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Saturday, April 18, 2020

'यमन दो मोर्चों पर युद्ध नहीं लड़ सकता'

संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स की अपील 
17 अप्रैल 2020//शांति और सुरक्षा
© UNICEF/Romenzi यमन में युद्ध के दौरान एक हवाई हमले में ध्वस्त हुए एक मकान के सामने बैठे कुछ बच्चे. (जुलाई 2019)
यमन में वैश्विक महामारी कोविड-19 के और ज़्यादा गंभीर होते जाने के कारण अब बिल्कुल सही वक़्त है कि युद्धरत पक्ष अपनी अदावत ख़त्म करके लड़ाई बन्द कर दें। यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने गुरूवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के ज़रिए सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में कही। 

उन्होंने कहा, “यमन एक साथ दो मोर्चों का सामना नहीं कर सकता: युद्ध और एक वैश्विक महामारी. और वायरस का मुक़ाबला करने में यमन के सामने अब जो नया युद्ध दरपेश है, उसी में उसकी सारी ताक़त लग जाएगी।"

इस युद्ध को तत्काल रोके जाने और सारे संसाधन इस नई मुसीबत का मुक़ाबला करने में लगा देने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।”

ध्यान रहे कि यमन में अनेक वर्षों से सरकार समर्थित सेनाओं और हूती विद्रोहियों के बीच युद्ध जारी है।

सरकारी पक्ष को गठबंधन का समर्थन हासिल है जबकि हूती विद्रोहियों को अंसार अल्लाह आंदोलन भी कहा जाता है।

ये दोनों पक्ष ख़स्ता हालत में पहुँच चुके देश पर क़ब्ज़ा करने के लिए पाँच साल से भीषण युद्ध लड़ रहे हैं जहाँ विश्व का भीषणतम मानवीय संकट पैदा हो गया है।

यमन की लगभग 80 फ़ीसदी आबादी बाहरी व मानवीय सहायता पर निर्भर हो चुकी है। 

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा कि कि यमन में कोविड-19 महामारी के आने से वहाँ के लोगों की तकलीफ़ें और भी ज़्यादा दर्दनाक बनने का ख़तरा पैदा हो गया है। 
UN Photo/Eskinder Debebe 
सुरक्षा परिषद की एक वर्चुअल मीटिंग को यूएन मुख्यालय स्थित स्टूडियों स्टाफ़ ने मुमकिन बनाया. (16 अप्रैल 2020)
“इससे बेहतर और कोई समय नहीं हो सकता जब युद्धरत पक्षों को अपनी बन्दूकें ख़ामोश कर देनी होंगी व संघर्ष समाप्त करके एक शान्तिपूर्ण और राजनैतिक समाधान की तलाश करनी होगी।”

राष्ट्रव्यापी युद्धविराम के लिए वार्ता
यमन सरकार की सेनाओं को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन हासिल है. इस गठबंधन ने यूएन महासचिव की अपील पर ध्यान देते हुए 8 अप्रैल को आरंभिक रूप में एक पखवाड़े के लिए इकतरफ़ा युद्धविराम की घोषणा की थी। 

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कुछ ही दिन पहले दिए अपने सन्देश में कोविड-19 वैश्विक महामारी को देखते हुए वैश्विक युद्धविराम की अपील की थी। 

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स यमन में एक राष्ट्रव्यापी युद्धविराम के प्रस्तावों पर दोनों युद्धरत पक्षों के बीच बातचीत कराने के लिए सक्रिय रहे हैं। 

इनमें क़ैदियों की रिहाई, सिविल सेवा के कर्मचारियों की वेतन अदायगी और मानवीय सहायता कार्यों के लिए रास्तों का खोला जाना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा शामिल है। 

उनका कहना था, “मैं पुरउम्मीद हूँ, और मेरा विश्वास है कि–जो प्रस्ताव मैंने रखे हैं, हम उन पर आम सहमति की तरफ़ बढ़ रहे हैं, ख़ासतौर से, एक राष्ट्रव्यापी युद्धविराम के सिद्धांत पर, जिसे दोनों ही पक्षों का समर्थन हासिल है।”

हताहतों की संख्या
विशेष दूत ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों को ये भी बताया कि इन घटनाक्रमों के बावजूद,अदावत अब भी जारी है। 
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कार्यों के लिए शीर्ष अधिकारी मार्क लोकॉक ने भी इस मौक़े पर बताया कि यमन में जनवरी के बाद से आम लोगों के हताहत होने की संख्या हर महीने बढ़ती ही रही है. इस अवधि के दौरान 500 लोग हताहत हुए हैं, उनमें से लगभग एक तिहाई बच्चे थे। 

कोविड-19 यमन में ऐसे समय पहुँचा है जब देश में पाँच साल की लड़ाई के कारण स्वास्थ्य ढाँचा बुरी तरह चरमरा गया है, लोगों की रोग प्रतिरोधी क्षमता बहुत कमज़ोर हो चुकी है और उनके अन्दर बीमारियों के लिए बहुत अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा हो गई हैं।

मानवीय सहायता कार्यों के संयोजक मार्क लोकॉक ने कहा, “परिणामस्वरूप स्वास्थ्य वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि कोविड-19 यमन में बहुत तेज़ी से फैल सकता है, ज़्यादा व्यापक दायरे में और अनेक अन्य देशों की तुलना में जानलेवा नतीजों के साथ।”

वैसे तो कोविड-19 महामारी को कम करने के लिए किए जा रहे ऐहतियाती उपायों के कारण सहायता अभियानों की रफ़्तार पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन रास्तों को रोके जाने, असुरक्षा और स्टाफ़ और सामान ले जाने पर लगी प्रशासनिक पाबंदियों के कारण बाधित ज़रूर हो रहे हैं। 

धन की कमी एक अन्य समस्या है, क्योंकि यमन में सहायता के लिए चलाए जा रहे 41 प्रमुख कार्यक्रमों और अभियानों में से 31 आने वाले कुछ सप्ताहों में बन्द हो जाएंगे, बशर्ते कि उन्हें सहारा नहीं दिया गया तो। 

मार्क लोकॉक ने अतीत में बीमारियों को क़ाबू करने में सक्रिय रहे स्वास्थ्य दलों को खो देने का डर जताते हुए कहा, “हमें इन चिकित्सा दलों की पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है – ना केवल कोविड-19 का मुक़ाबला करने के लिए, बल्कि बारिश का मौसम नज़दीक होने के कारण हैज़ा फिर से अपना सिर उठा सकता है।”

Sunday, March 29, 2020

कोरोना संकट में भी सामने आई ठाकुर दलीप सिंह की संगत

29th March 2020 at 5:08 PM
हर राज्य में पहुंचाए जा रहे हैं राशन और अन्य आवश्क्य चीज़ों के पैकेट  
लुधियाना: 29 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
इसमें कोई शक नहीं कि कोरोना वायरस ने सारी दुनिया को हिला कर रख दिया है लेकिन हकीकत यह भी है कि इसने सभी को एक भाईचारे का अहसास भी करवा दिया है। जहां पर्यावरण का मौसम शुद्ध हो गया है वहीँ लोगों के दिल और दिमाग का प्रदूषण भी अब तेज़ी से कम होता जा रहा है। लोग घर में बैठ कर चिंतन मनन करने लगे हैं। खुद से मुलाकात भी करने लगे हैं। लेकिन पैसे का संकट भी गहराया है। 
इस नाज़ुक हालात में जब आम लोग भूखमरी की कगार पर भी  पहुंच गए हैं। इस समय स्थिति बेहद नाज़ुक रूप ले रही है। लोगों के पास न तो नगद पैसा बचा है और न ही खाने का भोजन। ऐसे में जो लोग लंगर और राशन की सेवा ले कर आगे आये हैं उनमें से अधिकतर लोग या तो फोटो खिंचवा खिंचवा कर इन गरीबों के आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं या फिर इनके आधार कार्ड मांग कर इनको इनकी गरीबी और मजबूरी का अहसास कराते हैं। उनके अंदाज़ में कहीं भी दया भावना या दिव्यता नहीं होती। मध्य वर्गों से जुड़े बहुत से लोग ऐसी हालत में भूखे मरना तो मंज़ूर कर लेते हैं लेकिन लीडरी की ललक रखने वाले ऐसे लोगों की लिस्टों में अपना नाम कभी नहीं लिखाते। ऐसे लोगों की सहायता को पहुंचे हैं नामधारी समुदाय के संत स्वभाव लोग। किसी के भी आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाए बिना उसको मदद देते हैं। बिना कोई शर्त रखे बिना कोई सबूत मांगे। हालांकि गलत लोग इस का फायदा भी उठाने का प्रेस करते हैं लेकिन इनकी अंतर्दृष्टि सब पहचान लेती है और उन बेईमानों को भी इमां के रास्ते पर ले आती है।  शब्दों की मिठास उसे इस संकट में जो राहत देती है उसका उल्लेख शब्दों में किया ही नहीं जा सकता।  
इन मजबूर लोगों की मजबूरी और आत्म सम्मान को समझते हुए नामधारी संगत इनको बिना किसी भेदभाव के राहत पहुंचा रही है। राहत में सूखा राशन भी है और नगदी भी। नामधारी संगत यह सारा काम अपने सद्गुरु ठाकुर दलीप सिंह के आदेशों पर कर रही है। राहत के इस काम को पंजाब के साथ साथ दिल्ली, यूपी, हरियाणा, हिमाचल  प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों तक भी लेजाया जा रहा है। अमृतसर, गुरदासपुर, चुन्नी, मोहाली, जालंधर और पटियाला की संगत इस काम के लिए बढ़चढ़ कर आगे आई है। नामधारी हरविंदर सिंह, नामधारी तेजिंदर सिंह, सेवक देव सिंह ने कहा कि जैसी जैसी ड्यूटी लगाई गयी है उसी के मुताबिक संगत अपना काम कर रही है। 
नामधारी नवतेज सिंह ने कहा कोरोना के इस गंभीर संकट को देखते हुए जिस तरह बहुत से समाज सेवी संगठन आगे बढ़ कर आये है उसे देखते हुए यह विश्वास और पक्का होता है कि हम प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना को जल्द ही हरा देंगें। ऐसे में बेरोज़गारी और राशन की कमी का जो संकट खड़ा हुआ है उसे भी हमें सभी लोगों को एकजुट हो कर ही हराना होगा। हंस सभी एक रहेंगे तो इस पर भी काबू पाया जा सकेगा। 
इस लिए जितने भी संगठन इस मकसद के लिए कार्य कर रहे हैं वे सभी हार्दिक बधायी के पात्र हैं। हम उन्हें सलाम करते हैं।  
उनके साथ ही सुश्री भूपिंदर कौर (अमृतसर) ने कहा कि ठाकुर दलीप सिंह जी उन लोगों को ज़बरदस्त सड़कों पर लंगर खिलाने के हक में नहीं जो पहले ही पेट भर कर खाये होते हैं। हमें यह सारा लंगर ज़रूरतमंद लोगों तक पहुंचना होगा। इस मकसद के लिए अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित करना होगा। 
संकट का सामना करने के इस दिव्य अवसर पर सुश्री कुलदीप कौर (पटियाला), साहिब सिंह (अमृतसर), रत्न सिंह, हज़रा सिंह (चंडीगढ़), हरदीप सिंह (हिमाचल प्रदेश), जसपाल सिंह, मनमोहन सिंह (कानपुर), जसवीर सिंह (सिरसा), मोहन सिंह झब्बर (करीवाला), सरबजीत कौर दिल्ली और गुरमीत सिंह सग्गू भी मौजूद रहे।
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