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Thursday, August 13, 2020

बेंगलुरू में हुई शान-ए-रसूल में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी

Thursday: 13th August 2020 at 3:15 PM
 सज़ा न मिली तो शुक्रवार को आन्दोलन का ऐलान-शाही इमाम पंजाब 
जामा मस्जिद लुधियाना में मीटिंग की अध्यक्षता करते शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी
लुधियाना:13 अगस्त 2020:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
बीते दिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में एक विधायक के भांजे की तरफ से सोशल मीडिया पर पैगंबर इस्लाम हजरत मुहम्मद साहिब सल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में की गई गुस्ताखी के बाद जहां बेंगलुरू की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, वहीं देश भर के मुसलमानों में गुस्से की लहर दौड़ गई है, आज यहां स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रही जमात मजलिस अहरार इस्लाम की ओर से एतिहासिक जामा मस्जिद लुधियाना में इस विषय पर पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि बेंगलुरू में शान ए रसूल सल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम में की गई गुस्ताखी हरगिज बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शाही इमाम ने कहा कि अगर जल्दी ही अपराधियों को पकड़ कर सजा नहीं दी गई तो देश भर के करोड़ो मुस्लमान अंदोलन के लिए एक ही समय पर सडक़ों पर आ जाएंगे, क्योंकि यह पैगंबर हजरत मुहम्मद साहिब सल्लाहु अलैहि वसल्लम के सम्मान का मामला है, जिसमें मुसलमानों ने कभी कोई समझौता नहीं किया है। शाही इमाम पंजाब ने कहा कि प्यारे मुहम्मद सल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम हर एक मुसलमान को अपनी जान से ज्यादा अजीज है। अपने नबी साहिब के लिए मुसलमान कौम का हर मर्द, औरत, बच्चा अपनी कुर्बानी पेश करने के लिए तैयार है। शाही इमाम ने कहा कि सरकार इसको कोई आम मसला न समझे। इतिहास गवाह है दुनिया के किसी भी हिस्से में हम कम हो या ज्यादा गुस्ताख ए रसूल को कभी बर्दाश्त नहीं करते, शही इमाम ने कहा कि गुस्ताखी करने वाला किसी धर्म का नहीं है वह नास्तिक है। क्योंकि कोई भी मजहब किसी दूसरे मजहब की बेइज्जती की शिक्षा नहीं देता है,वर्णण योग्य है कि बेंगलुरू पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई को देखा जाएगा,अगर अपराधियों को नहीं पकड़ा गया तो शुक्रवार को आंदोलन का ऐलान किया जाएगा।
रोपड़ में कुरान शरीफ की बेअदबी करने वालों को गिरफ्तार करो- उस्मान रहमानी
लुधियाना: 13 अगस्त 2020:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
नूरपुर बेदी के करीबी गांव घाई माजरा, कट्टा सबोर में बीते तीन दिन पहले पवित्र कुरान शरीफ की हुई बेअदबी की घटना की नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने निंदा करते हुए पंजाब सरकार से मांग की है कि कुरान शरीफ की बेअदबी करने वालो को जल्दी गिरफ्तार किया जाए, उस्मान रहमानी ने कहा कि पंजाब की पवित्र धरती पर बार बार पवित्र ग्रंथों के साथ हो रही बेअदबी खुदा के कहर को न बुला ले, उन्होंने कहा कि तीन दिन गुजर जाने के बाद भी कीरतपुर साहिब हल्के की पुलिस इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी जो कि दुख की बात है। नायब शाही इमाम ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए जल्दी ही लुधियाना जामा मस्जिद से एक वफद रोपड़ जाएगा जिसकी रहनुमाई शाही इमाम साहिब करेंगे।

Monday, March 26, 2012

इडिंठकरई में चल रहे उपवास के समर्थन में

सात दिवसी देश व्यापी उपवास  जगह-जगह विरोध
कूड़ंकुलम में सक्रिय परमाणु विरोधी अभियान गरमाया मार्च २६, नयी दिल्ली : कूड़ंकुलम परमाणु बिजलीघर के विरोध में इडिंठकरई, तमिल नाडु में चल रहे उपवास के समर्थन में, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, परमाणु निशस्त्रीकरण और शांति के लिए गठबंधन, लोक राजनीति मंच और दिल्ली समर्थक समूह ने संयुक्त रूप से जंतर मंतर, दिल्ली, पर 26 मार्च से 1 अप्रैल 2012 तक सात दिवसीय उपवास का आह्वान दिया है। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के राष्ट्रीय समन्वयक और प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पाण्डेय ने आज से जंतर मंतर पर सात दिन का उपवास सुरु किया है | इन सात दिनों में अन्य कई लोग क्रमिक अनशन भी करेंगे |


कूड़ंकुलम परमाणु बिजलीघर के विरोध में चेन्नई में भी लोग उपवास पर हैं और मुंबई में प्रख्यात फिल्म निर्माता आनंद पटवर्धन दादर रेलवे स्टेशन के सामने विरोध का नेतृत्व करेंगे। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय आन्ध्र प्रदेश ने २७ मार्च को शाम ६ बजे से ८ बजे तक एक प्रदर्शन और मोमबती जुलूस निकलने का भी कार्यक्रम आंबेडकर मूर्ती, टैंक बंद, हैदराबाद में किया है |
कूड़ंकुलम परमाणु बिजली घर के विरोध में, 27 मार्च 2012 को एक दिवसीय उपवास का आयोजन देश में जगह जगह होगा।


यह विडम्बना ही तो है कि एक तरफ भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में, श्री लंका में तमिल लोगों के ऊपर हुए अत्याचार का मुद्दा उठाया है, परंतु देश के भीतर तमिल नाडु में परमाणु बिजली घर बनाने की जिद्द पर भारत अड़ा हुआ है जिसकी वजह से तमिल नाडु में रह रहे लोग खतरनाक परमाणु दुष्परिणामों को आने वाले सालों में भुगत सकते हैं।


हम भारत सरकार के गैर लोकतान्त्रिक ढंग से परमाणु ऊर्जा थोपने के प्रयास का विरोध करते हैं। अमरीका और यूरोप में जब भारी संख्या में आम लोग सड़क पर उतार आए तब उनकी सरकारों को परमाणु ऊर्जा त्यागनी पड़ी परंतु भारत में जब आम लोग परमाणु ऊर्जा पर सवाल उठा रहे हैं तो उनकी आवाज़ दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कुडनकुलम, तमिल नाडु के डॉ उदयकुमार के नेतृत्व में परमाणु ऊर्जा के विरोध में जन अभियान को भारत सरकार ने भ्रामक आरोपों आदि द्वारा दबाने का पूरा प्रयास किया है। जब कि डॉ उदयकुमार ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया है और उनके पास ‘एफ.सी.आर.ए.’ ही नहीं है जिससे ‘विदेशी पैसा’ लिया जा सके। यह भी साफ ज़ाहिर है कि भारत सरकार स्वयं ‘विदेशी’ ताकतों (जैसे कि अमरीका, रूस, आदि) के साथ मिलजुल कर सैन्यीकरण और परमाणु कार्यक्रम बढ़ा रही है।


भारत सरकार ने एक जर्मन नागरिक को जिसने शांतिपूर्वक कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा विरोधी अभियान में भाग लिया था, उसको पकड़ कर वापिस जर्मनी भेज दिया। 8 मार्च 2012 को भारत सरकार ने एक जापानी नागरिक का वीसा भी रद्द कर दिया। ‘ग्रीनपीस’ के निमंत्रण पर फुकुशिमा,जापान में 11 मार्च 2011 को हुई परमाणु दुर्घटना झेले हुए माया कोबायाशी को भारत सरकार ने 15 फरवरी 2012 को ‘बिजनेस’ वीसा दिया था जिससे कि वो भारत में एक सप्ताह आ कर जगह-जगह आयोजित कार्यक्रमों में परमाणु विकिरण आदि खतरों के बारे में बता सकें। परंतु 8 मार्च 2012 को भारत ने उनका वीसा ही रद्द कर दिया।


हाल हे में तमिल नाडु मुख्य मंत्री द्वारा डॉ एस.पी. उदयकुमार को नक्सलवादी करार करने का प्रयास यह ज़ाहिर करता है कि सरकार परमाणु कार्यक्रम को लागू करने के लिए कितनी मजबूर है। हम सरकार के आम लोगों को गुमराह करने का और परमाणु कार्यक्रम में पारदर्शिता नहीं रखने का भरसक विरोध करते हैं।


अब विकसित दुनिया यह मानने लगी है कि निम्न चार कारणों से नाभिकीय ऊर्जा का कोई भविष्य नहीं हैः (1) इसका अत्याधिक खर्चीला होना, (2) मनुष्य स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए खतरनाक, (3) नाभिकीय शस्त्र के प्रसार में इसकी भूमिका से जुड़े खतरे, व  (4) रेडियोधर्मी कचरे के दीर्घकालिक निपटारे की चुनौती।


भारत को नाभिकीय ऊर्जा का विकल्प ढूँढना चाहिए जो इतने खर्चीले व खतरनाक न हों। पुनर्प्राप्य ऊर्जा के संसाधन, जैसे सौर, पवन, बायोमास, बायोगैस, आदि, ही समाधान प्रदान कर सकते हैं यह मान कर यूरोप व जापान तो इस क्षेत्र में गम्भीर शोध कर रहे हैं। भारत को भी चाहिए कि इन विकसित देशों के अनुभव से सीखते हुए नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्र में अमरीका व यूरोप की कम्पनियों का बाजार बनने के बजाए हम भी पुनर्प्राप्य ऊर्जा संसाधनों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करें। भारत को ऐसी ऊर्जा नीति अपनानी चाहिए जिसमें कार्बन उत्सर्जन न हो और परमाणु विकिरण के खतरे भी न हो।


हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि परमाणु ऊर्जा के मुद्दे पर लोकतान्त्रिक तरीके से खुली बहस करवाए और जब तक यह सर्व सम्मति से निर्णय नहीं होता कि भारत को परमाणु कार्यक्रम चलना चाहिए या नहीं, परमाणु कार्यक्रम को स्थगित करे।


जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, परमाणु निशस्त्रीकरण और शांति के लिए गठबंधन, और लोक राजनीति मंच


अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: पी.के. सुंदरम 9810556134, रमेश शर्मा 9818111562, मधुरेश कुमार ९८१८९०५३१६, विजयन एम् जे 9582862682