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Friday, January 26, 2024

पंजाब का योगदान सबसे अधिक लेकिन परेड से झाँकी बाहर

 Chief Minister's Office, Punjab     26th January 2024 at 5:11 PM    मुख्यमंत्री कार्यालय, पंजाब  

मैं अगले मतदान के लिए नहीं बल्कि अगली पीढिय़ों के लिए काम कर रहा हूं-मुख्यमंत्री  

लुधियाना के आयोजन में दिखाई गई केंद्र द्वारा रद्द की गई झांकी 


*आधुनिक भारतीय गणराज्य की सृजना करने में पंजाब की भूमिका याद करवाई मुख्यमंत्री ने 

*राष्ट्रीय स्वतंत्रता संघर्ष में भी पंजाब ने बहुत कुछ किया 

*स्वतंत्रता पंजाबियों ने लेकर दी, परन्तु परेड से झाँकी बाहर निकाल दी  

*केंद्र द्वारा रद्द की गई झांकी लुधियाना के समारोह में दिखाई गई 

*झांकी दिखाकर पंजाबियों को पूछा, बताओ इनमें क्या गलत है  

*इसके साथ ही लोगों को लडक़े-लड़कियों में भेदभाव न करने की अपील  भी की 

*राज्य सरकार के लोक हितैषी प्रयासों का जि़क्र भी किया  

*मैं अगले मतदान के लिए नहीं बल्कि अगली पीढिय़ों के लिए काम कर रहा हूँ-मुख्यमंत्री  

*गणतंत्र दिवस के अवसर पर लुधियाना में राष्ट्रीय ध्वज लहराया  

लुधियाना: 26 जनवरी 2024:  (कार्तिका कल्याणी सिंह//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि अनगिनत बलिदान देकर देश की आज़ादी हासिल करने और देश की एकता, अखंडता और प्रभुसत्ता की रक्षा करके आधुनिक भारतीय गणराज्य की सृजना करने में पंजाब ने सबसे अधिक योगदान दिया है।   75वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यहाँ हुए समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज लहराने के बाद जनसभा को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दिन की पंजाब के लिए विशेष महत्ता है क्योंकि पंजाबियों ने इस मुल्क की ख़ातिर बड़े बलिदान दिए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘देश की आज़ादी से पहले भी बहुत बार 26 जनवरी का दिन गुजऱा था परन्तु किसी को राष्ट्रीय ध्वज लहराने की इजाज़त नहीं थी। अब हमें यह दिवस मनाने का हक है परन्तु बड़े दुख की बात है कि राज्य की झाँकी को राष्ट्रीय राजधानी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर हुई परेड में से जानबूझ कर बाहर रखा गया।’’ 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत हैरानी की बात है कि राष्ट्रीय दिवस पंजाब के बिना कैसे मनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पंजाब की झाँकी को जानबूझ कर बाहर रखा है, उनको यह बताना चाहिए कि इस झाँकी में क्या गलत था। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा तैयार की गई झांकी राज्य की समृद्ध संस्कृति और विरासत को मूर्तिमान करती थी, क्योंकि हम राज्य के गौरव और प्रतिष्ठा के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते। भगवंत सिंह मान ने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाबियों के बेमिसाल बलिदानों का मज़ाक उड़ाया है जिसको किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इसी कारण राज्य सरकार ने केंद्र के इस कदम का ज़ोरदार विरोध किया था।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य की झांकी रद्द करके माई भागो, गदरी बाबे, शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव, लाला लाजपत राय, शहीद उधम सिंह, शहीद करतार सिंह सराभा और अन्य शहीदों का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की परेड में राज्य की झांकी शामिल न करके इन नायकों के बलिदानों और योगदान के महत्व को घटाया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह बरताव सहन नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सीधे तौर पर हमारे देश-भक्तों और राष्ट्रीय नेताओं का निरादर है। उन्होंने कहा कि अब पंजाब सरकार पूरे राज्य में यह झांकी निकाल कर देश के प्रति पंजाबियों का योगदान दिखाएगी।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भारतीय हवाई सेना के हलवारा, लुधियाना में बनने जा रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखने का फ़ैसला किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के अथक प्रयासों के स्वरूप मोहाली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम पहले ही शहीद भगत सिंह के नाम पर रखा गया है और हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखना शहीदों को विनम्र सी श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने आगे कहा कि इन महान शहीदों के नाम पर हवाई अड्डों, यूनिवर्सिटियों और अन्य संस्थाओं का नामकरण उनकी शानदार विरासत को कायम रखने के लिए ज़रूरी है।  

अपनी तकरीर के दौरान भावुक होते हुए मुख्यमंत्री ने लोगों को लडक़े और लड़कियों में लिंग भेदभाव ख़त्म करने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘यह समय की ज़रूरत है कि लड़कियों को हरेक क्षेत्र में उपलब्धियाँ हासिल करने के लिए अधिक से अधिक अवसर दिए जाएँ, जिससे वह सफलता की नयी इबारतें लिख सकें। इसमें शक नहीं कि राज्य की लड़कियाँ बहुत निडर हैं और यदि उनको मौका दिया जाये तो वह कोई भी लक्ष्य हासिल करने की काबिलियत रखती हैं।’’  

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब अपने बेशकीमती प्राकृतिक संसाधन पानी और जऱखेज़ मिट्टी कुर्बान करके देश के लिए 182 लाख मीट्रिक टन धान की फ़सल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि पंजाब के योगदान ने देश को अनाज उत्पादन के पक्ष से आत्म-निर्भर बनाया, जिस कारण भारत विश्व भर में मज़बूत राष्ट्र के तौर पर उभरा है। भगवंत सिंह मान ने अफ़सोस ज़ाहिर किया कि राज्य के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से वंचित करने की साजिशें रची जा रही हैं, जो सरासर बेइन्साफ़ी है।  

पंजाब की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब हमेशा अग्रणी राज्य रहा है और अग्रणी ही रहेगा क्योंकि पंजाबियों को सख़्त मेहनत और दृढ़ जज़्बे की बख्शीश प्राप्त है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभा रही है जिससे पंजाब हर क्षेत्र में देश का नेतृत्व करे। भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘मुझे अगले मतदान का फिक्र नहीं बल्कि मैं तो आने वाली पीढ़ी के भले के लिए काम कर रहा हूँ जिस कारण मेरी सरकार ने कई रास्ते से हटकर प्रयास किए हैं।’’ 

युवा वर्ग की भलाई के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य के नौजवानों की भलाई के लिए बड़े प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित बनाने में लगी हुई है कि नौजवान रोजग़ार ढूँढने की बजाय रोजग़ार देने वाले बनें। भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्रगतिशील और खुशहाल पंजाब की सृजना करना समय की ज़रूरत है।  

नौकरियों और शिक्षा की बात भी हुई। इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान नौजवानों को नौकरियाँ और शिक्षा के अवसर से वंचित रखा गया था, जिससे वह राजनीतिक नेताओं के पीछे लगे रहें। उन्होंने कहा कि इस प्रथा को छोड़ा जा रहा है जिससे नौजवान राज्य की तरक्की और खुशहाली का अटूट अंग बन सकें। भगवंत सिंह मान ने कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब राज्य सरकार के अथक प्रयासों के स्वरूप पंजाब की पुरातन शान बहाल होगी।  

नहरी पानी को भी मुख्यमंत्री  भूले नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के स्वरूप पिछले 75 सालों में पहली बार राज्य में नहरी पानी आखिरी खेतों के टेलों तक पहुँचा है। उन्होंने कहा कि इस नेक कार्य को पूरा करना राज्य सरकार अपना फर्ज बनता है जिससे राज्य के किसानों को इसका भरपूर लाभ मिल सके। भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार के अथक प्रयासों स्वरूप पहले ही पंजाब के दूर-दूराज के इलाकों तक पानी पहुँच चुका है।  

स्वास्थ्य सेवाओं का दावा भी दोहराया गया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को मानक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने पंजाब भर में आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि इन क्लीनिकों में अब तक लगभग 97 लाख लोग मुफ़्त स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले चुके हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में यह एक नयी क्रांति है और इस क्षेत्र को नया रूप देने के लिए प्रयास जारी हैं।  

स्कूल ऑफ़ एमिनेंस पर भी खास बातें हुईं। इस पर मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विद्यार्थियों को मानक शिक्षा देने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने राज्य में ‘स्कूल ऑफ ऐमिनेंस’ स्थापित किए हैं और पहले साल के दौरान इसमें 8358 विद्यार्थी दाखि़ल हुए हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि स्कूलों के बुनियादी ढांचे और खेलों की सुविधाओं के विकास के लिए 200 करोड़ रुपए रखे गए हैं, इसके अलावा विद्यार्थियों को मुफ़्त वर्दियाँ मुहैया करवाई जा रही हैं।  

औद्योगिक विकास को भी विशेष तौर पर सामने रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंजाब को औद्योगिक क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार के ठोस प्रयासों के स्वरूप राज्य में 65,000 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है, जिससे 2.98 लाख नौजवानों को नौकरियाँ मिलेंगी। भगवंत सिंह ने कहा कि इससे राज्य के आर्थिक विकास को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।  

सड़क हादसों से होने वाली मौतों का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक तरफ़ राज्य में सडक़ हादसों के कारण होने वाली मौतों की दर को रोकने और दूसरी तरफ़ राज्य की सडक़ों पर यातायात को सुचारू बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा 27 जनवरी को जालंधर से सडक़ सुरक्षा फोर्स की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा कि अपनी किस्म की पहली विशेष फोर्स पंजाब में रोज़ाना के सडक़ हादसों में जा रही कई कीमती जानों को बचाने के लिए अहम भूमिका निभाएगी और इस फोर्स को अंधाधुन्ध ड्राइविंग करने वालों से निपटने, सडक़ों एवं वाहनों की यातायात को सुचारू बनाने और अन्य कार्यों की जि़म्मेदारी सौंपी जाएगी। सडक़ हादसों को रोकने के लिए भगवंत सिंह मान ने बताया कि शुरुआती तौर पर अति-आधुनिक यंत्रों से लैस 129 वाहन हर 30 किलोमीटर के बाद सडक़ों पर उचित व्यवस्था करने के लिए तैनात किए जाएंगे और इन वाहनों में किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को इमरजैंसी इलाज मुहैया करवाने के लिए पूरी मेडिकल किट भी होगी।  

बिजली के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने विशेष जानकारी प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने निजी कंपनी जी.वी.के. पावर की मलकीयत वाले गोइन्दवाल पावर प्लांट को खरीद कर इतिहास रचा है और इसका नाम भी तीसरे सिख गुरू श्री गुरु अमरदास जी के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि पहली बार यह उल्टा दौर शुरू हुआ है कि सरकार ने कोई प्राईवेट पावर प्लांट खरीदा है जबकि पहले राज्य सरकारें सार्वजनिक जायदादें चहेते व्यक्तियों को कौडिय़ों के भाव बेचती थीं। इसी तरह भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह बहुत ही गर्व और संतुष्टी की बात है कि पंजाब सरकार के लोक हितैषी फ़ैसलों के कारण राज्य के 90 प्रतिशत उपभोक्ताओं को ज़ीरो बिजली बिल आ रहा है।  

अपने भाषण में साम्प्रदायिक सदभावना का उल्लेख भी श्री मान ने बहुत दिलचस्प अंदाज़ में किया जो कि  यादगारी रहा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बड़े गर्व की बात है कि अयोध्या में श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी और सभी को उस स्थान पर माथा टेकने के लिए जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब, देश भर में धर्म निरपेक्षता और आपसी-भाईचारे का प्रतीक है क्योंकि युगों से यहाँ हर वर्ग के लोग शांति से रह रहे हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘चाहे रमज़ान को मुस्लिम भाईचारे का त्योहार माना जाता है परन्तु यह दो शब्द ‘राम’ और ‘ ज़ान’ के बिना है जिसका अर्थ है कि इसमें राम का जि़क्र भी है। इसी तरह हिंदु भाईचारे का त्योहार दीवाली में ‘अली’ शब्द है, जो आपसी-भाईचारे का प्रतीक है।’’ सांप्रदायिक एजंडे को उभारने वाली पार्टियों पर चुटकी लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी फूट डालने वाली राजनीति में विश्वास नहीं रखती बल्कि ‘काम की राजनीति’ के द्वारा हरेक के भले के सिद्धांत पर काम करती है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह आपसी-भाईचारे, शांति और सांप्रदायिक सद्भावना के सिद्धांतों पर आधारित समाज और देश की नींव है।  

धार्मिक आस्था और तीर्थ यात्रा की चर्चा भी हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को अपनी आस्था के तीर्थ स्थान की यात्रा करने की सुविधा देने के लिए राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा’ योजना शुरू की है। उन्होंने कहा कि इस योजना का समाज के हर वर्ग को बड़ा लाभ हो रहा है, क्योंकि वह तीर्थ स्थानों की मुफ़्त यात्रा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बेमिसाल योजना है जो देश में पहली बार किसी राज्य के द्वारा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि चाहे शुरू में रेलवे इसमें अड़चन पैदा करने की कोशिश कर रही थी परन्तु अब मामला सुलझ गया है।  

पंजाब के लिए देखे गए सपनों को भी श्री मान ने बहुत दिलचस्प ढंग से अपने भाषण में शामिल किया। मुख्यमंत्री ने लोगों को हमारे महान गुरूओं, संतों-महापुरुषों, पीरों-पैगंबरों, शहीदों और नायकों के सपनों का पंजाब सृजन करने के लिए आगे आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब हमेशा देश में शांति और आपसी-भाईचारे का केंद्र बिंदु रहा है। भगवंत सिंह मान ने पंजाब के बहादुर और देश-भक्त लोगों को खुशहाल पंजाब के लक्ष्यों के लिए अपने आप को समर्पित करने का न्योता दिया, जिसमें गरीबी, अनपढ़ता और बेरोजग़ारी जैसी बुराईयों की कोई जगह नहीं है। 

इससे पहले मुख्यमंत्री ने परेड कमांडर आकर्शी जैन, आई.पी.एस. के नेतृत्व वाली परेड का निरीक्षण किया। उन्होंने पंजाब पुलिस, पंजाब होम गार्ड्ज़, पंजाब आम्र्ड पुलिस, एन.सी.सी. (लड़कियाँ और लडक़े), भारत स्काउट्स और गाईड्ज़ के अलावा पंजाब पुलिस के ब्रास बैंड की टुकड़ी द्वारा शानदार मार्च पास्ट से सलामी भी ली। इस मौके पर अलग-अलग स्कूलों के विद्यार्थियों ने भंगड़ा, गिद्दा, ग्रुप डांस, पी.टी. शो और समूह गान समेत रंगारंग कार्यक्रम पेश किया।  

 मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों और उनके रिश्तेदारों को देश के आज़ादी संघर्ष में दिए गए कीमती योगदान के लिए सम्मानित भी किया।  

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Friday, January 29, 2021

केंद्रीय जेल में सहायक सुप्रिटेंडेंट इंदरप्रीत सिंह का सम्मान

29th January 2021 at 7:42 PM

  गणतंत्र दिवस पर 9 अधिकारीयों को किया गया सम्मानित 


लुधियाना
  29 जनवरी 2021:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

जब हालात नाज़ुक किस्म के चल रहे हों तो पुलिस की डयूटी निभाना आसान बात नहीं होती। इसके बावजूद पुलिस के जो अधिकारी अपने कर्तव्यों को पूरी ज़िम्मेदारी से निभाते हैं उनमें से कई खुशकिस्मत ऐसे भी होते हैं जिनको उनका विभाग सम्मानित भी करता है। सम्मानित करने वाले विभाग और सरकार बेशक संसारिक ही होती हैं लेकिन इस मकसद की कृपा भगवान की ही होती है। केंद्रीय जेल में कार्यरत सहायक अधीक्षक इंदरप्रीत सिंह का सम्मान हुआ तो उस पल यही महसूस हुआ कि भगवान् ने इस गुरमुख परिवार के इस होनहार सपूत पर अपनी कृपा दॄष्टि की है। जेल अधीक्षक राजीव कुमार अरोड़ा ने भी उनको अपने अच्छे कार्यों के लिए शाबाश दी। इसी तरह लग्न के साथ अपनी डयूटी निभाते रहने की प्रेरणा भी दी।

स्थानीय केंद्रीय जेल में गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित हुए कार्यक्रम में अच्छी लकारगुज़ारी दिखने वाले जिन अधिकारीयों और मुलाज़िमों को सम्मानित किया गया उनमें अधीक्षक राजीव अरोड़ा ने जिन अधिकारीयों को सम्मानित किया उनमें सहायक अधीक्षक इंजीनियर इंदरप्रीत सिंह, शिव कुमार, कश्मीरी लाल, हरबंस सिंह, हैड वार्डन-जगदेव सिंह, वार्डन-हरदेव सिंह, परगट सिंह, गुलाब सिंह और अब्दुल हमीद को उनकी बढ़िया कारगुज़ारी के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डिप्टी  सुपरिटेंडेंट जेल-सतनाम सिंह, डिप्टी सुपरिंटेंडें जेल-अश्वनी कुमार और सहायक जेल अधीक्षक- हरजिंदर सिंह भी मौजूद थे। 

कुल मिलकर यह आयोजन यादगारी रहा इस आयोजन से सभी कर्मचारियों और दर्शकों को कर्तव्य परायणता की प्रेरणा भी मिली। गौरतलब है कि ज़िंदगी में कर्तव्य का पालन ही सबसे कठिन और आवश्यक होता है। 

Thursday, January 25, 2018

वृद्ध आश्रम हमारे सभ्य समाज के लिए अभिशाप हैं

बजुर्ग हमारे समाज की मजबूत नींव हैं उनका सम्मान करना हमारा कर्तव्य  है:वरुण मेहता 
लुधियाना: 25 जनवरी 2018:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
धर्मकर्म और धर्मस्थलों से भरे इस देश में जन्म देने वाले मातापिता को वृद्ध होने के बाद घर से निकाल कर किसी वृद्धाश्रम में छोड़ने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। न जाने यह सब किस धर्म के अंतर्गत किया जा रहा है। यह बात संतोषजनक भी है और चमत्कार भी कि इन वृद्धों को वे लोग संभालते हैं जिनका इसने खून का कोई रिश्ता नहीं होता। जहां सगे छोड़ जाते हैं वहां बेगाने आ कर संभाल लेते हैं।  
भारत के 69 वे गणतन्त्र दिवस  को My Way फार ह्यूमन वेलफेयर सोसाईटी द्धारा भी कुछ अलग ढंग से मनाया गया। इस सोसायटी के सदस्यों और पदाधिकारियों को महसूस हुआ कि जब तक ये वृद्ध लोग उदास रहेंगे तब तक तिरंगा भी हमारी सलामी स्वीकार नहीं करेगा। जब तक इनका आशीर्वाद नहीं मिलेगा तब तक भगवान भी प्रसन्न नहीं होंगें। "मेरा भारत महान" कहना तो आसान है लेकिन वास्तविक ज़िंदगी में ऐसी महानता पैदा करना कुछ कठिन है जिस पर सचमुच गर्व किया जा सके। वृद्धों की उदासी को दूर करके इस सोसायटी ने कुछ इसी तरह की कोशिश की है।  स्थानीय मॉडल टाऊन में स्वामी विवेकानंद वृद्ध आश्रम में रहने वाले बजुर्गो के साथ इस सोसायटी ने केक काटकर खुशी मनाई। इस ख़ुशी को संस्था की अध्य्क्ष अजिन्दर कौर व महासचिव वरुण मेहता के नेतृत्व में मनाया गया।
इस अवसर पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए वरुण मेहता ने कहा कि हमारे बजुर्ग किसी मज़बूत इमारत की नींव के समान है जैसे नींव मज़बूत होने से इमारत का भविष्य उज्ववल होता है उसी प्रकार बजुर्गो के होने से उनके मार्गदर्शन में परिवार व समाज को योग्य मार्गदर्शन मिलता है लेकिन अफसोस आज साईंस के बढ़ते युग मे हमारा समाज जितना सभ्य होने का ढोंग करता है उतनी तेज़ी से वृद्ध आश्रमों के निर्माण की बढ़ोतरी हो रही है जोकि हमारे समाज के लिए कलंक है।  ईश्वर के रूप में माता पिता की सेवा व उनके दर्शन ही सबसे उत्तम है लेकिन दुर्भाग्यवनश कुछ लोगो की तरफ से माता पिता की सेवा करने की बजाय उन्हें वृद्ध आश्रम में रहने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे सविधान में अगर माता पिता का अपमान करने व उन पर अत्याचार करने वाली औलाद को कठोर सजा देने का प्रावधान होता तो शायद आज उम्र के इस पड़ाव में इन बजुर्गो को इस तरह बेबसी की हालत में  रहने के लिए विवश न होना पड़ता।
संस्था की अध्य्क्ष अजिन्दर कौर ने कहा कि हमारी संस्था ने हमेशा ही समाज के जरूरतमंद वर्ग की सेवा करने व उनके सहभागी बनने को अपना कत्तर्व्य समझा है इसलिए आज गणतन्त्र दिवस को वृद्ध आश्रम में मनाने से हमे जहाँ गर्व महसूस हो रहा है वही समाज की सेवा करने के लिए इन बजुर्गो का अनमोल आशीर्वाद भी हमे मिल रहा है । उन्होंने कहा कि सोना पुराना होने से पीतल नही हो जाता बल्कि उसकी गुणवत्ता और बढ़ जाती है उसकी कीमत पुराना होने के कारण कई गुना बढ़ जाती है लेकिन हमारे समाज के कई लोग परिवार की नींव रखने वाले बजुर्ग माता पिता की सेवा करने व उन्हें दो वक्त की रोटी देने की बजाय उन्हें वृद्ध आश्रम में छोड़ कर कभी न भरने वाले जख्म देते है जबकि माता पिता कोहिनूर के हीरे जैसे है जिनकी चमक पुराने होने के साथ ही बढ़ती जारही है इस अवसर पर संस्था द्वारा आश्रम में रहने वाले बजुर्गो को जरूरी राशन सामग्री व दवाईया भेट की गई व सभी सदस्यों ने मिलकर बजुर्गो का आशीर्वाद लेते हुए उनके साथ परिवारिक माहौल बनाते हुए खुशी के पल बाटे ।
इस अवसर पर आश्रम के प्रशाशक विकास भारती सहित संस्था की तरफ से गुरचरण कौर,नीतू सलूजा , रीटा मक्कड़, रितु बिंद्रा, रिंकी मनोचा, दमनप्रीत बहल, ममता मल्होत्रा, अनिता घई व अन्य भी उपस्थित थे। 
इस अभियान से जुड़ने के इच्छुक संस्था की अध्यक्षा अजिन्दर कौर से 9779668799 पर और महांसचिव वरुण मेहता से 9888409090 पर सम्पर्क कर सकते हैं। 
आप इस विषय पर क्या सोचते हैं? कौन है कसूरवार? क्यों आया हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक  समाज में यह खतरनाक अमानवीय बदलाव? आपने विचार अवश्य भेजिए। यह सिलसिला वास्तव में भारतीय संस्कृति और परम्परा पर एक आघात है। सूक्ष्म हमला है हमारे समाजिक और धार्मिक सिस्टम को थस नहस करने का। जो लोग आज अपने मातापिता को घरों से निकाल कल वृद्धाश्रम में भेज सकते हैं वे लोग कल को देश से भी ऑंखें फेर लेंगें।  



Monday, January 26, 2015

ग्यासपुरा वार्ड न: 73 में राजेश मिश्रा ने फहराया राष्ट्रीय ध्वज

Mon Jan 26, 2015 at 19:53
कई और इलाकों में भी हुए इसी तरह के आयोजन  
लुधियाना:26 जनवरी 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
आज हर तरफ गणतंत्र दिवस की धूम रही। हर ओर देश भक्ति का रंग।  तिरंगा हर तरफ छाया हुआ था। भारत के पवित्र गणतंत्र पर्व पर देश के शहीदो को नमन करते मिली बहुमूल्य आज़ादी और सविधान के प्रति इलाके के लोगो को प्रेरणा देने के मंतव अधीन ग्यासपुरा वार्ड : 73  के कई इलाको में शिरोमणि अकाली दल लुधियाना शहरी के मीडिया प्रभारी राजेश मिश्रा ने राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर तिरंगे को सलामी दी इस अवसर पर कई सथानो पर उनके साथ वार्ड : 16 के पार्षद राधे कृष्णा भी साथ रहे श्री मिश्रा ने इलाका गुरु अमरदास कालोनी , लक्ष्मण नगर , सुरजीत नगर ,एम .जे .के नगर , गगन नगर ,न्यू आज़ाद नगर , 33 फूटा रोड , सुन्दर नगर समेत कई स्थानो पर आयोजित कार्यक्रमों में शमूलियत की और इलाके के लोगो को गणतंत्र दिवस के बधाई देते समाज में फ़ैली कुरीतियों के खिलाफ डट कर काम करने का सन्देश दिया इस अवसर पर उनके साथ एल .एस . मिश्रा , वीरेंदर कश्यप , रमेश पांडे , राज बहादुर पाल , देश राज शर्मा , यूनिस अंसारी , रमेश शुक्ला , दलीप सोनी , डा .अशोक सिंह , डा :आर : के :यादव , सुधीर झा , अशोक झा , रमेश वर्मा , किशोरी शाह , संजय गुप्ता , बी .एन .तिवारी, संदीप मिश्रा ,रिंकू मिश्रा ,भीम सिंह आदि के इलावा कई साथी शामिल रहे।    

Monday, January 20, 2014

गणतंत्र दिवस-2014: लुधियाना में तिरंगा लहराएंगे मुख्य मंत्री

Mon, Jan 20, 2014 at 6:47 PM
डिप्टी कमिश्नर ने लिया सभी तैयारियों का पूरा जायज़ा 
लुधियाना: 20 जनवरी 2014: (सतपाल सोनी//पंजाब स्क्रीन)::
26 जनवरी के राष्ट्रिय त्यौहार को मनाने के लिए प्रशासन ने ज़ोरशोर से तैयारियां शुरू कर दी हैं। उस दिन बड़ा समारोह होगा लड़कों के राजकीय कालेज में जहाँ मुख्य मंत्री राष्ट्रिय ध्वज लहराएंगे। सभी विभागों के साथ साथ आम जनता कि भागीदारी भी इसमें बड़े और सुनियोजित ढंग से हो इस मकसद के लिए एक विशेष बैठक भी हुई जिसमें डिप्टी कमिश्नर रजत अग्रवाल सभी तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए पहुंचे। सभी विभागों के अधिकारी भी इसमें मौजूद थे। एडीसी (ज) नीरू कत्याल, एडीसी (विकास) बलदेव सिंह और एडीसीपी (हैडक्वाटर) सुखपाल सिंह बराड़ ने अपने अपने कशेत्रों और विभागों कि और से की जा रही व्यापक तैयारियों का विवरण देते हुआ आश्वासन दिया कि वे इस समारोह को यादगारी बनाने के लिए कोई कसर बाकि नहीं छोड़ेंगे। मेहमानों के बैठने से ले कर सुरक्षा तक के सभी मुद्दों पर गहन विचारें हुईं।   
उप ज़िला शिक्षा अधिकारी ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बारे में बताया कि कैसे भांगड़ा, गिद्दा और अन्य रंगारंग आईटमों कि तैयारियां जोरशोर से जारी हैं। अपाहिजों को ट्राईसाइकल मिलेंगे, विधवा महिलायों को सिलाई मशीनें दी जाएंगी और कई अन्य आयोजन भी होंगें।एसडीएम कुलजीत सिंह माही,एसडीएम, अजय सूद और सिवल सरजन डाकटर सुभाष बत्ता ने भी इस मौके पर कि जा रही विशेष तैयारियों का संक्षिप्त विवरण दिया और इस दिन को यादगारी बनाने का आश्वासन भी। 

Saturday, January 26, 2013

64वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर

25-जनवरी-2013 19:43 IST
भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का राष्ट्र के नाम संदेश
भारत में पिछले छह दशकों के दौरान,छह सदियों से अधिक बदलाव
64वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर राष्‍ट्र के नाम संदेश का मूल पाठ इस प्रकार है:-
मेरे प्यारे देशवासियो :
चौंसठवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मैं भारत में और विदेशों में बसे आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। मैं अपनी सशस्त्र सेनाओं, अर्ध सैनिक बलों और आंतरिक सुरक्षा बलों को विशेष बधाई देता हूं।
भारत में पिछले छह दशकों के दौरान, पिछली छह सदियों से अधिक बदलाव आया है। यह न तो अचानक हुआ है और न ही दैवयोग से; इतिहास की गति में बदलाव तब आता है जब उसे स्वप्न का स्पर्श मिलता है। उपनिवेशवाद की राख से एक नए भारत के सृजन का महान सपना 1947 में ऐतिहासिक उत्कर्ष पर पहुंचा, और इससे अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह हुई कि स्वतंत्रता से राष्ट्र-निर्माण की नाटकीय कथा की शुरुआत हुई। इसकी आधारशिला, 26 जनवरी, 1950 को अंगीकृत हमारे संविधान के द्वारा रखी गई थी, जिसे हम प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। इसका प्रेरक सिद्धांत था, राज्य और नागरिक के बीच एक सहमति अर्थात न्याय, स्वतंत्रता तथा समानता के द्वारा पोषित सशक्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी।
भारत ने अंग्रेजों से स्वतंत्रता इसलिए नहीं ली थी कि वह भारतीयों को आजादी से वंचित रखे। संविधान दूसरी आजादी का प्रतीक था और यह आजादी थी लिंग, जाति, समुदाय की गैर-बराबरी की घुटन से और उन दूसरी प्रकार की बेड़ियों से, जो हमें बहुत समय से जकड़े हुए थी।

इसने ऐसे क्रांतिकारी उद्विकास को प्रेरणा दी जिसने भारतीय समाज को आधुनिकता के मार्ग पर आगे बढ़ाया : समाज में क्रमिक उद्विकास के द्वारा बदलाव आया, क्योंकि हिंसक क्रांति भारतीय परिपाटी नहीं है। जटिल सामाजिक ताने-बाने में बदलाव पर अभी कार्य जारी है, और इसको कानून में समय-समय पर आने वाले सुधारों और जनमत की शक्ति से प्रेरणा मिलती रही है।

पिछले छह दशकों में ऐसा बहुत कुछ हुआ है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं। हमारी आर्थिक विकास दर तीन गुना से अधिक हो गई है। साक्षरता की दर में चार गुना से अधिक वृद्धि हुई है। खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के बाद अब हम खाद्यान्न के निर्यातक हैं। गरीबी की मात्रा में काफी कमी लाई गई है।  हमारी एक अन्य महत्त्वपूर्ण उपलब्धि लैंगिक समानता की दिशा में हमारा प्रयास है।

ऐसा किसी ने नहीं कहा कि यह कार्य आसान होगा। 1955 में अधिनियमित हिंदू संहिता विधेयक, जैसी पहली बड़ी कोशिश में जो समस्याएं आई थी, उनकी अलग कहानी है। यह महत्त्वपूर्ण कानून जवाहर लाल नेहरू तथा बाबा साहेब अंबेडकर जैसे नेताओं की अविचल प्रतिबद्धता से ही पारित हो पाया था। जवाहरलाल नेहरू ने बाद में इसे अपने जीवन की संभवत: सबसे बड़ी उपलब्धि बताया था। अब समय आ गया है कि हर-एक भारतीय महिला के लिए लैंगिक समानता सुनिश्चित की जाए। हम न तो इस राष्ट्रीय दायित्व से बच सकते हैं और न ही इसे छोड़ सकते हैं क्योंकि इसे नजरअंदाज करने की बहुत भारी कीमत चुकानी होगी। निहित स्वार्थ आसानी से हार नहीं मानते। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए सिविल समाज तथा सरकार को मिल-जुलकर प्रयास करने होंगे।

प्यारे देशवासियो :
मैं आपको ऐसे समय पर संबोधित कर रहा हूं जब एक बहुत व्यापक त्रासदी ने हमारे प्रमाद को झकझोर डाला है। एक नव-युवती के नृशंस बलात्कार और हत्या ने, एक ऐसी महिला जो कि उदीयमान भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक थी, हमारे हृदयों को रिक्तता से तथा हमारे मनों को क्षोभ से भर दिया है। हमने एक जान से कहीं अधिक कुछ खोया है; हमने एक सपना खो दिया है। यदि आज हमारे युवा क्षुब्ध हैं तो क्या हम अपने युवाओं को दोष दे सकते हैं?

देश का एक कानून है। परंतु उससे ऊंचा भी एक कानून है। महिला की पवित्रता भारतीय सभ्यता नामक समग्र दर्शन का नीति निर्देशक सिद्धांत है। वेद कहते हैं कि माता एक से अधिक हो सकती हैं; जन्मदात्री, गुरुपत्नी, राजा की पत्नी, पुजारी की पत्नी, हमें दूध पिलाने वाली और हमारी मातृभूमि। मां हमें बुराई और दमन से बचाती है, हमारे लिए जीवन और समृद्धि का प्रतीक है। जब हम किसी महिला के साथ पाशविकता करते हैं तो अपनी सभ्यता की आत्मा को लहुलुहान कर डालते हैं।

देश को अपनी नैतिक दिशा को फिर से निर्धारित करने का समय आ गया है। निराशावादिता को बढ़ावा देने के लिए कोई अवसर नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि निराशावाद नैतिकता को अनदेखा करता है। हमें अपनी अंतरात्मा में गहराई से झांकना होगा और यह पता लगाना होगा कि हमसे कहां चूक हुई है। समस्याओं का समाधान विचार-विमर्श तथा नजरियों में तालमेल से ढूंढ़ना होगा। लोगों को यह विश्वास होना चाहिए कि शासन भलाई का एक माध्यम है और इसके लिए हमें सुशासन सुनिश्चित करना होगा।

प्यारे देशवासियो :
हम दूसरे पीढ़ीगत बदलाव के मुहाने पर हैं; गांवों और कस्बों में फैले हुए युवा इस बदलाव के अग्रेता हैं। आने वाला समय उनका है। वे आज अस्तित्व संबंधी बहुत सी शंकाओं से ग्रस्त हैं। क्या तंत्र योग्यता को समुचित सम्मान देता है। क्या समर्थवान लालच में पड़कर अपना धर्म भूल चुके हैं। क्या सार्वजनिक जीवन में नैतिकता पर भ्रष्टाचार हावी हो गया है। क्या हमारी विधायिका उदीयमान भारत का प्रतिनिधित्व करती है या फिर इसमें आमूल-चूल सुधारों की जरूरत है। इन शंकाओं को दूर करना होगा। चुने हुए प्रतिनिधियों को जनता का विश्वास फिर से जीतना होगा। युवाओं की आशंका और उनकी बेचैनी को, तेजी से, गरिमापूर्ण तथा व्यवस्थित ढंग से बदलाव के कार्य पर लगाना होगा।

युवा खाली पेट सपना नहीं देख सकते। उनके पास अपनी और राष्ट्र की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए रोजगार होना चाहिए। यह सच है कि हमने 1947 के बाद एक लम्बा रास्ता तय किया है, जब हमारे प्रथम बजट का राजस्व मात्र 171 करोड़ रुपये था। आज केन्द्र सरकार के संसाधन उस बूंद की तुलना में एक महासागर के समान हैं। परंतु हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कहीं आर्थिक विकास से प्राप्त लाभ पर, पिरामिड के शिखर पर बैठे भाग्यशाली लोगों का ही एकाधिकार न हो जाए। धन के सृजन का बुनियादी उद्देश्य हमारी बढ़ती जनसंख्या से भुखमरी, निर्धनता और अल्प आजीविका की बुराई को जड़ से खत्म करना होना चाहिए।

प्यारे देशवासियो :
पिछला वर्ष हम सभी के लिए परीक्षा का वर्ष रहा है। आर्थिक सुधारों के पथ पर अग्रसर होते हुए, हमें बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं की वर्तमान समस्याओं के प्रति जागरूक रहना होगा। बहुत से धनी राष्ट्र अब सामाजिक दायित्व रहित अधिकार की संस्कृति के जाल में फंस गए हैं; हमें इस जाल से बचना होगा। हमारी नीतियों के परिणाम हमारे गांवों, खेतों, फैक्ट्रियों तथा स्कूलों और अस्पतालों में दिखाई देने चाहिए।

आंकड़ों का उन लोगों के लिए कोई अर्थ नहीं होता जिन्हें उनसे लाभ नहीं पहुंचता। हमें तत्काल काम में लगना होगा अन्यथा, वर्तमान में जिन अशांत इलाकों का प्राय: ‘नक्सलवादी’ हिंसा के रूप में उल्लेख किया जाता है उनमें और अधिक खतरनाक ढंग से विस्तार हो सकता है।

प्यारे देशवासियो :
अभी पिछले दिनों, नियंत्रण रेखा पर हमारे सैनिकों पर गंभीर नृशंसता के मामले सामने आए हैं। पड़ोसियों में मतभेद हो सकते हैं; सीमाओं पर तनाव एक सामान्य स्थिति हो सकती है। परंतु राज्य से इतर तत्त्वों के माध्यम से प्रायोजित आतंकवाद समूचे राष्ट्र के लिए भारी चिंता का विषय है। सीमा पर शांति में हमारा विश्वास है और हम सदैव दोस्ती की उम्मीद में हाथ बढ़ाने के लिए तैयार हैं। परंतु इस हाथ को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
प्यारे देशवासियो :
भारत की सबसे अजेय सम्पत्ति है उसका खुद में विश्वास। हमारे लिए प्रत्येक चुनौती, अभूतपूर्व आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता हासिल करने के हमारे सकंल्प को मजबूत बनाने का अवसर बन जाती है। इस संकल्प को, खासकर बेहतर और व्यापक शिक्षा पर भारी निवेश के द्वारा, मजबूत बनाना होगा। शिक्षा ऐसी सीढ़ी है, जो सबसे निचले पायदान पर मौजूद व्यक्तियों को व्यावसायिक और सामाजिक प्रतिष्ठा के शिखर पर पहुँचा सकती है। शिक्षा ऐसा मंत्र है जो हमारे आर्थिक भाग्य को बदल सकता है और ऐसी दरारों को पाट सकता है जो समाज में असमानता पैदा करती हैं। अभी तक शिक्षा की यह सीढ़ी, अपेक्षित स्तर तक, उन लोगों तक नहीं पहुंची है जिनको इसकी सबसे अधिक जरूरत है। भारत द्वारा वर्तमान वंचितों को, आर्थिक विकास के बहुत से उपादानों में बदल कर अपनी विकास दर को दोगुना किया जा सकता है।

हमारे चौंसठवें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यद्यपि चिंता का कोई कारण हो सकता है परंतु हताशा का कोई नहीं। यदि भारत में छह दशकों में पिछली छह सदियों के मुकाबले अधिक बदलाव आया है तो मैं आपसे वायदा करता हूं कि इसमें अगले दस वर्षों में, पिछले साठ वर्षों से ज्यादा बदलाव आएगा। भारत की शाश्वत जिजीविषा जागृत है।

अंग्रेजों को भी यह लगा था कि वे एक ऐसा देश छोड़कर जा रहे हैं जो उससे बहुत अलग है जिस पर उन्होंने आधिपत्य किया था। राष्‍ट्रपति भवन स्थित जयपुर स्तंभ की आधारशिला पर एक शिलालेख है :-

‘‘विचारों में आस्था... शब्दों में प्रज्ञा...
 कर्म में पराक्रम...
 जीवन में सेवा...
 अत: भारत महान बने’’
भारत की भावना प्रस्तर में उत्कीर्ण है।

जय हिंद!

                             ****       64वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर
मीणा/वि. कासोटिया/कविता/सुनील-327