Friday, November 19, 2021

कड़ाह प्रसाद वितरण और जश्न में पहुंचे हरकेश मित्तल

कृषि कानूनों की वापिसी घोषणा को बताया ऐतिहासिक कदम


लुधियाना
: 19 नवंबर 2021: (प्रदीप शर्मा इप्टा//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय कृषि कानून वापिस लेने की घोषणा को बीजेपी से जुड़े नेता एक ऐतिहासिक फैसला  बता रहे हैं। इस अवसर पर लुधियाना के घंटाघर स्थित बीजेपी कार्यालय के सामने खुशियां मनाई गईं। लड्डू बांटे गए और कड़ाह प्रसाद वितरित किया गया। कड़ाह प्रसाद वितरण और जश्न में पहुंचे हरकेश मित्तल ने इस मौके पर मीडिया से भी बात की। उन्होंने पंजब स्क्रीन से एक भेंट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय कृषि कानून वापिस की घोषणा ऐतिहासिक फैसला है। श्री मोदी ने बहुत बड़े दिल का सबूत दिया है। इसी बड़प्पन के चलते उन्होंने न केवल कृषि कानूनों को वापिस लेने की बात कही बल्कि किसानों से माफ़ी भी मांगी। 

गुरू नानक देव जयंती के पावन पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय कृषि कानून वापिस लेने की घोषणा से पूरे पंजाब में खुशी की लहर है। भाजपा शुरू से किसानो की हितेषी रही है। उक्त शब्द जिला ट्रेड सेल के प्रधान हरकेश मितल ने कृषि कानूनों के रद्द होने की घोषणा के उपरांत भारत नगर चौक में आपनी टीम के साथ लड्डू बांटते हुए कहे। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हार्दिक धन्यवाद करते हुए कहा कि आज गुरुपर्व के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री  द्वारा लिया गया ये  ऐतिहासिक फैसला पंजाब में बीजेपी की जड़े मजबूत करेगा और 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी पंजाब में सत्ता हासिल कर  एक नया अध्याय शुरू करेगी और पंजाब को तरक्की की राह पर ले जायेगी इस अवसर पर नीरू मित्तल,मनोज तायल,आशीष गुप्ता,ऋषि बंसल,.अवनि शर्मा,.मुकेश गौतम,राकेश जैन,रामिंदर सिंह खुराना,राकेश गुप्ता,दीपक भाटिया,राजीव जैन, मोती नारंग हियँ मित्तल विमल हरजाई। आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि किसान आंदोलन के चलते बीजेपी नेताओं का बाहर निकलना भी आसान नहीं रहा था। इस घोषणा से बीजेपी फिर से पंजाब में अपना वर्चस्व कायम करने के प्रयास तेज़ कर सकेगी। 


किसान आंदोलन की जीत पर जामा मस्जिद में मिठाई बांटी गई

 काले कानूनों की वापसी शुक्र का दिन है शाही इमाम पंजाब

जामा मस्जिद लुधियाना के बाहर खुशी मनाते अहरार कार्यकर्ता और शाही इमाम पंजाब मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी

लुधियाना: 19 नवंबर 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
किसान आंदोलन की जीत हुई है। पंजाब के जीते गए आंदोलनों में एक अध्याय और जुड़ गया है। इस पर यूं तो लगातार खबरें आ रही हैं लेकिन ज़ोरदार ख़ुशी का इज़हार किया है जमा मस्जिद लुधियाना के सामने बनती गई मिठाई ने। किसानों के आंदोलन में दिल्ली जा कर किसानों का साथ देने वाली जमा मस्जिद लुधियाना की टीम ने यह सब शाही इमाम मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने किया। और उनके साथियों ने आज किसानों की जीत पर भी खुशियां मनायीं। वर्तमान शै इमाम भी खुद दिल्ली जा कर किसानों के साथ कंधे कंधा मिला कर चलते रहे। उनको आज शिद्द्त से इस बात का अहसास है की जीत कितनी कठिन थी लेकिन हम ले कर रहे। 
आज सुबह जैसे ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी ने ऐलान किया कि तीनों काले खेती कानून वापिस लिए जा रहे है तो हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। इस अवसर पर यहां इतिहासिक जामा मस्जिद के सामने मजलिस अहरार इस्लाम के कार्यकर्ताओं द्वारा मिठाई बांटी गई और किसान मजदूर एकता जिंदाबाद के ज़ोरदार नारे लगा कर खुशी का इजहार किया गया। 
किसान आंदोलन की कामयाबी पर शाही इमाम पंजाब मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी ने कहा कि काले कानूनों की वापसी पर आज खुदा का शुक्र अदा करते है की एक लंबे आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने किसान भाइयों की सही बातों को मान लिया है। 
शाही इमाम पंजाब ने कहा कि देर आए दरुस्त आए कहावत के अनुसार हम प्रधानमंत्री जी के भी शुक्र गुजार हैं कि उन्होंने आखिर देश के मन की बात को सुन कर स्वीकार भी किया है। शाही इमाम ने कहा कि इस आंदोलन में देश के सभी धर्मों के लोगों ने जात पात से ऊपर उठ कर साथ दिया। इस लिए सभी इस अवसर पर मुबारकबाद के हकदार हैं। 
शाही इमाम मौलाना उस्मान लुधियानवी ने कहा कि इस अवसर पर उन सभी लोगों को याद करते हैं जिन्होने इस आंदोलन में अपनी जानो की कुर्बानी दी है। शाही इमाम ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि लुधियाना जामा मस्जिद में ज्यादा खुशी इस लिया भी है कयोंकि मरहूम शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी पहले दिन से किसान आंदोलन में शामिल रहे और लगातार आवाज उठाई हालांकि गोदी मीडिया ने मरहूम शाही इमाम साहिब को निशाना भी बनाया लेकिन वो सच्चाई के साथ डटे रहे। 
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की कामयाबी के लिया कोई विशेष पार्टी नही बल्कि सभी देश वासी मुबारकबाद के हकदार हैं।  
किसान आंदोलन की जीत पर जामा मस्जिद में मिठाई बांटी गई

Wednesday, November 17, 2021

सीएमसी लुधियाना ने 200वें मरीज को स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किए

 लेडी वलिंगटन हल में मरीजों ने की स्टेम सेल डोनर्स के साथ रैंपवाक


लुधियाना
: 17 नवंबर 2021: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

करीब दो तीन वर्ष पूर्व, शायद 2018 में एक खबर आई थी लखनऊ से। खबर में बताया गया था केजीएमयू के डॉक्टरों ने ब्लड कैंसर (मायलोमा) के मरीज को नई ज़िंदगी दी है। हिमेटॉलजी विभाग के डॉक्टरों ने मायलोमा कैंसर के एक ऐसे मरीज का हिमेटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (बोन मेरो ट्रांसप्लांट) किया है जिसे दवा असर करनी बंद हो चुकी थी। यह एक चमत्कार था। दवा से बहुत आगे की बात। दुआ के नज़दीक पहुंचती दवा की बातें बहुत पहले कहानियां हिन् तो थीं। सीएमसी लुधियाना ने वैलोर के बाद लुधियाना में भी इन बातों को सच कर दिखाया। बिमारियों के खिलाफ कई युद्ध लड़ने और जीतने के इतिहास रचा है सी एम् सी अस्पताल के डाक्टरों और वैज्ञानिकों ने। इसी जीत के जश्न जैसा था लेडी विलिंगटन हाल में हुआ छोटा और सादा सा आयोजन। जिन बच्चों को नई ज़िंदगी मिली वे भी थे। जिन्होंने अपने स्टेम सेल दान दे कर उन्हें नई ज़िंदगी दी वे भी थे। इन का इलाज करने वाले डाक्टर बी थे। नर्सें भी थीं। मौत के खिलाफ ज़िंदगी की जीत का जश्न था यह। 

क्रिश्चियन मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल(सीएमसीएच) की ओर से हाल ही में स्टैम सैल ट्रांसप्लांट की फील्ड में बड़ा मील पत्थर पार करते  हुए 200वें मरीज का स्टैम सैल ट्रांसप्लांट किया गया। पंजाब के लिए इस बड़ी उपलब्धि को सेलिब्रेट करने के लिए अस्पताल की ओर से धन्यवाद समागम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में अस्पताल के डायरेक्टर डॉ.विलियम भट्टी ने विशेष रूप से शिरकत की।

इस मौके मुख्यातिथि के तौर पर पहुंचे सिविल सजर्न डॉ.एसपी सिंह ने समारोह का उदघाटन किया। उन्होंने सीएमसी की ओर से इलाज के लिए क्षेत्र में की जा रही सेवाओं की सराहना की। इस दौरान दुनिया भर से शुभचिंतकों व गणमान्य शख्सियतों ने अपने रिकार्डेड मैसेज के जरिए सीएमसी को इस उपलब्धि पर बधाई दी। 

क्लीनिकल हेमाटोलोजी डिपार्टमेंट के हैड व प्रोफेसर डॉ.एम जोसफ जॉन ने संबोधित करते हुए स्टैम सैल ट्रांसप्लांटेशन के सफर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सफर 2008 में शुरु हुआ था, और आज तक 200 मरीजों के स्टैम सैल ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। समारोह की खास बात यह रही कि इसमें ट्रांसप्लांट कर चुके मरीज अपने परिवारों समेत पहुंचे, जिन्होंने अपने अनुभवों को सबके सामने साझा किया। 

इस दौरान स्टैम ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों व स्टैम सैल डोनर्स ने रैंपवॉक की। इसके अलावा चैंपियंस(ट्रांसप्लांट मरीजों) व सुपरहीरो(स्टैम सैल डोनर्स) के लिए फन गेम्स भी करवाई गईं। कार्यक्रम के समापन में डिप्टी नर्सिग सुपरिंटेंडेंट संगीता सैमुअल ने सभी का धन्यवाद प्रकट किया।

Monday, November 15, 2021

इस बार भी सीडीसी लुधियाना द्वारा मनाया गया बाल दिवस

 बच्चों से पुराना जुड़ाव है सीएमसी अस्पताल संस्थान का  


लुधियाना
: 15 नवंबर 2021: (कार्तिका सिंह और पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

बाल दिवस के अवसर पर क्रिश्चियन डेंटल कॉलेज के पीडियाट्रिक एंड प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री विभाग ने बचपन के मौखिक स्वास्थ्य रोगों और इनकी रोकथाम के बारे में जागरूकता जगाने के मकसद से एक वॉकथॉन का आयोजन किया।

रख बाग से सीएमसी परिसर तक सुबह 06:30 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में लगभग 120 दंत स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों और छात्रों ने भाग लिया। डॉ. विलियम भट्टी, निदेशक सीएमसी लुधियाना ने इस कार्यक्रम को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर नगर आयुक्त श्री प्रदीप कुमार सभरवाल मुख्य अतिथि थे। इस वॉकथॉन के माध्यम से क्रिश्चियन डेंटल कॉलेज के फैकल्टी और छात्रों ने दांतों की बीमारियों की रोकथाम का संदेश दिया और स्वस्थ मुस्कान के लिए शुरुआती जांच और निवारक और अवरोधक उपाय किए।

इस अवसर पर बाल रोग विभाग में मॉर्निंग स्टार स्कूल नूर मंजिल के बच्चों के साथ बाल दिवस मनाया गया। अगले दो सप्ताह के दौरान बच्चों में बेहतर मौखिक स्वास्थ्य प्रथाओं का समर्थन करने के लिए एक विशेष अभियान 'उज्ज्वल भविष्य मुस्कान' है। निदेशक डॉ. विलियम भट्टी ने बचपन में दंत रोगों के बोझ के बारे में सामुदायिक जागरूकता लाने में विभाग के प्रयासों की सराहना की। डॉ. अबी एम. थॉमस, प्रिंसिपल सीडीसी।

मुझे अभी भी याद है कि 20216 के दौरान सीएमसी संस्थान का बाल दिवस जो फिर से बताता है कि बच्चों के साथ सीएमसी संस्थान का पुराना जुड़ाव रहा है। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (CMCH) में ओपन हार्ट सर्जरी कराने वाले लगभग 30 बच्चों को बाल दिवस मनाने के लिए आमंत्रित किया गया था। इन बच्चों ने डॉक्टरों, स्टाफ और 'हैव ए हार्ट' फाउंडेशन और इसके अध्यक्ष बलबीर कुमार का आभार व्यक्त किया।

समारोह में बलबीर कुमार को उनके फाउंडेशन के माध्यम से बच्चों की सर्जरी कराने में मदद करने के लिए सम्मानित किया गया। फाउंडेशन के अध्यक्ष और ट्रस्टियों ने भविष्य में भी हृदय रोगियों के इलाज के लिए वित्तीय और नैतिक समर्थन के साथ निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर बोलते हुए, सीएमसीएच के निदेशक डॉ अब्राहम जी थॉमस ने करुणा और देखभाल के साथ बीमारों और जरूरतमंदों की सेवा करने की प्रतिबद्धता को मजबूत किया। डॉ एलन जोसेफ, प्रोफेसर और विभाग के प्रमुख ने सीएमसीएच निदेशक को सम्मानित किया और 'हैव ए हार्ट' और सभी हृदय रोगियों के संकाय और ट्रस्टियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

सीनियर कंसल्टेंट और पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डॉ क्रिस्टोफर रॉय ने भारत में हृदय रोग की समस्याओं पर एक प्रस्तुति दी।

डॉ नम्रता गौर, सीनियर कंसल्टेंट कार्डियक सर्जन, जिन्होंने शो का संचालन किया, ने सीएमसीएच के मिशन के बारे में बताया कि वह पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू और कश्मीर के दूर-दराज और दूरदराज के इलाकों में सेवाएं प्रदान करता है।

सीएमसीएच के चिकित्सा अधीक्षक डॉ विलियम भट्टी, बाल रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ, सर्जन और कई वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने कार्यक्रम में भाग लिया और छोटे दिलों को मनाने में उत्सुकता से भाग लिया।

बाल दिवस से संबंधित पिछले वर्ष 2020 के कार्यक्रम को याद करते हुए यह कोविड-19 के साये में था। हर तरफ कोरोना का आतंक था लेकिन सीएमसी जागरूक थी और समाज के कल्याण के लिए समर्पित रही।   

Saturday, November 06, 2021

चंडीगढ़ निगम चुनाव 35 सीटों पर लड़ेंगे बसपा और अकाली

चुनावों के लिए अर्ज़ियों की आखिरी तारीख 15 नवंबर 

मोहाली: 6  नवंबर 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव  बहुजन समाज पार्टी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर 35 सीटों पर लड़ रहे हैं । दोनों पार्टी मिलकर चंडीगढ़ नगर निगम के चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारेगी । सभी वार्डों के उम्मीदवारों से अपनी दावेदारी साबित करने के लिए एप्लीकेशन आ रही हैं । एप्लीकेशन जमा करवाने की आखिरी तारीख 15 नवंबर 2021 रखी गई है जिस करके चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार अभी से ही काफी  सरगरम हैं और अपने अपने वार्डों में मीटिंग कर रहे हैं । चंडीगढ़ निवासियों की तरफ से इस बार बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है कि लोग भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस से काफी दुखी हैं । इस बार ऐसा लग रहा है कि बहुजन समाज पार्टी चंडीगढ़ इस बार नगर निगम के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करेगी और अपनी जीत हासिल करेगी ।

बहुजन समाज पार्टी,चंडीगढ प्रदेश के अध्यक्ष गुरचरण सिंह कंबोज इस मकसद के लिए सक्रिय हैं। 




Friday, November 05, 2021

Murder: 26 वर्ष पूर्व सीमा गोयल ने किया था प्रेम विवाह

परिवारिक सूत्र भी पूछ रहे हैं की पति पत्नी अलग अलग क्यूँ सोते थे?

मृतका सीमा गोयल अपने पति और बेटी के साथ-करीब चार सप्ताह पुरानी 
तस्वीर जब वो इनडोर की तरफ घूमने गए थे
 

मोहाली
//चंडीगढ़: 5 नवंबर 2021: (पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

दीवाली की सुबह। मुँह अँधेरे तीन बजे का समय। सेक्टर 14 में पंजाब यूनिवर्सिटी का खामोश परिसर। उपकुलपति की रिहायश के ें पीछे रहने वाले एक प्रोफेसर की पत्नी को मौत के घाट उतार दिया गया। चोरी हुए केवल 200/- रुपए और एक बेड शीट। व्हाना मिली सीमा गोयल की लाश। 

एक पूर्व पत्रकार सोलोमन की रिश्ते में बुआ सीमा गोयल की बेरहमी से हत्या कर दी गई। सोलोमन कुछ दशक पूर्व हिंदी दैनिक से सबंधित रहे और उनकी खबरें एस के दोस्त के नाम से छपती थीं। उन्होंने सुबस सुबह मीडिया के मित्रों को इसकी जानकारी दी कि उनकी बया की हत्या हो गई है।  इसकी पुष्टि मृतका सीमा की इंग्लैण्ड से लौटी कज़न बहन ईवा ने भी की। मृतका सीमा इंग्लैंडस से लौटी ईवा की मामा की बेटी है। ईवा अपने भतीजे सोलोमन के पास तरनतारन के एक गांव मडिमेघा में आई हुई है और जल्द ही वापिस भी जाने वाली है। इस हत्या से वह भी बुरी तरह से आहत महसूस हुई।  परिवार के अन्य लोग चंडीगढ़ के लिए रवाना हो चुके थे और उन्होंने ही पोस्टमार्टम व उसके बाद अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं पूरी करवाईं।  सीमा को उसके धर्म के मुताबिक दफनाया गया जबकि उसके पति हिन्दू धर्म से सबंधित हैं। दफनाने की बात सीमा की बेटी ने ज़ोर दे कर मनवाई। 

किसी से रंजिश की आशंका पूछे जाने पर ईवा ने कहा कि ऐसा कुछ भी उनकी जानकारी में तो नहीं। मृतका सीमा गोयल के संबंध में इस परिवार ने बताया कि सीमा बठिंडा से सबंधित थी और प्रोफेसर भारत भूषण गोयल से शादी के बाद काफी अर्से से चंडीगढ़ में ही थी। सीमा और बी बी गोयल का विवाह प्रेम विवाह था और 26 वर्ष पूर्व हुआ था। कभी इस बात की आशंका महसूस नहीं हुई कि सीमा की हत्या उसके घर में ही हो जाएगी। 

गौरतलब है कि चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी के बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर बीबी गोयल की पत्नी सीमा की इस  बेरहमी से की गई हत्या के बाद अभी भी यह एक रहस्य बनी हुई है। आशंका लूटपाट और चोरी की भी है लेकिन वहां से केवल 200/- रुपए और एक बेड शीट गायब मिली। और कुछ भी चोरी नहीं हुआ। ज़ाहिर है कि हत्या के मकसद से ही सीमा के सर पर वार हुए। 

ईवा ने बताया कि यह हत्या सुबह तीन बजे हुई बताई गई है। इतनी सुबह एक पति अपनी पत्नी से अलग से ऊपर की मंज़िल पर अलग क्यूं सो रहा था? समाजिक तौर पर तो उसे अपनी पत्नी के साथ ही होना चाहिए था। 

इस कथित हत्याकांड को लेकर पूरे विश्वविद्यालय कैंपस में सनसनी फैली हुई है। उल्लेखनीय है कि इस हत्याकांड को यूनिवर्सिटी परिसर में स्थित उनके घर में ही अंजाम दिया गया। उनकी लाश के हाथ-पांव बंधे मिले। वहीं, सिर पर गंभीर चोटों के निशान भी हैं। आशंका जताई जा रही है कि उनके हाथ-पैर बांधने के बाद किसी वस्तु से सिर पर वार कर उनकी हत्या की गई। फिलहाल पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। दोपहर होते होते इस हत्या की खबर पीयू से सबंधित ग्रुपों में भी वायरल हो गई थी। 

उल्लेखनीय कि उनकी लाश को सबसे पहले प्रोफेसर पति ने देखा। उन्होंने ही तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस बेसुध हालत में मृतका को सरकारी अस्पताल ले गई। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतका सीमा गोयल की उम्र मौत के समय 59 साल बताई गई। वह पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी ऑफ बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर बीबी गोयल की पत्नी हैं। जानकारी के अनुसार वह कोई नौकरी नहीं करती थी। प्रोफेसर बीबी गोयल यहां पर अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहते हैं।

लेकिन वारदात के समय उनकी बेटी घर पर नहीं थी। बीबी गोयल पहली मंजिल पर थे, जब सुबह नीचे आकर देखा तो उनके होश उड़ गए। उनकी पत्नी की किसी ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। शिकायत के बाद मामले में सेक्टर.11 थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रोफेसर भारत भूषण गोयल का घर पीयू कैंपस में ही है। जो मौजूदा पीयू के कुलपति के घर की पिछली गली में है। हैरानी की बात यह है कि वहां पर इतनी भारी सुरक्षा के बाद भी कैसे किसी आरोपी ने आकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस इन सब पहलुओं पर भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में जल्द ही सब कुछ साफ कर दिया जाएगा। वहीं फोरेंसिक और फिंगर एक्सपर्ट टीम के साथ वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने मौके पर पहुंच कर जांच की और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस ने प्रोफेसर के बयान पर मामले में अज्ञात के खिलाफ आइपीसी की धारा-302 के तहत केस दर्ज किया है।

यूनिवर्सिटी के बिजनेस स्कूल के सीनियर प्रोफेसर बीबी गोयल ने पुलिस को दिए बयान में बताया है कि वीरवार की सुबह करीब 7:31 बजे उन्हें दूधवाले का फोन आया कि उसने दूध के पैकेट मेन गेट के पास रख दिए हैं। प्रोफेसर बीबी गोयल अपने घर की पहली मंजिल से उतरकर नीचे ग्राउंड फ्लोर पर आए बाहर के गेट पर पड़े दूध के पैकेट लेने चले गए। उन्होंने बताया जब वह दूध के पैकेट लेकर घर में दाखिल हुए तो उन्होंने देखा कि घर का मेन डोर बाहर से लॉक है। ऐसे में वह एक अन्य दरवाजे से बेडरूम में घुसे। बेडरूम में प्रवेश करते ही उन्होंने देखा कि पत्नी का शव बेड पर पड़ा है। उसकी हत्या कर दी गई थी। हत्यारे ने सीमा गोयल के सिर पर किसी भारी भरकम वस्तु से हमला कर वारदात को अंजाम दिया। सीमा को मौत के घाट उतारने के बाद हत्यारे ने शव के हाथ-पैर रस्सी से बांध दिए थे।

जो आरम्भिक जानकारी मिली उसके मुताबिक वारदात के समय प्रोफेसर बीबी गोयल घर के ऊपर वाले कमरे में सो रहे थे। शुक्रवार को पुलिस ने जीएमएसएच-16 अस्पताल में मृतका सीमा गोयल के शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद उसे स्वजनों को सौंप दिया। स्वजनों ने शुक्रवार देर शाम शव का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कुछ सैंपल लिए हैं, जिसके आधार पर आरोपित को पकड़ने में मदद मिलेगी। घर पर मौजूद नहीं थी बेटी

प्रोफेसर बीबी गोयल पत्नी सीमा गोयल और बेटी के साथ यहां रहते थे। बेटी वर्तमान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। उसने हाल ही में देहरादून से मेडिकल की अधिकृत शिक्षा ली है। वारदात के वक्त बेटी घर पर नहीं थी। पत्नी के अलावा सिर्फ प्रोफेसर गोयल ही घर पर थे। प्रोफेसर ने बताया कि घर में स्थित एक जाली का दरवाजा टूटा हुआ मिला। हो सकता है हत्यारा जाली का दरवाजा तोड़कर घर में घुसा होगा और सीमा की हत्या कर फरार हो गया। 

पुलिस ने घर के इर्द-गिर्द लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की है। हालांकि इसमें किसी भी शख्स के घर में दाखिल होने या बाहर निकलने की कोई फुटेज नहीं मिली है। पुलिस को अब शक नौकरों या परिवार के किसी सदस्य पर है। पुलिस घर के हर सदस्य के अलावा नौकरों और गोयल परिवार के करीबियों से पूछताछ कर रही है। हत्याकांड के 24 घंटे बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची पुलिस

एसएसपी ने मामले की जांच के लिए दो टीमें गठित की है। फिर भी हत्या के 24 घंटे बीतने के बावजूद चंडीगढ़ पुलिस हत्यारे का पता नहीं लगा पाई। ीवा ने बताया की घर में वृद्ध लोग पहले भी इस पर कई बार एतराज़ कर चुके थे कि पीटीआई पत्नी अलग अलग मंज़िलों पर क्यूँ सोते हैं? क्या दोनों में कोई पुराना विवाद था या किसी का किसे से कोई नया पुराण संबंध?

Sunday, October 31, 2021

इंदिरा गांधी के बाद किस ने बदल डालीं आर्थिक नीतियां?

निजीकरण लाने से क्या संबंध था इंदिरा गांधी की हत्या का?


लुधियाना
: 30 अक्टूबर 2021: (पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

जब सुश्री इंदिरा गांधी की हत्या की गई उन पलों पर बहुत कुछ लिखा गया। बहुत बार लिखा गया। बहुत बार दोहराया भी गया। लेकिन फिर भी किसी ने इस बात की चर्चा बड़े पैमाने पर नहीं की कि उस हत्या के बाद देश की नीतियों में बदलाव शुरू हो गया था। इस हत्या को सिख आतंक पर फोकस किया गया और सीमित भी रखा गया। जब हत्या हुई उस वक़्त उन पर इतनी गोलियां बरसाई गई कि बचने की कोई गुंजायश न रहे।  गोलियां चलते ही राष्ट्रीय मीडिया सहित विदेश मीडिया ने भी ज़ोरशोर से इसका प्रचार किया कि श्रीमती गाँधी के सिख सुरक्षाकर्मियों ने यह हरकत की। साथ ही बहुत सी भीड़ अस्पताल में भी एकत्र होनी शुरू हो गई। शाम को हत्या की औपचारिक और अधिकृत घोषणा भी कर दी गई। 

दिल्ली और बहुत से अन्य इलाकों में सिक्खों को गद्दार बताने वाले नारे लगाती भीड़ के ग्रुप सड़कों पर निकल ऐ। सिख्ख परिवारों को ढूंढ ढूंढ कर निशाना बनाया गया। हज़ारों सिक्खों को गले में टायर डाल डाल कर जला दिया गया।उनकी सम्पतियां जला कर रख कर दी गईं। बहु बेटियों की इज़्ज़तें लूटीं गईं। हज़ारों पुरुषों को वहिशयाना ढंग से कत्ल कर दिया गया। देश का कानून सोया रहा। देश के सुरक्षाबल मूक दर्शक बने रहे। नवनियुक्त प्रधानमंत्री राजीवगांधी बोले जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है। 

वास्तव में सुश्री गांधी की हत्या के बाद  हुआ बहुत कुछ ऐसा ड्रामा भी लगने लगा था जिससे अंतराष्ट्रीय समुदाय के दिल और दिमाग में यह बात इंजेक्ट कर दी गयी कि चूंकि सिक्खों ने ब्ल्यूस्टार ऑपरेशन का बदला लेने के लिए सिक्खों ने सुश्री इंदिरा गांधी की हत्या की थी उसीकी प्रतिक्रिया के फलस्वरूप भड़के हुए लोगों ने सिक्ख समुदाय से जुड़े लोगों की हत्या करदी। किसी ने नहीं बताया की  प्रशासन और सुरक्षा बल मूक दर्शक क्यूं  बने रहे?  को अवसर बनाने वाले लोग उन दिनों भी सक्रिय थे। उन्होंने उस राष्ट्रिय आपदा को बहुत ही सूक्ष्म ढंग से अवसर बनाने  हासिल कर ली थी। अफ़सोस कि कांग्रेस के लीडर उन पलों के इस पहलू पर कुछ नहीं बोलते। 

दुनिया भर के लोग इस सारे घटनाक्रम को सांस रोक कर देख/सुन रहे थे। मीडिया पर बंदिशें लगा दिन गईं थीं। अख़बारों की छपी हुई प्रतियों को ज़ब्त कर लिया गया था। दिल्ली से पंजाब पहुंचने वाली अख़बारों को हर शहर में बिक्री शुरू होने से पहले ही पुलिस की मदद से उठवा लिया गया था। इस सारे घटनाक्रम ने एक ही बात को प्रमुखता से उठाया और फैलाया कि सुरक्षा कर्मियों के वेश में सक्रिय सिक्ख आतंकियों ने प्रधानमंत्री की हत्या कर दी। सुरक्षा के मामले में विश्वासघात किया। किसी ने उस हत्या की ज़िम्मेदारी नहीं ली थी। 

हां खालिस्तानी संगठनों ने हत्यारों का गुणगान करके उन्हें बार बार महिममण्डित अवश्य किया। रागी सिंघों के जत्थों ने गर्म सुर वाले गुरुबाणी शब्दों का गायन शुरू कर दिया। श्री हरिमंदिर साहिब सहित बहुत से गुरुद्वारों में  शब्द पढ़े जाने लगे। ढाढी जत्थों ने इन हत्यारों को  नायक बना कर संगत के सामने रखा। आज भी उनकी याद मनाई जाती है। 

दुनिया भर ने यही समझा और माना कि सिक्ख कौम खतरनाक आतंकी कौम है जिसने प्रधानमंत्री तक को भी नहीं छोड़ा। उनदिनों इंटरनेट आम नहीं था। अगर था भी तो शायद केवल सेना ही इसका उपयोग कर पाती थी। लोग सरकारी मीडिया और और पारम्परिक प्रचार प्रसार साधनों पर ही निर्भर थे। एक बहुत बड़ा ड्रामा अंतराष्ट्रीय मंच पर खेला जा रहा था। तब भी आपदा को अवसर बनाया जा रहा था। इसके साथ ही असली बातें और असली मुद्दे छुपाए जा रहे थे। अंतराष्ट्रीय खिलाडियों को जो सही लगता था वही सामने लाया जा रहा था। साज़िशें आतंकवाद के प्रचार में ही छुप कर रह जातीं। 

जून-84 और नवंबर-84 के बाद पंजाब में खून खराबा ज़ोरों पर रहा। हर गली, हर गांव में दहशत। दूर दूर तक इसके छींटे पहुंचे। ट्रांज़िस्टर बम धमाके बहुत बड़ी घटना थी। पूर्व सेना प्रमुख जनरल अरुण श्रीधर वैद्य की हत्या हुई 10 अगस्त 1986 को। यह भी बहुत बड़ी घटना थी। इसी तरह 31 अगस्त 1995 को  पंजाब के सिवल सचिवालय चंडीगढ़ में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या बहुत बड़ी घटना थी। कांग्रेस पार्टी के सक्रिय नेता और सांसद ललित माकन और उनकी पत्नी की हत्या 31 जुलाई 1985 को पश्चिमी दिल्ली के इलाके कीर्ति नगर में  स्थित उनकी रिहाइशगाह में जा कर कर दी गई। एक दशक से अधिक समय तक चले खूनखराबे पर नियंत्रण होना शुरू हुआ सन 1992 में। हालाँकि मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या 1995 में हुई लेकिन  माना जाता है  कि आतंकी संगठनों पर सुरक्षाबलों का हाथ सन 1992 में ही ऊपर होना शुरू हो गया था। इस सारे घटनाक्रम के साथ ही चल रहा था आपदा को अवसर बनाने खेल। चेहरे और थे लेकिन काम यही हो रहा था। कांग्रेस कभी इस बात पर चर्चा नहीं लकरटीओ कि  के बाद आर्थिक नीतियां क्यूँ बड़े पैमाने पर बदलने लगीं। 

डाक्टर मनमोहन सिंह की तरफ से तैयार सन 1991 का बजट कम महत्वपूर्ण नहीं था इस दिशा में।  पी वी नर सिम्हा राव को "भारतीय आर्थिक सुधारों का पितामह" और इस "धरती का महान सपूत" कहा जाने लगा था। बरस 1991 में शुरू हुआ यह सिलसिला सन 1992 तक उजागर भी होने लगा था। जनमानस भी बहुत हद तक इससे अवगत हो चूका था। तकरीबन काफी चर्चा होती थी इसकी हर रोज़। 

गैट समझौते में आर्थर डंकल की तजवीज़ों पर अटल बिहारी वाजपेयी साहिब ने भी एतराज़ किया था और जनता दल के रबी रेय ने कहा था ह ड्राफ्ट वास्तव में साम्राजयवाद और आर्थिक गुलामी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यूं लगता है कि  भारत सरकार अमेरिका के दबाव में है।  इस ड्राफ्ट को स्वीकार करने का मतलब होगा कृषि और छोटी इंडस्ट्री की तबाही। 

वामदलों ने भी इस पर बहुत ज़ोरदार आवाज़ बुलंद की। फारवर्ड ब्लॉक के चित्तबसु ने इस पर काफी सख्त रुख था। सरकार ने विपक्षी दलों की वह मांग भी रद्द कर दी जिसमें कहा गया था कि  इस डंकल ड्राफ्ट का अध्यन करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति बनाई जाए।  कामर्स मंत्री पी जे कुरियन ने विधायकों को यह आश्वासन अवश्य दिया कि अंतिम रूप दिया जाएगा तब इन सभी सुझावों को सरकार मन में रखेगी और कोशिश करेगी कि इस समझौते के वक़्त अधिक से अधिक फायदा उठाया जा सके। 

आर्थिक सुधारों के लिए चलीं इन खुलीं हवाओं ने पहले सोवियत संघ में भी अपना रंग दिखाया था। मिखाइल गोर्बाचोव के कार्यकाल ने जो रचा वह सभी को नहीं तो बहुतों को याद होगा। प्रेस्टरॉयका और ग्लास्तनोस्त ने भी अपने रंग बिखेरे। सोवियत यूनियन टुकड़े टुकड़े हो गया। एक महांशक्ति थी जिसने संतुलन बनाया हुआ था वह भी रस्ते से हट गई। भारत की बारी भी आनी ही थी। 

इंदिरा गांधी की शख्सियत का एक दबदबा था शायद उनके होते इन आर्थिक सुधारों को लागू करना नामुमकिन होता। अपने सिद्धांतों को छोड़े बिना अमेरिका जैसों से आंख मिलकर बात कर लेना उनके बाद शायद कभी सम्भव न हुआ। इंदिरा गाँधी के बाद देश समाजवाद को छोड़ कर पूंजीवाद की रह पर चल पड़ा। राष्ट्रीयकरण की नीति को पलटने का सिलसिला तेज़ हो गया। आखिर कांग्रेस और वाम इस पर खुल कर बोलते क्यूं नहीं? काश आज इंदिरा गांधी होती तो महंगाई को आसमान पर पहुंचने वाले लोगों पर अंकुश लगा रहता। कार्पोरेट कभी इतनी छूट प्राप्त न कर पाते। कौन करेगा इंदिरा जी के बाद की बात?