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Wednesday, May 04, 2022

तड़प रही मानव जाति को बचाने आगे आए डा. बी एस औलख

कोरोना से बचाने को बनाई एल्प्रो सौक्शम नामक आयुर्वेदिक दवाई 

लुधियाना: 4 मई 2022: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 

डाक्टर बी एस औलख 
कोरोना एक ऐसा खतरा है जिसका भय शायद अभी कई सालों तक और चलेगा। शायद तब तक जब तक किसी नई मुसीबत का कोई कोई नया खतरा उभर कर सामने नहीं आ जाता। जब लोग कोरोना से मर रहे थे। वैक्सीन लगवाने के लिए लम्बी लम्बी लाईनों में खड़े थे। लॉक डाउन के कारण पाने कारोबार और घर छोड़ कर अपने गांवों की तरफ पैदल जा रहे थे उस समय भी डाक्टर बी एस औलख अपने घर में बहुत ही गहनता से इसकी दवाई तलाश कर रहे थे.दवाई भी बन गई लेकिन इसकी रजिस्ट्रेशन और बेचने की आज्ञा जैसे कई झमेले थेजीके लिए पूरी टीम को संघर्ष करना पड़ा। 

कोरोना के लिए खोजी गई इस दवा को आयुर्वेदिक विभाग, पंजाब सरकार की ओर से अब लक्षण आधारित ईलाज  को मंजूरी मिल गई है। यह खुलासा आज यहां क्रिश्चीयन मैडीकल कॉलेज, लुधियाना के रह चुके लैक्चरार और फिलहाल ग्रैगर मैंडल ईस्टीच्यूट फार रिसर्च इन जैनिटिक्स, लुधियाना के डायरैक्टर, मशहूर अन्तर्राष्ट्रीय पेटैंट होल्डर वैज्ञानिक बी.एस. औलख ने किया। मीडीया से खचाखच भरे हुए प्रेस कान्फ्रंस रूम में यर सी जगह  ही खली नहीं थी। खुद डाक्टर औलख विभिन्न मीडिया चैनलों को बाईट देते देते थक चुके थे। 

गौरतलब है कि बी.एस औलख ऐक प्रोफैशनल दवा वैज्ञानिक हैं जिन्हें यू.एस.ऐ. आस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, साऊथ अफ्रीका, कैनेडा, वगैरह की सरकारें पहले ही दवा खोज पेटैंटों से नवाज़ चुकी हैं। इसके लिए उन्हें कितना बड़ा संघर्ष करना पड़ा यह एक अलग और लम्बी कहानी है। 

मौजूदा खोज डा. औलख की दूसरी खोज है जो कई प्रकार के वायरसों पर प्रभावी एक ब्राड सपैक्ट्रम ऐंटी वायरल ड्रग है लेकिन आयुर्वैदिक विभाग ने उसे चार मुख्य रोग लक्षणों के ईलाज के लिए मंज़ूर किया है जो आमतौर पर नार्मल व गम्भीर किस्म के कोरोना मरीज़ों में मिलते हैं। इस मंजूरी के लिए उन्हें और उनकी बने दवा को कई परीक्षणों में से गुजरना पड़ा।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना के मुख्य लक्षण हैं, लगातार सूखी खाँसी, बुख़ार, साँस की टूटन और अँदरूनी अँगों की सोजि़श। मौजूदा दवा इन सभी चार कैटेगरी के लिए मंजूर की गई है। यह उसे कोरोना के ईलाज के लिए एक आदर्श दवा के तौर पर स्थापित करती है।

वैज्ञानिक डा. औलख का दावा है कि इस दवाई से कोरोना से होने वाली मौतों में बहुत जल्द और बहुत ही तेज़ी से  कमी आयेगी। कोरोना मरीज़ों में मौत का कारण फेफड़े, दिल, किडनी बरेन बगैरह के कोमल उत्तकों की सोजि़श व फिर उनमें होने वाली सड़न है जो इस दवा से कँट्रोल की जा सकती है।

इसके अलावा दर्दनाक सूखी खाँसी, बुखार, साँस लेने में दिक्कत भी कोरोना मरीज़ों को बहुत तकलीफ़ देते हैं जिसकी वजह से पूरे बदन में दर्द, बेपनाह थकावट व कमज़ोरी महसूस होती है। इस दवा से इन सब से राहत मिलेगी।

एल्प्रो सौक्शम नामक यह दवा शुद्ध, कुदरती जड़ी बूटियों से तैयार की गई है जो 500 मिलीग्राम के कैप्सूलों के रूप में 8 कैप्सूलों के पैक में मिलती है। रोज़ाना दो कैप्सूलों के साथ चार दिन के पूरे कोर्स की कीमत 320 रूपये है।

करीब 20 साल पहले मुँह खुर के वायरस की इंफैक्शन रोकने के लिए इस दवाई की खोज हुई थी। कुछ महीने पहले जब इस बीमारी का अचानक विस्फोट हुआ तो यह दवा इस पर फिर से प्रभावी पाई गई। देश के प्रधानमंत्री व सूबे के मुख्यमंत्री को बाकायदा इस कामयाबी की खबर दे दी गई है। इसके अलावा इंसानी इनफ़लूऐंजा पर भी यह काफी प्रभाव पाई गई है।

इस दवा के कोराना मरीज़ों पर इस्तेमाल का ख्याल तब आया जब कोरोना महामारी अचानक फूटी व जैसा कि विश्व सेहत संस्था ने बाद में माना, भारत समेत पूरी दुनियां में ज़ीका वायरस की दवाई रैमडैसवीर व इनफ्लूऐंजा की दवाई फेवीपीरावीर को जरूरी दस्तावेजों के अभाव में भी आनन फानन में मंज़ूरी दे दी गई।

बी.एस. औलख जो पहले ही इस दवा के एंटीवायरल प्रभाव पर खेाज कर रहा था ने प्रधानमंत्री, सेहत व आयुश मंत्री व अन्य अधिकारियों को इस बारे विधिवत पत्र भेजे। उसने इण्डियन कौंसिल फॉर मैडीकल रीसर्च व डिपार्टमेंट ऑफ हैल्थ रीसर्च को भी रिसर्च प्रोजैक्ट सबमिट किए जिनके सहयोग का आज भी इन्तज़ार है।

वैज्ञानिक ने उपरोक्त रोग लक्ष्णों वाले मरीज़ों पर इस दवाई की इजाजत देने के लिए आयुर्वैदिक विभाग का धन्यवाद किया व कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के ‘मेक इन इण्डिया’ व ‘आत्मनिर्भर’ पहल के लिए इससे बहुत मदद मिलेगी।

बी.एस. औलख इससे पहले विश्व की सर्वप्रथम सैक्स फिक्सर दवा की खोज कर चुका है जिससे डेयरी पशुओं में केवल मादा संतान पैदा करके डेयरी उत्पादकता व किसानों को होने वाले मुनाफ़े में बेहिसाब बढ़ोत्तरी की जा सकती है।

वैज्ञानिक ने बड़े दुखी हृदय से कहा कि विश्व सेहत संस्था के प्रभाव अधीन, दुनिया भर की सरकारें प्रो-कार्पोरेट व विज्ञान विरोधी कानून जैसे कि भारत सरकार द्वारा पास किया ‘‘न्यू ड्रगज़ एण्ड कलिनिकल ट्रायलज रूल्ज़, 2019’’, कानून शामिल है, बना रही हैं। इससे दवा खोज के असली नायकों यानि सालीटरी दवा वैज्ञानिकों से खोज करने का हक ही छीन लिया गया है और कार्पोरेट घरानों के लिए पूरा मैदान ही खुला छोड़ दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सालीटरी दवा वैज्ञानिकों से खेाज का अधिकार छीनना शर्मनाक है क्योंकि पैनिसिलीन व इैन्सुलीन की महान खोजें करने वाले अलेक्जैंडर फलैमिंग व जौहन बाँटिंग भी सालीटरी इन्वैंटर ही थे। आज की तारीख में जबकि ऐडज़, कैंसर, अस्थमा, मिर्गी, वगैरह लाईलाज़ बीमारियों की लिस्ट पहले ही बड़ी लम्बी है और नित्य नए वायरस सामने आ रहे हैं, हमें हर इन्सान को सेहतमंद रखने को नये दवा इलाज़ों की ज़रूरत है। 

तेजी से रूप बदल रहे वायरस के खिलाफ वैक्सीनें पहले ही प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं। जब कुदरत माँ ने सब इन्सानों को दिमाग की दात बख्शी है और इसी दिमाग का इस्तेमाल करके ही वैज्ञानिक नयी दवाईयांे की खोज करते हैं; इस संबंध में उनको रोकने का हर यत्न न केवल उनसे इन्सान होने का हक छीनता है बल्कि यह कुदरत माँ का भी घोर अपमान है। 

सरकार को इस संबंध में बहुत ही सोच समझ के फैसले लेने चाहिएं और अगर विश्व सेहत संस्था अपना विज्ञान विरोधी व मानवता विरोधी रवैया जारी रखती है तो इसमें से बाहर निकलने से भी गुरेज़ नहीं करना चाहिए। विज्ञान व वैज्ञानिकों को बढ़ावा देना केवल वक्त की ही जरूरत नहीं है बल्कि लाईलाज बीमारियों के हाथों तड़प तड़प कर मर रही इन्सानियत की यह पुकार भी है।

Monday, December 13, 2021

करोना मृतकों का अंतिम संस्कार कराने वाले हुए बेबस

 Monday 13th December 2021 at 4:46 PM

पुलिस वालंटियर को भी दो सालों से न तनख़्वाह मिली न छुट्टी


मोहाली
: 13 दिसंबर 2021: (गुरजीत सिंह बिल्ला//पंजाब स्क्रीन):: 
जब हर तरफ कोरोना मौत का नंगा नाच माच रहा था। घर घर से मौतों की खबरें आ रहीं थीं, कोई अपने परिजन का अंतिम संस्कार करने को भी तैयार नहीं था उस समय सामने आए लोगों को फ्रंट लाइनन वारियर कह कर वाहवाही की गई। बहुत से लोगों को सम्मानित भी किया गया लेकिन हालत सुधरते ही सर्कार भी भूल गई और समाज भी। आज वे योद्धा लोग बेबस से हुए खुद के सामने ही शर्मसार बने बैठे हैं। उन्होंने अपने इस शोषण की दास्तान आज मोहाली प्रेस क्लब में मीडिया के सामने सुनाई। अफ़सोस कि इनकी सहायता के लिए न तो कोई सियासी परज़ती आगे न ही कोई ट्रेड यूनियन। इनसे मेहनत करवा कर इनकी श्रम शक्ति को दिनदिहाड़े लूट लिया गया।  
छुट्टी मांगने पर उल्टा सवाल होता। आपको छुट्टी नहीं मिल सकती, क्यूंकि छुट्टी दी तो आपका काम कौन करेगा? वेतन मांगने पर कहा जाता-आपको तनख़्वाह किस बात की, आप क्या करते हो?’’ इस तरह के सवाल पूछ कर इन्हें ज़लील किया जाता। 
यह कोई हैरान होने वाली बात नहीं। बल्कि यह दास्तान पिछले 2 सालों से कोविड महामारी में पंजाब पुलिस वलंटियरज़ के तौर पर भरती किये उन 3600 नौजवानों की है जो अब तक नौकरी की आशा में बिना तनख़्वाहों के ही काम करते करते सिर्फ़ 380 रह गए हैं।
आज यहाँ मोहाली प्रैस क्लब में एक प्रैस कान्फ़्रेंस दौरान वालंटियर जगमीत सिंह मुक्तसर, गुरप्रीत सिंह तरनतारन, बचित्तर सिंह अमृतसर, गुरप्रीत सिंह फाजिल्का और हरिन्दर सिंह फ़िरोज़पुर ने बताया कि वह मार्च 2019 में करोना महामारी के शिखर पर सरकार ने तब भरती किये थे,, जब करोना मरीज़ों की मांएँ ने पुत्र नहीं पहचाने, पुत्रों ने पिता छोड़ दिए थे तो उस समय पर करोना मरीज़ों का सरकार यह वलंटीरज़ करवाते थे। 
यही नहीं; उन को थानों में सांझ केन्द्रों में चालक, बैंक ड्यूटी, नाका ड्यूटी पर चाय बनाने जैसी ड्यूटियों दीं गई, परन्तु अजय तक किसी को भी तनख़्वाह के नाम पर फूटी कौड़ी तक भी नहीं दी गयी। 
यही कारण है कि 3600 वलंटियरज़ में से अब 380 अभी भी बिन तनख़्वाहों के ही काम कर रहे हैं और बाकी के घर की तंगीयों तुरशियों के मारे वापस चले गए हैं।
इन्हों नेताओं ने बताया कि इन को पंजाब के डी जी पी और ओर अफसरशाही, विधायकों, मंत्रियों और मुख्य मंत्री तक जल्दी नौकरी देने के भरोसे दिए गए थे। पंजाब का शायद कोई ही विधायक हो जिसने उन को जल्दी नौकरी पर रखने का भरोसा न दिया हो। उन कहा कि सभी ही मंत्री और मुख्य मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने भी यह भरोसा दिया है कि जल्दी ही उन का काम कर दिया जायेगा।
चेहरे पर निराशा में डूबे इन फ्रंट लाईन योद्धाओं को शायद राजनीति की तिकड़मबाज़ियों का पता नहीं था जिस के भरोसे यह अपनी ज़िंदगी मौत के मुँह देने के लिए राज़ी हो गए और जब करोना का बुरा समय निकल गया तो करोना पर जीत के लिए अपनी पीठ थपथपाती सरकार ने इन को बाहर का रास्ता दिखा दिया। 
वह पत्रकारों को बार बार पूछ रहे थे कि घर घर जा कर फार्म भरवा कर रोज़गार देने के वायदे करन वाली सरकार 23 लाख नौकरियाँ देने का पाखंड तो कर रही है, परन्तु हकीकत में सभी कच्चे, आऊटसोरस और एडहाक मुलाज़िम हर रोज़ टैंकियों, सड़कें और धक्के खा रहे हैं। 
अब इन वलंटियरज़ ने मोहाली के फेस आठ स्थित एक गुरुद्वारा साहब के सामने सामने धरना लगा कर कोई सख़्त कदम उठाने का ऐलान किया है तांकि सरकार के कानों में उन की आवाज़ पड़ सके।
इसी दौरान भारतीय किसान मज़दूर एकता यूनियन की प्रधान श्रीमती हरमीत कौर बाजवा ने अपनी जत्थेबंदी की तरफ से इतना पंजाब पुलिस वालंटियर की तन मन पर धन के साथ हिमायत करन का ऐलान किया है।
दूसरी तरफ समाज से जुड़े विभिन्न  पछड़े हुए लोगों की भलाई के लिए कार्य करने वालों में से कुछ वशिष्ठ लोगों ने कहा कि हम इनका साथ तो ज़रूर देंगें लेकिन जब कोई वालंटियर बनता या बनाया जाता है तो ज़ाहिर होता है की इसकी कोई तनखाह नहीं होगी। इनकी नियुक्ति के वक्त भी इनके साथ ऐसा कोई भी लिखती वायदा नहीं किया गया होगा। फिर भी खास बात यह है कि इन लोगों ने वो काम किया जिसे करने से सरकार के तनखाहदार कर्मचारी भी पीछे हट गए थे। 

Friday, November 20, 2020

महामारी लम्बी खिंचने से एक पूरी पीढ़ी के भविष्य पर जोखिम

 19 नवंबर 2020//स्वास्थ्य

UNICEF//तुर्की की राजधानी इस्ताम्बूल में कोविड-19 महामारी के दौरान एक 7 वर्षीय बच्चा खिड़की से बाहर देखते हुए. स्कूल बन्द होने, स्वास्थ्य व पोषण सेवाओं में व्यवधान होने के कारण दुनिया भर में करोड़ों बच्चे प्रभावित हुए हैं.

यूनीसेफ़ ने 20 नवम्बर को मनाए जाने वाले विश्व बाल दिवस के अवसर पर गुरूवार को जारी एक रिपोर्ट में दर्शाया है कि कोरोनावायरस महामारी के बच्चों पर कितने घातक व बढ़ते प्रभाव हो रहे हैं जबकि महामारी दूसरे वर्ष में भी दाख़िल होने के कगार पर है.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से संक्रमित होने वाले बच्चों में लक्षण तो मामूली ही नज़र आ रहे हैं, लेकिन संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, साथ ही उनकी शिक्षा और पोषण पर भी दीर्घकालीन प्रभाव बढ़ रहा है, और युवाओं की एक पूरी पीढ़ी का स्वास्थ्य व रहन-सहन उनके पूरे जीवन को ही बदल देने वाला होने की आशंका है. 

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने कहा है, “कोविड-19 के दौरान पूरे समय ये ग़लत सोच बनी रही कि बच्चे इस महामारी से बहुत कम प्रभावित होंगे. ये सोच या ख़याल, कोरा झूठ होने के सिवाय कुछ नहीं हो सकता.”

“बच्चे भी बीमार हो सकते हैं, और उनसे भी बीमारी फैल सकती है, ये महामारी के विशालकाय आकार का केवल एक पक्ष है.

बुनियादी सेवाओं में व्यवधान और बढ़ती ग़रीबी के कारण बच्चों के लिये सबसे ज़्यादा जोखिम पैदा हो रहा है. जितने लम्बे समय तक ये महामारी रहेगी, उतना ही ज़्यादा असर बच्चों कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और उनके रहन सहन पर पड़ेगा. एक पूरी पीढ़ी के भविष्य पर ख़तरा मंडरा रहा है.”

पीढ़ी को बचाना होगा  

यूनीसेफ़ ने अपनी इस रिपोर्ट में कहा है कि 3 नवम्बर तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार 87 देशों में, 20 वर्ष से कम उम्र के युवाओं व किशोरों में हर 9 में से 1 को कोविड का संक्रमण था. या यूँ कहें कि उन देशों में ये संक्रमण 11 प्रतिशत था. 

यूनीसेफ़ का कहना है कि वैसे तो कोरोनावायरस बच्चों से एक दूसरे में और ज़्यादा उम्र वाले लोगों में भी फैल सकता है, लेकिन ऐसे मज़बूत सबूत भी हैं कि अगर पुख़्ता सुरक्षा और ऐहतियाती उपायों के साथ स्कूल खुले रखे जाएँ तो बन्द रखने के मुक़ाबले ज़्यादा लाभ हैं.

संगठन ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि सामुदायिक संक्रमण के फैलाव के मुख्य कारण स्कूल नहीं है, और बच्चों में संक्रमण स्कूलों से बाहर के स्थानों से वायरस फैलने की ज़्यादा सम्भावना है.

चिन्ताजनक तथ्य

साथ ही, 140 देशों में किये गए सर्वेक्षण से मिले आँकड़ों का इस्तेमाल करके रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि बच्चों के लिये ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सेवाओं में आए व्यवधान के कारण बच्चों के लिये सर्वाधिक गम्भीर जोखिम पैदा हो गया है.

कम से कम एक तिहाई देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता व दायरे में 10 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, इनमें टीकाकरण और मरीज़ों को दैनिक स्तर पर मिलने वाली बाहरकी स्वास्थ्य सेवाएँ भी शामिल हैं.

महिलाओं व बच्चों के लिये पोषण सेवाओं का दायरा भी कम हुआ है, जिनमें स्कूलों में मिलने वाला भोजन व विटामिन और अन्य पोषक पदार्थ भी शामिल हैं क्योंकि सामाजिक सेवाएँ मुहैया कराने वाले अधिकारियों की बच्चों के घरों के दौरे कम हुए हैं.

© UNICEF/Everett//केनया के नैरोबी शहर में 11 साल का बच्चा अपनी कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन करते हुए, घर पर पढ़ाई कर रहा है. वह ऑनलाइन शिक्षा नहीं ले सकता क्योंकि उसके परिवार के पास कोई मोबाइल फोन नहीं है

वैश्विक स्तर पर, लगभग 57 करोड़ बच्चे, यानि दुनिया भर में स्कूली शिक्षा के लिये पंजीकृत बच्चें की लगभग 33 प्रतिशत संख्या, 30 देशों में स्कूल बन्द होने से प्रभावित हुए हैं.

ये आँकड़े नवम्बर 2020 के हैं. बहुपक्षीय ग़रीबी में रहने वाले बच्चों की संख्या अनुमानतः 15 प्रतिशत बढ़ गई है.

बच्चों की ज़रूरतों को प्राथमिकता

रिपोर्ट में चिन्ताजनक जानकारी सामने आने के सन्दर्भ में यूनीसेफ़ ने तमाम देशों की सरकारों और साझीदारों का आहवान किया है कि वो कोविड-19 संकट का सामना करने के लिये ठोस कार्रवाई करें.

यूएन एजेंसी ने ऐसे हालात सुनिश्चित किये जाने का आहवान किया है जिसमें सभी बच्चों की शिक्षा जारी रह सके, और डिजिटल खाई भी पाटने का आहवान किया गया है. संगठन ने देशों से बच्चों व परिवारों को पोषण, पीने का साफ़ व सुरक्षित पानी के साथ-साथ, स्वास्थ, स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई सेवाएँ भी सुनिश्चित करने की पुकार लगाई है. टीकाकरण भी हर बच्चे को किफ़ायती बनाने के साथ-साथ आसानी से उपलब्ध कराने का भी आहवान किया गया है.

इन सबके साथ, सभी बच्चों व किशोरों को मानसिक स्वास्थ्य सुविधा, और हिंसा व नज़रअन्दाज़ किये जाने के माहौल से बचाने की भी माँग की गई है. संघर्षों, आपदाओं व विस्थापन के हालात में जीने वाले परिवारों और बच्चों को भी सहायता में बढ़ोत्तरी किये जाने का आहवान किया गया है.

यूनीसेफ़ ने बच्चों में ग़रीबी को पलटने की ज़रूरत पर ध्यान दिलाते हुए, महामारी से उबरने में सभी को साथ लेकर चलने का आहवान किया गया है.

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हैनरिएटा फ़ोर ने कहा है, “इस वर्ष विश्व बाल दिवस पर, हमने देशों की सरकारों और साझीदारों के साथ-साथ निजी सैक्टर से बच्चों और उनकी ज़रूरतों को प्राथमिकताओं पर रखने को कहा है.”

“ऐसे में जबकि हम सभी अपने भविष्य के बारे में फिर से सोच-विचार कर रहे हैं और महामारी से मुक्त विश्व की तरफ़ देख रहे हैं, बच्चे सर्वोच्च प्राथमिकता पर होने चाहिये.




Friday, October 09, 2020

GCG लुधियाना में लगाया गया विशेष कोविड-19 स्वास्थ्य कैंप

Friday: 9th October 2020 at 3:23 PM

 डाक्टर सीमा कौशल ने बताये बचाव के बहुत भी महत्वपूर्ण गुर 


लुधियाना
: 9 अक्टूबर 2020: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

कोरोना की मार को रोकने में पंजाब सरकार लगातार सक्रिय है। मिशन फ़तिह के अंतर्गत इस मकसद के लिया हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत पंजाब स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों की एक विशेष टीम ने लुधियाना स्थित लड़कियों के राजकीय कालेज में एक कैंप का  आयोजन आयोजन किया। इस कैंप के दौरान कोविड-19 के निशुल्क टैस्ट करवाए गए तांकि इसे रोकने में सभी आवश्यक कदम उठाये जा सकें। गौरतलब है की ऐसे कदम उठा कर ही रिकवरी दर को बढ़ाया जा सकता है और मृत्यु डर को कम किया जा सकता है। इसी मकसद के लिए जागरूकता अभियान भी चलाये जा रहे हैं। समाजिक और शिक्षण संस्थान भी काम में सहयोग दे रहे हैं। यू सी एच सी जवद्दी की मेडिकल अफसर डाक्टर सीमा कौशल ने कालेज के स्टाफ  छात्राओं को कोरोना से बचाव के लिए सभी सावधानियां और अन्य बातें बतायीं। रोग प्रतिरोधक शक्ति को मज़बूत रखने के लिए क्या क्या खाना पीना है इस बात के भी गुर बतलाये। डाक्टर मैडम ने बताया कि इन नियमों और सावधानियों का पालन करके ही हम कोरोना पर मुकम्मल विजय प्राप्त कर सकेंगे। स्वास्थ्य की रक्षा, स्वास्थ्यवर्द्धक खानपान और आवश्यक व्यायाम इस मामले में बहुत ही आवश्यक है। कार्यवाहक प्रिंसिपल डाक्टर गुरप्रीत कौर और स्टूडेंट्स काउन्सिल की इंचार्ज डाक्टर सुखविंदर कौर की देखरेख में लगाए गए इस स्वास्थ्य कैंप का फायदा कालेज की बहुत सी छात्राओं ने उठाया। इस तरह के स्वास्थ्य कैंपों का आयोजन तेज़ी से किया जा रहा है तांकि सभी क्षेत्रों के लोगों को इसका फायदा पहुंच सके। 

Sunday, September 27, 2020

भारत में तेजी से ठीक होने वाले रोगियों की संख्या में बढोतरी

 26-सितम्बर-2020 11:06 IST

पिछले 24 घंटों के दौरान 93 हजार से अधिक रोगी हुए ठीक 

*सक्रिय मामलों की तुलना में ठीक होने की दर 5 गुना अधिक

*प्रत्येक दिन बड़ी संख्या में ठीक होने वाले कोविड रोगियों के साथ ही भारत में तेजी से ठीक होने वाले रोगियों की संख्या में बढोत्तरी का सिलसिला जारी

नई दिल्ली: 26 सितंबर 2020: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन):: 

कोरोना ने अपना कहर बढ़ाया है लेकिन साथ ही हमने मिलजुल कर इसका साहस से सामना भी किया है। इसके कहर को मात भी दी है। बचाव कार्यों में बहुत ही तेज़ी  आई है। ठीक होने वाले मरीज़ों की संख्या बहुत ही तेज़ी से बढ़ी है। पिछले चौबीस घंटे के दौरान देश में 93,420 नए रोगी ठीक हुए हैं और इसके साथ ही ठीक होने वाले रोगियों की कुल संख्या 48,49,584 पहुंच गई है।


ठीक होने की दैनिक वृद्धि के साथ साथ रिकवरी दर में भी लगातार सुधार हो रहा है। वर्तमान में यह  82.14% पर पहुंच गई है।

भारत ने इस तरह एक दिन में ठीक होने वाले सर्वाधिक रोगियों के साथ ही वैश्विक रैंकिग में ठीक होने वाले कुल रोगियों की संख्या में शीर्ष स्थान बनाया हुआ है।

जैसे- जैसे भारत नए मामलों की तुलना में उससे अधिक रिकवरी दर हासिल कर रहा है वैसे- वैसे ठीक होने वाले मामलों और सक्रिय मामलों के बीच अंतर भी लगातार बढ़ रहा है

सक्रिय मामलों की तुलना में ठीक होने वाले मामलों की संख्या 5 गुना अधिक हो गई है।

ठीक होने वाले मामले (48,49,584) सक्रिय मामलों (9,60,969) से लगभग 39 लाख (38,88,615) अधिक हैं।

सक्रिय मामले कुल पॉजिटिव मामलों का केवल 16.28% है। इसमें स्थिर गिरावट का सिलसिला जारी है।

राष्ट्रीय औसत के बाद, 24 राज्य / केन्द्र शासित प्रदेशों भी नए मामलों की तुलना में रिकवरी की दर ज्यादा हो गई है।

10 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों का नए रिकवर मामलों में लगभग 73%  योगदान है

महाराष्ट्र ने 19,592 नए रिकवर मामलों के साथ अपनी इस बढ़त को कायम रखा है।

केंद्र सरकार की तीन-स्तरीय रणनीति 'टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट' की शुरुआत परीक्षण से होती है।  केंद्र सरकार 'चेज द वायरस' (वायरस का पीछा) की नीति का उद्देश्य परीक्षण के माध्यम संक्रमण का प्रसार रोकने और हर शख्स की पहचान करना है। केंद्र सरकार द्वारा परीक्षण की सुविधा को व्यापक बनाने और देश भर में आसान तथा अधिक सुलभ परीक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को उच्च परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए सशक्त बनाया गया है।  यह संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए संपर्कों की पहचान करने की  त्वरित निगरानी और ट्रैकिंग में सहायक है।

केंद्र सरकार ने घरों / आइसोलेशन केंद्र और अस्पतालों में रहने वाले रोगियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के लिए मानक प्रोटोकॉल जारी किए हैं। इनमें वैश्विक और राष्ट्रीय हालातों को देखते हुए समय- समय पर बदलाव किया जाता है। केंद्र सरकार तकनीकी, वित्तीय, सामग्री और अन्य संसाधनों के माध्यम से राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों में मदद कर रही है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय/ कोविड उच्च रिकवरी दर/ 26 सितंबर 2020/1

एमजी/एएम/केजे

Wednesday, August 12, 2020

कोरोना: लुधियाना के हालात दिल्ली से भी बदतर हुए-BJP

 Wednesday: 12th August 2020 at 4:19 PM
 सरकार सीएमसी, डीएमसी और फोर्टिस अस्पतालों को अपने हाथों में ले 
लुधियाना:12 अगस्त 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
लुधियाना में कोरोना संक्रमण के हालात बेकाबू हो रहे हैं। लुधियाना में कोरोना मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। लुधियाना में हर रोज़ लगभग  250  से 300  नए मरीज मिल रहे है। वहीं एक दिन में 10-12 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हो रही है। कोरोना संक्रमण से अब मौत का आंकड़ा लगभग 200 के करीब पहुंच गया है। भाजपा ज़िला लुधियाना के प्रधान पुष्पेंदर सिंगल ने भाजपा ज़िला कार्यालय में बैठक के दौरान कहा कि लुधियाना के हालात दिल्ली से भी बदतर हो गए हैं। जनता के लिए इससे बुरा क्या होगा कि पंजाब के मुख्य मंत्री व पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने एक बार भी लुधियाना में आकर कोरोना मरीजों और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों का हाल जानना जरूरी नहीं समझा। ज़िला प्रधान ने कहा कि एक साथ इतनी अधिक तादाद में लोगों के पॉज़िटिव आने और लगातार हो रही मौतों से स्पष्ट हो जाता है कि शहर के हर कोने में अब वायरस फैलने लगा है। ज़िला प्रधान ने पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू  व ज़िला प्रशाशन लुधियाना से मांग की कि पंजाब सरकार लुधियाना के तीन बड़े अस्पताल जिसमे DMC अस्पताल, CMC अस्पताल व फोर्टिस अस्पताल शामिल हैं इन तीनों हस्पतालों को COVID अस्पताल घोषित करे। इनका सारा कंट्रोल अपने हाथों में लेकर इन अस्पतालों को पूरी तरह कोविड ईलाज के लिए प्रयोग करे ताकि बिना बेड मिले जो मरीज हस्पताल के बाहर ही दम तोड़ रहे हैं उनको बचाया जा सके। ऐसी भयानक स्थिति से  अब आपात कदम आवश्यक हो गए हैं। इस मौके पर बैठक में ज़िला उपाध्य्क्ष योगेंद्र मकोल, सचिव कांटेंदु शर्मा, अश्वनी बहल, पंजाब युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष हर्ष शर्मा, युवा मोर्चा के प्रधान महेश शर्मा, सतीश कुमार, नवल जैन, पंकज जैन आदि मौजूद थे। 

Saturday, August 01, 2020

कोरोना का प्रकोप तेज़ी से जारी-लुधियाना में 203 नए मामले

Saturday: 1st August 2020 at 8:59 PM
 गत 24 घंटों में कोरोना ने लील ली लुधियाना में ही 10 ज़िंदगीयां 
लुधियाना: 01 अगस्त 2020: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::
कोरोना का कहर जारी है इसके बावजूद लोग लगातार लापरवाह बने हुए हैं। आज लुधियाना में कोरोना ने दस  इंसानी ज़िंदगियां निगल लीं हैं। इसके साथ ही 203 नए कोरोना केस बढ़ने की भी गंभीर खबर आई है। 
इसी बीच डिप्टी कमिश्नर श्री वरिन्द्र शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया है कि मिशन फतिह के चलते हमें कामयाबी भी मिल रही है। कोविड-19 के चंगुल से सुरक्षित निकलने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। बहुत से कोरोना मरीज़ तंदरुस्त भी हो रहे हैं और तंदरुस्त होने वाले ऐसे मरीजों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है। इसके बावजूद 1214 कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ लुधियाना ज़िले में मौजूद हैं। 
डीसी साहिब ने बताया कि विगत 24 घंटों में जो कुल 203 कोरोना पाज़िटिव मरीज़ जांच के दौरान सामने आये हैं उनमें से 193 जिला लुधियाना के हैं और अन्य 10 मरीज़ अन्य राज्यों और ज़िलों से सबंधित हैं। 
उन्होंने कहा कि अब तक जो 63740 सैंपल/नमूने लिए गए हैं उनमें से 61509 सैंपलों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। 
इस रिपोर्ट के मुताबिक 57620 सैंपल नैगेटिव पाए गए हैं और 2231 नमूनों की रिपोर्ट आणि अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि अभी तक लुधियाना के कुल मरीजों की संख्या 3439 है जबकि 450 मरीज़ अन्य ज़िलों/राज्यों से सबंधित हैं। 
उन्होंने गहरे दुःख के साथ कहा कि आज 10 मौतें भी हुई हैं जिनमें से 9 लुधियाना से हैं और एक मरीज़ अन्य ज़िलों राज्यों से सबंधित है। कोरोना पीड़ित मरीजों में से लुधियाना में मरने वाले लोगों की संख्या लुधियाना से 97 है और अन्य जिलों से 41 है। 
कोरोना को रोकथाम के लिए उठाये गए कदमों के अंतर्गत अब तक लुधियाना ज़िले में 22084 व्यक्तियों को घरों में एकांतवास किया गया है। इस मौजूदा समय में भी 4314 व्यक्ति एकांतवास में हैं।  आज भी 393 व्यक्तियों को घरों में एकांतवास किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन इस मामले में पूरी तरह सतर्क है। जब भी किसी पर ज़रा सा शक होता है कि वह कोविड-19का पीड़ित हो सकता है तो तुरंत ही उसके सैंपल जांच के लिए भेजे जा सकते हैं। इन सैंपलों की संख्या हर रोज़ सैंकड़ों में होती है। इस तरह आज भी 1158 संदेहपूर्ण व्यक्तियों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। जल्द ही इनके नतीजे भी सामने आ जायेंगे। उम्मीद है बहुत से लोग ठीक भी निकलेंगे। 
डीसी श्री शर्मा ने लुधियाना के नागरिकों को अपील की कि वे अपने घरों में ही रहें। इससे वे स्वयम भी सुरक्षित रहेंगे और अन्य लोगों को भी सुरक्षित रखने में सहायक साबित होंगें। इस तरह ऐसे सतर्क लोगों का योगदान अमूल्य होगा। 

बीजीपी लगातार उठा रही है "जन मुद्दे"

1st Aug 2020 at 4:14 PM
 राशन बांटने में लगाया बन्दरबांट का गंभीर आरोप  
लुधियाना: 1 अगस्त 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
प्लस मंच के कस्तूरी लाल भी कई जगहों पर पहुंचे राशन बांट देखने 
भारतीय जनता पार्टी निरंतर सक्रिय है और लगातार कोई न कोई मुद्दा उठा कर सियासत को गर्म रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी इस मामले में अब भी ढिलमुल नीति अपनाये हुए है।  अब भाजपा ने उठाया है राशन की बाँट का मुद्दा और आरोप लगाया है की इस मामले में भी हुए हैं बड़े घोटाले।  
बीजेपी ने कहा कि केंद्र सरकार ने  कोरोना संकट के चलते गरीब कल्याण फंड स्कीमों के अंतर्गत पंजाब के करीब डेढ़ करोड़ परिवारों को मुफ्त राशन भेजा था। नियमों के मुताबिक इसकी बांट पंजाब सरकार  द्वारा की जानी थी। इस राशन की बांट में शुरू से ही अनियमितताएं नज़र आने लगीं तो इस संबंध में शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी ने अपनी आवाज़ उठाते हुए कहा कि मुफ्त राशन बांटने में बंदर बांट हो रही है। गरीब परिवारों तक राशन नहीं पहुंच रहा है। इसको लेकर भाजपा जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंगल ने भी कई बार ज़िला प्रशासन व पंजाब सरकार को चेताया था। अब विभिन्न माध्यमों से खबर आ रही है कि प्रदेश कोविड कंट्रोल रूम द्वारा हिसाब मांगने पर राशन की 10 लाख से ज्यादा किटों का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है। गौरतलब है कि इन किटों में आटा, चावल, दाल, मसाले इत्यादि थे। इस मामले में खाद्य मंत्री भारत भूषण आशु के गृह ज़िले लुधियाना में ही उनकी नाक के नीचे लगभग 6 लाख किटों का हिसाब न मिलने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैंपन अमरिंदर से  सवाल पूछा कि राशन की 10.67 लाख किटों का हिसाब अब कौन देगा? ज़िला प्रधान पुष्पेंद्र सिंगल ने कहा कि इस घटना ने इस बात पर मोहर लगा दी है कि शुरू से ही पंजाब में राशन की बांट में घोटाला हो रहा है। भाजपा शुरू से ही यह मुद्दा उठा रही थी कि प्रशासन द्वारा राशन किटों को बांटने का काम कांग्रेसी नेताओं को सौंपा जा रहा है जिसमे गड़बड़ होने को आशंका है और अंत वही हो रहा है। भाजपा जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंगल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने केंद्रीय राशन में घोटाला करके गरीब परिवारों से धोखा किया है। ऐसी संकट की घड़ी में जब सभी ने अपनी स्मर्था से विभिन्न योगदान करके गरीब जरूरतमंदों की सहायता में लंगर लगाकर तथा राशन बांटकर अपने हाथ आगे बढ़ाए, तो पंजाब सरकार ने उनकी मदद करने की बजाय उनका राशन हड़प कर बड़ा घोटाला कर दिया। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राशन घोटाले में मोहल्ला, वार्ड तथा गांव से लेकर ऊपर तक कई कांग्रेसी कार्यकर्ता भी शामिल हैं । उन्होंने कहा कि अभी भी बहुत से कांग्रेसियों के घरों तथा गोदामों में पड़ा सरकारी राशन सड़ रहा है। भाजपा नेताओं ने कहा कि उन्हें पंजाब सरकार द्वारा इस मामले में छानबीन के लिए लगाई गई किसी भी एजेंसी पर विश्वास नहीं है। जिन डिप्टी कमिश्नरों की देखरेख में राशन वितरण का काम हुआ है, वह निष्पक्ष रुप से घोटाले की जांच कैसे करेंगे। इसलिए पंजाब सरकार को राशन के इस महाघोटाले की जांच सीबीआई से करवानी चाहिए। 
पंजाब सरकार के राशन घोटाले को लेकर आज भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष महेश शर्मा के आह्वान पर ज़िला लुधियाना के युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं द्वारा अपने अपने घरों में रह कर यह प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में भाजपा के जिला सचिव कांतेन्दु शर्मा, युवा मोर्चा पंजाब के उपाध्यक्ष हर्ष शर्मा, जिला भाजयुमो अध्यक्ष महेश शर्मा उपस्थित थे। अब देखना है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता भी मैदान में निकलते हैं या सत्ता की मस्ती में मस्त रहते हैं। 

Friday, July 03, 2020

कोरोना की आड़ में किया गया मज़दूर अधिकारों का हनन

3rd July  2020 at 1:35 PM
 कारखाना मज़दूर यूनियन ने भी किये रोष प्रदर्शन 
लुधियाना:03 जुलाई 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
आज विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा देशव्यापी रोष-प्रदर्शनों के आह्वान के तहत कारख़ाना मज़दूर यूनियन द्वारा लुधियाना के फेस 4, फोकल प्‍वाइंट में रोष-प्रदर्शन किया गया। धरना प्रदर्शन के साथ साथ इलाक़े में रोष मार्च भी किया गया।  
वक्ताओं ने केंद्र की मोदी सरकार और पंजाब समेत विभिन्न राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया। वक्ताओं ने केंद्र और राज्यों सरकारों पर गंभीर आरोप लगाया कि कोरोना के बहाने पूँजीपतियों के पक्ष में मज़दूर वर्ग के अधिकारों का हनन तेज़ी से तेज़ किया गया। इन सरकारों ने लोगों को कोरोना में उलझा कर उनका शोषण किया है। 
इन रोष प्रदर्शनों के दौरान बुलंद आवाज़ में मांग की गई कि श्रम क़ानूनों में संशोधनों को रद्द करने, श्रम अधिकार लागू कराने, श्रम क़ानूनों का उल्लंघन करने वाले पूँजीपतियों को सख़्त सज़ाएं देने, लॉकडाउन के कारण मज़दूरों के हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा, छंटनियों पर रोक लगाने, बंद और मंदी के समय की पूरी तनख़्वाह देने, बेरोज़गारों को बेरोज़गारी भत्ता देने, सभी बीमारियों के मुफ़्त इलाज, कच्चे स्वास्थ्य कर्मियों को पक्का करने, सभी स्वास्थ्य सुविधाओं के सरकारीकरण, सभी मज़दूरों को मुफ़्त अनाज देने, जन-वितरण प्रणाली का प्रसार करने, कोरोना के बहाने पूँजीपतियों को राहत पैकेज के नाम पर मेहनतकश जनता का पैसा लुटाना बंद करने और उन पर भारी टेक्स लगाकर मज़दूरों-मेहनतकशों को सुविधाएँ देने, महँगाई पर लगाम लगाने के लिए सचमुच के गंभीर कदम उठाये जाएं। 
वक्ताओं ने केंद्र की मोदी हुकूमत को फासीवादी हुकूमत करार देते हुए जनवादी अधिकारों का हनन बंद करने, झूठे पुलिस मामलों में जेलों में बंद किए गए जनवादी कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों को तुरंत रिहा करने, नाजायज गिरफ़्तारियाँ बंद करने की माँग भी की। प्रदर्शन को यूनियन के प्रधान लखविंदर के अलावा यूनियन नेताओं जसमीत, विमला, नौजवान भारत सभा के नवजोत आदि ने संबोधित किया।

Friday, June 12, 2020

ऑनलाइन और ऑफलाइन वर्गों में बढती दूरी बेहद चिंतनीय

  12th June 2020 at 6:14 AM
 कोरोना संकट के बाद दुनिया में डिजिटल सहयोग का नया रोडमैप 
11 जून 2020//एसडीजी  
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल टैक्नॉलॉजी के लाभ से वन्चित लोगों को स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी अहम जानकारी का ना मिल पाना उनके लिए जीवन-मरण का सवाल बन गया है। टैक्नॉलॉजी क्षेत्र में आ रहे तेज़ बदलावों से टिकाऊ विकास एजेंडा पर पड़ने वाले असर पर गुरुवार को चर्चा हुई, साथ ही डिजिटल सहयोग पर एक नया रोडमैप पेश किया गया है। 
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि डिजिटल सहयोग की ज़रूरत और तात्कालिकता से ध्यान हटाने के बजाय मौजूदा कोविड-19 संकट इसकी अहमियत को ही दिखा रहा है। 
संयुक्त राष्ट्र महासभा में गुरूवार को एक वर्चुअल उच्चस्तरीय चर्चा का आयोजन हुआ जिसमें टैक्नॉलॉजी क्षेत्र में तेज़ गति से आ रहे बदलावों से टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार-विमर्श हुआ।   

यूएन महासचिव ने कहा कि महामारी से निपटने की जवाबी कार्रवाई के केन्द्र में डिजिटल टैक्नॉलॉजी उभरी है – वैक्सीन पर शोध, ऑनलाइन माध्यमों पर पढ़ाई-लिखाई, ई-कॉमर्स, घर बैठकर दफ़्तर का काम करना, यानि जीवन के लगभग हर पहलू में इसका योगदान दिखाई देता है. 

लेकिन उन्होंने चिन्ता जताई कि ऑनलाइन सम्पन्न लोगों और ऑफ़लाइन यानि डिजिटल सुविधाओं से वंचित लोगों के बीच बढ़ती दूरी विषमता का एक नया चेहरा बन कर उभर रही है. 

कोविड-19 के बाद का रोडमैप
महासचिव गुटेरेश ने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोरोनावायरस संकट के बाद की दुनिया में समाज पर पड़ने वाले प्रभावों और उनक निहितार्थों को अभी समझने का प्रयास ही किया जा रहा है.

लेकिन यह तय है कि हम जैसे-जैसे उबरेंगे और पुनर्निर्माण करेंगे, डिजिटल टैक्नॉलॉजी पहले से कहीं अधिक अहम होगी. 

उन्होंने आशंका जताई कि डिजिटल माध्यमों से वंचित समुदाय इस प्रक्रिया में बहुत पीछे छूट जाएँगे.

ग़ौरतलब है कि डिजिटल सहयोग पर उच्चस्तरीय पैनल ने वर्ष 2019 में एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें मौजूदा डिजिटल खाई को पाटने की सिफ़ारिशें पेश की गई थीं.

साथ ही डिजिटल सन्दर्भ में मानवाधिकारों की रक्षा करने, साइबर सुरक्षा व भरोसा क़ायम करने और डिजिटल सहयोग के लिए एक नया वैश्विक ढाँचा खड़ा करने की बात शामिल थी.

इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि टैक्नॉलॉजी के हानिकारक पक्षों का समाधान सुनिश्चित करते हुए उसकी ख़ूबियों को सँवारा जाना होगा. 

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि इन सभी पहलुओं को गुरुवार को डिजिटल सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा पेश नए रोडमैप में शामिल किया गया है. 

“हम डिजिटल युग के लाभों का पूर्ण इस्तेमाल तब तक नहीं कर सकते जब तक डिजिटल खाइयों को पाटने और नुक़सानदेह पहलुओं को दूर करने के लिए वैश्विक सहयोग को संगठित ना किया जाए.”

वैश्विक दूरदृष्टि और नेतृत्व की तत्काल ज़रूरत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इस रोडमैप में सभी से ठोस कार्रवाई का आहवान किया गया है ताकि डिजिटल युग में लोगों के साथ जुड़ा जा सके, उनका सम्मान और रक्षा सुनिश्चित की जा सके. 

यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इस अभूतपूर्व लम्हे में हमने अवसरों का सही इस्तेमाल किया या नहीं, यह निर्णय भावी पीढ़ियाँ करेंगी. 

टैक्नॉलॉजी क्षेत्र में त्वरित बदलाव
महासभा अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बाँडे ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में चर्चा का उदघाटन करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण सभी को अपने काम करने, पढ़ने, सीखने, दुख जताने और उबरने के तरीक़ों में बदलाव लाने के लिए मजबूर होना पड़ा है. 

यूएन महासभा प्रमुख के मुताबिक डिजिटल खाई से तात्पर्य महज़ डिजिटल साधनों की उपलब्धता में विषमताओं का मौजूद होना ही नहीं है, बल्कि इससे भी है कि टैक्नॉलॉजी में तेज़ी से हो रहे बदलाव से ये असमानताएँ और ज़्यादा व्यापक हो रही हैं. 

“जागरूकता की कमी और इण्टरनेट कनेक्टिविटी की ऊँची क़ीमतों के कारण शिक्षा के अवसर खो सकते हैं.”

उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता इस सदी का एक निर्धारक पहलु है और यही तय करेगा कि समाज मानवाधिकारों के हनन और जलवायु संकट जैसी भावी चुनौतियों का सामना किस तरह करते हैं. 

महासभा अध्यक्ष ने ध्यान दिलाया कि ग़रीबी का उन्मूलन करने (एसडीजी-1), भुखमरी का अन्त करने (एसडीजी-2) और सभी के लिए गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चित करना (एसडीजी-4) सहित अन्य टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल किया जाना बेहद आवश्यक है. 

इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की ज़िम्मेदारी बनती है कि टैक्नॉलॉजी क्षेत्र में तेज़ गति से हो रहे बदलावों और उनके आर्थिक, सामाजिक व नैतिक पहलुओं का ख़याल रखा जाए और ज़रूरत पड़ने पर कार्रवाई हो. 

यूएन महासभा प्रमुख तिजानी मोहम्मद-बाँडे ने आगाह किया कि डिजिटल जगत में महिलाओं व लड़कियों की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने की रफ़्तार बढ़ानी होगी. 

उनके मुताबिक गुणवत्तापरक व किफ़ायती शिक्षा और अन्य सांस्कृतिक मानकों के कारण बहुत सी महिलाएँ ऐसे क्षेत्रों में आगे नहीं आ रही हैं.

वर्ष 2020 में टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा के मुताबिक कार्रवाई के दशक की शुरुआत की गई है.

उन्होंने बताया कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जो संकल्प लिए गए थे उन्हें आँखों से ओझल नहीं होने देना है.

साथ ही टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने की रफ़्तार को तेज़ करने के लिए उभरती टैक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करना होगा. 

Thursday, May 28, 2020

कोरोना +ve मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच तेज़

होशियारपुर में लिए गए 49 नए सैंपल: सिविल सर्जन
होशियारपुर: 27 मई 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
जिले में कोविड-19 संबंधी स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डा. जसवीर सिंह ने बताया कि आज जिले में पाजीटिव मरीजों के संपर्क में आने वाले 49 नए सैंपल लिए गए है। उन्होंने बताया कि अब तक 2097 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें से 1822 सैंपल नैगेटिव आए हैं व 135 सैंपलों की रिपोर्ट आनी बाकी है। उन्होंने कहा कि अभी तक 29 सैंपल इनवैलिड पाए गए हैं व जिले में 111 कोरोना पाजीटिव मरीज सामने आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 89 मरीज ठीक हो चुके हैं व पांच की मौत हो चुकी है।  
सिविल सर्जन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की हिदायतों के मुताबिक घर से जरुरी काम के लिए बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति के लिए मुंह पर मास्क लगाना जरुरी है व यदि कोई इसका पालन नहीं करता तो उसे 200 रुपए जुर्माना किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वाले व्यक्तियों को 100 रुपए जुर्माना किया जाएगा। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सभी लोग कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए सरकार की हिदायतों का पालन करना यकीनी बनाएं।

Monday, May 18, 2020

22 मई को पंजाब में भी रोष प्रदर्शन करने का ऐलान

Monday: 18th May 2020:4:26 PM
16 जन संगठनों द्वारा देश स्तरीय आह्वान पर फैसला 
चण्डीगढ़:18 मई 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::  
ट्रेड यूनियनों द्वारा 22 मई को देश भर में रोष प्रदर्शन करने के आह्वान के तहत पंजाब के 16 मज़दूर-मुलाज़िम, किसान, नौजवान, विद्यार्थी संगठनों ने भी राज्य भर में रोष प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह जानकारी आज मज़दूर नेताओं राजविन्दर सिंह, लछमण सिंह सेवेवाला, जगरूप सिंह, प्रमोद कुमार और किसान नेताओं जोगिन्द्र सिंह उगराहाँ, कंवलप्रीत सिंह पन्नू द्वारा जारी सांझे प्रेस विज्ञप्ति में दी गई। नेताओं ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार तथा विभिन्न राज्य सरकारों ने कोरोना संकट को बहाना बना कर मज़दूर वर्ग पर तीखा राजनीतिक-आर्थिक-सामाजिक हमला किया है। विभिन्न राज्यों में 8 घंटों की जगह 12 घंटे कार्यदिवस लागू करने समेत अन्य क़ानूनी श्रम अधिकारों का हनन किया गया है और किया जा रहा है। पंजाब में भी बारह घंटे कार्यदिवस लागू करने तैयारी है। भाजपा की उत्तर-प्रदेश सरकार ने तो लगभग सभी श्रम कानून ख़त्म करने का ऐलान कर दिया है। ज़रूरत तो इसकी थी कि कमज़ोर श्रम कानूनों को मज़दूरों के पक्ष में मज़बूत बनाया जाये परन्तु सरकारें न सिर्फ़ इनको ओर कमज़ोर बनाने पर तुलीं थी बल्कि अब तो ख़त्म ही कर रही हैं। यह प्रक्रिया पहले ही जारी थी परन्तु कोरोना संकट के बहाने और लॉकडाउन का फ़ायदा उठा कर इस मज़दूर विरोधी और देशी-विदेशी पूँजीवादी एजंडे को अंजाम दिया रहा है। इस तरह सरकारें पूँजीपतियों को मज़दूरों से जैसे मर्ज़ी लूट-खसोट और अन्य बेइन्साफ़ी करने की पूरी छुट दे रही हैं।
          नेताओं ने कहा सरकारों ने कोरोना संकट के हल के लिए उचित कदम उठाने की जगह इसको और भी गंभीर बनाया है। उन्होंने दोष लगाया कि हुकूमत द्वारा कोरोना से बचाव के बहाने जनता पर थोपे गए ग़ैर-जनवादी और दमनकारी लॉकडाउन के ज़रिए मज़दूरों-मेहनतकशों को भुखमरी, शारीरक कमज़ोरी, कोरोना और अन्य बीमारियों से नुकसान का ख़तरा बढ़ाने, पैदल व साईकिलों के ज़रिए लंबे सफरों, पुलिस दमन, नाजायज गिरफ़्तारियों, हादसों, आत्महत्यों आदि मुसीबतों के मुँह में धकेलने की आपराधिक भूमिका निभाई गई है जिसके लंबे समय तक भयानक नतीजे मज़दूरों तथा अन्य जनता को भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याएँ दूर करने की जगह सरकारें ‘‘देश’’ तथा ‘‘राज्य ’’ को कोरोना और लॉकडाउन से हुए नुकसान का बहाना बना कर आर्थिक पैकेज के नाम पर पूँजीपतियों को सरकारी ख़ज़ाना लुटा रही हैं और बिजली क्षेत्र समेत तमाम जन-सेवाओं के उपक्रमों के मुकम्मल निजीकरण के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। सरकारें जनता पर नए टेक्स थोपने की तैयारी कर रही हैं। खेती को राहत के नाम पर खेती उपभोग उत्पाद के उद्योगपतियों को लुटाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ़ जनता को कोरोना संकट, लॉकडाउन और अन्य भयानक मुसीबतों के मुँह में धकेल कर बड़ा राजनीतिक-आर्थिक हमला किया जा रहा है। संगठनों ने मज़दूर वर्ग, अन्य सभी मेहनतकशों तथा जनवादी लोगों को हुक्मरानों के इस हमले के ख़िलाफ़ ज़ोरदार संघर्ष और 22 मई के प्रदर्शनों में सावधानियाँ रखते हुए शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
इन 16 संगठनों में टेक्स्टाल-हौज़री कामगार यूनियन, पॉवर कॉम एंड ट्रांसको ठेका मुलाज़िम यूनियन, पंजाब खेत मज़दूर यूनियन, टेक्निकल सर्विसज़ यूनियन, भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहाँ), किसान संघर्ष कमेटी पंजाब, मोल्डर एंड स्टील वर्कर्ज़ यूनियन, जल स्पलाई एवं सेनिटेशन कंट्रैक्ट वर्कर्ज़ यूनियन पंजाब (रजि. नं 31), नौजवान भारत सभा (ललकार), पी.एस.यू. (शहीद रंधावा), नौजवान भारत सभा, पी.एस.यू. (ललकार), कारख़ाना मज़दूर यूनियन, गुरू हरगोबिंद थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत ठेका मुलाज़िम यूनियन आज़ाद, ठेका मुलाज़िम संघर्ष कमेटी पॉवर कॉम (ज़ोन बठिंडा) और पंजाब रोडवेज़ /पनबस कंट्रैक्ट वर्कर्ज़ यूनियन शामिल हैं।

Sunday, May 17, 2020

पलायन: यह पंजाब सरकार के लिए एक सुनहरा मौका है

 मज़दूरों को यह कहने का-कि "हम हैं न आपके साथ" 
कर्मभूमि छोड़ कर जा रहे मज़दूरों की तस्वीरें पंजाब स्क्रीन के लिए एम एस भाटिया ने क्लिक कीं 
लुधियाना: 17 मई 2020: (अमृत पाल सिंह 'गोगिया'//पंजाब स्क्रीन)::
अमृतपाल गोगिया 
करोना जैसी आपदा की इस संकट की घड़ी में जहाँ सारा देश त्राहि-त्राहि कर रहा है वहीं पंजाब सरकार ने अपना पूरा जोर लगा रखा है। इस दृढ़ निश्चय के साथ की हमारे बिहार और उत्तर प्रदेश की कामगर अपने-अपने घरों को सुरक्षित पहुँच जाएं। बहुत अच्छी तायदाद में लोगों को तयशुदा स्थान से बसों द्वारा सुरक्षित तरीके से उठाकर उनको रेलवे स्टेशन पर छोड़ा जा रहा है। यह एक मानवीय कदम है। जिससे उनके अन्दर आयी हुई असुरक्षा की भावना और जो अपनों से मिलने की अधीरता जो उत्पन्न हुई है। उसको थोड़ी रहत मिलेगी। 
उनकी भावनाओं की कदर करना हमारी मानवीय और सामाजिक जिम्मेवारी भी है। 
और अबतक हम जो भी कर रहे हैं वह एक सराहनीय कदम है। बहुत अच्छे प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन इसमें काफी तेजी लाने की जरूरत है। और भी अच्छे प्रयास किये जा सकते हैं। हमारे पास साधनों की कमी नहीं है मगर हम उसका उपयोग नहीं कर रहे। सिवाय पुलिस कर्मियों, सुरक्षा कर्मचारियों, स्वास्थ कर्मियों, डॉक्टर और उनके सहयोगियों के अलावा सारे के सारे अपने अपने घरों में बैठे मुफ्त की रोटियां तोड़ रहे हैं। यह एक आपातकालीन स्थिति है और अगर हम उनका इस्तेमाल अभी नहीं करेंगे तो कब करेंगे। हमें अपनी इच्छाशक्ति को जगाना है। बस! समझो काम हो गया। 
जहाँ बहुत अच्छी तायदाद में लोगों को तयशुदा जगह से बसों द्वारा सुरक्षित तरीके से उठाकर उनको रेलवे स्टेशन पर छोड़ा जा रहा है, वहीं हमारे कुछ कामगर/मजदूर पैदल ही या साइकिल द्वारा अपने गंतव्य की ओर निकल पड़े हैं जो उनकी अशंतुष्टि को दर्शाता है। यह अमानवीय है। हमें इसके लिए संवेदनशील होने की जरुरत है। हमें एक समय पानी नहीं मिलता तो हम तड़प जाते हैं और ये मज़दूर बेचारी कड़कती धूप में, कुछ तो नंगे पाँव अपने परिवारों, नन्हे नन्हे बच्चों के साथ, कुछ तो गर्भवती औरतें भी साथ चल रही हैं। कोई व्यवस्था नहीं है। यह घोर मानवीय अपराध है हमें इसको समझना होगा। इसके दूरगामी दुष्परिणाम होंगे। इसके लिए यह समाज हमें कभी माफ़ नहीं करेगा और इतिहास इसका गवाह बनकर काफी लम्बे समय तक हमारे साथ-साथ चलेगा। 
यह हमारी जिम्मेवारी है और मानवीय भी है कि हम उनको ऐसा करने से रोकने के लिए तुरंत कुछ कारगर कदम उठाएं जो प्रशंसनीय हों। यह पंजाब सरकार के लिए एक सुनहरा मौका है अपने आपको एक नयी ऊँचाई पर स्थापित करने का-कि "हम हैं न आपके साथ"
आज वह बिहार और उत्तर प्रदेश के कामगारों/मजदूरों का दिल जीत ले। पंजाब सरकार अगर ऐसा कर पाई तो निश्चित ही वह इन्हीं कामगारों/मजदूरों के माध्यम से यह साबित कर पायेगी कि वह एक सोच है जो मानवीय अधिकार के लिए लड़ती है और गरीब से गरीब व्यक्ति की भी चिंता करती है। अगर पंजाब ने ऐसा कर दिखाया तो निश्चय ही यह हमारी पंजाबियत की जीत होगी, हमारे पंजाब की जीत होगी। हमारी सरकार की जीत होगी और यह उन्हीं कामगारों/मजदूरों के माधयम से सारे देश में यह चर्चित होगा तो यह बात भी भी तय है कि मीडिया भी चुप बैठने वाली नहीं है और
मीडिया भी मज़बूर हो जायेगा यह बताने के लिए कि पंजाब सरकार और इसकी टीम ने कितनी मेहनत और लगन के साथ इस मुश्किल की घड़ी में देश का साथ दिया है। पंजाब की लोकप्रियता अचानक एक नई ऊंचाई को छूएगी जो कि अन्थया असंभव है। जिससे हमारी नयी आर्थिक व्यवस्था का उदय होगा और यह एक नया मार्ग प्रशस्त करेगा जो यह तय करेगा कि भारत की ओर रुख करने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां किस राज्य की ओर रुख करेंगी। यह तो एक सुनहरी मौका है और इसका पूरा-पूरा फ़ायदा उठाना चाहिए। इसका फर्क यह पड़ेगा कि दूसरे देशों के निवेशकों को पंजाब में सहज आमंत्रित किया जा सकेगा।  
हम खुशकिस्मत हैं कि हमारे प्रदेश में धार्मिक स्थलों की कमी नहीं है। जैसे गुरूद्वारे, राधा स्वामी सत्संग डेरे और भी काफी हैं। जहाँ हम कामगार को रास्ते में ही, जहाँ तक वो पहुंचे हैं। उनको वहीं से सुरक्षा कर्मचारियों और बसों की मदद से उनको नज़दीकी सेंटर में पहुंचाया जाये 
और वहाँ उनके रहने और खाने पीने के अलावा उनकी सेहत सुरक्षा का पूरा-पूरा इंतज़ाम किया जाये और उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाने के लिए उनकी अग्रिम बुकिंग में उनका पूरा-पूरा सहयोग किया जाये इसके लिए हमारे पास सरकारी कर्मचारी, स्कूल टीचर जो घर पर बैठे भी रोटियां तोड़ रहे हैं, उनको इस्तेमाल किया जा सकता है। 
हमारे पास ट्रेनों की कमी नहीं है। पूरी ट्रैन व्यवस्था ठप पड़ी है। सारे रेलवे कर्मचारी वापस काम पर लगाए जा सकते हैं। जो सरकारी बसें जो विभिन्न स्थलों पर मात्र खड़ी हैं। उनका स्टाफ घर पर बैठा है। उनको इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे हम चुनाव के दौरान करते हैं। सरकारी बसें, प्राइवेट बसें, माल वाहक गाड़ियां। इन सब का पूरा-पूरा फ़ायदा उठाया जाये। इस बात को पूर्णतः सुनिश्चित और प्रचारित किया जाये कि एक भी कामगार/मजदूर पंजाब से पैदल या साइकिल पर नहीं निकला और इसका पूरा-पूरा फ़ायदा भविष्य में पंजाब को मिलेगा। यहाँ से वापस गए हुए कामगारों /मजदूरों में यह विशवास स्थापित करेगा कि पंजाबियों जैसा कोई नहीं और हमारे कामगार/मजदूर इस बात को दुनिया में फैलाएंगे कि पंजाब सरकार ने कन्धे से कन्धा मिलाकर हमारी मदद की।
कुछ सुझाव हैं जिनपर ध्यान दिया जाना चाहिए। 
1. कामगारों/मजदूरों को उनके गंतव्य स्थान पर पहुँचाने के लिए ट्रेनों की संख्या में काफी वृद्धि की जाये और इस काम को प्राथमिकता के आधार पर किया जाये 
2. सुनिश्चित स्थानों की गिनती में वृद्धि की जाये ताकि उनको ज्यादा परेशानी न हो। 
3. बजाय कि ट्रेनें जो कि बड़े स्टेशनों से चलती हैं। उनको हर छोटे छोटे स्टेशनों से चलाया जाये ताकि कहीं भी बहुत भीड़ इकट्ठी न हो। 
4. अगले स्टेशनों पर पानी और खाने की व्यवस्था रेलवे कैटरिंग द्वारा की जाये।ताकि कोई भूख से बेचैन न हो। 5. जो लोग पैदल या साइकिल पर निकल गए हैं उनको राज्य के अंदर ही रोका जाये और किसी भी नजदीकी तयशुदा स्थान पर ले जाया जाये। 
6. उनके रहने, खाने पीने, स्वास्थ सेवा और उनकी ट्रेनों की बुकिंग का पूरा इंतजाम वहीँ से किया जाये और वहीँ से नजदीकी रेलवे स्टेशन का इस्तेमाल किया जाये 
7. जिनके पास जो भी समान या साइकिल हो उसको साथ ले जाने की इजाजत हो। उनको परेशान न किया जाये। 
8. ऐसा करने से उनमें सुरक्षा की भावना स्थापित होगी जो कि देश, समाज और पंजाब के हित में होगी। 

अमृत पाल सिंह 'गोगिया'
99887 98711 

Wednesday, April 29, 2020

पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा कर्फ्यू में दो हफ्ते की और वृद्धि का ऐलान

गैर सीमित जोनों में कल से मिलेगी थोड़ी राहत
*पंजाब में कर्फ्यू अब 17 मई तक जारी रहेगा 
*परन्तु साथ ही रहेगी सतर्क नज़र
*कल से हर सुबह 4 घंटे रोटेशन के साथ खुलेंगी दुकानें
*राज्य की अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए विशेष प्रयास 
*मजदूरों के फैक्ट्री के अंदर या पड़ोस में प्रबंधों के साथ उद्योग खोलने की अपील की
चंडीगढ़: 29 अपैल 2020: (पुष्पिन्दर कौर//पंजाब स्क्रीन)::
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बुधवार को कर्फ्यू में वृद्धि का ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में 3 मई के बाद दो हफ्ते के लिए और कर्फ्यू लागू रहेगा परन्तु कल से लाॅकडाउन की थोड़ी बंदिशें जरूर हटाई जा रही हैं। यह थोड़ी छूटें भी कोविड-19 के एहतियातों का पालन करते हुए सिर्फ गैर सीमित और गैर रेड जोनों के लिए दी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को कोविड की स्थिति में से बाहर निकालने के लिए बनाई गई माहिरों की समिति की रिपोर्ट और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों द्वारा प्राप्त हुई जानकारी के आधार पर यह जरूरी है कि लाॅकडाउन की बंदिशें अभी थोड़े समय और जारी रखी जाएँ।
पंजाब में कर्फ्यू / लाॅकडाउन अब 17 मई तक जारी रहेगा परन्तु इसके साथ ही कल से रोजमर्रा की प्रातःकाल 7 से 11 बजे तक थोड़ी छूटें जरूर मिलेंगीं। सीमित और रेड जोन वाले क्षेत्रों में पहले की तरह ही लाॅकडाउन की बंदिशें मुकम्मल तौर पर सख्ती के साथ लागू रहेंगी।
राज्य के लोगों के नाम जारी संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति की दो हफ्तों बाद समीक्षा की जायेगी और यदि महामारी कंट्रोल में रही तो बाद में और ढ़ील घोषित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री द्वारा थेड़ी राहतें देने के किये ऐलान के अंतर्गत कुछ दुकानों को सम्बन्धित क्षेत्रों में रोटेशन के साथ खोलने की आज्ञा होगी। यह दुकानें रोजमर्रा की प्रातःकाल 7 से 11 बजे तक 50 प्रतिशत स्टाफ की क्षमता के साथ खोली जा सकेंगी। डिप्टी कमीश्नरों को आदेश दे दिए गए हैं कि वह मुख्यमंत्री के निर्देशों के अंतर्गत दुकानों को खोलने के लिए रोटेशनल समय सारणी बना लें यह आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों के लागू होने के चार दिन बाद किये गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाॅकडाउन / कर्फ्यू प्रातःकाल 11 बजे से पहले की तरह जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह सामाजिक दूरी का पालन करते हुए तय समय तक अपने घरों में लौट जाया करें। छूट वाले समय के दौरान बाहर निकलने वाले व्यक्ति को मास्क पहनना और दूसरे व्यक्ति से 2 मीटर की दूरी बनाए रखनी होगी। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह राहत लोगों की सुविधा के लिए दी गई है। वह इस राहत के समय के दौरान दोस्तों या दूसरों को न मिलें। उन्होंने कहा कि अगर दो हफ्तों में स्थिति में सुधार हुआ तो हम और कदम उठा सकते हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा घोषित की गई सीमित ढील में कल से मल्टी ब्रांड और सिंगल ब्रांड माॅल्ज को छोड़कर सभी रजिस्टर्ड दुकानों को वर्करों की 50 प्रतिशत संख्या के साथ प्रातःकाल 7 बजे से प्रातःकाल 11 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई है। नयी हिदायतों के मुताबिक इस समय दौरान शहरी इलाकों में सभी अकेले दुकानों, नेबरहुड शाॅप्स और रिहायशी कम्पलैक्सों में दुकानों को खोलने की भी आज्ञा दी गई है। इन हिदायतों में स्पष्ट किया गया है कि सैलून, नाई की दुकानें आदि सेवाएं बंद रहेंगी। इसी तरह लाॅकडाउन के समय के दौरान ई-काॅमर्स कंपनियों को सिर्फ जरूरी वस्तुएँ मुहैया करवाने की इजाजत होगी।
उद्योग को खोलने के लिए अपनी सरकार की रूचि को प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने जो उद्योग कामगारों के रहने का बंदोबस्त कर सकते हों या फिर कामगार के साथ लगते इलाकों से आते हैं, को अपने यूनिट चलाने की अपील की जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बहाल किया जा सके।
लाॅकडाउन के समय के दौरान बाहर के राज्यों में बड़ी संख्या में फंसे पंजाबियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इनको वापस लाना उनकी सरकार की जिम्मेदारी बनती है परन्तु इनको 21 दिनों के लिए एकांतवास में रहना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि राज्य ने सभी जिलों में इनके एकांतवास के लिए बंदोबस्त किये हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में एन.आर.आईज की घर वापसी के दौरान पंजाब में समस्या गंभीर हुई थी और इसके बाद निजामूद्दीन के समागम में शामिल होने वालों की राज्य में वापसी होने पर यह समस्या और बढ़ गई थी। उन्होंने कहा कि राज्य यह सहन नहीं कर सकता कि दूसरे राज्यों से आने वालों से हालात एक बार फिर बेकाबू हो जाएँ। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों से अपने घर आने वालों को एकांतवास में रखना लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऐलान की गईं राहतों से पंजाब के लोगों को फायदा होगा जो पिछले 38 दिनों से कर्फ्यू की अलग-अलग बंदिशों में रह रहे हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने लोगों के लिए इसको कठिन समय बताया जिन्होंने अपने लिए, परिवारों और राज्य के लिए बड़ा त्याग किया है। उन्होंने कहा कि महामारी को काबू करना लाजिमी है जिससे राज्य में अब तक 330 व्यक्ति प्रभावित हुए हैं।
कोरोनावायरस को लम्बी लड़ाई बताते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि चाहे विभिन्न माहिरों की इस बारे में अलग-अलग राय है परन्तु ऐसे संकेत मिलते हैं कि कोरोनावायरस का संकट जुलाई / अगस्त तक या यहाँ तक कि सितम्बर तक जारी रहेगा। कोरोनावायरस की मार से किसी भी मुल्क के न बचने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस रोग से विश्वभर में बड़े स्तर पर जानें गई हैं और अकेले अमरीका में लगभग 50000 मौतें हुई हैं और अब तक 10 लाख केस सामने आए हैं। उन्होंने इंग्लैंड, जर्मनी और कैनेडा का उदाहरण देते हुए लगातार चैकस रहने की जरूरत पर जोर दिया।

Tuesday, April 28, 2020

जंग कोरोना से है तो महत्वपूर्ण है यह होम्योपैथिक दवा

Updated:29th April 2020 at 11:26 AM
कोरोना की जंग लड़ रहे योद्धाओं की इम्यून शक्ति को बढ़ाएगी यह दवा 
लुधियाना: 28 अप्रैल 2020: (उत्तम राठौर//पंजाब स्क्रीन)::
डा. विपन गुप्ता
कोरोना का खतरा इस समय हर वर्ग को है। हर उम्र, हर धर्म, हर जाति, हर वर्ग इस खतरे की ज़द में है। कोई भी इससे बचता नज़र नहीं आता। इसका सामना करने के लिए विज्ञान की अलग  अलग शाखाओं में बहुत ही तेज़ी के साथ निरंतर काम हो रहा है। पूरी दुनिया की प्रयोगशालाएं लगातार बिना रुके इस का इलाज खोजने में लगी हैं। अभी तक जो महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं उनमें एक बात स्पष्ट है कि कोरोना से बचने और इससे लड़ने के लिए अपनी रोग प्रतिरोधक शक्ति अर्थात इम्यून शक्ति को मज़बूत रखना आवश्यक है। यह शक्ति मज़बूत बनी रहे तो कोरोना का हमला नाकाम हो जाता है।अंग्रेजी वाले इसे इम्युनिटी भी बोलते हैं। इम्युनिटी को कैसे मज़बूत रखना है इस मकसद की एक विशेष दवा यहाँ के पुलिस जवानों को भी वितरित की गई।यदि यह शक्ति अर्थात इम्युनिटी मज़बूत हो तो कोई भी रोग नज़दीक नहीं आता। इम्यून शक्ति हर युग और हर उम्र में हमेशां एक वरदान रही है। इसे बनाये रखने और बढ़ाने के फार्मूले स्वदेशी थ्रेपियों में भी रहे और अंग्रेजी मेडिकल सिस्टम में भी। बहुत देर से जीवन का आधार बनी हुई यह शक्ति बहुत से मामलों में अभी तक एक रहस्य ही है। किस व्यक्ति को इस की कितनी आवश्यकता है  तक नहीं लगाया जा सका। हर वक्त में इसकी ज़रूरत उसके हिसाब से अलग अलग हो सकती है। इसके घटने बढ़ने के अनुमान तो कभी कभी सतर्क व्यक्तियों को महसूस हो भी लेकिन इसके बावजूद कोई विशेष स्थिति अभी  सुनिश्चित नहीं हो सकी। शरीर को इसकी ज़रूरत हर पल रहती ही है यह  बात पूरी तरह तय है। 
उल्लेखनीय है कि प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) किसी जीव के भीतर होने वाली उन जैविक प्रक्रियाओं का एक संग्रह है, जो रोगजनकों और अर्बुद कोशिकाओं को पहले पहचान और फिर मार कर उस जीव की रोगों से रक्षा करती है। यह विषाणुओं से लेकर परजीवी कृमियों जैसे विभिन्न प्रकार के एजेंट की पहचान करने मे सक्षम होती है, साथ ही यह इन एजेंटों को जीव की स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों से अलग पहचान सकती है, ताकि यह उन के विरुद्ध प्रतिक्रिया ना करे और पूरी प्रणाली सुचारु रूप से कार्य करे। इस तरह इसके कामकाज को देख कर इस की विशिष्टता का अनुमान लगाया जा सकता है। 
यहां यह बताना भी आवश्यक है कि शरीर की प्रतिरक्षा-प्रणाली में खराबी आने से रोग अक्सर ही शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। प्रतिरक्षा-प्रणाली में खराबी को इम्यूनोडेफिशिएंसी कहते हैं। इम्यूनोडेफिशिएंसी या तो किसी आनुवांशिक रोग के कारण हो सकता है, या फिर कुछ खास दवाओं या संक्रमण के कारण भी संभव है। 
फिर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का इस सिस्टम और प्रतिरक्षा प्रणाली के अध्ययन को प्रतिरक्षा विज्ञान (इम्म्यूनोलॉजी) का नाम दिया गया है। अब इसकी शिक्षा बहुत वशिष्ठ तौर पर होती है। इसकी बिलकुल अलग से एक अहमियत है। अन्य प्रणालियों के साथ साथ अब इसे भी पूरी तरह समझना बहुत आवश्यक है। 
गौरतलब है कि संक्रामक रोगों का निवारण करने की शरीर की शक्ति को प्रतिरक्षा (Immunity) कहते हैं। किंतु सभी शक्तियाँ प्रतिरक्षा में शामिल नहीं होती। अब यूं तो त्वचा भी जीवाणुओं को शरीर में प्रविष्ट नहीं होने देती। आमाशयिक रस का अम्ल जीवाणुओं को नष्ट कर देता है, किंतु इस सब के बावजूद यह प्रतिरक्षा के अंतर्गत नहीं आता। ये शरीर की रक्षा के प्राकृतिक साधन हैं। प्रतिरक्षा बिलकुल ही अलग है। प्रतिरक्षा से अर्थ है ब्राह्य प्रोटीनों को रक्त में उपस्थित विशिष्ट वस्तुओं द्वारा नष्ट कर डालने की शक्ति। जीवाणु जो शरीर में प्रविष्ट होते हैं, उनके शरीरों के घुलने से प्रोटीन उत्पन्न होते हैं। उनकी नष्ट कर देने की शक्ति रक्त में होती है। अब कोरोना के इस बेहद खतरनाक दौर में इसकी अहमियत हर किसी तक पहुंच रही है।
इस मकसद से बहुत सी दवाएं और टॉनिक भी सुझाये जाते हैं। अब होम्योपैथी में प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाये रखने में सक्रिय डाक्टर विपन गुप्ता ने भी इस दिशा में इस दवा का सुझाव सामने रखा। यह दवा इस मामले में बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रॉफीलेक्टिक नाम की इस दवा में बहुत सी खूबियां हैं। इस की 18  हज़ार खुराकें यहां लुधियाना के छह हज़ार पुलिस जवानों को निशुल्क वितरित की गयीं। वास्तव में यह एक इम्यून बूस्टर है। प्रथम पंक्ति में रह कर कोरोना के साथ युद्ध में सहभागी बने सभी योद्धाओं को यह दवा निशुल्क दी जा रही है। समाज के अन्य वर्ग भी इसका फायदा उठा सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इस दवा की और खुराकें भी बांटने का वायदा किया जायेगा। इस दवा को वितरित किये जाने के अवसर पर लायन डाक्टर रविंद्र कोछड़, लायन सुशील गुप्ता, लायन एच एस कालड़ा, लायन यूं पी सिंह सहित कई अन्य प्रमुख लोग भी मौजूद थे। 
गौरतलब है कि यह दवा सेंट्रल काउन्सिल फॉर रिसर्च इन इंडियन मेडिसिन एंड होम्योपैथी के दिशा निर्देशों के मुताबिक ही तैयार  करवाई और बांटी गयी। इस मौके पर समाजिक दूरी जैसे सभी सभी आवश्यक नियमों का भी पूरी बाकायदगी के साथ पालन किया गया। (इनपुट:पंजाब स्क्रीन डेस्क)
इस दवा के संबंध में डाक्टर विपन गुप्ता से बात की जा सकती है उनके मोबाईल नंबर:9814330698 पर।  

Monday, April 27, 2020

लॉकडाउन में शुभ संकेत: डा. मनमोहन सिंह ने मानी विनती

पंजाब की आर्थिक दशा सुधारने के लिए देंगें अपना मार्गदर्शन 
चंडीगढ़: 27 अप्रैल 2020: (पुष्पिंदर कौर//कार्तिका सिंह और पंजाब स्क्रीन टीम)::
कोई खुल कर बोले या न बोले--कुछ माने या न माने लेकिन हर व्यक्ति चिंतित है कि लॉकडाउन खुलने के बाद चौपट हो चूका कारोबार कैसे सम्भलेगा।  आम नागरिक का भी यही हाल है और सत्ता चला रही सरकारों का भी। आर्थिक भविष्य को देख कर निराशा का अंधेरा ही दिखता है। इस गहन अंधेरे में अब आशा की किरण दिखाई है मुख्य मंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने। 
उन्होंने इस समस्या को आर्थिक विशेषज्ञों के सामने रखा है। इस मकसद के लिए लिए सरदार मोंटेक सिंह आहलूवालिया साहिब की देखरेख में पांच विशेष ग्रुप भी बनाये गए हैं। इस ख़ास टीम को मार्गदर्शन देने के लिए मुख्य मंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने एक विशेष प्रयास करके पूर्व प्रधानमंत्री और आर्थिक मामलों के विश्व स्वीकृत विशेषज्ञ डाक्टर मनमोहन सिंह  को भी राज़ी कर लिया है। अब लगने लगा है कि स्थिति कितनी भी भयानक क्यूं न हो जाये यह टीम पंजाब को ही नहीं पूरे देश को बचा लेगी। इसके साथ ही इस मार्गदर्शन का फायदा पूरी दुनिया उठा सकेगी। 
पंजाब सरकार द्वारा राज्य को कोविड के उपरांत पुन: सुरजीत करने की कोशिशों के चलते नीति घडऩे की दिशा में सोमवार को उस समय पर पहला कदम उठाया गया जब मोंटेक सिंह आहलूवालीया के नेतृत्व अधीन माहिरों के ग्रुप ने पाँच सब ग्रुप तैयार कर लिए। इसके इलावा पूर्व प्रधान मंत्री डा.मनमोहन सिंह ने भी राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रगति को फिर बहाल करने के लिए अपना मार्गदर्शन देने के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अपील को स्वीकार कर लिया है।
मोंटेक सिंह आहलूवालीया के नेतृत्व अधीन माहिरों के ग्रुप ने वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के द्वारा मुख्यमंत्री के साथ जान-पहचान मीटिंग की जिसमें खुलासा किया गया कि मुख्यमंत्री ने माहिरों के ग्रुप के साथ डा. मनमोहन सिंह को राज्य सरकार का नेतृत्व करने के लिए लिखा था और उन्होंने यह अपील मान ली है। उन्होंने टवीट करके लिखा, ‘हम पंजाब को कोविड -19 के उपरांत आर्थिक विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए सख्त मेहनत करेंगे। हम इस पर दोबारा ध्यान केंद्रित करेंगे।’
मुख्यमंत्री ने ग्रुप सदस्यों को इस सहायता करने के लिए आगे आने के लिए धन्यवाद किया। गंभीर विश्व व्यापक स्थिति के मद्देनजऱ उन्होंने कहा, ‘‘मैं राज्य के लिए सबसे बढिय़ा चाहता था और इस ग्रुप से बढिय़ा और कुछ सोचा नहीं जा सकता।’’
मोंटेक सिंह आहलूवालीया ने वीडियो कॉनफ्ऱेंस के दौरान बताया कि माहिरों के ग्रुप जिसमें पहले 20 मैंबर थे और इसमें दो और मैंबर शामिल किये गए हैं, ने अपनी पहली मीटिंग की है। उन्होंने बताया कि ग्रुप के कामकाज को और सुचारू बनाने के लिए पाँच सब-ग्रुप वित्त, कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग और सामाजिक सहायता बनाऐ गए हैं। उन्होंने बताया कि इन ग्रुपों का हरेक चेयरपरसन एजेंडा आगे ले जाने के लिए वर्करों को लामबंद करेगा।
मुख्यमंत्री ने तो भारत सरकार की तरफ से हल पेश करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया क्योंकि पंजाब की हालत गंभीर है परन्तु मोंटेक सिंह आहलूवालीया ने कहा कि ग्रुप के समक्ष बहुत महत्वपूर्ण कार्य है परन्तु हम राज्य को फिर उभारने के लिए निश्चित रूप से तौर पर कुछ हल लेकर आऐंगे।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ग्रुप को बताया कि राज्य की वित्तीय स्थिति कमज़ोर है जिसको मासिक 3360 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा हुआ है। इनमें जी.एस.टी. के 1322 करोड़ रुपए, शराब पर राज्य की आबकारी 521 करोड़, मोटर व्हीकल टैक्स के 198 करोड़ रुपए, पेट्रोल और डीज़ल पर वैट के 465 करोड़ रुपए, इलैक्ट्रीसिटी ड्यूटी के 243 करोड़, स्टैंप ड्यूटी के 219 करोड़ और नॉन-टैक्स राजस्व के 392 करोड़ रुपए के रूप में घाटा शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के नगदी के आदान -प्रदान में मुकम्मल तौर पर ठहराव आ चुका है। उन्होंने बताया कि बिजली के उपभोग में 30 प्रतिशत कमी आई है और पंजाब राज्य बिजली बोर्ड को बिजली दरें एकत्रित करने में रोज़ाना 30 करोड़ रुपए का घाटा है। पंजाब के उद्योग ठप है जहाँ एक प्रतिशत से भी कम काम चल रहा है। उन्होंने दुख ज़ाहिर करते हुये कहा कि भारत सरकार की तरफ से राज्य के जी.एस.टी. का 4365.37 करोड़ रुपए का भुगतान करना अभी बाकी है।
ग्रुप मैंबर और उद्योगपति एसपी ओसवाल ने कहा कि राज्य और उद्योग को मुश्किल समय का सामना करना पड़ रहा है जिसके लिए सख्त फ़ैसलें लेने की ज़रूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूँ की फ़सल की बंपर पैदावार से कृषि इस समय स्थिति का एकमात्र उज्जवल पक्ष पेश कर रही है जिसके बाद कपास और धान की फ़सल आयेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कम हो रहे जल स्रोत को बचाने के लिए धान की काश्त को और घटाने का प्रस्ताव किया है परन्तु न्युनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) संबंधी केंद्र का स्टैंड अभी तक स्पष्ट न होने के कारण स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।
कैप्टन अमरिन्दर ने कहा कि केंद्र सरकार ने मंडियों में अपनी उपज देरी से लाने वाले किसानों को बोनस देने की उनकी सरकार की विनती को स्वीकार नहीं किया था जो कोविड के फैलाव को रोकने के लिए ज़रूरी था जिससे इस समय पर 8 जिले प्रभावित हैं और राष्ट्रीय औसत की तुलना में मृत्यु दर अधिक दिखाई गई है। हालाँकि, देश के मुकाबले राज्य की प्रतिशतता 1 अप्रैल को 2.2 प्रतिशत से कम होकर 25 अप्रैल को 1.2 प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा कि मामलों के दोगुने होने की दर (पिछले 1 सप्ताह के औसत के तौर पर) राष्ट्रीय औसत के 9 दिनों की तुलना में 18 दिन है।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि मौजूदा संकट से निपटने के लिए केंद्र जल्द ही राज्य को बहुत अपेक्षित राहत पैकेज मुहैया करवाएगी।  मोंटेक सिंह आहलूवालिया की निगरानी में बनाये