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Saturday, June 03, 2023

रॉ के पूर्व अधिकारी जीबीएस सिद्धू ने किए सनसनीखेज़ खुलासे

अतीत की गलतियों पर कुकी गिल ने भी कहीं खरी खरी बातें


चंडीगढ़: 3 जून 2023: (कार्तिका सिंह//रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन टीम)::

केन्द्रीय श्री गुरु सिंह सभा द्वारा 'साका जून 1984 की राजनीतिक पृष्ठभूमि' विषय पर आयोजित स्मृति समारोह में प्रो. शाम सिंह (अध्यक्ष) ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा हालात में सिख पंथ को संवाद बनाने की जरूरत है और फेडरल ढांचे को मजबूत करने के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष पर भरोसा करना चाहिए।

यहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता करते हुए, जस्टिस (सेवानिवृत्त) रणजीत सिंह ने कहा कि पंजाब के लोगों, विशेष रूप से सिखों को, गुरुओं द्वारा दिखाए गए "किछ सुनिए, किच्छ कहिए" के संकल्प पर पहरा देना चाहिए। सभी जम्हूरियत पसंद लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अप्रैल 1978 के निरंकारी कांड के बाद शुरू हुई पंजाब की समस्या ने जिस तरह से हिंसक रूप धारण किया और राज्य के दमन ने राज्य के नौजवानों को तबाह कर दिया, उससे आज भी सबक लेने की जरूरत है।

सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (रॉ) के पूर्व अधिकारी जीबीएस सिद्धू ने अपने विचार साझा करते हुए, कहा कि जून 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार भारत सरकार की सोची समझी साजिश थी, जिसके लिए पृष्टभूमि पहले से ही तैयार कर ली गई थी। सिद्धू ने अपनी किताब 'द खालिस्तान कॉन्सपिरेसी' का हवाला देते हुए कहा कि अमृतसर में हुई हर कार्रवाई की योजना दिल्ली में बनाई गई थी, भले ही कार्रवाई किसी पार्टी की ओर से हुई हो।

जाने-माने अधिवक्ता व मानवाधिकार अधिवक्ता राजविंदर सिंह बैंस ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस ने 1985 के चुनाव में 1984 की घटनाओं के जरिए सिखों को निशाना बनाकर भारी बहुमत हासिल किया था, उसी तरह वर्तमान सरकार अब मुसलमानों को निशाना बनाकर सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के अल्पसंख्यकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

प्रख्यात विश्लेषक और टिप्पणीकार मलविंदर सिंह माली ने कहा कि पंजाब की समस्या वास्तव में 1849 से शुरू होती है जब ब्रिटिश शासकों ने पंजाब देश को भारत में शामिल कर लिया था। उन्होंने कहा कि सिखों और पंजाबियों की समस्या का समाधान गुरु नानक साहिब और गुरबाणी की आशा के अनुरूप ही हो सकता है, जिसमें संवाद बहुत जरूरी है।

रणजीत सिंह कूकी गिल ने कहा कि सिख बुद्धिजीवियों को साका जून 1984 और दिल्ली में हुए सिख नरसंहार के बारे में सही शब्दावली का चयन करना चाहिए, ताकि आम लोगों के सामने सही परिप्रेक्ष्य पेश किया जा सके।

राजविंदर सिंह राही ने साका जून 1984 के दौरान फ़ौजी हमले में खत्म हुई सिख रेफरेंस लाइब्रेरी पर अपने शोध का जिक्र करते हुए कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, लाइब्रेरी की सामग्री और पवित्र ग्रंथों के गायब होने के लिए जिम्मेदार है।

अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते डाक्टर प्यारे लाल गर्ग भी इस मौके पर हर वक्ता को ध्यान से सुनते रहे। उन्होंने इस पुस्तक "द खालिस्तान कॉन्सपिरेसी' के लेखक पर भी सवाल किया कि वह इस सारे घटनाक्रम के एक विशेष पहलू पर चुप क्यूं रहा? इस खामोशी के पीछे क्या राज़ है? गौरतलब है कि इस पुस्तक के लेखक जी बी एस सिद्धू केंद्रीय खुफिया एजेंसी रॉ के उच्च अधिकारी रहे हैं। उनकी बातों में भी दम लगता है। जहां तक कुछ मुद्दों पर खामोशी की बात है तो उनकी bho कई मजबूरियां रही हो सकती हैं।

डॉ खुशहाल सिंह ने मंच संचालन की कमान संभाली। ज्ञानी केवल सिंह जी, ने पधारे लोगों का धन्यवाद किया। इस मौके पर कौमी सिंह सभा पत्रिका का नया संस्करण (जून-84 सिख रेफरेंस लाइब्रेरी कहां चला गया?) और जीबीएस सिद्धू की किताब "दा खालिस्तान कांस्पिरेसी' का प्रकाशन व्हाइट क्रो पब्लिशर्स ने किया।

इस कार्यक्रम में गुरप्रीत सिंह (ग्लोबल सिख काउंसिल), गुरबीर सिंह मचाकी, डॉ. प्यारा लाल गर्ग, हमीर सिंह, अशोक सिंह बागड़ी, प्रो. मनजीत सिंह, हरजोत सिंह, नारायण सिंह चौडा, महेंद्र सिंह मोरिंडा, सुरिंदर सिंह किशनपुरा, हरदीप सिंह दिबिबा, डॉ. भगवान सिंह और सभी विद्वानों ने अपने विचार रखे।

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Saturday, February 25, 2023

मोर्चे में दिखा छोटी कृपाण का रिवॉल्वर जैसा रंग रूप

आनेजाने वालों को तेज़ी से आकर्षित कर रहा है यह नया रंगरूप 

लुधियाना: 24 फरवरी 2023: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन):: 

चंडीगढ़-मोहाली बार्डर पर वाई पी इस चौंक के निकट बंदी सिंघों की रिहाई का मोर्चा जारी है। आज शाम दीवान के पंडाल में भीड़ तो काफी कम थी शायद शाम के पूजा पाठ की तयारी के कारण ऐसा रहा हो। इसके बावजूद इस कौमी मोर्चे का दायरा काफी बढ़ता जा रहा है। आसपास की सड़कों पर निहंग सिंघों की गाड़ियां और घोड़े देखे जा सकते थे। चाय और लंगर अटूट चल रहे थे। इसके साथ ही कई चीज़ों की बिक्री के स्टाल भी काफी लोकप्रिय होते जा रहे हैं। इन्हीं में से एक स्टाल था शस्त्रों का जहां अलग अलग तरह की बड़ी कृपाण, छोटी कृपाण, खंडा हुए चक्कर इत्यादि बिक रहे थे। 

एक स्टाल पर नज़र आया छोटी कृपाण का बदला हुआ नया रंगरूप। अब लगता है गले से कमर तक पहने जाने वाले गात्रे की कृपाणें अतीत की बात हो जाएंगी। समय के साथ साथ यह शस्त्र इंडस्ट्री भी नया रंग रूप अपना रही है।  इस स्टाल पर छोटी कृपाण का नया रंग रूप लोगों को बहुत आकर्षित कर रहा था क्यूंकि इसे देख कर इस तरह का धोखा होता जैसे पिस्तौल या रिवॉल्वर पहन रखा हो।

स्टाल पर खड़े विक्रेताओं ने इसकी कीमत 1500/-रुपए बतायी। साथ ही बताया कि यह काफी मज़बूत है। इसके कवर-केस पर बने हुए निशान बाकायदा गोलियां रखने वाले निशान हैं जिसमें नकली गोलियां डाली भी जा सकती हैं। इस तरह पिस्तौल या रिवाल्वर जैसी दिखने वाली यह छोटी कृपाण बहुत लोकप्रिय हो रही है। 

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Friday, January 20, 2023

मोहाली:YPS चौंक बन चुका है दिल्ली के सिंघू बॉर्डर जैसा दृश्य

19th January 2023 at 06:09 PM

कौमी इंसाफ मोर्चा में निरंतर बढ़ रहा है संगत का जमावड़ा


वाईपीएस चौक//मोहाली: 19 जनवरी 2023 की शाम: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::  

जिन लोगों ने दिल्ली की सीमाओं पर किसान मोर्चा के ऐतिहासिक जमावड़े को देखा, उनकी यादों में उनके दृश्य हमेशा के लिए अंकित हो गए थे। दिल्ली के टिकरी और सिंघू बॉर्डर के मंचों और सड़कों पर उस समय किसानों के लिए इन्साफ मांगने निकले लोगों ने शांतिपूर्ण मोर्चों का एक नया इतिहास रचा था जिसने पूरी दुनिया में कई नए रेकार्ड कायम किए। किसान आंदोलन का वह विशाल मोर्चा भविष्य में भी लोगों का मार्गदर्शन करता रहेगा। जो लोग दिल्ली के मोर्चों को देखना चूक गए थे वे अब वाईपीएस चौक मोहाली में उस समय की एक झलक ज़रूर देख सकते हैं, जहां  गुरु के अटूट लंगर चल रहे हैं, वाशिंग मशीनें भी जोरों पर काम कर रही हैं और पानी के नलों की कतारें भी लगातार चल रही हैं जैसे किसी धार्मिक स्थल का दृश्य हो। 

सड़क पर सजे हुए बहुत बड़े पंडाल में गुरबानी, कीर्तन और कथा का प्रवाह किसी धर्म स्थल की तरह ही सभी का ध्यान खींच रहा है। स्पीकर से आती हुई गुरुबाणी के पाठ की मधुर आवाज़ बार बस ही मन के ख्यालों को दिव्यता की तरफ आकर्षित करती है। अगर आप किसी से पूछें कि आप इतनी ठंड में इतने उत्साह में कैसे हैं तो इसका जवाब तो तुरंत बहुत ही मिठास भरे अंदाज़ में जवाब मिलता जैसा ही होता है। हम अपने उन बेटों, भाईओं और बज़ुर्गों के वे हमारे राजनीतिक बंदी हैं जिनका संघर्ष न तो व्यक्तिगत लाभ के लिए था और न ही किसी अन्य उद्देश्य के लिए। उन्होंने सभी संघर्ष केवल पंथ और पंजाब के लिए लड़े।  और पंथ और पंजाब के लिए ही सभी सुख छोड़ कर सभी जोखिम उठाए। उन्होंने आजीवन कारावास की तुलना में सलाखों के पीछे कहीं अधिक समय बिताया है। यह मोर्चा उन सभी की रिहाई के लिए है और जब तक आरपार का अब अंतिम फैसला नहीं हो जाता हम यहां डटे रहेंगे।


कौमी इन्साफ मोर्चे पर पहुंचे इन लोगों को जलेबी, लड्डू, बिस्कुट, रस्क समेत कई चीजें भी परोसी जा रही हैं।  इससे सभी की चढ़दी  इज़ाफ़ा हो रहा है। सड़क के दोनों किनारों पर मेले जैसा माहौल है। कहीं रास्ते में कोई अपना आधुनिक धनुषबाण दिखा रहा है जो दूर तक तीर मार सकता है। यह धनुष तेतीस हज़ार रुपये और तीर छह सौ रुपये में खरीदा गया है। इसी तरह छोटी और बड़ी कृपाण भी यहाँ आए तकरीबन बहुत से लोग पहनते हैं।

ट्रैक्टर-ट्रालियों की लम्बी लाईनों ने दिल्ली के सिंघू बॉर्डर जैसा माहौल बना दिया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए पंडालों में भी जगह बनाई गई है, टूरिस्ट कैंप जैसे छोटे-छोटे टेंट भी लगाए गए हैं और कुछ लोगों ने किराए पर आसपास के इलाकों में मकान लिए हैं। कुल मिलाकर लंबे संघर्ष की पूरी तैयारी है। हो सकता है सर्दी की कंपकंपाती ठिठुरन के बाद गर्मियों का मौसम भी यहां इसी माहौल में गुज़रे। 

जो लोग इस मोर्चे पर पहुंचे हैं वे सोच के मामले में भी काफी सुचेत हैं। किसी भी मुद्दे पर किसी से भी बात करें तो उसके जवाब से पता चलता है कि वह पूरी कहानी जानता है। लोग न केवल 84 जून से पहले का समय बल्कि 47 के बंटवारे से पहले का समय भी याद करते हैं। नई पीढ़ी के युवा लड़के-लड़कियों ने भी इस सरे इतिहास का पूरा अध्यन कर रखा है। उन्हें राजनीतिक नेताओं द्वारा किए गए झूठे वायदे भी याद हैं और अपने ही लोगों द्वारा किए गए विश्वासघात भी याद हैं।

यहां पहुंचे श्रद्धालु अब पूरी तरह से जागरूक हैं और सिख समुदाय के भविष्य की योजनाओं के बारे में बहस कर रहे हैं। वे खालिस्तान की मांग और अन्य मुद्दों को लेकर भी बहुत स्पष्ट हैं, लेकिन खालिस्तान के खुले समर्थन का स्वर कहीं सुनाई नहीं देता. हां, संत भिंडरां की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर जरूर लगे हैं, जिनमें दरबार साहिब पर हमला होने की स्थिति में खालिस्तान की नींव रखे जाने की बातें दर्ज हैं। शरीरक मौत की बजाए अंतरात्मा की मौत ही होती है असली मौत जैसी बातों वाले पोस्टर भी हैं। कुल मिलाकर माहौल दिल में हलचल सी महसूस करवाता है और मन में कई विचारोत्तेजक सवाल भी खड़े कर रहा है।

अब देखना होगा कि सिख बंदियों की रिहाई के लिए और कौन से दुसरे राजनीतिक दल इस मोर्चे में शामिल होने के लिए आगे आते हैं या फिर पंथ सुर पंजाब से दूरी बनाए रखते हैं। उल्लेखनीय है कि भाकपा माले लिबरेशन बहुत बार पहले ही सजा पूरी कर चुके बंदी सिंघों की रिहाई के लिए आवाज उठाती रही है. रविवार 22 जनवरी को पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य एक सेमिनार में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ आ रहे हैं। वह मोहाली के वाईपीएस चौंक के नज़दीक चल रहे कौमी इन्साफ मोर्चे में अपनी पार्टी की एकजुटता जताने के लिए वाईपीएस चौक जाएंगे या नहीं, इस संबंध में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। 


Monday, September 07, 2020

दिल्ली में बब्बर खालसा के दो सदस्य गिरफ्तार

छह पिस्तौल और 40 कारतूस बरामद हुए
नयी दिल्ली: 07 सितंबर 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
दिल्ली से बहुत बड़ी खबर आ रही है। एक बार फिर सिख मिलिटेंट संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल सुखियों में है। सोशल मीडिया पर इसी की चर्चा हो रहे है। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में हल्की गोलीबारी के बाद प्रतिबंधित मिलिटेंट समूह बब्बर खालसा इंटरनेशनल के दो संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। दिलचस्प बात है कि इन का संबंध  बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ बताया गया है।  यह वही संगठन है जिसने अतीत में बहुत बड़ी बड़ी वारदातों को अंजाम दिया है। इनका दिल्ली में होना बिना कारण नहीं होगा। 
पुलिस ने कहा कि संदिग्धों की पहचान लुधियाना निवासी भूपेन्दर उर्फ दिलावर सिंह और कुलवंत सिंह के रूप में हुई है। वे पंजाब में कुछ मामलों में भी वांछित थे। पुलिस सूत्रों ने मीडिया से कहा कि दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने दोनों को शनिवार रात पकड़ा था। पुलिस उपायुक्त (विशेष प्रकोष्ठ) ने कहा कि उनके पास से छह पिस्तौल और 40 कारतूस बरामद हुए हैं। देखना है और क्या क्या विवरण सामने आता है! 

Wednesday, June 08, 2016

एक होते तो जून-84 में दरबार साहिब पर हमला नहीं होता

ठाकुर दलीप सिंह ने तेज़ किया समाज को जोड़ने का अभियान
लुधियाना: 8 जून 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):

विरोधियों के आरोपों की बौछार से पूरी तरह बेअसर ठाकुर दलीप सिंह ने एक नए, स्वस्थ और एकजुट समाज के निर्माण का कार्य तेज़ कर दिया है। आंधी के खिलाफ चिराग जगाने की एक ज़ोरदार हिम्मत। खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने संगत के दीवान में आना नहीं छोड़ा। मंगलवार सात जून की रात को गिल रोड के एक इलाके में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट कहा कि  लोक सभा कौन होती है यह कहने वाली कि कौन सिख है और कौन नहीं? उन्होंने बहुत ही दुखद मन से कहा कि यदि हम सभी एकजुट होते तो न ही लोकसभा के इस प्रमाणपत्र की नौबत आती और न ही जून-1984 में ब्लू स्टार आपरेशन होता।   
वह यहाँ अपने एक अनुयाई के घर में दस्तार बंदी करवाने आये थे।  इस शुभ अवसर पर उन्होंने इस रस्म को अपने साथ साथ एक रामदासिया सिंह संत निर्मल सिंह के हाथों से भी पूरा करवाया। यह एक जंग का एलान था सिखों में अभी तक फैली जातिपाति की बुराई के खिलाफ। एक रेखा खींचने की हिम्मत कि अगर मेरे साथ आना है तो इस बुराई को छोड़ कर आना होगा। इसके साथ ही दलित और गरीब वर्ग को गले लगाने का एक आवाहन जिसे ठाकुर दलीप सिंह ने खुद अपने हाथों से सारी संगत के सामने पूरा करके दिखाया। 
फ़िज़ूल और दिखावे के खर्चों को बिलकुल बंद करके केवल ज़रूरी खर्चा करना, धार्मिक स्थानों पर सोना चढ़ाने की बजाए उस पैसे को समाज के किसी कमज़ोर वर्ग का भला करने के लिए इस्तेमाल करना कुछ ऐसे संकेत दे रहे थे जो आने वाले समय में बहुत जल्द कुछ अच्छे परिणाम दिखाएंगे।
लोक सभा और एस जी पी सी को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि जो भी गुरुनानक को मानता है वह गुरु का सिख है उसकी वेशभूषा चाहे कुछ भी हो।  उन्होंने दुनिया में मौजूद बहुत से वर्गों का उल्लेख किया जो गुरु नानक में आस्था रखते हैं।  जत्थेदार गुरदीप सिंह, जत्थेदार जोगिंद्र सिंह, ने  बहुत ही शानदार कीर्तन किया।  बीच बीच में उनको इशारों से मिलता दिशा निर्देश ठाकुर दलीप सिंह की संगीत पर पकड़ का पता दे रहा था।  इस जत्थे में मोहित सिंह नामदेव ने सुरीली बांसुरी बजाई। गंगा सिंह, भगवान सिंह और गगन सिंह सीहरा ने भी इस जत्थे में कीर्तन किया। प्रधान  हरभजन सिंह, सेवक देव सिंह, रणबीर सिंह, जसविंद्र सिंह, गुरमेल बराड़, सुश्री सतनाम कौर, हरप्रीत  कौर, गुरदीप जंडू,अरविंदर सिंह लाडी,जोगिंद्र सिंह मुक्तसर, 

Thursday, September 10, 2015

फिल्म जिन्दा सुक्खा: पहले मंजूरी अब पाबंदी

सेंसर बोर्ड या थाली का बैंगन?
चंडीगढ़: 9 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):  
जानीमानी कलाकारा सुनीता धीर 
फिल्म की घोषणा से ले कर उसके टाइटल रजिस्टर्ड होने, फिर शूटिंग होने और फिर अन्य कई पेचीदा किस्म की प्रक्रियायों से गुज़र कर उसके रलीज होने तक बहुत कुछ ऐसा होता है जो जग ज़ाहिर होता है। न  के लिए उसके पता लगाना मुश्किल होता है और न ही फिल्म निर्माण से जुडी संस्थाओं के लिए। इस सबके साथ एक एक ऐसा वर्ग होता है जो फिल्म निर्माण को संतान की तरह देखता है। यह वर्ग होता है कलाकारों का, लेखकों का, गीतकारों का, और दर्शकों का भी। कलाकार के लिए फिल उसके कैरियर और रोज़ी रोटी से जुडी होती है। जब तक फिल्म निर्माण चलता है उसका सारा ध्यान फिल्म पर केंद्रित होता है और जब फिल्म बन जाती है तो सारा ध्यान उसकी रिलीज़ पर केंद्रित हो जाता है। जब आखिरी दम तक मिली किसी मंजूरी को दरकिनार कर अचानक ही पाबंदी की घोषणा होती है तो सबसे अधिक निराशा होती है इस कलाकार वर्ग को। उसे ऐसा लगता है जैसे किसी ने भ्रूण हत्या कर दी हो। ऐसा महसूस होता है जैसे काटने को तैयार फसल को अचानक किसी ने आग के हवाले कर दिया हो। 
कुछ ऐसा ही हुआ है आगामी 11 सितंबर को रिलीज होने वाली पंजाबी फिल्म ‘मास्टर माइंड जिंदा सुक्खा’ कर मामले में। इस फिल्म पर रोक लगा दी गई है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पहले मंजूरी दे दी थी लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद इस पर पाबंदी लगा दी गई। मंत्रालय का कहना है कि इस फिल्म के रिलीज होने से पंजाब और आसपास के राज्यों मे हालात बिगड़ सकते हैं। फिल्म की टीम ने रोक लगने की पुष्टि की है। 
पाबंदी का एलान और इसकी वजह इतनी मासूमियत  से बयान की जाती है जैसे बेचारे सेंसर बोर्ड को कुछ पता ही न हो कि फिल्म किस मुद्दे पर थी, उसके हक़ और विरोध में कौन कौन थे, उसका क्या क्या असर हो सकता था। बहुत देर से सेंसर बोर्ड इस तरह की हरकतें कर रहा है कि फिल में एतराज़ की बात उसे बस सरकार के कहने पर ही पता चली हो। क्या फिल्म को पारित करते वक़्त इस बोर्ड ने कुछ नहीं देखा होता? 
फिल्म पर पाबंदी लगाने का कुछ संगठनों ने समर्थन किया है और कुछ ने विरोध। दल खालसा ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार को सिख विरोधी बताया है। उल्लेखनीय है कि यह फिल्म पूर्व सेना प्रमुख जनरल अरुण वैद्य के हत्यारों हरजिंदर सिंह जिंदा और सुखदेव सिंह सुक्खा के जीवन पर आधारित है। फिल्म बनाने वालों और फिल्म के समर्थकों ने इसे अपने नायकों पर बनी ऐतिहासिक फिल्म भी कहा है। अब देखना है कि फिल्म निर्माण से जुड़े कलाकारों और औनकी कला व कॅरियर के साथ खिलवाड़ कब तक जारी रहता है। 
फिल्म जिन्दा सुक्खा: पहले मंजूरी अब पाबंदी
सेंसर की भेंट:
1973 में फिल्म गर्म हवा का प्रदर्शन रोक गया 
1975 में  आंधी का प्रदर्शन रोक गया 
1977 में किस्सा कुर्सी का फिल्म पर पाबंदी सेंसर बोर्ड के कार्यालय से सारी रील उठवा कर जला दी 
1971 में सिक्किम फिल्म पर पाबंदी जिसे सितम्बर 2010 में हटा दी दिया गया।
1987 में फिल्म पति परमेश्वर की रेटिंग से इंकार किया गया 
1994 में फिल्म बैंडिट क्वीन पर पाबंदी 
1996 में फिल्म फायर पर पाबंदी 
2003 में फिल्म हवाएं पर पाबंदी जो नवंबर-१९८४ की घटनाओं से सबंधित थी। 
2005 में वर्ष 2004 की फिल्म ब्लैक फ्राईडे पर पाबंदी 
2005 में सिख व्विरोधी हिंसा पर पर बनी फिल्म अमु को कुछ आडियो कटस के बाद एडल्ट रेटिंग दी 
2005 में ही फिल्म वाटर हिन्दू संगठनों के ऐतराज़ पर रुकी और फिर मार्च 2007 में रिलीज़ हुई।
2014 में फिल्म कौम दे हीरे पर पाबंदी लगी  

Wednesday, August 12, 2015

सूरत सिंह खालसा की तरफ से सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम

अब देश विदेश  में कौम की सोई ज़मीरा जगा देंगे -सूरत सिंह खालसा
लुधियाना: 11 अगस्त 2015: (सरबजीत लुधियानवी//पंजाब स्क्रीन):
जेलों में बंदी सिंहों की रिहाई के लिए भूख हड़ताल पर चल रहे बापू सूरत सिंह खालसा ने आखिऱकार पंजाब और केंद्र सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया। बापू खालसा ने ऐलान किया कि अगर 15 अगस्त तक बंदी सिंहों को रिहा न किया गया तो वह अपने मन की बात करेंगे। जिस के साथ सूबे में ही नहीं देश विदेश अंदर कौम की सोई ज़मीरा जगा देंगे। इस से निकलने वाले नतीजो के लिए सरकार ख़ुद जि़ मेदार होगी। यह ऐलान आज बापू सूरत सिंह खालसा ने गाँव हसनपुर के गुरुद्वारा में कौम की चड़दी कला के लिए 9 अगस्त को श्री अखंड पाठ आरंभ करवाया गया था, के डाले भोग मौके किया।
आज फिर पुलिस ने पहला बापू खालसा को भोग समय गुरुद्वारा साहब में हाजिऱी भरने से रोक दिया। इस के बाद संघर्ष कमे के मैंबर ध्यान सिंह, जसपाल सिंह हेरा ने अपनी जि मेदारी और बापू गुरदुआरा साहब ले गए। बताने योग्य है कि 9 अगस्त को बापू खालसा को अखंड पाठ साहब के शुरू करन समय पर फिर मध्य समय पुलिस ने गुरुद्वारा साहब में जाने से रोक दिया था।
     गुरुदारा साहेब के दीवान हाल में बोलने वालों वक्तों पूर्व जत्थेदार बलवंत सिंह नन्दगड़, सत्कार समिति के नेता सुखदीप सिंह खोसें, जसपाल सिंह हेरा, ध्यान सिंह, दर्शन सिंह, लखवीर सिंह, अमरजीत सिंह काहन सिंह वाला और तरलोक सिंह आदि ने संगतें को संबोधन किया। इस मौके जोगा सिंह लुधियाना, बापू सूरत सिंह खालसा के सुपत्तर रविन्दरजीत सिंह गोगी, कुलदीप सिंह ईसेवाल और ओर पंथक जत्थेबंदियों ने हाजऱी भरी। 11 सदस्यता संघर्ष समिति की तरफ से केवल तीन मैंबर उपस्थित थे। 

Monday, December 01, 2014

चार साहिबजादे की प्रमोशन के साथ जुड़े कई और संगठन

पत्रकार सम्मेलन में आलोचना का निशाना बना कटटरवाद
लुधियाना:1 दिसंबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
धार्मिक कटटरवाद एक बार फिर समाज के निशाने पर है। बहुत से सिख बुद्धिजीवियों ने कटटरता की सख्त शब्दों में निदा  की और सिख सिद्धांत को समझने पर ज़ोर दिया। इसके साथ ही चार साहिबजादे फिल्म को घर घर तक पहुँचाने का अभियान भी तेज़ किया गया।
शायद पंजाबी फिल्मों के इतिहास में पहली बार हुआ की प्रशसंकों और बुद्धिजीवियों ने मिलकर खुद ही एक मीडिया सम्मेलन किया जिसमें फिल्म की प्रमोशन के साथ साथ कटटरवाद को भी आड़े हाथों लिया गया। इसमें मौजूद बुद्धिजीवी गुरभजन सिंह गिल, डाक्टर अनुराग सिंह, शिक्षण संस्थानों की ओर से जगतार सिंह, इंडस्ट्री की करते तरफ से डीएस चावला, मंच संचालक डाक्टर  रणजोध सिंह और डाक्टर सीबिया कटटरवाद के खिलाफ खुल कर सामने आये। जानेमाने लेखक गुरभजन गिल से जब इस चर्चा की शुरुआत हुई तो उन्होंने पंजाबी फिल्मों के अतीत की भी चर्चा की साथ ही धन्यवाद भी दिया की अब जबकि चार साहिबजादे नामक फिल्म ने एक नया इतिहास रचा है तो शुक्र है कि कोई पागल व्यक्ति कुल्हाड़ा लेकर इसके खिलाफ खड़ा नहीं हुआ।  हम इस बात के लिए आभारी हैं।

इसके साथ ही जानेमाने उद्योगपति डी एस चावला ने गुरु इतिहास की चर्चा करते हुए बहुत सी अर्थपूर्ण बातें की और कटटरता को नकारा।

रामगढ़िया एजूकेशन कोंसिल की तरफ से जगतार सिंह ने भी यही कि वास्तव में सिख धर्म में कटटरता के लिए कोई स्थान नहीं।
जानेमाने इतिहासकार डाक्टर अनुराग सिंह ने भी कटटरता को नकारते हुए कहा कि यूट्यूब पर तरह तरह की बेहूदा बातें  करने वालों को अगर सामने आकर बात करने के लिए कहें तो वे मैदान छोड़कर भाग जाते हैं।  
मंच संचालन कर रहे डाक्टर रणजोध सिंह ने सिख धर्म के सिद्धांत को घर घर तक पहुँचाने वाली इस शानदार फिल्म चार साहिबजादे का उल्लेख करते हुए कटटरता की निंदा की और सलाह भी दी कि भविष्य में इस फिल्म  को पैमाना बनाया जाना चाहिए अब जो भी धार्मिक फिल्म बने वह इससे कम दर्जे की नहीं होनी चाहिए। इस फिल्म को एक स्टैंडर  पर रखा जाना चाहिए।
इस ऐतिहासिक अवसर पर गुरुघर के क्लीन शेव्ड श्रद्धालु राजीव साहनी भी मौजूद थे जिन्होंने इस  प्रमोशन के लिए कैलेंडर, छल्ले, मैग्नेट, पज़ल, तीर कमान, खड्ग और ढाल के साथ साथ पेन ड्राईव जैसे  भी  तैयार किये।
बाईट: राजीव साहनी (गुरु घर के अनिनय भक्त उअर प्रमोशन प्रोडक्ट के कंट्रीब्यूटर)
उम्मीद करनी चाहिए कि इस फिल्म के बहाने मुद्द्त के बाद एकजुट हुआ सिख समुदाय कटटरवाद के खिलाफ नई हवा पैदा करने में कामयाब होगा। 

Sunday, November 02, 2014

नहीं दिखा बंद का कोई ज़्यादा असर,बाज़ारों में दिखाई दी चहल-पहल

कुछ जगहों पर करवाया गया जबरदस्ती बंद 
लुधियाना: 1 नवंबर 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
जब 31 अक्टूबर 1984 को कुछ सिख दिल्ली और पंजाब में स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी को श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे थे उस समय नवंबर-84 में हुए हत्याकांड को लेकर पंजाब बंद की तैयारी पूरी की जा रही थी। इस मकसद के लिए लुधियाना में नयी कचहरी जैसी सरकारी इमारतों पर भी पोस्टर लगाये गए जहाँ पोस्टर लगाना सख्त मना है। सुनह चार बजे से रेलों का चक्का जाम किया गया जिस से आम जनता को काफी तकलीफ हुई।  चौड़ा बाज़ार,  मार्किट, कंबल मार्किट, परताप बाज़ार, माता रानी चोंक और घंटा घर जैसे क्षेत्र  खुले रहे। दुकानें खोलने वालों में बहुत से सिख कारोबारी भी शामिल थे। लुधियाना के शहरी बाज़ारों में तो यह बंद बुरी तरह नाकाम रहा। कुछ सिख नेताओं और कार्यकर्ताओं को सुबह सुबह बस स्टैंड से ग्रिफ्तार भी किया गया। इनमें मुख्य गवाह बेबे जगदीश कौर, प्रमुख सिख नेता करनैल सिंह पीर मोहम्मद, कर्ज सिंह धर्म सिंह वाला और गुरमुख सिंह सहित करीब 150 अन्य वरके भी शामिल थे। 
गौरतलब कि कुछ सिक्ख संगठनों द्धारा पंजाब बंद की दी गई काल पर आज प्रातः करीब 5 बजे सिक्ख समुदाय के लोग स्थानीय गुरुद्वारा दुःख निवारण साहिब में एकत्र हो गए और अरदास के बाद गुरुद्वारा साहिब के नजदीक दिल्ली-अमृतसर रेल मार्ग पर रोष प्रदर्शन शुरू कर दिया। जिसके चलते गाड़ी संख्या 2460 (दिल्ली सुपर फास्ट ) तथा 15708 (अम्रपाली) के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पूरे पंजाब में बंद के फलस्वरूप रेल गाड़ियाँ अपने निर्धारित समय से कई- कई घंटे अपने गणतव्य पर देरी से पहुँची। 


सन 1984 के सिक्ख कत्लेआम पीड़ित वैलफेयर सोसायटी,सिक्ख स्टूडैंट फैडरेशन (मेहता) ऑल इण्डिया सिक्ख स्टूडैंट फैडरेशन(पीर मोहम्मद) के अनेकों कार्यकताओं ने शहर को बंद करवाने के लिए रोष मार्च निकाला और कई जगह पर दुकानो को बंद करवाया। कुछ समय के बाद बाजार में दुकाने फिर खुल गयी। कुछ ही देर बाद फिर सिक्ख नौजवानो ने दुकानदारों को  साथ देने का आग्रह कर दुकाने बंद करवा दी। उनके जाते ही कुछ ही देर बाद बाजार फिर सज गए। शहर के मुख्य बाज़ार चौड़ा बाजार,अकालगढ़ मार्किट,किताब बाज़ार,फीलडगंज,घुमारमंडी,मालरोड,मॉडल टाउन सहित अन्य बाज़ारों में चहल पहल रोज़ की तरह ही दिखाई पडी। किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए जिला पुलिस प्रशासन द्वारा पूर्ण मुस्तैदी दिखाई गयी तथा जगह -जगह पुलिस की टुकड़ियाँ तैनात रही। आल इण्डिया सिक्ख स्टूडैंट फैडरेशन (पीर मोहम्मद) के प्रधान करनैल सिंह,सिक्ख स्टूडैंट फैडरेशन (मेहता) के प्रधान परमजीत सिंह खालसा व सचिव मेजर सिंह खालसा, 1984 सिक्ख कत्लेआम पीड़ित वैलफेयर सोसायटी के प्रधान सुरजीत सिंह  तथा 1984 सिक्ख कत्लेआम पीड़ित वैलफेयर सोसायटी स्त्री विंग की प्रधान बीबी  गुरदीप कौर ने कहा कि 1984 के हुए सिक्ख कत्लेआम के  पीड़ित परिवार अनेकों समस्याओं से गुजर रहे हैं और इस कत्लेआम को करवाने वाले काँग्रेस के नेता सज्जन कुमार को सजा नहीं मिली। समय समय की सरकारें सिक्खों के ज़ख्मों पर मरहम लगाने का काम तो करती रही हैं परन्तु इस मरहम से पीड़ित परिवारों के ज़ख्म भरने वाले नहीं,जब तक इस कत्लेआम के दोषियों को सजा नहीं मिलती सिक्ख पीड़ितों को चैन नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि बेशक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1984 के सिक्ख दंगा पीड़ित परिवारों को 5- 5 लाख रूपये देने की घोषणा कर उनके ज़ख्मों पर मरहम लगाने का काम किया है जो सराहनीय है परन्तु इसके साथ साथ पंजाब में रह रहे 1984 के दंगा पीड़ितों को भी इसी प्रकार मुआवजा दिया जाए व इस कत्लेआम को हवा देने वालों को अविलंब दण्डित किया जाये। 

Tuesday, October 28, 2014

गुरूद्धारा विवाद: अवैध संबंधों को लेकर भड़का प्रधानगी का विवाद

अकाली नेता गुरदीप सिंह गोशा ने की समझाने की कोशिश
लुधियाना: 27 अक्टूबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):

बढ़ा करने लिए तस्वीर पर क्लिक करें 
सिख धर्म के संस्थापक साहिब श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व आने वाला है।  सभी गुरूद्धारा साहिबान में इस प्रकाश पर्व को मनाने के लिए ज़ोरशोर से तैयारियां चल रही हैं लेकिन लुधियाना के सलेम तबरी इलाके के एक गुरूद्धारा में एक नया विवाद पैदा हो गया है। इस विवाद को लेकर एक गुट के समर्थकों ने गुरूद्धारा साहिब के सामने धरना भी दिया। इस मौके पर पहुंचे युवा अकाली नेता गुरदीप सिंह गोशा ने संगत को समझाने का प्रयास भी किया। श्री गोशा ज़ोर दे रहे थे कि धरना सड़क से उठा कर गुरुद्धारा साहिब के अंदर बरामदे में ले जाया जाये तांकि वहां से आने जाने वाली आम जनता को कोई तकलीफ न हो पर धरना प्रदर्शन कर रहे लोग इस बात के लिए नहीं माने। अब देखना है कि मामला क्या रुख लेता है? गौरतलब है कि यह मामला इस धर्म स्थल के एक पदाधिकारी के किसी महिला के साथ अवैध संबंधों को लेकर भड़का और कमेटी के इस्तीफे की मांग तक जा पहुंचा। पुरानी कमेटी के पदाधिकारियों ने मौजूदा कमेटी के पदाधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाये। इनमें गुंडागर्दी से लेकर फ्राड  हैं। दूसरी तरफ आरोपी पदाधिकारी ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा है कि उस पर दबाव बना कर क्षमापत्र लिखवाया गया।  उसने दलील दी की वह पिछले चार वर्षों से यहाँ कार्य कर रहा है किसी को भी उनसे शिकायत नहीं हुई। अब कमेटी का एक गुट दुसरे गुट को  दिखाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बना रहा है।  उधर दुसरे गुट के नेता ने कई बार प्रयास करने के बाद फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।

Saturday, February 01, 2014

प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की फांसी की सजा स्टे

एसजीपीसी ने किया स्वागत                            Fri, Jan 31, 2014 at 9:25 PM
अमृतसर: 31 जनवरी 2014: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):
सुप्रीम कोर्ट की ओर से फांसी की सजा प्राप्त प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की फांसी की सजा को स्टे किए जाने और इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए जाने का एसजीपीसी प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ ने स्वागत किया है। अपने अमृतसर निवास पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से समूची सिख कौम और इंसाफ पसंद लोगों को प्रो. भुल्लर की जल्द रिहाई की उम्मीद जगी है। उन्होंने बताया, कि प्रो. भुल्लर के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और उसे इकबालिया बयान के आधार पर फांसी की सजा सुनाई गई है। उन्होंने कहा, कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से 15 फांसी प्राप्त कैदियो की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने के बाद आज प्रो. भुल्लर की फांसी पर स्टे जारी किया गया है, जो एक प्रशंसनीय कदम है। उन्होंने कहा, कि अब उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही प्रो. भुल्लर जेल से रिहा हो जाएंगे। क्योंकि वह पहले ही बीस वर्षो से जेल में बंद है और दूसरा उनकी मानसिक हालत भी ठीक नहीं है।

Friday, January 24, 2014

दल खालसा ने किया अमृतसर में रोष प्रदर्शन

Fri, Jan 24, 2014 at 7:55 PM
सिक्खों के साथ हमेशां भेदभाव का आरोप दोहराया 
अमृतसर: 24 जनवरी 2014: (गजिंदर  सिंह किंग/पंजाब स्क्रीन):
दल खालसा की ओर से आज अमृतसर में रोष प्रदर्शन किया गया और इस दौरान 26 जनवरी 1950 में जारी भारतीय संविधान में सिखों की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया गया। इस मौके पर दल खालसा की ओर से एक रोष मार्च भी निकाला गया और भंडारी पुल पर रोष प्रदर्शन भी किया गया। 
   दल खालसा की ओर से आज अमृतसर में भारतीय संविधान में सिखों की उपेक्षा किए जाने के आरोप लगाते हुए रोष मार्च और प्रदर्शन किया गया। इस दौरान दल खालसा के कार्यकर्ताओं ने संविधान में सिखों के अस्तित्व को स्वीकार न किए जाने, पंजाब के पानी की लूट करना, सिख पर्सनल ला न बनाए जाना और सिखों को स्व-निर्णय की छूट न दिए जाने का विरोध किया। दल खालसा के प्रवक्ता कंवरपाल सिंह ने कहा कि जब तक सिखों की यह चारों मांगे पूरी नहीं की जाती, तब तक देश के सिख 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे आजादी के कार्यकर्मों में हिस्सा नहीं ले सकते। उधर, इस मौके पर दमदमी टकसाल के मुखी भाई हरनाम सिंह खालसा भी पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि 1947 से पहले देश की आजादी के लिए और आजादी के बाद देश की सीमा की सुरक्षा के लिए सिखों ने काफी बलिदान दिया है। लेकिन सिखों के साथ हमेशा ही भेदभाव किया गया। उन्होंने कहा कि नवंबर 1984 में सिखों का सरेआम कत्लेआम किया गया। इतना ही नहीं, इसके बाद भी कई तरह से सिखों को प्रताड़ित किया गया। उन्होंने बताया कि सिख कौम को अलग धर्म के रूप में पहचान देने के लिए धारा 25 के तहत कई बार मांग की गई। लेकिन जैन और बौद्ध धर्म को तो अलग धर्म के रूप में मान्यता दे दी गई। परंतु सिखों की मांग को आज तक दरकिनार किया जा रहा है। 

Thursday, January 16, 2014

लव जेहाद नामक वेबसाइट के विरोध में रोष की लहर

Thu, Jan 16, 2014 at 10:24 AM
जत्थेदार अकाल तख्त साहिब को सौंपा हिंदू जनजागृति मंच ने ज्ञापन
अमृतसर: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):
आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तोएबा की ओर से चलाई जा रही वेबसाइट लव जेहाद डाट काम के खिलाफ हिंदू जनजागृति मंच और ह्यूमन राइट्स आफ ग्लोबल माइनारिटीज का एक शिष्टमंडल आज श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह से मिला और इस वेबसाइट के माध्यम से हिंदुओं और सिखों की लड़कियों से शादी कर उन्हें मुसलमान बनाने जैसे मुद्दे पर आगे आकर इसे रोकने की अपील की। ज्ञापन को हासिल करने के बाद जत्थेदार अकाल तख्त ने कहा है, कि वह इस मामले के संबंध में एसजीपीसी प्रधान से बात कर उचित कदम जरूर उठाएंगे श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने बताया, कि आज उन्हें यह ज्ञापन हासिल हुआ है और वह इस पर एसजीपीसी प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ से संपर्क कर उचित कदम जरूर उठाएंगे
    आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोएबा की ओर से चलाई जा रही वेबसाइट लवजेहाद डाट काम पर मुसलमान लड़कों को हिंदुओं और सिखों की लड़कियों के साथ शादी कर उन्हें मुसलमान बनाए जाने का आह्वान किए जाने के मुद्दे को लेकर आज हिंदु जनजागृति मंच और ह्यूमन राइट्स ग्लोबल माइनारिटीज के सदस्य श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह से मिलने पहुंचे और उन्हें ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने बताया, कि आज उन्हें यह ज्ञापन हासिल हुआ है और वह इस पर एसजीपीसी प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ से संपर्क कर उचित कदम जरूर उठाएंगे, उधर हिंदू जनजागृति मंच के नेता सुरेश मुंजाल और ह्यूमन राइट्स के इंद्रजीत सिंह ने बताया, कि लव जेहाद के माध्यम से कई हिंदुओं और सिखों की लड़कियों को मुसलमान बनाया जा चुका है और यह प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया, कि इस प्रक्रिया को रोकने के लिए वे हर धर्म के उच्च पदस्थ गुरुओं और जत्थेदारों से मिल कर उन्हें इस कार्य के खिलाफ लामबंद होने और लोगों को जागरूक करने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने बताया, कि इंग्लैंड में भी ऐसी ही घटनाओं पर वहां की पुलिस ने उचित कदम उठाते हुए हिंदुओं और सिखों को अपनी बेटियों को इस तरह की धोखाधड़ी से सचेत रहने के लिए कहा है।  

Wednesday, January 15, 2014

आपरेशन ब्लू स्टार और ब्रिटिश सरकार

Update:15 Jan 2014 at 6:15 AM 
भारत सरकार की मदद करने के दस्तावेज हुए जग जाहिर
अमृतसर: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):
जून 1984 में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब पर किए गए आपरेशन ब्लू स्टार के दौरान इंग्लैंड की तत्कालीन सरकार की ओर से भारत सरकार की मदद किए जाने संबंधी दस्तावेज के जगजाहिर होने के बाद यह मामला फिर से तूल पकड़ गया है। आज दल खालसा की ओर से इंग्लैंड के मौजूदा प्रधानमंत्री डेविड कैमरून को पत्र लिख कर मांग की गई है कि वह इस मामले में इंग्लैंड की स्थिति को स्पष्ट करें और यह भी बताएं कि इंग्लैंड की तत्कालीन सरकार ने किस हद तक भारत सरकार की मदद की थी। इस संबंध में दल खालसा के प्रवक्ता  कंवरपाल सिंह ने बताया कि उक्त दस्तावेज दल खालसा को इंग्लैंड की लाइब्रेरी में से हासिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज के मिलने के बाद पूरी सिख कौम एक दम से स्तब्ध रह गई है। क्योंकि अब तक यही समझा जा रहा था कि उस समय सिर्फ रूस की तत्कालीन सरकार ने ही भारत की मदद की थी।
पंजाबी दैनिक अजीत में प्रकाशित पूरा पृष्ठ 

Thursday, January 02, 2014

मैं पुलिस के पास भागी...वहां दरोगा बोला – अभी तो और मरेंगे.....

अगले दिन फिर पुलिस चौकी गई.. वहां पर तो प्लानिंग बन रही थी...
Pau Young Writers shared Arvind Kejriwal's photo
यह तस्वीर प्रकाशित होना और फिर इसे शेयर किया जाना साफ़ बताता है कि पंजाब के नौजवान कलमकार केवल इश्क़ पर नहीं ज़िंदगी के हालात पर भी पैनी नज़र रखते हैं।  अरविन्द केजरीवाल के प्रोफ़ाइल पर प्रकाशित इस तस्वीर और विवरण ने यह भी साफ़ किया है कि इन्साफ की दुहाई देने वाले हमारे समाज में 1984 की घटनाएं अभी भी ज्यों की त्यों पड़ी हैं। दिल्ली के चुनावी नतीजों ने हवा का रुख साफ़ किया है---समस्यायों को उजागर किया है और बताया है कि बड़ी पार्टियों से निराश हुए लोग अब हर जगह केजरीवाल की राह देख रहे हैं। यह संतोष की बात है कि लोग अब भी आशा कर रहे हैं।  करीब तीन दशकों की निराशा भी उन्हें बदल  नहीं पाई। उनमें अभी  भी संवैंधानिक ढंग से लड़ने और इन्साफ पाने का विश्वास बाकी है--अब देखना है कि अरविन्द केजरीवाल इसे बनाये रख पाते हैं या नहीं?  करेगा --लोग करेगा फ़िलहाल आप पढ़िए उन  कि दास्तान का एक छोटा सा अंश।-रेकटर कथूरिया
ARVIND KEJRIWAL and MATA JAGDISH KAUR ji...with manish sisodia AND GURPREET SINGH KAHLON...
UMMEED HAI ATE HONI BHI CHAAHIDI HAI KEJRIWAL TO... Pau Young Writers
Jagdish Kaur is one of the victims and eye witness to 1984 massacre. She came to my house a few days back. Listening to her story was heart rending. Manish Sisodia recounts our meeting with her -

” 72 वर्षीय जगदीश कौर जब यह बात कह रही थीं तो मुझे(मनीष सिसोदिया) लगा कि शायद अब रो देंगी... लेकिन नहीं, 1984 के दंगों के बाद से इन्साफ के लिए लड़ते लड़ते उनकी आँखों के आंसू शायद अब सूख चुके हैं ...आगे की आपबीती जगदीश कौर जी ने कुछ यूँ सुनाई -----“ये नाग हैं, पूरे देश को बेच देंगे, किसी को नहीं छोड़ेंगे.... मैं मरने से नहीं डरती... दुनिया की किसी अदालत में जाना पड़े लेकिन छोडूंगी नहीं..... मेरे पति और जवान बेटे को मेरे सामने मारा था इन्होंने... “मेरे तो पिता स्वतंत्रता सेनानी... थे, हम तो कांग्रेसी थे, पक्के वाले... जब ये मेरे हसबैंड को मारने लगे तो मैंने कहा था इनको कि इंदिरा गांधी तो हमारी भी नेता थीं, हमें भी बहुत दुःख हो रहा है... लेकिन वो नहीं माने.. मेरे पति को वहीं मार दिया, बड़ा बेटा भागा तो उसको भी मेरे सामने ही आग लगा दी.... मुझे उसे बचाने भी नहीं दिया... मेरी आँखों के सामने..,”

“ छोटे बच्चों को पड़ोस के पंडित जी के घर छिपाकर मैं पुलिस के पास भागी... वहां दरोगा बोला – अभी तो और मरेंगे.. मैं वापस आई तो ये लोग पंडित को भी मारने पहुँच गए, क्योंकि उसने हमें शरण दी थी..... हम वहां से भाकर वापस अपने घर आ गए.... बच्चों को मैंने छत पर छिपा दिया.. पूरी रात मैं कभी बेटे की बाड़ी के पास बैठती तो कभी हसबैंड की बाड़ी के पास बैठ जाती... अगले दिन मैं फिर पुलिस चौकी गई.. वहां पर तो प्लानिंग बन रही थी... दरोगा, दंगाइयों को कह रहा था कि तुम पहले पहुँचो, हंगामा करो, मैं पीछे से आता हूँ... मैं वहां से भागी... एक पुलिस की गाडी खड़ी थी.. मैं वहां पहुंची...मैंने कहा अब तो बचा लो, अब तो बहुत मर गए... तभी भीड़ वहां आ गई... पीछे से सज्जन कुमार आया, उसने पुलिस की जीप में लगा माइक लेकर आवाज़ लगानी चालू कर दी.. एक भी सिख नहीं बचना चाहिए...फिर वो पुलिस के साथ ही बैठकर चला गया... मैं दौड़कर वापस घर पहुंची...
... घर में दो बच्चे छिपे थे, दो लाशें पड़ी थीं... मैं रोती रही...घर के बाहर मेरे भाई को, उनके बेटों को भी जला दिया था...वहां पहुंची तो पुलिस वाला, उनसे (दंगाइयों से) पूछ रहा था.. कितने मुर्ग भूने आज? .. दो दिन तक .....यहाँ से वहां, भागती रही.. लेकिन कोई ये कहने वाला नहीं मिला कि तेरे बच्चों को हम बचा लेंगे... रात भर गोलियां चलती थीं.... तीसरे दिन पडोसी त्यागी जी आये, डरते डरते ... उनके साथ मिलकर मैंन घर के सोफे को तोड़ा, ... जो थोड़ा बहुत और फर्नीचर था उसको तोड़ा और अपने पति और बेटे के लिए चिता बनाई... दो दिन से पड़ी लाशों का अंतिम संस्कार मैंने अपने घर में ही कर दिया...”

“.......मैं कह रही हूँ कि मैंने देखा और कोर्ट कह रहा है कि सबूत नहीं है...छोडूंगी नहीं मैं इन्हें, चाहे दुनिया कि जिस अदालत में जाना पडेगा...”

मैं और अरविंद, स्तब्ध , सुन रहे थे.... अंत में बस इतना ही कह सके...” आपका जीतना ज़रूरी है, इंसानियत के लिए.. “... इनके हौसले के सामने हर थकावट, हर पराजय छोटी है.. सलाम. 

Saturday, December 28, 2013

भाई गुरबख्श सिंह ने खत्म की आपनी भूख हड़ताल

चार सिंहो की रिहाई के बाद श्री अकाल तख्त साहिब में तोड़ा अनशन 
जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ने जूस पिला कर खत्म  की हड़ताल 
अमृतसर: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): 
श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास करने के बाद जयकारो की गूज में भाई गुरबख्श सिंह नेगुरुद्वारा अंब साहिब में रखी आपने 45 दिनों से चलती भूख हड़ताल समाप्त कर दी है, बुढेल जेल में बंद भाई शमशेर सिंह एवं लखविंदर सिंह की रिहाई की परोल रिहाई की खबर मिलते ही माता गंगा निवास से श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के साथ भाई गुरबख्श सिंह श्री अकाल तख्त साहिब जा कर अरदास करने के बाद जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने आपने कमलो हाथो से जूस पिला कर भूख हड़ताल समाप्त करवाई 
     45 दिनों से सिंहो की रिहाई के लिए भूख हड़ताल पर बैठे भाई गुरबख्श सिंह ने दो सिंहो की रिहाई की परोल रिहाई की खबर सुन कर माता गंगा निवास से श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के साथ भाई गुरबख्श सिंह श्री अकाल तख्त साहिब जा कर अरदास करने के बाद जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने आपने कमलो हाथो से जूस पिला कर भूख हड़ताल समाप्तकरवाई , भाई गुरबख्श सिंह ने आपनी हड़ताल समाप्त करने के बाद प्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने सभी खालसा पंथ, सभी सिख जत्थेबंदियों और मानव अधिकार के लिए लड़ रही जत्थेबंदियों का धन्यवाद करते हुए कहा, कि वह अलग - अलग जेलों में बंद सिंहो की रिहाई के लिए लोकतंत्र ढ़ंग के साथ आपनी लड़ाई शुरू रखे गे, उन्होंने कहा, कि जिस मकसद को लेकर अरदास उन्होंने की थी वह पूरी हो गई है, 45वे दिन वह आपनी भूख हड़ताल खत्म कर रहे है, उन्होंने कहा, कि भाई लाल सिंह, भाई, गुरमीत सिंह की रिहाई परोल से पहले हो गई थी, लेकिन रहते दो सिंहो की रिहाई में रुकावट के कारण उन्होंने आपनी भूख हड़ताल उनकी रिहाई तक रखने की बात कही थी, उन्होंने ऐलान किया, कि वह बाकी का जीवन पंथ को समर्पित रखेगे, उन्होंने सभी खालसा पंथ, सभी सिख जत्थेबंदियों और मानव अधिकार के लिए लड़ रही जत्थेबंदियों को अपील की, कि वह श्री अकाल तख्त साहिब को तन मन के साथ समर्पित हो कर पंथ की समस्यो को हल करने के लिए कौम को एक सुर में मिल कर साथ देना चाहिए, उन्होंने कहा, कि वह गुरुद्वारा अंब साहिब जा कर सभी बंदियो की रिहाई की अरदास कर आपने गांव हरियाणा जा कर एक बड़ा समागम कर सभी सिख जत्थेबंदीयो के साथ विचार-विमर्श कर आगे की नीति तैयार करे गे, उन्होंने कहा, कि वह हथियार की लड़ाई लड़ाने वालो के हक़ में नहीं है और नही रहे गे, कलम और कानून की लड़ाई लड़ने वालो के साथ हमेशा उसके साथ लड़ कर उसका समर्थन करे गे, उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ कर बाकी सिंहो को रिहा करने की बात कही  
    श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने शरोमणी अकाली दल, शरोमणी कमेठी और पंजाब सरकार द्वारा दिए गए सयोग के लिए धन्यवाद किया  
भाई गुरबख्श सिंह ने खत्म की आपनी भूख हड़ताल 

Friday, December 27, 2013

सभी बंदी सिंह रिहा होने तक भूख हड़ताल जारी रहेगी-भाई गुरबख्श सिंह

श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद की प्रेस के साथ बातचीत 
अमृतसर: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): 
पंजाब की जेलो में बंद सिंहों की रिहाई के लिए भूख हड़ताल में बैठे भाई गुरबख्श सिंह ने कहा है, जब तक छह सिखों की रिहाई नहीं हो जाती तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। आज सुबह आपनी तरफ से सच्चखंड श्री हरमंदिर साहिब के परिक्रमा में रखवाए गए श्री अखंड पाठ के भोग के बाद उन्होंने प्रेस के साथ बातचीत के दौरान बताया 
     पंजाब की जेलो में बंद सिंहों की रिहाई के लिए भूख हड़ताल में बैठे भाई गुरबख्श सिंह ने कहा है, जब तक छह सिखों की रिहाई नहीं हो जाती तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। आज सुबह आपनी तरफ से सच्चखंड श्री हरमंदिर साहिब के परिक्रमा में रखवाए गए श्री अखड़ पाठ के भोग के बाद उन्होंने प्रेस के साथ बातचीत के दौरान बताया, उन्होंने बताया, कि वह श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के आदेश को मानते हुए डाक्टरी सहायता लेनी शुरू कर दी है, श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह द्वारा भूख  हड़ताल खत्म करने का कोई भी आदेश जारी नही किया गया है, लेकिन जब तक छह सिखों की रिहाई नहीं हो जाती तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। 


Tuesday, December 24, 2013

भाई गुरबख्श सिंह को भूख हड़ताल समाप्त करने का आदेश

Tue, Dec 24, 2013 at 5:34 PM
आदेश जारी किया पांच सिंह साहिबानों ने
भाई गुरबख्श सिंह का जीवन पंथ की अमानत-जत्थेदार अकाल तख्त
अमृतसर: 24 दिसंबर 2013  (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): 
भाई गुरबख्श सिंह का संघर्ष के सार्थक नतीजे आने शुरू हो गए हैं। भाई लाल सिंह की रिहाई के बाद अन्य बंदी सिंहों की रिहाई के लिए भी प्रयास शुरू हो चुके हैं। इसलिए पांच सिंह साहिबानों ने फैसला लेकर भाई गुरबख्श सिंह को आदेश दिया है, कि वह तुरंत अपनी भूख हड़ताल समाप्त करें और अन्य सिंहों की रिहाई के लिए प्रयास करें
     भाई गुरबख्श सिंह की ओर से विभिन्न जेलों में बंद सिखों की रिहाई के लिए छेड़ी गई मुहिम के सार्थक नतीजे निकलने शुरू हो गए हैं। भाई लाल सिंह की रिहाई के बाद अन्य सिंहों की रिहाई के लिए भी प्रयास शुरू हो गए हैं। इस मसले पर आज पांच सिंह साहिबानों की एक अहम बैठक संपन्न हुई। पांच सिंह साहिबानों की बैठक के बाद जत्थेदार अकाल तख्त ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा, कि भाई गुरबख्श सिंह की ओर से छेड़ी गई मुहिम काफी अहम है और वह शुरू से इसकी हिमायत करते आए हैं। उन्होंने कहा, कि भाई गुरबख्श सिंह का जीवन पंथ की अमानत है। इतना ही नहीं, भाई गुरबख्श सिंह की मुहिम के कारण ही  भाई लाल सिंह की रिहाई संभव हुई है और अन्य की रिहाई के लिए प्रयास जारी हैं। इसलिए पांच सिंह साहिबानों ने भाई गुरबख्श सिंह को आदेश दिया है, कि वह तुरंत अपनी भूख हड़ताल को समाप्त करें और पंथ की चढ़दी कला के लिए अपना अमूल्य योगदान दें।

Sunday, October 20, 2013

मामला राजस्थान में खुद को गुरु बताने वाले का

Sat, Oct 19, 2013 at 7:09 PM
गुरु बताने वाले के खिलाफ होगा पांच सिंह साहिबान की बैठक में फैसला
जत्थेदार के खिलाफ कोर्ट में केस दायर करने के मामले में यदि किसी का भी नाम आया  तो होगी कारवाई 
अमृतसर:19 अक्टूबर 2013: (गजिंदर सिंह किंग// पंजाब स्क्रीन):राजस्थान में खुद को गुरु बताने वाले लक्खा सिंह के मामले में आज श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कमेटी की ओर से अपनी रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को पेश की गई। उक्त रिपोर्ट हासिल करने के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने बताया कि लक्खा सिंह के खिलाफ चाहे पुलिस की ओर से केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ धार्मिक सजा सुनाने के लिए पांच सिंह साहिबानों की बैठक में फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया, कि इसके लिए एसजीपीसी के प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ को भी आदेश दिया गया है।
    इस मौके पर जत्थेदार अकाल तख्त ने कहा, कि दिल्ली की अदालत में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के खिलाफ जतिंदर सिंह सियाली की ओर से जो केस दर्ज किया गया है, उस मामले में भी आगे की कार्रवाई की जानी है और इस मुद्दे पर पांच सिंह साहिबानों की बैठक में फैसला लिया जाएगा। इस मामले में दिल्ली कमेटी के पूर्व प्रधान परमजीत सिंह सरना का नाम आने के बारे में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने कहा, कि अभी फिलहाल ऐसी चर्चाएं छिड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, कि यदि परमजीत सिंह सरना की इस मामले में शमूलियत साबित हो जाती है, तो उनके खिलाफ भी पांच सिंह साहिबानों की बैठक में फैसला लिया जाएगा।

Wednesday, September 18, 2013

पांच सिंह साहिबानों की बैठक:कई महत्वपूर्ण फैसले

*डेरा सिरसा सौदा के समागम में जाने पर एसजीपीसी सदस्य और पावन स्वरूप अमेरिका ले जाने वाले एनआरआई को श्री अकाल तख्त साहिब ने लगाई तन्ख्वाह*ज्ञानी त्रिलोचन सिंह के अकाल चलाने पर किया शोक प्रस्ताव पारित, परिवार को किया जाएगा सम्मानित
*पुलिस कस्टडी में बाबा राम सिंह अब्दाल के केश कत्ल मामले की जांच धर्म प्रचार कमेटी को सौंपी
*श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों को लिखने पर लगाई पूर्ण रूप से पाबंदी
अमृतसर (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यालय में आज पांच सिंह साहिबानों की बैठक हुई। इस बैठक में पांच सिंह साहिबानों ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इस दौरान डेरा सच्चा सौदा के समागम में हिस्सा लेने पहुंचे एसजीपीसी के सदस्य भाई नवतेज सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से  भविष्य में सुचेत रहने के लिए तन्खावह लगाई गई। जिसके तहत उन्हें  18 दिनों तक श्री दरबार साहिब मुक्तसर साहिब में नितनेम के अलावा एक पाठ जपुजि साहिब और एक घंटा सेवा करने के अलावा बाणी सुनने के बाद  21 सौ रुपये गोलक में दान हेतू देने होंगे। इसके अलावा श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों को गलत तरीके से अमेरिका ले जाने की कोशिश करने वाले एनआरआई भाई चरणजीत सिंह को भी अकाल तख्त साहिब की ओर से तन्ख्वाह लगाई गई है।  लगाई गई तन्ख्वाह के तहत भाई चरणजीत सिंह एनआरआई एक सप्ताह तक श्री हरमंदिर साहिब में एक घंटा जूते और बर्तन साफ करने की सेवा के अलावा नितनेम करना होगा। इसके साथ ही रोजाना पांच पाठ जपुजी साहिब करने के बाद 51 सौ रुपये की अरदास कराएंगे। इसके बाद वह अमेरिका में जहां सेवा कर रहे हैं वहां सहज पाठ कराएंगे।
       इस दौरान तख्त श्री केसगढ़ साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी त्रिलोचन सिंह के अकाल चलाने पर शोक प्रस्ताव पेश किया गया। इसके अलावा फैसला लिया गया कि ज्ञानी त्रिलोचन सिंह के परिवार को श्री अकाल तख्त साहिब पर सम्मानित किया जाएगा। इस मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने कहा, कि किसी भी मजार या कब्र पर गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश नहीं होगा। इतना ही नहीं, ऐसे स्थानों पर श्री अखंड पाठ  के साहिब के पाठ भी नहीं कराए जा सकेंगे। उन्होंने कहा, कि एक बीबी ने उनसे श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हस्तलिखित रचना करने की मांग की थी, जिसे पूरी तरह से नकार दिया गया है। इसके साथ ही जो लोग हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब की रचना कर रहे हैं, उन्हें भी आदेश दिया है, कि इसके संपूर्ण होने पर तुरंत श्री अकाल तख्त साहिब पर पावन स्वरूप को जमा करा दिया जाए। बाबा राम सिंह अब्दाल के पुलिस कस्टडी में केश कत्ल किए जाने के मामले के बारे में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने कहा, कि उक्त मामले की जांच करने के लिए धर्म प्रचार कमेटी को आदेश दिया गया है। इसके अलावा विदेशों में दस्तार की हो रही बेअदबी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने समूह सिख संगत को आपसी मतभेदों और घरेलू झगड़ों को छोड़ कर सिख कौम की चढ़ती कला के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है।