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Sunday, May 17, 2020

पलायन: यह पंजाब सरकार के लिए एक सुनहरा मौका है

 मज़दूरों को यह कहने का-कि "हम हैं न आपके साथ" 
कर्मभूमि छोड़ कर जा रहे मज़दूरों की तस्वीरें पंजाब स्क्रीन के लिए एम एस भाटिया ने क्लिक कीं 
लुधियाना: 17 मई 2020: (अमृत पाल सिंह 'गोगिया'//पंजाब स्क्रीन)::
अमृतपाल गोगिया 
करोना जैसी आपदा की इस संकट की घड़ी में जहाँ सारा देश त्राहि-त्राहि कर रहा है वहीं पंजाब सरकार ने अपना पूरा जोर लगा रखा है। इस दृढ़ निश्चय के साथ की हमारे बिहार और उत्तर प्रदेश की कामगर अपने-अपने घरों को सुरक्षित पहुँच जाएं। बहुत अच्छी तायदाद में लोगों को तयशुदा स्थान से बसों द्वारा सुरक्षित तरीके से उठाकर उनको रेलवे स्टेशन पर छोड़ा जा रहा है। यह एक मानवीय कदम है। जिससे उनके अन्दर आयी हुई असुरक्षा की भावना और जो अपनों से मिलने की अधीरता जो उत्पन्न हुई है। उसको थोड़ी रहत मिलेगी। 
उनकी भावनाओं की कदर करना हमारी मानवीय और सामाजिक जिम्मेवारी भी है। 
और अबतक हम जो भी कर रहे हैं वह एक सराहनीय कदम है। बहुत अच्छे प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन इसमें काफी तेजी लाने की जरूरत है। और भी अच्छे प्रयास किये जा सकते हैं। हमारे पास साधनों की कमी नहीं है मगर हम उसका उपयोग नहीं कर रहे। सिवाय पुलिस कर्मियों, सुरक्षा कर्मचारियों, स्वास्थ कर्मियों, डॉक्टर और उनके सहयोगियों के अलावा सारे के सारे अपने अपने घरों में बैठे मुफ्त की रोटियां तोड़ रहे हैं। यह एक आपातकालीन स्थिति है और अगर हम उनका इस्तेमाल अभी नहीं करेंगे तो कब करेंगे। हमें अपनी इच्छाशक्ति को जगाना है। बस! समझो काम हो गया। 
जहाँ बहुत अच्छी तायदाद में लोगों को तयशुदा जगह से बसों द्वारा सुरक्षित तरीके से उठाकर उनको रेलवे स्टेशन पर छोड़ा जा रहा है, वहीं हमारे कुछ कामगर/मजदूर पैदल ही या साइकिल द्वारा अपने गंतव्य की ओर निकल पड़े हैं जो उनकी अशंतुष्टि को दर्शाता है। यह अमानवीय है। हमें इसके लिए संवेदनशील होने की जरुरत है। हमें एक समय पानी नहीं मिलता तो हम तड़प जाते हैं और ये मज़दूर बेचारी कड़कती धूप में, कुछ तो नंगे पाँव अपने परिवारों, नन्हे नन्हे बच्चों के साथ, कुछ तो गर्भवती औरतें भी साथ चल रही हैं। कोई व्यवस्था नहीं है। यह घोर मानवीय अपराध है हमें इसको समझना होगा। इसके दूरगामी दुष्परिणाम होंगे। इसके लिए यह समाज हमें कभी माफ़ नहीं करेगा और इतिहास इसका गवाह बनकर काफी लम्बे समय तक हमारे साथ-साथ चलेगा। 
यह हमारी जिम्मेवारी है और मानवीय भी है कि हम उनको ऐसा करने से रोकने के लिए तुरंत कुछ कारगर कदम उठाएं जो प्रशंसनीय हों। यह पंजाब सरकार के लिए एक सुनहरा मौका है अपने आपको एक नयी ऊँचाई पर स्थापित करने का-कि "हम हैं न आपके साथ"
आज वह बिहार और उत्तर प्रदेश के कामगारों/मजदूरों का दिल जीत ले। पंजाब सरकार अगर ऐसा कर पाई तो निश्चित ही वह इन्हीं कामगारों/मजदूरों के माध्यम से यह साबित कर पायेगी कि वह एक सोच है जो मानवीय अधिकार के लिए लड़ती है और गरीब से गरीब व्यक्ति की भी चिंता करती है। अगर पंजाब ने ऐसा कर दिखाया तो निश्चय ही यह हमारी पंजाबियत की जीत होगी, हमारे पंजाब की जीत होगी। हमारी सरकार की जीत होगी और यह उन्हीं कामगारों/मजदूरों के माधयम से सारे देश में यह चर्चित होगा तो यह बात भी भी तय है कि मीडिया भी चुप बैठने वाली नहीं है और
मीडिया भी मज़बूर हो जायेगा यह बताने के लिए कि पंजाब सरकार और इसकी टीम ने कितनी मेहनत और लगन के साथ इस मुश्किल की घड़ी में देश का साथ दिया है। पंजाब की लोकप्रियता अचानक एक नई ऊंचाई को छूएगी जो कि अन्थया असंभव है। जिससे हमारी नयी आर्थिक व्यवस्था का उदय होगा और यह एक नया मार्ग प्रशस्त करेगा जो यह तय करेगा कि भारत की ओर रुख करने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां किस राज्य की ओर रुख करेंगी। यह तो एक सुनहरी मौका है और इसका पूरा-पूरा फ़ायदा उठाना चाहिए। इसका फर्क यह पड़ेगा कि दूसरे देशों के निवेशकों को पंजाब में सहज आमंत्रित किया जा सकेगा।  
हम खुशकिस्मत हैं कि हमारे प्रदेश में धार्मिक स्थलों की कमी नहीं है। जैसे गुरूद्वारे, राधा स्वामी सत्संग डेरे और भी काफी हैं। जहाँ हम कामगार को रास्ते में ही, जहाँ तक वो पहुंचे हैं। उनको वहीं से सुरक्षा कर्मचारियों और बसों की मदद से उनको नज़दीकी सेंटर में पहुंचाया जाये 
और वहाँ उनके रहने और खाने पीने के अलावा उनकी सेहत सुरक्षा का पूरा-पूरा इंतज़ाम किया जाये और उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाने के लिए उनकी अग्रिम बुकिंग में उनका पूरा-पूरा सहयोग किया जाये इसके लिए हमारे पास सरकारी कर्मचारी, स्कूल टीचर जो घर पर बैठे भी रोटियां तोड़ रहे हैं, उनको इस्तेमाल किया जा सकता है। 
हमारे पास ट्रेनों की कमी नहीं है। पूरी ट्रैन व्यवस्था ठप पड़ी है। सारे रेलवे कर्मचारी वापस काम पर लगाए जा सकते हैं। जो सरकारी बसें जो विभिन्न स्थलों पर मात्र खड़ी हैं। उनका स्टाफ घर पर बैठा है। उनको इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे हम चुनाव के दौरान करते हैं। सरकारी बसें, प्राइवेट बसें, माल वाहक गाड़ियां। इन सब का पूरा-पूरा फ़ायदा उठाया जाये। इस बात को पूर्णतः सुनिश्चित और प्रचारित किया जाये कि एक भी कामगार/मजदूर पंजाब से पैदल या साइकिल पर नहीं निकला और इसका पूरा-पूरा फ़ायदा भविष्य में पंजाब को मिलेगा। यहाँ से वापस गए हुए कामगारों /मजदूरों में यह विशवास स्थापित करेगा कि पंजाबियों जैसा कोई नहीं और हमारे कामगार/मजदूर इस बात को दुनिया में फैलाएंगे कि पंजाब सरकार ने कन्धे से कन्धा मिलाकर हमारी मदद की।
कुछ सुझाव हैं जिनपर ध्यान दिया जाना चाहिए। 
1. कामगारों/मजदूरों को उनके गंतव्य स्थान पर पहुँचाने के लिए ट्रेनों की संख्या में काफी वृद्धि की जाये और इस काम को प्राथमिकता के आधार पर किया जाये 
2. सुनिश्चित स्थानों की गिनती में वृद्धि की जाये ताकि उनको ज्यादा परेशानी न हो। 
3. बजाय कि ट्रेनें जो कि बड़े स्टेशनों से चलती हैं। उनको हर छोटे छोटे स्टेशनों से चलाया जाये ताकि कहीं भी बहुत भीड़ इकट्ठी न हो। 
4. अगले स्टेशनों पर पानी और खाने की व्यवस्था रेलवे कैटरिंग द्वारा की जाये।ताकि कोई भूख से बेचैन न हो। 5. जो लोग पैदल या साइकिल पर निकल गए हैं उनको राज्य के अंदर ही रोका जाये और किसी भी नजदीकी तयशुदा स्थान पर ले जाया जाये। 
6. उनके रहने, खाने पीने, स्वास्थ सेवा और उनकी ट्रेनों की बुकिंग का पूरा इंतजाम वहीँ से किया जाये और वहीँ से नजदीकी रेलवे स्टेशन का इस्तेमाल किया जाये 
7. जिनके पास जो भी समान या साइकिल हो उसको साथ ले जाने की इजाजत हो। उनको परेशान न किया जाये। 
8. ऐसा करने से उनमें सुरक्षा की भावना स्थापित होगी जो कि देश, समाज और पंजाब के हित में होगी। 

अमृत पाल सिंह 'गोगिया'
99887 98711 

Sunday, August 06, 2017

टेकस्टाइल हौज़री कामगार यूनियन का तीसरा सम्मेलन 13 अगस्त को

Sun, Aug 6, 2017 at 8:03 PM
सुबह 9 वजे होगा सम्मेलन और शाम 4 बजे होगी मज़दूर सभा
लुधियाना: 6 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
फाईल फोटो 

लुधियाना के हौज़री मज़दूरों को एकजुट करने के मकसद से टेकस्टाइल हौज़री कामगार यूनियन निरंतर सक्रिय है। इसी संबंध में इस बार 13 अगस्त को तीसरे आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं।  
आज टेकस्टाइल हौज़री कामगार यूनियन की कमेटी की मीटिंग हुई जिसमें यूनियन का तीसरा सम्मेलन करने का फैसला लिया गया। मीटिंग मे मौज़ूद यूनियन के कमेटी सदस्यों ने आज के समय मज़दूरों के आर्थिक हालातों, कारखानों में हो रहे लूट-शोशन, श्रम कानून लागू ना होना तथा कारखानों में हो रही गैरकानूनी छंटनी जैसी समस्यायों पर गहन विचार-चरचा करते हुए फैसला लिया कि ऐसे हालातों में मज़दूरों को संगठित करने व यूनियन को और मज़बूत करने की जरूरत है। इसी लिए यूनियन का तीसरा  तीसरा सम्मेलन करने का फैसला लिया गया। 13 अगस्त 2017 दिन रविवार को मज़दूर पुस्तकाल्य मकान न. 4135, ताज़पुर रोड़ लुधियाना पर सुबह 9 बजे सम्मेलन होगा जिसमें जनवादी तरीके से नई नेतृतवकारी कमेटी का चुनाव किया जाएगा। इसी दिन शाम 4 बजे मजदूर सभा भी की जाएगी। 
इस संबंध में और विवरण लेना हो तो सम्पर्क करें राजविंदर से जो टेकस्टाइल हौकारी कामगार यूनियनके अध्यक्ष हैं और उनका मोबाईल फोन नंबर है:9888655663

Saturday, April 01, 2017

भाजपा की है राम मन्दिर के नाम पर मारकाट की साज़िश-इंटक

पंजाब के साथ कांग्रेस का हर वायदा पूरा होगा-इंटक नेता दिनेश शर्मा
ट्रांसपोर्ट माफिया पर भी कसा जायेगा शिकंजा-दीपिंदर ढिल्लों 
ज़ीरकपुर (चंडीगढ़): 1 अप्रैल 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
कांग्रेस के नेतायों ने अपने  रवैये और कार्यशैली में नयी तबदीलियों लाते हुए तेज़ी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस के मज़दूर विंग इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस ( इंटक) ने अपने संगठन को नव जीवन देने के लिए जहाँ कुछ फेरबदल किये हैं वही कुछ नयी नियुक्तियां भी की हैं। इस मौके पर इंटक के नेतायों ने कहा है कि पंजाब के लोगों से जो वायदे किये गए थे वो सभी वायदे पूरे किये जायेंगे। इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि पंजाब के जल और जवानी दोनों को बचाया जायेगा। मीडिया वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि राम मन्दिर तो बीजेपी ने बनाना नहीं हाँ इसके नाम पर मारकाट की राजनीति करने की तैयारियां फिर ज़ोरों पर हैं जिनको हम सफल नहीं होने देंगें। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के नज़दीकी जाने जाते दीपिंदर सिंह ढिल्लों ने कहा कि पंजाब में ट्रांसपोर्ट माफिया भी तोडा जायेगा। 
युवा नेता कर्ण बेदी को पंजाब इंटक का सचिव बनाया गया है। बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा को इंटक की महिला शाखा का प्रांतीय अध्यक्ष बनाया गया है।  किसी समय आम आदमी पार्टी को स्थापित करने में सक्रिय भूमिका निभाने और फिर विद्रोह की आवाज़ बुलन्द करने वाले परमिंदर पप्पु को मालवा ज़ोन का अध्यक्ष बनाया गया है।  उनके अधीन अब आठ ज़िले होंगें। इसी तरह कुछ और नियुक्तियों को घोषणा आज ज़ीरकपुर में हुई एक विशेष सभा में की गयीं।
इस नियुक्ति के बाद उत्साहित नज़र आयी अनीता शर्मा ने कहा इतनी बड़ी पार्टी का साथ मिलना वास्तव में बेलन ब्रिगेड की नीतियों और संघर्ष का ही सुखद परिणाम है। अब पंजाब के मज़दूरों को उनकी पूरी कमाई और पूरा हक दिलाने के प्रयास और तेज़ होंगें। उन की मेहनत की कमाई को नशे के सौदागरों के पास नहीं जाने दिया जायेगा। बीमारी और अन्य
 इस अवसर पर मज़दूरों को उनका हक दिलाने के लिए संकल्प भी दोहराया गया। इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा सहित कई अन्य प्रमुख लोग भी मौजूद थे। इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपिंदर सिंह ढिल्लों, सचिन शर्मा, संजीव शर्मा, प्रदीप अग्रवाल और कई अन्य लोग भी मौजूद थे। 

Sunday, August 30, 2015

कारखाना मालिक ने मुनाफे के खातिर की दो और हत्याएँ--कामगार यूनियन

Sun, Aug 30, 2015 at 6:58 PM
कामगार यूनियन ने किया रोष प्रदर्शन करके संघर्ष तेज़ करने का ऐलान 


लुधियाना: 30 अगस्त 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):

आज टेक्सटाइल हौकारी कामगार यूनियन की अगवाई में सैंकड़ों मज़दूरों ने थाना मेहरबान पर ज़ोरदार धरना प्रदर्शन किया। भारती डाईग, मेहरबान, लुधियाना में कुछ दिन पहले डाईग मशीन में धमाका होने के कारण दो मज़दूरों निरंजन (22) और सुरेश (45)  की मौत हो गई थी, इस दुखद घटना के मुद्दे को लेकर गेट पर धरना भी लगाया। मज़दूरों ने मांग की कि दोषी मालिक को सख्त से सख्त सजा दी जाए और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
इस दौरान मज़दूरों को संबोधन करते हुए मज़दूर नेता लखविन्दर ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक कारखाने का नहीं है। सभी कारखानों में मज़दूरों की दुघटनाएँ और बिमारीयों से सुरक्षा प्रबंधों की धज्जीयां उडाई जा रही है। मालकों को सिर्फ आपने मुनाफ़े की फिकर है। मज़दूरों को वह सिर्फ मशीन के महज पुर्जे ही समझते है। सरकार पुलीस, प्रशाशन भी हमेशा पुंजीपतियों का ही साथ देते है। उन्होनें सरकार से यह मांग की कि कारखानों में दुरघटनाओं से बचाव के लिए सख्त से सख्त कानून बनाए जाए, और इनकी उलंघन करने वाले मालिकों को सख्त जेल से लेकर फ़ासी की सजा दी जाए। धरने को मज़दूर नेता लखविन्दर, महेश, प्रेमनाथ आदि ने संबोधन किया। कल भी मज़दूरों ने पुलीस चौकी पर ज़ोरदार प्रदर्शन किया था। कल की तरह आज भी पुलीस ने प्रदर्शन को बिखेरने की कोशिश की, पर मज़दूर डटे रहे। 

Sunday, August 24, 2014

टेक्सटाइल और हौजरी मजदूरों की हुई मज़दूर पंचायत

Sun, Aug 24, 2014 at 6:38 PM
वेतन न बढ़ने, श्रम कानून लागू न होने और मेहनत की भारी लूट के खिलाफ एकजूट संघर्ष का प्रण किया
सभी मालिकों को भेजे जाएंगे मांगपत्र
मांगें न मानी जाने पर संघर्ष तीखा होगा
लुधियाना: 24 अगस्त,2014: (*राजविन्दर):
लुधियाना के टेक्सटाइल और हौजरी मजदूरों के संगठन टेक्सटाइल हौज़री कामगार मजदूर यूनियन द्वारा आज यहां चंडीगढ़ रोड पर स्थित पुडा मैदान में मजदूर पंचायत बुलाई गई। अलग अलग कारखानों से पहुंचे मजदूरों और यूनियन के अगुवाओं ने मजदूरों के हालात के बारे में कारखानों के अंदर होने वाली ध्क्केशाही के बारे में विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि टेक्सटाइल और हौजरी मजदूर भी बहुत बुरे हालातों का सामना कर रहे हैं। महंगाई तेजी से बढ़ती जा रही है, पर आमदनी नहीं बढ़ रही है। मालिक वेतन और पीसरेट नहीं बढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि टेक्सटाइल और हौजरी कारखानों के मालिकों द्वारा श्रम कानूनों को लागू नहीं किया जा रहा। 8 घण्टे की ड्यूटी, न्यूनतम मजदूरी, पहचान पत्र, इ.एस.आई, पी.एपफ., हादसों से सुरक्षा, छुट्टियां आदि सभी कानूनों को कुछ नहीं समझा जाता। मालिक बेहिसाब मुनाफे कमा रहे हैं, दूसरी तरफ मजदूर बुरे हालातों में रहने के लिए मजबूर हैं। सरकार, श्रम विभाग सभी आंखें बंद करके बैठे हैं। 
विचार-विमर्श के बाद पंचायत में यह फैसला लिया गया कि इन मांगों के अधार पर एक मांगपत्र तैयार किया जाएगा और मालिकों एवं श्रम विभाग को सौंपा जाएगा। इस मांगपत्र में आठ घंटा काम दिहाड़ी का कानून लागू किया जाये और मासिक वेतन कम से कम 11000 रू. लगाया जाये, इ.एस.आई. कार्ड, पी.एपफ. कानून लागू करवाना, महिला मज़दूरों का पुरूष मज़दूरों के बराबर वेतन हो। फैक्टरी में मजदूरों के पहचान पत्र, हाजिरी रजिस्टर बनाए जाएं, 8.33 प्रतिशत बोनस और छुट्टियां लागू की जाएं। फैक्टरियों में हादसे रोकने के लिए सुरक्षा के इन्तजाम किए जाएं और इसके साथ ही बाकी सभी श्रम कानून लागू किए जाएं।
मजदूर पंचायत ने यह फैसला लिया कि अगर मालिकों ने मांगे नहीं मानी तो संघर्ष को विस्तारित करते हुए और तीखा किया जाएगा। मजदूर अगुवाओं ने ऐलान किया कि जब तक मालिक मजदूरों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए प्रयास नहीं करते, श्रम कानून लागू नहीं करते, तब तक संघर्ष चलता रहेगा। मजदूर पंचायत में हुई विचार चर्चा में मजदूर यूनियन के प्रधान राजविंदर, विश्वनाथ, ताजमोहम्मद, धिनिधर, उदय कुमार,जय पर्काश, गोपाल के सहित लगभग एक  दर्जन मजदूरों ने अपनी बात रखी। ।

*राजविन्दर टेक्सटाइल हौज़री कामगार मज़दूर यूनियन के प्रधान हैं और उनका फोन सम्पर्क नंबर है:9888655663 

Sunday, August 11, 2013

टेक्सटाइल-हौजरी मज़दूरों ने की मज़दूर पंचायत

 Sun, Aug 11, 2013 at 7:14 PM
सैंकड़ों मज़दूरों ने लिया श्रम कानून लागू करवाने के लिए संघर्ष का प्रण
लुधियाना। 11 अगस्त 2013 (विश्वनाथ*) आज टेक्सटाइल-हौकारी कामगार यूनियन के आह्वान पर मकादूरों ने चण्डीगड़ रोड पर स्थित पुडा(गलाडा) मैदान में मकादूर पंचायत की। इस में शहर के सैकड़ों मकादूरों ने भाग लेकर अपने माँग-मसलों पर चर्चा की। मकादूर नेताओं ने शहर में कारखानों के अन्दर मकादूरों के हो रहे शोषण के बारे में बोलते हुए कहा कि श्रम कानूनों के अतर्गत सुविधाएँ देना तो दुर की बात मालिक तो वर्षों से काम कर रही बड़ी मकादूर आबादी को कारखाने के अन्दर काम करने का एक पक्का प्रमाण तक नहीं देते हैं। अगर मकादूर श्रम विभाग के पास शिकायत लेकर जाते हैं तो उस पर कोई कारवाही नहीं होती। मालिकों ओर श्रम विभाग के इस रुख के प्रति मकादूरों में भारी आक्रोश है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष महँगाई बेहद बढ़ चुकी है। जिसके चलते मकादूरों के लिए परिवार का पेट भरना भी कठिन हो गया है, और मकादूर 12-12, 14-14 घंटे बिना किसी साप्ताहिक छुट्टी के काम करने को मकाबूर हैं। दूसरी तरफ कारखाना मालिकों के ऐशो-आराम में कमी नहीं हुई। उनकी फैक्ट्रियों, गाडिय़ों और बंगलों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। लेकिन फिर भी कारखाना मालिक मकादूरों के वेतन व पीस रेट बढ़ाने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए ही मकादूरों को मकाबूर होकर संघर्ष का मार्ग अपनाना पड़ा है।
टेक्सटाइल-हौकारी कमागार यूनियन के अध्यक्ष राजविन्दर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से शहर में टेक्सटाइल-हौकारी मकादूरों ने अपना संगठन बना कर संघर्ष का मार्ग चुना है। संगठन के दम पर पिछले तीन वर्षों से कुछ कारखानों  में मकादूरों ने कुछ अधिकार भी हासिल किए हैं। लेकिन जो भी हासिल किया है वह कुछ कारखानों में ही लागु हुआ है और बहुत सीमित है। श्रम कानून लागू करवाने के लिए शहर के मकादूरों का एक मकाबूत संगठन बनाना आज समय की माँग है। संगठन का जनवादी ढाँचा और फैसलों-फण्डों के सम्बन्ध में पारदर्शिता अपना कर ही संगठन को ठीक ढंग से चलाया जा सकता है। इसलिए ही संगठन ने सामूहिक फैसले लेने के लिए मकादूर पंचायत बुलाने की परम्परा शुरू की है।
मकादूर पंचायत में यूनियन कमेटी की तरफ से घनश्याम, गोपाल, हीरामन, विश्वनाथ आदि के इलावा अलग-अलग कारखानों से आए मकादूरों ने अपने काम के हलातों के बारे में चर्चा की और साथ ही यूनियन समिति की तरफ से प्रस्तावित गई माँगों को ठीक कहा और इन माँगों को हासिल करने के लिए जी-जान लगा देने का भी प्रण लिया। वक्ताओं ने कहा कि अगर आज हक-अधिकारों के लिए हम आवाज नहीं उठाते तो आने वाली नस्लों को 18-18 घंटे काम करने के लिए मकाबूर किया जाएगा।
मकादूर पंचायत में इन माँगों पर चर्चा की गई - बढ़ी महँगाई के हिसाब से इस वक्त लागू पीस रेटों और वेतन पर 30 प्रतीशत की वृद्धि की जाए, 10 या 10 से ज्यादा मकादूरों वाले कारखानों में सभी मकादूरों का ई.एस.आई. कार्ड बनाया जाए, सभी मकादूरों को 8.33 प्रतीशत की दर से सालाना बोनस दिया जाए, 20 या 20 से ज्यादा मकादूरों वाले कारखानों में सभी मकादूरों का ई.पी.एफ. चालू किया जाए, वेतन सहित सालाना छुट्टियाँ दी जाएँ और 1 मई की अन्तरराष्ट्रीय छुट्टी लागू की जाए, सभी मकादूरों के फैक्ट्री पहचान-पत्र बनाए जाएँ, रात को काम चलते समय कारखानों को ताला लगाया जाना बन्द किया जाए इसकी जगह पर चौंकीदार का प्रबन्ध किया जाए, कारखानों में साफ पीने का पानी, साफ टायल्ट-बाथरूम और आराम करने के लिए कमरे का प्रबन्ध किया जाए, वेतन और एडवांस 7 व 22 तारीख को दिया जाए और दिन के समय दिया जाए तांकि रात को होने वाली छीना-झपटी से बचाव हो सके, औरत मकादूरों को पुरूष मकादूरों के बराबर काम का बराबर वेतन दिया जाए, बच्चों समेत काम पर आने वाली स्त्री मकादूरों के बच्चों की देखभाल के लिए फैक्ट्रियों में शिशु-घर और प्रशिक्षित आया का प्रबन्ध किया जाए, शहर के बाहर स्थित कारखानों में मकादूरों को काम पर लेकर जाने और छोडऩे के लिए मालिक बसों आदि का प्रबन्ध करें, कारखानों में मकादूरों की सुरक्षा का पूर्ण प्रबन्ध किया जाए और हादसा होने की सूरत में उचित मुआवजे की गारण्टी की जाए, मकादूरों को संगठन बनाने का संविधानिक अधिकार दिया जाए, मकादूर अगुवाओं को गैरकानूनी तौर पर काम से निकाला जाना बन्द किया जाए और इन माँगोंसमेत सभी श्रम कानून लागू किए जाएँ। इन माँगों पर चर्चा के दौरान आए सुझावों पर विचार करके युनियन कमेटी एक माँग-पत्रक तैयार करके कारखाना मालिकों और श्रम विभाग को सौंपेगी। एक सप्ताह के अन्दर-अन्दर अगर मालिकों ने माँगे नहीं मानी तो यूनियन संघर्ष का मार्ग अपनाएगी।
मंच संचालन साथी ताज मोहम्मद ने किया। मकादूरों ने काोर-शोर से नाहरे लगाकर पंचायत का समाप्ण किया और एक हफते बाद फिर से एकत्र होने की सहमती बनी जिस में संघर्ष की कार्य-योजना तय की जाएगी।
*विश्वनाथ टेक्सटाइल-हौजरी कामगार युनियन, पंजाब के महासचिव हैं। 
उनसे सम्पर्क का नम्बर है: फोन नं:-9888655663

Sunday, August 05, 2012

मजदूरों को अभी तक नहीं मिला उनका अधिकार

टी एम् यूं ने फिर बुलंद की मजदूरों के अधिकारों की आवाज़ 
 लुधियाना: देश में अनगिनत कुर्बानियों के बाद आजादी के बाद भी वोह सुबह नहीं आई जिसके लिए लोगों ने खून बहाया था र एक नए समाज की स्थापना के सपने देखे थे. शहीदों के मकसद का भारत अभी तक भी नहीं बन पाया. लम्बे संघर्ष किये बिना यहाँ कभी भी मजदूरों को अपना हक नहीं मिला। मेहनत करना और उसका मुआवजा मांगने के वक्त लाठी गोली खाना एक गरीब और मजदूर का नसीब बन गया है. यह सब याद दिलाते हुए संकल्प किया गया कि हम सभी को उनका हक दिलाने का संकल्प लेना होगा। एक जुट होना होगा और संघर्ष के रस्ते पर लगातार बिना थके चलना होगा. यह बात शनिवार को टेक्सटाइल यूनियन के नेताओं ने मनजीत नगर स्थित धर्मशाला में आयोजित सम्मेलन में पहुंचे श्रमिक प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही गयीं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए यूनियन के संयोजक राजविंदर, सुखविंदर, लखविंदर, गोपाल घनश्याम आदि ने कहा कि खुशहाल पंजाब में मजदूरों का शोषण हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से श्रमिकों को न्याय व उनका अधिकार दिलाने के लिए कार्रवाई की मांग की। सम्मेलन में टेक्सटाइल मजदूर यूनियन के संविधान का प्रारूप तैयार किया गया। इसके साथ ही प्रदेश कमेटी का गठन भी किया गया। कमेटी में राजविंदर को प्रधान, ताज मोहम्मद को उप प्रधान, विश्वनाथ को महासचिव, विशाल कुमार को सचिव, गोपाल को खजांची और धनश्याम को प्रवक्ता नियुक्त किया गया। सम्मेलन में करीब 200 के डेलीगेटों ने भाग लिया। यूनियन की ओर पांच अगस्त को ग्लाडा ग्राउंड चंडीगढ़ रोड पर वर्धमान मिल के सामने विशाल रैली का आयोजन किया गया है। इस आयोजन से लुधियाना की मजदूर जमात में एक नया जोश जगा है और sश्रमिक वर्ग का मनोबल और मजबूत हुआ है. इस मौके पर  उपलब्धियों का लेखा जोखा भी किया गया  और नए निशाने भी सुनिश्चित किये गए. लटक रही समस्यायों पर भी गंभीरता से विचार हुआ. अतीत के साथ साथ नई मंजिलों कि निशानदेही भी की गई. कुल मिला कर यह आयोजन मजदूर आन्दोलन में एक नई जान फूंकने में सफल रहा.lउम्मीद है कि यह आयोजन दुनिया भर के मजदूरों को एक करने के सैद्धांतिक क्षेत्र में भी अपना योगदान देगा. ---रेक्टर कथूरिया 



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‘जाति प्रश्न और मार्क्सवाद’ पर पांच दिवसीय संगोष्ठी

मैं अन्तिम साँस तक ज़ि‍न्‍दगी की जंग लड़ूँगी