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Sunday, May 21, 2023

होम्यो दवाओं के उत्पादन में विश्वस्तरीय गुणवत्ता का दावा

21st May 2023 at  5:45 PM

एडवेन बायोटेक ने लुधियाना की CME में दिखाए तथ्य और आंकड़े 


लुधियाना
: 21 मई 2023: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

तेज़ी से लोकप्रिय होती जा रही होम्योपैथी वास्तव में वैकल्पिक चिकित्सा की ही एक प्रणाली है जो 1700 के अंत में जर्मनी में उत्पन्न हुई थी। यह इस विश्वास पर आधारित है कि समान लक्षण पैदा करने वाले पदार्थों की एक छोटी सी  खुराक लेने से ही एक व्यक्ति अपनी बीमारियों से ठीक हो सकता है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि डॉक्टर को सही लक्ष्ण पढने में सफलता मिल जाए तो इस दवा की एक ही खुराक मरीज़ को ठीक कर सकती है। सिंगल मेडिसिन और सिंगल डोज़  की थ्यूरी इस दवा की चमत्कारी क्षमता को दर्शाती है।  भारत में, विशेष रूप से पंजाब राज्य में भी लम्बे समय से होम्योपैथी का अभ्यास किया जाता रहा है और इसकी सामर्थ्य और प्रभावशीलता के कारण इसकी लोकप्रियता में तेज़ी वृद्धि भी हो रही है। इसके साथ ही बढ़ रहा है होम्यो दवायों के उत्पादन की  गुणवता का स्तर। अब भरता में इनका उत्पादन विदेश के सत्र पर होने लगा है। इन दवायों के उत्पादन, स्तर  और  गुणवता में अब भारत से भी चुनौतियाँ उठने लगी हैं। कुछ ऐसा ही महसूस हुआ लुधियाना के पार्क प्लाज़ा में हुए एक आयोजन के दौरान। इसे नाम तो सी एम ई का ही दिया गया था लेकिन वास्तव में यह होम्यो दवायों के भारतीय संस्करण को प्रोमोट करने वाला ही था। इसे सपांसर कर रही थी जानीमानी दवा उत्पादक कंपनी एडवेन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड।   

इस आयोजन में मौजूद डॉक्टर्स की बड़ी संख्या बता रही थी कि अब होम्योपैथिक शिक्षा और मेडिकल प्रेक्टिस में  भारत भर में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए तेजी से बहुत ही अच्छे अच्छे अवसर सुलभ हो रहे हैं। कई महिला डॉक्टर भी अब होम्योपैथी का ही अभ्यास कर रही हैं। बहुत से लोग ऐसे भी थे जिन्हें होम्यो की प्रेक्टिस करते हुए प्रेक्टिस करते उम्हुर का लम्एबा हिस्सा गुज़र गज़ा है। सिर और दाड़ी के बालों में आई सफेदी उनकी शख्सियत में एक दिव्यता भी लाने लगी है। आज के महंगाई वाले युग में भी वे बताते हैं कि कई अन्य  प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं की तुलना में भी होम्योपैथिक उपचार की लागत भी अपेक्षाकृत कम है, जो इसे उन लोगों के लिए एक व्यवहार्य विकल्प बनाता है जो अधिक महंगा उपचार नहीं करवा सकते।

उल्लेखनीय है कि होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. सैमुअल हैनीमैन ने इस प्रणाली को अपने अवलोकन और प्राकृतिक उपचार में शोध के आधार पर विकसित किया। तब से, होम्योपैथी कई चिकित्सा पेशेवरों के साथ एक सफल अभ्यास बन गया है, जो विभिन्न बीमारियों की देखभाल के प्रभावी रूप के रूप में इसके उपयोग की वकालत करता है। बहुत सी जटिल और गंभीर बिमारियों के उपचार में होम्योपैथी की लोकप्रियता आसमान छूने लगी है। अंग्रेज़ी दवायों के साईड इफेक्ट से डरे हुए लोग भी होम्योपैथी की तरफ आकर्षित होने लगे हैं। हालांकि कुछ किताबें पढ़ कर या यूट्यूब देख कर होम्यो दवायों का सेवन अपनी समझ के मुताबिक करने वाले इस वास्तविकता को नहीं जानते कि होम्यो दवायों में साइड इफेक्ट होते हैं। इनके गलत सेवन से भी खतरे सामने आते हैं। डाक्टर की सलाह के बिना होम्यो दवायों का सेवन भी सुरक्षित नहीं रहता। 

होम्योपैथी के ज़रिये विभिन्न बीमारियों के इलाज में नए नए रिकार्केड भी बन रहे हैं। इनके सेवन में सतर्कता और इनके उत्पादन में सतर्कता की चर्चा लुधियाना की सी एम ई में भी हुई। ज़ेह बहुत ही सारगर्भित और महत्वपूर्ण रही। यहां गौरतलब है कि कुछ लोगों ने इसे अपनी समझ के मुताबिक बिना डाक्टरी सलाह के भी उपयोग करना शुरू कर दिया है। यह ट्रेंड चिंताजनक है। 

भारत में होम्योपैथी की डिग्री और योग्यता की बात करें तो होम्योपैथी शिक्षा स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर प्रदान की जाती है। होम्योपैथिक उपचार की लागत उपचार के प्रकार और चिकित्सक के अनुभव के आधार पर भिन्न हो सकती है। होम्योपैथिक डॉक्टर आमतौर पर अपनी सेवाओं के लिए शुल्क लेते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोगों के लिए मुफ्त परामर्श या रियायती दरों की पेशकश करते हैं जो इसे वहन नहीं कर सकते। यह सब डाक्टर की व्यक्तिगत मर्ज़ी पर भी निर्भर करता है। 

वैकल्पिक चिकित्सा के इस रूप की बढ़ती हुई मांग के कारण भारत में महिला होम्योपैथिक डॉक्टरों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है। महिला चिकित्सक अक्सर अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में किफायती उपचार प्रदान करने में सक्षम होने की अधिक संभावना रखते हैं, क्योंकि वे कम कीमत वसूलते हैं और उनके अभ्यास के लिए कम स्टाफ सदस्यों की आवश्यकता के कारण ओवरहेड लागत कम होती है।

यह प्रणाली शरीर के स्वयं के उपचार की प्रतिक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए प्राकृतिक पदार्थों की पतली खुराक का उपयोग करके इलाज के सिद्धांत पर आधारित है। हाल के वर्षों में, स्वास्थ्य देखभाल के वैकल्पिक रूप के रूप में होम्योपैथी में रुचि बढ़ी है। इससे भारत में होम्योपैथिक दवाओं के स्वस्थ और सुरक्षित उत्पादन की मांग में वृद्धि हुई है। इस लेख में, हम भारत में होम्योपैथिक दवाओं के सुरक्षित और प्रभावी उत्पादन को सुनिश्चित करने के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न विधियों का भी पता लगाएंगे। हम इस बात पर भी चर्चा करेंगे कि कैसे होम्योपैथी को स्वास्थ्य सेवा के वैव्हारिक रूप और समाज के लिए इसके संभावित लाभों के रूप में उपयोग किया जा सकता है। 

हाल के वर्षों में, भारतीय कंपनियां सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से होम्योपैथिक दवाओं का उत्पादन करने के लिए प्रयास कर रही हैं। यह लेख यह पता लगाने का भी प्रयास है कि ये कंपनियां होम्योपैथिक दवाओं के उत्पादन को उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित और प्रभावी दोनों कैसे सुनिश्चित कर रही हैं।  यह होम्योपैथिक दवाओं का उत्पादन करते समय भारतीय कंपनियों के सामने आने वाली चुनौतियों और उन पर कैसे काबू पाया जा रहा है  इस पर ध्यान दिया जा रहा है। 

यह शरीर की अपनी हीलिंग प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न रूपों में प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करके, जैसे के साथ इलाज करने के सिद्धांत पर भी आधारित है। इसी उत्पादन अभियान  में भारत के नाम को ऊंचा करने के लिए अग्रसर एडवेन बायोटेक प्रा. लिमिटेड भारत में एक प्रमुख होम्योपैथिक दवा कंपनी है, जो विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के लिए उच्च गुणवत्ता और सुरक्षित होम्योपैथिक उपचार प्रदान करती है। 

यह कंपनी अपने उत्पादों के निर्माण के लिए उन्नत तकनीक का उपयोग करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे सुरक्षा और प्रभावकारिता के उच्चतम मानकों को पूरा करते हैं। इसके उत्पादों का व्यापक रूप से भारत भर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। सामान्य सर्दी से लेकर कैंसर और मधुमेह जैसी पुरानी बीमारियों तक का समाधान अब होम्यो में ही है।

एडवेन बायोटेक प्रा. अनुसंधान और विकास के लिए लिमिटेड की प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करती है कि इसके उत्पाद आधुनिक होम्योपैथिक उपचारों में सबसे आगे रहें। एडवेन की तरफ से कंपनी के सी ई ओ आदेश शर्मा ने छोटी छोटी कुछ फ़िल्में बी दिखाई जो कंपनी के स्तर और गुणवता को दर्शा रहीं थीं। इसके साथ ही उन्होंने डॉक्टरों और मीडिया कर्मियों को आमंत्रित भी किया कि वे जब चाहें उनके प्लांट में आ कर उनके उत्पादन की गुणवता को परख सकते हैं, देख सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बाज़ार में बिकते कुछ उत्पादनों पर बी सवाल उठाए कि जो लोग कच्चे माल की कीमत से भी कम दामों पर दवा बनाकर बेच रहे हैं उनका आप स्वयं ही अनुमान लगा लीजिए कि इतनी कम कीमत में वे आपको क्या बेच रहे होंगें? उन्होंने ज़ोर दिया की अगर विदेशी कंपनियों के उत्पादनों का मुकाबिला कर के भारत का नाम रौशन करना होगा तो उत्पादन की गुणवत्ता के लिए वह सब प्रबंध और खर्चा करना होगा जो बड़ी कंपनियां अपनी साख को बनाए रखने के लिए करती हैं। इसमें किसी समझौते की जगह नहीं होनी चाहिए और हम गुणवत्ता को ले कर कभी समझौता नहीं करते। 

Monday, August 07, 2017

माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी लुधियाना चैप्टर का विमोचन


प्रजीत सचदेव ने उठाया बुड्डा नाला की जर्जर दशा का मुद्दा 
लुधियाना: 6 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के सरंक्षण प्रकल्प के अंतर्गत लुधियाना शहर में चलाई गई मुहिम ‘माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी’ के ढाई वर्ष पूरे होने पर संस्थान ने इसे और आगे बढ़ाया। इस संबंध में एक विशिष्ट पैनल चर्चा के रूप में ‘माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी लुधियाना चैप्टर’ नामक विशेष पुस्तक का विमोचन समारोह होटल पार्क प्लाजा लुधियाना में 6 अगस्त 2017 को आयोजित किया। 
इस मौके विशिष्ठ अतिथियों के रूप में मुख्यातिथि श्री नरेंद्र सिंह तोमर, माननीय केंद्रीय कैबिनट मंत्री ग्रामीण विकास और पंचायती राज, शहरी विकास, अवास और शहरी गरीबी उन्नमूलन, अतिथियों का सम्मान श्री विजय सांपला, माननीय केंद्रीय सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण राज्य मंत्री, विशेष अतिथि श्री प्रजीत सचदेव, आई.आर.एस., आयकर जांच के प्रमुख निदेशक (पंजाब, जम्मू-कश्मीर), विशेष स्पीकर, साध्वी परमा भारती, सामाजिक-अध्यात्मिक प्रेरणा वक्ता तथा साध्वी आदिति भारती, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान प्रकृति संरक्षण कार्यक्रम के अखिल भारतीय कार्यक्रम इंचार्ज। 
पैनल चर्चा का आरंभ करते हुए विशेष अतिथि श्री प्रजीत सचदेव ने बुड्डा नाला की दशा की ओर ध्यान केंद्रित किया जो वर्षों पहले शहर की जीवन रेखा था और आज एक अनसुलझी पहेली बन चुका है। उन्होंने इसका सबसे बड़ा कारण बदलाव के प्रति लोगों के भीतर तत्परता का अभाव बताया।
इस तत्परता के अभाव की जड़ को उजागर करते हुए साध्वी परमा भारती जी ने आशुतोष महाराज जी की विचारधारा को आगे रखते हुए कहा कि तत्परता के अभाव की जड़ है मानव की अज्ञानता। यह अज्ञानता निरक्षरता नहीं अपितु मानव के प्रकृति के साथ आंतरिक एकात्मकता को समझने का अभाव है। केवल ब्रह्मज्ञान की अनुभूति से ही मानव को एक बार पुन: प्रकृति के साथ उसके आंतरिक बोध से ही सरंक्षण मानव का स्वभाव बन सकता है। संस्थान की ‘माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी कैम्पेन’ इसी विचारधारा को साकार करने के लिए प्रयासरत है और इस पड़ाव पर माननीय मुख्य मेहमान, श्री नरेंद्र ङ्क्षसह तोमर ने इस मुहिम की विशिष्ट ‘माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी लुधियाना चैप्टर-अ रिपोर्ट’ (जुलाई 2014-दिसम्बर 2016) का विमोचन किया। संस्थान के पर्यावरण सरंक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षा साध्वी आदिति भारती जी ने की, जो कि एक ‘क्वालिीफाईड एनवायर्नमैंटलईस्ट’ हैं, ने रिपोर्ट के बारे में बताते हुए कहा कि यह कोई साधारण रिपोर्ट नहीं है, अपितु संस्थान द्वारा प्रकाशित जागरूकता का एक ऐसा माध्यम है, जो एक ओर उन लोगों को उत्साहित करता है जिन्होंने इसमें बढ़चढ़ कर अपना सहयोग दिया और साथ ही उन लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है जिनकी अब तक इस मुहिम में कोई भागीदारी नहीं रही। श्री विजय सापंला जी माननीय केंद्रीय मंत्री ने मुहिम के उद्घाटन समारोह से लेकर अब तक मुहिम को अलग-अलग पड़ावों से गुजरते देखा है और उन्होंने श्री आशुतोष महाराज जी के दिशा निर्देशन में नि:स्वार्थ भाव से कार्य कर रहे कार्यकत्र्ताओं और सरंक्षण टीम को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। चर्चा को निष्कर्ष की ओर ले जाते हुए माननीय मुख्य मेहमान ने कहा कि सरकार बदलाव के लिए केवल कानून बना सकती है, परन्तु आतंरिक परिवर्तन और तत्परता को इन नियमों से जागृत नहीं कर सकती। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान और ‘माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी कैम्पेन’ इस आंतरिक परिवर्तन को लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसलिए मेरा कहना है कि संस्थान बढ़चढ़ कर ऐसी मुहिमें चलाए और समाज को परिवर्तन की ओर ले जाये। अंत में सभी विशेष अतिथियों को सम्मानित कर व धन्यवाद प्रस्ताव की परम्परा को निभाते हुए तरसेम सिंह जी ने कार्यक्रम को सम्पन्न किया। कार्यक्रम के पश्चात सरंक्षण की एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के सरंक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत ली गई ‘माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी’ मुहिम एक स्टेट-आफ आर्ट कदम है, जो कि समाज के विभिन्न किरदारों को मां प्रकृति के सरंक्षण हेतु एकजुट कर रहा है। संस्थान विश्व भर में फैली अपनी विभिन्न शाखाओं के द्वारा पर्यावरण सरंक्षण, गौ सरंक्षण, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, नशे की रोकथाम, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के साथ-साथ जेल के कैदियों तथा विकलांग वर्ग का भी सशक्तिकरण कर रहा है।

Saturday, March 11, 2017

दिल से कोई भी काम करें तो सफलता कदम चूमती है

सामाजिक क्रांति की प्रतीक शर्मिला टैगोर के रूबरू 
लुधियाना: 11 मार्च 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
सामाजिक क्रांति की एक सशक्त प्रतीक शर्मिला टैगोर आज उस समय लुधियाना में थी जिस दिन वोट के ज़रिये क्रांति की घोषणा हो रही थी। हिंदु परिवार में जन्म लेकर एक मुस्लिम से शादी करना आसान नहीं था लेकिन शर्मिला ने साबित कर दिखाया कि अगर प्रेम की शक्ति साथ हो तो यह सब सम्भव है। उन्होंने यह भी साबित किया कि प्रेम ही जातपात और धर्म के कटटरपन की दीवारों को तोड़ सकता है। 
शर्मिला टैगोर भारतीय फिल्मों की सशक्त अभिनेत्री रही हैं। शर्मिला टैगोर का जन्म हैदराबाद, आंध्र प्रदेश, भारत में एक हिंदू बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिताजी Gitindranath टैगोर एल्गिन मिल्स की ब्रिटिश इंडिया कंपनी मालिक के महाप्रबंधक थे।
यादगारी आयोजन कराया फिक्की फ्लो की तरफ से। इस प्रोग्राम में शहर की चुनिंदा हस्तियां पहुंचीं। शर्मिला ने बहुत सी बातों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि 13 साल की उम्र में ही उन्होंने बॉलीवुड में आने का फैसला कर लिया था क्योंकि उन्हें कोलकाता के मशहूर डायरेक्टर की दो फिल्मों में अभिनय करने का मौका मिल गया था। उसके बाद वह मुंबई में जाकर बस गई। इस मौके पर पारम्परिक दौर के साथ साथ आधुनिक ज़माने की बातें भी हुईं। उस वक़्त की जनरेशन और आज की जनरेशन के माइंड सेटअप पर शर्मिला ने सटीक बातें कहीं शर्मिला ने बताया कि आजकल की मॉडर्न जनरेशन अपनी मर्जी से काम करती है। इसलिए वह अपना अधिकतर समय अपने पोतों व पोतियों के साथ बिताती हैं। यह एक सुझाव भी था उस महिला वर्ग को जो उदास हो कर घर में पड़ा रहता है उदासीन हो कर।  

पैरेंटिंग टिप्स भी दिए: आज के दौर की प्रमुख समस्या पैरेंटिंग की भी उन्होंने चर्चा की और अपने अनुभव भी बताये। शर्मिला ने महिलाओं के साथ इंटरैक्शन में उनके बच्चों के साथ जीरो से तीन वर्ष की उम्र तक और छह वर्ष की उम्र तक पैरेंटिंग के टिप्स दिए। शर्मिला ने बताया कि उनके जमाने में महिलाएं बॉलीवुड में आती थीं तो लोगों की सोच सीमित थी, पर आज जमाना बदल रहा है। अगर आप फोकस्ड और विल पावर और दिल से कोई भी काम करते हैं तो सफलता आपके कदम चूमती है। आज के  व्यस्त और छोटे परिवारों के दौर में इस चर्चा से बहुत सी महिलायों ने फायदा उठाया।
उन्होंने अपने विवाह की भी चर्चा की और उस ज़माने में सामने आई चुनौतियों की भी। शर्मिला ने बताया कि उन्होंने क्रिकेटर नवाब टाइगर पटौदी के साथ शादी इसलिए की क्योंकि उन्हें लगता था वह पूरी उम्र उनकी रक्षा कर सकते थे। उनके देहांत के बाद वह पटौदी ट्रस्ट चला रही हैं। उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान, संजय दत्त, आमिर खान, प्रियंका चोपड़ा के सामाजिक कार्यो की तारीफ की। उन्होंने महिला की आजादी पर कहा कि इसके लिए कोई फार्मूला नहीं होता। लेकिन मेहनत, खुद पर यकीन और पॉजिटिविटी ही एक अच्छा जीवन जीने का मंत्र है। इन सुझावों को वहां मौजूद लोगों ने बहुत महत्व से सुना। 
कुछ ख़ास लोगों का ख़ास ज़िक्र: सफलता और शोहरत की शिखरों को छूने के बावजूद शर्मिला अपने ख़ास लोगों को याद करना नहीं भूली। शर्मिला ने कहा कि फिक्की मेंबर मीनाक्षी ने उनके पूरे जीवन को एक कविता में पिरोकर उनको सम्मान दिया है। तरुणा ने उनका पॉटरेट बनाया। एक अन्य महिला ने उनकी डलहौजी की एक यात्रा के दौरान उनके घर पर खींची गई तस्वीरें साझा की। फिक्की फ्लो की चेयरमैन सविता अग्रवाल ने कहा कि शर्मिला से सीखने के लिए बहुत कुछ है और उन्होंने जिस तरह से अपनी निजी और प्रोफेशनल लाइफ में सफलता हासिल की है वह सराहनीय है। उन्होंने गुंजन जैन की किताब में जिस तरह सफलता प्राप्त कर चुकी औरतों की चौबीस कहानियों का जिक्र किया, उसकी प्रशंसा की। फिक्की फ्लो के इस कार्यक्रम में शर्मिला टैगोर के फैंस का आलम यह था कि महिलाओं के लिए आयोजित प्रोग्राम में उनके पति और शहर के माने जाने कॉरपोरेट घराने के लोग, डॉक्टर्स, सोशल एक्टिविस्ट, फैशन डिजाइनर भी पहुंचे हुए थे। कुल मिलाकर यह एक यादगारी कार्यक्रम था जिसने साबित किया कि चुनावी और सियासी जनून के चलते भी लोग इन ख़ास आयोजनों को तरजीह देते हैं। इनमें शामिल होना चुनावी और सियासी जनून से अधिक महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। समाजिक बदलाव के लिए यह एक अच्छा संकेत भी है।  

Saturday, August 20, 2016

लिवर के लिए शराब जितना ही खतरनाक है मोटापा और शूगर

Sat, Aug 20, 2016 at 1:34 PM
पंजाब में तेज़ी से बढ़ रहा है हेपाटाइटिस सी का विकराल रूप 
लुधियाना: 20 अगस्त 2016; (पंजाब स्क्रीन टीम):
एसपीएस हॉस्पिटल की टीम ने लिवर ट्रांसप्लांट की पहली सफल सर्जरी करने का इतिहास रच दिया है। विश्व भर में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए विख्यात दिल्ली के सीएलबीएस हॉस्पिटल लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के मुखी डॉ. सुभाष गुप्ता के सानिध्य में हुई इस सर्जरी को करने वाली टीम की अगवाई लिवर ट्रांसपप्लांट व जीआई सर्जरी विभाग के मुखी डॉ. अरिंदम घोष और गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के मुखी डॉ. निर्मलजीत सिंह मल्ही ने की। इस सर्जरी के सफल होते ही अंतिम स्टेज पर मौत से लड़ रहे हेपाटाइटिस सी के मरीज को नई जिंदगी मिल गई है।
लिवर ट्रांसप्लांट के लिए विश्व भर में विख्यात और डॉ. बीसी राय अवार्ड से सम्मानित डॉ. सुभाष गुप्ता ने कहा कि हमारी कोशिश है कि बचपन से लेकर बुढ़ापे तक लिवर का बीमरियों से ख्याल रखा जाए। हम लुधियाना में बेहतर क्वालिटी का लिवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम स्थापित कर रहे हैं, ताकि इस क्षेत्र और आसपास के इलाकों के लोगों की सेवा कर सकें।
इस संबंध में हुई प्रेस कांफ्रेंस के दौरान डॉ. अरिंदम घोष ने कहा कि लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी की सफलता इस बात का सबूत है कि हमारे पास हेल्थकेयर की क्वालिटी, सेफ्टी व विश्वनीयता है और मरीज अपने बजट में इन सुविधाओं को हासिल कर सकता है। लुधियाना में शुरू हुई इस विश्वस्तरीय सुविधा का लाभ केवल पंजाबियों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कशमीर व राजस्थान इत्यादि पड़ोसी राज्यों के लोग भी इस सुविधा को ले सकेंगे।
लगातार बढ़ रही लिवर डैमेज की बीमारी पर चिंता जताते हुए डॉ. निर्मलजीत सिंह मल्ही ने कहा कि पंजाब में हैपाटाइटिस सी, शराब और मोटापा इसका मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि बीमारी की जल्दी पहचान और समय पर इलाज करने के लिए जागरूकता जरूरी है। क्योंकि देरी से बीमारी और बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट में आशा की किरण नजर आती है। डॉ. घोष के मुताबिक इसकी अंतिम स्टेज पर लिवर को काफी नुकसान हो सकता है। ऐसी स्थिति में उसकी काम करने की क्षमता दिन प्रतिदिन घटती जाती है।  डॉ. घोष ने बताया कि सर्जरी की नई तकनीकों के कारण मरीज और लिवर दान करने वाले की सुरक्षा यकीनी बन गई है। इसके रिजल्ट हमेशा पॉजीटिव रहे हैं। उन्होंने कहा कि लिवर  दान करना पूरी तरह सुरक्षित है। दान किया गया लिवर कुछ हफ्तों बाद खुद ही पूरा हो जाता है। इससे दान देने वाले और लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाला मरीज, दोनों ही सुरक्षित रह कर नॉर्मल लाइफ जी सकते हैं।
हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेडेंट डॉ. उबेद हामिद ने कहा कि हमने मरीज की हाई सेफ्टी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ लिवर की सफल सर्जरी करके राज्य में इतिहास रचा है। जिस महिला मरीज का यह लिवर ट्रांसप्लांट किया गया है, वह हैपाटाइटिस सी वायरस से ग्रस्त थी। उसे विभिन्न इंफेक्शनों के साथ कई बार दाखिल होना पड़ा था। लिवर पर बढ़ी इंफेक्शन और दूसरी काम्पिलीकेशंस के कारण उसकी जिंदगी तीन महीने ही बताई जा रही थी। काउंसलिंग के बाद उसकी बेटी ने उसे अपना आधा लिवर दान करके अपनी मां की जान बचा ली। सर्जरी के बाद मां और बेटी दोनों सुरक्षित हैं। एसपीएस हॉस्पिटल ने अपना लिवर क्लीनिक शुरू कर लिया है, जहां गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट और लिवर ट्रांसप्लांट की टीम मरीजों का चेकअप करेगी।

Saturday, December 13, 2014

लुधियाना में दो दिवसीय वैडिंग प्रदर्शनी शुरू

गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े iphone 6 ने लुधियानावासियों को लुभाया   
लुधियाना: 13 दिसंबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
चंडीगढ़ में कई दिलों को लुभाने के बाद, ज़ायरा डायमंड्स अब अपने गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े Iphone 6 के साथ लुधियानावासियों के दिलों में समाने को तैयारहै। इस सिलसिले में ज़ायरा डायमन्डज़ ने लुधियाना में अपनी प्रदर्शनी की शुरूआत की है। आभूषणों के लिए विश्वसनीय माने जाने वाले ब्रांड ज़ायरा डायमन्डज़ की इसएक्स्क्लूसिव कलेक्शन की प्रदर्शनी का शुभांरभ किया जाने माने उद्योगपति बी सी नागपाल और पंजाबी फिल्मों के मशहूर अभिनेता हेक्टर संधू ने होटल पार्क प्लाज़ामें 13 दिसंबर से दो दिन की प्रीमियम वेडिंग और लाइफस्टाइल प्रदर्शनी में भी इन खास गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े आईफोन्स को प्रदर्शित किया जाएगा।
ज़ायरा डायमंड के मनोज जैन के मुताबिक,लुधियाना अपने व्यवसायिक उत्साह के लिए जाना जाता है। साथ ही इस शहर के लोग महंगे गैजेट्स के लिए अपने शौकके लिए भी मशहूर हैं। लुधियानावासियों के इसी शौक के लिए हम यहां खास गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े आईफोन्स लेकर आए हैं। इन आईफोन्स की कीमत 90हज़ार से लेकर 6 लाख रुपए तक है। आईफोन्स की कीमतें उनमें जड़े डायमंड की गुणवत्ता और संख्या पर भी निर्भर करती है।"
ये आईफोन्स खरीददारों के लिए अपने महंगे शौक को पूरा करने लायक तो हैं ही साथ ही ये किसी निवेश से भी कम नहीं है. लुधियाना में ज़ायरा डायमंड्स की प्रदर्शनीमें एक ही छत के नीचे लाइफस्टाइल और लक्ज़री आईटम्स पेश किए जाएंगे. इस दौरान ज़ायरा गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े पेन, जिनकी कीमत 50,000 से 2 लाख रुपए तक होगी, डायमंड जड़ी स्विस घड़ियां, जिनकी कीमत 2 लाख रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक होगी, ऐसे कई आईटम्स ज़ायरा डायमंड्स की दो दिनों कीप्रदर्शनी में दिखाए जाएंगे।
ज़ायरा के आभूषण IGI मार्क और हॉलमार्क प्रमाणित होते हैं इसीलिए इसकी विश्वसनीयता सौ प्रतिशत खरी होती है. चंडीगढ़ में 2010 में अपने पहले आउटलेट केखुलने के बाद से अब तक ज़ायरा ने आभूषण जगत में काफी नाम कमाया है. वर्तमान में ज़ायरा के पूरे देश में 13 स्टोर हैं और अब कंपनी ने 2015 तक देश के बाकीशहरों में 40 स्टोर शुरु करने का लक्ष्य रखा है।
लुधियाना में आयोजित ज़ायरा डायमन्डज़ की इस प्रदर्शनी में शादी ब्याह के लिए महंगे और शानदार आईटम्स पेश किए गए। इस प्रदर्शनी में महिलाओं और पुरुषों के लिए इटैलियन डिजा़यन की अंगूठियां, और बैंड्स, रिंग कम पेन्डेन्ट्स, पेन्डेन्ट्स कम नेकलेस और कॉकटेल रिंग्स जैसे वो सभी महंगे आईटम्स हैं जिसे अपनी शादीयादगार बनाने के लिए हर महिला या पुरुष खरीदने की चाह रखता हैप्रदर्शनी में आकर यकीकन आप खुद को खरीददारी से रोक नहीं पाएंगे क्योंकि यहां जो आईटम्स हैं उन्हें आप अपने पास ज़रूर देखना चाहेंगे।