Saturday, April 10, 2021

पंजाब में गेहूँ की खरीद शुरू//आढ़तियों द्वारा हड़ताल ख़त्म

10th April 2021, at 5:45 PM

पंजाब ने फिर किया केंद्र की चुनौती का सामना 


लुधियाना:10 अप्रैल 2021: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के भरोसे के बाद आढ़तियों द्वारा अपनी प्रस्तावित हड़ताल ख़त्म कर देने से पंजाब में आज गेहूँ की खरीद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने खरीद प्रक्रिया में आढ़तियों की निरंतर सम्मिलन को सुनिश्चित बनाने और 131 करोड़ रुपए की बकाया राशि की एफ.सी.आई. से अदायगी होने का इन्तज़ार किए बिना तुरंत जारी करने समेत कई और कदम उठाने के हुक्म दिए हैं।

मुख्यमंत्री के आदेशों पर राज्य के खाद्य एवं सिविल आपूर्ति विभाग ने खरीद सम्बन्धी सॉफ्टवेयर में संशोधन कर दिया है, जिससे किसानों को फ़सल की अदायगी जारी करने की प्रक्रिया में आढ़तियों का सम्मिलन सुधारे गए रूप में ही सही, बनी ज़रूर रहेगी, जबकि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समय के अनुसार किसानों को 48 घंटों में उनके बैंक खातों में अदायगी मिल जाएगी। 

पंजाब के आढ़तियों के हितों की रक्षा के लिए अपनी स्पष्ट वचनबद्धता का ऐलान करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि आढ़तियों को न्युनतम समर्थन मूल्य से बाहर रखने संबंधी भारत सरकार के निर्देशों के बावजूद वह खरीद प्रक्रिया के साथ हमेशा जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक मैं यहाँ हूँ, आप व्यवस्था का हिस्सा बने रहोगे और आपकी भूमिका हमेशा कायम रहेगी।’’ उन्होंने कहा कि वह यकीन दिलाते हैं कि ए.पी.एम.सी. एक्ट के अंतर्गत आढ़तिया कमीशन और अन्य लागतें जारी रहेंगी।

भारत सरकार द्वारा सीधी अदायगी की प्रणाली को मुलतवी करने के लिए राज्य सरकार की अपील को मानने से इनकार कर देने पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हमने केंद्र से सख़्त लड़ाई लड़ी, परन्तु वह अड़े रहे और यहाँ तक कि सीधी अदायगी की प्रणाली को लागू न करने की सूरत में पंजाब से खरीद न करने की धमकी देने तक गए।’’

मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को 131 करोड़ रुपए की बकाया राशि भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) का इन्तज़ार किए बिना तुरंत जारी करने के हुक्म दिए, क्योंकि कुछ आढ़तियों द्वारा विवरण अपलोड न करने के कारण एफ.सी.आई. ने यह राशि रोकी थी। उन्होंने कहा कि इन आढ़तियों को उस समय पर शायद ऐसे लोगों ने रोक दिया हो, जो राजनीति खेलना चाहते हों। उन्होंने कहा कि चाहे कि एफ.सी.आई. से यह राशि अभी आनी है परन्तु उनकी सरकार इसका इन्तज़ार किए बिना तुरंत जारी करेगी। मुख्यमंत्री ने आढ़तियों को भरोसा दिया कि उनकी सरकार एफ.सी.आई. द्वारा लेबर की अदायगी में 30 प्रतिशत की कटौती का मुद्दा केंद्र सरकार के पास उठाएगी।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने फेडरेशन ऑफ आढ़तिया एसोसिएशन ऑफ पंजाब के प्रधान विजय कालड़ा का उनकी सरकार द्वारा संभावित हड़ताल वापस लेने सम्बन्धी की गई अपील को मानने और अनाज की लिफ्टिंग करने के लिए धन्यवाद किया, नहीं तो किसानों को नुकसान बर्दाश्त करना पड़ता। उन्होंने आढ़तियों से अपील करते हुए तुरंत ही खऱीद शुरू करने और कोविड सम्बन्धी नियमों का पालन करने के लिए कहा। मौजूदा वर्ष कोविड-19 के दूसरे दौर के कारण सरकार को पहले निर्धारित 1 अप्रैल की जगह पर खऱीद प्रक्रिया 10 अप्रैल तक मुलतवी करनी पड़ी थी।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष भी बीते वर्ष की तरह किसानों को पास जारी किए जाएंगे, जिससे कोविड महामारी की स्थिति को देखते हुए मंडियों में भीड़ घटाई जा सके। उन्होंने यकीन दिलाया कि किसानों को पास जि़ला स्तर पर आढ़तियों से विचार-विमर्श के बाद जारी किए जाएंगे, क्योंकि आढ़तियों को यह अच्छी तरह पता है कि कौन से किसान ने अपनी फ़सल की कटाई कर ली है और वह मंडी में आने के लिए तैयार है।

आढ़तियों के दुख-दर्द को साझा करते हुए, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि वह दिल की गहराईयों से इसको महसूस करते हैं, मुख्यमंत्री का कहना था कि उनको यह समझ नहीं आ रहा कि केंद्र सरकार उन (आढ़तियों) और किसानों के साथ ऐसा बुरा सलूक क्यों कर रही है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि आढ़तिया प्रणाली तब भी चलती थी जब वह छोटे थे और अपने दादा जी के साथ मंडियों में जाते थे। उन्होंने आगे कहा कि यह बात समझ से बाहर है कि भारत सरकार इस प्रणाली को बर्बाद करने पर क्यों तुली हुई है, क्योंकि आढ़तिये कोई बिचौलियागिरी नहीं करते बल्कि सेवाएं प्रदान करते हैं और निजी क्षेत्र का कामकाज मौजूदा प्रणाली के साथ चल सकता है, इसलिए मौजूदा प्रणाली को बदले जाने की कोई ज़रूरत नहीं है।

किसानों की आमदनी में 72 प्रतिशत वृद्धि का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने इसका सेहरा किसानों और आढ़तियों द्वारा मिलकर किए जाने वाले सहृदय यत्नों के सिर बाँधा। उन्होंने आगे कहा, हरित क्रांति लाने में और भारत के अनाज भंडारों को पूरी तरह से भरने में आपके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आगे बताया कि वह केंद्र सरकार द्वारा कृषि सम्बन्धी उठाए जा रहे कदमों के साथ बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं और उन्होंने यह भरोसा दिया कि आढ़तियों के सभी अंदेशे दूर किए जाएंगे और उनके साथ किए गए सभी वादे पूरे किए जाएंगे।

हड़ताल वापस लेने को राज्य और इसके किसानों के हित में बताते हुए, विजय कालड़ा ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह और उनकी सरकार द्वारा केंद्र के साथ लड़ाई में आढ़तियों का साथ देने के लिए धन्यवाद किया। विजय कालड़ा ने आगे कहा कि केंद्र सरकार, किसान आंदोलन खड़ा करने के लिए पंजाब को सज़ा देने पर तुली हुई है। इस मौके पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री भारत भूषण आशु ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि आढ़तिये तो बस अपनी व्यापारिक गतिविधियों और रोज़ी-रोटी की सुरक्षा चाहते हैं।


Thursday, March 04, 2021

पंजाब में लगातार गंभीर है चाईल्डहुड कैंसर की समस्या

 Thursday: 4th March 2021 at 4:13 PM

सीएमसी अस्पताल की वर्कशाप में कई नए पहलू भी सामने आए 


लुधियाना
: 4 मार्च 2021: (पंजाब स्क्रीन)::

कैंसर के इलाज की बहुत सी सम्भावनायें खोज लिए जाने के बावजूद कैंसर का खतरा और भय अभी तक समाप्त नहीं किया जा सका। कैंसर से बचाव की चेतना जगाने के मकसद से आज सी एम सी अस्पताल में चाईल्डहुड कैंसर की समस्या को ले कर विशेष वर्कशाप का आयोजन हुआ। लुधियाना के सबसे पुराने मेडिकल संस्थान इस आयोजन के दौरान कैंसर समस्या पर जहां विचार विमर्श हुआ। 

यह वर्कशाप तीन घंटों तक चली तक। सिवल सृजन डाक्टर सुखजीवन ककड़ इस मौके पर मुख्य मेहमान थे। इस वर्कशॉप में यह बात उभर कर सामने आई कि बचपन में होने वाला कैंसर अभी भी एक गंभीर समस्या बना हुआ। है। इस वर्कशॉप के  सक्रिय भागीदारी का सहयोग  संस्थान CANKIDS KIDSCAN ने इस विषय पर बहुत कुछ बताया। इस संस्थान  दी गई जानकारी  विश्व में हर साल तीन लाख बच्चे कैंसर से प्रभावित होते हैं जो की बेहद चिंतनीय है। इनमें थोड़ा और विस्तार में जाएँ तो भारत में दुनिया के 25 फीसदी से अधिक बच्चे कैंसर से पीड़ित हैं।  वैसे तो देश में कैंसर के इलाज के लिए 200 से ज्यादा सेंटर हैं, मगर इन केंद्रों में महज 30 फीसदी बच्चे ही इलाज के लिए पहुंच पाते हैं। ऐसे बच्चों की बहुत बड़ी संख्या इस  सुविधाओं से वंचित ही रह जाती है। 

आज की वर्कशॉप में 10 आशा वर्करों, 10 ए एन एम वर्करों और आठ कम्युनिटी वर्करों ने शामिल हो कर इसका लाभ उठाया। क्रिश्चियन मेडिकल कालेज और अस्पताल  डायरेक्टर डाक्टर विलियम भट्टी  मुख्य मेहमान  पर शामिल हुए  डाक्टर सुखजीवन ककड़ को सुस्वागतम कहते हुए उनका अभिनंदन किया। 

इसके साथ ही डाक्टर भट्टी ने विस्तार से बताया कि किस तरह कैंसर की रोकथाम में सीएमसी अस्पताल निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सीएमसी अस्पताल की तरफ से स्वास्थ्य वर्करों को बहुत ही विशेष  ट्रेनिंग  है जिससे कैंसर के साथ लड़ी जा रही जंग में विजय प्राप्त करना आसान होने लगता है। इस ट्रेनिंग का फायदा पूरे समाज के हर वर्ग को पहुंचता है। 

इस अवसर पर मौजूद रहे सिवल सर्जन डाक्टर सुखजीवन कक्क्ड़ ने कैंसर की रोकथाम  लिए  रही सरकारी योजनाओं के संबंध में भी बताया। उन्होंने आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री  योजना का विशेष तौर पर उल्लेख किया। उन्होने कहा कि कैंसर केमरीज़ों को इससे बहुत फायदा पहुँच रहा है। उन्होंने भविष्य में आने वाली कुछ और योजनाओं के बारे में  भी संकेत दिया। रोगी केंद्रित इलाज इसी  होंगें। 

क्लिनिकल मैटोलॉजी विभाग के प्रमुख डाक्टर जोसेफ जॉन कि इस तरह की वर्कशॉप जैसे प्रयासों से सभी हैल्थ वर्करों के साथ एक मानवीय संबंध  भी बनता और मज़बूत होता है जो ऐसी बिमारियों के साथ चलती जंग  को जीतने में सहायक होता है। 

 इस वर्कशॉप में कैनकिडज़ से आये डाक्टर बलबीर ने कैनकिडज़ की तरफ से दी  सुविधाओं का भी विवरण दिया। क्लिनिकल मैटोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर प्रतिभा धीमान ने भी इस विषय पर बहुत ही अर्थपूर्ण बातें कहीं। (Input:Health and Fitness Screen)

Saturday, February 27, 2021

पंजाब पुलिस द्वारा एक नई ज़ोरदार पहल

 सभी जिलों में स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती केंद्र किये जाएंगे स्थापित 

चंडीगढ़: 26 फरवरी 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

पुलिस कर्मियों का स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती सबसे पहली प्राथमिकता रही है जिसके चलते पंजाब पुलिस की तरफ से राज्य के सभी जिलों समेत तीन पुलिस कमिशनरेटज़ (सी.पीज़) में पुलिस के लिए स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती केंद्र (एच.डबल्यू.सी.) स्थापित करने का फैसला किया गया है। यह केंद्र सभी हथियारबंद पुलिस और पुलिस प्रशिक्षण केन्द्रों में भी स्थापित किये जाने का प्रस्ताव है।

इन एच.डबल्यू.सी. में इन्डोर जिम, आउटडोर जिम, ध्यान और योगा के लिए जगह, फिजीओथैरेपी सैंटर और काउंसलिंग के लिए रूम होंगे जिससे पुलिस कर्मियों को स्वास्थ्य सम्बन्धी काउंसलिंग और उपयुक्त परामर्श प्रदान किया जा सके। 

डायरैक्टर जनरल आफ पुलिस (डी.जी.पी.) दिनकर गुप्ता ने जानकारी देते हुये कहा कि पुलिस कर्मियों की तरफ से तनावपूर्ण स्थितियों में काम करने से उनको थकावट, तनाव की समस्याएँ हो जातीं हैं जो बाद में स्वास्थ्य सम्बन्धी गंभीर मुद्दों का कारण बन सकती हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती केंद्र जहाँ पुलिस कर्मियों को अपनी शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती की तरफ ध्यान देने के प्रति उत्साहित करेंगे वहीं सेहतमंद जीवन के लिए उनको स्वास्थ्य सम्बन्धी उपयुक्त परामर्श प्रदान भी करेंगे।

पहले पड़ाव में एच.सी.डबल्यूज़ की स्थापना के लिए बजट में से 2.97 करोड़ रुपए की राशि पहले ही सी.पी. लुधियाना और सी.पी. अमृतसर समेत 15 जिलों को जारी कर दी गई है। डी.जी.पी. ने बताया कि अधिकतर केंद्र सी.पी. अमृतसर, जिला तरन तारन, मानसा और पठानकोट में बन कर तैयार हो गए हैं और मार्च के अर्ध तक कार्यशील होने की उम्मीद है जबकि बाकी केन्द्रों का निर्माण कार्य चल रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे सैंटर स्थापित करने के लिए दूसरे पड़ाव में बाकी जिले, आम्र्ड पुलिस और पुलिस प्रशिक्षण केन्द्रों में फंडों का वितरित किया जायेगा।

डीजीपी दिनकर गुप्ता ने आगे बताया कि स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती के प्रोग्रामों के आयोजन के लिए अगले वित्तीय साल से हर जिले के लिए 2 लाख रुपए सालाना राशि भी रखी गई है।

डीजीपी ने कहा कि स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती केन्द्रों में पाँच से सात दिनों के हैल्थ एंड वैलनैस प्रोग्राम मनोरोग माहिरों समेत स्वास्थ्य पेशेवरों के द्वारा करवाए जाएंगे जो बेहतर स्वास्थ्य के लिए पुलिस कर्मियों को जीवन-शैली में बदलाव लाने के लिए शारीरिक व्यायाम, पौष्टिक खुराक और काउंसलिंग की सिफारिश करेंगे। उन्होंने कहा कि फिजीओथैरेपी सैंटर पुलिस को आयु से सम्बन्धी मामूली दर्द और घुटनों, जोड़ों, कमर आदि में दर्द से राहत सम्बन्धित सहूलतें प्रदान करेंगे।

एडीजीपी वैलफेयर वी. नीरजा ने कहा कि सभी पुलिस कमीशनरों (सी.पीज़) और सीनियर कप्तान पुलिस को स्वास्थ्य एवं वैलनैस प्रोग्राम की जरूरत वाले पुलिस कर्मियों की पहचान करने के लिए एस.पी. मुख्यालय और मैडीकल अधिकारियों के साथ कमेटी का गठन करने की हिदायत कर दी गई है। यह कमेटी मासिक स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती प्रोग्राम तैयार करेगी और इनका आयोजन करवाएगी। इसके इलावा यह कमेटी यह भी यकीनी बनाऐगी कि जिले में तैनात सभी पुलिस कर्मियों को साल में कम से कम एक बार प्रोग्राम में शामिल होने का मौका मिल सके।

इस दौरान डीजीपी ने उम्मीद जाहिर की है कि एच.डबल्यू.सीज़ पुलिस कर्मियों के लिए सेहतमंद जीवन शैली अपनाने और उनको विभिन्न बीमारियों से बचा कर रखने के लिए सहायक साबित होंगे।

Wednesday, February 24, 2021

आठ मिसाइल सह गोला बारूद नौकाओं की खरीद

Wednesday:24th February, 2021 at 18:24 IST

भारतीय नौसेना का मैसर्स सीकोन, विशाखापट्टनम के साथ अनुबंध


नई दिल्ली
: 24 फरवरी 2021: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन):: 

जंग के खिलाफ पूरी दुनिया में बहुत कुछ लिखा गया है लेकिन जंग का माहौल समाप्त ही नहीं होता। रंगरूप बदल बदल कर जंग सामने आती रहती है। जब तक पूरी दुनिया में अमन, शांति और सौहार्द का माहौल नहीं बन जाता तब तक हथियारों और गोला बारूद की ज़रूरत बनी रहेगी। जब तक हथियार और गोला बारूद रहेंगे तब तक इन्हें लाने लेजाने की ज़रूरत भी रहेगी। इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए भारत एक बार फिर और सशक्त हुआ है।  

मैसर्स सीकोन (एसईसीओएन), विशाखापट्टनम के साथ 19 फरवरी 2021 को भारतीय नौसेना ने आठ मिसाइल सह गोला बारूद वाली नौकाओं के निर्माण के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इन नौकाओं की डिलिवरी 22 जुलाई से शुरू होने वाली है। इन नौकाओं का इस्तेमाल किसी भी मिशन पर मिसाइलों को लाने-ले जाने और गोला-बारूद की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। परियोजना भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल में एक और मील का पत्थर साबित होगी।



Tuesday, February 23, 2021

कोविड केस बढ़ने पर पंजाब में भी फिर से होगी सख्ती

 टैस्टों की संख्या बढ़कर प्रति दिन 30,000 होगी 

*पंजाब में कोविड केस बढऩे पर मुख्यमंत्री द्वारा 1 मार्च से अंदरूनी और बाहरी जमावड़ों पर पाबंदी लगाने के आदेश

 *डिप्टी कमीश्नरों को हॉटस्पॉट इलाकों में ज़रूरत पडऩे पर रात का कर्फ़्यू लगाने के लिए अधिकृत किया

*विद्यार्थियों में मामले बढऩे के मद्देनजऱ सुरक्षा उपायों के अमल के लिए स्कूलों में अध्यापक नोडल अफ़सर मनोनीत किए

चंडीगढ़: 23 फरवरी 2021: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

कोविड से सुरक्षा के लिए मास्क
लगाती महिला Photo by
 Charlotte May of Pexels 
राज्य में कोविड के बढ़ रहे मामलों पर चिंता बढऩे के मद्देनजऱ पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अंदरूनी और बाहरी जमावड़ों पर बन्दिशें लगाते हुए एक मार्च से अंदरूनी जमावड़ों की संख्या 100 तक और बाहरी जमावड़ों की संख्या 200 तक सीमित करने के हुक्म दिए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मास्क /सामाजिक दूरी का सख़्ती के साथ पालन करने और टेस्टिंग भी बढ़ाकर प्रति दिन 30,000 तक करने के निर्देश दिए हैं।

मौजूदा स्थिति का जायज़ा लेने के लिए उच्च-स्तरीय वर्चुअल मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने डिप्टी कमीश्नरों को सम्बन्धित जिलों में हॉटस्पॉट इलाकों में ज़रूरत पडऩे पर रात का कर्फ़्यू लगाने के लिए अधिकृत किया है और माईक्रो कंटेनमेंट रणनीति भी अपनाई जायेगी। उन्होंने पुलिस को मास्क पहनने, सभी रैस्टोरैंटों और मैरिज पैलेसों द्वारा कोविड निरीक्षक तैनात करने बारे जारी नोटिफिकेशन का सख़्ती के साथ पालन करवाने के भी निर्देश दिए हैं और इस उद्देश्य के लिए कर और आबकारी विभाग नोडल एजेंसी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिनेमा घरों में संख्या कम करने का फ़ैसला एक मार्च के बाद लिया जायेगा। उन्होंने बताया कि प्राईवेट दफ़्तरों और रैस्टोरैंटों को सभी मुलाजिमों के लिए कोरोना टैस्टों की ताज़ा रिपोर्ट प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा।

टेस्टिंग बढ़ाने के आदेश देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने हर पॉजि़टिव व्यक्ति के संपर्क में आए 15 व्यक्तियों का अनिवार्य टेस्टिंग करवाने के हुक्म दिए हैं और इसकी निगरानी सी.पी.टी.ओज़ द्वारा की जायेगी जबकि स्वास्थ्य विभाग प्रगति का जायज़ा लेगा।

मुख्यमंत्री ने टीकाकरण की प्रगति का जायज़ा लेते हुए सूचना, शिक्षा और संचार (आई.ई.सी.) मुहिम जारी रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जिससे सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों और अगली कतार के वर्करों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जा सके। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को बुज़ुर्ग आबादी और सह-बीमारियों से पीडि़त आबादी हेतु वैक्सीन के लिए भी रूप-रेखा तैयार करने के हुक्म दिए।

3.23 सी.एफ.आर. पर चिंता जाहिर करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मृतकों के आडिट के निष्कर्षों का नोटिस लिया कि इनमें से ज्यादातर मौतें दाखिल रहने के 2-14 दिन के दरमियान हुई हैं। उन्होंने सह-बीमारियों से पीडि़त मरीजों खास कर प्राईवेट संस्थाओं में दाखिल मरीजों के लिए प्रोटोकॉल की निरंतर निगरानी की जरूरत पर जोर दिया। कुछ मौतों के घरों में होने का जिक्र करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग को आदेष दिए कि घरेलू एकांतवास वाले मामलों खास कर सह-बीमारियों से पीडि़तों की उचित निगरानी को यकीनी बनाया जाये। उन्होंने हिदायत की कि स्व -निगरानी की हिदायतों पर आधारित फतेह किटों को सम्बन्धित व्यक्तियों के पॉजिटिव आ जाने वाले दिन से ही घरेलू एकांतवास में उन तक पहुँचा दी जानी चाहीये।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य और मैडीकल शिक्षा विभागों को कहा कि सभी पद, जिनको विशेष तौर पर भरने की इजाजत दी गई है, को जल्दी से जल्दी भरा जाये।

सुरक्षा उपायों की पालन के लिए पंजाब पुलिस की तरफ से उठाये कदमों के बारे मुख्यमंत्री को अवगत करवाते हुये डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता ने बताया कि रोकों को सख्ती के साथ अमल में लाने के लिए फील्ड अधिकारियों को हिदायतें जारी की जा चुकी हैं।

इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के सचिव हुसन लाल ने जानकारी दी कि अमृतसर, होशियारपुर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, एस.ए.एस. नगर और शहीद भगत सिंह नगर जिलों में हाल ही के दिनों के दौरान कोविड के मामलों में विस्तार दर्ज किया गया है जिससे राज्य में दूसरी संभावी लहर उठने के अंदेशे प्रगटाए जाने लगे हैं।

टीकाकरण के मुद्दे सम्बन्धित उन्होंने खुलासा किया कि अब तक टीका लगाऐ जाने के बाद मामूली बुरे प्रभाव के 61 मामले सामने आए थे जबकि छह मामले अति गंभीर और 14 गंभीर मामले सामने आए थे। यह सभी अब ठीक हो चुके हैं।

राज्य सरकार के कोविड के बारे माहिरों के ग्रुप के प्रमुख डा. के. के. तलवाड़ ने कहा कि पॉजिटिविटी दर में हाल ही दौरान हुए वृद्धि के बारे विस्तार से अध्ययन किया जा रहा है जिससे नौजवानों में बढ़ते मामलों की बात सामने आई है। मौजूदा दर को देखते हुए पॉजिटिविटी दर दो हफ्तों में चार प्रतिशत तक बढ़ सकती है जिसका अर्थ होगा एक दिन में 800 मामले होंगे। उन्होंने इसकी रोकथाम के लिए तत्काल तौर पर कदम उठाए जाने की जरूरत पर जोर दिया।

मुख्य सचिव विनी महाजन ने सरकारी स्कूलों को फिर बंद किये जाने से इन्कार करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए विभाग की तरफ से सभी कदम उठाए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग के सचिव कृष्ण कुमार ने इस मौके पर कहा कि अध्यापकों को स्कूलों में नोडल अधिकारी बनाया गया है जिससे विद्यार्थियों को कोविड के मद्देनजर संयमी व्यवहार यकीनी बनाने और मास्क का उपयुक्त इस्तेमाल करने के बारे दिशा -निर्देश दिए जा सकें। यह कदम इसलिए उठाये गए हैं क्योंकि हाल ही के दौरान फिर खोले गए स्कूलों खास कर लुधियाना (3.1 प्रतिशत) और बठिंडा (2.9 प्रतिशत) में बड़ी संख्या में पॉजिटिव दर में विस्तार हुआ था।

डा. तलवाड़ ने आगे कहा कि अभी तक पंजाब में कोरोना वायरस के नये रूप की आमद नहीं हुई परन्तु नये सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और नतीजे अगले हफ्ते आऐंगे।

डा. राज बहादुर ने भी इस मौके पर मौजूदा स्थिति और कोविड के फैलाव पर नकेल डालने के लिए उठाये जा रहे कदमों पर रौशनी डाला।

Saturday, February 20, 2021

मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड टेक्नोलॉजी लॉन्च

 20th February 2021 at 1:06 PM

 हुंजन हॉस्पिटल लुधियाना का नी रिप्‍लेसमेंट के लिये विशेष प्रयास  


लुधियाना: 20 फरवरी, 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

घुटने बदलने (नी रिप्‍लेसमेंट) के मामले में लुधियाना ने एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि यह मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड टेक्नोलॉजी लाने वाला उत्तर भारत का पहला शहर बन गया है। यह विश्व की सबसे व्यापक रूप से अपनाई गई यूएस एफडीए द्वारा अनुमोदित तकनीक है। दुनिया की एक प्रमुख  मेडिकल डिवाइस कंपनी स्ट्राइकर इंडिया और हुंजन हॉस्पिटल द्वारा संयुक्त रूप से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि उत्तर भारत का पहला मैको सिस्टम हुंजन हॉस्पिटल में इंस्‍टॉल किया गया है। 

इस लॉन्च से हुंजन हॉस्पिटल और स्ट्राइकर ने घुटने के जोड़ों के रोगों से पीड़ित रोगियों के लिये सबसे उन्नत टेक्नोलॉजी और उपचार लाने के अपने प्रयास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड सर्जरी सिस्टम से सर्जन ज्यादा सटीकता के साथ शल्यक्रिया के ज्यादा अनुमानित परिणाम दे सकते हैं।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हुंजन हॉस्पिटल को बधाई देते हुए स्ट्राइकर इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट एवं मैनजिंग डायरेक्टर मीनाक्षी नेवाटिया ने कहा, ‘‘हम हुंजन हॉस्पिटल के साथ भागीदारी कर बहुत खुश हैं और यह स्ट्राइकर के लिये निश्चित रूप से गर्व का क्षण है। रोगियों के उपचार के परिणामों को सुधारने और स्वास्थ्यरक्षा को बेहतर बनाने के लिये नवाचार लाने का हमारा साझा लक्ष्य इस अस्पताल के साथ हमारी भागीदारी को बहुत खास बनाता है। हम उत्तर भारत में घुटना प्रत्‍यारोपण की जरूरत वाले रोगियों की सेवा पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर वाकई उत्‍साहित हैं।’’


हुंजन हॉस्पिटल में डायरेक्टर और ज्‍वॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. बी.एस. हुंजन ने लुधियाना में हुई प्रेस वार्ता के दौरान पारंपरिक और मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड सर्जरी के बीच अंतर के बारे में बात की। उन्‍होंने समझाया कि पारंपरिक सर्जरी की चुनौतियों में से एक है शल्यक्रिया की सटीकता जोकि सर्जन के अनुभव और तकनीक पर निर्भर होती है। मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड सर्जरी सिस्टम से सर्जन हर बार रोगग्रस्त जोड़ पर सटीक बोन कट्स लगा सकते हैं। डॉ. बी.एस. हुंजन ने कहा, ‘‘जिन पहले 8 रोगियों का हमने ऑपरेशन किया है, उन्होंने उत्साहजनक परिणाम दिये हैं। मैको से हमें अपने रोगियों के बारे में पहले से ज्यादा जानने का मौका मिला है और इससे हमें बोन यानी हड्डी को कम काटने में मदद मिलती है। कुछ रोगियों के लिये इसका मतलब सॉफ्ट टिश्यू की कम क्षति हो सकता है, जबकि अन्य के लिये हड्डी का ज्यादा संरक्षण।.” 

डॉ. जयवीर हुंजन, हुंजन हॉस्पिटल में कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक्स, ने बताया, ‘‘घुटना प्रत्‍यारोपण के लिये होने वाली पारंपरिक सर्जरीज पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से प्रभावी ढंग से रोगियों के जीवन को बेहतर बना रही हैं, लेकिन मैको सिस्टम हमारी सटीकता को महत्वपूर्ण ढंग से बढ़ाएगा। जैसा कि लिटरेचर में बताया गया है और शुरूआती सर्जरीज में हमारे अनुभव के अनुसार, हमने रोगियों को होने वाले कई फायदे देखे हैं। इनमें सटीक प्लानिंग और बोन कट्स के साथ ही हड्डी और सॉफ्ट टिश्यू का ज्यादा संरक्षण किया जा सकता है। मरीजों को ऑपरेशन के बाद कम दर्द होता है, वे तेजी से ठीक होते हैं और उन्‍हें अस्‍पताल से जल्‍दी छुट्टी मिल जाती है, साथ ही खून की भी कम हानि होती है।’’ इस तकनीक के बारे में डॉ. बीएस हुंजन ने बताया,  “इस टेक्नोलॉजी में नी रिप्‍लेसमेंट सर्जरी करने के तरीके को पूरी तरह से बदलने की क्षमता है। मुझे यकीन है कि एक दिन आएगा, जब यह टेक्नोलॉजी हर ऑपरेटिंग रूम में उपचार का मानक होगी। हमें बहुत गर्व है कि हम पंजाब में रोगियों के लिये विश्व स्तरीय उपचार लेकर आए हैं।”

हर रोगी की हड्डियों की रचना अलग होती है और गठिया से रोगग्रस्त जोड़ में और बदलाव हो जाता है। घुटने या कूल्हे की सर्जरी के मामले में, मैको सिस्टम का सॉफ्टवेयर रोगी के सीटी स्कैन के आधार पर रोगग्रस्त जोड़ का 3डी मॉडल बनाने में सहायता करता है। फिर यह सॉफ्टवेयर रोगियों के रोग की विशिष्ट स्थिति के आधार पर हर रोगी के लिये एक व्यक्तिपरक वर्चुअल सर्जिकल प्लान बनाने की सुविधा देता है। ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले हुई यह प्लानिंग सबसे सटीक बोन कट्स लगाने और इम्प्लांट्स के संरेखण का निर्णय लेने में मदद करती है। इस टेक्नोलॉजी से सर्जन सर्जरी के दौरान जरूरत पड़ने पर प्लान बदल भी सकता है। और एक बार प्लान तय होने पर मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड सर्जरी सिस्टम ऑपरेशन थियेटर में बोन कट्स लगाने में सर्जन को सहयोग देता है। अनूठी हैप्टिक टेक्नोलॉजी सुनिश्चित करती है कि सर्जन बनाई गई वर्चुअल सीमाओं में रहे। चूंकि रोबोटिक आर्म को वर्चुअल सीमा से बाहर भौतिक रूप से नहीं चलाया जा सकता, इसलिये सॉफ्ट टिश्यू का संरक्षण होता है। इससे बोन कट्स और इम्प्लांट्स की स्थिति सबसे सटीक हो जाती है और सॉफ्ट टिश्यू को चोट नहीं लगती है। 

1,000 से ज्यादा मैको सिस्टम्स (और गिनती जारी है) का सबसे बड़ा वैश्विक इंस्टालेशन आधार, 350,000 से ज्यादा मैको प्रोसीजर्स और प्रकाशित तथा समकक्षों द्वारा समीक्षा किये गये अध्ययनों में 145 से ज्यादा प्रकाशन मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड टेक्नोलॉजी की चिकित्सकीय दक्षता स्थापित करते हैं।

स्ट्राइकर क्या है 

स्ट्राइकर विश्व की अग्रणी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक है और अपने ग्राहकों के साथ मिलकर स्वास्थ्यरक्षा को बेहतर बनाने के लिये काम करती है। यह कंपनी ऑर्थोपेडिक्स, मेडिकल एवं सर्जिकल, और न्यूरोटेक्नोलॉजी एवं स्पाइन में खोजपरक उत्पादों तथा सेवाओं की पेशकश करती है, जो रोगी और अस्पताल के परिणामों को सुधारने में मदद करते हैं। ज्यादा जानकारी stryker.com पर उपलब्ध है। 


Monday, February 01, 2021

साज़िशों के बावजूद चढ़दीकला में है किसान आंदोलन

गोदी मीडिया को भी निरंतर मुँहतोड़ उत्तर दे रहे हैं समता जैसे लोग 


सिंघू बॉर्डर से
:1 फरवरी 2021
(विशेष इनपुट जसप्रीत समता की पंजाब स्क्रीन के लिए  ख़ास तस्वीरें)::

जसप्रीत कौर समता 
इस समय देश और दुनिया की नज़रें सिंघू बॉर्डर पर हैं। सियासत की चालाकियों और सत्ता के दमन के भरे कदम्पों का सामना करने वाले किसानों  अब यह उनकी कर्मभूमि बन चुका है। संघर्षों का नया इतिहास लोयखा जा रहा है सिंघू बॉर्डर पर। इस स्थान को  लगातार ऐतिहासिक बनता जा। अन्य जन संघर्षों की तरह इस बार किसान आंदोलन ने भी  इस संघर्ष लोगों को जहाँ  योद्धा   बनाया है वहीं  उन्हें  मीडिया जैसी ज़िम्मेदारियाँ भी सीखा दी हैं।  को संभालने वालों में युवा वर्ग भी शामिल है और वृद्ध लोग भी। आंधी हो या तूफ़ान।  बारिश हो या ओलों का ज़ोर लेकिन लुधियाना के कामरेड सुरिंदर सिंह हर हाल में आंदोलन की निश्चित जगह पर अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं। कामरेड सुरिंदर की ज़िंदगी हर प्रमुख जनसंघर्ष की गवाह रही है। उनका परिवार भी इसी तरह जन आंदोलनों के लिए समर्पित रहता है। मुश्किलों के  दौर में भी पूरी तरह प्रतिबद्ध रहता है। जब तक इस धरती पर अन्याय का खात्मा नहीं होता तब तक इसी तरह जुटे रहने की कसम खाई है शायद इस परिवार ने कि हम लगातार संघर्ष  करते रहेंगे। इसी  परिवार की युवा सदस्य है जसप्रीत कौर समता। ज़िंदगी को हर कदम पर एक जंग मानने वाली समता कभी टिकरी बॉर्डर पर होती है, कभी संघु बॉर्डर पर और कभी ज़ीरकपुर या चंडीगढ़ में।  हाथ में कैमरा या मोबाईल और नज़र आंदोलन पर। जन आंदोलनों  की रिपोर्टिंग का यह जनअंदाज़ भी एक नया इतिहास  रच रहा है। इससे जनपत्रकारिता और मज़बूत होगी। 

एक एक उतराव चढ़ाव को  गंभीरता से नोट करती समता बताती है कि सत्ता की खतरनाक साज़िशों के बावजूद आंदोलन कर रहे किसान पूरी तरह चढ़दीकला में हैं। सड़कों पर लगाए गए बड़े बड़े कील और साथ ही बनाई गई सीमेंट की दीवारें उनके हौंसलों को पस्त नहीं कर सकीं। किसानों के इस आंदोलन की बिजली काटने और इंटरनेट बंद करने जैसी हरकतें हमारे विरोध में खड़े कॉर्पोरेट के दलालों के चेहरों को ही बेनकाब कर रही है। 

समता की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों के आंदोलन में वृद्ध किसानों की आवाजाई के लिए किसानों ने बाकायदा ऑटो रिक्शा भी रखे हैं। लंगर भी अटूट चल रहा है। शायद सत्ता और बीजेपी के लोग इस लंगर के राशन की सप्लाई काटना चाह रहे हैं। अगर उनके मंसूबे इस तरह के घटिया स्तर तक पहुँच चुके हैं तो भी उनको नाकामी   मिलेगी।  जीत हमारे ही होनी है। जीतेंगे किसान ही। कॉर्पोरेट के दलालों का हर ज़ोर ज़ुल्म किसान आंदोलन को मज़बूत करेगा। 

 
इसी बीच गाजीपुर बॉर्डर पर हर नए दिन के साथ लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा से भी बड़ी संख्या में किसान यहां पहुंच रहे हैं।  इससे ट्रैफिक की समस्या और गंभीर होती जा रही है।सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के  पर पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर को भी पूरी तरह से सील कर दिया है। सोमवार को दिल्ली मेरठ हाइवे से किसी को भी बॉर्डर की ओर नहीं आने दिया गया। इससे यातायात ठप हो गया है और लोगों को घंटो जाम से जूझना पड़ा। यह समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती  जा रही है। 

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस के दिन किसान रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद से ही गाजीपुर बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बैरिकेडिंग को तो बाकायदा वैल्डिंग कर जोड़ दिया गया है। किसानों के धरनास्थल की तरफ आने-जाने का रास्ते पूरी तरह से ब्लॉक है। इन्हें और रोकने के तरीके सरकार के इरादों का संकेत दे रहे। हैं। पुलिस और आपात सेवाओं से जुड़े लोगों के अलावा किसी को भी दिल्ली के रास्ते बॉर्डर तक नहीं जाने दिया जा रहा है। पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर पर पक्की बैरिकेडिंग कर दी है, उसके बाद से इस रूट खुलने की संभावना भी पूरी तरह खत्म हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी लोगों को जाम से जूझना पड़ सकता है। सरकार के इन "प्रबंधों" को देख  कर लगता है कि सरकार किसान आंदोलन का का हल जल्द निकालने के मूड में नहीं। दूसरी तरफ किसान संगठन भी लम्बी लड़ाई के लिए तैयार हैं। इस लिए किसानों ने भी अपनी तैयारियां  लम्बे संघर्षों को सामने रख कर  की हैं।  इस बार किसानों का आंदोलन निरंतर चले आ रहे हर अन्याय और शोषण का समापन करने के लिए भी दृढ़  संकल्प क्यूंकि कृषि के तीनों नए कानूनों से  किसानों का यह  शोषण और लूट अपनी  चरमसीमा पर पहुंच जाते। शोषण और अन्याय के अतीत की चर्चा भी जल्द होगी।