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Tuesday, July 09, 2024

मोहाली के जिला अस्पताल में हुई रीढ़ की पहली सर्जरी

मंगलवार 9 जुलाई 2024 शाम ​​4:16 बजे

NRI ने स्वयं दी सरकारी अस्पताल को प्राथमिकता

साहिबजादा अजीत सिंह नगर: 09 जुलाई 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

सफल ऑपरेशन के बाद मरीज के साथ प्राचार्य डॉ. भवनीत भारती, डाॅ. अनुपम महाजन व अन्य अधिकारी

सरकारी अस्पतालों की प्रतिष्ठा और गुणवत्ता को और विकसित करने के लिए सरकार के साथ-साथ स्वास्थ्य संस्थानों के कर्मचारी भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। इसमें स्टाफ को सफलता भी मिल रही है क्योंकि अब एनआरआई मरीज भी सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पैसे देने लगे हैं। इस अस्पताल में मरीज़ों की लंबी कतारों के काम निपटने के लिए भी कर्मचारी देर तक मेहनत से काम करते हैं। अब स्पाइन की सफल सर्जरी का एक नया मामला सामने आया है जो की एक बड़ी उपलब्धि है।

स्थानीय मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की स्पाइन सर्जरी में बड़ी सफलता हासिल की है। यह जानकारी साझा करते हुए मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल भवनीत भारती और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. एच.एस. चीमा ने कहा कि इस अस्पताल में रीढ़ की हड्डी का पहला ऑपरेशन हुआ है, जिसका श्रेय ऑर्थो विभाग के प्रमुख डाॅ. अनुपम महाजन और उनकी टीम के पास जाता है।

उन्होंने कहा कि मरीज 45 वर्षीय पंजाबी महिला है, जिसने निजी अस्पताल के बजाय सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन कराना पसंद किया। उन्होंने बताया कि मरीज को चलने-फिरने में काफी दिक्कत हो रही थी. डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद ऑपरेशन करने की सलाह दी और मरीज की सहमति से ऑपरेशन किया गया, जो पूरी तरह से सफल रहा।

उन्होंने कहा कि यह जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए गौरव की बात है कि यहां पहला स्पाइन सर्जरी ऑपरेशन हुआ है। बड़ी बात यह है कि मरीज ने ऑपरेशन पर करीब 20 हजार रुपये खर्च किए हैं और अगर यह ऑपरेशन किसी निजी अस्पताल में होता तो कम से कम 2-3 लाख रुपये खर्च होते. डॉ। भवनीत भारती ने कहा कि इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में लगभग सभी उन्नत सर्जरी की जा रही हैं, जिससे मरीजों को काफी लाभ मिल रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जा रही निःशुल्क एवं सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठायें।

Saturday, February 20, 2021

मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड टेक्नोलॉजी लॉन्च

 20th February 2021 at 1:06 PM

 हुंजन हॉस्पिटल लुधियाना का नी रिप्‍लेसमेंट के लिये विशेष प्रयास  


लुधियाना: 20 फरवरी, 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

घुटने बदलने (नी रिप्‍लेसमेंट) के मामले में लुधियाना ने एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि यह मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड टेक्नोलॉजी लाने वाला उत्तर भारत का पहला शहर बन गया है। यह विश्व की सबसे व्यापक रूप से अपनाई गई यूएस एफडीए द्वारा अनुमोदित तकनीक है। दुनिया की एक प्रमुख  मेडिकल डिवाइस कंपनी स्ट्राइकर इंडिया और हुंजन हॉस्पिटल द्वारा संयुक्त रूप से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि उत्तर भारत का पहला मैको सिस्टम हुंजन हॉस्पिटल में इंस्‍टॉल किया गया है। 

इस लॉन्च से हुंजन हॉस्पिटल और स्ट्राइकर ने घुटने के जोड़ों के रोगों से पीड़ित रोगियों के लिये सबसे उन्नत टेक्नोलॉजी और उपचार लाने के अपने प्रयास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड सर्जरी सिस्टम से सर्जन ज्यादा सटीकता के साथ शल्यक्रिया के ज्यादा अनुमानित परिणाम दे सकते हैं।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हुंजन हॉस्पिटल को बधाई देते हुए स्ट्राइकर इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट एवं मैनजिंग डायरेक्टर मीनाक्षी नेवाटिया ने कहा, ‘‘हम हुंजन हॉस्पिटल के साथ भागीदारी कर बहुत खुश हैं और यह स्ट्राइकर के लिये निश्चित रूप से गर्व का क्षण है। रोगियों के उपचार के परिणामों को सुधारने और स्वास्थ्यरक्षा को बेहतर बनाने के लिये नवाचार लाने का हमारा साझा लक्ष्य इस अस्पताल के साथ हमारी भागीदारी को बहुत खास बनाता है। हम उत्तर भारत में घुटना प्रत्‍यारोपण की जरूरत वाले रोगियों की सेवा पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर वाकई उत्‍साहित हैं।’’


हुंजन हॉस्पिटल में डायरेक्टर और ज्‍वॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. बी.एस. हुंजन ने लुधियाना में हुई प्रेस वार्ता के दौरान पारंपरिक और मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड सर्जरी के बीच अंतर के बारे में बात की। उन्‍होंने समझाया कि पारंपरिक सर्जरी की चुनौतियों में से एक है शल्यक्रिया की सटीकता जोकि सर्जन के अनुभव और तकनीक पर निर्भर होती है। मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड सर्जरी सिस्टम से सर्जन हर बार रोगग्रस्त जोड़ पर सटीक बोन कट्स लगा सकते हैं। डॉ. बी.एस. हुंजन ने कहा, ‘‘जिन पहले 8 रोगियों का हमने ऑपरेशन किया है, उन्होंने उत्साहजनक परिणाम दिये हैं। मैको से हमें अपने रोगियों के बारे में पहले से ज्यादा जानने का मौका मिला है और इससे हमें बोन यानी हड्डी को कम काटने में मदद मिलती है। कुछ रोगियों के लिये इसका मतलब सॉफ्ट टिश्यू की कम क्षति हो सकता है, जबकि अन्य के लिये हड्डी का ज्यादा संरक्षण।.” 

डॉ. जयवीर हुंजन, हुंजन हॉस्पिटल में कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक्स, ने बताया, ‘‘घुटना प्रत्‍यारोपण के लिये होने वाली पारंपरिक सर्जरीज पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से प्रभावी ढंग से रोगियों के जीवन को बेहतर बना रही हैं, लेकिन मैको सिस्टम हमारी सटीकता को महत्वपूर्ण ढंग से बढ़ाएगा। जैसा कि लिटरेचर में बताया गया है और शुरूआती सर्जरीज में हमारे अनुभव के अनुसार, हमने रोगियों को होने वाले कई फायदे देखे हैं। इनमें सटीक प्लानिंग और बोन कट्स के साथ ही हड्डी और सॉफ्ट टिश्यू का ज्यादा संरक्षण किया जा सकता है। मरीजों को ऑपरेशन के बाद कम दर्द होता है, वे तेजी से ठीक होते हैं और उन्‍हें अस्‍पताल से जल्‍दी छुट्टी मिल जाती है, साथ ही खून की भी कम हानि होती है।’’ इस तकनीक के बारे में डॉ. बीएस हुंजन ने बताया,  “इस टेक्नोलॉजी में नी रिप्‍लेसमेंट सर्जरी करने के तरीके को पूरी तरह से बदलने की क्षमता है। मुझे यकीन है कि एक दिन आएगा, जब यह टेक्नोलॉजी हर ऑपरेटिंग रूम में उपचार का मानक होगी। हमें बहुत गर्व है कि हम पंजाब में रोगियों के लिये विश्व स्तरीय उपचार लेकर आए हैं।”

हर रोगी की हड्डियों की रचना अलग होती है और गठिया से रोगग्रस्त जोड़ में और बदलाव हो जाता है। घुटने या कूल्हे की सर्जरी के मामले में, मैको सिस्टम का सॉफ्टवेयर रोगी के सीटी स्कैन के आधार पर रोगग्रस्त जोड़ का 3डी मॉडल बनाने में सहायता करता है। फिर यह सॉफ्टवेयर रोगियों के रोग की विशिष्ट स्थिति के आधार पर हर रोगी के लिये एक व्यक्तिपरक वर्चुअल सर्जिकल प्लान बनाने की सुविधा देता है। ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले हुई यह प्लानिंग सबसे सटीक बोन कट्स लगाने और इम्प्लांट्स के संरेखण का निर्णय लेने में मदद करती है। इस टेक्नोलॉजी से सर्जन सर्जरी के दौरान जरूरत पड़ने पर प्लान बदल भी सकता है। और एक बार प्लान तय होने पर मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड सर्जरी सिस्टम ऑपरेशन थियेटर में बोन कट्स लगाने में सर्जन को सहयोग देता है। अनूठी हैप्टिक टेक्नोलॉजी सुनिश्चित करती है कि सर्जन बनाई गई वर्चुअल सीमाओं में रहे। चूंकि रोबोटिक आर्म को वर्चुअल सीमा से बाहर भौतिक रूप से नहीं चलाया जा सकता, इसलिये सॉफ्ट टिश्यू का संरक्षण होता है। इससे बोन कट्स और इम्प्लांट्स की स्थिति सबसे सटीक हो जाती है और सॉफ्ट टिश्यू को चोट नहीं लगती है। 

1,000 से ज्यादा मैको सिस्टम्स (और गिनती जारी है) का सबसे बड़ा वैश्विक इंस्टालेशन आधार, 350,000 से ज्यादा मैको प्रोसीजर्स और प्रकाशित तथा समकक्षों द्वारा समीक्षा किये गये अध्ययनों में 145 से ज्यादा प्रकाशन मैको रोबोटिक आर्म-असिस्टेड टेक्नोलॉजी की चिकित्सकीय दक्षता स्थापित करते हैं।

स्ट्राइकर क्या है 

स्ट्राइकर विश्व की अग्रणी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक है और अपने ग्राहकों के साथ मिलकर स्वास्थ्यरक्षा को बेहतर बनाने के लिये काम करती है। यह कंपनी ऑर्थोपेडिक्स, मेडिकल एवं सर्जिकल, और न्यूरोटेक्नोलॉजी एवं स्पाइन में खोजपरक उत्पादों तथा सेवाओं की पेशकश करती है, जो रोगी और अस्पताल के परिणामों को सुधारने में मदद करते हैं। ज्यादा जानकारी stryker.com पर उपलब्ध है। 


Saturday, February 03, 2018

लक्ष्णों के बावजूद ऑपरेशन में देरी करना जानलेवा भी हो सकता है

[17:22, 2/3/2018]
पित्ते की पथरी पर डा. नरोत्तम दीवान ने किया सावधान  
लुधियाना: 3 फरवरी 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
दीवान अस्पताल एंड एडवांस्ड लेप्रोस्कोपिक सजर्री  सेंटर के सेमिनार रूम में शनिवार को सीएमई का आयोजन किया गया। सीएमई में पित्ते की पथरी के इलाज व दूरबीन से ऑपरेशन के प्रसिद़्ध जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सजर्न डॉ.नरोत्तम दीवान ने ‘पित्ते की पथरी का समय पर ऑपरेशन कराने से होने वाली समस्याएं’ विषय पर संबोधित किया। 
डॉ.दीवान ने कहा कि वैसे तो पित्ते की पथरी के बारे में पता चलने के तुरंत बाद ऑपरेशन करना जरूरी नहीं है लेकिन पेट में मामूली दर्द, हाजमा खराब होना, गैस ज्यादा बनने, उलटी आने या बुखार चढ़ने जैसे लक्ष्णों के बावजूद ऑपरेशन में देरी करना जानलेवा भी हो सकता है।
 कई बार पित्ते की पथरी पित्ते से फसलकर पित्त की नलकी में फंसकर पित्त का रास्ता रोक देती है। इससे पित्त आंतड़ियों की बजाय रक्त में जाने लगता है। इससे मरीज की आंखें त्वचा व पेशाब पीला व शौच का रंग सफेद हो जाता है। मरीज के सारी त्वचा पर खुजली होने है।  शरीर में विटामिन के की कमी हो जाती है। विटामिन के की कमी से खून जमने में खराबी आ जाती है और थोड़ी सी चोट पर भी बहुत ज्यादा रक्त बहता है।
इसके अलावा कई बर पित्ते की पथरियां ज्यादा देर रहने तक से पित्ते में सोजिश पड़ने से आसपास की आंतड़ियां उससे चिपक जाती हैं और एक गांठ का आकार ले लेती है। इससे मरीज का एक दम ऑपरेशन नहीं हो पाता है। उसे कुछ महीने दवा लेनी पड़ती है व दाखिल भी होना पड़ता है। 
अगर पथरी एक और बड़ी हो तो वह सालों साल रहने के बाद पित्ते में कैंसर पैदा कर देती है। यह कैंसर जानलेवा होता है, क्योंकिा पित्ता जिगर के पास होने की वजह से कैंसर जिगर में बहुत तेजी से दाखिल हो जाता है, जिससे मरीज एकदम से कैंसर की आािखरी स्टेज में पहुंच जाता है।
 इसी तरह पित्ते की पथरी के ऑपरेशन में देरी करने से पित्ते में मवाद पड़ जाता है या पित्ता गल जाता है। मवाद का प्रेशर ज्यादा पड़ने से पित्ता फब्ट जाता है जोकि खतरनाक स्थिति है। इसके इलाज में रिस्क भी रहता है।
इसी तरह मरीज को कोलेंजाइटिस बीमारी भी हो सकती है, जिसमें कुछ अर्सा पहले तक शत प्रतिशत मरीजों की मौत हो जाती थी। हालांकि अभी भी  सात फीसदी डेथ रेट है।
इसमें मरीज को पीलिया, तेज बुखार व पेट के दाहिने में ऊपरी तरफ दर्द, तेज कंपकंपी होने लगती है। पित्ते की नलकियों में कीटाणु बहुत बढ़ जातो है और मवाद पैदा हो सकता है। वह कीटाणु व मवायद जिगर से होते हुए खून में चले जाते हैं, और सारे शरीर में मवाद, कीटाणाु व उसका जहर फैल जाता है। मरीज का ब्लड प्रेशन बहुत तेजी से गिर सकता है और उसके गुर्दे अैर फेफड़े फेल हो सकते हैं। इसके लिए बहुत तेजी से इलाज की जरूी रहीत है। 
पित्ते की पथरी के इलाज में देरी से पेनक्रियाज ग्रंथी में सोजिश से पेनक्रिएटाइटिस बीमारी हो जाती है। पेनक्रियाज से निकलने वलो द्रव्य गुर्दे व फेफड़ों को फेल कर सकते हैं। इससे पेट में पानी व मवाद भर सकता है। मरीज का ब्लड प्रेशर गिर सकता है व उसकी रक्त की धमनियों में ही ब्लड जम जाता है। पेट में खून की धमनियों के जमने से रक्त बहना भी शुरू हो सकता है। पेनक्रियाज में सोजिश से मवाद पड़ जाने पर बार-बार ऑपरेशन करने पड़ते हैं। इसमें भी मरीज को बहुत लंबे समय तक अस्ताल या आईसीयू में दाखिल रहकर बार-बार ऑप्रेशन कराने पड़ सकते हैं। लेकिन फिर भी दस फीसदी मरीज बच नहीं पाते हैं।

Wednesday, August 28, 2013

अमेरिका में लागत केवल 3 डालर और भारत में बिकता है 3-5 लाख रूपये में

हार्ट अटैक रोकने का आयुर्वैदिक इलाज केवल 21 दिन में ठीक
दोस्तो अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनिया जो दवाइया भारत मे बेच रही है ! वो अमेरिका मे 20 -20 साल से बंद है ! आपको जो अमेरिका की सबसे खतरनाक दवा दी जा रही है ! वो आज कल दिल के रोगी (heart patient) को सबसे दी जा रही है !! भगवान न करे कि आपको कभी जिंदगी मे heart attack आए !लेकिन अगर आ गया तो आप जाएँगे डाक्टर के पास !

और आपको मालूम ही है एक angioplasty आपरेशन आपका होता है ! angioplasty आपरेशन मे डाक्टर दिल की नली मे एक spring डालते हैं ! उसको stent कहते हैं ! और ये stent अमेरिका से आता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डालर का है ! और यहाँ लाकर वो 3 से 5 लाख रुपए मे बेचते है और ऐसे लूटते हैं आपको !

और एक बार attack मे एक stent डालेंगे ! दूसरी बार दूसरा डालेंगे ! डाक्टर को commission है इसलिए वे बार बार कहता हैं angioplasty करवाओ angioplasty करवाओ !! इस लिए कभी मत करवाए !

तो फिर आप बोलेंगे हम क्या करे ????!

आप इसका आयुर्वेदिक इलाज करे बहुत बहुत ही सरल है ! पहले आप एक बात जान ली जिये ! angioplasty आपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता !! क्यूंकि डाक्टर जो spring दिल की नली मे डालता है !! वो spring बिलकुल pen के spring की तरह होता है ! और कुछ दिन बाद उस spring की दोनों side आगे और पीछे फिर blockage जमा होनी शुरू हो जाएगी ! और फिर दूसरा attack आता है ! और डाक्टर आपको फिर कहता है ! angioplasty आपरेशन करवाओ ! और इस तरह आपके लाखो रूपये लूटता है और आपकी ज़िंदगी इसी मे निकाल जाती है ! ! !

अब पढ़िये इसका आयुर्वेदिक इलाज !!
Courtesy Photo 
हमारे देश भारत मे 3000 साल एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !! में
उन्होने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!! और इस पुस्तक मे उन्होने ने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे ! ये उनमे से ही एक सूत्र है !!

वागवट जी लिखते है कि कभी भी हरद्य को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियो मे blockage होना शुरू हो रहा है ! तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अमलता ) बढ़ी हुई है !

अमलता आप समझते है ! जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !!

अमलता दो तरह की होती है !
एक होती है पेट कि अमलता ! और एक होती है रक्त (blood) की अमलता !!
आपके पेट मे अमलता जब बढ़ती है ! तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !! खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! मुंह से पानी निकाल रहा है ! और अगर ये अमलता (acidity)और बढ़ जाये ! तो hyperacidity होगी ! और यही पेट की अमलता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अमलता(blood acidity) होती !!

और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अमलीय रकत (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता ! और नलिया मे blockage कर देता है ! तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !! और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्यूंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!

इलाज क्या है ??
वागबट जी लिखते है कि जब रकत (blood) मे अमलता (acidty) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो छारीय है !

आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !

अमलीय और छारीय !!
(acid and alkaline )

अब अमल और छार को मिला दो तो क्या होता है ! ?????
((acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????

neutral होता है सब जानते है !!
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तो वागबट जी लिखते है ! कि रक्त कि अमलता बढ़ी हुई है तो छारीय(alkaline) चीजे खाओ ! तो रकत की अमलता (acidity) neutral हो जाएगी !!! और रक्त मे अमलता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !! ये है सारी कहानी !!

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो छारीय है और हम खाये ?????

आपके रसोई घर मे सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजे है जो छारीय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए ! और अगर आ गया है ! तो दुबारा न आए !!
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सबसे ज्यादा आपके घर मे छारीय चीज है वह है लोकी !! जिसे दुदी भी कहते है !! english मे इसे कहते है bottle gourd !!! जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! इससे ज्यादा कोई छारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लोकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !! या कच्ची लोकी खायो !!

स्वामी रामदेव जी को आपने कई बार कहते सुना होगा लोकी का जूस पीयों- लोकी का जूस पीयों !
3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लोकी का जूस पिला पिला कर !! और उसमे हजारो डाक्टर है ! जिनको खुद heart attack होने वाला था !! वो वहाँ जाते है लोकी का रस पी पी कर आते है !! 3 महीने 4 महीने लोकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है !

वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे ! वो कहते है हम न्योर्क गए थे हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने ! वो राम देव जी के यहाँ गए थे ! और 3 महीने लोकी का रस पीकर आए है ! आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है ! और वो इतने हरामखोर है आपको नहीं बताते कि आप भी लोकी का रस पियो !!


तो मित्रो जो ये रामदेव जी बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है !! वागवतट जी कहते है रकत की अमलता कम करने की सबे ज्यादा ताकत लोकी मे ही है ! तो आप लोकी के रस का सेवन करे !!

कितना करे ?????????
रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !!

कब पिये ??

सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !!
या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!
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इस लोकी के रस को आप और ज्यादा छारीय बना सकते है ! इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो
तुलसी बहुत छारीय है !! इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है ! पुदीना बहुत छारीय है ! इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ! ये भी बहुत छारीय है !!
लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले ! वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !! ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!!

तो मित्रो आप इस लोकी के जूस का सेवन जरूर करे !! 2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !! 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!
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कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !! घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !! और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !!

और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे ! डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !! हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!
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आपने पूरी post पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

इन बीमारियो के इलाज के लिए और अच्छी तरह समझने के लिए यहाँ
जरूर जरूर click करे !!
http://www.youtube.com/watch?v=C8NbDw4QGVM&feature=plcp 
वन्देमातरम !!
अमर शहीद Rajiv Dixit जी की जय !