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Monday, May 13, 2024

मोहाली में ज़िला प्रशासन द्वारा 24x7 शिकायत कक्ष शुरू

 Monday 13th May 2024 at 6:15 PM

शिकायतों के निपटारे में अब और तेज़ व नई रफ़्तार लाने का दावा 


एसएएस नगर: (मोहाली): 13 मई 2024: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

लोगों को अक्सर यह शिकायत रहती है कि शिकायत जा तो दर्ज ही नहीं होती जा फिर उनका जल्द निपटारा नहीं होता। अब सत्ता और प्रशासन ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मई तकनीक के मुताबिक शिकायत का निपटारा हर हालत में 100 मिनटों के अंदर अंदर कर दिया जाएगा। इसकी जानकारी ए डी सी कम अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारी वी इस तिड़के ने दी। लोगों में इसे ले कर बेहद उत्साह है। 

यहां मोहाली अर्थात एसएएस नगर में भी सिविल विजिलेंस को 66 शिकायतें मिलीं, प्रशासन ने इनका समय पर समाधान किया-एडीसी विराज एस तिड़के इस दिशा में पूरी तरह से सक्रिय बने हुए हैं। इस शिकायत केंद्र में 66 में से 42 शिकायतें वैध पाई गईं 24x7 शिकायत निगरानी कक्ष सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। 

अतिरिक्त उपायुक्त-सह-अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारी विराज एस. तिडके ने कहा कि ज़िला प्रशासन द्वारा 24x7 शिकायत निगरानी कक्ष स्थापित किया गया है, जहां आदर्श चुनाव संहिता के उल्लंघन से संबंधित विभिन्न शिकायतें आती हैं। संचार के विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों का समय पर निस्तारण भी त्वरित गति से किया जा रहा है। 

एडीईओ ने आगे बताया कि शिकायत प्रकोष्ठ को अब तक भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा विकसित सी विजिल ऐप के माध्यम से आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित 66 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि 23 शिकायतें विभिन्न कारणों से खारिज कर दी गईं (वैध नहीं पाई गईं) जबकि शेष 42 शिकायतें वैध पाई गईं और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 100 मिनट की समय सीमा के भीतर निपटारा कर दिया गया, जबकि एक शिकायत प्रगति पर है उन्होंने कहा कि जब भी सी विजिल ऐप पर कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो शिकायत प्राप्त होने के पांच मिनट के भीतर फ्लाइंग स्क्वाड टीमों को नियुक्त किया जाता है, जिसके बाद टीम को 15 मिनट के भीतर वहां पहुंचना होता है। इसके बाद 30 मिनट के भीतर शिकायत की जांच कर रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए निर्वाचन क्षेत्र के सहायक रिटर्निंग अधिकारी को भेज दी जाती है। एआरओ को अगले 50 मिनट के भीतर शिकायत पर कार्रवाई करनी होगी। 

उन्होंने कहा कि इस तरह मात्र 100 मिनट में शिकायत का निपटारा हो जाता है. उन्होंने कहा कि यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और इस ऐप के माध्यम से नागरिक आदर्श आचार संहिता के किसी भी उल्लंघन के स्थान आधारित विवरण के साथ मौके पर ही फोटो और वीडियो अपलोड कर सकते हैं। जब वह कोई तस्वीर या वीडियो अपलोड करते हैं, तो उड़न दस्ते और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा तत्काल कार्रवाई शुरू की जाती है। इस तरह तेज़ी से इस दिशा में कदम उठाए जाते हैं। 

अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी ने यह भी बताया कि इन शिकायतों के समाधान में औसतन 43.26 मिनट का समय लगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन आदर्श आचार संहिता को सख्ती से लागू कर रहा है। 

Thursday, May 16, 2013

आयकर लोकपाल:

07-मई-2013 16:22 IST
अपनी शिकायतें दूर करने के लिए इनकी मदद लें--विशेष लेख
एक करदाता के रूप में मुआवज़े के निपटारे संबंधी आयकर मामले को लेकर आपकी कुछ जायज़ शिकयतें हो सकती हैं।  उदाहरण के तौर पर आपको लग सकता है कि आयकर विभाग को आपके कर का कुछ हिस्‍सा रिफंड करना है लेकिन न ही वह आपकी शिकायतों को सुन रहा है और न ही उसके निपटारे के लिए कुछ खास कदम उठा रहा है। आप अधिकारियों के रूखे व्‍यवहार या   उनके द्वारा बोर्ड के निर्देशों और परिपत्रों का पालन नहीं करने पर खिन्‍न हो सकते हैं। ऐसे सभी मामलों के लिए आप आयकर लोकपाल के पास जा सकते हें। ऐसा करने से पहले आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि कुछ शर्तें पूरी कर ली गई हैं। लोकपाल, आयकर लोकपाल दिशा-निर्देश,2006 के ढांचे के तहत और उसके द्वारा शासित होता है।
  लोकपाल की धारणा मूल रूप से स्‍कैंडिनेविया से ली गई है।लोकपाल सार्वजनिक क्षेत्र के प्राधिकरण के कामकाज के खिलाफ शिकायतों की जांच करता है। हमारे देश में लोकपाल की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। वे आम तौर पर एक ऐसा व्‍यक्ति होता है जिसे कर प्रशासन का काफी अनुभव होता है लकिन वह कामकाज स्‍वतंत्र रूप से करता है। वर्तमान में सरकार ने नई दिल्‍ली, मुम्‍बई, चेन्‍नई, कानपुर, चंडीगढ़, पुणे, भोपाल, कोच्चि, कोलकाता, हैदराबाद, बैंगलोर और अहमदाबाद में लोकपाल नियुक्‍त किए हैं।
शिकायतें जो आप लोकपाल के समक्ष रख सकते हैं:
आप निम्‍नलिखित मुआवज़े के निपटारे या उनकी देरी से मिलने संबंधी शिकायतें लोकपाल के समक्ष रख सकते हैं:
क. रिफंड जारी करना;
ख. ब्‍याज छूट संबंधी याचिकाएं;
ग. अपील इफेक्‍ट्स
घ. सुधार संबंधी आवेदन
ड. लेखा और संपित्‍त्‍यों की जब्‍त पुस्‍तकें जारी करना ;
च.   पैन नंबर देना/ पैन कार्ड जारी करना
निम्‍नलिखित कार्य नहीं होने पर भी आप शिकायत कर सकते हैं:
क. स्रोत पर काटे गए कर सहित भुगतान किए गए करों के लिए ऋण देना;
ख. जांच के लिए मामलों के चयन में पारदर्शिता बरतना;
ग. केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड के दिशा-निर्देशों, परिपत्रों और अनुदेशों का अनुपालन करना;
घ. आयकर अधिकारियों के सही कार्य-समय पर नज़र रखना;
ड. कर निर्धारिती द्वारा भेजे गए पत्रों और दस्‍तावेज़ों को स्‍वीकार करना;
च. उत्‍पीड़न संबंधी घटनाओं का रिकार्ड और रजिस्‍टर रखना। ‘एक व्‍यक्ति कर निर्धारिती के साथ आयकर अधिकारियों के अनुचित रूखे बर्ताव के बारे में भी शिकायत कर सकता है।’
अधिक जानकारी के लिए कृपया दिशा-निर्देशों की धारा 9 देंखे।
शिकायत के लिए प्रक्रिया
शिकायत मिलने पर लोकपाल इसकी जांच करेगा कि दिशा-निर्देशों में उल्लिखित कुछ मूल शर्तें पूरी की गई हैं की नहीं। यह शर्तें पूरी नहीं होने तक वह शिकायत पर गौर नहीं कर सकता। यह शर्तें इस प्रकार हैं:
        i.            अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा शिकायत पेश किए जाने पर उस पर शिकायतकर्ता के साथ-साथ उस अधिकृत प्रतिनिधि के हस्‍ताक्षर होने चाहिए।
      ii.            शिकायत में स्‍पष्‍ट रूप से निम्‍नलिखित चीज़ें उल्लिखित होनी चाहिए:
                       ii.क. शिकायतकर्ता का नाम, पता और पैन नंबर।
                       ii.ख. जिसके खिलाफ शिकायत की गई है उस अधिकारी का नाम और पदनाम (यह निरपवाद रूप से सबसे कनिष्‍ठ कम से कम आयकर रैंक का अधिकारी होना चाहिए जिसने शिकायत को आगे बढ़ाया है)
ग. शिकायत संबंधी तथ्‍य;
घ.  समर्थन में दस्‍तावेज़ ; और
ड. लोकपाल से अपेक्षित राहत
iii. लोकपाल इलैक्‍ट्रॉनिक तरीके से भेजी गई शिकायत को तभी स्‍वीकार करेगा यदि अन्‍य प्रकार से पूरी तरह व्‍यवस्थित है लेकिन ऐसी शिकायत के प्रिंटआउट पर जल्‍दी से जल्‍दी शिकायतकर्ता के हस्‍ताक्षर होने चाहिए। ऐसे करने के बाद शिकायत को उसी तारीख पर दर्ज किया जाएगा जिस दिन वो इलैक्‍ट्रॉनिक तरीके से भेजी गई थी।
लोकपाल के समक्ष शिकायत तब तक नहीं रखी जाएगी जब तक पहले दृष्‍टांत में शिकायतकर्ता ने उस अधिकारी जिसके खिलाफ शिकायत दर्ज की है उसके वरिष्‍ठ अफसर को भी लिखित अभिवेदन नहीं दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता तभी शिकायत कर सकता है यदि उसे इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है और इस बात को एक महीने से अधिक समय बीत गया है। वैकल्पिक रूप से वह तब भी शिकायत कर सकता है यदि उसे जवाब मिला है लेकिन वो उससे संतुष्‍ट नहीं है या उसके अभिवेदन को रद्द कर दिया गया है।
कोई शिकायत नहीं हो सकती यदि:
        i.            वरिष्‍ठ अधिकारी का जवाब मिले 12 महीने बीत गए हैं;
      ii.            वरिष्‍ठ अधिकारी को सौंपे गए अभिवेदन को 13 महीने बीत गए हों लेकिन कोई जवाब न मिला हो।
याद रखें कि लोकपाल शिकायत का संज्ञान नहीं लेगा यदि वे इस विषय से जुड़े हैं:
क. लोकपाल द्वारा पूर्व में किए गए मामले का निपटान
                     या
ख. आयकर प्रशासन या अदालत के समक्ष कोई अपील, संशोधन, रेफरेंस या रिट।
शिकायत मिलने पर लोकपाल इसे उस अधिकारी को भेज देगा जिसके खिलाफ शिकायत की गई है और उसे सुलह या बातचीत के ज़रिए समझौते के साथ निपटाने की कोशिश करेगा। यदि अधिकारी शिकायतकर्ता के साथ समझौते के जरिए शिकायत का निपटारा एक महीने के भीतर या लोकपाल द्वारा तय की गई समय-सीमा में नहीं करता तो लोकपाल इसमें मध्‍यस्‍थ बनेगा और किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश करेगा। अगर इसमें भी सफल नहीं हो पाता तो वे यह मामले पर फैसला दे सकता है।
शक्तियां

लोकपाल के पास निम्‍नलिखित अधिकार हैं-

1. वह दिशानिर्देश की धारा 9 में शामिल मामलों पर शिकायत प्राप्‍त कर सकते हैं।

2. वह इन शिकायतों पर विचार कर सकता है और सुलह एवं मध्‍यस्‍थता तथा उचित निर्णय से निपटा सकता है।

3. वह आयकर प्राधिकरण से कोई सूचना अथवा आवश्‍यक संबंधित दस्‍तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्‍त कर सकता है।

4. यदि आयकर प्राधिकरण ऐसी कोई जानकारी या दस्‍तावेज (उपर इंगित अनुच्‍छेद तीन में) प्रस्‍तुत करने में चूक करता है, तब लोकपाल प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

5. वह शिकायतों के निपटान के लिए सुधारात्‍मक उपायों का सुझाव कर सकता है।

6. वह सचिव, राजस्‍व विभाग और सीबीडीटी के अध्‍यक्ष को अपने जांच परिणामों का विवरण दे सकता है।

कर्तव्‍य

लोकपाल के कर्तव्‍य :

1. अधिक्षण शक्तियों का प्रयोग करना और अपने कार्यालय का संचालन करना।

2. स्वयं को प्राप्‍त होने वाले जानकारी को गोपनीय रखना तथा ऐसी जानकारी देने वाले व्‍यक्ति की सहमति को छोड़कर उन्‍हें तीसरे पक्ष को प्रकट नहीं करना। हालांकि यथोचित प्राकृतिक न्‍याय के सिद्धांत का अनुपालन करने के क्रम में ऐसी सूचना विपक्ष को दे सकता है।

3. करदाताओं के अधिकारों की रक्षा तथा उनके अनुपालन के बोझ को कम करना।

4. अनुपालन के बोझ को बढ़ाने वाले मामलों की पहचान करना तथा उन्‍हें सीबीडीटी और वित्‍त मंत्रालय के सामने लाना।

5. सीबीडीटी के अध्‍यक्ष और राजस्‍व विभाग के सचिव को दोषी कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की सलाह देते हुए मासिक रिपोर्ट प्रस्‍तुत करना।

6. कर प्रशासन की वार्षिक रिपोर्ट सीबीडीटी के अध्‍यक्ष और राजस्‍व विभाग सचिव को देना।

7. उसके द्वारा वित्‍त वर्ष में दिये गये निर्णयों  की सूची बनाना तथा उनकी संबंधित मुख्‍य आयुक्‍तों और सीबीडीटी के अध्‍यक्ष को जानकारी देना ताकि संबंधित अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट बनाने के समय उन्‍हें ध्‍यान में रखा जा सके। 

कार्यवाही का स्‍वरूप  

     लोकपाल के सामने कार्यवाही की प्रकृति अर्ध न्यायिक होता है। वह सबूतों के किसी भी कानूनी नियमों से बाध्‍य नहीं होता है। उससे उम्‍मीद की जाती है कि वह अपने कार्य के निष्‍पादन में हमेशा निष्‍पक्ष और विवेकपूर्ण हो।

निर्णय का स्‍वरूप  

     जैसा कि पहले संकेत दिया जा चुका है, वह सबसे पहले शिकायत का निपटारा समझौते के द्वारा करने की कोशिश करेगा। यदि इस तरह के समझौता का पालन एक महीने के अंदर या लोकपाल द्वारा दिये गये अधिक समय में निपटारा नहीं हो पाता है तब वह निर्णय ले सकता है। यह एक कथित आदेश होगा और संबंधित प्राधिकरण के लिए स्‍पष्‍ट रूप से निर्देश निर्दिष्‍ट करेगा, जिसमें माफी मांगना भी शामिल होगा। हालांकि एवार्ड आय की कुल राशि या निर्धारित कर या पहले से लगाये गये जुर्माने को प्रभावित नहीं कर सकती। शिकायत कर्ता के नुकसान के एवज में लोकपाल हजार रूपये तक का मुआवजा प्रदान कर सकता है। इस तरह का मुआवजा शिकायतकर्ता के खिलाफ आवंटित बजट पर चार्ज किया जाएगा। विभाग के लिए निर्णय बाध्‍य होगा, परंतु ये कर निर्धारिती के लिए सिर्फ तब बाध्‍य होगा, जब वह उसके प्राप्‍त होने के 15 दिन के भीतर स्‍वीकृति जारी करता है। यदि शिकायतकर्ता निर्णय स्‍वीकार नहीं करता है या 15 दिन के अंदर स्‍वीकृति पत्र देने में असमर्थ होता है, या लोकपाल द्वारा दी गई 15 दिन की अतिरिक्‍त अवधि समाप्‍त होने पर वह रद्द हो जाएगा और प्रभावी नहीं रहेगा। यदि वह निर्णय निर्धारिती द्वारा स्‍वीकार कर लिया जाता है तो जिस प्राधिकरण के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है उसको उसे एक महीने के भीतर लागू करना होगा। ऐसा होने का अनुपालन लोकपाल को सूचित करना होगा।

जांच सूची

    आपको शिकायत दर्ज करने में मदद देने के लिए एक जांच सूची बनाई गई है। ये नीचे दी गई है:-

1. शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पर हस्‍ताक्षर न किये गये हों।

2. अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा इस पर हस्‍ताक्षर नहीं किये गये हो।

3. इसमें शामिल नहीं हैं:-

(क) शिकायतकर्ता का नाम और पता

(ख) सहायक दस्‍तावेज

(ग) प्रशासनिक शिकायत जाँच अधिकारी से मांगे गये कर छूट के विवरण

4. इलेक्‍ट्रोनिक तरीके से तैयार परंतु हार्ड कॉपी (मुद्रित अभिलेख) में शिकायतकर्ता के हस्‍ताक्षर न हों।

5. ऐसा प्रतीत न हो कि शिकायत अधिकारी से तत्‍काल वरिष्‍ठ अधिकारी को सूचना न दी गई है।

6. तत्‍काल वरिष्‍ठ अधिकारी के सामने अभिवेदन पारित किये हुए एक महीना न बीता हो

7. अपने वरिष्‍ठ अधिकारी से प्राप्‍त उत्‍तर पर शिकायतकर्ता असंतुष्‍ट प्रतीत नहीं होता हो।

8. (क) तत्‍काल वरिष्‍ठ अधिकारी से उत्‍तर प्राप्‍त होने के एक साल बीतने पर शिकायत दायर की गई हो।

                 अथवा

(ख) तत्‍काल वरिष्‍ठ अधिकारी से कोई उत्‍तर न मिला हो।

तत्‍काल वरिष्‍ठ अधिकारी के सामने दायर किये गये अभिवेदन के 13 महीने के बाद शिकायत दर्ज की गई है।

9. शिकायत लोकपाल द्वारा पहले की गई कार्यवाही का विषय है।  

10. इस शिकायत पर किसी अदालत या अपीलीय प्राधिकरण में अपील, संशोधन, संदर्भ  या रिट के रूप में भी कार्रवाई हो रही हो।

11. शिकायत का आधार आयकर लोकपाल दिशानिर्देश 2006 के दिशानिर्देश 9 में शामिल न हो।

12. शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्‍व अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा किया गया हो। परंतु शिकायत दर्ज करने के लिए अटर्नी अधिकार लोकपाल के सामने दायर न किया गया हो।

     याद रखें की जांच सूची में हर वक्‍तव्‍य का उत्‍तर नकारात्‍मक होना चाहिए। क्रम संख्‍या एक से सात और 12 के सकारात्‍मक जवाब ये दर्शाते हैं कि, शिकायत दोषपूर्ण है और लोकपाल आपके शिकायत के निवारण के लिए आगे कार्यवाही नहीं कर सकता।

     वहीं क्रम संख्‍या आठ से 11 के लिए सकारात्‍मक प्रतिक्रिया ये दर्शाती है कि, शिकायत दोषपूर्ण होने के साथ-साथ निरुपाय है। ऐसी शिकायत दर्ज करने का कोई फायदा नहीं होगा।

     इस संस्‍था को प्रभावी बनाना हम सभी की वास्‍तविक जिम्‍मेदारी है। हम ऐसा ऊपर दी गई जांच सूची में शामिल दोषों को दूर करके और तुच्‍छ तथा बेकार शिकायतें दर्ज कराने से बचकर कर सकते हैं।
(PIB)
पसूका चंडीगढ़
मीणा/ई अहमद/प्रियंका/शोभा/सोनिका-91
पूरी सूची -07.05.2013 
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Wednesday, April 17, 2013

ऑनलाइन शि‍कायत प्रणाली के माध्‍यम से 2662 शि‍कायतें

राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता हेल्‍पलाइन को मार्च, 2013 में 12,121 कॉल की गई
    राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता हेल्‍पलाइन (एनसीएच) ने मार्च, 2013 के दौरान 12,121 कॉल प्राप्‍त की। इन दूरभाष कॉलों/शि‍कायतों के अलावा एनसीएच वेबसाइट पर ऑनलाइन शि‍कायत प्रणाली के माध्‍यम से 2662 शि‍कायतें भी प्राप्‍त की गईं।

      इनमें सबसे अधि‍क कॉल दि‍ल्‍ली से प्राप्‍त हुईं। इसके बाद उत्‍तर प्रदेश, महाराष्‍ट्र, हरि‍याणा, राजस्‍थान, बि‍हार, पश्‍चि‍म बंगाल, गुजरात, मध्‍य प्रदेश और पंजाब का स्‍थान रहा।

      मार्च, 2013 के दौरान उक्‍त शीर्ष 10 राज्‍यों के संबंध में की गई कॉलों का ब्‍यौरा नीचे दि‍या गया है:-

क्र.सं.
राज्‍य
शि‍कायतें
कुल कॉलों का प्रति‍शत
1
दि‍ल्‍ली
2963
24.45
2
उत्‍तर प्रदेश
1984
16.37
3
महाराष्‍ट्र
1383
11.41
4.
हरि‍याणा
991
8.18
5.
राजस्‍थान
845
6.97
6.
बि‍हार
588
4.85
7.
पश्‍चि‍म बंगाल
526
4.34
8.
गुजरात
464
3.83
9.
मध्‍य प्रदेश
427
3.52

10.
पंजाब
397
3.28

       अधि‍कतम 19 प्रति‍शत शि‍कायतें टेलीकॉम क्षेत्र की प्राप्‍त हुई। इसके बाद का स्‍थान उत्‍पाद, बैंकिंग और ई-कॉमर्स का रहा। देश के उपभोक्‍ता, टोल फ्री राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता, हेल्‍पलाइन संख्‍या 1800-11-400 पर संपर्क कर सकते हैं तथा उपभोक्‍ता संबंधि‍त समस्‍याओं के लि‍ए दूरभाष पर काउंसलिंग भी प्राप्‍त कर सकते हैं। उपभोक्‍ता हेल्‍पलाइन उपभोक्‍ता मामलों के संबंध में सूचना, सलाह और मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। शि‍कायतों को वेबसाइट:www.nationalconsumerhelpline.in. पर भी दर्ज कि‍या जा सकता है।      
वि.कासोटिया\यादराम/राजीव – 1899