणी प्रसाद जी से मिली हुई शिक्षा उनके बेटे के ज़रिये शिक्षा आज भी फल-फूल रही है। चमत्कार आज भी नज़र आते हैं। लोग बीमारी का दुःख लेकर आते हैं लेकिन सुखी हो कर वापिस जाते हैं। 

14 जून को हुए कैंप का भी कई लोगों ने फ़ायदा उठाया और अब दूसरा स्पेशल कैंप 20 जुलाई, 2026 को और तीसरा कैंप 23 नवंबर से 27 नवंबर, 2026 तक लगाया जाएगा।

Wednesday, April 15, 2026

त्योहारों के अवसर पर किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया

प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 15 APR 2026 at 7:58 AM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया 

नई दिल्ली: 15 अप्रैल 2026: (PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन डैस्क)::

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उमंग और उल्लास से भरे अवसरों पर राष्ट्र उन मेहनती किसान भाइयों और बहनों के प्रति कृतज्ञ है, जो पूरे देश का भरण-पोषण करते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“इत्थं फलति शुद्धेन सिक्तं सङ्कल्पवारिणा।

पुण्यबीजमपि स्वल्पं पुंसां कृषिकृतामिव॥”

इस सुभाषितम् का अर्थ है कि जिस प्रकार किसान द्वारा बोया गया एक छोटा सा बीज, यदि उचित समय पर जल से सींचा जाए तो समय के साथ भरपूर फसल देता है, उसी प्रकार शुद्ध संकल्पों के साथ किया गया छोटा सा प्रयास भी मनुष्य को महान सफलता प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स(X) पर लिखा;

“देश के अलग-अलग हिस्सों में अभी कई पर्व-त्योहार मनाए गए हैं। उमंग और उल्लास से भरे इन अवसरों के लिए हम अपने परिश्रमी किसान भाई-बहनों के कृतज्ञ हैं, जो पूरे देश का पोषण करते हैं।

इत्थं फलति शुद्धेन सिक्तं सङ्कल्पवारिणा।

पुण्यबीजमपि स्वल्पं पुंसां कृषिकृतामिव॥”

***//पीके/केसी/पीकेपी//(रिलीज़ आईडी: 2252032)

Saturday, March 21, 2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बात की

प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 21 MAR 2026 at 4:26 PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री ने ईद और नवरोज़ की शुभकामनाएँ दीं; क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर ज़ोर दिया

नई दिल्ली: 21 मार्च 2026:(PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन डैस्क)::

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज इस्लामिक गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन से बात की। उन्होंने क्षेत्रीय घटनाक्रमों और द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत बनाने पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन को ईद और नवरोज़ के शुभ अवसरों पर हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। चर्चा के दौरान, दोनों नेताओं ने  उम्मीद व्यक्त की कि यह त्योहारी मौसम पश्चिम एशियाई क्षेत्र के लिए शांति, स्थिरता और समृद्धि का दौर लेकर आएगा। श्री मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे पर हाल ही में हुए हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और महत्वपूर्ण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं। प्रधानमंत्री ने नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के अत्यधिक महत्व को दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग खुले और सुरक्षित रहें। इसके अलावा, श्री मोदी ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने में ईरान के निरंतर समर्थन के लिए हार्दिक सराहना व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने X पर लिखा:

"राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन से बात की और ईद तथा नवरोज़ की शुभकामनाएँ दीं। हमने उम्मीद ज़ाहिर की कि यह त्योहारी मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाएगा।

क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे पर हुए हमलों की निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं।

नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया कि शिपिंग मार्ग खुले और सुरक्षित रहें।

ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए ईरान के निरंतर समर्थन की सराहना की।"

*******//पीके/केसी/पीके//(रिलीज़ आईडी: 2243383) 

Monday, February 23, 2026

एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज, लुधियाना में पुस्तक का विमोचन

BB Goel on 23rd February 2026 at 05:28 PM Regarding Book Release

 अंग्रेजी कवि प्रो. अशोक कपूर ने लिखी है यह पुस्तक 


लुधियाना23 फरवरी 2026: (ब्रिज भूषण गोयल// पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

कविता जीवितों की आवाज़ है। इसी तरह के साहित्यिक विचारों को प्रोत्साहित करते हुएएससीडी गवर्नमेंट कॉलेज लुधियाना ने प्रोफेसर अशोक कपूर द्वारा लिखित कविताओं का एक बहुत ही गहन संग्रह 'सैलीज़ ऑफ़ सर्रियल शेड्सका विमोचन किया। प्रोफेसर कपूर जो 1960 के दशक की शुरुआत में एक पूर्व छात्र थेअब अपने अस्सी के दशक में हैं। प्रोफेसर कपूर ने अपने तत्कालीन सहपाठियों के साथ-साथ कॉलेज के अपने छात्रों को भी आमंत्रित किया जहां उन्होंने 30 वर्षों तक पढ़ाया। प्रिंसिपल गुरशरणजीत सिंह संधू ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि कॉलेज को हमेशा प्रोफेसर कपूर जैसे पूर्व छात्र शिक्षकों से प्रेरणा की आवश्यकता होती है। इस अवसर पर पूर्व छात्र प्रो. सागर चंद जैनहरीश कौरामंजुला जैनप्रोफेसर राजिंदर जैननवदीप सिंहओपी वर्मामनप्रीत सिंहप्रोफेसर विजय असधीर और पूर्व छात्र संघ के संगठन आयोजन सचिव बृज भूषण गोयल मौजूद थे प्रोफेसर अमिता थम्मन और दूसरे शिक्षक जैसे प्रोफेसर हरमीत कौरप्रोफेसर प्रीति खन्नाप्रोफेसर गुरजीतप्रोफेसर अतिंदर पांडेप्रोफेसर सूरज कुमारप्रोफेसर सारिका और प्रोफेसर गीतांजलि पबरेजा भी इस सेरेमनी में शामिल हुए। इस मौके पर प्रोफेसर कपूर ने अपनी कविता ‘कॉलेज के दिनों की यादें’ सुनाई। उन्होंने कॉलेज के स्टूडेंट्स के लिए कॉम्पिटिशन बुक्स खरीदने के लिए बीस हजार की रकम भी डोनेट की।

गोयल ने कहा कि प्रोफेसर कपूर की क्रिएटिव कविता से स्टूडेंट्स को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। प्रोफेसर पीके शर्मा ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी को क्रिएटिव कामों के ऐसे सेलिब्रेशन में शामिल होना चाहिए। ओपी वर्मा ने एल्युमनाई को सम्मानित करने के लिए कॉलेज मैनेजमेंट को धन्यवाद दिया। किताब का फॉरवर्ड लिखने वाले ब्रिटिश काउंसिल के पूर्व स्कॉलर डॉ. सतीश के. कपूर ने कहा, “प्रोफेसर कपूर की कविताएं एनर्जी से भरी हैंउनके शब्द नाचते हैंऊंचाइयों तक जाते हैं और हमें अंदर की जागृति की पुकार के साथ प्रकृति से जोड़ते हैं।”

बृज भूषण गोयल , आयोजन सचिव एलुमनाई एसोसिएशन, SCD गवर्नमेंट कॉलेजलुधियाना 9878790866