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Monday, May 22, 2017

सत्ता के बावजूद 21 मई को कांग्रेस नहीं कर सकी कोई बड़ा आयोजन

इंटक के दिनेश गुट ने दी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि 
लुधियाना: 21 मई 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
जून 1984 के बाद जब समुचित सिख समुदाय कांग्रेस से टूट गया था और 31 अक्टूबर को तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद अलगाव की यह खायी और गहरी हो गई थी। न सिख श्री अकाल तख्त साहिब की तबाही भूल सके और न ही कांग्रेस सुश्री इंदिरा गाँधी की हत्या को भूल सकी। नवंबर-84 की घटनाओं ने तो देश के इतिहास में दर्द से भरे वो पन्ने जोड़ दिए जिन्हें लाख कोशिशों के बाद भी अब तक हटाया नहीं जा सका। ऐसे नाज़ुक हालात में पंजाब समझौता करने वाले राजीव गांधी में जो जो सियासी खूबियां थीं उनको उनके विरोधी भी मानते हैं। संत लोंगोवाल और राजीव गाँधी के दरम्यान समझौते `की तस्वीर एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ बन कर सामने आयी। विवादों और विरोधों के बावजूद राजीव गांधी का सत्ता काल ऐतिहासिक बना रहेगा।  अमेरिका के साफ़ इंकार के बावजूद भारत ने अगर दुनिया में अपना पहला सुपर कंप्यूटर बना लिया था तो इस सारे प्रयास में राजीव गांधी की चाहत जनून की तरह काम कर रही थी। सभी विकसित देशों ने  जब इसका प्रदर्शन देखा तो मुंह में उंगलियां दबा ली थी। पहले सुपर कंप्यूटर को “8000 परम”का नाम दिया गया था। इन सभी बातों को कांग्रेस पार्टी उनकी पुण्यतिथि पर उठाने में भी नाकाम रही। 
पायलट के हवाई आकाश को छोड़ कर राजनीति में आए राजीव गांधी के प्रशंसकों ने कभी सपने में नहीं सोचा होगा कि आतंकवादी हमले में हुई हत्या के बाद उनकी पार्टी कांग्रेस धीरे धीरे भुला देगी। बेशक देश में कांग्रेस की सत्ता नहीं है लेकिन पंजाब में तो है। इसके बावजूद राजीव गाँधी की स्मृति में लुधियाना में कोई बड़ा कार्यक्रम होने की जानकारी नहीं मिली।  
इंटक के दिनेश सुंदरियाल इस संबंध में एक आयोजन अवश्य किया लेकिन इसकी जानकारी भी कार्यक्रम होने के बाद दी गयी। इसमें भी इंटक के बहुत से कार्यकर्ता और नेता नज़र नहीं आए। कुछ अन्य संगठनों ने भी इसी तरह अलग अलग आयोजन किये। 
इस आयोजन के ज़रिये कांग्रेस समर्थक मज़दूर संगठन इंटक ने आज समराला चौक स्थित डॉ प्रदीप अग्रवाल के कार्यालय में श्री राजीव गांधी जी को श्रदांजलि दी। डॉ अग्रवाल ने कहा कि रजीव गांधी विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र भारत के एकमात्र ऐसे युवा प्रधानमन्त्री थे, जिनकी उदार सोच, स्वप्नदर्शी व्यापक दृष्टि ने भारतवर्ष को एक नयी ऊर्जा और एक नयी शक्ति दी  कि देश को विश्व के अन्य उन्नत राष्ट्रों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देने वाले सबसे कम उम्र के वे ऐसे प्रधानमन्त्री थे, जिन्होंने इक्कीसवीं सदी का स्वप्न देते हुए भारत को वैज्ञानिक दिशा दी।  इंटक के महिला विंग की अध्यक्षा अनीता शर्मा ने कहा कि आज भी श्री राजीव गांधी हम में हैं। इस मौके पर इंटक टीम के अन्य लोगों ने भी अपने महबूब नेता को श्रद्धांजलि दी। इंटक के राज्य उप प्रधान जोगिन्दर सिंह टाइगर, स्टेट जनरल सेक्टरी फिरोज मास्टर,शिव चरण थापर कोर  मेंबर, विकास गुप्ता, राजीव शर्मा, अशोक बंसल ,रविंदर कौर थापर, विशाल पराशर, संजीव जोल्ली, अशवनी शर्मा और अन्य सदस्य भी शामिल थे। अब देखना यह है कि सत्ता के बावजूद नया नेता पैदा किये बिना पुराने नेताओं को भूलने की यह सोच कांग्रेस को किस अंजाम की तरफ ले जाएगी? अगर यही सब होता रहा तो गुटबंदियों और व्यक्तिगत रंजिशों में उलझी कांग्रेस शायद सत्ता का लाभ उठा कर भी खुद को मज़बूत न कर सके। 
सत्ता के बावजूद 21 मई को कांग्रेस नहीं कर सकी कोई बड़ा आयोजन 

Tuesday, May 02, 2017

May Day:'इंटक" के मंच से हुआ वृद्ध स्वतंत्रता सेनानी का अपमान

अनीता शर्मा के ज़ोर देने पर किया गया उसी स्वतंत्र सेनानी का सम्मान
कौन हैं यह बाबा-क्या है इतिहास में इनका रोल-देखिये मैडम अनीता शर्मा के साथ एक पुरानी वीडियो 
लुधियाना: 1 मई 2017: (पंजाब स्क्रीन टीम)::  For More Pics Please Click here
इंटक के एक विवादित गुट ने अपने बहादर के रोड पर हुए आयोजन के मंच से एक बेहद वृद्ध व्यक्ति का लगातार अपमान किया जो खुद को स्वतंत्रता सेनानी होने का दावा भी कर रहा था। इस अपमान को अनीता शर्मा ने बहुत जद्दोजहद करके और बाद में शर्म के मारे इन नेताओं ने उसी वृद्ध का मंच से नीचे आ कर सम्मान भी किया और अपनी भूल भी स्वीकार की। यह सब मई दिवस के पावन अवसर पर हुआ। मंच पर नेताओं के सम्मान का घमसान मचा रहा और सम्मान चिन्ह के दोशाले मंच से भीड़ की तरफ अपने ख़ास लोगों की तरफ जूतों की तरह फेंके जाते रहे। हरियाणा की खटटर सरकार के बयान का मई दिवस के हर आयोजन में तीखा विरोध हुआ लेकिन इंटक के इस गुट ने अपने इस आयोजन में इस पर एक शब्द बोलना भी उचित नहीं समझा।  गौरतलब है कि खुद को सेकुलर कहने वाले इंटक के इस विवादित गुट ने बहादर के रोड का आयोजन वाम दलों के केंद्र में सेंध लगा कर किया था जो बुरी तरह से फ्लॉप रहा।
INTUC: ਪਰਮਿੰਦਰ ਪੱਪੂ ਨੂੰ ਹਟਾਇਆ ਮਾਲਵਾ ਜ਼ੋਨ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਵਾਲੇ ਅਹੁਦੇ ਤੋਂ 
गौरतलब है कि इस जगह अक्सर एटक की तरफ से मई दिवस मनाया जाता था। उस समय यहां पांव रखने की जगह भी नहीं होती थी। यह सब देख कर इंटक के इस गुट को लगा कि यहां के नेताओं को  साथ मिला लिया जाये तो मज़दूरों की बहुत बड़ी संख्या अपने कब्ज़े में आ जाएगी और ऐतिहासिक कार्यक्रम होगा लेकिन एटक का समर्पित केडर यहां आने की बजाये नगर निगम ज़ोन ए में हुए सफल आयोजन में शामिल हुआ। यहां इंटक के कार्यक्रम में कुर्सियां आखिर तक खाली रहीं। शो बुरी तरह फ्लॉप हुआ।  
इसी बीच कार्यक्रम में कांग्रेस का नाम सुन कर यहां एक बहुत ही वृद्ध व्यक्ति आ पहुंचा जिसे आप तस्वीरों में भी देख सकते हैं। उसका दावा है कि उसने तेजा सिंह स्वतंत्र जैसे जाने माने वाम स्वंतन्त्रता सेनानी के साथ जेल काटी है। अंग्रेज़ों के साथ युद्ध के समय कुछ देश विरोधियों की हत्याएं भी की हैं। वह दो शब्द कहना चाहता था माईक पर लेकिन सम्मान के घमसान में व्यस्त इन नेताओं ने उसकी एक न सुनी।  इसकी सूचना मंच संचालकों के साथ साथ मंच पर काबिज़ वरिष्ठ नेताओं तक भी पहुंचाई गयी लेकिन किसी की न सुनी गयी क्यूंकि सम्मान की होड़ से किसी को वहां फुर्सत ही न थी।  
नाम लेने और सम्मान करने कराने का यह सिलसिला इतना अस्त व्यस्त था कि ऊषा मल्होत्रा और कई अन्य लोग बीच में ही उठ कर चले गए। एम एल ए संजीव तलवाड़ नाम लेते लेते रुआंसे हो आये और झट से अपना भाषण समाप्त कर वहां से निकलते बने।  उनके चेहरे पर आई निराशा और आक्रोश को साफ़ देखा जा सकता था। इंटक के महिला विंग के प्रांतीय प्रधान अनीता शर्मा के ज़ोर देने पर जब कार्यक्रम समाप्त हो चुका तो माईक उसी वृद्ध के हाथों थमा दिया गया जो काफी देर से नीचे खड़ा केवल दो मिंट की मांग कर रहा था। माईक  थमाने के साथ ही मंच से रौशनी बंद कर दी गयी। इस अपमानजनक स्थिति पर उस वृद्ध को भी बुरा लगा और उसने छूटते ही कहा चोर उचक्का चौधरी ते गुंडी रन प्रधान। इस बात से सभी का माथा ठनका और स्वयं दिनेश शर्मा सुन्द्रियाल सहित वृद्ध के पास पहुंचे। यहाँ भी सभी ने सेल्फी लेनी शुरू कर दी। उस वृद्ध का सम्मान भी किया। कुछ पल बाद दिनेश शर्मा ने इस पर मंच की गलति का अहसास भी किया लेकिन स्थानीय आयोजकों को इस का ज़रा भी अहसास नहीं हुआ। वे सब गौरवमयी ढंग से चल रहे थे। अंधेरा होते ही सभी नेता लोग घर चले गए मास्टर फ़िरोज़ टेंट और कुर्सियां उठवाने में अपनी ज़िम्मेदारी निभाने लगे। आखिर उन्होंने इस फ्लॉप शो के खर्चे तो उठाने ही थे। मास्टर फ़िरोज़ भी इस सारे घटनाक्रम से बुरी तरह निराश और हताश नज़र आये।  आखिर अनीता शर्मा, श्री पाल शर्मा और कुछ अन्य लोगों ने उन्हें जा कर दिलासा दिया। अब मई दिवस पर एक नया आयोजन होने की चर्चा है इसी महीने के मध्य में।  उसकी जगह और कार्यक्रम फाईनल  होते ही इसकी सूचना सभी को दी जाएगी। मई दिवस के नाम पर सम्मान के घमसान के यह फ्लाप  शो सभी याद रहेगा पर कुछ स्थानीय नेताओं को छोड़ कर क्यूंकि उनमें संवेदना या अहसास नाम की कोई चीज़ नहीं है। 
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(पंजाब स्क्रीन टीम: प्रदीप शर्मा, ओंकार सिंह पूरी, रेक्टर कथूरिया)

INTUC: ਪਰਮਿੰਦਰ ਪੱਪੂ ਨੂੰ ਹਟਾਇਆ ਮਾਲਵਾ ਜ਼ੋਨ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਵਾਲੇ ਅਹੁਦੇ ਤੋਂ 


Thursday, April 13, 2017

MCL: बबली को एक साल से नहीं मिला वेतन

एक वर्ष पहले पति की डियूटी पर हुई मौत के बाद मिली थी नौकरी  
लुधियाना: 12 अप्रैल 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
पिछले एक वर्ष से नगरनिगम में सफाई सेविका के तौर पर कार्य कर रही यह महिला बहुत दुखी है। जब बबली के पति की मौत हुई थी तो उस पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। समाज में बच्चों का लालन पालन और पति   के बिना जीना किसी अंधेरी गुफा में रहने जैसा था। इसके बाद  फैसला किया कि  वह अपने पति की निशानी  बच्चों को संभाल कर अच्छा इन्सान बनाएगी। पति की मौत डियूटी पर हुई थी इस लिए सरकारी नियमों के अंतर्गत उसको सरकारी नौकरी मिल गयी। यह बहुत बड़ी राहत थी। उसे लगा कम से कम वो अपना और अपने बच्चों का गुज़ारा तो कर सकेगी पर दुःख के गहन अँधेरे में यह एक सपना ही था। उसकी गम की रात कभी खत्म नहीं हुई। उसकी सुबह कभी नहीं आई। उसे नौकरी तो मिली पर एक बरस तक नौकरी करने के बावजूद उसे अभी तक पहली तनखाह भी नहीं मिली। पूछने पर उसने बताया कि विभाग के एक डाक्टर ने उसकी फाईल  रोक रखी है।  नगरनिगम कर्मचारियों के नेता कामरेड विजय कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि  हम भी इस मामले मैं कई बार सबंधित डाक्टर के चक्र काट चुके हैं लेकिन इसकी फाईल वहां से नहीं निकल रही। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अब अगर और देरी की गयी तो हम सख्त एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेंगे। 
इसी बीच अचानक वहां आए एक अन्य वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता मास्टर फ़िरोज़ ने भी बबली का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि हम इसे इन्साफ दिलाने के लिए हर सम्भव कदम उठाएंगे।  गौरतलब है कि  मास्टर फ़िरोज़ हाल ही में भाकपा और एटक का साथ छोड़ कर कांग्रेस समर्थक ट्रेड यूनियन इंटक में शामिल हो चुके हैं। वर्करों के हक की लड़ाई वह अब भी पहले की तरह ही लड़ रहे हैं।   ट्रेड यूनियन नेताओं ने दी संघर्ष की चेतावनी

Tuesday, April 04, 2017

"इंटक" के नाम पर लगाई गई "आप" और वाम दलों में सेंध?

इंटक के वरिष्ठ नेतायों  ने नई नियुक्तियों से पल्ला झाड़ा 
लुधियाना: 4  अप्रैल 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
सत्ता सम्भालने के तुरन्त बाद कांग्रेस ने अपने मज़दूर विंग इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के ज़रिये भी अपना जनाधार मज़बूत करना शुरू कर दिया है। सुविज्ञ सूत्रों की माने तो इस मकसद के लिए उन सभी लोगों की एक लिस्ट बनाई गयी है जो समाज में सक्रिय हो कर कार्य कर रहे हैं और किसी न किसी क्षेत्र में अच्छा नाम कमा चुके हैं। इस लिस्ट को बनाने और इसमें से ख़ास ख़ास लोगों को छांट कर इंटक के ज़रिये कांग्रेस के साथ जोड़ने का अभियान बड़े पैमाने पर शुरू हो चुका है। लुधियाना की हौजरी इंडस्ट्री के मास्टर फ़िरोज़ और नशे के खिलाफ सफल अभियान चलाने वाले संगठन बेलन ब्रिगेड की अनीता शर्मा को सफलता के साथ इंटक के साथ जोड़ा जा चुका है। इस सबन्ध में कई और नियुक्तियां भी हुईं हैं पर क्या इन नियुक्तियों को करने वाले लोग खुद इस मकसद के लिए अधिकृत हैं? यदि राष्ट्रिय अध्यक्ष दिनेश शर्मा हैं तो फिर संसद सदस्य जी संजीवा रेडी कौन हैं जिन्हें इंटक की वेबसाईट पर राष्ट्रिय प्रधान दिखाया गया है? इंटक के पुराने नेता सरबजीत सिंह सरहाली ने कहा है कि हमारे वास्तविक प्रधान संजीवा रेडी ही हैं और नयी नियुक्तियों में सक्रिय लोगो से हमारा कोई सम्बन्ध नहीं। उन्होंने कहा कि  यह लोग पहले भी इस तरह की कोशिशें कर  चुके है। 
गौरतलब है कि बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा को इंटक के महिला विंग का प्रांतीय अध्यक्ष बनाया गया है जबकि मास्टर फ़िरोज़ को इंटक की पंजाब इकाई का महासचिव बनाया गया है। मास्टर फ़िरोज़ और अनीता शर्मा-इन दोनों नेतायों ने आम जनता के साथ बहुत गहरायी से एकजुट हो कर काम किया है। इनको अपने एक एक सदस्य के साथ साथ अन्य लोगों की दयनीय हालत का भी अहसास होता है। इस लिए इनके साथ काम कर चुके लोग इनका सम्मान भी करते हैं। दिलचस्प बात है कि आम आदमी पार्टी मैडम अनीता शर्मा के इस अनुभव का फायदा नहीं उठा सकी और सी पी आई मास्टर फ़िरोज़ के जनाधार की समस्याएं हल करने करवाने में नाकाम रही। परिणाम यह हुआ कि अब ये दोनों नेता भी इंटक के साथ हैं। दोनों को इंटक से काफी उम्मीदें भी हैं पर क्या यह सब इतना आसान होगा? क्या इनको अपने साथ जोड़ने वाली इंटक के नेता सचमुच इस मकसद का अधिकार रखते हैं? 
इंटक चूंकि एक मज़दूर संगठन है इस लिए इसका मुख्य जनाधार भी आम मज़दूर ही हैं। इन मज़दूरों में बहुत से ऐसे हैं जिनके घरों की हालत दयनीय है। ठेकेदारी सिस्टम के चलते इनको पूरा वेतन नहीं मिल पाता। जो मिलता है वो भी शराब के सेवन में उड़ जाता  है। सीवरेज की सफाई के दौरान बहुत से मज़दूर मौत के मुँह में जा चुके हैं और बहुत से गंभीर बिमारियों का शिकार हो चुके हैं। क्या इंटक के नाम पर सक्रिय नया या पुराना गुट इस मकसद के लिए संघर्ष कर पायेगा? अभी भी बहुत से सरकारी और गैर सरकारी मुलाज़िमों/मज़दूरों को बहुत सी समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है क्या उन्हें इन्साफ मिलेगा? अमृतसर और मुंबई में वामपंथी मज़दूर संगठन एटक ने घरों में काम करने वाली महिलायों को एकजुट करके उन्हें संगठित किया है और उनके अधिकारों की जंग लड़ी जा रही है क्या इंटक के इन नए नेतायों के पास ऐसा कोई रेकार्ड या कार्ययोजना है?
इसके साथ ही उल्लेखनीय है कि जब दो सितम्बर की देशव्यापी हड़ताल हुई थी तो दोनों बार भारतीय मज़दूर संघ ऐन मौके पर उस हड़ताल से अलग हो गया था लेकिन इंटक ने अन्य मज़दूर संग्रहणों का साथ दिया। इससे मज़दूर भाईचारे में एकता की एक भावना मज़बूत हुई। क्या अब आम आदमी पार्टी और वाम दलों में सेंध लगा कर की जा रही नियुक्तियां इस भाईचारे को नुकसान  नहीं पहुँचायेगी? इन मज़दूर संगठनों में से कौन ज़्यादा शक्तिशाली बन कर सामने आएगा इसका फैसला जहाँ संघर्ष की दृढ़ता करेगी वहीँ कुछ सप्ताह बाद आने वाले मई दिवस पर होने वाली जनतक रैलियों भी बताएंगी कि किसके साथ है मज़दूरों की शक्ति?  
इस सम्बन्ध में पूछे जाने पर इंटक के महिला विंग की नव नियुक्त राज्य प्रधान अनीता शर्मा ने कहा कि श्री रेडी पर कोई मुकद्दमा चल रहा है इस लिए पार्टी हाई कमान ने यह ज़िम्मेदारी श्री दिनेश को सौंपी है। उन्होंने दावा किया कि  राष्ट्रीय प्रधान दिनेश शर्मा सुंदरियाल ही हैं। दूसरी तरफ श्री सरहाली ने कहा कि इंटक के राष्ट्रीय प्रधान हैं-जी संजीव रेडी, पंजाब के अध्यक्ष हैं सुभाष शर्मा, इंटक पंजाब के उपाध्यक्ष हैं-सरबजीत सरहाली, इंटक लुधियाना के प्रधान हैं-धर्मचन्द, इंटक लुधियाना के वर्किंग प्रेजिडेंट हैं-गुरजीत सिंह जगपाल और लुधियाना इंटक के महसचिव हैं-सुरेश सूद।
अब देखना है कि  कांग्रेस पार्टी की हाई कमान इस मामले पर क्या रुख अपनाती है?