Showing posts with label Chandigarh. Show all posts
Showing posts with label Chandigarh. Show all posts

Sunday, September 20, 2026

27 वर्षीय सड़क दुर्घटना पीड़ित कुलदीप ने किए अंगदान

Manjeet on 20th September 2026 at 17>57 Regarding Orgon Donor Kuldeep Singh-Chandigarh-Punjab Screen

दो किडनी मरीजों को दिया जीवन का दूसरा अवसर 

दो अन्य को मिला दृष्टि का उपहार 

 “गहरे शोक के बीच कुलदीप के परिवार ने दूसरों को जीवन का दूसरा अवसर देने का निर्णय लिया” 

“व्यक्तिगत त्रासदी को दूसरों के लिए आशा में बदलकर अंगदान को बनाया जीवन का सच्चा उपहार” : प्रो. विवेक लाल

रविवार 20, सितंबर ,2026, चंडीगढ़>>


27 वर्षीय कुलदीप सिंह के परिवार के लिए सड़क दुर्घटना के बाद के दिन ऐसे गहरे दुख से भरे थे, जिसका सामना करने के लिए कोई भी परिवार तैयार नहीं होता।
घर से निकला एक युवा बेटा और भाई अब कभी वापस नहीं लौटेगा। हालांकि, कुलदीप के अचानक और असहनीय निधन को स्वीकार करने के कठिन दौर में भी उनके परिवार ने ऐसा निर्णय लेने का साहस दिखाया, जिससे उनके शरीर का एक हिस्सा दूसरों के जीवन में आगे भी जीवित रह सके।

परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रो. विवेक लाल, निदेशक, PGIMER ने कहा, “ऐसे क्षणों में जब किसी परिवार के दुख को कोई शब्द कम नहीं कर सकते, कुलदीप का परिवार 27 वर्षीय बेटे और भाई को खोने के असहनीय दुख से गुजर रहा था। इसके बावजूद उन्होंने इस गहरे शोक के बीच दूसरों के बारे में सोचने का साहस दिखाया। उनके निर्णय ने व्यक्तिगत त्रासदी को अन्य परिवारों के लिए आशा में बदल दिया है। यही असाधारण करुणा अंगदान को जीवन का सच्चा उपहार बनाती है।”

यमुनानगर के जगाधरी निवासी कुलदीप को सड़क दुर्घटना में गंभीर सिर की चोट लगने के बाद 15 सितंबर 2026 को PGIMER में भर्ती कराया गया था। उन्हें प्रारंभिक उपचार के लिए सिविल अस्पताल, यमुनानगर ले जाया गया था, जिसके बाद उन्हें PGIMER रेफर किया गया। बताया गया कि कुलदीप स्कूटी चला रहे थे और स्पीड ब्रेकर के कारण गिरने से दुर्घटना हुई।

कुलदीप की मां बीरा रानी के लिए बेटे को खोने की वास्तविकता बेहद पीड़ादायक थी। उनके छोटे भाई परमिंदर के लिए बड़े भाई को खोना ऐसा सदमा था, जिसने पूरे परिवार का जीवन बदल दिया। इसी गहरे दुख के बीच परिवार को अंगदान के संबंध में परामर्श दिया गया।

17 सितंबर को ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन कमेटी द्वारा दो आकलन किए जाने के बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार ब्रेन स्टेम डेथ की पुष्टि की गई। अपार दुख के बावजूद परिवार ने कुलदीप के सभी अंगों और कॉर्निया के दान के लिए सहमति प्रदान की।

परिवार के इस निर्णय से कुलदीप का अंतिम योगदान दूसरों के लिए एक नई शुरुआत बन गया। दोनों किडनी और कॉर्निया सफलतापूर्वक निकाले गए और PGIMER में प्रत्यारोपित किए गए। दोनों किडनी के प्रत्यारोपण से गुर्दे की विफलता से पीड़ित दो मरीजों को जीवन का दूसरा अवसर मिला, जबकि कॉर्निया प्रत्यारोपण के माध्यम से दो अन्य मरीजों को दृष्टि का उपहार मिला।

शोकाकुल मां बीरा रानी ने कुलदीप को खोने के दर्द और अंगदान से मिलने वाली सांत्वना के बारे में कहा, “हमारे लिए यह स्वीकार करना असंभव है कि कुलदीप अब घर वापस नहीं आएगा। उसके बिना घर, परिवार और हमारे आसपास की हर चीज बदल गई है। लेकिन जब हम सोचते हैं कि उसके अंगों ने किसी को जीवन का एक और अवसर दिया है और उसके कॉर्निया किसी को देखने में मदद कर सकते हैं, तो हमें लगता है कि कुलदीप का एक हिस्सा आज भी हमारे साथ है। हम चाहते हैं कि उसका जीवन दूसरों के लिए आशा का संदेश बने।”

कुलदीप के छोटे भाई परमिंदर के लिए यह दुख अन्य परिवारों को ऐसी त्रासदी से बचाने के संकल्प में बदल गया है। उन्होंने कहा, “मेरे बड़े भाई के साथ जो हुआ, वह किसी और के साथ नहीं होना चाहिए। मैं सड़क दुर्घटनाओं के प्रति जागरूकता पैदा करने और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में काम करूंगा, ताकि दूसरों को ऐसी त्रासदियों से बचाया जा सके।”

PGIMER की ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर सुश्री स्वाति थापा, जिन्होंने परिवार को परामर्श दिया और अंगदान की सहमति की प्रक्रिया में सहयोग किया, ने कहा, “जिस परिवार ने अभी-अभी अपने युवा बेटे और भाई को खोया हो, उससे अंगदान के बारे में बात करना अंगदान की प्रक्रिया के सबसे भावनात्मक रूप से कठिन क्षणों में से एक होता है। कुलदीप का परिवार अपार पीड़ा से गुजर रहा था, फिर भी उन्होंने अपने दुख से आगे बढ़कर दूसरों के बारे में सोचने और उन्हें जीवन का उपहार देने का असाधारण साहस और करुणा दिखाई। उनका निर्णय आसान नहीं था, लेकिन यह अत्यंत निस्वार्थ था।”

कुलदीप एक स्टील फैक्ट्री में कार्यरत थे और स्वर्गीय श्री बलवंत सिंह के पुत्र थे। उनके परिवार को इस पीड़ादायक सच्चाई का सामना करना पड़ा कि उनका युवा बेटा और भाई अब कभी घर वापस नहीं आएगा। लेकिन उनके अंगदान के निर्णय ने यह सुनिश्चित किया कि कुलदीप की अंतिम विरासत केवल उस त्रासदी तक सीमित न रहे, जिसने उन्हें उनसे छीन लिया, बल्कि उन जीवनों और आशाओं से भी जुड़ी रहे, जिन्हें उनके अंगदान ने छुआ है।

PGIMER के Nodal Officer, ROTTO North, डॉ. विजय तडिया ने कहा, “अपने प्रियजन को खोने के दुख के बीच अन्य लोगों की जान बचाने के बारे में सोचना अत्यंत साहस का कार्य है। कुलदीप के परिवार ने असाधारण मानवीय संवेदना का परिचय दिया है। उनके निर्णय से दोनों किडनी और कॉर्निया का प्रत्यारोपण संभव हुआ और उन मरीजों के जीवन में आशा आई, जो लंबे समय से इसकी प्रतीक्षा कर रहे थे।”

यह त्रासदी सड़क दुर्घटनाओं के विनाशकारी परिणामों को भी उजागर करती है, विशेष रूप से तब जब इनमें युवा लोगों की जान चली जाती है। PGIMER ने नागरिकों से सड़कों पर सावधानी बरतने, यातायात नियमों का पालन करने तथा सुरक्षित तरीके से वाहन चलाने की अपील की।

कुलदीप के परिवार के लिए उनका दुख हमेशा बना रहेगा और उनके द्वारा छोड़ी गई खाली जगह कभी पूरी नहीं हो सकेगी। लेकिन अपने असाधारण निर्णय के माध्यम से परिवार ने यह सुनिश्चित किया है कि कुलदीप की अंतिम विरासत केवल दुख और क्षति की नहीं, बल्कि देने की विरासत भी हो—दो मरीजों को जीवन का अवसर देने की, दो अन्य को दृष्टि का उपहार देने की और उस जीवन को एक अर्थ देने की, जो बहुत कम उम्र में समाप्त हो गया।

Friday, September 18, 2026

वर्ष 2029 तक बनेगा नशा मुक्त भारत

PIB on 18th September 2026 at 15>05 A drug-free India will be created by 2029>Punjab Screen India 

भारत सरकार ने तैयार किया रोडमैप 

#प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में रोडमैप में स्पष्ट समय-सीमा, नियमित निगरानी, मापनीय परिणाम और अगले 3 वर्षों के लिए कार्ययोजना निर्धारित की गई है

#केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने जून 2026 में नशा मुक्त भारत के लिए ‘विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ रोडमैप लॉन्च किया था

#‘नशा मुक्त भारत 2029’ के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए पीआईबी शिमला ने आज एनसीबी और गृह मंत्रालय के सहयोग से शिमला में ‘वार्तालाप’ का आयोजन किया

#रोडमैप 4 स्तंभों, 25 घटकों और 200 से अधिक कार्य बिंदुओं पर आधारित है

विजन डॉक्यूमेंट में युवाओं के बीच नशीली दवाओं के दुरुपयोग के रोकथाम और उपचार एवं पुनर्वास क्षमता में 5 गुना से अधिक विस्तार की परिकल्पना की गई है

#बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं तथा प्रत्येक राज्य के एक मेडिकल कॉलेज में एक समर्पित विभाग

#अभियान जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ेगा, 50 करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य

#एनसीसी, एनएसएस और माई भारत के माध्यम से एक लाख ‘नशा मुक्त भारत मित्र’ तैयार किए जाएंगे

#स्कूल और कॉलेज नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ रक्षा की पहली पंक्ति बनेंगे

#पूर्ण समर्पण, निरंतर जागरूकता, केंद्र-राज्य समन्वय और दृढ़ प्रतिबद्धता के माध्यम से नशा मुक्त भारत 2029 का लक्ष्य हासिल किया जाए

#केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने शिमला में एनसीबी जोनल कार्यालय स्थापित करने को मंजूरी दी है, जिसे बहुत जल्द शुरू किया जाएगा

अगले तीन वर्षों के लिए कार्ययोजना निर्धारित की गई है 

शिमला//चंडीगढ़, 18 सितंबर, 2026>>PIB//पंजाब स्क्रीन डेस्क


केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक नशा मुक्त भारत बनाने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में रोडमैप में स्पष्ट समय-सीमा, नियमित निगरानी, मापनीय परिणाम और अगले तीन वर्षों के लिए कार्ययोजना निर्धारित की गई है। यह जानकारी आज केंद्रीय गृह मंत्रालय में अपर महानिदेशक (मीडिया) श्री राज कुमार ने दी। वे आज शिमला में पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा आयोजित नशा मुक्त भारत अभियान-2026 पर केंद्रित वार्तालाप कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के चंडीगढ़ और अमृतसर के जोनल डायरेक्टर श्री अमनजीत सिंह ने नशा मुक्त भारत -2026 के रोड़मैप के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर पीआईबी शिमला के सहायक निदेशक श्री संजीव शर्मा सहित पीआईबी, दूरदर्शन, आकाशवाणी और हिमाचल प्रदेश लोक संपर्क विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।    

श्री राज कुमार ने बताया कि यह रोडमैप गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में व्यापक विचार-विमर्श के माध्यम से तैयार किया गया है। 35 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों के साथ विचार-विमर्श किया गया। राज्य एनसीओआरडी (नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर) बैठकों और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) सम्मेलनों से सुझाव प्राप्त किए गए। हितधारकों के साथ 20 से अधिक उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की गईं। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से तीन व्यापक समीक्षा बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 26 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 10वीं शीर्ष स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में नशा मुक्त भारत के लिए ‘विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ रोडमैप लॉन्च किया था।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक पूर्ण विकसित भारत के निर्माण का संकल्प देश के सामने रखा है। भारत केवल एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था, एक सुरक्षित समाज, आधुनिक प्रौद्योगिकी और मजबूत संस्थानों पर ही आधारित नहीं होगा, बल्कि एक स्वस्थ, अनुशासित, सांस्कृतिक रूप से जुड़ी और नशा मुक्त युवा शक्ति पर भी आधारित होगा। भारत विश्व का सबसे युवा प्रमुख राष्ट्र है। हमारी युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत है। नशा स्वास्थ्य, परिवारों, सामाजिक व्यवस्था और राष्ट्र की सुरक्षा को प्रभावित करता है। नशा मुक्त भारत 2029, विकसित भारत 2047 की एक प्रमुख आधारशिला है। भारत सरकार ने नशे के खिलाफ लड़ाई को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बनाया है। गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक मादक पदार्थों के खिलाफ अभूतपूर्व सफलता हासिल की गई है।

श्री अमनजीत सिंह ने रोड़मैप के बारे में अपनी प्रस्तुति में बताया कि 2019 से जुलाई 2026 तक 93,33,987 किलोग्राम मादक और मन:प्रभावी पदार्थ जब्त किए गए, जिनका अनुमानित मूल्य 1,53,212 करोड़ रुपये है। जब्त किए गए 44,88,576 किलोग्राम एनडीपीएस पदार्थों को नष्ट किया गया है, जिनका अनुमानित मूल्य 88,010 करोड़ रुपये है। इसी अवधि के दौरान 3,992 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों और परिसंपत्तियों को फ्रीज या जब्त किया गया है। 128 अवैध गुप्त प्रयोगशालाओं को भी ध्वस्त किया गया है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से अब तक सभी चार स्तरों पर 16,966 से अधिक एनसीओआरडी बैठकें आयोजित की गई हैं। संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) में 539 प्रमुख मामलों पर विस्तृत चर्चा की गई। 27 द्विपक्षीय समझौतों, 19 समझौता ज्ञापनों और 02 सुरक्षा सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। 'भारतपोल' के माध्यम से 195 देशों के साथ सीधे इंटरपोल संपर्क स्थापित किया गया है। 'मानस' हेल्पलाइन 1933 के माध्यम से 3.33 लाख से अधिक नागरिकों को जोड़ा गया है।

नशा मुक्त भारत 2029 अभियान 'संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज' के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेगा। इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सुरक्षा एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सा संस्थानों, परिवारों और समाज की भागीदारी होगी। गुप्त रूप से संचालित नशीली दवाओं की प्रयोगशालाओं को नष्ट करने, मादक पदार्थ अपराधियों और भगोड़ों को वापस लाने, प्रणाली के एकीकरण और मापनीय राष्ट्रीय परिणाम प्राप्त करने पर विजन डॉक्यूमेंट में विशेष ध्यान दिया गया है।

जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक तीन वर्ष का रोडमैप ‘नशा मुक्त भारत’ बनाने के लिए है, जिसमें सभी लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करने का संकल्प है। रोडमैप चार स्तंभों पर आधारित है – खुफिया जानकारी और अभियान आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग और नुकसान में कमी तथा क्षमता निर्माण और समन्वय स्थापित करना है। इन चार स्तंभों के लिए परिचालन मंत्र पता लगाना, बाधित करना और नष्ट करना है। पता लगाना: स्रोत, मार्ग, पेडलर, प्रौद्योगिकी, भुगतान माध्यमों और सरगनाओं की पहचान करना। बाधित करना: परिवहन, रसद, प्रीकर्सर की आपूर्ति, डार्कनेट नेटवर्क, हवाला और मादक पदार्थों के वित्तपोषण को निशाना बनाना। नष्ट करना: मादक पदार्थों की प्रयोगशालाओं, अवैध खेती, कार्टेल की संपत्तियों, नेतृत्व और पूरे वितरण नेटवर्क को समाप्त करना। रोडमैप में 25 घटक और 200 से अधिक कार्य बिंदु हैं।

इस अवसर पर किए गए प्रस्तुतीकरण में भी आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और नुकसान में कमी के माध्यम से नशा मुक्त भारत के निर्माण के रोडमैप पर प्रकाश डाला गया। इसमें संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण के साथ इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए नेटवर्क, वित्त और भगोड़ों को निशाना बनाने पर भी प्रकाश डाला गया। नीति से लेकर अभियोजन तक एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई क्षमता को मजबूत करने को भी विजन डॉक्यूमेंट में प्राथमिकता दी गई है।

रोडमैप में नेटवर्क-केंद्रित प्रवर्तन दृष्टिकोण की परिकल्पना की गई है और सिंथेटिक ड्रग्स तथा डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी से संबंधित चुनौतियों से निपटने के उपायों को रेखांकित किया गया है। विजन डॉक्यूमेंट में युवाओं के बीच नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम और मार्च 2029 तक उपचार एवं पुनर्वास क्षमता में 5 गुना से अधिक विस्तार की परिकल्पना की गई है। इसके लिए नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या वर्तमान 334 से बढ़ाकर मार्च 2029 तक 1751 की जाएगी। बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं तथा प्रत्येक राज्य के एक मेडिकल कॉलेज में एक समर्पित विभाग स्थापित किया जाएगा।

यह जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ेगा। वर्तमान में 20 करोड़ लोगों तक पहुंच से इसे बढ़ाकर 50 करोड़ लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। एनसीसी, एनएसएस और माई भारत के माध्यम से एक लाख ‘नशा मुक्त भारत मित्र’ तैयार किए जाएंगे। स्कूल और कॉलेज नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ रक्षा की पहली पंक्ति बनेंगे। शिक्षा मंत्रालय, युवा और खेल मंत्रालय तथा शैक्षणिक संस्थान शैक्षणिक संस्थानों को नशा मुक्त बनाने का संकल्प ले रहे हैं।

नशा मुक्त भारत 2029 का लक्ष्य पूर्ण समर्पण, निरंतर जागरूकता, केंद्र-राज्य समन्वय और दृढ़ प्रतिबद्धता के माध्यम से हासिल किया जाना है। अभियान राज्यों के संसाधनों को मजबूत करेगा और परिणाम आधारित जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित करेगा। मादक पदार्थ विरोधी बुनियादी ढांचे के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय क्षेत्र वित्त पोषण होगा। मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूरी तरह सुसज्जित एएनटीएफ होगा। 30 दिनों के भीतर मादक पदार्थों के नमूनों की समयबद्ध रिपोर्टिंग की जाएगी। गृह मंत्रालय त्रैमासिक समीक्षा के माध्यम से परिणाम आधारित निगरानी करेगा। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने शिमला में एनसीबी जोनल कार्यालय स्थापित करने को मंजूरी दी है और इसे बहुत जल्द शुरू किया जाएगा।

इस अवसर पर श्री अहमद खान, मीडिया और संचार अधिकारी ने ‘वार्तालाप’ में प्रभावी सूचना और संचार माध्यम के रूप में मीडिया के माध्यम से जनभागीदारी और समाज में जागरूकता पैदा करने की अपील करते हुए सभी मीडिया कर्मियों का कार्यशाला में भाग लेने के लिए आभार व्यक्त किया।  

**

Friday, July 17, 2026

प्रधानमंत्री श्री मोदी चंडीगढ़ स्थित PGIMER में भी पधारे

स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 17 JUL 2026 at 5:48 PM by PIB Delhi

अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र तथा अत्‍याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्‍द्र का उद्घाटन किया

*प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत प्रधानमंत्री ने पीजीआईएमईआर में 150 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला रखी


*बारह वर्ष पहले हमने संकल्प लिया था कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में किसी भी नागरिक को कष्ट न उठाना पड़े तथा प्रत्येक व्यक्ति को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियाँ इसी संकल्प का परिणाम : प्रधानमंत्री

*“देश भर में 2014 के बाद 15 नए एम्स को मंजूरी दी गई, सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विशेष अस्पतालों को समर्थ किया गया”

*“देश में टीबी उपचार का कवरेज अब 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है तथा डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत कमी आई”

*राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक तथा उपशामक देखभाल पर विशेष बल देते हुए एक व्यापक, समग्र और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत नींव रखी : श्री जे. पी. नड्डा

*“आयुष्मान आरोग्य मंदिर देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रथम संपर्क केन्‍द्र बनकर उभरे और जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुदृढ़ कर रहे हैं”

* “आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य मंच के रूप में तेज गति से उभर रहा है, जो डिजिटल नवाचार के जरिये स्वास्थ्य सेवाएं देने में परिवर्तन ला रहा है”


चंडीगढ़
: 17 जुलाई 2026: (PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन)::

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र तथा अत्‍याधुनिक तंत्रिका विज्ञान (न्यूरोसाइंसेज़) केन्‍द्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के अंतर्गत पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में 150 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला भी रखी। इस कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं केन्‍द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया, केन्‍द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा, केन्‍द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव तथा चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद श्री मनीष तिवारी भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पीजीआईएमईआर में अत्‍याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन और नई परियोजनाओं की आधारशिला लाखों लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने वर्ष 2015 में पीजीआईएमईआर के दीक्षांत समारोह में अपनी यात्रा को याद करते हुए पिछले एक दशक में संस्थान की क्षमता में हुए उल्लेखनीय विस्तार की सराहना की। साथ ही, उन्होंने पीजीआईएमईआर के प्रबंधन, विभाग के सदस्यों तथा युवा चिकित्सकों को उनकी समर्पित सेवाओं के लिए बधाई दी।

स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के बीच घनिष्ठ संबंध पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वच्छता को जन अभियान बनाने के उद्देश्य से ‘स्वच्छ भारत मिशन’ प्रारंभ किया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों शौचालयों के निर्माण, खुले में शौच से मुक्ति, देशव्यापी स्वच्छता अभियानों तथा स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के प्रयासों से जनस्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की रैंकिंग ने चंडीगढ़ सहित अनेक शहरों को अपने स्वच्छता मानकों में निरंतर सुधार करने के लिए प्रेरित किया है।

प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी श्री इंदरजीत सिंह सिद्धू की ‘ब्रूम वॉरियर’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिकों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि स्वच्छता को बढ़ावा देने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सरकार ने इस वर्ष उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।

जनभागीदारी के महत्व पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “स्वच्छता एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।” उन्होंने ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल के अंतर्गत आयोजित विशेष स्वच्छता अभियान की सराहना की तथा चंडीगढ़ के नागरिकों को उनके उत्साहपूर्ण सहयोग के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जन-अभियान बीमारियों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक और परिवर्तनकारी बदलाव आए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान पूरी दुनिया में उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भारत सहायता मांगने वाला देश नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों की सहायता करने वाला राष्ट्र बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि आज भारत चिकित्सा पर्यटन (मेडिकल टूरिज्म) के प्रमुख वैश्विक केन्‍द्रों में से एक बन चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “बारह वर्ष पहले हमने यह संकल्प लिया था कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में किसी भी नागरिक को कठिनाई का सामना न करना पड़े तथा प्रत्येक व्यक्ति को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियाँ इसी संकल्प का परिणाम हैं।”

स्वास्थ्य अवसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “वर्ष 2014 के बाद देश में 15 नए एम्स को मंजूरी दी गई, सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विशेष अस्पतालों को समर्थ बनाया गया है।” उन्होंने वर्ष 2022 में शुरू हुए चंडीगढ़ स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान आज हजारों मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने को भी समान प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक, एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्रामीण, शहरी और जनजातीय क्षेत्रों सहित पूरे देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाले 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं, जिनमें 12 प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य देखभल सेवा पैकेज शामिल हैं। इन केन्‍द्रों के माध्यम से करोड़ों नागरिकों की उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा अन्य गैर-संचारी रोगों की जांच की जा चुकी है।

स्वास्थ्य सेवाओं में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ने विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श तक लोगों की पहुँच को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि अब तक इस मंच के माध्यम से 48 करोड़ से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सलाह आसानी से उपलब्ध हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि देश में अब 90 प्रतिशत से अधिक डिलीवरी संस्थागत स्तर पर हो रही हैं। साथ ही, मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी आई है तथा शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार के विशेष बल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योग, एचपीवी टीकाकरण तथा यू-विन प्लेटफॉर्म जैसी पहलें समय पर निवारक हस्तक्षेप सुनिश्चित कर करोड़ों नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा कर रही हैं।

क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ को जनभागीदारी के साथ लागू किया जा रहा है, ताकि जागरूकता बढ़े, समय पर जांच हो तथा मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने बताया कि देश में टीबी उपचार का कवरेज अब 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में टीबी की घटनाओं में पिछले एक दशक में 21 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का सबसे अधिक लाभ गरीबों, मध्यम वर्ग तथा महिलाओं को मिला है, जो अक्‍सर अपने परिवार की देखभाल में स्वयं के स्वास्थ्य की उपेक्षा कर देती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत में स्वास्थ्य सेवा अब कोई विशेषाधिकार नहीं रही, बल्कि यह प्रत्येक सामान्य नागरिक का अधिकार बनती जा रही है।”

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय सीमित मेडिकल कॉलेजों और सीटों के कारण अनेक प्रतिभाशाली युवाओं के लिए डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाता था। उन्होंने बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है तथा एमबीबीएस और स्नातकोत्तर चिकित्सा की सीटों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में एमबीबीएस कॉलेज की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है और शीघ्र ही इसमें प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इससे प्रतिभाशाली युवाओं को देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अध्ययन का अवसर मिलेगा तथा भारत की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कार्यबल और अधिक सशक्त होंगे।

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए परिवर्तनकारी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक तथा उपशामक (पैलिएटिव) देखभाल पर विशेष बल देते हुए एक व्यापक, समग्र और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत नींव रखी है।”

उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रथम संपर्क केन्‍द्र बनकर उभरे हैं और जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुदृढ़ कर रहे हैं।

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी ढंग से एक-दूसरे से जोड़ते हुए एक समेकित स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की है, जिससे प्रत्येक नागरिक को उपचार की निरंतर और समन्वित सुविधा सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि देशभर में 23 एम्स स्वीकृत किए जा चुके हैं और वे विभिन्न चरणों में विकसित हो रहे हैं। इससे गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तथा चिकित्सा शिक्षा तक लोगों की पहुँच में उल्लेखनीय विस्तार हो रहा है।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए श्री जे. पी. नड्डा ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 थी, जो आज बढ़कर 818 हो गई है। इसी प्रकार स्नातक (एमबीबीएस) चिकित्सा सीटों की संख्या बढ़कर 1.38 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने 75,000 अतिरिक्त स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटें सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिनमें से 25,000 सीटें पहले ही जोड़ी जा चुकी हैं।

श्री नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) तेज़ी से विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य मंच के रूप में विकसित हो रहा है, जो डिजिटल नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 90 करोड़ आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे नागरिक अपने डिजिटल स्वास्थ्य रिकार्डों को सुरक्षित तरीके से रख सकें।

राष्ट्र को समर्पित की जा रही नई स्वास्थ्य सुविधाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने कहा कि 300 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्‍द्र भारत की न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1967 से लगभग पाँच दशकों तक पीजीआईएमईआर में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के लिए केवल 25 बिस्तर उपलब्ध थे, जबकि यह नया केन्‍द्र संस्थान की स्वास्थ्य सेवा क्षमता में परिवर्तनकारी वृद्धि करेगा। लगभग 440 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह केन्‍द्र न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी तथा न्यूरो-क्रिटिकल केयर की समग्र सेवाएँ एक ही जगह पर उपलब्ध कराएगा, जिससे तंत्रिका संबंधी अत्‍याधुनिक उपचार तक लोगों की पहुँच और अधिक सुलभ होगी। उन्होंने कहा कि अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र देश में महिलाओं और बच्चों के लिए उपलब्ध सबसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में से एक है, जहाँ एक ही जगह व्यापक एवं विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएँ प्रदान की जाएँगी।

पृष्‍ठभूमि:

अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं, गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं तथा विशेष उपचार की आवश्यकता वाले बच्चों को व्यापक तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। 300 बिस्तरों और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित यह केन्‍द्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगा तथा क्षेत्र के हजारों परिवारों को लाभान्वित करेगा।

अत्‍याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्‍द्र में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-क्रिटिकल केयर तथा अत्याधुनिक नैदानिक (डायग्नोस्टिक) सुविधाएँ एक ही जगह पर उपलब्ध होंगी। यह केन्‍द्र जटिल तंत्रिका संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों को समयबद्ध एवं विश्वस्तरीय उपचार सुनिश्चित करेगा, साथ ही तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में चिकित्सा अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण को भी सशक्त बनाएगा।

पीजीआईएमईआर में स्थापित किया जाने वाला क्रिटिकल केयर ब्लॉक आपातकालीन तैयारी, गहन चिकित्सा (आईसीयू) सेवाओं तथा आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाएगा। साथ ही यह क्षेत्र की समग्र स्वास्थ्य अवसंरचना को और अधिक मजबूत बनाएगा।

***//पीके/केसी/केपी/एसएस//(रिलीज़ आईडी: 2285923) 

चंडीगढ़ में विभिन्न विकास परियोजनाओं का हुआ शुभारंभ

प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 17 JUL 2026 at 4:51 PM by PIB Delhi

विकास के इस नए अध्याय के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ


चंडीगढ़
//नई दिल्लीः 17 जुलाई 2026:(पंजाब स्क्रीन//PIB Delhi)::

पंजाब और चंडीगढ़ में आज चहल पहल थी। एक उत्सव सा माहौल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब और चंडीगढ़ के लिए विकास की उपलब्धियों का एक नया इतिहास लिखने आ रहे थे। इनके आने से 17 जुलाई का दिन एक ऐतिहासिक दिन बन गया। इस सुअवसर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विस्तार से इस नई स्वर्णिम रेखा  का विवरण भी बताया। 

सर्वप्रथम उन्होंने वहां मौजूद विशेष अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा, 

श्रीमान गुलाब चंद कटारिया जी, केंद्र में मेरे सहयोगी जे. पी. नड्डा जी, अश्विनी वैष्णव जी, संसद में मेरे साथी मनीष तिवारी जी, यहां सभागार में भी कई विधायक, मंत्री, सांसद बैठे हुए हैं। अन्य सभी महानुभाव भी, आज कईयों के दर्शन हो रहे, पुराने-पुराने लोगों के।


भाइयों-बहनों,

आज आप सबके बीच आकर मन में खुशी का एक भाव है, अलग ही भाव है।

साथियों,

चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं है, ये भारत के लिए development का एक मॉडल रहा है। चंडीगढ़ जाना जाता है, व्यवस्थित विकास के लिए, चंडीगढ़ की पहचान है, बेहतर लाइफस्टाइल के लिए, ease of living के लिए। चंडीगढ़ की पहचान है, चिकित्सा की बेहतर सुविधाओं के संबंध में और इस सबके साथ-साथ चंडीगढ़ की पहचान है, माँ चंडी का आशीर्वाद। और इसलिए, चंडीगढ़ का विकास हमेशा से NDA सरकार की प्राथमिकता रहा है। आपको ध्यान होगा, डेढ़ साल पहले देश ने न्याय व्यवस्था में बहुत बड़ा सुधार किया है। हम दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता लेकर आए हैं। भारतीय न्याय संहिता यानी, दंड आधारित क़ानूनों की जगह न्याय आधारित कानूनी व्यवस्था। और तब भारतीय न्याय संहिता लागू करने की शुरुआत चंडीगढ़ से ही हुई थी।

साथियों,

बीते वर्षों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग और डिजिटल गवर्नेंस, चंडीगढ़ को हाइटेक बनाने के लिए ऐसे कितने ही प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है। ढाई हजार करोड़ से ज्यादा रुपए इस मिशन में खर्च हुये हैं। आज भी यहाँ हेल्थ, एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विकास के कई काम शुरू हो रहे हैं। मैं इनके लिए सभी चंडीगढ़ वासियों को बधाई देता हूं।

साथियों,

यहाँ आने से पहले मैं हरियाणा के जींद में था और यहां से इसके बाद मुझे पंजाब के विकास कार्यों के लिए जालंधर जाना है। इन दोनों कार्यक्रमों के बीच आज ये चंडीगढ़ का कार्यक्रम हो रहा है। क्योंकि हमारा चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, इस पूरे क्षेत्र को जोड़ता है। चंडीगढ़ के विकास से चंडीगढ़ के लोगों का जीवन तो बदलता ही है, साथ ही हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और जम्मू कश्मीर के लोगों को भी इससे बहुत लाभ होता है। चिकित्सा सेवाओं के लिए तो चंडीगढ़ इस पूरे क्षेत्र में एक बड़ा हब है।

साथियों,

जब मैं चंडीगढ़ रहता था, तो मुझे कई बार PGI जाना होता था और कारण क्या? तो कोई ना कोई हमारे साथी या उनका परिवार चाहे जम्मू कश्मीर का हो, पंजाब का हो, हिमाचल का हो, हरियाणा का हो, कोई ना कोई बीमार यहां आते थे, तो मेरा मिलने जाना बड़ा स्वाभाविक रहता था। और इसलिए मुझे पता है कि इस पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए ये आरोग्य की दृष्टि से एक बड़ा महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

साथियों,

आज यहाँ चंडीगढ़ PGI में एडवांस्ड हेल्थकेयर फैसिलिटीज़ का विस्तार हो रहा है। यहाँ एडवांस न्यूरो-साइन्स सेंटर, एडवांस मदर एंड चाइल्ड सेंटर और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक, ये प्रोजेक्ट्स लाखों लोगों को इलाज की और बेहतर सुविधा देंगे। मुझे याद है, 2015 में, मैं चंडीगढ़ PGI के दीक्षांत समारोह में आया था। और मुझे खुशी है कि आज मुझे वर्चुअली भी वहां के सब पुराने साथियों से मिलने का अवसर मिल रहा है। तब से अब तक इस दशक में PGI की क्षमताओं में बड़ा विस्तार हुआ है। मैं PGI चंडीगढ़ के मैनेजमेंट की, यहाँ के प्रोफेसर्स और युवा डॉक्टर्स की सराहना करता हूं, उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जब हम स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो हम सब जानते हैं कि इसमें स्वच्छता की कितनी बड़ी भूमिका है और इसलिए जब हमारी सरकार बनी थी, तब हमने देश के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ लॉन्च किया था। देश में करोड़ों शौचालय बनाए गए, भारत को खुले में शौच से मुक्त कराया गया, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता के लिए अभियान चलाये गए, सफाई हमारी जीवनशैली का हिस्सा बने, इसके लिए अलग-अलग initiatives शुरू किए गए। हमारे शहरों की स्वच्छ भारत रैंकिंग इसी प्रयास का हिस्सा है और चंडीगढ़ इसमें बेहतर प्रदर्शन का प्रयास भी करता रहता है।

साथियों,

मैं आज चंडीगढ़ के रिटायर्ड IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की भी सराहना करना चाहूँगा। उनकी पहचान ‘ब्रूम वारीयर’ की बनी हुई है। उन्होंने चंडीगढ़ में स्वच्छता को लेकर एक नई अलख जगाई है, लोगों को प्रेरित किया है। इसके लिए हमारी सरकार ने उन्हें इस साल पद्म सम्मान से भी सम्मानित किया है।

साथियों,

स्वच्छता कोई एक दिन का काम नहीं है, स्वच्छता तो जीवन जीने का तरीका है। और मुझे खुशी है कि स्वच्छता को आज के इस कार्यक्रम से भी जोड़ा गया। आज यहां स्वच्छता से स्वागत, इस पहल के तहत विशेष सफाई अभियान चलाया गया। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में सारे लीडर लोग भी और जनता जनार्दन भी सफाई के काम में लगी थी। देश के अंदर एक खुशी का माहौल था, इन सारी चीजों को देखकर के। चंडीगढ़ के सभी भाई-बहनों को मैं इसके, इस पहल के लिए व्यक्तिगत रूप से बड़े गर्व के साथ आप सबको बधाई देता हूं।

साथियों,

स्वच्छता के ऐसे अभियान देश में अनेक रोगों की रोकथाम में बहुत मददगार साबित हुए हैं।

साथियों,    

एक समय था, भारत के हेल्थ सेक्टर पर पूरी दुनिया चिंता जताती थी। किसी बड़ी आपदा का अंदेशा होता था, तो लोग सवाल उठाने लगते थे कि भारत में क्या होगा? कोरोना के समय में हमने देखा है कि कैसे भारत ही विश्व की चिंताओं का केंद्र था। लेकिन हमारी सरकार ने भारत का सामर्थ्य भी बदला और विश्व का नजरिया भी बदला। जब कोरोना महामारी आई, तो भारत मदद मांगने वाला देश नहीं था, बल्कि भारत दुनिया को मदद भेज रहा था। आज कितने ही देशों से लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भारत आते हैं। भारत मेडिकल टूरिज़्म का बड़ा डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है।

साथियों,

ये बदलाव पिछले 12 वर्षों की ईमानदार कोशिशों और नीतियों का परिणाम है। 12 साल पहले हमने संकल्प लिया था, हमारे देश के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में नहीं जियेंगे, हमारे देश के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिलेगी और कम कीमत में मिलेंगी। पिछले 12 वर्षों की देश की सफलता इसी संकल्प का परिणाम है। बीते वर्षों में भारत ने अपने हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया है। 2014 के बाद देश में 15 नए AIIMS को मंजूरी दी गई है। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में नए AIIMS काम कर रहे हैं। देशभर में सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए speciality hospitals की संख्या भी बढ़ी है। यहाँ चंडीगढ़ में भी, होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल बना है, यहां से थोड़ी दूरी पर। 2022 में मुझे इसके लोकार्पण का अवसर मिला था। आज ये हॉस्पिटल हजारों मरीजों की सेवा कर रहा है। 

साथियों,

गाँव-गाँव में प्राइमरी हेल्थकेयर सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हर स्तर पर हेल्थ सिस्टम मजबूत हो, इसके लिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स और पब्लिक हेल्थ यूनिट्स जैसी सुविधाओं का नेटवर्क तैयार हुआ है। आज शहरी और ग्रामीण इलाकों से लेकर जनजातीय क्षेत्रों तक देश में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी काम कर रहे हैं। आरोग्य मंदिरों में प्राइमरी इलाज की सुविधाएं तो हैं ही, साथ ही,12 अलग-अलग हेल्थ पैकेज सर्विस भी यहाँ मिल रही हैं। इनमें करोड़ों लोगों की ब्लड प्रेशर और ड़ायबिटीज़ जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग हुई है।

साथियों,

हमारी सरकार तकनीक के जरिए भी इलाज को सुगम बना रही है। हमने ई-संजीवनी मिशन के जरिए telemedicine की सुविधा शुरू की। इसके तहत आज देश में 48 करोड़ से ज्यादा telemedicine consultations हो चुके हैं। दूर-सुदूर इलाकों से भी लोग बड़े अस्पतालों से, डॉक्टर्स से परामर्श कर रहे हैं।

साथियों,

स्वास्थ्य सेवाओं के इस विस्तार की वजह से आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक institutional डिलीवरी हो रही हैं। हमारे यहाँ माता मृत्यु दर में 86 percent की कमी आई है। और शिशु मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट आई है।

साथियों,

बीमारियों के इलाज के साथ ही आज उतना ही फोकस Preventive Healthcare पर भी है। पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योगा, H.P.V. Vaccination, U-WIN प्लेटफॉर्म, ऐसे कई अहम प्रयासों के कारण करोड़ों लोगों का जीवन सुरक्षित हो रहा है।

साथियों,

हमने देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प भी लिया है। इसके लिए टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। जनभागीदारी के जरिए, जन-जन को जागरूक किया जा रहा है। समय से टीबी की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इसी का परिणाम है, आज देश में टीबी का ट्रीटमेंट कवरेज 90 percent से ज्यादा हो गया है। पिछले साल आई WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 10 वर्षो के भीतर-भीतर टीबी संक्रमण भी इक्कीस प्रतिशत कम हुआ है। इन प्रयासों का सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब को हो रहा है, इसका लाभ हमारे मिडिल क्लास को हो रहा है और ज्यादा लाभ हमारी माताओं-बहनों को हो रहा है। क्योंकि माताएं-बहनें परिवार के काम को प्राथमिकता देती हैं। बीमारी को सहन करना ये माताओं-बहनों ने जैसे अपना एक संस्कार बना दिया है। लेकिन यह प्रोएक्टिव प्रयासों के कारण माताओं-बहनों का स्क्रीनिंग हुआ, उनकी देखभाल की गई और आज टीबी मुक्त होने में हमारी माताओं-बहनों की संख्या बड़ी है। भारत में हेल्थ सर्विसेस अब प्रिविलेज नहीं, आज हेल्थ सर्विसेस देश के सामान्य नागरिक का अधिकार बन रही हैं।

साथियों,

हेल्थ सेक्टर पर सरकार के फोकस का बहुत बड़ा लाभ भारत के युवाओं को भी हुआ है। हमारे युवा डॉक्टर्स इस बात से परिचित होंगे, पहले डॉक्टर बनने का सपना कितना मुश्किल होता था, युवाओं को डॉक्टर बनने के पर्याप्त मौके ही नहीं मिलते थे, क्योंकि मेडिकल सीटों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या बेहद कम थी। हमने इस परिस्थिति को भी बदला है। आज देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। MBBS और Post Graduate सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। और, अब तो चंडीगढ़ PGI में भी MBBS कॉलेज को मंजूरी दे दी गई है। जल्द ही यहां भी एडमिशन शुरू हो जाएंगे। इससे देश के कितने प्रतिभाशाली युवाओं को ऐसे टॉप इंस्टीट्यूट में पढ़ने का मौका मिलेगा। देश को बड़ी संख्या में बेस्ट डॉक्टर्स मिलेंगे।

साथियों,

चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है, जहां एजुकेशन, इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंस और रिसर्च से जुड़े बड़े संस्थान एक साथ मौजूद हैं। बहुत कम शहरों के पास ऐसा सामर्थ्य होता है। आने वाले समय में यही संस्थान नई टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, स्टार्टअप्स और इनोवेशन के बड़े केंद्र बन सकते हैं। आज एजुकेशन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी इस यात्रा को नई गति दे रही हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल एंड मेस का उद्घाटन हुआ है। सेक्टर-46 के गवर्नमेंट कॉलेज के लिए नया हॉस्टल भी तैयार हुआ है। रिसर्च स्कॉलर्स हॉस्टल की नींव भी रखी गई है। हमारा प्रयास है कि हमारे युवाओं को रिसर्च के लिए बेहतर लैब्स, बेहतर फैकल्टी मिले। जब रिसर्च का माहौल मजबूत होगा, तब इनोवेशन भी तेज होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डीप-टेक, ऐसी सभी टेक्नोलॉजी में हमें भारत को आगे लेकर जाना है। मुझे पूरा विश्वास है कि चंडीगढ़ के एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स, यहां के शिक्षक और यहां के युवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

साथियों,

इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का रोडमैप होता है। इसलिए, पहली बार देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को holistic approach के साथ विकसित किया जा रहा है। आज चंडीगढ़ में कनेक्टिविटी को लेकर भी कई शुभारंभ हुए हैं। आईटी सिटी से कुराली तक छह लेन वाले ग्रीनफील्ड हाईवे का उद्घाटन हुआ है। इससे एयरपोर्ट रोड पर दबाव कम होगा, मोहाली और खरड़ के लोगों को जाम से राहत मिलेगी। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड हाईवे से ‘पी.आर. सेवन स्पर’ इसकी आधारशिला भी रखी गई है। ऐसे सभी विकास कार्यों से उद्योग और कारोबार को गति मिलेगी। हमारे चंडीगढ़ में Ease of Living और बेहतर होगी।

साथियों,

रीजनल कनेक्टिविटी पर फोकस बढ़ाते हुए, आज जालंधर में रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स का भी लोकार्पण होने वाला है। इसका लाभ पंजाब के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र को होगा। साथ ही, आज हरियाणा के जींद से, जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी शुरू हुई है। क्लीन फ्यूल पर चलने वाली ये ट्रेन एक बहुत बड़ी शुरुआत है। मैं इसके लिए भी आप सभी को और देशवासियों को बधाई देता हूँ।

साथियों,

विकसित भारत की यात्रा में हमें फ्यूचर की टेक्नोलॉजी पर, फ्यूचर के ट्रांसपोर्टेशन पर और फ्यूचर की हेल्थ सर्विसेस पर, इसी आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ना है। हमें ऐसे फैसले लेने हैं, जिनका लाभ वर्तमान पीढ़ी को तो मिले ही मिले, आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता रहे। हमें ऐसे संस्थान बनाने हैं, जो समय के साथ और मजबूत हो जाएं। बीजेपी-एनडीए सरकार, इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मैं चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और इस पूरे क्षेत्र के लोगों को इन नई परियोजनाओं के लिए फिर से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।   


कुल मिला कर यह एक यादगारी आयोजन रहा। स्थानीय लोगों ने भी बहुत बढ़चढ़ कर और उत्साह से इस में भाग लिया। 

*******//MJPS/SS/ST/RK//(रिलीज़ आईडी: 2285778) 

Monday, July 06, 2026

पुनर्वास आवश्यक है, विकल्प नहीं:

हर व्यक्ति के बेहतर जीवन की दिशा में पीएमआर की भूमिका

राष्ट्रीय पीएमआर दिवस पर विशेष: 6 जुलाई, 2026: 

पीजीआई में डॉ. सौम्या सक्सेना के आधारित कार्तिका कल्याणी सिंह पंजाब स्क्रीन की विशेष प्रस्तुति -::

आज के आधुनिक चिकित्सा युग में उपचार का उद्देश्य केवल बीमारी को ठीक करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को फिर से सक्रिय, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने योग्य बनाना भी है। यही कार्य *फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) या पुनर्वास चिकित्सा का मूल उद्देश्य है। इस वर्ष राष्ट्रीय पीएमआर दिवस का विषय “रेहाबिलिटेशन इज एसेन्शियल, नॉट ऑप्शनल” इस संदेश को और अधिक सशक्त बनाता है कि पुनर्वास कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि समग्र उपचार का अनिवार्य अंग है। 

आधुनिक चिकित्सा में पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) को अब उपचार के बाद की वैकल्पिक सुविधा नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य सेवा का अनिवार्य हिस्सा माना जा रहा है। राष्ट्रीय फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) दिवस के अवसर पर पीजीआई, चंडीगढ़ के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. सौम्या सक्सेना ने कहा कि समय पर पुनर्वास न केवल व्यक्ति की कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ाता है, बल्कि उसे पुनः सम्मानजनक एवं सक्रिय जीवन जीने में भी सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय पीएमआर दिवस की थीम ‘पुनर्वास आवश्यक है, विकल्प नहीं’ समाज में इसी संदेश को सशक्त बनाने का प्रयास है।

 बीमारी से आगे, व्यक्ति को देखने की चिकित्सा 

पीएमआर केवल रोग का उपचार नहीं करता, बल्कि व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखता है। यह चिकित्सा पद्धति विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) के इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ फंक्शनिंग, डिसेबिलिटी एंड हेल्थ (आई सी ऍफ़) मॉडल पर आधारित है, जिसे बायोप्साइकोसोशल मॉडल भी कहा जाता है।

अर्थात, किसी व्यक्ति की बीमारी का प्रभाव उसके शरीर, मानसिक स्थिति, पारिवारिक जीवन, सामाजिक भागीदारी और कार्यक्षमता पर किस प्रकार पड़ रहा है, इसका समग्र मूल्यांकन कर उपचार एवं पुनर्वास की योजना बनाई जाती है। यही कारण है कि पीएमआर रोग नहीं, बल्कि पूरे व्यक्ति और उसकी जीवन-परिस्थितियों को केंद्र में रखकर कार्य करता है।


 कब आवश्यक होती है पुनर्वास चिकित्सा? 

पुनर्वास की आवश्यकता केवल दिव्यांग व्यक्तियों तक सीमित नहीं है। किसी भी ऐसी स्थिति में, जहाँ दर्द, कमजोरी, चलने-फिरने, दैनिक कार्यों या सामाजिक सहभागिता में बाधा उत्पन्न हो, पीएमआर विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 इससे लाभान्वित होने वाले प्रमुख रोगों एवं स्थितियों में शामिल— 

* स्ट्रोक एवं मस्तिष्क की चोट

* स्पाइनल कॉर्ड इंजरी

* सेरेब्रल पाल्सी एवं बच्चों की विकास संबंधी समस्याएँ

* ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर

* न्यूरोमस्कुलर विकार

* गठिया एवं जोड़ों के रोग

* कमर और गर्दन का दर्द

* खेल चोटें                                            

* अंग विच्छेदन एवं कृत्रिम अंग पुनर्वास

* वृद्धावस्था में चलने-फिरने और संतुलन की समस्याएँ

* ऑपरेशन के बाद पुनर्वास

* दीर्घकालिक दर्द एवं अन्य पुरानी बीमारियाँ

प्रारम्भिक पुनर्वास से बेहतर परिणाम 

वैज्ञानिक अध्ययनों से स्पष्ट है कि यदि बीमारी या चोट के शुरुआती चरण में ही पुनर्वास प्रारम्भ कर दिया जाए, तो कार्यक्षमता में सुधार, जटिलताओं में कमी तथा जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होती है।

समय पर पुनर्वास से— 

* दर्द एवं विकलांगता कम होती है,

* बेड सोर, कॉन्ट्रैक्चर और गिरने जैसी जटिलताओं की रोकथाम होती है,

* अस्पताल में रहने की अवधि घट सकती है,

* व्यक्ति शीघ्र अपने परिवार, समाज और कार्यस्थल से पुनः जुड़ पाता है,

* आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

आधुनिक तकनीक बदल रही है पुनर्वास का स्वरूप 

आज पुनर्वास चिकित्सा में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। रोबोटिक रिहैबिलिटेशन, कंप्यूटर आधारित गेट एवं मोशन एनालिसिस, एक्सोस्केलेटन सहायता प्राप्त चाल प्रशिक्षण, मायोइलेक्ट्रिक एवं बायोनिक कृत्रिम अंग, वर्चुअल रियलिटी और स्मार्ट पुनर्वास उपकरणों ने उपचार को अधिक प्रभावी और सटीक बनाया है।

इन तकनीकों की सहायता से मरीजों की कार्यक्षमता, संतुलन, गतिशीलता और स्वतंत्र जीवन जीने की क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार संभव हो रहा है।

दिव्यांगता की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण योगदान 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, उचित समय पर उपचार एवं पुनर्वास के माध्यम से अनेक मामलों में विकलांगता की गंभीरता को कम किया जा सकता है। पुनर्वास व्यक्ति को केवल बीमारी के बाद संभालने का माध्यम नहीं, बल्कि जटिलताओं और दीर्घकालिक निर्भरता को रोकने का भी सशक्त साधन है।

वृद्धजन और पुनर्वास 

बढ़ती आयु के साथ उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गठिया, कमर दर्द, सुनने की कमी और संतुलन संबंधी समस्याएँ सामान्य हो जाती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलन प्रशिक्षण, मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम तथा समुचित पुनर्वास कार्यक्रम वृद्धजनों को स्वतंत्र और सक्रिय जीवन बनाए रखने में सहायता करते हैं। अच्छी संतुलन क्षमता के लिए शरीर के विभिन्न तंत्रों का समन्वय अत्यंत आवश्यक होता है, और पीएमआर इस दिशा में वैज्ञानिक एवं व्यक्तिगत समाधान प्रदान करता है।

 पुनर्वास: मानव अधिकार और सामाजिक आवश्यकता 

डॉ. सौम्या सक्सेना ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) को उपचार के बाद की वैकल्पिक सुविधा नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य सेवा के अनिवार्य अंग के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी, दुर्घटना या शारीरिक अक्षमता के बाद व्यक्ति को पुनः कार्यक्षम, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने योग्य बनाना ही पुनर्वास चिकित्सा का प्रमुख उद्देश्य है। डॉ. सक्सेना के अनुसार, इस वर्ष राष्ट्रीय पीएमआर दिवस की थीम ‘पुनर्वास आवश्यक है, विकल्प नहीं’ इस बात का संदेश देती है कि उपचार तभी पूर्ण माना जा सकता है, जब व्यक्ति को उसकी अधिकतम कार्यक्षमता प्राप्त करने और परिवार तथा समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए आवश्यक पुनर्वास सेवाएँ समय पर उपलब्ध कराई जाएँ।

आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज पुनर्वास को विलासिता या विकल्प के रूप में न देखकर, एक मूलभूत स्वास्थ्य सेवा के रूप में स्वीकार करे। प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाओं तक पहुँच मिलनी चाहिए, जिससे वह अपनी अधिकतम क्षमता प्राप्त कर सके और सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।

राष्ट्रीय पीएमआर दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि ““रेहाबिलिटेशन इज एसेन्शियल, नॉट ऑप्शनल”          "(Rehabilitation is Essential, Not Optional)”—पुनर्वास आवश्यक है, विकल्प नहीं। उपचार तभी पूर्ण माना जा सकता है, जब व्यक्ति को पुनः कार्यक्षम, आत्मनिर्भर और समाज का सक्रिय सदस्य बनने में सहायता मिले।

पुनर्वास केवल स्वास्थ्य लाभ नहीं, बल्कि बेहतर कल, अधिक आत्मनिर्भरता और गरिमापूर्ण जीवन की आधारशिला है।

Saturday, August 23, 2025

होमी भाभा कैंसर कॉन्क्लेव 2025:

 Received From HBCH&RC Punjab on Saturday 23rd August 2025 at 5:22 PM Regarding Cancer Conclave

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया रोबोटिक-असिस्टेड कैंसर सर्जरी का उद्घाटन


चंडीगढ़
: 23 अगस्त 2025: (मीडिया लिंक रविंदर//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

तीन दिवसीय होमी भाभा कैंसर कॉन्क्लेव (HBCC) 2025 के दूसरे दिन पंजाब के महामहिम राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), पंजाब में अत्याधुनिक रोबोटिक-असिस्टेड कैंसर सर्जरी सुविधा का उद्घाटन किया।

चंडीगढ़ स्थित नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ (NMIMS) के कैंपस में आयोजित हो रहे इस प्रतिष्ठित कॉन्क्लेव ने देशभर से अग्रणी ऑन्कोलॉजिस्ट, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्र किया है ताकि कैंसर उपचार, देखभाल और रोकथाम में हो रहे नवीनतम नवाचारों पर चर्चा की जा सके।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने अस्पताल के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, "पिछले 80 वर्षों में टाटा मेमोरियल सेंटर ने कैंसर के उपचार के क्षेत्र में पूरी दुनिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हमारे देश में जिस तेज़ी से कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए टाटा मेमोरियल सेंटर का विस्तार आवश्यक हो गया है। वर्तमान में देशभर में नौ सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से दो पंजाब में हैं। यह क्षेत्र ऐसी उन्नत सुविधाओं के लिए लंबे समय से प्रतीक्षारत था।"

होमी भाभा कैंसर कॉन्क्लेव के इस दूसरे संस्करण में अनेक प्रतिष्ठित चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. श्रीपद डी. बनावली (निदेशक, अकादमिक, टाटा मेमोरियल सेंटर), डॉ. ए.के. अत्रि (डायरेक्टर प्रिंसिपल, जीएमसीएच-32, चंडीगढ़), डॉ. सत्यजीत प्रधान (निदेशक, एचबीसीएच एवं एमपीएमएमसीसी, वाराणसी) और डॉ. उमेश महानशेट्टी (निदेशक, एचबीसीएच एंड आरसी, विशाखापट्टनम) शामिल थे।

कार्यक्रम की शुरुआत एचबीसीएच एंड आरसी पंजाब के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद वार्षिक पत्रिका का विमोचन किया गया और बहुप्रतीक्षित रोबोटिक कैंसर सर्जरी सुविधा का शुभारंभ राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के करमकलों से संपन्न हुआ। यह  क्षेत्र में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

राज्यपाल ने पर्यावरणीय और जीवनशैली संबंधी कारणों का उल्लेख करते हुए कहा, "औद्योगिक प्रदूषण, सतलज नदी का प्रदूषण, रासायनिक खादों का बढ़ता उपयोग और जीवनशैली में बदलाव—ये सभी कारक कैंसर मामलों की वृद्धि के लिए ज़िम्मेदार हैं। कैंसर के प्रसार को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाना और इसके मूल कारणों का समाधान करना अत्यंत आवश्यक है।"

राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज की नींव है, और स्वस्थ समाज ही स्वस्थ राष्ट्र का आधार है। स्वास्थ्य के बिना कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता। यदि सबसे बड़ा प्राथमिकता बिंदु कोई है, तो वह स्वास्थ्य ही है। वर्ष 2013-14 में भारत का स्वास्थ्य बजट 33,000 करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।"

एचबीसीएच एंड आरसी द्वारा चलाए गए निवारक अभियानों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा, "अस्पताल ने अब तक 1.7 लाख से अधिक लोगों की शुरुआती जांच की है और बड़ी संख्या में रोगियों का शुरुआती अवस्था में उपचार किया है। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।"

एचबीसीएच एंड आरसी पंजाब में रोबोटिक कैंसर सर्जरी का शुभारंभ

रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत पंजाब में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है। यह अत्याधुनिक तकनीक सर्जनों को जटिल कैंसर शल्यक्रियाएं अधिक सटीकता के साथ करने, रक्तस्राव को न्यूनतम रखने और रोगियों को तेज़ी से स्वस्थ होने में मदद करेगी। इस शुभारंभ के साथ ही, एचबीसीएच एंड आरसी उत्तर भारत के उन चुनिंदा सरकारी कैंसर अस्पतालों में शामिल हो गया है जो रोबोटिक-असिस्टेड शल्य चिकित्सा की सुविधा प्रदान करते हैं। इससे पंजाब और पड़ोसी राज्यों के रोगियों को विश्वस्तरीय कैंसर उपचार अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकेगा।

रोगी-केंद्रित पहल के तहत अस्पताल ने घोषणा की कि सामान्य श्रेणी के पहले 80 रोगियों की रोबोटिक सर्जरी निःशुल्क की जाएगी। इसका फायदा बहुत से लोगों को होगा। 

इस अवसर पर डॉ. आशीष गुलिया, निदेशक, एचबीसीएच एंड आरसी पंजाब ने कॉन्क्लेव की दृष्टि साझा करते हुए कहा, "HBCC 2025 विज्ञान, नवाचार और सहयोग का संगम है। हमारा उद्देश्य केवल अत्याधुनिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराना ही नहीं है, बल्कि ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जहाँ ज्ञान और शोध सीधे रोगी देखभाल में परिवर्तित हो। रोबोटिक कैंसर सर्जरी की शुरुआत हमारे *प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी* के संकल्प का प्रतीक है, जिससे पंजाब के किसी भी रोगी को उन्नत उपचार के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।"

उन्होंने आगे कहा, "हमें यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि HBCC 2025 में देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस शैक्षणिक आयोजन के लिए सहयोग देने हेतु मैं एनएमआईएमएस का आभार व्यक्त करता हूँ। हम उत्तर भारत में आम कैंसरों के प्रति शिक्षा और जागरूकता को निरंतर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

उद्घाटन सत्र में मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी, स्त्री एवं मूत्रजननांग कैंसर, बाल्यावस्था कैंसर, स्तन कैंसर और मस्कुलोस्केलेटल ऑन्कोलॉजी पर शैक्षणिक चर्चा हुई, साथ ही उन्नत डायग्नोस्टिक एवं उपचार तकनीकों पर मास्टरक्लास भी आयोजित किए गए।

कॉन्क्लेव में जारी प्रोग्राम के अंतर्गत व्याख्यान, वाद-विवाद, पैनल चर्चा के अलावा सुखना झील पर कैंसर जागरूकता वॉकाथन का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम का समापन संयोजक सचिव डॉ. आलोक के. गोयल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने गणमान्य अतिथियों, संकाय और प्रतिनिधियों के योगदान को HBCC 2025 को कैंसर के विरुद्ध संघर्ष में एक ऐतिहासिक आयोजन बनाने में सराहा।

Wednesday, December 11, 2024

आस्था यात्रा:मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा श्री भाभोर साहिब में माथा टेका

 CM office Sent on Wednesday 11th December 2024 at 2:19 PM Email Gurdawara Sri Bhabhor Sahib

सीएम कार्यालय//बुधवार:11 दिसंबर 2024 दोपहर 2:19 बजे// ईमेल// गुरुद्वारा श्री भाभोर साहिब की आस्था यात्रा 

विनम्रता और समर्पण के साथ लोगों की सेवा करने की ताकत मांगी

 राज्य की प्रगति और विकास के लिए भी श्रद्धा के साथ प्रार्थना की 


नंगल
: (रूपनगर): 11 दिसंबर 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

हमारी संस्कृति में धर्म और आस्था का गहरा स्थान सदियों पुराना है। सत्ता पर बैठने वाले राजा महाराजा  अपने राज्य और राज्य के लोगों की भलाई के लिए अक्सर भगवान और पीरों पैगंबरों से याचना करते रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी इसी भावना  गुरुद्वारा भाभोर साहिब  टेकने गए।  

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बुधवार को गुरुद्वारा श्री भाभोर साहिब में मत्था टेका और प्रार्थना की और राज्य के लोगों को पूरी विनम्रता और समर्पण के साथ सेवा करने के लिए अपार शक्ति देने के लिए ईश्वर का आशीर्वाद मांगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि उन्हें राज्य की सेवा करने का अवसर मिला और इस यात्रा का उद्देश्य इस सेवा के लिए ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करना है। भगवंत सिंह मान ने समाज के सभी वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा करने के अलावा समग्र विकास, शांति और सांप्रदायिक सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने राज्य की प्रगति और विकास तथा लोगों की समृद्धि के लिए भी प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से राज्य के लोगों की पूर्ण समर्पण के साथ सेवा करने के लिए अपार शक्ति प्रदान करने का आशीर्वाद मांगा। उन्होंने गुरुद्वारा साहिब में प्रार्थना की और एक सामंजस्यपूर्ण समाज बनाने के लिए जाति, रंग, पंथ और धर्म की परवाह किए बिना राज्य के लोगों की सेवा करने की अपनी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। भगवंत सिंह मान ने कहा कि महान गुरुओं द्वारा सिखाए गए प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के लोकाचार को हर कीमत पर बनाए रखा जाएगा और यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

मुख्यमंत्री ने पंजाब के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ सेवा करने की जिम्मेदारी देने के लिए ईश्वर को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र तीर्थस्थलों की यात्रा करना उनके लिए हमेशा एक अनोखा अनुभव होता है, जो दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए प्रेरणा और सकारात्मकता का स्रोत हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि भगवान की कृपा से उनकी सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है और सरकार द्वारा जन-समर्थक और विकासोन्मुखी नीतियों को लागू करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

Friday, August 23, 2024

दिशा ट्रस्ट की तरफ से तीज का जोशो खरोश वाला आयोजन

Thursday 22nd August 2024 at 4:29 PM

आदर्श कौर बनी तीज की रानी व सतिंदर कौर बनी सुंदर पंजाबण


मोहाली: 22 अगस्त 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//पंजाब स्क्रीन डेस्क):: 

तीज के इतिहास को लेकर कई बार विवाद की बातें भी सामने आती हैं लेकिन इस  त्यौहार के बहुत गहरे रहस्य और भी हैं जिनमें स्वास्थ्य के बहुत से राज़ छुपे हुए हैं। इसके साथ ही तीज के त्यौहार महिलाओं को अपने गाँव और अपने मायके से मिलने जुलने का स्कून भी देता है। तीज का त्यौहार बहुत जोशो खरोश और स्नेह से मनाया जाता है इस बार चंडीगढ़//मोहाली में इसका आयोजन बहुत ही यादगारी रहा। यह आयोजन दिशा वूमैन वेलफेयर ट्रस्ट की तरफ से हुआ। 

महिलाओं की समस्याओं के समाधान हेतु हर फ्रंट पर संघर्ष करने वाले संगठन दिशा वूमैन वेलफेयर ट्रस्ट ने महिलाओं के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने तथा महिलाओं को तनाव मुक्त जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित करते हुए तीयां तीज दियां कार्यक्रम का आयोजन किया। इस यादगारी आयोजन में ट्राईसिटी की 100 से अधिक महिला उद्यमी, घरेलू महिलाओं तथा कामकाजी महिलाओं ने भाग लिया। एक महिला कभी मां, कभी पत्नी, कभी बहन या बेटी की भूमिका में होती है लेकिन तीज के उपलक्ष्य आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने अपनी दैनिक दिनचर्या से हटकर कुछ पल खुद के लिए निकाले।

ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष हरदीप कौर ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक महिला के भीतर कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है। कोई महिला खाना अच्छा बनाती है तो कोई अच्छी उद्यमी होती है। कोई महिला अच्छी लेखक होती है तो कोई महिला बेहतर टीम लीडर साबित होती है। दिशा वूमैन वेलफेयर ट्रस्ट ने ऐसी ही प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करते हुए तीयां जीत दियां कार्यक्रम का आयोजन किया।

 एडवोकेट रूपिंदरपाल कौर के मंच संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में लोक गायिका आर.दीप रमन तथा गुरमीत कुलार ने पंजाबी सांस्कृति से ओतप्रोत गीत पेश किए। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के लिए विशेष प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
इस मौके पर तीयां की रानी का ख़िताब दर्श कौर को, गिद्धे की रानी का खेताब सिमरन गिल को, सुनखी पंजाबण का खेताब सतिंदर कौर को, सुच्चजी पंजाबन का खेताब नरेंद्र कौर को दिया गया। इस कार्यक्रम में समाज सेविका जगजीत कौर काहलों, नर्सिंग सुपरडेंट कुलदीप कौर, गायिका गुरमीत कुलार ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम में भाग लेने वाली सभी महिलाओं को दिशा वूमैन वेलफेयर ट्रस्ट की तरफ से सम्मानित किया गया।

Friday, May 10, 2024

श्री आनंदपुर साहिब की सीट पर लगातार छा रही है भाजपा

Thursday 9th May 2024 at 3:45 PM

पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर भाजपा की आंखें 


चंडीगढ़
//श्री आनंदपुर साहिब: 09 मई 2024: (पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

पिछली बार किसान आंदोलन के समय जब किसान कार्यकर्ताओं ने कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं के घरों के सामने गोबर फेंका था व कुछ अन्य उग्र कदम उठाए थे उस समय लगता था कि भाजपा अब किसी भी तरह पंजाब में सर नहीं उठा सकेगी। जब प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानून वापिस लेने का एलान किया तो भाजपा के लिए पंजाब में एक बार फिर से सुखद माहौल बनने लगा। 

इसके बाद जब किसान आंदोलन ने शम्भु पर नया मोर्चा शुरू किया और खनौरी पर शुभकरण डीप सिंह की शहीदी हुई तो एक बार फिर से भाजपा के लिए पंजाब के माहौल में मुश्किलें बढ़ने लगीं। इन मुश्किलों को आसान किया पंजाब के सियासी नेताओं में भाजपा के लिए उमड़े सियासी प्रेम ने। पंजाब में आतंकवाद का शहीद कह कर परचारे जाते मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत बिटु  ने जब भाजपा में शामिल होने का एलान किया तो यह  कांग्रेस और कांग्रेस के समर्थकों पर बहुत बड़ा आघात था। निकट भविष्य में भाजपा को राष्ट्रवाद की निधि में बहुत फायदा मिलने की भी संभावना है। 

पंजाब में ब्लू स्टार ऑपरेशन कर के राष्ट्रवाद की दौड़ में सबसे आगे रहने की इच्छुक रही कांग्रेस ने दल बदली के ऐसे घटनाक्रम की तो कभी कल्पना भी नहीं की थी। कांग्रेस को लगता था उसका राष्ट्रवाद अजेय है लेकिन भाजपा ने अपने अंदाज़ में साबित किया कि उसका राष्ट्रवाद ज्यादा प्रभावी है। 

ऐसे माहौल में भाजपा की टीम पंजाब में कमाल की रणनीति से चुनाव के मैदान में है। उसने किसान आंदोलन और किसान संगठनों का डर पूरी तरह से उतार फेंका है। भाजपा के इस राजनीतिक रणकौशल के चलते हर रोज़ महत्वपूर्ण रणनीति का कदम उठाए जा रहे हैं। सिख चेहरे और किसान लगते चेहरे इन आयोजनों में काफी सक्रिय दीखते हैं। 

इसी सिलसिले में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और माता नैना देवी मंदिर में नतमस्तक हो कर डा. सुभाष शर्मा ने अपना चुनावी अभियान शुरू किया। चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर और अन्य कई स्थानों से भाजपा का चुनावी अभियान तेज़ी से जारी है। 

डा. सुभाष शर्मा ने अपना चुनावी अभियान शुरू  करते हुए श्री आनंदपुर साहिब को विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और मोहाली को आईटी हब बनाने के वायदे का एलान भी किया है। उन्होंने अपने वायदे में इस इस मकसद के लिए  हर सम्भव प्रयास करने की बात कही है। गुरु घर में नतमस्तक होते हुए उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा और बख्शीश से ही उन्हें श्री आनंदपुर साहिब का प्रतिनिधित्व करने का अवसर पार्टी ने प्रदान किया है। पार्टी ने जितना विश्वास किया है उस पर पूरी तरह से खरे उतरने की कोशिशें पूरी क्षमता और संकल्प से होंगीं। 

श्री आनंदपुर साहिब में पार्टी के सभी कार्यकर्ता पूरी तरह से सक्रिय हैं। श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा ने आज तख्त श्री केसगढ़ साहिब और माता नैना देवी के मंदिर में नतमस्तक हो कर अपने चुनाव प्रचार अभियान का शुभारम्भ किया। 

आनंदपुर साहिब के इस ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह धरती भक्ति और शक्ति के सिद्धान्त की जननी है और वह इससे प्रेरणा ले कर अपनी पूरी ताकत के साथ इलाके के लोगों की सेवा करेंगे। गुरु की बख्शीश से गुरु नगरी की सेवा करने का अवसर भी अवश्य मिलेगा।उनके इस कथन से संगत में भी भरी उत्साह दिखा। 

डा. सुभाष शर्मा ने बहुत ही स्कपष्हाट शब्दों में खुल कर कहा कि लोकतंत्र में फैसला जनता के हाथ में होता है। हम मोदी सरकार की नीतियों का प्रचार कर रहे हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि पंजाब में रिकॉर्ड तोड़ बहुमत से सभी 13 सीटें भाजपा जीतेगी। उन्होंने कहा कि वह खुद को बहुत भाग्यशाली मानते हैं जिन्हें गुरु की नगरी की सेवा करने के लिए पार्टी ने प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया है। 

इस मौके पर डा. सुभाष ने कहा कि आज मैंने गुरु नगरी के विकास और पंजाब की खुशहाली के लिए अरदास की और गुरु महाराज की कृपा से ही मैं यहां से चुनाव लड़ने जा रहा हूं। श्री आनंदपुर साहिब के विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह हलका विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होना चाहिए। बेंगलुरु की तरह मोहाली भी आईटी हब के रूप में आगे बढ़े और इसके लिए मैं अवश्य प्रयास करूंगा। 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पौराणिक और सिखों के गौरवशाली इतिहास की साक्षी श्री आनंदपुर साहिब की धरती का वातावरण कमल खिलने के सर्वथा अनुकूल है। इस अवसर पर भारी मात्रा में पार्टी के कार्यकर्ता स्थानीय लोग उपस्थित थे। 

Saturday, March 23, 2024

पत्रकार हरबंस सिंह सोढी आज भी सदमे में हैं उसे याद करके

किस पाताल में गिरते जा रहे हैं हम 

मोहाली//चंडीगढ़: 23 मार्च 2024: (मीडिया लिंक//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::


"झोले से निकली यादें" एक स्तम्ब जैसा ही है 
जिसे अक्सर जानेमाने पत्रकार हरबंस सोढी लिखते हैं। इस स्तंभ का लिखना और छपना शायद कोई पक्की अवधि या अंतराल नहीं है। लेकिन पंजाबी लेखक सभा चंडीगढ़ का एक बहुत ही लोकप्रिय व्हाटससप ग्रुप है जहां पर जनाब सोढी का यह स्तंभ अक्सर हवा के किसी ताज़ा झौंके की तरह  कई बार सामने आ ही जाता है। हर बार इसमें होती है-नई जानकारी, नई बात और वह भी बिलकुल नए अंदाज़ में। इस बार की पोस्ट में ु होने याद दिलाई है शहीद-ए-भगत सिंह जी की।

वह बताते हैं: पटियाला में रेडियो कोरेस्पोंडेंट था! पत्रकारों की टोली के साथ शहीद भगत सिंह की समाधि हुसैनीवाला पहुँचे! वापसी पर पत्रकारों ने लुधियाना में लंच के साथ ख़ूब बीयर उड़ा कर “शहीदी दिवस “ मनाया! 

मैं बेहद परेशान था!खाना भी नहीं खाया! 

पाकिस्तान में जिस जेल में भगत सिंह ,राजगुरू,सुखदेव को फाँसी दी गई थी, उसे गिरा कर,वहाँ शादमान चौक बना दिया गया है !(ये और बात है कि पाकिस्तान में इन शहीदों का बहुत सम्मान है ।वहाँ उन के पैतृक घर को सहेज कर भी रखा गया है ।)

 ज्ञानी ज़ैल सिंह ने भगत सिंह की माता विदिया वती को पंजाब माता का दर्जा दिया ।

Politiciansकी “कारगुज़ारियों “ से विचलित हो कर पंजाब माता को कहना पड़ा था- मेरे बेटे ने ऐसी आज़ादी के लिए क़ुर्बानी दी थी क्या?

Politicsके बारे कुछ नहीं कहना! …परन्तु विचलित तो मैं भी हूँ! जेल से छूटने के लिये, के बार बार माफ़ी माँगने वाले अब Hero हो गए हैं!

—शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले! आज शहीदों की चिताओं पर लगने वाले मेले औपचारिकता का चोग़ा पहन , सचमुच आम से मेले बन गये है!

पुनश्च ः

 शहीदी दिवस पर पत्रकारों के 🍺 Beer पीने से मैं परेशान हो उठा था ! बाद में मैं भी पत्रकार बन गया!

After all हर “profession”

के कुछ “ETHICS!” तो होते ही हैं न!

हरबंस सोढी जी यह पोस्ट पढ़ कर चिंता होने लगी है। शर्म आने लगी है। शहीद-ए-भगत सिंह को कुछ लोग इस तरह पिकनिक मना कर श्रद्धांजलि देते हैं तो भगवान् जाने हम किस युग को बुलावा दे रहे हैं।  किस समाज का निर्माण कर रहे हैं। हो सकता है ऐसा जश्न अंग्रेज़ों ने शहीदों को फांसी दे कर मनाया भी हो लेकिन हम--हम क्या कर रहे हैं?

जानेमाने लेखक और पत्रकार हरबंस सिंह सोढ़ी ने उठाया है यह मुद्दा बिना किसी का नाम लिए 

शहीदों के शहीदी दिवस पर ऐसा करने वालों को जाने शर्म कब आएगी????

Saturday, February 10, 2024

PEC ग्लोबल एलुमनी में मिले बहुत से पुराने महारथी

Saturday 10th February 2024 at 5:11 PM

पुराने महारथियों की यादों ने बांधा यादगारी रंग


चंडीगढ़
: 10 फरवरी 2024: (मीडिया लिंक//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

दशकों पहले कल्पना चावला और कई अन्य छात्र पीईसी अर्थात PEC के साथ जुड़े हुए थे। PEC मतलब Deemed to be University-इस गौरवशाली संस्थान पंजाब इंजीनियरिंग कालेज के साथ अपने जीवन काल में उन्होंने देश और दुनिया के लिए एक नया इतिहास रचा, जहां उन्होंने अपना और अपने परिवार का नाम रोशन किया, वहीं इस बात की गवाही भी दर्ज करवाई उन्हें इस काबिल बनाने में PEC  की अहम भूमिका रही। इन पुराने छात्रों ने सफलता की नई ऊंचाइयों को छू कर भी दिखाया है। आज जब बहुत से पुराने छात्र एलुमनाई में आए तो कई नए छात्र उनसे प्रेम. सम्मान और उत्साह के साथ मिले। उनसे उनकी खूबियों और कामयाबी के गुर सीखने के लिए बहुत सी बातें जानीं। उस्तादी रंग वाले ये गुर ज़िंदगी भर कदम कदम पर उनके काम भी आएंगे। 

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ (मानित विश्वविद्यालय) ने 10 फरवरी, 2024 को अपनी बहुप्रतीक्षित ग्लोबल एलुमनाई मीट - 2024 के लिए मंच तैयार किया। इस असाधारण कार्यक्रम ने न केवल गर्मजोशी से स्वागत का वादा किया, बल्कि प्रतिभा और सफलता का एक असाधारण उत्सव भी मनाया! इंजीनियर अतुल करवल, आईपीएस, महानिदेशक, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस अवसर की शोभा बढ़ाई। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज ओल्ड स्टूडेंट एसोसिएशन - पेकोसा ने अध्यक्ष इंजीनियर टीकम चंद्र बाली, के साथ इं. एच.एस. ओबेरॉय, पेकोसा के महासचिव के मार्गदर्शन में और 'स्टड्स' के भव्य आधिकारिक प्रायोजन के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत PEC के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) बलदेव सेतिया जी द्वारा मुख्य अतिथि और सभी पूर्व छात्रों का गर्मजोशी से स्वागत करने के साथ हुई। इसी दिन की शुरुआत सम्मानित अतिथियों के साथ औपचारिक दीप प्रज्वलित करके किया गया।

PECOSA के अध्यक्ष, एर. टीकम चंद्र बाली ने इस ग्लोबल मीट में एक बार फिर पीईसी कैंपस में सभी पूर्व छात्रों का स्वागत किया। उन्होंने पेकोसा के महत्व और विभिन्न बैचों और पृष्ठभूमियों के पूर्व छात्रों को एक साथ लाकर सौहार्द और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने में इसकी अभिन्न भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने PEC के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) बलदेव सेतिया जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन के लिए उनका आभार व्यक्त किया और स्टड्स के अध्यक्ष एर मधु खुराना, और स्टड्स के प्रबंध निदेशक एर. सिद्धार्थ खुराना को आधिकारिक भागीदार बनने के लिए भी धन्यवाद दिया।

अपने संबोधन में पेकोसा के महासचिव इं. एच. एस. ओबेरॉय ने एर अतुल करवाल, एनडीआरएफ के महानिदेशक के लिए आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और प्रत्येक पूर्व छात्र थे। वह विशेष रूप से PEC के प्रति कृतज्ञ महसूस करते थे। इंजीनियर मधु खुराना, और स्टड्स के प्रबंध निदेशक एर सिद्धार्थ खुराना जी ने 2 लाख (टॉपर के लिए 1 लाख, दूसरे टॉपर के लिए 60 हजार और तीसरे टॉपर के लिए 40 हजार) रुपये संसथान को दान किये। उन्होंने तहेदिल से उनका धन्यवाद दिया। अंत में, उन्होंने एक बार फिर 2024 की इस बैठक के लिए यहां आने वाले सभी पूर्व छात्र सदस्यों का स्वागत किया।

डॉ. राजेश कांडा (प्रमुख, पूर्व छात्र और कॉर्पोरेट संबंध) ने PEC से यूजी, पीजी और यहां तक कि पीएचडी दोनों को पूरा करने के साथ-साथ 100% -24 कैरेट गोल्ड पूर्व छात्र सदस्य होने के अपनी पूर्व यादों और गौरवपूर्ण क्षणों को व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत पूर्व छात्र एर सत प्रकाश गुप्ता, (1962 बैच), के परिवार के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। उनके पुत्र श्री पंकज गुप्ता ने दो छात्राओं की शिक्षा के लिए 57 लाख रु. का दान दिया।  इस दम्पति जोड़े को प्रतीक चिन्ह और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

पीईसी के सम्मानित निदेशक डॉ. बलदेव सेतिया सम्मानित अतिथि एर अतुल करवाल (आईपीएस - महानिदेशक); एर. टी.सी. बाली, अध्यक्ष पेकोसा, एर. एच.एस. ओबेरॉय, महासचिव, पेकोसा; स्टड्स के अध्यक्ष एर. मधु खुराना, और स्टड्स के प्रबंध निदेशक एर सिद्धार्थ खुराना सहित पूर्व छात्रों की एक विशिष्ट श्रृंखला का स्वागत करते हुए रोमांचित थे। उन्होंने इस बैठक के आयोजन के लिए पेकोसा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने पीईसी के 100+ वर्ष पूरे होने का उल्लेख भी किया। एक नहीं बल्कि दो राष्ट्रपतियों, पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द और वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती. राम नाथ कोविन्द और वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती. द्रौपदी मुर्मू. की परिसर में गरिमामय उपस्थिति के साथ गौरवशाली इतिहास और एक साल तक चलने वाला शताब्दी समारोह का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने फिराक गोरखपुरी को भी उद्धृत किया-

आने वाली नस्लें तुम पर फ़ख़्र नक्षत्र हम-असरो

जब भी उनका ध्यान आया तो तुमने 'फ़िराक़' को देखा       --'फ़िराक़'गोरखपुर

उन्होंने हाल के वर्षों में हो रहे विकास और अनुसंधान गतिविधियों के बारे में भी गर्व से बताया। उन्होंने हाल ही में पुरस्कार प्राप्त करने वाले विभिन्न संकाय सदस्यों और छात्रों की प्रशंसा की। परिसर के बुनियादी ढांचे को भी बढ़ाया गया है। उन्होंने यह भी कहा, कि स्टड्स ने हमारे आधिकारिक भागीदार होने का सम्मान विनम्रतापूर्वक स्वीकार किया है, जिससे इस आयोजन में प्रतिष्ठा और उत्साह की एक अतिरिक्त परत जुड़ गई है।

इसके साथ ही, स्टड्स के अध्यक्ष एर. मधु खुराना को पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में आकर वास्तव में पुरानी यादों का एहसास हुआ। स्टड्स ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के टॉपर्स के लिए 2 लाख रुपये का दान दिया था।  उन्होंने कहा कि यह सहायता छात्रवृत्ति पीईसी परिसर में और भी अधिक कल्पना चावला लाने के लिए काम करेगी और संस्थान की विरासत में उदारतापूर्वक योगदान देगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एर. अतुल करवाल जी, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के महानिदेशक ने पीईसी द्वारा सम्मानित किए जाने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि, ''एक इंजीनियर होने के नाते, सचमुच मुझे पुलिस में करियर बनाने के लिए अच्छी योग्यता मिली। हमें प्रौद्योगिकी को बहुत दृढ़ता से देखना होगा, अन्यथा हम पीछे रह सकते हैं। जीवन के किसी भी क्षेत्र में इंजीनियरिंग करने से आपको एक शानदार शुरुआत मिलती है, यही मेरे साथ भी हुआ।'' उन्होंने 15 साल की उम्र में अपना इंजीनियरिंग करियर शुरू किया और 19 साल की उम्र में पास भी हो गए। अंत में, उन्होंने कहा कि हमें यह जांचना चाहिए कि क्या हम जीवन को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं? बस अपने आप का आनंद लें।  कृतज्ञता की स्थायी भावना रखना और आपके आदर्श को हमेशा याद रखना ही असल मायने में जीना है।

हमारे सम्मानित पूर्व छात्र, आईएएस अधिकारी एर रितु माहेश्वरी. के भव्य प्रवेश के लिए मंच पूरी तरह तैयार था।  1954, 1964, 1969, 1974, 1989, 1999, 2009 और 2014 बैच के पूर्व छात्र प्रोफेसर अहस्वनी कुमार गोसाईं (आईआईटीडी में सिविल इंजीनियरिंग विभाग), पंकज दुहान जैसे विशिष्ट अतिथियों के साथ इस भव्य उत्सव को देखने के लिए उपस्थित थे। (रेकिट बेंकिज़र वेलनेस के वैश्विक प्रमुख), सरबजीत सिंह विर्क (फिनवेसिया ग्रुप के प्रबंध निदेशक और सह-संस्थापक), पीडब्ल्यूडी (बी एंड आर) हरियाणा के इंजीनियरिंग-इन-चीफ, और कई अन्य। माननीय मुख्य अतिथि एर अतुल करवाल और निदेशक, प्रो. (डॉ.) बलदेव सेतिया जी द्वारा सभी पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। ।

1988 बैच के पूर्व छात्रों ने आज सुबह 10 फरवरी, 2024 को संस्थान को 2 ई-वाहन, एक ई-स्कूटर और एक ई-कार्ट भी दान किये।

नृत्य, संगीत और अविस्मरणीय प्रदर्शन के मनमोहक मिश्रण से भरपूर, पूर्व छात्रों की बैठक बेहद आनंददायक रही, जिससे हर कोई उत्साहित और ऊर्जावान महसूस कर रहा था। उत्सव के बीच, हार्दिक कहानियों का आदान-प्रदान किया गया, जिससे उपस्थित लोगों को एक-दूसरे के जीवन, करियर और उपलब्धियों के बारे में जानने का मौका मिला। जैसे-जैसे रात ख़त्म होने लगी, उपस्थित सभी लोगों के बीच तृप्ति और कृतज्ञता की गहरी भावना बनी रही।

कुल मिला कर सारा आयोजन यादगारी रहा। इस सारे कार्यक्रम के दौरान नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी का एक बहुत ही दिलचस्प संयोजन भी सामने आया, जिसने समय और तकनीक का उपयोग करके भविष्य का एक और नया इतिहास भी रचना है। 

निरंतर सामाजिक चेतना और जनहित ब्लॉग मीडिया में योगदान दें। हर दिन, हर हफ्ते, हर महीने या कभी-कभी इस शुभ कार्य के लिए आप जो भी राशि खर्च कर सकते हैं, उसे अवश्य ही खर्च करना चाहिए। आप इसे नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आसानी से कर सकते हैं।