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Wednesday, April 17, 2013

ऑनलाइन शि‍कायत प्रणाली के माध्‍यम से 2662 शि‍कायतें

राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता हेल्‍पलाइन को मार्च, 2013 में 12,121 कॉल की गई
    राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता हेल्‍पलाइन (एनसीएच) ने मार्च, 2013 के दौरान 12,121 कॉल प्राप्‍त की। इन दूरभाष कॉलों/शि‍कायतों के अलावा एनसीएच वेबसाइट पर ऑनलाइन शि‍कायत प्रणाली के माध्‍यम से 2662 शि‍कायतें भी प्राप्‍त की गईं।

      इनमें सबसे अधि‍क कॉल दि‍ल्‍ली से प्राप्‍त हुईं। इसके बाद उत्‍तर प्रदेश, महाराष्‍ट्र, हरि‍याणा, राजस्‍थान, बि‍हार, पश्‍चि‍म बंगाल, गुजरात, मध्‍य प्रदेश और पंजाब का स्‍थान रहा।

      मार्च, 2013 के दौरान उक्‍त शीर्ष 10 राज्‍यों के संबंध में की गई कॉलों का ब्‍यौरा नीचे दि‍या गया है:-

क्र.सं.
राज्‍य
शि‍कायतें
कुल कॉलों का प्रति‍शत
1
दि‍ल्‍ली
2963
24.45
2
उत्‍तर प्रदेश
1984
16.37
3
महाराष्‍ट्र
1383
11.41
4.
हरि‍याणा
991
8.18
5.
राजस्‍थान
845
6.97
6.
बि‍हार
588
4.85
7.
पश्‍चि‍म बंगाल
526
4.34
8.
गुजरात
464
3.83
9.
मध्‍य प्रदेश
427
3.52

10.
पंजाब
397
3.28

       अधि‍कतम 19 प्रति‍शत शि‍कायतें टेलीकॉम क्षेत्र की प्राप्‍त हुई। इसके बाद का स्‍थान उत्‍पाद, बैंकिंग और ई-कॉमर्स का रहा। देश के उपभोक्‍ता, टोल फ्री राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता, हेल्‍पलाइन संख्‍या 1800-11-400 पर संपर्क कर सकते हैं तथा उपभोक्‍ता संबंधि‍त समस्‍याओं के लि‍ए दूरभाष पर काउंसलिंग भी प्राप्‍त कर सकते हैं। उपभोक्‍ता हेल्‍पलाइन उपभोक्‍ता मामलों के संबंध में सूचना, सलाह और मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। शि‍कायतों को वेबसाइट:www.nationalconsumerhelpline.in. पर भी दर्ज कि‍या जा सकता है।      
वि.कासोटिया\यादराम/राजीव – 1899

Monday, March 04, 2013

पहली बार गूगल + हैंगआउट पर

03-मार्च-2013 19:43 IST
बजट के बारे में नागरिकों के सवालों के जवाब
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम 2013-14 के आम बजट पर करेंगे विशेषज्ञों से चर्चा 
केंद्रीय वित्त मंत्री श्री पी. चिदंबरम कल भारतीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे गूगल+हैंगआउट बहुपक्षीय वीडियो कान्फ्रेन्स के ज़रिए आम बजट 2013-14 पर नागरिकों के सवालों के जवाब देंगे। ऐसा पहली बार हो रहा है जब केंद्रीय मंत्रिमंडल का कोई मंत्री नागरिकों से बात करने आम बजट के बारे में उनके सवालों के जवाब देने के लिए इस माध्यम का इस्तेमाल करेगा। यह संवाद का शक्तिशाली माध्यम है तथा दुनिया भर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले इसे देखते हैं। गूगल + हैंगआउट पर एक बार में 10 लोग भाग ले सकते हैं। बाद में कोई व्यक्ति एयर पर हैंगआउट के इस्तेमाल से इसे यू ट्यूब या लाइव स्ट्रीम पर शेयर कर सकता है। 
वित्त मंत्री गूगल + हैंगआउट पर जानी-मानी हस्तियों के समूह के साथ भी चर्चा करेंगे। इनमें एशिया के वरिष्ठ अर्थशास़्त्री श्री जहांगीर अज़ीज़ और भारत के मुख्य अर्थशास्त्री जेपी मोर्गन, श्री आनंद महिंद्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, श्री अमित सिंघल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गूगल$इंक तथा एक्सिस कैपिटल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मनीष चोखानी शामिल हैं। इसका संचालन वरिष्ठ पत्रकार श्री सेंथिल चेंगलवरयन करेंगे। 

नागरिक google.com/+GoogleIndia पर गूगल इंडिया + पेज या InConversation यूट्यूब चैनल के ज़रिए विशेष बजट गूगल+ हैंगआउट लाइव देख सकेंगे। 

हैंगआउट से पहले नागरिक वीडियो अपलोड करके या यूट्यूब चैनल पर टिप्पणी करके अथवा गूगल इंडिया + पेज और टैगिंग टैक्स्ट या hashtag #asktheFM पर वीडियो के ज़रिए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को अपने सवाल भेज सकते हैं। (PIB)
***

वि. कसोटिया/प्रदीप/सुनील/796

Friday, January 18, 2013

सहयोग करें सफलता आपके कदम चूमेंगी-भावना त्यागी

भारत को ब्रह्माण्ड़ गुरु की गरिमा वापस दिलाने का प्रयास 
दामिनी की जान हम नहीं बचा पाए उसके बाद इस तरह की घटनायों की मुक्कमल रोकथाम भी नहीं कर पाए लेकिन इस के बावजूद महिला सम्मान को लेकर एक आन्दोलन अवश्य खड़ा हुआ जो लगातार मजबूत हो रहा है। जहाँ एक और महिलायों और उनकी पौशाक को लेकर बहुत ज़िम्मेदार समझे जाने वाले लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं वहीँ इस नाज़ुक समय में महिलायों के समान को लेकर एक विशेष आयोजन भी हो रहा है। महिला रत्नों के सम्मान में आप अपने क्षेत्र की महिलायों के नामांकन भी भेज सकते हैं साथ ही आलेख, सुझाव, सहयोग और विज्ञापन भी। इस विशेष आयोजन में कर्मठ, सत्यानिष्ठ,  कर्तव्यनिष्ठ,  संघर्षशील, प्रतिभाशाली, समाजसेवी, राष्ट्रहित  में कार्य करने वाली सभी कार्यक्षेत्रों की महिलाओ का सम्मान किया जायेगा। आयोजकों का कहना है कि विश्व सभ्यता की रक्षा, सुरक्षा एवं वसुधैव कुटुम्बकम् की संस्कृति के विकास व विस्तार हेतु संकल्प के साथ इस महाभियान मे सहयोग करों सफलता आपके कदम चूमेंगी। आपका छोटा सा प्रयास भारत को विश्वगुरु ही नही वरन्
ब्रह्माण्ड़ गुरु की प्राचीन गरिमा वापस दिलाएगा। सम्पर्क   : भावना त्यागी भारतीय (011 22528272, 9013666652) और भू त्यागी भारतीय (विश्व चिंतक) (09999466822, 9013666651) आप अपने सुझाव यहाँ भी भेज सकते हैं जिन्हें आयोजकों तक पहुंचा दिया जायेगा।-- रेक्टर कथूरिया 
*महिला रत्नों का सम्मान                                         *सभी कार्यक्षेत्रों की महिलाओ का सम्मान


*महाभियान मे सहयोग करों--भावना त्यागी भारतीय



नामांकन आमन्त्रण महिला और मीडिया 2013 FFF.pdf
2339K   View   Download  

Monday, January 14, 2013

माउस से एक ही “क्लिक” करने से पूरी सभ्यता का विनाश?

साइबर युद्ध का ख़तरा-अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से
वर्ष 2013 में दुनिया भर में साइबर हमलों की संख्या में बड़ी तेज़गति से वृद्धि होगी। कुछ ख़ास ठिकानों पर ऐसे हमले किए जाएंगे और सरकारी एजेंसियों पर विशाल पैमाने के हमले भी होंगे। यह निष्कर्ष एंटीवायरस निगम "कैसपेर्स्की लैब" के विशेषज्ञों ने निकाला है। अमरीकी खुफिया सेवाओं ने भविष्यवाणी की है कि आनेवाले 20 वर्षों में वैश्विक साइबर युद्ध शुरू हो जाएगा।

"कैसपेर्स्की लैब" के विश्लेषकों के मुताबिक, अगले साल कई सरकारी संस्थानों और व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों की निजी कंपनियों की गोपनीय जानकारी की चोरी बड़े पैमाने पर होने लगेगी। सामाजिक सेवाओं और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर साइबर हमले अक्सर होने की सम्भावना है।

गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी बड़ी नेटवर्क कंपनियों के पास भारी मात्रा में ऑनलाइन जानकारी हासल करने की क्षमता होगी। इसके अलावा, संचार प्रौद्योगिकी के विकास की तेज़गति की बदौलत देशों की सरकारों का अपने नागरिकों पर असीम नियंत्रण हो जाएगा। लेकिन इन देशों के नागरिकों के पास भी अपनी सरकारों को चुनौतियाँ देने के कई अवसर मौजूद होंगे।

वर्तमान में, सूचना प्रौद्योगिकी हमारे समाज के सूचना क्षेत्र के विकास के संदर्भ में एक बड़ा ख़तरा बनती जा रही है। इस संबंध में रूस के सूचना सुरक्षा संघ के अध्यक्ष गेन्नादी येमेलियानोव ने रेडियो रूस को बताया –

ऐसा ख़तरा इसलिए बढ़ता जाएगा क्योंकि इस ख़तरे का एक टाइमबम फिट कर दिया जा चुका है। यदि हम समय पर पर्याप्त सुरक्षा उपाये नहीं करेंगे तो यह बम ज़रूर फटेगा और बड़े विनाश का कारण बनेगा। जब हम सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के इतने ज्यादा आदी हो जाएंगे कि इसके बिना जीवन ही असंभव हो जाएगा तब पूरी दुनिया के लिए बहुत-सी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ज़रा सोचिए, इस सूचना प्रौद्योगिकी ने अचानक ही काम करना बंद कर दिया है। अब आप क्या करेंगे? पूरा जीवन ठप्प। आप ज़रा कल्पना कीजिए कि सभी स्थानों पर बिजली गुल हो गई है। सारा काम ठप्प। वित्तीय और आर्थिक कारणों से भी ऐसा ख़तरा पैदा हो सकता है। इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी को अच्छी तरह से समझने वाले एक बहुत अच्छे दिमाग़ की ही ज़रूरत होगी।

अमरीकी खुफिया सेवाओं ने अपने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें अमरीका के लिए मौजूदा साइबर हमलों के ख़तरों की समीक्षा की गई है। इसमें कहा गया है कि इस क्षेत्र में अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से ही पैदा होगा। लॉस एंजिल्स टाइम्स में छपी इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस, फ्रांस, इज़राइल और दुनिया के कुछ अन्य देश भी साइबर जासूसी करते हैं लेकिन वे उतना विश्वासघात नहीं करेंगे जितना कि चीन कर सकता है। कम से कम रूस ऐसा नहीं कर रहा है। वह अपने व्यापारियों के लाभ के लिए अमरीकी कंपनियों की जानकारियां चुराने की कोशिशें नहीं कर रहा है।

इस बीच, दिसंबर माह की शुरूआत में साइबर रक्षा पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मंच साइबर सुरक्षा एशिया- 2012 के भागीदार इस बात पर सहमत हुए थे कि सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया की मुख्य समस्या यह है कि दुनिया की सरकारें अभी तक यह तय नहीं कर पाई हैः साइबर-आतंकवाद क्या चीज़ है? कुछ देशों की सरकारें साइबर युद्ध के लिए सबसे प्रभावकारी मालवेयर का विकास कर रही हैं। लेकिन कोई भी सरकार यह गारंटी नहीं दे सकती हैं कि ये मालवेयर और वायरस आतंकवादियों के लिए भी उपलब्ध नहीं हो सकेंगे। यदि ऐसा हुआ तो आतंकवादी गिरोह इन मालवेयरों और वायरसों का खूब इस्तेमाल करेंगे। इसलिए कहा जा सकता है कि आज भी दुनिया के कई देशों के लिए अपने ही साइबर संजाल में फंसने का बड़ा भारी ख़तरा बना हुआ है। माउस से एक ही “क्लिक” करने से पूरी सभ्यता का विनाश हो सकता है। (
रेडियो रूस से साभार)
13.12.2012, 16:32         
साइबर युद्ध का ख़तरा

Friday, August 03, 2012

भारत के राष्‍ट्रपति की नए डिजाइन वाली वेबसाइट का शुभारंभ

अब आम नागरिक भी राष्‍ट्रपति से सीधे कर सकेंगे सपंर्क
                                                                                                       साभार चित्र 
भारत के राष्‍ट्रपति की नए डिजाइन वाली वेबसाइट का आज राष्‍ट्रपति भवन में शुभारंभ किया गया। पुरानी वेबसाइट के एतिहासिक परिप्रेक्ष्‍य को बनाए रखा गया है लेकिन नए डिजाइन वाली वेबसाइट में कुछ नई खूबियां जाड़ी गई हैं। इसमें वेबसाइट से सीधे जुड़ने की सुविधा जोड़ी गई है अर्थात राष्‍ट्रपति के लिए फेसबुक और यू ट्यूब जैसे सोशल नेटवर्किंग माध्‍यम उपलब्‍ध कराए गए हैं। ये दोनों खूबियां राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पदभार संभालने के बाद शुरू की गई हैं। नई वेबसाइट में वीडियो गैलरी भी उपलब्‍ध कराई गई है। अब देश के नागरिक राष्‍ट्रपति से सीधे सपंर्क कर सकते हैं। इसके लिए सिर्फ "राष्‍ट्रपति को लिखें" बटन पर क्लिक करना होगा। वेबसाईट का शुभारंभ करते हुए राष्‍ट्रपति की सचिव ओमिता पॉल ने आशा प्रकट की कि इससे भारत के राष्‍ट्रपति को जनता के और करीब जाने में मदद मिलेगी। (पत्र सूचना कार्यालय)                          03-अगस्त 2012   21:21 IST

Sunday, April 29, 2012

इंटरनेट से बढ़ रहे साइबर अपराध भी//तबस्सुम खान

सावधान: खेल खेल में लिया गया पंगा भी दिला सकता है सज़ा
वास्तव में आज इंटरनेट के तमाम पहलू हैं। जीवन की हर आवश्यकता और कामकाज में इसका पर्याप्त दखल हो चुका है। इसके जरिए मानव जीवन में काफी फुर्ती नज़र आने लगी है। जो काम महीनों की मेहनत और लाखों परेशानियों के बावजूद असंभव लगते थे, अब पलक झपकते ही होने लगे हैं।मर्स इंटरनेट के जरिए अपने ग्राहकों की सही पहचान, उत्पादों का पूर्ण विवरण, दामों की समुचित जानकारी तथा उत्पादों की डिजाइन तथा सेवाएं बड़ी आसानी से हासिल करा रहा है। अपने देश में पिछले पांच-छ: सालों के दौरान ही इंटरनेट जैसी तकनीकी का इस्तेमाल सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र का विस्तार कर रही है। आज देश में इंटरनेट का दायरा बड़े महानगरों तक ही सिमटा नहीं रहा है बल्कि आज छोटे शहरों और कस्बों में भी साइबर कैफे की मौजूदगी है। भारत में बढ़ते कम्प्यूटर की तकनीकी के विस्तार की ओर इशारा कर रही है।
सूचना क्रांति के इस नायाब तोहफे को युवाओं ने अपने जीवन में कितना सही रूप में उतारा है, ये कह पाना संभव नहीं लगता।
मनोरंजन के तमाम अन्य साधनों से ऊब रहा युवा वर्ग  घंटों इंटरनेट के जरिए अपना समय व्यतीत करने में व्यस्त है आमतौर पर युवाओं में नेट सर्फिंग का नशा सा छा रहा है। जहां ये युवा नेट सर्फिंग के दौरान नेट फ्रेंड्स में मशगूल रहते हैं। मात्र शब्दों की बुनियाद पर रिश्तों की इमारत खड़ी करने के प्रयास में युवा अकसर धोखा ही खाते हैं। इन युवाओं को मीडिया को माध्यम बनाकर खेल खेलना बेहद आसान तरीका लगता है, जो इंटरनेट के घातक परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं। यह तो सच है इंटरनेट ने युवाओं में काफी गहरी पैठ बना ली है। स्वस्थ मनोरंजन का ज्ञान का सागर का साधन आज साइबर क्राइम का जरिया भी बन रहा है।
साइबर क्राइम के बढ़ते चलन पर रोक लगाने के लिए सन् 2000 में इंफारमेशन टेक्रालॉजी एक्ट बनाया गया, जिसके तहत इंटरनेट पर अवैध वस्तुओं का क्रय-विक्रय, ई-बैंकिंग से जालसाजी, अश्लील मैसेज भेजना, हैकिंग, पासवर्ड की चोरी, ई-मेल बाम्बिंग जैसे मामलों की सजा भी नियुक्त की गई।
कम्प्यूटर कोड में छेड़छाड़-सजा तीन वर्ष।
हैकिंग-सजा कैद या फिर दो लाख का जुर्माना या फिर दोनों संभव हैं। पोर्नोग्राफी (ऐसी कोई भी फोटो या लेख जिसे सामाजिक मानकों के लिहाज से अश्लील करार दिया जाए)-सजा पांच वर्ष (एक लाख जुर्माना)। सरकारी कम्प्यूटर से छेड़छाड-सजा दस वर्ष।
किसी का डिजिटल हस्ताक्षकर बनाना-सजा दो वर्ष।
गलत सूचना देना जिससे कम्प्यूटर को नुकसान हो-सजा दो वर्ष।
अधिकृत रूप में साइट में प्रवेश— सजा दो वर्ष।
किसी भी किस्म के जाली दस्तावेजों का इंटरनेट पर आदान-प्रदान-सजा  दो वर्ष।

इस सबके बावजूद आज साइबर क्राइम पर कंट्रोल करना मुश्किल हो गया है जबकि इंटरनेट के जरिए इस तरह के क्राइम बदस्तूर जारी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों की संख्या में 45 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी उसमें दुनिया भर के कम्प्यूटरों से जुड़े लोगों की केन्द्रीय भूमिका है। आई.टी. जहां रोजगार, विकास एवं जीवन के तमाम समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया है वहीं अपनी विश्वस्तरीय शृंखलाबद्धता के कारण कई बुराइयां की जड़ बन गया है। बढ़ता साइबर अपराध, कम्प्यूटर वायरसों से होने वाले हमले इसका प्रमाण हैं।(दैनिक ट्रिब्यून से साभार)