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Wednesday, January 11, 2023

पंजाब में पराली जलाने का जवाब है बाजरा:उमेंद्र दत्त

Wednesday 11th January 2023 at 04:43 PM

वेस्टर्न फास्ट फूड कल्चर से आगाह किया एडीजी राजेंद्र चौधरी ने 

*कहा कि बाजरा ग्लूटेन मुक्त, प्रोटीन में उच्च और स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है


चंडीगढ़//लुधियाना:11 जनवरी 2023:  (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज खेती विरासत मिशन के सहयोग से लुधियाना क्लब में मीडिया से इंटरेक्शन और मिलेट लंच का आयोजन किया। आज के दौर में हमारा समाज अनाज और कृषि से सबंधित जिन संकटों का सामना कर रहा है उनके समाधान तलाशने में यह एक ऐतिहासिक आयोजन था जिसमें बहुत ही पते की और गहरी बातें चर्चा का विषय बनीं। 

भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष (आईवाईएम) 2023 के प्रस्ताव को प्रायोजित किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) द्वारा अनुमोदित किया गया था। भारतीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी आईवाईएम 2023 को "जन आंदोलन" और भारत के लिए "बाजरा के लिए वैश्विक केंद्र" बनने की इच्छा व्यक्त की है। पीआईबी चंडीगढ़ द्वारा इस क्षेत्र में इस आंदोलन (मूवमेंट) की अगुवाई की जा रही है। उन्होंने स्थानीय मीडिया के लिए तरनतारन और चंडीगढ़ में भी मिलेट लंच का आयोजन किया है, ताकि मीडिया को बाजरा और इसके प्रचार के लिए अधिक मीडिया स्थान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

मौजूदा दौर में पैदा हुईं स्वास्थ्य समस्यायों की चर्चा करते हुए बहुत ही पते की बातों का खुलासा किया  पीआईबी  चंडीगढ़  के एडीजी श्री राजेंद्र चौधरी ने।  उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि “वेस्टर्न फास्ट फूड कल्चर अपनाने के कारण आज की युवा पीढ़ी कम उम्र से ही स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की समस्याओं का सामना कर रही है। बाजरा विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ लड़ाई में सहायता कर सकता है। बाजरा लस (ग्लूटेन) मुक्त, प्रोटीन में उच्च, और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होता है।इस प्रकार, वे वजन घटाने में भी मदद कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा, "बाजरा उपभोक्ताओं और किसानों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।" उन्होंने अपनी बात को जारी रखा “बाजरा को उगाने के लिए कम पानी और बिजली की आवश्यकता होती है। बाजरा मोटापे, मधुमेह, एनीमिया, हार्मोनल असंतुलन, उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि जैसी कई बीमारियों से लड़ने में मदद करता है, जिससे उपभोक्ता स्वस्थ जीवन जी सकेंगे। फलस्वरूप, यह संतुलित पोषक तत्वों का एक उत्कृष्ट स्रोत है।”आज के आयोजन का उद्देश्य मीडिया को बाजरा के बारे में जागरूक करना है। नतीजतन, खपत भी बढ़ेगी, जिससे मांग बढ़ेगी।”

कार्यक्रम के विशेष वक्ता, खेती विरासत मिशन के कार्यकारी निदेशक, श्री उमेंद्र दत्त ने कहा: "बाजरा को अब फ्रिंज फसल नहीं माना जाता है। वे चावल और गेहूं की चक्रीय कृषि के साथ प्रतिस्पर्धा में हैं। इसके अतिरिक्त, वे हमारे कार्बन फुटप्रिंट को कम कर सकते हैं।" उन्होंने पराली जलाने पर चर्चा करते हुए कहा "बाजरे का डंठल मवेशियों के लिए बहुत अच्छा भोजन है।” उन्होंने कहा “पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किए जाने के कारण किसान बाजरे के डंठल को नहीं जलाते हैं। यह पंजाब में पराली जलाने के मुद्दे का भी जवाब हो सकता है।”

जगराओं के बाजरा उगाने वाले किसान श्री रसिंदर सिंह ने भी इस अवसर पर अपने अनुभवों की बात की और कहा कि बाजरा भी जी-20 बैठकों का एक अभिन्न हिस्सा है और प्रतिनिधियों को इसे चखने, किसानों से मिलने और बाजरा से जुड़े हुए स्टार्ट-अप के साथ इंटरैक्टिव सत्र के माध्यम से बाजरा का सच्चा अनुभव दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा, "अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष 2023 के उपलक्ष्य में, बाजरा पर उचित ध्यान देने के लिए सरकार के प्रयासों को सही मायने में देखा जा रहा है, और वर्तमान बैठक का भी ऐसा ही करने का इरादा है।"

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Saturday, September 24, 2022

वेब की लड़ाई भी लड़ेगी शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन

23rd September 2022 at 07:31 PM

नए प्रबंधन में लुधियाना यूनिट के प्रधान बने कवलजीत सिंह 


जालंधर
: 23 सितंबर 2022: (हरप्रीत सिंह इनपुट-पंजाब स्क्रीन डेस्क)::
   

कुछ ही वर्ष पूर्व जब मीडिया में भेदभाव बढ़ने लगा। बड़े या छोटे पत्रकार कह कर एक अलग तरह की जातिपाति बढ़ने लगी उस समय सामने आया एक पत्रकार संगठन जिसका नाम शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के नाम पर रखा गया। बसंती पगड़ी को भी सम्मान से पहना गया तांकि बसंती छोले का संकल्प हर दिल में और मज़बूत बनाया जा सके। यह संगठन हर उस जगह पहुँचने लगा जहां भी किसी पत्रकार को उत्पीड़न का शिकार बनना पड़ा। मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए काम करने वालों में ही कुछ लोग अपने ही पुराने सहयोगियों को नज़रअंदाज़ करने लगे। उन्हें हिकारत की नज़र से देखने लगे। कसूर बताते कि यह तो वेब मीडिया चलाते हैं। इन बड़े लोगों ने कभी उनकी मुश्किलें न पूछीं बल्कि उन्हें अछूत की तरफ बताने के कुत्सित प्रयास किए। बड़े बड़े वेतनमान लेने वाले इन बड़े पत्रकारों ने अपने ही भाईचारे के ऑनलाइन पत्रकारों को कमज़ोर करने के नापाक प्रयास किए। फिर सियासत में तब्दीलियां आने लगी तो बड़े मीडिया को देश की जनता गोदी मीडिया कह कर बुलाने लगी। जनता के हितों से जुड़ीं हर खबर हर बड़े चैनल और कई बार बड़े अख़बारों से भी गायब हो जाती। आम जनता के एक बड़े हिस्से ने टीवी देखना ही बंद कर दिया। अख़बारों की बिक्री भी कम होने लगी। तो  ही बदल दिया। उस नाज़ुक दौर में जान किसान दिल्ली के बार्डर पर आंदोलन कर रहे थे उस समय इसी वेब मीडिया ने कमाल का ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। साधारण से संसाधनों वाले वेब मीडिया ने बड़े गोदी मीडिया को पटखनी दे दी। इस दर्द, इस जोश और इस उत्साह को मान्यता देने वालों में से पहल की शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन की टीम ने। 

शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन, पंजाब में पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए लड़ने वाला एकमात्र प्रमुख और प्रमुख संगठन है। पंजाब की राष्ट्रीय इकाई और राज्य के सभी जिला पदाधिकारियों की अध्यक्षता में सर्किट हाउस  जालंधर में अध्यक्ष अमरिंदर सिंह और शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की बहन विशेष रूप से पहुंचे।  एसोसिएशन की संरक्षक जसमीत कौर की देखरेख में एक आपात बैठक भी की गई। बैठक में पंजाब के विभिन्न कस्बों और ज़िलों के अध्यक्ष, अध्यक्ष और महासचिवों ने भाग लिया। इस सभा के प्रारंभ में पूर्व की भांति अमर शहीदों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा कल विदा लेने वाले पत्रकार एवं परिवार के सदस्यों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

बैठक में पत्रकारों के अधिकारों को लेकर कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। वेब चैनल के पत्रकारों को विशेष रूप से जालंधर में पत्रकारों का दर्जा देने के संबंध में कुछ पत्रकारों ने पुलिस की मिलीभगत से अपने ही साथियों को फर्जी पत्रकार बताकर केस दर्ज कराने वालों को परेशान करने की रणनीति पर विचार किया।  कुछ अन्य राज्यों में भी सभी पत्रकारों पर बने झूठे पर्चे को रद्द करने के संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया। 

इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने पंजाब के सभी जिलों की उपस्थिति में नैतिक कारणों के आधार पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से अपना इस्तीफा पंजाब के अध्यक्ष गोरा संधू को सौंपा। विचार के बाद इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया। उन्हें संघ के दरवाजे की तरह अपने पास रखने को कहा गया और उनका आश्वासन दिया गया। इस अवसर पर पंजाब उप प्रधान हरप्रीत सिंह मक्कड़, चैयरमैन जसविंदर सिंह चावला, प्रधान कवलजीत सिंह, सुनील जैन, अमरजीत सिंह और पंजाब के सभी जिलों के पद अधिकारी पहुंचे। 

अगर आप भी लिखते हैं तो आप भी कलम के सिपाही हैं। हम सभी कलमकार एक युद्ध  लड़ रहे हैं। इसे जीतने के लिए आइए एकजुट हो जाएं। हमें हर हाल में यह है। संमाज का  इंसान केवल हमसे ही उम्मीद लगाए बैठा है। शहीद भगत सिंह के सपनों का भारत तभी बन पाएगा। 

समाजिक चेतना और जन सरोकारों से जुड़े हुए ब्लॉग मीडिया को जारी रखने में निरंतर सहयोगी बनते रहिए। नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आप सहजता से ही ऐसा कर सकते हैं। 

Saturday, September 18, 2021

पीसीजेयू के मौजूदा दौर में मीडिया को चुनौतियों पर विचारगोष्ठी

  18th September 2021 at 10:22 PM

 सियासतदान परिवारिक, व्यापारी और दरबारी हुए: डॉ. गर्ग 


लुधियाना
18 सितंबर 2021: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

बरसों बाद लुधियाना में कोई ऐसा मीडिया आयोजन हुआ है जिसमें न कोई सरकारी सरपरस्ती थी और न ही कोई मंत्री या सरकारी अधिकारी मुख्य मेहमान था। न ही सत्ता से कोई जगह या अन्य फायदा माँगा गया और न ही किसी सियासी या कारपोरेट लीडर के सामने हाथ फैलाए गए। सिर ऊंचा उठा कर, समाज की आंख से आंख मिलाते हुए शुद्ध जनहित की चर्चा की गई। जनहित से जुड़े लोग ही इस सेमिनार के मेहमान थे जिन्होंने खुल कर हर सबंधित मुद्दे पर बात भी उठाई और चर्चा भी की। डा, प्यारा लाल गर्ग, प्रोफेसर जगमोहन सिंह, बलविंदर जम्मू सरीखे जानेमाने लोगों ने मीडिया के नैतिक उत्थान की बात भी ज़ोरदार ढंग से की। कार्पोरेटी जकड़ के खिलाफ आवाज़ बुलंद हुई और पत्रकारों को उनके कर्तव्य बहुत ही अपनत्व से याद कराए गए। साथ ही उनको अपनी मुहारत सुधारने पर भी ज़ोर दिया। 

पंजाब एंड चंडीगढ़ जर्निलस्ट यूनियन की तरफ से लुधियाना में मौजूदा दौर में मीडिया को चुनौतियां विषय पर एक सैमीनार करवाया गया। इस में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. प्यारा लाल गर्ग और प्रो. जगमोहन सिंह मुख्य प्रवकता के तौर पर पहुंचे। इस मौके पर उनके साथ इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन के महासचिव बलविंदर जम्मू और पीसीजेयू के सचिव जय सिंह छिब्बर भी शामिल हुए। लुधियाना टीम की तरफ से युवा और सक्रिय पत्रकार गगन अरोड़ा, संतोख गिल और अमरपाल सिंह की तरफ से सभी को सुस्वागतम कहा गया। 

मुख्य प्रवकता डॉ. गर्ग ने कहा कि आज के पत्रकारों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पत्रकार बेशक किसी भी संस्थान के साथ जुड़ा हो उसे जन हित के मुद्दों को उठाना ही चाहिए। उन्होंने खबर में सही और स्पष्ट तथ्य देने पर भी ज़ोर दिया और समझाया कि पत्रकार को बिना किसी धर्म, जातपात और मतभेद से अपना कर्तव्य निभाने पर जोर देना चाहिए। 

सेमिनार में बहुत से मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्पोरेटी दौर में आए मशीनीकरण ने संवेदनशीलता को समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस सारी स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बात पर ज़ोर दिया गया कि मौजूदा समय में एक पत्रकार को खुद पूरी मुहारत हासिल करनी पड़ेगी तांकि वह अपनी कलम के जरिए अच्छे मुद्दे प्रभावी ढंग से लोगों के बीच ले कर जाए। तभी वह अपना कलम का धर्म निभाता हुआ लोगों को जागरुक भी कर सकेगा।  

डॉ. गर्ग ने पत्रकारों को अपने खुद के मुद्दे उभारने के लिए संगठित होने पर भी जोर दिया। उन्होंने कि आज हमारे सियासतदान तो परिवारवाद, व्यापरिक और दरबारी हो गए है। इसके लिए पत्रकारों पर जनहित्त की ज़िम्मेदारी का बोझ और भी बढ़ गया है। 

वाम विचारधारा से जुड़े गहरी पैठ वाले वरिष्ठ और सक्रिय पत्रकार बलविंदर जम्मू ने कहा कि मौजूदा समय में मीडिया बड़े बड़े कार्पोरेट के हाथ में सिमटता जा रहा है। किसानी का मुद्दा साज़िश के तहत दिल्ली के बड़े मीडिया की तरफ से दबाया जा रहा है। मौजूदा दौर में पत्रकारी के काम को बहुत ज़्यादा नुकसान हुआ है जिसे बचाने के लिए हम सभी को मिल कर काम करना पड़ेगा। उन्होंने पत्रकारों को मौजूदा चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी खबरों के जरिए झूठ सच्च का निपटारा करते रहने के लिए प्रेरित किया। बलविंदर जम्मू ने पब्लिक सैक्टर के हो रहे उजाड़े पर भी चिंता व्यक्त की। 

शहीद भगत सिंह के भान्जे और निरंतर सक्रिय रहने वाले प्रो. जगमोहन सिंह ने पत्रकारों को आधुनिक टेक्नालिजी के साथ जुड़े  ठीक गलत की पहचान करने के लिए भी प्रेरित किया। गौरतलब है की इस विषय पर प्रोफेसर जगमोहन सिंह की गहरी पकड़ है। उन्हें तकरीबन हर मीडिया संस्थान और पत्रकार की आंतरिक वास्तविकता का गहरा ज्ञान है। उन्होंने देश में बढ़ रही महंगाई में कार्पोरेट घरानों का हाथ बताया। 

सेमिनार में चर्चा के वक्त जय सिंह छिब्बर और मैडम बिद्दू ने भी अपने विचार सांझे किए। सैमीनार में लुधियाना सहित आस पास के अलग अलग अखबारों के इंचार्ज और प्रतिनिधी ने भी हिस्सा लिया। सेमिनार में फोर्टो जर्नलिस्ट एसोसिएशन की पूरी टीम भी मौजूद रही। 

इस मौके पर लुधियाना टीम की तरफ से कोआर्डीनेटर गगनदीप अरोड़ा, अमरीक बतरा, गुरिंदर सिंह, वरिंदर राणा, हर्शराज सिंह, निखिल भाद्धवाज, अमरपाल सिंह, सतविंदर  शर्मा, विकास मल्होत्रा, रविंदर अरोड़ा, मुनीष शर्मा, दिलबाग दानिश, दिनेश कुमार, अमित कुमार, अरुण कुमार, अरुण सरीन, हिमांशु महाजन, अश्वनी धीमान, कुलदीप सिंह काला, अमनप्रीत चौहान, राजेश भट्टा,. जोगिंदर ओबराय, दविंदर सिंह जग्गी, डीपीएस बतरा, सहित अन्य लोग हाजिर थे। 

Tuesday, December 08, 2020

मोहाली प्रेस क्लब ने भी किया किसानों के हक में रोष प्रदर्शन

 चंडीगढ़ के सेक्टर 17 तक किया जोशीला रोष प्रदर्शन 


मोहाली: 8 दिसंबर 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 

Photo by Josh Hild of  Unsplash 
हड्डियों को कंपकंपा देने वाली शीत लहर की रातों में भी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली की सीमा पर बैठे किसानों का दर्द और उनके जज़्बात देख कर पत्रकार भी द्रवित हो उठे हैं। जिन कानूनों के कारण देश का अन्नदाता आज सड़कों पर आ गया है उनके खिलाफ रोष दिन-ब-दिन तीखा होता जा रहा है रहा है। किसानों के समर्थन में लेखक भी उठ खड़े हुए हैं, कलाकर भी, बुद्धिजीवी भी और पत्रकार भी। बहुत से पत्रकार तो दिल्ली की सीमा पर जा कर किसानों के इस ऐतिहासिक धरने का लाईव प्रसारण भी कर रहे हैं।  देश की वास्तविक राष्ट्रीयता, मानवता और अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर पत्रकारों की एकजुटता आज चंडीगढ़ में भी देखने को मिली। भारत बंद के देश व्यापी आह्वान पर आज मोहाली प्रेस क्लब के सदस्यों ने आज के रोष प्रदर्शन  कर भाग लिया।   छात्र शामिल हुए, मुलाज़िम शामिल हुए, किसान संगठन शामिल हुए वहीं इसमें पत्रकार भी शामिल हुए। मोहाली प्रेस  क्लब के बैनर की अगुवाई में यह पत्रकार सेक्टर 17 तक जोशीला रोष मार्च करते भी देखे गए। 

मोहाली प्रेस क्लब के प्रधान गुरजीत सिंह बिल्ला के नेतृत्व में आयोजित इस रोष मार्च शामिल पत्रकारों ने केंद्र सर्कार के खिलाफ और किसानों के  हक में लिखे नारों की तख्तियां भी पकड़ीं थी।  मोहाली अपने कार्यालय से चल कर सेक्टर 17 चंडीगढ़ की तरफ रवाना हुआ। 

इस मार्च से पहले हुई छोटी सी रैली को सम्बोधित करते हुए क्लब के प्रधान गुरजीत सिंह बिल्ला और  महासचिव हरबंस सिंह बागड़ी ने केंद्र सरकार की तानाशाही की सख्त शब्दों में निंदा की। उन्होंने मांग भी की कि देश भर में व्याप्त जनाक्रोश को देखते हुए इन कानूनों को तुरंत निरस्त किया जाए। उन्होंने कहा की स्वतंत्र भारत में यह पहली बार है कि किसानों के समर्थन में इतना बड़ा हजूम चल पड़ा है। इसके साथ ही उन्होइने चेतावनी भी दी की यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी अपनी ज़िद पर पर अड़े हुए हैं तो अब अन्नदाता किसान भी पीछे मुड़ने वाला नहीं है। 

इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष-गुरमीत सिंह शाही, सुखदेव सिंह पटवारी, उपाध्यक्ष-कुलदीप सिंह कुराली, कोषाधिकारी-सुखविंदर सिंह शान, राज कुमार अरोड़ा, जसविंदर रुपाल, नाहर सिंह धालीवाल, विशाल भूषण, सागर पाहवा, मंगत सैदपुरी, कृपाल सिंह, माया राम, विजय कुमार, गुरमीत सिंह रंधावा, जगविंदर सिंह, संदीप शर्मा, नीलम ठाकुर इत्यादि भी मौजूद रहे। 

Wednesday, December 02, 2020

मिलावटी शहद के सेवन का है स्वास्थ्य पर जानलेवा प्रभाव

 खाद्य धोखाधड़ी (फूड फ्रॉड) पर CSE की ख़ास पड़ताल 


नई दिल्ली: 2 दिसंबर 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

यह तहकीकात शहद को0 शुद्धता परीक्षणों से बचाने वाले मिलावटी व्यापार का खुलासा करती है। कोविड-19 के संकट के वक्त इस मिलावटी शहद का सेवन हमारे स्वास्थ्य पर जानलेवा प्रभाव डाल रहा है।

भारत और जर्मनी की प्रयोगशाला अध्ययनों पर आधारित सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट द्वारा की गई यह गहरी पड़ताल बताती है कि भारत के सभी प्रमुख ब्रांड के शहद में जबरदस्त मिलावट की जा रही है। 77 फीसदी नमूनों में शुगर सिरप की मिलावट पाई गई है। 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनएमआर) परीक्षण में 13 ब्रांड में सिर्फ 3 ब्रांड ही पास हुए।  

शहद के शुद्धता की जांच के लिए तय भारतीय मानकों के जरिए मिलावट को नहीं पकड़ा जा सकता, क्योंकि चीन की कंपनियां ऐसे शुगर सिरप तैयार कर रही हैं जो भारतीय जांच मानकों को आसानी से खरे उतरते हैं।  

कोविड-19 संकट के वक्त यह खाद्य धोखाधड़ी (फूड फ्रॉड) जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ है। भारतीय इस वक्त ज्यादा शहद का सेवन कर रहे हैं, क्योंकि उनका विश्वास है कि विषाणु से लड़ने के लिए यह अच्छाइयों की खान है, मसलन एंटीमाइक्रोबियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के साथ इसमें प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) को बनाने की क्षमता है।  

लेकिन यदि यह शहद मिलावटी है तो असल में हम चीनी खा रहे हैं, जो मोटापा और अत्यधिक वजन की चुनौती को बढ़ाता है और जो अंततः हमें गंभीर कोविड-19 संक्रमण के जोखिम की ओर ले जाता है।  देखिये विस्तृत रिपोर्ट के कुछ अंश:

“यह खाद्य धोखाधड़ी (फूड फ्रॉड) 2003 और 2006 में हमारे द्वारा सॉफ्ट ड्रिंक में की गई मिलावट की खोजबीन से ज्यादा कुटिल और ज्यादा जटिल है। हम इस समय जानलेवा कोविड-19 के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं और इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है, ऐसे कठिन समय में हमारे आहार में चीनी का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल (ओवरयूज) हालात को और भयावह बना देगा।“ शहद में मिलावट के भंडाफोड़ और अध्ययन को लेकर सेंटर फार साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने यह बातें कहीं। इस अध्ययन में पाया गया है कि भारतीय बाजारों में बिक्री किए जा रहे करीब सभी शहद के ब्रांड जबरदस्त तरीके से शुगर सिरप की मिलावट वाले हैं। 

पर्यावरणविद सुनीता नारायण ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है क्योंकि कोविड-19 के बुरे दौर में यह लोगों की सेहत से समझौता करने वाला है। हम जानते हैं कि शहद में जीवाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) और सूजन को कम करने वाले (एंटी इंफलेमेट्री) गुण होते हैं, इसलिए प्रत्येक घर वाले शहद को अच्छाइयों की खान मानकर उसका ज्यादा सेवन कर रहे हैं। हमारे शोध ने पाया है कि बाजार में बिकने वाले ज्यादातर शहद मिलावटी हैं, उनमें शुगर सिरप मिलाया गया है। इसलिए लोग शहद के बजाए अनजाने में अत्यधिक चीनी का सेवन कर रहे हैं। यह कोविड-19 के जोखिम को तो बढ़ाता ही है लेकिन शुगर का सेवन प्रत्यक्ष तौर पर मोटापे और मोटे लोगों से जुड़ा है जो उनमें जानलेवा संक्रमणों को बढ़ा देता है। 

तहकीकात में क्या पाया गया?

सीएसई के खाद्य शोधार्थियों ने भारतीय बाजार में बिकने वाले 13 शीर्ष और छोटे ब्रांड वाले प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) शहद को चुना। इन ब्रांड के नमूनों को सबसे पहले गुजरात के राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) में स्थित सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फूड (सीएएलएफ) में जांचा गया। लगभग सभी शीर्ष ब्रांड (एपिस हिमालय छोड़कर) शुद्धता के परीक्षण में पास हो गए, जबकि कुछ छोटे ब्रांड इस परीक्षण में फेल हुए, उनमें सी3 और सी4 शुगर पाया गया, यह शुगर चावल और गन्ने के हैं। 

लेकिन जब इन्हीं ब्रांड्स को न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण पर परखा गया तो लगभग सभी ब्रांड के नमूने फेल पाए गए। एनएमआर परीक्षण वैश्विक स्तर पर मोडिफाई शुगर सिरप को जांचने के लिए प्रयोग किया जाता है। 13 ब्रांड परीक्षणों में सिर्फ 3 ही एनएमआर परीक्षण में पास हो पाए। इन्हें जर्मनी की विशेष प्रयोगशाला में जांचा गया था। 

सीएसई के फूड सेफ्टी एंड टॉक्सिन टीम के कार्यक्रम निदेशक अमित खुराना ने कहा कि हमने जो भी पाया वह चौंकाने वाला था। यह दर्शाता है कि मिलावट का व्यापार कितना विकसित है जो खाद्य मिलावट को भारत में होने वाले परीक्षणों से आसानी से बचा लेता है। हमारी चिंता सिर्फ इतनी भर नहीं है कि जो शहद हम खाते हैं वह मिलावटी है लेकिन यह चिंता इस बात को लेकर है कि इस मिलावट को पकड़ पाना बेहद जटिल और कठिनाई भरा है। हमने पाया कि शुगर सिरप इस तरह से डिजाइन किए जा रहे कि उनके तत्वों को पहचाना ही न जा सके। 

खोज में यह तथ्य मिले

77 फीसदी नमूनों में शुगर सिरप के साथ अन्य मिलावट पाए गए

कुल जांचे गए 22 नमूनों में केवल पांच ही सभी परीक्षण में पास हुए

शहद के प्रमुख ब्रांड्स जैसे डाबर, पतंजलि, बैद्यनाथ, झंडु, हितकारी और एपिस हिमालय, सभी एनएमआर टेस्ट में फेल पाए गए

13 ब्रांड्स में से सिर्फ 3 – सफोला, मार्कफेड सोहना और नेचर्स नेक्टर, सभी परीक्षणों में पास पाए गए 

भारत से निर्यात किए जाने शहद का एनएमआर परीक्षण 1 अगस्त, 2020 से अनिवार्य कर दिया गया है, जो यह बताता है कि भारत सरकार इस मिलावटी व्यापार के बारे में जानती थी, इसलिए उसे अधिक आधुनिक परीक्षणों की आवश्यकता पड़ी। 

चीन से जुड़े तार और कैसे हमने इस “शहद घोटाले (हनीगेट)” को पकड़ा 

बीते वर्ष भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने आयातकों और राज्य के खाद्य आयुक्तों को बताया था कि देश में आयात किया जा रहे गोल्डन सिरप, इनवर्ट शुगर सिरप और राइस सिरप का इस्तेमाल शहद में मिलावट के लिए किया जा रहा है। 

अमित खुराना ने कहा कि यह अब भी अस्पष्ट है कि खाद्य नियामक वास्तविकता में इस काले कारोबार के बारे में कितना जानता है। वह कहते हैं कि एफएसएसएआई के निर्देश में जिन सिरप के बारे में कहा गया है, वे उन नामों से आयात नहीं किए जाते हैं या इनसे मिलावट की बात साबित नहीं होती। इसकी बजाए चीन की कंपनियां फ्रुक्टोज के रूप में इस सिरप को भारत में भेजती हैं। एफएसएसएआई ने यह निर्देश क्यों दिया? हमें यह निश्चित तौर पर नहीं मालूम? 

सीएसई ने अलीबाबा जैसे चीन के व्यापारिक पोर्टल्स की छानबीन की जो अपने विज्ञापनों में दावा करते हैं कि उनका फ्रुक्टोज सिरप भारतीय परीक्षणों को बाईपास कर सकता है। यह भी पाया गया कि वही चीन की कंपनी जो फ्रुक्टोज सिरप का प्रचार कर रही थी, वह यह भी बता रही थी कि यह सिरप सी3 और सी4 परीक्षणों को बाईपास कर सकते हैं और इनका निर्यात भारत को किया जाता है। सीएसई ने इस मामले में और जानकारी हासिल करने के लिए एक अंडरकवर ऑपरेशन चलाया।  

खुराना ने बताया कि चीन की कंपनियों को ईमेल भेजे गए और उनसे अनुरोध किया गया कि वे ऐसे सिरप भेजें, जो भारत में परीक्षणों में पास हो जाएं। उनकी ओर से भेजे गए जवाब में हमें बताया गया कि सिरप उपलब्ध हैं और उन्हें भारत भेजा जा सकता है। चीन की कंपनियों ने सीएसई को सूचित किया कि यदि शहद में इस सिरप की 50 से 80 फीसदी तक मिलावट की जाएगी तो भी वे परीक्षणों में पास हो जाएंगी। परीक्षण को बाईपास करने वाले सिरप के नमूने को चीनी कंपनी ने पेंट पिगमेंट के तौर पर कस्टम्स के जरिए भेजा। 

सीएसई ने उत्तराखंड के जसपुर में उस फैक्ट्री को भी खोजा जो मिलावट के लिए सिरप बनाती है, वे  सिरप के लिए “ऑल पास” कोडवर्ड का इस्तेमाल करते हैं। सीएसई के शोधार्थियों ने उनसे संपर्क किया और सैंपल खरीदा। यह समझने के लिए कि क्या यह शुगर सिरप प्रयोगशाला परीक्षण से पास हो सकते हैं, सीएसई ने शुद्ध शहद में इन्हें मिलाया। परीक्षणों में पता चला कि 25 फीसदी और 50 फीसदी शुगर सिरप वाले मिलावटी नमूने पास हो गए। इस तरह हमने यह सुनिश्चित किया कि शुगर सिरप एफएसएसएआई के शहद मानकों को बाईपास कर सकते हैं। 

सीएसई क्या कहता है ?

सुनीता नारायण ने कहा कि इस समय हमने मिलावट के कारोबार का खुलासा कर दिया है। हम सरकार, उद्योग और उपभोक्ताओं से ये चाहते हैं: 

चीन से सिरप और शहद का आयात बंद किया जाए

भारत में सार्वजनिक परीक्षण का सुदृढ़ीकरण किया जाए, ताकि कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया जा सके। सरकार को एनएमआर जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके नमूनों का परीक्षण करना चाहिए और यह जानकारी सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि उपभोक्ता जागरूक हों और हमारे स्वास्थ्य से समझौता न हो। यह कंपनियों को भी जिम्मेदार ठहराएगा।

शहद मधुमक्खी पालकों या छत्तों से लिया गया है, सभी शहद बेचने वाली कंपनियों को इसका खुलासा करना चाहिए 

सुनीता नारायण ने कहा कि हमें बतौर उपभोक्ता शहद के बारे में और अधिक जागरूक होना चाहिए जो हम इसकी अच्छाई के लिए खाते हैं। उदाहरण के लिए, हम अक्सर मानते हैं कि यदि शहद क्रिस्टलीकृत होता है तो यह शहद नहीं है। यह सही नहीं है। हमें शहद के स्वाद, गंध और रंग को सीखना शुरू करना चाहिए जो कि प्राकृतिक है। 

नारायण ने कहा कि हम अधिक शहद का उपभोग कर रहे हैं ताकि महामारी से लड़ सकें। लेकिन शुगर की मिलावट वाला शहद हमें बेहतर नहीं बना रहा है। असल में यह हमें और खतरे में डाल रहा है। वहीं दूसरी तरफ हमें और अधिक चिंतित होना चाहिए क्योंकि मधुमक्खियों को खोकर हम अपनी खाद्य प्रणाली को खत्म कर देंगे। यह मधुमक्खियां परागण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, यदि शहद में मिलावट होगी तो हम सिर्फ अपनी सेहत नहीं खोएंगे, बल्कि हमारी कृषि की उत्पादकता भी खो देंगे। 


Thursday, August 13, 2020

बेंगलुरू में हुई शान-ए-रसूल में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी

Thursday: 13th August 2020 at 3:15 PM
 सज़ा न मिली तो शुक्रवार को आन्दोलन का ऐलान-शाही इमाम पंजाब 
जामा मस्जिद लुधियाना में मीटिंग की अध्यक्षता करते शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी
लुधियाना:13 अगस्त 2020:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
बीते दिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में एक विधायक के भांजे की तरफ से सोशल मीडिया पर पैगंबर इस्लाम हजरत मुहम्मद साहिब सल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में की गई गुस्ताखी के बाद जहां बेंगलुरू की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, वहीं देश भर के मुसलमानों में गुस्से की लहर दौड़ गई है, आज यहां स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रही जमात मजलिस अहरार इस्लाम की ओर से एतिहासिक जामा मस्जिद लुधियाना में इस विषय पर पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि बेंगलुरू में शान ए रसूल सल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम में की गई गुस्ताखी हरगिज बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शाही इमाम ने कहा कि अगर जल्दी ही अपराधियों को पकड़ कर सजा नहीं दी गई तो देश भर के करोड़ो मुस्लमान अंदोलन के लिए एक ही समय पर सडक़ों पर आ जाएंगे, क्योंकि यह पैगंबर हजरत मुहम्मद साहिब सल्लाहु अलैहि वसल्लम के सम्मान का मामला है, जिसमें मुसलमानों ने कभी कोई समझौता नहीं किया है। शाही इमाम पंजाब ने कहा कि प्यारे मुहम्मद सल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम हर एक मुसलमान को अपनी जान से ज्यादा अजीज है। अपने नबी साहिब के लिए मुसलमान कौम का हर मर्द, औरत, बच्चा अपनी कुर्बानी पेश करने के लिए तैयार है। शाही इमाम ने कहा कि सरकार इसको कोई आम मसला न समझे। इतिहास गवाह है दुनिया के किसी भी हिस्से में हम कम हो या ज्यादा गुस्ताख ए रसूल को कभी बर्दाश्त नहीं करते, शही इमाम ने कहा कि गुस्ताखी करने वाला किसी धर्म का नहीं है वह नास्तिक है। क्योंकि कोई भी मजहब किसी दूसरे मजहब की बेइज्जती की शिक्षा नहीं देता है,वर्णण योग्य है कि बेंगलुरू पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई को देखा जाएगा,अगर अपराधियों को नहीं पकड़ा गया तो शुक्रवार को आंदोलन का ऐलान किया जाएगा।
रोपड़ में कुरान शरीफ की बेअदबी करने वालों को गिरफ्तार करो- उस्मान रहमानी
लुधियाना: 13 अगस्त 2020:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
नूरपुर बेदी के करीबी गांव घाई माजरा, कट्टा सबोर में बीते तीन दिन पहले पवित्र कुरान शरीफ की हुई बेअदबी की घटना की नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने निंदा करते हुए पंजाब सरकार से मांग की है कि कुरान शरीफ की बेअदबी करने वालो को जल्दी गिरफ्तार किया जाए, उस्मान रहमानी ने कहा कि पंजाब की पवित्र धरती पर बार बार पवित्र ग्रंथों के साथ हो रही बेअदबी खुदा के कहर को न बुला ले, उन्होंने कहा कि तीन दिन गुजर जाने के बाद भी कीरतपुर साहिब हल्के की पुलिस इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी जो कि दुख की बात है। नायब शाही इमाम ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए जल्दी ही लुधियाना जामा मस्जिद से एक वफद रोपड़ जाएगा जिसकी रहनुमाई शाही इमाम साहिब करेंगे।

Sunday, March 22, 2020

दिल्ली में भी सरकार ने दिया 31 मार्च तक लॉकडाउन का आदेश

दिल्ली के सभी बाजार 31 मार्च तक बंद रहेंगे
नई दिल्ली: 22 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 

कोरोना का कहर और आतंक दोनों बढ़ते जा रहे हैं। मज़ाक में लेने वाले आम लोग भी अब गंभीर होते नज़र आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर से दिए गए जनता कर्फ्यू को लोगों ने जितनी गर्मजोशी से समर्थन दिया है उससे एक नया इतिहास भी रचा गया है। इसी बीच पंजाब सरकार ने भी लॉक डाउन का आदेश जारी किया है, उत्तराखंड ने भी और दिल्ली सरकार ने भी।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने दिल्ली सरकार द्वारा आज दिल्ली में लॉक डाउन करने की घोषणा का समर्थन किया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्ली के व्यापारियों की ओर से   लॉक डाउन का समर्थन करते हुए कहा की दिल्ली सरकार का यह कदम दिल्ली में कोरोना वायरस के सामुदायिक संक्रमण को रोकने में बहुत मदद करेगा। उल्लेखनीय है कि कैट ने कल एक ट्वीट के जरिये दिल्ली के उपराज्यपाल श्री अनिल बैजल और दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल से  दिल्ली में तालाबंदी किया था।
दिल्ली में घोषित लॉकडाउन के पालन में कैट ने दिल्ली के सभी ट्रेड एसोसिएशंस को एक एडवाइजरी जारी की है कि प्रत्येक व्यापारी को कल से 31 मार्च, 2020 तक अपनी दुकान बंद रखनी होगी। श्री खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली में तालाबंदी की घोषणा के साथ दिल्ली के सभी वाणिज्यिक बाजार 31 मार्च तक बंद रहेंगे और दिल्ली में अगले 9 दिनों तक कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी। दिल्ली के 15 लाख छोटे और बड़े व्यापारी ही नहीं, बल्कि उनके 30 लाख से अधिक कर्मचारी भी  घर पर ही रहेंगे। कैट ने दिल्ली के व्यापारियों को किसी भी कर्मचारी की मजदूरी में कटौती नहीं करने की सलाह दी है। श्री खंडेलवाल ने आगे कहा कि दिल्ली का कारोबारी समुदाय COVID-19 का मुकाबला करने के लिए सरकार के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है।
मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल की प्रेस कांफ्रेंस
दिल्ली में 31 मार्च तक लॉकडाउन का ऐलान मेट्रो सेवाएं भी बंद-25 फीसदी बसें चलेंगी
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए तमाम राज्य लॉकडाउन की ओर बढ़ रहा है। जनता कर्फ्यू के दौरान दिल्ली मेट्रो सेवा 31 मार्च तक बंद करने का फैसला किया गया। वहीं, अब दिल्ली को लॉकडाउन करने का फैसला किया गया है। कल से दिल्ली लॉकडाउन रहेगा। राजधानी दिल्ली में कोरोना के चलते धारा 144 भी लागू है।
सीएम अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया कि कल यानी 23 मार्च से 31 मार्च तक दिल्ली में लॉकडाउन रहेगा।  पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद रहेंगे। डीटीसी की भी केवल 25 फीसदी बसें ही चलेंगी।
सीएम ने कहा, दिल्ली की दुकानें, बाजार सब बंद रहेंगे। दिल्ली के बॉर्डर सील रहेंगे, हालांकि दूसरे राज्यों से खाने-पीने के सामान और सब्जी लाने वाले वाहनों को अनुमति होगी। इसके अलावा सभी फ्लाइट्स और धार्मिक स्थल बंद रहेंगे। वहीं, अस्पताल और बिजली के दफ्तर खुले रहेंगे।
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गुमराहकुन अफवाहें बनाने और फ़ैलाने वालों पर दर्ज होंगें पर्चे
पंजाब:पूरे राज्य में 31 मार्च तक लॉकडाउन लागू करने का फैसला

Saturday, March 21, 2020

गुमराहकुन अफवाहें बनाने और फ़ैलाने वालों पर दर्ज होंगें पर्चे

21st March 2020 at 5:40 PM
डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 54 के अंतर्गत कैद और जुर्माना 
CDC से साभार चित्र 
लुधियाना:: 21 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
DC  प्रदीप कुमार अग्रवाल 
विश्व भर में फैली बीमारी नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के चलते कुछ शरारती तत्वों की ओर से सोशल मीडिया पर गुमराहकुन अफवाहें फैलाई जा रही हैं। यह अफवाहें इतनी खतरनाक और गंभीर हैं की इनसे आम लोगों के मन में तुरंत ही घबराहट पैदा होती है। किसी के दुष्प्रचार से ऐसी खतरनाक स्थिति  असहनीय है। ऐसी अफवाहों को फ़ैलाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ प्रशासन ने अब सख्ती करना  लिया है और इसकी घोषणा भी कर।  प्रशासन ऐसे  खिलाफ अब पर्चे दर्ज करेगा। इन तत्वों को नियंत्रित करने के लिए ऐसा करना आवश्यक भी है। 

इस संबंध में जिला लोक सम्पर्क अधिकारी को लिखे एक पत्र में डिप्टी कमिश्नर प्रदीप अग्रवाल ने कहा है कि मुख्य धारा  के मीडिया को इस मकसद के लिए जिला प्रशासन को सहयोग करना चाहिए।  उन्होंने मीडिया से अपील की कि किसी भी खबर  को अख़बार/चैनल/सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर चलाने से पहले उसके तथ्यों की पूरी तरह से जांच पड़ताल करके उनकी पुष्टि कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया भी गुमराहकुन प्रचार करने वालों की सूचना जिला प्रशासन को दे तांकि सके। 
उन्होंने यह भी कहा कि डिज़ाज़टर मैनेजमेंट ऐक्ट की धारा 54 के अंतर्गत यह प्रावधान है कि कि जो भी व्यक्ति कोई झूठी चेतावनी बनाता है या फैलाता है, जिससे लोगों में घबराहट होती हो तो उसे एक वर्ष की कैद या जुर्माना हो सकता है। गौरतलब है की सोशल मीडिया पर ऐसा बहुत कुछ लम्बे समय से प्रसारित होता आ  जिसके मूल स्रोत तक का भी उल्लेख नहीं किया जाता। 

Saturday, September 01, 2018

लोगों का पैसा लोगों के भलाई में लगाने में अहम भूमिका निभाई LIC ने

LIC ने पूर्ण किये राष्ट्र की सेवा में गौरवपूर्ण 62 वर्ष
लुधियाना: 1 सितम्बर 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम):: 

आज भारतीय जीवन बीमा निगम के दुगरी स्थित मंडल  कार्यालय में ऐतिहासिक रौनक थी। जिन जिन लोगों ने भी एल आई सी पालसिओं को घर घर पहुँचने में जोशो खरोश से काम किया था उन सभी के चेहरों पर एक चमक थी। सफलता की चमक। दिन रात एक करके की गयी मेहनत की चमक। राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान के गौरव की चमक। इस मेहनत और उपलब्धि के  बदले इन सभी को ध्वजारोहण के बाद सम्मानित भी किया गया।
लुधियाना मण्डल के वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक श्री एल.सी. पिपिल ने  बताया कि पिछले 18 वर्षो से जीवन बीमा के क्षेत्र मे प्राईवेट कंपनियों के आने के बावजूद भी भारतीय जीवन बीमा निगम ने मार्केट शेयर नई पॉलिसियाँ में 75.67% एवं कुल प्रीमियम आमदन में 69% रखते हुए अपना पहला स्थान कायम रखा हुया है । आज भारतीय जीवन बीमा निगम के पास 29 करोड़ से अधिक पॉलिसीधारक होने के साथ-साथ 25 लाख करोड़ से भी अधिक लाइफ फ़ंड एवं 28  लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्तियाँ भी हैं । उन्होने बताया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा 266.08 लाख दावों का भुगतान करते हुए 1,11,860.41 करोड़ रुपये अदा किए हैं । जबकि 98.04% मृत्यु दावों का भुगतान किया गया है। भारतीय जीवन बीमा निगम ने अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान करने हेतु सूचना प्रोधौयोगिकी का अधिकतम उपयोग किया है। भारत में सब से बड़ा बीमा उद्योग होने के कारण भारतीय जीवन बीमा निगम ने हमेशा उच्च तकनीक को अपनाते हुए अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान कर रहा है । अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हुए वर्ष 2017-18 में निगम को 27 पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है

प्रैस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक ने बताया कि लुधियाना मण्डल ने 31.03.2018 के समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान 1,08,034 नई पॉलिसियाँ जारी करके 201.50 करोड़ रुपये की प्रथम प्रीमियम आय अर्जित करके नव-व्यवसाय में नया कीर्तिमान स्थापित किया है । लुधियाना मण्डल के दावा भुगतान के संबंध मे बोलते हुए श्री एल.सी. पिपिल ने बताया कि 31.03.2018 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में तक कुल 1,23,557 पॉलिसियों में परिपक्वता एवं विद्दमानता हितलाभ  के 574.32 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह से कुल 3291 मृत्यु दावों का भुगतान करते हुए कुल 62.31 करोड़ रुपये का भुगतान करते हुए अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा की मिसाल लुधियाना मण्डल द्वारा पृस्तुत की जा चुकी है।
लुधियाना मण्डल की ओर से चालू वित्तीय (01.04.2018 to 31.07.2018) वर्ष में, अब तक कुल 28152 परिपक्वता एवं विद्दमानता हित लाभ दावों के रूप में 169.80 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह से कुल 1034 मृत्यु दावों का भुगतान करते हुए कुल 18.83 करोड़ रुपये का भुगतान करके अपनी बेहतर सेवा का प्रदर्शन कर चुका है।
देश में अपने पॉलिसी धारकों को सेवा प्रदान करने के लिए एलआईसी के 8 क्षेत्रीय कार्यालय, 113 मण्डल कार्यालय, 2048 शाखा कार्यालय, 1430 सेटेलाईट कार्यालय, 1227, मिनी कार्यालय, 73 कस्टमर ज़ोन कार्यालय का प्रावधान किया गया है जिनके द्वारा अपने बहुमूल्य पॉलिसी धारकों को उन के घर तक सेवा प्रदान कर रहा है। एलआईसी ने अपने पॉलिसी धारकों के लिए एक पोर्टल भी बनाया हुया है जिस से कोई भी पॉलिसी धारक अपनी पॉलिसी को रजिस्टर करने के बाद, पॉलिसी से संबन्धित जानकारी ऑनलाइन ले सकता है ।
श्री पिपिल ने बताया कि लुधियाना मण्डल द्वारा 01.09.2018 से 07.09.2018 तक बीमा सप्ताह मनाया जा रहा है जिसमें निम्नलिखित प्रोग्राम किए जा रहे हैं :
1.   बीमा सप्ताह का शुभारंभ आज दिनांक 01.09.2018 को निगम के ध्वजारोहण के साथ मण्डल कार्यालय में किया गया । इस भव्य समारोह में एलआईसी से रिटायर हुए कर्मचारियों, पॉलिसीधारकों, उत्कृष्ट विकास अधिकारियों, सी.एल.आई.ए. एवं अभिकर्ताओं को सम्मानित किया गया ।
2.   02.02.2018 को बीमा जागरूकता दौड़ की जाएगी
3.   03.09.2018 को पौधारोपण, हेल्थ सेमिनार किया जाएगा  ।
4.   04.09.2018 को एलआईसी प्रांगण में खून दान कैंप तथा 05.09.2018 को अध्यापक दिवस मनाया जाएगा ।
5.   06.09.2018 को एक सरकारी स्कूल में बच्चों के लिए चित्रकारी प्रतियोगिता, मेडिकल चैक उप कैंप, पॉलिसीधारक के साथ मीटिंग होगी ।
6.   बीमा सप्ताह का समापन समारोह दिनांक 07.09.2017 को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के द्वारा किया जाएगा ।

Friday, June 01, 2018

तीनों सेनाओं के पास हथियारों की कोई कमी नहीं-रक्षामंत्री सीतारमण

रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने गिनवाईं भाजपा सरकार की उपलब्धियां 
लुधियाना: 1 जून 2018: (प्रदीप शर्मा//पंजाब स्क्रीन):: 
सरकार की तरफ से सेना की तरफ ध्यान न दिए जाने के विपक्षी आरोपों की आज यहाँ रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने धज्जियां उड़ा दीं।  पत्रकारवार्ता में उन्हने स्पष्ट कहा कि देश की तीनों सेनाओं के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है। वह यहाँ के महाराजा रीजेंसी में हुए एक विशेष आयोजन में मीडिया से बात कर रहीं थीं। मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धियों को तथ्यों सहित बताने के लिए पहली बार लुधियाना पहुंची सीतारमण ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने पहली बार तीनों सेनाओं के वाइस चीफ को हथियारों की खरीद के अधिकार दे दिए हैं। इससे सेना के हाथ मज़बूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं को फंड मुहैया करवाया गया है और वह अपनी जरूरतों के अनुसार हथियारों की खरीद कर रहे हैं। हथियारों के मामले में भी मज़बूत बनने की यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इसके साथ साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए क्या उसे जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा? इस सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा कि इस पर लगातार मंथन किया जा रहा है। पेट्रोल व डीजल को केंद्र सरकार ने जीएसटी में बाकायदा रखा है और फिलहाल लिस्ट में उस पर जीरो फीसद टैक्स है। राज्य सरकारों की सहमति के बाद ही इसे जीएसटी में शामिल कर रेट निर्धारित किए जाएंगे, ताकि जीएसटी के कानून में किसी तरह का फेरबदल करने के लिए इसे पुनः लोकसभा व राज्यसभा में लाने की जरूरत न पड़े। अब राज्य सरकारों की मर्ज़ी का मामला विपक्ष के पीला में फेंक कर बीजेपी सरकार ने चुनावी रणनीति में बाज़ी मार ली है।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने बिना किसी राज्य का नाम लेते हुए कहा कि एक राज्य सरकार का पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से रोजाना नौ हजार करोड़ रूपये का राजस्व बढ़ गया, जबकि एक अन्य राज्य का सात करोड़ रुपये रोजाना राजस्व बढ़ा है। यदि राज्य सरकारें इसे लेकर चिंतित हैं तो उन्हें अपने टैक्स में कुछ कमी लानी चाहिए, ताकि जनता को इस समय राहत दी जा सके। हालांकि उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस समस्या का जल्द हल निकालेगी।
धार्मिक यात्राओं की भी चर्चा रही। श्री अमरनाथ यात्रा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को हर तरह से सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सीतारमण ने कहा कि इस संबंध में सेना को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं और श्रद्धालु बेखौफ धार्मिक यात्रा में जा सकेंगे। इससे भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का दिल जीतने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। 
नापाक हरकत करने वालों को नहीं बख्शेंगे। अंतरराष्ट्रीय सीमा और लाइन आफ कंट्रोल पर युद्धविराम की घोषणा के बाद लगातार आतंकी हमलों पर सीतारमण ने कहा कि सेना अपनी ओर से युद्धविराम जारी रख रही है, लेकिन हमारे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्पष्ट कहा है कि यदि कोई युद्धविराम में नापाक हरकत करने की कोशिश करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

रक्षा मंत्रालय में स्कैम की खबरें केवल अफवाह। यूक्रेन से हथियारों की खरीद में रक्षा मंत्रालय के अफसरों के स्कैम की खबरों को अफवाह बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस एजेंसी के साथ स्कैम होने की बात कही जा रही है, उससे भारत का कोई संबंध ही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया की यह कोरी अफवाह है। हथियारों की खरीद को लेकर यूक्रेन की सरकार से हमारा समझौता हुआ है। हमारे बीच कोई तीसरी एजेंसी या कंपनी नहीं है। यूक्रेन सरकार ने डील के बाद कुछ सामान्य सवाल पूछे थे, जिसका जवाब दिया गया है। इसमें किसी अफसर के शामिल होने की बात ही नहीं है। रक्षा मंत्री का यह ब्यान सीमावर्तीय राज्य पंजाब में बहुत अर्थपूर्ण है। 
किसान आंदोलन की भी चर्चा। पंजाब के किसानों द्धारा एक जून से सब्जी मंडी में अपने उत्पाद न ले जाने की घोषणा किए जाने पर रक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के लिए काफी कुछ किया है और यदि उन्हें किसी तरह की समस्या है तो उनसे फिर सीधे बात करने को तैयार है, ताकि उन्हें किसी तरह की समस्या न हो। अब देखना है की किसान संगठन इस मामले पर क्या जवाब देते हैं। 

Thursday, May 17, 2018

लुधियाना में फिर तैयार है "चाईना गेट" जैसी टीम

FIB अपनी सरगर्मियां और तेज़ करेगी
लुधियाना: 18  मई 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
डाक्टर भारत की टीम फिर जोश में 
देश और समाज के जो हालात हैं वे सभी के सामने हैं। सियासतदानों, पैसे वालों और पहुंच वालों  की मनमर्जियां अब शायद सभी क़ानूनों से ऊपर हो चुकी हैं। इस सारे माहौल में जो खतरनाक स्थितियां पैदा हुई हैं उनसे शायद सभी बेखबर हैं। देश समाज से अब शायद किसी को लेना देना भी नहीं है। किसी की अंतरात्मा अगर कोई आवाज़ लगा भी दे तो उसे अनसुना कर दिया जाता है। कह दिया जाता है-हमने क्या लेना देना। अगर कोई बात रंगे हाथों पकड़ में आ भी जाए तो बहाना सामने आता है-उसने भी किया था--इसने भी किया था अब अगर हमने कर लिया तो क्या हुआ! यानी ज़माना वह आ गया है जब अपना स्वार्थ सर्वोप्रिय बाकी सब भाड़ में जाये। 
ऐसे में भी कुछ लोग अभी बाकी हैं जिनसे यह सब सहन नहीं होता। वे अपनी अंतर आत्मा से आई आवाज़ को अनसुना नहीं कर पाते।  यह लोग रातों को सोते सोते अचानक उठ कर बैठ जाते हैं। दिन की सख्त दुपहरी में भी बाहर धूप में घूमते हैं। मकसद होता है की शायद देश और समाज के लिए कुछ किया जा सके। 
ऐसे ही लोगों में एक हैं डाक्टर भारत। वृद्ध आयु लेकिन जोश जवानी का। देश के लिए किसी भी क़ुर्बानी के लिए तैयार। देश के खिलाफ क्या क्या साज़िशें पक रही हैं इसकी खबर जुटाना उनके लिए प्राथमिक कामों में होता है। न जाने कैसा नेटवर्क है--कि आम तौर पर काफी कुछ पता लगा लेते हैं। 
"क्राईम फ्री इंडिया ब्यूरो" नामक संगठन के बाद अब ऍफ़ आई बी अर्थात "फस्ट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो"  नाम का संगठन चला रहे हैं। उनका कहना है कि यह गुप्तचर मीडिया संगठन है। इसमें शामिल लोग देश प्रेम और समाज सेवा को सामने रख कर इस में शामिल होते हैं। इन्हीं सदस्यों से मिलते थोड़े बहुत डोनेशन से इस संगठन का काम चलता है। जैसे ही इस संगठन को कोई विशेष सूचना मिलती है उसे अलग अलग माध्यमों से सरकार तक पहुंचा दिया जाता है। ज़रूरत पढ़ने पर उसे मीडिया के ज़रिये भी लोगों तक पहुंचाया जाता है। सदस्यों ने कई बार कहा कि डाक्टर साहिब इतने खतरनाक पंगे मत लिया करो लेकिन डाक्टर भारत की सेहत पर कोई असर नहीं। /हर बार एक ही जवाब-एक दिन मरना ही है--अगर देश के काम आ जाएँ तो इससे अच्छा क्या होगा। गोली से डर कर घर बैठ जाने वालों को कौन सा मौत नहीं आएगी? हो सकता है वे हार्ट अटैक या किसी और बीमारी से मर जाएँ। अब डाक्टर भारत को कौन बताये की आजकल के पहुँच वाले जब विरोधी बन जाएँ तो किसी न किसी समाज विरोधी तत्व से केवल गोली या छुरी ही नहीं चलवाते बल्कि सड़क हादसा भी करवा देते हैं। किसी राह चलते गुंडे से हमला भी हो सकता है। इस पर भी डाक्टर भारत का जवाब होता है-मुझे सब मालूम है। 
डा. भारत के सहयोगी ओंकार सिंह पुरी 
कुछ इसी तरह का हाल है उनके साथी ओंकार सिंह पूरी का। उनकी उम्र शायद 70-75 से भी अधिक की होगी। इस उम्र में भी अकाउंटस का काम करके खुद कमाते हैं। एक पाँव लुधियाना तो दूसरा तरनतारन में। अपना कायनेटिक चलाते हैं किसी हवाई जहाज़ की तरह। किसी पर बोझ नहीं बनते। जब भी  वक़्त निकलता है तो आ जाते हैं डाक्टर भारत के पास। कभी चाय-कभी जाम लेकिन चिंता हर पल यही कि देश के दुश्मनों के साथ कैसे निपटना है? एक दिन मुझे भी कहने लगे आप भी तेज़ी पकड़ो। मुझे हंसी भी आई--मैंने पूछा हम सब बूढ़े क्या कर लेंगें अब इस उम्र में?
डकटर भारत झट से बोले--उससे ज़्यादा कर लेंगें जो "चाईना गेट" फिल्म के बुज़ुर्गों ने कर दिखाया था। उनकी ज़िंदादिली को देख कर मन में उत्साह जगता है लेकिन वित्तीय हालत को देख कर दुःख भी होता है। अफ़सोस है की यहाँ देश भक्ति के आडंबर कर के अपनी लीडरी चमकाने वाले तो लाखों रूपये अपने जेब में डाल कर चलते बनते हैं और इधर पैसों की कमी के चलते कभी नेट बंद हो जाता है--कभी पेट्रोल की दिक्क्त और कभी बिजली का बिल। इन लोगों को देख कर और इनसे बने लगाव को देख कर कभी कभी लगता है कि हम सब अघोषित पागल हैं। आंधियों के सामने चिराग़ जगाना शायद हमें रोमांस लगता है। इसके बावजूद यकीन होता है कि हमने शायद कुछ भी न कमाया हो लेकिन उस इंसानियत की हम आखिरी नस्ल अवश्य होंगें जिनसे देश और समाज के नव निर्माण हुआ करते हैं। 
यह सारी टीम अब फिर सरगर्म है। मकसद है कुछ नयी तैयारी। देश के दुश्मनों से जंग लड़ना और वह भी बिना किसी सरकारी सहारे के। ये वे योद्धा हैं जो बिना हथियारों के भी इस जंग को लड़ने के लिए कमर कस रहे हैं।  इस संबंध में एक बैठक हुई जिसमें कुछ स्थानीय लोग शामिल हुए। राष्ट्रिय अपराध व नशा विरोधी गुप्तचर मीडिया सर्विस एफ आई बी (फर्स्ट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरोकी यह विशेष बैठक संगठन के मुख्य कार्यालय न्यू कुंदन पूरी सिविल लाइन्स में ब्यूरो के डायरेक्टर डॉक्टर भारत की अध्यक्षता में हुयी। इस बैठक में जहाँ देश की मौजूदा हालात पर चर्चा के साथ संगठन के कार्यों को तीव्र गति से आगे बढाकर अपराधों की रोकथाम में पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।  साथ ही यह निर्णय लिया गया कि  देश कि आन्तरिक सुरक्षा की रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार के साथ साथ अब स्टेट सरकार को भी दी जाया करे। डाक्टर भारत ने कहा की नए खतरे गंभीर हो चुके हैं। नए ग्रुप, नई जातिवाद स्थितियां, साम्प्रदायिकता और कई अन्य समस्याएं अब बेहद खतरनाक हालत में हैं। डाक्टर भारत ने इस संबंध में कुछ छोटी छोटी विशेष फ़िल्में भी टीम को दिखायीं। साथ ही कहा कि अब जरुरी है कि पुलिस के अलावा मीडिया और राष्ट्र हित में काम करने वाले सामजिक संगठनों को भी एक मंच पर साथ जोड़ा जाये। डा. भारत ने कहा कि अब जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। अब वक्त आ गया है कि राष्ट्र की भलाई के लिए  हर नागरिक आपने कर्तव्य का पालन करे। इस बैठक में डॉ. भारत के अलावा ओंकार सिंह पूरी,  सोनू शर्मा, हरजीत सिंह राजू और अन्य लोग शामिल थे। वक्त  सचमुच बहुत गम्भीर सा लगने लगा है। इस हालत में बिना हथियारों के ये योद्धा भी कितना लड़ पाएंगे? क्या आप लोग इनका साथ देंगें?

Tuesday, December 12, 2017

नारी शक्ति पे आधारित है ये फिल्म: “हार्ड कौर”

"नारीवाद महिलाओं को मज़बूत बनाना नहीं है...नारी तो पहले से ही मज़बूत है...बात सिर्फ नज़रिये की है के दुनिया किस नज़रिये से ये मज़बूती देखती है”...निर्देशक, अजित आर राजपाल 
लुधियाना:12 दिसंबर 2017:(पंजाब स्क्रीन टीम)::
आजकल हर जगह नारी शक्ति की बहुत चर्चा होती है कि किस तरह आजकल महिलायें हर क्षेत्र में आगे बड़ रही हैं।  वो चाहें अपने घरों में रह रही हों या बाहर काम कर रही हों, वे एक स्वतंत्र दृष्टिकोण का दावा करती हैं। वे अपने जीवन पर नियंत्रण प्राप्त कर रही हैं और अपने शिक्षा, कैरियर, पेशे और जीवनशैली के संबंध में अपना निर्णय खुद ले रही हैं। पंजाब सबसे बड़ा राज्य है, जिसने सबसे अधिक महिला योद्धाओं को जन्म दिया है, परन्तु आज हम अपनी मजबूत पकड़ को अपने साहसी दायरे से लुप्त होते देख रहे है। निर्देशक अजित आर राजपाल ने बताया के हमारी महिलाओं का जीवन बेहतर बनाने व उन के साहस को रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में इस्तेमाल करने की हमारी ये छोटी सी कोशिश है। इस पंजाबी फिल्म में पंजाब के पांच अलग-अलग शहरों की सिख लड़कियों हैं, जो पीड़ा से गुज़रती हैं, लेकिन सब एक जुट हो कर हर कठिनाई का डट के मुकाबला करती हैं। विजय उनके कदम चूमती है। 
निर्देशक अजित आर राजपाल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में हम दृष्टि ग्रेवाल, डियाना उप्पल, निर्मल ऋषि, नीत कौर, स्वाति बक्शी, चैतैन्य कन्हाई, तनविसर सिंह व शशि किरण को हम अहम किरदारों में देखेंगे।दिल्लीवुड स्टुडिओज़ प्राइवेट लिमिटेड के बैनर में बनी इस फिल्म के निर्माता हैं राकेश चौधरी, सुरेश चौधरी व् वसीम पाशा. अजित आर राजपाल ने लिखी है इस की कहानी और सोहेब सिद्दीक़ी हैं इस के छायाचित्र निर्देशक. फिल्म को वाइट हिल स्टूडियोज द्वारा डिस्ट्रीब्यूट किया जा रहा है। ये फिल्म 15 दिसम्बर 2017 को रिलीज़ हो रही है। 
मीडिया से बातचीत के दौरान निर्देशक अजित आर राजपाल ने बताया, "हार्ड कौर, पंजाबी सिनेमा का सबसे बेहतरीन उदाहरण है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण को अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में पेश करेगी।" उन्होंने आगे फिल्म के सार के बारे में बताया, "ये कहानी एक कौर की है जो एक स्कूल टीचर है और जो रोज़ एक लोकल बस द्धारा पटियाला से दोंक्ला से राजपुरा बाईपास तक सफर करती है और इस दौरान उस की मुलाक़ात एक बहुत ही अमीर लड़के से होती है जो कि हरियाणा से है। यहीं पर किस तरह से उस की ज़िन्दगी एक मोड़ लेती है जब चलती बस में एक खून हो जाता है और किस तरह ये मासूम लड़की उस खून के मामले में फस जाती है। कहानी नाज़ुक मोड़ लेती है।  किस तरह बाकी की चार कौर एकजुट हो कर इस लड़की को न्याय दिलाती हैं।" महिका एकता और सशक्तिकरण की एक दिलचस्प कहानी है हार्ड कौर। 
निर्माता  राकेश चौधरी, सुरेश चौधरी व वसीम पाशा ने बताया, "डेलीवुड स्टुडिओज़ प्राइवेट लिमिटेड के लिए, एक शानदार फिल्म "हार्ड कौर" जैसी फिल्म का निर्माण करना एक गर्व की बात है। हम क्षेत्रीय सिनेमा को एक  उच्च स्तर देने में बहुत गर्व महसूस करते हैं".
लीड एक्टर, चैतन्य कन्हई, ने भी बताया, "मैं इस तरह के कांसेप्ट व कंटेंट वाली फिल्म कर बहुत ही खुश हूँ और मुझे पूरी उम्मीद है के दर्शक इस फिल्म को ज़रूर पसंद करेंगे।"
इस फिल्म मे चार गाने है जिन्हें गाया है नछत्तर गिल, प्रभ गिल, नूरां सिस्टर्ज व अमन त्रिखा ने। इन  गीतों को लिखा है अनिल जींजर, राजवीर सिंह प्रजापति, सोनू ललका, कुंवर वड़ैच, ऐ एम तुराज व रवि बसनेट ने।  संगीत दिया है प्रतीक, अम्बिका, शिवा रामगड़िआ, एनकी व बबली हक़ ने। 

Monday, October 02, 2017

पत्रकारों की हत्या और बढ़ रही असुरक्षा के विरोध में मौन व्रत

इस बार भी खुल कर सामने नहीं आया मीडिया 
लुधियाना: 2 अक्तूबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

देश में हो रही पत्रकारों की हत्याओं और पत्रकारों की मिल रही धमकियों के विरोध में रोष प्रकट करने के लिए प्रैस क्लब आॅफ इंडिया के आह्वान पर आज गांधी जयंती के मौके पर लुधियाना में मौन धारण कर पूरे देश के पत्रकारों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया गया। लुधियाना के भाईवाला चैक स्थित चुनिंदा पत्रकारों, लेखकों, अध्यापकों एवं समाज सेवकों ने एकजुट हो कर इस सिलसिलो को बंद करवाने और देश में पत्रकारों की सुरक्षा पुख़्ता करने की मांग की गई।

प्रातः ठीक साढ़े ग्यारह बजे लुधियाना के भाईवाला चैक स्थित शहीद करतार सिंह सराभा पार्क फिरोज़पुर गांधी मार्केट में मौन व्रत की शुरूआत हुई, जिस में वरिष्ठ पत्रकार सुरजीत भगत, परमेश्वर सिंह, राज जोशी, रैक्टर कथूरिया के साथ पत्रकार दीप जगदीप सिंह, जसप्रीत सिंह, स्कूल टीवी के संचालक प्रो. संतोख सिंह, अध्यापक परमजीत कौर, दविंदर सिंह, कवियत्री सुकृति भारद्धाज, समाज सेवी एवं कला प्रेमी ललित सूद ने शिरक्त की। कुल दस मिनट के रोष प्रदर्शन में पहले पांच मिनट मौन व्रत रखा गया। उसके बाद पूरी दुनिया में पत्रकारों की सुरक्षा की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए ज़ोरदार टाइम्स डाॅट काॅम के संपादक, पत्रकार एवं लेखक दीप जगदीप सिंह ने बताया कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रही अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था रिपोर्टर्ज़ विदाऊट बाॅडर्ज़ के ताज़ा आंकड़ों की मुताबिक स्वतंत्र मीडिया के मामले में भारत 180 देशों में से पिछले साल के 133वें पायदान से खिसक कर 136वें पायदान पर चला गया है। इसके साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में भारत ईराक और सीरीया के बाद तीसरे स्थान पर है जबकि पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान भी उस के बाद आते हैं। पत्रकारों के खि़लाफ़ गाली-गलौच और धमकाने के मामले में भारत 18वें पायदान पर है। ऐसे माहौल में देश के अंदर काम कर रहे पत्रकारों के लिए जंग जैसे माहौल में काम करने की स्थिति बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि सितंबर माह में ही देश में हुई विभिन्न घटनाओं में तीन पत्रकार गौर लंकेश (बंगलौर), शांतनु भौमिक (त्रिपुरा) और केजे सिंह (मोहाली) की हत्या हो चुकी है। यही नहीं पिछले दो सप्ताह में दिल्ली-एनसीआर में 4 पत्रकारों ने वाॅटस ऐप पर धमकियां मिलने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। अफ़सोस की बात यह है कि करीब दो दशकों से पत्रकारों की हत्याओं और धमकाने का सिलसिला चल रहा है लेकिन आज तक किसी भी मामले में दोषियों को सज़ा नहीं मिल पाई है। दीप जगदीप सिंह ने इंटरनेशनल जर्नलिस्ट फ़ैडरेशन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब तक ऐसे मामलों में तेज़ी से कार्यावाही नहीं होती और दोषियों की सख़्त सज़ाएं नहीं दी जाती तब तक यह सिलसिला रुकने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि प्रैस क्लब आॅफ इंडिया ने आज राष्ट्रीय स्तर के शांतमई मूक प्रदर्शन के द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि पत्रकारों को मिल रही धमकियों और हत्याओं के मामलों में दोषियों की तुरंत पहचान की जानी चाहिए और उनके खि़लाफ कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए। राज्य सरकारों से मांग की गई है कि पत्रकारों को पेशेवर, सामाजिक और स्वास्थय सुरक्षा प्रदान करने के लिए पत्रकार भलाई फंड स्थापित किया जाए। सोशल मीडिया पर पत्रकारों को मिलने वाली धमकियों और महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार को रोकने के लिए आवश्यक ढांचा विकसित किया जाए और दोषियों की पहचान कर तुरंत कानूनी कार्यवाही की जाए। इस मौके पर उपस्थित सभी ने इस बात का समर्थन किया कि अपनी सुरक्षा के बारे में पत्रकारों को ख़ुद सचेत होना होगा और अपने सभी मतभेद भुला कर एकजुट होना होगा। इस बारे में सुझाव देते हुए दीप जगदीप सिंह ने कहा कि चाहे लुधियाना में विभिन्न पत्रकार संगठन हैं जो अपने-अपने ढंग से बढ़िया काम कर रहे हैं, लेकिन सभी संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर एक संयुक्त तालमेल कमेटी गठित करनी चाहिए ताकि पत्रकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एकजुटता का माहौल तैयार किया जा सके और आने वाले समय मे संयुक्त कार्यवाही का कार्यक्रम बनाया जा सके।
इस मौके पर अपने विचार देते हुए स्क्ूल टीवी के संचालक प्रो. संतोख सिंह ने कहा कि देश में बोलने की आज़ादी पर दो तरह के ख़तरा मंडरा रहा है एक तरफ एक ख़ास विचारधारा के तहत लेखकों और पत्रकारों की योजनाबद्ध तरीके से हत्याएं की जा रही हैं और दूसरी तरफ़ विभिन्न विवादित मामलों की कवरेज के दौरान भड़की हुई भीड़ द्वारा पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। यह दोनो तरह के चलन लोकतंत्र में विचारों की अभिव्यक्ति के सिद्धांत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस लिए हर किस्म के अलोकतांत्रिक चलन का विरोध करना और उनके खि़लाफ़ एकजुट होकर संयुक्त रूप से आवाज़ बुलंद करना आवश्यक है। कवित्री सुकृति भारद्वाज ने कहा कि वह पत्रकारों और लेखकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और इस कदम में उनके साथ हैं। वह इन मामलों पर अपनी कलम के ज़रिए लोगों में जागरुकता फैलाने का प्रयास करेंगी और मानव अधिकारों के लिए जो भी कार्य किए जाएंगे उन में भागीदारी निभाएंगी। अध्यापिका परमजीत कौर और अध्यापक दविंदर सिंह ने कहा कि स्कूल स्तर पर ही बच्चों को विचारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी के बारे में जागरुक करना चाहिए ता कि आगे चल कर एक दूसरे के विचारों से असहमत होने पर भी एक दूसरे को अपनी बात कहने देने वाला स्वभाव विकसित किया जा सके।
वरिष्ठ पत्रकारों सुरजीत भगत, परमेश्वर सिंह और राज जोशी ने उपरोक्त विचारों की प्रोढ़ता करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में बढ़ रहे ख़तरों पर चिंता प्रकट की और हर तरह का सहयोग देने का वादा किया।

Monday, August 21, 2017

कुरआन शरीफ की बेअदबी सहन नहीं की जाएगी : शाही इमाम पंजाब


Mon, Aug 21, 2017 at 1:16 PM
मालेरकोटला में हुए कांड के बाद प्रदेश भर के मुसलमानों में रोष की लहर
प्रैस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवीं व अन्य
लुधियाना: 21 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::


बीते दिन मालेरकोटला शहर में अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा पवित्र कुरआन शरीफ के साथ की गई बेअदबी को हरगिज सहन नहीं किया जाएगा। ये बात आज यहां लुधियाना जामा मस्जिद में रोष मीटिंग के बाद प्रैस कान्फे्रंस को संबोधित करते हुए पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कही। शाही इमाम ने कहा कि कुरआन शरीफ की इज्जत हमें जान से भी ज्यादा प्यारी है। इस मामले में कोई भी गुस्ताखी बर्दाशत नहीं की जाएगी। उन्होनें कहा कि मालेरकोटला में एक बार फिर से कुरआन शरीफ की बेअदबी से यह बात स्पष्ट हो गई है कि शरारती तत्व व संप्रदायिक ताकतें पंजाब की अमन और शांति को भंग करना चाहती हैं। शाही इमाम ने कहा कि पंजाब सरकार को चाहिए कि इस विषय में दर्ज किए गए मुकदमे पर तेजी से छानबीन की जाए और गुस्ताखी करने वालों को सख्त सजा दी जाए। शाही इमाम ने कहा कि पंजाब आपसी भाईचारे का प्रतीक है, प्रदेश के अमन को खराब नहीं होने दिया जाएगा। इस अवसर पर उन्होनें आपसी भाईचारे से शांति बनाए रखने की अपील की। जामा मस्जिद लुधियाना में हुई रोष मीटिंग में नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी, गुलाम हसन कैसर, मुस्तकीम अहरारी, मुहम्मद शाह नवाज, बाबुल खान, अकरम अली व शहर की विभिन्न मुस्लिम संस्थाओं के पदाधिक्कारी विशेष रूप में उपस्थित थे।

Saturday, August 05, 2017

DJJS: पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाया विशेष अभियान

Sat, Aug 5, 2017 at 1:36 PM  
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने बनाये इस दिशा में कई विशेष कार्यक्रम 
लुधियाना: 5 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान जिसके संचालक श्री आशुतोश महाराज जी हैं, की ओर से लुधियाना में आज 5 अगस्त 2017 को एक स्थानीय होटल में एक प्रैस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। यह आयोजन संस्थान की लुधियाना शाखा की ओर से चलाई जा रही मुहिम माई अर्थ माई रिसपोंसीबिल्टी से संबंधित किताब माई अर्थ माई रिसपोंसीबिल्टी चैप्टर-अ रिपोर्ट जुलाई 2014 दिसंबर 2016 के विमोचन के संबंध में था। 
इस संबंध में संस्थान के नेचर कंजरवेशन प्रोग्राम की मुख्य इंचार्ज साध्वी आदिति भारती, प्रचारक साध्वी परमा भारती तथा लुधियाना के माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी प्रोग्राम के इंचार्ज तरसेम सिंह ने प्रैस के समक्ष विमोचन की जाने वाली किताब के बारे में जानकारी दी। 
प्रैस को संबोधित करते हुए साध्वी सुश्री आदिति भारती ने कहा कि पर्यावरण का सरंक्षण एक दिन की क्रिया नहीं है, यह तो एक जीवनशैली है, इस जीवन शैली का संचार तथा प्रारंभ करना आसान कार्य नहीं है, यह तो एक निरंतर प्रक्रिया है। माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी कैंपेन का उद्देश्य समाज को इसी जीवनशैली की ओर बढ़ाना है। 
करीब ढाई वर्ष के काल के दौरान हमने अनेकों प्रकार से नागरिकों के मनों को हिलाने की कोशिश की है तथा यह किताब हमारे कार्यों, उपलब्धियों तथा यात्रा पाठ्यक्रम को सब के समक्ष खोल देगी। यह पूछने पर कि क्या यह किताब विमोचन प्रकरण शहर में मुहिम का अंत है तो इस पर प्रोग्राम के इंचार्ज तरसेम सिंह ने कहा कि माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी मात्र एक मुहिम नहीं, वास्तव में यह जनता की मुहिम है क्योंकि पृथ्वी सब की है। यह एक कोशिश है जिसके द्वारा शहर के लोगों को मुहिम व उसके नतीजों से अवगत करवाया जा सकेगा। यह इस का अंत नहीं! अपितु हम इसकी आवाज को दूसरे स्तर तक ले जाने की सोच रहे हैं। संस्थान ने आगामी महीनों में शहर के भीतर वायु प्रदूशण को रोकने हेतु एक विशाल जागरूकता रैली निकालने का ऐलान किया। इसके अतिरिक्त संस्थान शहर के कुछ खास इलाकों में भी कुछ ख़ास कार्य करेगा। लुधियाना के इंचार्ज तरसेम सिंह ने एक नंबर 9779824000, 9915761850 दिया और कहा कि हम यह नंबर प्रैस के माध्यम से जारी कर रहे हैं जो कोई भी घर में पौधा रोपित करना चाहता है, वह इस नंबर पर संपर्क करे, उसे मुफत डिलीवरी दी जायेगी। कांफ्रेंस के अंत में तरसेम सिंह ने मीडिया कर्मियों का उनके सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।