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Monday, June 15, 2026

वेणी प्रसाद जी की कला आज भी चमत्कार दिखाती है

On 14th June 2026 Regarding Medical Camp at Dhanwantri Garden Ludhiana 14 जून 2026 को धन्वंतरि गार्डन लुधियाना में मेडिकल कैंप के बारे में

डॉ. विश्व विजय शर्मा आज भी अनगिनत मरीज़ों का इलाज करते हैं


लुधियाना: 15 जून 2026: (मनप्रीत सिंह//मीडिया लिंक 32//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

यह कुछ दशक पुरानी बात है। कत्लेआम की आग के बावजूद पंजाब में सहनशीलता बनी रही। एक समुदाय के यात्रियों को बसों से निकालकर मारने की अमानवीय घटनाओं के बावजूद समाज में शांति और भाईचारा बना रहा। इतना ही नहीं, शाम को कुछ साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होने लगे। PAU स्टूडेंट्स होम थोड़ी दूर था, इसलिए ऐसे कुछ कार्यक्रम ओल्ड कोर्ट चौक के पास एक्सटेंशन लाइब्रेरी में होते थे। इन कार्यक्रमों में होने वाले कार्यक्रमों में विश्व भाईचारे की भावना भी साफ़ दिखती थी।

मंच संचालन के दौरान हिंदी, पंजाबी और उर्दू का मिला-जुला रंग भी महसूस होता था। स्टेज से होने वाले अनाउंसमेंट के बीच कविता और शायरी का भी रंग होता था। शायद ऐसे प्रोग्राम अब भी होते होंगे, लेकिन मुझे बहुत समय से पता नहीं है। शायद किसी ने मुझे बुलाया ही नहीं।

आज जिस प्रोग्राम की याद मैं शेयर कर रहा हूँ, उसमें मशहूर लेखक और जानकार डॉ. ज्ञान सिंह मान भी थे, जिनकी तांत्रिक के तौर पर भी शोहरत आसमान छू रही थी। इन इवेंट्स में औरतें भी बड़ी संख्या में शामिल होती थीं।

इस मौके पर मशहूर डॉ. वेणी प्रसाद जी भी मौजूद थे, जिनके परिवार का अस्पताल आज भी टैगोर नगर, धन्वंतरि गार्डन में बहुत मशहूर जगह है। शारीरिक और मानसिक बीमारियों से परेशान लोग आज भी यहाँ ज़रूर पहुँचते हैं। इस स्थान पर कई बीमारियों का इलाज मौजूद है, लेकिन सांस और अस्थमा के मरीज़ बहुत ज़्यादा हैं - कभी-कभी एक दिन के फिक्स कैंप में कुछ हज़ार मरीज़। मरीज़ आते और डॉ. साहब अपने असिस्टेंट और दोस्त बस्सी साहब के साथ उन्हें दवा का एक पैकेट या दो-तीन कैप्सूल देते और आँखें बंद करके कुछ ऐसा मंत्र पढ़ते...!

मैंने पूछा भी कि यह कौन सा मंत्र है जो आप बिना आवाज़ ऊंची किए पढ़ते हैं...? उन्होंने मुस्कुराकर मेरा सवाल टाल दिया...! जब मैंने पूछा कि आप किसी की बीमारी के बारे में पूछते भी नहीं हैं और बस दवा दे देते हैं,तब भी वह सिर्फ़ मुस्कुराए लेकिन उनके साथ खड़े मिस्टर MP बस्सी ने कहा कि यह खास दवा डॉक्टर साहब का बहुत पुराना और खास राज़ है। बल्कि यूं कहें कि यह उनके पिता माननीय कविराज वेणी प्रसाद जी का राज़ है, जिसका फ़ायदा लाखों-करोड़ों लोगों ने उठाया है। 

आज भी कुछ हज़ार मरीज़ डॉक्टर विश्व विजय शर्मा के पास दवा लेने आए थे। मिस्टर MP बस्सी भी डॉक्टर विश्व विजय शर्मा के पड़ोसी हैं और बैंक से रिटायर हो चुके हैं। दोनों दोस्तों के बीच इतना प्यार है कि दोनों दिन का ज़्यादातर समय साथ बिताते हैं। बस्सी साहब डॉक्टर साहब के मरीज़ों को देखते हैं और इलाज में डॉक्टर साहब के असिस्टेंट का रोल बड़ी ज़िम्मेदारी से निभाते हैं।

असल में, अपने पिता कविराज श्री वेणी प्रसाद की तरह अब उनके बेटे डॉक्टर विश्व विजय शर्मा जी में भी सिर्फ़ चेहरा देखकर बीमारी का पता लगाने की चमत्कारी काबिलियत है। लोग उन्हें कोई चमत्कारी बाबा कहते हैं। वे बिना कुछ पूछे लोगों का बहुत कामयाबी से इलाज करते हैं। कविराज वेणी प्रसाद जी से मिली हुई शिक्षा उनके बेटे के ज़रिये शिक्षा आज भी फल-फूल रही है। चमत्कार आज भी नज़र आते हैं। लोग बीमारी का दुःख लेकर आते हैं लेकिन सुखी हो कर वापिस जाते हैं। 

14 जून को हुए कैंप का भी कई लोगों ने फ़ायदा उठाया और अब दूसरा स्पेशल कैंप 20 जुलाई, 2026 को और तीसरा कैंप 23 नवंबर से 27 नवंबर, 2026 तक लगाया जाएगा।

Wednesday, August 24, 2022

डा. लोकेश ने बताए स्वस्थ जीवन के कुछ नए रहस्य

Tuesday 23rd August 2022 at 02:11 PM

गुरुद्वारा गुरदर्शन साहिब में आयुर्वेदा मेडिकल कैंप का आयोजन       


लुधियाना
: 23 अगस्त 2022: (पंजाब स्क्रीन डेस्क):: 

आधुनिक युग में तरक्की भी बहुत हुई है लेकिन तन और मन की बीमारियां भी बहुत बढ़ीं हैं। जो बीमारीयां पहले से मौजूद थीं वे भी विकृत हो कर सामने आ रही हैं। दाल रोटी से ज़्यादा ज़रूरी हो गयी हैं दवाइयां। सुबह उठते ही शुरू हो जाता है दवाओं का सिलसिला और रात को सोने तक जारी रहता है। दवाई के बिना नींद से उठ नहीं सकते -दवाई के बिना रात को सो नहीं सकते। खाना पीना सब दवाओं पर निर्भर हो गया है। डाक्टर लोकेश कहते हैं कि ऐसा चिंतनीय सिलसिला रुक सकता है। डाक्टर लोकेश के लाईफ स्टाईल को अपना कर बहुत कुछ बदला जा सकता है। हो सकता है शुरू शुरू में कुछ दावें भी कहानी पड़ें लेकिन धीरे धीरे ज़िंदगी की सुर प्राकृति की सुर से मिलने लगती है। प्रकृति की उस दिव्य सुर के साथ सुर मिलाते ही बीमारियां अतीत की बात होने लगती हैं और दिव्य आनंद तन और मन पर उतरने लगता है। पहली बार लगने लगता है जैसे किसी विराट शक्ति के साथ एकरूपता होती जा रही हो। डाक्टर लोकेश के विचारों को जन जन तक पहुँचाने के लिए धार्मिक संस्थान भी अब सक्रिय भूमिका अदा करने लगे हैं। 

दिलचस्प बात है कि आज के कमर्शियल युग में भी मुनाफे से बहुत दूर रहते हुए स्वस्थ जीवन के रहस्य दुसरे लोगों को भी समझाते हैं। इससे से लोग न केवल स्वयं स्वस्थ बनते हैं बल्कि  दूसरों को भी स्वस्थ बनाते हैं। इसके साथ ही इस तरह की ट्रेनिंग लेने वाले लोग अपने परिवारों के लिए भी सात्विक आमदनी अर्जित करने में सफल रहते हैं।  इस तरह तेज़ी से विकसित हो रहा है भारत के हर नागरिक को स्वस्थ बनाने का एक मूक अभियान जिसका कोई विज्ञापन नहीं होता। कोई चर्चा नहीं होती। बस पूरी तरह मौन साधना। 

गुरुद्वारा गुरदर्शन साहिब की ओर से फरीदकोट में एक आयुर्वेदा योगा नेचरोपैथी मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया।  इस कैंप में ईंचार्ज रहबर हॉस्पिटल एंड नेचुुरवेद के अचार्य डॉक्टर लोकेश ने जोड़ों का दर्द घुटने की रीढ़ की हड्डी के पेशीय रोगी, डायबिटीज लीवर किडनी न्यूरो हार्ट केयर ट्रेनिंग गंभीर ट्रांसप्लांट मरीजों को भी ट्रेनिंग दी गई। डॉ. शर्मा ने छात्रों और गृहिणियों और सेवानिवृत्त व्यक्तियों के लिए आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सा रेकी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के बारे में भी बताया कि लोगों को कैसे ठीक किया जाए और प्रमाणित विशेषज्ञ कैसे बना जाये। इस मौके गुरुद्वारा साहब की ओर से आचार्य डॉक्टर लोकेश को सम्मानित भी किया गया। आप भी इस मौन अभियान से जुड़ सकते हैं। 

नीचे कुमेंट में अपना नाम, शिक्षा, स्टेशन और मोबाईल नंबर लिखिए डाक्टर साहिब की टीम आप से यथाशीघ्र सम्पर्क करेगी। 

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Wednesday, May 04, 2022

तड़प रही मानव जाति को बचाने आगे आए डा. बी एस औलख

कोरोना से बचाने को बनाई एल्प्रो सौक्शम नामक आयुर्वेदिक दवाई 

लुधियाना: 4 मई 2022: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 

डाक्टर बी एस औलख 
कोरोना एक ऐसा खतरा है जिसका भय शायद अभी कई सालों तक और चलेगा। शायद तब तक जब तक किसी नई मुसीबत का कोई कोई नया खतरा उभर कर सामने नहीं आ जाता। जब लोग कोरोना से मर रहे थे। वैक्सीन लगवाने के लिए लम्बी लम्बी लाईनों में खड़े थे। लॉक डाउन के कारण पाने कारोबार और घर छोड़ कर अपने गांवों की तरफ पैदल जा रहे थे उस समय भी डाक्टर बी एस औलख अपने घर में बहुत ही गहनता से इसकी दवाई तलाश कर रहे थे.दवाई भी बन गई लेकिन इसकी रजिस्ट्रेशन और बेचने की आज्ञा जैसे कई झमेले थेजीके लिए पूरी टीम को संघर्ष करना पड़ा। 

कोरोना के लिए खोजी गई इस दवा को आयुर्वेदिक विभाग, पंजाब सरकार की ओर से अब लक्षण आधारित ईलाज  को मंजूरी मिल गई है। यह खुलासा आज यहां क्रिश्चीयन मैडीकल कॉलेज, लुधियाना के रह चुके लैक्चरार और फिलहाल ग्रैगर मैंडल ईस्टीच्यूट फार रिसर्च इन जैनिटिक्स, लुधियाना के डायरैक्टर, मशहूर अन्तर्राष्ट्रीय पेटैंट होल्डर वैज्ञानिक बी.एस. औलख ने किया। मीडीया से खचाखच भरे हुए प्रेस कान्फ्रंस रूम में यर सी जगह  ही खली नहीं थी। खुद डाक्टर औलख विभिन्न मीडिया चैनलों को बाईट देते देते थक चुके थे। 

गौरतलब है कि बी.एस औलख ऐक प्रोफैशनल दवा वैज्ञानिक हैं जिन्हें यू.एस.ऐ. आस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, साऊथ अफ्रीका, कैनेडा, वगैरह की सरकारें पहले ही दवा खोज पेटैंटों से नवाज़ चुकी हैं। इसके लिए उन्हें कितना बड़ा संघर्ष करना पड़ा यह एक अलग और लम्बी कहानी है। 

मौजूदा खोज डा. औलख की दूसरी खोज है जो कई प्रकार के वायरसों पर प्रभावी एक ब्राड सपैक्ट्रम ऐंटी वायरल ड्रग है लेकिन आयुर्वैदिक विभाग ने उसे चार मुख्य रोग लक्षणों के ईलाज के लिए मंज़ूर किया है जो आमतौर पर नार्मल व गम्भीर किस्म के कोरोना मरीज़ों में मिलते हैं। इस मंजूरी के लिए उन्हें और उनकी बने दवा को कई परीक्षणों में से गुजरना पड़ा।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना के मुख्य लक्षण हैं, लगातार सूखी खाँसी, बुख़ार, साँस की टूटन और अँदरूनी अँगों की सोजि़श। मौजूदा दवा इन सभी चार कैटेगरी के लिए मंजूर की गई है। यह उसे कोरोना के ईलाज के लिए एक आदर्श दवा के तौर पर स्थापित करती है।

वैज्ञानिक डा. औलख का दावा है कि इस दवाई से कोरोना से होने वाली मौतों में बहुत जल्द और बहुत ही तेज़ी से  कमी आयेगी। कोरोना मरीज़ों में मौत का कारण फेफड़े, दिल, किडनी बरेन बगैरह के कोमल उत्तकों की सोजि़श व फिर उनमें होने वाली सड़न है जो इस दवा से कँट्रोल की जा सकती है।

इसके अलावा दर्दनाक सूखी खाँसी, बुखार, साँस लेने में दिक्कत भी कोरोना मरीज़ों को बहुत तकलीफ़ देते हैं जिसकी वजह से पूरे बदन में दर्द, बेपनाह थकावट व कमज़ोरी महसूस होती है। इस दवा से इन सब से राहत मिलेगी।

एल्प्रो सौक्शम नामक यह दवा शुद्ध, कुदरती जड़ी बूटियों से तैयार की गई है जो 500 मिलीग्राम के कैप्सूलों के रूप में 8 कैप्सूलों के पैक में मिलती है। रोज़ाना दो कैप्सूलों के साथ चार दिन के पूरे कोर्स की कीमत 320 रूपये है।

करीब 20 साल पहले मुँह खुर के वायरस की इंफैक्शन रोकने के लिए इस दवाई की खोज हुई थी। कुछ महीने पहले जब इस बीमारी का अचानक विस्फोट हुआ तो यह दवा इस पर फिर से प्रभावी पाई गई। देश के प्रधानमंत्री व सूबे के मुख्यमंत्री को बाकायदा इस कामयाबी की खबर दे दी गई है। इसके अलावा इंसानी इनफ़लूऐंजा पर भी यह काफी प्रभाव पाई गई है।

इस दवा के कोराना मरीज़ों पर इस्तेमाल का ख्याल तब आया जब कोरोना महामारी अचानक फूटी व जैसा कि विश्व सेहत संस्था ने बाद में माना, भारत समेत पूरी दुनियां में ज़ीका वायरस की दवाई रैमडैसवीर व इनफ्लूऐंजा की दवाई फेवीपीरावीर को जरूरी दस्तावेजों के अभाव में भी आनन फानन में मंज़ूरी दे दी गई।

बी.एस. औलख जो पहले ही इस दवा के एंटीवायरल प्रभाव पर खेाज कर रहा था ने प्रधानमंत्री, सेहत व आयुश मंत्री व अन्य अधिकारियों को इस बारे विधिवत पत्र भेजे। उसने इण्डियन कौंसिल फॉर मैडीकल रीसर्च व डिपार्टमेंट ऑफ हैल्थ रीसर्च को भी रिसर्च प्रोजैक्ट सबमिट किए जिनके सहयोग का आज भी इन्तज़ार है।

वैज्ञानिक ने उपरोक्त रोग लक्ष्णों वाले मरीज़ों पर इस दवाई की इजाजत देने के लिए आयुर्वैदिक विभाग का धन्यवाद किया व कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के ‘मेक इन इण्डिया’ व ‘आत्मनिर्भर’ पहल के लिए इससे बहुत मदद मिलेगी।

बी.एस. औलख इससे पहले विश्व की सर्वप्रथम सैक्स फिक्सर दवा की खोज कर चुका है जिससे डेयरी पशुओं में केवल मादा संतान पैदा करके डेयरी उत्पादकता व किसानों को होने वाले मुनाफ़े में बेहिसाब बढ़ोत्तरी की जा सकती है।

वैज्ञानिक ने बड़े दुखी हृदय से कहा कि विश्व सेहत संस्था के प्रभाव अधीन, दुनिया भर की सरकारें प्रो-कार्पोरेट व विज्ञान विरोधी कानून जैसे कि भारत सरकार द्वारा पास किया ‘‘न्यू ड्रगज़ एण्ड कलिनिकल ट्रायलज रूल्ज़, 2019’’, कानून शामिल है, बना रही हैं। इससे दवा खोज के असली नायकों यानि सालीटरी दवा वैज्ञानिकों से खोज करने का हक ही छीन लिया गया है और कार्पोरेट घरानों के लिए पूरा मैदान ही खुला छोड़ दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सालीटरी दवा वैज्ञानिकों से खेाज का अधिकार छीनना शर्मनाक है क्योंकि पैनिसिलीन व इैन्सुलीन की महान खोजें करने वाले अलेक्जैंडर फलैमिंग व जौहन बाँटिंग भी सालीटरी इन्वैंटर ही थे। आज की तारीख में जबकि ऐडज़, कैंसर, अस्थमा, मिर्गी, वगैरह लाईलाज़ बीमारियों की लिस्ट पहले ही बड़ी लम्बी है और नित्य नए वायरस सामने आ रहे हैं, हमें हर इन्सान को सेहतमंद रखने को नये दवा इलाज़ों की ज़रूरत है। 

तेजी से रूप बदल रहे वायरस के खिलाफ वैक्सीनें पहले ही प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं। जब कुदरत माँ ने सब इन्सानों को दिमाग की दात बख्शी है और इसी दिमाग का इस्तेमाल करके ही वैज्ञानिक नयी दवाईयांे की खोज करते हैं; इस संबंध में उनको रोकने का हर यत्न न केवल उनसे इन्सान होने का हक छीनता है बल्कि यह कुदरत माँ का भी घोर अपमान है। 

सरकार को इस संबंध में बहुत ही सोच समझ के फैसले लेने चाहिएं और अगर विश्व सेहत संस्था अपना विज्ञान विरोधी व मानवता विरोधी रवैया जारी रखती है तो इसमें से बाहर निकलने से भी गुरेज़ नहीं करना चाहिए। विज्ञान व वैज्ञानिकों को बढ़ावा देना केवल वक्त की ही जरूरत नहीं है बल्कि लाईलाज बीमारियों के हाथों तड़प तड़प कर मर रही इन्सानियत की यह पुकार भी है।

Thursday, August 30, 2018

थैलेसीमिया का ईलाज: लवली जैन का जनून रंग लाया

अब लुधियाना में भी होगा बकरे के खून से थैलासीमिक बच्चों का ईलाज 
लुधियाना: 29 अगस्त 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम):: 

पूंजीवाद  के दौर में मुनाफा सबसे पहले आता है। बाप बड़ा न भैया-सबसे बड़ा रूपया। वो रुपया किसी का खूबसूरत चेहरा दिखा कर आए या फिर उसके आंसू दिखा कर--उसे बहुत गर्वपूर्ण कमाई समझा जाता है। शिक्षा, वकालत, गीत-संगीत, अभिनय, लेखन, मीडिया और अन्य क्षेत्रों के साथ साथ मेडिकल क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं बचा। पहले पहल होम्योपैथी और आयुर्वेद को सस्ता इलाज समझा जाता था लेकिन अब बहुत से लोग इन क्षेत्रों में भी कमाई को पहल देने लगे हैं। इसके बावजूद आयुर्वेद में अभी भी आशाएं बाकी हैं।

इसका अहसास हुआ जब करीब तीन वर्ष पूर्ण अहमदाबाद (गुजरात)  के डाक्टर अतुल भवसार से बात करवाई लुधियाना के लवली जैन ने। उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया के बच्चों को बकरे का खून भी चढ़या जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में सफलता के बाद अब पंजाब में भी इस तजर्बे की तैयारी है। सुन कर यकीन नहीं हुआ। इस योजना का विरोध भी बड़े पैमाने पर हुआ। यह तो लवली जैन की हिम्मत कहो कि यह अभियान जारी रहा।
उन दिनों गुजरात से लुधियाना आए डॉ.अतुल भावसर ने बताया था कि थेलेसीमिया के मरीजों के लिए इंसान की वजाए बकरे का खून ज्यदा फयेदेमंद है। गुजरात के शहर अहमदाबाद स्थित अखंडानंद आयुर्वेद अस्पताल के पंचकर्मा डिपार्टमेंट के हेड डॉ. भावसर ने कहा के थेलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को हर 15-20 दिन बाद ब्लड चढ़ाना पड़ता है क्योंकि इस बीमारी की वजह से ब्लड के आरबीसी (रेड ब्लड सेल) तेजी से टूटते है। जिस कारण मरीज में हिमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। थेलेसीमिया के मरीजों के लिए उन्होंने एक नई खोज की है। जिसके तहत बकरे का खून चढ़ाने पर मरीज को 15 -20 दिन की बजाय दो महीने बाद ही ब्लड चढ़ाने की जरुरत पड़ती है। कई मरीजों को 5 महीने बाद ही खून चढ़ाने की जरुरत पडती है। इसका कारण यह है कि बकरे के खून के आरबीसी जल्दी नहीं टूटते। जिससे मरीज में ज्यादा समय तक हीमोग्लोबिन की मात्रा सही बनी रहती है। डॉ. भावसर ने दावा किया कि इस भयंकर बीमारी से निपटने की कैपेसिटी एलोपैथी के मुकाबले आयुर्वेद में ज्यादा है। थेलेसीमिया में बकरे के खून के इस्तेमाल की पद्धति को गुजरात सरकार ने मान्यता दे दी है। इस पद्धति में मरीज को खून वेन की बजाय एनिमिया के  जरिए बड़ी आंत तक पहुंचाया जाता है।  यह आंत जरुरत के मुताबिक खून को लेने के बाद बाकी बाहर निकाल देती है।  सोसायटी के प्रधान लवली जैन  जुटे रहे। थैलेसीमिया के लिए काम करने वाले उनके बहुत से मित्र भी उन्हें छोड़ गए लेकिन लवली जैन का मनोबल नहीं टूटा।
कभी किसी वीआईपी से--कभी किसी मंत्री से--कभी किसी मीडिया से--जब भी मिलते बस यही गुहार लगाते-इन बच्चों का कुछ करो। गौरतलब है कि लवली जैन खुद शरीरक तौर पर बहुत मुश्किल से उठ बैठ सकते हैं। इस अक्षमता के बावजूद वह हर पल डटे रहे। हर वक यही सोचते-इन बच्चों को बचाना है। सबके पास अंग्रेजी इलाज पर खर्चा आनेवाला पैसा नहीं है। इसलिए इन पर डाक्टर भवसार का सफल प्रयोग लागू करना होगा। जो फायदा गुजरात के लोगों  को मिला वही फायदा पंजाब-हरियाणा-हिमाचल-जम्मू कश्मीर और आसपास के लोगों को भी मिलना चाहिए। 
आखिर लवली जैन का जनून रंग लाया। लुधियाना में थैलसीमिक बच्चों को बकरी या बकरे के खून से ईलाज उपलब्ध करने वाला अस्पताल बन कर तैयार हो चुका है। बहुत ही मेहनती स्टाफ। इन बच्चों के लिए डेडिकेटिड स्टाफ। लगता है है अब उन परिवारों की भी सुनी गयी है जो हर दो सप्ताह बाद खून चढ़ाने का खर्चा वहन नहीं कर सकते। 

Thursday, June 21, 2018

पी.ए.पी.ग्राउंड जालंधर में भी मनाया गया जिला स्तरीय योग दिवस

Jun 21, 2018, 1:56 PM
मानसिक तनाव को केवल योग और सात्विक आहार ही दूर कर सकता है
जालंधर: 21 जून (राजपाल कौर//पंजाब स्क्रीन)::
पी.एच.सी.रंधावा मसंदा के ए.एम.ओ.डॉक्टर हेमन्त मल्होत्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि डायरेक्टर आयुर्वेद पंजाब डॉ.राकेश शर्मा के निर्देशानुसार पी.ए.पी ग्राउंड जालंधर में जिला आयुर्वेदिक अफसर डॉ.सम्राट विक्रम सहगल की अगुवाई में जिला स्तरीय योग दिवस मनाया गया । मुख्य मेहमान आई.पी.एस कमांडेंट पी.ए.पी श्री पवन कुमार उप्पल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की । सम्बोधित करते हुए श्री उप्पल ने सभी को निरोग रहने के लिए योग अपनाने को कहा । इस मौके डॉ.सम्राट ने अपने सम्बोधन में कहा कि आजकल बढ़ते हुए मानसिक तनाव को केवल योग और सात्विक आहार ही दूर कर सकता है। डॉ.अविनाश, डॉ.हेमंत मल्होत्रा, डॉ.रुपाली कोहली, डॉ.सुखदेव, डॉ.योगेश, डॉ.मनु हल्लन, डॉ.रितिका, डॉ.नीरज बाला और उपवैध मदन लाल द्वारा 1200 के लगभग उपस्थित पी.ए.पी और जिला आयुर्वेदिक विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के इलावा आम जन को योगा प्रोटोकॉल के अनुसार योग अभ्यास करवाया गया । कमांडेंट श्री पवन उप्पल और जिला आयुर्वेदिक अफसर डॉ.सम्राट ने पी.ए.पी में 4 जून से योग सीखा रही जिला आयुर्वेदिक विभाग की टीम डॉ.अविनाश, डॉ.हेमंत मल्होत्रा, डॉ.रुपाली कोहली, डॉ.सुखदेव, डॉ.योगेश, डॉ.मनु हल्लन, डॉ.रितिका और डॉ.नीरज बाला को उनके अतुलनीय कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी देकर सन्मानित भी किया । इस मौके गणमान्य व्यक्तियों में सीनियर फिजिशियन डॉ.सुरिंदर कल्याण, डॉ.चेतन मेहता, डॉ.अमित सिधू, डी.एस.पी सुखविंदर सिंह, इंस्पेक्टर बाज सिंह, एस.आई गुरपाल सिंह, एस.आई रशपाल, एस.आई राजेश, एस.आई वेद प्रकाश, एस.आई कुलविंदर सिंह, ए.एस.आई रविंदर, ए.एस.आई कंवलजीत हाजिर थे।

Wednesday, August 28, 2013

अमेरिका में लागत केवल 3 डालर और भारत में बिकता है 3-5 लाख रूपये में

हार्ट अटैक रोकने का आयुर्वैदिक इलाज केवल 21 दिन में ठीक
दोस्तो अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनिया जो दवाइया भारत मे बेच रही है ! वो अमेरिका मे 20 -20 साल से बंद है ! आपको जो अमेरिका की सबसे खतरनाक दवा दी जा रही है ! वो आज कल दिल के रोगी (heart patient) को सबसे दी जा रही है !! भगवान न करे कि आपको कभी जिंदगी मे heart attack आए !लेकिन अगर आ गया तो आप जाएँगे डाक्टर के पास !

और आपको मालूम ही है एक angioplasty आपरेशन आपका होता है ! angioplasty आपरेशन मे डाक्टर दिल की नली मे एक spring डालते हैं ! उसको stent कहते हैं ! और ये stent अमेरिका से आता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डालर का है ! और यहाँ लाकर वो 3 से 5 लाख रुपए मे बेचते है और ऐसे लूटते हैं आपको !

और एक बार attack मे एक stent डालेंगे ! दूसरी बार दूसरा डालेंगे ! डाक्टर को commission है इसलिए वे बार बार कहता हैं angioplasty करवाओ angioplasty करवाओ !! इस लिए कभी मत करवाए !

तो फिर आप बोलेंगे हम क्या करे ????!

आप इसका आयुर्वेदिक इलाज करे बहुत बहुत ही सरल है ! पहले आप एक बात जान ली जिये ! angioplasty आपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता !! क्यूंकि डाक्टर जो spring दिल की नली मे डालता है !! वो spring बिलकुल pen के spring की तरह होता है ! और कुछ दिन बाद उस spring की दोनों side आगे और पीछे फिर blockage जमा होनी शुरू हो जाएगी ! और फिर दूसरा attack आता है ! और डाक्टर आपको फिर कहता है ! angioplasty आपरेशन करवाओ ! और इस तरह आपके लाखो रूपये लूटता है और आपकी ज़िंदगी इसी मे निकाल जाती है ! ! !

अब पढ़िये इसका आयुर्वेदिक इलाज !!
Courtesy Photo 
हमारे देश भारत मे 3000 साल एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !! में
उन्होने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!! और इस पुस्तक मे उन्होने ने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे ! ये उनमे से ही एक सूत्र है !!

वागवट जी लिखते है कि कभी भी हरद्य को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियो मे blockage होना शुरू हो रहा है ! तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अमलता ) बढ़ी हुई है !

अमलता आप समझते है ! जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !!

अमलता दो तरह की होती है !
एक होती है पेट कि अमलता ! और एक होती है रक्त (blood) की अमलता !!
आपके पेट मे अमलता जब बढ़ती है ! तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !! खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! मुंह से पानी निकाल रहा है ! और अगर ये अमलता (acidity)और बढ़ जाये ! तो hyperacidity होगी ! और यही पेट की अमलता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अमलता(blood acidity) होती !!

और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अमलीय रकत (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता ! और नलिया मे blockage कर देता है ! तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !! और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्यूंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!

इलाज क्या है ??
वागबट जी लिखते है कि जब रकत (blood) मे अमलता (acidty) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो छारीय है !

आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !

अमलीय और छारीय !!
(acid and alkaline )

अब अमल और छार को मिला दो तो क्या होता है ! ?????
((acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????

neutral होता है सब जानते है !!
_____________________
तो वागबट जी लिखते है ! कि रक्त कि अमलता बढ़ी हुई है तो छारीय(alkaline) चीजे खाओ ! तो रकत की अमलता (acidity) neutral हो जाएगी !!! और रक्त मे अमलता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !! ये है सारी कहानी !!

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो छारीय है और हम खाये ?????

आपके रसोई घर मे सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजे है जो छारीय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए ! और अगर आ गया है ! तो दुबारा न आए !!
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सबसे ज्यादा आपके घर मे छारीय चीज है वह है लोकी !! जिसे दुदी भी कहते है !! english मे इसे कहते है bottle gourd !!! जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! इससे ज्यादा कोई छारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लोकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !! या कच्ची लोकी खायो !!

स्वामी रामदेव जी को आपने कई बार कहते सुना होगा लोकी का जूस पीयों- लोकी का जूस पीयों !
3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लोकी का जूस पिला पिला कर !! और उसमे हजारो डाक्टर है ! जिनको खुद heart attack होने वाला था !! वो वहाँ जाते है लोकी का रस पी पी कर आते है !! 3 महीने 4 महीने लोकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है !

वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे ! वो कहते है हम न्योर्क गए थे हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने ! वो राम देव जी के यहाँ गए थे ! और 3 महीने लोकी का रस पीकर आए है ! आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है ! और वो इतने हरामखोर है आपको नहीं बताते कि आप भी लोकी का रस पियो !!


तो मित्रो जो ये रामदेव जी बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है !! वागवतट जी कहते है रकत की अमलता कम करने की सबे ज्यादा ताकत लोकी मे ही है ! तो आप लोकी के रस का सेवन करे !!

कितना करे ?????????
रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !!

कब पिये ??

सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !!
या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!
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इस लोकी के रस को आप और ज्यादा छारीय बना सकते है ! इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो
तुलसी बहुत छारीय है !! इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है ! पुदीना बहुत छारीय है ! इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ! ये भी बहुत छारीय है !!
लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले ! वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !! ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!!

तो मित्रो आप इस लोकी के जूस का सेवन जरूर करे !! 2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !! 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!
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कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !! घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !! और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !!

और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे ! डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !! हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!
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आपने पूरी post पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

इन बीमारियो के इलाज के लिए और अच्छी तरह समझने के लिए यहाँ
जरूर जरूर click करे !!
http://www.youtube.com/watch?v=C8NbDw4QGVM&feature=plcp 
वन्देमातरम !!
अमर शहीद Rajiv Dixit जी की जय !

Tuesday, January 17, 2012

करूर में आयुष कैम्‍प

चिकित्‍सा की अजब वैकल्पिक प्रणालियां-डॉ. के. परमेश्‍वरन*
केरल में वैद्यों (आयुर्वेद चिकित्‍सकों) के प्रसिद्ध परिवार के बारे में किंवदन्‍ती है, इन्‍हें अलाथर नाम्‍बी कहा जाता है। अलाथर नाम्बियों का परम्‍परागत घर पलक्‍कड़ के आधुनिक जिले के एक भाग में है। उनके आठ चिकित्‍सक परिवार हैं, उनका परिवार चिकित्‍सा की प्रत्‍येक शाखा में विशिष्‍ट क्षमता रखने में प्रसिद्ध है। ऐसा प्रतीत होता है कि एक बार देव लोक से अश्विनी देव जो कि स्‍वास्‍थ्‍य और चिकित्‍सा के संरक्षक देव हैं कौओं के रूप में प्रकट हुए और वे मन्दिर के तालाब के समीप पेड़ पर बैठकर कारुकू की ध्‍वनि का उच्‍चारण करते। 

एक दिन, मन्दिर में अलाथर नाम्‍बी परिवार का मुखिया पूजा के लिए आया तथा कौओं द्वारा किए जा रहे शोर को सुनकर खड़ा हो गया और संस्‍कृत की द्विपदी दोहराई, जिसका तात्‍पर्य यह था कि : जो उचित समय पर आवश्‍यकता अनुसार ही भोजन ग्रहण करता है, जो पेशाब और शौच बिना ज्‍यादा रुकावट के करता है और जो पर्याप्‍त मात्रा में जल पीता है वह किसी भी प्रकार की बीमारी से ग्रस्‍त नहीं होता। ऐसा लगता है कि कौअे ‘‘यह प्रश्‍न कर रहे थे कि ऐसा कौन है जिसे बीमारी नहीं है?’’ जैसा कि आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों ने जो जवाब दिया है वह सभी मानकों से आधुनिक है? 

इसी पृ‍ष्‍ठभूमि को ध्‍यान में रखते हुए केन्‍द्रीय सरकार चिकित्‍सा की वैकल्‍पिक प्रणालियों जैसे आयुर्वेद, होम्‍योपैथी, यूनानी, आदिवासी दवाओं आदि को उपयुक्‍त महत्‍व दे रही है। पर्यावरण उन्‍मुख होने के अलावा चिकित्‍सा की इन प्रणालियों से यह लाभ है कि ये प्रतिबन्‍धात्‍मक पहलुओं पर अधिक बल देती हैं। 

आयुष 
तमिलनाडु के करूर में हाल ही में सम्‍पन्‍न हुए भारत निर्माण लोक सूचना अभियान में लोक सूचना अभियान के भाग के रूप में नि:शुल्‍क चिकित्‍सा कैम्‍प आयोजित किया गया और इसमें एक प्रयोग किया गया। इसे केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत आयुष विभाग (आयुर्वेद, यूनानी, होमियोपैथी) द्वारा संचालित किया गया। अधिकतर रोगियों को आकर्षित करने के अलावा, कैम्‍प एक प्‍लेटफार्म के रूप में भी सफल रहा, जहां औषधियों की वैकल्पिक प्रणाली के लाभों तथा इनकी उपलब्‍धता की जानकारी दी गई। 

चेन्‍नई के विभिन्‍न संस्‍थानों के डाक्‍टरों तथा अर्धचिकित्‍सा स्‍टाफ की टीम ने तीन दिन के अभियान में भाग लिया। यूनानी दवाओं की केन्‍द्रीय अनुसंधान परिषद, आयुर्वेद के अनुसंधान केन्‍द्र तथ होमियोपैथी की क्‍लीनिकल अनुसंधान इकाई जैसे संस्‍थानों ने चिकित्‍सा कैम्‍प का आयोजन किया। इनका नेतृत्‍व क्रमश: डॉ. हफीज मो. सलाम, डॉ. पी. श्रीनिवास और डा. के राजू ने किया। 

एक दिन के चिकित्‍सा कैम्‍प के अलावा, इकाइयों ने इस अभियान में स्‍टाल लगाकर सम्‍बद्ध जानकारी के इश्‍तेहार बांटे तथा विभिन्‍न सामान्‍य बीमारियों की सस्‍ती दवाइयां बांटीं।बीमारों से जानकारी लोक सूचना अभियान प्रदर्शनी स्‍थल के नजदीक थनथनड्रीमलाई अग्रहारम के रिहायशी वेक्‍टेश्‍वरन कुछ समय से अपनी टांगों के अग्रभाग तथा ऐड़ी में दर्द महसूस कर रहे थे। उसने कैम्‍प में आयुर्वेदिक डॉक्‍टरों से परामर्श किया। डॉक्‍टरों ने दवाई युक्‍त तेल के साथ नहाने तथा सुबह खाना खाने से पहले पानी में पावडर को घोलकर पीने का सुझाव दिया। कैम्‍प की समाप्ति के समय वेंकटेश्‍वरन प्रसन्‍नचित्‍त था। उसने कहा कि उर्स दर्द से काफी राहत मिली है। 

करूर के नजदीक करूपत्‍ती से रोज दैनिक मजदूरी करने वाला जगदम्‍मा प्रदर्शनी देखने के लिए आया था। होम्‍योपैथी के डॉक्‍टरों द्वारा बताई गई दवा लगाने के बाद उसकी आंखों की लाली और सूखेपन से उसको काफी राहत मिली। यूनानी डॉक्‍टरों ने भी बहुत से बीमारों को आकर्षित किया। यूनानी डॉक्‍टरों ने बताया कि उन्‍होंने तमिल में तैयार की गई 1000 के लगभग रिकॉर्ड संख्‍या में ‘‘स्‍वस्‍थ जीवन के लिए सूत्र’’ पुस्तिका बांटी। संक्षेप में, कैम्‍प चिकित्‍सा की वैकल्पिक प्रणालियों की प्रभावशीलता तथा क्षमता के बारे में आंखें खोलने जैसा था। इससे सस्‍ती एवं पर्यावरण उन्‍मुख औषधियों की लोकप्रियता बढ़ने की प्रेरणा एवं सहायता मिली जिसे ग्रामीण क्षेत्रों के समान्‍य लोग सहजता से आकलन कर सकते हैं। 

*लेखक पत्र सूचना कार्यालय, मदुरैई में 
सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत्त हैं