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Sunday, March 01, 2015

आनंद मार्ग स्कूल में बहुत ही उत्साह से हुआ वार्षिक उत्सव

 बाबा का ही चमत्कार था भविष्वाणी के बावजूद नहीं हुयी बारिश 
लुधियाना: 28 फ़रवरी 2015: (कार्तिका सिंह//दिलजोत कौर//पंजाब स्क्रीन):
आनंद मार्ग स्कूल न्यू कुंदनपुरी स्कूल का वार्षिक कार्यक्रम घोषित हो चुका था। शाम को सारा आयोजन होना था। स्कूल के बच्चे और प्रबंधक सभी समय पर पहुँच रहे थे पर साथ ही एक चिंता सी सभी के चेहरे पर थी। मौसम की भविष्यवाणी थी कि आज अर्थात 28 फ़रवरी शनिवार की शाम को सात बजे ज़ोरदार बरसात होगी। शाम होते होते सचमुच मौसम खराब होने लगा। आंधी चलने लगी पर इसके बावजूद न तो स्कूल के आचार्य घबरा रहे थे न ही टीचर और न ही बच्चे।  विश्वास के साथ अपनी अपनी आइटम तैयार करने में लगे थे। प्रबंधकों में चिंता बढ़ रही थी की आखिर इस तरह कार्यक्रम कैसे होगा?
सात बजते ही अंधी थम गयी। मौसम सुहावना हो गया। आधी रात के बाद कहीं जाकर बरसात हुयी। यह शायद बाबा का ही एक चमत्कार था। कार्यक्रम शुरू हुआ। रंगबरंगी पोशाकों में बने ठने बच्चे सा माहौल बना रहे थे। शुरुआत हुयी वेलकम  गीत के साथ।  उसके बाद राजस्थान के घूमर और पंजाब के भांगड़े ने सभी को एक तक देखने पर मजबूर कर दिया। घूमर प्रस्तुत करने वाली लड़की ने तो कमाल ही कर दिया। बड़ी सी थाली पर डांस कर सकना किसी आम कलाकार के बस का नहीं होता।
आप भी देखिये ज़रा एक झलक।
 इसी तरह लब पे आती है  दुया बन के …… गीत पर आधारित कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय हुआ।
इसी स्कूल में सक्रिय और इन बच्चों को कोरियोग्राफी सीखा रहे इनके आर्यन सर ने भी अपना कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
कला और मार्ग में  को किसी ऊंचे जीवन की  रहे बच्चे एक से बढ़ कर  प्रस्तुत कर रहे थे। इसी स्कूल में सक्रिय  बच्ची नेरंगीला ग कर तो सभी रंग एक साथ प्रस्तुत कर दिए। श्रोता लोग मग्न हो चुके थे।
बच्चों को पुरस्कार देने की औपचारिकता स्थानीय भुक्ति कमेटी के प्रधान अशोक चावला और बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा और शोभा वशिष्ठ ने निभायी। मास्टर सुरेन्द्र, बिन्देश्वरी दादा, मुकेश दादा, रुपेश दादा और अन्य लोगों ने आचार्य न्यायमित्र  निर्देशन में अपना अपना कर्तव्य निभाया।

Thursday, October 30, 2014

पंजाबी फिल्म 'दी ब्लड स्ट्रीट' का संगीत रिलीज़

ज़ुलम, अन्याय और संघर्ष की कहानी है ब्लड स्ट्रीट 
लुधियाना: 30 अक्टूबर 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
हरजी मूवीज़ की पहली पंजाबी फिल्म  'दी ब्लड स्ट्रीट' का संगीत महानगर में फिरोज़पुर रोड स्थित एक होटल में रिलीज़ किया गया। फिल्म के गीतों को गुरबख्श शौंकी,दविन्द्र पाल सिंह,सोनाली डोगरा,पैनी सिंह तथा मनपाल सिंह आदि ने अपनी आवाज़ में ढाला है.। फिल्म की कहानी बताते हुए निर्माता जसबीर सिंह बोपाराय ने बताया कि यह फिल्म देश की कम गिनती के साथ हुए धक्केशाही की दास्ताँ को दर्शाती है और संघर्षवादी नौजवानो की जि़ंदगी में समय समय की सरकारों द्वारा खड़ी की जा रही दीवारों ,जुल्मो से दवाने की कोशिश को बखूबी बयान किया गया है। फिल्म के निर्देशक दर्शन दर्वेश ने कहा कि भारतीय सैंसर बोर्ड ने इस फिल्म पर अघोषित प्रतिबंध लगा दिया है जिससे फिल्म को प्रदर्शित करने के सभी रास्ते बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि दो वार फिल्म की स्क्रीनिंग होने के बाद भी उनकी ओर से लिखित रूप में ऐसा कारण नहीं बताया जा रहा कि 'आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है?जिसकी वजह से प्रतिबंध लगाया गया है। दर्वेश के अनुसार दो वार मुंबई में महंगे थियटर बुक करके और सैंसर बोर्ड की फीसें अदा करके भी सैंसर बोर्ड की तरफ से कोई लिखित जबाव नहीं मिला है। इस मौके अभिनेत्री सोनप्रीत जवंधा,अभिनेता बिन्नी सिंह,सह अभिनेता करमजीत बराड़,गीतकार मनप्रीत गोसल,संगीतकार मनपाल सिंह,हरिन्द्र सोहल आदि उपस्थित थे। 

जुगल बन्दियाँ बैंड' की सदस्याएँ ,अब महानगर में

दिखाएँगी कला के जौहर और बनाएंगी लोगों के दिलों में जगह 
लुधियाना: 30 अक्टूबर 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
गायन क्षेत्र में एक नया आयाम बनाने के लिए तीन बालाओं द्वारा 'जुगल बन्दियाँ बैंड'बनाया गया है, जो  विभिन्न तर्जों पर अपने गीतों को प्रस्तुत कर देश की जनता का मनोरंजन करेंगी। पत्रकारों से विशेष बात चीत के दौरान बैंड की सदस्याओं ने बताया कि प्रीती साऊथ ओडिशा और राजस्थान से संबध रखती हैं, जिन्होंने इस बैंड को तैयार करने की एक वर्ष पहले अपने मन में ठानी थी। गोल्डन मैलोडीज़ के परमजीत ने उनके इस सपने को साकार करने में पूर्ण सहायता प्रदान की.। करीब 6 महीने पहले बने उक्त बैंड की सदस्याएँ  देश की राजधानी (दिल्ली) में 6 कार्यक्रम आयोजित कर चुकी हैं। प्रीती ने जानकारी देते हुए बताया कि वे लुधियाना में भी स्टेज शो करके शहर वासियों का मनोरंजन करेंगी। बैंड में सभी लड़कियाँ का होना भी एक अलग बात है,और देश में कम ही ऐसा देखने को मिलता है कि बैंड में सभी लड़कियाँ ही हों। बैंड की तीनों लड़कियों ने म्यूजिक में प्रोफैशनल डिग्री हासिल की है.। एक अन्य सदस्या शालू ने बताया कि उनके माता-पिता भी संगीत से संबध रखते हैं.। प्रीति नागराजन भजन गायक सीके नागराजन की सपुत्री हैं.। रेशमा नामक सदस्या के अनुसार 4 वर्ष की आयु में ही उसने संगीत की शिक्षा लेनी आरम्भ कर दी थी.। तीनो गायिकाओं के अनुसार उन्हें पंजाबी गीतों से बहुत अधिक मोह है, परन्तु पंजाबी नहीं जानती,फिर भी मंच पर पंजाबी गीतों को ब-खूबी निभाती हैं।


Tuesday, October 07, 2014

बेगम अख्‍तर के जन्‍म सदी समारोह शुरू

07-अक्टूबर-2014 14:52 IST
जानी-मानी शास्‍त्रीय गायि‍का की स्मृति में स्‍मारक सि‍क्‍के जारी


नई दिल्ली: 7 अक्टूबर 2014: (पीआईबी):

आज से बेगम अख्‍तर के जन्‍म सदी समारोह शुरू हो गए हैं। नई दि‍ल्‍ली में आयोजि‍त एक शानदार समारोह में केन्‍द्रीय संस्‍कृति‍ मंत्री श्रीयुत श्रीपद नाइक ने 100 रुपए और 5 रुपए के स्‍मारक सि‍क्‍के जारी कि‍ए। इस मौके पर दादरा गायि‍का डॉ. रीता गांगुली और ठुमरी गायक श्री शशांक शेखर तथा गज़ल गायि‍का श्रीमती प्रभाती मुखर्जी ने प्रभावशाली कार्यक्रम पेश कि‍ए। 
अख्‍तर बाई फैजाबादी को आम तौर पर बेगम अख्‍तर नाम से जाना जाता है। (अक्‍तूबर 07, 1914 – अक्‍तूबर 30, 1974) वह गज़ल, दादरा और ठुमरी गायि‍का थीं। उन्‍हें गायि‍का के रूप में संगीत नाटक अकादमी पुरस्‍कार प्रदान कि‍ए गए और मरणोपरांत भारत सरकार ने उन्‍हें पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्‍मानि‍त कि‍या। उन्‍हें मल्‍लि‍का-ए-गज़ल का खि‍ताब भी प्रदान कि‍या गया। इस प्रति‍भाशाली गायि‍का के 100 वर्ष की होने पर भारत सरकार ने इस मौके को यादगार बनाने का फैसला कि‍या। इस उद्देश्‍य से एक राष्‍ट्रीय समि‍ति‍ गठि‍त की गई है जि‍सके अध्‍यक्ष केन्‍द्रीय संस्‍कृति‍ मंत्री हैं। यह समि‍ति‍ वर्ष भर मनाए जाने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करेगी। 
बेगम अख्‍तर के सम्‍मान में दि‍ल्‍ली, लखनऊ, हैदराबाद, भोपाल और कोलकाता में कार्यक्रम आयोजि‍त कि‍ए जाएंगे। उनकी कृति‍यों के वेब-पोर्टल, डीज़ि‍टाइज़ेशन/ डॉक्‍यूमेंटेशन इत्‍यादि‍ तैयार कि‍ए जाएंगे और प्रदर्शनि‍यां, प्रकाशन, वि‍चार गोष्‍ठि‍यों का आयोजन कि‍या जाएगा तथा युवा कलाकारों को छात्रवृत्‍त‍ियां‍ दी जाएंगी। (PIB)

विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/ एएम/आरएसएस/एम- 4085

BEGUM AKHTAR (the complete documentary)


Friday, January 17, 2014

नई अल्बम सिख होण दा मान

Fri, Jan 17, 2014 at 10:17 PM
मलकीत सिंह ने अमृतसर में रीलिज की अपनी नई अल्बम 
अमृतसर: 17 जनवरी 2014:(गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):
आपने तूतक-तूतक-तूतियां लोकगीत तो जरूर सुना होगा। यह गीत जिस पंजाबी गायक की आवाज में सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ, उसका नाम है मलकीत सिंह। मलकीत सिंह ने इसके बाद कई अल्बम निकालीं और कई गाने गाएं, लेकिन आज भी उनकी पहचान तूतक-तूतक ही बना हुआ है। अब मलकीत सिंह एक धार्मिक अल्बम सिख हौण दा मान लेकर आए हैं। उन्होंने आज गुरु नगरी अमृतसर पहुच कर सच्चखंड श्री हरमंदिर साहिब में अपनी नई अल्बम सिख होण दा मान की कामयाबी के लिए गुरु घर में नतमस्तक हो कर माथा टेक आर्शीवाद लिया और गुरु घर में अपनी नई अल्बम की कामयाबी के लिए अरदास की, गायक मलकीत सिंह ने प्रेस वार्ता दौरान आपनी अपनी नई अल्बम सिख होण दा मान को रीलिज किया। इस अल्बम की रीलिज के दौरान उन्होंने बताया, कि इस अल्बम में दस धार्मिक गीत हैं और सभी की विडियो भी तैयार की गई हैं। उन्होंने बताया, कि यह एक धार्मिक कैसेट है, जिसमें हर धर्म का सम्मान करो और सिख हौण दा मान जैसे गीत रिकार्ड किए गए हैं। जो न सिर्फ दर्शकों को पसंद आएंगे, बल्कि सिखी का प्रचार और प्रसार भी करेंगे। उन्होंने बताया, कि इसके बाद एक सभ्याचारक अल्बम भी तैयार की गई है, जिसे बैसाखी पर रीलिज किया जाएगा।

Wednesday, October 30, 2013

सरोदवादक अमजद अली खां सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में नतमस्तक

पत्नी और बेटा भी साथ आए:एसजीपीसी ने किया स्वागत व सम्मान 
अमृतसर: 29 अक्टूबर 2013: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): सुप्रसिद्ध सरोद वादक अमजद अली खां अपनी पत्नी और बेटे के साथ गुरु नगरी अमृतसर पहुंचे और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में नतमस्तक होकर परिवार, देश और दुनिया में अमन और शांति के लिए अरदास की। इस मौके पर एसजीपीसी की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया गया है।
   सुप्रसिद्ध सरोद वादक अमजद अली खां अपनी पत्नी शुभलक्ष्मी और बेटे अमान अली खा के साथ गुरु नगरी अमृतसर पहुंचे और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में नतमस्तक हुए। इस मौके पर तीनों ने आम श्रद्धालुओं की तरह सचखंड श्री हरमंदिर साहिब की परिक्रमा की और वाहेगुरु से परिवार, देश और दुनिया में अमन और शांति के लिए अरदास की। इस अवसर पर सरोद वादक अमजद अली खां ने कहा कि वह पहले भी सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में आ चुके हैं और यहां आकर उन्हें असीम शांति का अहसास होता है। उन्होंने बताया, कि उनकी पत्नी और बड़े बेटे अमान अली खां की भी यहां आकर वाहेगुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने की इच्छा थी, तो वह भी उनके साथ यहां आ गए। इसके अलावा उन्होंने बताया, कि जल्द ही उनके बेटों की एक म्युजिक अल्बम रीलिज होने जा रही है। उनके अलावा इस मौके पर पहुंची उनकी पत्नी शुभलक्ष्मी और बेटे अमान अली खां ने कहा, कि सचखंड श्री हरमंदिर साहिब आस्था का केंद्र है और यहां उन्हें असीम शांति के साथ-साथ वाहेगुरु का आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ है।

Tuesday, September 03, 2013

फिर हुआ इश्मीत सिंह की मौजूदगी का अहसास

गीत-संगीत और आवाज़ के जादू से लौट आया गुज़रा हुआ समय 
                                                                                                             Courtesy photo
लुधियाना, 3 सितंबर 2013:(पंजाब स्क्रीन): मौत ने तो इश्मीत को छीन ही लिया था पर उसकी आवाज़ अब भी उसे हमारे दरम्यान रखे हुए है।एक बकार फिर यह अहसास हुआ वॉयस ऑफ इंडिया के विनर रहे स्वर्गीय इशमीत सिंह के 25वें जन्मदिवस के मौके पर जब राजगुरु नगर स्थित इशमीत सिंह म्युजिक इंस्टीच्यूट में म्यूजिकल शो का आयोजन किया गया। इश्मीत सिंह की स्मृति में ये शाम इशमीत के नाम थी। इस संगीतमय शाम के अंतर्गत हुए इस कार्यक्रम का आगाज इशमीत के गायकी के सफर के बारे में दी गई प्रैजैंटेशन से शुरू हुआ जिसका अंदाज़ दिल को छू लेने वाला था। 
इसके बाद इशमीत सिंह के चाचा व इंस्टीच्यूट के डायरैक्टर डा. चरण कमल सिंह ने इशमीत की याद में गाकर कमाल कर दिया। जब उन्होंने जान कढ़ लई वेईमानां वे तू, जान वाली गल करके गीत गाया तो पूरा हाल इश्मीत की स्मृति में ही। सुरीली शाम में कई  लोग मौजूद थे। टी.वी. शो में भाग ले चुके फाइनलिस्टों ने जहां अपने सुरीले और हसीन नगमों से अपनी आवाज का जादू बिखेरा वहीं इश्मीत की संगीतक स्मृतियों को भी एक बार फिर पुनर्जीवित किया। यूं लगता था जैसे गुज़रा हुआ समय एक बार फिर लौट आया हो। आवाज़ और सुरों के इन साधकों को सम्मानित भी किया गया जिसमें आवाज पंजाब दी की विनर सुरमंगल अरोड़ा, भारत की शान की फाइनलिस्ट रुपाली छावड़ा, गुरलीन कौर, वॉयस ऑफ पंजाब की फाइनलिस्ट हरगुण कौर ने बॉलीवुड तराने भी गाए। बतौर मुख्यातिथि पहुंचे जत्थेदार रखविंदर सिंह गाबड़िया, प्रो. सुखवंत सिंह, रणजोध सिंह आदि को भी बुके देकर सम्मानित किया गया। इश्मीत की याद में बहेगी हुई आँखें और रुंधे हुए कंठ बिना बोले ही कह रहे थे की वे इश्मीत को कभी नहीं भूल सकते। इस मौके पर इशमीत सिंह के पिता व एडवाइजरी बोर्ड ऑफ इंस्टीच्यूट के चेयरमैन गुरपिंदर सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने और अशिम नागपाल ने मिलकर इशमीत को श्रद्धांजलि अर्पित की जो सबके दिलो दिमाग को छू रही थी और  में उतर रही थी। अंत में इंस्टीच्यूट की डीन प्रीति बहल ने ए ट्रिब्यूट टू इशमीत सिंह के टाइटल के अंतर्गत इशमीत के जिंदगी के पहुलओं के सबके सामने जागरूक किया। इश्मीत की गैर मौजूदगी में भी इश्मीत की आवाज़ और उसे चाहने वालों की मौजूदगी उसकी ही मौजूदगी का अहसास करा रही थी। 

Friday, August 09, 2013

लुधियाना: हर्षो-उल्लास से मनाया गया तीज का त्यौहार

मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कालेज में हुआ रंगारंग कार्यक्रम
लुधियाना: 8 अगस्त; 2013: (रेक्टर कथूरिया/पंजाब स्क्रीन): तीज का त्योहार इस बार भी हर तरफ हर्षो उल्लास और धूमधाम से मनाया गया। इस सम्बन्ध में एक शानदार कार्यक्रम लुधियाना के मास्टर तार सिंह मेमोरियल कालेज में भी हुआ। हर बार की तरह इस बार भी कॉलेज में सजी-धजी मुटियारें हर तरफ मस्ती, डांस और पंजाबी गानों की धूम से  पूरे माहौल को संगीत और डांस के जादू से यादगारी बना रहीं थीं। कार्यक्रम के दौरान कुछ अलग सा ही नजारा था मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कॉलेज फॉर वुमन का। गौरतलब है कि इस बार कालेज में तीज कार्यक्रम के साथ-साथ फ्रेशर पार्टी का भी आयोजन किया गया। आसमान में आँख मिचोली खलते बादल, सावन की फुहारें, सजी-संवरी, झूला-झूलतीं पंजाबी पहरावे में मोहक लगती मुटियारें तो कहीं मेंहदी रचाती लड़कियां हरव तरफ एक अलग सा रंग था। कहीं रंग-बिंरगी चूडिय़ों की खनखनाहट सुने दे रही थी तो कहीं मुटियारों के सिर पर सजी संतरंगी चुन्नियां और सगी-फूल टीका कोका भूले बी इसरे पंजाब के याद ताज़ा करा रहे थे। वातवरण में गूंजती पंजाबी लोक धुनें और गिद्दे की धमक ने मंच पर एक बार तो वही पंजाब रच दिया था जो अब तेज़ी से लुप्त होता जा रहा है।
        हर तरफ रंग था, जोश था, उत्साह था और आधुनिकता के साथ साथ अपनी परम्परा को अपने साथ बनाये र्ख्न्र का दृढ़ संकल्प भी था। पंजाब की परम्परा को दिखाती पंजाबी ड्रेस और आधुनिक जमाने के साथ कदम मिलाने का जोश दिखाती वेस्टर्न ड्रेस में सजी लड़कियां अपनी परफार्मेंस देने का इंतजार कर रही थीं। 
अपने टीवी के अतीत को एक बार फिर ज्वलंत करती तेजिन्द्र कौर और उसकी टीम की सदस्याएं अपने मनमोहक बोलों और खनखनाती सुरीली आवाज़ के साथ दर्शकों को शुरू से लेकर अंत तक बांधे रखने में कामयाब रहीं। दर्शक और श्रोता मन्त्र मुग्ध हुए नजर आ रहे थे जैसे उन पर किसी ने जादू कर दिया हो। संगीत का जादू, मस्ती का जादू, कुछ बन दिखाने का जोश, कुछ कर दिखाने का संकल्प---तीज के बहाने से इन छात्रायों में छुपी कला और आगे बढने की ललक पंख लगा कर बाहर आ रही थी। सुनिश्चित है की अगर यह कार्यक्रम न हुआ होता तो उह कला अंतर मन के किसी कोने में लगातार छुपी की छुपी ही रह जाती।
         इस मौके पर कॉलेज प्रबंधक कमेटी के प्रधान स्वर्ण सिंह तथाप्रबंधक कमेटी के ठेकेदार कंवलइंद्र भी मौजूद रहे।  कॉलेज प्रिंसीपल प्रवीण कौर चावला ने जहाँ तीज के महत्व की चर्चा की वहीँ नई छात्रयों को सुस्वागतम भी कहा। मिस तीज और मिस फ्रेशर प्रतियोगिता भी करवाई गई। जिसमें तियां दी रानी अर्शदीप कौर, कुड़ी पंजाबण हरमनदीप कौर बनीं तथा कुड़ी मजाजण का ताज नवदीप कौर के सिर सजा। नए आए स्टूडेंट्स के लिए मिस फ्रेशर ऐश्वर्या बनी, फस्र्ट रनरअप शिफाली और सेकेंड रनरअप हरप्रीत कौर बनीं। सभी विजेताओं को प्रधान स्वर्ण सिंह, कंवलइंद्र सिंह ठेकेदार और प्रिंसीपल प्रवीण कौर चावला ने सम्मानित किया।

लुधियाना: हर्षो-उल्लास से मनाया गया तीज का त्यौहार 

Saturday, May 04, 2013

स्‍पीक मैके-

01-मई-2013 20:55 IST
पारंपरि‍क भारतीय शास्‍त्रीय संगीत और संस्‍कृति के उत्‍थान का महत्‍वपूर्ण अंतरराष्‍ट्रीय मंच
विशेष लेख                                                               किरण सेठ*
                                                                                                                 Courtesy Photo
‘’ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईआईटी), खड़गपुर में अध्‍ययन के बाद मैं पीएचडी करने के लिए न्‍यूयार्क के कोलम्बिया विश्‍वविद्यालय गया था। उन्‍हीं दिनों, ब्रुकलिन अकादमी ऑफ म्‍युजिक, न्‍यूयार्क में मुझे ध्रुपद गायन सुनने का मौका मिला। उस गायन ने जैसे मेरे मन के तारों को झंकृत कर दिया। गायक कलाकार थे - उस्‍ताद नसीर अमीयुद्दीन डागर और उस्‍ताद फरीदूद्दीन डागर। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि मैं अपनी संस्‍कृति से कितना दूर हूं’’ यह कथन है किरण सेठ का जो हमारे देश के अधिकतर युवाओं की भी कहानी है। प्रतिस्‍पर्धा के इस युग में हमारा युवा वर्ग कई मायनों में वंचित रह जाता है।
‘’वर्ष 1976 में देश लौटकर मैंने दिल्‍ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईआईटी) में अध्‍यापन शुरू किया। युवाओं को अपनी संस्‍कृति से जोड़ने के लिए मैं दिलो-जान से जुट गया। अगले ही साल मैंने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया।‘’
पिछले 35 वर्षों के दौरान कई लोग साथ जुड़ते चले गए और आज स्पिक मैके भारत के 400 शहरों और 50 विदेशी शहरों में कार्यक्रमों का आयोजन कर चुका है। पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से भारतीय प्रबंधन संस्‍थान कोलकाता में आगामी 20 मई -26 मई, 2013 के बीच पहले अंतरराष्‍ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसका उदघाटन राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी करेंगे।
इस सम्मेलन के दौरान श्रीमती गिरिजा देवी, प्रोफेसर टी.एन. कृष्‍णन, पंडित बिरजू महाराज, विद्वान टी.वी.शंकरनारायणन, पंडित शिव कुमार शर्मा, श्रीमती अंजलि इला मेनन, पांडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई के साथ कई और जाने माने कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। यही नहीं इस सम्‍मेलन के दौरान देश भर से आए स्‍कूलों और कॉलेजों के 1500 विद्यार्थी भारत की प्राचीन आश्रम प्रथा से रूबरू होंगे।
नादभेद नामक कार्यक्रम के माध्‍यम से अखिल भारतीय स्‍तर पर एक शास्‍त्रीय संगीत प्रतिस्‍पर्धा का आयोजन किये जाने की भी योजना है। यह आयोजन स्पिक मैके और दूरदर्शन के संयुक्त तत्वाधान में होगा। यह भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित एक गौरवशाली रियलिटी शो होगा जिसमें कर्नाटक संगीत और हिन्दुस्तानी शैली के गायन और वाद्य यंत्रों की सुंदर प्रस्तुति होगी। इसका एकमात्र उद्देश्य युवाओं में हमारी समृद्ध संगीत परंपरा का प्रचार-प्रसार करना है।
इस कार्यक्रम के दौरान 6 श्रेणियों में पुरस्‍कार प्रदान किए जाएंगे। पंडित भीमसेन जोशी युवा पुरस्‍कार (हिंदुस्‍तानी संगीत), पंडित रविशंकर युवा पुरस्‍कार (हिंदुस्‍तानी वाद्य), उस्‍ताद अल्‍ला रक्‍खा युवा पुरस्‍कार (हिंदुस्‍तानी उपवादक), श्रीमती एम एस सुब्‍बुलक्ष्‍मी युवा पुरस्‍कार (कर्नाटिक गायन), विदवान शेख चिन्‍ना मौलाना युवा पुरस्‍कार (कर्नाटिक वाद्य), विदवान पालघाट मणिअय्यर युवा पुरस्‍कार (कर्नाटिक उपवादक)। प्रत्‍येक श्रेणी के अंतर्गत्‍विजेता को 5 लाख रूपये का नकद पुरस्‍कार प्रदान किया जाएगा। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर फाइनल में आने वाले कलाकारों के अलावा प्रोत्‍साहन के तौर पर 10 हजार रूपये का पुरस्‍कार भी प्रदान किया जाएगा।
भारतीय संगीत कला और संस्‍कृति की धारा हमारे देश के साथ-साथ पूरे विश्‍व को समृद्ध कर रही है। हमारे युवा वर्ग को भी स्पिक मैके के बदौलत अपनी संस्‍कृति के साथ परिचित होने का एक बेहतरीन मंच मिला है।

*लेखक को कला क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा ‘पदम श्री’ पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है।
वि.कासोटिया/संजीव/रत्‍नावली/रीता/चित्रदेव/मलिक/श्‍याम - 88

Monday, January 21, 2013

स्तास नामिन और "दस अवतार"


भारतीय संस्कृति और कला से मोहित हैं-स्तास नामिन
                                                           कोलाज व्यास आफ रशिया 
कई दशक पूर्व जाने माने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी शख्सीयत राज कपूर साहिब की एक फिल्म का एक गीत बहुत लोक प्रिय हुआ था 
मेरा जूता है जापानी 
ये पतलून इंगलिस्तानी 
सर पे लाल टोपी रूसी 
फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी 
फिल्म श्री420 के इस गीत को लिखा था शैलेन्द्र ने और संगीत दिया था शंकर-जयकिशन ने।  गीत संगीत की दुनिया में एक यादगारी छाप छोड़ने वाले जनाब मुकेश साहिब की आवाज़ में जब गीत  दुनिया के सामने आया तो सबके दिल में उतर गया।  आज भी लोग इसे  गुनगुनाते अक्सर सुने जा सकते हैं। इस गीत की  भावना को इतनी मुद्दत के बाद याद दिलाया है रेडियो रूस ने अपनी एक खबर में। खबर है स्तास नामिन और "दस अवतार" की।  रेडियो रूस के मुताबिक स्तास नामिन-एक प्रसिद्ध रूसी रॉक संगीतकार, कलाकार, फोटोग्राफर और थिएटर तथा फिल्म निर्देशक हैं। उन्होंने भारतीय विषय पर एक नाटक तैयार करने का संकल्प किया है। स्तास नामिन का कहना है कि वह भारतीय संस्कृति और कला से मोहित हैं। स्तास नामिन ने कहा-

आप यह सुकर हैरान होंगे कि मुझे भारत से प्यार विगत शताब्दी के आठवें दशक में तब हुआ जब मैंने "बीटल्स" का संगीत सुना। बाद में मैं प्रामाणिक भारतीय कला के संपर्क में आया। तब हमारे देश में भारत से कई संगीत कलाकार आए थे। भारत के परंपरागत वाद्ययंत्रों की सुंदरता और विशिष्टता ने मेरा मन मोह लिया। मैं उन भारतीय संगीत कलाकारों से मिला और भारतीय वाद्ययंत्रों के बारे में जानकारी हासिल की। सितार का तो में दीवाना हो गया और मैंने संकल्प किया कि भारत जाकर सितार वादन की शिक्षा पाऊँगा।

भारत जाने से पहले स्तास नामिन और उसकी संगीत मंडली ने लगभग आधी दुनिया की यात्राएँ कीं और अपने कई दिलचस्प कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उन्होंने अस्सी के दशक में मास्को में आयोजित नशीले पदार्थों के विरुद्ध एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय रॉक संगीत त्योहार में भाग लिया था। उसके बाद उन्होंने विभिन्न देशों के संगीतकारों के साथ मिलकर ब्रिटेन के कई नगरों में अपने संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वह कुछ समय के लिए अमरीका में भी रहे। वहाँ वह संगीत संस्कृति का ज्ञान हासिल करने के प्रयास करते रहे। वहाँ ही उन्होंने सितार ख़रीदा और भारतीय संगीतकारों से सितार वादन सीखना शुरू किया। उसके बाद उन्होंने सितार के साथ अपने संगीत कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू किया और इस साल उन्होंने भारत का दर्शन भी किया। वहाँ उन्होंने भारत के बारे में कुछ दस्तावेज़ी फिल्में बनाईं। उनमें से एक फिल्म वाराणसी और वहाँ आनेवाले तीर्थयात्रियों के बारे में है। स्तास नामिन की यह फिल्म हाल ही में मास्को स्थित भारत के सांस्कृतिक केंद्र में दिखाई गई जो दर्शकों को बहुत पसंद आई। इस फ़िलाम के लिए संगीत भी स्तास नामिन ने स्वयं ही रचा है।

मास्को में स्तास नामिन का अपना एक थीएटर भी है। इस थीएटर में रूसी चैम्बर संगीत, रॉक ओपेरा और संगीत नाटक प्रस्तुत किए जाते हैं। ऐसा लगता है कि यह रूसी फिल्म निर्माता और संगीतकार अपने थिएटर को एक नया रंग देना चाहते हैं। स्तास नामिन ने बताया कि अपने थीएटर में एक भारतीय महाकाव्य पर आधारित संगीत नाटक प्रस्तुत करने की उनकी योजना है। उन्होंने कहा-

हमारे नए संगीत नाटक का नाम होगा- "दस अवतार"। यह भगवान विष्णु के विभिन्न अवतार धारण करने की कहानी होगी जिसका वर्णन प्राचीन पुराणों में किया गया है। यह एक संगीत और नृत्य प्रस्तुति होगी। इसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य होगा। हम रूसी दर्शकों को भारतीय महाकाव्य की विलक्षण झलकियाँ दिखानी चाहते हैं ताकि दर्शक अद्वितीय भारतीय कला और संस्कृति की मूल परंपराओं को अच्छी तरह से समझ सकें।

स्तास नामिन के संगीत नाटक "दस अवतार" में भाग लेने के लिए भारतीय संगीत कलाकारों को आमंत्रित किया गया है और इसमें भारतीय शास्त्रीय नृत्य रूसी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। उम्मीद है कि यह संगीत नाटक अगले वर्ष के पूर्वार्ध में प्रस्तुत किया जाएगा।(
रेडियो रूस से साभार)
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Tuesday, December 25, 2012

भक्ति में शक्ति के आधार पर आगे बढ़ रहा गौरव सग्गी

अभिनय और गायन में फिर लुधियाना की मौजूदगी का अहसास
पंजाबी फिल्मों की बात चले तो जो नाम और चेहरे एकदम जहन में आते है उनमें से एक चेहरा है सरदार भाग सिंह का। चंडीगढ़ के बस स्टैंड से बाहर निकलते ही सडक पार करके उनके घर में जाना किसी वक्त रोज़ की बात हुआ करती थी। वक्त की गर्दिश में फिर यह सिलसिला न चाहते हुए ही लगातार कम होता चला गया। यहाँ रोज़ी रोटी के फ़िक्र में ऐसे सिलसिले अक्सर कम हो जाते हैं। पर उनकी जो बातें अब तक जहन में हैं उनमें से एक है सोमवार। वह सोमवार को उपवास रखते थे। भगवान् शिव में उनकी गहरी आस्था थी। शिव का नटराज रूप उनके ड्राईंग रूम में भी सजा होता। कभी मूड होने पर वह भगवान् शिव और कला की विस्तृत चर्चा भी करते। 
Photo Courtesy:Sara Tariq
इसी तरह गायन और अभिनय के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाने वाली सुलक्षना पंडित भी बहुत अध्यात्मिक थी।सर्दी हो या ओले बरस रहे हों हर रोज़ सुबह पूरे केशों सहित स्नान करना और फिर पूजा पाठ में काफी समय गुज़ारना उनकी दिनचर्या में शामिल था। उनकी आवाज़ में भी जादू सा था और अभिनय में भी। बहुत सी लोकप्रिय फिल्मों में यादगारी भूमिका निभा पाना और फिर फिल्म फेयर एवार्ड भी हासिल कर लेना कोई आसान बात नहीं थी। हालाँकि उनके सामने चुनौती भी सख्त थी और प्रतियोगिता भी। 
दर्शकों के मन में हनुमान जी की छवि बनने के बाद दारा सिंह जी भी धर्म कर्म में बहुत रुचि लेने लगे। शायद यही कारण है कि दर्शक उनमें हनुमान जी को ही देखने लगे। पहले पहले मुझे लगता था की शायद इस तरह के सात्विक किस्म के लोग तामसिक प्रवृतियों से भरी फ़िल्मी दुनिया में सफल नहीं हो सकेंगे। पर इन सबकी सफलता देख कर दुनिया के साथ साथ मैं खुद भी हैरान रह गया। पंजाबी फ़िल्मी दुनिया के महारथी भाग सिंह ने किस तरह अपनी बेटी बरखा को पत्रकारिता की बारीकियों से अवगत करा कर एक कुआलिफाईड पत्रकार बनाया। अभिनय में नई जान डालने 
पठानकोट में गौरव सग्गी के  
भक्ति रस में झूमते भक्त 
वाली अपनी धर्मपत्नी कमला भाग सिंह के साथ किस तरह कदम दर कदम मिला कर कठिन से कठिन रास्तों पर चल कर सफलता की ऊंचाइयों को छुआ यह किसी करामत से कम नहीं। मुझे उनके परिवार के साथ इतय एक एक पल बिना किसी कोशिश के अब तक याद है। भाग सिंह जी का गोरा   रंग और मेहंदी रंगी भूरी दाड़ी कुल मिलकर उनकी शख्सियत बहुत ही आकर्षक लगती रिटायर्मेंट के बाद इस तरह की  सहेज पान तभी संभव होता है जब दिल और दिमाग के ख्याल भी बहुत खूबसूरत हों। ज़िन्दगी के सभी रंगों को उन्हों ने मुस्करा कर समझा। हर मुश्किल को उन्होंने हर बार सुस्वागतम कहा। एक आम इंसान की तरह ज़िंदगी जीते जीते वह अचानक ही अपनी सहजता के कारण खास हो जाते। मुझे याद है एक बार एक फ़िल्मी मेले के आयोजन को लेकर कुछ पत्रकार दोस्तों ने काफी कुछ विरोध में लिखा पर जब वे भाग सिंह जी के सम्पर्क में आये तो उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। वे समझ गए कि मामले को देखना अपनी अपनी सोच पर भी निर्भर करता है। जादू केवल जादूगर की छड़ी में नहीं शब्दों में भी होता है। बाद में यह विरोध दोस्ती में बदल गया। वे पत्रकार दोस्त दिल्ली से उन्हें मिलने विशेष तौर पर चंडीगढ़ आते।
लुधियाना का गौरव सग्गी 
इसी तरह दारा सिंह जी ने भी धमकियों और चुनौतियों को बहुत ही सहजता से सवीकार करके ज़िन्दगी जीने के नए अदाज़ सिखाये। चंडीगढ़ में दारा स्टूडियो की स्थापना का काम आसान नहीं था। मुझे पता चला कि उन्हें उतनी जगह नहीं मिली जितनी वह चाहते थे। किसी सनसनीखेज़ खबर की चाह में मैंने दारा जी से इसी मुद्दे पर सवाल कर दिया। दारा जी मुझे देखकर मुस्कराए और बहुत ही सहजता से बोले अगर सरकार यह जगह भी न देती तो हम क्या कर लेते? दारा जी जैसे महान लोगों ने जिंदगी को जो सलीके और सबक सिखाये उनकी अहमियत वक्त के साथ साथ लगातार बढती रहेगी। उनके पास बैठ कर, उनसे बातें करके एक नई ऊर्जा का अहसास होता था।
आज अचानक यह सब कुछ मुझे याद आ रहा है एक नए युवा चेहरे को देख कर। लुधियाना का गौरव सग्गी भी फ़िल्मी दुनिया को समर्पित है लेकिन पूरी तरह सात्विक रहते हुए। तकरीबन तकरीबन हर रोज़ उपवास, हर रोज़ पूजा पाठ, हर रात्रि मेडिटेशन। सोने में चाहे आधी रात हो जाये लेकिनउठना वही रात को दो बजे और ठंडे पानी से नहा कर रम जाना पूजा पाठ में। मेडिटेशन, रियाज़ या फिर शूटिंग, रिकार्डिंग या कोई और परफोर्मेंस बस यही है गौरव की दिनचर्या। मैंने कभी गौरव को आम लडकों की तरह इधर उधर आलतू फालतू बातों में नहीं देखा। लुधियाना से मुम्बई और मुम्बई से विदेश तक यही है उसका लाइफ स्टाइल।
कहते हैं धरती गोल भी है बहुत छोटी भी। बस इसी सिद्धांत पर एक बार हमारी मुलाकात पठानकोट में हुई। सुबह मूंह अँधेरे से लेकर देर शाम तक हम एक साथ रहे। यह सब किसी प्रोजेक्ट को लेकर था और इसके बारे में वहां शायद किसी को खबर भी नहीं थी लेकिन हमें वहां बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के जाना पड़ा एक ही आयोजन में। हम सब ने जलपान किया लेकिन गौरव का उपवास था। खाना तो दूर जल या चाये की एक बूँद भी नहीं। अचानक ही मेरे सामने किसी आयोजक ने मंच पर गौरव का नाम अनाऊंस करवा दिया और उसके बाद कमरे में आ कर कहा कि अब आप मंच पर आ जाइये अगली बारी आपकी है। सुन कर मुझे चिंता हुई। मुझे मालूम था कि गौरव ने सुबह से कुछ नहीं खाया। 
चाये या पानी का एक घूँट भी नहीं। मुझे लगा कि शायद यह लड़का कहीं मंच पर गिर न पड़े। इसके साथ ही न वहां गौरव की टीम थी न ह साज़ और संगीत का पर्याप्त प्रबंध। पर गौरव के चेहरे पर न चिंता, न डर, न ही घबराहट। आशंकित मन के साथ कुछ ही पलों के बाद मैं भी पीछे पीछे बाहर बने मंच पर चला गया।वहां मेरे देखते ही देखते गौरव ने भगवान् का नाम लेकर अपना गायन शुरू कर दिया। कुछ ही पलों में वहां मौजूद सभी लोग पहले तो मस्त हुए फिर उठ कर गौरव के साथ साथ झूमने लगे।मुझे वह दिन अब भी याद आता है तो मुझे फिर फिर हैरानी होने लगती है। सुबह से लेकर रात तक मैंने गौरव पर से आँख नहीं हटाई तां कि वह छुप कर कहीं कुछ खा तो नहीं रहा पर सचमुच उसने सारा दिन कुछ नहीं खाया-पीया। मुझे लगता है कि इस के बावजूद इतनी अच्छी परफारमेंस किसी दैवी शक्ति से ही संभव हो सकी। गौरतलब है की मेडिटेशन करने वालों की कार्यक्षमता अक्सर बढ़ जाती है। मन की शक्ति एकाग्र हो जाने से उनकी योग्यता विकसित होती है।यही कारण है गौरव एक्टिंग में भी काम कर रहा है और गीत संगीत में भी। इसके साथ ही कैमरे की बारीकियों  को भी वह बहुत ही अच्छी तरह से समझता है। अपनी लोकप्रिय एल्बम "रब दा सहारा" में उसने गायन और अभिनय दोनों में अपना जादू दिखाया है। आखिर में एक बात और इस सबके लिए वह अपने पिता अश्विनी सग्गी और माता के आशीर्वाद को ही एक वरदान मानता है।-रेक्टर कथूरिया 


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भक्ति में शक्ति के आधार पर आगे बढ़ रहा गौरव सग्गी