Showing posts with label All India Radio. Show all posts
Showing posts with label All India Radio. Show all posts

Wednesday, April 24, 2019

बातों ही बातों में दिल के राज़ जान लेने वाली आर जे रिनी

मॉडल टाउन के एक संस्थान ने कराया सबके साथ रूबरू  
लुधियाना: 24 अप्रैल 2019: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::
आप ने बहुत बार सुनी होगी दिल में उतरती हुई सुरीली सी आवाज़। बिना आप से पूछे आपके दिल में उठते सवालों का जवाब देने वाली आवाज़। आप से बातें करती हुई खनकती सी आवाज़। जो गम आप ने सब से छुपा कर रखे; उन ग़मों की बात करती हुई कोई आकाशीय और दिव्य सी आवाज़--सिर्फ बात ही नहीं अक्सर किसी न किस समस्या के समाधान का कोई न कोई रास्ता भी बताती हुई वह जादूभरी आवाज़। दिल की बात करते करते दिमाग में पहुंच जाना और दिमाग की बात करते करते मन के साथ साथ अंतरात्मा को छू लेना। गंभीर से गंभीर मन को कुछ पलों के लिए चंचल सा बना देना--किसी चमत्कार से कम नहीं। लेकिन इस तरह के करिश्मे दिखाने वाली रेडियो जॉकी रिनी से मिलना आसान भी नहीं। एफ एम गोल्ड या दूरदर्शन में जाना हर किसी के बस में कहाँ? मुलाकात हो भी जाये तो भी वहां खुल कर बातों का माहौल कहां। लुधियाना के लोगों को आर जे रिनी से मुलाक़ात का सुअवसर प्रदान किया ओएस्टर इंसिच्यूट ऑफ़ ब्यूटी एन्ड वेलनेस नामक संस्थान ने। 
लुधियाना के मॉडल टाऊन में स्थित इस सेलून में रूबरू हुई आर जे रिनी। बहुत से लोगों ने केवल दूर से जिसकी आवाज़ सुनी थी--वही रिनी आज उन सभी के सामने थी। उन्हें अपने काम के बारे में अपने अनुभव बताती हुई, ज़िंदगी के संघर्ष की जानकारी देती हुई, रेडियो और दूरदर्शन से मिले उड़ान के पंखों की चर्चा करती हुई, आवाज़ की दुनिया के सपनों के साकार होने की चर्चा करती हुई।  
यकीन नहीं हो रहा था कि रेडियो और टीवी के बक्से से निकल कर जादुई आवाज़ की वह मलिका सब के सामने साकार खड़ी है। सेलून में आई महलाएं उन्हें छु छू कर अपनी तसल्ली कर रहीं थी। उनकी फैंस उनके साथ तस्वीरें खिंचवा रही थी। आर जे रिनी उन्हें बता रहीं थी कि ज़िंदगी में खुद को खूबसूरत और तंदरुस्त बनाये रखना कितना ज़रूरी है। कभी मौसम की तब्दीली और कभी खानपान में कोई गड़बड़ी... इसका खमियाज़ा हमारे तन या मन को न भुगतना पड़े इस का मार्गदर्शन करते हैं देश के जानेमाने स्वास्थ्य विशेषज्ञ जिनसे मिलने का मौका आसानी से मिलता है इस तरह के सौंदर्य वर्द्धन संस्थानों में। 
आर जे रिनी ने ब्यूटी सैलूनों की अहमियत के साथ साथ सौंदर्य के इस क्षेत्र में  बने कैरियर के सुअवसरों की भी चर्चा की। इस मौके पर इस संस्थान के सीईओ डाक्टर अमित खोसला, डाक्टर रोहित टंडन, मैडम नीलम खोसला, डाक्टर मेहर और अन्य लोग भी मौजूद रहे। कुल मिलकर यह एक यादगारी आयोजन था। उम्मीद करनी चाहिए कि लोकप्रिय संस्थान आर जे रिनी की तरह अन्य शख्सियतों से भी रूबरू करवाते रहेंगे। 

Sunday, October 30, 2016

संकटों के बीच में भी, एकता के मंत्र को ले करके आगे बढ़ना है-PM मोदी


30-अक्टूबर-2016 12:09 IST
हमारा हर पर्व शिक्षादायक होता है
30 अक्तूबर 2016 को आकाशवाणी पर प्रधानमंत्री के 'मन की बात' संबोधन का मूल पाठ
मेरे प्यारे देशवासियो, आप सबको दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनायें। भारत के हर कोने में उत्साह और उमंग के साथ दीपावली का पर्व मनाया जाता है। भारत एक ऐसा देश है कि 365 दिन, देश के किसी-न-किसी कोने में, कोई-न-कोई उत्सव नज़र आता है। दूर से देखने वाले को तो कभी यही लगेगा कि जैसे भारतीय जन-जीवन, ये उत्सव का दूसरा नाम है, और ये स्वाभाविक भी है। वेद-काल से आज तक भारत में जो उत्सवों की परम्परा रही है, वे समयानुकूल परिवर्तन वाले उत्सव रहे हैं, कालबाह्य उत्सवों की परम्परा को समाप्त करने की हिम्मत हमने देखी है और समय और समाज की माँग के अनुसार उत्सवों में बदलाव भी सहज रूप से स्वीकार किया गया है। लेकिन इन सबमें एक बात हम भली-भाँति देख सकते हैं कि भारत के उत्सवों की ये पूरी यात्रा, उसका व्याप, उसकी गहराई, जन-जन में उसकी पैठ, एक मूल-मन्त्र से जुड़ी हुई है – स्व को समष्टि की ओर ले जाना। व्यक्ति और व्यक्तित्व का विस्तार हो, अपने सीमित सोच के दायरे को, समाज से ब्रह्माण्ड तक विस्तृत करने का प्रयास हो और ये उत्सवों के माध्यम से करना। भारत के उत्सव कभी खान-पान की महफ़िल जैसे दिखते हैं। लेकिन उसमें भी, मौसम कैसा है, किस मौसम में क्या खाना चाहिये। किसानों की कौन सी पैदावार है, उस पैदावार को उत्सव में कैसे पलटना। आरोग्य की दृष्टि से क्या संस्कार हों। ये सारी बातें, हमारे पूर्वजों ने बड़े वैज्ञानिक तरीक़े से, उत्सव में समेट ली हैं। आज पूरा विश्व environment की चर्चा करता है। प्रकृति-विनाश चिंता का विषय बना है। भारत की उत्सव परम्परा, प्रकृति-प्रेम को बलवान बनाने वाली, बालक से लेकर के हर व्यक्ति को संस्कारित करने वाली रही है। पेड़ हो, पौधे हों, नदी हो, पशु हो, पर्वत हो, पक्षी हो, हर एक के प्रति दायित्व भाव जगाने वाले उत्सव रहे हैं। आजकल तो हम लोग Sunday को छुट्टी मनाते हैं, लेकिन जो पुरानी पीढ़ी के लोग हैं, मज़दूरी करने वाला वर्ग हो, मछुआरे हों, आपने देखा होगा सदियों से हमारे यहाँ परम्परा थी – पूर्णिमा और अमावस्या को छुट्टी मनाने की। और विज्ञान ने इस बात को सिद्ध किया है कि पूर्णिमा और अमावस को, समुद्र के जल में किस प्रकार से परिवर्तन आता है, प्रकृति पर किन-किन चीज़ों का प्रभाव होता है। और वो मानव-मन पर भी प्रभाव होता है। यानि यहाँ तक हमारे यहाँ छुट्टी भी ब्रह्माण्ड और विज्ञान के साथ जोड़ करके मनाने की परम्परा विकसित हुई थी। आज जब हम दीपावली का पर्व मनाते हैं तब, जैसा मैंने कहा, हमारा हर पर्व एक शिक्षादायक होता है, शिक्षा का बोध लेकर के आता है। ये दीपावली का पर्व ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ - अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने का एक सन्देश देता है। और अन्धकार, वो प्रकाश के अभाव का ही अन्धकार वाला अन्धकार नहीं है, अंध-श्रद्धा का भी अन्धकार है, अशिक्षा का भी अन्धकार है, ग़रीबी का भी अन्धकार है, सामाजिक बुराइयों का भी अन्धकार है। दीपावली का दिया जला कर के, समाज दोष-रूपी जो अन्धकार छाया हुआ है, व्यक्ति दोष-रूपी जो अन्धकार छाया हुआ है, उससे भी मुक्ति और वही तो दिवाली का दिया जला कर के, प्रकाश पहुँचाने का पर्व बनता है। 

एक बात हम सब भली-भांति जानते हैं, हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में चले जाइए, अमीर-से-अमीर के घर में चले जाइए, ग़रीब-से-ग़रीब की झोपड़ी में चले जाइए, दिवाली के त्योहार में, हर परिवार में स्वच्छता का अभियान चलता दिखता है। घर के हर कोने की सफ़ाई होती है। ग़रीब अपने मिट्टी के बर्तन होंगे, तो मिट्टी के बर्तन भी ऐसे साफ़ करते हैं, जैसे बस ये दिवाली आयी है। दिवाली एक स्वच्छता का अभियान भी है। लेकिन, समय की माँग है कि सिर्फ़ घर में सफ़ाई नहीं, पूरे परिसर की सफ़ाई, पूरे मोहल्ले की सफ़ाई, पूरे गाँव की सफ़ाई, हमने हमारे इस स्वभाव और परम्परा को विस्तृत करना है, विस्तार देना है। दीपावली का पर्व अब भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है। विश्व के सभी देशों में किसी-न-किसी रूप में दीपावली के पर्व को याद किया जाता है, मनाया जाता है। दुनिया की कई सरकारें भी, वहाँ की संसद भी, वहाँ के शासक भी, दीपावली के पर्व के हिस्से बनते जा रहे हैं। चाहे देश पूर्व के हों या पश्चिम के, चाहे विकसित देश हों या विकासमान देश हों, चाहे Africa हो, चाहे Ireland हो, सब दूर दिवाली की धूम-धाम नज़र आती है। आप लोगों को पता होगा, America की US Postal Service, उन्होंने इस बार दीपावली का postage stamp जारी किया है। Canada के प्रधानमंत्री जी ने दीपावली के अवसर पर दिया जलाते हुए अपनी तस्वीर Twitter पर share की है।
 
Britain की प्रधानमंत्री ने London में दीपावली के निमित्त, सभी समाजों को जोड़ता हुआ एक Reception का कार्यक्रम आयोजित किया, स्वयं ने हिस्सा लिया और शायद U.K. में तो कोई ऐसा शहर नहीं होगा, कि जहाँ पर बड़े ताम-झाम के साथ दिवाली न मनाई जाती होI Singapore के प्रधानमंत्री जी ने Instagram पर तस्वीर रखी है और उस तस्वीर को उन्होंने दुनिया के साथ share किया है और बड़े गौरव के साथ किया है। और तस्वीर क्या है। Singapore Parliament की 16 महिला MPs भारतीय साड़ी पहन करके Parliament के बाहर खड़ी हैं और ये photo viral हुई है। और ये सब दिवाली के निमित्त किया गया हैI Singapore के तो हर गली-मोहल्ले में इन दिनों दिवाली का जश्न मनाया जा रहा हैI Australia के प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय को दीपावाली की शुभकामनायें और Australia के विभिन्न शहरों में दीपावली के पर्व में हर समाज को जुड़ने के लिए आह्वान किया है। अभी New Zealand के प्रधानमंत्री आए थे, उन्होंने मुझे कहा कि मुझे जल्दी इसलिए वापस जाना है कि मुझे वहाँ दिवाली के समारोह में शामिल होना है। कहने का मेरा तात्पर्य यह है कि दीपावली, ये प्रकाश का पर्व, विश्व समुदाय को भी अंधकार से प्रकाश की ओर लाए जाने का एक प्रेरणा उत्सव बन रहा है। 

दीपावली के पर्व पर अच्छे कपड़े, अच्छे खान-पान के साथ-साथ पटाखों की भी बड़ी धूम मची रहती है। और बालकों को, युवकों को बड़ा आनंद आता है । लेकिन कभी-कभी बच्चे दुस्साहस भी कर देते हैं। कई पटाखों को इकठ्ठा कर-कर के बड़ी आवाज़ करने की कोशिश में एक बहुत बड़े अकस्मात को निमंत्रण दे देते हैं। कभी ये भी ध्यान नहीं रहता है कि आसपास में क्या चीजें हैं, कहीं आग तो नहीं लग जाएगी। दीपावली के दिनों में अकस्मात की ख़बरें, आग की ख़बरें, अपमृत्यु की ख़बरें, बड़ी चिंता कराती हैं। और एक मुसीबत ये भी हो जाती है कि दिवाली के दिनों में डॉक्टर भी बड़ी संख्या में अपने परिवार के साथ दिवाली मनाने चले गए होते हैं, तो संकट में और एक संकट जुड़ जाता है। मेरा खास कर के माता-पिताओं को, parents को, guardians को खास आग्रह है कि बच्चे जब पटाखे चलाते हों, बड़ों को साथ खड़े रहना चाहिए, कोई ग़लती न हो जाए, उसकी चिंता करनी चाहिए और दुर्घटना से बचना चाहिए । हमारे देश में दीपावली का पर्व बहुत लम्बा चलता है। वो सिर्फ एक दिन का नहीं होता है। वो गोवर्धन पूजा कहो, भाई दूज कहो, लाभ पंचमी कहो, और कार्तिक पूर्णिमा के प्रकाश-पर्व तक ले जाइए, तो एक प्रकार से एक लंबे कालखंड चलता है। इसके साथ-साथ हम दीपावली का त्योहार भी मनाते हैं और छठ-पूजा की तैयारी भी करते हैं। भारत के पूर्वी इलाके में छठ-पूजा का त्योहार, एक बहुत बड़ा त्योहार होता है। एक प्रकार से महापर्व होता है, चार दिन तक चलता है, लेकिन इसकी एक विशेषता है-समाज को एक बड़ा गहरा संदेश देता है। भगवान सूर्य हमें जो देते हैं, उससे हमें सब कुछ प्राप्त होता है। प्रत्यक्ष और परोक्ष, भगवान सूर्य देवता से जो मिलता है, उसका हिसाब अभी लगाना ये हमारे लिये कठिन है, इतना कुछ मिलता है और छठ-पूजा, सूर्य की उपासना का भी पर्व है । लेकिन कहावत तो ये हो जाती है कि भई, दुनिया में लोग उगते सूरज की पूजा करते हैं। छठ-पूजा एक ऐसा उत्सव है, जिसमें ढलते सूरज की भी पूजा होती है। एक बहुत बड़ा सामाजिक संदेश है उसमें । 

मैं दीपावली के पर्व की बात कहूँ, छठ-पूजा की बात कहूँ-ये समय है आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनायें देने का, लेकिन साथ-साथ मेरे लिये समय और भी है, ख़ासकर के देशवासियों का धन्यवाद करना है, आभार व्यक्त करना है। पिछले कुछ महीनों से, जो घटनायें आकार ले रही हैं, हमारे सुख-चैन के लिये हमारे सेना के जवान अपना सब कुछ लुटा रहे हैं। मेरे भाव-विश्व पर सेना के जवानों की, सुरक्षा बलों के जवानों की, ये त्याग, तपस्या, परिश्रम, मेरे दिल-दिमाग पर छाया हुआ रहता है। और उसी में से एक बात मन में कर गई थी कि यह दिवाली सुरक्षा बलों के नाम पर समर्पित हो। मैंने देशवासियों को ‘Sandesh to Soldiers’ एक अभियान के लिए निमंत्रित किया। लेकिन मैं आज सिर झुका कर के कहना चाहता हूँ, हिंदुस्तान का कोई ऐसा इन्सान नहीं होगा, जिसके दिल में देश के जवानों के प्रति जो अप्रतिम प्यार है, सेना के प्रति गौरव है, सुरक्षा-बलों के प्रति गौरव है। जिस प्रकार से उसकी अभिव्यक्ति हुई है, ये हर देशवासी को ताक़त देने वाली है। सुरक्षा-बल के जवानों को तो हम कल्पना नहीं कर सकते, इतना हौसला बुलंद करने वाला, आपका एक संदेश ताक़त के रूप में प्रकट हुआ है। स्कूल हो, कॉलेज हो, छात्र हो, गाँव हो, ग़रीब हो, व्यापारी हो, दुकानदार हो, राजनेता हो, खिलाड़ी हो, सिने-जगत हो - शायद ही कोई बचा होगा, जिसने देश के जवानों के लिए दिया न जलाया हो, देश के जवानों के लिए संदेश न दिया हो। मीडिया ने भी इस दीपोत्सव को सेना के प्रति आभार व्यक्त करने के अवसर में पलट दिया और क्यों न करें, चाहे BSF हो, CRPF हो, Indo-Tibetan Police हो, Assam Rifles हो, जल-सेना हो, थल-सेना हो, नभ-सेना हो, Coast Guard हो, मैं सब के नाम बोल नहीं पाता हूँ, अनगिनत। ये हमारे जवान किस-किस प्रकार से कष्ट झेलते हैं - हम जब दिवाली मना रहे हैं, कोई रेगिस्तान में खड़ा है, कोई हिमालय की चोटियों पर, कोई उद्योग की रक्षा कर रहा है, तो कोई airport की रक्षा कर रहा है। कितनी-कितनी जिम्मेवारियाँ निभा रहे हैं। हम जब उत्सव के मूड में हों, उसी समय उसको याद करें, तो उस याद में भी एक नई ताक़त आ जाती है। एक संदेश में सामर्थ्य बढ़ जाता है और देश ने कर के दिखाया। मैं सचमुच में देशवासियों का आभार प्रकट करता हूँ। कइयों ने, जिसके पास कला थी, कला के माध्यम से किया। कुछ लोगों ने चित्र बनाए, रंगोली बनाई, cartoon बनाए, जो सरस्वती की जिन पर कृपा थी, उन्होंने कवितायें बनाईं। कइयों ने अच्छे नारे प्रकट किये। ऐसा मुझे लग रहा है, कि जैसे मेरा Narendra Modi App या मेरा My Gov, जैसे उसमें भावनाओं का सागर उमड़ पड़ा है - शब्द के रूप में, पिंछी के रूप में, कलम के रूप में, रंग के रूप में, अनगिनत प्रकार की भावनायें, मैं कल्पना कर सकता हूँ, मेरे देश के जवानों के लिये कितना गर्व का एक पल है। ‘Sandesh to Soldiers’ इस Hashtag पर इतनी सारी चीज़ें-इतनी सारी चीज़ें आई हैं, प्रतीकात्मक रूप में। 

मैं श्रीमान अश्विनी कुमार चौहान ने एक कविता भेजी है, उसे पढ़ना पसंद करूँगाI 

अश्विनी जी ने लिखा है - 
“मैं त्योहार मनाता हूँ, ख़ुश होता हूँ, मुस्कुराता हूँ, 
मैं त्योहार मनाता हूँ, ख़ुश होता हूँ, मुस्कुराता हूँ, 
ये सब है, क्योंकि, तुम हो, ये तुमको आज बताता हूँ, 
मेरी आज़ादी का कारण तुम, ख़ुशियों की सौगात हो, 
मैं चैन से सोता हूँ, क्योंकि, 
मैं चैन से सोता हूँ, क्योंकि तुम सरहद पर तैनात हो, 
शीश झुकाएँ पर्वत अम्बर और भारत का चमन तुम्हें, शीश झुकाएँ पर्वत अम्बर और भारत का चमन तुम्हें, 
उसी तरह सेनानी मेरा भी है शत-शत नमन तुम्हें, उसी तरह सेनानी मेरा भी है शत-शत नमन तुम्हें ।। ” 

मेरे प्यारे देशवासियो, जिसका मायका भी सेना के जवानों से भरा हुआ है और जिसका ससुराल भी सेना के जवानों से भरा हुआ है, ऐसी एक बहन शिवानी ने मुझे एक टेलीफोन message दिया। आइए, हम सुनते हैं, फ़ौजी परिवार क्या कहता है: - 

“नमस्कार प्रधानमंत्री जी, मैं शिवानी मोहन बोल रही हूँ। इस दीपावली पर जो ‘Sandesh to Soldiers’ अभियान शुरू किया गया है, उससे हमारे फ़ौजी भाइयों को बहुत ही प्रोत्साहन मिल रहा है। मैं एक Army Family से हूँ। मेरे पति भी Army ऑफिसर हैं। मेरे Father और Father-in-law, दोनों Army Officers रह चुके हैं। तो हमारी तो पूरी family soldiers से भरी हुई है और सीमा पर हमारे कई ऐसे Officers हैं, जिनको इतने अच्छे संदेश मिल रहे हैं और बहुत प्रोत्साहन मिल रहा है Army Circle में सभी को। और मैं कहना चाहूँगी कि Army Officers और Soldiers के साथ उनके परिवार, उनकी पत्नियाँ भी काफ़ी sacrifices करती हैं। तो एक तरह से पूरी Army Community को बहुत अच्छा संदेश मिल रहा है और मैं आपको भी Happy Diwali कहना चाहूँगी। Thank You .” 

मेरे प्यारे देशवासियो, ये बात सही है कि सेना के जवान सिर्फ़ सीमा पर नहीं, जीवन के हर मोर्चे पर खड़े हुए पाए जाते हैं। प्राकृतिक आपदा हो, कभी क़ानूनी व्यवस्था के संकट हों, कभी दुश्मनों से भिड़ना हो, कभी ग़लत राह पर चल पड़े नौजवानों को वापिस लाने के लिये साहस दिखाना हो-हमारे जवान ज़िंदगी के हर मोड़ पर राष्ट्र भावना से प्रेरित हो करके काम करते रहते हैं। 

एक घटना मेरे ध्यान में लाई गई - मैं भी आपको बताना चाहता हूँ। अब मैं इसलिए बताना चाहता हूँ कि सफलता के मूल में कैसी-कैसी बातें एक बहुत बड़ी ताक़त बन जाती हैं। आप ने सुना होगा, हिमाचल प्रदेश खुले में शौच से मुक्त हुआ, Open Defecation Free हुआ। पहले सिक्किम प्रान्त हुआ था, अब हिमाचल भी हुआ, 1 नवम्बर को केरल भी होने जा रहा है। लेकिन ये सफलता क्यों होती है ? कारण मैं बताता हूँ, देखिए, सुरक्षाबलों में हमारा एक ITBP का जवान, श्री विकास ठाकुर - वो मूलतः हिमाचल के सिरमौर ज़िले के एक छोटे से गाँव से हैं। उनके गाँव का नाम है बधाना। ये हिमाचल के सिरमौर ज़िले से हैं। अब ये हमारे ITBP के जवान अपनी ड्यूटी पर से छुट्टियों में गाँव गए थे। तो गाँव में वो उस समय शायद कहीं ग्राम-सभा होने वाली थी, तो वहाँ पहुँच गए और गाँव की सभा में चर्चा हो रही थी, शौचालय बनाने की और पाया गया कि कुछ परिवार पैसों के अभाव में शौचालय नहीं बना पा रहे हैं। ये विकास ठाकुर देशभक्ति से भरा हुआ एक हमारा ITBP का जवान, उसको लगा-नहीं-नहीं, ये कलंक मिटाना चाहिये। और उसकी देशभक्ति देखिए, सिर्फ़ दुश्मनों पर गोलियाँ चलाने के लिये वो देश की सेवा करता है, ऐसा नहीं है। उसने फटाक से अपनी Cheque Book से सत्तावन हज़ार रुपया निकाला और उसने गाँव के पंचायत प्रधान को दे दिया कि जिन 57 घरों में शौचालय नहीं बना है, मेरी तरफ से हर परिवार को एक-एक हज़ार रूपया दे दीजिए, 57 शौचालय बना दीजिए और अपने बधाना गाँव को Open Defecation Free बना दीजिए। विकास ठाकुर ने करके दिखाया। 57 परिवारों को एक-एक हज़ार रूपया अपनी जेब से दे करके स्वच्छता के अभियान को एक ताक़त दी। और तभी तो हिमाचल प्रदेश Open Defecation Free करने की ताक़त आई। वैसा ही केरल में, मैं सचमुच में, नौजवानों का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। मेरे ध्यान में आया, केरल के दूर-सुदूर जंगलों में, जहाँ कोई रास्ता भी नहीं है, पूरे दिन भर पैदल चलने के बाद मुश्किल से उस गाँव पहुँचा जा सकता है, ऐसी एक जनजातीय पंचायत इडमालाकुडी, पहुँचना भी बड़ा मुश्किल है। लोग कभी जाते नहीं। उसके नज़दीक में, शहरी इलाके में, Engineering के छात्रों के ध्यान में आया कि इस गाँव में शौचालय बनाने हैं। NCC के cadet, NSS के लोग, Engineering के छात्र, सबने मिलकर के तय किया कि हम शौचालय बनाएँगे। शौचालय बनाने के लिए जो सामान ले जाना था, ईंटें हो, सीमेंट हो, सारे सामान इन नौजवानों ने अपने कंधे पर उठा करके, पूरा दिन भर पैदल चल के उन जंगलों में गए। खुद ने परिश्रम करके उस गाँव में शौचालय बनाए और इन नौजवानों ने दूर-सुदूर जंगलों में एक छोटे से गाँव को Open Defecation Free किया। उसी का तो कारण है कि केरल Open Defecation Free हो रहा है। गुजरात ने भी, सभी नगरपालिका-महानगरपालिकायें, शायद 150 से ज़्यादा में, Open Defecation Free घोषित किया है। 10 ज़िले भी Open Defecation Free किए गए हैं। हरियाणा से भी ख़ुशख़बरी आई है, हरियाणा भी 1 नवम्बर को उनकी अपनी Golden Jubilee मनाने जा रहा है और उनका फ़ैसला है कि वो कुछ ही महीनों में पूरे राज्य को Open Defecation Free कर देंगे। अभी उन्होंने सात ज़िले पूरे कर दिए हैं। सभी राज्यों में बहुत तेज़ गति से काम चल रहा है। मैंने कुछ का उल्लेख किया है। मैं इन सभी राज्यों के नागरिकों को इस महान कार्य के अन्दर जुड़ने के लिये देश से गन्दगी रूपी अन्धकार मिटाने के काम में योगदान देने के लिये ह्रदय से बहुत-बहुत अभिनन्दन देता हूँ। 

मेरे प्यारे देशवासियो, सरकार में योजनायें तो बहुत होती हैं। और पहली योजना के बाद, उसी के अनुरूप दूसरी अच्छी योजना आए, तो पहली योजना छोड़नी होती है। लेकिन आम तौर पर इन चीज़ों पर कोई ध्यान नहीं देता है। पुरानी वाली योजना भी चलती रहती है, नयी वाली भी योजना चलती रहती है और आने वाली योजना का इंतज़ार भी होता रहता है, ये चलता रहता है। हमारे देश में जिन घरों में गैस का चूल्हा हो, जिन घरों में बिजली हो, ऐसे घरों को Kerosene की ज़रुरत नहीं है। लेकिन सरकार में कौन पूछता है, Kerosene भी जा रहा है, गैस भी जा रहा है, बिजली भी जा रही है और फिर बिचौलियों को तो मलाई खाने का मौका मिल जाता है। मैं हरियाणा प्रदेश का अभिनन्दन करना चाहता हूँ कि उन्होंने एक बीड़ा उठाया है। हरियाणा प्रदेश को Kerosene मुक्त करने का। जिन-जिन परिवारों में गैस का चूल्हा है, जिन-जिन परिवारों में बिजली है, ‘आधार’ नंबर से उन्होंने verify किया और अब तक मैंने सुना है कि सात या आठ ज़िले Kerosene free कर दिए, Kerosene मुक्त कर दिए। जिस प्रकार से उन्होंने इस काम को हाथ में लिया है, पूरा राज्य, मुझे विश्वास है कि बहुत ही जल्द Kerosene free हो जायेगा। कितना बड़ा बदलाव आयेगा, चोरी भी रुकेगी, पर्यावरण का भी लाभ होगा, हमारी foreign exchange की भी बचत होगी और लोगों की सुविधा भी बढ़ेगी। हाँ, तकलीफ़ होगी, तो बिचौलियों को होगी, बेईमानों को होगी। 

मेरे प्यारे देशवासियो, महात्मा गाँधी हम सब के लिए हमेशा-हमेशा मार्गदर्शक हैं। उनकी हर बात आज भी देश कहाँ जाना चाहिए, कैसे जाना चाहिए, इसके लिये मानक तय करती है। गाँधी जी कहते थे, आप जब भी कोई योजना बनाएँ, तो आप सबसे पहले उस ग़रीब और कमज़ोर का चेहरा याद कीजिए और फिर तय कीजिए कि आप जो करने जा रहे हैं, उससे उस ग़रीब को कोई लाभ होगा कि नहीं होगा। कहीं उसका नुकसान तो नहीं हो जाएगा। इस मानक के आधार पर आप फ़ैसले कीजिए। समय की माँग है कि हमें अब, देश के ग़रीबों का जो aspirations जगा है, उसको address करना ही पड़ेगा। मुसीबतों से मुक्ति मिले, उसके लिए हमें एक-के-बाद एक कदम उठाने ही पड़ेंगे। हमारी पुरानी सोच कुछ भी क्यों न हो, लेकिन समाज को बेटे-बेटी के भेद से मुक्त करना ही होगा। अब स्कूलों में बच्चियों के लिये भी toilet हैं, बच्चों के लिये भी toilet हैं। हमारी बेटियों के लिये भेदभाव-मुक्त भारत की अनुभूति का ये अवसर है। 

सरकार की तरफ़ से टीकाकरण तो होता ही है, लेकिन फिर भी लाखों बच्चे टीकाकरण से छूट जाते हैं। बीमारी के शिकार हो जाते हैं। ‘मिशन इन्द्रधनुष’ टीकाकरण का एक ऐसा अभियान, जो छूट गए हुए बच्चों को भी समेटने के लिए लगा है, जो बच्चों को गंभीर रोगों से मुक्ति के लिए ताक़त देता है। 21वीं सदी हो और गाँव में अँधेरा हो, अब नहीं चल सकता और इसलिये गाँवों को अंधकार से मुक्त करने के लिये, गाँव बिजली पहुँचाने का बड़ा अभियान सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। समय सीमा में आगे बढ़ रहा है। आज़ादी के इतने सालों के बाद, गरीब माँ, लकड़ी के चूल्हे पर खाना पका करके दिन में 400 सिगरेट का धुआं अपने शरीर में ले जाए, उसके स्वास्थ्य का क्या होगा। कोशिश है 5 करोड़ परिवारों को धुयें से मुक्त ज़िंदगी देने के लिये। सफलता की ओर आगे बढ़ रहे हैं। 

छोटा व्यापारी, छोटा कारोबारी, सब्जी बेचनेवाला, दूध बेचनेवाला, नाई की दुकान चलानेवाला, साहूकारों के ब्याज के चक्कर में ऐसा फँसा रहता था - ऐसा फँसा रहता था। मुद्रा योजना, stand up योजना, जन-धन account, ये ब्याजखोरों से मुक्ति का एक सफल अभियान है। ‘आधार’ के द्वारा बैंकों में सीधे पैसे जमा कराना। हक़दार को, लाभार्थी को सीधे पैसे मिलें। सामान्य मानव के ज़िंदगी में ये बिचौलियों से मुक्ति का अवसर है। एक ऐसा अभियान चलाना है, जिसमें सिर्फ़ सुधार और परिवर्तन नहीं, समस्या से मुक्ति तक का मार्ग पक्का करना है और हो रहा है। 

मेरे प्यारे देशवासियो, कल 31 अक्टूबर, इस देश के महापुरुष - भारत की एकता को ही जिन्होंने अपने जीवन का मंत्र बनाया, जी के दिखाया - ऐसे सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म-जयंती का पर्व है। 31 अक्टूबर, एक तरफ़ सरदार साहब की जयंती का पर्व है, देश की एकता का जीता-जागता महापुरुष, तो दूसरी तरफ़, श्रीमती गाँधी की पुण्यतिथि भी है। महापुरुषों को पुण्य स्मरण तो हम करते ही हैं, करना भी चाहिए। लेकिन पंजाब के एक सज्जन का फ़ोन, उनकी पीड़ा, मुझे भी छू गई: - 

“प्रधानमंत्री जी, नमस्कार, सर, मैं जसदीप बोल रहा हूँ पंजाब से। सर, जैसा कि आप जानते हैं कि 31 तारीख़ को सरदार पटेल जी का जनमदिन है। सरदार पटेल ओ शख्सियत हैं, जिनाने अपनी सारी ज़िंदगी देश नु जोड़न दी बिता दित्ती and ओ उस मुहिम विच, I think, सफ़ल भी होये, he brought everybody together. और we call it irony or we call it, एक बुरी किस्मत कहें देश की कि उसी दिन इंदिरा गाँधी जी की हत्या भी हो गई। and जैसा हम सबको पता है कि उनकी हत्या के बाद देश में कैसे events हुए। सर, मैं ये कहना चाहता था कि हम ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण जो events होते हैं, जो घटनायें होती हैं, इनको कैसे रोक सकते हैं। ” 

मेरे प्यारे देशवासियो, ये पीड़ा एक व्यक्ति की नहीं है। एक सरदार, सरदार वल्लभ भाई पटेल, इतिहास इस बात का गवाह है कि चाणक्य के बाद, देश को एक करने का भगीरथ काम, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया। आज़ाद हिंदुस्तान को, एक झंडे के नीचे लाने का सफल प्रयास, इतना बड़ा भगीरथ काम जिस महापुरुष ने किया, उस महापुरुष को शत-शत नमन। लेकिन यह भी तो पीड़ा है कि सरदार साहब एकता के लिए जिए, एकता के लिए जूझते रहे; एकता की उनकी प्राथमिकता के कारण, कइयों की नाराज़गी के शिकार भी रहे, लेकिन एकता के मार्ग को कभी छोड़ा नहीं; लेकिन, उसी सरदार की जन्म-जयंती पर हज़ारों सरदारों को, हज़ारो सरदारों के परिवारों को श्रीमती गाँधी की हत्या के बाद मौत के घाट उतार दिया गया । एकता के लिये जीवन-भर जीने वाले उस महापुरुष के जन्मदिन पर ही और सरदार के ही जन्मदिन पर सरदारों के साथ ज़ुल्म, इतिहास का एक पन्ना, हम सब को पीड़ा देता है । 

लेकिन, इन संकटों के बीच में भी, एकता के मंत्र को ले करके आगे बढ़ना है। विविधता में एकता यही देश की ताक़त है। भाषायें अनेक हों, जातियाँ अनेक हों, पहनावे अनेक हों, खान-पान अनेक हों, लेकिन अनेकता में एकता, ये भारत की ताक़त है, भारत की विशेषता है। हर पीढ़ी का एक दायित्व है। हर सरकारों की ज़िम्मेवारी है कि हम देश के हर कोने में एकता के अवसर खोजें, एकता के तत्व को उभारें। बिखराव वाली सोच, बिखराव वाली प्रवृत्ति से हम भी बचें, देश को भी बचाएँ। सरदार साहब ने हमें एक भारत दिया, हम सब का दायित्व है श्रेष्ठ भारत बनाना। एकता का मूल-मंत्र ही श्रेष्ठ भारत की मज़बूत नींव बनाता है। 

सरदार साहब की जीवन यात्रा का प्रारम्भ किसानों के संघर्ष से हुआ था। किसान के बेटे थे। आज़ादी के आंदोलन को किसानों तक पहुँचाने में सरदार साहब की बहुत बड़ी अहम भूमिका रही। आज़ादी के आंदोलन को गाँव में ताक़त का रूप बनाना सरदार साहब का सफल प्रयास था। उनके संगठन शक्ति और कौशल्य का परिणाम था। लेकिन सरदार साहब सिर्फ संघर्ष के व्यक्ति थे, ऐसा नहीं, वह संरचना के भी व्यक्ति थे। आज कभी-कभी हम बहुत लोग ‘अमूल’ का नाम सुनते हैं। ‘अमूल’ के हर product से आज हिंदुस्तान और हिंदुस्तान के बाहर भी लोग परिचित हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि सरदार साहब की दिव्यदृष्टि थी कि उन्होंने co-operative milk producers के union की कल्पना की थी। और खेड़ा district, उस समय केरा district बोला जाता था, और 1942 में इस विचार को उन्होंने बल दिया था, वो साकार रूप, आज का ‘अमूल’ किसानों के सुख-समृद्धि की संरचना सरदार साहब ने कैसे की थी, उसका एक जीता-जागता उदाहरण हमारे सामने है। मैं सरदार साहब को आदरपूर्वक अंजलि देता हूँ और इस एकता दिवस पर 31 अक्टूबर को हम जहाँ हों, सरदार साहब को स्मरण करें, एकता का संकल्प करें। 

मेरे प्यारे देशवासियो, इन दीवाली की श्रृंखला में कार्तिक पूर्णिमा-ये प्रकाश उत्सव का भी पर्व है। गुरु नानक देव, उनकी शिक्षा-दीक्षा पूरी मानव-जाति के लिये, न सिर्फ़ हिंदुस्तान के लिये, पूरी मानव-जाति के लिए, आज भी दिशादर्शक है। सेवा, सच्चाई और ‘सरबत दा भला’, यही तो गुरु नानक देव का संदेश था। शांति, एकता और सद्भावना यही तो मूल-मंत्र था। भेदभाव हो, अंधविश्वास हो, कुरीतियाँ हों, उससे समाज को मुक्ति दिलाने का वो अभियान ही तो था गुरु नानक देव की हर बात में। जब हमारे यहाँ स्पृश्य-अस्पृश्य, जाति-प्रथा, ऊँच-नीच, इसकी विकृति की चरम सीमा पर थी, तब गुरु नानक देव ने भाई लालो को अपना सहयोगी चुना। आइए, हम भी, गुरु नानक देव ने जो हमें ज्ञान का प्रकाश दिया है, जो हमें भेदभाव छोड़ने के लिए प्रेरणा देता है, भेदभाव के ख़िलाफ़ कुछ करने के लिए आदेश करता है, ‘सबका साथ सबका विकास’ इसी मंत्र को ले करके अगर आगे चलना है, तो गुरु नानक देव से बढ़िया हमारा मार्गदर्शक कौन हो सकता है। मैं गुरु नानक देव को भी, इस ‘प्रकाश-उत्सव’ आ रहा है, तब अन्तर्मन से प्रणाम करता हूँ। 

मेरे प्यारे देशवासियो, फिर एक बार, देश के जवानों के नाम ये दिवाली, इस दिवाली पर आपको भी बहुत-बहुत शुभकामनायें। आपके सपने, आपके संकल्प हर प्रकार से सफल हों। आपका जीवन सुख-चैन की ज़िंदगी वाला बने, यही आप सबको शुभकामनायें देता हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद। 
***

अतुल कुमार तिवारी/ अमित कुमार/ हिमांशु सिंह

Sunday, August 30, 2015

आकाशवाणी पर प्रधानमंत्री ने कही मन की बात


30-August-2015 11:19 IST

Text of Prime Minister’s ‘Mann ki Baat’ on All India Radio
क़रीब पौने अठारह करोड़ बैंक खाते खोले गए
गरीबों ने बचत करके, सेविंग करके बाइस हज़ार करोड़ की राशि जमा करवाई


नई दिल्ली: 30 अगस्त 2015: (PIB):
मेरे प्यारे देशवासियो, आप सबको नमस्कार। फिर एक बार, मन की बातें करने के लिए, आपके बीच आने का मुझे अवसर मिला है। सुदूर दक्षिण में लोग ओणम के पर्व में, रंगे हुए हैं और कल पूरे देश ने रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया। भारत सरकार ने, सामाजिक सुरक्षा को लेकर के कई नई-नई योजनायें, सामान्य मानवों के लिए लागू की हैंI मुझे ख़ुशी है कि बहुत कम समय में, व्यापक प्रमाण में, सबने इन योजनाओं को स्वीकारा है। 
मैंने एक छोटी सी गुज़ारिश की थी कि रक्षाबंधन के पर्व पर हम अपनी बहनों को ये सुरक्षा योजना दें। मेरे पास जो मोटी-मोटी जानकारी आई है कि योजना आरम्भ होने से अब तक ग्यारह करोड़ परिवार इस योजना से जुड़े हैं। और मुझे ये भी बताया गया कि, क़रीब-क़रीब आधा लाभ, माताओं-बहनों को मिला है। मैं इसे शुभ संकेत मानता हूँ। मैं सभी माताओं-बहनों को रक्षाबंधन के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनायें भी देता हूँ। 
आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ, जन-धन योजना को एक वर्ष पहले बड़े पैमाने पर हाथ में लिया गया था। जो काम साठ साल में नहीं हुआ, वो इतने कम समय में होगा क्या? कई सवालिया निशान थे। लेकिन मुझे आज ख़ुशी है कि इस योजना को लागू करने से संबंधित सरकार की सभी इकाइयों ने, बैंक की सभी इकाइयों ने, जी-जान से सब जुट गये, सफ़लता पाई और अब तक मेरी जानकारी के अनुसार क़रीब पौने अठारह करोड़ बैंक खाते खोले गए। सत्रह करोड़ चौहत्तर लाख। मैंने गरीबों की अमीरी भी देखी। ज़ीरो बैलेंस से खाता खोलना था लेकिन गरीबों ने बचत करके, सेविंग करके बाइस हज़ार करोड़ की राशि जमा करवाई। अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा, बैंकिंग क्षेत्र भी है और ये व्यवस्था ग़रीब के घर तक पहुँचे इसलिए बैंक-मित्र की योजना को भी बल दिया है। आज सवा लाख से भी ज़्यादा बैंक-मित्र देश भर में काम कर रहे हैं। नौजवानों को रोज़गार भी मिला है। आपको जानकर के ख़ुशी होगी कि इस एक वर्ष में, Banking sector, अर्थव्यवस्था और ग़रीब आदमी - इनको जोड़ने के लिए एक लाख इकत्तीस हज़ार Financial Literacy कैम्प लगाये गए हैं। सिर्फ़ खाते खोलकर के अटक नहीं जाना है और अब तो कई हजारों लोग इस जन-धन योजना के तहत overdraft लेने के हक़दार भी बन गए और उन्होंने लिया भी। और ग़रीब को बैंक से पैसा मिल सकता है ये विश्वास भी पैदा हुआ। मैं फिर एक बार, संबंधित सब को बधाई देता हूँ और बैंक के अकाउंट खोलने वाले सभी, ग़रीब से ग़रीब भाइयों-बहनों को भी आग्रह करता हूँ, कि, आप बैंक से नाता टूटने मत दीजिये। ये बैंक आपकी है, आपने इसको अब छोड़ना नहीं चाहिये। मैं आप तक लाया हूँ, अब उसको पकड़ के रखना आपका काम है। हमारे सबके खाते सक्रिय होने चाहियेI आप ज़रूर करेंगे, मुझे विश्वास है। 


पिछले दिनों गुजरात की घटनाओं ने, हिंसा के तांडव ने, सारे देश को बेचैन बना दिया और स्वाभाविक है कि गाँधी और सरदार की भूमि पर कुछ भी हो जाए तो देश को सबसे पहले सदमा पहुँचता है, पीड़ा होती है। लेकिन बहुत ही कम समय में गुजरात के प्रबुद्ध, सभी मेरे नागरिक भाइयों और बहनों ने परिस्थिति को संभाल लिया। स्थिति को बिगड़ने से रोकने में सक्रिय भूमिका निभाई और फिर एक बार शांति के मार्ग पर गुजरात चल पड़ा। शांति, एकता, भाईचारा यही रास्ता सही है और विकास के मार्ग पर ही कंधे से कंधा मिलाकर के हमें चलना है। विकास ही हमारी समस्याओं का समाधान है। 



पिछले दिनों मुझे सूफ़ी परम्परा के विद्वानों से मिलने का अवसर मिला। उनकी बातें सुनने का अवसर मिला। और मैं सच बताता हूँ कि जिस तज़ुर्बे से, जिस प्रकार से, उनकी बातें मुझे सुनने का अवसर मिला एक प्रकार से जैसे कोई संगीत बज रहा है। उनके शब्दों का चयन, उनका बातचीत का तरीका, यानि सूफ़ी परम्परा में जो उदारता है, जो सौम्यता है, जिसमें एक संगीत का लय है, उन सबकी अनुभूति इन विद्वानों के बीच में मुझे हुई। मुझे बहुत अच्छा लगा। शायद दुनिया को इस्लाम के सही स्वरुप को सही रूप में पहुँचाना सबसे अधिक आवश्यक हो गया है। मुझे विश्वास है कि सूफ़ी परम्परा जो प्रेम से जुड़ा हुआ है, उदारता से जुड़ा हुआ है, वे इस संदेश को दूर-दूर तक पहुँचायेंगे, जो मानव-जाति को लाभ करेगा, इस्लाम का भी लाभ करेगाI और मैं औरों को भी कहता हूँ कि हम किसी भी संप्रदाय को क्यों न मानते हों, लेकिन, कभी सूफ़ी परम्परा को समझना चाहिये। 



आने वाले दिनों में मुझे एक और अवसर मिलने वाला है, और इस निमंत्रण को मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ। भारत में, विश्व के कई देशों के बौद्ध परंपरा के विद्वान बोधगया में आने वाले हैं, और मानवजाति से जुड़े हुए वैश्विक विषयों पर चर्चा करने वाले हैं, मुझे भी उसमें निमंत्रण मिला है, और मेरे लिए खुशी की बात है कि उन लोगों ने मुझे बोधगया आने का निमंत्रण दिया है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरु बोधगया गए थे। मुझे विश्व भर के इन विद्वानों के साथ, बोधगया जाने का अवसर मिलने वाला है, मेरे लिए एक बहुत ही आनंद का पल है। 



मेरे प्यारे किसान भाइयो-बहनों, मैं फिर एक बार आप को विशेष रूप से आज मन की बात बताना चाहता हूँ। मैं पहले भी ‘मन की बात’ में, इस विषय का जिक्र कर चुका हूं। आप ने सुना होगा, संसद में मुझे सुना होगा, सार्वजनिक सभाओं मे सुना होगा, ‘मन की बात’ में सुना होगा। मैं हर बार एक बात कहता आया हूँ, कि जिस ‘Land Acquisition Act’ के सम्बन्ध में विवाद चल रहा है, उसके विषय में सरकार का मन खुला है। किसानों के हित के किसी भी सुझाव को मैं स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ, ये बार-बार मैं कहता रहा हूं। लेकिन आज मुझे, मेरे किसान भाइयों-बहनों को ये कहना है कि ‘Land Acquisition Act’’ में सुधार की बात राज्यों की तरफ से आई, आग्रहपूर्वक आई और सब को लगता था, कि गाँव, ग़रीब किसान का अगर भला करना है, खेतों तक पानी पहुँचाने के लिए नहरें बनानी हैं, गाँव में बिजली पहुँचाने के लिए खम्बे लगाने हैं, गाँव के लिए सड़क बनानी है, गाँव के ग़रीबों के लिए घर बनाने हैं, गाँव के ग़रीब नौजवानों को रोज़गार के लिए व्यवस्थायें उपलब्ध करानी हैं, तो हमें ये अफ़सरशाही के चंगुल से, कानून को निकालना पड़ेगा और तब जाकर के सुधार का प्रस्ताव आया था। लेकिन मैंने देखा कि इतने भ्रम फैलाए गए, किसान को इतना भयभीत कर दिया गया। मेरे किसान भाइयो-बहनो, मेरा किसान न भ्रमित होना चाहिये, और भयभीत तो कतई ही नहीं होना चाहिए, और मैं ऐसा कोई अवसर किसी को देना नहीं चाहता हूं, जो किसानों को भयभीत करे, किसानों को भ्रमित करे, और मेरे लिए देश में, हर एक आवाज़ का महत्व है, लेकिन किसानों की आवाज़ का विशेष महत्व है। हमने एक Ordinance जारी किया था, कल 31 अगस्त को Ordinance की सीमा समाप्त हो रही है, और मैंने तय किया है, समाप्त होने दिया जाए। मतलब ये हुआ, कि मेरी सरकार बनी, उसके पहले जो स्थिति थी, वो अब पुनःप्रस्थापित हो चुकी है। लेकिन उसमें एक काम अधूरा था, और वो था - 13 ऐसे बिंदु थे, जिसको एक साल में पूर्ण करना था और इसलिए हम Ordinance में उसको लाये थे, लेकिन इन विवादों के रहते वो मामला भी उलझ गया। Ordinance तो समाप्त हो रहा है, लेकिन जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलने वाला है, किसानों का सीधा आर्थिक लाभ जिससे जुड़ा हुआ है, उन 13 बिंदुओं को, हम नियमों के तहत लाकर के, आज ही लागू कर रहे हैं ताकि किसानों को नुकसान न हो, आर्थिक हानि न हो, और इसलिए जिन 13 बिन्दुओं को लागू करना पहले के कानून में बाकी था, उसको आज हम पूरा कर रहे हैं, और मेरे किसान भाइयों और बहनों को मैं विश्वास दिलाता हूँ, कि हमारे लिए ‘’जय-जवान, जय-किसान’ ये नारा नहीं है, ये हमारा मंत्र है - गाँव, ग़रीब किसान का कल्याण - और तभी तो हमने 15 अगस्त को कहा था, कि सिर्फ कृषि विभाग नहीं, लेकिन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग बनाया जायेगा, जिसका निर्णय हमने बहुत तेज़ी से आगे बढ़ाया है। तो मेरे किसान भाइयो-बहनो, अब न भ्रम का कोई कारण है, और न ही कोई भयभीत करने का प्रयास करे, तो आपको भयभीत होने की आवश्यकता है। 



मुझे एक बात और भी कहनी है कि दो दिन पूर्व 1965 के युद्ध के पचास साल हुए और जब-जब 1965 के युद्ध की बात आती है तो लाल बहादुर शास्त्री जी की याद आना बहुत स्वाभाविक है। “जय-जवान, जय-किसान” मंत्र भी याद आना बहुत स्वाभाविक है। और भारत के तिरंगे झंडे को, उसकी आन-बान-शान बनाये रखने वाले, उन सभी शहीदों का स्मरण होना बहुत स्वाभाविक है। 65 के युद्ध के विजय के सभी संबंधितों को मैं प्रणाम करता हूँ। वीरों को नमन करता हूँ। और ऐसी इतिहास की घटनाओं से हमें निरंतर प्रेरणा मिलती रहे। 



जिस प्रकार से पिछले सप्ताह मुझे सूफ़ी परम्परा के लोगों से मिलने का अवसर मिला उसी प्रकार से एक बड़ा सुखद अनुभव रहा। मुझे देश के गणमान्य वैज्ञानिकों के साथ घंटों तक बातें करने का अवसर मिला। उनको सुनने का अवसर मिला, और मुझे प्रसन्नता हुई कि साइंस के क्षेत्र में, भारत कई दिशाओं में, बहुत ही उत्तम प्रकार के काम कर रहा है। हमारे वैज्ञानिक, सचमुच में उत्तम प्रकार का काम कर रहे हैं। अब हमारे सामने अवसर है कि इन संशोधनों को जन-सामान्य तक कैसे पहुँचायें? सिद्धांतों को उपकरणों में कैसे तब्दील करें? Lab को Land के साथ कैसे जोड़ें? एक अवसर के रूप में उसको आगे बढ़ाना है। कई नई जानकारियां भी मुझे मिलीं। मैं कह सकता हूँ कि मेरे लिए वो एक बहुत ही inspiring भी था, educative भी था। और मैंने देखा, कई नौजवान वैज्ञानिक क्या उमंग से बातें बता रहे थे, कैसे सपने उनकी आँखों में दिखाई दे रहे थे। और जब मैंने पिछली बार ‘मन की बात’ में कहा था कि हमारे विद्यार्थियों को विज्ञान की ओर आगे बढ़ना चाहिये। इस मीटिंग के बाद मुझे लगता है कि बहुत अवसर हैं, बहुत संभावनाएं हैं। मैं फिर से एक बार उसको दोहराना चाहूँगा। सभी नौजवान मित्र साइंस की तरफ़ रूचि लें, हमारे Educational Institutions भी विद्यार्थियों को प्रेरित करें। 



मुझे नागरिकों से कई चिट्ठियाँ आती रहती हैं। ठाणे से, श्रीमान परिमल शाह ने ‘MyGov.in’ पर मुझे Educational Reforms के संबंध में लिखा है। Skill Development के लिए लिखा है। तमिलनाडु के चिदंबरम से श्रीमान प्रकाश त्रिपाठी ने प्राइमरी शिक्षा के लिए अच्छे शिक्षकों की ज़रूरत पर बल दिया है। शिक्षा क्षेत्र में सुधारों पर बल दिया है। 



मुझे ख़ास मेरे नौजवान मित्रों को भी एक बात कहनी है कि मैंने 15 अगस्त को लालकिले पर से कहा था, कि निचले स्तर के नौकरी के लिए ये interview क्यों? और फ़िर जब interview का कॉल आता है तो हर गरीब परिवार, विधवा माँ, सिफारिश कहाँ से मिलेगी, किसकी मदद से नौकरी मिलेगी, जैक किसका लगायेंगे? पता नहीं कैसे-कैसे शब्द प्रयोग हो रहे हैं? सब लोग दौड़ते हैं, और शायद नीचे के स्तर पर भ्रष्टाचार का ये भी एक कारण है। और मैंने 15 अगस्त को कहा था कि मैं चाहता हूँ कि interview की परम्परा से एक स्तर से नीचे तो मुक्ति होनी चाहिये। मुझे खुशी है कि इतने कम समय में, अभी 15 दिन हुए हैं, लेकिन सरकार, बहुत ही तेज़ी से आगे बढ़ रही है। सूचनायें भेजी जा रही हैं, और क़रीब-क़रीब अब निर्णय अमल भी हो जायेगा कि interview के चक्कर से छोटी-छोटी नौकरियाँ छूट जायेंगी। ग़रीब को सिफ़ारिश के लिए दौड़ना नहीं पड़ेगा। exploitation नहीं होगा, corruption नहीं होगा। 



इन दिनों भारत में विश्व के कई देशों के मेहमान आये हैं। स्वास्थ्य के लिए, ख़ासकर के माता-मृत्युदर और शिशु-मृत्युदर कम हो, उसकी कार्य योजना के लिए ‘Call to Action’ दुनिया के 24 देश मिलकर के भारत की भूमि में चिंतन किया। अमेरिका के बाहर ये पहली बार, किसी और देश में ये कार्यक्रम हुआ। और ये बात सही है कि आज भी हमारे देश में हर वर्ष क़रीब-क़रीब 50 हज़ार मातायें और 13 लाख बच्चे, प्रसूति के समय ही और उसके तत्काल बाद ही उनकी मृत्यु हो जाती है। ये चिन्ताजनक है और डरावना है। वैसे सुधार काफ़ी हुआ है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की सराहना भी होने लगी है, फ़िर भी ये आंकड़ा कम नहीं है। जैसे हम लोगों ने पोलियो से मुक्ति पाई, वैसे ही, माताओं और शिशु के मृत्यु में टिटनेस, उससे भी मुक्ति पाई। विश्व ने इसको स्वीकारा है। लेकिन हमें अभी भी हमारी माताओं को बचाना है, हमारे नवजात बच्चों को बचाना है। 



भाइयो-बहनो, आजकल डेंगू की खबर आती रहती है। ये बात सही है कि डेंगू खतरनाक है, लेकिन उसका बचाव बहुत आसान है। और जो मैं स्वच्छ भारत की बात कर रहा हूँ न, उससे वो सीधा-सीधा जुड़ा हुआ है। TV पर हम advertisement देखते हैं, लेकिन हमारा ध्यान नहीं जाता है। अखबार में advertisement छपती है, लेकिन हमारा ध्यान नहीं जाता है। घर में छोटी-छोटी चीज़ों में सफाई शुद्ध पानी से भी रख-रखाव करने के तरीके हैं। इन बातों में व्यापक लोक-शिक्षा हो रही है, लेकिन हमारा ध्यान नहीं जाता है और कभी-कभी लगता है कि हम तो बहुत ही अच्छे घर में रहते हैं, बहुत ही बढ़िया व्यवस्था वाले हैं और पता नहीं होता है कि हमारे ही कहीं पानी भरा हुआ है और कहीं हम डेंगू को निमंत्रण दे देते हैं। मैं आप सब से यही आग्रह करूँगा कि मौत को हमने इतना सस्ता नहीं बनने देना चाहिए। ज़िंदगी बहुत मूल्यवान है। पानी की बेध्यानी, स्वच्छता पर उदासीनता, ये मृत्यु का कारण बन जाएं, ये तो ठीक नहीं है! पूरे देश में करीब 514 केन्द्रों पर डेंगू के लिए मुफ़्त में जांच की सुविधायें उपलब्ध हैं। समय से रहते ही, जांच करवाना ही जीवन रक्षा के लिए उपयोगी है और इसमें आप सबका साथ-सहयोग बहुत आवश्यक है। और स्वच्छता को तो बहुत महत्व देना चाहिए। इन दिनों तो रक्षा-बंधन से दीवाली तक एक प्रकार से हमारे देश में उत्सव ही उत्सव होते हैं। हमारे हर उत्सव को स्वच्छता के साथ अब क्यों न जोड़ें? आप देखिये संस्कार स्वभाव बन जाएंगे। 



मेरे प्यारे देशवासियो, आज मुझे एक खुशखबरी सुनानी है आपको, मैं हमेशा कहता हूँ कि अब हमें देश के लिए मरने का सौभाग्य नहीं मिलेगा, लेकिन देश के लिए जीने का तो सौभाग्य मिला ही है। हमारे देश के दो नौजवान और दोनों भाई और वे भी मूल हमारे महाराष्ट्र के नासिक के - डॉ. हितेंद्र महाजन, डॉ. महेंद्र महाजन, लेकिन इनके दिल में भारत के आदिवासियों की सेवा करने का भाव प्रबल रहता है। इन दोनों भाइयों ने भारत का गौरव बढ़ाया है। अमेरिका में ‘Race across America’ एक Cycle-Race होती है, बड़ी कठिन होती है, करीब चार हजार आठ सौ किलोमीटर लम्बी रेस होती है। इस वर्ष इन दोनों भाइयों ने इस रेस में विजय प्राप्त किया। भारत का सम्मान बढ़ाया। मैं इन दोनों भाइयों को बहुत-बहुत शुभकामनायें देता हूँ, बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, अभिनंदन करता हूँ। लेकिन सबसे ज्यादा मुझे इस बात की खुशी हुई कि उनका ये सारा अभियान ‘Team India – Vision for Tribal’ आदिवासियों के लिए कुछ कर गुज़रने के इरादे से वो करते हैंI देखिये, देश को आगे बढ़ाने के लिए हर कोई कैसे अपने-अपने प्रयास कर रहा है। और यही तो हैं, जब ऐसी घटनाएं सुनते हैं तो सीना तन जाता है। 



कभी-कभार perception के कारण हम हमारे युवकों के साथ घोर अन्याय कर देते हैं। और पुरानी पीढ़ी को हमेशा लगता है, नई पीढ़ी को कुछ समझ नहीं है और मैं समझता हूँ ये सिलसिला तो सदियों से चला आया है। मेरा युवकों के संबंध में अनुभव अलग है। कभी-कभी तो युवकों से बातें करते हैं तो हमें भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं कई ऐसे युवकों को मिला हूँ जो कहते हैं कि भई, मैंने तो जीवन में व्रत लिया हुआ है ‘Sunday on Cycle’। कुछ लोग कहते हैं कि मैंने तो सप्ताह में एक दिन Cycle-Day रखा हुआ है। मेरी health के लिए भी अच्छा रहता है। environment के लिए भी अच्छा रहता है। और मुझे अपने युवा होने का बड़ा आनंद भी आता है। आजकल तो हमारे देश में भी साइकिल कई शहरों में चलती है और साइकिल को promote करने वाले लोग भी बहुत हैं। लेकिन ये पर्यावरण की रक्षा के लिए और स्वास्थ्य के सुधार के लिए अच्छे प्रयास हैं। और आज जब मेरे देश के दो नौजवानों ने अमेरिका में झंडा फहरा दिया, तो भारत के युवक भी जिस दिशा में जो सोचते हैं, उसका उल्लेख करना मुझे अच्छा लगा। 



मैं आज विशेष रूप से महाराष्ट्र सरकार को बधाई देना चाहता हूँ। मुझे आनंद होता है। बाबा साहेब अम्बेडकर - मुंबई की ‘इंदू मिल’ की ज़मीन - उनका स्मारक बनाने के लिए लम्बे अरसे से मामला लटका पड़ा था। महाराष्ट्र की नई सरकार ने इस काम को पूरा किया और अब वहाँ बाबा साहेब अम्बेडकर का भव्य-दिव्य प्रेरक स्मारक बनेगा, जो हमें दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा। लेकिन साथ-साथ, लंदन में डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर जहाँ रहते थे - 10, किंग हेनरी रोड, वो मकान भी अब खरीद लिया है। विश्व भर में सफ़र करने वाले भारतीय जब लंदन जाएंगे तो बाबा साहेब अम्बेडकर जो स्मारक अब महाराष्ट्र सरकार वहाँ बनाने वाली है, वो एक हमारा प्रेरणा-स्थल बनेगा। मैं महाराष्ट्र सरकार को बाबा साहेब अम्बेडकर को सम्मानित करने के इन दोनों प्रयासों के लिए साधुवाद देता हूँ, उनका गौरव करता हूँ, उनका अभिनन्दन करता हूँ। 



मेरे प्यारे भाइयो-बहनो, अगली “मन की बात” आने से पूर्व आप अपने विचार जरुर मुझे बताइये, क्योंकि मेरा विश्वास है कि लोकतंत्र लोक-भागीदारी से चलता है। जन-भागीदारी से चलता है। कंधे से कन्धा मिला करके ही देश आगे बढ़ सकता है। मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें। बहुत-बहुत धन्यवाद।
***
AKT/AK

Sunday, January 12, 2014

एफएम गोल्ड पर छाये सीनियर पत्रकार गौतम जालंधरी

Sun, Jan 12, 2014 at 6:14 PM
खबर गर्म है के जरिये हुए श्रौताओं से रूबरू:कई मुद्दों पर की चर्चा 
लुधियाना: 12 जनवरी 2014: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
वरिष्ठ पत्रकार एवं ऑन लाइन न्यूज पार्टल नया शिखर के मुखय संपादक गौतम जालंधरी प्रसार भारती के एफएम गोल्ड में हर रविवार सुबह साढ़े नौ बजे प्रसारित कार्यक्रम खबर गर्म है, में विशेष रूप से शामिल हुए। खबर गर्म हैअकाशवाणी लुधियाना एफएम गोल्ड का एक बेहद संजीदा कार्यक्रम है तथा श्रौताओं में काफी पसंद किया जाता है। कार्यक्रम की शुरूआत में संचालक नवयेश नवराही ने पत्रकार जालंधरी कोश्रौताओं से रूबरू करवाते हुए आज विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित आम आदमी पाटी, एनआरआई स्म्मेलन व देवयानी प्रकरण सहित अन्य बड़ी खबरों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। श्रौताओं से रूबरू होते हुए पत्रकार जालंधरी ने इन खबरों पर अपना नजरिया व इसका आने वाले समय में प्रभाव के बारे में गहराई से बताया। इससे पहले स्टूडियों आने पर एफएम स्टाफ ने पत्रकार जालंधरी का स्वागत किया।

Tuesday, September 10, 2013

आकाशवाणी निःशुल्‍क एसएमएस सेवा शुरु

09-सितम्बर-2013 20:01 IST
सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने दिखाया एक और कमाल 
भारत निर्माण वेब पोर्टल का भी किया शुभारम्भ 
सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री मनीष तिवारी ने आज भारत निर्माण अभियान की ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की। इस ऑनलाइन पोर्टल द्वारा भारत निर्माण अभियान की विभिन्‍न परियोजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी डिजिटल प्‍लेटफॉर्म पर उपलब्‍ध होगी। यह डिजिटल प्‍लेटफॉर्म अंग्रेजी, हिन्‍दी और 11 क्षेत्रीय भाषाओं में प्रदान की जाएगी। इस सुविधा के शुरू हो जाने से उपयोगकर्ता को सभी जानकारियां एक ही स्‍थान पर उपलब्‍ध होंगी। इसके जरिये फेसबुक, ट्विटर और यू-ट्यूब को भी जोड़ गया है। इसके अलावा मोबाइल फोनों और टैब्‍लेट के लिये भी पोर्टल से संबंधित एप्‍लीकेशन्‍स दिये गए हैं।

     समग्र मल्‍टी मीडिया अभियान 2013 के दूसरे चरण की शुरुआत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 14 अगस्‍त, 2013 को की थी। इस मल्‍टी मीडिया अभियान को आठ जन सूचना अभियानों के जरिये मजबूत मीडिया तंत्र का समर्थन प्राप्‍त है। ग्रामीण इलाकों में यह काम पत्र सूचना कार्यालय कर रहा है, जिसे डीएवीपी, डीएफपी और गीत एवं नाटक डीविजन का समर्थन प्राप्‍त है। अब तक चार जन सूचना अभियानों को ‘जमुनिया’ ध्‍वनि एवं प्रकाश शो का समर्थन प्राप्‍त है।

     मंत्री महोदय ने आज ही आकाशवाणी का ‘आकाशवाणी समाचार निःशुल्‍क एसएमएस सेवा’ की भी शुरुआत की। उपभोक्‍ताओं को मोबाइल टेलीफोन पर आकाशवाणी समाचार निशुल्‍क एसएमएस द्वारा प्रदान की जाएगी। जो लोग इस सेवा को प्राप्‍त करना चाहते हैं, वे 08082080820 पर ‘AIRNEWS their name’ एसएमएस कर सकते हैं। वे चाहें तो इसी नंबर पर मिस-कॉल भी दे सकते हैं। अब तक दो लाख लोग इस सेवा से जुड़ चुके हैं।

भारत निर्माण अभियान के तथ्‍य एवं आंकड़े
मीडिया
श्रेणी
प्रथम चरण
द्वितीय चरण(अद्यतन)


(विज्ञापन/स्‍पॉट की संख्‍या)
टेलीविजन
केबल व उपग्रह चैनल
31,042
34,789

दूरदर्शन
1570
2090

योग
32,612
36,879
रेडियो
आकाशवाणी

12,600 (92 स्‍टेशनों पर)

निजी एफएम

94,932 ( 216 स्‍टेशनों पर)

योग

1,07,532 (1.07 लाख)
सामुदायिक रेडियो


6,048स्‍पॉट(36स्‍टेशनों पर)
डिजिटल सिनेमा
स्‍क्रीन
11,200 प्रतिदिन,2.24 लाख पूर्ण अवधि के दौरान(1400 अनुबंधि‍त स्‍क्रीनों पर)
27,324प्रतिदिन,6.46 लाखपूर्ण अवधि के दौरान (6,831अनुबंधि‍त स्‍क्रीनों पर)
प्रिंट
एडवर्टोरियल्‍स
5 X 750 = 3750


स्‍ट्रीप विज्ञापन
12 X 750 = 9000


योग
12,750 (लगभग750 समाचार पत्रों में)
15,120 (लगभग 700समाचार पत्रों में)
बाहरी प्रसार
प्रदर्शित स्‍थलों की संख्‍या
3,550
4,225
अगस्‍त और सितंबर, 2013 में किए गये जन सूचना अभियानों का ब्‍योरा इस प्रकार है:-

·        झाबुआ, मध्‍यप्रदेश (11-13 अगस्‍त, 2013)
·        मारवाड़, पाली, राजस्‍थान (17-19 अगस्‍त, 2013)
·        साहिया, मिजोरम (21-23 अगस्‍त, 2013)
·        धारियाबाद, प्रतापगढ़, राजस्‍‍थान (24-26 अगस्‍त, 2013) (जमुनिया 24 अगस्‍त से 27 अगस्‍त, 2013 तक)
·        बैतूल, मध्‍यप्रदेश (25-27 अगस्‍त, 2013) (जमुनिया 24 अगस्‍त से 28 अगस्‍त, 2013 तक)
·        छिंदवाड़ा, मध्‍यप्रदेश (पांच से सात सितंबर, 2013) (जमुनिया आठ सितंबर से 11 सितंबर, 2013 तक)
·        गरियाबंद, छत्‍तीसगढ़ (छह-आठ सितंबर, 2013)
·        बाओली, सवाई माधोपुर, राजस्‍थान (सात-नौ सितंबर, 2013) (जमुनिया तीन सितंबर से सात सितंबर, 2013 तक)

****
वि कासोटिया/अरुण/अंबुज-6086

Friday, August 16, 2013

लुधियाना में आकाशवाणी का एफएम गोल्ड रेडियो

16-अगस्त-2013 19:41 IST
दशकों पुराना सपना साकार:मनीष तिवारी ने किया उदघाटन 
*लुधियाना में पासपोर्ट का क्षेत्रीय कार्यालय खुलवाने का भरोसा दिलाया 
*लुधियाना और नई दिल्ली के बीच शीघ्र नई शताब्दी

सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने आज लुधियाना में आकाशवाणी के एफएम गोल्ड रेडियो का उद्घाटन किया। इसके साथ ही लुधियाना चार मेट्रो शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता के बाद एफएम गोल्ड रेडियो वाला देश का पांचवां शहर हो गया है। 
इस मौके पर गुरु नानक देव भवन के सभागार में बड़ी संख्या में जुटे लोगों को संबोधित करते हुए श्री तिवारी ने बताया कि पंजाब के बड़े और अहम औद्योगिक केंद्र लुधियाना में स्थानीय रेडियो केंद्र की मांग काफी समय से लंबित पड़ी थी जो आज पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल लुधियाना रेडियो केंद्र का दायरा 20 किलोमीटर ही है जिसे बाद में बढ़ाया जाएगा और यहां से स्टूडियो आधारित कार्यक्रम बनाए जाएंगे और प्रसारित किए जाएंगे। एफएम गोल्‍ड लुधियाना का प्रसारण 100.01 मेगा हर्ट्ज पर सुना जा सकता है। 

श्री तिवारी ने महज 4 महीने की अवधि में एफएम गोल्ड को साकार करने के लिए प्रसार भारती के अधिकारियों और अभियंताओं को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नया रेडियो केंद्र लुधियाना जैसे शहर में एक नई शुरूआत का संदेशवाहक बनेगा जो पंजाब का एक अहम शहर होते भी अपने एफएम रेडियो से अब तक वंचित था। इस कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में फतेहगढ़ साहिब से सांसद सुखदेव सिंह लिबरा, प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सरकार, और आकाशवाणी के महानिदेशक एल डी मंडोली भी शामिल रहे। इस मौके पर अन्य लोगों के अलावा श्री सुरिंदर डावर, श्री मोहम्मद सादिक़ (दोनों विधायक), श्री पवन दिवान डीसीसी (यू) अध्यक्ष, पूर्व राज्य मंत्री श्री मल्कियत सिंह डाखा, मलकित सिंह बिरनी, और इशर सिंह मेहरबान, पूर्व विधायक जगदेव सिंह जस्सोवाल भी मौजूद थे।
लुधियाना में भावी नागरीय सुविधाओं के बारे उन्होंने बताया कि मौजूदा पासपोर्ट सेवा केंद्र को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में बदलने के लिए उन्होंने संबंधित मंत्रालय के सामने बात रखी है ताकि आवेदकों को पासपोर्ट के लिए चंडीगढ़ या जालंधर नहीं जाना पड़े। श्री तिवार ने लुधियाना से नई दिल्ली वाया अंबाला एक नई शताब्दी ट्रेन शुरू करने का भी वायदा किया। उन्होंने बताया कि ये मसला पहले ही रेलवे मंत्रालय के सामने रख दिया गया। 

श्री मनीष तिवारी ने केंद्र की ओर से लुधियाना को मिल रही अन्य सेवाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2010 में ही दिल्ली और लुधियाना के बीच हवाई सेवाएं मिल गईं थी लेकिन राज्य सरकार की ओर से कुछ जरूरी आवश्यकताएं पूरी नहीं कर पाने की वजह से हवाई सेवाएं जारी नहीं रखी जा सकीं। इस मौके पर श्री तिवारी ने यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी खाद्य सुरक्षा योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत देश के 81 करोड़ आबादी को क्रमश: 3, 2, और 1 रुपये में ही चावल, गेहूं और मोटे अनाज मिल सकेंगे। 

इस मौके पर प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सरकार ने घोषणा की कि दो महीने के भीतर ही स्थानीय एफएम गोल्ड रेडियो में तैयार स्थानीय कार्यक्रम इसी केंद्र से प्रसारित किए जाएंगे जो शुरूआती दौर में एक घंटे के होंगे और सुबह और शाम के समय प्रसारित होंगे। (PIB)
वि. लक्ष्मी कासोटिया/अनिल/सुजीत- 5651

रेडियो स्‍टेशनों के लिए बोलियों का काम अगले छह महीनों में

लुधियाना में आकाशवाणी का एफएम गोल्ड रेडियो